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बजाज का सफरनामा

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क्या तुम उसे यह बताने वाली हो?” मैंने उससे मजाक में पूछा।

“मैं नहीं कहूँगी लेकिन……” उसने अपना वाक्य पूरा नहीं किया।

“रागिनी क्या मैं तुमसे कुछ रिक्वेस्ट कर सकता हूँ? तुम उसे मानोगी?”

“यह तो आपके रिक्वेस्ट पर निर्भर करता है !”

“अगर मैं तुमसे कुछ मांगू तो?”

“क्या?”

“क्या तुम मुझे एक चुम्बन दोगी? अगर मैं मांगू तो?”

“यह आप क्या कह रहे हैं? मैंने आपके लिए ऐसा कभी सोचा भी नहीं !” उसने गुस्से से नहीं लेकिन बहुत धीमे से और मेरी बात पर चौंकते हुए कहा।

“प्लीज़ रागिनी सिर्फ़ एक.. तुम्हारे इन रस भरे होंठो का एक चुम्बन ही तो मांग रहा हूँ मैं ! समझो मैं भीख मांग रहा हूँ।”

“भीख मांगने से कोई फायदा नहीं है, मैं इसके लिए आपको मना करने वाली नही !” और वो मुस्कुरा दी।

उसके सफ़ेद दांत उसके सुंदर चेहरे पर और चार चाँद लगते हुए दिखे,” ठीक है ! लेकिन सिर्फ़ एक ही दूंगी.. और इस बात का पता न तो आपकी बीवी को और ना मेरे पति को चले ! आप वादा करो कि किसी से यह बात नहीं कहोगे !” उसने कहा।

मेरी हिम्मत बढ़ी मैं उठा और उसके बाजू में जा कर बैठ गया, उसके एकदम करीब। मैंने देखा मेरी इस हरकत से वो थोड़ी सी सिमट गई। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसने नज़रें झुका ली और अपने दोनों हाथ मसलने लगी।

मैंने अपना चेहरा बढ़ाया और उसके गालों पर से बालों को एक ऊँगली से हटाया, वो सिहर उठी।

मैंने तभी अपने होंठ उसके फूले हुए गालों पर रख दिए और “पुच्च” से एक चुम्बन लिया।

वो कसमसाई और तिरछी नज़र से सिर्फ़ मेरी तरफ़ देखा उसने किसी प्रकार का विरोध या सहमति नहीं दिखाई। मैं जब उसके और करीब खिसका तो उसने कहा,”बस !”

मैंने कहा- यह चुम्बन नहीं था, यह तो सिर्फ़ तुम्हें छू कर देखा मैंने होंठों से !

अब मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, मैं उसके दाहिने तरफ़ बैठा था, मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा। वो शायद इसके लिए तैयार नहीं थी, वो मेरी गोद में गिरने लगी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए। अब वो मुझे आगे बढ़ने से रोकने का हल्का प्रयास कर रही थी।

मैंने कहा- तुम्हें तो मालूम है कि असली चुम्बन कैसे और कहाँ लिया जाता है.. और तुम ख़ुद यह करने के लिए तैयार हुई हो..

कहते हुए मैं उसकी बांहों को अपनी ऊँगली से हल्के हल्के नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे सहलाने लगा। उसके कंधे पर दबाव बढ़ाते हुए फ़िर से उसके गालों पर कान के ठीक पास में चूमा और जीभ से उसके कान को सहलाया..

उसकी सांसे बिखरने लगी, वो मेरी तरफ़ शरमाई नज़र से देख रही थी..

उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला। अब मैंने उसके चेहरे की तरफ़ अपना चेहरा किया और उसके थरथराते लाल रसीले लरज़ते होंठो पर अपने होंठ रख दिए। मैंने बहुत हल्के से उसके होंठों पर “चु..ऊ..क.,” करके चुम्बन कर दिया।

मैं उसकी बांहों को सहला रहा था.. और उन्हें सहलाते हुए मैंने उसका आँचल धीरे से कंधे से हटा दिया। उसके दोनों हाथ मैंने पकड़ रखे थे इसलिए वो अपना आँचल संवार नहीं पाई और मेरे सामने उसके पीन पयोधर आमंत्रण देते हुए महसूस हुए ! वैसे मैं उसकी बांहों की सहलाते हुए उसकी चूचियों को बाजू से स्पर्श कर रहा था. मैंने उसके गालों को हल्के हल्के “पुच्च.. पुच्च.. ” करते हुए चूमना जारी रखा था… फ़िर मैंने अपने होंठ उसके कानों की तरफ़ बढाये.. और उसके कान में फ़ुसफुसाकर कहा.. “रागिनी तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें पाने के लिए मैं बहुत बेताब हूँ !”

