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बस स्टॉप
लेखक - गुड्डू सिंह (कुंदन )
शालनी को कॉलेज छोड़े दो साल हो गया था मगर विनोद शालनी के घर की तरफ
जाना अभी भी नहीं भुला था ।विनोद हर रोज अपनी बाइक से शालनी की घर की तरफ जब तक दो - तीन चक्कर
नहीं मारता उसे चैन कहाँ आने वाला था । कभी - कभी शालनी छत पर कपड़े सूखती हुई दिखाई देती तो विनोद
शालनी को देखकर मन ही मन बहुत खुश होता ।दिसम्बर का महीना था| ठंड की वजह से हल्का - हल्का कोहरा भी
नीले आसमान में छाया हुआ था !धुप की किरणें कोहरे को चीरता हुआ ओस की बुँदे पड़ परती तो ऐसा लगता जैसे आसमान से ओस
नहीं कुंदन की बारीश हुआ हो !विनोद कॉलेज के उस खूबसूरत पल को
कैसे भूल पता । ६० साल कॉलेज का आज पूरा हो गया था इसलिये आज वार्शिक महोत्सब (अनुअल फंसन ) में सब
लोग अपनी - अपनी कला को बड़े नुमाइश के साथ प्रदर्शन कर रहे थे !पूरा हॉल तालियो की आवाज से गूंज रहा था
।उस भीड़ में विनोद की नजर शालनी पर पड़ी ?नैन -नस्क सुबह की पहली किरण , बाल अम्बर में उमरते - घुमड़ते काली बदली की तरह। लटके झटके के साथ रंगमंच पर .......मेरा पिया घर आया हो रामजी। इस गाने पड़ अंगविच्छेप (नाच - रंग ) से सबको मोह रही थी। विनोद पहली नजर में ही शालनी को चाहने लगा|?और टकटकी नजरों देखने लगा । जब कॉलेज की छुट्टी हुई तो भीड़
की वजह से शालनी विनोद से ओझल हो गई। विनोद व्याकुल होकर शालनी को इधर -उधर ढूंढने लगा
। तभी कॉलेज के चपड़ासी बहादुर शर्मा जी सीढ़ियों से फिसल कर गीर गये !सभी स्टूडेंट शर्मा जी को घेर कर
खड़े हो गये ?मगर कोई शर्मा जी को
उठाकर अस्पताल नहीं ले गया । इतने सारे स्टूडेंट में शालनी ने अकेले ही अपनी बहादुरी दिखाई थी। शालनी की हर अदा विनोद के दिल में प्यार के सुगन्धित पुष्प खिला रही थी। सम्पूर्ण जिस्म में जैसे एक अलोखिक शक्ति दौड़ने लगी| मन बार - बार उसकी मनमोहक चेहरा देखने के लिए व्याकुल हो उठा। विनोद न चाहते हुए भी बार - बार शालनी के
बारे में ही सोच रहा था!अरे विनोद आज
तो कमाल ही हो गया शालनी ने अकेले ही शर्मा जी को उठाकर अस्पताल ले गई ?बहुत बहादुर लड़की है -
रोहित दौड़ते हुए विनोद के पास आकर बोला । तू जानता है उस लड़की को । विनोद ने
पूछा ? हाँ मेरे घर से आगे दो मंजिला घर है? वही है शालनी का । रोहित ने झट से
जवाब दिया । विनोद -रोहित की बात सुनकर मन ही मन मुस्कुराने लगा । रोहित -विनोद को
मुस्कुराते हुए देखकर बोला । क्यों भाई क्या माजरा है? कही तू कुछ गरबर तो नहीं करने
वाला है ।नहीं यार ऐसा कुछ भी नहीं है ?और सुन आज से तू मेरे
साथ आयेगा भी और जायेगा भी समझा । विनोद रोहित के
सर पर मारते हुए बोला ।ओ भाई मै बस से आता जाता हु ?........ मेरे पास तुम्हारी तरह
बाइक नहीं है । रोहित विनोद के आगे आकर और उसकी तरफ घूम कर बोला । आज से तू मेरे साथ ही आयेगा
और जायेगा । ज्यादा बोला तो अबकी बार जोड़ से मारूंगा । विनोद रोहित के सर पर दुबारा मारते हुए बोला । रोहित
-विनोद के साथ बाइक से जाने लगा । दोनों एक दूसरे
से रास्ते में हसी ठिटकुले करते हुए जा रहे थे । रोहित एक बात बता ? वो जो लड़की है
किस चीज से आती जाती है । विनोद बाइक चलाते हुए पूछा ? वो कौन ? ...... रोहित अचंभित होकर पूछा ? अरे वही लड़की जो शर्मा जी को उठाकर अस्पताल ले गई थी । विनोद की इस
बात पर रोहित हसते हुए बोला । बस से आती है और बस से जाती है | क्यों अब बस
भी खरीदने का इरादा है क्या ? रोहित की बात सुनकर विनोद बाइक की स्पीड बढ़ाते हुए बोला । कल से
हम दोनों बस से आयेंगे और जायेंगे समझ गया । अगले दिन विनोद और रोहित कॉलेज
जाने के लिए बस स्टॉप पर जल्दी ही गया । विनोद की निगाहे- शालनी को ही चारो तरफ ढूंढ रही
थी । तभी विनोद की नजर शालनी पर गया । शालनी अपनी सहेलियों के साथ बाते
करती हुई आ रही थी । विनोद लगातार शालनी की तरफ ही देख रहा था । इसी बीच
बस आ गई । शालनी अपनी सहेलियों के साथ बस में चढ़ गई और पीछे से विनोद और
रोहित भी चढ़ गया । बस पब्लिक से पूरी तरह से भरी हुई थी । कंडक्टर टिकट -
टिकट बोलते हुए सब को टिकट दे रहा था । ए शालनी देख पीछे वाला लड़का तुम्हे ही
देख रहा है ? शालनी की सहेली पुष्पा –विनोद की तरफ आँखो से इशारा करती हुई बोली
। शालनी- विनोद की तरफ देखकर बोली |ऐसा कुछ भी नहीं है यार मै सब समझती
हु । पुष्पा- शालनी को छेरती हुई बोली । पुष्पा की बात सुनकर शालनी मुस्कुराते हुए
शर्मा कर सर झुका ली ।शालनी भी कभी - कभी विनोद की तरफ देखती और शर्मा
कर सर निचे कर लेती । शालनी बिटियाँ ये लो तुम अपना पांच सौ रूपये मेरी दवा में
जो खर्च हुआ था । पीछे से कॉलेज के चपड़ासी शर्मा जी ने आवाज लगाई । कैसी
तबियत है, आपकी चाचा जी शालनी पूछी ? अब मै बिल्कुल ठीक हु,
बिटियाँ -बिटियाँ ये लो तुम अपना पैसा । शर्मा जी शालनी की तरफ पैसा बढ़ाते हुए बोले
।नहीं चाचा हमें जब भी किताब या नोट्स की जरुरत होती है, तो आप मेरी मदद करते है|
इसलिए ये पांच सौ रूपये आप ही रख लीजिये और दवा ठीक से करना अपना । इतना
बोलकर शालनी चली गई । छह हजार के महीना में शर्मा जी कैसे अपने परिवार का भरन -पोषण कर रहे है ? ये बात शर्मा जी ही जानते है, और ऊपर से ये महगाई थमने का नाम ही नहीं ले रही है !जब भी शर्मा जी
के ऊपर कोई मुसीबत
आती तो सारे स्टूडेंट चंदा इकट्ठा कर के शर्मा जी को मदद करते। शर्मा जी से
कभी - कभी शालनी कुछ पूछती तो शर्मा जी बताते । बिटियाँ पांच सौ रूपये से इस
कॉलेज में नौकरी कर रहा हु । चालिश साल मैंने इस कॉलेज में सबकी सेवा करते हुए
गुजार दिए मगर -यहाँ तो इंसान खस्ता मिट्टी का ढ़ेर है । कोई स्टूडेंट
लड़ाई करता तो समझाने पर वह हमें ही दो- चार बाते सुना देता ।इसलिए बिटियाँ
चुपचाप एक तरफ खड़ा होकर तमाशा देखना परता । किसी को अपनी भविष्य की फिक्र
ही नहीं है |जिसको देखो वो पढ़ने के वजाये इधर - उधर घूमता रहता है । इतना
