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बहू नगीना और ससुर कमीना

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तारिक के घर में सब खाना खाने के लिए डाइनिंग टेबल पर पहुँचे। चारु और शमा ने सिर्फ़ फ़्रॉक ही पहनी थी बिना ब्रा और पैंटी के। राजीव और तारिक सिर्फ़ चड्डी में थे। लड़कियों ने खाना लगाया और जब वो प्लेट्स वगेरह टेबल पर रख रहीं थीं तब दोनों मर्दों ने उनकी फ़्रॉक ऊपर करके मस्ती से उनकी गाँड़ दबायी। चड्डी में अब दोनों के लंड आधे खड़े हो चुके थे। लड़कियों के भी निपल्ज़ तन चुके थे और फ़्रॉक के ऊपर से साफ़ नज़र आ रहे थे। सबने खाना खाया।

खाने के बाद सब सोफ़े पर बैठ कर बातें करने लगे।

राजीव: यार कबसे बिटिया को लगा रहे हो? सील तो तुमने ही तोड़ी होगी ना?

तारिक हँसकर शमा को अपनी गोद में खींचा और उसकी फ़्रॉक ऊपर करके उसकी टाँगें फैला दिया। अब उसकी नंगी बुर राजीव और पास बैठी चारु को साफ़ खुली हुई दिखाई से रही थी। राजीव का लंड तनने लगा। तारिक बोला: मैं इसकी साल भर पहले सील तोड़ा था। याद है ना शमा? वह उसकी बुर सहलाते हुए बोला।

शमा: आऽऽऽह अब्बा सब याद है। बहुत दुखा था पहली बार। कितना ख़ून भी निकला था।

तारिक उसके गाल चूमकर बोला: पर अब तो मज़ा आता है ना!

शमा : जी अब्बा अब तो बहुत मज़ा आता है।

राजीव: कैसे शुरू हुआ सब? आओ चारु तुम भी मेरे गोद में बैठो। अब चारु उसकी गोद में बैठी और वह भी उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी टाँगे फैलाकर तारिक और शमा को दिखाकर उसकी बुर सहलाने लगा।

तारिक चारु की बुर को घूरते हुए बोला: क़रीब तीन साल पहले इसकी अम्मी की एक ऐक्सिडेंट में मौत हो गयी थी। इसे सम्भालने के लिए मैंने एक औरत रख ली जो कि घर का काम भी करे और इसकी देखभाल भी करे। उसका नाम निशा था और उम्र क़रीब ३५ साल की थी । वह शादीशुदा थी और सुबह आती थी और रात को अपने घर जाती थी। शमा जवान हो रही थी और इसकी चूचियाँ अब नीबू से बढ़कर छोटे संतरे के आकार की हो गयीं थीं । इसकी अम्मी के जाने के बाद मैंने सेक्स नहीं किया था और बदन की भूक़ बढ़ती जा रही थी। एक दिन मैं दोपहर को जल्दी आ गया। मेरे पास घर की एक चाबी रहती थी। मैं अंदर आया तो घर बिलकुल शांत था। मैं सोचा कि शमा सो रही होगी स्कूल से वापस आकर । जब मैं शमा के बेडरूम में पहुँचा तो मेरे होश उड़ गए। शमा बिस्तर पर लेटी थी और उसकी फ़्रॉक ऊपर हो गयी थी और उसकी ढीली पैंटी के साइड से उसकी बुर का काफ़ी हिस्सा नंगा दिख रहा था। उसकी बुर के पास छोटे छोटी नरम से बाल भी दिख रहे थे। उफ़्फ़्फ़्फ क्या दृश्य था । मैं वैसे भी सेक्स का प्यासा था ही। फिर मेरा ध्यान इसकी सख़्त अमरूदों पर गया जो कि फ़्रॉक से आधे बाहर आकर झाँक रहे थे। पहली बार इसके बारे में मेरे मन में ऐसे विचार आए और मेरा खड़ा हो गया अपनी सगी बेटी की उभरती हुई जवानी देखकर।

वह शमा की बुर सहलाते हुए उसके गाल को चूमकर बोला।

राजीव का लंड अब पूरा तन गया था और चारु अपनी गाँड़ हिलाकर बोली: आऽऽऽह अंकल आपका तो पूरा खड़ा हो गया।

राजीव : ऐसी बात सुनकर खड़ा नहीं होगा क्या? हाँ फिर क्या हुआ?

तारिक: मैं अपने आप को कंट्रोल किया और दूसरे कमरे में गया तो वहाँ का दृश्य और भी उत्तेजक था। मेरे बेडरूम में शांति टी वी पर ब्लू फ़िल्म देख रही थी। वह मेरी सी डी के कलेक्शन में से एक फ़िल्म लेकर डीवीडी प्लेअर में लगाई हुई थी। उसकी सलवार पूरी नीचे थी और वह अपनी बुर में दो ऊँगलियाँ डालकर उइइइइइइ सीईईई कर रही थी। मैं काफ़ी देर तक उसे देखता रहा। तभी उसका फ़ोन बजा। वह बोली: हेलो।

वो:——-/-/

शांति: हाँ अभी खाना खाया। अभी बेबी यानी शमा के साथ टी वी देख रहीं हूँ।

वो:-/-/—

शांति अपनी ऊँगली हिलाती हुई: हाय्य्य्य्य नहीं कुछ नहीं ऊँगली दब गयी सब ठीक है।

वो:-/-///—-

शांति: हाँ हाँ रात को कर लेना। मैंने कभी मना किया है। तुम ही तो थकावट का बोल कर सो जाते हो। आऽऽऽह्ह्ह । वह अब शायद झड़ना चाहती थी। वह बोली: चलो रात को जो चाहे कर लेना। अभी रखती हूँ।

वो:—///—-

शांति: हाँ हाँ दवाई लगा लूँगी ऊँगली में। ज़्यादा नहीं लगी है। बाई । वह फ़ोन काटी और अपनी एक चूची को कुर्ते के ऊपर से दबाकर अपनी बुर में फिर से तीन उँगलियाँ डालकर हिलाने लगी। अब मुझसे नहीं रहा गया। मैं अंदर आया और वह उछल पड़ी और कपड़े ठीक करने लगी। मैं बोला: ये क्या हो रहा है मेरे कमरे में? वह घबरा कर बोली: कुछ नहीं साहब बस कपड़े ठीक कर रही थी।

मैंने कहा: और ये टी वी पर क्या चल रहा है? वहाँ अब एक आदमी पर दो औरतें चढ़ीं हुई थीं और आवाज़ के साथ चुदाई चालू थी। वह घबरा कर रोने लगी। मैंने उसे देखा और बाहों में जकड़ लिया। फिर उसके होंठ चूमते हुए बोला: क्या बात है बहुत गरम हो रही हो? चूत में उँगलियाँ कर रही हो? अरे हमारा लंड है ना ऊँगली की क्या ज़रूरत है रानी?

मैंने कुर्ते के ऊपर से उसकी चूची दबाई और ठोस चूची के मज़े से भर गया। मैं बोला: रानी क्या पति सही से नहीं चोदता?

वह शर्मा कर; जी छोड़िए ना साहब । शर्म आती है।

मैंने महसूस किया कि मेरे चुम्बन और चूचि मरदन से वह गरम हो रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी खुली सलवार के अंदर डाला और पैंटी के अंदर से उसकी पूरी गीली चूत पर सहलाना शुरू किया। अब वह चुपचाप मज़ा ले रही थी। विरोध बंद हो चुका था। फिर मैंने उसे नंगी किया और ख़ुद भी नंगा हो गया। मैंने उसे अपने ऊपर उलटा लिटा किया ताकि हम ६९ की पोसीजन में आ गये। अब मैं उसकी बुर चूस रहा था और वह मेरा लंड। उसके लंड चूसने से पता चल रहा था कि उसे चूसने में बहुत मज़ा आता है। अब मैंने उसे नीचे किया और उसके ऊपर चढ़कर उसकी चुदाई शुरू की। वो बहुत ज़ोर ज़ोर से आऽऽऽऽह उइइइइइइ चिल्लाने लगी। मैं भी कई दिनों के बाद चोद रहा था इसलिए ख़ुद भी उत्तेजना से भरकर आऽऽऽऽह ह्म्म्म्म्म चिल्लाए जा रहा था। हम चुदाई में इतने मस्त थे कि हम भूल ही गए कि साथ वाले कमरे में शमा सो रही है।

अब शमा भी बोल उठी: और अंकल मेरी नींद खुली क्योंकि बहुत अजीब अजीब सी आवाज़ें आ रहीं थीं । मैं उठकर अब्बा के कमरे में आयी और खिड़की से झाँकी -तो देखा कि टी वी में एक सेक्सी फ़िल्म लगी थी और उधर बिस्तर पर अब्बा और शांति अपनी फ़िल्म चला रहे थे।

यह कहकर वह हँसने लगी। तारिक ने उसकी बुर को मसला और वह हाऽऽऽऽय अब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बाऽऽ दुखता है ना बोल पड़ी।

तारिक: हाँ तभी मेरी निगाह खिड़की पर गयी और वहाँ इसको देखकर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया। पर अब मै झड़ने वाला था इसलिए रुका नहीं गया और शमा की आँखों में देखते हुए उसकी ज़बरदस्त चुदाई करते हुए मै झड़ने लगा। वह भी चिल्लाकर झड़ रही थी। उसके अपनी जाँघें भींचकर मेरे लंड को अपनी बुर में मस्त जकड़ लिया था। अब मैं उसके ऊपर से हटा और उसके बग़ल में लेट गया। फिर मैंने खिड़की की ओर देखा तो शमा वहाँ नहीं थी। मैंने शांति की चूची दबाकर कहा: तुम तो शादीशुदा हो फिर क्यों ऊँगली डाल रही थी बुर में?

शांति: साहब मेरा पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पता। वह बहुत जल्दी झड़ जाता है। पाँच दस धक्के मारता है और सी सी करके झड़ जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ।

मैंने उसके होंठ चूसे और कहा: चलो अब मेरे से चुदवा लिया करना। मैं भी प्यासा हूँ और तुम भी। पर एक दिक़्क़त आ गयी है।

निशा मुझसे लिपटकर मेरा लंड सहलाकर बोली: कैसी दिक़्क़त साहब ?

मैं बोला: अरे शमा ने हमारी चुदाई देख ली है।

निशा: ओह ये तो गड़बड़ हो गयी साहब । अब क्या करेंगे?

मैं: पता नहीं । शायद वह ग़ुस्सा होगी मेरे से । चलो जाकर समझाता हूँ उसे।

मैं उठकर कपड़े पहना और बाहर आकर शमा के कमरे में आया। शमा पेट के बल लेटी हुई थी और चुपचाप रो रही थी। मैंने आकर उसके पास बैठा और उसकी पीठ सहला कर बोला: बेटी नाराज़ हो अपने अब्बा से?

