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बिना झान्टो वाली बुर compleet

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Guest
RajSharma stories

बिना झान्टो वाली बुर पार्ट--1

मेरी दीदी की शादी बुर-हान पुर मे अभी तीन महीने पहले हुई थी. मेरी बहन मुझसे दो साल बरी है. शादी के बाद पहली बार मेरे जीजाजी दीदी को बीदा कराने महीनेभर पहले आए थे. उस समय केवल एक दिन ही रुके थे. उस समय उनसे बहुत बाते तो नही हुई लेकिन मेरी भोली-भली दीदी अपने पति के बारे में वह सब बता गयी जो नई-नई ब्याहता नही बता पाती.

उसने बताया कि वे बड़े सेक्सी है और कामकला में पारंगत है. उनका वो (कॉक) बड़ा मोटा है, पहली बार बहुत दर्द हुआ था. उस समय दीदी की बाते सुनकर ना जाने क्यों जीजाजी के प्रति मेरी उत्सकता बहुत बढ़ गयी. सोचती उनका लॉरा नज़ाने कितना बरा और लंबा होगा. बात-बात में मैने बारे अंतरंग चर्चा में जीजाजी की यह बात अपनी सहेली कामिनी को बता दिया. उसको तो सेक्स के सिवा कुछ सूझता ही नही. उस बुर चोदि ने मेरे साथ सेक्स का खेल खेलते हुए (चपटी) हुए जीजाजी से चुदवाने के सभी गुर सिखाना सुरू कर दिए. वह खुद भी अपने जीजाजी से फँसी है और उनसे चुदवाने का कोई अवसर नही छोड़ती. अपने ट्यूशन टीचर को भी पता रखा है जिससे वह अपनी खुजली मिटवाती रहती है. उससे मेरे बहुत अच्छे सम्बन्ध है. वह बहुत ही मिलनसार और हँसमुख लड़की है लेकिन सेक्स उसकी कमज़ोरी है और मैं वह बुरा नही मानती. उसका मानना है कि ईश्वर ने स्त्री पुरुष को इसी लिए अलग अलग बनाया है कि वे आपस में चुदाई का खेल खेलें. सेक्स करने के लिए ही तो अलग अलग सेक्स बनाया है. उसका यह भी मानना है कि यह सब करते हुए कुवारि कन्या को बहुत चालाक होना चाहिए नही तो वह कभी भी फस सकती है और बदनाम भी हो सकती है.

कल मेरी मम्मी ने बताया कि रेखा (दीदी) का फोन आया था कि मदन (जीजाजी) एक हफ्ते के लिए ऑफीस के काम से यहाँ शुक्रवार (फ्राइडे) को आ रहें है. रेखा उनके साथ नही आ पाएगी, उसके यहाँ कुछ काम है.उन्होने हिदायत देते हुए कहा की तेरे पापा तो दौरे पर गये हुए है अब तुझे ही उनका ख्याल रखना होगा. रेखा का उपरवाला कमरा ठीक कर देना. परसों से मैं भी जल्दी कथा सुन कर आ जाया करूँगी. वैसे वह दिन में तो ऑफीस में ही रहेगा सुबह-शाम मैं देख लूँगी

जीजाजी परसों आ रहे है जानकर मन अंजान ख़ुसी से भर उठा. मेरा बदन बार-बार बेचैन हो रहा था और पहली बार उनसे कैसे चुदवाउन्गि इसका ख्वाब देखने लगी. दीदी से तो मैं यह जान ही चुकी थी कि वे बरे चुड़ककर हैं.

मैं तुम्हे बता दूं कि मेरे पापा जो इंजीनियर हैं उन्होने मेरा और दीदी का कमरा उपर बनवाया है ग्राउंड-फ्लोर पर मॅमी पापा का बरा बेड रूम, ड्रॉयिंग-रूम, किचेन स्टोर, गेस्ट रूम, वरॅंडा, लोन, तथा पीछे सा छ्होटा बगीचा है. उपर और कमरे है जो लगभग खाली ही रहते हैं क्योकि मेरे बड़े भैया भाभी अमेरिका मे रहते है और बहुत कम ही दिनो के लिए ही यहाँ आ पाते हैं. वे जब भी आते हैं अपने साथ बहुत सी चीज़ें ले आते है इसलिए कंप्यूटर, टीवी, डVड प्लेयर, हांडीकम एत्यादि सभी चीज़ें हैं. मेरी भाभी भी खुले विचारो की है और अमेरिका जाते समय अपनी अलमारी की चाभी देते हुए बोली देखो! अलमारी में कुच्छा अडल्ट सीडी, डVड & आल्बम रखी हैं पर तुम उन्हे देखना नही उन्होने मुस्कराते हुए चाभी पकड़ा दी थी.

जीजाजी शुक्रवार को सुबह 8 बजे आ गये. जल्दी-जल्दी तैयार हुए नस्ता किया और अपने ऑफीस चले गये. दोपहर ढाई बजे वे ऑफीस से लौटे, खाना खाकर उप्पेर दीदी के कमरे में जाकर सो गये.

उसके बाद मम्मी मुझसे बोली, बबुआ सो रहे है, मैं सोचती हूँ जाकर कथा सुन औन. चमेली आती होगी बरतन धुल्वा लेना. बबुआजी सो कर उठ जाएँ तो चाय पीला देना और अलमारी से नस्ता निकाल कर करवा देन.यह कहकर वो कथा सुनने चली गई हमारी बरतन माँजने वाली बाई चंपा मेरी हम उम्र है और हमेशा हँसती बोलती रहती है

मम्मी के जाते ही मैं उपर गई देखा जीजाजी अस्त व्यस्त हालत मे सो रहे है उनकी लूँगी से उनका लिंग झाँक

रहा था. सपने मैं वे ज़रूर बुर (पुसी) का दीदार कर रहे होंगे तभी उनका लॉरा (कॉक) खरा था. मेरे पूरे शरीर में झुरजुरी फॅल गयी. मैं कमरे से निकल कर बर्जे पर आ गयी. सामने पार्क में एक कुत्ता कुतिया की बुर चाट रहा था फिर थोरी देर बाद वह कुतिया के उपर चढ़ गया और अपना लॉरा उसकी बुर में अंदर बाहर करने लगा. ओह क्या चुदाई थी. उनकी चुदाई देख कर मेरी बुर पनिया गयी और मैं अपनी बुर को सहलाने लगी. थोरी देर बाद कुत्ता के लंड को कुतिया ने अपनी बुर मैं फँसा लिया. कुत्ता उससे च्छुटने का प्रयास करने लगा इस प्रयास में वह उलट गया. वह च्छुटने का प्रयत्न कर रहा था लेकिन कुतिया उसके लौरे को छोड़ नही रही थी. यह सब देख कर मन बहुत खराब हो गया. फिर जीजाजी की तरफ ध्यान गया और मैं जीजाजी के कमरे में आ गयी.
 


जीजाजी जाग चुके थे. मैने पुचछा, चाय (टी) ले आउवो बोले नही! अभी नही.सर दर्द कर रहा है थोरी देर बाद फिर मुस्करा कर बोले, साली के रहते हुए चाय की क्या ज़रूरत?

