रात में कोई घटना विस्तार से बताने लायक नहीं है आज भी कामेश ने अपनी थकान के आगे कामया को भुला दिया था और कामया को भी जैसे कोई फरक नहीं पड़ता था वैसे ही हमेशा की तरह सुबह और फिर खाने का समय भी हो गया कामया ने भी पापाजी और मम्मीजी के साथ ही खाना खा लिया पर खाने की टेबल पर जो नई बात खुली वो थी मम्मीजी के तीर्थ जाने की आज मम्मीजी के साथ उसे शापिंग को जाना था लाखा आ जाएगा और फिर
पापाजी- बहू चली जाना इनके साथ या कोई कोई काम है
कामया- जी नहीं चली जाऊँगी
मम्मीजी हाँ… चलना नहीं तो समझ ही नहीं आता कि क्या लो
कामया- जी मम्मीजी पर जाना कब है परसो सुबह
मम्मीजी- पर तू अकेली रह जाएगी बहू
कामया- जी कोई बात नहीं आप तो जल्दी आ जाएँगी ना
पापाजी- अरे कहाँ महीना भर तो लगेगा ही या फिर ज्यादा भी हो सकता है लंबा टूर अरेंज किया है तुम्हारी सास ने
मम्मीजी- हाँ… लंबा टूर कहाँ जाती हूँ में एक टूर अरेंज किया उसमें में भी
पापाजी- अरे अरे नहीं भाई हमने कब कहा की गलत किया बिल्कुल जाना चाहिए
मम्मीजी- और क्या कुछ हमारे मंडली के लोग है और होगा तो गुरुजी के आश्रम भी जाएँगे यहां से गये उन्हें बहुत दिन हो गये है कामया को भी मिलाना है
पापाजी- हाँ… बोलना कि अब बहुत घूम चुके अब इस आश्रम की शोभा बढ़ाओ
और फिर खाना खाकर पापाजी तो शोरुम चले गये और कामया और ममी जी अपने कमरे में तैयार होने लाखा काका पापाजी को छोड़ कर तुरंत वापस आएँगे सोचकर दोनों जल्दी से तैयारी करने लगी कामया भी तैयार होते वक़्त सोच रही थी कि लाखा काका से जरूर मौका देखकर पूछेगी कि क्या बात है आज कल आते क्यों नहीं है
वो तैयार होते होते बहुत कुछ अपने आपसे बातें करती जा रही थी पर एक बात तो तय थी कि वो आज लाखा काका से पूछकर ही दम लेगी तभी बाहर गाड़ी का हार्न सुनाई दिया
वो जल्दी से नीचे की ओर भागी जाते हुए भीमा की भी नजर उसपर थी टाइट फिटिंग वाला चूड़ीदार पहना था बहू ने क्या खूब दिख रही थी मस्त कलर कॉम्बीनेशन था और सुंदर भी बहुत दिख रही थी जाते हुए बहू ने एक बार किचेन की ओर देखा भी था और उनकी नजर भी मिली थी पर आज भीमा जानता था कि आज वो कुछ नहीं कर सकता
मम्मीजी और बहू बाहर खड़ी कार तक पहुँच गये थे बाहर लाखा गाड़ी का दरवाजा खोले नीचे सिर किए खड़ा था मम्मीजी की ओर कामया की तरफ का दरवाजा खुला था कामया की नजर जैसे ही लाखा पर पड़ी वो एक बार सिहर उठी पर जल्दी से अंदर बैठ गई और लाखा भी भागकर अपनी सीट पर पहुँच गया गाड़ी सड़क की और भागने लगी थी पर कामया का पूरा ध्यान लाखा की ओर ही था लाखा भी नजर चुरा कर कभी बहू की ओर देख लेता था पर उसके चेहरे पर एक चिंता की लकीर साफ देखने को मिल रही थी
पर कामया का ध्यान मम्मीजी की ओर भी था जो कि कुछ कहती भी जा रही थी और बहू की ओर देखकर मुस्कुराती भी जा रही थी वो बहुत खुश लग रही थी कि आज बहुत दिनों बाद घर से बाहर शापिंग को जो निकली थी बहुत कुछ खरीदना था पर कामया का पूरा ध्यान तो सिर्फ़ और सिर्फ़ लाखा काका की ओर ही था वो बार-बार उनकी तरफ ही देख रही थी पर काका की नजर एक दो बार ही उससे टकराई और वो पूरा ध्यान गाड़ी चलाने की ओर दे रहे थे
आखिर कार गाड़ी एक शापिंग कॉंप्लेक्स के सामने रुकी तो भागकर मम्मीजी की तरफ के दरवाजे को खोले खड़ा हो गया पर कामया की ओर आया ही नहीं कामया भी अपनी तरफ का डोर खोलकर मम्मीजी के साथ हो ली और काम्पलेस में घुस गये बहुत देर तक शापिंग चलती रही और दोनों के हाथ भर गये थे एक शॉप पर जाकर मम्मीजी एक सोफे पर बैठ गई तो शाप के मालिक ने मम्मीजी से कहा
शाप कीपर- अरे सेठानी जी आप कैसी है बहुत दिनों के बाद
मम्मीजी- हाँ… भैया आज कल तो बस घर पर ही रहना होता है अच्छा सुनो किसी को भेज दो जरा यह समान बाहर गाड़ी में रख आए
शाप कीपर- जी क्यों नहीं
और उसने जोर से एक आवाज लगाकर एक आदमी को बुलाया और इशारे से समान को गाड़ी में रखने को कहा
वो आदमी- जी कौन सी गाड़ी है
कामया- जी चलिए में बताती हूँ
शाप कीपर- अरे मेडम आप क्यों तकलीफ करती है गाड़ी का नंबर बता दीजिए वो ढूँढ लेगा
कामया- जी नहीं में बता देती हूँ और रखवा भी देती हूँ
मम्मीजी- मेरी बहू है
शाप कीपर- जी नमस्ते मेडम
और कामया उस आदमी को लेकर बाहर पार्किंग की ओर चली और अपनी गाड़ी को ढूँढने लगी
दूर एक कोने में उसे अपनी गाड़ी दिख गई और कामया ने उस आदमी को इशारे से अपनी गाड़ी दिखाई और उसके पीछे-पीछे गाड़ी की ओर चल दी
गाड़ी के पास जैसे ही पहुँचे तो लाखा जल्दी से बाहर निकला और डिकी को खोलकर खड़ा हो गया और उस तरफ देखने लगा जिस तरफ से बहू आ रही थी पर उसकी नजर में मम्मीजी कही नहीं आई
वो आदमी समान रखकर जाने लगा तो कामया ने कहा
कामया- और भी समान मम्मीजी के पास रखा है वो भी ले आओ
वो आदमी- जी मेमसाहब और दौड़ता हुआ चला गया
अब वहां लाखा काका और कामया ही थे
लाखा ने एक नजर बहू की ओर डाली और अपना सिर झुकाए चुपचाप खड़ा हो गया
कामया- काका क्या बात है
लाखा- जी कुछ नहीं वो बस (उसकी आवाज गले से नहीं निकल रही थी )
कामया- पर आप गाड़ी सिखाने क्यों नहीं आ रहे कोई तो बात है
लाखा की आँखों में कुछ परेशानी के भाव वो साफ देख सकती थी पर काका के कुछ ना कहने से उसके मन में भी एक डर घुस गया था वो चुपचाप खड़ी काका की ओर ही देखती रही लाखा भी कभी इधर कभी उधर देखता हुआ कुछ अपने हाथ को इधर-उधर कर रहा था पर उसके इस तरह से करने से कामया को और भी चिंता होने लगी कि कही यह बीमार तो नहीं या फिर कुछ और परेशानी
वो कुछ इधर-उधर होने लगा था शायद वो बचना चाहता था कामया को जबाब देने से पर कामया तो वहां खड़ी उसी की ओर देख रही थी जब कामया को जबाब नहीं मिला तो वो फिर से बोली
कामया- आपने बताया नहीं कि क्या बात है आप आज कल शाम को आते नहीं
लाखा- जी वो
कामया उसकी तरफ देखती रही
लाखा कुछ गुस्से में परेशान सा दिखता हुआ कुछ अटकते हुए और कुछ सकुचाते हुए बोला
लाखा- जी वो सब गड़बड़ हो गया बहू रानी
कामया- लेकिन हुआ क्या है बताएगे नहीं तो .......और अब तो कामया के चेहरे पर भी चिंता की लकीर खिंच गई थी
लाखा- जी असल में भोला को सबकुछ मालूम हो गया
और एक मुक्का डिकी पर चला दिया गुस्से में वो अब भी स्थिर खड़ा नहीं हो पा रहा था दो चार मुक्के उसने डिकी पर चलाता रहा पर उसका चेहरा देख साफ लग रहा था कि वो परेशान है
इधर कामया के कानों में जैसे कोई जलती हुई सलाख घुस गई हो और मुँह में जैसे कुछ अटक गया हो वो बिल्कुल काठ की भाँति खड़ी हुई काका की ओर एकटक देखती रही जैसे उसके शरीर में खून ही ना हो वो भोला के बारे में सोचने लगी थी वो एक गुंडा जैसा दिखता था बड़ा ही बालिश्ट और सांड़ की भाँति था वो जब भी दुकान से कही बड़ी डील के लिए जाना होता था वो कामेश या पापाजी के साथ ही जाता था दुकान की सेक्योंरिटी भी उसके हाथों में ही थी जंगली भैसे की तरह और वैसा ही निर्मम था वो
कामया कुछ कहती कि लाखा की आवाज उसके कानों में टकराई
लाखा- बहुत गड़बड़ हो गई बहू उस साले को सब पता चल गया
कामया- पर पता चला कैसे
उसकी आवाज में भी चिंता थी कही उसने कामेश को या फिर पापाजी को बता दिया तो
लाखा- जी वो जब आप हमारे घर आई थी तब
कामया का खून फिर से सुख गया उस दिन पर कैसे उसने तो चारो ओर देखा था पर उसे तो कोई भी जान पहचान का नहीं दिखा था
लाखा- जी वो उस दिन वही पर था साले को मार डालूँगा बहू मैं , बहुत हरामी है वो कुत्ते जैसी नजर है साले की
कामया- पर अब
कामया के चेहरे पर चिंता के साथ एक डर का साया भी था उसके हाथ पाँव फूल गये थे सुन्न हो गये थे वो गाड़ी का सहारा लिए खड़ी ही थी कि दुकान का वो आदमी कुछ और पेकेट लिए आता दिखा
कामया और लाखा थोड़ा सचेत हो गये पर चिंता और परेशानी की रेखाए उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी वो आदमी समान रखकर गया तो कामया फिर से लाखा काका की ओर देखने लगी
कामया- लेकिन अब
लाखा- साले को मार डालूँगा में
कामया- पर
लाखा- बहुत ही हरामी है वो उसकी नजर ठीक नहीं है बहू
कामया- हाँ… लेकिन अब
लाखा- गलत नजर रखे हुए है बहू आप पर कहता है कि भैया जी को बता दूँगा
कामया- क्य्ाआआआअ
