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बदलते रिश्ते

‘दीदी, बताओ प्लीज, फिर पति क्या करता है पत्नी के साथ?’

‘उसे पूरी तरह से नंगी कर देता है और फिर खुद भी नंगा हो जाता है। दोनों काफी देर तक एक दूसरे के अंगों को छूते हैं, उन्हें सहलाते हैं और अंत में पति अपनी पत्नी की योनि में अपना लिंग डालने की कोशिश करता है। जब उसका लिंग आधे के करीब योनि के अन्दर घुस जाता है तो पत्नी की योनि की झिल्ली फट जाती है और उसे बड़ा दर्द होता है, योनि से कुछ खून भी निकलता है। कोई-कोई पत्नी तो दर्द के मारे चीखने तक लगती है। परन्तु पति अपनी मस्ती में भर कर अपना शेष लिंग भी पत्नी की योनि में घुसेड़ ही देता है।’ ‘फिर क्या होता है दीदी?’

‘होता क्या, थोड़ी-बहुत देर में पत्नी को भी पति का लिंग डालना अच्छा लगता है और वह भी अपने कूल्हे मटका-मटका कर पति का साथ देती है। इस क्रिया को सम्भोग-क्रिया या मैथुन क्रिया कहते हैं।’

अनीता समझ चुकी थी कि अब सुनीता भी पूरी जानकारी लेने को उतावली हो गई है तो उसने सुनीता से कहा- अगर तू पूरी जानकारी चाहती है तो मेरे पास सुहागरात की एक सीडी पड़ी है, उसे देख ले बस, तुझे इस वारे में सब-कुछ पता लग जायेगा।

सुनीता एकदम चहक उठी, बोली- दिखाओ दीदी, कहाँ है वह सीडी? जल्दी दिखाओ नहीं तो रात को जीजू आ जायेंगे तुम्हारे कमरे में।

अनीता बोली- तेरे जीजू के पास वो सबकुछ है ही कहाँ, जो मेरे साथ कुछ कर सकें।

सुनीता ने आश्चर्य से पूछा- हैं??! सच दीदी… जीजू नहीं करते आपके साथ, जो कुछ आपने मुझे बताया अभी तक पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में?’

अनीता बोली- तेरे जीजू बिकुल नामर्द हैं। पहली रात को तो मैंने किसी तरह उनका लिंग सहला-सहला कर खड़ा कर लिया था और हम-दोनों का मिलन भी हुआ था मगर उस दिन के बाद तो उनके लिंग में कभी तनाव आया ही नहीं।

सुनीता ने पूछा- दीदी, फिर तुम अपनी इच्छा कैसे पूरी करती हो?

अनीता बोली- ये सारी बातें मैं तुझे बाद में बताऊँगी, पहले तू सीडी देख।

अनीता ने सीडी लेकर सीडी प्लेयर में डाल दी और फिर दोनों बहनें एक साथ मिलकर देखने लगीं।

पहले ही दृश्य में एक युवक अपनी पत्नी की चूचियाँ दबा रहा था। पत्नी सी..सी करके उत्तेजित होती जा रही थी और युवक का लिंग अपनी मुट्ठी में लेकर सहला रही थी। धीरे-धीरे उसने पत्नी के सभी कपड़े उतार फेंके और खुद भी नंगा हो गया। उसने अपनी पत्नी की योनि को चाटना शुरू कर दिया। पत्नी भी उसका लिंग मुँह में लेकर चूस रही थी।

यह दृश्य देखकर सुनीता के सम्पूर्ण शरीर में एक उत्तेजक लहर दौड़ गई, उसकी योनि में एक अजीब सी सुरसुराहट होने लगी थी। वह बोली- दीदी, मुझे कुछ-कुछ हो सा रहा है।

अनीता बोली- तेरी योनि पानी छोड़ने लगी होगी।

सुनीता बोली- हाँ दीदी, चड्डी के अन्दर कुछ गीला-गीला सा महसूस हो रहा है मुझे।

अनीता ने उसकी सलवार खोलते हुए कहा- देखूं तो…!!

अनीता ने ऐसा कहकर सुनीता की योनि को एक उंगली से सहलाना शुरू कर दिया।

एक सिसकी सुनीता के मुँह से फूट निकली- ..आह: दीदी, बहुत मन कर रहा है, अन्दर कोई मोटी सी चीज ठूंस दो इसके अन्दर, बस आप इसी तरह से मेरी योनि में अपनी उंगली डाल कर उसे अन्दर-बाहर करती रहो।

अनीता ने सुनीता की सलवार उतार फेंकी और बोली- तू इसी तरह से चुपचाप पड़ी रहना, मैं दरवाजे की सिटकनी लगा कर अभी आती हूँ।

अनीता ने लौट कर देखा कि सुनीता अपनी योनि को खूब तेजी से सहला रही थी। अनीता ने उसके सारे कपड़े उतार कर उसे पूरी नंगी कर दिया और फिर वह खुद भी नंगी हो गई।

दोनों बहनों ने एक-दूसरे को अपनी बांहों में भर लिया और कस कर चिपट गईं। दोनों बहनों की आँखें टीवी पर टिकी थीं जहाँ स्त्री-पुरुषों के बीच नाना-प्रकार की काम-क्रीड़ायें चल रही थीं।

अनीता ने सुनीता की चूचियों की कस कर दबाना शुरू कर दिया और अपने होंट उसके होटों से सटा दिए। सामने के दृश्य में एक साण्ड सा मर्द अपने लिंग को एक नंगी औरत की योनि में घुसेड़ने की तैयारी में था।

कुछ ही देर में वह अपना लिंग उसके योनि में घुसेड़ कर लगातार धक्के लगा रहा था और अंत में औरत उस मोटे लिंग को बर्दाश्त न कर पाई और बेहोश हो गई। यह सब देख सुनीता का सारा बदन गर्म हो गया, वह बुरी तरह कामाग्नि में झुलसने लगी, उसके मुख से अजीब सी कामुक आवाजें आने लगी थीं।

अगले दृश्य में उसने एक स्त्री को हब्शी का लिंग सहलाते हुए देखा, उस औरत ने लिंग को अपनी योनि पर टिका लिया और फिर समूचा लिंग एक ही झटके से योनि में जा घुसा। औरत थोड़ी देर छटपटाई और फिर उठ खड़ी हुई।

सुनीता का शरीर बेकाबू हो गया उसने अपनी बड़ी बहन को अपनी बाहों में कस कर जकड़ लिया और बोली- दीदी, अब अपनी योनि में किसी का लिंग डलवाने की मेरी बहुत इच्छा हो रही है। दीदी, जीजू जब इस लायक नहीं हैं तो फिर तुम अपनी कामाग्नि कैसे शांत करती हो?

 
अनीता ने अपनी बहन को प्यार से चूमते हुए कहा- फ़िक्र मत कर, आज मैं और तू किसी हट्टे-कट्टे आदमी से अपनी प्यास बुझाएँगे।

सुनीता ने चहक कर पूछा- कौन है दीदी, जो हमारी प्यास बुझाएगा? आह: दीदी, मैं तो तड़प रही हूँ अपनी योनि फड़वाने के लिए। काश ! वह सांड जैसा मर्द ही टीवी फाड़कर निकल आये और हम-दोनों को तृप्त को अपने लिंग के धक्कों से।

‘सब्र कर बेवकूफ, वो मर्द कोई और नहीं है, मेरे पिता जी ही आज हम-दोनों की इच्छाएँ पूरी करेंगे।’

‘दीदी, यह क्या कह रहीं हैं आप?’

‘हाँ सुनीता, वे मेरे ससुर ही हैं जो मुझ तड़पती हुई औरत को सहारा देते हैं। अब तू ही बता मुझे क्या करना चाहिए? क्या मैं पास-पड़ोस के लोगों को फंसाती फिरूं अपनी प्यास बुझाने के लिए?’