मैने कहा हटिए भी! लाइए आप का सर दबा दूं मैं उनका सर अपनी गोद में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगी. फिर उनके गाल को सहलाते हुए बोली, क्या साली चाय होती है कि उसको पी जाएँगे जीजाजी मेरी आँखों मे आँख डाल कर बोले, गरम हो तो पीने में क्या हर्ज है? और उन्होने मुझे थोरा झुका कर कपड़े के उपर से मेरे चूचियों (बूब्स) को चूम लिया. मैं शरमा उनके सीने पर सिर च्छूपा लिया. उस समय मैं शर्त & स्कर्ट पहनी थी और अंदर कुच्छ भी नही. उनके सीने पर सर रखते ही मेरे बूब्स उनके मूह के पास आ गये और उन्होने कोई ग़लती नही की, उन्होने स्कर्ट के बटन खोल कर मेरी करारी चूंचियों के निपल को मूह मे ले लिया. मेरी सहेलियों मैं आप को बता दू मेरी सहेली कामिनी ने कई बार मेरी चूंचियों को मूह में लेकर चूसा है लेकिन जीजाजी से चुसवाने से मेरे शरीर में एक तूफान उठ खरा हुआ.

मैने जीजा जी को चूंची ठीक से चूसने के उद्देश्य से अपना बदन उठाया तो पाया की जीजाजी का लंड लूँगी हटा कर खरा होकर हिल रहा था जैसे वह बुला रहा हो, आओ मुझे प्यार करो. ओह मा! कितना मोटा और कारक. मैने उसे अपने हाथो मे लेलिया. हाथ लगते ही वह मचल गया कि मुझे अपने ओठों मे लेकर प्यार करो मैं क्याकरती उसकी तरफ बढ़ना पड़ा क्योकि मेरी मुनिया (पुसी) भी जीजाजी का प्यार चाह रही थी. जैसे ही मैने लंड तक पहुचने के लिए गोद से जीजाजी का सर हटाया और उपर आई, जीजाजी ने स्कर्ट हटा कर मेरी बुर पर हाथ लगा दिया. फिर चूम कर उसे जीब से सहलाने लगे. ओह जीजाजी का लॉरा कितना प्यारा लग रहा था उसके छ्होटे से होंठ पर चमक रही बूँद (पीकुं) कितना अच्छा लग रहा था की मैं बता नही सकती, लॉरा इतना गरम था की जैसे वह लावा फेकने वाला हो. उसे ठंडा करने के लिए मैने उसे अपने मुँह में ले लिया. लॉरा लंबा और मोटा था इस लिए हाथ में लेकर पूरे सुपरे को चूसने लगी. जीजाजी बुर की चुसाइ बड़े मन से कर रहे थे और मैं जीजाजी के लौरे को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मूह में लेने की कोशिश कर रही थी पर वह मेरे मूह मे समा नही रहा था.

मैने जीजाजी के लौरे को मूह से निकाल कर कहा, हे जीजाजी! यह तो बहुत ही लंबा और मोटा हैï¿1/2

तुम्हे उससे क्या करना है? जीजाजी चूत से जीभ हटा कर बोले.

अब मैं अपने आपे में ना रह सकी, उठी और बोली अभी बताती हूँ चोदु लाल मुझे क्या करना हैï¿1/2

मैं अब तक चुदवाने के लिए पगला चुकी थी. मैने उनको पूरी तरह नगा कर दिया और अपने सारे कपरे उतार कर उनके उपर आ गयी, बुर को उनके लौरे के सीध मे कर अपने यौवन द्वार पर लगा कर नीचे धक्का लगा बैठी लेकिन चीख मेरे मूह से निकली, ओह मा! मैं मरी जीजाजी ने झट मेरे चूतरको दोनो हाथो से दबोच लिया जिससे उनका आधा लंड मेरी बुर में धसा रह गया और वे मेरी चून्चि को मूह में डालकर चूसने लगे. चूंची चूसे जाने से मुझे कुछ राहत मिली और मेरी चूत चुदाई के लिए फिर तैय्यार होने लगी और चूतर हरकत करने लगे. ताव-ताव में इतना सब कुछ कर गयी लेकिन लेकिन अब आगे बढ़ने की हिम्मत नही पड़ रही थी लेकिन मुनिया (बुर) चुदवाने के लिए मचल रही थी.

मैं जीजाजी के होंठ चूम कर बोली, जीजाजी उपर आ जाओï¿1/2

क्या चोदोगी नहीï¿

नही चुदवाउन्गि अपने चुदक्कर राजा से

बिना बुर से लॉरा निकाले वे बरी सफाई से पलते और मैं नीचे और वे उपर और लंड मेरी बुर मे जो अब थोरी नरम हो गयी थी. उन्होने मेरे होंठ अपने होंठ में ले लिया और बुर से लॉरा निकाल कर एक जबारजस्ट शॉट लगा दिया. उनका पूरा लॉरा सरसराते हुए मेरी बुर में घुस गया. दर्द से मैं बहाल हो गयी. मेरी आवाज़ मेरे मूह में ही घुट कर रह गयी क्योकि मेरे होंठ तो जीजा जी के होंठो मे थे. होंठ चूसने के साथ वे मेरी चूंचियो को प्यार से सहला रहे थे फिर चूंचियों को एक-एक कर चूसने लगे जिससे मेरी बुर का दर्द कम होने लगा.

प्यार से उनके गाल को चूमते हुए मैं बोली, तुमने अपनी साली के बुर का कबाड़ा कर दिया नाï¿1/2

क्या करता साली अपनी बुर के झांट को साफ कर चुदवाने के लिए तैयार थीï¿1/2

जीजाजी आप को ग़लतफहमी हो गयी मेरे बुर पर बाल है ही नहीï¿1/2

यह कैसे हो सकता है तुम्हारी दीदी के तो बहुत बाल है, मुझे ही उनको साफ करना परता हैï¿1/2

हाँ! ऐसा ही है लेकिन वह सब बाद में पहले जो कर रहे हो उसे करोï¿1/2

मेरे बुर का दर्द गायब हो चुका था और मैं चूतर हिला कर जीजाजी के मोटे लंड को एडजुस्ट करने लगी थी जो धीरे-धीरे अंदर बाहर हो रहा था.

जीजाजी ने रफ़्तार बढ़ाते हुए पूछा, क्या करूँ?
 


मैं समझ गयी जीजाजी कुछ गंदी बात सुनना चाह रहे हैं मैं अपनी गान्ड को उच्छाल कर बोली, हाई रे साली चोद! इतना जालिम लॉरा बुर की जर तक घुसा कर पुंच्छ रहे हो क्या करूँ हाई रे बुर चोद अपने मोटे लौरे से मथ कर मेरी मुतनी का शुधा-रस निकालना है अब समझे चुदक्कर राजा मैने उनके होंठ चूम लिए.

अब तो जीजाजी तूफान मैल की तरह चुदाई करने लगे. बुर से पूरा लंड निकालते और पूरी गहराई तक पेल देते थे. मैं स्वर्ग की हवओ मे उरने लगी..

हाई राज्ज्ज्जा ! और ज़ोर सीईई बरा मज्ज़ज़ज्ज्ज्ज्जा एयाया आ रहा है और जूऊर्ररर सीई ओह माआ! हाईईईईई मेरी बुर्र्र्र्ररर झरने वाली है.मेरी बुर्र्र्र्ररर कीयेयी चितारे यूरा डूऊऊऊऊï¿. हाईईईईई मई गइईईई

रुक्कको मेरी चुदासी राआअनि मैं भीईए आआआआअ रहा हूँ जीजाजी ने दस बारह धक्के लगा कर मेरी बुर को अपने गरम लावा से भर दिया. मेरी बुर उनके वीर्य ईक-एक कतरे को चूस कर खुस हो गयी.

