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बिनाश दूत बिकास-विकास की वापसी complete

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" हैरी......!" जैकी ने भावुकता में भरकर जोर से उसे पुकारा---" मेरे बेटे!” --"म्याऊं-म्याऊं. !" हैरी के मुख से निकला और साथ ही वह सहमकर पीछे हट गया ।

" हैरी...हैऱी !" जैकी जैसे पागल होकर चीख उठा------" क्या हुआ हैरी?"

पुन: हैरी के मुख से बिल्ली की भाति ' म्याऊ-म्याऊ' निकला और इस बार सहमकर वह पलंग के नीचे घुस गया । जूलिया जैकी से लिपटी बुरी तरह सिसंक रही थ्री । जैकी ने म्याऊं-म्याऊ' करते हैरी के गले में एक टिन की प्लेट लटकी हुई थी, जिस पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा था ।

किसी समय ये मेरा दोस्त रह चुका है लेकिन अब दुश्मन है क्योकि इस वारं यह मुझसे टकराना चाहता था । अब जरा इसे देख लो, ये बिल्ली बिकास से टकराएगी-बेवकूफ ।

विनाशदूत विकास ।

जैकी की आंखें लाल होती चली गईं, जैसे अंगारे दहकते चले जाएं । उसका दिल विकास के प्रति घृणा से भर गया । सारा जिस्म मे तनाव आ गया । क्रोध से कांप उठा ।

वह बुदबुदा उठा…"बिकास । जैकी तुम्हें पाताल में भी जिंदा नहीँ छोड़ेगा ।”

चौंककर जूलिया ने जैकी की ओर देखा । अपने पते की भाव-भंगिमा देखकर जूलिया काप उठी ।

जैकी के आंखों में लहू था । दृष्टि शून्य में टिकी हुई थी ।
 
विकास की वापसी

विकास के आंख दबाते ही बिजय चोंक पडा । एक वार उसने अलफांसे की और देखा बोला-----" प्यारे लूमड खां ।। ये साला चेला तो गुरु वन गया । क्यो प्यारे दिलजले! तुम यहां अलादीन के चिराग की भांति कैसे पैदा हो गए?”

“बाईं दी वे गुरू! " विकास मोहकता के साथ बोला……"मगल का सम्राट आपका बच्चा है । जानता है कि गुरु लोग कहां जा सकते हैं !"

…“तो प्यारे, अब हमं यहां आ गए !" बिजय ने कहा-----"अब तक तुमने जो किया है, वह इतना हो चुका है कि अगर मैं तुम्हारा क्रिया क्रम कर दूं तो.... तो दुनिया हमें पुष्पहार पहनाएगी ।"

“गलत गुरू !" विकास ने उसी संयमता के साथ कहा… जो काम आप कर नहीं सकते वह कहने से क्या लाभ?"

"क्या कहा वे।” बिजय एकदम अपनी दोनो बांहे चढाता हुआ बोला----- " साले गुरू लोगों से टकराता है यानी कि आखें दिखाता हैं! बेटा कैलेंडर बनाकर दीवार पर चिपका दूगा ।”

अलफासे आश्चर्यजनक रूप से शात था । अशरफ भी खडा हो चुका था । वह आश्चर्य के साथ बिकास को देख रहा था ।

“अरे आप तो बुरा मान गए गुरू !" विकास गिरगिट की तरह एकदम रग बदलता हुआ बोला-" मैं तो मजाक कर रहा था ! असंल बात तो यह है कि आपको लेने आया हूं !"

……“जो तुम कह रहे हो बेटा दिलजले, वह कभी नहीं कर सकते ।" कहते हुए विजय ने कमाल कर दिया । विकास तो विकास, अशरफ और अलफांसे तक कुछ न समझ सके ।

इतनी अधिक फुर्ती से विजय ने विकास के जबड़े पर घूंसा मारा था , वैसी फुर्ती किसी ने नही देखी थी. हालांकि विकास अपनी तरफ़ से वेहद सतर्क था, लेकिन विजय भी आखिर उसका गुरु था ।। एक ही घूसे में विकास फिरकनी की तरह घूम गया और धड़ाम से गिरा ।

विजय जानता था कि लड़का भी पहुंचा हुआ है, इसलिए तेजी से झपटा,लेकिन...।

बीच में आ गया अलफांसे!

जैसे ही विजय विकास पर झपटा, अलफांसे के बूट की जोरदार ठोकर उसके चेहरे पर पड़ी ।

विजय के कंठ से एक चीख निकल गई और वह तुरंत दूसरी ओर पलट गया । विजय को सोचने का मौका ही नहीं मिला, लेकिन अशरफ अलफांसे की विचित्र हरकत पऱ अवश्य अवाक रह गया ।

विद्युत गति विजय झुंझलाकर खडा हो गया था लेकिन अलफांसे विजय और विकास के बीच कूल्हों परे हाथ रखे खडा था । उसकी पीठ विकास की ओर थी और वह बिजय घूर रह्य था ।

" अरे बेटे लूमडखान । ये क्या गिरगट की तरह रग बदल रहे हो?”

.…" अगर इस बार विकास पर हाथ उठाया जासूस बेटे तो तोडकर जेब में रख दूगा ।" अलफांसे गुर्राया-‘लडका जो कर रहा ठीक कर रहा है ।"

.……"देखा प्यारे झानझरोखे ।" विजय ने अशरंफ़ की ओर देखकर भटियारिन की भाति हाथ नचाकर कहा-"इस साले लूमड को अपने साथ रखना भी जुर्म है । हमारा नाम भी विजय दी ग्रेट है । तुम्हारे भी कस-बल ढीले करने पड़ेगे ।" कहता हुआ विजय वास्तव में अपने आपको विकास और अलफांसे से टकराने के लिए तैयार करने लगा ।

" तुम्हारी बुद्धि को जंग लग गया है जासूस प्यारे ।" अलफांसे सतर्क होकर बोला--" अब विकास पूरी तरह अपराधी वन चुका है, जबकि शुरू से हमारा उद्देश्य यह था कि अपराधी न बने । हम इसे वापस लेने आए थे लेकिन हम हार गए । हमारे यहां पहुंचने से पहले ही यह इतना आगे निकल गया है कि अब इसका लौटना एकदम असंभव है ।

अब इसका लौटना एकदम असंभव है । यह अपराधी बन चुका है । विश्व इसे माफ़ नहीं करेगा । फिर क्यों न इसे अपने उद्देश्य में सफल हो जाने दे? जव यह अपराधी बन ही गया तो इसे अपना कार्य पूरां करने दो । अमेरिका विश्व, के अन्य देशो का, नासूर है । खत्म हो जाने दो उसे !”

“बेटा लूमढ़, क्या तुम्हारी बुद्धि उलट गई है?"

"अब कुछ नहीं होगा विजय, अलफांसे दृढ़ स्वर में बोला…"मैं विकास के-साथ हूं ।"

तभी-एक अन्य आश्चर्य हुआ । अचानक विकास की एक जोरदार ठोकर अलफांसे की पीठ पर पडी ।

अलफांसे को विकास से इस अजीब हरकत की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वह स्वयं को -संभाल नहीं सका और वेग के साथ सीधा विजय से जाकर टकराया, तभी पीछे से बिकास बोला---"क्षमा करना गुरु! बच्चा ,गुरु लोगों की नस-नस पहचानता है ।"

" क्या मतलब?" अलफांसे ने चौंकने का अभिनय किया ।

"मतलब को हाजमे की गोली खिलाओ प्यारे लूमड़खान ।" बीच में टपका विजय-" हम दोनों ने ऐसा चेला तैयार किया है कि एक दिन ये हमें गंजा करके एक-दूसरे की चुटिया बांध देगा । गुरु लोगों की चाल को भी समझ गया ।"

" क्षमा करना गुरु! वास्तव में मैं आपकी चाल समझ गया था ।" विकास ने कहा-"आप लोग ऐसा प्रदर्शित कर रहे थे जैसे एक-दूसरे से झगड़ा कर रहे हो जबकि अलफांसे गुरु आप मेरे बनकर मेरा ही बंटाधार करने पर तुले हुए थे ।"

विजय और अलफांसे ने चमत्कृत-सी निगाहों से विकास को देखा ।

अशरफ की तो जैसे खोपड्री ही में चकरा रही थी । उसने तो स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि विजय और अलफासे एक योजना-के अंतर्गत एक…दुसरे से लड़े । इससे भी यह एक बार पुन: विकास से बेहद प्रभावित हुआ ।

यह लड़का गुरु लोगों की साजिश में नहीं आया था ।

" विकास !" अलफांसे गुर्रा उठा-" माना कि तुम बेहद चालाक हो लेकिन तुम अपनी शक्ति के सामने गुरु का आदर करना भी भूल गए हो । याद रखो, अब मंगल पर अलफांसे आ चुका है और जब तक मैं नहीं चाहूगा विकास, तुम कुछ कर नहीं सकोगे । हमने इसलिए ही ट्रेड नहीं किया था कि उस शक्ति को गलत कार्यों में प्रयोग करो ।। माना कि आज तुम शक्तिशाली हो गए हो । यह भी माना क्रि इस समय तुम मंगल-सम्राट हो । यह भी माना कि विश्व के खूंखारतम अपराधी तुम्हारे नाम से कांपते हैं ।

यह माना कि विदेशी जासूसों के दिमाग पर तुम्हारा भूत सवार है ।। और यह भी मानता हू विकास र्कि वास्तव में तुम उन सबसे शक्तिशाली भी हो लेकिन हमसे टकराने की कोशिश मत करो विकास घाटे में रहोगे! तुम जो हो, हमारी बदौलत.. .हम तुम्हारे गुरु हैं । तुम्हें दांव हमने सिखाए, ट्रेंड हमने किया लेकिन याद रखो, बिल्ली अगर शेर को सारे दांव सिखा देती तो बिल्ली को गुरु कोई नहीं कहता !"

" आपके सोचने का ढंग जरा गलत है क्राइमर अंकल! " विकास ने कहा-"मैंने कभी कोशिश नहीं की थी कि आप लोगों से टकराऊं. . .क्यो विजय गुरु, तुम बोलो! क्या मैने कभी तुमसे टकराने की कोशिश की है? सबसे पहले मैं आपको यह बताने गया था कि भारत मे सी.आई.एं. का जाल है । वहां भी मैं नहीं गुरू आप ही टकराए । तुम भी सुनो अलफांसे गुरू; कान खेलकर सुनो! जब हमारे दोनों दलो के मोण्टोफो और सर्जिबेण्टा मिले तो तब कौन टकराया था? किसने पहले साजिश की थी? नहीं गुरु मै नहीं था, वो आप थे । आप गुरु लोगों से टकराना नहीं चाहता था इसीलिए लंबू अंक्ल को आपको गिरफ्तार करने के लिए भेजा था ।

आपको हेडक्वार्टर पर न रखकर जाम्बू के अड्डे पर रखा ताकि¸.मैं सामने ही न पडू लेकिन आपने मुझे फिर सामने आने पर विवश कर दिया । नहीं गुरु, नहीं । मैं कभी नहीं टकराया. . .मैं आपकी इज्जतं करता हूं, और करता रहूगा ।"

" बेटा लूमड़खान ।" विजय बोला--------" ये तो भाषण देने में ही आगे निकल गया ।"

--'"अगर तुम हमेँ गुरु मानते हो विकास तो वापस चलो !" अलफांसे ने कहा।

" क्षमा करना गुरु!"' बिकास बोला ---- “पहले ही आपके चरणों की-कसम खा चुका हूं कि भारत से सी.आई.ए. का नाम् मिटाकर ही दम लुगां । बैसे भी अब मेरे लोटने से क्या लाभ? भारत में रहकर भारत का जासूस तो नहीं बन सकता । विजय गुरु, आपके सपने मैं साकार कर ही नहीं सकता, फिर वापस लौटने से लाभ क्या?"

"अबे बेटा दिलजले ! यानी कि फिर बदमाशी ? अबे तब तो कह रहा था कि तेरे पास कोई ऐसा प्वाइंट है जिसके बूते पर तू भारत. में दनदनाएगा और यू.एन.ओ .तेरा कुछ नही बिगाड सकेगी?"

"बो तो है गुरु, लेकिन क्यों न उसे तभी प्रयोग किया जाए, जब मैं अमेरिका को पूरी तरह मजा चखा दूं? अब मंजिल अघिक दूर नहीं गुरु! अब वापस लौटना एकदम असंभव है ।"

" इस तरह नहीं मानेगा लूमड़ भाई!" विजय ने अलफांसे सें कहा ।

"तो आज साले के कान पकड़कर मुर्गा बना दो, तब मानेगा ।'" अलफांसे भी ताव खा गया ।

दोनो तेयार होने लगे, तभी सतर्कता के साथ पीछे हटाता हुआ विकास बोला…“देखो गुरु, अब आप विवश कर रहे हैं ।"
 
"अब तो बेटा, तुझे फिनिश कर देगे ।" कहता हुआ विजय अलफांसे के साथ आगे बढा ।

तभी विकास ने उसी अंधेरे में जंप लगा दी जिसमें से वह प्रकट हुआ था । उसके पीछे तेजी के साथ विजय 'भी झपटा । कुछ सोचकर अलफांसे ने जंप नहीं लगाई । तभी अंधेरे में से एक ऐसी आवाज आई जैसे किसी ने किसी को जोरदार चपत मारी हो ।

अगले ही पल…"अवे-अबे' करता हुआ विजय अंधकार से बाहर प्रकाश में आगिरा।

उसी क्षण-अंधेरे मैं से विकास के स्थान पर प्रकट हुआ टुम्बकटू।

"आदाब अर्ज है प्यारे महान क्राइमर ।" गन्ने की तरह लचककर बडे अदब के साथ टुम्बकटू ने अलफांसे को नए संबोधन के साथ सलाम किया ।

अलफांसे तो उस कार्दूंन को देखता रह गया लेकिन विजय तुरत संभलकर बोला ।

"ओह तो प्यारे टुम्बकटू जी हैं।"

" है तो सही महाराज, अगर तुम रहने दो ।" टुम्बकटू उसी प्रकार इज्जत के साथ बोला…"बैसे आप लोगों की बडी गलत बात है कि आप दो संड-मुस्टड होकर एक नादान बालक की ओर एक साथ ही बढते हो ।"

" 'क्यो प्यारे, तुम क्या हिमायती हो उसके?" बिजय बोला ।

" जाहिर है !" उसने सलाई-सी बांहें झटककर कहा !

