फोन की घंटी फिर बज उठी थी कामेश था कामया का हाथ किसी तरह से भोला को छोड़ कर वापस फोन तक पहुँचा था कि भोला के हाथों से फोन उसके हाथों पर आया कामया को होश नहीं था पर हाँ… भोला के हाथों का टच जो उसे हुआ था वो बहुत ही सुंदर था और अभी तो बहुत ही अच्छा लगा था थकि हुई थी और ऊपर अभी भोला लेटा हुआ था और उसके हाथों में फोन लिए हुए कामया ने एक बार फिर से
कामया- हाँ…
कामेश- सुनो वो ऋषि दोपहर तक आ जाएगा तुम तैयार रहना 4 बजे की फ्लाइट है और भोला को ट्रेन से आने को कह देना ठीक है
कामया- जी
कामेश- उठ गई हो की सो रही हो
कामया- उठ गई हूँ
कामेश- चलो रखता हूँ कल मिलेंगे
कामया- जी
और फोन कट गया अपने हाथों में फोन लिए हुए कामया ने थोड़ा सा जोर लगाया था अपने शरीर में ताकि भोला उसके ऊपर से हटे पर भोला उसे और भी अपनी बाहों में कसे जा रहा था जैसे की आख़िरी बार उतरने से पहले कस रहा था
उसके कसाव में एक अनोखी बात थी एक अजीब सी जान थी और एक अजीब सा प्यार था वो उसके शरीर को कसता हुआ एक एहसास उसके अंदर तक उतर रहा था कि वो उसे कितना प्यार करता है या फिर उसके शरीर को कितना चाहता है यार फिर उसे छोड़ना नहीं चाहता जो भी हो एक अजीब सा मजा था उसे कसते हुए बाहों में अपनी रात भर की थकान को मिटाने का रात भर और सुबह के सेक्षुयल एन्काउन्टर का
और सुबह सुबह अपने शरीर को आराम देने का कामया चुपचाप भोला के कंधों को धीरे से अपनी बाहों में भरकर चुपचाप लेटी रही कुछ देर तक फिर खुद भोला ही धीरे से उसके ऊपर से हट-ते हुए गहरे गहरे कुछ किस करता हुआ उसके ऊपर से उतर गया और बेड पर पड़े हुए चद्दर से उसे ढँकता हुआ भहर चला गया था
कामया वैसे ही कुछ देर लेटी रही आखें अभी भी बंद थी पर पूरा तन जाग गया था
उसका रोम रोम पुलकित सा था और हर अंग उसे अपने होने का एहसास दिला रहा था हर अंग में मस्ती थी हर अंग उसके शरीर में अपने जगह पर तने हुए थे आज सुबह का खेल बहुत ही मजेदार था कामया सोचती हुई धीरे से अपनी आखें खोलकर एक बार पूरे कमरे की और देखा सबकुछ वैसा ही था कुछ नहीं बदला था
लेकिन कुछ तो जरूर बदला था वो शायद कामया की नजर ही थी उसके देखने का तरीका ही था थोड़ी देर बाद वो उठी और बाथरूम में जाकर नहा दो कर बाहर निकली बाथरूम में उसने एक बार अपने आपको देखा था बहुत करीब से उसके शरीर में हर कही लाल और काले दाग थे भोला के एक एक किसका और दबाने की निशान साफ-साफ दिख रहे थे उसके शरीर में वो अजीब सी मुश्कान उसके होंठों पर दौड़ गई थी और हर निशान को एक बार ध्यान से देखती हुई वो बाथरूम
से बाहर आ गई थी घड़ी में 11 बज चुके थे बाहर कुछ हलचल थी कमरे के पर क्या पता नहीं थोड़ी देर बाद एक नॉक हुआ था डोर में कुछ कहने से पहले ही भोला हाथों में चाय का ट्रे लिए अंदर आ गया था जैसे कुछ कहने की या पूछने की जरूरत ही नहीं थी उसे आते ही बेड के पास वाले टेबल पर ट्रे रखते हुए नीचे नजर किए
भोला- मेमसाहब चाय पी लीजिए
और उसकी नजर एक बार फिर से कामया से टकराई थी पर कहा कुछ नहीं उसकी नजर में अब तक भूख साफ-साफ देखी जा सकती थी कामया जिस तरह से मिरर के सामने बैठी थी उसका गाउन जाँघो से फिसल गया था एक नजर उसपर डालते हुए भोला बाहर चला गया था
कामया ने चाय की ट्रे की ओर देखा और बाहर जाते हुए भोला को पीछे से एक मुस्कुराहट की एक हल्की सी लाइन उसके होंठों पर फिर से दौड़ गई थी
जानवर कही का रात भर क्या कुछ तो नहीं किया फिर भी मन नहीं भरा था अब भी देख रहा था मुस्कुराती हुई उठी थी कामया और चाय पीने लगी थी अब क्या करना है उसे पता नहीं था धीरे-धीरे अपने काम से निपटने लगी थी नहा धो कर एकदम फ्रेश थी वो कोई डिस्टर्बेन्स नहीं था और ना ही कोई घटना जिसे लिख सके ऋषि भी जल्दी ही आ गया था और फिर दोपहर का खाना खाकर सभी तैयारी में थे जाने की पर भोला की नजर बार-बार कामया के ऊपर रुक जाती थी पर कामया ने एक बार भी उसकी ओर नजर नहीं किया था और नहीं उसकी ओर देखने की हिम्मत ही थी उसमें
ऋषि के साथ वो एरपोर्ट की ओर भी रवाना हो गई और जल्दी ही घर भी घर पर मम्मीजी के साथ बहुत सी बातें और फिर रात कामेश के ना आने से कामया थोड़ा सा बिचालित थी पर एक सुखद सा एहसास उसके अंदर अब तक जीवित था कल का भोला का और उस रात की हर घटना का घर पर सभी कुछ नार्मल था एक अजीब सी तैयारी का महाल था गुरुजी के आने का बहुत दिनों बाद उनके घर पर आ रहे थे इसलिए बहुत काम था सभी को घर का हर कोना साफ और चमकदार बना हुआ था हर कोई उनके आने से पहले फ्री हो जाना चाहता था
भीमा की खेर नहीं थी वो तो शायद सांस लेने तक की फ़ुर्सत नहीं थी उसे फिर भी कोई शिकायत नहीं थी उसे एक नजर उसने भी कामया पर डाली थी और एक आह भरकर ही रह गया था कामया अपने आप में थी पता नहीं कितनो का दिल तोड़ कर और कितनो का दिल जोड़ कर बैठी है शायद उसे भी पता नहीं था हाँ… पर रात को वो खूब सोई थी जैसे बहुत दिनों की नींद पूरी की हो पर रात भर सपने में भोला की याद उसे आती रही थी एक अजीब सी कसक उसके शरीर में पैदा हो गई थी वो ना चाह कर भी अपनी हाथों को अपने जाँघो तक ले जाने से रोक नहीं पाई थी
हर एक लम्हा उसे याद था कैसे शुरू हुआ था और कैसे आँत हुआ था कैसे उसने उसके शरीर को निचोड़ा था और कैसे उसने उसके चुचियों को चूसा था कैसे उसने उसे चूमा था और कैसे उसने उसे नहलाया था एक-एक वाक़या अपनी आखों के सामने होते हुए लग रहा था पूरी रात कामया के जेहन में यही बात चलती रही थी और एक अजीब सी कसक और भूख को बढ़ावा देती रही थी जब भी करवट लेती थी तो अपने शरीर को टच होता हुआ महसूस करती थी वो भोला से उसके शरीर का हर अंग परिचित था और वो एहसास अब भी उसके अंदर कही जमा था या कहिए की याद था
उसका वहशीपन और उसका प्यार का हर एक लम्हा उसे याद था उसके हाथों का हर स्पर्श उसे याद था वो यह जान गई थी कि भोला एक औरत को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता था और उसने किया भी था उसका हर एक रोम रोम को उसने छुआ था हर एक कोने को वो जानता था रात भर कामया इसी सोच में डूबी हुई करवटें बदल बदल कर सोई थी पर नींद बहुत अच्छी आई थी सुबह जब उठी थी तो उसके शरीर का हर एक अंग खिला हुआ सा था एकदम तरोताजा थी वो कही कोई दर्द नहीं और नहीं कोई खिचाव ही था एक अजीब सी खुशी और मादकता ने उसके पूरे शरीर को घेर रखा था एक अजीब सी मदहोशी थी उसके अंदर
वो जल्दी उठकर तैयार होने लगी थी नीचे चाय पीने जाना था कामेश का कुछ पता नहीं था कब आएगा पर मम्मीजी और पापाजी थे घर में इसलिए जल्दी से तैयार होकर नीचे पहुँची थी पापाजी और मम्मीजी चाय के टेबल पर उसकी का इंतजार कर रहे थे
मम्मीजी-, आओ बहू अच्छे से सोई की नहीं
कामया- जी
पापाजी- सुनो बहू आज तुम घर पर ही रहो और मम्मीजी का हाथ बँटाओ कामेश भी आता होगा
कामया- जी
मम्मीजी- अरे घर पर क्या करेगी
पापाजी- नहीं कुछ ना करे पर थोड़ा आराम तो चाहिए ना बहू को कितना काम कर रही है जब से तुम गई हो
मम्मीजी- हाँ… वो तो है
पापाजी- अच्छा बहू परसों गुरु जी आरहे है कोई बड़ा काम है घर भी आरहे है इसलिए
मम्मीजी---अरे हम सब है ना कहाँ बहू अकेली है तुम मत डरो बहू गुरु जी बहुत अच्छे है और तुम्हारा बहुत मान करते है
पापाजी- हाँ यह बात तो है और तुम बिल्कुल चिंता मत करना और सभी लोग आएँगे घर पूरा भरा रहेगा
कामया- जी इसी तरह के कुछ टिप्स और ट्रिक्स की बातें करते हुए चाय खतम हुई और सभी अपने कमरे में पहुँचे थे कामेश कब आएगा यह उसे पता नहीं था पर आज आएँगे खेर कामया नहा धो कर तैयार थी
और तभी कामेश की आवाज आई थी उसे अरे वो आ गये है चलो थोड़ा सा टाइम कटेगा पर कामेश के आते ही वो इतना जल्दी में था की समान रखते ही जल्दी-जल्दी तैयार होने लगा था और दुनियां भर की बातें भी करता जा रहा था