मेरे चूंचियों के बीच सर रख कर मेरे उपर थोरी देर परे रह कर अपने सांसो को शांत करने के बाद मेरे बगल में आकर लेटने के बाद मेरी वीर्य से सनी बुर पर हाथ फेरते हुए बोले हाँ! अब बताओ अपनी बिना बाल वाली बुर का राज

मैं इस राज को जल्दी बताने के मूड में नही थी, मैने बात को टालते हुए कहा, अरे ! पहले सफाई तो करने दो, बुर चिपचिपा रही है. इस साले लौरे ने पूरा भीगा दिया है मैं उठ कर बाथरूम में चली आई

....बाथरूम में मेरे पिछे-पिछे जीजाजी भी आ गये. मैने पहले जीजाजी के

लौरे को धो कर साफ किया फिर अपनी बुर को साफ करने लगी. जीजाजी गौर से

देखा रहे थे, शायद वे बुर पर बाल ना उगाने का राज जानने के पहले यह

यकीन कर लेना चाह रहे थे कि बाल उगे नही हैं कि उन्हे साफ किया गया है.

उन्होने कहा "लाओ मैं ठीक से साफ कर दूं" वे बुर को धोते गुए अपनी तसल्ली

करने के बाद उसे चूमते हुए बोले, "वाकाई तुम्हारे बुर का कोई जवाब नही है"

और वे मेरी बुर को चूसने लगे. मैने अपने पैरो को फैला दिया और उनका सर

पकर कर बुर चुसवाने लगी. "ओह जीजाजी... क्य्ाआअ कार्रर्ररर रहीईई हैं....

ओह ...."

तभी कॉल-बेल बज उठा. मैने जीजा से अपने को च्छूराते हुए बोली, "बर्तन

माँजने वाली चमेली होगी" और उल्टे सीधे कपरे पहन कर नीचे दरवाजा

खोलने के लिए भागी. दरवाजा खोला तो देखा चमेली ही थी. मैने राहत की

सांस ली.

अंदर आने के बाद चमेली मुझे ध्यान से देख कर बोली, "क्या बात है दीदी! कुछ

घ्हबराई कुच्छ सरमाई, या खुदा ये माजरा क्या है" फिर बात बदल कर बोली

"सुबह जीजाजी आए थे, कहाँ हैं" मैं बोली, "उपर सो रहे हैं मैं भी सो गयी

थी"

"जीजाजी के साथ?" हसते हुए वह बोली.

"तू भी सोएगी" मैने पलट वॉर किया लेकिन वह भी मंजी हुई खिलाड़ी थी बोली,

"हे दीदी! हमारा इतना बरा भाग्य मेरा कहाँ?"

उससे पार पाना मुश्किल था, बात बढ़ाने से कोई फ़ायदा भी नही था, क्योकि वह

हमराज़ थी, इस लिए बोली, "जा अपना काम कर, काम ख़तम कर जीजाजी के लिए

चाय बना देना, मैं देखती हूँ कि जीजाजी जागे कि नही"

नीचे का मैन गेट (दरवाजा) बंद कर उपर आ गयी, चमेली से मैं निसचिंत

थी वह बचपन से ही इस घर में आ रही है और सब कुछ जानती और समझती

है.

दीदी के कमरे में लूँगी पहन कर बैठे जीजाजी मेरा इंतजार कर रहे थे,

जैसे ही मैं उनके पास गयी मुझे दबोच लिया. मैं उनसे छूटने की नाकाम

कोशिस करते हुए बोली, "चमेली बर्तन धो रही है अब उसके जाने तक इंतजार

करना परेगा"

जीजाजी बोले, "अरे! उसे समय लगेगा तब तक एक बाजी क्या दो (टू) बाजी हो

सकती है" वे मेरी बूब्स को खोलकर एक बूब के निपल को मूह में लेकर चूसने

लगे और उनका एक हाथ मेरी बुर तक पहुँच गया. बाथ-रूम में जीजाजी बुर

चूस कर पहले ही गरमा चुके थे. अब मैं अपने को ना रोक सकी और लूँगी को

हटा कर लौरे को हाथ मे ले लिया. मैं बोली, "जीजाजी यह तो पहले से भी

मोटा हो गया है"
 


"हाई! मेरे चोदु सनम! इस शैतान ने मेरी मुनिया को दीवाना बना दिया है... अब

इसे उससे मिलवा दो.." मैने उनके लौरे को हाथ मारते हुए कहा.

जीजाजी ने मेरे वे कपरे उतार दिए जिससे मैं अपनी नग्नता च्छुपाए हुए थी

और मुझे पलंग पर लिटा कर मेरे पैरों को फैला दिया. अब मेरी मदमस्त रसीली

योवन गुहा उनके सामने थी. उन्होने उसे फिर अपनी जीभ से छेड़ा.

कुच्छ देर तो उनकी दीवानगी का मज़ा लिया लेकिन मैं परम सुख के लिए बेचैन

हो उठी और उन्हे अपने उपर खिच लिया और बोली, "राजा अब उन दोनो को मिलने दो"

जीजाजी मेरी निपल को मूह से निकाल कर बोले, "किसको"

मैने उनके लौरे को बुर के मूह पर लगाते हुए बोली "इनको ....बुर और लंड

को...समझे मेरे चुदक्कर सनम..... मेरी बुर के खेवनहार.... अब चोदो भी.."

इस पर उन्होने एक जबारजस्ट शॉट लगाया और मेरी बुर को चीरता हुआ पूरा लंड

अंदर समा गया, "हाईईईईईईई मररर्र्ररर डाला ओह मेरे चोदु सनम .... मेरी

मुनिया तो प्यार करना चाहती पर इस मोटू को दर्द पहुचाने में ज़्यादा मज़ा आता

है..... अब रुके क्यो हो?......... कुच्छ पाने के लिए कुच्छ तो सहना

परेगा....ओह माआआ .... अब कुच्छ ठीक लग रहा है..... हाँ अब तिककककककक

हाईईईईईईईईईई फाड़ डालो इस लालची बुर को...." मैं चुदाई के उन्माद में नीचे से

चूतर उठा उठा कर उनके लंड को बुर में ले रही थी और जीजाजी उपर से कस

कस कर शॉट पर शॉट लगाते हुए बोल रहे थे, " है चुदसी रनीईईइ..

तुम्हारी बिना झांट वाली बुर ने तो मेरे लंड को पागल बना दिया है...वह इस

साली मुनिया का दीवाना हो गया है....इसे चोद चोद कर जब तक यहाँ हूँ जन्नत

की सैर करूँगा... रानी बहुत मज़ा आ रहा है..."

क्रमशः.........

 
बिना झान्टो वाली बुर पार्ट--2

गतान्क से आगे....................

मैं चुदाई के नशे में जीजाजी को कस कस कर धक्के लगाने एक लिए प्रोत्साहित

कर रही थी, "हाँ राजा !!!!!! चोद लो अपनी साली के बुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर कूऊऊ

और जोर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर सीईए फर्रर्र्र्र्ररर डूऊऊऊ एस सलीईईई

बुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर को ओह राज्ज्जज्ज्जाआअ मैं जन्नत कीईईईईए सैर कर

रही हूऊओ........चोदो राजा चोद्द्द्द्द्दूऊ और ज़ोर सीईईई हाईईईईई कस कस

कर मारो ...ओह बस मैं अनीईई वलीईईइ हुन्न्ञणणन् उई माआअ मैं

गइईईई....." मेरी बुर ने सुधारस छोड़ दिया पर जीजाजी धक्के पर धक्के

लगाए जा रहे थे झरने का नाम ही नही ले रहे थे, मैने कहा, "जीजाजी ज़रा

जल्दी! चमेली चाय ले कर आती होगी"

"मैं तो कब से चाय लेकर खरी हूँ. चाय ठंडी हो गयी और मैं गरम"

यह चमेली की आवाज़ थी.

