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बहन भाई की मस्तियाँ
मेरा नाम नफीस है और मैं 21 साल का एक युवक हूँ, मेरी बाजी का नाम जमीला है। उसकी उमर क़रीब 25 साल है। बाजी मुझसे 4 साल बड़ी हैं। हम लोग एक मिडल-कलास फ़ैमिली है और एक छोटे से फ्लैट में मुंबई में रहते हैं।
हमारा घर में एक छोटा सा हाल, डायनिंग रूम दो बेडरूम और एक किचन है। बाथरूम एक ही था और उसको सभी लोग इस्तेमाल करते थे। हमारे पिताजी और अम्मी दोनों नौकरी करते हैं।
बाजी मुझको नफीस कह कर पुकारती हैं और मैं उनको बाजी कह कर पुकारता हूँ।
शुरू शुरू में मुझे सेक्स के बारे कुछ नहीं मालूम था क्योंकि मैं हाई स्कूल में पढ़ता था और हमारे बिल्डिंग में भी अच्छी मेरे उमर की कोई लड़की नहीं थी। इसलिए मैंने अभी तक सेक्स का मज़ा नहीं लिया था और ना ही मैंने अब तक कोई नंगी लड़की देखी थी। हाँ मैं कभी कभी पॉर्न मैगजीन में नंगी तस्वीर देख लिया करता था।
जब मुझे लड़कियों के तरफ़ और सेक्स के लिए इंटेरेस्ट होना शुरू हुआ। मेरे नज़रों के आसपास अगर कोई लड़की थी तो वो जमीला बाजी ही थी। बाजी की लंबाई क़रीब क़रीब मेरे तरह ही थी, उनका रंग बहुत गोरा था और उनका चेहरा और बोडी स्ट्रक्चर हिंदी सिनेमा के जीनत अमान जैसा था। हाँ उनकी चूचियाँ जीनत अमान जैसे बड़ी बड़ी नहीं थी।
मुझे अभी तक याद है कि मैंने अपना पहला मुठ मेरी बाजी के लिए ही मारा था। एक सन्डे सुबह सुबह जैसे ही मेरी बाजी बाथरूम से निकली मैं बाथरूम में घुस गया। मैंने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और अपने कपड़े खोलने शुरू किए। मुझे जोरो की पेशाब लगी थी। पेशाब करने के बाद मैं अपने लंड से खेलने लगा।
एकाएक मेरी नज़र बाथरूम के किनारे बाजी के उतरे हुए कपड़ों पर पड़ी। वहाँ पर बाजी अपनी नाइटगाऊन उतार कर छोड़ गई थी। जैसे ही मैंने बाजी का नाइटगाऊन उठाया तो देखा कि नाइटगाऊन के नीचे बाजी की ब्रा पड़ी थी।
जैसे ही मैंने बाजी की काले रंग की ब्रा उठाई तो मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा। मैंने बाजी का नाइटगाऊन उठाया तो उसमें से बाजी के नीले रंग का पैंटी भी नीचे गिर गई। मैंने पैंटी भी उठा ली। अब मेरे एक हाथ में बाजी की पैंटी थी और दूसरे हाथ में बाजी की ब्रा थी।
ओह भगवान ! बाजी के अन्दर वाले कपड़े चूमने से ही कितना मज़ा आ रहा है यह वही ब्रा है जिसमें कुछ देर पहले बाजी की चूचियाँ जकड़ी हुई और यह वही पैंटी हैं जो कुछ देर पहले तक बाजी की फुद्दि से लिपटी थी। यह सोच सोच करके मैं हैरान हो रहा था और अंदर ही अंदर गरमा रहा था। मैं सोच नहीं पा रहा था कि मैं बाजी की ब्रा और पैंटी को लेकर क्या करूँ।
मैंने बाजी की ब्रा और पैँटी को लेकर हर तरफ़ से छुआ, सूंघा, चाटा और पता नहीं क्या क्या किया। मैंने उन कपड़ों को अपने लंड पर मला, ब्रा को अपने छाती पर रखा। मैं अपने खड़े लंड के ऊपर बाजी की पैंटी को पहना और वो लंड के ऊपर तना हुआ था। फिर बाद में मैं बाजी की नाइटगाऊन को बाथरूम के दीवार के पास एक हैंगर पर टांग दिया। फिर कपड़े टांगने वाला पिन लेकर ब्रा को नाइटगाऊन के ऊपरी भाग में फँसा दिया और पैँटी को नाइटगाऊन के कमर के पास फँसा दिया।
अब ऐसा लग रहा था की बाजी बाथरूम में दीवार के सहारे ख़ड़ी हैं और मुझे अपनी ब्रा और पैँटी दिखा रही हैं। मैं झट जाकर बाजी के नाइटगाऊन से चिपक गया और उनकी ब्रा को चूसने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि मैं बाजी की चुची चूस रहा हूँ। मैं अपना लंड को बाजी की पैँटी पर रगड़ने लगा और सोचने लगा कि मैं बाजी को चोद रहा हूँ।