बोलकर शर्मा जी एकदम से चुप हो जाते । शालनी शर्मा जी की बात सुनकर कुछ बोलती
तो शर्मा जी धीमे स्वर में कैहते -सब लोग तुम्हारी तरह थोड़े होते है बिटियाँ । अब
रोज विनोद- शालनी के आगे - पीछे मँडराने लगा । एक दिन की बात है, शालनी एक
हफ्ते के लिए कॉलेज नहीं आई । विनोद रोज शालनी को कॉलेज और बस स्टॉप पर
जाकर ढूंढने लगा । फिर एक दिन विनोद - शर्मा जी से जाकर पूछा ?तो शर्मा जी बोले ।
हमें भी नहीं मालूम है| शायद बीमार पड़ गई होगी? तुम पुष्पा से जाकर क्यों नहीं पूछते
हो पुष्पा को मालूम होगा । विनोद तुरंत पुष्पा से जाकर पूछा ?तो पुष्पा ने भी कुछ जवाब
नहीं दी। विनोद- शालनी को देखने के लिए इस कदर परेशान था ?जैसे चाँद
बिना चकोर ।मन उचाट सा रहने लगा , किताब कॉपी सभी जगह शालनी का ही प्रतिबिम्ब दिखाई देता |फर्क इतना था की उस प्रतिबिम्ब देखर अपने दिल की आवाज उस तक नहीं पंहुचा पता। अगले दिन पुष्पा -शालनी से मिलने उसके घर गई । आंटी शालनी कहा है ? पुष्पा
- शालनी की माँ से पूछी ? ऊपर अपने कमरे में | शालनी की माँ बर्तन मांजते हुए जवाब दी
। पुष्पा- शालनी के कमरे में चली गई और उसे सारी बात बता दी । शालनी- पुष्पा की
बात सुनकर कुछ बोली नहीं मनो जुबान किसी चीज से चिपक गया हो। दिल की धड़कन दुगुनी रफ़्तार से धड़कने लगा हो। मन में पुरानी काल्पनिक बस वाली छाया धुंधली सी दिखाई देने लगी। शालनी एक बात और बोलू-पुष्पा -शालनी के हाथ पर
अपनी हाथ रखती हुई बोली । क्या ? शालनी धीमे से रूखे स्वर में जवाब दी । शालनी -विनोद
सचमुच तुमसे बेहद प्यार करता है| वरना कोई इस तरह परेसान क्यों होता ? शालनी तू
बहुत लक्की है, जो तुम्हे विनोद जैसा इंसान प्यार करने वाला मिला है । पुष्पा इतना
बोलकर चली गई। मगर पुष्पा की बात शालनी के अंतर आत्मा छू गई । न चाहते हुए भी
शालनी बार - बार विनोद के खयालो में डूबती जा रही थी । शायद शालनी के दिल में भी प्यार का नन्हा बीज पनपने लगा था |अगले दिन शालनी जब कॉलेज गयी? तो कॉलेज का गेट
बंद था और बाहर नोटिस बोर्ड पर लिखा था । कॉलेज पंद्रह दिनों के लिए बंद है ।
शालनी नोटिस बोर्ड पर लिखी सूचना देखकर एकदम से सुर्ख गई। चहरे पर गम और चिंता की लकीर उभर आई |पैर को किसी ने मानों मोटी जंजीर से जकड़ लिया हो। शालनी बिस्फरित आँखो सो टकटकी लगाए हुए नोटिस बोर्ड को ही देख रही थी। तभी पीछे से
शर्मा जी ने आवाज दिए । शालनी पीछे मुरकर देखि तो शर्मा जी हाथ में मिठाई के
डब्बा लिए खड़े थे । लो बिटियाँ मिठाई खाओ आज हमने पाचश हजार का लॉटरी जीता
है । शर्मा जी अपनी हाथो से शालनी को मिठाई खिलाते हुये बोले । चाचा कॉलेज पंद्रह
दिनों के लिए क्यों बंद है? शालनी शर्मा जी से उत्सुकता से पूछी ? हरताल चल रहा है
कॉलेज का बिटियाँ ....... बिटियाँ तुम से एक बात कैहना था? कल तुम्हे विनोद खोज रहा था
बेचारा बहुत परेशान लग रहा था । क्या बात है बिटियाँ सब ठीक तो है ना ? शर्मा जी शालनी से पूछे ? कुछ नहीं
चाचा विनोद को
साइकोलॉजी का नोट्स देना था । शालनी इसे पहले कभी नहीं शर्मा जी से झूठ बोली थी
।शालनी के मुँह से ये झूठ कैसे निकल गया शालनी को समझ में भी नहीं आ रहा था ।
अपने दिल की हर बात शर्मा जी से शेयर करती थी अगर शर्मा जी को ये बात पता
चलेगी तो क्या सोचेंगे मेरे बारे में । मैंने उन से झूठ बोला एक शर्मा जी ही तो इस
कॉलेज में है जो सबकी मदद करते है । एक दिन सड़क पर एक छोटा बच्चा भीख मांग
रहा था और एक बाइक वाले ने उस बच्चे को टक्कर मार दी । उस बच्चे का सारा शरीर
खून से लदपद था । शर्मा जी ने उस बच्चे को उठाकर अस्पताल ले गए थे |उस दिन
शर्मा जी को तंखोया (शैलरी )मिली थी । जो सारा पैसा उस बच्चे के इलाज में खर्च हो
गया था । जिसकी वजह से शर्मा जी को कर्ज लेकर अपना घर चलना पड़ा था । वरना
आज के दौर में कौन किसी की फिक्र करता है । कोई मरे - कोई जिये आज के
लोग बस - ट्रैन की तरह भागते रहते है । एक छोटा सा झूठ शालनी के मन को झँकोर
दिया था । आज रोहित का जन्मदिन था।घर मेहमानो से भरे- पुरे हुए थे । विनोद –रोहित के
साथ बैठ कर कुछ बाते कर रहा था । मुबारक हो रोहित आज तुम पुरे चौबीश साल के
हो गए हो । शालनी - रोहित के हाथ में सरप्राइज गिफ्ट देती हुई बोली । थैक्यू शालनी
अगले साल पच्चीस का हो जाऊँगा । रोहित हस्ते हुए बोला । विनोद -शालनी को देखकर
मन्त्रमुग्ध हो गया। बालों और जिस्म की खुसबू से मन में बार - बार प्यार के फुब्बारे फूटने लगा। आज पहली बार विनोद- शालनी को इतना करीब से देख था। कांति से भरा यौवन |विनोद को बार - बार उसकी और आकर्षण की तरह खीच रहा था । शालनी भी पार्टी में आये
- लोगो से नजरे चुरा कर विनोद को देख रही थी । शायद दोनों एक दूसरे से बात करना
चाहते थे मगर हिम्मत किसी को नहीं हो रही थी । देखता क्या है मजनू जाके प्रपोज
कर दे । रोहित -विनोद के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला । नहीं यार डर लगता है| कही
नाराज हो गई तो । विनोद की बात सुनकर रोहित –विनोद को शालनी की तरफ धकेलते
हुए बोला |कुछ नहीं होगा जा ? विनोद जैसे ही शालनी के पास गया तभी पुष्पा आ गई
। विनोद वापस मायुश होकर रोहित के पास आ गया । ऐ शालनी देख विनोद भी
आया है । तूने कुछ बात की क्या ?पुष्पा- शालनी की चुटकी लेती हुई बोली । क्या बात
करू विनोद से शालनी विनोद की तरफ देखती हुई बोली । पहले तो लम्बी - लम्बी
बाते करती थी |फिर आज क्या हुआ देख शालनी अगर विनोद को प्रपोज करने में तुम्हे
डर लगता है तो मै करू विनोद को प्रपोज । पुष्पा की बात सुनकर शालनी -पुष्पा
को
अपनी आँखे दिखती हुई बोली |गला दवा दुँगी तेरा अब दुबारा कभी ऐसी बात की तो।
अगले दिन कॉलेज खुला तो कॉलेज में नया चपड़ासी आया हुआ था । शालनी नये
चपड़ासी के पास जाकर शर्मा जी के बारे में पूछी ?तो नया चपड़ासी इतराते हुए बोला
।हम शर्मा जी का ठिका ले रखे है जाओ शर्मा जी को ढूंढो और जो पूछना है पूछो ?
