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बहन को दी सौगात (इन्सेक्ट ,लव )

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बहन को दी सौगात (इन्सेक्ट ,लव )

होली आने वाली थी और जैसे जैसे ये पास आ रही थी मेरे लिए तकलीफे और भी बढ़ रही थी ,कारण था की इस होली मैं अकेले ही रहने वाला था ,घर के सभी लोग गांव को निकल चुके थे और मेरे ऑफिस वालो ने मुझे 1 दिन की ही छुट्टी दी थी जिसमे मेरा गांव जाना तो नामिमकिंन ही था ,15 दिन मुझे यंहा अकेले ही बिताने थे ,और सबसे बड़ी बात मैं जिसके साथ होली में सबसे ज्यादा मस्ती करता था वो इस होली मेरे साथ नही थी,मेरी बहन निशा …..

निशा मुझसे 2 साल छोटी थी और इसी साल उसकी शादी हुई थी ,उसने अपने ही क्लास के लड़के से लव मैरिज किया था जिससे मेरे घर वाले उससे बात तक बंद कर चुके थे,उसके स्पोर्ट में खड़ा रहने वाला एक ही शख्स था वो था मैं ,मैं अपनी बहन को बहुत चाहता हु और उसकी हर जिद मानना मेरी बचपन की आदत है ,उसके होठो में आयी हुई मुस्कुराहट ही मेरे लिए सबसे खास थी ,जब वो घर में थी तो हम जमकर होली खेला करते थे,होली से एक दिन पहले ही उसकी सब सहेलियां हमारे ही घर आ जाया करती क्योकि बाकियों को वो छूट नही दी गई थी जो मैं अपनी बहन को देता था,मैं ही उन लोगो के लिए वोदका और बियर की व्यवस्था करता था ,और मेरे घर के छत में सभी की महफ़िल जमती थी ,मेरे निगरानी में सब होता था इसलिए पापा मम्मी भी कोई विरोध नही करते थे ,होली के दिन मैं मम्मी पापा और निशा के साथ गांव निकल जाता था और वँहा भी पूरा परिवार मिलकर जमकर होली खेलता था ,

लेकिन इस साल ना निशा मेरे साथ थी ना मैं गांव ही जाने वाला था,निशा के जाने के बाद ऐसे भी घर में मातम सा माहौल रहता था और घर वाले ज्यादातर घर से दूर ही रहना पसंद करते थे वही मैं भी अपने काम में ही बिजी रहने की कोशिस करता था ,

होली को बस दो ही दिन बचे थे मैं ऑफिस से थका हुआ घर में आया ,लेकिन अंदर जाते ही मेरी आंखे खुसी से भर गई थी ,

“भइया …”

निशा दौड़ते हुए मेरे पास आयी और मेरे सीने से लग गई ,मैं अभिभूत होकर उसेके बालो को सहलाये जा रहा था ,मैंने नजर दौड़ाई उसका पति नितिन कही नजर नही आ रहा था,

“बेटा नितिन कहा है “

“हम अलग हो गए “

“क्या “मेरे सीने में जैसे पत्थर टूटा ,

“हा भैया ,मैं जैसा सोची थी वो वैसे नही है ,वो ...वो “

वो फफक कर रोने लगी ,अभी उनकी शादी को मुश्किल से 3 महीने ही हुए थे और ये कैसे हो गया ,निशा ,नितिन को पिछले 5 सालो से जानती थी ,5 साल आ प्यार शादी के 3 महीने में ही कैसे खत्म हो गया ,मैं अपनी ही उलझन में था ,

“क्या हुआ है निशा तूने कुछ बताया क्यो नही “

“किस मुह से बताती और क्या बताती ,मैंने जिस लड़के लिए अपने घरवालों को भी छोड़ दिया वो एक ,”

निशा इतना ही बोलकर चुप हो गई ,

“वो क्या “

“कुछ नही भैया ,लेकिन हमारा बहुत झगड़ा हुआ है और जब तक मम्मी पापा नही आ जाते मैं यही रहूंगी ,अगर आपको एतराज ना हो तो “

“तू पागल हो गई है क्या ,मुझे तेरे होने से एतराज होगा ,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया “

मेरी आंखे भर गई थी और निशा को अपनी गलती का अहसास हुआ

“सॉरी भईया “

“जब मां पापा आ जाय तो भी रहना ये घर तेरा ही है ,देख अभी भी तेरे पास इसकी चाबी है ,और तुझे कौन निकलता है मैं देखता हु ,वो लोग तेरे जाने के बाद से मुरझा गए है अकेले में तो रोते है और सामने बड़े ज्ञान की बात करते है ,समाज मर्यादा वो सब ,देखता हु अब मेरी बहन को कौन क्या बोलता है “

मैंने अपना संकल्प दोहरा दिया ,निशा मुझसे और भी जोरो से लिपट गई

“नही भैया आप मेरे लिए किसी से नही लड़ोगे ,मा पापा को आपकी जरूरत है ,आप ही तो उनका सहारा हो ,मैं उन्हें भी आपसे अलग नही करना चाहती “

मैं निशा को और भी कस कर जकड़ लेता हु मेरी बहन …

“मेरी बहन बड़ी बड़ी बाते करने लगी है आजकल “

निशा और मैं दोनो ही हँस दिए..

रात होने को थी और निशा ने अभी भी मुझे नही बताया था की आखिर उसके और नितिन के बीच किस बात को लेकर झगड़ा हुआ है ,निशा का मुरझाया हुआ चहरा मुझसे बर्दास्त नही हो रहा था,मैंने बाहर जाकर नितिन को काल लगा ही दिया .

“हैल्लो “

“हैल्लो नितिन “

“अभिषेक भैया “

“क्यो तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे की मेरा नंबर तुम्हारे पास नही है “

“भैया वो निशा ने जाते हुए सबका नंबर मेरे फोन से डिलीट कर दिया था,मैं बहुत परेशान हु क्या वो आपके साथ है “

मैं और भी ज्यादा चौक गया

“तुम्हे पता था की वो मेरे पास है कैसे पति हो तुम ,”

“थैंक्स गॉड ,भैया आप नही जानते ये सुनकर मुझे कितना सुकून हुआ है “

“अभी तुम्हारी शादी को बस 3 महीने हुए है ,तुम दोनो ने अपने घर वालो से लड़कर शादी की और इन 3 महीनों में ही ऐसा क्या हो गया की निशा इसतरह तुमसे झगड़कर घर आ गई “

मेरा माथा फटा जा रहा था ,मुझे पता था की निशा तो नकचढ़ी थी लेकिन नितिन बहुत ही शांत स्वभाव का समझदार लड़का था,

“भैया वो…”वो रुक गया

“क्या ना ही निशा कुछ कह रही है ना ही तुम ,आखिर बात क्या हो गई है “

“भैया सबसे पहले आप मुझे सबका नंबर मेसेज कीजिये और निशा का भी वो तो बात करने को तैयार ही नही हो रही है “

“आखिर हुआ क्या है ,???”

“भैया मैं सब कुछ बताऊंगा लेकिन अभी मुझे निशा से बात करनी है “

“ठीक है मैं नंबर दे रहा हु “.....

