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बर्दास्त नही होता

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Guest
बर्दास्त नही होता



“आह किशन मेरी जान ,मजा आ गया “

“साली रंडी तुझे तो मजा आएगा ही तू तो है ही सबसे बड़ी रंडी,ओह साली सोमनी तेरी चुद है की मख्खन है ,जितना मथो उठाना ही मजा आता है,”

“तू चोद साले और ये रंडी किसे बोल रहा है रंडी होगी तेरी मा समझा “

“ओह साली इतने लंडो से चुदवाने वाली को रंडी ही बोलते है मेरी रानी ,ओह मादर ओह….”

“मादरचोद अंदर नही बाहर निकाल “

किशन सोमनी के योनि से अपना लिंग निकलता है और अपना गाढ़ा गाढ़ा वीर्य सोमनी के पेट में छोड़ देता है ,दोनो ही हाँफने लगते है और एक दूसरे के बाजू में लेट जाते है,

“रानी यू छत में करने में मजा नही आता कभी हमे भी तो अपने घर बिस्तर में ले जाओ “

“चुतिया हो गया है क्या मा बाबा जाग गए ना तो मर जाएंगे,यही सही है समझे,करना है तो करो वरना ..”

“वह मेरी जान तू तो नाराज हो गई ,ऐसे मेरी पिचकारी कैसे लगी तुझे “

सोमनी के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो अपने पेट में पड़े हुए वीर्य को अपनी चुन्नी से पोछती है,

“होली में भी ऐसे ही भिगोना मुझे “वो हल्के से हँसती है,

“तुझे तो होली में पूरा गांव भिगोने को तैयार रहता है मेरी जान ,जंगल में चलेंगे दारू पियेंगे और फूल चुदाई करेंगे,मैं ,अकरम,केशव ,भुजंग सभी तैयार बैठे है होली के लिए “

सोमनी जोरो से हँसने लगती है

“तुम साले सब मिलकर होली में मेरी फाड़ ही डालोगे…”दोनो ही हँसने लगते है तभी कुछ टकराने से गिरने की आवाज आती है दोनो ही जल्दी से उठ जाते है और आवाज की दिशा में देखने लगते है ,

“है भगवान ये कौन था,”

दूसरी छत से किसी शख्स को अंदर जाते देख कर किशन कह पड़ा …

“फिकर मत करो वो रघु चाचा होंगे “

“है भगवान रघु ,वो साला सांड वो तो हमे मार ही देगा “

“फिकर मत करो वो ऐसे ही मुझे देखकर बस आहे भरता रहता है ,साला कमीना रिस्ते में तो मेरा चाचा लगता है लेकिन मुझे चोदना चाहता है ..”

“अरे तो क्या हुआ ,कौन सा तेरा सगा चाचा है वो ,पड़ोसी ही तो है “

“हा लेकिन हम बचपन से ही साथ साथ रहे ,और उस साले ने मुझे प्रपोज कर दिया,मैं ठहरी रांड किस्म की मुझे ये प्यार मोहोब्बत समझ नही आता “

“तो चुदवा ही ले ना,ऐसे भी ना जाने कितने लोगो ने तो तेरी मारी है वो भी सही बेचारे का दिल ही रख ले “

सोमनी जोरो से हँसने लगी

“वो भी तो वही चाहता है लेकिन उसके चहरे में आये असहाय भाव को देखकर मुझे तो बड़ा मजा आता है ,वो भी मुझे दुसरो से चुदते हुए देख देख कर और भी जल जाता है ,मुझे तो उसे और भी जलाना है उसे जलाने में ही मुझे मजा आता है ,हा हा हा साला बड़ा आया मुझे चोदने के सपने देखने वाला …”

सोमनी के आंखों में गुस्सा भर गया ,पता नही ऐसा क्या था की जब भी वो रघु का नाम सुनती वो बौखला जाती लेकिन फिर भी वो जानबूझकर रघु को दिखाने के लिए तरह तरह के कारनामे करती ,आज भी उसे समझ आ गया था की रघु उसे देख रहा है वो उसे जलाने के लिए जोरो से आहे ले रही थी उसे इसमें ही मजा आता था…

