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बस कंडक्टर से मराई फुददी
हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम राधा है और मैं एक अमीर घर की बेटी और बहू हूं। मैं शादीशुदा हूं और एक बेटी और एक बेटे की मां हूं। मेरी आयु 28 साल और कद 5 फीट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा और फिगर बहुत सेक्सी है।
मुझे शुरू से ही लड़कों और मर्दों में बहुत दिलचस्पी रही है और अब भी है लेकिन मुझे कट लंड से अनकट लंड ज्यादा अच्छे लगते हैं इसी वजह से मैंने ज्यादा चुदाई इंडियन लड़कों एवं मर्दों से की है। हरियानवी लड़के और मर्दों की चुदाई की तो मैं दीवानी हूं। हरियानवी लड़कों एवं मर्दों के लंड शानदार होते हैं और चुदाई भी बहुत ही अच्छी करते हैं।
मैं अभी तक बहुत हरियानवी लड़कों एवं मर्दों के साथ चुदाई कर चुकी हूं और मुझे गांड चुदाई भी बहुत अच्छी लगती है। मुझे वीर्य पीना बहुत पसंद है, गर्म गर्म वीर्य का नमकीन सवाद और इसकी महक से मैं पागल सी हो जाती हूं।
इसके अलावा जब गर्म गर्म वीर्य मेरी गांड के छेद की गहराई में गिरता है तो मुंझे जंनत में होने का एहसास होता है। हरियानवी लड़कों एवं मर्दों से चुदाई इसलिए भी पसंद है क्योंकि ये एक बार चुदाई के बाद दूसरे राऊंड केलिए जल्दी तैयार हो जाते है और बारी बारी मुंह, फुद्दी और गांड में वीर्य गिरा कर मेरी कम अग्नि को बहुत अच्छे से शांत करते हैं। मेरी पहली चुदाई भी एक हरियानवी मर्द से ही हुई थी।
ये बात तब की है जब मैं बारहवीं के बाद बीए में कॉलेज़ में दाखिला लिया था। तब मैं 18 साल की थी और तब भी मेरा बदन भरा हुआ था। मेरे गांव से कॉलेज करीब 24 किमी था और मैं बस में जाती थी। बस में भीड़ होने से कभी सीट नहीं मिलती थी और खड़े होकर ही आना जाना पड़ता था।
हमारे गांव से एक ही बस शहर आती जाती थी। मैं सुबह उसी बस से जाती और वापिस भी उसी पर आती थी। तब मेरी फिगर का साईज़ 34डी-26-36 था। पहले मैं मोटी थी लेकिन रोज़ कसरत करके मैंने अपना पेट सपाट किया और फिगर को सेक्सी बनाया।
जब मैं स्कूल में थी तो सब मुझे मोटी कहते थे लेकिन अभी मोटी कहने वाले लड़के मेरी सेक्सी फिगर के दीवाने थे। मैं अब भी रोज़ कसरत करती हूं ताकि मेरी फिगर ऐसे ही सेक्सी बनी रहे। अब कहानी पर वापिस आते हैं। जब मैं बस में सफर करती तो बहुत से मनचले लड़के और मर्द मेरे पीछे खड़े होकर जींस के ऊपर से मेरी गांड सहलाते या पीठ पर हाथ फेरते कुछ तो बूब्ज़ भी दबा देते या मेरी भरी हुई जांघों को सहलाते।
कई बार तो कुछ लड़के या मर्द मेरे टॉप या शर्ट में हाथ डालकर मेरी पीठ, पेट पर भी हाथ फेर देते या बूब्ज़ दबा देते। कई बार बस के ब्रेक लगने पर या ज्यादा भीड़ का बहाना करके मेरी गर्दन को चूम भी लेते। उनकी हरकतों से मैं बहुत गर्म हो जाती और घर आकर फुद्दी रगड़ कर गर्मी निकालती।
उस बस का कंडक्टर करीब 45 साल का हरियानवी मर्द था। उसका नाम राज सिंह और कद करीब 6 फीट था। दिखने में बहुत हट्टा कट्टा और सुंदर था। उसकी आंखें भूरी और बाल काले थे। उसका रंग गोरा और चेहरा क्लीन शेव था। उसकी आंखों में चमक थी और चेहरे पर लाली थी।