लाखा- हाँ बहू मैंने रोक रखा है उसे इसलिए नहीं आया बहू शाम को
कामया- तो अब
लाखा- जी इसलिए तो भैया जी और पापाजी से बहाने बनाता जा रहा हूँ क्या करू आप ही बताए
उसके चेहरे पर एक प्रश्न चिन्ह था
कामया- पर वो चाहता क्या है
लाखा- कहता है छोड़ो बहू में कुछ करता हूँ आप परेशान मत होइए
कामया- क्या बात करते हो में परेशान ना होऊँ जान जा रही है मेरी
लाखा- कहता है कि गाड़ी सिखाने में जाऊँगा या फिर मेरी बात करा दे छोटी मेमसाहब से बहुत कमीना है वो बहू
कामया- क्य्ाआआआ लेकिन क्यों
लाखा- वो प्लीज बहू मुझे माफ कर दो में बहुत मजबूर हूँ किसी तरह साले को रोक रखा हूँ
कामया सोच में डूबी थी कि वो आदमी फिर से दौड़ता हुआ वापस आता दिखा
वो आदमी- जी मेडम आपको सेठानी जी बुला रही है
कामया- हाँ… चलो
और बड़े ही भारी पैरों के साथ वो फिर से माल की ओर चल दी उसके पैर ठीक से जमीन पर नहीं पड़ रहे थे उसके चेहरे की रंगत उड़ी हुई थी जैसे उसके शरीर से सारा खून निचोड़ लिया गया हो बड़ी मुश्किल से वो जब वापस दुकान पर पहुँची तो मम्मीजी को बाहर खड़े हुए देखा
मम्मीजी- क्या बात है तेरी तबीयत तो ठीक है
काया- जी हाँ… वो बस ऐसे ही थोड़ा थकान लग रही थी
मम्मी जी- चल थोड़ा सा ही काम बाकी है जल्दी-जल्दी कर लेते है
कामया और मम्मीजी फिर से शापिंग पर जुट गये पर कामया का दिल कही और था उसके दिलो दिमाग पर एक ही बात बार-बार आ रही थी कि अब क्या होगा अपनी काम अग्नि के चक्कर में वो एक ऐसी मुसीबत में पहुँच गई थी कि अब उसे इससे निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था
वो मम्मीजी के साथ मुस्कुराती हुई शापिंग कर जरूर रही थी पर उसका ध्यान पूरा भोला पर ही था अब कैसे अपनी जान बचाए और कैसे इस मुसीबत से निकले
शापिंग करते करते शाम हो गई और वो घर की ओर रवाना हो गये अंधेरा भी हो चुका था पता ही नहीं चला कि कब शाम हो गई पर गाड़ी में उसकी नजर लाखा काका की ओर ही थी शायद उन्होंने कुछ रास्ता निकाला हो अब तो सिर्फ़ उसका ही सहारा था और किसी से वो यह बात कर भी नहीं सकती थी
घर पहुँचकर भी वो शांत ही थी मम्मीजी उसे अपने कमरे में ले गई और जो कुछ खरीदा था उसे निकाल निकालकर फिर से देखने और दिखाने लगी मम्मीजी के कमरे में ही थी की पापाजी भी आ गये और कामेश भी
खाना खाने के बाद रात कैसे कटी पता नहीं कामया के चेहरे पर कोई भी हलचल नहीं थी उसके अंदर एक युद्ध चल रहा था और वो उसका तोड़ नहीं निकाल पा रही थी सुबह जब आखें खुली तो कामेश चाय नीचे से पीकर आचुका था और कामया के लिए भी ले आया था
उसी ने उठाया था कामया को
कामेश- मम्मी कह रही थी कि कल तुम्हें मॉल में ठीक नहीं लग रहा था थकान लग रही थी
कामया- हाँ… बस थोड़ा सा
कामेश- डाक्टर को दिखा लो कही बढ़ गया तो
कामया- नहीं कोई बात नहीं में ठीक हूँ आप पेरशान ना हो बाहर नहीं जाती हूँ ना इसलिए हो गया होगा धूप में
कामेश- इसलिए तो कहता हूँ जल्दी से गाड़ी सीख लो
कामया- जी
कामेश- और यह साला लाखा भी तो अब नखरे करने लगा है पता नहीं जैसे ही कहो कि घर चले जा तो उसकी नानी मर जाती है कोई ना कोई बहाना बनाता रहता है
कामया- नहीं ठीक है सीख लूँगी (कामया में कहने में कोई जोश नहीं था )
कामेश- वो भोला भी है पर उसके साथ तुम्हारी नहीं बनेगी साला थोड़ा बदमाश है नहीं तो उसे ही बोल देता
कामया को तो जैसे मन की मुराद ही मिल गई
कामया- बदमाश है तो फिर रखा क्यों है निकाल बाहर करो आदमियो की कमी है क्या
कामेश- हाँ… पापा भी यही कह रहे थे पर है आदमी काम का लेकिन थोड़ा अयाश है शोरुम की लड़कियों को घूरता रहता है
कामया- छि छि इतना पता होते हुए भी आप लोग उसे झेल रहे है शोरुम की सोचो
कामेश- हाँ… ठीक कह रही हो चलो एक दो दिन में साले को बाहर का रास्ता दिखा ही देता हूँ
कामया के शरीर में एक नई जान आ गई हो वो कूद कर नीचे उतरी और मुस्कुराते हुए कामेश के सीने में हाथ मारती हुई बाथरूम की ओर चली गई
कामेश भी मुस्कुराए बगैर नहीं रहा पाया
कामया बाथरूम से निकलते ही
कामया- लेकिन लाखा काका को हुआ क्या है आते क्यों नहीं एक दिन ही आए
थोड़ा सा इठलाते हुए कामया ने कहा
कामेश- हाँ यार आज भेजता हूँ
कामया- नहीं आज नहीं कल से आज मम्मीजी से मिलने वाले आएँगे और शाम तक बहुत लोग हो जाएँगे आज नहीं कल से ठीक है
सुबह का काम रोज की तरह चला पापाजी के जाने के बाद मम्मीजी और कामया भी पकिंग में जुट गये फिर थोड़ी देर बाद मम्मीजी से मिलने के लिए उनके फ्रेंड्स भी आ गई कुछ साथ जाने वाले तो कुछ मिलने वाले कोई खास बात नहीं
बताने को
और इस तरह रात और फिर सुबह और मम्मीजी गई घर में सिर्फ़ पापाजी, कामेश और कामया
आज पापाजी भी देर से गये थे शो रूम थोड़ा सा अपनी बहू को कंपनी देने को रुक गये थे
खाना खाते समय भी उन्होंने बहू को अपने साथ ही खाने खाने को कहा था और जाते हुए बहू को बताया भी था कि शाम को लाखा को जरूर भेज देंगे
कामया जल्दी से पापाजी के जाने के बाद अपने कमरे में चली गई और अंदर घुसते ही एक लंबी सी सांस छोड़ी और बेड पर गिर गई वो अब इस पूरे घर में अकेली थी अब सब कुछ रात तक उसका था उसका राज था
कामेश उस भोला को कुछ दिनों में निकाल ही देगा फिर वो कुछ नहीं कर पाएगा वो अब आजाद थी कुछ भी करने को कैसे भी करने को वो अब अपने तन की आग को बुझाना चाहती थी आज कल तो कामेश को सुध ही नहीं थी पर भोला तो है बस एक झटके से उठी और वार्ड रोब के सामने थी
सोच ही रही थी कि दरवाजे पर हल्की सी आहट हुई पलटकर देखा कि भीमा चाचा अंदर आ रहे थे शायद अब भीमा चाचा को कोई ओपचारिकता की जरूरत नहीं थी वो खड़ी खड़ी चाचा की ओर देखती रही भीमा चाचा अंदर आए और दरवाजे को अपने पैरों से बंद करके चुपचाप सिर झुकाए खड़े हो गये
कामया के होंठों पर एक मुश्कान दौड़ गई और चाचा की ओर देखते हुए उसने अपनी चुन्नी को कंधे से निकाल कर बेड की ओर उछाल दिया और थोड़ी सी इठलाती हुई अपने ड्रेसिंग टेबल की ओर चल दी
कामया- कहिए चाचा कुछ काम है
भीमा- जी सोचा कि (और अपनी बात बीच में ही छोड़ दी )
कामया- हाँ… हाँ… कहिए क्या सोचा
भीमा- जी वो आपके कंधे का दर्द कैसा है
(भीमा के बोल में कुछ शरारत थी )
कामया- हाँ… अब तो ठीक है
(वो अब भी मिरर के सामने खड़ी हुई अपनी जुल्फो को धीरे-धीरे संवार रही थी )
भीमा- और कही पर दर्द या कुछ और
कामया- हाँ… है तो
भीमा- तो आपका सेवक हाजिर है
कामया- अच्छा ठीक है तो दर्द दूर करो हमारा
और एक बहुत ही मादक सी हसी उसके होंठों से फूट पड़ी वो अब भी मिरर को देखती हुई खड़ी थी पर नजर अपने पीछे खड़े हुए भीमा चाचा की ओर ही थी भीमा चाचा की नजर थोड़ा सा उठी और बहू को पीछे से देखते रहे और धीरे-धीरे आगे बढ़े और ठीक बहू के पीछे खड़े होकर धीरे से अपने हाथों को बहू की कमर पर रखा और बहुत ही होले से अपने हाथों को उसकी कमर के चारो तरफ घुमाने लगे थे वो अपने हाथों से बहू के शरीर का जाएजा लेता जा रहा था और उसकी नर्मी और चिकनाई को अपने हाथों के जरिए अपने जेहन में उतारने की कोशिश कर रहा था वो धीरे से अपने हाथों को घुमाते हुए उसके नितंबों तक ले गया और वहां भी उनकी गोलाइयों को नापने लगा था
कामया जो कि मिरर के सामने खड़ी हुई भीमा चाचा के हाथों को अपने शरीर पर घूमते हुए महसूस कर रही थी और अपने अंदर सोई हुई अग्नि को धीरे-धीरे अपने उफान पर आते महसूस कर रही थी
कामया- आआआआआअह्ह क्या देख रहे हो चाचा आआआआआअ
भीमा- आप बहुत सुंदर हो बहू कितना सुंदर शरीर पाया है आपने उूुुउउफफफफफफफ्फ़
और धीरे से बहू के नितंबों को अपने हाथों से दबा दिया
कामया- आह्ह
भीमा- क्या करू बहू सबर नहीं होता
कामया- तो मत करो ना आह्ह
भीमा ने एक झटके से बहू को अपने सीने से लगा लिया और दोनों हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी चुचियों तक पहुँच गये और वो अब उन्हें अपने हाथों से दबा दबाकर उसकी नर्मी को देखने लगे उसके होंठ अब बहू के कंधे और गले को चूम रहे थे और उनका लिंग बहू के नितंबों पर चोट कर रहा था
