S
StoryPublisher
Guest
राजीव मुस्कुराया और बोला: ये तुमने क्या पहना हुआ है? आज तो दुल्हन दिख रही हो? अरे ये क्या तुमने तो वही सास की साड़ी पहन ली जो वो हमारे शादी के दिन पहनी थी।
मालिनी: आप सही पहचाने। ये वही साड़ी है। अब वो उठकर बोली: पापा किसी दिख रही हूँ मैं?
राजीव:उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटा क्या कहूँ? बिलकुल वैसी दिख रही हो जैसे तुम्हारी सास दिखी थी सालों पहले शादी के दिन।बल्कि उससे भी ज़्यादा प्यारी और सुंदर।
मालिनी: आज तो पापा आप भी कई क़त्ल कर दोगे अगर ऐसे बाहर गए तो। पता नहीं कितनी लड़कियाँ और अंटियाँ आप पर मर मिटेंगी। क्या लग रहे हो आप?
राजीव झेंप कर: अरे मुझे ही खींचने लगी अब तुम। वैसे इरादा क्या है तुम्हारा? ये दुल्हन का लिबास पहनकर कहाँ जाओगी? और मुझे भी कहाँ ले जाओगी?
वो हँसी: पापा आपको इतना तय्यार करके अगर मैं बाहर गयी तो पता नहीं आप जब वापस आएँगे तो पता नहीं कितनी लड़कियों के साथ आएँगे? ऐसा रिस्क मैं ले नहीं सकती। इस लिए अब हम कहीं बाहर नहीं जा रहे हैं । ठीक है? बस इस पूजा घर तक ही जाएँगे।
राजीव चौंक कर: पूजा घर ? वहाँ क्यों?
मालिनी: क्योंकि आज मैं आपसे गंधर्व विवाह करने वाली हूँ।
राजीव को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ, वो हैरानी से बोला: क्या कहा? ज़रा फिर से कहना।
वो मुस्कुराई : हाँ हम अभी गंधर्व विवाह करेंगे। आपकी इच्छा थी ना कि मैं आपकी भी पत्नी बनूँ, वो आज मैं पूरी करूँगी। इसी लिए तो मैंने आपसे शुभ समय का पूछा था। अब से लेकर १२ बजे तक अत्यंत शुभ समय है आपको कल पंडित ने बताया था ना। बस अब चलिए पूजा घर में , मैंने सब तय्यारियाँ कर रखी हैं।
राजीव ख़ुशी से झूम कर: वाह बहु तुमने तो एकदम से मुझे हैरत में ही डाल दिया। मुझे तो यक़ीन ही नहीं हो रहा है किमेरी क़िस्मत खुल गयी है ।
वह आगे बढ़ा और उसको बाहों में लेकर चूम लिया। वो उसको बोली: पापा अभी छोड़ो और पूजा घर चलो।
दोनों ने वॉश्बेसिन में हाथ धोए और पूजा घर में घुसे । अब मालिनी बोली: पापा हम इसका वीडीयो बनाते हैं। यादगार रहेगा। उसने अपने फ़ोन का वीडीयो रिकॉर्डिंग चालू की और वहाँ खिड़की पर रख दिया। फिर दोनों वहाँ पर बैठ गए। अब मालिनी ने एक पुस्तक निकाली और कुछ भजन पढ़ने लगी। राजीव मंत्र मुग्ध सा उसके चेहरे को देखता ही रह गया। अब मालिनी ने भगवान के आगे दिया जलाया। और आँख बंद करके प्रार्थना की। फिर वो खड़ी हुई और राजीव भी खड़ा हुआ। अब वो थाल का कपड़ा उठाई और उसमें से दो फूलों की माला निकाली। एक माला उसने राजीव को दी। अब वो ख़ुद राजीव के सामने खड़ी होकर उसके गले में माला डाली और अब राजीव भी उसके गले में माला डाला। अब उसने राजीव को सिंदूर की डिब्बी दी जिसमें से लाल सिंदूर निकालके वह उसकी माँग भरा और मालिनी झुककर उसके पैर छुई। राजीव ने उसे उठाकर अपने सीने से लगा लिया और उसका माथा चूम लिया। अब मालिनी बोली: पापा चलो हो गया। देखें विडीओ कैसा बना है।
