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बदलते रिश्ते

सुनीता और अजय दोनों भाई-बहन अपनी दीदी अनीता के यहाँ आ गये थे। अनीता ने भाई बहन की खूब खातिरदारी की।

सुनीता ने पूछा- दीदी, कहीं मौसा जी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं?

अनीता ने मुस्कुराते हुए पूछा- क्या बात है सुनीता, मौसा जी को देखे बिना चैन नहीं पड़ रहा? ठीक है, अभी दुकान तक ही गए हैं, आते ही होंगे।

सुनीता बोली- दीदी, जीजू कैसे हैं? उनमे कोई बदलाव आया है क्या?

अनीता जीजू के नाम पर झुझलाकर बोली- अब उनमें कोई बदलाव नहीं आने वाला। एक दिन तो उन्होंने साफ़-साफ़ कह दिया कि अगर रहना है तो रह मेरे पास वर्ना किसे से भी अपने यौन-सम्बन्ध बना ले, मुझे कोई एतराज नहीं। अब तुझे मैं उनके बारे में क्या खाक बताऊँ?

अनीता ने पूछा- तू बता इतनी जल्दी कैसे वापस आ गई? क्या मौसा जी की याद खींच लाई।

सुनीता ने सर हिलाकर हामी भरी और बोली- दीदी, तुमने वह सीडी दिखाकर मेरे तन-बदन में जो आग लगाई है न, वो अब बुझाये नहीं बुझ रही है। मन में आया कि चलकर मौसा जी से ही मज़े लिए जाएँ। वैसे दीदी बुरा न मानना, मैंने अजय भैया को भी अपनी दे डाली है। क्या करती, हम-दोनों खिड़की की ओट से बड़े भैया और मझली भाभी की ब्लू-फिल्म देख रहे थे कि अजय भैया ने मेरी चूचियाँ सहलानी शुरू कर दी और मैं उनके बढ़ते हुए हाथों को कतई रोक न पाई। हम लोग कमरे में आ गए और उन्होंने मेरी सलवार उतार कर मेरी चूत में उंगली डालकर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैंने तो फिर उनके आगे हथियार डाल दिए और अपने को उनके हाल पर छोड़ दिया। फिर क्या था, उन्होंने मेरी ब्रा खोली और खूब जमकर उन्होंने मेरी चूचियों को रगड़ा, चूसा और सहलाया। मुझे विरोध न करते देख उनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने मेरी सलवार भी उतार फैंकी और खुद भी नंगे होकर मुझ पर चढ़ गए और फिर उन्होंने मेरी चूत पर अपना मोटा लंड टिकाकर मुझे जोरों से चोदना शुरू कर दिया। सारी रात उन्होंने मेरी ली। मेरा भी मन नहीं भर रहा था इसलिए मेरे कहने पर उन्होंने मेरी बुर चार-पांच बार चोदी। फिर मैं उन्हें पटाकर तुमसे मिलने का बहाना बना कर अजय भैया को यहाँ ले आई।

सुनीता की जुबानी सारी सच्चाई सुनकर अनीता ने पूछा- कहीं अजय अब मेरी तो नहीं लेगा। देख सुनीता, तूने तो मेरे इतना मना करने के बावजूद भी उससे अपनी चुदवा ली, पर याद रखना मैं ऐसा हरगिज़ नहीं करवा सकती। चाहे वह बुरा माने या भला। बहरहाल मुझे किसी कीमत पर उसे अपनी नहीं देनी है।

सुनीता बोली- दीदी, यह तुम्हारी अपनी मर्ज़ी है। पर एक बात तो है कि मैं मौसा जी से आज रात जरूर चुदवाऊँगी।

अनीता ने पूछा- अच्छा सुनीता एक बात बता, अजय का लिंग भी तेरे मौसा जी के लिंग के बराबर ही है?