शालनी को जैसे पैरो के निचे से जमीन खिसक गया हो । शर्मा जी जैसे अच्छे इंसान को
कॉलेज से क्यों निकाल दिया गया । नया चपड़ासी हमेशा पान चिबाता और जहाँ
मन होता वही पर थूक देता था। जिसकी वजह से कॉलेज की दिवार, पान और गुटखे की पिक (थूक ) से साडी दिवार पर भद्दी -भद्दी कलाकृतिया नजर आ रही थी| । नया चपड़ासी से जब भी कोई स्टूडेंट किताब या नोट्स लाने को कैहता तो
नया चपड़ासी झट से बोलता । दस रूपया लूंगा तो नोट्स लाकर दूंगा ? मेरे भी बाल -
बच्चे है। कॉलेज में किसी को अब स्टूडेंट की फिक्र ही नहीं थी । जिसे मदद मांगों पैसे
की बात करता था । सभी स्टूडेंट को शर्मा जी की कमी महशुस होने लगी थी । जब भी
कोई शर्मा जी से कुछ कैहता तो शर्मा जी तुरंत लाकर दे देते । पैसा देने पर शर्मा जी
जीभ को दाँतो के बीच काटते हुए बोलते । इन पैसे को अपनी पढाई पर खर्च करो? और
अपने परिवार का नाम उज्वल करो । क्या इस समाज में शर्मा जी जैसे ईमानदार और
अच्छे इंसान को जीने का कोई हक़ नहीं है । क्या इसी ईमानदारी के वजह से चालिश
साल जिसने इस कॉलेज में सबकी सेवा की आज उनकी ईमानदारी और मेहनत का कोई मोल नहीं है ?
अब किसे शालनी अपनी दुख - सुख शेयर करती । कौन पूछता कैसी हो बिटियाँ ?उस
दिन शालनी बिना क्लास किये घर आ गई । माँ ने जब जल्दी आने का कारन पूछी ?तो
तबियत ठीक नहीं है । जवाब देकर चुप- चाप अपने कमरे में चली गई । उस दिन शालनी न खाना
खाई और न किसी से बात की बस सोचती रही |शर्मा जी अब कैसे होंगे ? कहाँ होंगे ।
उस दिन के बाद से कॉलेज का माहौल ही बदल गया । अगले दिन जब शालनी कॉलेज
जाने के लिए बस स्टॉप पर आई तो वहाँ विनोद पहले से ही मौजूद था । विनोद -शालनी
को देखकर पास गया ,और बोला -कॉलेज चले ? बस कहाँ आई है ? शालनी मुस्कुराते
हुए जवाब दी । जी मेरे पास बाइक है , विनोद हिचकिचाते हुए अपनी बाइक की तरफ
हाथ से इशारा करते हुए बोला । शालनी कुछ और बोल पाती इसे पहले बस आ गई ।
शालनी बस पर चढ़ गई और मुस्कुराते हुए बार - बार पीछे मुरकर विनोद की तरफ
देखने लगी । विनोद भी अपनी बाइक से बस के साथ कॉलेज जाने लगा |और जब भी
शालनी विनोद की तरफ देखती तो विनोद भी मुस्कुराते हुए जवाब दे देता । आज कॉलेज
में परिक्षा का रिजल्ट निकलने वाला था । शालनी और विनोद कॉलेज पंहुचे तो देखा
नोटिस बोर्ड के पास बहुत भीड़ लगी हुई है। शालनी और विनोद नोटिस बोर्ड के पास
जाकर अपना - अपना रिजल्ट देखने लगे । शालनी अपना रिजल्ट देखकर खुश होती हुई
बोली । पुष्पा मै अच्छे नम्बरो से पास हो गई । तुम्हारा क्या है ? सैकेंड आया है यार ।
इतनी मेहनत करने बाद । पुष्पा लम्बी सास लेती हुई बोली । विनोद ने जब अपना
रिजल्ट देखा तो उसके होस ही उड़ गए । बाकि सभी सब्जेक्ट में अच्छे नंबर था मगर
साइकोलॉजी में पच्चीस, जिसकी वजह से विनोद परीक्षा में फेल हो गया । विनोद कॉलेज
के सीढ़ी पड़ धम जाकर बैठ गया- और उसके मन में ढ़ेर सारे सवाल घूमने लगा । माँ को
जब पता चलेगा की मै फेल हो गया हु ?तो उनपर क्या बीतेगा । मेरा कैरियर मेरा प्यार
सब ख़त्म हो गया । अब शालनी कभी हमसे बात नहीं करेगी । तभी पुष्पा आई और
विनोद के हाथ में एक कागज का टुकड़ा देकर चली गई । विनोद कागज को खोलकर पढ़ने लगा ।
इंसान को कभी निराश नहीं होना चाहिए । जो काम कल नहीं हुआ उसे आने वाले कल
में भी पूरा किया जा सकता है । विनोद जब पढ़कर शालनी की तरफ देखा तो शालनी
मुस्कुराते हुए जवाब दे दी ।कॉलेज खत्म होने के बाद शालनी एक मोबाईल कम्पनी में नौकरी करने लगी
और विनोद दिल -जान लगाकर परीक्षा की तैयारी करने में लग गया था । लेकिन
कभी - कभी शालनी की याद विनोद को बैचेन कर देती । पुष्पा की शादी हो गई और पुष्पा अपने पति के साथ बिदेश
में सैटल हो गई थी । रोहित ने अपना रेडीमेट का
नया बिजनेश शुरू कर लिया था । दो पहर हो चूका था । विनोद अपने कमरे में लेटा हुआ
था । तभी विनोद की माँ आई और बोली - बेटा बाहर कोई पुष्पा आई है |तुमसे मिलने
के लिए ?विनोद -पुष्पा की नाम सुनकर तुरंत बाहर गया |और पुष्पा को देखकर व्याकुलता पूछा ?