ये चुप रही और मैं झुका और उसके गाल सहलाकर बोला: बेटी रो रही हो? एक बात बोलूँ ?

शमा: जी अब्बा।

मैं: बेटी देखो मैं एक मर्द हूँ और मेरी शारीरिक ज़रूरतें हैं जो तुम्हारी अम्मी पूरी करती थी। अब उनके ना होने से मैं थोड़ा परेशान रहता हूँ। आज निशा को जब अपनी जवानी से खेलते हुए देखा तो मानो पागल हो गया। वो भी प्यासी है क्योंकि उसका पति उसको संतुष्टि नहीं कर पाता। मैं बोले जा रहा था और शमा मुझे ऐसी निगाहों से देख रही थी कि मानो कुछ समझ नहीं आ रहा हो। मुझे अपनी बेवक़ूफ़ी पर हँसी आयी। ये बेचारी कमसिन इन बातों को क्या समझेगी।

पर तब मैं हैरान रह गया जब ये एकदम से उठी और आकर मेरे तरफ़ देखते हुए अपनी टांगों को फैलाकर मेरी गोद में बैठ गयी और मेरे गले में अपनी बाँह डालकर बोली: अब्बा मैं कुछ नहीं जानती बस आप निशा को अभी निकालो। और अम्मी की ज़िम्मेदारी मैं निभाऊँगी निशा नहीं। मैं तो अवाक् सा होकर इसकी तरफ़ देखता रह गया। उसकी सख़्त चूचियाँ मेरे सीने से सटी हुईं थीं। उसकी बुर मेरे सोये हुए लंड पर थी और उसकी एक एक टाँग मेरे कूल्हों को मानो जकड़ी हुई थी। मेरा हाथ उसकी पीठ सहलाने लगा और मैं बोला: बेटी तुम अपनी अम्मी की सब ज़िम्मेदारियाँ निभा सकती हो सिवाय इसके जो मैं निशा के साथ कर रहा था। मेरा हाथ उसकी ब्रा के स्ट्रैप पर पड़ा और मेरे अंदर अहसास हुआ कि एक कमसीन जवानी मेरे गोद में बैठी है। अब मेरे लंड ने अपना सर उठाना शुरू कर दिया था।

तभी शमा ने मानो बम फोड़ा और मेरी आँखों में देखकर बोली: अब्बा वह काम भी मैं ही करूँगी आपके साथ, जो आप निशा के साथ कर रहे थे।

मुझे तो काटो ख़ून नहीं। ये क्या बोल रही है ये नादान लड़की। मैंने कहा: बेटी मैं तुम्हारा अब्बा हूँ हम ये नहीं कर सकते। समाज और धर्म इसकी इजाज़त नहीं देते।

शमा: अब्बा अगर सलमा कर सकती है तो मैं क्यों नहीं?

मैं अवाक् होकर उसे देखते रह गया। सलमा उसकी ममेरी बहन है। इसका मतलब है कि क्या सलमा को उसका बाप याने मेरा साला ज़फ़र चोद रहा है?

मैं: तुमको कैसे पता कि सलमा ज़फ़र से चु— मतलब ये सब करती है?

शमा: अब्बा जब वो पिछले महीने आयी थी तब मैंने मज़ाक़ मज़ाक़ में पूछा था कि तेरी छातियाँ इतनी बड़ी कैसे हो गयीं हैं अभी से ? किसी से दबवाती है क्या? मेरे स्कूल में कई लड़कियाँ बताती हैं कि जो अपनी छातियाँ दबवाती हैं उनकी बड़ी हो जाती हैं । वो हँसने लगी और फिर बहुत पूछने से उसके मुँह से निकल गया कि वो अपने अब्बा से मज़ा ले रही है।

मेरा लंड अब पूरा तन गया था और शमा अब मेरी गोद में उसे पूरा अहसास कर रही थी। वह अपनी गाँड़ हिलाई और मुझे समझ आ गया था कि उसे समझ में आ गया है कि ये मेरा लंड ही है जो उसकी बुर से टकरा रहा है। फिर भी मैं बोला: बेटी देखो मुझे विश्वास नहीं आ रहा है। ज़फ़र भाई ऐसा कैसे कर सकते हैं।

शमा: अब्बा आप उनसे ही पूछ लो ना। फ़ोन कर लो।

मैंने ज़फ़र को फ़ोन लगाया: यार ज़फ़र कैसे हो?

ज़फ़र: मस्त हूँ भाई जान। आप कैसे हो? शमा ठीक है ना?

मैं: अरे साले सांब शमा के लिए ही फ़ोन किया है। वह कह रही है कि वह अपनी मम्मी की सब ज़िम्मेदारियाँ निभाना चाहती है। मैंने उसे समझाया कि एक के अलावा वह सभी ज़िम्मेदारी निभा सकती है। पर वह नहीं मान रही है। एक ज़िम्मेदारी समझे ना वही मर्द और औरत वाली।

ज़फ़र की आवाज़ बंद सी हो गयी। वह बोला: भाई जान इसमें मैं क्या बोल सकता हूँ। आपने मुझे ये बताने को फ़ोन किया क्या?

मैं: अरे यार मैंने भी शमा को समझने की कोशिश की है कि बाप बेटी में यह रिश्ता नहीं हो सकता। पर वह तुम्हारा और सलमा का उदाहरण दे रही है।

ज़फ़र को फिर से साँप सूंघ गया। वह चुप रहा।

मैं: देखो यार अगर सच भी है तो मैं किसी को बोलने वाला तो हूँ नहीं। अब सलमा के मुँह से ये निकल गया। तुम उसे मारना नहीं। बच्ची है वह भी ना।

ज़फ़र ने गहरी साँस ली और बोला: हाँ भाई सच है। पिछले एक साल से मै उसे चो- मतलब कर रहा हूँ। पर ये लड़की भी ना कोई बात इसके पेट में पचती ही नहीं।

मैं: अरे भाई चलो कोई बात नहीं। ये मेरे पास भी सीक्रेट ही रहेगा। पर ये तो बताओ भाभी को पता है?

ज़फ़र: हाँ सब कुछ उसकी रज़ामंदी से ही हुआ है। असल में मुझे सलमा के स्कूल बैग से ऐसी किताबें मिली जिनमे खुल कर चुदाई हो रही थी। जब मैंने उसे डाँटा तो वह रोने लगी।बाद में उसने अपनी अम्मी को बताया कि उसे सेक्स करने की बहुत इच्छा होती है और वो चार पाँच दिनों में ही किसी लड़के से चुदवाने वाली थी। बस तभी हमने यह तय किया कि वह बाहरवालों से चुदवाए इससे तो अच्छा है कि घर की बात घर में ही रहे। वैसे भी सलमा की अम्मी की तबियत काफ़ी ख़राब रहती है। इसलिए मुझे भी खुराक की कमी हो रही थी। इस तरह क़रीब साल भर से सलमा मुझसे चुद रही है। यही सच है।

उसकी बात सुनकर मेरा लंड तन कर दर्द कर रहा था और मेरा एक हाथ उसकी पीठ से होकर उसकी गाँड़ की गोलायियाँ नापने लगा था।

अब मैं ओह चलो रखता हूँ कहकर फ़ोन बंद किया और अब दोनों हाथ से उसकी गाँड़ सहलाने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और पूरे नंगे चूतडों को दबाकर मस्ती से भरने लगा। मेरे होंठ अब शमा के होंठ चूसने लगे थे।

तभी शमा बोली: अब्बा निशा को निकालो अभी के अभी। वह हमारे घर में अब काम नहीं करेगी।

मैं शमा की ज़िद के आगे झुका और उसे अपनी गोद से हटाया। मैंने अपने लंड को एडजस्ट किया जिसे शमा ध्यान से देख रही थी। फिर मैं आलमरी से पैसे निकाला और किचन में जाकर निशा से कहा: देखो निशा सब गड़बड़ हो गया है। शमा ने हमको देख लिया है और वह तुम्हें निकालने की ज़िद पर अड़ गयी है। इसलिए ये तुम्हारी तनख़्वाह और ये ऊपर से दो हज़ार लो और कल से काम पर नहीं आना। वह चुपचाप पैसे लेकर रोते हुए घर से बाहर चली गयी। मुझे ख़राब लगा पर मैं मज़बूर था।

मैं वापस आया तो शमा फिर से लेट गयी थी। मैं उसके पास आकर बोला: बेटी एक बार फिर से सोच लो। ये ग़लत होने जा रहा है। एक बार हम आगे बढ़ गए तो वापसी नहीं हो सकेगी। अभी भी सोच लो।

पर शमा पर तो भूत सवार था। वह मुझे अपने ऊपर खींचकर मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दी और मेरे हाथ भी उसकी सख़्त चूचियों पर आ गए। उसके बाद कहाँ रुक सकते थे। बस वह दिन है और आज का दिन है हम दोनों बाप बेटी बिना चुदाई के रह ही नहीं सकते। हैं ना शमा बेटी? अब तारिक उसकी फुद्दी सहलाकर बोला।

शमा: जी अब्बा ।

राजीव की गोद में चारु बैठी थी और वह भी उसकी बुर सहला रहा था। राजीव बोला: यार तुम्हारी कहानी तो बड़ी गरम कर गयी मुझे। आऽऽह शमा बेटी आओ मेरे पास। उफ़्फ़्फ क्या मस्त हॉट लौंडिया हो तुम।

तारिक भी चारु को बोला :आओ बिटिया मेरे पास ।

लड़कियाँ अदल बदल हो गयीं। राजीव ने शमा को अपनी गोद में उलटा लिटाया और उसकी फ़्रॉक ऊपर करके उसके मस्त चूतडों को सहलाने लगा। उसकी देखा देखी तारिक ने भी चारु की गाँड़ सहलाना शुरू कर दिया। दोनों लौंडियाँ मस्ती ले रहीं थीं अब राजीव शमा के चूतडों को फैला कर उसके छेद को सहला कर मस्ती से बोला: आऽऽह भाई क्या मस्त गाँड़ है बिटिया की। मस्त खुली हुई है। फिर वह उसके छेद पर थूका और थूक से गीली अपनी दो उँगलियों को उसकी गाँड़ में डालकर अंदर बाहर करते हुए बोला: उफ़्फ़्फ कितनी टाइट गाँड़ है बिटिया की। मज़ा आएगा मारने में।

तारिक भी अब चारु की गाँड़ में एक सूखी ऊँगली डाला और बोला। आऽऽह चारु की तो बिलकुल टाइट है।

