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बरगद का पेड़

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Guest


बरगद का पेड़


शाम चिड़ियों की चहचहाहट में और सूरज के लाल प्रकाश के फैलाने के साथ ही मैं इंतजार करता हु उन दो प्रेमियों का जो बचपन से मेरे आलिंगन में बढ़े ,ना सिर्फ उनका शरीर उनका मन ,बल्कि उनकी मोहोब्बत का मैं एक मात्र गवाह रहा हु ,मैं गांव का बूढ़ा बरगद हु जो इस तालाब के किनारे सदियों से हु ,मुझे किसने जन्म दिया मैं उन्हें भी भूल चुका हु ,400 साल के मेरे जीवन में मैंने अनेक घटनाएं देखी थी लेकिन किशन और चम्पा उसमे सबसे खास थे,वो मेरे ही छाव तले खेला करते थे,चम्पा ग्वालों की बेटी थी वही किशन साहूकार के परिवार का एकलौता लड़का ,दोनो का बेपरवाह बचपन मेरे साये में बिता और जब वो जवान हुए अल्हड़ जवानी में वो मेरे नीचे ही अपने प्यार को महसूस किया था,किशन कभी कभी अकेले में मुझसे बाते किया करता था जैसे उसे ये यकीन था की मैं उसकी बाते सुनता हु ,वो अपने दिल की हर बात मुझे कहता ,

कहता था की बरगद दादा मैं चम्पा के लिए ये कर सकता हु वो कर सकता हु ,उस नादान को क्या पता था की मैं उसके लिए कुछ भी नही कर सकता ,मैं तो उसकी बाते सुन बस मंद मंद मुस्कुराया करता था लेकिन मेरा चहरा ही कहा था की मैं उसे अपने भाव दिखा सकू ,मैं तो बस था,जैसे सब होते है ,मेरे अंगों का कोई भी वर्गीकरण नही किया जा सकता था ,मैं अपने हर अंग में बसा हुआ हु एक एक पत्ती मैं ही हु ,जड़ से लेकर हर तने में मेरा अस्तित्व है …….

उस शाम बहुत देर हो चुकी थी और मैं प्रतीक्षा में हवाओ के झोंके को महसूस कर रहा था ,तभी चम्पा दौड़ती हुई आती दिखाई दी वो हांफ रही थी ,चहरा ऐसे धधक रहा था जैसे बुखार हो गया हो ,वो आकर मेरे नीचे बैठ गई और गहरी सांसे लेने लगी ,उसने अपना सर मेरे मजबूत धड़ से लगा दिया ,किशन का कोई नामोनिशान अभी तक नही था ,इधर चम्पा तालाब की ओर मुह किये डूबते हुए सूरज कोई निहार रही थी ,अब वो थोड़ी शांत थी ,चम्पा मुझसे बातें नही किया करती थी वो जानती थी की मैं बस एक पेड़ हु वो दुसरो की मर्जी का गुलाम हु ,वो शायद किशन से ज्यादा अक्लमंद थी ,कुछ औरते दूर से ही अपने खेतो से लौटते हुए दिखी ,तालाब का पानी हल्की हवाओ से लहरा रहा था ,तभी किशन अपनी मोटरसाइकिल में पहुचा ,दोनो ने एक दूजे को देखा और चम्पा मुह फुलाकर दूसरे ओर देखने लगी ,किशन उसके पास आ चुका था ,

“अरे तुम हमेशा मुझसे रूठ जाय करती हो ,ये भी कोई बात होती है रूठने की “

चम्पा की तरफ से कोई जवाब नही आया ,किशन अब उसके बाजू में बैठा था ,उसने अपने हाथ चम्पा के कंधों पर ले जाना चाहा लेकिन चम्पा ने उसे झिड़क दिया ,

“बहुत नाराज हो ????”