पुष्पा -शालनी नहीं आई है । विनोद के चेहरे पर एक अजीब सी खुसी उभर आई थी ।
जब पुष्पा ने ना में सर हिलाकर जवाब दी| तो विनोद एक दम से मुरझा गया। कितना
प्यार करता है |विनोद शालनी से एक दम पागलों की तरह न ज़माने की फिक्र है ?और ना
ही इस समाज की और एक शालनी है |जो विनोद के प्यार से अब तक कोशो दूर है ।
न जाने कितनी बार विनोद के मुँह से शालनी का नाम आता होगा । शायद पुष्पा को
शालनी से इर्स्या (जलन ) होने लगी थी । शालनी -विनोद से कितना प्यार करती थी ये
बात किसे बताती । एक माँ थी जो सारा दिन अपने काम में लगी रहती। उनके पास
इतना सा भी वक्त नहीं था |की शालनी से कभी बैठकर आराम से दो बाते कर सके ।
पापा थे जो सारा दिन ऑफिस के काम में लगे रहते थे । एक शर्मा जी थे जिनके पास
जाकर शालनी अपने मन की बोझ को हल्का कर लेती थी । मगर कॉलेज ने उन्हें भी
निकाल दिया था । अब शालनी बिल्कुल अकेली पड़ गई थी । ऐसा लगने लगा था की
किसी के पास शालनी के लिए थोड़ा सा भी वक्त नहीं है । जो दो बाते अपनी कैह सके
- और दो बाते शालनी की सुन सके । विनोद को शालनी से दूर हुए दो साल होने वाला था
। ना विनोद -शालनी को भूल पाया था और नाही शालनी विनोद को भूल पाई थी । घर
में शालनी की शादी की बात चल रही थी । कई जगह से रिस्ता भी आया मगर शालनी
ने सब को ठुकरा दी । इतने अच्छे - अच्छे घरो से रिस्ता आ रहे है । तुम इंकार क्यों
कर रही हो । माँ ने शालनी के सर पड़ सनेह से स्पर्श करती पूछी ? माँ अभी मै शादी
नहीं करना चाहती हु ? शालनी ने धीमे और रूखे लफ्जो में माँ को जवाब दे दी ? पर क्यों नहीं करना
चाहती हो| आखिर बात क्या है? माँ ने शालनी का चेहरा अपनी तरफ करके पूछी ? ऐसे
ही अभी मै नौकरी करना चाहती हु । शालनी की बात सुनकर माँ गुस्से में बोली |क्या
लोग शादी के बाद नौकरी नहीं करते है । सारे मौहल्ले में तुम्हारे नाम की संकीर्ण चर्चा हो रही है । सब
की शादी हो गई पर शालनी ने शादी क्यों नहीं की? मौहल्ले कीऔरते ये बात बोलती
है । किस - किस को मै जवाब देती फिरूँगी। इतना बोलकर शालनी की माँ चली गई । माँ की
बात सुनकर शालनी का जैसे दिल बैठ सा गया हो। आखो से अश्रु की बुँदे टपकने लगी |और तकिये से मुँह को दाब कर सिसकने लगी। कैसा समाज है हमारा यहाँ बेटियों
को ज्यादा दिन रहने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए लोग अपनी बेटियां की शादी
कम उम्र में कर देते है । क्या यहाँ बेटियों को चैन से जीने का कोई हक़ नहीं है । क्या
यही हमारे देश के नियम - कानून है बेटियों को हमेशा हीन नजर से देखा जाये ।
इतना सोचते ही शालनी के आँखो से मानो अश्रु का बांध टूट गया । शालनी का मन अभी पूरी तरह
से हल्का भी नहीं हुआ था तभी पुष्पा आई । अरे पुष्पा कब आई? शालनी अपनी
हाथो से आंसू पोछती हुई बोली ।अश्रु और आँखो की गीली नमी देख कर पुष्पा को बात समझने में देर न लगी।
कल ही तो आई हु ? पुष्पा –शालनी के पास जाकर गले लगती हुई बोली । बहुत दिनों के बाद आई है |अपने पति के बारे में कुछ नहीं बतायेगी
। शालनी- पुष्पा से मजाक करती हुई बोली । शालनी की बात सुनकर पुष्पा हसने लगी
और बोली| शालनी आज सुबह विनोद से मिली थी । बहुत प्यार करता है ?तुम से हर
वक्त तुम्हारा ही नाम लेता रहता है । यार शालनी लाइफ में पहली बार देखा है । इतना
प्यार किसी को करते हुए । बिल्कुल पागल हो चूका है तुम्हारे लिए । पुष्पा की बात
सुनकर शालनी -विनोद के बारे में पूछती रही? और पुष्पा शालनी को विनोद के बारे में
बताती रही ।शालनी का दिल भी विनोद से मिलने के लिए उतना ही मचल रहा था जितना की विनोद का । आज
कॉलेज में परीक्षा का रिजल्ट निकलने वाला था । शालनी विनोद से मिलने कॉलेज जा
रही थी ।तभी पीछे से किसी ने बोला -कैसी हो शालनी बिटियाँ । शालनी पीछे मुरकर
देखि तो शर्मा जी रिक्शा लिए हुए कही जा रहे थे । शालनी शर्मा जी को इस हालत में
देखकर अचंभित रह गई । चेहरें पर झुरिया आ चुकी थी । हाथो के नस साफ - साफ दिखाई
देने लगा था। ज्यादा तेज बोलने से सास भी फूलने लगा था । पच्चपन वर्ष के होने के
बाबजूद शर्मा जी सत्तर वर्ष के लग रहे थे । आखिर कौन था ?शर्मा जी के इस हालत का जिम्मेदार कॉलेज या फिर
शर्मा जी अच्छाई । क्या सोचने लगी बिटियाँ / शर्मा जी
शालनी के कंधे पर हाथ रखते हुए बोले । कुछ नहीं चाचा जी-शालनी हिचकिचाते हुए
बोली । कॉलेज जा रही हो ना । शर्मा जी हस्ते हुए बोले । शालनी हा में सर हिलाकर
जवाब देदी । शालनी के मना करने के बाद भी शर्मा जी शालनी को अपनी रिक्शा से
कॉलेज छोड़ दिए । जब शालनी शर्मा जी को उनकी मजदूरी दी तो शर्मा जी अपनी
जीभ को दाँतो के बीच काटते हुए बोले। बिटियाँ तुम्हारा कर्ज मेरे यहाँ अभी बाकि है ।
इतना बोलकर शर्मा जी रिक्शा के घंटी बजाते हुए चले गये । शालनी नोटिस बोर्ड के
पास जाकर विनोद का रिजल्ट देखि तो विनोद परीक्षा में अव्वल नंबर से पास हो चूका
था। शालनी विनोद का रिजल्ट देखकर बहुत खुस हो गई और विनोद को ढूंढने
लगी।मगर विनोद शालनी को कॉलेज में कहीं नहीं मिला । शालनी उदास होकर घर चली आई
। अगले दिन शालनी ऑफिस जाने के लिए बस स्टॉप पर खड़ी होकर बस का इंतजार
कर रही थी । तभी विनोद आया और बोला | ऑफिस छोड़ दू ? शालनी विनोद को
देखकर चौक गई और मुस्कुराते हुए बोली । बस कहाँ आई है ? जी मेरे पास बाइक है ।
विनोद इस बार भी हिचकिचाते हुए अपनी बाइक की तरफ हाथ से इशारा करते हुए बोला । तभी फिर बस
आ गई । बस को देखकर विनोद उदास होकर सर निचे झुका लिया। तभी पीछे से शालनी एक
कागज पुलिंदा विनोद के सर पर मरती हुई बोली । बाइक पर बैठने के लिए नहीं
कहोगे !