थोड़ी ही देर बाद

“मैंने कह दिया ना की मुझे तुमसे कोई बात नही करनी ,और नंबर किसने दिया मेरा “

निशा फोन में चीख रही थी

वो मुझे घूर कर देखती है ,फिर थोड़ी शांत दिखाई देती है ,मैं उसके पास ही बैठा हुआ था ,

“मैं भी लेकिन …”

“ह्म्म्म ठीक है लेकिन मुझे समय चाहिए ,”

“तो तुम्हे क्या लगता है की मेरा इस दुनिया में कोई नही है ,इनके पास नही आऊंगी तो किसके पास जाऊंगी “

वो फिर से एकबार मेरी ओर देखती है लेकिन फिर नजर हटा लेती है ,

“ओके “

वो मुझे खा जाने वाले नजर से देख रही थी ,

“अपने मेरा नंबर नितिन को दिया था “

“कुछ गलत किया क्या “

“मैं उसे सबक सीखना चाहती थी “

मैं उसके पास जाकर उसे अपने बांहो में भरने की कोसिस की लेकिन वो मेरे हाथो को झटक देती है ,

“अरे मेरी जान “मैंने उसके फुले हुए गालो को पकड़कर दबा दिया वो अब भी गुस्से में थी

“बात करने से ही सुलह होती है ,अगर तू ऐसे भागेगी तो कैसे बनेगा,अभी तो सिर्फ 3 महीने हुए है शादी को अभी तो पूरी जिंदगी बाकी पड़ी है ,और तू बहुत ही नकचढ़ी हो गई है ,ऐसे कोई किसी के मोबाइल से कांटेक्ट डिलीट करता है क्या “

वो फिर से मुझे घूरती है

“हा हु मैं नकचढ़ी और अपने ही बनाया है मुझे ऐसा “उसके होठो में वो मुस्कान आती है जिसका मैं इतने देर से इंतजार कर रहा था ,मुझे उसपर बहुत प्यार आया और मैंने उसके गालो को पकड़कर चुम ही लिया ,......

रात को मैंने उसकी सभी सहेलियों को मेसेज कर दिया था ,होली के दिन मेरी छुट्टी थी इसलिए एक दिन पहले रात का ही प्लान किया गया था,लेकिन इस बारे में निशा को कुछ भी नही बताया था ,मैं उसे सरप्राइज देना चाहता था और उसके चहरे में वही खुसी और उमंग देखने को बेताब था जो कभी मेरे लिए सबसे बड़ी चीज हुआ करती थी ……...

नितिन से बात होंने के बाद से निशा थोड़ी खुस तो थी ,लेकिन उसकी उदासी जा ही नही रही थी,मुझे तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या चाहती है ,रात वो मेरे कमरे में आ गई और मुझसे लिपट के सोने लगी मुझे पता था की वो सो नही रही है ,रात उसके मोबाइल की रिगटोन बजी वो उसने बंद कर दिया ,फिर से बजा तो मोबाइल ही स्विच ऑफ कर दिया,फिर से मुझसे लिपट गई ,

“अरे बात कर ले ना उससे “

“मैं सो रही हु नींद आ रही है है मुझे “

मैंने आगे कुछ भी नही कहा ,

दूसरे दिन मैं रोज की तरह ऑफिस गया और शाम जल्दी ही घर आ गया,मोहल्ले में होलिका दहन होने वाला था इसबार सबको लगा था की मेरे घर से कोई भी नही आएगा ,सभी का खासकर लड़कियों का चहरा उतारा हुआ था क्योकि उनकी पार्टी मेरे ही घर में होती थी ,शाम निशा ने जाने से मना कर दिया लेकिन मैं उसे खीचकर ले ही गया ,सबके चहरे खिल गए थे ,सभी निशा को घेरने लगे निशा के चहरे में भी थोड़ी खुसी आयी वो धीरे धीरे रंग में रंगने लगी थी ,नगाड़े बज रहे थे ,और गुलाल फेके जा रहे थे ,सभी लोग नाचने लगे लेकिन निशा पहले तो वैसे ही खड़ी थी ,फिर उसके आंखों में आंसू आये जिसे मैने देख लिया मैं जल्दी से उसके पास जाकर उसे उठाकर लोगो के बीच ले आया और उसका हाथ उठाकर डांस करने लगा ,थोड़ी ही देर में वो रंग में आ गई और एक बार जो नाचना शुरू किया वो बस …..

पड़ोस की पिंकी ने मुझे खिंचा ,

“भैया आज का क्या प्रोग्राम है ,हर साल की तरह या सब सूखा सूखा ही होने वाला है “

“तुझे मेसेज नही मिला क्या “

“नही तो “

“भूल गया होऊंगा सभी लड़कियो को बात दे की पार्टी मेरे घर में है ,बस निशा को पता नही चलना चाहिए ,”वो समझ गई थी

रात निशा थकी हुई थी ,और हम जल्द ही सोने चले गए ,मैंने उससे कहा की मुझे कल भी ऑफिस जाना है सुबह जल्दी तो मैं सोने जा रहा हु ,वो और भी उदास हो गई थी ,लेकिन करती भी क्या ..वो अपने कमरे में जाकर सोने लगी …

रात लगभग 10 बजे हमारे घर की घण्टी बजी मैं अब भी बिस्तर में पड़ा था ,निशा ने एक बार मुझे आवाज दी लेकिन मेरे तरफ से कोई भी रिस्पॉन्स नही आता देख वो ही उठकर गेट खोलने जाने लगी ,

उसने गेट खोला और

“हैप्पी होली “

एक बाल्टी रंगों से भरी उसके ऊपर उड़ेल दी गई ,वो स्तब्ध थी ,मैं पीछे से आकर उसके में रंग लगाना शुरू कर दिया उसका पूरा शरीर ही गिला हो गया था कपड़े जिस्म से सट गए थे ,सोते समय ऐसे भी वो अंदर कुछ नही पहनती थी उसका टीशर्ट और छोटा सा लोवर पूरी तरह से भीग गए थे लेकिन किसे परवाह थी ,वो थोड़ी देर तो गुस्से में दिखी लेकिन जब उसने देखा की उसकी सभी फ्रेंड्स और मोहल्ले की सभी लडकिया और कुछ आंटीया वहां है तो उसे समझ आ गया की क्या हो रहा है वो भी उनके ऊपर झपट पड़ी ,मैं थोड़ा दूर खड़ा हुआ अपनी बहन को देख रहा था ,उसकी इसी खुसी ले लिये तो ये सब किया था,तभी एक आंटी मेरे पास आ गई

“क्यो अभिषेक सब सूखा सूखा इस बार”

“अरे आंटी होली सूखी कैसे हो सकती है सब इंतजाम है चलो तो सही ऊपर “

सभी एक एक कर छत में आने लगे ,मैंने एक टेबल में बियर और वोडका को सजा कर रख दिया था ,खाने का समान निशा की फ्रेंड्स ला रही थी ,रंग और बाकी समान मोहोले की लडकिया,मैंने साउंड सिस्टम बजाना शुरू कर दिया ,यहां का रूल था की यहां लड़को की एंट्री नही थी ,मैं ही एक मात्र लड़का यहां होता हु वो भी आयोजक की तरह ना की मैं उनके साथ शामिल होता हु ,