जब टिकिट काटने केलिए आगे पीछे जाते टाईम मेरे बदन को छूता तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। उसकी चौडी़ छाती और सुडौल जिस्म की तरफ मैं खींची जाती। एक दिन मैं बस में चढी़ तो बहुत भीड़ थी तो ठीक से खड़ी होना भी मुश्किल था तभी उसने मुझे अपनी सीट पर बैठा दिया जो उसकी कंडक्टर सीट थी। उस दिन पहली बार सीट पर बैठ कर गई।
दूसरे दिन उसने कंडक्टर सीट के साथ वाली सीट खाली रखी और मुझे बैठा दिया। टिकिट काटने के बाद वो मेरे साथ बैठ गया और हम बातें करने लगे। उसने मेरा नाम पूछा और मैंने राधा बता दिया और एक-दूसरे के बारे पूछते बताते हम शहर पहुंच गए। जब मैं उतरने लगी तो उसने मुझे कहा आज से ये सीट तुम्हारी हुई।
वापिस आते हुए भी हम दोनों साथ साथ बैठ गए। हम एक-दूसरे से बिल्कुल सटकर बैठे हुए थे और वो अपनी टांग हिलाकर मेरी जांघ अपनी जांघ से सहलाने लगा। कुछ देर बाद उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। उसका मुझे ऐसे छूना मुझे अच्छा लग रहा था तो मैंने भी हाथ नहीं हटाया। सारी रात मुझे उसका स्पर्श याद आता रहा और मैंने सोच लिया उसको कैसे भी पटाना है।
अगले दिन मैं सीट पर बैठ गई और वो भी साथ बैठ गया। मैंने उसको कहा राज जी थैंक्स आप मेरे लिए सीट रखते हो। उसने कहा मैंने तो दोस्त समझ कर सीट रखी है अगर तुम भी दोस्त समझती हो तो राज नहीं सिर्फ राज कहना और आप की जगह तुम।
मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसने कहा ये बात सही है कि मैं आयु में तुमसे बहुत बड़ा हूं लेकिन दोस्ती में आयु नहीं देखी जाती बाकी तुम्हारी मर्जी जो सही लगे पर सीट मिलती रहेगी। मैंने कहा ऐसी बात नहीं राज मैं तो खुश हो रही थी कि तुम जैसा दोस्त मिला मेरे पास बोलने को शब्द नहीं थे तो ऐसे देख रही थी।
मैं उसको टिकिट केलिए पैसे देने लगी तो बोला मैं अपने दोस्त से टिकिट के पैसे नहीं ले सकता तो मैंने कहा अगर बस के मालिक को पता चला तो गलत हो जाएगा कि आप मुझे बिना टिकिट के सफर करवाते हो।
तो वो हंसने लगा तब पता चला कि वही उस बस का मालिक है। उसने मुझसे एक पासपोर्ट फोटो मांगी जो मेरे पास थी। उसने वहीं बैठे बैठे एक फार्म पर लगा कर दे दी और कहा हमारी 8 बसें हैं कभी भी और किसी हमारी बस में बैठो तो ये दिखा देना टिकिट नहीं लगेगी।
मैंने उसको थैंक्स बोला। उसने कहा अभी तक आप मुझे दोस्त नहीं मानती मैंने कहा क्या हुआ तो बोला दोस्ती में सॉरी और थैंक्स नहीं बोलते। फिर उसने कहा क्या एक और फोटो मिल सकती है। मैंने पूछा क्यों तो उसने कहा पास रखने केलिए जब याद आए तो देख सकूं। मैंने उसको स्माईल दी और किट से फोटो निकाल कर दे दी।
अब कुछ ही दिनों में हम एक-दूसरे से बहुत खुल गए और एक-दूसरे के बारे सब जान गए। उसका अपनी पत्नी से तालाक हो गया था और उसने दोबारा शादी नहीं की थी। उसका घर पंजाब में था पर यहीं शहर में बस स्टैंड के पास एक फ्लैट में रहता था अकेला।