" तुम ये भूल गए टुम्बकटू वेटे कि हम भी यहीँ खड़े हैं?" कहता हुआ अलफांसे उसकी ओर बढा ।

"ओ भाई, अबे ओ भाई साहब ।" टुम्बकटू ने एकदम हाथ जोड़ दिए---" भाई, तुम तो महान क्राइमर हो । तुमसे डर लगता है ! कहीं तुम मेरा बोरिया-बिस्तर बंद करके चांद पर न पहुंचा दो ।"

लेकिन अलफांसे नहीं रुंका ।

तभी टुम्बकृटू तेजी से बोला---" अबे पकडो इसे---मुझे मार डालेगा ? बड़ा खतरनाक आदमी है !"

उसका यह कहना था कि जाम्बू के अनेक उल्टे साथी उसके चारों से प्रकट हुए ।

वे सभी शब्दों से लेस थे । विजय, अलफांसे और अशरफ को जिस्म का कोई अंग तक हिलाने का अवसर नहीं मिला ।

पूजा बेहद बेचैन थी । प्रत्येक पल उसकी इच्छा विकास से मिलने की हो रही थी । वह सोचती रही थी कि मंगल पर पहुंचते ही वह बिकास से मिलेगी लेकिन् विकास?

उफ, उस लडके के पास तो दिल नाम की जैसे कोई चीज ही नहीं थी! पूजा ने सोचा, कैसा दिल है इस बेदर्द के पास? मिलना तो,दूर रहा---सामने तक नहीं आया । सबके साथ उसे भी कैद का लिया ।

हल्की-सी आहट होती तो वह तुरंत सोचती------"बिकास आ गया । उसका देवता-उसका स्वामी ।

लेकिन ।

विकास के स्थान पर किसी अन्य को पार वह निराश हो जाती । उसके सीने में बडा तीखा-सा दर्द उठता । पूना कराहकर रह जाती ।

लेकिन करती क्या?

इस कैद से निकलने का कोई रास्ता उस भोली-भाली मासूम को नज़र नही आया था । उसे यह भी नहीं पता था कि बह अगर यहां से निकल भी गई तो जाएगी कहां?

तभी कमरे के. बाहर हल्की सी आहट हुई और पूजा सतर्क हो गई । दरवाजा खुला-ओर..॥॥

धक्क से रह गया पूजा का दिल ।

दिल की धडकने भी धीमी हो गई।

कमरे के द्वार पर चंद्रमा उदय हुआ था ।

उसका विकास, पूजा की रग रग में बसा हुआ विकास ।

प्यारा-प्यारा मुखड़ा, गुलाबी होठ, गोरा मस्तक । उस पर एक ताज चमकता हुआ । लंवा…खूब लंबा ।

वह पूजा की ओर देख रहा था । उसकी वडी-वडी आंखों में चमक थी-प्यार-भऱी एक मीठी चमक ।

होंठों पर मधुर मुस्कान ।

पूजा बिकास को देखती ही रह गई ।

दोनों नेत्र एक-दूसरे में डूब गए ।

पूजा को जेसे सुध ही नहीं रही।

विकास अकेला था । आगे बढता हुआ बोला-----"कैसी हो पुजा ? "

पूजा के विवेक को एक झटका लगा ।

उसने बोलना चाहा लेकिन एक शब्द भी मुह से नहीं निकला । जीभ जैसे तालू से चिपककर रह गई ।

तब तक बिकास उसके समीप पहुच गया था ।

वह पुन: बोला-----"सुना नहीं पूजा, कैसी हो?"

" कैद कराने वाले, कैदी से हाल पूछ रहे हो!" वडे धीमे से, साहस करके पूजा ने कहा--------" हमें तो देवता की कैद भी मंजूर है , लेकिन उसका दूर रहना नहीं । जिसकी केद में रहे, उसके पास तो रहैं ।

विकास पूजा को देखता रह गया ।

दबी जुबान से उसने यह सब कहा था लेकिन फिर भी उसके नेत्र नीर भर गए थे ।

विकास के दिल ने पिघल जाना चाहा परंतु उस पर काबू करके वह बोला

" नाराज क्यों होती हो पूजा! मैंने तो पहले ही कहा था कि विकास ने अपना जीवन भारत मां को अर्पण कर दिया है । तुम्हारे लिए मेरे पास कुछ भी नहीं ।"

विकास के शब्द विष-तीरं की भाति पूजा के सीने को वेध गऐ परंतु फिर भी साहस करके वह बोली-" ये क्यो भूल जाते हो… विकास कि किसी ने अपना जीवन तुम्हें अर्पण कर दिया है?”

“पूजा! तुम पत्थर से सिर टकरा रही हो ।"

-"पहले भी कई बार सुन चुकी हूं ।" पूजा ने स्पष्ट स्वर में कहा---" तुम पत्थर सही विकास, तुम बेदर्द सही, लेकिन प्यार करने वालों को यही मंजूर होगा कि पत्थर के सनम से टकरा-टकराकर अपना अंत कर ले ।”

विकास निरूत्तर-सा हो गया ।

पूजा की दीवानगी के सामने वह कुछ बोल न सका ।

"तुम मुझसे चाहती क्या हो?" उसने विषय को थ्रोड़ा मोड़ दिया ।

" केवल तुम्हारा साथ है !"

"केवल साथ?" विकास ने कहा-----" या अपने प्रति मुझसे भी वही भावना जो मेरे प्रति तुम्हारी है?”
 
" मैंने तुम्हें समझ लिया है विकास, लेकिन तुम पूजा को नहीं समझे । तुम समझे कि पूजा प्यार के लिए गिडगिडाएगी-नही । अगर पैने अपने प्यार के बदले में प्यार मांगा तो मैरे निस्वार्थ प्रेम का महत्व ही क्या? तुम नहीं जानते विकास, मैं तुमसे प्यार करती हूं-तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं । तुम पत्थर हो, सचमुच पत्थर हो। प्यार क्या होता है क्या समझोगे ? तुम तो यह भी नही सोच सकते कि उस समय किसी के दिल पर क्या बीती होगी, जब एक

जल्लाद जल्लाद अपने चरणो में चढे फूल को अपने गुरु के पास सर्जिबेण्टा में छोड़ गया था । तुम्हें तो यह भी नहीं पता कि तुमसे दूर मैं किस हाल में रही? तुम तो यह भी नहीं जानते कि पूजा तुम्हारे लिए कितनी बेचैन थी? . .तुम तो बेदर्द हो ना पत्थर दिल हो! नहीं जानते ! अगर जानते होते तो मुझे यहां. इस तरह कैद ऩ करते ।" कहते-कहते पूजा सिसक पडी । "

“पूजा!” विकास ने कुछ कहना चाह्य मगर` पूजा कहती ही गई ।

"मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? ,मैं तो तुम्हारे रास्ते का रोडा भी नहीं थी । तुम्हें पाने के लिए तुम्हारे कंघे…से कंधा मिलाती, मै आगे बड्री थी । फिर फिर तुमने अपने विरोधियों के साथ यहाँ कैद क्यो है किया? ........क्यों बिकास? क्या जुर्म था मेरा? क्या यह कि मै तुमसे प्यार करती हू? तुम मुझें साथ रखो विकास! तुम्हारी कसम, कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंगी' । तुम पर मैं अपनी जान न्यौछावर कर दूगीं । तुम मुझे साथ रखो ।” कहती-कहती पूजा बुरी तरह रो पडी ।

विकासं स्वयं को संभाल न सका । उसे पूजा के त्याग याद आ गए---यह वो मासूम लडकी है जिसने यह जानते ही कि उसका भाई देश का गद्दार है --उसे मार दिया । उसके साथ रही, उंसकी सहायता की और बदले में उसने इस मासूम को क्या दिया? केवल दुख, जुदाई.....! विकास जैसे लड़के का दिल भी कराह उठा ।

उसने सोचा---अपने और बलिदानों के बदले उससे क्या मांग रही है----केवल उसका साथ!

अगर वह पूजा को ठुकरा देता है तो अन्याय होगा । नारी का सबसे महान रूप तभी सामने आताहै, जव वह किसी को अपने दिल का देवता मानकर त्याग करने लगती है । नारी बलिदान की मुर्ती है और नारी का यही रूप सबसे महान है । फिर. . फिर वह पूजा को क्यों ठुकराए? अपने ही तर्को से विकास पराजित होगया।"

वह स्वयं को न संभाल सका पूजा के दोनों कंधों पर हाथ रखकर प्यार से बोला - "रोओ मत पूजा---मुझे माफ कर दो?"

चौककर पूजा ने अपना मुखडा ऊपर उठाया--विकास को देखा ।

उसे विकास से इस प्रकार के शब्दों की उम्मीद नहीं थी । आंसुओं से भीगी आंखों से वह एक पल विकास को देखती रही, फिर धीरे से बोती------" साथ रखोगे न-अकेली तो नहीँ छोडोगे ?"

" नही , अकेली नहीं छोडूंगा । तुम मेरे साथ रहोगी ।"

" विकास ..!"-भावावेंश पूजा विकास से लिपट गई ।

विकास भी विरोध न कर सका । उसने पूजा को नन्ही-मुनी-सी गुडिया की तरह बांहों में समेट लिया । "

पूजा विकास के सीने में मुंह छुपाकर रो पडी ।

बिकास को पता नहीं थाकि ऐसे अवसरों पर कहा क्या जाता है, इसलिए वह कुछ बोला नहीं, केवल पूजा के बालों पर प्यार-भरा हाथ फेरता रहा । लगभग पंद्रह मिनट पश्चात सामान्य अवस्था में आया ।

तब विकास बोला ।

" मेरे साथथ आओ, तुम्हें एक खेल दिखाता हूं ।"

पूजा चुपचाप उसके साथ चल दी । विकास की अनुपस्थिति में वह विकास से कहने के लिए जाने क्या-क्या सोचती थी लेकिन सामने आते ही उसके मुंह से शब्द भी नहीं फूटा ।

अपनी ही भावनाओं में गुम यह विकास साथ बाहर आ गई । विकास उसे एक हांल में ले गया ।

पूजा ने देखा------हाॅल में एक तरफ़ सुभ्रांत उसके तीनों सहयोगी बैठे थे । उनके बीच सामने एक पत्थर पर सूट पहंने धनुषटंकार बैठा था । बड़े आराम से उसने पैर फैला रखे थे । होंठों के बीच एक मोटा सिंगार दबा हुआ था और दाएं हाथ में एक रिवाॅल्बर था ।

बड़ा अजीब सा दृश्य था ।

धनुषटंकार के सामने बैठे चारों आदमियों के सिरों पर चार पत्थर रखे थे । पत्थर हल्के-से थे ।

सुभ्रांत और उसके सहयोगियों के चेहरे पीले पडे हुए थे । पूजा और विकास की तरफ धनुषटंकार की पीठ थी ।

" यह क्या नाटकबाजी है धनुषटंकार ।।" पीछे से विकास ने कहा ।

पलक झपकते ही एक जंप के साथ बंदर घूम गया । बिकास के साथ पूजा को देखकर उसकी आंखो में एक चमक आई और इससे पूर्व कि कोई कुछ समझ सके, धनुषटंकार ने होंठों से सिगार गिरा दिया

और झपटकर न केवल पूजा के गले में बाहे डालकर उसकी छाती झूल गया बल्कि दनादन पांच-सात चुबन् उसके गाल पर अंकित कर दिए।

पूजा झेंपकर रहे गई ।

विकास मुस्कराता हुआ बोला----" मेरी बात का जंवाब दो” ।

धनुषटंकार ने डायरी पर यूं लिखा…" गुरु, अब मेरै निशाने, का कमाल देखना !"

इधर विकास ने पढ़ा और उधर धनुष्टंकार ने पुन: सिगार होंठों में दबाकर एक कश लिया ।

उसके दाएं हाथ में रिवॉत्वर था उन चारों के ठीक सामने दो पैरों पर खड़े होकर उसने मुंह से धुएं का एकं छला निकाला ।

अभी तक विकास भी समझ नहीं आ पाया था कि धनुषटंकार क्या दिखाना चाहता है?

