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वो इंसान- नमस्कार गुरु भाई में यहां का खादिम हूँ यह जगह मेरे सुपुर्द है और में यहां का करता धर्ता हूँ यह जगह गुरु जी ने आप लोगों के लिए चुना है आइए एक नजर देख लीजिए अगर पसंद ना आए तो बदलाव किया जा सकता है या फिर कोई दूसरी जगह भी चुनी जा सकती है आइए
उसके कहने का तरीका इतना शक्तिशाली था की सभी चुप थे पर आखें फटी पड़ी थी सबकी इतना बड़ा महल में क्या वो लोग रहेंगे बाप रे अंदर घुसते ही एक बड़ा सा हाल था बड़ेबड़े शांडाल लाइट से सजा हुआ और वाइट ग्रीन के साथ-साथ रेड कलर के कॉंबिनेशन का फ्लोर और वैसे ही पर्दे उसपर पड़े हुए गोल्डन कलर का रोप छत पर भी ग्लोड़ें कलर की नक्काशी थी बीच से सीढ़िया जो जा रही थी उसपर रेड कलर का कार्पेट था और सीढ़ियो के साइड में जो पिल्लर थे वो गोल्डन थे वाकई वो एक महल है
वो इंसान- जी अब आपका निवास यह रहेगा गुरु भाई आप अपने परिवार के साथ यहां रहेंगे सभी यहां आपके खादिम है और आपकी आग्या के आनुसार चलने के लिए है बस हुकुम कीजिएगा आइए में आपको बाकी की जगह दिखा देता हूँ फिर क्या था लगभग दो घंटे कैसे निकल गये थे पता भी नहीं चला था एक-एक कमरा और एक-एक जगह दिखाने के बाद जब वो लोग नीचे वापस आए तो किसी के पास कुछ कहने को नहीं था पूरा घर अरे धत्त महल को देखने से लगता था की किसी ने बड़े ही जतन से बनवाया है और कही कोई त्रुटि निकाल कर दिखाने का खुला चेलेंज दिया है नीचे आते ही पीछे की ओर एक रास्ते से बाहर निकलकर वहां पर पड़े बड़े-बड़े चेयर नुमा सोफा पर बैठ गये थे सब मम्मीजी थक गई थी पर बोली कुछ नहीं
वो इंसान- कहिए गुरु भाई कुछ कमी हो तो सब आपके हिसाब का होना चाहिए गुरु जी का आदेश है
पापाजी- नहीं नहीं सब ठीक है
कुछ कहते इससे पहले ही दो शिष्य हाथों में ट्रे लिए हुए उसके सामने हाजिर थी 30 35 साल की होंगी वो बड़े ही अजीब तरह के कपड़े थे एक सफेद कलर का कपड़ा डाल रखा था उन्होंने शायद ऊपर से काट कर गले में डाल लिया था और कमर के चारो ओर एक गोल्डन कलर के पत्ते से बँधा हुआ था और उसपर एक रेड तो कोई गोल्डन कलर का रोप से बाँध रखा था साइड से थोड़ा बहुत स्किन दिख रहा था पर ज्यादा नहीं वैसा ही पोशाक जेंट्स का भी था पोशाक घुटनों तक जाती थी पर कुछ लोग जो गुरु जी के साथ थे उनकी पोशाक तो पैरों तक थी और शायद सिल्क का कपड़ा था वो पर यहां जो लोग थे उनकी पोशाक शायद काटन की थी जो भी हो वो दोनों शिस्या उनलोगों के लिए ग्लास में कुछ ठंडा पेय डालकर उनके सामने रखकर साइड में खड़ी हो गई थी
वो इंसान- यह पे पी लीजिए गुरु भाई आप लोगों की थकान दूर हो जाएगी
सच में जाने क्या था उस शरबत में कि अंदर जाते ही सबकुछ एकदम तरो ताजा हो गये थे शरबत कुछ जड़ी बूटी वाला था यह तो साफ था पर था क्या नहीं मालूम
पापाजी- आअह्ह अच्छा एक बात बताओ गुरु जी से मिलना है कहाँ जाए
वो इंसान- जी बुला लेंगे आपको गुरु भाई आप चिंता ना करे हम यही खड़े है आप लोग थोड़ा सुस्ता ले कहिए तो कमरा ठीक कर दूं
पापाजी- नहीं नहीं ठीक है यही
वो इंसान थोड़ा सा पीछे जाकर खड़ा हो गया था सभी मंत्र मुग्ध से इधर उधर देख रहे थे की पापाजी बोले
पापाजी- हाँ… अब क्या क्यों कामेश कामया
कामेश- जी मुझे तो कुछ समझ में नही आ रहा पापा इतना इंतज़ाम कब कर लिया गुरु जी ने
मम्मीजी- अरे गुरु जी है उनको सब पता है
पापाजी- हाँ… पर बात सिर्फ़ इतना नहीं है कि यहां रहना है पर दायत्व बहुत बड़ा है और गुरु जी तो कामया को अपना उत्तरिधिकारी भी चुन चुके है तो फिर अब क्या करना है यह सोचो
कामेश- हाँ… पापा गुरु जी से यह साफ कर लो कि कामया से पूजा पाठ जैसा कोई काम अभी से मत करवाएँ यह नहीं बनेगा इससे क्यों कामया
कामया ......
