S
StoryPublisher
Guest
लेखक:-रोनी
मैं तीस साल का युवक हूँ कद 5’6″ एवं स्मार्ट हूँ, सागर विश्वविद्यालय से स्नातक किया है, इंजीनियर बनाने की चाहत थी पर बन नहीं पाया परिस्थितियाँ ही कुछ ऐसी थी पर भवन निर्माण के काम करने की चाहत थी सो वह काम करने लगा।
ठेकेदारी से नवनिर्माण एवं पुराने मकानों में सुधार एवं सजावट का काम करके भी आजीविका ठीक से चल जाती है, उन्हें वास्तु के हिसाब से सुधार करना एवं नया रूप देना हमारे शौक एवं कमाई दोनों को पूरा करता है।
इस काम के लिए मैंने ऑफिस नहीं बनाया बल्कि मोबाइल से ही मुझे इतने ऑर्डर मिलते रहते हैं कि काम करने का समय तय करना मुश्किल हो जाता है। जब समय मिलता है तो आर एस एस पे कहानियाँ पढ़ता हूँ एवं सेक्सी साईट पर सर्फिंग अच्छा लगता है।
अब मतलब की बात पर आते हैं! मेरे साथ हुई एक खूबसूरत घटना जो एकदम सत्य है, आपको लिख रहा हूँ।
तो हुआ यूँ 21 मार्च 2011 को दोपहर में मेरे मोबाईल पर फोन आया जो मिस्टर पी.एल.पाण्डेय (बदला हुआ नाम) ब्रांच मैंनेजर का था जो पास की तहसील के एक बैंक में कार्यरत हैं, उन्होंने पूछा- मैं अपने पुराने बाथरूम को नए तरीके से बनाना चाहता हूँ, क्या तुम इसे बना सकते हो? इसका क्या खर्चा होगा?
क्यूंकि मेरा अन्य जगह पर काम चल रहा था तो मैंने कह दिया कि शाम सात बजे तक आ जाऊँगा।
उन्होंने कहा- ठीक है।
काम में व्यस्तता के कारण समय का पता ही नहीं चला और रात के आठ बज गए। पाण्डेय जी का फोन आया तो मैंने उन्हें सॉरी कहकर अगले दिन आने को कह दिया।
तो उन्होंने कहा- सुबह दस बजे तक जरूर आ जाना!
और फोन कट गया। अगली सुबह नौ बजे बाइक से मैं निकल पड़ा लेकिन पाँच किलोमीटर ही चला था कि टायर पंचर हो गया। साढ़े दस तक पंचर बनवाकर 11 बजे पाण्डेय साहब के घर पहुँचा।
पुराना लेकिन शानदार मकान बना था। गेट के बाहर बाइक को छोड़कर अन्दर गया, बगीचे में सुन्दर पौधे और फूल लगे थे।
मुख्य दरवाजे पर पहुँच कर घण्टी बजाई तो थोड़ी देर में एक महिला ने दरवाजा खोला जो इतनी खूबसूरत थी कि मैं उसे देखता रह गया।
उसने पूछा- क्या काम है?
मैंने कहा- पाण्डेय साहब से मिलना है बाथरूम की रिपेयरिंग के लिए!
तो वह बोली- मैं मिसेज़ रमा पाण्डेय (बदला हुआ नाम) हूँ, साहब बैंक चले गए है आप अन्दर आकर बाथरूम देख लीजिये। उसके बाद बैंक जाकर साहब से मिल लेना।
वो मुझे अन्दर ले गई और बैठक में बिठाकर रसूई की ओर चली गई। रमा पाण्डेय ने उस समय आसमानी रंग की झालरदार और सुन्दर मेक्सी पहनी थी, जिसका गला बहुत ही गहरा था, अन्दर की गोलाइयों के बीच की घाटी साफ दिखाई दे रही थी, उनकी उम्र 32 के आसपास होगी फिगर 34-30-36 होगा, पीछे से उसकी चाल और उसकी गाण्ड की
गोलाइयों को देखकर मन विचलित होने लगा। मन पर काबू करके मैंने मकान का जायजा लिया, अन्दर से भी बहुत शानदार कोठी थी, सारा सामान करीने से सजा हुआ था।
तभी वो ट्रे में पानी का गिलास और जूस लाई और मेज़ पर रख दिया। रखते समय मम्मों की झलक देख कर मेरे लिंग में तनाव पैदा होने लगा।
मैं जूस पीने लगा तो उसने बताया कि साहब को दो दिन के दौरे पर जाना है आप बाथरूम में लगने वाले सामान की लिस्ट बनाकर साहब को उनके जाने के पहले बैंक में दे देना।
फिर मैं उनके साथ बाथरूम देखने के लिए चलने लगा। सामने गैलरी में दो दरवाजे दिखे, एक साहब के बेडरूम में खुलता है और दूसरा बाथरूम में! बाथरूम का दरवाजा खोला तो उसमें से तेज गंध आई जैसे वहाँ पर हवा का आना-जाना न हो।
अन्दर जाकर देखा तो 8 बाई 10 का कमरा था। मेरे हिसाब से इतनी जगह बाथरूम के लिए पर्याप्त होती है। इसमें एक दीवार की ओर टोयलेट सीट लगी थी उसके सामने की दीवार पर 1 बाई 1 फ़ुट का छोटा रोशनदान लगा था, बीच की एक दीवार पर नल और सामने की दूसरी दीवार पर पुराना सा शॉवर लगा था। कुल मिला कर पुराने समय का बाथरूम था।
मैंने पूछा- मैडम, आप को कैसा बाथरूम बनवाना है?
बोली- मुझे यहाँ पर मार्डन टाइप बाथटब जिसमे हैंड-शॉवर, ठंडा-गर्म पानी के नल हों, एक दीवार पर सुन्दर सा शॉवर जो बाथरूम के मध्य में हो, वाशबेसिन, सुन्दर से नल, 5 फीट ऊँचाई तक सुन्दर टाइल्स, जमीन पर मारबल और अच्छा सा दरवाजा!
तब मैंने कहा- मैडम, अगर आप बुरा न मानें तो मैं एक सुझाव देना चाहता हूँ।
तो वो बोली- हाँ जरूर! इसीलिए तो आपको बुलाया है!
तब मैंने कहा- मैडम बाकी सब तो आपने सही चुना है, मैं चाहता हूँ कि आपके बाथरूम में रोशनदान बड़ा हो हवा और रोशनी के लिए, क्यूंकि रोशनदान के नीचे की दीवार खाली है। मैं चाहता हूँ कि यहाँ पर आदमकद दर्पण लगना चाहिए क्यूंकि नहाते वक्त अपने आप को दर्पण में देखना बड़ा ही सुखद और आनंददायक लगता है!
यह सुनते ही उसके होंठों पर हल्की मुस्कान, गालों पर लाली छा गई और शायद शर्म के कारण चेहरा घुमाकर दूसरी ओर देखने लगी।