इधर

रघु बेचारा फिर से अपने कमरे में पहुचकर अपना लिंग अपने हाथो में लिया हिलाने लगा ,

“मादरचोद साली सोमनी ,एक बार मुझे भी अपनी दे दे यू तो सबको अपनी जवानी बांटती रहती है ,ओह एक दिन ये जरूर होगा की मैं तुझे चोदूँगा ना सिर्फ नंगा करके बल्कि कुत्तों की तरह नोच नोच कर ओह ओह”

वो बस ऐसे ही अपने को शांत कर लेता था लेकिन उसके दिमाग में ये बात हमेशा चलती रहती थी की उसे क्या करना है और शायद सोमनी और किशन की बाते सुनकर उसने कुछ मन ही मन ठान लिया था……

रघु की हवस सोमनी के लिए बढ़ते ही जा रही थी वही सोमनी भी उसे नीचा दिखाने में कोई भी कमी नही छोड़ती ,एक दिन फिर से वो छत में ही थी ,किसी आशिक के इंतजार में ,

उसे रघु के आने की आहट सुनाई दी ,वो पटल कर उसे देखती है की रघु की तो धड़कने ही रुक गई ,

“आप ऐसे क्यो घूर रहे हो चाचा जी “

“कुछ नही क्या कर रही हो अकेले “

सोमनी के चहरे पर एक व्यंग्यात्मक मुस्कान छलक गई ,

“जैसे आपको पता नही की यहां क्या होता है”उसकी हँसी रघु के दिल को छेद रही थी,

“सोमनी अगर मुझसे तुम्हे परेशानी है तो ठीक है लेकिन आखिर मैं भी तुम्हारे रिस्ते में चाचा लगता हु रिस्तो का भी लिहाज भूल गई हो तुम “

सोमनी के चहरे पर गुस्से के भाव साफ झलकने लगते है ,

“चाचा ,शर्म करो कुछ रोज यहां मुह उठाकर चले आते हो ,और मेरे जिस्म को देखकर लार टपकाते हो और मुझे रिस्तो का मतलब समझा रहे हो ,आरे जाओ जाओ जाकर मेरा नाम लेकर अपना लंड हिलाओ वही करते आये हो और वही करते रहोगे “

सोमनी के तीखे जवाब को सुनकर रघु का मुह ही लटक गया ,तभी किशन वहां आ गया आज उसके साथ उसका दोस्त भी था,दोनो ही रघु को देखकर एक तीखी सी मुस्कान देते है जिसे देखकर रघु का खून और भी खोल जाता है लेकिन वो बेचारे सा मुह लटकाया अपने कमरे में भारी पाव से वापस जाने लगता है लेकिन तभी उसके कानो में जो आवाज पड़ती है उसे सुनकर वो वो मानो शर्म से पानी पानी ही हो जाता है ,

“अरे सोमनी तेरे चाचा के ही सामने मारे क्या तेरी “

तीनो जोरो से हँसते है,

“अरे छोड़ो इस नामर्द को ,तुम अपना काम शुरू करो बहुत खुजली हो रही है “

फिर तीनो हँसते है ,

“साला चुतिया “

किशन की आवाज से रघु शर्म से पानी पानी हो जाता है ,वो कभी सोचता है की सोमनी के माता पिता को ये सब बाते बता दे लेकिन इससे उसका वो बदला और वो अरमान तो पूरे नही होने थे उसे अब बस होली का इंतजार था…………