चम्पा मौन थी …

“अरे कुछ कहोगी नही तो समझूंगा कैसे “

“कुछ नही कहना ,तुम्हारा प्यार बस दिखावा है और कुछ नही “

“अरे मेरी रानी …”किशन अपने हाथो को उसके कंधों में रखकर उसे अपनी ओर खिंचता है और उसके गालो को अपने हाथो से अपनी ओर खिंचने की कोशिस करता है ,चम्पा भी अपने चहरे को उसके दबाव के साथ उसकी ओर ले आती है ,

“मैं कोशिस तो कर रहा हु क्या तुम्हे लगता है की ये इतना आसान है “

“आज फिर से मेरे घर लड़के आये थे मुझे देखने “चम्पा का स्वर ठंडा था ,वही किशन के चहरे में भी शिकन आ गई ,

“मैं अपने बापू से बात करने ही वाला हु “

“जैसे तुम्हे लगता है की वो मान जाएंगे “

“मैं उनका इकलौता बेटा हूं “

“मैं ग्वालों की बेटी हु किशन ,तुम्हारा बाप मुझे और मेरे परिवार को मार देगा लेकिन मुझे तुम्हारी नही होने देगा “इस बार चम्पा की आंखों में आंसू की कुछ बूंदे आ गई थी

“मैं सब छोड़ कर तुम्हारे पास आ जाऊंगा “

चम्पा के होठो पर एक कटीली मुस्कान आ गई

“और तुम्हे लगता है की मेरे परिवार वाले मान जाएंगे “

“तो हम ये गांव छोड़कर भाग जाएंगे “

“इतनी हिम्मत है तुममें “चम्पा की कटीली मुस्कान जैसे किशन के दिल को छेद गई

“क्या तुम्हे लगता है की मैं ये नही कर पाऊंगा “

“तुम बचपन से इतने सुख में पले हो मेरे साथ तो तम्हे दुख ही मिलेगा किशन ,तकलीफे ही मिलेंगी “चम्पा का चहरा फिर से मुरझा गया

“मैं सभी दुखो को सह लूंगा चम्पा ,जबसे होशं सम्हाल है मैंने बस तुम्हे ही अपना माना है ये तो तुम्हे भी पता है ,ये बरगद दादा भी इसके गवाह है चम्पा पूछ लो इनसे “

किशन की आंखों में भी आंसू आ गए थे ,लेकिन चम्पा जोरो से हँसी

“तुम और तुम्हारे बरगद दादा ,अगर अगले महीने तक कुछ नही किया तो मेरा बाप मेरी शादी कही और कर देगा फिर अपने बरगद दादा से ही बाते करते रहना “वो उठ खड़ी हुई

“अरे कहा चली “

“अब मेरी माँ मुझे शाम को बाहर जाने नही देती कहती है की तू बड़ी हो गई है और अब तेरी शादी होने वाली है तो ये शाम को घूमना फिरना बंद कर “

“थोड़ी देर तो और बैठ जा “

“अब जल्दी से मुझसे शादी करके अपना बना ले फिर दिन रात तेरी ही बांहो में बैठी रहूंगी ,अब जाने दे नही तो माँ ढूंढने ना निकल जाय “

चम्पा ने किशन के जवाब का इंतजार भी नही किया वो बस वैसे ही दौड़ती गई जैसे की आयी थी “

किशन का चहरा मुरझा गया था वो मेरी ओर मुड़ा ,

“बरगद दादा देख लिया ना इसे ,ये अभी तो मेरी सुनती नही जब मेरी बीवी बन जाएगी तो क्या होगा ,पता नही मेरी माँ से इसकी कैसे बनेगी ,नकचढ़ी हो गई है ,पर एक बात बताऊ दादा चम्पा के बिना मैं नही जी सकता ,वो साला मेरा खड़ूस बाप ….पता नही ये जानने के बाद मुझे कितना मारेगा लेकिन मैं हर मार सह लूंगा मेरी चम्पा बस मुझे मिल जाय ,”किशन मुझसे लिपट गया ,मैंने भी अपने दिल से (जो पता नही कहा पर है )उसके लिए दुवा की ,मैं उसपर अपना प्यार बरसा रहा था लेकिन वो इतना सूक्ष्म था की किशन के मन की गहराई ही इसे समझ सकती थी ,