कामया भी उसकी बातों में हाँ या ना में बातें करती रही और उसके जल्दी-जल्दी काम की और एकटक देखती रही उसे गुस्सा तो बहुत आया था कि इतने दिनों बाद आने पर ही कुछ आपस की बातें ना करते हुए इधार उधर की बातों में टाइम जाया कर रहे है किस तो कर सकते थे पर नहीं इतना भी क्या काम था कि पत्नी को उसका हक ही ना मिले
कामया भी कुछ ना कहती हुई उसके पीछे-पीछे नीचे उतर आई थी खाना खाने के बाद पापाजी और कामेश बाहर की ओर निकले थे घर में बहुत से लोगों को फिर से काम करते हुए उसने देखा था कौन थे पता नहीं पर थे सभी के चेहरे पर एक आदर का भाव था और सत्कार का भाव साफ-साफ देखा जा सकता था खेर कामया को क्या उसे तो मम्मीजी के साथ ही रहना था बाहर आते ही उसकी नजर भोला पर पड़ी थी पोर्च में तीन गाडिया लाइन से खड़ी थी एक में लाखा था और दूसरे में भोला और तीसरी खाली थी वो गाड़ी कामेश की थी
पर जैसे ही वो लोग बाहर निकले कामेश ने भोला की ओर देखते हुए
कामेश- भोला मेरी गाड़ी अंदर रख दे और मेरे साथ चल आज मेमसाहब की छुट्टी है
भोला के चहरे में एक भाव आया था जो कि वहां खड़े किसी ने नोटीस नहीं किया था पर कामया से वो छुप ना सका था वो जल्दी से दौड़ कर कामेश की गाड़ी को गेराज में खड़ा करते हुए जल्दी से मर्क की और बड़ा था पर जाते जाते एक नजर से अपने सप्निली चीज को देखना नहीं भुला था और सिर झुका कर मम्मीजी को भी नमस्कार किया था
कामया की आखें एक बार तो उससे टकराई थी पर कुछ नहीं कह या कर पाई थी वो उसके सामने से गाड़ी धीरे धीरे आगे की ओर सरक्ति हुई बाहर की ओर चली गई थी तभी उसकी नजर लाखा पर पर थी वो पापाजी की गाड़ी को आगे लेते हुए बाहर की ओर चला गया था उसके चहरे पर भी एक अजीब सा भाव उसने नोटीस किया था कामया का पूरा शरीर एक बार तो सनसना उठा था और वो सिहर उठी थी हर एक पाल जो कि उसने भोला के साथ गुजरे थे उसे याद आते रहे फिर लाखा के साथ के पल भी वो वापस तो मम्मीजी के साथ अंदर आ गई थी पर दिल का हर कोना उसे लाखा भोला और भीमा के साथ गुजरे पल की याद दिला रहा था कामेश की बेरूखी ने यह सब किया था
वो क्या करती पर अभी तो यह सब सोचना नहीं चाहिए पर वो क्या करे उसका बस नहीं था अपनी सोच पर जितना झटकती थी और ना सोचने की कोशिश करती थी उतना ही वो उस सोच में डूबती जा रही थी हर अंग एक बार फिर से जाग रहा था और अपने आप ही एक सरसराहट और उत्तेजना की लहर उसके तन को घेर रही थी वो नहीं जानती थी कि आगे क्या पर एक उमंग सी जाग गई थी उसके तन में यह उमंग उसने कभी महसूस किया था कि नहीं मालूम नहीं हाँ… याद आया शादी के बाद बाद में महसूस किया था जब वो सुहाग रात के बाद अपने पति को देखती थी तब एक अजीब सी खुशी और एक अजीब सी सरसराहट उसके तन को घेरती जा रही थी वो मम्मीजी के साथ साथ हर काम को देख रही थी
पर दिल का एक कोना उसके अंदर एक उथल पुथल मचा रहा आता उसका शरीर का हर कोना जगा हुआ था और कुछ माँग रहा था कामेश नहीं भीमा नहीं लाखा नहीं शायद भोला नहीं अभी नहीं अभी तो कुछ नहीं हो सकता कामेश अगर घर में होता तो शायद कुछ होता पर वो तो खेर कोई बात नहीं किसी तरह से अपने आपको समझा कर कामया मम्मीजी के साथ लगी रही काम तो क्या बस मम्मीजी के साथ भर घूमती रही थी घर के हर कोने तक और जैसा मम्मीजी कह रही थी घर के नौकरो को वो सब होते हुए देखती रही
खेर कोई ऐसी घटना नहीं हुई जो लिख सकूँ पर हाँ… एक बात साफ थी की कामया के अंदर का शैतान का कहिए कामया का शरीर जाग उठा था अपने आपको संभालती हुई वो किसी तरह से सिर्फ़ कामेश का इंतजार करती रही
रात को बहुत देर से कामेश आया घर का हर कोना साफ था और सजा हुआ था गुरु जी के आने का संकेत दे रहा था पापाजी और कामेश के आने के बाद तो जैसे फिर से एक बार घर में जान आगई थीपूरा घर भरा-भरा सा लगने लगा था नौकर चाकर दौड़ दौड़ कर अब तक काम कर रहे थे भीमा को असिस्ट करने के लिए भी कुछ लोग आ गये थे किचेन से लेकर घर का हर कोना नौकरो से भरा हुआ था पर कामया का हर कोना खाली था और उसे जो चाहिए था वो उसे नहीं मिला था अब तक उसे वो चाहिए ही था कामेश के आते ही वो फिर से भड़क गया था एक तो पूरा दिन घर में फिर इस तरह के ख्याल उसके दिमाग में घर कर गये थे की वो पूरा दिन जलती रही थी
पर कमरे में पहुँचते ही कामेश का नजरिया ही दूसरा था वो जल्दी-जल्दी सोने के मूड में था बातें करता हुआ जैसे तैसे बेड में घुस गया और गुड नाइट कहता हुआ बहुत ही जल्दी सो गया था कामया कुछ कह पाती या कुछ आगे बढ़ती वो सो चुका था कमरे में एक सन्नाटा था और वो सन्नाटा कामया को काटने दौड़ रहा था किसी तरह चेंज करते हुए वो भी सोने को बेड में घुसी थी की कामेश उसके पास सरक आया था एक उत्साह और ललक जाग गई थी कामया में मन में और शरीर में पर वो तो उसे पकड़कर खर्राटे भरने लगा था एक हथेली उसके चूचों पर थी और दूसरा कहाँ था कामया को नहीं पता शायद उस तरफ होगा पर कामेश के हाथों की गर्मी को वो महसूस कर रह थी एक ज्वाला जिसे उसने छुपा रखा था फिर से जागने लगी थी
पर कामेश की ओर से कोई हरकत ना देखकर वो चुपचाप लेटी रही अपनी कमर को उसके लिंग के पास तक पहुँचा कर उसे उकसाने की कोशिश भी की पर सब बेकार कोई फरक नहीं दिखा था कामया को रात भर वो कोशिश करती रही पर नतीजा सिफर सुबह उठ-ते ही कामेश जल्दी में दिखा था कही जाना था उसे कामया को भी जल्दी से उठा दिया था उसने और बहुत सी बातें बताकर जल्दी से नीचे की ओर भगा था नीचे जब तक कामया पहुँची थी तब तक तो कामेश नाश्ते के टेबल पर अकेला ही नाश्ता कर रहा था पापाजी और मम्मीजी चाय पीते हुए उससे कुछ बातें कर रहे थे
जो बातें उसे सुनाई दी थी
मम्मीजी- अरे तो बहू को आज क्यों भेज रहा है उसे रहने दे घर में
कामेश- मम्मी आ जाएगी वो दोपहर तक फिर कर लेना जो चाहे
कामेश--सोनू तुम थोड़ा सा कॉंप्लेक्स हो आना कुछ वाउचर रखे है साइन कर देना और कुछ कैश भी निकाल कर अकाउंट्स में रख देना कल से नहीं जा पाओगी
कामया- जी
कामेश- और हाँ… उसे ऋषि को बोल देना कि रोज जाए कॉंप्लेक्स कुछ सीखा कि नहीं
कामया- जी
मम्मीजी - हाँ ऋषि भी तो है वो क्या करता है
कामेश- फिल्म देखता है वो भी सलमान खान की हाँ… हाँ… हाँ…
पापाजी और मम्मीजी के चहरे पर भी मुश्कान दौड़ गई थी कामेश का खाना हो गया था और वो जल्दी में बाहर निकला था कामया भी उसके साथ बाहर तक आई थी तीनों गाडिया लाइन से खड़ी थी कामेश की गाड़ी नहीं थी और पापाजी की
कामेश---अरे भोला मेरी गाड़ी नहीं निकाली
भोला की नजर एक बार कामेश और कामया पर पड़ी थी कुछ सोचता उससे पहले ही
कामेश---तू सुन तू मेमसाहब को लेकर कॉंप्लेक्स जाना और जल्दी आ जाना मेरी गाड़ी निकाल दे और सुन दोपहर को शोरुम आ जाना
भोला- नज़रें झुकाए जल्दी से गेराज में गया और कामेश की गाड़ी निकाल कर उसे सॉफ करने लगा था लाखा भी दौड़ा था पर कामेश की जल्दी के आगे वो सब रुक गये थे कामेश जल्दी से गाड़ी में बैठकर बाहर की ओर चला गया रह गये थे तो सिर्फ़ लाखा भोला और कमाया एक नजर लाखा और फिर भोला पर पड़ते ही कामया अंतर मन फिर से जाग उठा था भोला की नजर में कुछ था जो उसे हमेशा से ही बिचलित करता था वो एक गहरी सांस लेकर पलटी थी और अंदर आ गई थी अपने बेडरूम में पहुँचकर देखा था कि एक मिस कॉल था
किसका है देखा तो ऋषि का था उसने ऋषि को डायल किया
ऋषि- हेलो भाभी कैसी हो अरे यार तुम कल गई नहीं में बोर हो गया था आज जाओगी ना
कामया- हो दोपहर तक हूँ लेने आती हूँ तैयार रहना आज कुछ जल्दी है ठीक है
ऋषि- जी भाभी
और फोन रखने के बाद कामया नहाने को चली नहाते वक़्त भी उसे कामेश का ध्यान आया था कैसे उसने कल रात पूरी गँवा दी कुछ नहीं किया और आज सुबह भी जल्दी चला गया था पर एक शान्ती थी आज वो फिर बाहर जा सकती है कल तो पूरा दिन ही खराब हो गया था