समाप्त
लेखक - गुड्डू सिंह (कुंदन )
शालनी को कॉलेज छोड़े दो साल हो गया था मगर विनोद शालनी के घर की तरफ
जाना अभी भी नहीं भुला था ।विनोद हर रोज अपनी बाइक से शालनी की घर की तरफ जब तक दो - तीन चक्कर
नहीं मारता उसे चैन कहाँ आने वाला था । कभी - कभी शालनी छत पर कपड़े सूखती हुई दिखाई देती तो विनोद
शालनी को देखकर मन ही मन बहुत खुश होता ।दिसम्बर का महीना था| ठंड की वजह से हल्का - हल्का कोहरा भी
नीले आसमान में छाया हुआ था !धुप की किरणें कोहरे को चीरता हुआ ओस की बुँदे पड़ परती तो ऐसा लगता जैसे आसमान से ओस
नहीं कुंदन की बारीश हुआ हो !विनोद कॉलेज के उस खूबसूरत पल को
कैसे भूल पता । ६० साल कॉलेज का आज पूरा हो गया था इसलिये आज वार्शिक महोत्सब (अनुअल फंसन ) में सब
लोग अपनी - अपनी कला को बड़े नुमाइश के साथ प्रदर्शन कर रहे थे !पूरा हॉल तालियो की आवाज से गूंज रहा था
।उस भीड़ में विनोद की नजर शालनी पर पड़ी ?नैन -नस्क सुबह की पहली किरण , बाल अम्बर में उमरते - घुमड़ते काली बदली की तरह। लटके झटके के साथ रंगमंच पर .......मेरा पिया घर आया हो रामजी। इस गाने पड़ अंगविच्छेप (नाच - रंग ) से सबको मोह रही थी। विनोद पहली नजर में ही शालनी को चाहने लगा|?और टकटकी नजरों देखने लगा । जब कॉलेज की छुट्टी हुई तो भीड़
की वजह से शालनी विनोद से ओझल हो गई। विनोद व्याकुल होकर शालनी को इधर -उधर ढूंढने लगा
। तभी कॉलेज के चपड़ासी बहादुर शर्मा जी सीढ़ियों से फिसल कर गीर गये !सभी स्टूडेंट शर्मा जी को घेर कर
खड़े हो गये ?मगर कोई शर्मा जी को
उठाकर अस्पताल नहीं ले गया । इतने सारे स्टूडेंट में शालनी ने अकेले ही अपनी बहादुरी दिखाई थी। शालनी की हर अदा विनोद के दिल में प्यार के सुगन्धित पुष्प खिला रही थी। सम्पूर्ण जिस्म में जैसे एक अलोखिक शक्ति दौड़ने लगी| मन बार - बार उसकी मनमोहक चेहरा देखने के लिए व्याकुल हो उठा। विनोद न चाहते हुए भी बार - बार शालनी के
बारे में ही सोच रहा था!अरे विनोद आज
तो कमाल ही हो गया शालनी ने अकेले ही शर्मा जी को उठाकर अस्पताल ले गई ?बहुत बहादुर लड़की है -
रोहित दौड़ते हुए विनोद के पास आकर बोला । तू जानता है उस लड़की को । विनोद ने
पूछा ? हाँ मेरे घर से आगे दो मंजिला घर है? वही है शालनी का । रोहित ने झट से
जवाब दिया । विनोद -रोहित की बात सुनकर मन ही मन मुस्कुराने लगा । रोहित -विनोद को
मुस्कुराते हुए देखकर बोला । क्यों भाई क्या माजरा है? कही तू कुछ गरबर तो नहीं करने
वाला है ।नहीं यार ऐसा कुछ भी नहीं है ?और सुन आज से तू मेरे
साथ आयेगा भी और जायेगा भी समझा । विनोद रोहित के
सर पर मारते हुए बोला ।ओ भाई मै बस से आता जाता हु ?........ मेरे पास तुम्हारी तरह
बाइक नहीं है । रोहित विनोद के आगे आकर और उसकी तरफ घूम कर बोला । आज से तू मेरे साथ ही आयेगा
और जायेगा । ज्यादा बोला तो अबकी बार जोड़ से मारूंगा । विनोद रोहित के सर पर दुबारा मारते हुए बोला । रोहित
-विनोद के साथ बाइक से जाने लगा । दोनों एक दूसरे
से रास्ते में हसी ठिटकुले करते हुए जा रहे थे । रोहित एक बात बता ? वो जो लड़की है
किस चीज से आती जाती है । विनोद बाइक चलाते हुए पूछा ? वो कौन ? ...... रोहित अचंभित होकर पूछा ? अरे वही लड़की जो शर्मा जी को उठाकर अस्पताल ले गई थी । विनोद की इस
बात पर रोहित हसते हुए बोला । बस से आती है और बस से जाती है | क्यों अब बस
भी खरीदने का इरादा है क्या ? रोहित की बात सुनकर विनोद बाइक की स्पीड बढ़ाते हुए बोला । कल से
हम दोनों बस से आयेंगे और जायेंगे समझ गया । अगले दिन विनोद और रोहित कॉलेज
जाने के लिए बस स्टॉप पर जल्दी ही गया । विनोद की निगाहे- शालनी को ही चारो तरफ ढूंढ रही
थी । तभी विनोद की नजर शालनी पर गया । शालनी अपनी सहेलियों के साथ बाते
करती हुई आ रही थी । विनोद लगातार शालनी की तरफ ही देख रहा था । इसी बीच
बस आ गई । शालनी अपनी सहेलियों के साथ बस में चढ़ गई और पीछे से विनोद और
रोहित भी चढ़ गया । बस पब्लिक से पूरी तरह से भरी हुई थी । कंडक्टर टिकट -
टिकट बोलते हुए सब को टिकट दे रहा था । ए शालनी देख पीछे वाला लड़का तुम्हे ही
देख रहा है ? शालनी की सहेली पुष्पा –विनोद की तरफ आँखो से इशारा करती हुई बोली
। शालनी- विनोद की तरफ देखकर बोली |ऐसा कुछ भी नहीं है यार मै सब समझती
हु । पुष्पा- शालनी को छेरती हुई बोली । पुष्पा की बात सुनकर शालनी मुस्कुराते हुए
शर्मा कर सर झुका ली ।शालनी भी कभी - कभी विनोद की तरफ देखती और शर्मा
कर सर निचे कर लेती । शालनी बिटियाँ ये लो तुम अपना पांच सौ रूपये मेरी दवा में
जो खर्च हुआ था । पीछे से कॉलेज के चपड़ासी शर्मा जी ने आवाज लगाई । कैसी
तबियत है, आपकी चाचा जी शालनी पूछी ? अब मै बिल्कुल ठीक हु,
बिटियाँ -बिटियाँ ये लो तुम अपना पैसा । शर्मा जी शालनी की तरफ पैसा बढ़ाते हुए बोले
।नहीं चाचा हमें जब भी किताब या नोट्स की जरुरत होती है, तो आप मेरी मदद करते है|
इसलिए ये पांच सौ रूपये आप ही रख लीजिये और दवा ठीक से करना अपना । इतना
बोलकर शालनी चली गई । छह हजार के महीना में शर्मा जी कैसे अपने परिवार का भरन -पोषण कर रहे है ? ये बात शर्मा जी ही जानते है, और ऊपर से ये महगाई थमने का नाम ही नहीं ले रही है !जब भी शर्मा जी
के ऊपर कोई मुसीबत
आती तो सारे स्टूडेंट चंदा इकट्ठा कर के शर्मा जी को मदद करते। शर्मा जी से
कभी - कभी शालनी कुछ पूछती तो शर्मा जी बताते । बिटियाँ पांच सौ रूपये से इस
कॉलेज में नौकरी कर रहा हु । चालिश साल मैंने इस कॉलेज में सबकी सेवा करते हुए
गुजार दिए मगर -यहाँ तो इंसान खस्ता मिट्टी का ढ़ेर है । कोई स्टूडेंट
लड़ाई करता तो समझाने पर वह हमें ही दो- चार बाते सुना देता ।इसलिए बिटियाँ
चुपचाप एक तरफ खड़ा होकर तमाशा देखना परता । किसी को अपनी भविष्य की फिक्र
ही नहीं है |जिसको देखो वो पढ़ने के वजाये इधर - उधर घूमता रहता है । इतना