आखिर होली का दिन आ ही गया,जैसा की सोमनी प्लान किया था वो अपने सहेली का बोलकर अपने आशिकों के पिचकारियों से भीगने जाने वाली थी ,रघु भी तैयार बैठा था ,सोमनी को जंगल तक तो अपनी सहेलियों के साथ ही जाना था उसके बाद उसे अपनी सहेलियों को अलविदा कह चुपचाप अलग हो जाना था ,इससे किसी को पता भी नही चलता और वो 4-5 घण्टो के लिए अपने आशिकों के साथ पूरे मजे कर लेती ,वो जंगल तक तो पहुची और अपने सहेलियों से अलग होकर चुपचाप जंगल में थोड़ी आगे बड़ी तभी एक वेन उसके पास आकर रुकी उसने अंदर देखा तो एक मर्द बैठा था जो चहरे पर मुखोटा पहने था,वो भारी आवाज में बोला ,

“चल जल्दी से अंदर आ जा ,सब तेरा ही इंतजार कर रहे है “

उसने वो आवाज पहले नही सुनी थी लेकिन उसे लगा की ये कोई नया दोस्त होगा,वो इस किस्म की छिनाल थी की उसने इतनी भी फिक्र नही की कि कोई नया लड़का आज उसकी लेने वाला है ,वो जल्दी से वेन के अंदर बैठी और जैसे ही वो अंदर बैठी एक रुमाल उसके नाक पर पड़ा वो थोड़ी छटपटाई लेकिन थोड़ी ही देर में निढल होकर बेहोश हो गई……..

“रघु चाचा तुम “

“क्यो मादरचोद बहुत तड़फाय है तुमने मुझे अब बताता हु की दर्द किसी कहते है “

रघु की आंखों में खून उतर गया था,वो लाल आंखे देख कर सोमनी की रूह जी कॉप जा रही थी ,इस समय सोमनी किसी अनजान जगह में थी ,उसके दुप्पटे से ही उसका हाथ बंधा गया था ,उसकी सफेद सलवार और कमीज पूरी तरह से रंग से भीगा हुआ था जिससे उसकी गदराई जवानी का नजारा मिलता था,वो दीवाल से सटी हुई बैठी थी,वो थोड़ी छटपटाई लेकिन हिल छूट नही पा रही थी …

“चाचा प्लीज़ जाने दो “वो लगभग रोती हुई बोली

“क्यो ताकि तू अपने यारो के साथ जाकर गुलछर्रे उड़ाए ,तुझे तो आज बताऊंगा साली बहुत तड़फाय है तूने मुझे “

“अगर तुम ऐसा कुछ करने की सोच रहे हो तो समझ लेना की मैं तुम्हे छोडूंगी नही “सोमनी के अंदर गुस्से की एक लहर दौड़ी ये स्वाभाविक ही था ,क्योकि आजतक वो रघु को अपने इशारों पर नचाती आई थी लेकिन आज वो ही उसके ऊपर हावी होने की कोशिश कर रहा था वो कैसे उससे हार सकती थी …

“साली कुतिया तुझे क्या लगता है की तू जाकर गांव वालो से बोलेगी की रघु ने तेरा बलात्कार किया तो सब मान लेंगे ...ये देख “

रघु के हाथो में मोबाइल था और स्क्रीन में सोमनी और किशन के अंतरंग दृश्य थे साथ ही होली का उनका प्लान भी रिकॉड था जिसमे सोमनी खुद अपने मुह से कई लड़को के साथ सेक्स का प्लान कर रही थी

“इसे देखने और सुनने के बाद तेरी तो कोई नही सुनेगा,सबको तो पता ही है की तू एक रांड है लेकिन इसके बाद तेरे घर वालो को भी पता चल जाएगा की तू कितनी बड़ी रांड है “

रघु जोरो से हँसने लगा और उसकी गूंज से पूरा कमरा ही गूंज उठा ,सोमनी सुबकते हुए अपनी नजर उठाई और पहली बार उस कमरे को देखा वो तो दंग ही रह गई ये तो उसके कमरे से लगा हुआ कमरा था जो की मेहमानों के लिए बनाया गया था ,उसके चहरे में डर साफ झलकने लगा