मैं इतना गरम हो गया था कि मेरा लंड फूल कर पूरा का पूरा टनटना गया था और थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और मैं झड़ गया। मेरे लंड ने पहली बार अपना पानी छोड़ा था और मेरे पानी से बाजी की पैंटी और नाइटगाऊन भीग गया था। मुझे पता नहीं कि मेरे लंड ने कितना वीर्य निकाला था लेकिन जो कुछ निकला था वो मेरे बाजी के नाम पर निकला था।
मेरा पहले पहले बार झड़ना इतना तेज़ था कि मेरे पैर जवाब दे गए, मैं पैरों पर ख़ड़ा नहीं हो पा रहा था और मैं चुपचाप बाथरूम के फ़र्श पर बैठ गया। थोड़ी देर के बाद मुझे होश आया तो मैं उठ कर नहाने लगा। शोवर के नीचे नहा कर मुझे कुछ ताज़गी महसूस हुई और मैं फ़्रेश हो गया। नहाने बाद मैं दीवार से बाजी की नाइटगाऊन, ब्रा और पैंटी उतारा और उसमें से अपना वीर्य धोकर साफ़ किया और नीचे रख दिया।
उस दिन के बाद से मेरा यह मुठ मारने का तरीक़ा मेरा सबसे फ़ेवरेट हो गया। हाँ, मुझे इस तरह से मैं मारने का मौक़ा सिर्फ़ इतवार को ही मिलता था क्योंकि इतवार के दिन ही मैं बाजी के नहाने के बाद नहाता था। इतवार के दिन चुपचाप अपने बिस्तर पर पड़ा देखा करता था कि कब बाजी बाथरूम में घुसे और बाजी के बाथरूम में घुसते ही मैं उठ जाया करता था और जब बाजी बाथरूम से निकलती तो मैं बाथरूम में घुस जाया करता था।
मेरे अम्मी और पिताजी सुबह सुबह उठ जाया करते थे और जब मैं उठता था तो अम्मी रसोई के नाश्ता बनाती होती और पिताजी बाहर बाल्कोनी में बैठ कर अख़बार पढ़ते होते या बाज़ार गये होते कुछ ना कुछ समान ख़रीदने।
इतवार को छोड़ कर मैं जब भी मैं मारता तो तब यही सोचता कि मैं अपना लंड बाजी की रस भरी फुद्दि में पेल रहा हूँ। शुरू शुरू में मैं यह सोचता था कि बाजी जब नंगी होंगी तो कैसा दिखेंगी? फिर मैं यह सोचने लगा कि बाजी की फुद्दि चोदने में कैसा लगेगा। मैं कभी कभी सपने ने बाजी को नंगी करके चोदता था और जब मेरी आँख खुलती तो मेरा शॉर्ट भीगा हुआ होता था।
मैंने कभी भी अपना सोच और अपना सपने के बारे में किसी को भी नहीं बताया था और न ही बाजी को भी इसके बारे में जानने दिया.
मैं अपनी स्कूल की पढाई ख़त्म करके कालेज जाने लगा। कॉलेज में मेरी कुछ गर्ल फ़रेंड भी हो गई। उन गर्ल फ़रेंड में से मैंने दो चार के साथ सेक्स का मज़ा भी लिया। मैं जब कोई गर्ल फ़रेंड के साथ चुदाई करता तो मैं उसको अपने बाजी के साथ कम्पेयर करता और मुझे कोई भी गर्ल फ़रेंड बाजी के बराबर नहीं लगती।
मैं बार बार यह कोशिश करता था मेरा दिमाग़ बाजी पर से हट जाए, लेकिन मेरा दिमाग़ घूम फिर कर बाजी पर ही आ जाता। मैं हमेशा 24 घंटे बाजी के बारे में और उसको चोदने के बारे में ही सोचता रहता।
मैं जब भी घर पर होता तो बाजी तो ही देखता रहता, लेकिन इसकी जानकारी बाजी की नहीं थी। बाजी जब भी अपने कपड़े बदलती थी या अम्मी के साथ घर के काम में हाथ बटाती थी तो मैं चुपके चुपके उन्हे देखा करता था और कभी कभी मुझे सुडोल चुची देखने को मिल जाती (ब्लाउज़ के ऊपर से) थी।
बाजी के साथ अपने छोटे से घर में रहने से मुझे कभी कभी बहुत फ़ायदा हुआ करता था। कभी मेरा हाथ उनके शरीर से टकरा जाता था। मैं बाजी के दो भरे भरे चुची और गोल गोल फुद्दिड़ों को छूने के लिए मरा जा रहा था.