बोलकर शर्मा जी एकदम से चुप हो जाते । शालनी शर्मा जी की बात सुनकर कुछ बोलती
तो शर्मा जी धीमे स्वर में कैहते -सब लोग तुम्हारी तरह थोड़े होते है बिटियाँ । अब
रोज विनोद- शालनी के आगे - पीछे मँडराने लगा । एक दिन की बात है, शालनी एक
हफ्ते के लिए कॉलेज नहीं आई । विनोद रोज शालनी को कॉलेज और बस स्टॉप पर
जाकर ढूंढने लगा । फिर एक दिन विनोद - शर्मा जी से जाकर पूछा ?तो शर्मा जी बोले ।
हमें भी नहीं मालूम है| शायद बीमार पड़ गई होगी? तुम पुष्पा से जाकर क्यों नहीं पूछते
हो पुष्पा को मालूम होगा । विनोद तुरंत पुष्पा से जाकर पूछा ?तो पुष्पा ने भी कुछ जवाब
नहीं दी। विनोद- शालनी को देखने के लिए इस कदर परेशान था ?जैसे चाँद
बिना चकोर ।मन उचाट सा रहने लगा , किताब कॉपी सभी जगह शालनी का ही प्रतिबिम्ब दिखाई देता |फर्क इतना था की उस प्रतिबिम्ब देखर अपने दिल की आवाज उस तक नहीं पंहुचा पता। अगले दिन पुष्पा -शालनी से मिलने उसके घर गई । आंटी शालनी कहा है ? पुष्पा
- शालनी की माँ से पूछी ? ऊपर अपने कमरे में | शालनी की माँ बर्तन मांजते हुए जवाब दी
। पुष्पा- शालनी के कमरे में चली गई और उसे सारी बात बता दी । शालनी- पुष्पा की
बात सुनकर कुछ बोली नहीं मनो जुबान किसी चीज से चिपक गया हो। दिल की धड़कन दुगुनी रफ़्तार से धड़कने लगा हो। मन में पुरानी काल्पनिक बस वाली छाया धुंधली सी दिखाई देने लगी। शालनी एक बात और बोलू-पुष्पा -शालनी के हाथ पर
अपनी हाथ रखती हुई बोली । क्या ? शालनी धीमे से रूखे स्वर में जवाब दी । शालनी -विनोद
सचमुच तुमसे बेहद प्यार करता है| वरना कोई इस तरह परेसान क्यों होता ? शालनी तू
बहुत लक्की है, जो तुम्हे विनोद जैसा इंसान प्यार करने वाला मिला है । पुष्पा इतना
बोलकर चली गई। मगर पुष्पा की बात शालनी के अंतर आत्मा छू गई । न चाहते हुए भी
शालनी बार - बार विनोद के खयालो में डूबती जा रही थी । शायद शालनी के दिल में भी प्यार का नन्हा बीज पनपने लगा था |अगले दिन शालनी जब कॉलेज गयी? तो कॉलेज का गेट
बंद था और बाहर नोटिस बोर्ड पर लिखा था । कॉलेज पंद्रह दिनों के लिए बंद है ।
शालनी नोटिस बोर्ड पर लिखी सूचना देखकर एकदम से सुर्ख गई। चहरे पर गम और चिंता की लकीर उभर आई |पैर को किसी ने मानों मोटी जंजीर से जकड़ लिया हो। शालनी बिस्फरित आँखो सो टकटकी लगाए हुए नोटिस बोर्ड को ही देख रही थी। तभी पीछे से
शर्मा जी ने आवाज दिए । शालनी पीछे मुरकर देखि तो शर्मा जी हाथ में मिठाई के
डब्बा लिए खड़े थे । लो बिटियाँ मिठाई खाओ आज हमने पाचश हजार का लॉटरी जीता
है । शर्मा जी अपनी हाथो से शालनी को मिठाई खिलाते हुये बोले । चाचा कॉलेज पंद्रह
दिनों के लिए क्यों बंद है? शालनी शर्मा जी से उत्सुकता से पूछी ? हरताल चल रहा है
कॉलेज का बिटियाँ ....... बिटियाँ तुम से एक बात कैहना था? कल तुम्हे विनोद खोज रहा था
बेचारा बहुत परेशान लग रहा था । क्या बात है बिटियाँ सब ठीक तो है ना ? शर्मा जी शालनी से पूछे ? कुछ नहीं
चाचा विनोद को
साइकोलॉजी का नोट्स देना था । शालनी इसे पहले कभी नहीं शर्मा जी से झूठ बोली थी
।शालनी के मुँह से ये झूठ कैसे निकल गया शालनी को समझ में भी नहीं आ रहा था ।
अपने दिल की हर बात शर्मा जी से शेयर करती थी अगर शर्मा जी को ये बात पता
चलेगी तो क्या सोचेंगे मेरे बारे में । मैंने उन से झूठ बोला एक शर्मा जी ही तो इस
कॉलेज में है जो सबकी मदद करते है । एक दिन सड़क पर एक छोटा बच्चा भीख मांग
रहा था और एक बाइक वाले ने उस बच्चे को टक्कर मार दी । उस बच्चे का सारा शरीर
खून से लदपद था । शर्मा जी ने उस बच्चे को उठाकर अस्पताल ले गए थे |उस दिन
शर्मा जी को तंखोया (शैलरी )मिली थी । जो सारा पैसा उस बच्चे के इलाज में खर्च हो
गया था । जिसकी वजह से शर्मा जी को कर्ज लेकर अपना घर चलना पड़ा था । वरना
आज के दौर में कौन किसी की फिक्र करता है । कोई मरे - कोई जिये आज के
लोग बस - ट्रैन की तरह भागते रहते है । एक छोटा सा झूठ शालनी के मन को झँकोर
दिया था । आज रोहित का जन्मदिन था।घर मेहमानो से भरे- पुरे हुए थे । विनोद –रोहित के
साथ बैठ कर कुछ बाते कर रहा था । मुबारक हो रोहित आज तुम पुरे चौबीश साल के
हो गए हो । शालनी - रोहित के हाथ में सरप्राइज गिफ्ट देती हुई बोली । थैक्यू शालनी
अगले साल पच्चीस का हो जाऊँगा । रोहित हस्ते हुए बोला । विनोद -शालनी को देखकर
मन्त्रमुग्ध हो गया। बालों और जिस्म की खुसबू से मन में बार - बार प्यार के फुब्बारे फूटने लगा। आज पहली बार विनोद- शालनी को इतना करीब से देख था। कांति से भरा यौवन |विनोद को बार - बार उसकी और आकर्षण की तरह खीच रहा था । शालनी भी पार्टी में आये
- लोगो से नजरे चुरा कर विनोद को देख रही थी । शायद दोनों एक दूसरे से बात करना
चाहते थे मगर हिम्मत किसी को नहीं हो रही थी । देखता क्या है मजनू जाके प्रपोज
कर दे । रोहित -विनोद के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला । नहीं यार डर लगता है| कही
नाराज हो गई तो । विनोद की बात सुनकर रोहित –विनोद को शालनी की तरफ धकेलते
हुए बोला |कुछ नहीं होगा जा ? विनोद जैसे ही शालनी के पास गया तभी पुष्पा आ गई
। विनोद वापस मायुश होकर रोहित के पास आ गया । ऐ शालनी देख विनोद भी
आया है । तूने कुछ बात की क्या ?पुष्पा- शालनी की चुटकी लेती हुई बोली । क्या बात
करू विनोद से शालनी विनोद की तरफ देखती हुई बोली । पहले तो लम्बी - लम्बी
बाते करती थी |फिर आज क्या हुआ देख शालनी अगर विनोद को प्रपोज करने में तुम्हे
डर लगता है तो मै करू विनोद को प्रपोज । पुष्पा की बात सुनकर शालनी -पुष्पा
को
अपनी आँखे दिखती हुई बोली |गला दवा दुँगी तेरा अब दुबारा कभी ऐसी बात की तो।
अगले दिन कॉलेज खुला तो कॉलेज में नया चपड़ासी आया हुआ था । शालनी नये
चपड़ासी के पास जाकर शर्मा जी के बारे में पूछी ?तो नया चपड़ासी इतराते हुए बोला
।हम शर्मा जी का ठिका ले रखे है जाओ शर्मा जी को ढूंढो और जो पूछना है पूछो ?