उस समय अन्य किसी की तो बात ही दूर,खुद विकास चमत्कृत रह गया, जब धनुषटंकार ने रिवॉल्वर का ट्रेगर दबाया ।

कमाल यह था कि गोली धुएं के छल्ले के बीच से निकली और सीधी सुभ्रांत के सिर पर रखे पत्थर से टकराई ।

सनसनाता हुआ पत्थर पीछे जा गिरा । इससे भी अधिक कमाल यह था कि धुएं का वह छल्ला ब्लाऊ केवल धीरे से कंपकंपाकर रह गया, टूटा नहीं ।

उस समय तो विकास हैरान गया , ज़ब उसी छल्ले मे से तीन गोलिया बिना उसे तोड़े निकली सहयोगियों के सिरों पर रखे पत्थर दूर जा गिरे । वास्तव में धनुषटंकार की यह कला हैरत अंगेज थी ।

इस समय वह बड़े आराम से रिवॉल्वर की नाल से निकलने वाले धुएं में फूक मारकर उसे उडा रहा था ।

पूजा भी अवाक-सी धनुषटंकार को देखती रह गई ।

“अब तुम्हें एक कमाल मैं दिखाता हूं धनुषटंकार ।" कहते हुए विकास ने अपना रिवाल्वर निकाल लिया ।

पूजा कांप उठी । उसे लगा कि एक वार फिर उसे विकास का जल्लादी रूप देखना पडेगा ।

विकास ने पूजा की और देखा तक नही और रिवाॅल्वर सीधा करके बेहिचक फायर कर दिया । पलक झपकते ही सुभ्रांत के एक सहयोगी भारद्वाज का भेजा बाहर आ गया ।

गोली उसकी कापटी पर लगी थी । सिर, तरबूज की तरह फट गया था ।

कुछ समझना तो दूर, वह चीख तक न सका और जीवन से रूठकर मौत से जा, मिला । "

सब…अवाक्-से रह गए ।

सुभ्रांत तो अपने इस सहयोगी की मौत पर ठगा-सा रह गया ।

एक पल तक बह बोल ही नहीं सका, फिर एकदम पागलों की भांति चीख पड़ा------" ये तुमने क्या किया? वो ..वो मेरा सहयोगी था । में तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा !" कहने के साथ ही बह विकास पर झयटा लेकिन...।"

विकास ने तेजी के साथ अपना स्थान छोड दिया, सुभ्रांत पत्थरों पर जाकर गिरा । पीछे से विकास बोला ।

" होश में रहो प्रोफेसर, दिमाग से सोचो ।" इस समय विकस का स्वर बड़ा कठोर हो गया था…..."सोचो कि चारों से से. मैंने भारद्वाज को ही की चुना? मेरी गोली का निशाना बही क्यो वना!"

“तुम. . .तुम पागल हो?" सुभ्रांत चीख पड़ा-तुम पर हत्या करने का जुनुन सवार है । एक दिन तुम खुद को भी अपनी, गोली-का निशांना वना लोगे । वह मेरा महत्वपूर्ण सहयोगी था !"

"तुम गलत सोच रहे हो प्रोफेसर?" विकास ने कहा-" विकास पर कोई जुनुन सवार नहीं है । हां बचपन से ही देश के गद्दारों को सजा देने,का जुनून जरूर सवार है । माना कि वह तुम्हारे कार्य में एक अच्छा सहयोगी था लेकिन वो देश का गद्दाऱ था ।"

"'यहं गलत है.....झूठा आरोप है ।" सुभ्रांत चीख पड़ा ।--"खुद की गलती छुपाने के लिए तुम झूठ बक रहे हो !"

“झूठा जारोप है तो जरा सोचो, जिस रियाल्बो को तुम इतने गुप्त ढंग से बना रहे थे, वह प्रिंसेज जैक्सन ने कैसे बना लिया? तुम्हारे रियाब्लो का फार्मूला कहाँ से लीक हुआ ?"

सुभ्रांत के दिमाग को एक झटका-सा लगा, वह बोला---"मतलब?"

" मतलब भारद्वाज तुम्हारा सहयोगी होने के साथ साथ देश का गद्दार भी था । ये प्रिसेज जैक्सन का एजेंट था और तुम्हारे कार्यों की रिपोर्ट मर्डरलेड पहुंचाता था !"

अविश्वास भरे स्वर में सुभ्रांत ने धीमे स्वर में कहा.----.“तुम्हें कैसे पता लगा कि भारद्वाज गद्दार है?”

"रियाब्लो में मैंने इसे जैक्सन से बातें करते हुए देख लिया था !" उसकर यह जवाब सुनकर सुभ्रांत ने भारद्वाज की पडी हुई लाश को देखा, उसकी आंखों अब भी अविश्वास था ।।
 
पूजा सोच रही थी-विकास तो आदमी को आदमी न समझकर गाजर-मूली समझता है ।

" लेकिन इस तरह तुमने इसे एकदम इतनी भयानक मौत......." सुभ्रांत ने कछ कहना चाहां ।

"मेरे पास इस भी भयानक मौत है प्रोफेसर! " गुर्रा उठा विकास-"जिस दिन वह देख लोगे कि देश के गद्दारों को विकास क्या सजा देता है, तुम्हाऱी रूह फना हो जाएगी !"

"वेटे धनुषटंकार इस लाश को छोडकर सबको हैडक्वार्टर ले चलो । इन्हें कमाल दिखाएंगे ।"

विकास ने आदेश दिया और फिर पूजा को नम्र स्वर में बोला-" आओं पूजा !"

यंत्रचालित-सी पूजा उसके साथ चल दी ।

उस कक्ष मे सभी उपस्थित थे ।

विकास,पूजा , धनुषटंकार टुम्बकटू एक तरफ बैठे थे ।

विजय,अलफासे, अशरफ, सुभ्रांत और उसके सहयोगियों को एक स्क्रीन के सामने बैठा दिया गया था ।

उनके सामने सशस्त्र उल्टे लोग खड़े थे जिन्हें खुद विकास ने आदेश दिए थे कि अगर उनमे से कोई भी गलत हरकत करे तो उसे तुरंत ईश्वरपुरी का टिकट थमा दिया जाए ।

प्रिंसेज जैक्सन स्कीन के समीप एक स्टूल पर बैठी थी । धनुषटंक्रार टुम्बकटू अपनी अपनी सिगरेट फूंक रहे थे ।

यह दूसरी वात है अकेला धनुषटकार मुह से धुएं के छल्ले बना रहाथा । कक्ष मे अभी तक सन्नाटा था।

“क्यों प्यारे दिलजले सबको यहां एकत्र करके किसी की सगाई चढानी है?” सन्नाटा तोडने का श्रेय विजय ने पाया ।

"बच्चा गुरू लोगों को अपनी सफलता का छोटा-सा नमूना दिखाना चाहता है ।" बिकास ने कहा-----"अमेरिका के लोगों को म्याऊ म्याऊं करते हुए तो आप लोगों ने देख ही लिया है । अब जरा यह भी देखो गुरु कि उनका दम किस तरह निकलता है । यानी मेरा ,प्रतिशोध......!"

"तुम कहना क्या चाहते हो?" प्रश्न अलफासे ने किया । "

"मेरी क्या बिसात है गुरु कि आप लोगों के सामने कुछ कहूं । लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि आप लोगों को यह जानकर खुशी होगी कि धनुषटंकार अंकल के साथ-साथ अव जैक्सन आटी ने भी मुझे सहयोग देना स्वीकार कर लिया है ।"

" ये सब अपराधी है बेटे छग्गन लाल, तुम्हें बर्बाद कर देंगे !" विजय ने कहा ।

"आप भूल रहे हैं गुरु कि आपका बच्चा खुद एक अपराधी है” । विकास ने कहा------"अब तो वो करूगां गुरु जो सोचा है । आप मेरे गुरु है लेकिन आपने मेरा साथ छोड़ दिया । अपने बच्चे के दिल से पूछो विजय गुरू ,आपकी बेवफाई ने मुझे पागल कर दिया और तुम भी सुनो अंलफासे गुरु, कान खोल कर सुनो! आपको कितने दिल से पुकारा था । मुझें विश्वास था गुरु कि मेरे अभियान में तुम मेरा साथ दोगे, लेकिन आपने भी अपने बच्चे के दिल को ठेस पहुचाई । आप भी मुझे नहीं समझे गुरु! आपने सोचा कि अगर आप साथ नहीं देगे तो विकास का अभियान पूरा नहीं होगा । लेकिन नहीं गुरू सुनो! दोनो सुनो, विकास डंके की चोट पर कहता है कि वह भारत से भी आई ए. का जाल हटाकर रहेगा वरना अमेरिका को तबाह कर देगा । आपने गद्दारी कर दी तो क्या हुआ?

लंवू अकंल, जैक्सन आंटी धनुषटंकार मेरे साथ है । आपकी तो मैं इज्जत करता हूं गुर्रु मानता हूं तब भी आपने अमेरिका से टकराने के लिए न केवल अकेला छोड़ दिया बल्कि रास्ते मे आप रोड़ा भी अटकाते रहे । लेकिन इसे देखो गुरु, आप जानते है, इसका नाम पूजा है । यह क्यो है मेरे साथ? क्योंकि इसने बिशन मल्होत्रा जैसे भाई का खून कर दिया? क्यों गुरु? क्या स्वार्थ था इसका? वफा सीखनी है तो इससे सीखे । मैरे कदम , गलत् हो या ठीक,यह मेरे साथ है । आप लोग दूर रहकर हमेशा मुझें हराने की सोचते रहे । हमेशा मेरा बुरा चाहा न ।"

“वाह बेटे, ।" विजय बोला…"गलती तुम्हारी नहीं, लड़की चीज ही ऐसी होती है । दो दिन से मिली है और गुरू लोगों से ज्यादा प्यारी हो गई अब तुम्हारा अंत निश्चित है विकास याद करो, तुमसे एक बार कहा था कि लड़की के चक्कर में न पड़ना और जिस दिन पड़ गए, यह तुम्हारी जिंदगी का अंतिम दिन होगा ।"

"मुझे अंत की परवाहं नहीं है!"

"पूजा ने तुम पर डोरे डाले बेटे और तुम डोरों मे र्फस गए !" विजय ने कहा-" तुम्हारा अंतिम समय आ गया है । सुनो विकास, सुनो आज तुम्हारा गुरु कहता है कि पूजा ही तुम्हारे अंत का करण होगी !"

" आज नहीं तो कल अंत हो सकता है गुरू !" विकास ने कहा…“लेकिन यह दावा है कि मेरा अंत अमेरिका के अंत से पहले नहीं होगा । खेर, लगता है मैं विषय से भटक गया हूं। मेने आप लोगों को एक छोटा-सा खेल दिखाने के लिए याद किया था !"

“क्या दिखाना चाहते हो?" प्रश्न अलफांसे ने किया ।

"आंटी स्क्रीन ओन कर दो ।" विकास ने जैक्सन को आदेश दिया ।

जैक्सन ने विना कोई शब्द कहे स्क्रीन आन कर दी । कुछ देर तक गड़बड्री सी होती रही, फिर उस पर एक शहर की साफ-सुथरी सड़क का स्पष्ट दृश्य उंभर आया । सड़क पर लोगों का आवागमन था ।

सबकी दृष्टि स्कीन पर ही जमी हुई थी ।

"जहा तक मेरा अनुमान है गुरु, आप लोग इसे शहर को पहचान गए होंगे !" विकास बोला-------" अगर नहीं पहचाने तो मै बताऊं! यह अमेरिका का एक छोटा-सा नगर र्कोंसर है । तक्लीफ तो आपको होगी गुरू ।" विकासं ने कहा…"ज़रा देखते तो जाओ ।" कहने के साथ ही विकास ने हाथ फैला दिया ।

धनुषटंकार ने माइक जैसा एक यंत्र उसे थमा दिया । उसके समीप मुंह ले जाकर विकास बोला-“हैलो प्रोफेसंर तुंग तुम अपनी स्क्रीन पर कोसर देख रहे हो न?”

"हां महामहिम! " दूसरी ओर से तुंगलामा की आवाज आई---" बखूबी देख रहा हूं !"

"सब काम तैयार है?" विकास ने प्रश्न किया ।

"केवल आपके आदेश की देर है महामहिम । , दुसरी ओर से तुंगलामा बोला-----" आप आदेश दे तो कोंसर पंद्रह मिनट मे कब्रिस्तान बन सकता है । क्या आपके सारे मेहमान वहां पहुच गए है महामहिम?"

"सब आ गए हैं तुंग, तुम अपना काम शुरू करो ।"

"ओके महामहिम ।" दूसरी ओर से तुंगलामा का सम्मानित स्वर उभरा ।।

इसके बाद विकास ने माइक वापस धनुष्टंकार को थमा दिया । विजय इत्यादि की ओर उन्मुख होकर बोला ।

" अब जरा आप स्क्रीन पर होने वाला तमाशा ध्यान से देंखें !" कहते समय उसने दृष्टि विजय पर जमा दी और कठोर स्वर में' गुर्राया-" एक बात कान खोलकर सुन लो गुरु. वह यब कि स्क्रीन के दृश्य को देखकर किसी प्रकार की गलत हरकते करने की चेष्टा मत करना वरना वह आपकी असफल चेष्टा होगी क्यों कि आपके चारों और खड़े हुए गुलामो को आपके बच्चे के आदेश प्राप्त हैं कि आपकी किसी भी गलत हरकत पर आपातकालीन मोर्चा खडा कर दे ।"

विजय ने एक बार विकास की घूरा, फिर इस प्रकार मुस्कराया जैसे कोई बुजुर्ग किसी बच्चे की बचकानी हरकत पर मुस्कराएं ।

बोला----"तुमसे नालायक शिष्य सारी दुनिया में नहीं होगा !"

“घन्यवाद ॥" विकास ने भी की आराम से `मुस्कराकर कहा-" अब आप लोग ध्यान से स्क्रीन पर देखे ।"

बिजय, अलफासे इत्यादि सबकी दृष्टि स्क्रीन पर जम गई उनके देखते-ही-देखते स्क्रीन के दृश्य में परिवर्तन होने लगा ।

जहां स्कीन पर दिन जैसा प्रकाश था, वहां धीरे धीरे अंधेरा होने लगा । देखते-हि-देखते पूरे शहर मे अंधेरा छा गया । लाइटों से विहीन शहर स्क्रीन पर चमकने लगा । स्क्रीन पऱ वे बौखलाए हुए भयभीत और आतंकित लोगों को स्पष्ट देखते रहे थे । शहर में भगदड-सी गई थी । सबकी दुष्टि प्रत्येक पल स्क्रीन पर जमी हुई थी । पूजा का दिल बड़ी तेजी से धडक रहा था ।

. …"स्क्रीन पर नजर आने वाले इसलिए घबरा रहे है गुरु क्योकि उन्हें पता है कि क्या होने वाला है लेकिन क्या करें? जो होने वाला है, उसे वे तो क्या, पूरी अमेरिकन सरकार भी नहीं रोक सकती पूरा विश्व, भी नहीं रोक सकता ।"

" तुम कहना क्या चाहते हो विकास?" अलफांसे ने गंभीर स्वर में प्रश्न किया । .