मैं चुदाई के तूफान में इस कदर खो गयी थी कि चमेली की तरफ ध्यान ही

नही गया, मैं जीजाजी को अपने उपर से हटते हुए बोली, "तू कब आई" "जब आप

चोदु सनम से चुदवा रही थी और चुदक्कर रानी को जीजाजी चोद रहे थे"

"अच्छा! ठीक है! यह सब छोड़ जब तू यहाँ आकर मर ही गयी तो बुर

खुजलाना छ्होर आ जीजाजी को सम्हाल" मैं उठी और चमेली के सारे कपरे उतार

दिए और उसे जीजाजी के पास पलंग पर धकेल दिया. जीजाजी ने उसे दबोच लिया.

उन्होने अपना लंड उसके चूत में लगा कर धक्का दिया. उसके मूह से एक कराह

सी निकली. मोटा लंड जाने से दर्द हो रहा था. मैं धीरे-धीरे उसके उरोजो को

मसलने लगी जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जाए और दर्द कम. धीरे-धीरे

जीजाजी अपना पूरा लंड चमेली की बुर में घुसा दिया. अब उसकी तरफ से पूरा

सहयोग मिल रहा था.

जीजाजी अब अपने लंड को चमेली की चूत में अंदर बाहर करने लगे और

चमेली भी अपने कमर को उठा कर जीजाजी के लंड को अपने चूत में आराम से

ले रही थी, दोनो एक दूसरे से गुथे हुए थे चंपा बर्बरा रही थी, "दीदी!

जीजाजी मस्त चुदाई करते हैं ...जीजाजी चोद दो ... और ज़ोर से .. और ज़ोर से...

मुझे भी आने देना ओह्ह्ह्ह आज बहुत दिनो की प्यसस्स्स्स्सस्स बुझीईईईई

गीईईई अब आ जाओ दीदी के चोदु सनम ....ओह्ह्ह्ह माआअ मैं गइईई.."

जीजाजी के अंदर उबाल पहले से ही उठ रहा था जो बाहर आने को बेचैन था.

थोरी देर मे दोनो साथ-साथ खलास हो गये.

थोरी देर चमेली के शरीर पर परे रहने के बाद जब जीजाजी उठे तो मैं

चमेली से बोली, "गर्मी शांत हो गयी? जा अब चुदक्कर जीजाजी के लिए फिर से

स्पेशल चाय बना कर ला क्यों की जीजाजी ने तेरी स्पेशल चुदाई की है" "दीदी

आप भी...." वह अपने कपरे उठाने लगी तो मैने छीन लिए और बोली, "जा

ऐसे ही जा" "नही दीदी कपरे दे दो, चाय लेकर जीजाजी के सामने नंगे आने मे

शरम लगेगी" मैं बोली, "जा भाग चाय लेकर आ, नंगी होकर चुदवाने में

शरम नही आए, अच्च्छा जा हम लोग भी यहाँ नंगे रहेंगे" शैतान चमेली यह

कहते हुए नंगी ही भाग गयी, "नंगे रह कर चुदाई करते रहेंगे"

चमेली नीचे चाय बनाने चली गयी. जीजाजी मुझे छेड़ते हुए बोले, "मालकिन

की तरह नौकरानी भी जबारजस्ट है" मैं बोली, " जीजाजी उसे ज़्यादा भाव ना

दीजिए गा नही तो वह जॉक की तरह चिपक जाएगी. पर जीजाजी वह है बरी

भली, बस सेक्स के मामले मे ही थोरी कमजोर है" "आने दो देखता हूँ कमजोर

है कि खिलाड़ी है"
 


चमेली के जाने के बाद साफ-सफाई के लिए हम दोनो बाथरूम में आ गये. मैने

शावर खोल दिया. हम दोनो के नंगे जिस्म पर पानी की फुहार पड़ने लगी. बाथरूम

में लगे बरे शीसे में मैं देख रही थी, शावर के नीचे मेरे उत्तेजक

बदन पर पानी पर रहा था, मेरे तने मुम्मो से टपकता पानी जो पैरों के बीच

मेरी बुर से होता हुआ पैरो पर छ्होटी-छ्होटी धार बनाते हुए नीचे गिर रहा

था. मेरी सुपस्ट चून्चियो से गिरता हुआ पानी आज बहुत अच्च्छा लग रहा था.

जीजा के चौरे सीने से बहता पानी उनके लौरे से धार बनकर बह रहा था

जैसे वे मूत रहे हों. मैने उनका लंड हाथ में ले लिया और सुपरे को

खोलने और बंद करने लगी. लंड हाथ में आते ही सजग हो गया और मेरी

बुर को देख कर अकरने लगा. मैने मदन (जीजाजी) के नंगे सुपस्ट शरीर को

अपनी छाती से चिपका कर उनके होंठ अपने ओठों में ले लिए. मेरी कसी हुई

चून्चिया जीजाजी के सीने में रगर खाने लगी. मैने उनके शिश्न (कॉक) को

पकर कर अपनी बुर से सटा लिया और थोरा पैर फला कर उसे अपने यौवांद्वार

(कंट) पर रगर्ने लगी.

जीजाजी मेरे बूब्स को दबाते और सहलाते हुए मेरे ओठों को चूस रहे थे और

उनका लंड मेरी मुनियाको अपने होंठ से सहला रहा था. बैठकर नहाने के लिए

रखे स्टूल पर मैने अपना एक पैर उठा कर रखा लिया और और उनके लंड को

बुर में आगे बढ़ने का मौका मिल गया. शीशे में दिख रहा था उनका लंड

उन्दर बाहर होते हुए मेरी प्यारी बुर से खिलवाड़ कर रहा था. मेरी मुनिया उसे

पूरा अपने मूह मे लेने की कोशिश कर रही थी. कुछ देर बाद मैं अपने को छुड़ा

कर बाथ-टब को पकड़ कर झुक गयी. मेरे चूतर उठे हुए थे और मेरा

योआवान्द्वार दिखने लगा. जीजाजी ने उसपर अपने तननाए हुए लंड को लगा कर

थक्का दिया. पूरा लंड गॅप से बुर में समा गया. फिर क्या था लंड और चूत का

खेल शुरू हुआ. शीशे मे जैसे ब्लू फिल्म चल रही हो, जिसकी हेरोइन मैं थी

और हीरो थे मेरे मदन जीजा. जीजाजी का लंड मेरी बुर में अंदर बाहर हो रहा

था जिससे बुर बावली हो रही थी पर मुझे शीशे में लंड का घुसना और

निकलना बहुत भला लग रहा था.

शावेर से पानी की फुहार हम दोनो पर पड़ रही थी, हमलोग उसकी परवाह ना कर

तन की तपिस मिटाने मे लगे थे. जीजाजी पीछे मेरी चून्चिया पकड़ कर

बराबर धक्के लगाए जा रहे थे. शीशे में अपनी चुदाई देख कर मैं काफ़ी

गरम हो चुकी थी एसलिए मैं अपने चूतर को आगे पिछे कर गपगाप लौरे को

बुर में लेरही थी और बोलती जा रही थी, "जीजाजी ! बहुत अच्च्छा लग रहा

है... चुदाई में चोद्दो मेरे सनम जिंदगी का पूरा मज़ा ले लो ...हाई !!!!!!