कामया भी उत्तेजित होती जा रही थी पर भीमा चाचा का इस तरहसे उसके शरीर को छूना उसके लिए एक बरदान था जो आग वो दो तीन दिनों से अपने अंदर छुपाकर रखी थी वो उमड़ रही थी उसकी सांसें और शरीर उसका साथ नहीं दे रहे थे अब तो उसके हाथ भी भीमा चाचा के हाथों से जुड़ गये थे और वो ही अब भीमा चाचा के हाथों को डाइरेक्षन दे रही थी वो अपने को भीमा चाचा से रगड़ने लगी थी
और भीमा चाचा को अपने ऊपर हावी होने का न्यूता दे रही थी
भीमा भी कहाँ रुकने वाला था वो तो खुद पागल हुआ जा रहा था उसके हाथ अब बहू के कपड़ों में उलझ गये थे वो बहू की सलवार को खींचता हुआ एक हाथ से उसके कुर्ते के अंदर अपने हाथों को घुसाता और अपने होंठों से बहू के गालों और गले को चूमता
जहां भी उसके हाथ जाते और उसके होंठ जाते वो उनका इश्तेमाल बहुत ही तरीके से करता जा रहा था वो जानता था कि बहू को क्या चाहिए पर वो थोड़ा सा इंतजार करके उस हसीना को अपने तरीके से भोगना चाहता था वो आज कुछ अलग ही मूड में था तभी तो वो बिना किसी डर के उसके कमरे में आ गया था वो अब अपने तरीके से बहू को उत्तेजित करता जा रहा था और किसी एक्सपीरियेन्स्ड आदमी की तरह वो बहू को नचा भी रहा था बहू के कपड़े धीरे-धीरे उतर चुके थे वो सिर्फ़ एक पैंटी पहने हुए उसके सीने से लगी हुई थी और उसके हाथो का खिलाना बने हुए थी भीमा पीठ की तरफ से उसे जकड़े हुए उसके हर अंग को खूब तरीके से घिस रहा था रगड़ रहा था कामया के मुख से निकलने वाली हर सिसकारी को और हर दबाब के बाद निकलने वाली हल्की सी चीख को भी ध्यान से सुन रहा था
कामया- बस चाचा और नहीं अब करो प्लेआस्ीईईईईईई
भीमा- जरा खेलने दे बहुउऊुुुुुुुुउउ तुझ से खेले बहुत दिन हो गये है
कामया- और नहीं सहा जाता चाचा उूुुुुउउम्म्म्मममममम
उसके होंठ चाचा के होंठों को ढूँढ ही लिए
भीमा भी बहू के नरम होंठों के आगे झुक गया और अपने जीब से बहू के होंठों को चूमता और चूसता जा रहा था कुछ देर बाद वो भी अपने कपड़ों से आजाद था और अपने लिंग को बहू के नितंबों पर रगड़कर अपने मर्दानगी का परिचय देता जा रहा था तभी भीमा बहू को छोड़ कर अलग हो गया और मुस्कुराते हुए बेड की ओर चलने लगा भारी भरकम और सफेद और काले बालों से ढका उसका शरीर किसी बनमानुष की तरह लग रहा था और उसपर उनका अकड़ा हस लिंग जो कि उनके शरीर से अलग ही उठा हुआ था देखकर कामया ने जिग्याशा भरी हुई दृष्टि से भीमा चाचा की ओर देखा भीमा चाचा बेड के किनारे बैठ गये और इशारे से अपने लिंग की ओर देखते हुए बोले
भीमा- आ बहू इसे प्यार कर आ आाजा
कामया भी बिना कुछ ना नुकरके धीरे धीरे चलते हुए भीमा चाचा के पास पहुँच गई और उनके सामने खड़ी हो गई भीमा बैठे बैठे अपने हाथों से एक बार कामया को नीचे से ऊपर तक सहलाया और फिर कंधे पर जोर देकर अपने लिंग के पास जमीन पर बिठा दिया
कामया ने एक बार ऊपर देखा और अपने हाथों को लेजाकर भीमा चाचा के लिंग को अपने गिरफ़्त में ले लिया उसके चेहरे पर एक मनाही थी पर मजबूरी के चलते वो जो भी चाचा कहेंगे करना पड़ेगा सोचकर धीरे से अपने मुख को उनके लिंग की और बढ़ाया
भीमा का एक हाथ बहू के सिर पर पहुँच गया था और धीरे से अपने लिंग की ओर धकेल रहा था
कामया ने भी कोई आना कानी नहीं की और अपनी जीब को निकाल कर धीरे-धीरे चाचा के लिंग को चाटने लगी
भीमा- आआआआआह्ह बहू कितना मजा देती है तू आआआआआअह्ह
कामया- हमम्म्ममम
भीमा- चूस और चूस बहुउऊुुुउउ आआआह्ह
और कामया तो अब लगता है कि एक्सपीरियन्स वाली हो चुकी थी भीमा चाचा का लिंग उसके मुख में और भी फूलता जा रहा था और गरम भी वो अपने हाथों को अब भीमा चाचा की जाँघो पर फेरने लगी थी उनके जाँघो से लेकर पीछे पीठ तक और मुँह तो बस उनके लिंग को एक बार भी नहीं छोड़ा था अब तो वो खूब मजे लेकर चूस रही थी और अपनी चूचियां को भी उनकी जाँघो में घिस रही थी
भीमा भी बहू की कामुकता को महसूस कर रहा था और अपने लिंग को अब झटके से उसके गले तक पहुँचा देता था उस दिन की तरह आज बहू अपने को बचाने की कोशिश नहीं कर रही थी उसे आज मजा आ रहा था वो यह अच्छे से जानता था बहू के हाथ जब उसकी जाँघो और पीठ तक जाते थे तो भीमा और भी पागल हो उठ-ता था अपने आपको किसी तरह से रोके रखा था पर ज्यादा देर नहीं रोक पाया वो झट से उठा और बहू को खींचकर खड़ा कर लिया बहू हान्फते हुए उठी और झमक से उसके मुख से भीमा का लिंग हवा में लटक गया थूक की एक लकीर उसके मुख से निकल कर भीमा के लिंग तक चली गई बहू के खड़े होते ही भीमा फिर से बहू के होंठों पर टूट पड़ा और बड़ी ही बेरहमी से उन्हें छूने लगा और एक हाथ बढ़ा कर बहू की पैंटी लो उसके शरीर से अलग कर दिया और एक ही धक्के से बहू को बिस्तर पर उल्टा लिटा दिया अब बहू के नितंब सीलिंग की ओर थे और गोरी गोरी स्किन रोशनी में चमक उठी भीमा झट से बहू के ऊपर टूट पड़ा और बहू की पीठ से लेकर नितंबों तक किसकी बौछार करने लगा उसके हाथ बहू की पीठ से लेकर जाँघो तक और फिर सिर तक जाते और फिर कस के सहलाते हुए ऊपर की और उठ-ते कामया भीमा चाचा के इस तरह से अपने ऊपर चढ़े होने से हिल तक नहीं पा रही थी और उनके लिंग को अपने नितंबों के बीच में घिसते हुए पा रही थी वो भी अब सबर नहीं कर पा रही थी और अपनी जाँघो को खोलकर भीमा चाचा के लिंग को अपनी जाँघो के बीच में लेने की कोशिश करती जा रही थी
भीमा भी अपनी कोशिश में लगा था पर जैसे भी बहू ने अपनी जाँघो को खोला तो वो और भी कामुक हो गया उसने झटके से बहू को नीचे की ओर खींचा और कमर को अपनी ओर उँचा करके अपने लिंग को एक ही धक्के में बहू की योनि में उतार दिया
कामया- आआआआआआह्ह ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
आज पहली बार किसी ने उसे पीछे से डाला था उसकी योनि गीली तो थी पर उसके योनि को चीरते हुए वो जब अंदर गया तो कामया धम्म से बेड पर गिर पड़ी और अपने अंदर गये हुए लिंग से छुटकारा पाने की कोशिश करने लगी आज उसे बहुत दर्द हो रहा था पर कहाँ वो भीमा चाचा के जोर के सामने कुछ नहीं कर पाई घोड़ी बनाकर उसके पति ने भी आज तक नहीं किया था पर भीमा चाचा के अंदाज से तो वो मर ही गई भीमा चाचा कस कर कामया को बेड पर दबा रखा था और अपने लिंग को बिना किसी पेरहेज के उनकी योनि के अंदर और अंदर धकेलते जा रहा थे
कामया- मर गई ईईईईईईईईईईईईईईई प्लीज ईईईईईई धीरीईईईईईईईईईईई
पर भीमा को कहाँ चैन था वो तो धक्के पर धक्के लगाते जा रहा था
भीमा कहाँ सुनने वाला था वो बहू को और भी अपने पास कमर से खींचकर अपने से जितना चिपका सकता था चिपका लिया और निरंतर अपने धक्कों को चालू रखा बहू की चीख पुकार से उसे कोई फरक नहीं पड़ा हाँ उसका कसाव और भी बढ़ गया उसकी हथेली अब बहू की चुचियों को पीछे से पकड़कर निचोड़ रही थी और वो बहुत ही बेदर्दी से निचोड़ रहे थे हर धक्के में बहू बेड पर गिरने को होती पर भीमा उसे संभाले हुए था धीरे धीरे बहू की ओर से आने वाली चीत्कार सिसकियो में बदलने लगी थी और अब वो खुद ही अपनी कमर को भी भीमा के धक्कों के साथ ही आगे पीछे भी करने लगी थी
भीमा- बहू उूुुुुुुुउउ अब ठीक है हाँ… और अपने होंठों से बहू के होंठों को ढूँढने लगा था
कामया ने भी भीमा चाचा को निराश नहीं किया और मुड़कर अपने होंठों का प्याला उनकी ओर कर दिया और अंदर होते उनके लिंग को एक और सहारा दिया
कामया को अब उतना दर्द या फिर परेशानी नहीं हो रही थी भीमा चाचा का जंगलीपन अब उसे अच्छा लगने लगा था वो भी जानती थी कि किसी आदमी को जब एक औरत अपनी हवस की पूर्ति के लिए मिल जाए तो वो क्या-क्या कर सकता था वो आज भीमा में उस बात का परिणाम देख रही थी वो भी अब भीमा चाचा के लिए एक खिलोना थी जिसे वो अपने तरीके से भोग रहे थे और अपनी ताकात का परिचय दे रहे थे उनकी बाहों का कसाव इतना जोरदार था कि कामया को सांस लेना भी दूभर था पर उस कसाव में एक अपनापन था और एक भूख थी जिसे कामया समझ पा रही थी
भीमा जो कि अब तक बहू को जम कर निचोड़ रहा था अब अपने शिखर पर पहुँचने वाला था और अपनी पूरी ताकत से वो बहू को अपने अंदर और अंदर तक उतार जाना चाहता था