भोला की नजर जब उसपर पड़ी थी तो कयामत सी आ गई थी उसके शरीर में एक अजीब सी जुनझुनी और सिहरन ने उसके शरीर में निकालते समय सूट को छोड़ कर बार-बार साड़ी की ओर ही उसकी नजर जाती थी साड़ी क्यों पहनु कॉंप्लेक्स जाते समय तो हमेशा ही सूट पहनती है पर साड़ी क्यों नहीं साड़ी ही पहनती हूँ आज भोला को भी अच्छी लगती है छि भोला के लिए पहनु अब में तो क्या हुआ उसे चिडाने में मजा आएगा चलो वही काली वाली पहनु नहीं नहीं वो वाली नहीं क्या सोचेगा एक ही साड़ी है फिर यह पीली वाली पहन लेती हूँ हाँ… यह ठीक है प्लेन है और ज्यादा भड़काऊ नहीं है ब्लाउस तो स्लेवेलीस ही है ठीक है ना क्या हुआ
बहुत सी बातें करती हुई जाने कब कामया ने अपने मन को साड़ी पहनाने को मना लिया था और येल्लो कलर की साड़ी निकाल कर बेड में रख दी थी उसके साथ वाइट कलर का अंदर गारमेंट्स पहनने को थी पर क्या सोचकर मुस्कुराती हुई उसने ब्लैक कलर का ब्रा और पैंटी निकाल ली थी येल्लो में अंदर का पहन लेती हूँ इसके ऊपर
हां यह ठीक रहेगा चलो उस जानवर को एक बार फिर भड़का कर देखते है क्या करेगा अभी तो घर में है और फिर कॉंप्लेक्स ही तो जाना है वहाँ भी क्या कर लेगा यही सब सोचते हुए कामया एक के बाद एक करके अपने आपको संवारती हुई मिरर के सामने खड़ी अपने आपको निहारती जा रही थी और अपने शरीर के हर हिस्से को टटोल टटोल कर देखती हुई ब्रा से लेकर पैंटी फिर पेटीकोट और ब्लाउस पहनती हुई इठलाती हुई अपने आपको देखती हुई एक जहरीली सी
मुश्कान बिखेरती हुई साड़ी उठाकर पहेन्ने लगी थी बहुत ही कसकर बाँधी थी उसने हर एक हिस्सा साड़ी के अंदर होते हुए भी खिल कर बाहर की और आ रहा था हर गोलाई और उभार को दिखाता हुआ उस साड़ी ने सब कुछ खोलकर रख दिया था लग रहा था की टाफी को पकिंग के साथ ही खा जाए नीचे की जाने से पहले उसने अपने ऊपर वो सम्मर कोट डाल भर लिया था जो की सिर्फ़ कंधे पर टिका हुआ था उसने हाथों में नहीं पहना था डालकर अपने आपको थोड़ा सा छुपा लिया था और कुछ नहीं
नीचे को आते हुए उसने मम्मीजी को किचेन के बाहर एक चेयर पर बैठे देखा था जो की अंदर काम कर रहे लोगों को कुछ इनस्टरक्ट कर रही थी उसे जाते हुए एक बार देखा था
कामया- मम्मीजी में आती हूँ
मम्मीजी- हाँ बहू जल्दी आ जाना ज्यादा देर मत करना
कामया- जी
और कामया बाहर की ओर चल दी थी पोर्च की ओर बढ़ते हुए उसके कदम में गजब का विस्वास था और एक लचीलापन भी था बड़े ही मादक ढंग से चलती हुई वो मैंन डोर तक जब पहुँची थी तो भोला को वही सीढ़ियो में ही बैठा देखा था उसके हाइ हील की आवाज से वो पलटा था और दौड़ कर मर्क का डोर खोलकर खड़ा हो गया था उसकी नजर ऊपर एक बार जरूर उठी थी पर घर का मामला था इसलिए नीचे ही रही पर कामया की सुगंध से नहाया हुआ भोला एक बार फिर से पारी लोक की सैर करने को तैयार था क्या खसबू है मेमसाहब की हमम्म्ममम
और भोला को वापास करते ही एक महक जो कि कामया के अंदर तक उतरती चली गई थी वो थी गुटके की और पसीने की एक मर्दाना स्मेल था वो वो इस स्मेल को पहले भी सुंग चुकी थी सुंग चुकी थी टेस्ट भी किया था हाँ… यह वही स्मेल आई कामया अपनी सीट पर बैठी ही थी कि भोला ने एक नजर अंदर बैठी मेमसाहब पर डाली और डोर बंद करते हुए जल्दी से दौड़ कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया था
गाड़ी धीरे से पोर्च से बाहर और फिर गेट से बाहर होती चली गई थी और फिर सड़क पर धीरे-धीरे दौड़ने लगी थी कामया बिल कुल शांत सी पीछे बैठी हुई बाहर की ओर देख रही थी कि उसे भोला की आवाज सुनाई दी
भोला- उसे भी लेना है मेमसाहब
कामया- हाँ…
वो अच्छे समझ रही थी कि भोला ऋषि के बारे में ही कह रहा है उसकी नजर एक बार उसकी और उठी थी पर फिर से बाहर की ओर चली गई थी क्योंकी भोला उसे बक मिरर में एकटक देख रहा था
भोला- आपके लिए फूल नहीं ला पाया
कामया- जानवर कही का फूल क्यों नौकर है तू मेरा
भोला- साड़ी में बहुत सुंदर लगती है आप
कामया-
साला जानवर, गुंडा एक झटके में बाहर निकाल दूँगी नौकरी से पता नहीं इतनी हिम्मत इसकी की जो मन में आए का रहा है
भोला- पर यह कोट मत पहनिए अच्छा नहीं लग रहा
कामया- गाड़ी चलाओ और फालतू बातें मार करो
एक गरजती हुई आवाज निकली थी उसके अंदर से समझता क्या है अपने आपको यह एक बार उसके साथ क्या कर लिया अपना हक़्क़ समझ लिया है जो मन में आया कह रहा है
इतने में ऋषि का घर आ गया था ऋषि पोर्च में ही खड़ा हुआ इंतजार कर रहा था गाड़ी को देखकर ही वो खिल उठा था जल्दी से गाड़ी की ओर बढ़ा था पर गाड़ी के रुकते ही भोला जल्दी से बाहर की ओर निकला और सामने का डोर खोलकर खड़ा हो गया था ऋषि ने एक बार भोला को देखा था और फिर कुछ ना कहते हुए सामने ही बैठ गया था कामया को भी कुछ समझ नहीं आया की भोला ने ऐसा क्योंकिया पर हाँ… वो कुछ कहती इससे पहले ही ऋषि सामने की ओर बढ़ गया था वो जो डोर खोलकर ऋषि के लिए जगह बनाया था वो खाली रह गया
पर एक बात जो कामया ने नोटीस नहीं की थी वो था उसका कोट जो कि सिर्फ़ उसके कंधो पर टिका हुआ था अब थोड़ा सा ढल गया था उसके कंधो पर से पीछे की ओर चला गया था एक गजब का नजारा था स्लीवलेशस ब्लाउसमें उसके दोनों चुचे खुलकर सामने की ओर देख रहे थे साड़ी का पल्ला कही भी था पर वहां नहीं था जहां होना चाहिए गोरा सा सपाट पेट येल्लो कलर की साड़ी से जो नजारा पेश कर रहा था जिसे देखकर कोई भी पागल हो सकता था और यह तो भोला था उस हुश्न का पुजारी एक पूरी रात उसने इस परी के साथ गुजारी थी पूरी रात
ऋषि के बैठ ते ही भोला भी जल्दी से ड्राइविंग सीट की ओर लपका था
ऋषि-हाई भाभी हाई कितनी सुंदर लग रही हो आज साड़ी पहनी है सच में भाभी आप साड़ी में बहुत बहुत अच्छी लगती हो
इतने में भोला अपनी सीट पर बैठ गया था उसकी नजर एक बार तो ऋषि की ओर पड़ी और फिर पीछे की ओर मेमसाहब पर और जो नजारा उसके सामने था वो वाकाई लाजबाब था एक मुश्कान उसके होंठों पर दौड़ गई थी वाह क्या नजारा है मेमसाहब और फिर ऋषि की ओर मुड़कर
भोला- बड़े हैंडसम लग रहो भैया हाँ…
ऋषि-
भोला-क्या बात है बात नहीं करेंगा हमसे नाराज है क्या
ऋषि- नहीं
बड़े ही रूखे पन से जबाब दिया था उसने पर भोला को कोई फरक नहीं पड़ा था
भोला- मर्क चलाई है कभी आपने भैया
ऋषि और कामया की नजर एक साथ ही भोला की ओर उठी थी क्या कह रहा है यह भोला की नजर अब भी सामने की ओर ही थी पर नजर पीछे बैठी मेमसाहब पर भी थी
कुछ कहते की भोला फिर कह उठा
भोला- भैया चलाकर देखो कैसी चलती है
ऋषि- क्यों आप क्या करेंगे
भोला- अरे कुछ नहीं भैया बस हम तो सिर्फ़ पूछ रहे थे अगर चलाना हो तो बोलो आज के बाद मौका नहीं मिलेगा
उसकी बातों में कुछ अर्थ था यह तो साफ था पर क्या यह ना तो ऋषि ही समझ पाया और नहीं कामया थोड़ा आगे बढ़ कर भोला ने गाड़ी एक पेड़ के नीचे रोक लिया और ऋषि की ओर देखने लगा
कामया- गाड़ी क्यों रोकी
भोला ने कोई जबाब नहीं दिया था बल्कि ऋषि की ओर देखते हुए
भोला- आइए भैया मर्क भी चलाकर देख लो आज में थोड़ा सा पीछे बैठा हूँ
और झट से डोर खोलकर पीछे की सीट की ओर बड़ा था ऋषि का चहरा सफेद हो गया था पर कुछ कहता इससे पहले ही भोला पीछे की सीट पर बैठा हुआ था कामया पास बिल्कुल बिना किसी ओपचारिकता के और नहीं किसी डर के
ऋषि और कामया कुछ समझते
भोला- अरे भैया चलो कोई देखेगा तो क्या सोचेगा
ऋषि झट से ड्राइविंग सीट पर बैठ गया था और एक ही झटके में गाड़ी आगे की ओर बढ़ गई थी उसकी नजर पीछे की सीट पर थी भाभी बड़ी ही डरी हुई लग रही थी और वो गुंडा उसे तो कोई फरक ही नहीं पड़ रहा था कैसे पीछे सीट पर सिर टिकाए बैठा हुआ था चहरे पर कोई शिकन नहीं थी जानवर कही का लेकिन पीछे क्यों बैठा है वो
और उधर कामया की हालत खराब थी पीछे जैसे भोला बैठा था वो कुछ बोल भी नहीं पाई थी जैसे उसकी आवाज उसके गले में ही अटक गई थी और उसने अपने कोट की ओर ध्यान क्यों नहीं दिया वो कब धलक गया था उसे पता ही नहीं चला था यह तो जैसे भोला को न्योता देने वाली बात हो गई थी पर उसने कभी नहीं सोचा था कि भोला गाड़ी में ही अटेक कर लेगा उसने तो कभी जिंदगी में इस बात का ध्यान नहीं किया था