“फिकर मत कर तेरे घर वाले मेरे घर में होली खेल रहे है ,मैंने सबके खाने में इतना भांग मिलाया है की कोई भी रात तक हमे डिस्टर्ब करने नही आएगा ,और अगर तूने होशियारी दिखाने की कोशिश की तो सोच ले बोल दूंगा की तुझे ढूंढता हुआ जब मैं जंगल पहुचा तो तू वँहा पर अपने आशिकों के साथ दंगल कर रही थी ,और जब मैंने तुझे पकड़ लिया तो तू मेरे ऊपर ही इल्जाम लगाने लगी,,”

सोमनी को समझ आ चुका था की वो अब पूरी तरह से फंस चुकी है और अब रघु से उसके लिए लड़ना फिजूल है उसे बस उसका कहा ही मानना पड़ेगा ,

“ठीक है चाचा मैं आपकी हर बात मानूँगी “

“गुड ये हुई ना बात “

रघु जाकर उसके हाथो को खोल देता है ,सोमनी झट से रघु के मोबाइल को पकड़ लेती है और अपनी सफलता पर हँसने लगती है ,

“साले क्या समझा था मुझे ,आज तक तो तुझे बस जलाया है लेकिन अब तो ,साले मादरचोद मुझे चोदेगा तू तेरा तो लंड कटवाऊंगी मैं अपने यारो से मिलकर “

सोमनी का गुस्सा सातवे आसमान पर था लेकिन रघु की आंखों में कोई भी ख़ौफ़ नही था बल्कि वो हँसने लगा जिसे देखकर सोमनी भी आश्चर्य से भर गई

“साली तूने क्या समझा था की मैं इतना बड़ा चुतिया हु जो इस वीडियो की कॉपी नही रखा होऊंगा ,ये वीडियो मेरे गूगल ड्राइव में भी सेव है ,और मैं जंहा से चाहू इसे खोल सकता हु ,”

रघु जोरो से हंसा लेकिन रघु की ये हँसी सोमनी के आंखों में आंसू लाने को काफी थे ,पहले तो रघु उसके ऊपर कुछ सहम कर भी देता लेकिन इस हरकत के बाद उसे भी पता था की उसका हाल बहुत ही बुरा होने वाला था ,लेकिन आखिर वो करने क्या वाला था,वो क्या सिर्फ उससे सेक्स करता ,ये तो सोमनी के लिए एक बहुत ही छोटी सजा होती क्योकि सोमनी तो रोज ही कई लड़को के साथ सोती थी ,तो क्या वो उसे मारने वाला था...सोमनी के दिमाग में हर तरह की बाते कौध रही थी और डर से उसकी सांसे रुकने को हो रही थी ,वो बार बार जोरो से सांसे ले रही थी ,

इधर रघु बड़े ही इत्मीनान से उसे देख रहा था ,

“जा जाकर मेरे लिए तेरे बाप की वो महंगी वाली दारू की बोलत लेकर आ जिसे उसने अपने दोस्त से मंगवाई थी “रघु का आदेश सुनकर ही वो कांप गई ,वो बोतल उसके बाप की जान थी वो किसी खास मौके पर ही एक दो पैक उससे निकाल कर पीता था ,

सोमनी हिलने का नाम ही नही ले रही थी ,

“मादरचोद समझ नही आता की क्या कहा जल्दी से जा और हा साथ में बर्फ और कुछ खाने का समान भी लाना “वो डरी हुई भागी उसके पास और कोई चारा भी तो नही था ……

रघु चाहता तो अभी उसके साथ सेक्स कर सकता था लेकिन उससे उसे शायद कुछ भी हासिल नही होता क्योकि एक आदमी के सेक्स से उसका कुछ भी बिगड़ने वाला नही था,उसके लिए ये रोज का खेल था इसलिए उसने सोमनी को वहां चोट करने की ठानी जंहा उसे सबसे ज्यादा दुख हो,वो था उसका ईगो,रघु मन ही मन बहुत खुस होने लगा,वो जाकर सोमनी के ही कमरे में बैठ गया,वो जाकर उसके बिस्तर में पसर गया…