कामया भी जानती थी कि भीमा की चाल में आगे क्या है वो भी अपने शिखर पर पहुँचने वाली थी आज उसे इस बेदर्दीपन में बहुत मजा आया था उसके शरीर में इतना जोर नहीं था कि वो हिल भी सके पर अंदर आते जाते उनके लिंग का मजा तो वो उठा ही रही थी सांसें किसी हुंकार की भाँति निकल रही थी दोनों की और एक लंबी सी चीख और आह्ह के साथ कामया और भीमा अपने शिखर पर पहुँच गये भीमा कामया को इसी तरह से अपनी बाहों में भरे हुए उसके ऊपर लेटा रहा दोनों के पैर अब भी बेड के नीचे लटक रहे थे और कमर के ऊपर का हिस्सा बेड पर थे
कुछ देर बाद भीमा तो नार्मल हो गया पर कामया को तो कोई सुध ही नहीं थी वो अब भी निश्चल सी उनके नीचे दबी पड़ी थी उसके हाथ पाँव ने जबाब दे दिया था आज के खेल में जितना भीमा चाचा इन्वॉल्व थे शायद उससे ज्यादा कामया ने उस खेल का मजा उठाया था आज के सेक्स में जो रफनेस था वो कामया के शरीर में एक नया जोश भर गया था वो बिना हीले वैसे ही उल्टी बेड पर पड़ी रही जब भीमा उसके ऊपर से हटा तो भी भीमा ने उठकर उसके गोल गोल नितंबों पर एक हाथ रखकर उन्हें बड़े ही प्यार से सहलाता जा रहा था और उसकी जाँघो तक लाता था कामया की जाँघो के बीच से कुछ गीला पन सा बह कर घुटनों तक आ रहा था शायद दोनों के मिलन की निशानी थी या फिर कामया के उतावलेपन का जो भी हो भीमा वैसे ही बेड पर बैठा हुआ उसके नंगे शरीर को अपने हाथों से सहलाता जा रहा था और अपने अंदर उठ रहे ज्वर को कुछ देर के लिए और भी भड़का रहा था वो जानता था कि बहू में आज अब इतना दम नहीं है कि वो उसे दूसरी बार झेल सके पर वो अपने मन को कैसे समझाए
फिर भी कुछ देर बाद उसने बहू को आवाज दी
भीमा- बहू
कामया-
भीमा- बहू उठो
कामया- उूुउऊह्ह
भीमा- अच्छा लगा आज
कामया- उउउम्म्म्मम
और भीमा अपने हाथों से कामया को उठाकर ठीक से बेड पर सुलाकर पास में खड़ा हुआ अपने कपड़े पहनने लगा उसने आज बहू को धक्का नहीं शायद अपने अंदर उस सुंदरता को उतारना चाहता था वो थोड़ी देर खड़ा-खड़ा बहू को देखता रहा फिर नीचे झुक कर एक लंबा सा किस उसके होंठो पर किया और बाहर निकल गया
कामया भी जानती थी कि भीमा चाचा क्या देख रहे है पर उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो उठकर अपने को ढँके आज तक उसके पति ने उसे इस तरह से नहीं देखा था वो अपनी अद्खुलि सी आँखों से भीमा चाचा के चेहरे पर उठ रही लकीरो को देख पा रही थी अगर कामया ने एक बार भी कुछ किया होता तो शायद वो उसपर फिर से टूट पड़ते पर आज उसमें इतनी जान नहीं बची थी कि वो और भीमा चाचा को झेल सके आज का सेक्स उसके जीवन में एक नया मोड़ ले आया था वो इस बात को जान गई थी कि उसे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था आज जब वो दर्द से चिल्लाई थी तब अगर भीमा चाचा रुक जाते या फिर यह सब नहीं करते तो उसे जो आनंद आज मिला था वो नहीं लूट पाती हर दिन की तरह ही आज भी भीमा चाचा ने उसे निचोड़ा था पर आज कुछ अलग था आज उसमें एक वहशीपन था आज उन्होंने कामया की एक नहीं सुनी थी
उन्होंने जो कुछ भी किया अपने तरीके से किया और अपने सेक्स को शांत करने के लिए किया उन्हें आज नहीं मतल्ब था कि कामया क्या सोचेगी या फिर कामया को कितना दर्द होगा जैसे वो पहले से ही जानते थे कि कामया को यह पसंद आएगा जो भी हो कामया को आज मजा आया था हर दिन से अलग सोचते सोचते वो कब सो गई पता ही नहीं चला
उसकी आँखें खुली तो पाया कि कोई उसके बदन को सहला रहा है उसके हर गोलाई को अपने हाथों के बीच में लेकर उनका नाप ले रहा था वो थोड़ा सा कसमसाई और आँखें खोलकर देखा वो भीमा चाचा थे जो कि उसके बेड पर ही बैठे हुए उसके नंगे बदन को सहला रहे थे
कामया के होंठों पर एक मुश्कान दौड़ गई जो कि भीमा की नज़रों से बच नहीं पाई वो झुके और एक लंबा सा चुंबन कामया के होंठों पर किया और
भीमा- चाय लाया था बहू पी लो
कामया- हमम्म हाँ…
और थोड़ा सा अकड कर उठने की कोशिश करने लगी भीमा झट से उठ गया और, कामया को सपोर्ट देने को कोशिश करने लगा पर उसके हाथों ने बहू की चूचियां को नहीं छोड़ा एक हाथ उसकी पीठ पर जरूर ले गया था
कामया- छोड़िए मुझे
भीमा- क्यों
कामया- क्यों क्या बाथरूम जाना है
भीमा चली जाना थोड़ा सा रुक जाओ बहू ऐसा मैंने जिंदगी में कभी नहीं किया थोड़ा सा रुक जा
कामया- उूउउफफफ्फ़ छोड़िए जाने दीजिए और मेरे कपड़े ला दीजिए
भीमा- थोड़ा सा रुक जा
और वही बहू के पास खड़े हुए उसकी चुचियों को धीरे-धीरे अपने हाथों से मसलने लगा था और दूसरे हाथों से बहू की नंगे पीठ को कामया अब तक बिना कपड़ों के थी भीमा उसके बहुत पास खड़ा था उसकी जाँघो के बीच का हिस्सा थोड़ा सा सख़्त था जो कि कभी कभी आके चेहरे पर लग रहा था
भीमा- थोड़ा सा प्यार करलेने दे फिर चली जाना अभी तो लाखा भी आने वाला है
कामया- उउउफ्फ… चाचा प्लीज जाने दो नहीं तो यही हो जाएगी
भीमा- ही ही तो हो जाने दे में साफ कर दूँगा
कामया- छि चलिए हटिए आज आप ती बिल्कुल निडर हो गये है
भीमा- सिर्फ़ आपके लिए बहू नहीं तो मेरी क्या औकात है
कामया- अच्छा चाय भी यही रूम में ही ले आए
भीमा- जी बहू आपका कुत्ता जो हूँ जैसा आप चाहे में आपके लिए कर सकता हूँ प्लीज थोड़ा सा और
कामया- नहीं बहुत थक गई हूँ अब और नहीं अब कल हाँ…
और हँसते हुए अपने टांगों को खींचकर चादर से बाहर निकाला और उठने की कोशिश करने लगी पर भीमा उसके बिल्कुल सामने खड़ा हो गया
बेड पर बैठी कामया को एक भूखी नजर से देखने लगा उसके हाथ अब भी कामया के कंधे पर थे और वो उन्हें सहला रहा था वो थोड़ा सा और आगे बढ़ा और अपने पेट को बहू के चेहरे पर घिसने लगा
कामया भी सकते में थी कि अब क्या करे पर भीमा चाचा के अंदाज से ही लग रहा था कि वो बहुत मजबूर है वो मुस्कुराते हुए ऊपर की ओर भीमा चाचा की ओर देखा और
कामया- चाचा लाखा काका आते ही होंगे प्लीज
भीमा- एक बार बहू सिर्फ़ एक बार और देख क्या हालत हो रही है
और अपने लिंग को झट से अपनी धोती से बाहर निकाल कर कामया के चेहरे पर फेरने लगे थे
कामया की सांसें तेज हो गई थी उसके सामने जैसे कोई काला मोटा सा लंबा सा साप झूल गया था वो उसे देख ही रही थी कि भीमा चाचा के हाथ ने उसके एक हाथ को पकड़कर अपने लिंग पर रखा और धीरे से दबा दिया
भीमा- देखा तुझे देखकर क्या हो जाता इसे चल एक बार और फिर में तुझे तैयार कर दूँगा
उनके बातों में बेबसी थी और एक परम इच्छा के साथ गुजारिश भी
कामया- चाचा दुपहर को आज हुआ तो था फिर कल करलेंगे अब तो कोई दिक्कत नहीं है में तो घर में ही हूँ पर अभी लाखा काका आ जाएगे में तैयार हो जाती हूँ हाँ…
भीमा- सुन एक काम कर मुँह में लेले तू बहुत अच्छा चूसती है प्लीज थोड़ी देर के लिए फिर में चला जाऊँगा प्लीज़
और अपने हाथों के जोर से वो बहू को अपने लिंग पर झुकाने में सफल हो गये
कामया ने भी देखा कि कोई चारा नहीं है तो थोड़ा सा लिंग अपने मुख में लेकर चुबलने लगी और अपनी नजर ऊपर उठाकर देखा
भीमा चाचा अपना सिर उँचा करके अपने लिंग के चारो तरफ बहू के होंठों का आनंद ले रहे थे
उनका लिंग धीरे-धीरे और अकड रहा था और उनकी कमर भी अब धीरे से हिलने लगी थी कामया ने सोचा था कि एक दो बार चूसकरछोड़ देगी पर भीमा चाचा के हाथों का दबाब उसके सिर पर धीरे-धीरे बढ़ने लगा और वो अपने को छुड़ाने की कोशिस करने लगी थी पर जैसे ही वो अपने को छुड़ाने की कोशिश करती उनका दबाब और भी बढ़ आ जाता कामया समझ गई थी कि अब जब तक वो झरेंगे नहीं तब तक वो नहीं जा सकती उसे बाथरूम जाना था
पर क्या करे अपने को बचाने के लिए कामया ने भीमा चाचा के लिंग को और भी जोर से चूसना शुरू कर दिया और अपनी जीब को उसके चारो और भी घुमाती जा रही थी
भीमा- आआह्ह, बहू और चूस और जीब से कर
कामया- हाँ… हमम्म्मम करती हुई जाम कर उनके लिंग को चूसती जा रही थी और जल्दी से अपने को बचाने की कोशिश करती जा रही थी पर अपने आपको बचाने की जल्दी में या फिर उस परिस्थिति से निकलने की जल्दी में वो एक नये निष्कर्ष पर पहुँच गई थी वो नहीं जानती थी कि लिंग को चूसने में कितना मजा है वो आज उस गरम सी चीज को अपने मुख में लेने के बाद और अपनी इच्छा से उसे जल्दी-जल्दी चूसने के चक्कर में उसे पता चला था कि नहीं यह जैसा मजा