अब दोनों बाहर आए और ड्रॉइंग रूम में बैठे तभी घंटी बजी और मालिनी ने रेस्तराँ से आए पैकेट को लेकर पैसा दिया।
राजीव अपने कमरे में गया और एक चाबियों का गुच्छा लेकर आया और उसने मालिनी की कमर में उसे खोंस कर बोला: बेटा अब ये चाबियाँ तुम ही सम्भालो। आज से ये घर तुम्हारा हुआ। और तुम इस घर की महारानी हो।
मालिनी मुस्कुराकर: पापा थैंक यू। मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी ईमानदारी से सम्भालूँगी। राजीव ने उसे चिपका कर उसे प्यार किया। फिर मालिनी बोली: पापा चलो छोले भटूरे खाते हैं। आपकी पसंद की रेस्तराँ से मँगाये है।
अब मालिनी ने टेबल में नाश्ता लगाया और एक थाली में सब लगाया। मालिनी: पापा अब एक ही थाली में खाएँ ना।
राजीव उसके गाल चूमकर: हाँ बेटा क्यों नहीं। अब तो हम दो बदन एक जान है । पर एक बात बता कि मैं अब तेरा पति भी हूँ और ससुर भी। तो क्या तुमको बेटी बोलूँ या नहीं?
मालिनी: पापा आप मुझे बेटी ही कहिए। वो क्या है ना सबके सामने जो बोलेंगे वही अकेले में भी बोलेंगे तो ठीक ही रहेगा।
राजीव खाते हुए बोला: चलो जैसा तुम चाहो। फिर दोनों खाना खाते हुए विडीओ देखने लगे।
दोनों खा कर उठे और अब मालिनी बोली: पापा क्या आप मेरे लिए वही पान ला देंगे जो कभी कभी खिलाते हो।
राजीव हैरानी से : पान खाना है वो भी अभी? ठीक है आज तो मैं तुम्हारी सभी शर्तें पूरी करूँगा। वो उठकर बाहर चला गया। क़रीब १० मिनट का पैदल रास्ता था। गली में थी पान की दुकान तो वो पैदल ही चला गया।
जब वो चला गया तो मालिनी ने राजीव के कमरे में जाकर बिस्तर पर नयी चादर बिछाई और फिर फूलों की पंखुड़ियाँ बिखेरीं ।दरवाज़े पर फूलों के हार सेलो टेप से चिपकायी। अब वो रूम में ख़ुशबू वाली स्प्रे भी करी। सब कुछ सुंदर बना दिया था उसने। अब वो वाशरूम गयी और फ़्रेश होकर अपनी बुर को साफ़ किया। अब उसने वहाँ भी एक ख़ुशबू वाला स्प्रे किया अब वो अपनी घूँघट नीचे करके बिस्तर पर दुल्हन बन कर बैठ गयी। अब वो अपने दूल्हे राजा का इंतज़ार कर रही थी। उसके निपल्ज़ कड़े हो गए थे और बुर गीली हो गयी थी।
तभी राजीव आया और अंदर आकर मालिनी को आवाज़ दिया। फिर वो उसके कमरे में गया और वहाँ उसको ना पाकर वो किचन में गया। अब वो सोचा कि कहाँ चली गयी? तभी मालिनी ने आवाज़ लगाई : पापा मैं यहाँ हूँ आपके कमरे में।
राजीव अपने कमरे की ओर बढ़ा और जैसे ही कमरे में पहुँचा वो ख़ुशी से झूम उठा। उफफफफ ये लड़की भी क्या क्या सोच लेती है? मस्त दुल्हन बनी बैठी है मेरे बिस्तर पर। आह्ह्ह्ह्ह उसका लौड़ा तनाव में आने लगा। अब वह बोला: बेटी पान लाया हूँ।
मालिनी ने हाथ बढ़ाकर कहा: लायिए मुझे खाना है।