कहते हुए उसके कान के लैब अपने होंठो में लिए .. उसके मुँह से सी.आह्ह..की आवाज़ निकली। मैं उसकी गर्दन और कंधे मसल रहा था। वो थोड़ा सा कसमसाई।

अब मैंने उसकी साड़ी को उसके वक्ष से पूरी तरह हटा दिया। वो हल्का विरोध कर रही थी.. “नहीं..संजय.. प्लीज़ ऐसा मत करो.. किसी को पता चल गया तो !”

मैंने उसकी बात नहीं सुनी.. मैंने अपना हाथ उसकी बांई चूची पर ब्लाउज के ऊपर से रख दिया और गोलाई को सहलाया.. उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और दबा लिया.. मैंने पंजे में चूची पकड़ी और हल्के से दबाया तो उसके मुँह से आ…आ..आह.. निकल पड़ी…

मेरे हाथ को पकड़ते हुए उसने कहा,”बस संजय.. इसके आगे नहीं.. ! इसके आगे जाने से हम दोनों बदनाम हो सकते हैं…!”

मैंने उसकी बात नहीं सुनी.. मेरे हाथ तो उसके ब्लाउज के बटन खोल रहे थे। उसका हाथ मेरे हाथ पर था। लेकिन कोई हरकत नहीं थी..

ब्लाउज के दोनों पल्ले खोल कर मैंने देखा अन्दर काले रंग की ब्रा है, मैंने जल्दी से उसके स्तनों पर मेरे होंठ रखे और उसके उरोजों की गर्मी महसूस की… आह्ह..
 
उसके गोरे बदन पर मस्तानी चूचियों पर काले रंग का ब्रा..

मैंने जल्दी से ब्रा को बिना खोले ऊपर की तरफ़ उठा दिया, वो सोफे पर पीछे झुक गई जिससे उसके फूले हुए गदराये स्तन और उभर आए थे। मैंने उसकी चूची पर चूमा और उसके मुँह सेसी. .सी.. स्..स्.. स्. आह.. ऐसी कराहें निकलने लगी..

उसकी लाजवाब चूचियां मेरे सामने थी जिनके मैं सपने देखा करता था..

मैंने उसके गालों पर फ़िर से चूमते हुए उसके कान में कहा,”रागिनी मैं तुम्हें प्यार करता हूँ.. मुझे आज मत रोकना प्लीज़ !”

उसने कुछ कहा नहीं.. वो सोफे पर और पीछे झुक गई.. उसने अपने स्तन और ऊपर कर दिए.. उसके स्तन अभी भी सख्त थे.. किसी रबर की गेंद की तरह. उसके स्तन का साइज़ 36 डी होगा, यह मैंने उन्हें हाथ में ले कर जाना..

अब मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसके ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा के खुलते ही उसने अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढकना चाहा लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए। मैं उसके नायाब खजाने को देखना चाह रहा था.. उसका गोरा बदन.. एकदम चिकना.. हाथ रखते ही हाथ फिसल जाता.. इतना चिकना बदन किसी का हो सकता है .. यह सोच कर ही मेरी मस्ती सातवें आसमान पर पहुँचने लगी.. ये नरम गदराया जिस्म मेरे सामने है .. इसकी चूत कितनी नरम होगी.. कितनी मजेदार नज़ारा होगा.. उफ़.. ये ख्याल इंच दर इंच मेरे लंड की लम्बाई और मोटाई को और बढ़ा रहे थे।

कहा,”रागिनी, मुझे इन्हें जी भर के देखने और प्यार करने दो..

कहते हुए मैंने उसके गुलाबी चुचूक को हाथ लगाया, मसला.. वो अब कड़क होने लगे थे.. उसके मुँह से आउच.. की आवाज़ निकली..

मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा.. वो सीधे मेरे कंधे पर सर टिका कर मेरे गालों को चूमने लगी… मेरे हाथ की उँगलियाँ उसकी चूचियों पर भ्रमण कर रही थी. .. उसकी साँस बहुत तेज़ हो रही थी.. उसकी साड़ी का आँचल अब ज़मीन पर पड़ा था।

“संजय अभी अगर कोई आ जाए और हमें इस तरह देख ले तो? क्या होगा ? बोलो !

“फिकर मत करो इतनी सुबह कोई नहीं आयेगा ! और फ़िर मैंने बाहर का दरवाज़ा अच्छे से बंद कर दिया है इसलिए अगर कोई आयेगा तो उसे वैसे ही दरवाजे से वापस जाना होगा।” कहते हुए अब मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठों पर एक लंबा चुम्बन लिया..

उसने भी अब मेरा साथ दिया.. उसकी साँस फूलने से उसने मुझे धकेला और बहुत ही सेक्सी नज़र से देखा..

आह क्या दिख रही थी वो.. गोल गोल गोरे गोरे उरोज.. एकदम तने हुए और गुलाबी चुचूक…

मैंने अपनी बनियान निकाल दी। मेरे बालों से भरे सीने में उसके गुलाबी स्तनाग्र रगड़ने खाने लगे…

उसने मेरी तरफ़ देखा और कहा,”तुम बहुत बदमाश हो ! एक दम गंदे !” और फ़िर मेरे सीने से लग गई..

