विकास की वापसी
विकास के आंख दबाते ही बिजय चोंक पडा । एक वार उसने अलफांसे की और देखा बोला-----" प्यारे लूमड खां ।। ये साला चेला तो गुरु वन गया । क्यो प्यारे दिलजले! तुम यहां अलादीन के चिराग की भांति कैसे पैदा हो गए?”
“बाईं दी वे गुरू! " विकास मोहकता के साथ बोला……"मगल का सम्राट आपका बच्चा है । जानता है कि गुरु लोग कहां जा सकते हैं !"
…“तो प्यारे, अब हमं यहां आ गए !" बिजय ने कहा-----"अब तक तुमने जो किया है, वह इतना हो चुका है कि अगर मैं तुम्हारा क्रिया क्रम कर दूं तो.... तो दुनिया हमें पुष्पहार पहनाएगी ।"
“गलत गुरू !" विकास ने उसी संयमता के साथ कहा… जो काम आप कर नहीं सकते वह कहने से क्या लाभ?"
"क्या कहा वे।” बिजय एकदम अपनी दोनो बांहे चढाता हुआ बोला----- " साले गुरू लोगों से टकराता है यानी कि आखें दिखाता हैं! बेटा कैलेंडर बनाकर दीवार पर चिपका दूगा ।”
अलफासे आश्चर्यजनक रूप से शात था । अशरफ भी खडा हो चुका था । वह आश्चर्य के साथ बिकास को देख रहा था ।
“अरे आप तो बुरा मान गए गुरू !" विकास गिरगिट की तरह एकदम रग बदलता हुआ बोला-" मैं तो मजाक कर रहा था ! असंल बात तो यह है कि आपको लेने आया हूं !"
……“जो तुम कह रहे हो बेटा दिलजले, वह कभी नहीं कर सकते ।" कहते हुए विजय ने कमाल कर दिया । विकास तो विकास, अशरफ और अलफांसे तक कुछ न समझ सके ।
इतनी अधिक फुर्ती से विजय ने विकास के जबड़े पर घूंसा मारा था , वैसी फुर्ती किसी ने नही देखी थी. हालांकि विकास अपनी तरफ़ से वेहद सतर्क था, लेकिन विजय भी आखिर उसका गुरु था ।। एक ही घूसे में विकास फिरकनी की तरह घूम गया और धड़ाम से गिरा ।
विजय जानता था कि लड़का भी पहुंचा हुआ है, इसलिए तेजी से झपटा,लेकिन...।
बीच में आ गया अलफांसे!
जैसे ही विजय विकास पर झपटा, अलफांसे के बूट की जोरदार ठोकर उसके चेहरे पर पड़ी ।
विजय के कंठ से एक चीख निकल गई और वह तुरंत दूसरी ओर पलट गया । विजय को सोचने का मौका ही नहीं मिला, लेकिन अशरफ अलफांसे की विचित्र हरकत पऱ अवश्य अवाक रह गया ।
विद्युत गति विजय झुंझलाकर खडा हो गया था लेकिन अलफांसे विजय और विकास के बीच कूल्हों परे हाथ रखे खडा था । उसकी पीठ विकास की ओर थी और वह बिजय घूर रह्य था ।
" अरे बेटे लूमडखान । ये क्या गिरगट की तरह रग बदल रहे हो?”
.…" अगर इस बार विकास पर हाथ उठाया जासूस बेटे तो तोडकर जेब में रख दूगा ।" अलफांसे गुर्राया-‘लडका जो कर रहा ठीक कर रहा है ।"
.……"देखा प्यारे झानझरोखे ।" विजय ने अशरंफ़ की ओर देखकर भटियारिन की भाति हाथ नचाकर कहा-"इस साले लूमड को अपने साथ रखना भी जुर्म है । हमारा नाम भी विजय दी ग्रेट है । तुम्हारे भी कस-बल ढीले करने पड़ेगे ।" कहता हुआ विजय वास्तव में अपने आपको विकास और अलफांसे से टकराने के लिए तैयार करने लगा ।
" तुम्हारी बुद्धि को जंग लग गया है जासूस प्यारे ।" अलफांसे सतर्क होकर बोला--" अब विकास पूरी तरह अपराधी वन चुका है, जबकि शुरू से हमारा उद्देश्य यह था कि अपराधी न बने । हम इसे वापस लेने आए थे लेकिन हम हार गए । हमारे यहां पहुंचने से पहले ही यह इतना आगे निकल गया है कि अब इसका लौटना एकदम असंभव है ।
अब इसका लौटना एकदम असंभव है । यह अपराधी बन चुका है । विश्व इसे माफ़ नहीं करेगा । फिर क्यों न इसे अपने उद्देश्य में सफल हो जाने दे? जव यह अपराधी बन ही गया तो इसे अपना कार्य पूरां करने दो । अमेरिका विश्व, के अन्य देशो का, नासूर है । खत्म हो जाने दो उसे !”
“बेटा लूमढ़, क्या तुम्हारी बुद्धि उलट गई है?"