राजीव: यार क्रीम लगाकर मारना। वरना बेचारी मर जाएगी।

तारिक: हाँ यार । बहुत मस्त गाँड़ है । चलो बेडरूम में चलते हैं और मज़े करते हैं।

राजीव: यार एक ही बिस्तर पर इनकी लेते हैं।

तारिक: चलो मेरे बेडरूम में चलते हैं। वो दोनों उन लड़कियों को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गए।

तारिक ने चारु की फ़्रॉक उतारी और उसकी चूचियाँ चूसने लगा। राजीव भी शमा की फ़्रॉक निकाल कर चूचियाँ चूसने लगा। अब तारिक ने चारु से घोड़ी बनने को कहा और वो उसे घोड़ी बनाकर बिस्तर के कोने में लेकर आया और झुक कर उसकी गाँड़ को ऊपर किया और दरार में मुँह डालकर वहाँ चुम्बन लेने लगा। फिर जीभ से गाँड़ सहलाकर अपनी जीभ से कुरेदते हुए उसकी बुर भी चाटने लगा। चारु आऽऽऽऽह चिल्ला रही थी। राजीव ने भी यही शमा के साथ करने लगा और वह भी उइइइइइ चिल्ला उठी। थोड़ी देर में दोनों लौंडियों की बुर पानी छोड़ने लगीं थीं ।अब तारिक उठा और जाकर क्रीम लाया और चारु की गाँड़ में दो ऊँगली में क्रीम लपेट कर डाला और अंदर बाहर करने लगा।क्या मस्ती भरा दृश्य था । दो दो कमसिन जवानियाँ अपनी गाँड़ ऊपर करके बिस्तर के कोने में घोड़ी बनी हुई थीं। उनके पीछे खड़े होकर दोनों मर्द अपने लंड लहरा रहे थे।

तारिक ने चारु की गाँड़ में उँगलियाँ अंदर बाहर की और चारु आऽऽऽह्ह्ह कर उठी। फिर वह अपने लंड पर भी क्रीम लगाया और चारु की गाँड़ में अपना लंड धीरे से दबाने लगा। सुपाड़ा उसके गाँड़ के छल्ले को फैलाकर अंदर घुसता चला गया। चारु आऽऽऽऽऽहह करके चिल्लाई और लंड अंदर घुसता चला गया।

अब राजीव ने भी क्रीम लेकर शमा की गाँड़ में लगाई और फिर अपने लंड में लगाकर अपना लंड उसकी गाँड़ ने पेला और शमा हाऽऽऽऽऽय्य मरीइइइइइइइ चिल्लाई: आऽऽऽपका बहुत मोओओओटा है अंकल जीइइइइइइइ।

अब थप्प थप्प की आवाज़ के साथ दोनों मज़े से गाँड़ मरवाने लगीं। अब राजीव ने अपना लंड निकाला और कहा : तारिक यहाँ आओ और अपनी बेटी की मारो। मैं चारु की मारता हूँ।

अब दोनों लड़कियाँ बदलकर उनकी गाँड़ ठोकने लगे।

थोड़ी देर बाद वो फिर से लड़कियाँ बदलकर उनकी गाँड़ चोदने लगे। अचानक शमा चिल्लाई: आऽऽऽह्ह अब मेरी चूत मारो अंकल जी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ प्लीज़ ।

अब राजीव ने अपना लंड उसकी गाँड़ से निकाला और नीचे करके उसकी चूत में डाला और बुरी तरह से चोदने लगा। अब तो शमा मानो दीवानी हो गयी और चिल्लायी: आऽऽऽऽह और ज़ोर से हाऽऽऽय फ़ाऽऽऽऽऽड़ दो मेरी फुद्दी उफ़्फ़्फ़्फ । वो अपनी गाँड़ दबाकर चुदवाने लगी। कमरा फ़च फ़च मी आवाज़ से गूँज उठा। तारिक अभी भी चारु की गाँड़ ही मार रहा था। वो बोल रहा था; आऽऽऽऽह क्या चिकनी और टाइट गाँड़ है। वह अपनी दो उँगलियाँ उसकी बुर में डालकर उसकी क्लिट सहलाकर चारु को मस्त कर रहा था। तभी चारु आऽऽऽऽहह उइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी और उसकी उँगलियाँ गीली होने लगी। तभी वह भी उसकी गाँड़ में झड़ने लगा।

उधर राजीव भी शमा की चूत फाड़ते हुए झड़ने लगा और शमा भी आऽऽऽऽऽह करके झड़ती चली गयी।

वासना का भूत उतर गया था और सब शांत पड़े थे। अब राजीव बोला: यार अब हम घर जाएँगे। बहुत मज़ा आया। फिर सब तय्यार हुए और एक दूसरे को चूमकर फिर मिलने का बोल कर राजीव और चारु अपने घर को चले गए।

 
राजीव और चारु घर पहुँचे तब शाम हो चुकी थी। सब ड्रॉइंग रूम में बैठे थे। मालिनी ने चाय बनाई और उसे देते हुए बोली: बहुत ख़ाली ख़ाली सा लग रहा है मम्मी के जाने के बाद ।

राजीव उसे अपनी गोद में खींचकर उसे प्यार किया और कहा: बहू ,मम्मी की याद तो मुझे आ रही है तुमको तो राजेश याद आ रहा होगा। मस्त गाँड़ मारी थी ना उसने।

मालिनी: पापा अब तो सबको चुदवाते देखकर मेरी भी नीचे खुजाती है। मैं कल अस्पताल जा रही हूँ और जाँच करवा कर आऊँगी। देखते हैं शायद डॉक्टर चुदाई की पर्मिशन दे दे।

राजीव उसे चूमते हुए उसकी चूची दबाकर बोला: सच बहुत दिन हो गए तुम्हें चोदे। उफ़्फ़्फ़्फ मैं तो मरा जा रहा हूँ तुमको चोदने के लिए।

सोफ़े पर अधलेटी मुन्नी बोली: अंकल आप तो सबको करने के लिए मरे जाते हो।

राजीव हँसकर: अरे जिसके घर में बहू जैसी मस्त माल हो वो साला पागल तो हो ही जाएगा ना चोदने के लिए।

इस पर चारु बोली: पापा आप पहले करेंगे दीदी के साथ या हमारे जीजू ?

राजीव: अरे दोनों मिलकर ही ले लेंगे तेरी दीदी की। है ना बहू रानी?

मालिनी हँसकर: हाँ हाँ क्यों नहीं मैंने कब मना किया है?

चारु: बेचारी मुन्नी का क्या होगा? देखो ना अंकल उसके निपल्ज़ कैसे कड़े हो गए हैं?

मुन्नी: हाँ हो गए हैं तो तुझे क्यों जलन हो रही है।

मालिनी उठी और सबके कप लेकर किचन में जाते हुए बोली: अरे क्यों बेकार में लड़ रही हो?

राजीव उठकर मुन्नी के पास जाकर बैठा और उसकी टाँगे सहलाकर मज़े से भर कर बोला: चारु , हमारी रानी गुड़िया को मत चिढ़ाओ। फिर वो हाथ को जाँघ तक ले जाकर सहलाता हुआ बोला: उफ़्फ़्फ बिटिया कितनी चिकनी हो तुम? फिर उसने उसकी स्कर्ट उठाई और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को मूठ्ठी में भरकर दबाने लगा। मुन्नी की आऽऽऽऽऽह निकल गयी। अब वो उसकी पैंटी के साइड से उसकी चूत में उँगलियाँ अंदर किया और मुन्नी उइइइइइइ कहकर अपनी गाँड़ उठा दी। थोड़ी देर तक दो उँगलियाँ अंदर बाहर करने के बाद वो उनको बाहर निकाला और चूसने लगा और बोला: उफ़्फ़्फ क्या स्वाद है।

चारु उठी और कमरे में जाते हुए बोली: मैं तो आराम करने जा रही हूँ। आप लोग मस्ती करो।

राजीव भी शमा को चोदकर थका हुआ था। उसने मस्ती शुरू तो कर दी थी पर वह जानता था कि वह इस समय इस गरम गुड़िया को चोद नहीं सकता था। इसलिए उसने उसका टॉप उठाया और उसकी मस्त चूचियों को मुँह में लेकर चूसते हुए दबाने भी लगा। जब मुन्नी पूरी गरम हो गयी तो वह नीचे बैठा और उसको घुमाकर उसकी पैंटी निकाला और फिर उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर वह अपना मुँह उनके बीच में डाला। अब वह बेतहाशा उसकी मस्त गुलाबी चूत चूसने लगा। उसकी लम्बी जीभ मुन्नी को सिसकियाँ लेने पर मजबूर कर दीं और वो आऽऽऽऽऽह उइइइइइइइ उफ़्फ़्फ़्फ कहकर अपने मज़े का इजहार करने लगी और राजीव के सिर को पकड़ कर अपनी बुर में दबाने लगी और साथ ही अपनी गाँड़ भी उछालने लगी। क़रीब दस मिनट की चुसाई के बाद जब राजीव उसकी क्लिट पर हमला किया तो वह उइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइ कहकर उसके मुँह में अपना फ़ौवारा छोड़ने लगी। राजीव उसके मस्त रस को पीते चला गया।

अब राजीव अपना मुँह साफ़ किया और हँसते हुए उठा और अपने कमरे की ओर जाता हुआ बोला: बिटिया रात को चुदाई के लिए तय्यार रहना।

लस्त पड़ी मुन्नी बोली: आऽऽह अंकल अभी तो आपने मेरा पूरा रस ही निचोड़ लिया। रात की रात को देखेंगे। वह वहीं वैसे ही सो गयी।

मालिनी किचन से बाहर आयी तो देखी कि मुन्नी सोफ़े पर सोयी हुई है और उसका टॉप खुला है और स्कर्ट भी ऊपर है और पैंटी ज़मीन पर पड़ी है। उसने अपना माथा पीटा और सोची कि पापा भी बहुत सेक्सी हैं । यहीं सोफ़े पर ही इससे मस्ती कर लिए।

वह उसे वैसे ही छोड़कर अपने कमरे में चली गयी।

शाम को आठ बजे शिवा आया तो ड्रॉइंग रूम में कोई नहीं था। सब अपने अपने कमरे में आराम कर रहे थे । वह अपने कमरे में गया तो वहाँ मालिनी गुड़िया को दूध पिला रही थी। वह शिवा को देखकर मुस्कुराई और शिवा मस्ती में आकर उसके दूसरे दूध को पीने लगा। मालिनी भी प्यार से उसके सिर पर हाथ फेर रही थी।

मालिनी: मैं कल डॉक्टर के पास जाँच करवाने जा रही हूँ।मुझसे अब बर्दाश्त नहीं होता, मुझे भी मज़े से चुदवाना है।

शिवा: ठीक है कल जा कर जाँच करवा लेना। पापा को ले जाना।

मालिनी: नहीं मैं अकेली चली जाऊँगी । पापा घर में गुड़िया का ध्यान रखेंगे।

शिवा दूध पीते हुए: ठीक है जान जैसी तुम्हारी मर्ज़ी।

उस रात खाना खाकर रात को शिवा ने चारु को और राजीव ने मुन्नी को चोदा और मालिनी गुड़िया के साथ सो गयी।

अगले दिन सबको विदा करके गुड़िया को काम वाली बाई और राजीव को सौंप कर मालिनी अस्पताल चली गयी। अस्पताल में गायनिक की पर्ची कटवा कर वह इंतज़ार करने लगी। जब उसे अंदर बुलाया गया तो वह चौंकी क्योंकि उसकी लेडी डॉक्टर की जगह एक ४२/४५ साल का आदमी था जो काफ़ी तगड़ा सा दिख रहा था।

मालिनी: जी जी वो डॉक्टर निशा नहीं है क्या?