निशा ने जब ये सब देखा वो भाव विभोर हो गई और मुझसे आकर लिपट गई ,

“ये सब कब कर लिये “

“आज शाम से यही तो कर रहा हु ,मेरी बहन आये और होली ना मने ऐसा हो सकता है क्या “

वो और भी जोरो से लिपट गई ,वो इस सरप्राइज के लिए तैयार नही थी इसलिए उसने कपड़े नही बदले थे,उसका जिस्म पूरी तरह नजर आने लगा था ,लेकिन यहां किसी को इससे कोई भी परेशानी नही थी ,लेकिन मुझे उसके शरीर का आभास हुआ तो कुछ अजीब सा लगा

“तू कपड़े बदल ले ना “

उसे समझ आ गया की मैं क्या कहना चाहता हु

“छोड़ो ना भैया ऐसे भी कोई तो नही है यहां ,और आपकी विस्की “

मैंने उसे इशारे से दिखाया ,वो उनलोगों में शामिल हो गए ,शराब का दौर चला और सच बताऊ दारू के बाद औरते बहुत ही ज्यादा वाइल्ड हो जाती है ,इतनी मस्ती करती है की आप साधारण तह सोच भी नही सकते ,उनकी मस्तिया चल रही थी और उन्हें देख देखकर मैं भी खुस हो रहा था,मैंने अपनी विस्की की बोतल निकल कर पिने लगा ,डांस पूरे जोरो में था ,और कुछ लड़कियों ने मुझे भी खिंच लिया ,मुझे भी रंगों से नहला दिया गया था,मैं भी पूरे जोश में नाच रहा था ,थोड़ी थोड़ी देर नाचकर मैं उनसे अलग होकर बैठ जाता था,और निशा को नाचते हुए देखने लगता था,वो आज हँस रही थी ,खुस थी इससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए था,वो मुझे देखती फिर मुझे खिंच लेती ,ये सब रात 1 बजे तक चला अब सभी पूरी तरह से टुन्न थे और कुछ तो वही लुढक गए थे ,आसपास की सभी आंटीया और लडकिया अपने घर जा चुकी थी ,लेकिन निशा और उसकी एक दो फ्रेंड्स अब भी नाच रही थी,मैं भी पूरी एक बोतल विस्की गटक चुका था ,कोई उल्टियां कर रहा था कोई छत में ही पड़ा था तो कोई मेरे सोफे में आकर सोया हुआ था .अब जो होशं में थे मैं और निशा ही थे,क्योकि ये अचानक किया गया था और मा पापा भी नही थे ,घर की हालत भी खराब हो गई थी ,मै नीचे आकर देखने लगा की कल कितना काम करना पड़ेगा ,खैर एक 500 के नोट से मेरे घर की काम वाली ये सब साफ कर देगी ,जिन्हें जहा जगह मिली थी वो सो गए थे ,लेकिन निशा को तो अभी भी डांस करना था वो हमेशा ही ऐसा करती थी ,मैं उसके साथ थोड़ी देर और नाचा लेकिन मैं भी थक गया था ,

“हो गया ना चल अब मैं भी थक गया “

हम दोनो का एक एक अंग अभी रंग से रंगा था,

“आप नही थक सकते भैया “

मुझे लगा वो अपने आपे में नही है ,मैं उसे उठाने की कोसिस करने लगा लेकिन वो मुझे बीच में ही रोक दी

“नितिन भी थक जाता है ,वो तो शुरू भी नही कर पता “

मेरा दिमाग चकराया

“हा भैया मैं अभी भी वैसे ही हु जैसा की शादी के समय थी “

मैं कुछ समझने की कोसीस कर रहा था

“मैं अभी भी वर्जिन हु भइया ,”

मेरे दिल में जोरो की चोट लगी ,अब मुझे उन दोनो की पूरी बाते समझ आ गई थी,मुझे निशा के दुख का आभास हुआ और मैंने उसे जोरो से जकड़ लिया वो जोरो से रोने लगी ,मेरा इतना किया सब जाता रहा ,थोड़ी देर तक हम ऐसे ही रोते रहे मुझे तो इसका यकीन ही नही हो पा रहा था की नितिन जैसा लड़का ऐसा हो सकता है ,मैं उससे बात करना चाहता था लेकिन अभी नही ,

मैं निशा को नीचे ले आया और उसे अपने कमरे में ले गया वो बिस्तर में बैठी हुई थी मैंने पहले उसे कपड़े बदलने और नहाने की सलाह दी लेकिन वो पहली मेरे साथ ही नहाने की जिद करने लगी ,जिंदगी में जो थोड़ी खुसी मैं उसे दे सकता था देना चाहता था ,ताकि वो इस दुख से लड़ सके ,

हम दोनो शावर के नीचे खड़े थे ,अभी हमने कपड़े उतारे नही थे ,पानी की फुहार हमारे बदन पर पड़नी शुरू हुई

“हैप्पी होली भइया “

हम दोनो ही हँस पड़े,

धीरे धीरे हम पूरे तरह से गीले हो गए और निशा ने मुझे अपने बांहो में जकड़ लिया ,उसका पूरा शरीर भीगा हुआ था उसके कपड़े उसके तन से चिपक गए थे,मेरी प्यारी बहन इतने जल्दी इतनी बड़ी हो गई इस बात का सही अहसास तो मुझे अब हुआ ,उसके हर अंगों का भराव मेरे बदन से चिपक रहा था और मैं उसे महसूस कर सकता था,थोड़ी देर में वो मुझसे अलग हुई और बाथटब में थोड़ा गर्म पानी कर उसमे लिकविड डाल दिया ,हम दोनो वही लेट गए ,वो हल्का हल्का गर्म गर्म अहसास ,हमे बहुत सकून दे रहा था ,थोड़ी देर में निशा पहले की तरह बच्चों जैसे मुझपर पानी फेक्नी लगी और पास ही पड़े फोम से मेरे शरीर को धोने लगी फिर मैं भी उसे रगड़ रगड़ कर साफ करने लगा ,पूरा पानी ही रंगीन हो गया था ,तो फिर से नया पानी भरकर हम उसमे लेते रहे ,दारू का नशा थोड़ा कम तो हो गया था लेकिन अब भी सर भारी था ,हमे कब नींद आयी पता ही नही चला,

जब मेरी नींद खुली तो निशा वँहा नही थी ,मैं भी उठाकर अपने को पोछा और बैडरूम में गया .वो कपड़े चेंज कर सो चुकी थी ,वो बच्चों की तरह पैर मोड़े हुए सोए हुए थी ,मेरे होठो पर एक मुस्कान फैल गई ,मैं भी खुद के कपड़े चेंज किये उसे एक किस किया और गहरी नींद के आगोश में चला गया …………

होली का दिन और सुबह उठाते ही रात की सारी बाते दिमाग में घूम गई ,सर में थोड़ा दर्द भी हो रहा था,मैंने बाजू देखा तो निशा को नही पाया ,मैं सर पकड़े बाहर आया ,घर जमा हुआ था मतलब की निशा बहुत पहले ही उठ चुकी थी ,

मैं किचन की तरफ बढ़ने लगा ,तभी किसी के जोरो की हँसी आयी,ये नेहा थी,नेहा निशा की सहेलियों में एक थी बहुत ही सेक्सी टाइप की लड़की थी ,निशा के सभी दोस्तो से अलग थी क्योकि सभी मुझे भैया ही कहा करती निशा को छोड़कर,

निशा और मैं दोनो ही जानते थे की नेहा मुझे बेहद पसंद करती है लेकिन मैं ही उसे भाव नही देता ऐसे भी नेहा मेरे टाइप की नही थी ,लेकिन दिल की बड़ी अच्छी लड़की थी ,वो निशा के सामने उसके डर से कोई भी ऐसी वैसी बात करने से बचती थी,लेकिन जब हम अकेले होते तो वो मुझपर टूट ही पड़ती …….