नीचे देता है वैसा ही मजा उसके मुख में भी देता है उसका टेस्ट भी उसे अब अच्छा लगने लगा था वो भी गरम होने लगी थी पर वो जानती थी कि जरा सी हरकत उसकी योनि में होते ही उसकी सूसू निकल जाएगी वो जल्दी से अपने आपको बचाने के चक्कर में लगी थी और अपनी पूरी ताक़त से चाचा के लिंग को चूसे जा रही थी
भीमा के तो जैसे पर निकल आए थे वो कहाँ उड़ रहा था उसे पता नहीं था बहू जिस तरह से उसका लिंग चूस रही थी उसे परम आनंद की अनुभूति हो रही थी वो अब बहू के सिर को छोड़ कर धीरे से अपने हाथों को उसकी चुचियों तक ले गया था और वो उन्हे कसकर दबा रहा था पर जैसे ही वो थोड़ा सा सतर्क होता उसके लिंग ने जबाब दे दिया और बहू उसके हाथों से फिसल कर बाथरूम में घुस गई वो कुछ समझता उसके लिंग का एक बार का वीर्य बहू के मुख के अंदर था और दूसरी बार का उछलकर बेड पर पिचकारी की तरह छिड़क गया भीमा खड़ा नहीं रह सका और धम्म से वही बेड पर लेट गया और लंबी-लंबी साँसे लेने लगा वो बहू को देख भी नहीं पाया था जब वो बाथरूम में घुसी पर हाँ… वो संतुष्ट था
उसके चेहरे पर मुश्कान उसके दिल की हालत को बयान कर रही थी उसने उठकर अपनी धोती ठीक की और बाहर चला गया कामया जो कि बाथरूम में जल्दी से जाकर अपने मुँह में आए चाचा के वीर्य को थूक रही थी उसे अजीब सा लग रहा था उसका टेस्ट भी अजीब था पर कुछ तो उसके गले के नीचे भी चला गया वो मिरर में अपने को देखकर जल्दी से तैयार होने लगी मुँह हाथ धोकर जब वो बाहर निकली तो भीमा चाचा जा चुके थे
वो कमरे में तौलिया लपेटे ही घुसी थी वो बिल्कुल फ्रेश थी और आगे के लिए भी तैयार थी वो अब ड्राइविंग सीखने लाखा काका के साथ जाना चाहती थी भीमा चाचा ने जो अभी-अभी उसके साथ लिया था उससे कामया के शरीर में वो आग फिर जल उठी थी जिसे वो अब काबू नहीं कर पा रही थी वो जल्दी से वारड्रोब के सामने खड़ी हुई और अपने कपड़ों को खागालने लगी
20 25 मिनट बाद वो बिल कुल तैयार थी वो मिरर के सामने खड़ी होकर एक मधुर सी मुश्कान लिए अपने आपको देख रही थी हल्के पिंक कलर की साड़ी जो कि कमर के काफी नीचे से बँधी थी उसकी नाभि के बहुत नीचे शायद पैंटी से ही लगी हुई थी ब्लाउस भी छोटा था नीचे से और स्लीव लेस और डीप था आगे से और पीछे से सारी का पल्लू बस कंधे पर टिका हुआ था जो की कामया के जरा सा हिलने से ही उसके पीछे कि नज़रें को अपने आँखों के सामने उजागर कर देते थे दो पहाड़ नुमा चूचियां उसके ब्लाउसमें जो क़ैद थी बाहर आने को जगह ढूँढ रही थी थोड़ा सा तनकर खड़ी होकर कामया ने एक बार फिर से अपने आपको मिरर में देखा और घंटी बजते इंटरकम की और नजर उठाई लाखा काका आ गये होंगे
कामया- हाँ…
भीमा- जी लाखा आ गया है बहू
कामया- हाँ… बस एक मीं में आती हूँ
भीमा- जी
और कामया ने फोन काट कर बाहर निकलने जा ही रही थी कि उसे कुछ ध्यान आया वो वापस मुड़ी और वही कोट को पहन लिया और मुस्कुराती हुई नीचे की ओर चल दी सीढ़िया उतरते ही उसे भीमा चाचा किचेन के दरवाजे पर देखे
कामया- कहाँ है काका
भीमा- जी बाहर
भीमा बहू को बाहर की ओर जाते हुए देखता रहा वो जानता था कि अब वो लाखा के साथ क्या करने वाली है और लाखा भी बस इसी इंतजार में ही होगा वो मुस्कुराते हुए वापस किचेन में घुस गया और कामया जब बाहर निकली तो लाखा उसके लिए दरवाजा खोले खड़ा था वो थोड़ा सा ठिठकि पर जल्दी से पीछे की सीट पर बैठ गई लाखा भी जल्दी से ड्राइविंग सीट पर जम गया और गाड़ी गेट के बाहर हो गई
सड़क पर गाड़ी दौड़ रही थी पर अंदर बहुत ही शांत सा माहौल था कामया बार-बार लाखा काका की ओर देख रही थी कि शायद वो कुछ कहेंगे पर वो चुप ही रहे
कामया- काका क्या हुआ
लाखा- जी क्या
कामया- वो भोला का
लाखा- जी वो भैया जी ने उसे बाहर भेजा है किसी काम से कल या परसो आएगा उस दिन के बाद कुछ बोला नहीं
कामया- (एक लंबी सी सांस छोड़ती हुई ) हाँ… पर क्या वो मान जाएगा
लाखा- क्या बहू
कामया- मेरा मतलब है कि क्या वो मतल्ब
लाखा- बहुत कमीना है बहू वो क्या गुल खिलाएगा पता नहीं चुप है पर
कामया- क्या पर कही वो पापा जी या भैया जी बता
लाखा- नहीं बहू वो यह हरकत तो नहीं करेगा हाँ… आपसे मिलने की कोशिश जरूर करेगा
कामया- क्यों
लाखा- अब क्या बताऊ बहू वो बताया ना साला बहुत कमीना है
कामया-
लाखा- आप चिंता ना करे बहू रानी हम संभाल लेंगे साले को ऐसी जगह लेजाकर मारेंगे कि किसी को पता भी ना चलेगा
कामया एक बार सिहर उठी क्या बात कर रहा है लाखा काका मार डालने की बात वो चुपचाप बैठी बैठी काका को देखती रही
कामया- नहीं आप कुछ नहीं करेंगे बस डरा धमका कर छोड़ देना नहीं तो गड़बड़ हो जाएगी
लाखा- नहीं बहू कुछ नहीं होगा भीमा भी मेरे साथ है
कामया- क्याआआअ आपने भीमा चाचा को भी बता दिया
लाखा- और नहीं तो क्या वो मेरे गाँव का ही है हमारी बहुत अच्छी बनती है आप फिकर मत करो भोला को छोड़ेंगे नहीं
कामया के शरीर से जान ही निकल गई थी वो किस मुसीबत में पड़ने जा रही थी पहले तो काका ने भीमा चाचा को उसके और मेरे बारे में बता दिया और अब भोला के बारे में भी यानी कि यह भी बता दिया होगा कि वो उसके घर गई थी और वहां क्या हुआ था
वो एक बार सिहर उठी वो नहीं जानती थी कि वो किस और जा रही है पर एक बात तो क्लियर थी भोला कुछ भी करने से पहले एक बार कामया से जरूर मिलेगा लेकिन क्यों कही वो भी तो भीमा और लाखा काका जैसे........ उसे नहीं नहीं वो क्या सोच रही है छि क्या वो ऐसी है
वो सोच ही रही थी कि लाखा काका की आवाज आई
लाखा- कुछ सोच रही है बहू
कामया- नहीं हुहह देखना काका कुछ गड़बड़ ना हो जाए
लाखा- आप परेशान ना हो बहू रानी हम है ना और किसी में इतनी हिम्मत है कि आपकी बात उठा दे आप निसचिंत रहे
कामया- पर अगर वो
लाखा- नहीं बहू वो वैसे भी थोड़ा हमसे और भीमा से डरता है कुछ करने से पहले उसे हजार बार सोचना पड़ेगा
कामया- हाँ…
लाखा गाड़ी चलाते हुए अपना एक हाथ पीछे ले गया और साइड सीट पर रखता हुआ उसे थपथपाने लगा और बोला
लाखा- छोड़ो ना बहू आपके चेहरे पर चिंता और परेशानी के भाव अच्छे नहीं लगते आप तो खुश और मुस्कुराती हुई ज्यादा अच्छी लगती है और एक बार फिर से सीट के बॅक पर थोड़ा सा हाथ मारा और घूमकर गाड़ी चलाने लगा
कामया भी काका के बातों में आ गई थी और थोड़ा सा मुस्कुरा दी और अपने जेहन से भोला की बात को निकाल दिया
लाखा- हम तो बहू रानी आपके नौकर है आपने हमे आपका गुलाम बना लिया है आप क्यों चिंता करती है आपकी लिए लाखा और भीमा की जान हाजिर है आप कह के दो देखो ही ही ही
और खुलकर हँसने लगा उसकी हँसी में एक बेफिक्री थी जो कि कामया को इस चिंता से दूर बहुत दूर ले गया था वो भी अब मुस्कुरा रही थी और वाइंड स्क्रीन की ओर देखती जा रही थी गाड़ी ट्रॅफिक के बीच से होती हुई सड़क पर अब भी दौड़ रही थी
कामया- हाँ… लेकिन काका ध्यान रखना
लाखा- जी बहू आप निसचिंत रहे और गाड़ी सीखिए ही ही
कामया भी जानती थी कि काका क्या कहना चाहते है वो पीछे बैठी बैठी धीरे-धीरे अपने कोट के बटन खोलने लगी थी और जब तक ग्राउंड में पहुँचती वो कोट उतार चुकी थी लाखा की नजर पीछे बैठी बहू की हर हरकत पर थी जब वो कोट उतार रही थी तो भी और जब थोड़ा सा आगे होकर अपनी बाहों से कोट को निकाला था तो भी उसके आँचल के ढलकने से जो नजारा उसे दिखा था तो फ़ौरन तैयार था उसका पुरुषार्थ
वो जल्दी से ग्राउंड में गाड़ी खड़ा करके सीट पर ही बैठा रहा और पीछे मुड़कर बहू की नजर से नजर मिलाकर
लाखा- आ जाइए ड्राइविंग सीट पर
और उसकी नजर बहू के चहरे पर से हटी और चुचियों चूचियां पर टिक गई और किसी भूखे की तरह से उसे देखने लगा था
कामया भी काका की नजर का पीछा कर रही थी और वो जानती थी कि काका की नजर कहाँ है वो और भी अपने सीने को बाहर की ओर धकेलती ही पल्ले को ठीक किया और दरवाजा खोलकर बाहर निकली और ड्राइविंग सीट की ओर घूमकर चल दी
ड्राइविंग सीट का दरवाजा खुला हुआ था
आज काका ने नीचे उतर कर साइड सीट में जाने की जहमत नहीं उठाई थी वो वही से ही एक पैर गियर रोड के उस तरफ करके बैठ गये थे और एक पैर अब भी ड्राइविंग सीट पर ही था वो थोड़ा सा मुस्कुराती हुई ड्राइविंग सीट पर बैठने लगी