“ला इधर रख ,चल एक पैक बना “सोमनी का दिमाग गुस्से से फटा जा रहा था वो जिसे अपने जूती में रखा करती थी वही आज उसपर ऐसे हुक्म चला रहा था,लेकिन वो कर भी क्या सकती थी ,वो एक पैक बना कर रघु के सामने किया रघु बड़े ही आराम से किसी राजा की तरह बिस्तर से लगे हुए दीवार में अपने को ठिका कर लेटा रहा,

“मेरे पैर दबा ,मालिक की सेवा ही नॉकरो का धर्म होता है “रघु जोरो से हंसा जिसे सुनकर सोमनी लज्जा से भर गई ,वो उसके पैर दबाने को झुकी ,

“ऐसे नही पहले अपनी कमीज उतार ले और मेरा पेंट भी “

अब वो ऊपर सिर्फ ब्रा में थी ,रघु का लिंग अभी भी सोया हुआ था ,सोमनी के नाजुक से हाथ उसके जांघो तक मालिस कर रहे थे ,वो अब दूसरा पैक गटक रहा था,सोमनी के बड़े बड़े बोब्स उसके ब्रा से बाहर आने को झूल रहे थे जो की रघु को भी उत्तेजित कर रहे थे लेकिन वो अपनी ही मस्ती में मस्त था ,उसका लिंग धीरे धीरे खड़ा होने लगा था ,वो सोमनी का हाथ पकड़कर अपने लिंग के ऊपर लाता है ,

“चल चूस इसे “

सोमनी तो ये करती आयी थी लेकिन कोई इस तरह से जलील करके उसे ये सब नही करा सकता था,वो गुस्से में भी थी,ग्लानि से भरी हुई भी थी ,और एक झिझक उसे पहली बार जकड़े हुए भी था,वो काँपते हुए हाथो से उसके लिंग को पकड़कर उसे उसके अंडरवियर से बाहर निकालती है ,जैसे ही वो अपना मुह उसके पास ले जाती है उसे उसके गंदे पन का अहसास हो जाता है उसे उल्टी सी आती है जिसे देखकर रघु को बहुत ही आनद आता है,

“क्या हुआ साली दिखा अपना रंडिपन “

सोमनी के आंखों में आंसू आ गए थे ,उसने जब रघु के लिंग की ऊपरी चमड़ी सरकाई तो उसे एक सफेद परत दिखाई दी,रघु ने शायद कई दिनों से उस जगह को साफ नही किया था,उससे मांस के सड़ने जैसी बदबू से सोमनी को उल्टी आने लगी लेकिन वो थोड़ी सम्हाली और एक रुमाल से उसे साफ करने की कोशिश करने लगी,लेकिन रघु ने उसे रोक दिया .

“रुक साली उसे अपने होठो से साफ कर ,अपनी जीभ से चाटकर “

इस बात का तो अंदेशा सोमनी को भी था वो सम्हाल कर अपने रुमाल को एक तरह रखती है और झुककर रघु के लिंग को अपने मुह में डालती है ,

“आह साली “

रघु जैसे एक आनंद से झूम उठता है ,जिसके सपने उसने इतने बरसो देखे थे वो आज पूरा हो रहा था,वो अपना हाथ उसके सर पर रख देता है और अपने ताकत का इस्तमाल करके उसके सर को जोरो से दबाता है,रघु का पूरा लिंग सोमनी के मुह में समा गया था ,वो उसके गले तक जा रहा था जिससे सोमनी को सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी वो गु गु की आवाज कर रही थी और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी ,रघु को ये सब देखकर बहुत मजा आया और उसने अपनी पकड़ और भी मजबूत कर दी ,सोमनी के लिए ये बर्दास्त के बाहर हो रहा था वो अपने सर को जोरो से हिलाने लगी ,लेकिन रघु की पकड़ मजबूत थी ,अब उसके हाथ पैर भी छटपटा रहे थे ,वो उसके जांघो को अपने हाथ ओ से मार रही थी ,रघु किसी शैतान की तरह हँस रहा था,लेकिन उसे छोड़ नही रहा था,सोमनी की आंखे भीग चुकी थी ,जिल्लत और दर्द उसके जेहन को दर्द से डुबो रहा था ,वो अब जोरो से रो रही थी लेकिन उसकी आवाज उसके मुह में ही दब जा रही थी ….आखिर जब रघु को लगा की ये बहुत ज्यादा हो जाएगा उसने उसे छोड़ दिया ,सोमनी दहाड़ मार कर रोने लगी उसकी आंखे लाल थी मुह से लार निलक रहा था,सांसे तेज थी ,लेकिन वो गुस्सा करने की हालत में नही थी ,रघु की हँसी उसके कानो के में गूंजने लगी थी जो उसके दर्द को और भी बड़ा रहा था …