सुनीता बोली- दीदी, है तो करीबन उतना ही लम्बा और मोटा किन्तु सख्त बहुत है। सच मानना दीदी, तीन दिन तक तो मेरी बुर सूजी रही थी। पूरे एक घंटे तक ली थी भैया ने मेरी। आह: दीदी, सच पूछो तो अजय भैया का लंड भी न, बड़ा ही मज़े देता है। मेरी बात मानकर अपनी चूत में एक बार उनका लंड ले जाकर तो देखो, अगर न अपने तन की सुध-बुध भूल जाओ तो कहना।

‘देख अजय के लंड की इतनी तारीफें कर-करके मेरे मुँह में पानी मत भरवा। तू कितनी ही कोशिश कर मैं खूंटे पर रख कर फाड़ दूँगी अपनी परन्तु अजय को नहीं दूँगी।’

सुनीता बोली- जैसा तुम ठीक समझो दीदी, मैं तो रात में अपने बिस्तर से उठ कर मौसा जी के कमरे में चली जाऊंगी। आज रात तुम्हारे कमरे में अजय भैया और तुम ही सोओगी सिर्फ।

सुनीता की बात पर अनीता अजय की वारे में बहुत देर तक सोचती रही। वह सोच रही थी की जब सुनीता उसके लंड की इतनी तारीफ़ कर रही है तो उसका स्वाद भी चख लिया जाए। जब मैं पिता समान ससुर से चुदवा सकती हूँ तो वह तो फिर भी मेरा भाई ही है।

इसी उधेड़-बुन में कब रात हो गई।

 
उसे तो तब पता चला जब रामलाल दुकान से समान लेकर भी लौट आया और उसने ढेरों बातें सुनीता से भी कर डालीं। अनीता ने पास आकर रामलाल से कहा- जानू आज मेरा छोटा भाई आया है। उसके सामने अपनी पोल न खुल जाए इसलिए सुनीता मौका पाकर तुम्हारे कमरे में खुद ही आ जायेगी, ज्यादा द्वन्द मत काटना। खूब लेना मज़े लेकिन सुनीता के साथ। मुझे बिल्कुल भी आवाज न देना। रामलाल एक समझदार ससुर की भांति बहू की बात मान गया।

खाना खाकर सब लोग अपने-अपने कमरे में चले गए।

अजय ने पूछा- मौसा जी, जीजू कहाँ गए हैं?

रामलाल ने बताया कि आज उसे अनाज लेकर अनाज मंडी भेजा है। अजय की तो मन की बात हो गई। उसके दिल में अन्दर ही अन्दर लड्डू फूटने लगे थे, अब वह आसानी से दीदी की चूत ले सकेगा।

रात के करीब 11 बजे का वक्त होगा, सुनीता चुपचाप अनीता के पास से उठकर रामलाल के कमरे में जा घुसी।

अनीता और अजय अपने-अपने बिस्तर पर लेटे नीद आने का इन्तजार कर रहे थे। अनीता के मन में धक्-धक् हो रही थी कि कहीं अजय उसके साथ कुछ करने लगे तो उसे कैसे रोकेगी वह। सुनीता की तो ले ही चुका है, अब उसका अगला निशाना कहीं वह न हो। इसी बीच अजय ने अनीता को आवाज दी- दीदी, क्या सो गईं?

अनीता ने कहा- नहीं तो, क्या बात है?

अजय बोला, दीदी, तुम्हें भी नीद नहीं आ रही क्या?

अनीता बोली- ऐसी बात नहीं, पर मेरे सिर में कुछ दर्द सा है, इसी लिए नीद नहीं आ रही है। अजय बोला- दीदी आपका सिर दबा दूं? मेरे हाथों में जादू है। हल्के हाथ से दबाने पर ही सर दर्द गायब हो जाएगा।

अनीता कुछ न बोली और अजय उसकी मौन स्वीकृति को भांप कर अनीता के सिरहाने जा बैठा और हलके-हलके उसका सर दबाने लगा। अजय के हाथ अनीता के सर पर इस प्रकार से फिर रहे थे कि उसे स्वयं भी अच्छा लगने लगा था।

‘दीदी, कन्धों में भी दर्द हो रहा है न !’ ऐसा कहकर उसने अनीता की हाँ, ना का इंतजार न करते हुए उसके कन्धों पर भी धीरे-धीरे हाथ फिराने शुरू कर दिए थे।