मम्मीजी हाँ… और क्या अभी उमर ही क्या है इसकी यह सब बाद में
पापाजी- पर बोलेंगे क्या यह सोचो इतना इंतज़ाम करके रखा है पूरा परिवार के लिए जगह बना दी है और पता नहीं क्या के सोचकर बैठे होंगे वो
तभी वो इंसान उनके पास आया और पापाजी से कुछ बोला
पापाजी- चलो गुरु जी ने बुलाया है
वो सब उस इंसान के साथ उसे छोटे से महल के डोर तक आए फिर वही शिस्या उन्हे लेके एक अलग रास्ते से चल पड़ी थी एक बड़े से खुले हुए कमरे में कुछ लोग बैठे थे और कुछ खड़े थे गुरु जी का आसान यहां भी अलग सा था देखते ही बोले
गुरु जी- क्यों ईश्वर पसंद आया क्या कहते हो विद्या कुछ बदलाव चाहिए
पापाजी- नहीं गुरु जी सब ठीक है
गुरु जी ..बैठो हाँ और यह पेपर्स है पढ़ लो और साइन करदो और कुछ बदलाव चाहिए तो बता दो वकील लोग यही खड़े है
एक ब्लैक कोट पहेने हुए अधेड़ सा आदमी कुछ पेपर्स को देखते हुए आगे बढ़ा था कामेश और कामया एक सोफे में बैठे थे और पापाजी और मम्मीजी एक सोफे में बैठे ही अंदर तक धस्स गये थे पर था आराम दायक वो एक पेपर का सेट पापाजी के हाथों में, एक पापर का सेट कामेश के हाथों में और एक सेट कामया के हाथों में रखकर पीछे हट गया था कामया के हाथों में जो सेट था उसमें साफ-साफ लिखा था कि आज से कामया जो की कामेश की पत्नी है और ईश्वर के घर की बहू है को गुरु जी अपना उत्तराधिकारी बनाते हुए अपनी चल आचल संपत्ति का मालिकाना हक दे रहे है अब वो इस अश्राम के साथ-साथ बहुत से और भी अड्रेस्स और बहुत कुछ लिखा था की मालकिन है पढ़ते पढ़ते कामया की आखें फटी की फटी रह गई थी वो कामेश की ओर देख रह थी पर कामेश तो साइन कर रहा था
कामया ने भी एक बार पलटा कर उस पेपर को देखा था पीछे गुरु जी के साइन के अलावा चार साइन भी थे और गुरु जी की फोटो के साथ उसका फोटो भी लगा था बस साइन करना बाकी था
तब तक कामेश ने अपना पेन कामया की ओर कर दिया था कामया ने एक नजर कामेश और फिर पापाजी की ओर उठाई थी पर सभी चुपचाप थे कामेश ने एक बार उसे आखों से इशारा भर किया था कि साइन कर दे और कामया ने साइन कर दिया वो वकील वापस आके सभी से पेपर ले लिया और गुरु के सामने रख दिया
गुरु जी- तो ईश्वार आज से तेरा परिवार यहां का हो गया ठीक है अब से तुम और कामेश मेरे अरे नहीं हमारी सखी की संपत्ति की देख भाल करोगे अब मेरा कुछ नहीं है यहां चाहो तो एक धक्का मारकर निकाल दो हाहहाहा
पापाजी- अरे गुरु जी आपका ही दिया हुआ है सब हमारा क्या है