सुनीता ने अपनी दीदी की बात पर अपनी सहमति व्यक्त की, बोली- तुम ठीक ही कह रही हो दीदी, इससे घर की इज्जत भी बची रहेगी और तुम्हारी कामाग्नि भी शांत होती रहेगी। अच्छा दीदी, एक बात बताओ। क्या मौसा जी का भी इतना बड़ा और सख्त है जितना कि इस फिल्म में मर्दों का दिखा रहे थे, ऐसा मोटा-लम्बा किसी लम्बे खीरे जैसा?

अनीता बोली- आज तू खुद ही देख लेना अपनी आँखों से, अगर देख कर डर न जाए तो मेरा नाम बदल देना। मुझे तो डर है कि तू झेल भी पायेगी या नहीं।

‘हैं दीदी, सच में इतना मोटा और लम्बा है मौसा जी का?’

दोनों बहनें बहुत देर तक इस वासना की बातों में डूबी रहीं।

सुनीता बोली- दीदी, अगर आप इजाजत दें तो मैं भी आपकी योनि चाट कर देख लूं?

अनीता बोली- चल देख ले, आज तू भी चख कर देख, योनि से जो पानी निकलता है वह कितना आनन्ददायक होता है।

अनीता ने लाइन क्लीयर कर दी, सुनीता ने दीदी की योनि पर अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी।

अनीता की योनि बुरी तरह फड़कने लगी, वह बोली- सुनीता, जरा जोरों से चाट, आह: कितना मज़ा आ रहा है। अपनी जीभ मेरी योनि की अन्दर-बाहर कर… उई माँ…मर गई मैं तो… सुनीता और जोर से प्लीज़… आह: …ऊह …

आधे घंटे तक चाटने के बाद सुनीता बोली- दीदी, अब मेरी भी चाटो न !

तब अनीता ने उसकी क्वांरी योनि को चाटना शुरू कर दिया। सुनीता का समूचा बदन झनझना उठा, सुनीता के मुँह से भी सिसकारियाँ फूटने लगीं, वह बोली- दीदी, क्या मौसा जी इस समय नहीं आ सकते? प्लीज़ उनसे कहो कि आकर मेरी योनि फाड़ डालें।

अनीता बोली- क्या पागल हो गई है? थोड़ा सा भी इन्तजार नहीं कर सकती।’दीदी, अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही यह मरी जवानी की आग… दीदी, मौसा जी राज़ी तो हो जायेंगे न मेरी फाड़ने के लिए?

‘मरी बाबली है बिल्कुल ही, जिसे एकदम क्वांरी और अछूती योनि मिलेगी चखने को वह उसे लेने से इंकार कर देगा क्या?’

‘दीदी, और अगर नहीं हुए राज़ी तो…?’

‘वो सब तू मुझ पर छोड़, तू एक काम करना, आज रात वो मेरे पास आयें और हमारी काम-क्रीड़ायें शुरू हो जाएँ तो तू एकदम से लाइट ऑन कर देना और ज़िद करना कि तुझे तो मेरे पास ही सोना है। हमारे पास आकर हमारे ऊपर पड़ा कम्बल खींच देना। हम-दोनों बिल्कुल ही नंगे पड़े होंगें कम्बल के भीतर। तू कहना, मौसा जी, मुझे तो दीदी के पास ही सोना है। वे डर जायेंगे और तुझे भी अपने साथ सुलाने को मजबूर हो जायेंगे। बस समझो तेरा काम बन गया। फिर तू उनके साथ चाहे जैसे मज़ा लेना। समझ गई ना?

सुनीता को तसल्ली हो गई कि आज उसके मौसा जी उसकी योनि जरूर फाड़ देंगे, सुनीता ने दीदी से कहा- दीदी, तुम्हें एक बात नहीं मालूम होगी।

‘क्या?’ अनीता ने पूछा।

 
सुनीता ने बताया- तुम्हारी शादी के बाद एक दिन मैं यों ही खिड़की की ओट से मंझले भैया के कमरे में झाँकने लगी, मुझे भाभी के साथ किसी मर्द की आवाजें सुनाई दीं, कोई कह रहा था ‘अपने सारे कपड़े उतार कर मेरे ऊपर आ जा। अब मुझसे ज्यादा इन्तजार नहीं हो रहा।’ मेरी उत्सुकता बढ़ी, मैंने सोचा की मझले भैया तो नाइट ड्यूटी जाते हैं, फिर यह कौन आदमी भाभी से नंगी होने की बात कह रहा है।

मैंने खिड़की थोड़ी से और खोल कर अन्दर झाँका तो दीदी, बिल्कुल ऐसा ही सीन अन्दर चल रहा था जैसा कि हम-लोगों ने आज ब्लू-फिल्म में देखा था। बड़े भैया, मझली भाभी को नंगी करके अपने ऊपर लिटाये हुए थे और भाभी ऊपर से धक्के मार-मार कर बड़े भैया का लिंग अन्दर लिए जा रहीं थीं। मुझे यह खेल देखने का चस्का लग गया। एक बार मैंने उनका यह खेल छोटे भैया को भी दिखाया। देखते-देखते छोटे भैया उत्तेजित हो उठे और उन्होंने मेरी छातियों पर हाथ फेरना आरम्भ कर दिया। मैं किसी तरह भाग कर अपने कमरे में चली आई, छोटे भैया ने समझा कि बुरा मान कर अंदर भाग आई हूँ।

वे मेरे पीछे-पीछे आये और मुझसे माफ़ी मांगने लगे। आगे कभी ऐसा न करने का वादा भी करने लगे। मैं कुछ नहीं बोली और बह चुपचाप वहां से चले गए।

उनके चले जाने के बाद मैं बहुत पछताई कि क्यों मैंने उनको नाराज़ कर दिया। अगर उनसे करवा ही लेती तो उस दिन मुझे कितना आनन्द आता। अफ़सोस तो इस बात का रहा कि उन्होंने दुबारा मेरी छातियाँ क्यों नहीं दबाई। अगर आगे वह ऐसा करें तो मुझे क्या करना चाहिए दीदी? हथियार डाल उनके आगे, और कर दूं अपने आपको उनके हवाले?

‘पागल हो गई है क्या तू? सगे भाई से यह सब करवाने की बात तेरे दिमाग में आई ही कैसे? देख सुनीता, सगे भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही पवित्र होता है। आगे से ऐसा कभी सोचना भी मत।’

‘दीदी, तुम्हारी बातें सही हैं मगर जब लड़का और लड़की दोनों के ही सर पर वासना का भूत सवार हो जाये तो बेचारा दिल क्या करे? मेरी कितनी ही सहेलियाँ ऐसी हैं जिनके यौन-सम्बन्ध अपने सगे भाइयों से हैं। और ये सम्बन्ध उनके वर्षों से चले आ रहे हैं। मेरी एक सहेली ने तो अपनी शादी के बाद अपने सगे छोटे भाई के साथ सम्बन्ध बनाने पड़े। उसका पति नपुंसक है और कभी उसके लिंग में थोड़ी-बहुत उत्तेजना आती भी है तो वह पत्नी की योनि तक पहुँचते-पहुँचते ही झड़ जाता है।’

दोनों बहनों को बातें करते-करते शाम हो आई।

ससुर ने आवाज लगाई- बहू, जरा इधर तो आ। क्या आज खाना नहीं बनाना है?’ अनीता पास आकर ससुर के कान में फुसफुसाई- जानू आज समझो तुम्हारा काम बन गया। उसी को पटाने में इतनी देर लग गई। आप आज रात को मेरे पलंग पर आकर चुपचाप लेट जाना, आगे सब मैं सम्भाल लूंगी।

रात हुई, दोनों बहनें अलग-अलग बिस्तरों पर लेतीं। सुनीता आँखें बंद करके सोई हुई होने का नाटक करने लगी।