मेरे चोदु बलम.... तुम्हारा लॉरा बरा जानदार है.... मारो राजा धक्का.... और

ज़ोर से.... हाई राजा और ज़ोर से... और ज़ोर से.... हाई! इस जालिम लौरे से फार दो

मेरी बुर्र्र्र्र्र्र्ररर ब्ब्ब्ब्बबबाहुत अच्च्छााआआ लगगगगगगग रहाा हाईईईईई..."

पीछे से चुदाई में मेरे हाथ झुके-झुके दुखने लगे मैने जीजाजी से कहा,

"राजा ज़रा रूको, इस तरह पूरी चुदाई नही हो पा रही है, लेटा कर चुदाइ में

पूरा लॉरा घुसता है तो झरने में बहुत मज़ा आता है" मैने शेवर बंद

किया और वही गीली ज़मीन पर लेट गयी और बोली, "अब उपर आ कर चुदाई करो"

अब जीजाजी मेरे उपर थे और मेरी बुर मे लंड डालकर भरपूर चुदाई करने लगे.

अब मेरी बुर में लॉरा पूरा का पूरा अंदर बाहर हो रहा था और मैं नीचे से

सहयोग करते हुए बर्बरा रही थी, "अब चुदाई का मज्जा मिल रहा है .... मारो

राजा...मारो धक्का... और ज़ोर से.... हाँ! राजा इसी तरह से....भर दो अपने

मदन रस से बुर को.... अहह एसस्स्स्स्स्स्स्सस्स ओह. जीजाजी कस-कस कर धक्का

मार कर मेरी बुर को चोद रहे थे. थोरी देर बाद उनके लंड से लावा निकला और

मेरी बुर की गहराई में झार गयेऔर मैं भी साथ-साथ खलास हो गयी. मैं

सेफ पीरियड में थी इस लिए परवाह नही किया.

कुछ देर परे रहने के बाद मैं बुर को साफ कर जल्दी बाहर निकल आई. बाहर आ

कर बिस्तर को ठीक किया कमरा ब्यावस्थित किया और भाभी के कमरे से एक ब्लू

सीडी लाकर ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉयर में डाल दी. तब तक जीजाजी टवल लपेटे कर

बाथ-रूम से बाहर आ गये. वे फ्रेसस दिख रहे थे शायद उन्होने साबुन लगा कर

ठीक से नहा लिया था. उन्हे देख कर "मैं भी फ्रेसस हो कर आती हूँ" कह कर

बाथ-रूम में घुस गयी.

इसी बीच चमेली चाय लेकर उपर आई और कमरे के बाहर से आवाज़ दी, "जीजाजी

आँखे बंद करिए चाय लेकर आई हूँ" मैं बाथरूम से निकल कर बाहर आने

वाली थी, तभी सोचा, देखें ये लोग क्या करते हैं. मैं दरवाजे के शीशे से

इन दोनो को देखने लगी.

जीजाजी बोले, " आँख क्यों बंद करूँ"

चमेली बरी मासूमियत से बोली, "नंगी हूँ ना" जीजाजी बोले, "अब आ भी जाओ,

सुधा बाथरूम में है, मुझसे क्या शरमाना" चमेली चाय लेकर नंगी ही

अंदर आ गयी. इस बार चाय केटली में थी. चाय टेबल पर रख कर अपनी

चून्चि और चूतर एक अदा से हिलाया मानो कह रही हो 'माँगता है तो राजा ले

ले, नही मैं ये चली' फिर उसने जीजा जी का तौलिया खींच लिया. जीजाजी ने उसे

अपनी बाहों मे भर लिया. वह अपने को छुड़ाते हुए बोली, "फिर चाय ठंडी

करनी है क्या?"

"सुधा को बाथरूम से आ जाने दे साथ-साथ चाय पिएँगे, तब तक तू ड्रॉयर से

सिगरेट निकाल कर ले आ" चमेली ने ड्रॉयर से सिगरेट और माचिस निकाली. एक

सिगरेट अपने मुन्ह मे लगाकर सुलगा दिया और एक लंबी कश लगा कर सिगरेट को

अपंनी बुर के मूह में खोंस कर बोली, "जीजाजी अब मेरी बुर से सिगरेट निकाल कर

पियो मस्ती आ जाएगी" मदन जीजा ने सिगरेट बुर से निकाल कर उसकी चूत को

चूम लिया और फिर आराम से सिगरेट पीने लगे. चमेली बोली, "तब तक मैं अपना

सिगरेट पीती हूँ" और उसने मदन के लौरे को अपने मुँह में लेलिया. मदन ने

सिगरेट ख़तम होने तक लौरा चुसवाने का मज़ा लिया फिर उसे लिटा कर उसके

उपर चढ़ गये और अपना लॉरा उसकी चूत में पेल दिया.
 


पहले तो चमेली तिलमिलाई फिर हर धक्के का मज़ा लेने लगी, " जीजाजी आप

आदमी नही सांड (बुल) है.... जहाँ चूत देखी पिल परे.... अब जब मेरी बुर

में घुसा ही दिया है तो देखूँगी की तुम्हारे लौरे मे कितना दम है....

चोदो राजा चोदो इस बार चुदाई का पूरा सुख उठाउंगी... हाई मेरे चुदक्कर जीजा

फाड़ कर लाल कर दो इस बर को .... और ज़ोर से कस-कस कर धक्का मरो .... ओह

अहह इसस्स्स्सस्स बहुत मज़ा आ रहा है" चमेली जानती थी कि मैं बाथरूम

में हूँ इसलिए मेरे निकलने के पहले झार लेना चाह रही थी जब की मैं

बाथ-रूम से निकल कर इन दोनो की चुदाई का खेल बहुत देर से देख रही थी.

चमेली गंदे-गंदे शब्दों का प्रयोग कर जीजाजी को जल्दी झरने पर मजबूर कर

रही थी और नीचे से चूतर उठा-उठा कर मदन के लंड को अपनी बुर में निगल

रही थी. जब की जीजाजी केयी बार चोद चुकने के कारण झार ही नही रहे थे.

एक बार चमेली झार चुकी थी लेकिन जीजाजी उसकी बुर मे लंड डालकर चोदे जा

रहे थे मैं उन दोनो के पिछे खरे हो कर घमासान चुदाई देख रही थी

मेरी बुर भी पनिया गयी पर मेरी हिम्मत इस समय और चुदवाने की नही हो रही

थी इस लिए चमेली को नीचे से मिमियाते देख बरा मज़ा आ रहा था. चमेली ने

एक बार फिर साहस बटोरा और बोली, "ओह मा! कितनी बार झारो गे मुझे लेकिन मैं

मैदान छ्होर कर हटूँगी नही... राजा और चोदो .....बरा मज़ा आ रहा

है....चोदूऊऊ ओह बलम हरजाई ....और कस....कस कर चोदो और ंज़ोर से

मारो धक्के फार दो बुर...... ओह अहह एसस्स्स्स्स्स्सस्स हाँ! सनम आ बा भी

जऊऊऊ चूत का कबाड़ा कर के ही दम लोगे क्या? अऊऊऊ अब आ भी जाऊओ"

जीजाजी उपर से बोले, "रूको रानी अब मैं भी आ रहा हूँ" और दोनो एक साथ झार

कर एक दूसरे में समा गये.

जीजाजी चमेली के उपर थे उनका लॉरा उसकी बुर में सुकड रहा था, गंद

कुछ फैल गयी थी. मैने पीछे से जाकर जीजाजी की गान्ड मे अपनी चून्चि

लगा दी. जीजाजी समझ गये बोले, "क्या करती हो" मैने चूची से दो-तीन

धक्के उनकी गंद (आस) में लगाए और बोली, "चोदु लाल की चूची से गंद मार रही हूँ.