राजीव ने उसके नाज़ुक हथेली पर पान रखा और वो उसे खाने लगी। घूँघट के अंदर से ही वो राजीव को देख रही थी जो अपना पान भी खाने लगा था।
राजीव: बेटी क्या सजावट की है तुमने ? मेरे जीवन की आज सबसे ख़ुशनुमा घड़ी है। सच में आज तुमने मुझे अपना ग़ुलाम बना लिया है।
अब राजीव ने आलमारी खोली और एक ज़ेवर का बॉक्स निकाला और लाकर बिस्तर पर रखा। अब वो वाश रूम गया और फ़्रेश होकर आया । उसने अपना लौड़ा अच्छी तरह से साफ़ किया और मालिनी के बग़ल में आकर बैठ गया।
अब वो मालिनी को बोला: बेटा घूँघट उठाऊँ क्या? या और कोई रस्म बाक़ी है।
मालिनी अपनी बुर के गीलेपन से परेशान ही थी सो बोली: आह पापा अब और कोई रस्म बाक़ी नहीं है ।
राजीव ने उसका घूँघट उठाया और उसके रूप का तेज़ देखकर वो मस्ती से भर गया। अब वो उसके हाथ में ज़ेवर का बॉक्स रखा और बोला: बेटा ये मेरी तरफ़ से तुम्हारी मुँह दिखाई का तोहफ़ा।
मालिनी मुस्कुरा कर उसको लेकर बोली: पापा थैंक यू।
अब राजीव बोला: बेटा अब और ना तड़पाने । आओ मेंरी बाँहों में आ जाओ। अब वो उसको खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। अब वो उसके गाल को चूमने लगा। मालिनी ने महसूस किया कि पापा का खूँटा उसके गाँड़ में चुभ रहा था। वो और भी मस्त हो गयी थी। अब राजीव उसके गरदन और होंठ चूसने लगा। अब राजीव ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। वो उसके बग़ल में लेटा और मालिनी को अपनी बाँह में भरकर चूमने लगा। मालिनी भी राजीव के बलिष्ठ शरीर से लिपट गयी।
राजीव: कितने दिनों के बाद आज मेरी तमन्ना पूरी होगी। उफ़्फ़ कितना तड़पाया है तुमने।
मालिनी: पापा मैंने नहीं तड़पाया है बल्कि आप ख़ुद ही तड़प रहे थे। मुझे तो कई बार शक होता है कि आप मुझे इस घर में अपने लिए लाए हो या शिवा के लिए?
राजीव हँसकर उसकी गाँड़ में एक चपत लगा कर बोला: वैसे ये सच है कि मेरा कमीना दिल तो तुम पर तभी से आया हुआ था जब मैं तुमको पहली बार शिवा के साथ देखने आया था। तुम चीज़ ही ऐसी मस्त हो जान। अब चलो ना ये भारी भरकम साड़ी उतारो और अपनी जवानी दिखाओ।
मालिनी हँसकर: आप ही उतारो ना। गरज तो आपकी है।
राजीव हँसकर : बिलकुल सही कहा। मैं ही तो मरा जा रहा हूँ तुम्हें चोदने को। यह कह कर उसने उसकी साड़ी की गाँठ कमर से खोली और एक ही झटके में साड़ी उसके बदन से अलग कर दी। अब वो मालिनी की रसीलि जवानी को ब्लाउस और पेटिकोट में देखकर मस्ती से भर गया। वो उसके ऊपर झुका और उसकी गरदन और कंधे को चूमने लगा। अब वो उसकी ब्लाउस को देखा और छातियों को दबाकर बोला: ये लगता है तुमने अपनी सास का ब्लाउस ही पहना है ना? बिलकुल फ़िट आ गया है। ऐसी ही मस्त टाइट अनार थे उसके भी शुरू में । फिर वो उसके नंगे सपाट पेट को चूमा और नाभि के छेद में अपनी जीभ फिराने लगा। मालिनी बोली: पापा आऽऽह गुदगुदी हो रही है।