वो अपनी चूचियों को मेरे नज़रों से छुपाने की कोशिश कर रही थी, मैंने उसे थोड़ा परे किया और अब मैंने अपना चेहरा उसकी चूचियों पर रखा और उसके निपल मुँह में लिया. दुसरे को उँगलियों से मसल रहा था..

उसने मेरा सर जोर से अपनी छाती पर दबाया.. और “आह्ह..बस..उफ़.. संजय..” करने लगी..

लेकिन मुझे तो नशा हो रहा था.. उसके मदमस्त स्तन.. चूसने में मुझे किसी शहद या मिठाई से ज्यादा मीठापन महसूस हो रहा था.. मैं अब जोर से चूसने लगा.. मैंने हल्के से उसके बाएँ निपल में काट लिया ..ऊईई…उफ्फ्फ्फ़…बस संजय.. रुक जाओ.. अब और नहीं..” कहते हुए वो उठने लगी।

मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा,”नहीं रागिनी मुझे मत रोको प्लीज़.. मुझे आज मेरे सपनो की रानी को जी भर कर प्यार करने दो !”

और मैं फ़िर से उसके निपल मुँह में लेकर एक एक कर चूसने लगा।

“आआआआआह्ह्ह..हाँ..संजय.. जोर से… उफ़. बहुत अच्छा लग रहा है..” कहते हुए मेरे सर को अपने सीने पर दबाने लगी।

मैंने अब उसकी साड़ी को निकालना शुरू किया.. वो उठने लगी..मैंने साड़ी निकाल कर फेंक दी.. अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थी… कमर पर थोड़ा गदरायापन था. उसकी नाभि बहुत गहरी थी. मैंने उसकी नाभि पर हाथ फेरा… वो मचल उठी.. मैंने फ़िर से उसके गालों को चूमा.. फ़िर उसके कान पर गीली जीभ फेरी.. वो उछल पड़ी.. मैं चाहता था कि उसके उछलने से उसकी चूचियाँ भी उछलें .. लेकिन नही.. वो तो जैसे उसके सीने पर चिपकी हुई थी.. जैसे किसी मूर्ति के स्तन हो ! एकदम सख्त.. !

दोस्तों आप सोच सकते हो मेरी क्या हालत हो रही थी उसके इस रूप को देख कर…

उसके निपल मानो स्ट्राबेरी हों इस तरह गुलाबी से लाल हो रहे थे… मेरे चूसने से और कड़क हो गए थे.. मैंने उसके एक स्तन को पंजे से पकड़ा और ज्यादा से ज्यादा मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगा… आह..आह.. ओह्ह.. संजय.. उफ़.. तुम बहुत बदमाश हो.. आह.. उफ़.. मुझे क्या हो रहा..इश..इश्ह.. कहते हुए वो अपनी दोनों जांघों को रगड़ने लगी.. संजय.. क्या कर रहे हो.. आ..आह्ह..बस.. हाँ दबाओ.. चूसो.. और उसने एक हाथ से अपनी चूची पकड़ी और मेरे मुँह में डालने लगी….
 
उसके पैर उसी तरह हिल रहे थे.. वो अपने चूतड़ ऊपर कर रही थी.. और अचानक उसने मुझे जोर से भींच लिया.. और आह्ह..आह्ह.. आह… करते हुए अपने पैरों को पूरा लंबा कर दिया..
 
मैं समझ गया कि वो झड़ गई है..

अब उसको मैंने फ़िर से होंठो से चूमना शुरू किया.. और चूमते हुए मैंने उसके हाथों को ऊपर उठाया और अपना मुँह उसकी बगल में घुसाया.. ओह्ह.. उसके बगल की वो मादक खुशबू.. पसीने और पाऊडर की मिली-जुली खुशबू.. मैंने उसे सूंघा और फ़िर जीभ फेरते हुए चाटने लगा।

उसे गुदगुदी होने लगी..

मैंने दोनों बगलों को करीब दस मिनट तक चाटा.. वो मचलती रही..

फ़िर मैं दुबारा उसके स्तनों पर आ गया.. इस बार मैं पूरे स्तन को हथेली में लेता और निपल समेत जितना मुँह में ले सकता, उतना मुँह में लेता और चूसता.. दोनों चूचियाँ अब लाल हो चुकी थी, दबाने से नीले निशान दिख रहे थे.. मैंने जहाँ जहाँ दांत लगाये, वहां पर दांतों के निशान भी पड़ गए थे…

रागिनी सिर्फ़ आह.. ओह्ह.. कर रही थी.. मैं उसकी पतली कमर को सहलाता.. पेट पर हाथ फेरता.. अब मैं नीचे पेट की तरफ़ आया.. जैसे ही गोरे पेट पर चूमा.. वो थोड़ी उछल पड़ी.. मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ के नीचे डाल दिए। उसके चूतड़ किसी कुंवारी लड़की जैसे सख्त थे.. लेकिन उस सख्ती में एक मुलामियत का अहसास था… मैंने उन्हें दबाते हुए मेरी जीभ उसकी नाभि पर गोलाई में घुमाना शुरू किया.. अब वो फ़िर से बेचैन होने लगी थी.. ओह्ह संजय.. बहुत बदमाश हो तुम.. उफ़ नहीं.. बस.. मैं.. मर जाउंगी.इ.इ.इ.इ.” और वो थोड़ा उठ कर बैठ गई..