गुरुजी- अरे नहीं ईश्वर यह सभी तो हमारी सखी का है और तुम लोग बस इसकी देख भाल करोगे बाकी का काम हमारी सखी करेगी अब से सखी जो करेगी वो तुम दोनों को सम्भालना है मेरी जो भी चल आचल संपत्ति थी आज से वो उसकी मालकिन है और तुम दोनों मेरे पूरे बैंक और रुपये पैसे का हिसाब रखोगे इसके बाद जो भी निर्णए लेना हो तुम दोनों के हाथों में है मेरा यहाँ किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा फिर थोड़ा सा बातें और फिर खाने के लिए सभी एक साथ आगे बढ़े बाअप रे बाप इतना बड़ा डाइनिंग स्पेस उउउफफ्फ़ पूरा शहर समा जाए यहां तो खाने से टेबल पटा पड़ा था कितने लोग थे पता नहीं कुछ कोट पहने हुए थे तो कुछ पैंट शर्ट पहने हुए थे सभी के साथ साथ गुरु जी ने भी आसन ग्रहण किया और खाना शुरू हो गया था
खाने के बाद गुरु जी ने एक बार फिर कामेश के परिवार को अपने पास बुला लिया था और एक आलीशान कमरे में बुलाकर बोले
गुरु जी- हाँ तो ईश्वर क्या सोचा तुमने बोलो
पापाजी- जी हमें क्या सोचना गुरु जी सब आपके ऊपर है जैसा आदेश होगा करेंगे
गुरु जी- हाँ… एक काम करो तुम जल्दी से अपना बाहर का काम कब तक खतम कर लोगे यानी की दुकान शो रूम और सभी काम को किसी ना किसी को तो सोपना पड़ेगा ना
पापाजी- जी कोई एक हफ़्ता तो लगेगा ही गुरु जी
गुरु जी- हाँ… और कामेश तुम्हारा
कामेश- लगभग इतना तो
गुरु जी- तो ठीक है एक काम करो तुम सब लोग अपना काम खतम करके वापस यहां एक हफ्ते में चले आओ विद्या तुम भी और इसी जगह में शिफ्ट हो जाओ तुम लोग तो अपना काम ठीक से कर लोगे चिंता है तो सिर्फ़ हमें हमारी सखी की है क्यों सखी तुम्हारा कोई काम बचा है क्या
कामया- जी
गुरु जी- तुम्हारी जिम्मेदारी कुछ अलग सी है हमें तुम्हारी जरूरत ज्यादा है क्योंकी तुम्हारा अभिषेक करना है हमारे जाने से पहले इसके लिए तुम्हें तैयार होना या करना बहुत जरूरी है और हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं है
मम्मीजी- आप आदेश करे गुरु जी
गुरु जी- हाँ… वैसे हमारी सखी का काम है क्या बाहर
पापाजी- जी , कुछ खास नहीं गुरु जी वो तो कामेश देख लेगा और में हूँ थोड़ा बहुत ही है
गुरु जी तो ठीक है एक काम करते है तुम लोग जब तक वापस आओगे तब तक हम हमारी सखी को देश के सामने कामयानी देवी बनाकर प्रस्तुत करदेंगे कहो कोई आपत्ति तो नहीं
मम्मीजी- पर गुरु जी बहू की उम्र अभी कम है अभी से पूजा पाठ करेगी तो,
गुरु जी- अरे विद्या तू तो अब तक भोली ही है में कौन सा इससे इसका जीवन छीन रहा हूँ में तो इसे इस अश्राम के हिसाब से ढाल रहा हूँ इसके लिए इसे यहां रहना पड़ेगा की नहीं