अनीता ने सोने का अभिनय करते हुए खर्राटे भरने शुरू कर दिए थे। अजय ने अवसर पाकर उसके कन्धों से नीचे की ओर अपने हाथ फिसलाने शुरू कर दिए और उसकी चूचियों को भी हल्के से सहलाना आरम्भ कर दिया।

अनीता तो जगी ही पड़ी थी किन्तु फिर भी वह अनजान बनी चुपचाप लेटी रही।

उसने नीद में होने का अभिनय करते हुए अपने बदन को बिल्कुल सीधा कर दिया।

अजय को उससे अनीता के सारे बदन को टटोलने में काफी सुविधा हो गई, वह अपने हाथ धीरे-धीरे फिसलाता हुआ उसकी जाँघों तक ले आया।

धीरे से उसने अनीता की साड़ी उठाकर उसके पेट पर रख दी और उसकी चिकनी मासल जाँघों पर हाथ फिराने लगा।

अनीता के मुँह से एक हल्की सी सिसकारी फूटी जिसका अजय ने तुरंत लाभ उठाकर अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसेड़ कर उसे अन्दर-बाहर करने लगा।

अनीता ने मस्ती में आकर अपना एक हाथ अजय के लिंग को टटोल कर उसे पकड़ लिया और बोली- अजय, तू मुझसे कितना छोटा है, तुझे चोदने को सिर्फ मैं ही मिली थी।

अजय बोला- नहीं दीदी, आपसे पहले मैं सुनीता को भी चोद चुका हूँ चुदवाते वक्त सुनीता ने मुझे सब-कुछ बता दिया कि सबसे पहले उसने तुम्हारे ससुर से अपनी चूत फटवाई है। उसने यह भी बताया क़ि जीजू तो नामर्द हैं। इसी लिए दीदी भी अपने ससुर से अपनी आग शांत करवाती हैं। अब दीदी, एक बात बताओ, अगर तुम्हारा छोटा भाई भी बहती गंगा में हाथ धो लेगा तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाएगा।

ऐसा कहकर अजय ने अपनी उंगलियों से अनीता की चूत सहलानी शुरू कर दी और दोनों छातियों को कस-कस कर दबाने और चूसने लगा।

अनीता के बदन के सारे तार झनझना उठे। उसने कस कर अजय को अपनी बांहों में जकड़ लिया और बोली- अच्छा चल तू भी ले ले मेरी, डाल दे अपना पूरा लंड मेरी चूत में। पर तुझे मेरी कसम, इस बात का ज़िक्र किसी से भूल कर भी न करना।

अजय बोला- दीदी, क्या मैं पागल हूँ जो किसी से ऐसी बातें कहूँगा। लोग मुझे ‘बहनचोद’ कहकर नहीं पुकारेंगे।

‘तो ठीक है, आ जा सारे कपड़े उतार कर मेरे ऊपर।’

और फिर अजय ने एक ही धक्के में अनिता की चूत में अपना पूरा लंड घुसेड़ दिया।

अजय बोला- दीदी, आपको तो जरा भी दर्द नहीं हुआ और मेरा समूचा लंड तुम्हारी बुर में समा गया। सुनीता ने कुछ दर्द महसूस तो किया था।

‘देख अजय, मैं कब से अपने ससुर से चुदवा रही हूँ। अनीता ने सिर्फ एक सप्ताह ही अपने मौसा जी से चुदवाई है। उसकी मुझसे ज्यादा चुस्त तो होगी ही। अच्छा, अब देर मत कर, मेरी चूत को जितनी तेजी से फाड़ सके, फाड़ डाल इसे।’

अजय ने एक जोरदार धक्का फिर अनीता की चूत में दे मारा और अनीता ख़ुशी से उछल पड़ी और उसकी सिसकारियाँ उस बड़े कमरे में गूंजने लगीं ‘…आह: अजय…मेरे भाई… आज पूरी ताकत से मेरी बुर को फाड़ डाल मेरे भैया, अगर तूने मुझे खुश कर दिया तो फिर तेरे लिए अपनी चूत के द्वार हमेशा-हमेशा के लिए खोल दूँगी …आज मेरी चूत का चित्तोड़-गढ़ बना डाल।

तेरा जीजू तो न मर्द है साला ….’