मैंने जल्दी से उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा.. अब वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी… मैंने अपनी जीभ उसके मुँह के अन्दर डाल दी.. फ़िर उसकी जीभ मुँह में लेकर चूसने लगा.. मुझे मालूम था कि अब रागिनी भी गरम हो चुकी है फ़िर से..

मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा.. उसकी चूचियों को देखते हुए मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर चिपका दिए.. और जोरों से चूसने लगा.. उसके मुँह से उम् ऽऽ उम् आह की आवाज़ निकलने लगी.. मेरे हाथ स्तनों पर थे.. मैंने मेरे होंठ फ़िर से उसके निपल पर रखे ..उसका हाथ मेरे बालों में घूम रहा था.. इस पोज़ में मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी. मैंने उसे सोफे के किनारे पर पैर लटका कर बिठाया और मैं नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया.. इस तरह बैठने से उसकी चूंचिया ठीक मेरे होंठो के सामने आ गई। मैंने दोनों चूचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया और उसके निपल मुँह में लिए.. कभी कभी मैं उसकी कमर को भी सहला देता था.. मैंने नीचे सर झुकाया तो मैंने देखा उसका पेटीकोट सामने से गीला हो रहा है.. मैं अपना मुँह नीचे की तरफ़ लाया उसके पेट पर से होते हुए उसके दोनों जांघों के बीच में मैंने सर रखा और नाभि का चुम्बन लेते हुए उसकी जांघों को हाथों से फैलाया.. पेटीकोट का कपड़ा पूरा फ़ैल गया।

मेरे होंठ उसकी जांघों पर पहुंचे पेटीकोट के ऊपर से ही.. पैर फैला देने से मुझे उसकी उभरी हुई चूत का आभास मिल रहा था. मैंने बहुत हलके से उस उभार पर होंठ रखे और “पुच्च..पुच्च.” किया.. वो सिहर उठी.. अपनी जांघ सिकोड़ने लगी।

अब मैंने उसका पेटीकोट निकलने का निश्चय किया और उसकी डोरी पर हाथ रखा। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया,”नहीं संजय.. ये मत करो.. प्लीज़, अपनी बीवी और मेरे पति के बारे में सोचो.. यह ग़लत है.. हम उनसे दगाबाजी कर रहे हैं .. रुक जाओ संजय !”

उसने मुझे रोकने का एक असफल प्रयत्न किया और उठ कर खड़ी होने लगी।

“रागिनी, अब बहुत देर हो चुकी है.. तुम भी जानती हो कि अब हम दोनों के लिए रुकना नामुमकिन है.. अब इस मौके का फायदा उठाओ और मजा लो.. इसी में दोनों की भलाई है !” कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया.
 
और उस मस्ती का मज़ा लिया जो मैं ज़िदगी भर नहीं भूल नहीं सकता
 
शालू

दोस्तों में संजय आपके लिए एक नयी कहानी लेकर आया हु जो एक लड़की ने मेरे को email की है उसकी सहेली की कहानी उसकी जुबानी

मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शालिनी।

उसकी उमर कोई 28 साल, कद 5’6″, फ़ीगर 34-28-36, गुलाबी रंग, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ, खूब फूले हुए स्तन, भरे-भरे चूतड़ और उनसे नीचे उतरती सुडौल जांघें। बहुत ही प्यारी और सेक्सी लड़की है वो।

हम दोनों कॉलेज से एक साथ हैं और कोई बात एक दूसरे से छुपी हुई नहीं है। और हो भी कैसे सकती है क्योंकि कॉलेज के ज़माने से ही हम दोनों के बीच एक रिश्ता और बन गया।

एक रोज़ मैं उसके साथ उसके घर गई तो घर मैं कोई नहीं था। हम दोनों मज़े से बातें कर रहे थे और मैं उसे सता रही थी कि रविवार को तुम कपिल से मिली थी तो तुम दोनों ने क्या किया था

बताओ न मुझे !

शालू शरमा रही थी।

कपिल उसका चचेरा भाई था और दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों अक्सर घूमने और पिक्चर देखने जाते थे। मेरे आग्रह करने पर उसने बड़े शरमाते हुए बताया कि

उस दिन कपिल ने उसका चुम्बन लिया था।मैंने उसे लिपटा कर उसका गुलाबी गाल चूम लिया-

हे बेईमान ! अब बता रही हो?

तो वो शरमा कर हंस दी।

हे शालू ! बता ना और क्या किया था तुम दोनों ने?