मेरा सबसे अच्छा पास टाइम था अपने बालकोनी में खड़े हो कर सड़क पर देखना और जब बाजी पास होती तो धीरे धीरे उनकी चुचियों को छूना। हमारे घर की बाल्कोनी कुछ ऐसी थी की उसकी लम्बाई घर के सामने गली के बराबर में था और उसकी संकरी सी चौड़ाई के सहारे खड़े हो कर हम सड़क देख सकते थे। मैं जब भी बालकोनी पर खड़े होकर सड़क को देखता तो अपने हाथों को अपने सीने पर मोड़ कर बालकोनी की रेल्लिंग के सहारे ख़ड़ा रहता था।
कभी कभी बाजी आती तो मैं थोड़ा हट कर बाजी के लिए जगह बना देता और बाजी आकर अपने बगल ख़ड़ी हो जाती। मैं ऐसे घूम कर ख़ड़ा होता की बाजी को बिलकुल सट कर खड़ा होना पड़ता। बाजी की भारी भारी चुन्ची मेरे सीने से सट जाता था। मेरे हाथों की उंगलियाँ, जो की बाल्कोनी के रेल्लिंग के सहारे रहती वे बाजी के चूचियों से छु जाती थी।
मैं अपने उंगलियों को धीरे धीरे बाजी की चूचियों पर हल्के हल्के चलत था और बाजी को यह बात नहीं मालूम था। मैं उँगलियों से बाजी की चुन्ची को छू कर देखा की उनकी चूची कितना नरम और मुआयम है लेकिन फिर भी तनी तनी रहा करती हैं कभी कभी मैं बाजी के फुद्दिड़ों को भी धीरे धीरे अपने हाथों से छूता था। मैं हमेशा ही बाजी की सेक्सी शरीर को इसी तरह से छू्ता था.
मैं समझता था की बाजी मेरे हाक्तों और मेरे इरादो से अनजान हैं बाजी इस बात का पता भी नहीं था की उनका छोटा भाई उनके नंगे शरीर को चाहता है और उनकी नंगी शरीर से खेलना चाहता है लेकिन मैं ग़लत था। फिर एक बाजी ने मुझे पकड़ लिया।
उस दिन बाजी किचन में जा कर अपने कपरे बदल रही थी। हाल और किचन के बीच का पर्दा थोड़ा खुला हुआ था। बाजी दूसरी तरफ़ देख रही थी और अपनी कुर्ता उतार रही थी और उसकी ब्रा में छुपा हुआ चुची मेरे नज़रों के सामने था। फ़िर रोज़ के तरह मैं टी वी देख रहा था और बाजी को भी कंखिओं से देख रहा था।
बाजी ने तब एकाएक सामने वाले दीवार पर टंगा शीशे को देखा और मुझे आँखे फ़िरा फ़िरा कर घूरते हुए पाया। बाजी ने देखा की मैं उनकी चूचियों को घूर रहा हूँ। फिर एकाएक मेरे और बाजी की आँखे मिरर में टकरा गयी मैं शर्मा गया और अपने आँखे टी वी तरफ़ कर लिया।
मेरा दिल क्या धड़क रहा था। मैं समझ गया की बाजी जान गयी हैं की मैं उनकी चूचियों को घूर रहा था। अब बाजी क्या करेंगी? क्या बाजी अम्मी और पिताजी को बता देंगी? क्या बाजी मुझसे नाराज़ होंगी? इसी तरह से हज़ारों प्रश्ना मेरे दिमाग़ में घूम रहा था। मैं बाजी के तरफ़ फिर से देखने का साहस जुटा नहीं पाया।
उस दिन सारा दिन और उसके बाद 2-3 दीनो तक मैं बाजी से दूर रहा, उनके तरफ़ नहीं देखा। इन 2-3 दीनो में कुछ नहीं हुआ। मैं ख़ुश हो गया और बाजी को फिर से घुरना चालू कर दिया। बाजी में मुझे 2-3 बार फिर घुरते हुए पकड़ लिया, लेकिन फिर भी कुछ नहीं बोली। मैं समझ गया की बाजी को मालूम हो चुका है मैं क्या चाहता हूँ ।
ख़ैर जब तक बाजी को कोई एतराज़ नहीं तो मुझे क्या लेना देना और मैं मज़े से बाजी को घुरने लगा.