लेकिन अब क्या भोला तो उसके पास बैठा हुआ एकटक उसकी ओर ही देख रहा था और वो बिना कुछ कहे बिल्कुल सिमटी हुई सी बैठी हुई थी जैसे मालिक वो नहीं भोला हो गया था पर भोला के शरीर से उठ रही वो स्मेल अब धीरे धीरे उसके नथुनो को भेद कर उसके अंतर मन में उतरती जा रही थी उसने अपनी सांसें रोके और आखें बाहर की ओर करके चुपचाप बैठी हुई अगले पल का इंतजार कर रही थी जैसे उसके हाथों से सबकुछ निकल गया है
इतने में भोला की हल्की सी आवाज उसे सुनाई दी
भोला- भैया आराम से चलिए और थोड़ा सा घूमकर चलिए आपका मन भी भर जाएगा और थोड़ा घूम भी लेंगे
कामया की नजर एक बार भोला की ओर उठी थी पर उस नजर में एक जादू सा था बड़ी ही खतरनाक सी दिखती थी उसकी आखें भूखी और सख़्त सी थी और एक जानवर सा दिख रहा था वो सांसें भी उसकी फूल रही थी पर कर कुछ नहीं रहा था
कामया का शरीर अब धीरे-धीरे उसका साथ छोड़ रहा था पर वो बड़े ही , तरीके से बैठी हुई भोला को नजर अंदाज करने की कोशिश कर रही थी पर हल्के से एक उंगली ने उसके हाथ के उल्टे साइड को टच किया था चौंक कर उसने अपने हाथ को खींच लिया था वो एक नजर भोला की ओर ना देखती हुई सीट की ओर देखा था वहाँ उसकी हथेलिया थी मोटी-मोटी उंगलियां और गंदा सा हाथ था उसका मेल और काला पन लिए हुए वो फिर बाहर की ओर देखने लगी थी गाड़ी धीरे-धीरे चला रहा था ऋषि एसी के चलते हुए भी एक गरम सा महाल था अंदर
कामया की नजर बाहर जरूर थी पर ध्यान पूरा अंदर था और भोला जो उसके पास बैठा था क्या करेगा आगे सोच रही थी तभी उसकी कमर के साइड में उसे भोला के हाथ का स्पर्श महसूस हुआ था वो सिहर उठी थी और अपने आपको हटाना चाहती थी उसके छूने से पर कहाँ वो बस थोड़ा सा हिल कर ही शांत हो जाना पड़ा था उसे क्योंकी भोला की उंगलियां उसके पेटीकोट के नाडे पर कस्स गई थी थोड़ी सी जगह पर से उसने अपनी उंगली को अंदर डालकर उसे फँसा लिया था वो कुछ ना कर सकी बल्कि सामने की ओर एक बार ऋषि की ओर देखा और फिर भोला की ओर
पर भोला की पत्थर जैसी आखों में वो ज्यादा देर देख ना सकी सीट पर सिर टिकाए हुए वो कामया की ओर एक कामुक नजर से देख रहा था वही नजर थी वो जो उसने पहली बार और जाने कितनी बार देखा था उस नजर के आगे वो कुछ नहीं कर सकती थी चाहे वो कही भी हो वो क्या कर सकती है अब यह जानवर तो उससे गाड़ी में ही सबकुछ कर लेना चाहता है और ऋषि भी कुछ नहीं कह रहा है वो तो एक अबला सी नारी है वो कैसे इस जानवर से लड़ सकती है कैसे इस वहशी को बाँध सकती है पर उसकी हालत भी खराब थी उसके टच ने ही उसे इतना उत्तेजित कर दिया था कि वो अपने गीले पन को रोक नहीं पा रही थी ना चाहते हुए भी वो अपनी जाँघो को खींचकर आपस में जोड़ रखा था पर भोला को मना नहीं कर पाई थी और नहीं शायद वो मना करना चाहती थी उसे भी वो सब चाहिए था और वो अभी तो सिर्फ़ भोला ही दे सकता था और उसने भी अभी उसने हाथों को बढ़ाकर एक आखिरी ट्राइ करने की कोशिश की और उसके उंगलियों को अपने पेटीकोट के नाडे पर से निकालने की कोशिश की पर यह तो उल्टा पड़ गया था भोला ने उसकी हाथों को कस्स कर पकड़ लिया था और उसे अपनी ओर खींच लिया था एक ही झटके में वो भोला के ऊपर गिर सी पड़ी थी ऋषि जो कि गाड़ी कम चला रहा था पीछे नजर ज्यादा थी थोड़ा सा गाड़ी धीरे कर दी थी उसने पर जैसे ही भोला की आवाज उस तक पहुँची थी वो फिर से गाड़ी चलाने लगा था
भोला- अरे यार इतना भी धीरे मत चलो थोड़ा घुमाते हुए चलो ना भैया और आगे देखो
और भोला ने अपने मजबूत हाथों के सहारे कामया को उठाया था और दूसरे हाथों से उसकी कमर को पकड़कर अपने पास खींच लिया था बहुत ही पास लगभग अपनी गोद में और अपनी हाथों का कसाव को निरंतर बढ़ते हुए उसे और पास खींचते जा रहा था कामया जितना हो सके अपने आपको रोकती जा रही थी अपने कोहनी से वो भोला को अपने से दूर रखना चाहती थी पर भोला की ताकत उससे ज्यादा थी ऋषि भी कुछ नहीं कर रहा था
कामया- प्लीज नहीं
भोला कुछ ना कहते हुए उसे एक झटके से अपने ऊपर अपनी जाँघो पर सीने के बल लिटा लेता है कामया भी कुछ नहीं कर सकी उसकी जाँघो के सहारे लेट गई हाई भगवान उसने अपने लिंग को कब निकाला था अपने पैंट से आआह्ह अपने सीने पर उसके लिंग का गरम-गरम स्पर्श पाते ही कामया हर गई थी वो और भी उसके लिंग से लिपट जाना चाहती थी पर उसकी जरूरत नहीं थी भोला का लिंग इतना सख़्त था कि वो खुद ही उसके ब्लाउज के खुले हुए हिस्से को आराम से छू सकता था और वो कर भी यही रहा था भोला के हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे और उसके अंदर के हर तार को छेड़ते हुए उसके हर अंग में एक उत्तेजना की लहर भर रहा था वो अपने आपको उसके सुपुर्द करने को तैयार थी वो भूल गई थी कि वो गाड़ी में है और सामने ऋषि गाड़ी चला रहा है
वो अब अपने आप में नहीं थी एक सोते हुए शेर को भोला ने जगा दिया था और वो अब रुकना नहीं चाहती थी भोला उसकी पीठ के हर हिस्से को जो की खुला हुआ था अपने सख़्त हाथों से सहलाते हुए उसकी कमर तक जाता था और फिर उसके पीठ पर आ जाता था उसके हाथों का जोर इतना नहीं था कि वो उठ नहीं सकती थी पर वो उठी नहीं और भोला के लिंग का एहसास अपनी चुचियों के चारो ओर करती रही वो गरम-गरम और अजीब सा एहसास उसे और भी मदमस्त करता जा रहा था वो उठती क्या बल्कि उसकी हथेली धीरे-धीरे भोला के लिंग की ओर बढ़ने लगी थी एक भूख जो कि उसने दबाकर रखा था वो फिर जाग गया था और वो अब आगे ही बढ़ना चाहती थी उसका हाथ धीरे से भोला की जाँघो से होता हुआ उसके लिंग तक पहुँच चुका था और धीरे से अपनी गिरफ़्त में लेने को बेकरार था और उस गरम-गरम और सख़्त चीज को उसने अपने नरम और कोमल हाथों के सुपुर्द कर दिया
कामया चुपचाप अपने काम में लग गई थी धीरे उसके लिंग को अपनी गिरफ़्त में सख्ती से पकड़कर मसलने लगी थी और खुद ही अपने सीने पर घिसने लगी थी और अब भी वैसी ही उसके जाँघ पर लेटी हुई थी और भोला को पूरी आ जादी दे रखी थी जो चाहे करे और भोला भी कोई चूक नहीं कर रहा था अपने हाथों को पूरी आ जादी के साथ कामया के शरीर पर फेर रहा था उसके नितंबों तक अपने हाथों को ले जाता था अब तो वो और धीरे से दबा भी देता था उसके लिंग को पूरा समर्थन मेमसाहब की ओर से मिल रहा था सो वो तो जन्नत की सैर कर रहा था पर कामया की भूख थी जो सिर्फ़ इससे ही मिटने वाली नहीं थी वो खुद थोड़ा सा आगे हो जाती थी ताकि भोला का हाथ उसके नितंबों के आगे भी बढ़ सके भोला एक खेला खाया खिलाड़ी था
वो जानता था कि मेमसाहब को अब क्या चाहिए पर वो तो इस खेल को आराम से खेलता था और फिर बाद में जोर लगाता था पर अभी वो समय नहीं था उसे जल्दी करना था सो उसने अपने हाथों से मेमसाहब की साड़ी को
पीछे से ऊपर की ओर खींचना शुरू किया कामया ने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि अपने नितंबो को उठाकर उसे और भी आसान कर दिया था उसके हाथों पर आए हुए लिंग को वो बुरी तरह से निचोड़े जा रही थी और जब, कुछ आगे का नहीं सूझा तो उसे अपने होंठों के बीच में लेकर चूसने लगी थी भोला अंदर ही अंदर खुश हो रहा था और मेमसाहब की पैंटी को थोड़ा सा नीचे की ओर खिसका कर अपनी उंगली को उसके योनि तक पहुँचाने की कोशिश करने लगा था कामया ने थोड़ा और आगे बढ़ते हुए उसे आसान कर दिया था
और धीरे से वो उंगली उसकी योनि में समा गई थी ् गीली और तड़पती हुई वो जगह जहां भोला कई बार आचुका था फिर भी एक नया पन लिए हुए थी कामया के होंठों का स्पर्श इतना अग्रेसिव था कि भोला को लगा कि वो कही उसके मुख में ही ना झड जाए वो भी जल्दी में था सो उसने कामया को खींचकर बिठा लिया था और एक ही झटके में उसकी पैंटी को उसकी कमर से निकालने के लिए नीचे की ओर झुका था कामया बैठी हुई भोला को झुके हुए देख रही थी कि उसकी नजर सामने गाड़ी चला रहे ऋषि की ओर उठी थी ऋषि उसे ही बक मिरर में देख रहा था वो अपनी नजर झुकाती इससे पहले ही बंद हो गई थी