“क्यो मादरचोद मजा आया ,अब सांस ले ली तो चल फिर से शुरू हो जा “

सोमनी उसे दहसत भरी निगाहों से देखने लगी

“चूस इसे मादरचोद “रघु उसके बालो को पकड़कर जोरो से अपने लिंग की तरह ले जाता है ,सोमनी अब भी जोरो से रो रही थी लेकिन वो मजबूर इतनी थी की इसका कोई भी विरोध नही कर पाई ,इस बार भी वही हुआ लेकिन इस बार रघु उसके सर को ऊपर नीछे करता वो मजे के सागर में था ,कभी कभी वो सर को जोरो से दबा देता जिससे उसका लिंग सोमनी के गले में जा धसता जिससे वो कांप जाती थी लेकिन रघु को इससे कोई भी फर्क नही पड़ रहा था ,वो तो अपने मजे में था ,आखिर उसने सोमनी का सर जोरो से अपने जांघो के बीच गड़ाया जिससे उसका लिंग सोमनी के गले में जा टकराया वो छटपटाई लेकिन रघु ने अपनी पकड़ मजबूत रखी और अपना पूरा वीर्य उसके गले से नीचे उतार दिया ,वो थककर गिर पड़ा और सोमनी को छोड़ दिया ….दोनो ही हाँफने लगे थे ,सोमनी ने उसके झड़ने के लिए भगवान को धन्यवाद दिया ,रघु को भी ये आभास हुआ की अगर वो ऐसे ही जल्दी झड़ गया तो सोमनी को वो तकलीफ कैसे दे पायेगा जो उसे देना था ,उसके होठो पर एक मुस्कान आयी और उसने अपनी जेब से एक दवाई निकाली,इसे उसने खास आज के लिए ले रखा था ,वो एक गोली अपने ड्रिंक के साथ पी गया ,इसका असर उसे आधे घंटे बाद दिखने वाला था तो लेटे हुए सोमनी को देखने लगा और उसकी ललचाई आंखों में उसके वक्ष स्थल झूल गए ,उसके होठो में एक शैतानी की मुस्कान खिल गई …...

conti................

 
“मेरे लिए एक सिगरेट जला कर ला “

रघु उसके सामने सिगरेट का एक पैकेट फेंककर बोला वो जाकर एक माचिस ले आई और सिगरेट जला कर उसके हाथो में दे दिया ,रघु ने उसे खीचकर उसे अपने गोद में सुला लिया ,दो कस खिंचने के बाद वो सोमनी के वक्षो की ओर देखने लगा और अपने हाथो से उसे जमकर मसलने लगा ,वो सिगरेट को उसके दाहिने वक्ष की ओर ले जाने लगा ,

“नही ये क्या कर रहे हो ,नही “

सोमनी कांप ही गई से समझ आ चुका था की वो क्या करने वाला है ,रघु शैतानी मुस्कुराहट से उसे देखता है और चुप रहने का इशारा करता है,वो डर से काँपने लगती है ,रघु सिगरेट को उसके वक्षो के पास ले जाकर घूमता है उसकी तपन से सोमनी का जिस्म फिर से कांप जाता है ,लेकिन अभी तक रघु ने उसे उसके चमड़ी से छुवाय नही था,जिससे सोमनी के मन में डर की लहर बढ़ने लगती है ,वो अब भी इंतजार में थी लेकिन रघु तो जैसे खेलने के ही मूड में था ,वो हल्के से सिगरेट को छुवा कर फिर से उसे हटा लिया ,