बस ना ! सिर्फ़ चुम्मा लिया था उसने !

वो शरमा कर मुस्कराई।ऐ शालू ! बता न प्लीज ! कैसे किया था?

हट बदतमीज़ !

वो प्यार से मुझे धक्का देकर हंस दी।

मैं उसकी भरी-भरी जांघों पर सिर रख कर लेट गई, उसके गोल गोल दूधमेरे चेहरे के ऊपर थे, मैंने धीरे से उसके दाएँ दूध पर उंगली फेरी-

क्यों शालू ! ये नहीं दबाये कपिल ने?

तो उसके चेहरा शरम से लाल हो गया और धीरे से बोली-

हाँ !

तो मैंने उसका खूबसूरत गुलाबी चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर गाल चूम लिये-

कैसा लगा था शालू?

हाय आइना ! क्या बताऊँ ! मेरी तो जैसे जान निकल गई थी जब उनकी गर्म-गर्म ज़बान मेरे मुँह में आई ! मैं मदहोश हो गई ! उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और एकदम से अपना हाथ यहाँ रख दिया

!वो आइना का हाथ अपनी बाईं चूची पर रख कर सिसकी।मैं तड़प उठी और बहुत मना किया पर वो न माने और दबाते रहे।

फिर शालू ?

आइना, बड़ी मुश्किल से कपिल ने मुझे छोड़ा।

शालू की बातें सुनकर मेरी हालत अजीब होने लगी, ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरे जिस्म पर चीटियां दौड़ रही हों।मेरा यह हाल देख कर शालू मुस्कुराई और मेरे गाल सहला कर बोली-

तुमको क्या हो गया आइना?

तो मैंने शरमा कर उसकी जांघों में मुँह छुपा लिया। वो मेरी पीठ सहला रही थी और मेरी हालत खराब हो रही थी क्योंकि मेरा चेहरा बिल्कुल उसकी चूत के ऊपर था जो खूब गर्म हो रही थी और महक रही थी।मैंने धीरे से उसकी चूत पर प्यार कर लिया तो वो सिसक उठी-

आह ! आह आह ! आइना उफ़ ! नहीं ! ना ! प्लीज मत करो !

और मेरे चेहरा उठाया। हम दोनों के चेहरे लाल हो रहे थे, शालू के गुलाबी होंठ कांप रहे थे, मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर वो सिसकी-

आइना !और मैं भी अपने को ना रोक सकी और उसके गुलाबी कांपते होंठ चूम लिये।एक आग सी लगी हुई थी हम दोनों के जिस्मों में !मैं उसके होंठों पर होंठ रख कर सिसक उठी-

शालू ! प्लीज मुझे बताओ न कपिल ने कैसे चूमे थे ये प्यारे होंठ?तो अपने नाज़ुक गुलाबी होंठ दांतों में दबा कर मुस्कुराई-

आइना, उसके लिये तो तुमको शालू बनना पड़ेगा।मैं हंस दी !उसके गाल चूम कर बोली-

चलो ठीक है ! तुम कपिल बन जाओ।शालू ने अपनी बाहें फैला दी तो मैं उनमें समा गई और वो मेरे गाल, होंठ, आँखें, नाक और गर्दन पर प्यार करने लगी।तो मैं तड़प उठी-

आह आ आह शा शाआलू ऐ ए मा नहीं ओह ओह ओह ऐ री उफ़ ये अह ओह ऊ ऊम अह अह क्या कर रही हो अह है है बस बस नहीं न ऊफ और उसके होंठ मेरे होंठों से चिपक गये और उसकी गुलाबी ज़बान मेरे होंठों पर मचलने लगी।उसका एक हाथ जैसे ही मेरे दूध पर आया तो मेरी चीख निकल गई-

नाआ हि आअ ह अह शाअलु ऊफ़ मत करो प्लीज ये आअह क्या कर रही हो, तो मेरे होंठ चूस तु !शालू बोली- वो ही तो कर रही हूँ जो कपिल ने मेरे साथ किया था।
 
वो मुझ से जुड़ गई और उसकी ज़बान मेरे होंठ खोल रही थी धीरे-धीरे और फिर अंदर घुस गई तो मैं उसकी ज़बान की गर्मी से पागल हो उठी और उससे लिपट गई।

शालू ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे दोनों दूध दबाते हुए मेरे होंठ चूसने लगी। ऊफ़ उसकी ज़बान इतनी चिकनी, गर्म और इतनी लम्बी थी कि मेरे पूरे मुँह में मचल रही थी और मेरे गले तक जा रही थी।हम दोनों के चेहरे पूरे लाल हो रहे थे और थूक से भीग चुके थे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था,

मैं भी उसका साथ दे रही थी और उसका प्यारा सा गुलाबी चेहरा हाथों में लेकर उसके होंठ और ज़बान चूसरही थी, सिसकार रही थी-

आह अह शालू अह अह हां अह !

आइना मेरी जान !

ऊफ़ शालू !