आजलगता था कि लाखा को कोई ओपचारिकता की जरूरत नहीं थी वो बहू को खुलकर या फिर कहिए बिना किसी संकोच के अपने तरीके से इश्तेमाल करना चाहता था
लाखा ने जैसे ही कामया को ड्राइविंग सीट पर बैठ-ते देखा उसने अपना एक हाथ बढ़ा कर बहू के नितंबों के नीचे ले गया और लगभग सहारा देते हुए अपनी जाँघ पर बैठने को मजबूर कर दिया कामया को भी कोई शिकायत नहीं थी वो भी जैसे काका ने इशारा किया वैसे ही किया और अपनी एक जाँघ को लाखा काका की जाँघ के ऊपर रखकर बैठ गई एक हाथ से डोर बंद करके वो एक्सीलेटर पर अपने पैर जमा लिया और काका की ओर देखने लगी काक का एक हाथ अब बहू के कंधे पर था और दूसरा हाथ उसकी जाँघो पर
कानों के पास अपने मुख को लाकर काका ने कहा
लाखा- गाड़ी चालू करो बहू
और अपने कंधे वाले हाथों को बहू की चूचियां पर पहुँचा दिया अपने होंठों से बहू के गले और गालों को चूमते हुए वो अपनी उंगलियों से बहू के ब्लाउज के बटनो को खोलने में लगा था
कामया भी काका की हरकतों को बिना किसी ना नुकुर के चुपचाप सहते हुए अपने अंदर उठ रहे ज्वार को समेटने में लगी थी उसके हाथ अब भी स्टेआरिंग पर ही थे पर काका का कोई ध्यांन ड्राइविंग की ओर नहीं था वो तो बस अपने पास बैठी हुई बहू को टटोलने में व्यस्त थे उसकी उंगलियों ने कामया के ब्लाउसको खोल दिया था और अपनी हथेली को ब्रा के अंदर उसकी चूचियां तक पहुँचा चुके थे
कामया- अह्ह सस्स्स्स्स्स्शह हमम्म्ममममममममम
कामया के मुख से जोर से एक सिसकारी निकली और वो अपने चहरे को काका के चहरे पर हल्के से घिसने लगी थी वो अब अपने आपसे नियंत्रण खो चुकी थी वो अब ड्राइविंग का पाठ पढ़ना भूल चुकी थी
लाखा भी बहू की जाँघो और चहरे पर अपने हाथ और होंठों को बिना किसी रोक टोक के बिल्कुल खुले दिल से सहला रहा था वो धीरे से अपने हाथों को लेजाकर अपने लिंग को धोती से निकालकर गियर रोड पर टिका दिया और कामया के हाथों को स्टेआरिंग से हल्के से खींचकर अपनी रोड पर रख दिया
कामया को भी कोई अपपति नहीं थी वो तो चाहती ही थी जैसे ही उसे हाथों में काका का लिंग आया उसने कस कर उसे अपने हाथों के बीच में जकड़ लिया काका के लिंग को पकड़ने में कामया को मजा आरहा था कितना गरम था और सख्त भी नरम भी और मुलायम भी उसका चेहरा अब पीछे की ओर हो गया था उसका सिर अब सीट पर टिक गया था जैसे की काका को वो अपना पूरा गला और शरीर सोप रही थी
और लाखा भी उत्तेजित ही था वो अपने आपको उस सुंदरी के गले से लेकर पेट तक साफ कर चुका था एक भी कपड़ा उसे रोकने को नहीं था उसके हाथों को आ जादी थी कही भी और कैसे भी सहलाने की और चिकने और मुलायम शरीर का मजे लेने को वो बहू को चूमते हुए
लाखा- बहू अच्छा लग रहा है ना
कामया- हाँ… हाँ… हाँ… सस्शह हाँ… ष्ह
लाखा- अपने हाथों को आगे पीछे कर ना बहू
और अपने हाथों से अपने लिंग पर कसे हुए बहू के हाथों को थोड़ा सा आगे पीछे करने लगा
कामया को तो इशारे की ही जरूरत थी वो अपनी नरम हथेली से काका के लिंग को कसकर पकड़कर आगे पीछे करने लगी थी और अपने मुख से गरम-गरम साँसे काका के चेहरे पर छोड़ने लगी थी वो अब बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन काका को कुछ नहीं कह पा रही थी उसकी सांसें सब बयान कर रही थी और लाखा बहू के, शरीर का रस पान करते हुए नहीं थका था वो अपने होंठों को बहू के शरीर पर हर कही घुमा-घुमाकर हर इंच का को चूमता और, चाट कर उसका टेस्ट ले रहा था कमर से लेकर होंठों तक और माथे से लेकर गले तक पूरा गीलाकर चुका था वो बहू को
कामया भी अब नहीं रुकना चाहती थी उसकी जाँघो के बीच में बहुत चिपचिपा सा हो गया था अब तो चाहे जो भी हो उसे वो चाहिए ही
उसने खुद ही अपनी कमर को उचकाना शुरू कर दिया था और ज़ोर लगा के लाखा के ऊपर आने की कोशिश करने लगी थी और एक हाथ से काका को अपने हाथ से जोड़े रखा था वो अपने टांगों को उँचा करती जा रही थी पर वो काका के ऊपर अपने को लाने में असमर्थ थी वो कोशिश पर कोशिश करती जा रही थी और उसकोशिश में कामया की साड़ी उसकी जाँघो तक पहुँच चुकी थी लाखा भी बहू के इस तरह से मचलने से और भी उत्तेजित होता जा रहा था वो अपने जोर को बहू के ऊपर और बढ़ा रहा था और बहू को किसी तरह से सीट पर रखने की कोशिश कर रहा था
पर बहू को अब संभालना थोड़ा सा मुश्किल लग रहा था वो अब किसी भूखे शेर की तरह से उसपर टूट पड़ी थी वो लाखा के होंठों को अपने मुख में लिए चबा जा रही थी और मुख से अजीब सी आवाजें निकालती हुई अकड कर उसपर सवार होने की कोशिश में थी लाखा अपने हाथों को बहू की जाँघो तक ले गया और उनके बीच में घुसा दिया ताकि वो कुछ तो कंट्रोल कर सके
जैसे ही काका का हाथ उसकी जाँघो के बीच गया तो कामया के मुख से एक लंबी सी सिसकारी निकली
कामया- सस्स्स्स्स्स्स्स्शह उूुुउउम्म्म्मममममममममम
लाखा- थोड़ा सा रुक जा बहू थोड़ा सा खेल लेने दे मुझे आआआआआआआआह्ह
लाखा- हाँ… हाँ… रुक जा बहुत दिन हो गये थोड़ा सा रुक मेरा भाग्य भीमा जैसा कहाँ है कि रोज तेरे हुश्न के दर्शन हों थोड़ा सा रुक
कामया- आप ही तो नहीं आइईईईईईईईई आअब्ब्ब्ब करो सस्स्स्स्स्स्स्स्शह
और कामया के होत फिर से लाखा के मोटे-मोटे होंठों पर टूट पड़े उसे काका के होंठों को चूसने में बहुत मजा आ रहा था वो अपने जीब को भी काका के मुख में डालकर अपनी जीब से से टटोलती जा रही थी
लाखा का एक हाथ जो कि उसके जाँघो के बीच में था उसे वो अब बहू की पैंटी को खींचने लगा था और कामया ने भी थोड़ा सा उठ कर उसे मदद की और झट से बहू की पैंटी लाखा के हाथों में थी और नीचे कही अंधेरे में खो गई थी बहू की जाँघो की बीच में लाखा ने अपनी उंगली घुसाकर अपने लिए रास्ते को एक बार आगे पीछे करके देखा
कामया- उंगली नहीं पल्ल्ल्ल्ल्लीीईईआआआआसस्स्स्सीईईईईईईई वो
लाखा- हाँ… हाँ… देख तो लूँ पहले
कामया- प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज आअब करो
अचानक ही लाखा अपनी जाँघो को गियर रोड के ऊपर से निकलकर साइड सीट पर चला गया और बहू की ओर घूमते हुए देखने लगा उसका लिंग भी कामया के हाथों से छूट गया पर कामया उसे पकड़ने की कोशिश करती जा रही थी वो अपने हाथों में आई उस अनमोल चीज को जैसे छोड़ना नहीं चाहती थी पर लाखा ने बहू को कमर से पकड़कर अपनी ओर खींच ने लगा था
कामया को कुछ समझ में आया और कुछ नहीं वो यह तो जानती थी कि अब उसे वो चीज बस मिलने ही वाली है पर कैसे पता नहीं वो तो काका ही जानते है
वो गाड़ी के अंदर ही उठने की कोशिस करती हुई अपने दाँये पैर को काका के ऊपर चढ़ाने को कोशिश करने लगी थी तब तक काका ने एक झटके से उसे अपने ऊपर अपनी ओर फेस करते हुए बिठा लिया था
अब कामया लाखा काका की गोद में बिल्कुल सट कर बैठ गई थी उसकी बाँहे काका के सिर के चारो ओर घूमकर उसके चहरे पर आ रही थी चिकनी चिकनी जाँघो की गिरफ़्त में थे अब लाखा काका और खूबसूरत और मुलायम और चिकना और गुलाबी बदन के मालिक थे लाखा काका वो अपने हाथो को बहू की पीठ पर अच्छे से सहलाकर उसकी नर्मी और मुलायम पन का एहसास कर रहे थे आज उन्हें बहू पर बहुत प्यार आ रहा था और वो उस टाइम को खूब अच्छे तरीके से एंजाय करना चाहते थे उनका लिंग बहू के नितंबों के पार निकल गया था और निरंतर उसके नितंबों पर नीचे से टक्कर मार रहा था
कामया भी अपनी जाँघो के बीच में हो रही हलचल को किसी तरह से अपने अंदर ले जाना चाहती थी पर काका तो तो बस अपने खेल में ही लगे थे कामया को अब सहन नहीं हो रहा था वो अब अपने अंदर उस चीज को लेलेना चाहती थी पर काका की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो हिल भी नहीं पा रही थी उसने एक हाथ को पिच करके किसी तरह से अपने नितंबों के नीचे दबी उस चीज को अपने उंगलियों से छुआ और अपने को थोड़ा सा पीछे करने लगी थी लाखा जो कि बहू की चुचियों का स्वाद ले रहा था पर जैसे ही उसे अपने लिंग पर बहू की उंगलियों का स्पर्श हुआ वो थोड़ा सा सचेत हो गया और चूचियां चूसते चूसते बहू को और भी कस कर भिच लिया वो जान गया था कि अब बहू को क्या चाहिए उसकी भी हालत कुछ वैसी ही थी पर अपने को बहू के शरीर के अंगो का स्वाद लेने से नहीं रोक पा रहा था पर बहू की उत्तेजना को देख कर उसने बहू को थोड़ा सा ढीला छोड़ा