जहा बुर देखी पिल पड़ते हैं" चमेली जीजाजी के नीचे से निकलती हुई बोली, "

दीदी मैं भी मारूँगी मेरी तुमसे बड़ी है" सब हसने लगे

चमेली की चुदाई देख कर मैं गरम हो गयी थी लेकिन मम्मी के आने का समय

हो रहा था, फिर चाय भी पीनी थी इस लिए मन पर काबू करते हुए बोली, "अब

सब लोग अपने अपने कपरे पहन कर शरीफ बन जाइए. मम्मी के आने का समय

हो रहा है". फिर हमलोग अपने अपने कपरे ठीक से पहन कर चाय की टेबल

पर आ गये. चमेली केटली से चाय डालते हुए बोली, "दीदी देख लो चाय ठंडी

हो गयी हो तो फिर से बना लाउ"

जीजाजी चाय पीते हुए बोले, "ठीक है, चमेली इस बार केटली में चाय इसीलिए

बना कर लाई थी कि दुबारा चाय गरम करने के लिए नीचे ना जाना परे और

दीदी अकेले-अकेले.." जीजाजी चमेली की तरफ गहरी नज़र से देख कर मुस्काराए.

"जीजाजी आप बरे वो हैं" चमेली बोली.

"वो क्या?"

"बरे चोदु हैं" सब हंस परे.

तभी नीचे कॉल बेल बजी. मॅमी होंगी, मैं और चमेली भाग कर नीचे

गयी. दरवाजा खोला तो देखा तो कामिनी थी. "अरे कामिनी तू? आ अंदर आ जा"

चमेली बोली "आप की ही कमी थी" "क्या मतलब" " अरे छोड़ो भी कामिनी उसकी

बात को वह हर समय कुछ ना कुछ बिना समझे बोलती रहती है. चल उपर अपने

जीजाजी से मिल्वाउ"

कामिनी बोली, "मेरी बन्नो बरी खुस है लगता है जीजाजी से भरपूर मज़ा मिला

है.." फिर चमेली से बोली "तू भी हिस्सा बटा रही थी क्या?" चमेली शरमा

गयी, "वो कहाँ, वो तो जीजाजी...." मैने उसे रोका, " अब चुप हो जा... हाँ! बोल

कामिनी क्या बात है" कामिनी बोली, "चाची नही है क्या? मॅमी ने जीजाजी को कल

रात को खाने पर बुलाया है" चमेली से फिर रहा ना गया बोली, " कामिनी दीदी

जीजाजी को.... कल की ....दावत देने आई है" कामिनी बोली, "चल तू भी साथ आ

जाना. हाँ! जीजाजी कहा है....चलो उनसे तो कह दूं" मैं बोली, "मुझे तो नही

लगता मॅमी इसके लिए मम्मी राज़ी होंगी, हाँ! तू कहेगी तो जीजाजी ज़रूर मान

जाएँगे" कामिनी ने कहा "पहले ये बता, तुम दोनो को तो कोई एतराज नही, बाकी

मैं देख लूँगी" "मुझे क्या एतराज हो सकता है और चमेली की मा से भी बात

कर लेंगे पर...." कामिनी बोली, "बस तू देखती जा, कल की कॉकटेल पार्टी मे

मज़ा ही मज़ा होगा"

इसी बीच मॅमी आ गयी. कामिनी चाचिजी चाचिजी कह कर उनहे पिछे लगी

गयी, उनके तबीयत के बारे में पुंच्छा, दीदी की बाते की फिर अवसर पा कर

कहा, "चाचिजी एक बहुत ज़रूरी बात है आप मॅमी से फोन पर बाते कर लें".

उसने झट अपने घर फोन मिला कर मॅमी को पकड़ा दिया. मेरी मॅमी कुछ देर

उसकी मॅमी की आवाज़ सुनती रही फिर बोली, " ऐसी बात है तो चमेली को कल रात

रुकने के लिए भेज दूँगी उसकी मॅमी मेरी बात टलेगी नही.... बबुआजी (मदन)

को बाद में सुधा के साथ भेज दूँगी..... अभी कैसे जाएगी..... अरे भाभी!

ये बात नही है..... जैसे मेरा घर वैसे आप का घर...... ठीक है कामिनी

बात कर लेगी...... हमे क्या एतराज हो सकता है...... इन लोगो की जैसी

मरजी....... आप जो ठीक समझें..... ठीक है ठीक.... सुधा प्रोग्राम बना

कर आपको बता दही...... चमेली तो जाएगी ही .... नमस्ते भाभी" कह कर

मॅमी ने फोन रख दिया. मॅमी मुझसे बोली, "कामिनी की मॅमी तुम सब को कल

अपने घर पर बुला रही हैं तुम सब को वहीं खाना खाना है, उन्हे कल रात

अपने मायके जागरण में जाना है, भाई साब कन्हि बाहर गये हैं, कामिनी घर

पर अकेली होगी वे चाहती हैं कि तुम सब वही रात में रुक जाओ. तुम्हारे

जीजाजी रुकना चाहें तो ठीक नही तो तुम उनको लिवा कर आ जाना, चमेली रुक

जाएगी"मैं कामिनी की बुद्धही का लोहा मान गयी और मॅमी से कहा, "ठीक है

मॅमी! जीजाजी जैसा चाहें गे वैसा प्रोग्राम बना कर तुम्हे बता दूँगी".
 


हम तीनो को तो जैसे मन की मुराद मिल गयी. जीजाजी हमलोगो को छोड़ कर यान्हा

क्या करेंगे. "चलो! जीजाजी से बात कर लेते हैं" कह कर हम दोनो उपर जीजाजी

से मिलने चल दिए, सीढ़ी पर मैने कामिनी से पुंच्छा, "यह सब क्या है? तूने

तो कमाल कर दिया. अब बता प्रोग्राम क्या है" मेरे कान में धीरे से बोली "सामूहिक

चुदाई....अब बता जीजाजी ने तेरी चूत कितनी बार मारी?"

"चल हट यह भी कोई बताने की बात है"

"चलो तुम नही बताती तो जीजू से पुंछ लूँगी"

हम दोनो उपर कमरे में आ गये. जीजाजी आल्मिराह से सीडी निकाल कर ब्लू फिल्म देख

रहे थे. स्क्रीन पर चुदाई का द्रिस्य चल रहा था. उनके चेहरे पर उत्तेजना

साफ झलक रही थी.

कामिनी धीरे से कमरे में अंदर जा कर बोली, "नमस्ते जीजाजी! क्या देख रहें

हैं"

कामिनी को देख कर वे हर्बरा गये. कामिनी रिमोट उठाकर सीडी प्लेयर बंद करती

हुई बोली, "ये सब रात के लिए रहने दीजिए. कल शाम को मेरे घर आपको आना

है, मॅमी ने डिनर पर बुलाया है, सुधा और चमेली भी वहाँ चल रही हैं.

जीजाजी सम्हलते हुए बोले, "आप कामिनी जी है ना? मेरी शादी में गाली आप ही

गा रही थीं"

"अरे वाह जीजाजी आप की यादास्त तो बहुत तेज है"

जीजाजी बोले, "ऐसी साली को कैसे भूला जा सकता है, कल जश्न मनाने का इरादा

है क्या"

"हाँ जीजाजी! रात वही रुकना है, रात रंगीन करने के लिए अपनी पसंद की

चीज़ आपको लाना है...कुछ.. हॉट ..हॉट. बाकी सब वहाँ होगा.."