कितनी मज़ेदार ज़बान है तेरी !

इतनी लम्बी !

ऊफ़ !

सच्ची कपिल को मज़ा आ गया होगा !

आअह धीरे आइना !

अह आअह सच्ची आइना !

बहुत मज़ा आया था क्या बताऊँ तुझे !

आह धीरे से मेरे होंठ !

आह आइना !

उठो न प्लीज अब

!हम दोनों उठे तो फिर से मुझे लिपटा कर मेरे होंठ चूसने लगी और मेरे कुरते की ज़िप खोली और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मुँह में सिसकी-

उतारो न आइना प्लीज !

और मेरे हाथ ऊपर करके मेरा कुरता अलग कर दिया।

आअह शालू !

ये आह !

तो मेरे होंठ चूम कर सिसकी- कुछ न बोलो आइना !

सच्ची बहुत मज़ा आ रहा है !

मैं उसके सामने टॉपलेस बैठी थी, शर्म से मेरी बुरी हालत थी। मैंने अपने दोनों हाथों से अपने भरे-भरे दूध छुपा लिये और देखा तो शालू ने भी अपना कुरता और ब्रा अलग अपने बद्न से हटा दिए थे और मैं उसे देखती रह गई-

उफ़ ! कितने प्यारे दूध हैं शालू के !

खूब बड़े बड़े बिल्कुल गुलाबी रंग, तनी हुई लम्बे चुचूक ! जिनके आस पास लाल रंग का गोल घेरा !उसने मुझे अपनी तरफ़ देखते हुए पाया तो मेरी आँखें चूम लीं,

मेरे दोनों हाथ मेरे दूधों पर से हटाये और अपने दूधों पर रख लिर और होंठ चबा कर सिसकी-

ऊई मां आह आह !और फिर उसने मेरे दूध पकड़े तो मेरी जान निकल गई- आऐ आ आऐ र अह्ह अह आअह ऊओह ऊऊम आआअह नहीं शा…लू !और मैंने भी उसके दूध ज़ोर से दबाये तो शालू भी मुझसे लिपट कर सिसक उठी-

आईए ऊउइ उ अह अह अह धीरे आह आइना !

धीरे आह मेरे दूधु !

और मेरे होंठों पर होंठ रखे तो एक साथ हम दोनों की ज़बाने मुँह के अंदर घुस पड़ी।उसकी लम्बी चिकनी और गर्म ज़बान ने मुझे पागल कर दिया और फिर मुझे लिटा कर वो भी मेरे ऊपर लेट गई। हमारे दूध आपस में जैसे ही टकराये तो दोनों की चीखें निकल पड़ी और हम दोनों झूम गईं और मेरी चूत रस से भर गई।मैंने उसे अपने बदन से लिपटा लिया और उसकी चिकनी पीठ और नर्म-नर्म चूतड़ सहलाने लगी।इस पर वो मेरे जिस्म पर मचलने लगी।

मैंने उसका गुलाबी चेहरा उठाया तो उसकी आँखें नहीं खुल पा रही थी, बहुत हसीन लग रही थी शालू !मैं उसके गाल और होंठ चूसने लगी, उसके गोल नर्म नर्म दूध मेरे सांसों से टकराते तो जैसे आग लग जाती।मैंने उसको थोड़ा ऊपर किया तो उसके खूबसूरत चिकने गुलाबी दूध मेरे सामने थे मैं अपने आप को रोक न सकी और उसकी लाल चूची पर ज़बान फेरी तो वो मस्ती में चिल्ला पड़ी-

आईई माँ ! मर जाऊँगी मैं! आह अह ओह ऊओफ़ अह आइना !

आह अह्ह हाँ ! ये ये ये भी किया था अश… अह कपिल ने !

शालू बोली।और मैंने उसका पूरा का पूरा दूध अपने मुँह में ले लिया तो मज़ा आ गया। और शालू ने मेरा चेहरा थाम कर अपने दूधों में घुसा लियाऔर सिर झटक कर मचलने लगी-

आ आ इए आइना ! धीरे प्लीज ऊफ़ ऐई री ! माँ ! धीरे से ! न आअह ! बहुत अच्छा लग रहा है !

आह !

पूरा !

पूरा चूसो न !

ऊफ़ मेरा दूध आह !

आइना सची ऐईए ऐसे नहीं !

न काटो मत प्लीज !

उफ़ तुम तो अह कपिल से अच्छा चूसती हो !

आअह आराम से मेरीजान !

और वो मेरे दूध दबाने लगी- सच्ची कितनी नरम दूध हैं तेरे आइना !मुझे दो न प्लीज आइना !तो मैंने होंठ अलग किये उसके दूध से और देखा तो उसका दूध मेरे चूसने से लाल और थूक से चिकने हो रहे थे।
 
मैंने जैसे ही दूसरा दूध मुँह में लेना चाहा वो सिसक उठी-

आह आइना ! प्लीज मुझे दो न अपनी ये प्यारी प्यारी चूचियाँ ! कितनी मुलायम हैं !उइ सच्ची ?