“दादा देख लेना एक दिन मेरे और चम्पा के बच्चे भी आपकी डालो में झूला करेंगे जैसे हम झूलते थे “किशन एक अजीब से आत्मविश्वास से भर गया था जैसे उसने मन ही मन कोई बड़ा फैसला कर लिया हो …

दूसरे दिन की शाम किशन बहुत पहले से ही आकर मेरे नीचे बैठा था ,वो कभी उठता कभी बैठ जाता बहुत ही बेकरार लग रहा था ,चम्पा के आने के कोई भी आसार अभी तक नही दिखाई दिए थे ,वो आज मुझसे भी कोई बात नही कर रहा था ,शाम ढल चुकी थी रात ने अपने पाव जमाने शुरू कर दिया था ,सूरज की थोड़ी लालिमा ही रह गई थी की चम्पा फिर से उसी तरह दौड़ती हुई आती दिखी ,घाघरे को एक हाथो से उठाये हुए वो दौड़ रही थी बेकरार सी ,वो आकर रुकी सांसे बहुत तेज चल रही थी लेकिन किशन ने इसके फिक्र किये बिना ही उसे गले से लगा लिया ,वो उसे अपनी बांहो में जकड़े जा रहा था वही चम्पा को इस बात से स्तब्ध थी की आखिर उसे आज हुआ क्या है ,

“मैंने बापू से बात कर ली चम्पा वो मान गए है “किशन ने उतावले होकर कहा और चम्पा को तो जैसे यकीन ही नही हो रहा था ..

“सच सच में ..”उसकी जबान लड़खड़ा रही थी

“हा चम्पा “किशन ने उसे अपने से अलग किया और उसकी निगाहों में देखता हुआ बोला

“चम्पा मेरी रानी आज मैं बहुत खुस हु ,कल ही बाबा तुम्हारे बापू से बात करने जाने वाले है “

चम्पा की आंखे शून्य में खो गई थी ,जैसे उसे इस बात पर यकीन ही नही आ रहा था,वो अब भी स्तब्ध थी ,उसके इस जन्म की एक ही आरजू क्या सच में ये सच था ,क्या सच में ये पूरा होने वाला था ,उसके आंखों ने खुसी के अतिरेक में कुछ बूंदे बरसा दी लेकिन वो बस मूर्ति की तरह खड़ी रही ,उसका मुह थोड़ा खुला हुआ था जैसे कुछ कहना चाहती हो लेकिन कोई भी शब्द फुट नही रहे थे,आखिर किशन ने उसे झकझोर ही दिया ,

“चम्पा ये चम्पा “

“किशन तुम सच कह रहे हो “

“तो क्या पगली ,और बापू ने मुझे शहर जाने को कहा है चाचा के पास ,तेरे लिए कपड़े खरीदने और एक सप्ताह में ही तेरा मेरा ब्याह करने की सोच रहे है बापू ,मैं 5 दिनों में ही वापस आ जाऊंगा “

“किशन .ओ मेरे किशन “

चम्पा किसी अमरबेल की तरह किशन से लिपट गई ,

दोनो ही आंसुओ से अपनी आंखे भिगो रहे थे,मैं शांत खड़ा सा तो दिख रहा था लेकिन मेरा मन उन दो प्रेमियों के प्रेम से झूम उठा था ,दोनो का मिलान होने वाला था,जिसके सपने वो मेरे छाव तले देखा करते थे ,घंटो किये वो बाते एक दूसरे का हो जाने की कल्पना वो उन्होंने बचपन से बना कर रखी थी वो सच होने वाला था,मेरे गोद में बैठे हुए दोनो घंटो तक लिपटे रहे ,जैसे दुनिया अब खत्म होने वाली हो ,एक दूसरे के आंसू को अपने होठो से पीते हुए वो एक दूसरे को दिलासा देते हुए ,चम्पा तो भूल ही गई थी की उसकी माँ उसे ढूंढते हुए यहां तक आ सकती है ,और हुआ भी ऐसा ही उसकी माँ की दूर से आती आवाज से ही दोनो सजग हुए और चम्पा दौड़ाते हुए फिर से वापस चली गई ...किशन अब भी मेरी गोद में बैठा हुआ था ,