डॉक्टर: वह तो छुट्टी पर है मेरा नाम पाटिल है मैं ही आपको देखूँगा। बैठिए बताइए क्या तकलीफ़ है।

मालिनी थोड़ा सा हिचकिचाई फिर बोली: ये मेरी रिपोर्ट है मुझे कुछ दिनों पहले बेटी हुई है।

पाटिल : हाँ ओके रिपोर्ट तो सब ठीक है। वैसे नीचे अभी सब ठीक है ना?

मालिनी: हाँ जी ठीक है। मैं अपनी जाँच करवाने आयी थी कि नीचे सब ठीक है या नहीं? पर अब निशा नहीं है तो मैं वापस जाती हूँ।

पाटिल: अरे मैं जाँच कर लेता हूँ ना। इसमें क्या बात है। आख़िर मैं भी गायनिक ही हूँ।

तभी एक नर्स आयी और बोली: चलिए आप वहाँ लेटिए ।

नर्स के आने से मालिनी का हौंसला बढ़ा और वह उठकर पार्टिशन के पीछे रखे बिस्तर पर लेट गयी। उसने साड़ी पहनी थी और पैंटी नहीं पहनी थी कि आख़िर जाँच के लिए खोलनी तो होगी ही ।

नर्स ने उसे अपनी क़मर उठाने को कहा। वह जब कमर उठाई तो उसने उसकी साड़ी पेटिकोट समेत ऊपर कर दी और उसकी बुर एकदम से नंगी हो गयी। मालिनी इस अचानक हमले से चौंक गयी। तभी नर्स बोली: आइए डॉक्टर सब तय्यार है।

पाटिल का सोचकर मालिनी ने शर्म से आँखे बंद कर ली। डॉक्टर अंदर आया और मालिनी की चिकनी साफ़ सुंदर बुर को देखा और देखता ही रह गया। उसने बड़ी मुश्किल से वहाँ से नज़र हटायी और मालिनी के पेट से साड़ी हटाकर उसका पेट दबाकर चेक करने लगा। मालिनी ने आँखे खोली और दोनों की नज़रें मिली।

तभी नर्स का फ़ोन बजा और वह बोली: डॉक्टर मुझे जाना होगा। इमर्जन्सी में बुला रहे हैं । वह चली गयी।

अब पाटिल उसके चिकने पेट को चेक करते रहा और उसकी नाभि में ऊँगली डालकर मस्ती से भरने लगा। उसके पैंट में तंबू बनने लगा था। फिर वह बोला: बेटी कोई तकलीफ़ है क्या?

मालिनी: जी नहीं सब ठीक है। बस आप नीचे की जाँच कर लीजिए कि सब ठीक है या नहीं? बोलने के साथ ही वह झेंप सी गयी।

पाटिल: हाँ देखता हूँ अभी नीचे भी। पहले तुम्हारा ब्लड प्रेशर देख लूँ। यह कहकर वो उसके हाथ में पट्टी लगाने लगा और उसका हाथ का किनारा उसकी उभरी हुई छातियों से टकरा गया। मालिनी को थोड़ा अजीब सा लगा फिर सोची कि डॉक्टर से कैसी शर्म । फिर पाटिल बोला: बेटी बी पी तो सही है। बाक़ी की जाँच भी कर लेता हूँ।

अब वह उसकी साड़ी को छातियों से हटाया और स्टेठेस्कोप को उसकी छातियों पर दबाकर वो उसके उभारों को महसूस करते हुए चेक अप किया। मालिनी की आँख अचानक उसके तंबू पर पड़ी और वह हैरान हो कर सोची कि हे भगवान ये कैसा डॉक्टर है। पर एक बात मालिनी सोचकर मन में मुस्कुराई कि तंबू तो शिवा और पापा सरीखा ही बड़ा सा बना हुआ है। तभी वो महसूस करी कि उसका हाथ ज़्यादा ही देर तक उसके उभारों पर है। वह बोली: सब ठीक है ना?

पाटिल: हाँ सब ठीक है । अब नीचे की जाँच कर लेता हूँ।पर पहले दरवाज़ा बंद कर लेता हूँ कहीं कोई अंदर नहीं आ जाए। अब वो दरवाज़ा बंद करके अपने तंबू को ऐडजस्ट करते हुए ,उसके पैरों की ओर गया। जैसे ही उसकी निगाह उसके जाँघों पर पड़ी वह उनको सहलाया और बोला: बेटी जाँघे फैलानी पड़ेंगी ना। और घुटने भी मोड़ने होंगे।

मालिनी ने टाँगें फैला दीं और घुटने मोड़ दिए। और उसकी पूरी कचौरी सी फूली बुर उसकी आँखों के सामने थी। डॉक्टर के मुँह से आह निकल गयी। वो उसकी बुर की फाँक को देखा और बोला: बेटी इतनी सुंदर चू- मतलब योनि मैंने नहीं देखी। जानती हो मैंने हज़ारों नंगी लड़कियाँ और औरतें देखीं हैं पर उफ़्फ़्फ इतनी सुंदर योनि कभी नहीं देखी।

मालिनी शर्मा कर: क्या डॉक्टर जैसे सबकी होती है वैसी ही मेरी है। अच्छा चेक अप करिए ना । मेरे पति बहुत आतुर हो रहे हैं सेक्स के लिए। उसने मन में सोचा कि शिवा ही नहीं पापा भी पागल हो रहे हैं मेरी बुर की चुदाई के लिए।

अब वह उसकी बुर को सहलाते हुए बोला: अरे नहीं नहीं बेटी ये तो बहुत ही प्यारी है। उसकी हथेली मालिनी को अंदर तक उत्तेजित कर रही थी। उसकी इच्छा हुई कि गाँड़ उछालकर अपनी चूत में घुसेड़ ले उसकी उँगलियाँ ।पर शर्म के मारे चुपचाप लेटी रही। अब डॉक्टर ने उसकी चूत की फाँकों को फैलाया और उसके अंदर झाँका। उफ़्फ़्फ क्या गुलाबी छेद था और एकदम साफ़ सुथरी बुर थी। वह बोल उठा: बेटी सब ठीक है अंदर से ।अब तुम चुदवा सकती हो। वैसे जैसे तुम्हारे पति का मन करता है चुदाई के लिए, तुम्हारा भी तो मन करता होगा ना चुदवाने को।

मालिनी बोल उठी: हाँ मेरा भी मन करता है।

पाटिल: ये तो बिलकुल सामान्य बात है । वैसे एक बात बोलूँ ये इतनी सुंदर है कि बेटी बड़ा मन हो रहा है, एक चुम्बन ले लूँ इसका?

मालिनी शर्मा कर आँख बंद कर ली और कोई जवाब नहीं दी। पाटिल ने इसे उसकी हामी समझी और उसकी बुर का एक नहीं कई चुम्मा ले लिया। अब मालिनी की सिसकी निकल गयी। फिर वो उँगलियाँ अंदर डालकर जाँच लिया और बोला: बेटी ये बताओ कि एक बच्चा पैदा करने के बाद भी तुम्हारी चूत इतनी टाइट कैसे है?

मालिनी: वो डॉक्टर मैंने चू- मतलब योनि को टाइट करने की एक्सर्सायज़ की थी जैसे डॉक्टर शांति जी ने बताया था।

पाटिल: उफ़्फ़्फ ये बिलकुल हैरानी की बात है बेटी । क्या मस्त टाइट चूत है तुम्हारी। इस बार उसने चूत शब्द का इस्तेमाल कर ही लिया। मालिनी तो चूत और ऐसे शब्दों की आदी थी सो उसे भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। बल्कि अब उसकी चूत पानी छोड़ रही थी डॉक्टर पाटिल की हरकतों के कारण।

पाटिल अब मस्त होकर बोला: बेटी बड़ा मन कर रहा है इसे चाटने का। चाट लूँ?

मालिनी चुप रही और पाटिल झुका और उसकी चूत की फ़ाकें फैलाकर अपनी जीभ डालकर चाटने लगा। अब मालिनी अपने पर क़ाबू नहीं रख सकी और अपनी गाँड़ उठाकर आऽऽऽऽऽह करके अपनी चूत चटवाने लगी। थोड़ी देर बाद वह उत्तेजना से अपनी चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से मसलने लगी। फिर वह बोली: आऽऽऽऽऽह डॉक्टर मेरी चूची भी दबाओ ना। आऽऽऽऽऽह । मस्त लग रहा है।

पाटिल ने अपने हाथ बढ़ाए और उसकी चूचियों को ब्लाउस के ऊपर से दबोच कर दबाते हुए चूत चाटने लगा। मालिनी आऽऽऽऽऽह उइइइइइइ कहकर मस्त हो रही थी। तभी पाटिल ने अपना सिर उसकी चूत से हटाया और वो बोल उठी: आऽऽऽऽह क्या हुआ डॉक्टर ? उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।

 