पापाजी- जी गुरु जी
गुरु जी- जैसे की हम इसे अपना उत्तराधिकारी बनाएगे तो इसे कुछ तो सिखाना पड़ेगा की नहीं काम से काम अश्राम के तौर तरीके तो समझना पड़ेगा और फिर जब यह संसार के सामने कामयानी देवी के रूप में आएगी तब देखना क्या वैभव और सम्मान मिलता है तुम्हारी बहू को क्यों सखी तैयार हो ना
कामया-
मम्मी और पापाजी- जी जैसा आप उचित समझे गुरु जी
गुरु जी- क्यों कामेश- एक हफ्ते तक अपनी पत्नी से अलग रह पाओगे की नहीं
कामेश- जी झेंपता हुआ सा जबाब दिया था
गुरु जी- और तुम दोनों जिंदगी भर पति पत्नी रहोगे में तुम्हें अलग नहीं कर रहा हूँ बस एक दायित्व सोप रहा हूँ क्यों ईश्वर
पापाजी- जी गुरु जी जैसा आप ठीक समझे
गुरु जी- तो ठीक है आज से बल्कि अभी से सखी अश्राम में रहेगी और तुम लोग जितना जल्दी हो सके अपना काम खतम करके यहां लौट आओगे दो दिन बाद सखी एक बार घर आएगी और फिर अश्राम क्यों सखी कोई आपत्ति तो नहीं
कामया-
चुप क्या कहती वो चुपचाप सिर झुकाए हुए बैठी रही झुकी नजर से एक बार कामेश की और फिर पापाजी और मम्मीजी की ओर देखा सभी को सहमत देखकर वो भी चुप थी
गुरु जी- मनसा
एक सख्त पर धीमी आवाज उस कमरे में गूँज गई थी एक 30 35 साल की औरत वही वाइट कलर का ड्रेस पहने हुए जल्दी से आई और गुरु जी के सामने हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई थी
गुरु जी- आज से रानी साहिबा आपकी जिम्मेदारी है हमारी सखी का पूरा खयाल आपको रखना है और इस आश्रम के नियम क़ायदे भी इन्हें सिखाना है आज से आप पूरे समय 24 घंटे रानी साहिबा के साथ रहेंगी
मनसा- जी जो हुकुम गुरु जी
और कामया की ओर पलटकर
मनसा- आइए रानी साहिबा
उसके कहने का तरीका इतना शक्तिशाली था की सभी चुप थे पर आखें फटी पड़ी थी सबकी इतना बड़ा महल में क्या वो लोग रहेंगे बाप रे अंदर घुसते ही एक बड़ा सा हाल था बड़ेबड़े शांडाल लाइट से सजा हुआ और वाइट ग्रीन के साथ-साथ रेड कलर के कॉंबिनेशन का फ्लोर और वैसे ही पर्दे उसपर पड़े हुए गोल्डन कलर का रोप छत पर भी ग्लोड़ें कलर की नक्काशी थी बीच से सीढ़िया जो जा रही थी उसपर रेड कलर का कार्पेट था और सीढ़ियो के साइड में जो पिल्लर थे वो गोल्डन थे वाकई वो एक महल है