“ओह दादा आज मैं बहुत खुस हु ,देखना जब मेरी शादी होगी तो तुम्हे मैं दूल्हे की तरह सजाऊंगा ,यहां पर (वो अपनी उंगली से मेरे तनों को दिखता है) और यहां से यहां तक झूमर लगवाऊंगा ,तेरे ही डालियों में खेलते हुए हम बड़े हुए है और तेरे ही गोद में मुझे मेरी चम्पा मिली ...तू भी नाचेगा ना मेरी बारात में “

वो जोरो से हँसने लगा और नाचने लगा ,पगला था किशन ,कोई देख लेता उसे मुझसे बात करते हुए तो समझता की किशन सच में पागल हो गया है ….

4 दिन बीत गए थे ,गांव में हो रही हलचल से मैं अनजान था लेकिन आस पास के वातावरण से मुझे आभास हो रहा था की सच में शादी की तैयारी चल रही है ,ना किशन आया था ना ही चम्पा का कुछ पता था ,मैं और तालाब अब भी अपनी धुन में मस्त थे ,सोचता था जब चम्पा दुल्हन बने मेरे पास आएगी तो मैं उसे क्या दे पाऊंगा ,मेरे पास था ही क्या देने को बस छाव और थोड़ी जगह ,शायद शादी के बाद दोनो ही मेरे पास ना आये और मैं था भी कौन एक बरगद का पेड़ जिसकी संवेदनाओ को समझने वाला यंहा कौन था ,लेकिन मैं भी मुस्कुराता हु मैं भी रोता हु किसी को दिखाई दे या ना दे ,मेरा अस्तित्व भी है ….

आज गांव में गजब की हलचल हो रही थी नए नए लोग तालाब में आते जाते दिख रहे थे ,लेकिन मेरी नजर उन दोनो को ही ढूंढ रही थी ,अब तक तो किशन को शहर से आ जाना था ,पतझर से आने से पहले मैं चम्पा को दुल्हन के लिबास में देखना चाहता था ,और गर्मियों में जब दोनो की लड़ाई हो जाएगी तो किशन मेरे पास आकर अपना दुखड़ा सुनता ,मैं मन ही मन हंसा,लगा की कोई बारात आयी है ,गाजे बाजे बज रहे थे ,मंगल गीत गए जा रहे थे,मैं चौका क्या आज ही उनकी शादी है ,खैर मैं तो सालो से यंहा खड़ा था और सालो तक खड़ा रहूंगा वक्त मेरे लिए विचलित करने वाला नही था,मैं धैर्य से प्रतीक्षा करने लगा ,

रात होने को आयी थी ,नगाड़े बजने बहुत देर से ही बंद हो गए थे,मैं भी अलसाया सा खड़ा था ,तभी मुझे उन्ही घुंघरू की आवाजे सुनाई दी ,चम्पा फिर से हाँफती हुई दौड़े जा रही थी वो मेरे ही पास आ रही थी ,ये क्या वो दुल्हन के लिबास में थी ?

वो मेरे पास आकर ही रुकी ,

“देख रहे हो ना ,किशन कहता था की तुम हमारी बात सुनते हो और उससे बात करते हो तो देख लो और जान लो ,हमारे घर वालो ने हमारे साथ धोखा किया है ,किशन को बाहर भेजकर मेरी शादी किसी और से करना चाहते है ,लेकिन उन्हें क्या पता की मैंने किशन को ही बचपन से अपना पति माना है और मैं जान दे दूंगी लेकिन किसी और की नही होऊंगी ,कह देना अपने किशन से मैं उसकी नही हो सकी तो मेरे जीवन का कोई मूल्य भी है “