तो कामया को जैसे मन किी मुराद ही मिल गई हो वो थोड़ा सा ऊपर उठी और अपनी उंगलियों के सहारे काका के लिंग को अपनी योनि के द्वार पर रखा और झट से नीचे बैठ गई
कामया- आआआआअह्हस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स
और कस कर काका के चेहरे को अपनी चुचियों पर फिर से कस लिया कामया आज बहुत उत्तेजित थी पता नहीं क्यों उसे अब मजा आने लगा था वो लाखा और भीमा चाचा से लगता था कि अपनी सेक्स की भूख को ख़तम करना चाहती थी या फिर और भी बढ़ा रही थी पहले तो रात में एक बार या फिर किसी दिन कामेश के साथ दो बार ही होता था पर अब तो दिन में दो बार वो भी डिफरेंट आदमियो के साथ करने पर भी उसका मन नहीं भरता था वो अपने को काका की गोद में उचका कर अपने अंदर उनके लिंग को ठीक से फिट करते हुए अंदर और अंदर तक उतारती जा रही थी
लाखा भी अब धीरे-धीरे नीचे से अपनी कमर को उचकाते हुए बहू के अंदर समाने की कोशिश करता जा रहा था बहू की उत्तेजना को देखते हुए वो भी बहुत उत्तेजित हो चुका था और अपने होंठों को बहू के एक निपल्स से दूसरे और फिर पहले पर ले आता था उसके चेहरे पर बहू की सांसें भी बड़ी जोर से पड़ रही थी नुकीली नाक और नीचे से देखने पर दो छोटे छोटे गप के साथ वो अद्भुत नज़ारा देखता जा रहा था होंठ खुले हुए और कभी-कभी जीब निकाल कर अपनी आहो को कंट्रोल करने की कोशिश देखता हुआ लाखा अपने कामोंवेश को ज्यादा नहीं रोक पाता वो बहू के सिर को कस कर पकड़कर नीचे किया और उसकी नाक को अपने होंठों के अंदर दबाकर अपने जीब को उसकी नोक दार और शार्प नोस को अपनी जीब से टटोल ने लगा था
कामया की सांसें बंद होती जा रही थी लेकिन काका का यह अंदाज उसे पसंद आया था उसे अपनी नाक का भी इंपार्टेन्स लगा कि काका को मेरी नाक तक पसंद है तभी तो अपने होंठों पर लेके चूम रहे है वो और जोर-जोर से सांसें लेने लगी थी पर अपनी नाक को नहीं निकाला था काका के होंठों के दबाब से और दोनों हथेली को जोड़ कर काका के चेहरे को और भी कस कर जकड़ लिया था ऊपर-नीचे होते होते और अपने को काका के अंदर समाने की कोशिश में कामया भी अपने शिखर पर पहुँचने वाली थी उसकी कमर की गति भी बढ़ गई थी वो अब बहुत ही तेजी से अपने कमर को आगे पीछे कर रही थी जैसे लगता था जल्दी काका को नहीं या फिर काका कामया को नहीं भोग रहे थे बल्कि कामया काका को भोग रही थी काका भी आश्चर्य से बहू की इस बात पर गौर कर रहे थे वो सीधी सादी दिखने वाली बहू आज क्या कमाल कर रही है कामया अपनी नाक को काका के होंठों से निकाल कर अपने होंठों से, काका के होंठों को दबाकर चूस रही थी और बहुत ही तेजी दिखा रही थी
कामया- करो काका करो और जोर से
लाखा- हाँ… हाँ… अया बहुउऊुुुुुुुउउ तू तो कमाल की हाईईईईईईईईईईई उूुुुुुुुुुुउउफफफफफफफफ्फ़
कामया- हाँ… नाअ करो अब और जोर-जोर से
लाखा- हाँ… बहू बस हो गया समझ तूने तो सच में मुझे अपना गुआलमम्म्मममम बना लिया है हमम्म्ममम
कामया- आआआआआआह्ह गाइिईईईईईईई हमम्म्मममममममममममममम
और दो तीन झटको में ही कामया का शरीर धीरे-धीरे शांत होने लगा पर शरीर में उठ रही तरंगो पर वो अब भी झटके ले रही थी
लाखा भी कामया के साथ ही झड़ गया पर आज लगता था कि बरसो बाद वो जिस सुख की इच्छा करता आ रहा था वो उसे मिल गया था बहू ने आज उसे वो मजा दिया था वो शायद ही उसे अपने जीवन काल में मिला होगा या फिर किसी स्त्री ने उसे इतना मदहोश किया होगा वो भी दो चार झटके के बाद बहू को अपने सीने से चिपका कर जोर-जोर से सांसें लेने लगा था मुख अब भी बहू के सीने पर ही था और बहू ने उसका सिर कस कर पकड़ रखा था वो धीरे से अपने होंठों को खोलकर अपनी नजरों के सामने रखे उस निपल्स को अपने होंठों में दबा लिया और सहद का पान करने लगा उसके दोनों हाथ बहू की कमर और पीठ के चारो से घूमकर उसकी चुचियों तक आ गये थे और वो साइड से भी उन्हें दबाता जा रहा था वो अब शांत थे बहुत ही शांत गाड़ी के अंदर आए उस तुफ्फान को दोनों ने मिलकर शांत किया था
लाखा के हाथ अब भी बहू के शरीर का जायजा ले रहे थे वो आज बहुत ही शांत था बड़े ही प्यार से वो बहू को सहला रहा था और अपने को शांत कर रहा था
थोड़ी देर बाद लाखा को सुध आई कि वो कहाँ है तो उसने बहू को थपथपाया पर बहू तो उससे चिपकी हुई अपने शरीर को मिले उसपरम आनंद के सागार में अब भी गोते लगा रही थी लाखा का लिंग अब भी बहू की योनि में ही था सिकुड़ गया था पर था वही बहू जिस तरह से उसकी गोद में बैठी थी उसके निकलने का कोई रास्ता ही नहीं था
लाखा- बहू
कामया- हाँ…
लाखा- चलना चाहिए बहुत देर हो गई है
कामया- हाँ…
और लाखा ने अपने हाथों को थोड़ा सा ढीला छोड़ा तो कामया थोड़ा सा पीछे हटी और काका की ओर देखने लगी
लाकः भी बहू की ओर ही देख रहा था उसने फिर से बहू को अपने आपसे जकड़ लिया और उसके होंठों का आनंद लेने लगा
कामया- उूउउम्म्म्ममम छोड़िए प्लीज़ उूउउम्म्म्मम
लाखा- हाँ… बहू जल्दी कर बहुत देर हो गई है
कामया भी जल्दी से साइड डोर खोलकर बाहर निकली और झट से पीछे का डोर खोलकर अंदर बैठ गई
लाखा वही बैठा बैठा अपने कपड़े ठीक कर रहा था पर कामया के कपड़ों का तो पता ही नहीं था कि वो कहाँ है कामया अपने सीने को ढँके हुए सामने काका को अपने कपड़े ठीक करते हुए देख रही थी जिसे कि उसके बारे में कोई चिंता नहीं थी
कामया- काका मेरे कपड़े,
लाखा- जी वो
और उसने गाड़ी के अंदर की लाइट जला दी ताकि वो बहू के कपड़ों को ढूँढ़ सके
कामया ने अपने हाथो से अपनी चुचियों को ढँकते हुए सामने की ओर काका की ओर देख रही थी
लाखा को फ्रंट सीट के नीचे ही उसके ब्लाउस और ब्रा मिल गये और वो उठाकर पीछे की ओर देखते हुए अपने हाथ बढ़ा दिए पर बहू को इस तरह बैठे देखकर वो थोड़ा सा रुक गया
कामया- लाइट बंद करिए
लाखा ने हाथ बढ़ा कर लाइट बंद कर दी पर अपने हाथों से बहू के ब्लाउस और ब्रा को नहीं छोड़ा कामया ने अपने ब्लाउस और ब्रा को लेने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया तो वो उन्हें खींच नहीं पाई वो हकबका होकर काका की ओर देखने लगी थी
लाखा- ले पहन ले
कामया- आप उधर मुँह करिए
लाखा-क्यों
कामया- करिए प्लीज
लाखा- बहू देखने दे प्लीज में तो तेरा गुलाम हूँ पहली बार तुझे कपड़े पहनते देखूँगा
कामया- नहीं प्लीज आप आगे देखिए
लाखा- ठीक है पर अंदर तो अंधेरा है जल्दी से पहन ले
कामया ने भी कोई जिद नहीं की और बैठे बैठे अपने ब्रा और ब्लाउसको पहनने लगी और काका की नजर अपने शरीर पर घूमते हुए देखती रही और अपनी सुंदरता पर नाज करती रही
किसी तरह से अपने कपड़े पहनकर कामया ठीक से बैठी ही थी कि गाड़ी अपने रास्ते पर आ गई और तेजी से घर की और दौड़ पड़ी गाड़ी के अंदर दोनों चुप थे शायद आने वाले कल की प्लॅनिंग कर रहे थे या फिर शायद जो हुआ था उसके बारे में सोच रहे थे
कामया बहुत शांत थी उसके तन की आग आज दूसरी बार भुजी थी वो अब टॉटली फ्री लग रही थी बहुत ही खुश और तरोताजा मूड भी अच्छा था भोला जैसे से भी छुटकारा शायद मिल भी जाएगा और भीमा और लाखा तो उसके हुश्न के गुलाम है ही कामेश से समझ में इज्ज़त है ही घर भी बढ़िया और क्या चाहिए एक औरत को वो सोचते हुए गाड़ी के बाहर की ओर देख रही थी कि उसके होंठों पर एक मुश्कान दौड़ गई जब गाड़ी घर के कॉंपाउंड में घुसी तब तक कामया संभाल चुकी थी और जब तक लाखा काका दौड़ कर उसके डोर तक आते वो डोर खोलकर जल्दी से गाड़ी से उतरगई और लगभग दौड़ती हुई सी अंदर चली गई उसके बाल अस्त व्यस्त थे और कपड़े भी ठीक से नहीं पहने थे पर उसे कोई डर नहीं था क्योंकी उसे देखने या टोकने वाला कोई नहीं था घर में सिवाए भीमा चाचा के
हाथों में कोट लिए कामया जल्दी से अपने कमरे में जाने की जल्दी थी उसे जब तक वो डाइनिंग स्पेस तक पहुँची तो बाहर गाड़ी के बाहर निकलने की आवाज उसे आ गई थी पापाजी को लेने जा रहे थे काका मैन डोर के बंद होने की भी आवाज उसे आई मतलब भीमा चाचा ने मेन डोर बंद कर दिया था वो चाचा को फेस नहीं करना चाहती थी, जिस तरह से वो अस्तवस्त दिख रही थी वो इसलिए उन्हें अवाय्ड करना चाहती थी