रात के करीब दस बजे धीरे से दरवाजा खुलने की आवाज आई।

 
रात हुई, दोनों बहनें अलग-अलग बिस्तरों पर लेटी। सुनीता आँखें बंद करके सोई हुई होने का नाटक करने लगी।

रात के करीब दस बजे धीरे से दरवाजा खुलने की आवाज आई।

सुनीता चौकन्नी हो गई, उसने कम्बल से एक आँख निकाल कर देखा कि दीदी के ससुर अन्दर आये। अन्दर आकर उन्होंने अन्दर से कुण्डी लगा ली और दबे पाँव दीदी के कम्बल में घुस गए।

अनीता पहले से ही पेटीकोट और ब्रा में थी, रामलाल ने भी अपने सारे वस्त्र उतार फैंके और अनीता को नंगी करके उसके ऊपर चढ़ गया और दोनों की काम-क्रीड़ायें शुरू हो गईं।

रामलाल धीरे से अनीता के कान में बोला- थोड़ी सी पिएगी मेरी जान, आज मैं विलायती व्हिस्की लेकर आया हूँ। आज बोतल की और इस नई लौंडिया की सील एक साथ तोडूंगा।

रामलाल ने अपने कुरते को टटोलना शुरू किया ही था कि अनिता उसे रोकते हुए बोली- अभी नहीं, सुनीता पर काबू पाने के बाद शुरू करेंगे पीना। आज मैं तुम दोनों को अपने हाथों से पिलाऊँगी और खुद भी पीऊँगी तुम्हारे साथ। पहले मेरी बहन की अनछुई जवानी का ढक्कन तो खोल दो बाद में बोतल का ढक्कन खुलेगा।

रामलाल मुस्कुराया, बोला- मेरी जान, तू मेरे लिए कितना कुछ करने को तैयार है। यहाँ तक कि अपनी छोटी बहन की सील तुडवाने को भी राज़ी हो गई।

‘आप भी तो हमारे ऊपर सब-कुछ लुटाने को तैयार रहते हो मेरे राजा, फिर तुम्हारी रानी तुम्हारे लिए इतना सा काम भी नहीं कर सकती?’

सुनीता कम्बल की ओट से सब-कुछ साफ़-साफ़ देख पा रही थी। नाईट बल्ब की रोशनी में दोनों के गुप्तांग स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।

सुनीता ने सोचा ‘दीदी ने तो कहा था कि लाइट ऑन करके दोनों के ऊपर से कम्बल हटाने के लिए। यहाँ तो कुछ भी हटाने की जरूरत नहीं है, सब काम कम्बल हटाकर ही हो रहा है।’ सुनीता ने उठकर लाइट ऑन कर दी।

दोनों ने दिखावे के तौर पर अपने को कम्बल में ढकने का प्रयास किया, सुनीता बोली- दीदी, मैं तो तुम्हारे पास सोऊँगी। मुझे तो डर लग रहा है अकेले में।

अनीता ने दिखावटी तौर पर उसे समझाया- हम लोग यहाँ क्या कर रहे हैं, यह तो तूने देख ही लिया है, फिर भी तू मेरे पास सोने की ज़िद कर रही है?

रामलाल बोला- हाँ हाँ, सुला लो न बेचारी को अपने पास। उसे हमारे काम से क्या मतलब, एक कोने में पड़ी रहेगी बेचारी ! आजा बेटी, तू मेरी तरफ आ जा।

सुनीता झटपट रामलाल की ओर जा लेटी और बोली- आप लोगों को जो भी करना है करो, मुझे तो जोरों की नींद लगी है।

इधर अनीता और रामलाल का पहला राउंड चल रहा था, इस बीच सुनीता कभी अपनी चूचियों को दबाती तो कभी अपनी योनि खुजलाती।

जब अनीता और रामलाल स्खलित हो गये तो रामलाल ने कहा- जानू लाओ तो हमारी व्हिस्की की बोतल, इससे जोश पूरा हो जायेगा।

अनीता बोली- मुझे तो बहुत थोड़ी सी देना, मैं तो पीकर सो जाऊँगी। मेरे राजा, आज तो तुमने मेरे फाड़ कर रख दी। योनि भी बहुत दर्द कर रही है।

फिर वह अपने ससुर जी के कान में बोली- आज इसको कतई छोड़ना मत, सोने का बहाना बनाये पड़ी है। आज मैंने ब्लू-फिल्म दिखाकर इसे तुम्हारा यह मूसल सा मोटा लिंग अन्दर डलवाने के लिए बिल्कुल तैयार कर लिया है। लाइट तो ऑन थी ही, पलंग पर दोनों ससुर-बहू बिल्कुल नग्नावस्था में बैठे थे।

सुनीता ने मौसा जी के मोटे लिंग को कनखियों से देखा तो सर से पैर तक काँप गई ‘बाप रे, किसी आदमी का लिंग है या किसी घोड़े का’ पूरे दस इंच लम्बा और मोटा लिंग अभी भी तनतनाया था सुनीता की लेने की आस में।

अनीता ने बोतल की सील तोड़ी और दो गिलासों में शराब उड़ेली दी। दोनों ने जैसे ही सिप करना चाहा कि सुनीता ने कम्बल से मुँह बाहर निकाल कर कहा- दीदी, आप दोनों ये क्या पी रहे हैं? थोड़ी मुझे नहीं दोगे?

अनीता ने गुस्सा दिखाते हुए कहा- ज़हर पी रहे हैं हम लोग, पीयेगी?

‘हाँ, मुझे भी दो न !’

रामलाल ने सुनीता की हिमायत लेते हुए कहा- हाँ, दे दो थोड़ी सी इस बेचारी को भी।

अनीता ने दो पैग शराब एक ही गिलास में डाल दी और गिलास थमाते हुए बोली- ले मर, तू भी पी थोड़ी सी।

सुनीता ने दो घूँट गले से नीचे उतारी, और कड़वाहट से मुँह बनाती बोली- दीदी, यह तो बहुत ही कड़वी है।

‘अब गटक जा सारी चुप-चाप, ज्यादा नखरे दिखाने की जरूरत नहीं है। ला थोड़ा सा पानी मिला दूं इसमें…’ अनीता ने बाकी का खाली गिलास पानी से भर दिया।

सुनीता दो बार में ही सारी शराब गले के नीचे उतार गई और अपना कम्बल ओढ़ कर चुप-चाप सोने का अभिनय करने लगी।

शराब पीने के बाद रामलाल का अध-खड़ा लिंग अब पूरा तन-कर खड़ा हो गया, उसने अनीता से पूछा- क्या शुरू की जाए इसके साथ छेड़खानी?

अनीता ने धीरे से सर हिलाकर रास्ता साफ़ होने का संकेत दे दिया।

 
रामलाल अनीता से बोला- तुम अपने लिए दूसरा कम्बल ले आओ। मैं तो अपनी प्यारी बिटिया के कम्बल में ही सो लूँगा।

ऐसा कह कर वह सुनीता के कम्बल में घुस गया। रामलाल के हाथ धीरे-धीरे सुनीता के वक्ष की ओर बढ़े।

सुनीता ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी, वह केवल नाइटी में थी। रामलाल ने ऊपर से ही सुनीता की चूचियाँ दबा कर स्थिति का जायजा लिया।

सुनीता सोने का बहाना करते हुए सीधी होकर बिल्कुल चित्त लेट गई जिससे कि रामलाल को उसका सारा बदन टटोलने में किसी प्रकार की बाधा न पड़े। उसका दिल जोरों से धड़कने लगा, साँसें भी कुछ तेज चलने लगीं।

रामलाल ने उसके होटों पर अपने होंट टिका दिए और बेधड़क होकर चूसने लगा।

सुनीता ने नकली विरोध जताया- ओह दीदी, क्या मजाक करती हो। मुझे सोने भी दो अब…

रामलाल ने उसकी तनिक भी परवाह न करते हुए उसकी छातियाँ मसलनी शुरू कर दीं और फिर अपने हाथ उसके सारे बदन पर फेरने लगा।

इधर सुनीता पर शराब और शवाब दोनों का ही नशा सवार था, उसके बदन में मदहोशी की हजारों चींटियाँ सी काटने लगीं। उसने अनजान बनते हुए रामलाल की जाँघों के बीच में हाथ कर उसके लिंग का स्पर्श भी कर लिया।

तभी उसने लिंग को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया, और बोली- दीदी, तुम्हारी यह क्या चीज है?