मैं उसकी चूचियाँ मसलने लगी तो मैंने उसके गीले लाल होंठ चूम लिये। शालू मेरी चूचियाँ चूसने लगी !

और मेरे मुँह से आवाजें निकलने लगी-

अह आअह शालू ! आराम से मेरीजान ! आह ! और !

और क्या किया था कपिल ने बताओ न !

तो मेरे दूध पर से अपने चिकने गुलाबी होंठ हटाते हुए मुस्कुराकर बोली- और कुछ नहीं करने दिया मैंने !तो मैंने पूछा- क्यों शालू ! दिल नहीं चाहा तुम्हारा।

वो मेरे ऊपर से उतर कर अपने पैर फैला कर बैठी और मुझे भी अपने से चिपका कर बिठा लिया और मेरे दूधों से खेलते हुए बोली-

आइना, सच दिल तो बहुत चाहा लेकिन मैंने अपने को बड़ी मुश्किल से रोका क्योंकि डर लग रहा था।और मेरे दूधों पर ज़बान फेरने लगी तो मेरी आंखें बंद हो गई मज़े में !मेरा हाथ उसके चिकने मुलायम पेट पर आया और मैं उसकी गोल नाभि में उंगली घुमाने लगी-

आह शालू ! सच्ची कितनी लम्बी ज़बान है तुम्हारी ! मैं क्या करूं ! आह मेरे दूध आऐ ए माँ ! अह्ह ! धीरे ! ना ! इतनी ज़ोर से मत नोचो मेरे दूध !

आह आह ओह ऊ ओफ़ शालू प्लीज नहीं ! आअह हन हां अन बस ऐसे ही चूसे जाओ बहुत मज़ा आ रहा है !आइना !

मेरी जान, सच्ची कहां छुपा रखे थे ये प्यारे-प्यारे दूधु तूने ! तो मैं शरम से लाल हो गई उसकी बात सुनकर और उसकी एक चूची ज़ोर से दबाई तो वो चिल्ला कर हँस पड़ी- ऊऊउइ माँ आइना।

तो मैंने उसके होंठ चूम लिये।शालू !हूम्म !तुमने बताया नहीं कपिल और क्या कर रहा था या करना चाह रहा था?तो वो शरमा कर मुस्कुराई-

आइना ! वो तो !

हाँ बोलो ना शालू प्लीज !

तो शालू ने मेरा हाथ अपनी सलवार के नाड़े पर रखा और धीरे से बोली-

वो तो इसे खोलने के मूड में था।फिर शालू?मैंने रोक दिया उसे !

क्यों शालू ? क्यों रोक दिया ? बेचारा कपिल !शालू मेरे गाल पर ज़ोर से काट कर हंस दी-

बड़ी आई कपिल वाली !मैं भी ज़ोर से चिल्ला कर हंस दी-

ऐ शालू बताओ ना क्यों रोक दिया?

तो वो मुसकराई, मैंने कह दिया- ये सब अभी नहीं !

और वो फिर मेरे दूध चूसने लगी ज़ोर ज़ोर से तो मैं पागल हो उठी- आह शालू !

आराम से मेरी जान !

और मैंने उसकी सलवार खोल दी तो वो चौंक गई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- ये ! ये क्या कर रही हो आइना?

तो मैंने उसके गीले रस भरे होंठ चूम लिये- मेरी शालू जान !

कपिलको नहीं तो मुझे तो दिखा दो !

वो मुझसे लिपट कर मेरे पूरे चेहरे पर प्यार करने लगी- हाय मेरीआइना !

कब से सोच रही थी मैं !

आह मेरी जान !और एकदम से उसने मेरी सलवार भी खोल दी

और उसका हाथ मेरी चिकनी जांघों पर था।

मैं मज़े में चिल्ला पड़ी- ऊऊउइ शा..आ..लू !! ना..आ.. हाय !!

वो मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी जांघें सहला रही थी,

मैं मचल रही थी- नहीं शालू ! प्लीज मत करो ! आ..इ..ए ऊ..ऊ..ओ..फ़ ना..आ..ही ना! ओह मैं क्या करूँ !

और उसने एकदम से मेरी जलती हुई चूत पर हाथ रखा तो मैं उछल पड़ी- हाय रे ! आह ! ये क्या कर दिया शालू !मुझे कुछ होश नहीं था,

उसका एक हाथ अब मेरी चूत सहला रहा था जो बुरी तरह गरम हो रही थी, दूसरे हाथ से वो मेरा दूध दबा रही थी और उसकी लम्बी गरम ज़बान मेरे मुँह में हलचल मचा रही थी।मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत झड़ने वाली है।

मैंने उसे लिपटा कर उसके चूतड़ों पर हाथ फेरा तो वो मचल उठी और मैं भी मस्त हो गई।उसकी सलवार भी उतर चुकी थी,

अब हम दोनों बिल्कुल नंगी थी और बिस्तर पर मचल रही थी- आह आइना ऊ..ओफ़ सच्ची, बहुत गरम चूत है ! उफ़कितनी चिकनी है छोटी सी चूत !