" आप देख रहे हैं कि केवल दस मिनट मे वहां रात हो गई है ।" विकास ने कहा----- "केवल पाच मिनट और देखिए फिर आपको खुद ही मालूम हो जाएगा कि मैं क्या करना चाहता हूं !"

…"मुझे लगता तुम पागल हो गए हो ।" अलफांसे गुर्राया ।

"आंटी!" विकास जैक्सन से बोला------" जरा गुरु लोगों को दिखा दो कि अचानक दस मिनट में अमेरिका के इस शहर में यह रात अचानक क्यों हो गई ।"

हालांकि जैक्सन के दिमाग मेँ एक तीव्र तूफान था । वह ऐसा अवसर तलाश कर रही थी, जब वह विकास का तख्ता पलट सके लेकिन इस समय तो वह विवश थी । उसने एक बटन दबा दिया ।

स्कीन पर उपस्थित दृश्य भी घूमता चला गया स्कीन पर घने काले रंग का धुआं नजर आया ।

यह धुआं एकत्र होकर बादलों जैसा लग रहा था ।
 
अचानक गड़गड़ाहट की आवाज से सारा कक्ष गूज उठा । यह उन बादर्लो में बिजली कड़की थी । बिजली कडकते ही सबने काले धुएं के बीच चमकने वाले अक्षरों को पढा ।

"विनाशदूत विकास..... विऩाशदूत विकस ।"

प्रत्येक होंठ स्वयं ही बुदबुदा उठे । विजय अलफांसे जैसे इंसान कांपकर रह गए । उनके देखते-ही, कई बार बिजली कड़की उन्होंने "विनाशदूत विकास' बिल्कुल स्पष्ट देखा ।

इधर पूजा विकास की यह शैतानियत देखकर अदर…ही-अदर दहल उठी थी ।

"जो शब्द आपने पढे गुरु, ठीक उसी प्रकार कोसंर के लोग . , भी इन्हें पढ़ रहे हैं।"

फिर इंसके पश्चात......!

उसी तरह का विनाश कोसर में भी फैला जो पहले ही सियुडाड के ज्यूरज और अन्य स्थानो, पर फैल चुका था ।

विनाश का श्रीगणेश ठीक उसी प्रकार हुआ । पहले "बिनाशदूत विकास' का 'वि' गिरा, फिर 'ना', उसके खाद एक-एक करके संभी अक्षर गिरे और उन्होंने विनाश फैलाया ।

जिस समय 'विकास' का 'का' दूटा विजय अचानक पागल-सां होकर चीख पड़ा ।

"बंद करो, बंद करो, विकासा ये शैतानी खेल बंद करों मान गया कि तुम दुनिया के सबसे बडे शैतान हो । सिंगहीँ से भी भयानक अपराधी हो । लेकिन अगर यह खेल तुमने बंद नहीं किया तो मैं अपनी जान दे दूंगा । बंद करो विकास बंद करो ।"

इस बीच बिकास ने धनुषटंकार से माइक लेकर कहा ----" अब इस खेल को बंद कर दो तुंग !"

" अभी तो 'स' और बचा है महामहिम !" दूसरी ओर से आवाज़ आई ।

"हमारे विजय गुरु हमारे इस शैतानी खेल को, नहीं देख पा रहे है ।"

" जो आज्ञा महामहिम !" दूसरी ओर से कहा गया ।

कुछ ही देर मे स्क्रीन पर छाया अंधकार शांत हो गया ।

अब स्कीन पर तबाह और बर्बाद कौसर दिखाई दे रहा था । उसे कौसर के स्थान पर कब्रिस्तान ही कहना अधिक उचित होगा ।

उस दृश्य को देखकर वहां उपस्थित इंसानों के क्लेजे दहल उठे । तभी जैक्सन ने विकास के आदेश पर स्क्रीन आंफ कर दी । जिसके आँफ होते ही सबके दिमागों को जैसे एक झटका-सा लगा ।

सबने चौंककर एक-दूसरे क्रो देखा ।

"अब भी तुम कह सकते हो कि धरती पऱ वापस जाकर भारत के जासूस बन सकते हो?" विजय खतरनाक स्वर में गुर्राया । उसकी गुर्राहट ऐसी भयानक थी कि सबने चौंक उसकी ओर देखा ।

विजय का भयानक रूप देखकर प्रत्येक इंसान कांप उठा ।

विकास की तो अंतरात्मा तक हिलकर रह गई । वहं जान गया कि विजय गुरु को उसकी इस हरकत पर बेहद क्रोध आ ऱहा है ।

परंतु फिर भी यह संयम के साथ बोला ।

“ये खेल तो मैं इससे पहले भी कई बार अमेरिका के शहरों में खेल चूका हू गुरु ।" विकास कहता ही गया…"तब भी यह कह रहा हू कि आपका बच्चा धरती पर नहीं बल्कि हिंदुस्तान लौटेगा यू-एन-ओत-हस्तक्षेप तक नहीं कर सकेगा ।"

"बको मत । " गुर्रा उठा विजय--" मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा पागलपन इस हद तक बढ़ गया है कि शहर-के-शहर तुम तबाह करने पर तुल गए हो । बंद कर दो विकास, इस खतरनाक खेल को खेलना बंद कर दो । हम मान गए कि तुम अकेले ही विश्व को हिला सकते हो, लेकिन मानवता का इतना बड़ा खून करना कहाँ से सीखा? तुम्हें इतना खतरनाक किसने बनाया ?"

“मेरे देश की परिस्थितियों ने गुरु, इन अमेरिकन कुत्तों ने ! आप जानते हैं गुरु, सीधी उंगली से घी नहीं निकलता ।"

"'लेकिंन अगर तुमने यह खतरनाक खेल बंद नहीं किया तो मेरे ही हाथों तुम्हारा अंत होगा ।"

"मेरा अंत करने के चक्कर में तो पूरा विश्व लगा हुआ है गुरु! विश्व के महानतम जासूस मेरा अंत करने के लिए मंगल ग्रह की यात्रापर रवाना हो चुके है । आपके हाथों मारा जाना भी एक गर्व की बात होगी गुरु ।"

विजय विकास को देखता रह गया ।

उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस जिद्दी लड़के का करे क्या? यह तो विजय निश्चय कर चुका था कि बह विकास को अब जल्दी समाप्त कर देगा ।"

"बिश्व के जासूस तुम्हारे अंत के लिए मंगल ग्रह पर आ रहे हैं?”प्रश्न अलफांसे ने किया ।

"दु:ख तो ये है गुरु कि उन जासूसों में हिंदुस्तान का भी जासूस है । मेरे पास रिपोर्ट आई है कि वह भारतीय सीक्रेट सर्विस का एजेट है । भारत भी मेरे विरुद्ध ही है।"

विकास के इस वाक्य पर विजय चौका, उसने सोचा…भारतीय सीक्रेट सर्विस से ब्लैक व्बाॅय ने किसे भेजा होगा ।। विक्रम, नाहर

अथवा वह स्वयं? विजय कुछ निश्चय न कर सका ।

"लेकिन वे यहां के लिए रवाना क्यों हुए?"

"जानता हूं गुरु कि इस बहानें आप कुछ रहस्य जान लेना चाहते हैं ।" बिकास बडी मोहक मुस्कान के साथ बोला…"लेकिन जो आवश्यक नहीं है, उसे छिपाऊगा नहीं । मैं पहले भी अमेरिका को जपना यह खेल दिखा चुका हूं। मैंने अमेरिका को वार्निंग दी है कि या तो पैंतालीस दिन में वह भारत से सी.आई.ए.

का जाल हटा ले अन्यथा में सारे अमेरिका को इसी तरह पंद्रह मिनट में तबाह कर दूंगा । उन जासूसों को इसीलिए भेजा गया है गुरु कि पैंतालीस दिन से पहले ही मुझे समाप्त कर दे ।"

"तुमने पैंतालीस दिन का ही समय क्यों दिया?"

"आप फाउल कर रहे हैं गुरू ।" विकास बोला------"ये रहस्य की बात है ।"

अलफांसे उसका मुंह ताकता रह गया ।

"विज्ञान से संबंधित एक प्रश्न मैं करना चाहता मिस्टर विकास ।" अचानक सुभ्रांत बोला ।

" यही जानना चाहते हैं न प्रोफेसर कि इंसानों को बिल्ली कैसे वना दिया जाता है?" विकास ने मुस्कराकर कहा ।

" आप बिल्कुल ठीक समझे ।" सुभ्रांत ने कहा ---" मै यही जानना चाहता हूं।"

" इसका बेहतर जवाब आपको मिस्टर तुगलामा देगे !" विकास ने कहा और धनुषटंकार के हाथ से-माइक लेकर उस माइक की बैक में लगा हुआ एक बटन दबाया और बोला-“जाम्बू ।"

"आज्ञा कीजिऐ महान स्वामी ।” दूसरी और से जाम्बू की आवाज़ आई । उसने भी हिंदी सीख ली थी ।

" तुंग को लेकर हमारे पास आओ ।"

" जैसी आज्ञा महान स्वामी । दुसरी ओर से आबाज आई !

विकास ने संबंध-विच्छेद कर दिया ।

दो मिनट के पश्चात जाम्बू और उस के कुछ साथियो के साए में घिरा हुआ तुंगलासा कक्ष में प्रविष्ट हुआ ।

सबकी दृष्टि उसी पर जम गई उसे एक चेयर पर बैठा दिया गया, फिर बिकास बोला ।।

"'मिस्टर तुंग प्रोफेसर सुभ्रांत जानना चाहते हैं कि इंसानों को विल्ली बनाने की थ्योंरी क्या है ?'

" आपकी क्या आज्ञा है?" तुंग ने आदर के साथ बिकास सें पुछा ।

" हम समझते है कि इन्है बताने में कोई हानि नहीं है !"

“जैसी आज्ञा महामहिम! " तुंग ने कहा और फिर बह सुभ्रांत की और मुखातिब होकर बोला-" इस फार्मूले की कोई लंबी चौडी थ्योंरी नहीं है।"

" आप संक्षेप में समझा दे ।" सुभ्रांत ने कहा।
 
" मेन--थ्योंरी यह है कि सबसे पहले मैंने ये सोचा कि दिमाग सोचता क्यों है ? सबसे पहले मेरे दिमाग मे यह विचार आया कि आखिर दिमाग ही क्यों सोचता है ? किसी जीव का अन्य कोई भाग अथवा अंग क्यों नहीं सोचता ? मतलब, इंसान के फेफडे में सोचने की शक्ति क्यों नहीं होती ? हाथ-पेर अथवा अन्य कोई

भाग क्यों नहीं सोचता ? वो क्या खास बात है, जिसके कारण केवल दिमाग को ही सोचने की शक्ति प्राप्त है ?

बस मै इसी विशेषता की खोज में लग गया । वायोलॉंजी की, अनेक किताबों का अध्यन किया , मैंने यह माना कि दिमाग वाले भाग में दो प्रकारके नम्हें कीटाणु होते हैं जिन्हें क्रमश: शुक्र किटाणु और निशुक्र कीटाणु कहा जाता है । ये केवल दिमाग वाले भाग होते । जब भी ये आपस में टकराते है तो सोचने की शक्ति पैदा कर देते हैं'। जब भी इंसान अथवा कोई भी जीव कछ देखता है तो ये जीबाणु जोर मारकर एक्र-दूसरे से मिलते है और सोचने की शक्ति पैदा करते है । इंन दोनों जीवाणुओं से, मिलकर ही दिमाग बनता है ।"

सुभ्रांत के साथ-साथ तुंगलामा की इस थ्योंरी को सभी सुन रहे थे । वह कहता जा रहा था ।

" उसके पश्चात मेरे दिमाग में यह प्रश्न उठा कि आखिर इंसान ही सबसे अधिक स्वस्थ ढंग से क्यों सोच पाता है?. अन्य कोई जीव उस स्वस्थ ढंग से क्यों नहीं सोच पाता? यह प्रश्न मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण था इसलिए मैं रिसर्च पर रिसर्च करने लगा । इस रिसर्च के लिए मेने एक बिल्ली और एक इंसान को चुना । परीक्षण में मैने जाना कि यह परिवर्तन .उन दोनो जीवाणुओं का अंतर है । विल्ली के जीवाणुओं के मुकाबले इंसानी जीवाणुओं को मैंने अधिक क्रियाशील पाया । उसके वाद मेरे दिमाग में यह फितूर उठा कि अगर ये जीवाणु परिवर्तित कर दिए जाएं तो क्या हो? अपने इस परीक्षण के लिए पहले मैंने इंसानी: जीवाणु यानी अधिक क्रियाशील जीवाणुओं का कृत्रिम निर्माण करने का प्रयास किया लेकिन मे उतने शक्तिशाली जीवाणु ईजाद करने में असफल रहा । फिर मैंने बिल्ली के जीवाणुओं पर अपनी ईजाद की और मुझे अपने इस प्रयोग में सफलता मिल गई । में बिल्ली के कृत्रिम जीवाणुओं को बनाने मे सफ़ल होगया । ये जीवाणु मैंने एक इंजेक्शन के रूप में वनाए थे । अब मैं इनका परीक्षण करना चाहता था । मेरे दिमाग में यह विचार आया कि अगर मैं इन जीवाणुओं को इंसानी दिमाग में डाल दु तो इंसान क्या करेगा? लेकिन इस प्रयोग के लिए आवश्यक था कि पहले इंसानी दिमाग में मोजूद जीवाणुओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए

मैं इन जीवाणुओं की हत्या. करने की दवा के प्रयोग मे लग गया । काफी परिश्रम के पश्चात मैंने एक इंजेक्शन् के रूप में इस दवा की खोज भी करली । इस दवा का परीक्षण करने, के लिए पहले एक इंसान को उसके दिमाग के जीवाणुओं की हत्या वाला इंजेक्शन दिया गया । इस इंजेक्शन ने बीस मिनट बाद ही यह प्रभाव दिखाया कि उस इंसान का दिमाग पूर्णतया शुन्य हो गया । सोचने-समझने की कोई , . शक्ति उसमें न रह गई । उससे अगर यह कह दिया जाए कि खुद को गोली मार ले हो यह तुरंतृ गोली मार लेगा क्योकि उसमें यह सोचने की शक्ति नहीं थी कि गोली मारने से होगा क्या? बिना दिमाग का वह आदमी पागल सा घूमने लगा । तभी मैने अपने पहले प्रयोग का परीक्षण किया । अपने इंजेक्शन द्वारा विल्ली के जीवाणु , उसके मस्तिष्क में प्रविष्ट कर दिए । केबल एक घंटे के बाद बह इंसान पूरी तरह बिल्ली वन गया ।

" तो वह म्याऊं-म्याऊं करने लगता है?"