अनीता चूतड़ उछाल-उछाल कर अजय के लंड को अन्दर ले जाने का भरसक प्रयास कर रही थी। और अंत में दोनों ही एक साथ झड़ गए।

काफी देर तक दोनों एक दूसरे से नंगे बदन लिपटे रहे।

सुबह सुनीता ने आकर दोनों के ऊपर से कम्बल उठाया तो दोनों को नंगा लिपटे देखकर खिलखिलाकर हंस पड़ी तो उनकी नींद टूटी। अनीता की बात बन आई, वह बोली- क्यों दीदी, याद है तुमने क्या कहा था कि ‘खूंटे पे रखकर फाड़ दूँगी पर भाई को नहीं दूँगी।’

अनीता झेंप सी गई और बोली- चुप हरामजादी, तूने ही तो इसके लंड की तारीफों के पुल बाँध कर मुझे इससे चुदने को मजबूर कर दिया।

‘दीदी…’ सुनीता बोली- अब तो मैं अजय भैया से रोज रात को चुदवा सकती हूँ? सच बताओ तुम्हें भैया का लंड कैसा लगा।

अनीता मुस्कुरा भर दी। अगले दिन सुनीता और अजय ने विदा ली और अपने घर की ओर चल पड़े।

रास्ते भर दोनों लोग अपने अगले प्लान के बारे में सोचते रहे। अंत में उन्होंने तय किया कि वह किस प्रकार अपने बड़े भैया जो मंझली भाभी को चोदते हैं, को ब्लैकमेल करके पहले उनसे खुद चुदवायेगी और फिर वह मंझली भाभी को डरा-धमका कर अजय भैया से चुदवाने को मजबूर कर देगी।

 
सुबह सुनीता ने आकर दोनों के ऊपर से कम्बल उठाया तो दोनों को नंगा लिपटे देखकर खिलखिलाकर हंस पड़ी तो उनकी नींद टूटी। अनीता की बात बन आई, वह बोली- क्यों दीदी, याद है तुमने क्या कहा था कि ‘खूंटे पे रखकर फाड़ दूँगी पर भाई को नहीं दूँगी।’

अनीता झेंप सी गई और बोली- चुप हरामजादी, तूने ही तो इसके लंड की तारीफों के पुल बाँध कर मुझे इससे चुदने को मजबूर कर दिया।

‘दीदी…’ सुनीता बोली- अब तो मैं अजय भैया से रोज रात को चुदवा सकती हूँ? सच बताओ तुम्हें भैया का लंड कैसा लगा।

अनीता मुस्कुरा भर दी। अगले दिन सुनीता और अजय ने विदा ली और अपने घर की ओर चल पड़े।

रास्ते भर दोनों लोग अपने अगले प्लान के बारे में सोचते रहे। अंत में उन्होंने तय किया कि वह किस प्रकार अपने बड़े भैया जो मंझली भाभी को चोदते हैं, को ब्लैकमेल करके पहले उनसे खुद चुदवायेगी और फिर वह मंझली भाभी को डरा-धमका कर अजय भैया से चुदवाने को मजबूर कर देगी।

सुनीता और अजय दोनों अब पूरी योजना बना चुके थे कि उन्हें बड़े भैया रविशंकर को और मझली भाभी को अपने शिकंजे में कैसे फांसना है। सुनीता का मकसद था बड़े भैया के साथ मजे लेना और अजय का इरादा था अपनी मझली भाभी की फ़ुद्दी चोदना।

अत: एक दिन मौका पाकर सुनीता बड़े भैया के कमरे में जा पहुँची और बोली- बड़े भैया, मेरे सीने में एक गाँठ उभर आई है, इसमें सुबह से हल्का सा दर्द हो रहा है।

ऐसा कहते हुए सुनीता ने रवि का हाथ पकड़ अपनी दाहिनी चूची पर रख दिया। रवि के तन-बदन में एक झुरझुरी सी आ गई।

सुनीता बोली- भैया अन्दर से पकड़ कर देखो, ऊपर से गाँठ दिखाई नहीं देगी।

रवि को सकुचाते देख सुनीता ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी कुर्ती के अन्दर डाल दिया। अन्दर ब्रा न पहने होने के कारण सुनीता की समूची नंगी चूची रवि के हाथ में आ गई।