"रात रंगीन करने के लिए आप से ज़्यादा हॉट क्या हो सकता है?" जीजाजी उसे

छेड़ते हुए बोले और उसका हाथ खींच कर अपने पास कर लिया. जीजा जी कुछ

और हरकत करते मैं बीच में आकर बोली, जीजा जी आज नही कल दावत है"

जीजाजी ललचाई नज़र से कामिनी को देख रहे थे, सचमुच कामिनी इस समय अपने

रूप का जलवा बिखेर रही रही थी उसमे सेक्स अपील बहुत है. कामिनी ने हाथ

बढ़ाते हुए कहा, "जीजाजी! कल आपको आना है" जीजाजी ने हाथ मिलाते हुए उसे

खींच लिया और उसके गाल पर एक चुंबन जड़ दिया.

मैं जीजाजी को रोकते हुए बोली "जीजाजी इतनी जल्दी ठीक नही है" तभी नीचे से

चमेली नस्ता लेकर आ गयी और बोली, "चलिए सब लोग नस्ता कर लीजिए, मॅमी

ने भेजा है" सब ने मिल कर नस्ता किया.

कामिनी उठती हुई मुझसे बोली, "सुधा! अब चलने दे, चलें! घर में बहुत

काम है फिर कल की तैयारी भी करनी है, कल जीजाजी को लेकर ज़रा जल्दी आ

जाना." और जीजा जी के सामने ही मुझे अपने बाहो में भरकर मेरे ओंठ चूम

लिए फिर जीजाजी को देख कर एक अदा से मुस्करा दी. जैसे कह रही हो यह

चुंबन आपके लिए है.

कामिनी के साथ हम्सब नीचे आ गये. कामिनी मॅमी से मिल कर चली गयी.

चमेली भी यह बोलते हुए चली गयी कि मा को बता कर कल सुबह एक दिन रहने

के लिए आ जाएगी.

क्रमशः.........

 
RajSharma stories

बिना झान्टो वाली बुर पार्ट--3

गतान्क से आगे....................

जीजाजी मॅमी से बाते करने लगे और मैं किचेन में चली गयी. जल्दी जल्दी

खाना बना कर खाने की मेजा पर लगा दिया और हम लोगो ने खाना खाया. रात

खाने के बाद मॅमी मन-पसंद सीरियल देखने लगीं. जीजाजी थोरी देर तो टीवी

देखते रहे फिर यह कह कर उपर चले गये कि ऑफीस के काम से ज़्यादा बाहर

रहने के कारण वे रेग्युलर सीरियल नही देख पाते इस लिए उनका मन सीरियल देखने

में नही लगता. फिर मुझसे बोले, "सुधा! कोई नयी पिक्चर का सीडी है क्या?"

बीच में ही मॅमी बोल पड़ी, "अरे! कल रेणुका (मेरी परोसन) देवदास की सीडी

दे गयी थी जा कर लगा दे. हाँ! जीजाजी को सोने के पहले दूध ज़रूर पीला

देना". मैने कहा, "जीजाजी आप उपर चल कर कपड़ा बदलिए मैं आती हूँ" और

मैं अपना मनपसंद सीरियल देखने लगी.

सीरियल ख़तम होने पर मम्मी अपने कमरे में जाते हुए बोली "तू उपर अपने

कमरे में सो जाना और जीजाजी का ख्याल रखना" मैं सीडी और दूध लेकर पहले

अपने कमरे में गयी और सारे कपरे उतार कर नाइटी पहन लिया और देवदास

को रख कर दूसरी सीडी अपने भाभी के कमरे से निकाल लाई. जानती थी जीजाजी

साली के साथ क्या देखना पसंद करे गे. जब उपर उनके कमरे में गयी तो

देखा जीजाजी सो गये हैं. दूध को साइड टेबल पर रख कर एक बार हिला कर

जगाया जब वे नही जागे तो उनके बगल में जाकर लेट गयी और नाइटी का बटन

खोल दिया नीचे कुच्छ भी नही पहने थी.. अब मेरी चून्चिया आज़ाद थी. फिर

थोरा उठा कर मैने अपनी एक चून्चि की निपल से जीजाजी के होंठ सहलाने लगी

और एक हाथ को चादर के अंदर डाल कर उनके लंड को सहलाने लगी. उनका लॉरा

सजग होने लगा शायद उसे उसकी प्यारी मुनिया की महक लग चुकी थी. अब मेरी

चून्चि की निपल जीजाजी के मुट्ठी में थी और वे उसे चूसने लगे थे.

जीजाजी जाग चुके थे. मैने कहा, "जीजाजी दूध पी लीजिए"

वे छूटते ही बोले, "पी तो रहा हूँ"

"अरे! ये नही काली भैस का दूध, वो रखी है ग्लास में"

"जब गोरी साली का दूध पीने को मिल रहा है तो काली भैस का दूध क्यो पियूं"

जीजाजी चून्चि से मूह अलग कर बोले और फिर उसे मूह में ले लिया. मैने कहा

"पर इसमें दूध कहाँ है" यह कहते हुए उनके मूह मे से अपनी चून्चि

छुड़ा कर उठी और दूध का ग्लास उठा लाई और उनके मूह में लगा दिया.

जीजाजी ने आधा ग्लास पिया और ग्लास लेकर बाकी पीने के लिए मेरे मूह में लगा

दिया. मैने मूह से ग्लास हटाते हुए कहा, "जीजाजी मैं दूध पी कर आई हूँ" इस

बीच दूध छलक कर मेरी चून्चियो पर गिर गया. जीजाजी उसे अपनी जीभ से

चाटने लगे. मैं उनसे ग्लास लेकर अपनी चून्चियो पर धीरे-धीरे दूध

गिराती रही और जीजाजी मज़ा ले-ले कर उसे चाटते गये. चुचियाँ चाटने से मेरी

बुर में सुरसुरी होने लगी, इस बीच थोरा दूध बीच बह कर मेरी चूत तक

चला गया. जीजाजी की जीभ दूध चाटते-चाटते नीचे आ रही थी और मेरे

बदन में सनसनी फैल रही थी. उनके होंठ मेरी बुर के होंठ तक आ गये और

उन्होने उसे चटाना शुरू कर दिया.

मैने जीजाजी के सिर को पकर कर अपनी योनि के आगे किया और अपने पैर फैला कर

अपनी बुर चटवाने लगी. जीजाजी ने मेरी चूतर को दोनो हाथ से पकर लिया और

मेरी बुर की तीट (क्लितोरिक) को जीभ से चाटने लगे और कभी चूत की गहराई

मे जीभ थेल देते. मैं मस्ती की पाराकस्ता तक पहुँच रही थी और उत्तेजना

में बोल रही थी, "ओह! जीजू ये क्या कर रहे हो ... मैं मस्ती से पागल हो रही

हूँ.... ओह राज्ज्जज्जाआ चॅटो .. और.... अंदर जीएभाा डाल कर

चतूऊ...बहुत अच्च्छा लग रहा है ...आज अपनी जीभ से ही इस बुर को चोद

दो... ओह...ओह अहह एसस्सस्स"

जीजाजी को मेरी चूत की मादक ख़ुसबु ने उन्हे मदमस्त बना दिया और वे बरी

तल्लिनता से मेरी बुर के रस (सुधरस) का रास्पान कर रहे थे.