“ऐसे क्यो हँस रही हो ,और निशा कहा है “

“अपना चहरा देखो पहले और निशा बाजू वाली आंटी के घर गई है ,अभी बस हम दोनो ही है घर में “ उसने बड़ी अदा से कहा और मैं मुह सिकोड़कर वहां से भागा अपने बाथरूम में आ गया ,अपना चहरा देखा तो वो पूरा काला था ,जरूर ये निशा की ही बदमाशी थी मुझे हँसी आयी और अगले ही पल निशा के बारे में सोचकर दुख….इस उम्र में उसे ये सब सहना पड़ रहा है ,सोच के ही मन रो पड़ता है,मैं तैयार होकर बाहर आया ,नेहा ने मेरे लिए नाश्ता लगाया ,वो आज बड़े ही तमीज से पेश आ रही थी ,

“तुम्हे क्या हुआ है आज सलवार कमीज में “

“क्यो पसंद नही आया क्या “

“अच्छी लग रही हो ,लेकिन ये बदलाव कैसे “

“सब कुछ तो बदल गया है ,निशा आप तो मैं कैसे वैसे ही रहू “

मैंने उसे धयन से देखा उसे हो क्या गया है की वो इतने संजीदा बाते कर रही है,

“क्या हुआ “

“आप बताओ की क्या हुआ है “

“अरे ये क्या बात हुई “

“तो आपका चहरा क्यो उतरा है “
 


मेरा चहरा?ओह तो इसे समझ आ गया

“कुछ नही “

“ह्म्म्म निशा मेरी सबसे खास सहेली है और जो बात उसने आपको कल बताई वो मैं बहुत ही पहले से जानती हु ,जब नितिन और उसकी शादी हुई “

मैं फिर से उसे गौर से देखने लगा

“अब अगर कोई कुछ कर सकता है तो आप “

“मतलब “

“निशा को जो चाहिए वो देकर “

“क्या चाहिए उसे “

मैं आश्चर्य चकित सा उसे देख रहा था

“प्यार “

“तो तुम्हे क्या लगता है की मैं उसे प्यार नही करता “

“जिस्म का प्यार “

मेरा गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ गया ,

“तुम समझती क्या हो अपने आप को तुम उसकी सहेली हो तो मैं तुम्हारी किसी भी बात को चुपचाप सुनूंगा ,निकल जाओ यहां से और कभी फिर चहरा मत दिखाना ,अगर तू लड़की नही होती तो तुझे यही गाड़ देता “

मेरा चहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था ,मेरी धड़कन बड़ी हुई थी ,लेकिन नेहा के चहरे में एक शिकन तक नही आयी

“हा जा रही हु ,लेकिन ये मैं अपने मर्जी से नही कह रही हु,मैं तो आपको किसी और के साथ सोच भी नही सकती लेकिन इसे मेरे अलावा कोई और आपसे कह भी नही सकता था,ये कहने को निशा ने ही मुझे कहा था ,अब आप जानो और आपकी बहन मैं चली “

वो भी गुस्से में आते हुए वहां से चली गई ,उसके चहरे से उसका दुख जरूर झलक रहा था ,

लेकिन मैं …………...मैं तो स्तब्ध था,दिल चीख रहा था की जो तूने सुना है वो बस बकवास है ,कोरी बकवास ...निशा तो ऐसा सोच भी नही सकती …

नाश्ता मेरे मुह के अंदर ही नही जा रहा था,मैंने निशा के आने से लेकर अब तक को फिर से सोचा ,जो नेहा हमेशा ही मेरे लिए पागल रहती थी कल वो बिल्कुल चुपचाप बैठी थी ,बहन के आने की खुसी में मैं उसे देखना ही भूल गया था,निशा का पहले इतना दुखी होना और मेरे साथ ही नहाने की जिद करना ,क्या ये महज इत्तफाक था ,या प्लान किया गया था,लेकिन क्या उसे मुझपर इतना भरोसा नही था की उसे लगा की मैं ये कर पाऊंगा ………..

हो सकता है की निशा की ये सबसे बड़ी जरूरत हो ,और उसे पूरा करना उसके जीवन और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी हो ,लेकिन मैं ही क्यो दुनिया में इतने लड़के है,और मैं तो उसका भाई हु ये गलत है ,मैं अपने ही आप से बात करता हुआ अपने सोच में गुमसुम सा बैठा था ,की फिर से नेहा की आवाज आई ,वो बाहर जा चुकी थी लेकिन फिर से अंदर आई

और मेरे सामने खड़े हो गई

“अगर आप सोचते हो की ऐसा क्यो ,तो वो इसलिए क्योकि निशा आपसे ज्यादा किसी से भी प्यार और विस्वास नही करती ,उसके लिए आपसे बढ़कर कोई भी नही है नितिन भी नही “

मैं उसे देखता रहा मेरे आंखों में आंसू थे ,जो बहाने को तैयार थे लेकिन किसी वजह से रुके हुए थे ,दिल भरा हुआ था लेकिन फिर भी मैं उसकी बात सुन रहा था ,

“और अगर आप सोचते हो की ये गलत है तो बहन की इज्जत और जीवन से बढ़कर कोई भी सही गलत नही होता ,खुशियो के सामने सब सही गलत फीके है,जब बहन ही नही रहेगी ,उसकी खुसी ही नही रहेगी तो सही गलत का अचार तो डालना नही है आपको ….”

मैं अब भी उसे ही देख रहा था,

“खैर जो फैसला करना है कर लीजिएगा और आपके बिस्तर के पास एक जेल रख दिया है क्योकि निशा अब भी वर्जिन है ,और ये भांग की गोलियां जिससे आप और निशा इस रिस्तो के बंधन से मुक्त होकर एक दूसरे को दुख से बचा सके …”

वो कुछ गोलियां रखकर वहां से चली गई ,मैं तो अब और भी शॉक में था की निशा ने सब प्लान किया हुआ है ,मेरे दिमाग में कोई भी सवाल नही थे क्योकि नेहा ने सारे जवाब पहले ही दे दिए थे ,लेकिन एक अजीब सी बेचैनी और डर मुझे अंदर ही अंदर खाये जा रहा था ………

थोड़ी देर बाद निशा घर आती है ,उसके भी चहरे का रंग उड़ा हुआ था ,वो मेरे टेबल में रखे गोलियो को देखती है ,हमारी नजर मिलती है और वो अपनी नजर झुका लेती है ,और मेरे सामने आकर खड़े हो जाती है ,

“भइया नेहा ने आपसे बात की “

उसकी नजर अभी भी झुकी हुई थी

“हा “

“तो .”