"अब कुछ नहीं होगा विजय, अलफांसे दृढ़ स्वर में बोला…"मैं विकास के-साथ हूं ।"
तभी-एक अन्य आश्चर्य हुआ । अचानक विकास की एक जोरदार ठोकर अलफांसे की पीठ पर पडी ।
अलफांसे को विकास से इस अजीब हरकत की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वह स्वयं को -संभाल नहीं सका और वेग के साथ सीधा विजय से जाकर टकराया, तभी पीछे से बिकास बोला---"क्षमा करना गुरु! बच्चा ,गुरु लोगों की नस-नस पहचानता है ।"
" क्या मतलब?" अलफांसे ने चौंकने का अभिनय किया ।
"मतलब को हाजमे की गोली खिलाओ प्यारे लूमड़खान ।" बीच में टपका विजय-" हम दोनों ने ऐसा चेला तैयार किया है कि एक दिन ये हमें गंजा करके एक-दूसरे की चुटिया बांध देगा । गुरु लोगों की चाल को भी समझ गया ।"
" क्षमा करना गुरु! वास्तव में मैं आपकी चाल समझ गया था ।" विकास ने कहा-"आप लोग ऐसा प्रदर्शित कर रहे थे जैसे एक-दूसरे से झगड़ा कर रहे हो जबकि अलफांसे गुरु आप मेरे बनकर मेरा ही बंटाधार करने पर तुले हुए थे ।"
विजय और अलफांसे ने चमत्कृत-सी निगाहों से विकास को देखा ।
अशरफ की तो जैसे खोपड्री ही में चकरा रही थी । उसने तो स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि विजय और अलफासे एक योजना-के अंतर्गत एक…दुसरे से लड़े । इससे भी यह एक बार पुन: विकास से बेहद प्रभावित हुआ ।
यह लड़का गुरु लोगों की साजिश में नहीं आया था ।
" विकास !" अलफांसे गुर्रा उठा-" माना कि तुम बेहद चालाक हो लेकिन तुम अपनी शक्ति के सामने गुरु का आदर करना भी भूल गए हो । याद रखो, अब मंगल पर अलफांसे आ चुका है और जब तक मैं नहीं चाहूगा विकास, तुम कुछ कर नहीं सकोगे । हमने इसलिए ही ट्रेड नहीं किया था कि उस शक्ति को गलत कार्यों में प्रयोग करो ।। माना कि आज तुम शक्तिशाली हो गए हो । यह भी माना क्रि इस समय तुम मंगल-सम्राट हो । यह भी माना कि विश्व के खूंखारतम अपराधी तुम्हारे नाम से कांपते हैं ।
यह माना कि विदेशी जासूसों के दिमाग पर तुम्हारा भूत सवार है ।। और यह भी मानता हू विकास र्कि वास्तव में तुम उन सबसे शक्तिशाली भी हो लेकिन हमसे टकराने की कोशिश मत करो विकास घाटे में रहोगे! तुम जो हो, हमारी बदौलत.. .हम तुम्हारे गुरु हैं । तुम्हें दांव हमने सिखाए, ट्रेंड हमने किया लेकिन याद रखो, बिल्ली अगर शेर को सारे दांव सिखा देती तो बिल्ली को गुरु कोई नहीं कहता !"
" आपके सोचने का ढंग जरा गलत है क्राइमर अंकल! " विकास ने कहा-"मैंने कभी कोशिश नहीं की थी कि आप लोगों से टकराऊं. . .क्यो विजय गुरु, तुम बोलो! क्या मैने कभी तुमसे टकराने की कोशिश की है? सबसे पहले मैं आपको यह बताने गया था कि भारत मे सी.आई.एं. का जाल है । वहां भी मैं नहीं गुरू आप ही टकराए । तुम भी सुनो अलफांसे गुरू; कान खेलकर सुनो! जब हमारे दोनों दलो के मोण्टोफो और सर्जिबेण्टा मिले तो तब कौन टकराया था? किसने पहले साजिश की थी? नहीं गुरु मै नहीं था, वो आप थे । आप गुरु लोगों से टकराना नहीं चाहता था इसीलिए लंबू अंक्ल को आपको गिरफ्तार करने के लिए भेजा था ।
आपको हेडक्वार्टर पर न रखकर जाम्बू के अड्डे पर रखा ताकि¸.मैं सामने ही न पडू लेकिन आपने मुझे फिर सामने आने पर विवश कर दिया । नहीं गुरु, नहीं । मैं कभी नहीं टकराया. . .मैं आपकी इज्जतं करता हूं, और करता रहूगा ।"
" बेटा लूमड़खान ।" विजय बोला--------" ये तो भाषण देने में ही आगे निकल गया ।"
--'"अगर तुम हमेँ गुरु मानते हो विकास तो वापस चलो !" अलफांसे ने कहा।
" क्षमा करना गुरु!"' बिकास बोला ---- “पहले ही आपके चरणों की-कसम खा चुका हूं कि भारत से सी.आई.ए. का नाम् मिटाकर ही दम लुगां । बैसे भी अब मेरे लोटने से क्या लाभ? भारत में रहकर भारत का जासूस तो नहीं बन सकता । विजय गुरु, आपके सपने मैं साकार कर ही नहीं सकता, फिर वापस लौटने से लाभ क्या?"
"अबे बेटा दिलजले ! यानी कि फिर बदमाशी ? अबे तब तो कह रहा था कि तेरे पास कोई ऐसा प्वाइंट है जिसके बूते पर तू भारत. में दनदनाएगा और यू.एन.ओ .तेरा कुछ नही बिगाड सकेगी?"
"बो तो है गुरु, लेकिन क्यों न उसे तभी प्रयोग किया जाए, जब मैं अमेरिका को पूरी तरह मजा चखा दूं? अब मंजिल अघिक दूर नहीं गुरु! अब वापस लौटना एकदम असंभव है ।"
" इस तरह नहीं मानेगा लूमड़ भाई!" विजय ने अलफांसे सें कहा ।
"तो आज साले के कान पकड़कर मुर्गा बना दो, तब मानेगा ।'" अलफांसे भी ताव खा गया ।
दोनो तेयार होने लगे, तभी सतर्कता के साथ पीछे हटाता हुआ विकास बोला…“देखो गुरु, अब आप विवश कर रहे हैं ।"