रवि ने हिम्मत करके उसे धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया। सुनीता पर मदहोशी सी छाने लगी, बोली- भैया, आप ऐसे ही धीरे-धीरे सहलाते रहो, इससे दर्द कुछ कम सा होता जा रहा है।

रवि भी अत्तेजित हो उठा था, उसने धीरे-धीरे अपना हाथ दोनों चूचियों पर फिराना शुरू कर दिया। सुनीता के सारे शरीर में करंट सा दौड़ गया, उसके मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं।

रवि ने हाथ पेट से होते हुए नीचे नाभि तक सरकाना शुरू कर दिया। उसका लिंग तन कर खड़ा होने लगा था जो सुनीता की जाँघों से रगड़ खा रहा था।

रवि ने कहा- सुन्नो, अपनी कुर्ती उतार दे, मैं अभी दरवाजा बंद करके आता हूँ।

और जब रवि लौटा तो उसने सुनीता को अपनी बांहों में भर कर चूम और बोला- सुन्नो, तू सीधी होकर लेट जा, मैं इस गाँठ को अभी ठीक करता हूँ।

तब रवि ने अर्ध-नग्न सुनीता की दोनों चूचियों को खुलकर सहलाना शुरू कर दिया और घुंडियों को मुँह में लेकर चूसना भी आरम्भ कर दिया था।

सुनीता मस्ती में भर कर सिसकारियाँ भरने लगी थी। रवि ने अपना एक हाथ सुनीता की सलवार के अन्दर सरका कर उसकी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया था।

सुनीता सिहर उठी और उसने रवि के सीने में अपना मुँह छुपा लिया, वह बोली- भैया, यह क्या कर रहे हो?

‘तुझे जी भर के प्यार कर रहा हूँ पगली, आज मैं तुझे इतना प्यार करूँगा, जितना तुझे कभी किसी ने नहीं किया होगा। बोल चाहती है कि मैं तुझे इसी तरह प्यार करूँ… या तुझे अच्छा नहीं लग रहा यह सब करना?’

‘नहीं भैया, ऐसी बात नहीं है। मगर मुझे गुदगुदी सी हो रही है।’

‘कहाँ हो रही है गुदगुदी सी, जरा मैं भी तो देखूं…’

‘दोनों जाँघों के बीच में भैया… आह:… उंगली अन्दर न डालो भैया…’

‘क्यों, क्या दर्द हो रहा है? अच्छा, एक काम कर…’

‘क्या भैया?’

‘अपनी सलवार भी उतार दे, आज तुझे पूरा मज़ा दे ही डालूँ…’

‘नहीं भैया, मुझे डर लगता है। आप वैसे ही करोगे, जैसा मझली भाभी के संग करते हो..?’

‘क्या करता हूँ मैं मझली भाभी की संग?’

‘आप उन्हें नंगा करके उनकी पेशाब की जगह में अपना मोटा वो डालते हो।’

‘तुझे किसने बताया….?’

‘मैंने खुद अपनी आँखों से यह सब देखा है भैया… आपने पहले भाभी को नंगी किया फिर आप खुद भी नंगे हो गए, फिर आपने भाभी की पेशाब वाली जगह को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया… तभी आपने अपना मोटा सा डंडा भाभी की पेशाब वाली जगह में घुसेड़ दिया। अगर आप मेरी पेशाव वाली जगह में ऐसा करोगे तो मेरी फट जायेगी भैया…’

‘चल तेरी नहीं फाडूंगा, पर उसे चाटने तो देगी।’

‘हाँ भैया, चाट लेना।’

‘तो जल्दी से उतार दे अपनी सलवार और बिल्कुल नंगी हो जा, मेरी अच्छी सुन्नो।’

‘नहीं भैया, मुझे शर्म आती है।’

‘क्यों शर्माती है… मैंने तुझे नहलाते वक्त कभी नंगी नहीं देखा क्या, तू छोटी सी थी तबसे तुझे नंगी देखा है मैंने… चल उतार दे सलवार … आज एक-एक परत उठाकर देखूँगा तेरी।’

‘नहीं भैया, आप फाड़ डालोगे मेरी…’