वो बस इतना ही बोलकर रुक जाती है ,मैं गोलियां सामने कर देता हु ..

“लो इसे दूध में घोलकर भांग तैयार कर दो “

“भइया “

निशा खुसी के मारे चिल्ला पड़ती है और मेरे गले से लग जाती है ,मुझे उसके इस रिएक्शन का जरा भी इल्म नही था ,

“मैं बहुत खुस हु की अपने मुझे माफ कर दिया और आपके लिए ऐसा भांग बनाउंगी की आप सब कुछ भूल जाओगे “

मुझे तो विस्वास ही नही हुआ की निशा इतनी बड़ी बात के लिए थोड़ी भी गंभीर नही थी ,हो सकता है की वो इस बारे में बहुत सोच कर ही ये फैसला किया है ,और ये स्वाभाविक था क्योकि जैसा नेहा ने कहा था की नितिन के शादी के बाद से ही निशा प्रॉब्लम में थी तो वो इतने दिनों तक इसके बारे में सोचा ही होगा ,और नेहा से इसके बारे में लंबी बातचीत भी की होगी ….

निशा अंदर चले गई और बाहर आकर मुझे अपने हाथो से नाश्ता खिलाने लगी ,मैं अभी भी बहुत ही नर्वस फील कर रहा था

“भइया अपने मुझे माफ नही किया है ना “

“नही बहन ऐसे क्यो बोल रही हो “

“तो यू गुमसुम क्यो हो ,अगर आप ऐसे ही रहोगे तो मुझे कुछ भी नही चाहिए पहले आपकी खुसी फिर बाकी कुछ ,आज होली है हमारा सबसे फेवरेट त्योहार है और आप ऐसे घुमसुम रहोगे तो नही चलेगा ,बोलो तो भांग को फेक दु “

मैंने उसके चहरे को देखा सच में वो मेरी खुसी के लिये कुछ भी कर सकती थी

“भांग मेरे ही साथ पीना जरूरी है क्या “

मैं उससे अब भी सीधे बात नही कर सकता था

“आप पागल हो गए हो क्या ,सिर्फ सिर्फ और सिर्फ आपके साथ ही पिऊंगी और किसी के साथ तो सोच भी नही सकती “

“लेकिन नितिन “

“देखो भैया अब उसका नाम लेकर मेरा दिमाग खराब मत करो ,मैं भांग को फेक रही हु “

वो अपने स्वाभाविक गुस्से में उठी ,मैं ने उसे खीचकर अपने गोद में बिठा लिया ,वो एक सफेद सलवार कमीज में थी ,आज पहली बात उसके कूल्हों को मैं अपने जांघो में महसूस कर रहा था ,अब मुझे तो ये करना ही था और निशा की भी यही चाहत थी तो क्यो ना मैं अपने शर्म को गिरा दु ताकि मैं उस चीज के लिए तैयार हो जाऊ,ये मेरे लिए आसान तो नही था ,

“ठीक है तू मेरे साथ ही भांग पीयेगी ओके ,और एक चीज हमेशा से याद रखना की तेरा भाई तेरे लिए कुछ भी कर सकता है ,कुछ भी ,i love you मेरी जान .”

मैं उसके गालो को चूमने लगा ,मेरी आंखों में आंसू आ गए थे

“भैया रोइये मत मैं जानती हु आप मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो ,मैं आपके प्यार को जानती हु भैया,मैं जानती थी की आप मुझे माफ भी कर देंगे और मेरी खुसी के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाएंगे लव यु भैया “

वो मेरे गालो को पकड़े हुए उसे चूमने लगी ,तभी गेट में किसी की दस्तक हुई ,जैसे ही मैंने गेट खोला होली खेलने वाले मेरे घर में हमला बोल दिया सब कुछ ही देर में रंगों से सराबोर थे ,सबने हमे नीचे ग्राउंड में जंहा पर पूरी कालोनी के लोग इकट्ठा होते है ले जाने लगे ,लेकिन निशा थोड़ी देर बोलकर सबको भगा दी ,निशा अंदर जाकर मेरे लिए और अपने लिए भांग के दो ग्लास लायी ,इतना बढ़िया भांग मैंने कभी नही पिया था,

जो लोग भांग के नशे के बारे में जानते है उन्हें पता होगा की इसमें जो आप सोचोगे आप बस वही सोचते रहोगे ,दिमाग मतवाला सा होकर बंधनो को तोड़ देता है ,ये शराब के नशे से बहुत ही भिन्न है ये गांजे के नशे के समान होता है लेकिन उससे अच्छा होता है ,स्वस्थ्य की दृष्टि से भी भांग जब ठंडाई के साथ साथ बनाया जाय तो ये ठंडा करने वाला और दिमाग को अच्छा बनाने वाला भी होता है ,लेकिन जैसा सभी औषधियों के साथ होता है इसका भी उपयोग बस नशे के रूप में किया जाता है ….

अब हम दोनो ही मस्त थे ,मैंने अपनी पिचकारी उठाई ,

“भैया आज अपनी पिचकारी अच्छे से भर लेना ,आज देखती हु की आप मुझे कितना भीगा पाते हो ….”

वो हँसते हुए वहां से निकल गई और मैं उसके बात का मतलब समझने की कोसीसे करने लगा ,............

भांग का नशा अपने शबाब पर था साथ ही होली का रंग भी ,ये पहली बार था जबकि हम शहर में होली मना रहे थे,हम हमेशा से ही गांव में होली मनाते थे,

निशा और मैं पूरी तरह से रंग में सराबोर थे,मेरी पिचकारी ना जाने क्यो आज सिर्फ और सिर्फ निशा के ऊपर ही बरस रही थी ,वो हँस रही थी और हँस रही थी और हँस रही थी ,लगभग सभी को पता चल चुका था की हम भांग पीकर आये है क्योकि हम थोड़े पागलो वाली हरकत कर रहे थे,मैं बार बार पिचकारी में रंग भरता और निशा के ऊपर डालता और वो बस हँसती रहती वो भी ठहाके मार मार कर मैं भी उसे देखकर हँसता था फिर पिचकारी में रंग भरकर उसे भिगोने चले जाता,हमारी हालत देखकर आस पड़ोस की आंटीयो को चिंता सताने लगी क्योकि निशा को हँसने के कारण पेट में दर्द होने लगा था ,वही वो उल्टियां करने की कोशिस भी कर रही थी लेकिन कुछ हो नही रहा था,उसके चहरे का दर्द साफ झलक रहा था लेकिन वो भी मजबूर हो गई थी और अपनी हँसी रोक ही नही पा रही थी ,जो लोग गांजा या भांग का नशा करते है उन्हें शायद ये पता हो जिन्हें नही पता उनको बता दु की ये नशा कभी उल्टियां करने से ठिक नही होता,इसके लिए माइंड को बिजी रखना जरूरी है या अगर वो सो पाए तो सुला दो ये सबसे असरकारक होता है लेकिन इस नशे में सो पाना भी तो बेहद मुश्किल है ,