चम्पा ने चिल्ला के कहा वो विक्षिप्त सी दिख रही थी ,दुल्हन के वेष में थी लेकिन बाल जैसे उजड़े हुए थे ,गहने बिखरे हुए थे ,वो मेरे ऊपर चढ़ने लगी ,उसने अपने साड़ी को निकल कर अपने गले में डाला और मेरे एक कमजोर तने में फसा दिया ,वो क्या करने वाली है ये समझ कर ही मेरे रूह से एक आवाज निकली ‘रुको ‘लेकिन सुनने वाला कौन था ,मैं मजबूर सा स्तब्ध सा बस जड़वत खड़ा था ,मैं तो हु ही जड़ चेतना का तो बस आभास था,तभी दूर से आती आवाजो की तरफ उसने देखा ,जलते हुए मसालों के जत्थे वहां आ रहे थे ,थोड़ी ही देर में वो वहां पहुच गए,चम्पा अभी भी वैसे ही बैठी थी ,शायद किसी उमीद में …

उस जत्थे में किशन और चम्पा के बाप भी थे साथ ही गांव वाले भी थे ,और पास के गांव के लोग भी थे जो बहुत ही गुस्से में लग रहे थे ,ये चम्पा को ब्याहने वहां आये थे ,

“रुको चम्पा बेटी ये क्या कर रही हो “

चम्पा के बाप की आवाज कांप रही थी ,

“मैं शादी करूँगी तो बस किशन से उसके सिवा किसी से नही “

चम्पा रोते हुए चिल्लाई

“ये पागल लड़की मेरे बेटे को तू क्या समझ कर रखी है की वो तुझसे ब्याह करेगा ,वो तो गया अपने चाचा के घर शहर को अब वही रहेगा ,और तेरे मारने जीने से उसे क्या “

ये व्यंग भरी आवाज किशन के बापू की थी ,

“नही आप झूट बोल रहे हो वो ऐसा नही कर सकता ….मेरा किशन ऐसा नही कर सकता”

चम्पा की आवाज थोड़ी धीरे हो चुकी थी उसके गले में उसका लाल जोड़ा था ,सभी निश्चिंत थे की अगर वो लटक गई तो भी उसे बचा लेंगे ,लेकिन तभी किसी और की आवाज आई ,

“साली रंडी तुझे तो यही जला देंगे तेरे बाप ने हमसे धोखा किया है,इसे पता था की तेरा आशिक है लेकिन इसने हमारे गांव के लड़के से शादी करवाई और बारात को जलील किया ,तुझे तो आज मरना ही पड़ेगा ,” सभी जोरो से चीखने लगे ,वँहा खड़े चम्पा के गांव वाले भी अपनी लाठियां लेकर पहुचे थे ,सभी ताव में थे कोई एक पक्ष में था तो कोई दूसरे ,किसी ने किशन के बापू को मनाने की कोशिस भी की लेकिन वो मानने को तैयार नही था,आखरी चम्पा के बापू की चीख निकली चम्पा मेरे तने से झूल चुकी थी ,लोग मेरी तरह भागे ,मेरा दिल बैठ गया था मैंने पूरा जोर लगाया था ,मेरी रूह तक उसे बचना चाहती थी ,तभी ..

“चम्पा …”एक जोरो की आवाज भीड़ से आयी वो किशन था ,वो पागलो सा भागता हुआ जाने कहा से आ रहा था ,तब तक बारातियों ने अपनी मसाले मेंरे ऊपर फेक्नी शुरू कर दी थी उन्होंने पहले से ही जो मिट्टी का तेल मुझपर गांव वालो को उलझा कर डाला था वो अपना असर दिखाने लगा था , वो गांव वालो को भी आगे नही आने देना चाहते थे ,पास पड़ी सूखी पत्तियो ने आग को अपना कर जलने लगी थी जो चारो ओर आग की लपटे उठानी शुरू हो गई थी ,आग की दहसत ने सबको शांत कर दिया था ,लाठियां चल रही थी लेकिन आग पर किसी का बस नही चल रहा था,किशन पागलो सा चिल्लाता हुआ आया और सीधे ही उस आग में समा गया ,पहली बार उसके पिता की आंखों में ख़ौफ़ आया था वो किशन को आवाज लगता रहा और शायद अपने किये पर पछताता रहा लेकिन अब तो बहुत देर हो चुकी थी ,मेरे सूखे तनों ने आग पकड़ लिया था मैं भी जल रहा था ,किशन और चम्पा के प्यार की तरह ….