डॉक्टर मुस्कुराता हुआ अपनी पैंट निकालने लगा और मालिनी की आँखें उसकी चड्डी में फँसे हुए लंड पर पड़ी। उसकी चूत में अब भयानक खुजली होने लगी। कितने दिनों की प्यासी है उसकी चूत । तभी पाटिल ने अपनी चड्डी निकाली और अब अपना लंड बाहर निकाला। मालिनी ने अंदाज़ा लगाया कि शिवा के जैसा है बड़ा है और मस्त मोटा भी है।अब पाटिल ने उसकी टाँगें खिंची और उसकी गाँड़ को बेड के एकदम कोने पर ले आया।फिर पाटिल ने बिना समय बिगाड़े अपना लंड खड़े खड़े ही मालिनी की बुर पर ऊपर से नीचे रगड़ा और मालिनी चिल्ला उठी: आऽऽऽऽऽऽह डॉक्टर डाऽऽऽऽऽऽऽलो ना। उफ़्फ़्फ़्फ अब नहीं सहा जा रहा। उत्तेजना में मालिनी यह भी भूल गयी कि वह आज किसी बाहर वाले से चुदने जा रही है। अब पाटिल ने अपना लंड उसकी चूत में डाला और मालिनी को लगा कि वह बरसों के बाद गरम लंड का अहसास कर रही है। तभी पाटिल ने अपना पूरा लंड अंदर पेला और उसकी टाइट चूत का अहसास करके मस्ती में आकर चिल्लाया: ह्म्म्म्म मस्त चूत है बेटी। अब वह अपनी कमर हिलाकर उसकी चुदाई में लग गया। मालिनी कहाँ पीछे रहने वाली थी । वह अपनी गाँड़ उछालकर चुदवाने लगी। अब डॉक्टर ने उसकी चूचियों को ब्लाउस के ऊपर से ही मसलना शुरू किया। तभी उत्तेजना में आकर मालिनी अपने ब्लाउस का हुक खोली और ब्रा में से अपनी चूचियाँ बाहर निकाली और पाटिल एक एक करके उसकी चूची चूस कर दूसरी को दबाने लगा और ज़ोर के झटके मारने लगा। कमरा फ़च फ़च की आवाज़ और पलंग की चूँ चूँ से गूँज रहा था और साथ ही मालिनी की उन्नन उन्नन भी निकल रही थी हर धक्के के साथ। अचानक मालिनी आऽऽऽऽह कहकर झड़ने लगी और पाटिल भी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कहकर अपना पानी अंदर छोड़ दिया। अब पाटिल उसके ऊपर आधा लेटा हुआ गहरी साँस ले रहा था। मालिनी भी लस्त पड़ी हुई थी।

अब पाटिल ने टिश्यू पेपर से अपना लंड साफ़ किया और पैंट पहन ली। फिर निढाल पड़ी मालिनी की बुर भी साफ़ किया । अब मालिनी भी उठी और अपने कपड़े ठीक किए।

अब डॉक्टर जाकर अपनी कुर्सी पर बैठा और मालिनी भी आकर उसके पास रखी एक कुर्सी पर बैठ गयी।

पाटिल: तो बेटी तुम्हारी चूत का टेस्ट हो गया अब तुम चुदवा सकती हो। वैसे तुम्हारे घर में कौन कौन हैं?

मालिनी: जी पति और ससुर हैं। मेरी दो कज़िंज़ भी अभी आयीं हुईं हैं कुछ समय के लिए।

पाटिल: जानती हो अगर तुम मेरी बहू होती तो मैं तो तुम्हारे पीछे दिवानों की तरह लगा रहता। वह उसके गाल सहलाकर बोला।

मालिनी भी हँसकर: तो ये ससुर कौन से मेरे दीवाने नहीं है।

पाटिल उत्तेजित होकर: वाऽऽह तो ससुर से भी मज़े कर रही हो?

मालिनी हँसकर: और क्या वो भी आपके जैसे ही रोमांटिक हैं । वैसे आपके घर में कौन कौन हैं?

पाटिल: बस मैं और पत्नी ही हैं । हमारा इकलौता बेटा हॉस्टल में रहकर पढ़ता है। वैसे मेरी पत्नी भी ख़ूबसूरत है। चालीस की उम्र में भी मस्त माल है।

मालिनी: जब वो मस्त माल हैं तो आप इधर उधर मुँह क्यों मारते हैं?

पाटिल: सही कहा तुमने। पर हम दोनों वेरायटि के शौक़ीन हैं । हम कई बार दोस्तों के साथ पत्नी की अदला बदली करते हैं । उसे भी नए लंड से चुदवाना अच्छा लगता है।

मालिनी: ओह फिर आप दोनों ही मस्ती करते रहते हो।

पाटिल: वैसे तुम्हारे पति और ससुर का लंड बड़ा तो होगा ही ना?

मालिनी हँसकर: हाँ जी आपके जैसे ही बड़े हैं। क्यों क्या हुआ?

पाटिल: वह बात यह है कि वह सिर्फ़ बड़े लंड से ही चुदवाना पसंद करती है। सोच रहा हूँ कि तुम्हारे ससुर और पति से भी उसे चुदवा दूँ। अगर तुमको आपत्ति ना हो तो?

मालिनी: मुझे भला क्या आपत्ति होगी। वैसे भी बदले में आप मुझे आप भी चोदोगे ही। है ना?

पाटिल: सही कहा। तो बात करवाओ अपने ससुर या पति से । प्रोग्राम बनाते हैं इस इतवार का।

मालिनी: आप अपना नम्बर दे दीजिए मैं उनसे बात करूँगी। अगर वह राज़ी हुए तो आपको बताऊँगी । अच्छा अब दवाई लिख दीजिए मैं चलती हूँ।

फिर पाटिल ने दवाई लिखी और पाटिल प्यार से उसके चूतडों को सहलाया और मालिनी उसको चूमकर दवाई ख़रीद कर घर की ओर चली गयी।

जब वह घर पहुँची तो काफ़ी थक चुकी थी। घर में बाई काम कर रही थी और जब वह अपने बेडरूम में पहुँची तो देखी कि गुड़िया और उसके बग़ल में राजीव सोया हुआ है। वह मन में सोची कि लगता है गुड़िया ने अपने दादा या पता नहीं पापा को बहुत तंग किया है। अब दोनों मज़े से सो रहे हैं । वह अपनी साड़ी उतारी और बाथरूम में जाकर अपनी चूत साफ़ की । वह फिर बाहर आकर अपने ब्लाउस को उतारी और एक ढीला सा टॉप पहन ली और नीचे एक ट्राउज़र पहन कर बाहर आयी।

जब वह किचन में काम कर रही थी । बाई जा चुकी थी कि तभी राजीव की आवाज़ आयी: बहू आ गयी क्या वापस?

मालिनी बेडरूम में जाकर बोली: जी आ गयी। आप तो गुड़िया के साथ मस्त सो रहे थे सो मैंने जगाया नहीं।

राजीव : हाँ वो यहाँ पड़ी तुम्हारी साड़ी ब्लाउस देखकर मै समझ गया था कि तुम वापिस आ गयी हो।

मालिनी आकर उसके पास बिस्तर में बैठी और राजीव ने कहा: क्या कहा डॉक्टर शांति ने?

मालिनी: अरे पापा वो तो छुट्टी में थी मुझे दूसरे डॉक्टर ने देखा?

राजीव: ओह फिर क्या बोली डॉक्टर ?

मालिनी: वो बोली नहीं बोला। क्योंकि वो एक आदमी था?

राजीव: ओह तो तुम अपनी चूत एक आदमी को दिखा आयी?

मालिनी हँसकर: हाँ जी दिखा आयी ।

राजीव: साला किस्मतवाला है जो तुम्हारी मस्त चूत के दर्शन कर लिए उसने।

मालिनी हँसकर: वह भी यही बोल रहा था।

राजीव भी हँसकर: सच में? अच्छा क्या बोला? चुदवा सकती हो या नहीं?

मालिनी: अब क्या बताऊँ? हाँ उसने चुदाई का क्लीयरेंस दे दिया है। और उसकी शुरुआत भी कर दी है।

राजीव चौंक कर: क्या मतलब? क्या उसने तुमको चोद दिया?

मालिनी: हाँ पापा उसने जाँच करते हुए मुझे बहुत उत्तेजित कर दिया और मेरी ले ली।

राजीव: ओह तो तुम आज बाहर वाले से चुदवा ही ली।

राजीव अब उत्तेजित होकर अपना लंड दबाने लगा और बोला: मज़ा दिया उसने? या बस यूँ ही था? क्या उम्र है उसकी?

मालिनी: पापा ४५ के आसपास होगा और हाँ बहुत मज़ा दिया। और एक बात बोला है कि वो अपनी बीवी को आपसे और शिवा से एक साथ चुदवाना चाहता है। हाँ बदले में वह मुझे भी चाहेगा।

राजीव अब मालिनी को अपनी गोद में खींचकर उसे चूमते हुए बोला: वाऽऽह ये तो बढ़िया बात है। कोई फ़ोटो है उसकी वाइफ़ की? वह मालिनी के होंठ चूसने लगा और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ दबाने लगा। मालिनी भी बहुत दिनों बाद ससुर के हाथों का मज़ा लेने लगी। फिर बोली: पापा मैंने उसे कहा था कि आप दोनों से बात करके मैं उसे बताऊँगी कि हम आगे सम्बंध रखेंगे या नहीं। उसने अपना नम्बर मैसेज किया है। आप चाहो तो बात कर लेना।

राजीव उसके टॉप को उतारते हुए बोला: बहु , शाम को शिवा के आने के बाद फ़ैसला करेंगे। अभी तो मुझे तुमको चोदना है। बहुत दिन हो गए तुम्हारी चूत का मज़ा लिए हुए।

अब वह मालिनी को नीचे करके उसकी ब्रा भी खोला और बारी बारी से चूचियाँ दबाकर चूसने भी लगा। मालिनी भी अपने ससुर को दूध पिलाते हुए आऽऽऽह करने लगी।

अब उसके पेट को चूमते हुए वह नीचे आया और उसकी ट्राउज़र निकाल दिया। मालिनी ने अपनी गाँड़ ऊपर करके उसे निकालने में मदद की। अब नंगी मालिनी को देखकर वह मस्ती से भर गया और अपनी टी शर्ट और लूँगी निकाल कर पूरा नंगा होकर वह मालिनी की जाँघ चूमने लगा।

मालिनी: आऽऽऽऽऽह पापा ६९ करते हैं । मुझे भी आपका चूसना है।

राजीव पीठ के बल लेटा और बोला: आओ बहू मेरे ऊपर आ जाओ । मालिनी उलटी होकर उसके ऊपर आयी और अपनी चूत ससुर के मुँह पर रखी और अपना सिर उसकी टांगों के बीच डालकर उसका मोटा लंड हाथ में लेकर उसका सुपाड़ा खोली और उसे सूंघी और फिर जीभ से उसे चाटने लगी। वह बोली: आऽऽऽह पापा क्या गंध है आपकी। मस्त हो गयी मैं। अब वह अपना सिर ऊपर नीचे करते हुए उसको मस्त चुसाई का मज़ा देने लगी। जल्दी ही वह उसे डीप थ्रोट भी देने लगी। वह बीच बीच में उसके बॉल्ज़ को भी चूसने लगती थी।

उधर राजीव की आँखों के सामने मालिनी के मस्त मोटे मोटे चुतड थे जिनको वो मस्ती से दबा और चूम रहा था। फिर उसने उसकी गाँड़ फैलायी और उसके गुदा के छेद में अपना मुँह डालकर चाटने लगा और जीभ से उसे कुरेदने भी लगा। मालिनी आऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽपा चिल्ला उठी। अब वह उसकी बुर की फाँकों को भी खोला और उसकी गुलाबी बुर देखकर मस्त होकर जीभ से चाटने लगा। जल्दी ही वह उसे जीभ और दो उँगलियों से चोद्ने लगा।