मैंने उससे पूछा फिर शादी क्यों नहीं की तो बोला उसको आजादी से रहना है तो शादी नहीं की। मैंने पूछा जब अकेलापन होता है तो क्या करते हो। उसने मेरी तरफ देखा और कहा वैसे मैं किसी को नहीं बताता लेकिन तुम मेरी दोस्त हो तो बता रहा हूं। उसने बताया कि उसके पास वाले फ्लैट में एक औरत है जिसका पति यूएस गया हुआ है। रात को वो आ जाती है और अकेलापन दूर हो जाता है।
मैंने कहा तुम बहुत चालू हो यार तो बोला उसको मर्द की जरूरत है मुझे औरत की तो एक-दूसरे की जरूरत पूरा करते हैं। ऐसे बातें करते करते महीने से ऊपर बीत गया। एक दिन मैंने नोट किया कि वो तीन चार दिन से काफी उदास है और ज्थादा बात नहीं करता। पहले हर टाईम हंसता हुआ चेहरा अब जैसे खुश होना भूल गया।
मैंने उससे उदासी की वजह पूछी तो उसने कहा कुछ नहीं राधाजो किस्मत में लिखा है वही होता है। मैंने जोर देकर पूछा तो उसने बताया कि वो औरत अपने पति के पास चली गई है उसको अच्छा नहीं लग रहा अब उसका सेक्स में साथ देने वाली कोई नहीं है अब रात को शराब पीकर सो जाता है। मुझे भी बहुत बुरा लगा और उदास हो गई।
इससे पहले मैं कुछ कहती हमारा गांव आ गया। घर आकर मैं उसके बारे सोचने लगी सोचते सोचते मुझे ख्याल आया कि क्यों न मैं उससे चुदाई कर लू़ं। ये सोचते ही मेरी फुद्दी गीली होने लगी और उसके साथ चुदाई के ख्यालों में खो गई। मैंने सोच लिया कल उसके साथ चुदाई करुंगी। मैंने बाथरूम में जाकर अपनी फुद्दी के बाल साफ किए और बदन के बाकी अनचाहे बाल भी निकाल दिए।
रात को मैंने उसको फोन किया और पूछा क्या वो कल छुट्टी लेकर अपने घर रह सकता है मुझे कोई जरूरी बात करनी है। उसने हां बोल दी और मैंने सुबह 9 बजे उससके घर आने का वादा किया। उसने पूछा कैसे आओगी तो मैंने कहा बस से। ये सुनकर बोला बस से रहने दो तुम्हारे गांव के बस स्टैंड के आगे जो कच्चा सुनसान रास्ता है वहां आ जाना मैं कर से ले जाऊंगा। मैंने हां बोल दिया।
दूसरे दिन मैं घर से तैयार होकर निकल आई। मैंने हरे रंग की टाईट शर्ट, काली जींस और काले हाई हील के सैंडिल पहने हुए थे और नीचे से हरा हॉफ ब्रा और हरी सट्रिप वाली पैंटी पहनी हुई थी। पर्स में लाल लिप्सटिक, आई शैडो और काजल ले लिया। मैं थोडा़ लेट चली ताकि बस निकल जाए।
जब मैं बस स्टॉप पहुंची तो बस निकल चुकी थी और वहां कोई नहीं था। मैं कच्चे रासते तक पहुंच गई वहां राज कार में वेट कर रहा था। मैं कार में बैठ गई और हम उसके घर की तरफ चलने लगे। उसने मुझसे पूछा क्या काम है तो मैंने कहा घर तो चलो फिर बताती हूं।
कुछ देर बाद हम उसके फ्लैट में पहुंच गए अंदर आते ही मैंने बाथरूम कहां है पूछा। मैंने आइने के सामने खड़ी होकर लिप्सटिक आई शैडो और काजल लगाया। फिर मैंने अपने बाल खुले छोड़ लिए और नज़र का चश्मा आंखों पर लगा लिया। तैयार होकर मैं बाहर निकली और वो मुझे देखता ही रह गया। मैंने कहा क्या देख रहे हो पहले कभी देखा नहीं क्या। तो राज बोला देखा तो है लेकिन आज एकदम आईटम लग रही हो। मैं हंस पड़ी और कहा आईटम दिखने केलिए ही तो शिंगआर किया है।
राज ने कहा अब तो बताओ काम क्या है तो मैंने कहा राज तुम हर रोज मेरे बदन को छूते थे कभी जांघों पर कभी पीठ पर कभी कहीं पर मुझे उसकी आदत हो गई है लेकिन पिछले कुछ दिनों से तुमने छुया नहीं है तो वो काम है। राज ने कहा अच्छा तो ये बात है लो अभी छू देता हूं।