किशन और चम्पा के पिता रोते हुए जमीन में बैठ चुके थे ,बाराती लाठियां खाकर भाग चुके थे और गांव वाले तालाब का उपयोग कर आग बुझाने में जुट गए थे ,सभी को लग रहा था की दो प्रेमी फिर से समाज के बंधनो की बलि चढ़ चुके है ,लेकिन मैं ????

जब चम्पा मेरे तने से झूल गई और बारातियों ने मुझे आग के हवाले कर दिया किशन आग की फिक्र ना करता हुआ मेरे पास आया ,मेरे मन में उठी एक गहरी संवेदना ने मुझ जड़ ने थोड़ी चेतना भरी मैं हिला मैने अपने उस तने को हिलाने की पूरी कोशिस की जंहा चम्पा लटक रही थी वो सूखा तना मुझसे अगल होकर गिरा था और चम्पा किशन की बांहो में थी ,वो मेरे सबसे कच्चे स्थान पर बैठे थे जंहा तक आग की लपटे नही पहुच पा रही थी ,मुझसे सटे हुए दोनो ही एक दूसरे को देखते हुए रो रहे थे ,लोग लड़ रहे थे उनके पिता रो रहे थे लेकिन हम उन लपटों के बीच भी सुकून से बैठे हुए मुस्कुरा रहे थे ,उन दोनो को देखकर एक बारी मुझे भी रोना आ गया ,लेकिन क्या करू मेरी आंखे तो नही है जो आंसुओ को दिखा पाता………

3 साल बाद …

दोपहर का वक्त था ,एक छोटी सी बच्ची मेरे लटकते जड़ो को पकड़ कर झूलने की कोसीसे कर रही थी ,साथ ही कुछ और भी बच्चे खेल रहे थे ,एक *** साल का लड़का मेरी जड़ो पर पत्थर से वार कर रहा था ,बच्ची ने उसे रोकते हुए अपनी तोतली जुबान से कहा …

“ये दादा को मत मारो इन्हें दर्द होगा “

बाकी बच्चे हँसने लगे ,

“तू तो पगली है रानी इसे कोई दर्द होगा और ये तेरा दादा कब से हो गया “

“ये हमारे दादा है समझे ,और मैं इनसे बात करती हु “

सभी फिर से हँसने लगे लेकिन उस प्यारी सी बच्ची ने उन्हें आखिर रोक ही दिया वो मेरे लटके जड़ो से लिपट गई थी …

“रानी ओ रानी “

“पापा पापा “रानी भागती हुई अपने पापा के पास आ गई

“पापा देखो ना ये शुभम दादा को पत्थर से मार रहा था “किशन ने उस बच्चे की ओर देखा और वो बच्चा वहां से भाग गया

“अच्छा तो तुम अपने बरगद दादा से बात करती हो “

“हा जैसे आप करते हो “

वो मेरे पास आकर मुझसे लिपट गया ,

“दादा ये भी चम्पा पर गई है ,है ना, बस ये मेरी तरह आपसे बात करती है ,इसेकी हमेशा रक्षा करना जैसे अपने चम्पा की की थी “किशन और रानी मुझसे लिपट कर मुझपर एक चुम्मन देते है ,काश मैं अपने बांहो को फैला सकता तो दोनो को अपनी बांहो में भर लेता,काश मेरे आंख होते और मैं उन्हें रो कर दिखता की मैं उनसे कितना प्यार करता हु ,दिल तो मेरा भी है पर धड़कता नही है ,रोता मैं भी हु पर दिखता नही है ,प्यार मैं भी करता हु ,लेकिन किसी को पता नही चल पाता…….
 
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