शालनी को जैसे पैरो के निचे से जमीन खिसक गया हो । शर्मा जी जैसे अच्छे इंसान को
कॉलेज से क्यों निकाल दिया गया । नया चपड़ासी हमेशा पान चिबाता और जहाँ
मन होता वही पर थूक देता था। जिसकी वजह से कॉलेज की दिवार, पान और गुटखे की पिक (थूक ) से साडी दिवार पर भद्दी -भद्दी कलाकृतिया नजर आ रही थी| । नया चपड़ासी से जब भी कोई स्टूडेंट किताब या नोट्स लाने को कैहता तो
नया चपड़ासी झट से बोलता । दस रूपया लूंगा तो नोट्स लाकर दूंगा ? मेरे भी बाल -
बच्चे है। कॉलेज में किसी को अब स्टूडेंट की फिक्र ही नहीं थी । जिसे मदद मांगों पैसे
की बात करता था । सभी स्टूडेंट को शर्मा जी की कमी महशुस होने लगी थी । जब भी
कोई शर्मा जी से कुछ कैहता तो शर्मा जी तुरंत लाकर दे देते । पैसा देने पर शर्मा जी
जीभ को दाँतो के बीच काटते हुए बोलते । इन पैसे को अपनी पढाई पर खर्च करो? और
अपने परिवार का नाम उज्वल करो । क्या इस समाज में शर्मा जी जैसे ईमानदार और
अच्छे इंसान को जीने का कोई हक़ नहीं है । क्या इसी ईमानदारी के वजह से चालिश
साल जिसने इस कॉलेज में सबकी सेवा की आज उनकी ईमानदारी और मेहनत का कोई मोल नहीं है ?
अब किसे शालनी अपनी दुख - सुख शेयर करती । कौन पूछता कैसी हो बिटियाँ ?उस
दिन शालनी बिना क्लास किये घर आ गई । माँ ने जब जल्दी आने का कारन पूछी ?तो
तबियत ठीक नहीं है । जवाब देकर चुप- चाप अपने कमरे में चली गई । उस दिन शालनी न खाना
खाई और न किसी से बात की बस सोचती रही |शर्मा जी अब कैसे होंगे ? कहाँ होंगे ।
उस दिन के बाद से कॉलेज का माहौल ही बदल गया । अगले दिन जब शालनी कॉलेज
जाने के लिए बस स्टॉप पर आई तो वहाँ विनोद पहले से ही मौजूद था । विनोद -शालनी
को देखकर पास गया ,और बोला -कॉलेज चले ? बस कहाँ आई है ? शालनी मुस्कुराते
हुए जवाब दी । जी मेरे पास बाइक है , विनोद हिचकिचाते हुए अपनी बाइक की तरफ
हाथ से इशारा करते हुए बोला । शालनी कुछ और बोल पाती इसे पहले बस आ गई ।
शालनी बस पर चढ़ गई और मुस्कुराते हुए बार - बार पीछे मुरकर विनोद की तरफ
देखने लगी । विनोद भी अपनी बाइक से बस के साथ कॉलेज जाने लगा |और जब भी
शालनी विनोद की तरफ देखती तो विनोद भी मुस्कुराते हुए जवाब दे देता । आज कॉलेज
में परिक्षा का रिजल्ट निकलने वाला था । शालनी और विनोद कॉलेज पंहुचे तो देखा
नोटिस बोर्ड के पास बहुत भीड़ लगी हुई है। शालनी और विनोद नोटिस बोर्ड के पास
जाकर अपना - अपना रिजल्ट देखने लगे । शालनी अपना रिजल्ट देखकर खुश होती हुई
बोली । पुष्पा मै अच्छे नम्बरो से पास हो गई । तुम्हारा क्या है ? सैकेंड आया है यार ।
इतनी मेहनत करने बाद । पुष्पा लम्बी सास लेती हुई बोली । विनोद ने जब अपना
रिजल्ट देखा तो उसके होस ही उड़ गए । बाकि सभी सब्जेक्ट में अच्छे नंबर था मगर
साइकोलॉजी में पच्चीस, जिसकी वजह से विनोद परीक्षा में फेल हो गया । विनोद कॉलेज
के सीढ़ी पड़ धम जाकर बैठ गया- और उसके मन में ढ़ेर सारे सवाल घूमने लगा । माँ को
जब पता चलेगा की मै फेल हो गया हु ?तो उनपर क्या बीतेगा । मेरा कैरियर मेरा प्यार
सब ख़त्म हो गया । अब शालनी कभी हमसे बात नहीं करेगी । तभी पुष्पा आई और
विनोद के हाथ में एक कागज का टुकड़ा देकर चली गई । विनोद कागज को खोलकर पढ़ने लगा ।
इंसान को कभी निराश नहीं होना चाहिए । जो काम कल नहीं हुआ उसे आने वाले कल
में भी पूरा किया जा सकता है । विनोद जब पढ़कर शालनी की तरफ देखा तो शालनी
मुस्कुराते हुए जवाब दे दी ।कॉलेज खत्म होने के बाद शालनी एक मोबाईल कम्पनी में नौकरी करने लगी
और विनोद दिल -जान लगाकर परीक्षा की तैयारी करने में लग गया था । लेकिन
कभी - कभी शालनी की याद विनोद को बैचेन कर देती । पुष्पा की शादी हो गई और पुष्पा अपने पति के साथ बिदेश
में सैटल हो गई थी । रोहित ने अपना रेडीमेट का
नया बिजनेश शुरू कर लिया था । दो पहर हो चूका था । विनोद अपने कमरे में लेटा हुआ
था । तभी विनोद की माँ आई और बोली - बेटा बाहर कोई पुष्पा आई है |तुमसे मिलने
के लिए ?विनोद -पुष्पा की नाम सुनकर तुरंत बाहर गया |और पुष्पा को देखकर व्याकुलता पूछा ?