एक दिन मैं और बाजी अपने घर के बालकोनी में पहले जैसे खड़े थे। बाजी मेरे हाथों से सट कर ख़ड़ी थी और मैं अपने उँगलियों को बाजी के चूची पर हल्के हल्के चला रहा था।
मुझे लगा की बाजी को शायद यह बात नहीं मालूम की मैं उनकी चूचियों पर अपनी उँगलियों को चला रहा हूँ। मुझे इस लिए लगा क्योंकी बाजी मुझसे फिर भी सट कर ख़ड़ी थी। लेकिन मैं यह तो समझ रहा थी क्योंकी बाजी ने पहले भी नहीं टोका था, तो अब भी कुछ नहीं बोलेंगी और मैं आराम से बाजी की चूचियों को छू सकता हूँ.
हमलोग अपने बालकोनी में खड़े थे और आपस में बातें कर रहे थे, हमलोग कालेज और स्पोर्ट्स के बारे में बाते कर रहे थे। हमारा बालकोनी के सामने एक गली था तो हमलोगों की बालकोनी में कुछ अंधेरा था.
बाते करते करते बाजी मेरे उँगलियों को, जो उनकी चूची पर घूम रहा था, अपने हाथों से पकड़कर अपने चूची से हटा दिया। बाजी को अपने चूची पर मेरे उंगली का एहसास हो गया था और वो थोड़ी देर के लिए बात करना बंद कर दिया और उनकी शरीर कुछ अकड़ गयी लेकिन, बाजी अपने जगह से हिली नहीं और मेरे हाथो से सट कर खड़ी रही।
बाजी ने मुझे से कुछ नहीं बोली तो मेरा हिम्मत बढ गया और मैं अपना पूरा का पूरा पंजा बाजी की एक मुलायम और गोल गोल चूची पर रख दिया।
मैं बहुत डर रहा था। पता नहीं बाजी क्या बोलेंगी? मेरा पूरा का पूरा शरीर कांप रहा था। लेकिन बाजी कुछ नहीं बोली। बाजी सिर्फ़ एक बार मुझे देखी और फिर सड़क पर देखने लगी। मैं भी बाजी की तरफ़ डर के मारे नहीं देख रहा था। मैं भी सड़क पर देख रहा था और अपना हाथ से बाजी की एक चूची को धीरे धीरे सहला रहा था। मैं पहले धीरे धीरे बाजी की एक चूची को सहला रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद बाजी की एक मुलायम गोल गोल, नरम लेकिन तनी चूची को अपने हाथ से ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा। बाजी की चूची काफ़ी बड़ी थे और मेरे पंजे में नहीं समा रही थी।
थोड़ी देर बाद मुझे बाजी की कुर्ता और ब्रा के उपर से लगा की चूची के निपपले तन गयी और मैं समझ गया की मेरे चूची मसलने से बाजी गरमा गयी हैं बाजी की कुर्ता और ब्रा के कपड़े बहुत ही महीन और मुलायम थी और उनके ऊपेर से मुझे बाजी की निपपले तनने के बाद बाजी की चूची छूने से मुझे जैसे स्वर्ग मिल गया था।
किसी जवान लड़की के चूची छूने का मेरा यह पहला अवसर था। मुझे पता ही नहीं चला की मैं कब तक बाजी की चूचियों को मसलता रहा। और बाजी ने भी मुझे एक बार के लिए मना नहीं किया। बाजी चुपचाप ख़ड़ी हो कर मुझसे अपना चूची मसलवाती रही।
बाजी की चूची मसलते मसलते मेरा लंड धीरे धीरे ख़ड़ा होने लगा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन एकाएक अम्मी की आवाज़ सुनाई दी। अम्मी की आवाज़ सुनते ही बाजी ने धीरे से मेरा हाथ अपने चूची से हटा दिया और अम्मी के पास चली गयी उस रात मैं सो नहीं पाया, मैं सारी रात बाजी की मुलायम मुलायम चूची के बारे में सोचता रहा.