वो इंसान- जी अब आपका निवास यह रहेगा गुरु भाई आप अपने परिवार के साथ यहां रहेंगे सभी यहां आपके खादिम है और आपकी आग्या के आनुसार चलने के लिए है बस हुकुम कीजिएगा आइए में आपको बाकी की जगह दिखा देता हूँ फिर क्या था लगभग दो घंटे कैसे निकल गये थे पता भी नहीं चला था एक-एक कमरा और एक-एक जगह दिखाने के बाद जब वो लोग नीचे वापस आए तो किसी के पास कुछ कहने को नहीं था पूरा घर अरे धत्त महल को देखने से लगता था की किसी ने बड़े ही जतन से बनवाया है और कही कोई त्रुटि निकाल कर दिखाने का खुला चेलेंज दिया है नीचे आते ही पीछे की ओर एक रास्ते से बाहर निकलकर वहां पर पड़े बड़े-बड़े चेयर नुमा सोफा पर बैठ गये थे सब मम्मीजी थक गई थी पर बोली कुछ नहीं
वो इंसान- कहिए गुरु भाई कुछ कमी हो तो सब आपके हिसाब का होना चाहिए गुरु जी का आदेश है
पापाजी- नहीं नहीं सब ठीक है
कुछ कहते इससे पहले ही दो शिष्य हाथों में ट्रे लिए हुए उसके सामने हाजिर थी 30 35 साल की होंगी वो बड़े ही अजीब तरह के कपड़े थे एक सफेद कलर का कपड़ा डाल रखा था उन्होंने शायद ऊपर से काट कर गले में डाल लिया था और कमर के चारो ओर एक गोल्डन कलर के पत्ते से बँधा हुआ था और उसपर एक रेड तो कोई गोल्डन कलर का रोप से बाँध रखा था साइड से थोड़ा बहुत स्किन दिख रहा था पर ज्यादा नहीं वैसा ही पोशाक जेंट्स का भी था पोशाक घुटनों तक जाती थी पर कुछ लोग जो गुरु जी के साथ थे उनकी पोशाक तो पैरों तक थी और शायद सिल्क का कपड़ा था वो पर यहां जो लोग थे उनकी पोशाक शायद काटन की थी जो भी हो वो दोनों शिस्या उनलोगों के लिए ग्लास में कुछ ठंडा पेय डालकर उनके सामने रखकर साइड में खड़ी हो गई थी
वो इंसान- यह पे पी लीजिए गुरु भाई आप लोगों की थकान दूर हो जाएगी
सच में जाने क्या था उस शरबत में कि अंदर जाते ही सबकुछ एकदम तरो ताजा हो गये थे शरबत कुछ जड़ी बूटी वाला था यह तो साफ था पर था क्या नहीं मालूम
पापाजी- आअह्ह अच्छा एक बात बताओ गुरु जी से मिलना है कहाँ जाए
वो इंसान- जी बुला लेंगे आपको गुरु भाई आप चिंता ना करे हम यही खड़े है आप लोग थोड़ा सुस्ता ले कहिए तो कमरा ठीक कर दूं
पापाजी- नहीं नहीं ठीक है यही
वो इंसान थोड़ा सा पीछे जाकर खड़ा हो गया था सभी मंत्र मुग्ध से इधर उधर देख रहे थे की पापाजी बोले
पापाजी- हाँ… अब क्या क्यों कामेश कामया
कामेश- जी मुझे तो कुछ समझ में नही आ रहा पापा इतना इंतज़ाम कब कर लिया गुरु जी ने
मम्मीजी- अरे गुरु जी है उनको सब पता है
पापाजी- हाँ… पर बात सिर्फ़ इतना नहीं है कि यहां रहना है पर दायत्व बहुत बड़ा है और गुरु जी तो कामया को अपना उत्तरिधिकारी भी चुन चुके है तो फिर अब क्या करना है यह सोचो
कामेश- हाँ… पापा गुरु जी से यह साफ कर लो कि कामया से पूजा पाठ जैसा कोई काम अभी से मत करवाएँ यह नहीं बनेगा इससे क्यों कामया
कामया ......