इस बीच रामलाल ने उसकी नाइटी भी उतार फैंकी और उसे बिल्कुल नंगी कर डाला।

रामलाल ने ऊपर से कम्बल हटाकर उसका नग्न शरीर अनीता को दिखाते हुए कहा- देखा रानी, तेरी बहन बेहोशी में जाने क्या-क्या बड़बड़ाये जा रही है?

रामलाल ने उसकी दोनों जाँघों को थोड़ा सा फैलाकर उसकी योनि पर हाथ फिराते हुए कहा- यार जानू, तेरी बहन तो बड़े ही गजब की चीज है। इसकी योनि तो देखो, कितनी गोरी और चिकनी है। कहो तो इसे चाट कर इसका पूरा स्वाद चख लूं? रानी, तू कहे तो इसकी योनि का पूरा रस पी जाऊं… बड़ी रसदार मालूम पड़ रही है।

‘अनीता बोली- और क्या… जब नशे में मस्त पड़ी है तो उठा लो मौके का फायदा। होश में आ गई तो नहीं देगी। अभी अच्छा मौका है, डाल दो अपना समूचा लिंग इसकी योनि के अन्दर।

रामलाल ने उसकी जांघें सहलानी शुरू कर दीं, फिर धीरे से उसकी गोरी-चिकनी योनि में अपनी एक उंगली घुसेड़ कर उसे अन्दर-बाहर करने लगा।

उसने अनीता से पूछा- क्यों जानू… इसकी योनि के बाल तुमने साफ़ किये हैं?

‘नहीं तो…’ अनीता बोली- इसी ने साफ़ किये होंगे, पूरे एक घंटे में बाथरूम से निकली थी नहाकर।

रामलाल सुनीता की योनि पर हाथ फेरता हुआ बोला- क्या गजब की सुरंग है इसकी ! कसम से इसकी सुलगती भट्टी तो इतनी गर्म है कि डंडा डाल दो तो वह भी जल-भुन कर राख होकर निकलेगा अन्दर से।

सुनीता से अब नहीं रहा गया, बोली- तो डाल क्यों नहीं देते अपना डंडा मेरी गर्म-गर्म भट्टी में।

रामलाल की बांछें खिल उठीं। उसने सुनीता की चूची को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

सुनीता की सिसकारियाँ कमरे में गूँज कर वातावरण को और भी सेक्सी व रोमांटिक बनाने लगीं। रामलाल अब खुलकर उसके नग्न शरीर से खेल रहा था।

सुनीता ने रामलाल का लिंग पकड़ कर अपने मुँह में डाल लिया और मस्ती में आकर उसे चूसने लगी। अब उसे अपने बदन की गर्मी कतई सहन नहीं हो रही थी, उसने रामलाल का लिंग अपनी जाँघों के बीच में दबाते हुए कहा- मौसा जी, प्लीज़.. अब अपना यह मोटा डंडा मेरी जाँघों के भीतर सरकाइये, मुझे बड़ा आनन्द आ रहा है।

तब रामलाल ने मोटे लिंग का ऊपरी लाल भाग सुनीता की योनि धीरे-धीरे सरकाना आरम्भ किया। सुनीता योनि में एक तेज सनसनाहट दौड़ गई, उसने कस कर अपने दांत भींच लिए और लिंग की मोटाई को झेल पाने का प्रयास करने लगी।

 
रामलाल का लिंग जितना उसकी योनि के अन्दर घुस रहा था, योनि में उतनी ही पीड़ा बढ़ती जा रही थी।

अब रामलाल के लिंग में भी और अधिक उत्तेजना आ गई थी, उसने एक जोरदार धक्का पूरी ताकत के साथ मारा जिससे उसका समूचा लिंग सुनीता की कोरी योनी को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

सुनीता के मुँह से एक जोरों की चीख निकल कर वातावरण में गूँज उठी और वह रामलाल के लिंग को योनि से बाहर निकालने की चेष्टा करने लगी।

अनीता ने रामलाल से कहा- जानू इसके कहने पर अपने इंजन को रोकना नहीं, देखना अभी कुछ ही देर में रेल पटरी पर आ जाएगी।

योनि से खून बह निकल पड़ा जो चादर पर फैल गया था।

अनीता सुनीता को डांटते हुए बोली- देख सुनीता, अब तू चुपचाप पड़ी रह कर इनके लिंग के धक्के झेलती रह, यों व्यर्थ की चिखापुकारी से कुछ नहीं होगा। इस वक्त जो दर्द तुझे महसूस हो रहा है वह कुछ ही देर में मज़े में बदल जायेगा। इन्हें रोक मत, इनके रेस के घोड़े को सरपट दौड़ने दे, अधाधुंध अन्दर-बाहर। इनका बेलगाम घोडा जितनी तेजी से अन्दर-बाहर के चक्कर काटेगा उतना ही तुझे मज़ा आएगा।

बड़ी बहन की बात मानकर सुनीता थोड़ी देर अपना दम रोके यों ही छटपटाती रही और कुछ ही देर में उसे मज़ा आने लगा।

रामलाल अब तक सेंकडों धक्के सुनीता की योनि में लगा चुका था। अब सुनीता के मुख से रामलाल के हर धक्के के साथ मादक सिसकारियाँ फूट रही थीं। उसे लगा कि वह स्वर्ग की सैर कर रही है। इधर रामलाल अपने तेज धक्कों से उसे और भी आनन्दित किये जा रहा था।

सुनीता अब अपने नितम्बों को उचका-उचका कर अपनी योनि में उसके लिंग को गपकने का प्रयास कर रही थी, वह मस्ती में भर कर चीखने लगी- मौसा जी, जरा जोरों के धक्के लगाओ… तुम्हारे हर धक्के में मुझे स्वर्ग की सैर का आनन्द मिल रहा है… आह:… आज तो फाड़ के रख दो मेरी योनि को… और जोर से… और जोर से… उई माँ… मौसा जी… प्लीज़ धीरे-धीरे नहीं… थोड़े और जोर से फाड़ो…

उसने रामलाल को कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया, अपनी दोनों टाँगों से उसने अपने मौसा जी के नितम्बों को जकड़ रखा था। अजब प्यास सी उसकी जो बुझाए नहीं बुझ रही थी।

अंतत: रामलाल ने उसकी प्यास बुझा ही डाली, सुनीता रामलाल से पहले ही क्षरित हो कर शांत पड़ गई, उसने अपने हाथ-पैर पटकने बंद कर दिए थे पर वह अब भी चुपचाप पड़ी अपने मौसा जी के लिंग के झटके झेल रही थी।

आखिरकार रामलाल के लिंग से भी वीर्य की एक प्रचंड धारा फूट पड़ी, उसने ढेर सारा वीर्य सुनीता की योनि में भर दिया और निढाल सा हो उसके ऊपर लेट गया।

कुछ देर बाद तीनों का नशा मंद पड़ा। रात के करीब दो बजे सुनीता का हाथ रामलाल के लिंग को टटोलने लगा। वह उसके लिंग को धीरे-धीरे पुन: सहलाने लगी। बल्ब की तेज रोशनी में उसने सोते हुए रामलाल के लिंग को गौर से देखा और फिर उसे अपनी उँगलियों में कस कर सहलाना शुरू कर दिया था।

रामलाल और अनीता दोनों ही जाग रहे थे। उसकी इस हरकत पर दोनों खिलखिलाकर हंस पड़े।

अनीता ने कहा- देख ले अपने मौसा जी के लिंग को, है न उतना ही मोटा, लम्बा जितना कि मैंने तुझे बताया था।

वह शरमा कर मुस्कुराई।

रामलाल भी हँसते हुए पूछा- क्यों मेरी जान, मज़ा आया कुछ?