मालिनी को लगा कि पापा की हरकतों से वह झड़ जाएगी। सो वह एकदम से उठी और उलटी होकर सामने की ओर आयी और उसका गीला लंड पकाकर अपनी पनियायी हुई बुर के छेद पर रखी और धीरे धीरे नीचे होकर बैठते हुए उसने पूरा लंड अंदर ले लिया। उसके लंड की मोटायी के अहसास को अपनी चूत में महसूस करके वह सिसकी भर उठी और बोली: आऽऽऽऽह पपाऽऽऽऽऽऽऽ आख़िर कितने दिनों के बाद ये सुख मिला है। पपाऽऽऽऽऽऽ जो मज़ा आऽऽऽऽऽऽपसे मिलता है आऽऽऽऽऽऽह वो किसी और से नहीं मिलता।

यह कहकर वह ज़ोर ज़ोर से कूदने लगी और लंड को अंदर बाहर करते हुए चुदाई में लग गयी। राजीव भी उसके मस्त चूचियों को ऊपर नीचे होता देखकर उनको पकड़ कर दबाने लगा। जब वह निपल्ज़ को मसलता था तब मालिनी हाऽऽऽऽऽय्य पपाऽऽऽऽऽऽऽ चिल्ला उठती थी। कमरा पलंग की चूँ चूँ और फ़च फ़च की आवाज़ों से भरने लगा था।

अब मालिनी बोली: आऽऽऽऽऽह पपाऽऽऽऽ अब रुका नहीं जा रहा। आप ऊपर आकर चुदाई ख़त्म करो।

राजीव उसे बाहों में लपेटे हुए पलटा और ऊपर आकर उसकी जाँघों को अपने कंधे पर रखकर चूत के सामने बैठकर ज़बरदस्त पिलाई करने लगा। मालिनी भी वासना में भरकर अपनी गाँड़ उछालकर उसका साथ देते हुए चिल्लाई: आऽऽऽह पपाऽऽऽऽऽ और जोऊओऊऊऊर से। फ़ाऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दो ना।हाऽऽऽयय्यय चोओओओओओओओओदो ना। पाऽऽऽऽऽपा मैं गयीइइइइइइइइइइइ।

राजीव: आऽऽह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म मैं भी झड़ा बहु राऽऽऽऽऽऽनी।

अब दोनों चिपक कर अपने अपने स्खलन का आनंद लेते हुए शांत पड़े रहे।

मालिनी अपने ससुर के सीने पर हाथ फेरते हुए बोली: आऽऽऽऽऽह पापा आपने तृप्त कर दिया। बहुत प्यासी थी मैं।

राजीव उसके मोटे नितम्बों पर हाथ फेरते हुए बोला: बहू जो मज़ा तुमको चोदने में आता है वह किसी और को चोदने में नहीं आता।

मालिनी: पापा मुझे भी आपसे चुदवाने में सबसे ज़्यादा मज़ा आता है।

वह दोनों एक दूसरे से यूँ ही लिपटे हुए ससुर बहू एक दूसरे के होंठ चूसते हुए प्यारी बातें करने लगे।

 
शाम तक दोनों बहू ससुर लिपटे पड़े थे। राजीव ने मालिनी को एक राउंड और चोद दिया था। फिर दोनों जब चाय पी रहे थे तब मुन्नी और चारु पढ़ाई करके घर आए । दोनों आकर सीधे किचन में गयीं और स्नैक्स खाते हुए बाहर आयीं ।चारु आकर मालिनी के पास बैठ गयी। मुन्नी जाकर राजीव के पास बैठने जा रही थी पर उसने उसे अपने गोद में खींच लिया। और उसके गाल चूमने लगा।तभी उसकी निगाह मुन्नी के टॉप पर पड़ी ।

वो बोला: ये क्या मुन्नी तुम्हारे टॉप यहाँ पर इतना मुड़ा तुड़ा सा क्यों है। वो उसके अमरूदों की ओर इशारा करके बोला।

मुन्नी: ऐसा कुछ नहीं है अंकल। ऐसे ही प्रेस ख़राब हो गयी होगी।

मालिनी: नहीं मुन्नी । साफ़ लगा रहा है कि तुम्हारी छातियों को कोई मसला है। तुम्हारे टॉप इसी वजह से ऐसा हो गया है।

चारु: मुन्नी किसने दबाई तुम्हारी चूचियाँ ?

अचानक मुन्नी रोने लगी। राजीव ने उसके गाल से आँसू पोंछे और कहा: बेटी डरो मत बताओ ये किसका काम है? हम उसे ठीक कर देंगे।

मुन्नी ने आँसूँ पोंछकर कहा: अंकल बस का कंडक्टर और ड्राइवर मुझे तंग कर रहे हैं । उन्होंने मुझे कहा है कि मैंने किसी को बताया तो मुझे जान से मार देंगे।

राजीव: लेकिन इतनी लड़कियों के सामने वो ऐसा कैसे कर सकते हैं ? पूरी बात बताओ कि ये सब कैसे शुरू हुआ?

मुन्नी ने गहरी साँस ली और बोलना शुरू किया: अंकल क़रीब ५/६ दिन पहले बस में स्कूल जाने के समय भीड़ के कारण मुझे सीट नहीं मिली। मैं पीछे की ओर कंडक्टर की सीट के पास खड़ी थी। वह मेरी छातियों को घूर रहा था। उसकी उम्र कोई ५० साल की होगी। तभी मुझे लगा कि मेरी कमर पे किसी का हाथ आ गया है। मैंने मुड़कर देखा तो एक स्वीट सा लड़का था। वो मुझे छूने लगा और सच कहूँ तो मुझे भी अच्छा लगा और मैं चुपचाप मज़ा लेने लगी।

राजीव: ओह फिर क्या हुआ?

मुन्नी: वो मुझे छूता रहा और फिर मेरी स्कर्ट के ऊपर से मेरे चूतडों को दबाने लगा। थोड़ी देर बाद वो स्कर्ट उठकर मेरी जाँघों को सहलाने लगा। और अब पैंटी के ऊपर से मेरी गाँड़ सहलाने लगा। मुझे मज़ा आ रहा था सो मैंने उस प्यारे से लड़के को सब करने दिया। थोड़ी देर बाद स्कूल आया और हम सब उतर गए। ।

स्कूल के बाद जब मैं बस की तरफ़ आ रही थी तो बस का ड्राइवर राजू जिसकी उम्र कोई २५/३० की होगी , मुझे एक पेड़ के पास खड़ा हुआ मिला। वो बोला: मुन्नी ज़रा यहाँ आओ।

मैं उसके पास जाकर बोली: क्या बात है राजू भय्या।

वो मुझे अपने मोबाइल को दिखाकर बोला: देखो इसमें तुम्हारी एक क्लिप है। देख लो ज़रा।

मैंने वो क्लिप देखी और मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी। उसमें मैं साइड से साफ़ दिख रही थी और वो लड़का भी दिख रहा था जिसने मेरी स्कर्ट उठकर मेरी नंगी जाँघे सहलायीं थीं । उसमें मेरी पैंटी में उसकी ऊँगलियाँ मेरी गाँड़ में घुसती हुई साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं समझ गयी कि कमीने कंडक्टर ने मेरी क्लिप बना ली है।

वो कमीनी मुस्कान के साथ बोला: मुन्नी बड़ी मस्त गाँड है तुम्हारी। बड़ा मज़ा करी आज इसके साथ। अब अगर मैं ये क्लिप फ़ेस्बुक में डाल दूँ तो तुम्हारा क्या होगा?

मैं: नहीं नहीं भय्या ऐसा मत करना प्लीज़ मैं बदनाम हो जाऊँगी। मैं रोने लगी।

वो: देखो तुमको हमारी बात माननी होगी। आज तुम आख़री स्टॉप तक बस से नहीं उतरोगी। फिर हम दोनों तुम्हारे साथ थोड़ा सा मज़ा करेंगे फिर तुमको तुम्हारे घर पर छोड़ देंगे। और हमारी बात नहीं मानी तो ये क्लिप तुम्हारे स्कूल के सब बच्चे देखेंगे। बोलो मंज़ूर है?

मैंने चुपचाप हाँ में सर हिला दिया। फिर मैंने सिर उठाया तो मेरी नज़र उसके पैंट के ऊपर बने हुए तंबू पर पड़ी। मैं समझ गयी कि आज मेरा हाल ख़राब होने वाला है।

ख़ैर जब मैं बस में चढ़ी तो मुझे अहसास हुआ कि मेरी स्कर्ट में किसी का हाथ घुसा है। मैंने मुड़ी तो सामने वो बुड्ढा कंडक्टर था और वो कमीनी मुस्कान दे रहा था। मैं जानती थी कि विडीओ क्लिप इसी कमीने ने बनायी है पर क्या कर सकती थी। मैं सीट पर बैठ गयी। और आख़री स्टॉप पर जब बस ख़ाली हो गयी तो मैं अकेली ही बस में बैठी थी। अब कंडक्टर मेरे पास आकर खड़ा हुआ और उसके पैंट का तंबू भी साफ़ दिख रहा था।

मैं: सलीम अंकल मुझे जाने दो और वो क्लिप डिलीट कर दो।

वो: वाह जब स्कर्ट में हाथ डलवा कर गाँड़ मसलवाई थी तब ये नहीं सोचा था? अब हमको भी मौक़ा दो मुन्नी।

मेरी हालत इन दो कमीनों के बीच में फँसी हुई एक मुर्ग़ी जैसी थी जो अब हलाल होने वाली है।

अब दोनों बस को एक सुनसान सड़क पर खड़े किए और मेरे पास आकर खड़े हुए। दोनों के तंबू देखकर मैं डर गयी थी। पता नहीं क्या क्या करेंगे मेरे साथ।

मालिनी: ओह स्साले बड़े कमीने हैं ये दोनों। फिर क्या हुआ??????

 
मुन्नी बताने लगी: फिर वो दोनों मेरे सामने खड़े थे और मैं बैठी थी तभी सलीम ने मेरी एक चूची दबाई और बोला: वाह क्या मस्त चूची है। देखो राजू मज़ा लो यार। अब राजू मेरी दूसरी चूची दबाने लगा। वो अब अपने तंबू मुझे गड़ाने लगे। मेरी तो घिघ्घि बंध गयी थी। फिर उन्होंने मेरे टॉप को उतार दिया और ब्रा को भी ऊपर करके मेरी चूचियाँ नंगी की और मस्ती से दबाने लगे। अब वो निपल्ज़ भी मसल रहे थे और मैं मारे उत्तेजना के सिसकियाँ लेने लगी थीं । ना चाहते हुए भी मुझे बहुत मज़ा आने लगा था। मुझे पैंटी में गीला सा महसूस हो रहा था।

मुन्नी बताए जा रही थी। और राजीव उसे गोद में बैठाकर उसकी जाँघ सहला रहा था। वो बोली: फिर वो झुके और मेरी चूचियाँ चूसने लगे। मेरी हालत ख़राब होने लगी थी। फिर उन्होंने अपना अपना लंड बाहर निकाला।

चारु: कैसा था उनका लंड?