‘नहीं रे सुन्नो… तेरी कसम, जरा भी तकलीफ़ नहीं होने दूंगा तुझे…’

‘भैया, आप ही नंगी कर दो मुझे… मुझे शर्म आती है।’

 
‘अच्छा, नहीं मानती तो चल मैं ही तुझे नंगी किये देता हूँ, चल चूतड़ उठा।’

रवि ने अपने हाथों से उसकी सलवार उतार फेंकी और उसकी दोनों जाँघों को फैला कर उसकी चिकनी दूधिया योनि पर हाथ फेरता हुआ बुदबुदाया- मेरी सुन्नो, मुझे क्या पता था तेरी इतनी चिकनी और सुन्दर है रे… चल पूरी ताक़त के साथ अपनी जाँघों को चौड़ा करके फैला दे। आज मैं जी भर के चखूँगा तेरी योनि का रस।’

और फिर उसने पूरे जोशो-खरोश के साथ सुनीता की योनि चाटना शुरू कर दी। सुनीता अपने दोनों कूल्हे हिला-हिला कर किलकारियाँ भरने लगी।

‘आह: बड़ा मज़ा आ रहा है भैया, और जोर से चाटो इसे… उईईईई… मार डाला भैया आपने तो..’

‘सुन्नो, मेरी रानी बहना… अभी तो मैंने डाला ही नहीं है तेरे अन्दर, तू पहले से ही इतना शोर क्यों मचा रही है?’

‘…तो अब डाल दो भैया, मेरे अन्दर कर दो …अब तो बिल्कुल ही सहन नहीं हो रहा।’

रवि ने उचित मौका जान कर अपना मोटा लिंग उसके हाथ में थमा दिया और बोला- देख सुन्नो, इतना मोटा झेल जाएगी? …बोल डालूँ अन्दर?

सुनीता ने आँखें बंद कर रखीं थीं, लिंग को हाथ में लेकर उसे सहलाते हुए उसने सिर हिलाकर स्वीकृति दे दी।

रवि ने अपने लिंग का अग्र भाग उसकी योनि के मुख पर टिका कर एक जोर का झटका मारा कि समूचा मोटा लिंग फनफनाता हुआ उसकी योनि के अन्दर समां गया और फिर उसने जोरों की धकापेल शुरू कर दी।

मारे आनन्द के चिंहुक उठी सुनीता, उसके मुँह से निकल पड़ा- वाह भैया, आज तो मज़ा आ गया। फाड़ डालो मेरी …इतनी फाड़ो कि इसके चिथड़े उड़ जाएँ…

उसने रवि के चूतड़ों पर अपनी टांगें जकड़ रखीं थीं और चूतड़ उछाल-उछाल कर उसका साथ दे रही थी।

रवि भी अपना मोटा इंजन गुफा के अन्दर तेजी से दौड़ाए जा रहा था। लगभग आधे घंटे तक लिंग-योनि की लड़ाई में दोनों को काफी मज़ा आ गया।

इसके बाद रवि के लिंग से वीर्य की एक तेज धार फ़ूट निकली जिससे सुनीता की योनि भर गई।

फिर दोनों एक-दूसरे से लिपट कर निढाल होकर पड़ गए।

सुबह आठ बजे तक दोनों उसी प्रकार एक-दूजे की बांहों में लिपटे पड़े रहे। किसी बात की परवाह तो थी नहीं दोनों को। मंझले भाई को दो दिन के बाद आना था, वह अपनी पत्नी के साथ ससुराल गया था, छोटा भाई अजय भी परीक्षा देने के लिए बाहर गया हुआ था।

आठ बजे दोनों की आँखे खुलीं, सुनीता चौंक कर उठी और उसने झट अपने कपड़े पहने।

रवि अभी भी सो रहा था, वह एक-टक उसे यों ही निहारती रही, ऊपर से नीचे तक रवि भैया का नंगा बदन देख कर उसकी योनि में एक बार को फिर से खुजली होने लगी। उसने हौले से उसके लिंग पर हाथ फिराया और हाथ में लेकर सहलाने लगी।

इसी बीच रवि की आँखें खुल गईं, उसने मुस्कुराते हुए सुनीता से कहा- क्यों सुन्नो, फिर से डलवाने की इच्छा हो रही है क्या?