नेहा हमारी हालत देखकर मुस्कुरा रही थी ,उसे सबने कहा की वो हमे घर छोड़ दे ,नेहा हमे खीचकर हमारे घर तक ले गई और जाते जाते मैं निशा की हालत देखकर रोने लगा ,मुझे देखकर निशा रोने लगी ,नेहा ने हमे जैसे तैसे हमारे घर तक लायी और दरवाजा खोलकर निशा के पास आकर कहा

“ठिक होना है “

“हा”निशा रोते हुई बोली

“तो कुछ ऐसा सोच जो अच्छा हो “

“क्या “निशा सुबक ही रही थी ,वो इच्किया ले रही थी

“सेक्स के बारे में सोच अच्छा लगेगा “नेहा ने हम दोनो को देखकर कहा

“और तुम अपनी बहन का ध्यान नही रख सकते जाकर इसे नहलाओ और जो बोला है वो करो “मैं किसी बच्चे की तरह उसकी बात में सर हिलाया

“और दरवाजा अंदर से बंद कर देना “

वो हमे छोड़कर वँहा निकल गई

मैं अंदर आकर दरवाजा लगाया

“चल नहाते है “

“हा भैया “वो अब भी रो रही थी साथ ही मैं भी ,हम इसे खत्म कैसे करे वो समझ नही आ रहा था ,

हम बाथरूम में खड़े थे ,हम रंगों से सराबोर थे और पूरी तरह से गीले थे हम शावर के नीचे आ गए ,हम अब भी रो रहे थे ,अब वो मेरे आंसू पोछती और मैं उसके ,

मैंने शावर चालू किया पानी की ठंडक ने हमे थोड़ा आराम दिया हम पूरी तरह से गीले थे ,हमारे चहरो और शरीर में लगा हुआ रंग धीरे धीरे करके पानी की धार के साथ साथ ही बह रहा था,अब मुझे उसका वो प्यारा सा चहरा दिखने लगा था हालांकि अब भी उसपर बहुत रंग बाकी था,

रोना बंद ही नही हो रहा था जैसे ही हम एक दूसरे को देखते दहाड़ मार कर रो पड़ते …

“भइया कुछ करो ना “

“क्या “

“जो नेहा बोली सेक्स की बात कैसे सोचु कुछ समझ नही आ रहा “

वो और भी जोरो से रोने लगी ,भांग चीज ही ऐसा है ,गांजा तो फिर भी ठिका हो जाता है लेकिन भांग अगर चढ़ गई तो जान ही ले लेती है ,

सेक्स की बात सुनकर मेरे दिमाग में एक बार नेहा की पूरी बात घूम गई ,उस नशे की हालत में ही मैंने निशा को खुस करने का फैसला किया लेकिन कैसे मुझे ये तो पता ही नही था ,

“भइया कैसे सोचु सेक्स के बारे में “

“नितिन के बारे में सोच “

वो और भी जोरो से रोने लगी मेरा दिमाग तो सेक्स की तरफ जाने लगा था और मैं नेहा की कही बातो के कारण थोड़ा गर्म हो रहा था ,लेकिन बेचारी निशा का क्या

“वो तो बहुत बेकार है ,मैं कैसे सोचु “

वो फिर से रोने लगी ,मैं आगे बड़ा और उसके स्तनों में अपने हाथ रखकर उसे मसलने लगा ,निशा के कपड़े जिस्म से चिपक कर बहुत ही सेक्सी हो गए थे ,लेकिन अभी भी मुझे इसका कोई आभास नही था क्योकि अब भी मेरे अंदर का भाई जिंदा था जो अपनी बहन को हवस की नजर से नही देख सकता चाहे वो नंगी ही क्यो ना हो …

“अब अच्छा लगा “

“नही ….”वो जोरो से रोई

“सोचु कैसे “

मेरा दिमाग काम नही कर रहा था की ये कैसे सोचेगी मैं अपने कपड़े निकलकर बस अंडरवियर में आ गया ,अभी मेरे लिंग में कोई भी अकड़ नही थी ,मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने सीने में लगाया

“तू मुझे प्यार करती है ना “

“बहुत “निशा ने बड़ी ही मासूमियत से कहा

“तो सोच अगर मैं तेरा पति होता ,तो …”

“ओ अब सुबक रही थी ,थोड़ी शांत भी हो गई ,थोड़ी ही देर के बातचीत और पानी की धार ने कमाल दिखाया था ,

“तो ….”

“हम कैसे सेक्स करते ये सोच “

वो मेरे सीने को सहलाती है ,

“भइया आपके मसल्स कितने कसे हुए है ,नितिन तो थुलथुला है “

“अरे छोड़ उसे मेरे बारे में सोच ना “

बेचैनी में मुझे भी रोना आ गया था,मेरा लिंग उसके स्पर्श और सेक्स के विचारों के कारण खड़ा होने लगा था ,मुझे इतनी उत्तेजना कभी महसूस नही हुई थी ,ये भी उस नशे का कमाल है और जो लोग इसका सेवन कर कभी भी सेक्स के बारे में सोचे हो वो ये बात भली भांति जानते होंगे की मैं क्या कहना चाहता हु ,दिमाग शून्य हो जाता है ,लिंग ऐसे अकड़ जाता है जिसे की कोई रॉड हो ,मेरे साथ भी यही हुआ ….

दिल की धड़कने बहुत ही बढ़ गई थी ,वो मेरे सीने को चुपचाप सहला ही रही थी ,अब उसकी सांसे भी तेज हो गई थी वो भी गर्म होने लगी थी ,अब हम दोनो का ही रोना बंद हो चुका ,वो मेरे बालो से भरे चौड़े सीने को इतने ध्यान से देख रही थी जैसे की उसमे खो गई हो शायद वो ये सोच रही थी की अगर मैं उसका पति होता तो उसके साथ कैसे सेक्स करता .

“आह “उसकी आंखे बंद हो गई .पानी उसके गुलाबी होठो से जो अभी थोड़े बैगनी हो गए थे में जाने लगा उसका मुह थोड़ा सा खुल गया था ,

उसकी आंखों में नशा उतर गया था ,नशीली आंखे अब मेरे चहरे को ही गहरे जा रही थी ,मेरे भी लिंग का हाल बुरा था ,

“भइया आप कितने सेक्सी हो ,ये मेरे दिमाग में पहले क्यो नही आया ,आप तो मुझे रौंद ही डालोगे,कितनी ताकत है आपके अंदर ,मुझे बहुत मजा आएगा “

वो इतनी हांफ रही थी की वो ढंग से बोल भी नही पा रही थी ,उसका नाजुक शरीर मेरे पास आने लगा ,मेरे लिए वो किसी गुड़िया जैसी थी ,मैंने उसे जोरो से कसा वो मेरे सीने में धस गई और मेरा लिंग उसके जांघो के बीच जोरो से रगड़ खाया

“आआआ हहहह “

वो नजर उठाकर मेरे होठो पर अपने होठ रखने को अपना सर ऊपर की और मैं अपने सर को नीचे कर उसके रसीले होठो को अपने होठो की गिरफ्त में ले लिया ,

गुलाल का स्वाद मेरे मुह में घुल रहा था लेकिन हम दोनो ही एक दूसरे को जी जान से खाने में तुले थे ,मेरा हाथ उसके शरीर के हर हिस्से पर जा रहा था मैं उसके कूल्हों को पूरे ताकत से दबाता जैसे मसल कर राख कर देना चाहता हु,वो भी जोरो से आहे भर रही थी ,उसके हाथ मेरे सर पर था और वो पूरी तरह से मेरे गिरफ्त में …………..