सब चौंक कर उसे देखे तो वो शर्मा गयी।

मुन्नी: दीदी एक दम काला और बहुत मोटा था और बहुत बाल थे। और बहुत बास भी मार रहे थे। सलीम का तो पूरा नसों से भरा हुआ था। वो उम्र में भी बड़ा है ना। फिर वो मेरे दोनों हाथ खींच कर अपने अपने लंड पर रखे और मैं उनको सहलाने लगी। वो अब मेरी चूचियाँ दबाते हुए मेरी स्कर्ट उठाने लगे। मेरी पैंटी में उनके हाथ घुसने की कोशिश कर रहे थे। फिर सलीम बोला: मेरा लंड चूस साली। मैं बोली: छी इतनी बास आ रही है । पहले धो कर आओ। वह हँसा और एक बोतल में से पानी निकाल कर बस के अंदर ही अपना लंड पानी से साफ़ किया। फिर मेरे टॉप से लंड को पोंछकर मेरे मुँह के सामने ले आया। अब मेरे पास कोई चारा नहीं था सो मैंने अपना मुँह खोला और उसका लंड मेरे मुँह में घुस गया। अब वह क़मर हिलाकर मेरे मुँह में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा।

उधर राजू ने भी अपना लंड साफ़ किया और वो भी मेरे पास आकर मेरे गाल से अपना लंड रगड़ने लगा। सलीम ने अपना लंड बाहर निकाला और राजू ने मेरे मुँह में डाल दिया। अब मैं बारी बारी से उनका चूस रही थी।

मालिनी अपनी बुर खुजाकर: यार तुझे तो अब मज़ा आने लगा होगा?

मुन्नी: हाँ दीदी। अब मैं भी मस्ती से चूसने लगी थी और उनका चूची मर्दन तो जारी ही था। तभी राजू आऽऽऽह करके मेरे मुख में पानी छोड़ने लगा। मैंने उसे हटाने की कोशिश की पर वो मेरे मुँह में अपना लंड पेलता ही रहा। मुझे उसका थोड़ा बहुत वीर्य पीना ही पड़ा बाक़ी का मैंने थूक दिया।

उधर अब सलीम ने मुझे बस की सीट पर लिटाया और मेरी स्कर्ट उठाकर मेरी पैंटी नीचे करके बाहर निकाल दी। अब वो मेरी पैंटी राजू को दिखाकर बोला: देख साली कितनी गरम हो गयी है पैंटी एकदम गीली है। फिर उसने मेरे पैरों को फैलाया और बोला: उफ़्फ़्फ राजू देख साली की चूत कितनी मस्त है? यह कहकर वो मेरी चूत में नाक डाला और सूँघा और बोला: उफ़्फ़्फ़्फ क्या मस्त गंध है । अब वो मेरी चूत को मूठ्ठी में लेकर मानो भींचने लगा। मेरी हालत पस्त हो रही थी। फिर वह अपना मुँह अंदर डालकर मेरी बुर चूसने और चाटने लगा। मेरी उइइइइइइइ निकलने लगी। और अगले ५ मिनट में ही मैं झड़ गयी और वो पूरा पानी पी गया।

तभी किसी कार के रुकने की आवाज़ आयी तो वह जल्दी से मुझे छोड़ा और मेरी पैंटी को अपनी जेब में डालकर बोला: चल कपड़े ठीक कर। मेरे को तो आज तेरी पैंटी से ही काम चलाना पड़ेगा। इसी में मूठ्ठ मारूँगा। मैं जल्दी से अपने कपड़े ठीक की और वो भी ड्राइवर की सीट पर बैठकर बस को दौड़ा दिया। मैंने देखा कि वो कार जो पास आकर मुझे बचाई थी उसमें भी एक जोड़ा आपस में लिपटे हुए थे। शायद इसीलिए उस सुनसान सी जगह पर आए थे और मेरी जान बच गयी। फिर वो मुझे उतार दिए मेरे स्टॉप पर और बोले: ख़बरदार अगर किसी को बताया तो।

मैं डर गयी थी और मैंने किसी को नहीं बताया।

मालिनी: अरे हमको तो बता दिया होता। फिर आज भी तंग किए क्या?

चारु: आज चोद दिए क्या?

राजीव ने गोद में बैठी मुन्नी की पैंटी में ऊँगलियाँ डाली और कहा: लगता तो नहीं है कि आज चुदी है ये।

मुन्नी: नहीं अंकल आज तो बाल बाल बच गयी। पर कल तो बुरी तरह से चोदा था दोनों ने।

मालिनी: ओह कल क्या हुआ?

मुन्नी: उस दिन के बाद तो मैं एक दिन डर के स्कूल नहीं गयी । बीमारी का कह कर घर में ही रही। पर अगले दिन जब गयी तो राजू बोला पास आकर फुसफुसाया: : कल क्यों नहीं आयी?

मैं: तबियत ठीक नहीं थी।

राजू: साली कुतिया , ख़बरदार जो नहीं आयी और किसी को बताया तो। आज साली तेरी चूत फाड़ेंगे ।

मैं चुप चाप स्कूल आने पर बस से उतर गयी। शाम को वापस आने के समय एक मैडम भी बस में चढ़ी और बोली: आख़री स्टॉप कौन सा है?

राजू: जी गांधी चौक। ठीक है मुझे वहीं उतार देना।

मैं मन ही मन ख़ुश हो गयी कि आज तो बची। मेरे स्टॉप पर मैं उतरी और मैडम के साथ होने के कारण कुछ हुआ नहीं।

पर कल सब गड़बड़ हो गया। वो मुझे लेकर उसी जगह बस को रोके और इस बार मुझे पूरा ऊपर से और नीचे से नंगी करके दोनों मेरे ऊपर चढ़ से गए। मेरी चूचियों को दबाकर और चूसकर मुझे बेहाल कर दिए। फिर राजू सीट पर बैठा और मुझे सीट पर खड़ा करके मेरी चूत चाटने लगा और सलीम पीछे से मेरे चूतडों को चूम चाट कर मेरी गाँड़ के छेद को चाटने लगा। मैं समझ गयी कि मैं बुरी तरह से फँस गयी हूँ। थोड़ी देर बाद राजू नीचे सीट पर लेटा और मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और सलीम ने उसका लंड पकड़कर मेरी बुर में सेट किया। अब राजू ने नीचे से धक्का मारा और उसका मोटा लंड मेरी चूत में घुसता चला गया। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कितना अच्छा लगा था। उधर ढेर सारा थूक लगा कर मेरी गाँड़ में सलीम ऊँगली कर रहा था और फिर उसने भी अपना लंड मेरी गाँड़ में सेट किया और मैं चीख़ उठी। जैसे कोई मोटा बाँस मेरी गाँड़ फाड़कर अंदर घुस रहा हो।

अब वो दोनों मुझे चोदने लगे। मैं शुरू के दर्द से उबरी और फिर मेरी चूत गीली होती चली गयी। उफ़्फ़्फ कितने चुदक्कड है दोनों। क़रीब आधा घंटे तक ज़बरदस्त चुदाई करने के बाद मेरे छेदों में अपना माल गिराकर हाँफने लगे। राजू: आऽऽऽह अंकल मज़ा आ गया। क्या बुर है साली की। गाँड़ कैसी है अंकल?

सलीम हाँफता हुआ: उफ़्फ़्फ मत पूछ । क्या मस्त चिकनी मलाई गाँड़ है। मज़ा आ गया साला।

राजू मेरी चूची चूसकर: अंकल तो एक एक राउंड और हो जाए छेद बदल कर।

सलीम कमीनी हँसी के साथ: हाँ हाँ क्यों नहीं। मैं मूत कर आता हूँ।

मैं रोकर बोली: अब जाने दो मुझे प्लीज़।

राजू: हाँ हाँ बेबी एक राउंड और चोद कर तुझे तेरे घर तक छोड़ आएँगे।

मैं रुआंसी होकर बोली: मुझे भी पेशाब आयी है।

सलीम: हाँ हाँ चलो नीचे उतरो यहाँ कोई नहीं है।

मैं: क्या मैं ऐसे नंगी उतरूँ? मेरे कपड़े दो।

सलीम: अरे यहाँ हम ही है। ये सुनसान जगह है। मेरा हाथ पकड़ना उतारा और मैं पूरी नंगी नीचे आकर एक कोने में बैठी और पेशाब करने लगी। सलीम और राजू आकर मेरे सामने खड़े हुए और मुझे पेशाब करते देखने लगे। मेरी पेशाब से सीटी की सामान्य सी आवाज़ आ रही थी। उन दोनों ने भी मेरे सामने ही पेशाब करना शुरू किया। उनके लंडों से मोटी धार निकल रही थी और मैं भी उत्तेजित होने लगी थी। उनके लंड भी अब खड़े होने लगे थे। माहोल ही काफ़ी सेक्सी हो गया था।

अब हम सब बस के अंदर आए और वो दोनों मुझे चूमने और चूसने लगे। फिर इस बार सलीम ने खड़े हुए मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मैंने अपने दोनों पैर उसकी क़मर पर रखे और हाथ उसके कंधों पर रखे ताकि गिर ना जाऊँ। अब वी नीचे को झुका और खड़े खड़े ही अपने खड़े लंड को मेरी बुर में पेल दिया। राजू भी पीछे से खड़े खड़े थूक लगाकर मेरी गाँड़ में अपना लंड पेल दिया। उफ़्फ़्फ़्फ क्या बताऊँ अंकल दोनों ने बिना समय गँवाते हुए मेरी डबल चुदाई शुरू की। मैं अब मस्ती से दोनो छेदों में मोटे मोटे लंड का मज़ा ले रही थी। सलीम उत्तेजना से चिल्लाने लगा: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त बुर है तेरी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कोई रँडी भी साली क्या मज़ा देगी आऽऽहहह।

राजू: आऽऽऽऽऽह सही कहा अंकल। उफ़्फ़्फ़्फ मस्त टाइट गाँड़ है कुतिया की। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मादरचोद मैं तो गया। वह झड़ते हुए चिल्लाया। उधर सलीम ने मुझे खड़े खड़े ही क़रीब ३५ मिनट चोदा। मुझे तो याद नहीं कि मैं कितनी बार झड़ी। मैं इतनी पस्त हो गयी थी कि मुझे कपड़े भी उन दोनों ने ही पहनाए। किसी तरह मैं घर पहुँची थी।

चारु: ओह तो फिर आज क्या हुआ?