सुनीता ने शरमाकर रामलाल के सीने में अपना मुँह छिपाते हुए कहा- हाँ मौसा जी, मुझे मेरी आशा से कहीं अधिक मज़ा आया आपके साथ। मालूम है, मैंने आपके साथ यह पहला शारीरिक सम्बन्ध बनाया है।

रामलाल बोला- सुनीता रानी, अब से मुझसे मौसा जी मत कहना। मुझसे शारीरिक सम्बन्ध बनाकर तूने मुझे अपना क्या बना लिया है?

सुनीता चुप रही।

रामलाल बोला- अब तूने मुझे अपना खसम बना लिया है। मैं अब तुम दोनों बहनों का खसम हूँ। आई कुछ बात समझ में?

सुनीता बोली- ठीक है खसम जी, पर सबके आगे तो मैं आपको मौसा जी ही कहूँगी।

रामलाल ने सुनीता की योनि में उंगली घुसेड़ कर उसे अन्दर-बाहर करते हुए कहा- चलो सबके आगे तुम्हारा मौसा ही बना रहूँगा।

सुनीता ने रामलाल के एक हाथ से अपनी छातियाँ मसलवाते हुए कहा- हमारा आपसे मिलन भी अनीता दीदी के सहयोग से ही हुआ है। अगर आज दीदी मुझे वह ब्लू-फिल्म नहीं दिखाती तो मैं कभी भी आपके इस मोटे हथियार से अपनी योनि फड़वाने का इतना आनन्द कभी नहीं ले पाती। मेरे खसम, अब तो अपना ये डंडा एक बार और मेरी योनि में घुसेड़ कर उसे फाड़ डालने की कृपा कर दो। इस बार मेरी सुरंग फाड़ कर रख दोगे तब भी मैं अपने मुँह से उफ़ तक न करूंगी।

रामलाल बोला- क्यों अपनी चूत को चित्तोड़-गढ़ बनवाना चाह रही है। मैं तो बना डालूँगा, कुछ धक्को में तेरी योनि की वो दशा कर दूंगा कि किसी को दिखाने के काबिल नहीं रह जाएगी। चल हो जा तैयार…

ऐसा कहकर राम लाल ने अपने मजबूत लिंग पर हाथ फिराया।

इसी बीच अनीता बोली- क्यों जी, आज में एक बात पूछना चाहती हूँ मुझे यह समझाओ कि योनि को लोग और किस-किस नामों से पुकारते हैं?’

अनीता की बात पर सुनीता और रामलाल दोनों खिलखिलाकर हंस पड़े।

रामलाल बोला- मेरी रानी, किसी भी चढ़ती जवानी की लड़की की योनि को चूत कहते हैं। इसके दो नाम हैं- एक चूत, दूसरा नाम है इसका ‘बुर’ चूत सदैव बिना बालों वाली होती है जबकि ‘बुर’ के ऊपर घने काले बाल होते हैं। अब नंबर आता है, भोसड़ी का। मेरी दोनों रानियों ध्यान से सुनना, जब औरत की योनि से एक बच्चा बाहर आ जाता है, तो उसे भोसड़ी कहते है और जब उससे 4-5 बच्चे बाहर आ जाते हैं तो वह भोसड़ा बन जाता है।

सुनीता ने चहक कर पूछा- और अगर किसी औरत योनि से दस-बारह बच्चे निकल चुके हों तो उसकी क्या कहलाएगी?

रामलाल बोला- यह प्रश्न तुमने अच्छा किया। ऐसी औरत की योनि को चूत या भोसड़ी का दर्ज़ा देना गलत होगा। ऐसी योनि बम-भोसड़ा कही जाने के योग्य होगी। तीनों लोग जोरों से हंस पड़े।

सुनीता ने पूछा- राजा जी, इसी प्रकार लिंगों के भी कई नाम होते होंगे?

‘हाँ, होते हैं। आमतौर पर गवांरू भाषा में इसे ‘लंड’ कहते है। परन्तु लड़ते वक्त या गालियाँ देते वक्त लोग इसे ‘लौड़ा’ कहकर संबोधित करते हैं। ये सारे शब्द मुझे कतई पसंद नहीं हैं, क्योंकि मैंने बीसियों रातें तुम्हारी दीदी के संग गुजारी हैं। तुम इनसे ही पूछ लो अगर मैंने कभी इन गंदे शब्दों का प्रयोग किया हो। हाँ, मेरी जिन्दगी में कुछ ऐसी औरतें भी आई हैं, जो अधिक उत्तेजित अवस्था में चीखने लगती हैं ..’फाड़ डालो मेरी चूत’ …’मेरी चूत चोद-चोद कर इसका चबूतरा बना डालो’ …मेरी चूत को इतना चोदो कि इसका भोसड़ा बन जाए’ बगैरा, बगैरा। एक काम-क्रीड़ा होती है- गुदा-मैथुन। इसमें पुरुष स्त्री की योनि न मार कर उसकी गुदा मारता है। मेरे अपने विचार से तो गुदा-मैथुन सबसे गन्दी, अप्राकृतिक एवं भयंकर काम-क्रीड़ा है। इससे एड्स जैसी ला-इलाज़ बीमारियाँ होने का खतरा रहता है।’

 
अनीता ने पूछा- राजा जी, यह चोदना कौन सी बला है। मैंने कितने ही लोगो को कहते सुना है ‘तेरी माँ चोद दूंगा साले’

रामलाल ने बताया कि स्त्री की योनि में लिंग डालकर धक्के मारने की क्रिया को ‘चोदना’ कहते हैं।

मैंने तुम दोनों बहनों के साथ सम्भोग किया है, चोदा नहीं है तुम्हें।’

सुनीता बोली- मेरे खसम महाराज, एक बार और जोरों से चोदो न मुझे !

रामलाल बोला- चलो, तुम्हारी यह इच्छा भी आज पूरी किये देता हूँ। अनीता रानी, पहले एक-एक पैग और बनाओ, हम तीनों के लिए।

तीनों शराब गले से उतारने के बाद और भी ज्यादा उत्तेजित हो गए। इस बार तीनों लोग एक साथ मिलकर काम-क्रीड़ा कर रहे थे।

रामलाल के एक ओर सुनीता और दूसरी ओर अनीता लेटी और उन दोनों की बीच में रामलाल लेटे-लेटे दोनों के नग्न शरीर पर हाथ फेर रहे थे।

रामलाल कभी सुनीता की योनि लेता तो कभी अनीता की चूचियों से खेलता।

रात के दस बजे से लेकर सुबह के पांच बज गए। तब तक तीनों लोग शरीर की नुमाइश और काम-क्रीड़ा में व्यस्त रहे।

इस प्रकार रामलाल ने दोनों बहनों की रात भर बजाई। उस रात दोनों बहनें इतनी अधिक तृप्त हो गईं कि दूसरे दिन दस बजे तक सोती रहीं।

पूरे सप्ताह रामलाल ने सुनीता को इतना छकाया था कि जिसकी याद वह जीवन भर नहीं भूल पाएगी।

सुनीता तो अपने घर वापस जाना ही नहीं चाहती थी। जाते वक्त सुनीता रामलाल से एकांत में चिपट कर खूब ही रोई।

उसका लिंग पायजामे के ऊपर से ही सहलाते हुए बोली- जानू अपने इस डंडे का ख़याल रखना। मुझे शादी के बाद भी इसकी जरूरत पड़ सकती है। क्या पता मेरा पति भी जीजू के जैसा ही निकला तो…?