भोला उसकी जाँघो को किस करता हुआ उसकी चूचियां दबाने लगा था उसकी ब्लाउसको उसने कंधे से गिरा लिया था ब्लाउस इतना खुला हुआ था कि उसे हुक खोलने की जरूरत ही नहीं थी वो कमर के ऊपर पूरी तरह से नंगी थी और कमर के चारो ओर उसकी साड़ी और पेटीकोट लपेटी हुई थी जांघे खाली थी और उसपर भोला की किस और जीब का आक्रमण था
कामया की आखें बंद थी और सांसो की रफ़्तार लगातार बढ़ती जा रही थी कामया के शरीर का हर हिस्सा जीवित था और बस एक ही इच्छा थी कि भोला का लिंग उसे चीर दे और भोला के उठ-ते ही वो आसान दिखने लगा था पर भोला उठकर वापस बैठ गया था कामया का एक हाथ उसके कंधे पर था वो उसे किस करता हुआ एकटक मेमसाब की ओर देखता हुआ उसे सामने की ओर झुका कर उसे अपनी गोद में लेने की कोशिश करने लगा था कामया जानती थी कि वो क्या चाहता है उसने भी थोड़ा सा उठ कर उसे आसान बनाया था और वो खुद उसकी गोद में बैठ गई थी भोला का लिंग किसी बटर को छेदते हुए छुरी की तरह उसकी योनि में उतर गया था कामया के होंठों से एक मदमस्त सी आह निकली थी जो की ऋषि के बहुत ही पास उसके कानों तक गई थी कामया अपने दोनों हाथों को अगली सीट पर टिकाए हुए और दोनों सीट के बीच में बैठी हुई अपने आपको सहारा देने की कोशिश करती जा रही थी भोला के धक्के धीरे नहीं थे पर उसके होंठों से निकलने वाली हर सिसकी ऋषि को जरूर बैचेंन कर रही थी वो आगे बैठे हुए एक हथेली से धीरे से कामया के गालों को छुआ था
कामया ने आखें खोल कर उसे देखा था और फिर उन झटको का मजा लेने लगी थी भोला का हर झटका उसे सीट से ऊँचा उठा देता था और फिर वापस उसके लिंग के ऊपर वही बिठा देता था उसके होंठों से निकलने वाली हर सिसकी कार के अंदर के वातावरण को और भी गरमा रही थी पर कामया को इस बात की कोई चिंता नहीं थी वो आराम से अपनी काम अग्नि को शांत करने की कोशिश में लगी थी भोला जो की अब शायद ज्यादा रुक नहीं पाएगा उसकी पकड़ कामया की कमर के चारो ओर कस्ती जा रही थी और उसके होंठों ने उसकी पीठ पर कब्जा जमा लिया था उसके हाथों ने उसकी चुचियों को पीछे से पकड़कर दबाना शुरू कर दिया था और कामया जो कि अब तक दोनों सीट का सहारा लिए हुए थी धीरे से पीछे की ओर गिर पड़ी थी और पूरी तरह से भोला के सहारे थी वो अपने हाथों को इधर-उधर करती हुई सहारे की तलाश में थी कि भोला के सिर को किसी तरह से पकड़ पाई थी पर ज्यादा देर नहीं
कामया- रुकना नहीं और करो प्लीज
भोला- बस मेमसाब थोड़ी देर और मजा आ गया आज तो मेमसाब
कामया- करते रहो जोर-जोर से भोला एयाया आआआआआआआआअह्ह
और एकदम निढाल होकर उसके ऊपर गिर गई थी कामया
भोला- बस मेमसाहब थोड़ा सा और साथ देदो आगे हो जाओ
कामया ने उसकी बात मान ली थी और आगे की ओर होती हुई फिर से दोनों सीट को कस्स कर पकड़ लिया था और ऋषि के बहुत करीब पहुँच गई थी हर एक सांस उसकी ऋषि के कानों में या फिर उसके गालों पर पड़ रही थी ऋषि का एक हाथ फिर से कामया के गालों को सहलाता जा रहा था पर हर धक्के पर वो अपने हाथों पर से कामया के गालों को खो देता था पर फिर उसके हाथों पर उसके गाल आ जाते थे भोला भी अपने मुकाम पर जल्दी ही पहुँच गया था
भोला- हुआ मेमसाब वाह मजा आआआआआआआआआअ हमम्म्मममममममममममममममममममम
और मेमसाहब की पीठ पर झुक गया था वो कामया भी थक कर अगली सीट पर झुकी हुई थी पर वो थकान एक सुख दाईं थकान थी हर अंग पुलकित सा था और हर वक़्त एक नया एहसास को जगा रहा था कामया की योनि अब भी सिकुड कर भोला के लिंग को अपने अंदर तक समेट कर रखना चाहती थी भोला का आखिरी बूँद भी नीचूड़ गया था और
वो सांसों को कंट्रोल करते हुए वास्तविकता में लाट आया था और मेमसाब की कमर और जाँघो को एक बार अपने खुरदुरे और सख़्त हाथों से सहलाते हुए धीरे-धीरे अपने आपको शांत करने में लगा हुआ था कामया भी थोड़ा बहुत शांत हो गई थी और धीरे-धीरे सामानया होने लगी थी गाड़ी की रफ़्तार वैसे ही धीरे-धीरे थी एरपोर्ट रोड की ओर से लॉट रही थी गाड़ी भोला अपने आपसे ही धीरे से कामया को उठाकर अपने अलग किया था और
भोला- भैया रोको कही अब अपनी औकात में आ जाए हम
कामया कुछ कहती तब तक तो गाड़ी एक पेड़ के नीचे रुक गई थी गाड़ी के अंदर ही ऋषि अपनी जगह में चला गया था और भोला उतर कर वही पेड़ के नीचे ही पिशाब करने लगा था कामया और ऋषि ने अपना चहरा फेर लिया था कितना बेशर्म है यह कोई चिंता ही नहीं खेर भोला पिशाब करके वापस आया और गाड़ी अपने मुकाम की ओर दौड़ पड़ी थी
कामया ने भी अपने आपको संभाल लिया था और कपड़े ठीक करते हुए कोट पहनकर बाहर की ओर देखती हुई चुपचाप बैठी रही थी ऋषि भी शांत था कोई कुछ नही कह रहा था कॉंप्लेक्स के अंदर जाकर गाड़ी रुक गई थी और कामया के साथ ऋषि भी आफिस में घुस गया था वहां भी कोई बात नहीं जैसे दोनों एक दूसरे से कट रहे हो या आपस में बात करने का कोई बहाना ढूँढ़ रहे हो पर बोला कोई नहीं जल्दी जल्दी काम खतम करते हुए कामया अभी उठी थी और ऋषि भी भोला बाहर ही था गाड़ी एक बार फिर घर की ओर दौड़ गई थी घर में घमासान मचा हुआ था घर भरकर लोग थे मम्मीजी भी काम में लगी थी
खेर कोई ऐसी घटना नहीं हुई रात भी वैसी ही गुजर गई थी कामेश के थके होने की वजह
सुबह जल्दी कामेश को गुरुजी को लेने जाना था सो कामया ने भी उसे डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा था चुपचाप अपने आप समझा कर सुला लिया था पर रात भर भोला की यादें उसे परेशान करती रही थी उसकी हर हरकत जैसे उसके सामने ही हो रही हो और वो अब भी उसके तन से खेल रहा था अपने पति के पास सोते हुए भी कामया किसी और की बाहों में थी ऐसा उसे लग रहा था सुबह जब कामेश तैयार होकर जा रहा था तब उसे उठाया था
नींद से जागी कामया सिर्फ़ इतना ही कह पाई थी जल्दी आ जाना
कामेश- हाँ… और तुम जल्दी से तैयार हो जाओ गुरु जी 9 00 बजे तक आ जाएँगे
कामया- जी
और कामया जल्दी-जल्दी नहा धो कर नीचे चली गई थी पापाजी मम्मीजी काम में लगे थे सभी के पास कुछ ना कुछ काम था नहीं था तो सिर्फ़ कामया के पास वो चुपचाप मम्मीजी के साथ घूमती रही और सबको काम करते देखती रही करीब 9 00 बजे के आस-पास घर के बाहर शंख और ढोल की आवाज से यह पता चल गया था कि गुरु जी आ गये है ् और सभी पापाजी मम्मीजी और बहुत से मेहमान जल्दी से दरवाजे की ओर दौड़े
करीब 9 00 बजे के आस-पास घर के बाहर शंख और ढोल की आवाज से यह पता चल गया था कि गुरु जी आ गये है और सभी पापाजी मम्मीजी और बहुत से मेहमान जल्दी से दरवाजे की ओर दौड़े
कामया भी मम्मीजी के साथ थी एक हाथ में फूल भरी थाली थी और मम्मीजी के पास आरती करने वाली थाली थी और मिसेज़ धरमपाल भी थी उसकी शायद कोई लड़की भी और ना जाने कौन कौन था
घर के दरवाजे पर जैसे ही गाड़ी रुकी थी पहले कामेश निकला था और फिर कुछ बहुत ही सुंदर दिखने वाले एक दो लोग और फिर पीछे का दरवाजा खोलकर गुरु जी बाहर आए थे वहाँ क्या गुरूर था उनके चहरे पर बिल्कुल चमक रहा था उनका चेहरा सफेद सिल्क का धोती और कुर्ता था रेड कार्पेट स्वागत था उनका फूलो से और खुशबू से पटा पड़ा था उनका घर कामया खड़ी-खड़ी गुरु जी को सिर्फ़ देख रही थी कुछ करने को नहीं था उसके पास मम्मीजी और मिसेज़ धरमपाल ही पूरा स्वागत का काम कर रही थी कामेश आके कामया के पास खड़ा हो गया था
कामेश- देखा
कामया-
कामेश- गुरु जी रबाब क्या दिखते है ना बहुत रस था यार सड़क पर बाहर भी लोग खड़े है पोलीस भी लगी है बड़ी मुश्किल से पहुँचा हूँ
कामया-
क्या बोलती वो चुपचाप खड़ी हुई गुरु जी के रुतबे को देख रही थी कैसे लोग झुक झुक कर उनका आशीष लेने को बेताब है और कैसे वो मुस्कुरा कर हर किसी के अभिनंदन का जबाब दे रहे थे कामया को यह देखकर बड़ा अलग सा ख्याल उसके दिमाग में घर करने लगा था इतना सम्मान और रुतबा तो सिर्फ़ मिनिस्टर्स का ही होता है और किसी का नहीं पर गुरुजी का तो जबाब ही नहीं वो और कामेश सभी के साथ चलते हुए अंदर आ गये थे अंदर आते ही भीड़ थोड़ी कम हुई और सांसें लेने की जगह बनी