" हां, क्योंकि सोचने की शक्ति के अभाव के कारण बह कुछ भी नहीं बोल सकता । तुम जानते हो कि प्रत्येक जीवित जिस्म की मेन चीज दिमाग है । जब बही बदल गया तो सब कुछ बदल जाएगा । इंसान की प्रवृत्ति भी दिमाग के साथ ही बदल जाती है या साधारणतया यूं समझो कि इंसान पूरी तरह बिल्ली बन जाता है । उसकी प्रवृत्ति, इच्छा इत्यादि एक बिल्ली की भांति हो जाती है ।"

" शायद-इसलिए बिल्ली वना इंसान चूहा भी खा जातें हे?"

“बिस्कूल ठीक समझे ।" तुग ने कहा-"चूहा बिल्ली का प्रिय खाद्य पदार्थ है ।"

"तो क्या अमेरिका के लोगों को इन्ही दो इंजेक्शनों द्वारों बिल्ली वनाया गया था?" अशरफ ने प्रश्न किया ।

" स्पष्ट है !" तुंग ने कहा---" और चेहरे इत्यादि पर बिल्ली की भांति बाल इत्यादि सब पक्का मेकअप होता है ।"

"लेकिन ये सव करता कौन है?" अलफांसे ने प्रश्न किया-----" आप तो यहां हैँ बहां रात-ही रात में इंसान बिल्ली बन जाते हैं ।"

अलफासे के इस प्रश्च पर तुगलामा ने विकास की और देखा, विकास मुस्करा उठा ।

"गुरु, आपका हर प्रश्न बड़े काम का होता है । लेकिन मैं मी बही बताऊंगा जो मैं बताना चाहूगा । इस रहस्य को आप पर प्रकट करने में मैं अपनी कोई हानि महसूस नहीं करता इसलिए बताता हूं। अपको यह तो मालूम है ही कि मंगल स्मार्ट सिंगही थे । यह मी आप सहज ही अनुमान लगा सकते है कि धरती पर भी उनके एजेंट होंगे क्योंकि उनका तो मुख्य उद्देश्य ही विश्व विजय करना है । मैंने अमेरिका में उपस्थित उनके एजेर्टों के पते लाग़ए उसी यंत्र के जरिए जिससे सिगंही दादा अपने एजेंटों से संबध स्थापित करते थे, मैं उन्हें यहीं से संबंध स्थापित करके आदेश देता हूं । फार्मूला भी धरती पर उपस्थित सिंगही के वैज्ञानिक साथियों को उसी यंत्र पर बताया गया जिस पर वे तेजी से इंजेक्शन बनाकर प्रयोग कर रहे हैं ।" विकास ने कहा । "

"लेकिन धरती पर उपस्थित सिंगही के आदमियों ने तुम्हारा आदेश कैसे मान लिया?"

"आप जैसे गुरु लोगों का शिष्य हू गुरु! भला इतनी कच्ची गोली खेल सकता हूं ? वास्तविक यह है कि मैं उन्हें प्रत्येक आदेश सिगंही की आबाज मे देता हूं और यह आदेश भी देता हूं कि घटना के पीछे बिकास का नाम जोड़ दे ताकि हमारा एक बहुत बड़ा दुश्मन विश्व के नजरों में गिर-जाए और पंगु होकर रह … जाए ।"

विकास के इस कथन पर विजय और अंलफासे ने एक दूसरे को देखा ।

मन-ही मन दोनों गुरुं लडके के दिमाग की प्रशंसा कर उठे । विजय का दिमाग इसी प्वाइंट को लेकर सोच रहा था । उसे लग रहा था कि वास्तव में विकास ने अपनी वापसी के मार्ग वना रखे हैं लेकिन फिर भी कुछ घटनाएं थीं जो विकास को भयानक अपराधी करार देने हेतु पर्याप्त थी ।

" और वह विनाशकारी फार्मुला क्या है?" यह प्रश्न भी सुभ्रांत ने किया ।

"इसका उत्तर अभी नहीं मिल सकता प्रोफेसर !" विकास ने कहा----"यहाँ बड़े-बड़े खतस्नाक लोग बैठे हैं । पता लगते ही कुछ न-कुछ हरकत कर ही देगे और मेरे अरमानो को मिट्टी में मिला देंगे !"

विजय और अलफासे ने मुस्कराकर एक-दूसरे कों देखा ।

विकास ने कहा----'' आज का खेल यहीं समाप्त होता है गुरु., अब लंवू अंकल आप लोगों की तशरीफ़ का टोक़रा आप लोगों के घोंसेल में पहुंचाकर आएंगे, ।"

"'प्यारे पुत्र आँफ़ तुला राशी!" विजय बोला---

" और तुम्हारी तशरीफ का टोकरा हम मंगल से ऊपर पहुचाने वाले है ।"

"धन्यवाद गुरू ।" विकास ने कहा…"आपकी बड़ी मेहरबानी होगी।"

इसके बाद यह वेठक समाप्त हो गई ।

वह एक छोटे सा कमरा था । एक गोल दायरे में पडी हुई कुर्सियों की संख्या दस थी । दसों कुर्सियों पर दस इंसान बैठे थे । सबके चेहरों पर कुछ विचित्र-से भाव थे । सबसे अधिक बेचैन वह व्यक्ति नजर जा रहा था जिसके पतले से जिस्म पर डाक्टर जैसा एक सफेद चोगा था । उसकी आयु पचास पचपन के बीच में थी । बड्री-बडी आंखो पर चश्मा था ।

" मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि यह हो कैसे सकता है?"

एकाएक सफेद चोगे वाले ने अपने स्थान पर बैठे-ही-बैठे सन्नाटा भंग किया ।

" सर है तो वास्तव में उलझन की बात ।" उसके सामने बैठा हुआ एक मजबूत-सा इंसान बोला----" हमें इस रहस्य तक पहुंचने के लिए

सबसे पहले यह तो पता लगाना होगा कि इनमें नकली कौन है ?"

" यह तो पता लगाना होगा ही मिस्टर बर्मन !" अधेड आयु वाला जो कदाचित इस ग्रुप का चीफ था , बोला " तुम सबसे पहले हेम्बलर से उन सबकी लिस्ट लेकर आओ जो कल की रात हमारे शिकार थे । उसी से पता लगेगा कि नकली कौन है ।"

" ओकै सर!" बर्मन नामक व्यक्ति ने कहा--और कमरे से बाहर निकल गया ।

" मैं अपना एक प्रस्ताव रखना चाहता हूं सर! " एकाएक एक अन्य इंसान बोला ।

"क्या कहना चाहते हो?” कहते हुए अधेड चीफ ने अपनी आंखें उसके चेहरे पर गड़ा दी ।

"मेरे विचार से हमें यह सूचना महामहिम सिंगहीँ तक पहुचा देनी चाहिए।"

"लेकिन इन छोटी-छोटी बातों के लिए महामहिम सिगंही को परेशान करना उचित नहीं लगता ।" अधेड चीफ़ बोला-" हो सकता है कि महामहिम इस बात पर रुष्ट हो जाएं । उन्हें हम पर पूरा विस्वास है लेकिन अगर हमने इस छोटी-सी बात के लिए उनसे राय ली तो संभव है हमारे दल से उनका बिश्वास उठ जाए। अगर ऐसी परिस्थिति बन गई तो बडी मुसीबत हो जाएगी ।"

"लेकिन ......!"

अभी वह व्यक्ति कुछ कहना हो चाहता था कि अधेड एक साथ सबको संबोधित करके बोला-----"मिस्टर सुखाडिया के प्रस्ताव से कितने लोग सहमत हैं?"

उत्तर में केवल दो हाथ उठे ।

उन्हे देखकर अधेड़ के बूढे होंठों पर एक अजीब-सी मुस्कान आई । वह बोला…"सर्वसम्मति को आपका प्रस्ताव अच्छा नहीं लगा मिस्टर सुखाड्रिया इसलिए माना नहीं जा सकता । वेसे वास्तविकता भी यही है कि इतनी छोटी-सी बात के लिए महामहिम की राय लेना हमारे लिए तौहीन की बात है । आखिर हम भी कुछ बुद्धि रखते हैं । हमें यहां महामहिम ने किसी विश्वास पर ही नियुक्त किया है । ये छोटी-छोटी उलझने तो हम खुद ही सुलझा लेते है ।"

"थैक्यू सर ।” मिस्टर सुखाडिया ने कहा ।

तभी हाथ मे फाइल लिए बर्मन ने कमरे मेँ प्रवेश किया । फाइल अघेड़ को थमा दी और बोला------“ये उन के नाम और पतों की फाइल है जो कल रात हमारे शिकार बने और ये है उन लोगों के नाम और पते जो आज सुबह बिल्ली वने हुए पाए गए ।" कहते हुए एक कागज निकालकर उसने अधेड़ बाॅस को थमा दिया ।

बर्मन पुन: अपनी सीट पर जाकर वैठ गया ।

अधेड गहराई से फाइल और कागज़ को देखता रहा । पैन निकालकर वह एक कागज पर चिन्ह भी लगाता गया । इस बीच कमरे में पूर्णतया ब्लेड की घार जैसा पैना सन्नाटा रहा ।

पंद्रह मिनट बाद अधेड ने अपना चेहंरा उठाया और बोला ।

"ये हैरी कौन हे? "

" उसमें लिखा है सर !" वर्मन ने कहा----" और बैसे भी यह लड़का न्यूयॉर्क ही नहीं, बल्कि पूरे अमेरिका में प्रसिद्ध है । इसका नाम हैरी आर्मस्ट्रांग है । यह यहा के प्रसिद्ध क्राइम रिपोर्टर का लडका है । विशेष रूप से यह तब प्रसिद्ध हुआ था, जव वो शैतान लड़का विकास यहां माफिया से टकराया था । उस समय कदम-कदम पर यह लड़का विकास की सहायता कर रहा था ।"

“गुड़!" अधेड ने कहा…“इस लड़के को तुरंत यहां लाया जाए ।"

“ओके चीफ़! " कहकर बर्मन उठ खड़ा हुआ ।

" र्हैरी. . .मेरे बेटे!" पागल-सी होकर जूलिया हैरी की ओर बढी लेकिन हैरी पहले की भांति ही "म्याऊ-म्याऊ" करके-पलंग के नीचे घुस गया । जूलिया बेचारी तड़पक्रर रह गई । वह रो पडी । पागलों जैसी स्थिति में उसने अपने पति जैकी की ओर देखा, ।

जैकी की आंखें तो पागलों की भांति शून्य में टिकी हुई थी । उसकी आंखों से खून था । चेहरे पर संसार-भर की भयानकता । जूलिया ने उसे झिंझोड दिया और लगभग चीखती हुई सी बोली ----" क्या हुआ आपको ?"

चौंककर जैकी भावनाओं की दुनिया सें बाहर आया । उसने जूलिया का आंसुओं से भीगा चेहरा देखा उसे सीने से लिपटकर बोला--" चिंता मत करना जूलिया, चिंता मत करना । मैं बदला लूगां । यह विकास ने किया है । उसी विकास ने जूलिया, जिसे तुमने मां का प्यार दिया है । जिसे मैंने सब सिखाया । यह उसी विकास ने किया है जूलिया, जिसे हैरी भाई मानता था । उसके लिए हैरी मुझसे टकरा गया था । यह सब उसी विकास ने किया है । मैं उसे जिंदा नहीं छोडूंगा । वो नहीं मिला तो तुम्हारी कसम, पूरे हिंदुस्तान में आग लगा दूंगा।”

"नही-नही!" पागल-सी हो गई जूलिया-"आप नहीं, मैं बदला लूगीं । उसने मेरे बच्चे को बिल्ली बनाया है । किसी भी कीमत पर मैं नहीं छोडूंगी । आपको मेरी कसम है । उसकी जान आप नहीं लेगे । उस शेतान की हत्या मैं करूंगी ।" कहकर वह पुन जैकी से लिपटकर रो पडी ।

" जुलिया ....!"

……'"हाथ ऊपर उठा तो मिस्टर जैकी! । " अभी जैकी कुछ कहना ही चाहता था कि वहां एक भयानक आवाज गूंजी----"अगर किसी तरह की चालाकी दिखाने की चेष्टा की तो दोनो का भेजा फोड़ दिया जाएगा ।"

जैकी जूलिया चोंकै । झटके के साथ एक… दूसरे से अलग हो गए । उन्होंने देखा आठ इंसान खडे थे ।

प्रत्येक के जिस्म पर खतरनाक गुंडे जैसा लिबास था और लिखने की आवश्यकता नहीं कि सबके हाथों में रिवॉल्वर थे ।।

जैकी चमाकृत सा रह गया ।
 
यह आश्चर्य की बात थी कि वह चारों ओर से घिर गया था । उसे आभास तक नही हुआ । उसने चारों ओर देखा इस समय इन लोगों के विरुद्ध वह कुछ भी कर पाने में असमर्थ है । उन्हें देखकर जुलिया कांप गई और पुनः चीखकर जैकी से लिपट ग्रई ।।।

" कट..... !"