मैं उसके सलवार के नाड़े को पकड़ कर खोल दिया सलवार भी एक ही झटके में नीचे आ गिरा ,आप उसकी पेंटी के ऊपर से मेरा हाथ उसके कूल्हों को मसल रहा था ,उसकी नरम त्वचा का अहसास मुझे और भी गर्म कर रही थी ,मेरे लिए ये सब सहन करना मुश्किल हो रहा था मैं अपने अंडरवियर को निकाल फेका और उसके पेंटी के ऊपर से ही उसके योनि के ऊपर रगड़ने लगा..

“ओह माँ ...आह नही ओह “

वो उत्तेजना के शिखर में थी और मैं पागलो की तरह उसके पेंटी के ऊपर से ही अपने लिंग को रगड़ रहा था लेकिन मुझे थोड़ा भी शुकुन नसीब नही था ,बल्कि ये और भी ज्यादा बढ़ रहा था ,मैंने अपना हाथ लेजाकर उसके पेंटी को उसकी योनि से सरकाया और धीरे से अपने लिंग को उसकी योनि में घुसा दिया ,वाह क्या अहसास था जब मेरे लिंग की चमड़ी पहली बार अपने सुपडे से अलग हुई और फैलाकर पीछे हो गई ,दर्द तो दोनो को ही हुआ था लेकिन इतना मजा और ये नशा सब दर्द पी गया ,

वो चिल्लाई

“माँ …...भइया ….ओह गॉड ..ऊहह “

मुझे कसकर जकड़ लिया ,उसके गीले योनि में मेरा लिंग दो ही झटकों में पूरी तरह से समा गया था ,शायद मेरा लिंग थोड़ा छिल गया था और उसमे खून भी आ गया था लेकिन अभी इसका अहसास भी मुझे नही था ,लिंग के अंदर जाते ही मुझे इतना अच्छा अहसास और शांति मिली की मैं तो दीवाना ही हो गया ,एक बार फिर से उसे बाहर खिंचा और जोरो से अंदर डाला ,इस बार भी निशा ने मुझे जोरो से जकड़ा ,वो अब बस अपने कमीज में खड़ी थी ,शावर अब भी चालू था और हमे भिगो रहा था और मैं पूरी तरह से नंगा खड़ा था ,उसके पैर काँपने लगे थे मैंने उसे वही लिटा दिया और उसके बाकी के कपड़ो को लगभग चीरते हुए उतारा ,हम दोनो बहुत ही जल्दी और जोश में थे ,उसके पूरा नंगा होते ही मैं उसके टांगो को उठाकर अपने लिंग को उसकी योनि पर हमला कर दिया ,मैं अपने पूरे जोश में अंदर बाहर कर रहा था और वो भी मेरे सर को पकड़े जोरो से चिल्ला चिल्ला कर मेरा साथ दे रही थी ,हम दोनो ही उत्तेजना के शिखर पर थे वो झड़ी ना जाने कितने बार मेरे भी हाथो में दर्द भर गया था ,लिंग का हाल तो बेहाल था ,वही हाल उसकी योनि का भी था लेकिन दोनो ही डटे हुए थे ,मैं उसे अलग अलग पोजिशन बना कर सेक्स कर रहा था ,पता नही मुझे ये सब कैसे आ गया ,मैंने जिंदगी में कभी ना पोर्न देखी थी ना ही हिलाया था लेकिन कहते है ना की सेक्स सीखने या सीखने की चीज नही है ,जोश हो तो सब खुद ब खुद हो जाता है ऐसा ही मेरे साथ हो रहा था ,मैं उसे पलटा कर कुत्तों की तरह चोदने लगा था ,उसके कूल्हों से मेरे कमर टकराकर आवाज करने लगे थे मैं हर झटका इतने जोर से मरता था...पानी की आवाज के साथ साथ हम दोनो के मिलन से उठने वाली छप छप की आवाज कमरे में फैल रही थी ,वो झर जाती फिर से गर्म हो जाती ऐसा घंटे भर तक चला ,

वो तो मर सी गई थी मेरा भी हालत वैसा ही था,मैंने पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन साला मेरा लिंग पानी छोड़ने का नाम ही नही ले रहा था ,मैं पागल हुए जा रहा था और मुझसे अब नही हो रहा था ,हमारा नशा भी खत्म होने लगा था ,मैं 5 -10 मिनट ताकत लगाने के बाद थककर उसके ऊपर गिर जाता फिर थोड़ी देर में फिर से कोशिस करता था ,निशा भी परेशान लग रही थी ,उसे अब दर्द होने लगा था ,1 घंटा बीत जाने के बाद वो रोने लगी और मजबूरी में मैं भी ,

“भइया हो गया ना प्लीज़ ,अब नही सहा जाता …”

वो सच में रो रही थी उसे देखकर मेरा दिल भी भर गया मैं उठा और उसे ऐसे ही उठाकर बिस्तर में पटक दिया ,वो बेहद ही मजबूरी भरे नजरो से मुझे देख रही थी,

“माफ कर दो भइया मैं सह नही पा रही हु “

वो रोने लगी मैं उसके ऊपर आकर उसे प्यार करने लगा ,मेरा लिंग अब भी रॉड बना हुआ था

“कोई बात नही बहन ये ठीक हो जाएगा मैं इसे ठंडे पानी से धोता हु “

हम अब नशे में नही थे लेकिन हमारे मन में अभी तक हुए वाकये को लेकर कोई भी ग्लानि नही उठी थी ,मैं फ्रिज से बेहद ठंडा पानी निकल कर अपने लिंग में डालने लगा ,इससे मुझे राहत तो मिली लेकिन अब भी उसकी अकड़ नही गई ,तभी निशा ने नेहा को काल किया और उसे सभी बताई ,थोड़ी ही देर में घर की घंटी बजी,निशा एक नाइटी उठा कर दरवाजा खोली नेहा ने अंदर आकर तुरंत अंदर से दरवाजा बंद कर लिया ,

“ये क्या दे दिया है तुमने “

मैं अब भी नंगा था और मुझे नेहा से कोई भी शर्म नही आ रही थी ,वो बस मुस्कुराई और मेरे पास आकर नीचे बैठ गई और मेरे लिंग को देखने लगी ,चमड़ी अब भी ऊपर चढ़ी हुई थी और लिंग इतने रगड़े जाने के बाद और भी सूज गया था ,वो बहुत ही मोटा दिख रहा था ,मेरा सूपड़ा बुरी तरह से लाल था ,वो उसे देखकर एक आह भरी ,

“मुझे पता था की तुम जितने दमदार हो ये भी उतना ही दमदार होगा “वो इतना ही बोलकर लिंग को अपने मुह में लेकर चूसने लगी ,जो लिंग ठंडे पानी के पड़ने से थोड़ा सा ठंडा पड़ा था वो फिर से गर्म होकर बेहद ही कड़ा हो गया ,वो किसी बहुत ही एक्सपर्ट की तरह उसे चूसे जा रही थी मेरा भी हाथ उसके सर पर चला गया और मैं मजे के सागर में डूब गया ……….