सच्ची बहुत तरसी हूँ इस प्यारी चूत के लिये मैं ! दे दो न प्लीज आइना ये हसीन छोटी सी चूत मुझे!

हाय शालू ! मैं जल रही हूँ !

प्लीज !

आह ! मैं क्या करूँ !मेरा पूरा जिस्म सुलग रहा था

और मैंने शालू के नरम-गरम चूतड़ खूब दबाए और जब एकदम से उसकी चूत पर हाथ रखा तो

वो तड़प उठी- ऊ..ऊ..उइ नी..ईइ..ना कर !
 
और मैं तो जैसे निहाल हो गई, उसकी चूत बिल्कुल रेशम की तरह मुलायम और चिकनी थी, खूब फूली हुई !मैं एकदम से उठी और उसकी चूत पर नज़र पड़ी तो देखती रह गई, बिल्कुल चिकनी चूत जिस पर एक बाल भी नहीं था,

शालू की चूत लाल हो रही थी।

क्या देख रही हो आइना ऐसे?

तो मैं अपने होंठों न पर ज़बान फेर कर सिसकी- शालू !!

और एकदम से मैंने उसकी चूत पर प्यार किया तो वो उछल कर बैठ गई।हम दोनों एक दूसरे की चूत सहला रहे थे।

शालू !

हू म्म !

कपिल को नहीं दी यह प्यारी सी चीज़ ?

तो वो शरमा कर मुस्कुराई- ऊँ..हूँह !

क्यों?

तो वो शरारत से मुस्कुरा कर बोली- तुम्हारे लिये जो बचा कर रखीहै।

तो मैं हंस दी- हट !

बदतमीज़ !

सच्ची आइना !

वो मेरी चूत धीरे से दबा कर सिसकी- हमेशा सोचती थी कि तुम्हारीयह कैसी होगी?तो मैं शरमा कर मुसकुराई- मेरे बारे मैं क्यों सोचती थी तुम?पता नहीं बस ! तुम मुझ बहुत अच्छी लगती हो ! दिल चाहता है कि तुम्हें प्यार करूँ !मैंने मुस्कुरा कर उसके होंठ चूम लिये- तो फिर आज से पहले क्यों नहीं किया यह सब?तो मेरे दूधों पर चेहरा रख कर बोली- डर लगता था कि तुमको खो न दूँ कहीं !मैंने उसे अपने नंगे बदन से लिपटा कर उसके होंठ चूस लिये, आहिस्ता से उसे लिटा दिया और झुक कर चूत के उभार पर प्यार कियातो वो मचल उठी- आअह्ह..आआह.. आइना ! मुझे दे दो न अपनी हसीन सी चूत !ले मेरी जान ! मेरे प्यार ! और मैंने घूम कर अपनी चूत उसकी तरफ़ की तो शालू ने मेरे नरम चूतड़ पकड़ कर नीचे किये और मेरी चूत पर होंठ रखे तो मैं कांप गई- आह.. आह.. आह.. ऊऊ..औइ शालू !और जैसे ही उसकी ज़बान मेरी चूत पर आई, मैं नशे में उसकी चूत पर गिर पड़ी और उसकी चूत पर प्यार करने लगी और चूसने लगी।हम दोनों की चीखें निकल पड़ी, दोनों के चूतड़ उछल रहे थे।शालू मेरे चूतड़ दबा रही थी और अचानक उसकी ज़बान मेरी चूत के छेदमें घुस पड़ी तो ऐसा लगा जैसे गरम पिघलता हुआ लोहा मेरी चूत मेंघुस गया हो, मैं चिल्ला पड़ी उसकी चूत से झूम कर- आ..ऐ..ई..ए.. मा..अ मर जा..ऊँ..गी.. ना.. आ..अ..हि शलु अर्रर्रर्ररे.. आह.. ऊ..ओम ऊमफ ऊऊओह्ह ओह ओह ह्हह्है ह्हअ आआइ मैं निकल रही हूँ.. ओ शालू !मेरे चूतड़ उछलने लगे और शालू के चूतड़ भी मचले और वो भी मेरी चूत में चिल्लाने लगी- आइना ! चूसो अ आआइउ अयययो मा अर्रर्रर्रे रीईईए आआआअह ऊफ़्फ़ आआह्ह ह्हाआआआ आआअह्हह्ह ह्हाआआअ !और मुझे ऐसा लगा जैसे चूत से झरना बह निकला हो !रोकते-रोकते भी मेरे गले से नीचे उतर गया !यही हाल शालू का भी था।हम दोनों के चेहरे लाल हो रहे थे, सांसें तेज़ तेज़ चल रही थीं औरहम दोनों एक दूसरे से लिपट कर पता नहीं कब सो गये।मज़ा आया पढ़ कर?
 
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