मंदिर के सामने एक दीवान पर उनका आसान बनाया गया था गुरु जी पहले मंदिर में प्रणाम करते हुए उस आसान में बैठ गये थे पापाजी मम्मीजी और सभी उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगे थे एक-एक कर सभी कामेश के साथ जब कामया उनके सामने आई तो
मम्मीजी- यह कामेश है और यह हमारी बहू कामया
गुरुजी की एक नजर कामया पर पड़ी कामया का पूरा शरीर एक बार ठंडा सा पड़ गया था कितनी गहरी नजर है उनकी तब तक कामेश उनके पैर छूकर उठ चुका था और जैसे ही कामया उनके पैरों पर झुकी गुरु जी ने अपने पैर खींच लिए थे
सभी आचंभित थे और एकदम सन्नाटा छा गया था घर में
गुरु जी- नहीं आप नहीं आप तो इस घर की लक्ष्मी है और इस घर की लक्ष्मी को किसी बाहरवाले के पैरों पर झुकना नहीं है
पापाजी- पर गुरु जी आपका आशीर्वाद तो चाहिए ना हमारी बहू को
कामया हाथ बाँधे और सिर झुकाए हुए खड़ी थी बड़ी ही असमंजस में थी क्या करे
गुरु जी- हमारे आशीर्वाद की कोई जरूरत ही नहीं है ईश्वर (कामेश के पिता का नाम) यह तो खुद लक्ष्मी है और सिर्फ़ राज करने के लिए है
पापाजी और पूरा घर शांत हो गया था कोई कुछ नहीं कह सका था सभी चुपचाप् कभी कामया की ओर तो कभी गुरु जी की ओर देख रहे थे कामया एक काटन साड़ी पहने हुए अपने आपको पूरा ढँक कर वही बीच में कामेश के साथ खड़ी थी नज़रें झुका कर
गुरु जी- विद्या (कामेश की मा) और ईश्वर हमारा यहां आना कोई ऐसे ही नहीं है बहुत बड़ा काम और दायत्व से भरा हुआ है हमारा आगमन थोड़ा सा समय के बाद बताऊँगा पहले बैठो
सभी बैठने लगे थे वही नीचे गद्दी में पर
गुरु जी- नहीं नहीं आप नहीं आप नीचे नहीं बैठेंगी और किसी के पैरों के पास तो बिल्कुल भी नहीं यहां हमारे पास एक कुर्सी रखिए और यहां हमारी बराबरी में बैठिए
उनका आदेश कामया के लिए था सभी फिर से चुप कुछ खुसुर फुसर भी हुई सभी कामया की ओर बड़े ही इज़्ज़त से देख रहे थे गुरु जी के पास और उनके बराबरी वाह बड़ी किश्मत वाली है कामया इतना मान तो आज तक गुरु जी ने किसी को नहीं दिया होगा जितना कामया को मिल रहा था
कामया अपने आप में ही सिकुड़ रही थी उसे अभी-अभी जो इज़्ज़त मिल रही थी वो एक अजीब सा एहसास उसके दिल और पूरे शरीर में उथल पुथल मचा दे रहा था अभी-अभी जो इज़्ज़त गुरु जी से मिल रही थी उसे देखकर वो कितना विचलित थी पर जब उसे थोड़ा सा इज़्ज़त मिली तो वो कितना सहम गई थी कामया के लिए वही डाइनिंग चेयर को खींचकर गुरु जी के आसान के पास रख दिया गया था थोड़ा सा दूर थी वो कामया को बैठ-ते हुए शरम आ रही थी क्योंकी सभी नीचे बैठे थे और वो और गुरु जी बस ऊपर थे पापाजी मम्मीजी, कामेश और सभी सभी की नजर एक बार ना एक बार कामया की ओर जरूर उठ-ती थी पर गुरु जी की आवाज से उनका ध्यान उनकी तरफ हो जाता था
बहुतो की समस्या और कुछ की निजी जिंदगी से जुड़े कुछ सवालों के बीच कब कितना टाइम निकल गया था कामया नहीं जान पाई थी सिमटी सी बैठी हुई कामया का ध्यान अचानक ही तब जागा जब कुछ लोग खड़े होने लगे थे और गुरु जी की आवाज उसके कानों में टकराई थी
गुरु जी- अब बाद में हम आश्रम में मिलेंगे अभी हमें बहुत काम है और ईश्वर से और उसके परिवार से कुछ बातें करनी है तो हमें आगया दीजिए
सभी उठकर धीरे-धीरे बाहर की ओर चल दिए कामया भी खड़ी हो गई थी जो बुजुर्ग थे अपना हाथ कामया के सिर पर रखते हुए बाहर चले गये थे रह गये थे धरम जी उनकी पत्नी और कामेश का परिवार हाल में सन्नाटा था
गुरु जी- बहुत थक गया हूँ थोड़ा भी आराम नहीं मिलता
पापाजी- हम पैर दबा दे गुरु जी
गुरु जी- अरे नहीं ईश्वर पैर दबाने से क्या होगा हम तो दाइत्व से थक गये है चलो तुम थोड़ी मदद कर देना
पापाजी- अरे गुरु जी में कहाँ
गुरु जी- कहो ईश्वर कैसा चल रहा है तुम्हारा काम
पापाजी- जी गुरु जी अच्छा चल रहा है
गुरु जी कुछ उन्नती हुई कि नहीं
पापाजी- हाँ… गुरु जी उन्नती तो हुई है
गुरु जी- हमने कहा था ना हमारी पसंद की बहू लाओगे तो उन्नती ही करोगे हाँ तुम्हारे घर में लक्ष्मी आई है
कामया एक बार फिर से गुरु जी की ओर तो कभी नीचे बैठे अपने परिवार की ओर देखने लगी थी
मम्मीजी- जी गुरु जी उन्नती तो बहुत हुई है और अब तो बहू भी काम सभालने लगी है
गुरु जी- अरे काम तो अब संभालना है तुम्हारी बहू को हम जो सोचकर आए है वो करना है बस तुम लोगों की सहमति बने तब
पापाजी और मम्मीजी- अरे गुरु जी आप कैसी बातें करते है सब कुछ आपका ही दिया हुआ है
गुरु जी- नहीं नहीं फिर भी
कामेश- जो आप कहेंगे गुरु जी हमें मंजूर है
गुरु जी---अरे यह बोलता भी है हाँ… बहुत बड़ा हो गया है पहले तो सिर्फ़ मुन्डी हिलाता था
कामेश झेप गया था और
मम्मीजी- आप तो हुकुम कीजिए गुरु जी
गुरु जी- धरम पाल कैसा है
धरम पल- जी गुरु जी ठीक हूँ सब आपका असिर्वाद है
गुरु जी- एक काम कर तू ईश्वर की दुकान और उसका काम संभाल ले और उसका हिस्सा उसके पास पहुँचा देना ठीक है
धरम पाल और कामेश और सभी एक बार चौंक गये थे यह क्या कह रहे है गुरु जी दुकान कॉंप्लेक्स और सभी कुछ धरम पाल जी के हाथों में फिर वो क्या करेंगे पर बोला कुछ नहीं
गुरु जी- ईश्वर और विद्या तुम लोग आराम करो है ना बहुत काम कर लिया क्या कहते हो
करीब 9 00 बजे के आस-पास घर के बाहर शंख और ढोल की आवाज से यह पता चल गया था कि गुरु जी आ गये है और सभी पापाजी मम्मीजी और बहुत से मेहमान जल्दी से दरवाजे की ओर दौड़े
कामया भी मम्मीजी के साथ थी एक हाथ में फूल भरी थाली थी और मम्मीजी के पास आरती करने वाली थाली थी और मिसेज़ धरमपाल भी थी उसकी शायद कोई लड़की भी और ना जाने कौन कौन था
घर के दरवाजे पर जैसे ही गाड़ी रुकी थी पहले कामेश निकला था और फिर कुछ बहुत ही सुंदर दिखने वाले एक दो लोग और फिर पीछे का दरवाजा खोलकर गुरु जी बाहर आए थे वहाँ क्या गुरूर था उनके चहरे पर बिल्कुल चमक रहा था उनका चेहरा सफेद सिल्क का धोती और कुर्ता था रेड कार्पेट स्वागत था उनका फूलो से और खुशबू से पटा पड़ा था उनका घर कामया खड़ी-खड़ी गुरु जी को सिर्फ़ देख रही थी कुछ करने को नहीं था उसके पास मम्मीजी और मिसेज़ धरमपाल ही पूरा स्वागत का काम कर रही थी कामेश आके कामया के पास खड़ा हो गया था
कामेश- देखा
कामया-
कामेश- गुरु जी रबाब क्या दिखते है ना बहुत रस था यार सड़क पर बाहर भी लोग खड़े है पोलीस भी लगी है बड़ी मुश्किल से पहुँचा हूँ
कामया-
क्या बोलती वो चुपचाप खड़ी हुई गुरु जी के रुतबे को देख रही थी कैसे लोग झुक झुक कर उनका आशीष लेने को बेताब है और कैसे वो मुस्कुरा कर हर किसी के अभिनंदन का जबाब दे रहे थे कामया को यह देखकर बड़ा अलग सा ख्याल उसके दिमाग में घर करने लगा था इतना सम्मान और रुतबा तो सिर्फ़ मिनिस्टर्स का ही होता है और किसी का नहीं पर गुरुजी का तो जबाब ही नहीं वो और कामेश सभी के साथ चलते हुए अंदर आ गये थे अंदर आते ही भीड़ थोड़ी कम हुई और सांसें लेने की जगह बनी
मंदिर के सामने एक दीवान पर उनका आसान बनाया गया था गुरु जी पहले मंदिर में प्रणाम करते हुए उस आसान में बैठ गये थे पापाजी मम्मीजी और सभी उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगे थे एक-एक कर सभी कामेश के साथ जब कामया उनके सामने आई तो
मम्मीजी- यह कामेश है और यह हमारी बहू कामया
गुरुजी की एक नजर कामया पर पड़ी कामया का पूरा शरीर एक बार ठंडा सा पड़ गया था कितनी गहरी नजर है उनकी तब तक कामेश उनके पैर छूकर उठ चुका था और जैसे ही कामया उनके पैरों पर झुकी गुरु जी ने अपने पैर खींच लिए थे
सभी आचंभित थे और एकदम सन्नाटा छा गया था घर में
गुरु जी- नहीं आप नहीं आप तो इस घर की लक्ष्मी है और इस घर की लक्ष्मी को किसी बाहरवाले के पैरों पर झुकना नहीं है