सुनीता भारी मन से न चाहते हुए भी अपने घर चली तो गई पर जाते-जाते रामलाल के लिए एक प्रश्न छोड़ गई… कि कहीं उसका पति भी जीजू जैसा ही निकला तो??

सुनीता अपनी दीदी के घर से वापिस आ तो गई किन्तु रातें काटे नहीं कट रहीं थीं।

जब उसे रामलाल के साथ गुजारी रातों की याद सताती तो वह वासना के सागर में गोते लगाने लगती और उसके समूचे बदन में आग की सी लपटें उठने लगतीं।

आज तो उसे बिल्कुल नीद नहीं आ रही थी, वह जाकर खिड़की पर खड़ी हो गई और मंझली भाभी के कमरे में झाँकने लगी।

रात के करीब ग्यारह बजे का समय था। ठीक इसी समय उसके बड़े भैया विजय ने भाभी के कमरे में प्रवेश किया।

मझली भाभी के कमरे की हर चीज इस खिड़की से साफ़ दिखाई देती थी।

उसने देखा- बड़े भैया के आते ही मझली भाभी पलंग से उठ खड़ी हुई और वह भैया की बाहों में लिपट गई।

बड़े भैया ने उसके साथ चूमा-चाटी शुरू कर कर दी और उन्होंने भाभी को बिल्कुल नंगा करके उसकी चूचियाँ मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

अब वह खुद भी नंगे हो कर भाभी के नंगे बदन का जमकर मज़ा ले रहे थे।

आज भैया ने भाभी के साथ कुछ अलग ही किस्म का मैथुन करना शुरू कर दिया, भाभी अपने दोनों नितम्बों को पीछे की और उभार कर झुकी हुई थीं और भैया अपना लिंग उनकी गुदा में डालने की कोशिश कर रहे थे।

भैया का मोटा लिंग उनकी गुदा में नहीं घुस पा रहा था इसलिए भैया ने लिंग पर थोड़ा सा तेल लगाया और फिर अन्दर करने की कोशिश करने लगे।

इस बार वह अपनी कोशिश में कामयाब हो गए क्योंकि उनका लिंग आधे से अधिक भाभी की गुदा के अन्दर घुस गया था।

फिर भैया ने एक जोर का धक्का भाभी की गुदा पर लगाया। इस बार पूरा का पूरा लिंग भाभी की गुदा को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया, भाभी दर्द से चिल्लाने लगीं।

भैया ने धीरज बंधाया- कोई बात नहीं मेरी जान, पहली बार गुदा-मैथुन में ऐसे ही दर्द होता है। आगे से ऐसा कुछ भी नहीं होगा।

भाभी की गुदा का दर्द शायद कुछ कम हो गया था क्योंकि उन्होंने भी भैया की लिंग पर पीछे की ओर धक्के लगाने शुरू कर दिए थे।

यह सब देखना सुनीता की बर्दाश्त के बाहर था, अत: उसने अपना एक हाथ सलवार में डालकर अपनी योनि को कुरेदना शुरू कर दिया।

इसी बीच छोटे भैया आ धमके, उसे खिड़की पर आँखें टिकाये देखकर मुस्कुराते हुए बोले- सुन्नो, दीदी के पास से आते ही तुमने फिर से भैया और मझली भाभी की ब्लू-फिल्म देखना शुरू कर दी। हट, अब मैं भी थोड़ा सा मज़ा ले लूँ।

सुनीता के वहाँ से हटते ही अजय भैया ने अपनी आँखें खिड़की पर टिका दीं, सुनीता अपने कमरे में आकर कुर्सी पर बैठ गई।

 
तभी उसकी निगाह मेज पर रखी एक इंग्लिश मैगजीन पर पड़ी। उठाकर देखा तो ज्ञात हुआ कि वह एक सेक्सी-मगज़ीन थी, उसमें एक जगह पर सुनीता ने मास्टरबेशन, फिंगरिंग और फिस्टिंग जैसे शब्द पढ़े, जो उसकी समझ में नहीं आ रहे थे।

उसने मन में सोचा कि भैया से सेक्स के बारे में बात करने का इससे बढ़िया मौका उसे कभी नहीं मिलेगा, क्यों न भैया के कमरे में चल कर इन बातों का ही मज़ा लिया जाए।

वह उठ कर भैया के कमरे की चल दी। अजय अपने कमरे में एक कुर्सी पर बैठा हुआ था। सुनीता दरवाजा ठेल कर अन्दर आ गई और अजय से बोली- भैया, मुझे इन शब्दों के अर्थ नहीं समझ में आ रहे हैं, मुझे बता दो प्लीज़…

अजय ने देखा कि वही सेक्सी मैगज़ीन सुनीता के हाथ में थी जिसे वह स्वयं सुनीता की अनुपस्थिति में उसकी मेज पर रख आया था जिससे कि सुनीता उसे पढ़े तो उसके अन्दर भी सेक्स की भावना प्रबल हो उठे।

सेक्स की मैगज़ीन को सुनीता के हाथ में देखकर अजय मन ही मन खुश हो उठा पर ऊपर से गुस्सा दिखाते हुए उसे डांटकर बोला- अरे यह तो सेक्सी मैगज़ीन है। कहाँ से लाई इसे? ऐसी सेक्सी किताबें पढ़ते हुए तुझे शर्म नहीं आती? मालूम है, ये सेक्सी-मैगज़ीन बड़े लोग पढ़ा करते हैं।

सुनीता बेझिझक होकर बोली- भैया, मैं भी तो अब बालिग़ हो चुकी हूँ। पूरे 19 वर्ष की हो चुकी हूँ। फिर मेरी शादी भी तो होने वाली है अब।

अजय चुप हो गया और बोला- बता, क्या पूछना चाहती है?

सुनीता ने पूछा- भैया, यह मास्टरबेशन क्या होता है? एक ये फिंगरिंग और फिस्टिंग शब्दों का मतलब समझ में नहीं आ रहा।

अजय मुस्कुराया और बोला- जा पहले कमरे की सिटकनी लगा कर आ… तब मैं डिटेल में तुझे इसका मतलब समझाऊंगा।

सुनीता ने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। उसके मन में लड्डू फूट रहे थे कि आज अजय उसकी जरूर लेगा।

वह ख़ुशी-ख़ुशी लौटकर आई और कुर्सी खींच कर अजय के पास ही बैठ गई।

अजय ने कहा- सुन्नो, देख मैं तुझे समझा तो दूँगा इन शब्दों का मतलब, लेकिन जब तब इन पर प्रेक्टिकल करके नहीं समझाऊँगा, तेरी समझ में कुछ नहीं आने वाला ! बोल…समझेगी?

‘हाँ भैया, मुझे कैसे भी समझाओ, मुझे मंजूर है।’

‘उस दिन जब मैंने तेरी चूचियों पर हाथ फिराया था तो तू नाराज होकर अन्दर क्यों भागी थी?’

‘भैया, उस समय मुझे डर लग रहा था। हम लोग बाहर खड़े थे, कोई देख लेता तो..? मैं अन्दर आई ही इसीलिए थी कि अगर आप अन्दर आकर मेरी चूचियाँ सहलाओगे तो किसी को भी पता नहीं चलेगा और मुझे भी अच्छा लगेगा।’

अजय बोला- इसका मतलब तो यह हुआ कि तू उस दिन भी तैयार थी अपनी चूचियों को मसलवाने के लिए? अरे यार, मैं ही बुद्धू था, जो उस दिन बुरी तरह डर कर भाग निकला। अच्छा, आ बैठ मेरे पास और एक बात बता …क्या सच में तू मेरे साथ मज़े लूटना चाहती है या मुझे उल्लू बनाने के मूड में है। अगर वाकई तू जवानी के मज़े लेना चाहती है तो चल मेरे बैड पर चलते हैं।

सुनीता और अजय दोनों अब बैड पर आ बैठे।

अजय ने पूछा- लाइट यों ही जलने दूं या बंद कर दूं?