मैंने कहा ऐसे नहीं आज पूरी तरह एक एक कपड़ा निकाल कर और आज से मुझे अपनी पत्नी समझना पडे़गा। राज ने हैरानी से मेरी तरफ देखा तो मैंने कहा मैं बहुत दिनों से ये बात कहना चाहती थी लेकिन तुम्हारी जिंदगी में दूसरी औरत थी तुम मना न कर दो तो कह नहीं सकी लेकिन मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं मुझे तुम चाहिए।
राज को समझ नहीं आ रही थी वो क्या करे उसने जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला लेकन उसमें सिगरेट नहीं थी। मैंने कहा क्या हुआ तो बोला तुम मुझसे बहुत छोटी हो। मैंने अपने पर्स से सिगरेट निकाल कर उसको दी और लाईटर से सिगरेट सुलगाते हुए कहा दोस्ती आयु नहीं देखती और प्यार भी नहीं देखता।
राज ने कहा ये बात नहीं है तुम मुस्लिम हो और मैं हरियानवी अगर किसी को पता चला तो बहुत बड़ी दिक्कत हो सकती है। मैंने कहा प्यार में कोई मजहब नहीं होता और किसी को कभी पता नहीं चलेगा और प्यार करने वाले डरते नहीं हैं। उसने कहा तुम पति पत्नी होने की बात कर रही हो आज नहीं तो कल पता चल ही जाएगा कि हमने शादी की है। मैं हंसने लगी और उसने हंसने की वजह पूछी।
मैंने कहा अरे बुद्दू शादी नहीं सिर्फ पति पत्नी समझेगैं वो भी अकेले में। मैं चुदाई की आग में जल रही हूं और तुम भी। आज नहीं तो कल तुम्हें नई फुद्दी मिल जाएगी और मुझे लंड क्यों न हम दोनों एक-दूसरे की जरूरत पूरी करें। और दोस्त होते किस केलिए हैं एक-दूसरे को खुश रखने केलिए। मुझे लंड की जरूरत है तुझे फुद्दी की क्यों न हम एक-दूसरे को खुशी दें।
हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम राधा है और मैं एक अमीर घर की बेटी और बहू हूं। मैं शादीशुदा हूं और एक बेटी और एक बेटे की मां हूं। मेरी आयु 28 साल और कद 5 फीट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा और फिगर बहुत सेक्सी है।
मुझे शुरू से ही लड़कों और मर्दों में बहुत दिलचस्पी रही है और अब भी है लेकिन मुझे कट लंड से अनकट लंड ज्यादा अच्छे लगते हैं इसी वजह से मैंने ज्यादा चुदाई इंडियन लड़कों एवं मर्दों से की है। हरियानवी लड़के और मर्दों की चुदाई की तो मैं दीवानी हूं। हरियानवी लड़कों एवं मर्दों के लंड शानदार होते हैं और चुदाई भी बहुत ही अच्छी करते हैं।
मैं अभी तक बहुत हरियानवी लड़कों एवं मर्दों के साथ चुदाई कर चुकी हूं और मुझे गांड चुदाई भी बहुत अच्छी लगती है। मुझे वीर्य पीना बहुत पसंद है, गर्म गर्म वीर्य का नमकीन सवाद और इसकी महक से मैं पागल सी हो जाती हूं।
इसके अलावा जब गर्म गर्म वीर्य मेरी गांड के छेद की गहराई में गिरता है तो मुंझे जंनत में होने का एहसास होता है। हरियानवी लड़कों एवं मर्दों से चुदाई इसलिए भी पसंद है क्योंकि ये एक बार चुदाई के बाद दूसरे राऊंड केलिए जल्दी तैयार हो जाते है और बारी बारी मुंह, फुद्दी और गांड में वीर्य गिरा कर मेरी कम अग्नि को बहुत अच्छे से शांत करते हैं। मेरी पहली चुदाई भी एक हरियानवी मर्द से ही हुई थी।