तभी साइलेंसरयुक्त रिवॉल्वर से एक फायर हुआ और जैकी के कान को स्पर्श करता हुआ शोला दीवार में जा धंसा ।

तह फायर, करने वाला बर्मन था । उसके रिबॉंल्बर की नाल से धुआं निकल रहा था । एक कदम आगे बढाकर वह खतरनाक स्वर में बोला ।

“चीखो मत !" वह गुर्रा उठा था…"अगर दूसरी चीख मुह से निकली तो यह अच्छी तरह समझ लो कि यह बेआवाज़ रिवॉल्वर तुम्हें हमेशा के लिए शांत कर देगा ।"

जैकी औय जूलिया कांपकर रह गए ।

परिस्थिति देखकर जैकी अपने हाथ ऊपर उठाता हुआ बोला ।

"आप लोग कौन ?"

"महार्माहेम विकास के सेवक हैं ।" बर्मन ने बड़े आराम से जबाब दिया ।

विकास का नाम सुनते ही पागल-सी होकर जूलिया चीखना ही चाहती थी कि जैकी ने संकेत से उसे-मना कर दिया ।

अंदर-ही-अंदर जैकी के दिमाग में प्रचंड तूफान जन्म ले रहा था । लेकिन ऊपर से मन को संयत करके उसने प्रश्न किया ।

" आप, लोग क्या चाहते हैं?"

“महामहिम विकास ने हैरी को याद किया है ।"

“बिल्ली तो वना दिया है । अब वह कमीना इसका क्या करेगा?" चीख पड़ा जैकी ।

" चीखने का अंजाम मौत होगा मिस्टर जैकी ।" बर्मन गुर्राया-" हम यहां हैरी को लेने आए हैं, लेकर ही जाएंगे । इस प्रकार जैकी जूलिया ने विरोध किया लेकिन आठ रिबॉंल्बरों के सामने भला उनका विरोध क्या महंत्व रखता था! उनकी एक न चली । उन दोनो को एक तरफ़ बांधकर डाल दिया गया ।

मुह में कपडा ठूंस दिया- यह सब करने के बाद बर्मन हैरी की ओर बढा ।।

हैरी ने अपनी मासूम-सी आंखो से उसे अपनी ओर बढते हुए देखा म्याऊं म्याऊं के साथ सहमकर पीछे हट गया ।

यह देखकर न जाने क्यों बर्मन के होठों पर बेहद गहरी र्मुस्कान उभर आईं ।

हैरी म्याऊं म्याऊं करता ही 'रह गया और बर्मन ने अपने साथियो की मदद से उसे रस्सी से बांध लिया । जैकी और जूलिया के देखते-ही-देखते वे उनके जिगर के दुकड़े को ले गये ।

अन्य कोई कार्य तो वे करते ही क्या, वे तो चीख तक भी न सके ।।

कोठी के बाहर ले जाकर हैरी को एक कार में डाल दिया गया । तीन इंसान इस कार में बैठे उर बाकी पीछे खडी अन्य कार में ।

कार के शीशों पर पर्दे चढा दिए गए । कार फरटि भरती हुई अनजाने मार्गों से गुजरने लगी । बर्मन हैरी के पास बैठा था ।

रह-रहकर हैरी 'म्याऊं-म्याऊं" कर उठता था ।

"मिस्टर हैरी! आपको बिल्ली किसने बनाया?" अचानक बर्मन ने हैरी से प्रश्न किया । "

हैरी केवल-"म्याऊं-म्याऊं' करके रह गया ।

उत्तर में वर्मन के होंठों पर फिर वहीं रहस्यमय मुस्कान नृत्य कर उठी । उसके बाद उसने कुछ नहीं कहा ।

कार ने पुनः सन्नाटा' छा गया । कुछ देर बाद कार एक विशाल इमारत के गैरेज में रूकी ।

हैरी की आंखों पर एक काली पट्टी बांधृ दी गई ।

उसके बाद. . . ।

तब जबकि हैरी की आंखों से पट्टी उठाई गई, वह एक हॉलनुमा बडे से कमरे में था । उसके चारों ओर वे ही दसो इंसान खड़े थे जो कुछ देर पूर्व कमरे में मीटिंग कर थे ।

हैरी फर्श पर बिल्ली की भांति सहमा-सा बैठ गया । उसके ठीक सामने वही अधेड चीफ़ एक चेयर पर बैठा था ।

हैरी के बंधन खोल दिए गए थे।

तभी एक चुहा फुदकता हुआ हैरी के सामने आया ।

विद्युत गति से हैरी चूहे पर झपटा लेकिन चूहा उससे अधिक फुर्ती के साथ फुदककर उसके हाथ के नीचे से निकल गया ।

एक नाली के रास्ते कमरे से बाहर निकल गया । तभी यह बूढा बोला ।

"तुम चूहे को नहीं पकड सकते मिस्टर हैरी! क्योंकि तुम नकली बिल्ली हो ?"

हैरी ने केवल "म्याऊं-म्याऊं" की आवाज लगाई उसकी इस हरकत पर एक बार पुन: सब मुस्करा उठे ।

अधेड चीफ फिर बोला ।

"यहां तुम्हारा अभिनय नहीं चलेगा मिस्टर हैरी क्योकि इंसानों को बिल्ली बनाने वाले हम ही लोग है । पिछली रात हमने महांमहिम की आक्षानुसार केवल पचास इंसानों को बिल्ली बनाया था लेकिन इक्यावऩ आदमी बिल्ली कैसे बन गए । हमारे सामने यहीं सबसे बडा प्रश्न-आया । इसका उत्तर पाने के लिए तुम्हें यह तकलीफ देनी पडी क्योंकि तुम चूहा नहीं पकड सके । इससे स्पष्ट है कि तुम्हारे अंदर अभी पूरी बिल्ली के गुण विद्यमान नहीं हुए हैं । अगर तुम वास्तव में बिल्ली होते तो किसी भी कीमत पर चूहा तुम्हें गच्चा नहीं दे सकता था । यह स्पष्ट हो चुका है कि तुम बिल्ली वने नहीं हो केवल एक्टिग कर रहे हो? इसके पीछे तुम्हारा क्या उद्देश्य है?"

हैरी ने जवाब में पुन: "प्याऊं-म्याऊं' का नारा लगाया ।

उसकी इस हरकत पर एक बार फिर सबके होंठों पर मुस्कान उभर आई ।

अधेड बॉंस बोला…"हमारे द्धारा बिल्ली बनाए गए लोग केवल म्याऊं म्याऊं नहीं करते मिस्टर हैँरी बल्कि वास्तव में बिल्ली बन जाते हैं । हमे नहीं मालूम था कि आपको बिल्ली बनने का इतना शोक है । अगर हमें मालूम तो निश्चिय ही सबसे पहले हम तुम्हें बिल्ली बनाते । खेर, अब भी कुछ नहीं बिगडा है । हम वास्तव.: तुम्हें बिल्ली बनाए देते हैं ।” कहते हुए उसने एक इंजेक्शन सिरिंज उठा ली ……"यह इंजेक्शन तुम्हारे मस्तिष्क को शून्य कर देगा और दूसरा इंजेक्शन तुम्हें पूर्णतया बिल्ली वना देगा ।" कहता हुआ वह हैरी की तरफ बढा । समीप पहुंचकर वह चेतावनी वाले लहजे में बोला ।

" अब भी समय है मिस्टर हैरी! फौरन बता दो कि तुम्हारा बिल्ली बनने के पीछे क्या उद्देश्य है वरना अब तुम्हें वास्तव से बिल्ली वना दिया जाएगा ।”

"बिल्ली -बना दोगे तो वह उद्देश्य कैसे जानोगे मिस्टर धतूराराम ।।” अचानक हैरी उछलकर खड़ा होता हुआ बोला-" बैसे अब तुम्हें यह भी बता दूं कि जिस उद्देश्य से मैंने यह नाटक रचा था किसी हद तक 'सफ़ल हो गया है ।"

“यानी...?"

"मैं आप जैसे लोगों के दर्शन करना चाहता था ।" हैरी ने बड़ा संक्षित सा उत्तर दिया।

“लेकिन क्या तुम्हें उम्मीद है कि अब यहां से जिंदा बचकर जा सकोगे ।" मुस्कराते हुए अधेड़ ने कहा ।

" मुझे उम्मीद ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है मिस्टर धतूराराम ।" हैरी वड़े रहस्यमय ढंग से मुस्कराकर बोला'--"तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि यह इमारत इस समय सी.आई.ए. के घेरे मेँ है । यह एक लंबा-चौड़ा प्लान था मिस्टर धतूराराम कि मैं नकली बिल्ली वना । मैं जानता था कि इस तरह आप चौकेंगे और सामने आएंगे । वहीं हुआ । यानी आप लोग मुझे यहाँ ले आए । लेकिन यह प्लान मैंने सी.आई.ए से मिलकर बनाया था अर्थात वे निरन्तर हमारे पीछे और इस समय आप लोग खतरे मे है ।"

हैरी के इस कथन पर दसों ने एक-दूसरे का मुंह ताका जबिक लडके के होंठों पर अजीब-सी मुस्कान थी ।

अपनी बात को अधिक सशक्त वनाने के लिए उसने कहा ।

".अब आप लोगों से प्रार्थना है कि आराम से आत्म-समर्पण कर दे वरना आधे घायल होंगे और आधे मुर्दा ।"

" बर्मन ! इसका ख्याल रखना । हम अमी महामहिम से बाते करके आते है ।" कहने के पश्वात उसने किसी के जवाब इत्यादि की कोई चिंता नहीं की और तेजी के साथ हांलनुमा कमरे से बाल निकल गया । वह एक अन्य कमरे में पहुचा । उसके चेहरे पर इस समय परेशानी के लक्ष्ण स्पष्ट थे ।

उसने एक यंत्र ऑन किया और मंगल पर संबंध स्थापित करने का प्रयत्न करने लगा । !

कुछ ही देर बाद दूसरी ओर से सिगंही की आवाज़ उभरी----“हैंलो ...हैलो. . .सोबऱ.....क्या रिपोर्ट है ।"

" सर ….! हम एक वहुत वडी मुसीबत में फंस गए है ।" सोबऱ ने कहा और उसके बाद सारी घटना उसने संक्षेप में जल्दी जल्दी सुना दी ।

सुनते ही दूसरी तरफ सिगंही की रोंगटे खडे कर देने वाली गुर्राहट उभरी ।

" मैं नहीं जानता था सोबर कि तुम इतने मूर्ख भी हों सकते हो ।" सोबर भयभीत-सा बड़े ध्यान से सुन रहा था----"तुम नहीं , जानते कि वह लड़का कितना खतरनाक है। लेकिन एक बात का ध्यान रखना सोबर कि उस लड़के को तुम किसी प्रकार की हानि मत पहुंचाना क्योंकि अगर तुमने ऐसा किया तो निश्चित रूप से अब तक हमने जो कुछ किया है उस पर पानी फिर जाएगा । अब तक हम प्रत्येक घटना के पीछे विकास को बदनांम करते रहे है लेकिन इस घटना से कई लोग समझ जाएंगे कि यह सब वास्तव में विकास नहीं कर रहा है क्योंकि हैरी विकास का पक्का दोस्त है । विकस सब कुछ कर सकता हे, हैरी का बुरा नहीं चाहं सकता ।"

" तो अब आदेश दीजिए महामहिम कि क्या किया जाए !"

" तुम फिलहाल उसके सामने आत्मसमर्पण कर दो ।" दूसरी ओर से सिगंही का आदेश गूंजा ।

" जी. . . !" सोवर के मुखसे आश्चर्य में डूबी चीख निकल गई ।

"जो आदेश हम दे रहे हैं, उसका पालन करो बेवकूफ ।" सिगंही की गुर्राहट पर सोबर कांप उठा !!

"या. . .या तुम एक काम करो ।" ऐसी आवाज आई जैसे अचानक सिगंही को कोई .प्लान सूझा हो…"हैरी की बाते हमसे करवाओ !”

"आपसे !"एक बार फिर सोबर के मुह से आश्चर्य में डूबा हुआ स्वर निकला ।

"ज़ल्दी करो बेवकूफ! न जाने कब सी.आई.ए. वहां छापा मार दे ।"

"जैसी आज्ञा महामहिम ! " कहकर सोबर बहां से हटकर तेजी के साथ उसी हाॅलनुमा कमरे में पहुंच गया । यहाँ जाकर वह हैरी से बोला…"मिस्टर हैरी, आप मेरे साथ आइए ।"

"तुमने क्या सोचा ।" हैरी अत्यंत प्रभावशाली स्वर में बोला-----" आत्मसमर्पण कर रहे हो या........!"

…" पहले आप एक मिनट मेरे साथ आएं ।" सोबर बुरी तरह बौखलाया हुआ था-" महामहिम आपसे कुछ बाते करना चाहते है।"

हैरी जानता था कि ये लोग महामहिम विकास को कह रहे हैं । विकास से बाते करने की खुद उसकी भी प्रबल इच्छा थी । एक मिनट उसने सोचने का अभिनय किया और बोला । "

…”चलो लेकिन एक बात याद रखना, तुम्हारे इस हाँल में भी सी.आई.ए के एजेंट उपस्थित है !”

" बको मत! " सोबर चीख़ पडा… "अब तुम्हारी गप्प जरूरत से ज्यादा लंबी होती जा रही है । अब तो मुझे यह संदेह होने लगा है . मैं कि तुम सी आई. ए की धमकी सूखी दे रहे हो । सच बोलो..... कहते हुए उसने रिवाल्बर निकाल लिया-------"'वरना गोली-मार दूंगा ।"

" धांय !'