मम्मीजी हाँ… और क्या अभी उमर ही क्या है इसकी यह सब बाद में
पापाजी- पर बोलेंगे क्या यह सोचो इतना इंतज़ाम करके रखा है पूरा परिवार के लिए जगह बना दी है और पता नहीं क्या के सोचकर बैठे होंगे वो
तभी वो इंसान उनके पास आया और पापाजी से कुछ बोला
पापाजी- चलो गुरु जी ने बुलाया है
वो सब उस इंसान के साथ उसे छोटे से महल के डोर तक आए फिर वही शिस्या उन्हे लेके एक अलग रास्ते से चल पड़ी थी एक बड़े से खुले हुए कमरे में कुछ लोग बैठे थे और कुछ खड़े थे गुरु जी का आसान यहां भी अलग सा था देखते ही बोले
गुरु जी- क्यों ईश्वर पसंद आया क्या कहते हो विद्या कुछ बदलाव चाहिए
पापाजी- नहीं गुरु जी सब ठीक है
गुरु जी ..बैठो हाँ और यह पेपर्स है पढ़ लो और साइन करदो और कुछ बदलाव चाहिए तो बता दो वकील लोग यही खड़े है
एक ब्लैक कोट पहेने हुए अधेड़ सा आदमी कुछ पेपर्स को देखते हुए आगे बढ़ा था कामेश और कामया एक सोफे में बैठे थे और पापाजी और मम्मीजी एक सोफे में बैठे ही अंदर तक धस्स गये थे पर था आराम दायक वो एक पेपर का सेट पापाजी के हाथों में, एक पापर का सेट कामेश के हाथों में और एक सेट कामया के हाथों में रखकर पीछे हट गया था कामया के हाथों में जो सेट था उसमें साफ-साफ लिखा था कि आज से कामया जो की कामेश की पत्नी है और ईश्वर के घर की बहू है को गुरु जी अपना उत्तराधिकारी बनाते हुए अपनी चल आचल संपत्ति का मालिकाना हक दे रहे है अब वो इस अश्राम के साथ-साथ बहुत से और भी अड्रेस्स और बहुत कुछ लिखा था की मालकिन है पढ़ते पढ़ते कामया की आखें फटी की फटी रह गई थी वो कामेश की ओर देख रह थी पर कामेश तो साइन कर रहा था
कामया ने भी एक बार पलटा कर उस पेपर को देखा था पीछे गुरु जी के साइन के अलावा चार साइन भी थे और गुरु जी की फोटो के साथ उसका फोटो भी लगा था बस साइन करना बाकी था
तब तक कामेश ने अपना पेन कामया की ओर कर दिया था कामया ने एक नजर कामेश और फिर पापाजी की ओर उठाई थी पर सभी चुपचाप थे कामेश ने एक बार उसे आखों से इशारा भर किया था कि साइन कर दे और कामया ने साइन कर दिया वो वकील वापस आके सभी से पेपर ले लिया और गुरु के सामने रख दिया
गुरु जी- तो ईश्वार आज से तेरा परिवार यहां का हो गया ठीक है अब से तुम और कामेश मेरे अरे नहीं हमारी सखी की संपत्ति की देख भाल करोगे अब मेरा कुछ नहीं है यहां चाहो तो एक धक्का मारकर निकाल दो हाहहाहा
पापाजी- अरे गुरु जी आपका ही दिया हुआ है सब हमारा क्या है
गुरुजी- अरे नहीं ईश्वर यह सभी तो हमारी सखी का है और तुम लोग बस इसकी देख भाल करोगे बाकी का काम हमारी सखी करेगी अब से सखी जो करेगी वो तुम दोनों को सम्भालना है मेरी जो भी चल आचल संपत्ति थी आज से वो उसकी मालकिन है और तुम दोनों मेरे पूरे बैंक और रुपये पैसे का हिसाब रखोगे इसके बाद जो भी निर्णए लेना हो तुम दोनों के हाथों में है मेरा यहाँ किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा फिर थोड़ा सा बातें और फिर खाने के लिए सभी एक साथ आगे बढ़े बाअप रे बाप इतना बड़ा डाइनिंग स्पेस उउउफफ्फ़ पूरा शहर समा जाए यहां तो खाने से टेबल पटा पड़ा था कितने लोग थे पता नहीं कुछ कोट पहने हुए थे तो कुछ पैंट शर्ट पहने हुए थे सभी के साथ साथ गुरु जी ने भी आसन ग्रहण किया और खाना शुरू हो गया था
खाने के बाद गुरु जी ने एक बार फिर कामेश के परिवार को अपने पास बुला लिया था और एक आलीशान कमरे में बुलाकर बोले