ये बात तब की है जब मैं बारहवीं के बाद बीए में कॉलेज़ में दाखिला लिया था। तब मैं 18 साल की थी और तब भी मेरा बदन भरा हुआ था। मेरे गांव से कॉलेज करीब 24 किमी था और मैं बस में जाती थी। बस में भीड़ होने से कभी सीट नहीं मिलती थी और खड़े होकर ही आना जाना पड़ता था।
हमारे गांव से एक ही बस शहर आती जाती थी। मैं सुबह उसी बस से जाती और वापिस भी उसी पर आती थी। तब मेरी फिगर का साईज़ 34डी-26-36 था। पहले मैं मोटी थी लेकिन रोज़ कसरत करके मैंने अपना पेट सपाट किया और फिगर को सेक्सी बनाया।
जब मैं स्कूल में थी तो सब मुझे मोटी कहते थे लेकिन अभी मोटी कहने वाले लड़के मेरी सेक्सी फिगर के दीवाने थे। मैं अब भी रोज़ कसरत करती हूं ताकि मेरी फिगर ऐसे ही सेक्सी बनी रहे। अब कहानी पर वापिस आते हैं। जब मैं बस में सफर करती तो बहुत से मनचले लड़के और मर्द मेरे पीछे खड़े होकर जींस के ऊपर से मेरी गांड सहलाते या पीठ पर हाथ फेरते कुछ तो बूब्ज़ भी दबा देते या मेरी भरी हुई जांघों को सहलाते।
कई बार तो कुछ लड़के या मर्द मेरे टॉप या शर्ट में हाथ डालकर मेरी पीठ, पेट पर भी हाथ फेर देते या बूब्ज़ दबा देते। कई बार बस के ब्रेक लगने पर या ज्यादा भीड़ का बहाना करके मेरी गर्दन को चूम भी लेते। उनकी हरकतों से मैं बहुत गर्म हो जाती और घर आकर फुद्दी रगड़ कर गर्मी निकालती।
उस बस का कंडक्टर करीब 45 साल का हरियानवी मर्द था। उसका नाम राज सिंह और कद करीब 6 फीट था। दिखने में बहुत हट्टा कट्टा और सुंदर था। उसकी आंखें भूरी और बाल काले थे। उसका रंग गोरा और चेहरा क्लीन शेव था। उसकी आंखों में चमक थी और चेहरे पर लाली थी।
जब टिकिट काटने केलिए आगे पीछे जाते टाईम मेरे बदन को छूता तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। उसकी चौडी़ छाती और सुडौल जिस्म की तरफ मैं खींची जाती। एक दिन मैं बस में चढी़ तो बहुत भीड़ थी तो ठीक से खड़ी होना भी मुश्किल था तभी उसने मुझे अपनी सीट पर बैठा दिया जो उसकी कंडक्टर सीट थी। उस दिन पहली बार सीट पर बैठ कर गई।
दूसरे दिन उसने कंडक्टर सीट के साथ वाली सीट खाली रखी और मुझे बैठा दिया। टिकिट काटने के बाद वो मेरे साथ बैठ गया और हम बातें करने लगे। उसने मेरा नाम पूछा और मैंने राधा बता दिया और एक-दूसरे के बारे पूछते बताते हम शहर पहुंच गए। जब मैं उतरने लगी तो उसने मुझे कहा आज से ये सीट तुम्हारी हुई।
वापिस आते हुए भी हम दोनों साथ साथ बैठ गए। हम एक-दूसरे से बिल्कुल सटकर बैठे हुए थे और वो अपनी टांग हिलाकर मेरी जांघ अपनी जांघ से सहलाने लगा। कुछ देर बाद उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। उसका मुझे ऐसे छूना मुझे अच्छा लग रहा था तो मैंने भी हाथ नहीं हटाया। सारी रात मुझे उसका स्पर्श याद आता रहा और मैंने सोच लिया उसको कैसे भी पटाना है।
अगले दिन मैं सीट पर बैठ गई और वो भी साथ बैठ गया। मैंने उसको कहा राज जी थैंक्स आप मेरे लिए सीट रखते हो। उसने कहा मैंने तो दोस्त समझ कर सीट रखी है अगर तुम भी दोस्त समझती हो तो राज नहीं सिर्फ राज कहना और आप की जगह तुम।
मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसने कहा ये बात सही है कि मैं आयु में तुमसे बहुत बड़ा हूं लेकिन दोस्ती में आयु नहीं देखी जाती बाकी तुम्हारी मर्जी जो सही लगे पर सीट मिलती रहेगी। मैंने कहा ऐसी बात नहीं राज मैं तो खुश हो रही थी कि तुम जैसा दोस्त मिला मेरे पास बोलने को शब्द नहीं थे तो ऐसे देख रही थी।
मैं उसको टिकिट केलिए पैसे देने लगी तो बोला मैं अपने दोस्त से टिकिट के पैसे नहीं ले सकता तो मैंने कहा अगर बस के मालिक को पता चला तो गलत हो जाएगा कि आप मुझे बिना टिकिट के सफर करवाते हो।
तो वो हंसने लगा तब पता चला कि वही उस बस का मालिक है। उसने मुझसे एक पासपोर्ट फोटो मांगी जो मेरे पास थी। उसने वहीं बैठे बैठे एक फार्म पर लगा कर दे दी और कहा हमारी 8 बसें हैं कभी भी और किसी हमारी बस में बैठो तो ये दिखा देना टिकिट नहीं लगेगी।
मैंने उसको थैंक्स बोला। उसने कहा अभी तक आप मुझे दोस्त नहीं मानती मैंने कहा क्या हुआ तो बोला दोस्ती में सॉरी और थैंक्स नहीं बोलते। फिर उसने कहा क्या एक और फोटो मिल सकती है। मैंने पूछा क्यों तो उसने कहा पास रखने केलिए जब याद आए तो देख सकूं। मैंने उसको स्माईल दी और किट से फोटो निकाल कर दे दी।
अब कुछ ही दिनों में हम एक-दूसरे से बहुत खुल गए और एक-दूसरे के बारे सब जान गए। उसका अपनी पत्नी से तालाक हो गया था और उसने दोबारा शादी नहीं की थी। उसका घर पंजाब में था पर यहीं शहर में बस स्टैंड के पास एक फ्लैट में रहता था अकेला।
मैंने उससे पूछा फिर शादी क्यों नहीं की तो बोला उसको आजादी से रहना है तो शादी नहीं की। मैंने पूछा जब अकेलापन होता है तो क्या करते हो। उसने मेरी तरफ देखा और कहा वैसे मैं किसी को नहीं बताता लेकिन तुम मेरी दोस्त हो तो बता रहा हूं। उसने बताया कि उसके पास वाले फ्लैट में एक औरत है जिसका पति यूएस गया हुआ है। रात को वो आ जाती है और अकेलापन दूर हो जाता है।
मैंने कहा तुम बहुत चालू हो यार तो बोला उसको मर्द की जरूरत है मुझे औरत की तो एक-दूसरे की जरूरत पूरा करते हैं। ऐसे बातें करते करते महीने से ऊपर बीत गया। एक दिन मैंने नोट किया कि वो तीन चार दिन से काफी उदास है और ज्थादा बात नहीं करता। पहले हर टाईम हंसता हुआ चेहरा अब जैसे खुश होना भूल गया।
मैंने उससे उदासी की वजह पूछी तो उसने कहा कुछ नहीं राधाजो किस्मत में लिखा है वही होता है। मैंने जोर देकर पूछा तो उसने बताया कि वो औरत अपने पति के पास चली गई है उसको अच्छा नहीं लग रहा अब उसका सेक्स में साथ देने वाली कोई नहीं है अब रात को शराब पीकर सो जाता है। मुझे भी बहुत बुरा लगा और उदास हो गई।
इससे पहले मैं कुछ कहती हमारा गांव आ गया। घर आकर मैं उसके बारे सोचने लगी सोचते सोचते मुझे ख्याल आया कि क्यों न मैं उससे चुदाई कर लू़ं। ये सोचते ही मेरी फुद्दी गीली होने लगी और उसके साथ चुदाई के ख्यालों में खो गई। मैंने सोच लिया कल उसके साथ चुदाई करुंगी। मैंने बाथरूम में जाकर अपनी फुद्दी के बाल साफ किए और बदन के बाकी अनचाहे बाल भी निकाल दिए।
रात को मैंने उसको फोन किया और पूछा क्या वो कल छुट्टी लेकर अपने घर रह सकता है मुझे कोई जरूरी बात करनी है। उसने हां बोल दी और मैंने सुबह 9 बजे उससके घर आने का वादा किया। उसने पूछा कैसे आओगी तो मैंने कहा बस से। ये सुनकर बोला बस से रहने दो तुम्हारे गांव के बस स्टैंड के आगे जो कच्चा सुनसान रास्ता है वहां आ जाना मैं कर से ले जाऊंगा। मैंने हां बोल दिया।