सुनीता बोली- भैया, जैसी आपकी मर्ज़ी, वैसे अँधेरे में मेरी समझ में क्या आएगा। मुझे अभी आपसे बहुत कुछ पूछना बाकी है।

‘जैसा तू ठीक समझे, देख शरमाना बिल्कुल नहीं… वरना कुछ मज़ा नहीं आएगा। एक बात और…

‘क्या भैया?’

‘कल को किसी से कहेगी तो नहीं कि भैया ने मेरे साथ ये सब किया।’

‘नहीं भैया, मैं कसम खाकर कहती हूँ किसी को कुछ नहीं बताऊँगी।’

‘तो चल, पहले मैं तेरे संग वो करता हूँ जहाँ से पति-पत्नी के मिलन की शुरुआत होती है। तू मेरे बिल्कुल करीब आकर मुझसे चिपट जा…’

सुनीता आकर अजय से चिपट गई और उसके गले में हाथ डालकर बोली- बताओ भैया, अब मुझे क्या करना है।

अजय बोला- अब तुझे कुछ भी नहीं करना है, बस मज़े लेती जाना। जहाँ तुझे परेशानी हो मुझसे कहना, ठीक है?

‘ठीक है भैया…’ अजय ने सुनीता के होटों पर अपने होंट रख दिए और उन्हें चूसने लगा।

सुनीता ने भी उसका पूरा साथ दिया। अजय के हाथ सुनीता की ब्रा के हुक खोल रहे थे, सुनीता ने जरा भी विरोध न किया, वह सुनीता की चूचियों को जोरों से दबाने लगा।

उसने चूची की घुंडियों को मुँह में डालकर उन्हें भी चूसना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे अजय के हाथ सुनीता की नाभि के नीचे के भाग को टटोल रहे थे। अजय का एक हाथ सुनीता की सलवार के नाड़े से जा उलझा। वह उसे खोलने का प्रयास करने लगा और कुछ ही देर में अजय ने सुनीता की सलवार उतारकर पलंग के एक ओर रख दी।

सुनीता कौतूहलवश यह सब चुपचाप देखे जा रही थी, उसकी दिल की धड़कनें बढ़ने लगी थीं, साँसों की गति भी तेज हो गई थी किन्तु फिर भी वह अजय के अपनी नाभि से नीचे की ओर फिसलते हुए हाथों को रोकने का प्रयास तक नहीं कर पा रही थी।

 
अजय के हाथ धीरे-धीरे सुनीता की नंगी-चिकनी जाँघों पर फिसलने लगे।

फिर उसने सुनीता की दोनों जाँघों के बीच में कुछ टटोलना आरम्भ कर दिया।

इससे पहले अजय ने अभी तक किसी लड़की की चूत इतनी करीब से नहीं देखी थी और न किसी की चूत को सहलाया ही था, वह बोला- सुन्नो, आज मैं तेरी प्यारी-प्यारी चूत को गौर से देखना चाहता हूँ।

सुनीता बोली- भैया, मुझे भी अपना लंड दिखाओ न !

‘दिखा दूंगा, तुझे अपना लंड भी दिखाऊंगा, घबराती क्यों है सुन्नो मेरी जान ! आज मैं तेरी हर वो इच्छा पूरी करूंगा जो तू कहेगी।’

‘ तो पहले अपना लंड मेरे हाथों में दो, मैं देखना चाहती हूँ कि मेरी चूत में यह अपनी जगह बना भी पायेगा या फाड़कर रख देगा मेरी चूत को।’

अजय ने झट-पट अपने सारे कपड़े उतार फैंके और एकदम नंगा होकर सुनीता की बगल में आ लेटा, सुनीता की ऊपर की कुर्ती भी उसने उतार कर पलंग के नीचे गिरा दी।

अब सुनीता भी एकदम नंगी हो गई थी, दोनों एक दूसरे से बुरी तरह से चिपट गए और एक दूसरे के गुप्तांगों से खेल रहे थे।

अजय सुनीता की चूत में अपनी एक उंगली डालकर आगे-पीछे यानि अन्दर-बाहर कर रहा था जिससे सुनीता के मुँह से सिसकियाँ निकल रहीं थीं।

अजय ने सुनीता को बताया कि इसी कार्य को फिंगरिंग कहते हैं। फिंगरिंग अर्थात चूत में उंगली डालकर उसे अन्दर-बाहर करना। इस क्रिया को हिन्दी में हस्त-मैथुन तथा अंग्रेजी में मास्टरबेशन कहते हैं।

अजय बोला- जब औरत काफी कामुक और चुदालु प्रकृति की हो उठती है तो वह किसी भी मर्द से या स्वयं ही अपनी योनि में पूरी मुट्ठी डलवाकर सम्भोग से भी कहीं अधिक आनन्द का लाभ उठाती है। सुन्नो, अब मैंने तीनो शब्दों का अर्थ बता दिया है। अब मैं तुझसे इसकी फीस वसूलूंगा।

अजय एक तकिया उसके नितम्बों के नीचे लगाते हुए बोला- अब मैं तेरी चूत में उंगली डालकर मैं अपनी उंगली को आगे-पीछे सरकाऊँगा यानि फिंगरिंग करूंगा।

अजय ने सुनीता की चूत में उंगली डालकर अन्दर-बाहर रगड़ना शुरू कर दिया, सुनीता के मुँह से सिसकियाँ फूटने लगीं।

अजय ने पूछा- बता सुन्नो, तुझे कैसा महसूस हो रहा है?

‘अच्छा लग रहा है भैया, जरा जोर से करो न, आह: मज़ा आ रहा है। एक बात बताओ भैया, आपने मेरे चूतड़ों के नीचे यह तकिया क्यों लगा दिया?’

‘इसलिए कि चूतड़ों के नीचे तकिया लगाने से औरत की चूत पहले की अपेक्षा कुछ अधिक खुल जाती है और उसमे कितना ही मोटा लंड क्यों न डाल दो, वह सब-कुछ आसानी से झेल जाती है।’

सुनीता बोली- भैया, बुरा तो नहीं मानोगे, एक बात पूछूं आपसे?

‘पूछ चल !’

‘कहीं आप मेरी चूत में अपना लंड डालने की तैयारी तो नहीं कर रहे?’

‘हो भी सकता है अगर मेरे लंड से बर्दाश्त नहीं हुआ तो तेरी चूत मैं इसे घुसेड़ भी सकता हूँ।’

‘भैया, पहले अपने लंड का साइज़ दिखाओ मुझे… मैं भी तो देखूं कितना मोटा है आपका.. मैं आपका लम्बा-मोटा लिंग झेल भी पाऊँगी या नहीं।’

‘चल तुझे अपना लंड दिखाता हूँ… तू भी क्या याद करेगी कि भैया ने अपना लंड दिखाया, सुन्नो, एक बात तुझे पहले बताये देता हूँ, अगर मेरा मन कहीं तेरी चूत लेने को हुआ तो देनी पड़ेगी। फिर तुझे बिना चोदे मैं छोड़ने का नहीं।’

यह कहते हुए अजय ने अपने पेण्ट की जिप खोली और अपना लम्बा-मोटा सा लिंग निकाल कर सुनीता के हाथ में थमा दिया।

सुनीता ने कहा- भैया, इसे मैं सहलाऊँ?