मेरा नाम नफीस है और मैं 21 साल का एक युवक हूँ, मेरी बाजी का नाम जमीला है। उसकी उमर क़रीब 25 साल है। बाजी मुझसे 4 साल बड़ी हैं। हम लोग एक मिडल-कलास फ़ैमिली है और एक छोटे से फ्लैट में मुंबई में रहते हैं।
हमारा घर में एक छोटा सा हाल, डायनिंग रूम दो बेडरूम और एक किचन है। बाथरूम एक ही था और उसको सभी लोग इस्तेमाल करते थे। हमारे पिताजी और अम्मी दोनों नौकरी करते हैं।
बाजी मुझको नफीस कह कर पुकारती हैं और मैं उनको बाजी कह कर पुकारता हूँ।
शुरू शुरू में मुझे सेक्स के बारे कुछ नहीं मालूम था क्योंकि मैं हाई स्कूल में पढ़ता था और हमारे बिल्डिंग में भी अच्छी मेरे उमर की कोई लड़की नहीं थी। इसलिए मैंने अभी तक सेक्स का मज़ा नहीं लिया था और ना ही मैंने अब तक कोई नंगी लड़की देखी थी। हाँ मैं कभी कभी पॉर्न मैगजीन में नंगी तस्वीर देख लिया करता था।
जब मुझे लड़कियों के तरफ़ और सेक्स के लिए इंटेरेस्ट होना शुरू हुआ। मेरे नज़रों के आसपास अगर कोई लड़की थी तो वो जमीला बाजी ही थी। बाजी की लंबाई क़रीब क़रीब मेरे तरह ही थी, उनका रंग बहुत गोरा था और उनका चेहरा और बोडी स्ट्रक्चर हिंदी सिनेमा के जीनत अमान जैसा था। हाँ उनकी चूचियाँ जीनत अमान जैसे बड़ी बड़ी नहीं थी।
मुझे अभी तक याद है कि मैंने अपना पहला मुठ मेरी बाजी के लिए ही मारा था। एक सन्डे सुबह सुबह जैसे ही मेरी बाजी बाथरूम से निकली मैं बाथरूम में घुस गया। मैंने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और अपने कपड़े खोलने शुरू किए। मुझे जोरो की पेशाब लगी थी। पेशाब करने के बाद मैं अपने लंड से खेलने लगा।
एकाएक मेरी नज़र बाथरूम के किनारे बाजी के उतरे हुए कपड़ों पर पड़ी। वहाँ पर बाजी अपनी नाइटगाऊन उतार कर छोड़ गई थी। जैसे ही मैंने बाजी का नाइटगाऊन उठाया तो देखा कि नाइटगाऊन के नीचे बाजी की ब्रा पड़ी थी।
जैसे ही मैंने बाजी की काले रंग की ब्रा उठाई तो मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा। मैंने बाजी का नाइटगाऊन उठाया तो उसमें से बाजी के नीले रंग का पैंटी भी नीचे गिर गई। मैंने पैंटी भी उठा ली। अब मेरे एक हाथ में बाजी की पैंटी थी और दूसरे हाथ में बाजी की ब्रा थी।
ओह भगवान ! बाजी के अन्दर वाले कपड़े चूमने से ही कितना मज़ा आ रहा है यह वही ब्रा है जिसमें कुछ देर पहले बाजी की चूचियाँ जकड़ी हुई और यह वही पैंटी हैं जो कुछ देर पहले तक बाजी की फुद्दि से लिपटी थी। यह सोच सोच करके मैं हैरान हो रहा था और अंदर ही अंदर गरमा रहा था। मैं सोच नहीं पा रहा था कि मैं बाजी की ब्रा और पैंटी को लेकर क्या करूँ।
मैंने बाजी की ब्रा और पैँटी को लेकर हर तरफ़ से छुआ, सूंघा, चाटा और पता नहीं क्या क्या किया। मैंने उन कपड़ों को अपने लंड पर मला, ब्रा को अपने छाती पर रखा। मैं अपने खड़े लंड के ऊपर बाजी की पैंटी को पहना और वो लंड के ऊपर तना हुआ था। फिर बाद में मैं बाजी की नाइटगाऊन को बाथरूम के दीवार के पास एक हैंगर पर टांग दिया। फिर कपड़े टांगने वाला पिन लेकर ब्रा को नाइटगाऊन के ऊपरी भाग में फँसा दिया और पैँटी को नाइटगाऊन के कमर के पास फँसा दिया।
अब ऐसा लग रहा था की बाजी बाथरूम में दीवार के सहारे ख़ड़ी हैं और मुझे अपनी ब्रा और पैँटी दिखा रही हैं। मैं झट जाकर बाजी के नाइटगाऊन से चिपक गया और उनकी ब्रा को चूसने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि मैं बाजी की चुची चूस रहा हूँ। मैं अपना लंड को बाजी की पैँटी पर रगड़ने लगा और सोचने लगा कि मैं बाजी को चोद रहा हूँ।