वो काफी देर तक मेरे लिंग को जोरो से चूसती रही ,पूरी मेहनत वो कर रही थी और मजे मैं उठा रहा था,उसके चूसने का अंदाज ही ऐसा था की मैं पागल हुए जा रहा था ,आखिरकार वो समय आया जिसका मुझे इतनी देर से इंतजार था मैं जोरो से नेहा के मुह में अपना वीर्य छोड़ा और आश्चर्य की बात ये थी की वीर्य बहुत गढ़ा तो था लेकिन ज्यादा मात्रा में नही था ,मैं शांत हो गया और हांफता हुआ बिस्तर में गिर पडा ,

मेरे बाजू में निशा जो अब फिर से अपने कपड़े उतार चुकी थी आकर लेट गई ,वही नेहा अब अपने कपड़े खोलकर मेरे ऊपर आ गई और मुझे धीरे धीरे चूमने लगी ,अब हम तीनो ही नंगे थे …

“इस दिन का मुझे ना जाने कब से इंतजार था “नेहा की मदभरी आवाज मेरे कानो में पहुची लेकिन अब मैं नशे में नही था ना ही मेरे अंदर उत्तेजना ही थी ,

वो मेरे शरीर को सहलाने लगी मेरा लिंग फिर से अकड़ने लगा नेहा ने पास रखे उस क्रीम को देखा ,

“तुमने इसका प्रयोग नही किया “

“जरूरत ही नही पड़ी “

उसके चहरे में कातिलाना मुस्कान आ गई

“थैंक्स नेहा “मैं धीरे से उससे कहा

“मेरी तरफ से भी “निशा भी बोल पड़ी और मेरे सीने में एक किस कर दिया

“मुझे जिंदगी का सुख देने के लिए ,लेकिन उस भांग में था क्या “निशा ने फिर से कहा

“कुछ भी नही ,जो भी था तुम दोनो के अंदर ही था,तुम दोनो की समाज के बंधन में ऐसे बंधे थे की तुम्हे अपने शरीर की भूख दिखाई नही देती थी ,इसलिए तुम दोनो इस उम्र में भी वर्जिन हो ,मैंने तो बस इतना ही किया की उस बंधन को तोड़ने में मदद कर दी ,बाकी तो सब कुछ तुम लोगो ने ही कर दिया “

वो रहस्य से भरी हुई मुस्कुराई ,

“लेकिन अगर तुमने ये नही कहा होता की निशा भी ये चाहती है तो शायद मैं कभी ये नही कर पाता ,निशा को समझने के लिए थैंक्स “

अब निशा मुझे आश्चर्य से देखने लगी

“मैंने ऐसा कब कहा था,ये तो इसने ही मुझे कहा था की अगर नितिन से नही होता तो दूसरा ढूंढ ले और जब मैंने मना किया तो ये आपका नाम लेने लगी लेकिन मैं जब इसपर गुस्सा हो गई तो इसने वो सब कहना छोड़ दिया “

मेरा तो दिमाग ही हिल गया ,

“लेकिन तू मुझसे इतना माफी क्यो मांग रही थी और तूने नेहा को तो पूछने भेजा था ना “

“वो तो मैं भांग पीने को लेकर पूछने को बोला था,मुझे लगा की आप इससे गुस्सा हो जाओगे …”निशा भी आश्चर्य में थी ,मेरा दिमाग गुस्से से पागल हो गया,मेरे चहरे में आये भाव देखकर नेहा मेरे ऊपर से हट गई थी,

“तेरी इतनी हिम्मत मादरचोद “मैं लगभग चीखा लेकिन मैं कुछ कह पता निशा ने मेरे होठो पर अपने होठ टिका कर जोरो से चूमने लगी …उसके आंखों से आंसू झर रहे थे ..

“भइया इसने जो किया वो अपनी मोहोब्बत को पाने और अपनी दोस्ती को निभाने के लिए किया ,वो हमे ऐसे दुख में नही देख पाई होगी ,और देखो आज हम कितने खुस है ,”

मैं निशा को देखने लगा ,उसके नाजुक होठ थोड़े सूजे हुए थे,बाल पूरी तरह से बिखरे हुए ,उसकी आंखों में वो आंसू भी मुझे किसी मोती की तरह लग रहा था ,गुलाबी होठो की पंखुड़ियां थोड़ा थोड़ा हिल रही थी,मैं फिर से उसे अपने पास खिंच कर उसके होठो को चूमने लगा इस बार मैं उसके ऊपर था हम दोनो की नजरे मिली और उसकी आंखों में देखते हुए ही मैंने अपना लिंग उसके अंदर डाल दिया ,उसके नाजुक होठ खुले और मैं उन्हें अपने होठो में भर लिया ,में बहुत ही धीरे धीरे से अपनी कमर हिला रहा था,लिंग इस बार भी उतना ही कड़ा था लेकिन उत्तेजना की जगह बस प्यार था,और वो प्यार शायद सिर्फ निशा के लिए ही नही बल्कि नेहा के लिए भी था,वो आकर अपने शरीर को मेरी पीठ पर ठिका दी मैं सर पलट कर उसे देखा और उसके सर को अपने निगाहों के पास लाया ,उसकी आंखों में भी आंसू थे मैं उसके होठो को चूसने लगा ,मेरी कमर हल्के हल्के से हिलते हुए मेरी बहन के अंदर मेरे लिंग को हल्के हल्के चला रही थी ,

“मुझे माफ कर दो “

नेहा की आंखों में अब भी आंसू थे,निशा ने अपने हाथो से उसके सर को पकड़ा और उसकी आंखों में देखने लगी ,

“नही नेहा तुम्हारा धन्यवाद की तुम्हारे कारण मेरे भाई ने मुझे इतनी बड़ी सौगात दी “

निशा का ये कहना था की हम तीनो ही प्यार की दरिया में डूब गए ………………

इसके बाद ये प्यार हमारे रोज का काम हो गया ,आज भी हम तीनो जब भी एक दूसरे से मिलते है प्यार और सेक्स का पूरा सुख उठाते है ,नेहा की शादी हमारे ही कालोनी के एक लड़के से हुई है ,जी है वो उसके साथ कम और मेरे साथ ज्यादा सोती है,अब नितिन पहले से थोड़ा अच्छा हो गया है ,इसके लिए उसने डॉ चुतिया से अपना ट्रीटमेंट कराया था,लेकिन निशा अब भी मेरे नीचे रहना ही पसंद करती है,इसलिए वो अब इसी शहर में रहने लगी है,मैंने दोनो को सौगात और हमारे प्यार की निशानी के रूप में अपने वीर्य से भरा था जिसका परिणाम अब दो हट्टे कट्टे बच्चे है,मेरी भी शादी होने को है और मुझे यकीन है की नेहा और निशा मिलकर कोई ऐसा तिकड़म करेंगी की मेरी बीवी भी हमारे साथ हो जाय ……

############ समाप्त ##########

 
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