तभी एक फायर की आवाज से कमरा दहल उठा । " कोई समझा भी नही और पलक झपकते ही सोबर का रिबॉंल्बर दूर जा गिरा ।

गोली सीधी उसके रिवॉल्वर पर लगी । सोबर का हाथ झनझनाकर रह गया ।

सब चोंक पडे, तभी एक आवाज गूंजी ।

" कोई न हिले । हैरी की तरफ़ कदम बढाने का मतलब है मौत !"

हैरी के अतिरिक्त सबने चौंककर इस गरजने वाले क्रो देखा । वह अधेड के ही दस आदमियों में से एक था । तभी हाँल के दूसरे कोने से आवाज गूंजी।

"उधर ही नहीं, इधर भी सी.आई.ए है ।"

देखा तो उनका ही एक अन्य साथी हाथ में रिवाल्वर लिए खड़ा था ।।

सोबर और उसके सभी साथी चौंक पडे ।

सोबर के मुँह से है निकला…“तुम !”

" नही मिस्टर धतुरारामजी, ऐसी बात नहीं है ।" हैरी बोल पड़ा-“वो तुम्हारे साथी नहीं, बल्कि तुम्हारे साथियों के मेकअप में हैं । मिस्टर बर्मन बखूबी जानते हैं कि जब वे मुझे लेने कोठी में गए थे तो इन दोनो को कार के पास छोड़ गए थे । लेकिऩ इसका क्या किया जाए कि जबतक ये लोग मुझे लेकर कार के पास पहुचे, उक्त बीच सी.आई.ए. के ये दोनों महारथी तुम्हारे उन साथियों का क्रिया-कर्म करके तुम्हारे साथी वन गए ।”

सोबर की आखें फैली की फैली रह गईं ।

उसे सोचना पड़ा कि कम उम्र का लड़का बेहद काइयां हैं।

उन दोनों सी आई ए के एजेंटों ने सारे हॉल को कवर कऱ लिया । मुस्कराते हुए हैरी ने सोबर से कहा-----" चलो, जरा तुम्हारे महामहिम से बातें कर ले ।"

सोबर उसे लेकर यंत्र के पास महुंच गया । माउथपीस के'पास मुंह ले जा कर हैरी बोला ।

" हैलो विकास! मैं हैरी बोल रहा हूँ ।"
 
"तुम हैरी बोल रहे हो बर्खुरदार, लेकिन मैं विकास नहीं हू।" दूसरी ओर से सिगंही की गुर्राहटा उभरी-"तुम शायद मुझें आवाज से ना पहचानो इसलिए तुम्हें बता दूं कि विश्व मुझे सिंगही के नाम से जानता है । मैं जानता हूं कि तुमने अपनी चाल चलकर सी.आई.ए के साथ मेरे आदमियों को घेर लिया है । लेकिन एक बात कान खोलकर सुन लो कि अगर मेरे किसी भी आदमी को हानि पहुंचाई गई तो हमेशा के लिए अपना एक अच्छा दोस्त खो बैठोगे ।"

--"क्या मतलब! " हैरी थोडा उलझा ।

उसका दिमाग बड्री तेजी से क्रार्यं कर रहा था

"मतलब कि तुम्हारा दोस्त विकास--यहाँ मंगल ग्रह पर हमारी केद मे है और अगर तुमने हमारे आदमियों को किसी प्रकार की हानि पहुँचाने की चेष्टा की तो यहाँ मैं विकास को खत्म कर दूगा ।"

" ओह.......!* हेरी एकदम बोला-" तो अब मैं समझा, यह सब कुछ विकास नहीं वल्कि तुम कर रहे हो । और विकास तुम्हारी कैद में है और तुम प्रत्येक अपराध उसके नाम से करके उसे पूरे विश्व में बदनाम क़र रहे हो । इंसानों को बिल्ली तुम बनाते हो सिगंही । अमेरिका के शहरों में विनाश तुम फैला रहे इस सबके पीछे विकास का नाम छोड़ देते हो ताकि तुम्हारे सिर पर मंडराता हुआ एक खतरा हमेशा के लिए विश्व में प्रचलित हो जाए ।"

" मुझे तुम्हारी समझदारी की दाद देनी होगी लड़के ।” दूसरी ओर सें सिगंही का स्वर उभरा-"बहुत जल्दी तुम सिगंही का प्लान

समझ गए लेकिन एक बात ध्यान रखना कि अगर तुमने यह रहस्य अन्य किसी पर प्रकट किया अथवा मेरे आदमियों को गिऱफ्तार किया तो यहां विकास का अंत समझना ।

" हैरी इस तरह की धमकियों में नहीं आता है सिगंही बेटे!" ' लड़का एकदम भयानक होकर गुर्रा उठा----""मुझे तो किसी भी कीमत पर यह विश्वास ही नहीं आ रहा था कि विकास विनाश फैलाकर मानवता को इतनी बडी हानि पहुचा सकता है । वो मेरा दोस्त है, उसे मैं पहचानता है । वह ऐसा नहीं कर सकता । तुमने मुझे जो ये गीदड़ भभकी दी है, इसमें भी मैं आने वाला नहीं हू । मैं सव कुछ करूगां, तुम्हारे आदमियों को भी गिरफ्तार करूंगा । सारे अमेरिका को बता दूगा कि यह सब विकास नहीं बल्कि तुम कर रहे हो । लेकिन एक बात सुनो सिगंही! अगर विकास को कुछ हो गया तो. . .तो कसम विकास की, तुम्हें चीर-फाड़कर सुका दूंगा ।"

" अभी तो तुम पैदा हुए हो लड़के !" सिगंही की आवाज उभरी…" सिगंही क्या है, तुम नहीं जानते ।"

" तुम नहीं जानते सिगंही बेटे कि हैरी क्या है !" कहते कहते हैरी का चेहरा कनपटी तक सुर्ख हो गया----“याद रखना, में दोस्त हू विकास का । उसे किसी भी कीमत पर बदनाम नहीं होने दूंगा । वह अपराधी नहीं है । में जानता हु कि तुम आसानी से उसे मार नहीं सकते, लेकिन अगर तुमने मारने की धमकी दी है र्तों हैरी झुकने वाला नहीं है । विकास जिंदा रहकर इतना बदनाम हो जाए कि पूरा विश्व उससे नफरत करे, इससे अच्छा यह है कि विश्व यह जान ले कि विकास अपराधी नहीं है । यंह जान ले कि मानवता के लिए विकास ने जान वे दी है । उस जिदगी से यह मौत अच्छी है । विकास को मार देने की तुम्हारी धमकी मुझें विश्व के सामने सच्चाई खोलने से नहीं रोक सकती । लेकिन एक बात कान खेलकर सुन लो, अगर मेरे यार को तुमने एक उंगली भी लगाई तो ,उसी की कसम, तुम्हें पाताल तक मैं नहीं छोडुंगा ।"

"लगता है तुम्हें विकास से पेम नहीं ।

"प्रेम का मतलब यह नहीं है कि तुम्हारी इस धमकी मे आकर में अपने दोस्त को जीते-जी मार दूँ ।"

" ज़हां तक तुम पहुचे हो हैरी, वह मेरा महत्वपूर्ण अड्डा नहीं है ।" सिगंही की आवाज उभरी…"तुम अगर उन्हें गिरफ्तार कर लोगे तो मेरी शक्ति में कोई अंतर नही पडेगा, लेकिन विकास को तुम खो दोगे ।" कहने के साथ ही उसकी ओर से संबंध-विच्छेद होगया।

हैरी के मस्तिष्क को एक झटका लगा ।

अंतिम शब्दों में सिंगही ने उसे एक बार फिर विकास की हत्या की धमकी दी थी । उसे तेजी के साथ फैसला करना था कि उसे करना क्या चाहिए । वैसे उसे यह उम्मीद नहीं थी कि विकास इस सरलता से मर जाएगा ।

एक बार को तो उसके दिमाग में आया कि वह विकास के लिए इन सबको छोड़ दे, लेकिन तभी उसके दिमाग में अपना फर्ज घूम गया । उसके पिता जैकी ने उसे सिखाया है कि हमेशा प्रत्येक भावना से ऊचा फर्ज होता है । अगर उसने इन्हें छोड़ दिया तो ये लोगों को बिल्ली बनाते रहेगे । मानवता…की इतनी बड्री हानि वह सहन नहीं कर सकता । यह उसका फर्ज है ।

यह संब करने में विकास की जान को खतरा था । लेकिन एक विकास को बचाने के लिए वह मानवता की इतनी बडी हानि भी तो नहीं कर सकता । उसने निश्चय कर लिया कि वह अपना फर्ज पूरा करेगा ।

अगर सिगंही ने वास्तव में विकास को हानि पहुंचाई तो किसी भी कीमत पर वह सिंगही को नहीं छोड़ेगा ।

सोचते-सोचते हेरी के चेहरे पर कठोरता उभर आई । वह तेजी के साथ सोबर की ओर घूमा और गुर्रांया ।

“तुंम अपने-आपको गिरफ्तार समझो ।”

कुछ ही देर में सी-आई-ए, ने वहां कब्जा कर लिया, सबकों गिरफ्तार कर लिया गया । हैरी ने सी.आई.ए के सामने यह स्पष्ट कर दिया फि-यह सब विनाश सिंगही फैला रहा है । विकास को तो केवल बदनाम किया जा रहा है ।

हैरी को अब बहुत काम करने थे , इसलिए वह एक टैक्सी में बैठा अपने घर की तरफ उडा चला जा रहा था ।

जैकी और जूलिया को अपनी सफ़लता के विषय में बताने के लिए वह बेचैन था।

जैक्सन का दिमाग बेहद परेशान था ।

दिन बीतते जा रहे थे और वह दिन करीब आता जा रहा था, जब विकास के पैंतालीस दिन पूरे होने थे और जैक्सन को यह विश्वास होगया था कि अगर जल्दी ही कुछ किया न गया तो निश्चित रूप से विकास के पास वह शक्ति है जिसके बूते पर वह संपूर्ण अमेरिका को खाक में मिला सकता है ।

पहलें तो जैक्सन के दिमाग में था कि अगर उसे किसी प्रकार मालूम हो जाए कि विकास ने सिंगही को कहाँ कैद किया है तो सबसे पहले वह उसे आजाद करे ।

लेकिन पता न लगा सकी । उसे तो इस बात से भी अवगत न किया गया था कि विजय, अलफांसे, अशरफ इत्यादि को कहाँ कैद किया गया है ।

अब पैंतालीस दिन में से घटकर दस दिन रह गए थे, यानी विकास द्वारा दिए गए चैलेंज को तीस दिन बीत गए थे ।

कयामत का दिन केवल दस दिन बाद था ।

कदाचित इसीलिए जैक्सन अधिक चिंतित थी । किसी भी तरह उसे विकास को यह विनाश करने से रोकना था । इसके लिए अब जैक्सन के दिमाग में नया क्रीडा कुलबुला रहा था ।

वह सोच रही थी कि क्यों न इसकी जड़ को ही समाप्त कर दिया जाए । विकास को पंगु बनाने का एक तरीका उसके दिमाग से आ गया था ॥

तुगलामा की हत्या ॥ ॥

अब प्रिसेज जैक्सन के दिमाग मे यही विचार स्थिर होकर रह गया था ।

वह जानती थी कि केवल तुंग ही इस अविष्कार का जन्मदाता है । इसे समाप्त करने से विकास पंगु हो जाएगा ।

लेकिन ......तुगलामा की हत्या कैसे की जाए ? जैक्सन जानती थी कि यह कार्य इतना सरल नही है । विकास टुम्बकटू और धनुष्टंकार उसकी सुरक्षा का विषेश प्रबंध रखते है ।

इस समय जैक्सन सतर्कता के साथ गैलरी पार करती हुई उस प्रयोगशाला की तरफ बढ रही थी जिसमें तुंग था

उसे मुकुट की जुदाई का बेहद दुख था , मुकुट के साथ ही उसकी समस्त वैज्ञानिक शक्तियां छिन गई थी । अभी वह प्रयोगशाला के समीप पहुंची ही थ्री कि अचानक उसके सिंर पर एक चपत पड्री और वह चौकी।

"गुलाम हाजिर है स्वन सुंदरी! उसके ठीक सामने खड़ा टुम्बकटू लहरा रहा था ।

एक पल के लिए टुम्बकटू जैक्सऩ को जिन्न-सा लगा, परंतु मजाल है कि जैक्सन के मुखड़े पर हल्की…सी भी बौखलाहट का भाव आ जाए! वह अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ मुस्कराकर बोली----" तुम क्या हमेशा मेरे पीछे रहते हो?"

"'तुमसे कितना कहा मेरे सपनों की रानी!" टुम्बकटू अदा के साथ लहराकर बोला…“कि मेरे दिल के टमाटर पर प्रेम के पानी का बताशा रखकर फोड दो । कसम मूंगफैली के तेल की; एक साल में बारह दर्जन बच्चों की माताजी वना दूंगा ।"

"मैं तो हूं ही तुम्हारी लंबू राजा ।" बडी शराफ़त्त के साथ बोली जैक्सन-"लेकिन मेरे ऐसे नसीब कहां जो तुम जैसा शक्तिशाली व्यक्ति मेरा हाथ थामे?”

" हाय-----!" कहते हुए टुम्बकटू अपनी नन्ही-स्री छाती पर हाथ मारकर एकदम दो-तीन जगह से लचक गया…" ये क्या तौहीन कर रही हो स्वप्न सुंदरी! अगर तुम अपनी किस्मत को दोष दोगी तो कसम काली भैस की, तुम्हारा हाथ ही नहीं बल्कि पूरी तुम्हें अपनी फौलादी बांहों में कस लूँगा !" कहते हुए अपनी सीक-सलाई-सो बॉडी फुलाई ।

"तो आ जा न मेरे पास ।" जैक्सन मुस्कराकर उसकी और बढती हुई बोली------- “दूर क्यों खडे हो? मुझे बांहों में कस लो !"