मैं इतना गरम हो गया था कि मेरा लंड फूल कर पूरा का पूरा टनटना गया था और थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और मैं झड़ गया। मेरे लंड ने पहली बार अपना पानी छोड़ा था और मेरे पानी से बाजी की पैंटी और नाइटगाऊन भीग गया था। मुझे पता नहीं कि मेरे लंड ने कितना वीर्य निकाला था लेकिन जो कुछ निकला था वो मेरे बाजी के नाम पर निकला था।
मेरा पहले पहले बार झड़ना इतना तेज़ था कि मेरे पैर जवाब दे गए, मैं पैरों पर ख़ड़ा नहीं हो पा रहा था और मैं चुपचाप बाथरूम के फ़र्श पर बैठ गया। थोड़ी देर के बाद मुझे होश आया तो मैं उठ कर नहाने लगा। शोवर के नीचे नहा कर मुझे कुछ ताज़गी महसूस हुई और मैं फ़्रेश हो गया। नहाने बाद मैं दीवार से बाजी की नाइटगाऊन, ब्रा और पैंटी उतारा और उसमें से अपना वीर्य धोकर साफ़ किया और नीचे रख दिया।
उस दिन के बाद से मेरा यह मुठ मारने का तरीक़ा मेरा सबसे फ़ेवरेट हो गया। हाँ, मुझे इस तरह से मैं मारने का मौक़ा सिर्फ़ इतवार को ही मिलता था क्योंकि इतवार के दिन ही मैं बाजी के नहाने के बाद नहाता था। इतवार के दिन चुपचाप अपने बिस्तर पर पड़ा देखा करता था कि कब बाजी बाथरूम में घुसे और बाजी के बाथरूम में घुसते ही मैं उठ जाया करता था और जब बाजी बाथरूम से निकलती तो मैं बाथरूम में घुस जाया करता था।
मेरे अम्मी और पिताजी सुबह सुबह उठ जाया करते थे और जब मैं उठता था तो अम्मी रसोई के नाश्ता बनाती होती और पिताजी बाहर बाल्कोनी में बैठ कर अख़बार पढ़ते होते या बाज़ार गये होते कुछ ना कुछ समान ख़रीदने।
इतवार को छोड़ कर मैं जब भी मैं मारता तो तब यही सोचता कि मैं अपना लंड बाजी की रस भरी फुद्दि में पेल रहा हूँ। शुरू शुरू में मैं यह सोचता था कि बाजी जब नंगी होंगी तो कैसा दिखेंगी? फिर मैं यह सोचने लगा कि बाजी की फुद्दि चोदने में कैसा लगेगा। मैं कभी कभी सपने ने बाजी को नंगी करके चोदता था और जब मेरी आँख खुलती तो मेरा शॉर्ट भीगा हुआ होता था।
मैंने कभी भी अपना सोच और अपना सपने के बारे में किसी को भी नहीं बताया था और न ही बाजी को भी इसके बारे में जानने दिया.
मैं अपनी स्कूल की पढाई ख़त्म करके कालेज जाने लगा। कॉलेज में मेरी कुछ गर्ल फ़रेंड भी हो गई। उन गर्ल फ़रेंड में से मैंने दो चार के साथ सेक्स का मज़ा भी लिया। मैं जब कोई गर्ल फ़रेंड के साथ चुदाई करता तो मैं उसको अपने बाजी के साथ कम्पेयर करता और मुझे कोई भी गर्ल फ़रेंड बाजी के बराबर नहीं लगती।
मैं बार बार यह कोशिश करता था मेरा दिमाग़ बाजी पर से हट जाए, लेकिन मेरा दिमाग़ घूम फिर कर बाजी पर ही आ जाता। मैं हमेशा 24 घंटे बाजी के बारे में और उसको चोदने के बारे में ही सोचता रहता।
मैं जब भी घर पर होता तो बाजी तो ही देखता रहता, लेकिन इसकी जानकारी बाजी की नहीं थी। बाजी जब भी अपने कपड़े बदलती थी या अम्मी के साथ घर के काम में हाथ बटाती थी तो मैं चुपके चुपके उन्हे देखा करता था और कभी कभी मुझे सुडोल चुची देखने को मिल जाती (ब्लाउज़ के ऊपर से) थी।
बाजी के साथ अपने छोटे से घर में रहने से मुझे कभी कभी बहुत फ़ायदा हुआ करता था। कभी मेरा हाथ उनके शरीर से टकरा जाता था। मैं बाजी के दो भरे भरे चुची और गोल गोल फुद्दिड़ों को छूने के लिए मरा जा रहा था.