दूसरे दिन मैं घर से तैयार होकर निकल आई। मैंने हरे रंग की टाईट शर्ट, काली जींस और काले हाई हील के सैंडिल पहने हुए थे और नीचे से हरा हॉफ ब्रा और हरी सट्रिप वाली पैंटी पहनी हुई थी। पर्स में लाल लिप्सटिक, आई शैडो और काजल ले लिया। मैं थोडा़ लेट चली ताकि बस निकल जाए।
जब मैं बस स्टॉप पहुंची तो बस निकल चुकी थी और वहां कोई नहीं था। मैं कच्चे रासते तक पहुंच गई वहां राज कार में वेट कर रहा था। मैं कार में बैठ गई और हम उसके घर की तरफ चलने लगे। उसने मुझसे पूछा क्या काम है तो मैंने कहा घर तो चलो फिर बताती हूं।
कुछ देर बाद हम उसके फ्लैट में पहुंच गए अंदर आते ही मैंने बाथरूम कहां है पूछा। मैंने आइने के सामने खड़ी होकर लिप्सटिक आई शैडो और काजल लगाया। फिर मैंने अपने बाल खुले छोड़ लिए और नज़र का चश्मा आंखों पर लगा लिया। तैयार होकर मैं बाहर निकली और वो मुझे देखता ही रह गया। मैंने कहा क्या देख रहे हो पहले कभी देखा नहीं क्या। तो राज बोला देखा तो है लेकिन आज एकदम आईटम लग रही हो। मैं हंस पड़ी और कहा आईटम दिखने केलिए ही तो शिंगआर किया है।
राज ने कहा अब तो बताओ काम क्या है तो मैंने कहा राज तुम हर रोज मेरे बदन को छूते थे कभी जांघों पर कभी पीठ पर कभी कहीं पर मुझे उसकी आदत हो गई है लेकिन पिछले कुछ दिनों से तुमने छुया नहीं है तो वो काम है। राज ने कहा अच्छा तो ये बात है लो अभी छू देता हूं।
मैंने कहा ऐसे नहीं आज पूरी तरह एक एक कपड़ा निकाल कर और आज से मुझे अपनी पत्नी समझना पडे़गा। राज ने हैरानी से मेरी तरफ देखा तो मैंने कहा मैं बहुत दिनों से ये बात कहना चाहती थी लेकिन तुम्हारी जिंदगी में दूसरी औरत थी तुम मना न कर दो तो कह नहीं सकी लेकिन मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं मुझे तुम चाहिए।
राज को समझ नहीं आ रही थी वो क्या करे उसने जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला लेकन उसमें सिगरेट नहीं थी। मैंने कहा क्या हुआ तो बोला तुम मुझसे बहुत छोटी हो। मैंने अपने पर्स से सिगरेट निकाल कर उसको दी और लाईटर से सिगरेट सुलगाते हुए कहा दोस्ती आयु नहीं देखती और प्यार भी नहीं देखता।
राज ने कहा ये बात नहीं है तुम मुस्लिम हो और मैं हरियानवी अगर किसी को पता चला तो बहुत बड़ी दिक्कत हो सकती है। मैंने कहा प्यार में कोई मजहब नहीं होता और किसी को कभी पता नहीं चलेगा और प्यार करने वाले डरते नहीं हैं। उसने कहा तुम पति पत्नी होने की बात कर रही हो आज नहीं तो कल पता चल ही जाएगा कि हमने शादी की है। मैं हंसने लगी और उसने हंसने की वजह पूछी।
मैंने कहा अरे बुद्दू शादी नहीं सिर्फ पति पत्नी समझेगैं वो भी अकेले में। मैं चुदाई की आग में जल रही हूं और तुम भी। आज नहीं तो कल तुम्हें नई फुद्दी मिल जाएगी और मुझे लंड क्यों न हम दोनों एक-दूसरे की जरूरत पूरी करें। और दोस्त होते किस केलिए हैं एक-दूसरे को खुश रखने केलिए। मुझे लंड की जरूरत है तुझे फुद्दी की क्यों न हम एक-दूसरे को खुशी दें।