पुष्पा -शालनी नहीं आई है । विनोद के चेहरे पर एक अजीब सी खुसी उभर आई थी ।
जब पुष्पा ने ना में सर हिलाकर जवाब दी| तो विनोद एक दम से मुरझा गया। कितना
प्यार करता है |विनोद शालनी से एक दम पागलों की तरह न ज़माने की फिक्र है ?और ना
ही इस समाज की और एक शालनी है |जो विनोद के प्यार से अब तक कोशो दूर है ।
न जाने कितनी बार विनोद के मुँह से शालनी का नाम आता होगा । शायद पुष्पा को
शालनी से इर्स्या (जलन ) होने लगी थी । शालनी -विनोद से कितना प्यार करती थी ये
बात किसे बताती । एक माँ थी जो सारा दिन अपने काम में लगी रहती। उनके पास
इतना सा भी वक्त नहीं था |की शालनी से कभी बैठकर आराम से दो बाते कर सके ।
पापा थे जो सारा दिन ऑफिस के काम में लगे रहते थे । एक शर्मा जी थे जिनके पास
जाकर शालनी अपने मन की बोझ को हल्का कर लेती थी । मगर कॉलेज ने उन्हें भी
निकाल दिया था । अब शालनी बिल्कुल अकेली पड़ गई थी । ऐसा लगने लगा था की
किसी के पास शालनी के लिए थोड़ा सा भी वक्त नहीं है । जो दो बाते अपनी कैह सके
- और दो बाते शालनी की सुन सके । विनोद को शालनी से दूर हुए दो साल होने वाला था
। ना विनोद -शालनी को भूल पाया था और नाही शालनी विनोद को भूल पाई थी । घर
में शालनी की शादी की बात चल रही थी । कई जगह से रिस्ता भी आया मगर शालनी
ने सब को ठुकरा दी । इतने अच्छे - अच्छे घरो से रिस्ता आ रहे है । तुम इंकार क्यों
कर रही हो । माँ ने शालनी के सर पड़ सनेह से स्पर्श करती पूछी ? माँ अभी मै शादी
नहीं करना चाहती हु ? शालनी ने धीमे और रूखे लफ्जो में माँ को जवाब दे दी ? पर क्यों नहीं करना
चाहती हो| आखिर बात क्या है? माँ ने शालनी का चेहरा अपनी तरफ करके पूछी ? ऐसे
ही अभी मै नौकरी करना चाहती हु । शालनी की बात सुनकर माँ गुस्से में बोली |क्या
लोग शादी के बाद नौकरी नहीं करते है । सारे मौहल्ले में तुम्हारे नाम की संकीर्ण चर्चा हो रही है । सब
की शादी हो गई पर शालनी ने शादी क्यों नहीं की? मौहल्ले कीऔरते ये बात बोलती
है । किस - किस को मै जवाब देती फिरूँगी। इतना बोलकर शालनी की माँ चली गई । माँ की
बात सुनकर शालनी का जैसे दिल बैठ सा गया हो। आखो से अश्रु की बुँदे टपकने लगी |और तकिये से मुँह को दाब कर सिसकने लगी। कैसा समाज है हमारा यहाँ बेटियों
को ज्यादा दिन रहने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए लोग अपनी बेटियां की शादी
कम उम्र में कर देते है । क्या यहाँ बेटियों को चैन से जीने का कोई हक़ नहीं है । क्या
यही हमारे देश के नियम - कानून है बेटियों को हमेशा हीन नजर से देखा जाये ।
इतना सोचते ही शालनी के आँखो से मानो अश्रु का बांध टूट गया । शालनी का मन अभी पूरी तरह
से हल्का भी नहीं हुआ था तभी पुष्पा आई । अरे पुष्पा कब आई? शालनी अपनी
हाथो से आंसू पोछती हुई बोली ।अश्रु और आँखो की गीली नमी देख कर पुष्पा को बात समझने में देर न लगी।
कल ही तो आई हु ? पुष्पा –शालनी के पास जाकर गले लगती हुई बोली । बहुत दिनों के बाद आई है |अपने पति के बारे में कुछ नहीं बतायेगी
। शालनी- पुष्पा से मजाक करती हुई बोली । शालनी की बात सुनकर पुष्पा हसने लगी
और बोली| शालनी आज सुबह विनोद से मिली थी । बहुत प्यार करता है ?तुम से हर
वक्त तुम्हारा ही नाम लेता रहता है । यार शालनी लाइफ में पहली बार देखा है । इतना
प्यार किसी को करते हुए । बिल्कुल पागल हो चूका है तुम्हारे लिए । पुष्पा की बात
सुनकर शालनी -विनोद के बारे में पूछती रही? और पुष्पा शालनी को विनोद के बारे में
बताती रही ।शालनी का दिल भी विनोद से मिलने के लिए उतना ही मचल रहा था जितना की विनोद का । आज
कॉलेज में परीक्षा का रिजल्ट निकलने वाला था । शालनी विनोद से मिलने कॉलेज जा
रही थी ।तभी पीछे से किसी ने बोला -कैसी हो शालनी बिटियाँ । शालनी पीछे मुरकर
देखि तो शर्मा जी रिक्शा लिए हुए कही जा रहे थे । शालनी शर्मा जी को इस हालत में
देखकर अचंभित रह गई । चेहरें पर झुरिया आ चुकी थी । हाथो के नस साफ - साफ दिखाई
देने लगा था। ज्यादा तेज बोलने से सास भी फूलने लगा था । पच्चपन वर्ष के होने के
बाबजूद शर्मा जी सत्तर वर्ष के लग रहे थे । आखिर कौन था ?शर्मा जी के इस हालत का जिम्मेदार कॉलेज या फिर
शर्मा जी अच्छाई । क्या सोचने लगी बिटियाँ / शर्मा जी
शालनी के कंधे पर हाथ रखते हुए बोले । कुछ नहीं चाचा जी-शालनी हिचकिचाते हुए
बोली । कॉलेज जा रही हो ना । शर्मा जी हस्ते हुए बोले । शालनी हा में सर हिलाकर
जवाब देदी । शालनी के मना करने के बाद भी शर्मा जी शालनी को अपनी रिक्शा से
कॉलेज छोड़ दिए । जब शालनी शर्मा जी को उनकी मजदूरी दी तो शर्मा जी अपनी
जीभ को दाँतो के बीच काटते हुए बोले। बिटियाँ तुम्हारा कर्ज मेरे यहाँ अभी बाकि है ।
इतना बोलकर शर्मा जी रिक्शा के घंटी बजाते हुए चले गये । शालनी नोटिस बोर्ड के
पास जाकर विनोद का रिजल्ट देखि तो विनोद परीक्षा में अव्वल नंबर से पास हो चूका
था। शालनी विनोद का रिजल्ट देखकर बहुत खुस हो गई और विनोद को ढूंढने
लगी।मगर विनोद शालनी को कॉलेज में कहीं नहीं मिला । शालनी उदास होकर घर चली आई
। अगले दिन शालनी ऑफिस जाने के लिए बस स्टॉप पर खड़ी होकर बस का इंतजार
कर रही थी । तभी विनोद आया और बोला | ऑफिस छोड़ दू ? शालनी विनोद को
देखकर चौक गई और मुस्कुराते हुए बोली । बस कहाँ आई है ? जी मेरे पास बाइक है ।
विनोद इस बार भी हिचकिचाते हुए अपनी बाइक की तरफ हाथ से इशारा करते हुए बोला । तभी फिर बस
आ गई । बस को देखकर विनोद उदास होकर सर निचे झुका लिया। तभी पीछे से शालनी एक
कागज पुलिंदा विनोद के सर पर मरती हुई बोली । बाइक पर बैठने के लिए नहीं
कहोगे !
समाप्त