मेरा सबसे अच्छा पास टाइम था अपने बालकोनी में खड़े हो कर सड़क पर देखना और जब बाजी पास होती तो धीरे धीरे उनकी चुचियों को छूना। हमारे घर की बाल्कोनी कुछ ऐसी थी की उसकी लम्बाई घर के सामने गली के बराबर में था और उसकी संकरी सी चौड़ाई के सहारे खड़े हो कर हम सड़क देख सकते थे। मैं जब भी बालकोनी पर खड़े होकर सड़क को देखता तो अपने हाथों को अपने सीने पर मोड़ कर बालकोनी की रेल्लिंग के सहारे ख़ड़ा रहता था।
कभी कभी बाजी आती तो मैं थोड़ा हट कर बाजी के लिए जगह बना देता और बाजी आकर अपने बगल ख़ड़ी हो जाती। मैं ऐसे घूम कर ख़ड़ा होता की बाजी को बिलकुल सट कर खड़ा होना पड़ता। बाजी की भारी भारी चुन्ची मेरे सीने से सट जाता था। मेरे हाथों की उंगलियाँ, जो की बाल्कोनी के रेल्लिंग के सहारे रहती वे बाजी के चूचियों से छु जाती थी।
मैं अपने उंगलियों को धीरे धीरे बाजी की चूचियों पर हल्के हल्के चलत था और बाजी को यह बात नहीं मालूम था। मैं उँगलियों से बाजी की चुन्ची को छू कर देखा की उनकी चूची कितना नरम और मुआयम है लेकिन फिर भी तनी तनी रहा करती हैं कभी कभी मैं बाजी के फुद्दिड़ों को भी धीरे धीरे अपने हाथों से छूता था। मैं हमेशा ही बाजी की सेक्सी शरीर को इसी तरह से छू्ता था.
मैं समझता था की बाजी मेरे हाक्तों और मेरे इरादो से अनजान हैं बाजी इस बात का पता भी नहीं था की उनका छोटा भाई उनके नंगे शरीर को चाहता है और उनकी नंगी शरीर से खेलना चाहता है लेकिन मैं ग़लत था। फिर एक बाजी ने मुझे पकड़ लिया।
उस दिन बाजी किचन में जा कर अपने कपरे बदल रही थी। हाल और किचन के बीच का पर्दा थोड़ा खुला हुआ था। बाजी दूसरी तरफ़ देख रही थी और अपनी कुर्ता उतार रही थी और उसकी ब्रा में छुपा हुआ चुची मेरे नज़रों के सामने था। फ़िर रोज़ के तरह मैं टी वी देख रहा था और बाजी को भी कंखिओं से देख रहा था।
बाजी ने तब एकाएक सामने वाले दीवार पर टंगा शीशे को देखा और मुझे आँखे फ़िरा फ़िरा कर घूरते हुए पाया। बाजी ने देखा की मैं उनकी चूचियों को घूर रहा हूँ। फिर एकाएक मेरे और बाजी की आँखे मिरर में टकरा गयी मैं शर्मा गया और अपने आँखे टी वी तरफ़ कर लिया।
मेरा दिल क्या धड़क रहा था। मैं समझ गया की बाजी जान गयी हैं की मैं उनकी चूचियों को घूर रहा था। अब बाजी क्या करेंगी? क्या बाजी अम्मी और पिताजी को बता देंगी? क्या बाजी मुझसे नाराज़ होंगी? इसी तरह से हज़ारों प्रश्ना मेरे दिमाग़ में घूम रहा था। मैं बाजी के तरफ़ फिर से देखने का साहस जुटा नहीं पाया।
उस दिन सारा दिन और उसके बाद 2-3 दीनो तक मैं बाजी से दूर रहा, उनके तरफ़ नहीं देखा। इन 2-3 दीनो में कुछ नहीं हुआ। मैं ख़ुश हो गया और बाजी को फिर से घुरना चालू कर दिया। बाजी में मुझे 2-3 बार फिर घुरते हुए पकड़ लिया, लेकिन फिर भी कुछ नहीं बोली। मैं समझ गया की बाजी को मालूम हो चुका है मैं क्या चाहता हूँ ।
ख़ैर जब तक बाजी को कोई एतराज़ नहीं तो मुझे क्या लेना देना और मैं मज़े से बाजी को घुरने लगा.