‘सहला दे …’

सुनीता ने सहलाते-सहलाते उसके लिंग को चूम लिया और उसे ओठों से सहलाने लगी।

अजय ने ताव में आकर सुनीता की चूचियाँ जोरों से रगडनी शुरू कर दीं।

सुनीता बोली- भैया, अब खुद भी नंगे हो जाओ न, मुझे आपका लंड खुलकर देखने की जल्दी हो रही है।

अजय ने अपना पैंट और अंडरवियर दोनों ही उतार फैंके और सुनीता के ऊपर आ चढ़ा।

सुनीता बोली- क्यों न हम एक दूसरे का नंगा बदन गौर से देखें। मुझे तो तुम्हारा ये गोरा और मोटा लंड बहुत ही उत्तेजित कर रहा है।

अजय बोला- मैंने भी तेरी चूत अभी गौर से कहाँ देखी है। चल फैला तो अपनी दोनों जांघें इधर-उधर।

सुनीता ने अपनी दोनों जांघें फैलाकर अपनी चूत के दर्शन कराये, अजय सचमुच सुनीता की चूत देखकर निहाल हो गया।

वह सुनीता से बोला- सुन्नो, मेरी जान, आज तो अपनी इस गोरी, चिकनी और चुस्त चूत को मेरे हवाले कर दे। तेरी कसम जो भी तू कहेगी जिन्दगी भर करूंगा।

‘वादा करते हो भैया, जो कहूँगी करोगे?’

‘हाँ, चल वादा रहा…’

‘अपने ख़ास दोस्तों से चुदवाओगे मुझे? देखो तुमने वादा किया है मुझसे।’

‘अच्छा चल, चुदवादूंगा तुझे, लेकिन यह बता कि तू इतनी चुदक्कड़ कबसे बन गई।’

‘यह सब बाद में बताऊँगी, पहले अपना लंड मेरी सुलगती बुर में डालकर तेजी से कस-कस कर धक्के लगा दो।’

अजय को भी अब बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, उसने अपने लंड की सुपारी सुनीता की चूत के मुँह पर रखकर एक जोर का धक्का मारा। उसका समूचा लंड सुनीता की चूत में जा समाया।

 
आनन्दानुभूति से किलकारियाँ भरने वह और जोरों से चिल्ला-चिल्लाकर अपने दोनों चूतड़ उछाल-उछाल कर अजय के मोटे लंड को अपनी चूत में गपकने की चेष्टा करने लगी।

अजय को भी लगा कि उसका लंड किसी गर्म सुलगती भट्टी में जा समाया है। गर्म भट्टी में होने के बावजूद उसे आनन्द की अनुभूति हो रही थी। वह जोरों के धक्के सुनीता की बुर में लगाए जा रहा था।

इधर सुनीता का हाल तो काबिले-बयाँ था, वह तो इतनी गरमा गई थी कि मुँह से अनेक गंदे-गंदे शब्दों का प्रयोग कर रही थी जैसे- आह: फाड़ डालो मेरी चूत को …भैया, आज मेरी चूत को चोद-चोदकर निहाल कर दो मुझे … आज अपने लंड के सारे जौहर मेरी चूत के ऊपर ही दिखा दो …जरा जोरों से चोदो न, अगर तुमने मुझे आज तृप्त कर दिया तो मैं अपनी सारी सहेलियों को तुमसे चुदवा डालूंगी…

लगभग एक घंटे की काम-क्रीड़ा के बाद अजय ने सुनीता को पूरी तरह से छका दिया और खुद ने भी छक कर उसकी चूत का मज़ा लिया।

आधी रात के बाद सुनीता की योनि फिर गर्म होने लगी, उसने अजय का लंड पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया।

काफी देर तक वह अजय का लंड पकडे उसे चूमती-चाटती रही, अंतत: अजय की आँखें खुल ही गईं, वह बोला- सुन्नो, अब हम-लोग काफी थक गए हैं, अभी सो जाओ, कल की रात भी तो आएगी ही। बाकी अगर आज कोई कमी रह गई है तो कल पूरी कर लेंगे। अब हम-तुम एक दूसरे के इतने करीब आ गए हैं कि हमारा ये साथ छुटाए नहीं छूटेगा। जाओ आराम कर लो।

सुनीता अब एक ऐसी औरत बन चुकी थी कि उसे तृप्त करना कोई आसान काम नहीं रह गया था। उसकी तो ख्वाहिश इतनी बढ़ चुकी थी कि एक साथ अगर उस पर दस-बारह लोग भी उतर जाएँ तो भी वह थकने वाली न थी।

सुबह नाश्ते की मेज पर अजय ने उससे पूछा- सुन्नो, रात मैंने एक बात नोटिस की कि तूने मेरा आठ इंच का लंड आसानी से झेल लिया और न तो तेरी चूत फटी और न ही उससे खून ही निकला।

‘सच-सच बताऊँ ..तो सुनो। जब मैं दीदी के यहाँ गई तो उस समय तक मैं बिल्कुल अछूती, अनछुई या ये कहिये बिल्कुल कच्ची कली थी। दोपहर को दीदी ने मुझे एक ब्लू-फिल्म दिखाई जिसे देख कर मेरा दिल मेरे काबू से बाहर हो गया और मैं किसी मर्द का लंड अपनी चूत में डलवाने को तड़प उठी।

मेरी तड़प देखकर दीदी बोली- घबरा मत, आज तेरी इच्छा पूरी करवा दूँगी।

मैंने चौक कर पूछा कि कौन है जो मेरी इच्छा पूरी कर सकता है तो दीदी ने बताया कि उसके ससुर रामलाल हैं।

मैंने आश्चर्य से पूछा कि वह क्या कह रहीं हैं, तो ज्ञात हुआ कि वह स्वयं भी उन्हीं से अपनी आग ठंडी करवाती है।

दीदी ने बताया कि जीजू तो किसी काम के हैं नहीं, वे तो एकदम नपुंसक हैं। दीदी ने बहुत कोशिश की पर जीजू का लंड खड़ा होने का नाम ही नहीं लेता। अंत में हार-थक कर दीदी को ससुर की बात ही माननी पड़ी और आज उनके पेट में जो बच्चा पल रहा है वो भी उनके ससुर का ही है। जिस रात में ब्लू-फिल्म देख कर बेकाबू हो रही थी उसी रात को दीदी ने मुझे भी उन्ही से चुदवाने की राय दी और मैं मान गई।

लेकिन भैया, एक बात तो माननी पड़ेगी। मौसा जी का लंड है बड़े गजब का। पट्ठे ने एक साथ हम दोनों बहनो की रात में तीन वार ली परन्तु मज़ाल क्या जो जरा भी कमजोर पड़ जाता हमारे आगे।

सारी बात सुनकर अजय बोला- सुन्नो, मुझे दीदी के ससुर पर क्रोध भी आ रहा है और उसे धन्यवाद देने का मन भी कर रहा है।

सुनीता ने पूछा- ऐसा क्यों भैया?

अजय बोला- गुस्सा इसलिए कि उसने अपनी बेटी समान बहु और उसकी बहन की लेने से नहीं चूका। और धन्यवाद इसलिए देता हूँ कि अगर वह तुझे न चोदता तो तू मुझसे कैसे चुदवाती। अच्छा चल, दीदी के यहाँ चलने का प्रोग्राम बनाते हैं किसी दिन।

मैंने पूछा- भैया, अचानक आपको दीदी के यहाँ जाने की क्या सूझी?

अजय ने मुस्कुराकर कहा- पगली, जब दीदी अपने ससुर से चुदवा सकती है तो मैं क्यों उसे नहीं चोद सकता?

अजय ने सुनीता को समझाया- देख सुनीता, हम-तुम तो जीवन भर एक-दूजे के रहेंगे। पर अगर दीदी की चूत मिल जाए तो क्या बुरी बात है। तू अपनी मर्ज़ी बता, अगर मैं कुछ गलत सोच रहा होऊं तो। और फिर मैंने तुझसे ये वादा भी तो किया है कि मैं अपने सारे दोस्तों से तुझे चुदवाने की खुली छूट दे दूंगा और तू अपनी सहेलियों की मुझे दिलाएगी।

इस बात पर दोनों ही सहमत हो चुके थे।

कहानी जारी रहेगी।

 
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