‘आपकी मर्ज़ी है बड़े भैया, आपकी भी इच्छा है तो मुझे कोई इन्कार नहीं है।’

सुनीता की इस बात पर रवि ने उसे खींच कर अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसके ओठों से अपने होंट सटा दिए।

दोनों के हाथ एक बार फिर से एक दूसरे के अंगों से खेलने लगे, रवि ने सुनीता की चूचियों को रगड़ना शुरू कर दिया।

सुनीता भी उसके मोटे लिंग से खुलकर खेल रही थी।

‘एक बात बताओ बड़े भैया, क्या भाभी को आपका यह मोटा-ताज़ा हथियार पसंद नहीं था?’ सुनीता ने रवि के लिंग पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा।

रवि बोला- उसका यार जो बैठा है उसके मायके में। उसे छोड़ कर साली आना ही नहीं चाहती तो कोई क्या करे।

‘भैया, चलो अब तो दो-दो हैं, आपकी प्यास बुझाने वाली आपके पास।’

‘दो कौन हैं?’

‘क्यों? एक मैं और एक मंझली भाभी।’

‘भैया, एक बात बताऊँ आपको, अजय भैया ने भी आपका और भाभी का खेल देख लिया है। जब मैं छुपकर आपको भाभी के साथ वो सब करते हुए देख रही थी तो अजय भैया भी आ गए और उन्होंने भी आपको भाभी की लेते हुए देख लिया था।’

‘तो अब क्या करना चाहिए? तू ही बता।’

‘आप मंझली भाभी को समझा देना कि वह अजय भैया से भी करवा लें, नहीं तो वह आप दोनों की पोल खोल देंगे।’

‘तू ही कुछ कर, उसे समझा-बुझा कर चुप करा दे।’

‘भैया, मैं क्या कर सकती हूँ। उस दिन जब मैं आपको मंझली भाभी की लेते हुए देख रही थी तो वह भी आकर देखने लगे। वह इतने उत्तेजित हो गए कि उन्होंने मुझ पर ही हाथ फेरना शुरू कर दिया। एक बार तो मैं उनसे बचकर चली आई पर आखिर मैं कब तक बचती। उन्होंने मुझे हथियार डालने पर मजबूर कर दिया। और एक दिन मैं एक सेक्सी-मैगजीन पढ़ रही थी कि उन्होंने देख लिया। मैंने उनसे पूछ लिया कि भैया, ये मास्टरबेशन क्या होता है तो उन्होंने मेरी सलवार खोल कर मुझे नंगी कर दिया और मेरी योनि में उंगली घुसेड़ कर बोले- इसे कहते हैं मास्टरबेशन’ इतने पर ही उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा और मेरे साथ वो सब कर डाला जो आज रात को आपने मेरे साथ किया।’

‘बड़ा हरामी निकला बहनचोद, अपनी छोटी बहन को ही चोद डाला साले ने !’

‘भैया, आपने भी तो अपनी सगी छोटी बहन को ही चोदाआप उन पर क्यों नाराज हो रहे हैं?’

सुनीता की बात पर रवि बुरी तरह से झेंप गया, वह बोला- चल जो हो गया सो हो गया, अब आगे की सोच… अब क्या किया जाये?’ ‘भैया, मेरी बात मानो तो मंझली भाभी को अजय भैया से चुदवा ही डालो। आप क्यों चिंता करते हो, मैं हूँ तो आपके पास, आपकी हर इच्छा पूरी करने के लिए। आप मेरी जिस तरह से चाहें लीजिये, मुझे कोई एतराज नहीं है। पर भैया, मंझली भाभी को अजय भैया से चुदने लिए राज़ी कर लीजिये।’

‘ठीक है, मैं कल उससे बात करूँगा। अब आ, एक बार तेरी फ़ुद्दी और ले लूँ… उतार अपने कपड़े और आ बैठ मेरे मोटे से लिंग पर।’ सुनीता ने झटपट अपने सारे कपड़े उतार फेंके और कतई नंगी होकर अपने बड़े भैया के वक्ष से आ लिपटी।

समाप्त

 
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