एक दिन मैं और बाजी अपने घर के बालकोनी में पहले जैसे खड़े थे। बाजी मेरे हाथों से सट कर ख़ड़ी थी और मैं अपने उँगलियों को बाजी के चूची पर हल्के हल्के चला रहा था।
मुझे लगा की बाजी को शायद यह बात नहीं मालूम की मैं उनकी चूचियों पर अपनी उँगलियों को चला रहा हूँ। मुझे इस लिए लगा क्योंकी बाजी मुझसे फिर भी सट कर ख़ड़ी थी। लेकिन मैं यह तो समझ रहा थी क्योंकी बाजी ने पहले भी नहीं टोका था, तो अब भी कुछ नहीं बोलेंगी और मैं आराम से बाजी की चूचियों को छू सकता हूँ.
हमलोग अपने बालकोनी में खड़े थे और आपस में बातें कर रहे थे, हमलोग कालेज और स्पोर्ट्स के बारे में बाते कर रहे थे। हमारा बालकोनी के सामने एक गली था तो हमलोगों की बालकोनी में कुछ अंधेरा था.
बाते करते करते बाजी मेरे उँगलियों को, जो उनकी चूची पर घूम रहा था, अपने हाथों से पकड़कर अपने चूची से हटा दिया। बाजी को अपने चूची पर मेरे उंगली का एहसास हो गया था और वो थोड़ी देर के लिए बात करना बंद कर दिया और उनकी शरीर कुछ अकड़ गयी लेकिन, बाजी अपने जगह से हिली नहीं और मेरे हाथो से सट कर खड़ी रही।
बाजी ने मुझे से कुछ नहीं बोली तो मेरा हिम्मत बढ गया और मैं अपना पूरा का पूरा पंजा बाजी की एक मुलायम और गोल गोल चूची पर रख दिया।
मैं बहुत डर रहा था। पता नहीं बाजी क्या बोलेंगी? मेरा पूरा का पूरा शरीर कांप रहा था। लेकिन बाजी कुछ नहीं बोली। बाजी सिर्फ़ एक बार मुझे देखी और फिर सड़क पर देखने लगी। मैं भी बाजी की तरफ़ डर के मारे नहीं देख रहा था। मैं भी सड़क पर देख रहा था और अपना हाथ से बाजी की एक चूची को धीरे धीरे सहला रहा था। मैं पहले धीरे धीरे बाजी की एक चूची को सहला रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद बाजी की एक मुलायम गोल गोल, नरम लेकिन तनी चूची को अपने हाथ से ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा। बाजी की चूची काफ़ी बड़ी थे और मेरे पंजे में नहीं समा रही थी।
थोड़ी देर बाद मुझे बाजी की कुर्ता और ब्रा के उपर से लगा की चूची के निपपले तन गयी और मैं समझ गया की मेरे चूची मसलने से बाजी गरमा गयी हैं बाजी की कुर्ता और ब्रा के कपड़े बहुत ही महीन और मुलायम थी और उनके ऊपेर से मुझे बाजी की निपपले तनने के बाद बाजी की चूची छूने से मुझे जैसे स्वर्ग मिल गया था।
किसी जवान लड़की के चूची छूने का मेरा यह पहला अवसर था। मुझे पता ही नहीं चला की मैं कब तक बाजी की चूचियों को मसलता रहा। और बाजी ने भी मुझे एक बार के लिए मना नहीं किया। बाजी चुपचाप ख़ड़ी हो कर मुझसे अपना चूची मसलवाती रही।
बाजी की चूची मसलते मसलते मेरा लंड धीरे धीरे ख़ड़ा होने लगा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन एकाएक अम्मी की आवाज़ सुनाई दी। अम्मी की आवाज़ सुनते ही बाजी ने धीरे से मेरा हाथ अपने चूची से हटा दिया और अम्मी के पास चली गयी उस रात मैं सो नहीं पाया, मैं सारी रात बाजी की मुलायम मुलायम चूची के बारे में सोचता रहा.