जीजाजी ने मेरी चूत पर से मूह हटाए बिना मुझे खींच कर पलंग पर बैठा दिया

और खुद ज़मीन पर बैठ गये. मेरी जाँघो को फैला कर अपने कंधों पर रख

लिया और मेरे भगोस्थो को अपनी जीभ से चाटने लगे. मैं मस्ती से सिहर

रही थी और चूतर आगे सरका कर अपन्नी चूत को जीजू के मूह से सटा दिया. अब

मेरी चूतर पलंग से बाहर हवा में झूल रही थी और मेरी मखमली जांघों

का दबाव जीजाजी के कंधों पर था. जीजाजी ने अपनी जीभ मेरी बुर में घुसा दिया

और बुर की अन्द्रूनि दीवार को सहलाने लगे. मैं मस्ती के अनजाने पर अद्भुत

आनंद के सागर में गोते लगाने लगी और अपनी चूतर उठा-उठा कर अपनी चूत

जीजाजी के जीभ पर दबाने लगी.
 


"ओह राजा! इसी तरह चूसते और चाटते रहो ..बहुत ..अच्च्छा लग रहा है

....जीभ को अंदर बाहर करो ना...है .. तुम ही तो मेरे चुदक्कर सैया

हो....ओह राजा बहुत तरपि हूँ चुदवाने के लिए... अब सारी कसर निकाल

लूँगी....ओह राज्ज्जजाआ चोदूऊ मेरी चूऊओत को अपनी जीएभ से...."

जीजाजी को भी पूरा जोश आ गया और मेरी चूत मैं जल्दी-जल्दी जीभ

अंदर-बाहर करते हुए उसे चोदने लगे. मैं ज़ोर-ज़ोर से कमर उठा कर जीजाजी के

जीभ को अपनी बुर में ले रही थी. जीजाजी को भी इस चुदाई का मज़ा आने लगा.

जीजाजी ने अपनी जीभ कड़ी कर के स्थिर कर ली और सर को आगे-पिछे कर के मेरी

चूत चोदने लगे. मेरा मज़ा दुगना हो गया.

अपने चूतरो को उठाते हुए बोली, " और ज़ोर से जीजाजी... और जूऊओर से है...

मेरे प्यारे जीजाजी ... आज से मैं तुम्हारी माशूका हो गयी.इसि तरह जिंदगी

भर चुदाउगी....ओह माआआआआ ओह्ह्ह्ह ..उईईईईई माआअ" मैं अब झरने

वाली थी. मैं ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी लेते हुए अपनी चूत जीजू के चेहरे पर रगर

रही थी. जीजू भी पूरी तेज़ी से जीभ लपलपा कर मेरी चूत पूरी तरह से चाट

रहे थे. अपनी जीभ मेरी चूत में पूरी तरह अंदर डालकर वे हिलने लगे.

जब उनकी जीभ मेरी भग्नासा से टकराई तो मेरा बाँध टूट गया और जीजाजी के

चेहरे को अपनी जांघों मे जाकड़ कर मैने अपनी चूत जीजू के मूह से चिपका

दी. मेरा पानी बहने लगा और जीजाजी मेरे भागोस्तों को अपने मूह में दबा

कर जवानी का अमृत 'सुधरस' पीने लगे.

इसके बाद मैं पलंग पर लेट गयी. जीजाजी उठकर मेरे बगल मे आ गये. मैने

उन्हे चूमते हुए कहा, "जीजाजी! ऐसे ही आप दीदी की बुर भी चूसते हैं"

"हाँ! पर इतना नही. 69 के समाया चूसता हूँ पर उसे चुदवाने मे ज़्यादा मज़ा

मिलता है" मैने जीजाजी के लंड को अपने हाथ में ले लिया. जीजाजी का लंड

लोहे की रोड की तरह सख़्त और अपने पूरे आकार में खरा था. देखने मे

इतना सुंदर और अच्छा लग रहा था कि उसे प्यार करने का मन होने लगा, सुपरे

के छ्होटे से होंठ पर प्रीकुं की बूँद चमक रही थी. मैने उसपर एक-दो बार

उपर-नीचे हाथ फेरा, उसने हिल-हिल कर मुझसे मेरी मुनिया के पास जाने का

अनुरोध किया. मैं क्या करती, मुनिया भी उसे पाने के लिए बेकरार थी. मैने उसे

चूम कर मनाने की कोशिश की लेकिन वह मुनिया से मिलने के लिए बेकरार था.

अंत में मैं सीधी लेट गयी और उसे मुनिया से मिलने के लिए इजाज़त दे दी.

जीजाजी मेरे उपर आ गये और एक झटके मे मेरी बुर में अपना पूरा लंड घुसा

दिया. मैं नीचे से कमर उठा कर उन दोनो को आपस मे मिलने मे सहयोग देने

लगी. दोनो इस समय इस प्रकार मिल रहे थे मानो वे बरसो बाद मिले हो. जीजाजी

कस-कस कर धक्के लगा रहे थे और मेरी बुर नीचे से उनका जवाब दे रही थी.

घमासान चुदाई चल रही थी.

लगभग 15-20 मिनट की चुदाई के बाद मेरी बुर हारने लगी तो मैने गंदे

शब्दों को बोल कर जीजू को ललकारा, "जीजाजी आप बरे चुदक्कर हैं.. चोदो

रजाआअ चड़ूऊ .. मेरी बुर भी कम नही है.... कस-कस कर धक्के मारो मेरे

चुदक्कर रजाआा, फार दो इस साली बुर कूऊऊओ, जो हर समय चुदवाने के लिए

बेचैन रहती है.. बुर को फार कर अपने मदनरस से इसे सिंच

दूऊऊओ....ओह माआअ ओह मेरे राजा बहुत अच्च्छा लग रहा है

...चोदो..चोदो...चोदो ..और चोद्दूऊ, राजा साथ-साथ गिरना...ओह

हाईईईईईईईईई आ जाओ ... मेरे चोदु सनम....है अब नही रुक पाउन्गी ओह मैं

.. मैं..गइईईईईईईई." एधर जीजाजी कस कस कर दोचार धक्के लगाकर

साथ-साथ झार गये. सचमुच इस चुदाई से मेरी मुनिया बहुत खुस थी क्यो की

उसे लॉरा चूसने और प्यार करने का भरपूर सुख मिला.

कुछ देर बाद जीजाजी मेरे उपर से हट कर मेरे बगल में आ गये. उनके हाथ

मेरी चून्चियो, चूतर को सहलाते रहे मैं उनके सीने से कुच्छ देर लग कर

अपने सांसो पर काबू प्राप्त कर लिया. मैने जीजाजी को छेड़ते हुए पुंच्छा,

"देवदास लगा दूं?"

"आरे! अच्च्छा याद दिलाया जब कामिनी आई थी तो उस समय मैं उस पिक्चर को नही

देख पाया था, अब लगा दो" जीजाजी मेरी चून्चि को दबाते हुए बोले.

"ना बाबा! उस सीडी को लगाने की मेरी अब हिम्मत नही है, उसे देख कर यह मानेगा

क्या?" मैं उनके लौरे को पकड़ कर बोली. "आप भी कमाल के आदमी है सेक्स से

थकते ही नही. आपको देखना है तो लगा देती हूँ पर मैं अपने कमरे में

सोने चली जाउन्गि"

"ओह मेरी प्यारी साली! बस थोड़ी देर देख लेने दो, मैं वादा करता हूँ मैं कुछ

नही करूँगा, क्यों की मैं भी थक गया हूँ" जीजाजी मुझे रोकते हुए बोले.
 
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