पापाजी- पर गुरु जी आपका आशीर्वाद तो चाहिए ना हमारी बहू को
कामया हाथ बाँधे और सिर झुकाए हुए खड़ी थी बड़ी ही असमंजस में थी क्या करे
गुरु जी- हमारे आशीर्वाद की कोई जरूरत ही नहीं है ईश्वर (कामेश के पिता का नाम) यह तो खुद लक्ष्मी है और सिर्फ़ राज करने के लिए है
पापाजी और पूरा घर शांत हो गया था कोई कुछ नहीं कह सका था सभी चुपचाप् कभी कामया की ओर तो कभी गुरु जी की ओर देख रहे थे कामया एक काटन साड़ी पहने हुए अपने आपको पूरा ढँक कर वही बीच में कामेश के साथ खड़ी थी नज़रें झुका कर
गुरु जी- विद्या (कामेश की मा) और ईश्वर हमारा यहां आना कोई ऐसे ही नहीं है बहुत बड़ा काम और दायत्व से भरा हुआ है हमारा आगमन थोड़ा सा समय के बाद बताऊँगा पहले बैठो
सभी बैठने लगे थे वही नीचे गद्दी में पर
गुरु जी- नहीं नहीं आप नहीं आप नीचे नहीं बैठेंगी और किसी के पैरों के पास तो बिल्कुल भी नहीं यहां हमारे पास एक कुर्सी रखिए और यहां हमारी बराबरी में बैठिए
उनका आदेश कामया के लिए था सभी फिर से चुप कुछ खुसुर फुसर भी हुई सभी कामया की ओर बड़े ही इज़्ज़त से देख रहे थे गुरु जी के पास और उनके बराबरी वाह बड़ी किश्मत वाली है कामया इतना मान तो आज तक गुरु जी ने किसी को नहीं दिया होगा जितना कामया को मिल रहा था
कामया अपने आप में ही सिकुड़ रही थी उसे अभी-अभी जो इज़्ज़त मिल रही थी वो एक अजीब सा एहसास उसके दिल और पूरे शरीर में उथल पुथल मचा दे रहा था अभी-अभी जो इज़्ज़त गुरु जी से मिल रही थी उसे देखकर वो कितना विचलित थी पर जब उसे थोड़ा सा इज़्ज़त मिली तो वो कितना सहम गई थी कामया के लिए वही डाइनिंग चेयर को खींचकर गुरु जी के आसान के पास रख दिया गया था थोड़ा सा दूर थी वो कामया को बैठ-ते हुए शरम आ रही थी क्योंकी सभी नीचे बैठे थे और वो और गुरु जी बस ऊपर थे पापाजी मम्मीजी, कामेश और सभी सभी की नजर एक बार ना एक बार कामया की ओर जरूर उठ-ती थी पर गुरु जी की आवाज से उनका ध्यान उनकी तरफ हो जाता था
बहुतो की समस्या और कुछ की निजी जिंदगी से जुड़े कुछ सवालों के बीच कब कितना टाइम निकल गया था कामया नहीं जान पाई थी सिमटी सी बैठी हुई कामया का ध्यान अचानक ही तब जागा जब कुछ लोग खड़े होने लगे थे और गुरु जी की आवाज उसके कानों में टकराई थी
गुरु जी- अब बाद में हम आश्रम में मिलेंगे अभी हमें बहुत काम है और ईश्वर से और उसके परिवार से कुछ बातें करनी है तो हमें आगया दीजिए
सभी उठकर धीरे-धीरे बाहर की ओर चल दिए कामया भी खड़ी हो गई थी जो बुजुर्ग थे अपना हाथ कामया के सिर पर रखते हुए बाहर चले गये थे रह गये थे धरम जी उनकी पत्नी और कामेश का परिवार हाल में सन्नाटा था
गुरु जी- बहुत थक गया हूँ थोड़ा भी आराम नहीं मिलता
पापाजी- हम पैर दबा दे गुरु जी
गुरु जी- अरे नहीं ईश्वर पैर दबाने से क्या होगा हम तो दाइत्व से थक गये है चलो तुम थोड़ी मदद कर देना
पापाजी- अरे गुरु जी में कहाँ
गुरु जी- कहो ईश्वर कैसा चल रहा है तुम्हारा काम
पापाजी- जी गुरु जी अच्छा चल रहा है
गुरु जी कुछ उन्नती हुई कि नहीं
पापाजी- हाँ… गुरु जी उन्नती तो हुई है
गुरु जी- हमने कहा था ना हमारी पसंद की बहू लाओगे तो उन्नती ही करोगे हाँ तुम्हारे घर में लक्ष्मी आई है
कामया एक बार फिर से गुरु जी की ओर तो कभी नीचे बैठे अपने परिवार की ओर देखने लगी थी
मम्मीजी- जी गुरु जी उन्नती तो बहुत हुई है और अब तो बहू भी काम सभालने लगी है
गुरु जी- अरे काम तो अब संभालना है तुम्हारी बहू को हम जो सोचकर आए है वो करना है बस तुम लोगों की सहमति बने तब
पापाजी और मम्मीजी- अरे गुरु जी आप कैसी बातें करते है सब कुछ आपका ही दिया हुआ है
गुरु जी- नहीं नहीं फिर भी
कामेश- जो आप कहेंगे गुरु जी हमें मंजूर है
गुरु जी---अरे यह बोलता भी है हाँ… बहुत बड़ा हो गया है पहले तो सिर्फ़ मुन्डी हिलाता था
कामेश झेप गया था और
मम्मीजी- आप तो हुकुम कीजिए गुरु जी
गुरु जी- धरम पाल कैसा है
धरम पाल- जी गुरु जी ठीक हूँ सब आपका असिर्वाद है
गुरु जी- एक काम कर तू ईश्वर की दुकान और उसका काम संभाल ले और उसका हिस्सा उसके पास पहुँचा देना ठीक है
धरम पाल और कामेश और सभी एक बार चौंक गये थे यह क्या कह रहे है गुरु जी दुकान कॉंप्लेक्स और सभी कुछ धरम पाल जी के हाथों में फिर वो क्या करेंगे पर बोला कुछ नहीं
गुरु जी- ईश्वर और विद्या तुम लोग आराम करो है ना बहुत काम कर लिया क्या कहते हो
पापाजी और मम्मीजी दोनों अपने हाथ जोड़ कर बस यही कह पाए थे पर कामया की चिंता वैसे ही थी इतना बड़ा काम सिर्फ़ गुरु जी के कहने पर किसी को देकर अलग हो जाना कहा की बुद्धिमानी है
गुरु जी- एक काम करो ईश्वर तुम मेरे आश्रम का पूरा काम देखो पूरे भारत का उसका हिसाब किताब और डोनेशन सबका काम तुम ही सम्भालो अब में और नहीं कर सकता पवर आफ आट्रनी मैंने बना ली है आज से तुम ही मेरे सारे आश्रम और खेत खलिहान के मालिक हो जैसा चाहो करो क्यों करसकते हो ना इतना तो मेरे लिए
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया था पूरे भरत में कम से कम 1000 करोड़ की प्रॉपर्टी और बैंक बलेन्स है उनका विदेशो से आने वाला फंड और यहां का फंड मिलाकर हर महीने कुछ नहीं तो 1000 करोड़ बनते हैं वो सब पापाजी के नाम
वाह
गुरु जी- और विद्या तुम एक काम करो यह मंदिर थोड़ा छोटा है आश्रम के मंदिर में तुम पूजा किया करो ठीक है
मम्मीजी- जी ठीक है
गुरु जी फिर रहना भी वही कर लो तुम लोग क्यों कामेश
कामेश- जी
गुरु जी- एक काम करो तुम्हारा परिवार वही आश्रम में नीचे का हिस्सा ले लो एक तरफ का और वही रहो तुम्हारे नाम कर देता हूँ कामेश तू पापाजी की मदद करदेना तेरा दिमाग अच्छा है तू संभाल लेगा ठीक है क्यों कोई आपत्ति तो नहीं
सब क्या कहते यह सब तो उन्होंने तो कभी जीवन में नहीं सोचा था इतना बड़ा दायित्व और सबकुछ कुछ ही मिंटो में एकटक आँखे बिछाये वो सबके सब गुरु जी की ओर देखने लगे थे धरम पाल के चहरे पर खुशी टिक नहीं पा रही थी और पापाजी के और कामेश के और मम्मीजी के भी सभी बहुत खुश थे
कामया चेयर पर बैठी हुई बैचन हो रही थी पर गुरु जी की आवाज से उसका ध्यान फिर से एक बार उनकी तरफ चला गया था गुरु जी- हाँ तो ठीक है बहुत बड़ा दायित्व निभा लिया है मैंने मुझे पूरा विस्वास था कि ईस्वर तू मना नहीं करेगा हमेशा से ही तू और तेरे परिवार ने मेरी बात मानी है कल से तुम लोग या चाहो तो कुछ दिनों बाद से आश्रम में दाखिल हो जाना ठीक है
पापाजी- जी गुरु जी आपका ध्यनवाद हमें इसकाबिल समझा आपने
गुरु जी- अरे पगले मेरा धन्यवाद क्यों करता है तेरे घर की लक्ष्मी है ना उसे धन्यवाद कर एक काम उसके लिए भी है क्यों करोगी
कामया हड़बड़ा गई थी गुरु जी की आवाज से
कामया- (बस सिर हिला दिया था )
मम्मीजी- हाँ… हाँ… गुरु जी क्यों नहीं हम सब तैयार है आप हुकुम कीजिए
गुरु जी- नहीं नहीं हम तुम्हारी बहू को हुकुम नहीं दे सकते बस एक आग्रह कर सकते है और अगर वो मान जाए तो और तुम सबकी हामी भी जरूरी है
पूरा परिवार एक साथ तैयार था कोई हामी की जरूरत भी नहीं थी
पापाजी- आप तो कहिए गुरु जी बहू को क्या करना है
गुरु जी- देख ईश्वर हमने बहुत कुछ सोचकर तुम्हारे घर इस लड़की को लाए थे सोचा था हमारा उद्धार करेगी यही सोचकर हम यहां भारत में भी आए है अगले हफ्ते हम बाहर चले जाएँगे हमेशा के लिए बूढ़ा हो गया है हमारा शरीर शायद ज्यादा दिन नहीं है हम इसलिए हमारा कुछ भार तो तुम लोगों ने कम कर दिया है पर एक भार और है वो हम तेरी बहू को देना चाहते है
पापाजी- अरे गुरु जी ऐसा मत कहिए आप जो कहेंगे वो होगा
गुरु जी- तुम्हारा क्या कहना है
वो कामया की ओर देखकर कह रहे थे अभी तक उन्होंने उसे संबोधन नहीं किया था बस घर वालों की ओर इशारा करते हुए ही कुछ कहा था पर इस बार डाइरेक्ट था
कामया ने एक बार कामेश की ओर देखा था वो खुश था घर के सभी लोग खुश थे इतना बड़ा काम और इतना सारा पैसा और दौलत और ना जाने क्या-क्या