मुन्नी: आज भी वो मुझे ले जाने वाले थे। पर हुआ यूँ कि मैं पीछे सीट पर बैठी थी और कुछ भीड़ कम होने के बाद राजू मेरे पास आकर खड़ा हुआ और मुझे गंदे इशारे करने लगा। उसका मोबाइल उसके जेब में था। उसी समय दो लड़कों में लड़ाई हो गयी। वो उनको अलग करने गया तो उसका मोबाइल उसकी जेब से गिर गया। मैंने चुपके से उसे उठा लिया। वह अब उस लड़के की पट्टी कर रहा था जिसे ज़्यादा चोट लगी थी। मैंने उसके मोबाइल से वो विडीओ डिलीट कर दिया। तभी वह आया और मुझसे मोबाइल वापस लिया। मैंने कहा: मैंने विडीओ डिलीट कर दिया है। अब तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

तब तक २ बच्चे ही बस में थे और वो भी आगे बैठे थे। वह ग़ुस्सा हो गया और बोला: मेरे पास कॉपी है।

मैं उसे चेक करने के लिए बिना डरे बोली: ठीक है अब तुमको जहाँ पोस्ट करना है कर दो मैं अब तुम्हारी कोई ग़लत बात नहीं मानूँगी। इस पर वो ग़ुस्सा हुआ और मेरे पास आकर मेरी चूचियाँ दबाने लगा और बोला: साली रँडी तुझसे मैं बाद में निपटूँगा । उसके फ़्रस्ट्रेशन से मैं समझ गयी कि उसके पास कोई कॉपी नहीं है।

मैं किसी तरह उसका हाथ झटकी और उठकर खड़ी होकर चिल्लाई: बस रोको मुझे उतरना है वरना मैं शोर मचाऊँगी।

राजू जाकर ड्राइवर को शायद मोबाइल वाली बात बताया। सलीम ने गाड़ी रोकी और मैं उतर गयी और ऑटो लेकर घर आयी हूँ।

राजीव: कल स्कूल जाकर दोनों को नौकरी से निकलवाता हूँ।

मुन्नी: छोड़िए अंकल अब मै बस से नहीं जाऊँगी। शेयर्ड ऑटो इससे ज़्यादा अच्छा होगा।

राजीव उसकी बुर में ऊँगली डालकर उसे गरम कर दिया था। मुन्नी बोली: आऽऽह अंकल कुछ करोगे या बस ऊँगली ही करते रहोगे?

राजीव: अरे मुन्नी आज बहुत दिनों बाद तेरी दीदी को दो राउंड चोदा है। अब साला ये लंड कहाँ खड़ा होगा। चल तेरी बुर चूस देता हूँ। यह कहकर वो उसकी पैंटी निकाला और उसे सबके सामने सोफ़े पर लिटा दिया। उसकी टाँगें फैलाकर उसकी बुर में अपना मुँह घुसा दिया और आवाज़ के साथ सड़प सड़प चूसने लगा। मुन्नी उइइइइइइइ मॉआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽहह कहकर झड़ने लगी। राजीव ने अपना पूरा गीला मुँह उसकी जाँघों के बीच से बाहर निकाला और आस्तिन से मुँह पोंछ कर बोला: साला सलीम और राजू की क्या ग़लती है। इसकी बुर है ही इतनी स्वाद। म्म्म्म्म्म्म्म ।

इस पर सब हँसने लगे। मुन्नी हँसती हुई अपनी पैंटी पहनी।

 
शाम को शिवा आया तो सब सोफ़े चारु और मुन्नी बातें कर रहीं थीं। मालिनी किचन में थी और राजीव अपने कमरे में गुड़िया को सम्भालते हुए टी वी देख रहा था।

चारु: आज जिजु तो बहुत स्मार्ट लग रहे हैं । क्या बात है?

शिवा आकर उसके गाल सहलाकर बोला: क्या बात है बड़ी ख़ुश नज़र आ रही हो।

चारु: ख़ुश तो मुन्नी है क्योंकि अंकल से चूत चटवाई है ।

मुन्नी: तू जिजु का लंड चूस ले ना। तू भी ख़ुश हो जा।

शिवा हँसकर: अभी मुझे तुम्हारी दीदी का ध्यान रखना है। बहुत चुदासी हो रही है वो?

मुन्नी: कोई चुदासी नहीं है वो । आज पापा ने दो राउंड ठुकाई की है उनकी। आप भी तो ठोक चुके हो ना।

शिवा: अरे ये प्यास ऐसे नहीं बुझेगी । आज रात को हम दोनों बाप बेटा चुदाई करेंगे उसकी। यह कहता हुआ वो किचन में गया और मालिनी को पीछे से पकड़कर प्यार करते हुए बोल : क्या हाल है हमारी जान का? पापा ने दो राउंड चोद दिया, ऐसा मुन्नी बोल रही थी।

मालिनी हँसकर : हाँ बहुत मज़ा आया। अब रात को दोनों बाप बेटा लेना मेरी जैसे पहले लेते थे।

शिवा: क्यों नहीं मेरी जान। वो उसकी चूचियाँ दबाकर उसके मस्त पिछवाड़े में अपना आधा खड़ा लंड दबाकर बोला।

मालिनी भी मज़े से बोली: आऽऽऽऽह मस्त लग रहा है। वह अपनी गाँड़ उसके लंड पर घुमाती हुई बोली : जाओ फ़्रेश हो जाओ । खाना लगाती हूँ।

शिवा: ठीक है जान चलो फ़्रेश होता हूँ। वह उसकी गाँड़ दबाकर बाहर आ गया।

सब खाना खा रहे थे और चूहल भी जारी थी। सब एक दूसरे को छेड़ रहे थे। अचानक चारु बोली: आपकी मम्मी (सरला) का फ़ोन आया था। हम दोनों को बुला रही हैं । कह रहीं थीं कि कुछ दिनों के लिए आ जाओ।

मालिनी: ओह तो चले जाओ ना कुछ दिनों के लिए। राजेश भाई के लंड का भी मज़ा ले लेना।

चारु मुँह बना कर: उनको चाची से फ़ुर्सत मिलेगी तब तो वो हमारी लेंगे ना। उनकी जान तो चाची में ही बसती है।

मालिनी: हाँ यह तो है कि वो मम्मी का दीवाना है।

मुन्नी: हाँ चलो एक चक्कर मार ही आते हैं वरना चाची को बुरा लगेगा।

अब यह तय हो गया कि दोनों लड़कियाँ कल सुबह अपनी चाची के घर जाएँगी और शिवा उनको सुबह बस स्टॉप तक छोड़ कर आएगा।

खाना खाकर सब सोफ़े पर बैठ कर बातें कर रहे थे। फिर चारु और मुन्नी अपने कमरे में चली गयीं क्योंकि बाप बेटा दुकान का हिसाब देखने लगे।

मालिनी किचन से आइ और लड़कियों के कमरे में जाकर बोली: देखो आज मैं बहुत दिनों के बाद बाप और बेटे दोनों से एक साथ चुदवाऊँगी । तुम लोग बीच में नहीं आओगे ।

मुन्नी: ही ही लगता है दीदी बहुत प्यासी हो रही हो?

मालिनी: और क्या तुम लोग इतने दिनों से मज़े कर रही हो मेरे सामने, मुझ पर क्या बीती होगी तुम क्या जानो? चलो तुम सो जाओ मैं चलती हूँ।

मालिनी बाहर आयी तो बाप बेटा अभी भी हिसाब में व्यस्त थे। वह अपने कमरे में गयी और शॉवर लेकर अपनी चूत और गाँड़ में सेण्ट लगायी जो कि राजीव उसके लिए लाया था । फिर उसने एक लेस वाली पारदर्शी सी लिंगरी निकाली और ब्रा पहनी। वो शीशे में देखी । आधी से भी ज़्यादा चूचियाँ तो नंगी ही थीं । फिर वह पैंटी पहनी जिसमें से उसकी शेव्ड चूत का फूला हुआ हिस्सा और बीच की फाँक साफ़ समझ आ रही थी। वो मुड़ी और पिछवाड़ा चेक करी। गोल गोल चूतड़ पूरे नंगे थ और फाँको के बीच में फँसी रस्सी ऊपर से ही दिख रही थी । गाँड़ की गहराइयों में तो मानो गुम सी हो गयी थी। फिर उसने एक लाल रंग की नायटी पहनी और अपने आप को देखकर वो ख़ुद ही अपने आप पर मस्त हो गयी। भरी पूरी बदन की मालिकन मालिनी ख़ुद को देखकर मस्त हो गयी। सच में एक बच्चा होने के बाद बदन बहुत ही भर गया था। और ye मांसल बदन अब ज़बरदस्त चुदाई माँग रहा था। वो एक मादक अंगड़ाई ली और अब चेहरे ka मेकअप किया और बाहर आयी।

वहाँ अब भी बाप बेटा हिसाब में लगे थे। मालिनी को देखकर शिवा की आँखें फैल गयीं।

मालिनी: क्या आज रात भर यही हिसाब होते रहेगा क्या? और मेरा क्या होगा? वो मटक कर बोली।

तभी राजीव ने सिर उठा कर देखा और देखता ही रह गया अपनी कामुक बहू को। वो बोला: अरे भाड़ में जाए ये हिसाब। इसका क्या है कल हो जाएगा। पर बेटी तुम्हारा ख़याल तो अभी रखना ही पड़ेगा। वाह क्या माल लग रही हो।

उधर शिवा उसे खींचकर अपनी गोद में बिठाया और उसके गाल चूमा और बोला: क्या लग रही हो? ये नायटी तो पापा लाए थे ना तुम्हारे लिए।

राजीव: हाँ यार वही है। अरे ज़रा हमारे पास भी आओ ना। वो उठकर राजीव के पास आयी। राजीव ने उसके मस्त चूतडों पर हाथ फेरकर कहा: उफ़्फ़्फ़्फ बहू क्या मस्त गाँड़ हो गयी है तुम्हारी। आज तो मैं गाँड़ मारकर रहूँगा।

मालिनी: पापा जो मारना है मार लो पर अपने बेडरूम में तो चलो।

अब राजीव और शिवा खड़े हुए और आगे आगे मालिनी अपनी गाँड़ को मॉडल की तरह मटका कर चल रही थी और पीछे पीछे ससुर और उसका पति अपना लंड दाबकर मस्ती में भरते हुए चल रहे थे। तीनों बेडरूम में घुसे और राजीव ने कमरे को बंद कर दिया। मालिनी की पैंटी गीली हो चली थी। उसके निपल्ज़ कड़े होकर तन गए थे। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आज कितने दिनों के बाद वो अपनी पुरानी चुदाई का मज़ा लेगी: वो सोची।

आगे: अगले अप्डेट में———

 
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