"अरे ठहरो?" टुम्बकटू एकदम अपने स्थान पर खड़ा-खड़ा ही बोखलाकर चीखा----" आगे मत बढना ।” उसके स्वर में चेतावनी वाला पुट था------" कसम अपने अब्बा की, आज मेरा नारी-व्रत है ।"

"नारी-व्रत?" जैक्सन उलझकर बोली-" ये क्या होता है?”

"इस व्रत के दिन पुरुष को नारी से स्पर्श तक नहीं करना चाहिए ।" टुम्बकटू जल्दी से बोला---" दूर रहो अरे.......रे!"

"आज मै तुम्हारी होकर कर रहुगीं । तुम खुद नहीं तो मै तुम्हारा व्रत तोड़ दूंगी ।" कहती हुई जैक्सन उसकी ओर बढ़ी ।

"नहीं नहीं!" टुम्बकटू इस प्रकार भयभीत होकर चीखा मानो वास्तव में जैक्सन के स्पर्श मात्र से ही अनर्थ हो जाएगा । उसी क्षण वह उछला जैक्सन केवल यह देख सकी कि टुम्बकटू एक रोशनदान के जरिए प्रयोगशाला में चला गया ।

जैक्सन के दिमाग को एक झटका-सा लगा था । वह जान गई थ्री कि तुंगलामा की हत्या करना कठिन ही नहीं बल्कि असंभव है ।

वह वापस लोट गई और अपने कक्ष में जाकर वेड पर लेट गई । वह तेजी से सोच रही थी कि उसे क्या करना चाहिए?

उसके जीवन का यह प्रथम अवसर था जब वह खुद को इतंना बिक्श पा रही थी । बेड पर पड़े-पड़े जैक्सन सो गई । फिर पता नही कितने घंटे बाद उसकी नींद खुली । इसके बाद उसके दिमाग में एक अन्य स्कीम आ रही थीं । यह स्कीम काफी खतरनाक थी, लेकिन इसके अतिरिक्त कोई चारा न देखकर उसी खतरनाक स्कीम पर चलने की ठानी ।

इसके एक घंटे बाद. . .

उसने एक ऐसे उल्टे मानव से बाते करनी शुरू कर दी जो कि सिगंही का बहुत वफादार मुलाजिम था और इस हैडक्वार्टर की पूरी एक रेक का मालिक था । किसी बहाने से प्रिसेज जैक्सन पकडकर अपने कक्ष में ले आई । वह उल्टा मानव जैक्सन की हरकतों पर बुरी तरह उलझ गया था ।

वह कुछ कहना ही चाहता था कि जैक्सन ने उत्ते चुप रहने का संकेत किया । बाथरूम में पहुचते ही जैक्सन ने दरवाजा बंद किया ।

तभी मंगल निवासी मंगल की अदा मे बोला-----"क्य वात है मेडम?"

" पहले यह बात बताओ कि तुम्हारा नाम क्या है?" जैक्सन ने प्रश्न किया।

" जाम्बूरा ।" उसने जवाब दिया ।

"तुम्हारा सग्राट कौन है?"
 
"असली सम्राट तो महामहिम सिगंही है ।" .वह बोला……"लेकिन आजकल वे किसी महत्वपूर्ण आविष्कार में उलझे हुए हैं, इसलिए महामहिम विकास को सम्राट वना दिया है ।"

" यह गलत है ।." जैक्सन ने कहा…"तुम जानते हो कि यहां विकास के बाद में अपने साथियों के साथ आई थी । वास्तब में हम सब महान सिंगही के साथी है । असलियत यह है कि विकास ने महान सिंगहीँ को कैद कर रखा है और आप सबको इस धोखे में रखा है कि वे आविष्कार कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह नहीं है । असलियत यह है कि इस लड़के ने महान सिगंही को कैद कृरं रखा है । मेरे उन सभी साथियों को भी कैद कर लिया है जो मेरे साथ आए थे ।"

"क्या बक रही हो?" जाम्बूरा गुर्रा उठा ।

"तुम मेरा यकीन करो, मैं सच कह रही हूं ।" जैक्सन ने संयम के साथ कहा…“उन्हें इसलिए कैद किया गया है क्योंकि उन्होंने महान सिगंही से मिलने की इच्छा प्रकट की थी ।"

"फिर तुम्हें आजाद क्यों रखा?"

"मैं प्ररिस्थितियों को समझकर चल रही हू ।" उसने कहो-" इस लड़के ने महान सिंगही को धोखे से कैद किया है । मेने सोचा, धोखेबाज़ को धोखे से ही मारा जा सकता है । इसलिए मैंने महान सिंगही से मिलने की इच्छा प्रकट नहीं-की और जाहिर किंया कि मैं उसी के साथ हूं।"

" लेकिन मैं इस बात पर कैसे विश्वास कर सकता हूं?" जाम्बूरा ने कहा ।

" बिल्कुल यकीन मत करो ।" जैक्सन अपने शब्दों को कड़ा करती हुई बोली…"तुम अपने साथियों के साथ मिलकर लड़के के सामने पहुचो और यही अपील करों कि तुम केवल एक बार महान सिगंही के दर्शन करना चाहते हो? मेरा दावा है कि वह इस बात के लिए तैयार नहीं होगा । केवल इसलिए कि वह कैद में है । अगर वह तुम्हें दर्शन करा दे तो मेरी बात झूठी साबित हो जाएगी नहीं कराए तो तुम्हें खुद ही मालूम हो जाएगा कि मैं ठीक कह रही हूं । इसके बाद जैसा तुम चाहो, करना ।"

और इस प्रकार......

जैक्सन ने जाम्बूरा को प्रभावित कर लिया । जाम्बूरा के दिमाग में यह बात बैठ गई उसने शीध्र ही यह बात दरबार मेँ उठाने की सोच ली । जैक्सन अपने इस जाल को और अधिक दुढ़ कर लेना चाहती थी ।

एक अन्य स्कीम भी उसके दिमाग में थी ।।

विकास, टुम्बकटू और धनुष्टंकार की दुप्टि उस स्क्रीन पर जमी हुई थी । स्क्रीन पर एक यान नजर आ रहा था । वह मंगल की धरती पर लेड करना ही चाहंता था ।

उसे देखता हुआ टुम्बकटू अचानक बोला ।

"इसका क्या किया जाए बापूजान?"

"मेरे विचार से उन्हें उतरते ही गिरफ्तार कर लिया जाए लंबू अंकल!" विकास ने कहा…“इस यान मे विश्व के श्रेष्ठतम जासूस हैं । हमारे लिये खतरनाक भी साबित हो सकते है ।"

" ओके बापू जान! " टुम्बकटू ने कहा--" आप मुझे इनकी स्थिति की जानकारी देते रहना, मैं जाम्बू और उसके साथियों के साथ जाकर इनको मुर्गा बनाता हू !" इस प्रकार टुम्बकटू तेजी के साथ लहराता हुआ वहा से निकल गया ।

वहां केवल विकास और धनुष्टंकार रह गए ।

विकास अब प्रत्येक काम सोच-समझकर, और सतर्कता के साथ करना चाहता था ।

वह जानता था कि उसके सारे ही दुश्मन अब उसके इर्द गिर्द एकत्र हो चुके है । सिगंही उसकी कैद में था, विज़य, अलफासे अशरफ इत्यादि का ग्रुप भी दुश्मन के रूप में ही था ।

जैक्सन पर भी उसे संदेह था ।

इधर विश्व भर-के जासूस उसका अंत करने के उद्देश्य से यहां आ ही थे ।

चारों ओर दुश्मन थे ।

इधर विकास सहित वे केवल चार थे । उसके तीन विश्वस्त साथी थे-टुम्बकटू धनुषटंकार ओर पूजा ।

पूजा तो बेचारी इन खतरनाक बातों से नावाकिफ थी । वह इन सब बातों को क्या समझती?

"अब हमे तुगलामा ने इतने बादल और अक्षर दे दिए है कि हम अमेरिका को खत्म कर सकते है ।” विकास ने घनुषटंकार की ओर देखकर कहा।

धनुषटंकार ने डायरी पर यूं लिखा…"र्तो फिर इंतजार किसका है गुरु? उड़ा दो अमेरिका को !"

मुस्कराकर विकास बोला…“इतना उतावलापन ठीक नहीं होता धनुषटंकार । वैसे मैंने संपूर्ण शक्ति इस मशीन मे समेट ली है । क्या एक बटन दबाते ही पंद्रह मिनट बाद पूरा अमेरिका समाप्त हो जाएगा ।"

" बैसे गुरु आपने अपनी चाल चलकर हैरी को खूब खीचा ।“ धनुषटंकार ने डायरी पर लिखा ।

"भारत मे वापस भी तो जाना है प्यारे धनुषटंकार ।" बिकास ने कहा-"सिंगही की आवाज में मैंने उसे जो धोखा दिया, उसका' परिणाम यह होगा कि वह सारे विश्व में फैला देगा कि यह सब विकास के नाम से सिगंही कर रहा है ।"

"मान गए गुरु!" धंनुषटंकार ने पुन: डायरी पर लिखा ।

इसके बाद उनकी बातों का क्रम टूट गया । विकास ने एक ट्रांसमीटऱ ऑन किया और स्क्रीन पर देखकर वह टुम्बकटू को यान की स्थिति समझाने लगा ।

इस प्रकार उनके देखते-ही-देखते टुम्बकटू , जाम्बू और उसके साथियों ने विश्वभर के जासूसों को बड्री सरलता के साथ कैद कर लिया ।

तभी उस कक्ष में पूजा ने प्रवेश किया ।

उसे देखते ही विकास बोला-----"आओ पूजा । हो गई नीद पूरी?”

" इस तरह तो मैं बोर हो जाऊंगी विकास !" पूजा ने कहा… "मुझे भी कुछ काम बताओ ।"

"तुम क्या काम करोगी?" मुस्कराकर विकास ने पूछा , तभी धनुषटंकार ने डायरी पर कुछ लिखा ।

"अगर आप बुरा न माने गुरु तो एक बात कहूं? वह यह बात फि अब हमारे इतने दुश्मन यहाँ एकत्र हो चूके है कि हमें सतर्क होकर रहना चाहिए । यानी विजय इत्यादि पर नजर रखनी चाहिए।"

" विचार तो तुम्हारा ठीक ही है ।" बिकास ने कहा-" लेकिन हमारे पास ऐसा कोई भी विश्वस्त आदमी नहीं है जो उन पर नजर रख सके ।"

" क्या मुझ पर अभी भी विश्वास नहीं है?" पूजा ने कहा ।

" तुम पर तो विश्वास है ।" विकास ने कहा…"लेकिन तुम उन पर किस प्रकार नजर रखोगी?"

"एक आइडिया है गुरु, अगर पूजा डार्लिंग को पसंद आए ।" धनुषटकार ने लिखा ।

--"बोलो, क्या है?"

" मेरे बिचार से गुरु, पूजा डार्लिंग को स्वामी विजय के साथ ही कैद कर दिया जाए ।"धनुषटकार ने लिखा---" इससे स्वामी विजय को किसी प्रकार का भी संदेह नहीं रहेगा और पूजा उन पर नजर भी रख सकेगी । वे कैद में रहकर जो भी हरकत करेगे, पूजा हमेँ रिपोर्ट देती रहेगी !"

धनुषटकार का लिखा हुआ पूजा को सुनाकर विकास ने पूछा-----"क्या इरादा है?”

पूजा के मुखड़े पर नाराज़गी के भाव उभर आए । रूठने के से अंदाज में वह बोली----" आप लोग मुझे फिर अपने से दूर करना चाहते हैं !"

'"इसका मतलब तुम यह कार्य नहीं कर सकती ।"

" मैंने ऐसा कब कहा विकास ।" पूजा बोली-------" तुम पूजा से आग में छलांग लगाने को कहोगे, यह भी मंजूर होगा ।"

" मुझे गलत मत समझो पूजा?" विकास ने कहा…“तुम जनती हो कि अब ज़बकि मैं अपने लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच गया हूं । मेरे अपने दुश्मन चारो ओर है । किसी भी क्षण मैं लक्ष्य से दूर हो सकता हू । तुम सेरे विश्वस्त साथियो में से एक हो । इस लक्ष्य को प्राप्त करने मे तुम मेरी सहायता करो । उसके बाद जो तुम चाहोगी , वही होगा।"

"जो मैं चाहूंगी ?" पूजा ने बड़ी कातर निगाहों से विकास के देखते हुए कहा ।

" सच पूजा, जो तुम चाहोगी ।"

" फिर तो मैं एकदम तैयार हू । मुझें फौरन कैदंखाने में भेजो ।"

"धनुषटंकार ।" बिकास ने उससे कहा----"तुम जाकर पूजा को विजय गुरू के कक्ष में छोड़ और देखो ध्यान रखना, इस बीच कहीं विजय गुरु कोई चालाकी न दिखा जाए ।"

"आप चिंता न करो गुरु!" धनुषटंकार ने अपनी' डायरी पर लिखा। . ।

“देखो! पूजा को छोड़कर जल्दी आना । लंब्रूअंकल भी उन लोगों को लेकर यहां पहुचने वाले होंगे । इधर दरबार का समय भी ही रहा है । उनकी पेशी आज दरबार में होगी ।"

बड़े मजे धनुषटंकार एक आंख दबाई और पूजा के साथ कक्ष से बाहर निकल गया ।

बिकास और धनुष्टंकार में से कोई भी यह नहीं देख सका कि पूजा बडे रहस्यमय ढंग से मुस्कराई थी ।
 
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