वो शायद कुछ कहना चाहती तो भी नहीं कह सकती थी
गुरु जी- सुनो थोड़ा समय चाहिए तो लेलो पर हमें जल्दी बता दो नहीं तो यह शरीर छोड़ नहीं पाएँगे हम
पापाजी- गुरु जी ऐसा नहीं कहिए प्लीज बहू को जो काम देंगे वो करेगी हम सब है ना
गुरु जी- ठीक है चलो हम बताते है हम बहू को आज से सखी कहेंगे संगिनी ठीक है आज से बहू हमारी उतराधिकारी है हमारे आश्रम की हमारी पूरी प्रॉपर्टी की और पूरे भरत में फेले हमारे साम्राज्या की जिसका कि ध्यान आप लोगों को रखना है
सभी लोग एकदम शांत हो गये थे कामया के पैरों के नीचे से जैसे जमीन हट गई थी अवाक सी कभी कामेश को और अपने परिवार को तो कभी गुरु जी को देख रही थी
कमरे में बैठे सभी की नजर कभी गुरु जी पर तो कभी कामया पर
गुरु जी- बोलो कामेश तुम्हें कोई आपत्ति है
कामेश- जी में क्या
गुरु जी- अरे तेरी बीवी है तेरी बीवी ही रहेगी पर हमारी उत्तराधिकारी है यह हमारी प्रॉपर्टी और हमारे, पूरे भारत में हर एक हिस्सा का अश्राम से इन्हे कामयानी देवी के नाम से लोग जाँएंगे बोलो क्या कहते हो
मम्मीजी- पर इसकी उम्र अभी कहाँ है गुरु जी
गुरु जी हाँ… हमें पता है लेकिन यही हमारे संस्था की उतराधिकारी है जहां तक उमर की बात है वो चलेगा यह हमेशा कामेश की पत्नी रहेगी हमारे आश्रम में ऐसा कोई नियम नहीं है कि बचलर ही होना होगा या बाल ब्रह्म चारी बोलो क्या कहते हो और तुम सब लोग भी तो हो सभी कुछ तुम लोगों के सामने है ईश्वार और कामेश है ही
कामया और कामेश कुछ ना कह सके पर एक लाल्शा साफ देखी जा सकती थी उसके चहरे पर पापाजी और मम्मीजी के भी इतनी बड़ी संस्था के मालिक हो जाएगे और सभी कुछ उनके हाथों में ही होगा इज़्ज़त और धन दौलत से पटा रहेगा सबकुछ
पापाजी और मम्मीजी- जी गुरु जी जैसा आप उचित समझे
गुरु जी- तो ठीक है सखी तुम तैयारी करो कुछ दिनों के लिए तुम्हें आश्रम में रहना होगा और वहां के नियम क़ायदे सीखना होगा एक सादा जीवन गुजारना होगा तुम्हें एक विलासिता पूर्णा जिंदगी से दूर आश्रम का जीवन बोलो मंजूर है
कामया-
अपनी नजर झुकाए हुए कामेश की ओर देखते हुए उसने हामी भर दी थी
गुरु जी- ऐसा इसलिए कर रहा हूँ कि जब तुम्हें इस दुनियां की सामने पेश करूँगा तो तुम वाकाई में हमारी उत्तराधिकारी दिखो और कुछ नहीं वैसे हमें पूरा विस्वास है कि तुम संभाल लोगी तुम्हारी कुंडली मैंने देखी है एक बहुत बड़े साम्राज्य की मालकिन हो तुम आज भारत की कल पूरे विश्व की ठीक है
कामया-
सिर हिलाकर अपना समर्थन जारी रखा था उसने
गुरु जी- तो ठीक है सखी आज से ही तुम हमारे साथ चलो और एक सदा जीवन की शुरुआत करो हाँ… आश्रम में वही के कपड़े पहनने होते है बाद में कुछ और ठीक है जब तुम्हारा अभिषेक होगा तब से तुम कामयानी देवी के नाम से जानी जाओगी और जीवन भर अपने और पूरे विश्व का उद्धार तुम्हारे हाथों से होगा कामया को कुछ समझ में नहीं आरहा था पर परिस्थिति ऐसी बन गई थी कि कोई कुछ नहीं बोल सका था बोलता भी कोंन इतना बड़ा फेसला एक झटके में गुरु जी ने कर लिया था
कामया के साथ-साथ पूरा परिवार गुरुजी का कायल था बाहर खड़े और साथ में आए लोगों को कानों कान भनक भी नहीं लगी की अंदर कितना बड़ा फेसला हो गया था पर गुरु जी के चहरे पर कोई शिकन या चिंता नहीं थी वो वैसे ही मुस्कुराते हुए सभी से बातें कर रहे थे कि अचानक ही उठ खड़े हुए और बोले
गुरु जी- चलो फिर आश्रम चलते है क्यों कामेश चलो ईश्वर विद्या चलो और खुद आगे की ओर यानी कि दरवाजे की ओर मुड़कर चल दिए पीछे-पीछे सभी उनके दौड़े और साथ बनाए रखने की कोशिश करने लगे थे पर गुरु जी की चाल बहुत तेज थी जल्दी ही बाहर पहुँच गये थे
फिर पीछे पलटकर
गुरु जी- हाँ ईश्वर हमारी सखी को भूलना नहीं और सबकुछ समझ लो जल्दी से कामेश तुम्हारी तो बहुत जरूरत है और सखी तुम तैयार हो ना
कामेश और कामया क्या बोलते चुपचाप सिर हिला दिया और गुरु जी के पीछे-पीछे गाड़ी तक आ गये थे कामेश दौड़ कर अपनी गाड़ी में बैठ गया था और गुरु जी भी उसी गाड़ी में कामया पापाजी और मम्मीजी के साथ अलग गाड़ी में और भी बहुत सी गाडिया थी एक के बाद एक सभी पोर्च से बाहर निकलने लगी थी सामने हूटर बजाते हुए पोलीस की गाड़ी चल रही थी सड़क के दोनों ओर बहुत भीड़ थी और गुरु जी की जयजयकार सुनाई दे रहा था कामया और पूरा परिवार उन भीड़ के बीच से होते हुए अश्राम की ओर जा रहे थे सड़क की भीड़ को देखकर लग रहा था कि गुरु जी का क्या दबदबा है कैसे लोग उनकी पूजाकरते है और कितना मानते है कामया तो एक बार इस समय को भूलकर भी भूलना नहीं चाहती थी ऐसा लग रहा था कि बस यह चलता रहे बस चलता रहे वो अपने आप में ही सोच रही थी कि गुरु जी उसे उत्तराधिकारी बना रहे है क्या करना होगा उसे पापाजी और कामेश का काम तो समझ में आ गया था पर उसका काम क्या होगा क्या उसे भी गुरु जी की तरह हमेश पूजा पाठ में ही रहना होगा पर उसे तो कुछ भी नहीं आता और पूजा पाठ
उसकी उमर क्या है अभी इस तरह की बातों का पर अब क्या गुरुजी ने तो कह दिया है और वो क्या घर का कोई भी कुछ नहीं कह पाया था धन दौलत के आगे सब झुक गये थे और वो भी इसी सोच में डूबी कामया अपनी गाड़ी को अश्राम के अंदर जाते हुए देख रही थी बाहर से कुछ हिस्सा ही दिखता था पर जितना उसने अब तक देखा था वो बस 1्10 आफ दा पार्ट था अंदर तो बहुत बड़ा था यह लगभग गेट से ही 5 मिनट लग गये थे मैंन डोर तक पहुँचने में और जैसे ही बाहर निकलकर एक बार उस आश्रम की ओर देखा था वो तो सन्न रह गई थी बाप रे यह आश्रम है अरे यह तो महल है महल ही क्या कोई बहुत बड़ा पलेस है और ना जाने क्या-क्या कामया आचंभित सी खड़ी खड़ी उस महल को देख रही थी कितना बड़ा और भव्य है
मार्बल से बना हुआ कही कही स्टोन भी लगा था लाल और सफेद का क्या कॉंबिनेशन है वाह वो कुछ आगे देखती पर गुरु जी के पीछे का रेला उन्हें धकेलते हुए अंदर की ओर ले चला था आश्रम के अंदर आते ही वहां का माहॉल बिल्कुल चेंज था वैभवता का पूरा ध्यान रखा गया था कही भी कुछ भी नार्मल नहीं था एकदम क्लीन फ्लोर मार्बल का और ग्रेनाइट लगता था कि पैर फिसल जाएगा पर कोई नहीं फिसला था अंदर बड़े-बड़े गलियारे और बड़े-बड़े डोर थे और उनपर वैसे ही बड़े-बड़े पर्दे थे उनके घर का डोर तो शायद 7फ्ट का होगा पर यहां के डोर तो 10 या 11 फुट उचे है और उनपर पड़े पर्दे भी वैसे ही वाइट आंड गोलडेन रंग के थे वैसे ही वहां की हर चीज सलीके से और सुंदर थे डोर के अंदर आते ही बड़े-बड़े कमरे के बीच से गुजरते हुए गुरु जी एक बड़े से खुले हुए सतान पर आ गई थे और वहां पड़े हुए एक बड़े से आसन पर बैठ गये थे उसके साथ आए सभी लोग वहां नीचे बिछि गद्दी पर बैठने लगे थे पर कामेश का परिवार कुछ सोचता इससे पहले ही एक शिष्य ने आके पापाजी से कुछ कहा पापाजी कामेश और सभी को लेकर वहां से बाहर की ओर चल दिए कामया भी कामेश के साथ आगे बढ़ी थी मम्मीजी लंगड़ाते हुए चल रही थी गठिया का दर्द शायद बढ़ गया था पर यहां के वैभव के आगे जैसे वो सब भूल गई थी उस शिष्य के पीछे-पीछे जब वो लोग एक खुली जगह पर आके रुक गये थे एक बड़ा सा दरवाजे के अंदर एक सुंदर सा छोटा सा महल नुमा आकृति उसे दिखाई दी थी पापाजी के साथ सभी का ध्यान उस तरफ गया था आश्रम के अंदर भी कुछ ऐसा था इसका उन्हें पता नहीं था पर कामया के लिए यह तो बिल्कुल नया था इतना बड़ा और भव्य महल ना तो उसने कभी देखा था और नहीं कभी सोचा ही था वो कुछ आगे बढ़े तो दरवाजे के अंदर का दृश्य कुछ कुछ बदलने लगा था और गेट के अंदर का माहॉल ही अलग था पूरे अश्राम का निचोड़ था ये जगह बड़ा सा गार्डेन और गार्डेन में खरगोशो के साथ-साथ पेंग्विन और वो भी वाइट राज हँस पानी में तैरते हुए फाउंटन झूला वो भी वाइट कलर का कुछ लोग गार्डेन में काम कर रहे थे उसको देखते ही उठकर सिर झुका कर खड़े हो गये थे एक मध्यम उमर का इंसान जल्दी से उनके पास आया था