पर जैसे ही वो सीढ़िया चढ़ने लगी थी कि
भीमा- बहुउऊउउ (बहुत ही धीमी आवाज )
कामया- जी
और मुड़कर भीमा चाचा की ओर देखने लगी जो कि डाइनिंग स्पेस तक आ चुके थे और एकटक कामया की ओर ही देख रहे थे कामया के पलटने से भीमा उसे देखता ही रह गया था
साड़ी तो बस पहनी हुई थी कंधे पर बस टिकी हुई थी ना कुछ ढँकने की चाह थी और ना ही कुछ ढका ही था दोनों चूचियां दोनों ओर से पूरी आ जादी से अपने आकार को प्रदर्शित कर कर रही थी चेहरे से लेकर कमर तक का हिस्सा बिल कुल साफ-साफ अपने यौवन को खिल खिलाकर अपने होने का पूरा समर्थन दे रहे थे भीमा चाचा थोड़ा सा आगे होते हुए कामया से थोड़ी दूर आके रुक गये कामया वैसे ही पलटकर खड़ी हुई चाचा की ओर देखती रही
कामया- जी
भीमा- बहुउऊउउ
कामया- हाँ… कहिए क्या हुआ
भीमा- बहुत परेशान हूँ बहू
कामया- क्यों
भीमा- जब से तू गई है लाखा के साथ तब से
और भीमा अपनी धोती के ऊपर से अपने लिंग को सहलाने लगा था और एकटक वो कामया की ओर बड़ी ही दयनीय दृष्टि से देख रहा था वो थोड़ा सा और आगे बढ़ा और आखिरी सीढ़ी के पास आके रुक गया और धीरे से कामया का हाथ का पकड़ लिया
और धीरे-धीरे सहलाते हुए पकड़े रहा
भीमा- देख क्या हालत है इसकी
और अपने लिंग का पूरा आकार धोती के ऊपर से कामया को दिखाया और धोती के अंदर से अपने लिंग को निकालने की कोशिश भी करने लगे थे
भीमा- थोड़ा सा रहम कर बहू नहीं तो मर जाउन्गा प्लीज़
कामया- छि आप भी चाचा क्या बात करते हो नहीं अभी नहीं बहुत थक गई हूँ
और अपने हथेली को छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन भीमा की पकड़ क्या इतनी कमजोर थी कि कामया जैसी नाजुक और कोमल औरत उसके पकड़ से आजाद हो जाए
भीमा- प्लीज़ बहुउऊउउ कुछ कर दे हाथों से ही कर दे तू
कामया- नहीं ना मुझे नहाना है छोड़ो मुझे
भीमा- नहा लेना बहू थोड़ा सा रुक जा प्लीज़ पकड़ ले ना
और भीमा तब तक अपने लिंग को निकाल कर कामया के बहुत करीब आ गया था और अपने हाथों के जोर से वो कामया की हथेली को अपने लिंग तक ले आया था
लेकिन कामया अपने हाथों पर चाचा के लिंग को लेने को तैयार नहीं थी उसे जल्दी से फ्रेश होना था उसकी जाँघो के बीच में बहुत ही गीला था जो उसे बहुत परेशान कर रहा था वो बस किसी तरह से जल्दी से बाथरूम में जाकर अपने को धोना चाहती थी और जो भी हो उसके बाद
पर भीमा चाचा की उत्तेजना को वो देख रही थी उनका लिंग बुरी तरह से तना हुआ था और उसके हथेली के पीछे चाचा घिस रहे थे और उसकी गर्मी का एहसास उसे हो रहा था वो अपने हाथों को छुड़ाना चाहती थी पर जैसे ही भीमा चाचा के लिंग का स्पर्श उसके हाथों पर हुआ और चाचा के सांसें जब उसके चेहरे पर टकराने लगी तो वो बिल्कुल
समर्थन की मूड में आ गई थी वो थोड़ा बहुत छूटने की चेष्टा जरूर कर रही थी पर उतना जोर नहीं था उसके शरीर में हाँ… उनके लिंग को छूने की इच्छा जरूर बढ़ गई थी साडियो पर खड़े हुए जब भीमा ने कामया को अपने से और भी सटा लिया तो कामया ने बिल्कुल से अपने छूटने की कोशिश को भुला दिया और धीरे से अपनी हथेली में चाचा के लिंग को धीरे से पकड़ लिया
भीमा- आआआआअह्ह बहू कितना आनंद है आआआआआआआआह्ह
कामया- (जो की थोड़ा सा डरी हुई थी ) चाचा यहां नहीं कमरे में चलिए प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज हमम्म्ममममममममम
उसके होंठों को भीमा ने अपने होंठों से दबा दिया था और उसके होंठों को चूसते जा रहा था कामया की आवाज वही उसे गले में घूम हो गई और कामया की पकड़ उसके लिंग पर और भी मजबूत हो गई
अब तो भीमा को कोई चिंता नहीं थी उसे जो चाहिए था वो उसे मिल रहा था वो अपने हाथों से कामया के शरीर को भी सहला रहा था और कपड़ों के ऊपर से ही उसके हर उभार को छूकर उनकी सुडोलता का एहसास कर रहा था
कामया भी अब फिर से भीमा चाचा की इच्छा के अनुसार चलने को तैयार थी और जैसे उन्होंने कहा था अपने हाथों को उनके लिंग पर आगे पीछे करती जा रही थी पर उसकी जाँघो के बीच में भी फिर से आग भड़क रही थी लेकिन वहां तो पूरा गड़बड़ है वो जगह फिर से गंगा जमुना की तरह पानी का श्रोत शुरू करने ही वाला था पर कामया नहीं चाहती थी कि वहां भीमा चाचा कुछ करे
वो जल्दी से चाचा को ठंडा करना चाहती थी और कुछ आगे नहीं बढ़ना चाहती थी वो अपने पूरे ध्यान से चाचा के हर स्पर्श को उसके अनुरूप ही शामिल हो रही थी और कही कोई मनाही नहीं थी वो भी सीडियो पर खड़ी हुई आज इस तरह के सेक्स का आनंद लेने के पूरे मूड में थी घर पर कोई नहीं था और था भी जो वो उसके साथ ही था और उसके हाथों में जो था वो उसे पसंद था वो बी अपने पूरे तन मन से भीमा चाचा को शांत करने में लगी रही और अपने शरीर पर घूमते हुए उसके हाथों के स्पर्श का आनंद लेती रही
भीमा के हाथ कामया की साड़ी के ऊपर से उसके कमर और पीठ और चूचियां और चेहरे पर सब जगह पर पूरी आ जादी से घूम रहे थे और बहू के शरीर के मीठे मीठे स्वाद को भी अपने होंठों से अपने जेहन पर उतारते जा रहे थे भीमा चाचा की सांसें अब बहू तेज होती जा रही थी और उनकी पकड़ भी कसती जा रही थी पर अचानक ही उनकी पकड़ थोड़ी ढीली हुई और उनकी हथेली कामया के कंधे पर आके रुक गई और
बहू की गर्दन को पकड़कर वो बहू के होंठों को बहुत ही बेदर्दी से एक बार लंबा चुंबन लिया और
तब तक तो कामया भीमा चाचा के घुटनों के पास बैठी हुई थी और भीमा का लिंग उसके मुँह के अंदर था और थोड़ी देर में ही कामया के होंठ और जीब वो कमाल कर रहे थे कि भीमा भी ज्यादा देर नहीं झेल पाया और अपने हाथो को कस कर बहू के माथे पर रखकर जल्दी-जल्दी अपनी कमर को दो चार बार आगे पीछे किया और धीरे सारा वीर्य अपने लिंग से उडेल दिया जो कि कामया के गले के अंदर तक चला गया और कमाया भी खाँसते हुए अपने चेहरे को आजाद करने की जुगत में लगी हुई थी पर भीमा की पकड़ के आगे वो कुछ नहीं कर पाई और ना चाहते हुए भी उसे चाचा का पूरा का पूरा वीर्य अपने गले के नीचे उतारना पड़ा भीमा अब भी अपने लिंग को कामया के
मूह में उतनी ही जोर से आगे पीछे कर रहा था और अपने लिंग का आखिरी ड्रॉप भी उसके मुख के अंदर चढ़ता जा रहा था कामया भी अपने जीब से उसके लिंग को चाट्ती हुई अपने को किसी तरह से छुड़ाने में सफल हुई और हान्फते हुए अपने को संभालने लगी वो वही सीडीयों पर बैठी हुई थी और ऊपर भीमा चाचा की ओर ही देख रही थी भीमा भी अब थोड़ा सा संभला था और बहू की ओर देखकर थोड़ा सा मुस्कुराया
भीमा- कमाल की आई तू बहू
कामया-
भीमा- क्यों ना कोई तेरे लिए पागल हो
और झुक कर कामया के होंठों को फिर से अपने होंठों में दबाकर बहू को लंबा सा एक किस दे डाला और एक ही झटके में बहू को अपने दोनों हाथों पर उठाकर जल्दी से ऊपर की ओर लपका और बहू को उसके कमरे में छोड़ कर वो पलटकर अपनी धोती ठीक कर के नीचे की ओर चल दिया
भीमा के चहरे को देखकर ही लगता था कि वो कितना खुश है और कितना संतुष्ट है कामया कमरे में जाते ही सबसे पहले दौड़ कर बाथरूम में घुसी और अपने सब कपड़े उतारकर जल्दी से नहाने की तैयारी करने लगी बीच बीच में खाँसते हुए अपने मुँह में आए भीमा चाचा के वीर्य को भी थूकती जा रही थी पर जाने क्यों उसे इतना बुरा नहीं लग रहा था पर एक बात तो थी कामया अब भी बड़ी ही उत्तेजित थी पता नहीं क्यों पर थी लाखा काका और फिर भीमा चाचा के साथ उसने जो भी किया था उसका उसे कोई पश्चाताप नहीं था पर कामुक जरूर थी शायद आखिरी में जो भीमा चाचा ने उसके साथ किया था उससे ही यह स्थिति बन गई हो पर जो भी हो वो खुश थी उसके शरीर में एक पूर्ति सी आ गई थी उसका मन और शरीर अब उड़ने को हो रहा था वो बहुत खुश थी उसे लग रहा था कि अब उसके जीने का मकसद उसे मिल गया था वो अब वो औरत नहीं थी जो पहले हुआकरती थी
जो हमेशा अपने पति के पीछे-पीछे घूमती रहती थी या फिर उनके आने और उठने का इंतजार करती रहती थी वो अब आजाद पंछी की तरह आकाश में उड़ना चाहती थी और बहुत खूल कर जीना चाहती थी उसके तन और मन की पूर्ति को देखकर ऐसा नहीं लगता था कि अभी-अभी कुछ देर पहले जो भी वो करके आई थी उससे उसे कोई थकान भी हुई है