“आह ,नही “इसबार सोमनी की आंखे बंद थी और उसके मुह से एक नशीली सी आवाज निकली रघु जानता था की सोमनी को इस खेल में थोड़ा तो मजा आया है ,वो अब जल्दबाजी के मूड में नही था ,वो उसे अपनी दासी बनाना चाहता था ,वो उसके लिए सालो तड़फा था वो कुछ ऐसा करना चाहता था की सोमनी भी उसके कदमो से सालो तक रहे ,एक ही बार में गुस्से में आकर बलात्कार करना उसे पसंद नही था ,फिर से सिगरेट को उसके वक्षो के ऊपर घुमाने लगा और आहिस्ता आहिस्ता से उसके निप्पलों पर अपनी उंगलिया फेरने लगा ,उसका लिंग अब अकड़ाने लगा था शायद दवाई असर दिखाने लगी थी वही सोमनी को भी ना चाहते हुए भी एक नशा सा चढ़ रहा था वो मदहोश हो रही थी …...उसने उसके निप्पलों को हल्के हल्के उंगलियों से मसलना जारी रखा जबकि सिगरेट को उसके वक्षो पर हल्के हल्के घुमा रहा था कभी कभी ही वो उसके त्वचा को टच करती जिससे सोमनी के मुह से आहे निकल जाती वो दर्द देने वाला नही बल्कि मजा देने वाला बन गया था,रघु को अपनी ही हरकत पर हैंसी आ रही थी वो सोमनी का बलात्कार करना चाहता था उसे रुलाना चाहता था लेकिन वो उसे ही मजा दे रहा है ,लेकिन उसे पता था की ये तो बस इन्वेस्टमेंट है ...जिसका रिटर्न उसे जिंदगी भर मिलेगा ….

सोमनी थोड़ी थोड़ी मदहोश होने लगी थी ,रघु जाकर थोड़ा रंग ला लेता है और सोमनी को पकड़ उसके होठो को चूमता हुआ उसके होठो में अपने होठो को घुसा कर बड़े ही पैसनेटली चूमने लगता है ,देखते ही देखते दोनो के हाथ एक दूसरे पर चल रहे थे ,दोनो ही लंबी लंबी सांसे ले रहे थे,एक दूजे के होठो पर अपनी जीभ घुसा कर बैठे थे ,और एक दूसरे पर रंग लगा रहे थे ,अब दोनो ही पूरी तरह से नंगे थे ,दवाई का असर रघु के लिंग पर दिख रहा था और उसके होठो में कातिलाना मुस्कुराहट झूमने लगी वो सोमनी के गीले हुए योनि में अपने लिंग को पेलता चला गया ,दोनो जिस्म मिले दोनो ही मजे से कहारे ले रहे थे ,किसी को ये यकीन ही नही होता की रघु सोमनी का बलात्कर कर रहा था असल में अब ये बलात्कार नही रह गया था क्योकि मजे तो दोनो ही ले रहे थे ,आखिर कर दोनो झड़े ,रघु ने सोमनी को अंदर तक भीगो दिया था …

सोमनी को अब भी समझ नही आ रहा था की आखिर रघु ने उसके साथ इतना अच्छा व्यव्हार क्यो किया ,लेकिन इस हादसे के बाद से ही वो रघु की पर्सनल रांड बन चुकी थी ,और उसके बच्चों की मा भी ,रघु के कहने पर ही उसने किशन से शादी कर ली ,सोमनी ने किशन को उसका बच्चा पेट में होने की बात कह कर ब्लैकमेल कर उससे शादी कर ली ,अब रघु किशन को देखकर हंसता था ,रघु ने ना सिर्फ अपना बदला लिया बल्कि हमेशा के लिए अपना जुगाड़ भी फिक्स कर लिया ,

end
 
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