गुरु जी- हाँ तो ईश्वर क्या सोचा तुमने बोलो
पापाजी- जी हमें क्या सोचना गुरु जी सब आपके ऊपर है जैसा आदेश होगा करेंगे
गुरु जी- हाँ… एक काम करो तुम जल्दी से अपना बाहर का काम कब तक खतम कर लोगे यानी की दुकान शो रूम और सभी काम को किसी ना किसी को तो सोपना पड़ेगा ना
पापाजी- जी कोई एक हफ़्ता तो लगेगा ही गुरु जी
गुरु जी- हाँ… और कामेश तुम्हारा
कामेश- लगभग इतना तो
गुरु जी- तो ठीक है एक काम करो तुम सब लोग अपना काम खतम करके वापस यहां एक हफ्ते में चले आओ विद्या तुम भी और इसी जगह में शिफ्ट हो जाओ तुम लोग तो अपना काम ठीक से कर लोगे चिंता है तो सिर्फ़ हमें हमारी सखी की है क्यों सखी तुम्हारा कोई काम बचा है क्या
कामया- जी
गुरु जी- तुम्हारी जिम्मेदारी कुछ अलग सी है हमें तुम्हारी जरूरत ज्यादा है क्योंकी तुम्हारा अभिषेक करना है हमारे जाने से पहले इसके लिए तुम्हें तैयार होना या करना बहुत जरूरी है और हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं है
मम्मीजी- आप आदेश करे गुरु जी
गुरु जी- हाँ… वैसे हमारी सखी का काम है क्या बाहर
पापाजी- जी , कुछ खास नहीं गुरु जी वो तो कामेश देख लेगा और में हूँ थोड़ा बहुत ही है
गुरु जी तो ठीक है एक काम करते है तुम लोग जब तक वापस आओगे तब तक हम हमारी सखी को देश के सामने कामयानी देवी बनाकर प्रस्तुत करदेंगे कहो कोई आपत्ति तो नहीं
मम्मीजी- पर गुरु जी बहू की उम्र अभी कम है अभी से पूजा पाठ करेगी तो,
गुरु जी- अरे विद्या तू तो अब तक भोली ही है में कौन सा इससे इसका जीवन छीन रहा हूँ में तो इसे इस अश्राम के हिसाब से ढाल रहा हूँ इसके लिए इसे यहां रहना पड़ेगा की नहीं
पापाजी- जी गुरु जी
गुरु जी- जैसे की हम इसे अपना उत्तराधिकारी बनाएगे तो इसे कुछ तो सिखाना पड़ेगा की नहीं काम से काम अश्राम के तौर तरीके तो समझना पड़ेगा और फिर जब यह संसार के सामने कामयानी देवी के रूप में आएगी तब देखना क्या वैभव और सम्मान मिलता है तुम्हारी बहू को क्यों सखी तैयार हो ना
कामया-
मम्मी और पापाजी- जी जैसा आप उचित समझे गुरु जी
गुरु जी- क्यों कामेश- एक हफ्ते तक अपनी पत्नी से अलग रह पाओगे की नहीं
कामेश- जी झेंपता हुआ सा जबाब दिया था
गुरु जी- और तुम दोनों जिंदगी भर पति पत्नी रहोगे में तुम्हें अलग नहीं कर रहा हूँ बस एक दायित्व सोप रहा हूँ क्यों ईश्वर
पापाजी- जी गुरु जी जैसा आप ठीक समझे
गुरु जी- तो ठीक है आज से बल्कि अभी से सखी अश्राम में रहेगी और तुम लोग जितना जल्दी हो सके अपना काम खतम करके यहां लौट आओगे दो दिन बाद सखी एक बार घर आएगी और फिर अश्राम क्यों सखी कोई आपत्ति तो नहीं
कामया-
चुप क्या कहती वो चुपचाप सिर झुकाए हुए बैठी रही झुकी नजर से एक बार कामेश की और फिर पापाजी और मम्मीजी की ओर देखा सभी को सहमत देखकर वो भी चुप थी
गुरु जी- मनसा
एक सख्त पर धीमी आवाज उस कमरे में गूँज गई थी एक 30 35 साल की औरत वही वाइट कलर का ड्रेस पहने हुए जल्दी से आई और गुरु जी के सामने हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई थी
गुरु जी- आज से रानी साहिबा आपकी जिम्मेदारी है हमारी सखी का पूरा खयाल आपको रखना है और इस आश्रम के नियम क़ायदे भी इन्हें सिखाना है आज से आप पूरे समय 24 घंटे रानी साहिबा के साथ रहेंगी
मनसा- जी जो हुकुम गुरु जी
और कामया की ओर पलटकर
मनसा- आइए रानी साहिबा