फिर मैं और नबीला ऐसी ही कोई 10 मिनट लेट कर अपनी सांसें बहाल करते रहे जब मेरे लंड ने वीर्य की आखिरी बूंद भी निकाल दी फिर नबीला के ऊपर से हट कर बेड पे उसके साथ लेट गया। फिर नबीला कुछ देर बाद उठकर अटैच बाथरूम में जाने लगी तो वह शायद चल न सकी उससे चला नही जा रहा था। मैंने पूछा नबीला कहाँ जाना है तो वह बोली पेशाब करना है लेकिन चला नहीं जा रहा तकलीफ हो रही है मैं उठा और नबीला को अपनी बाहों में उठा कर बाथरूम ले गया और उसको मैंने बाथरूम में ले जाकर अपनी टांगों पे बैठा लिया और कहा मेरी जान अब पेशाब करो तो वह बोली भाई इस तरह तो सारा पेशाब आप के ऊपर आएगा
मैंने कहा मेरी जान तुम्हारा गर्म गर्म पेशाब अपने लंड पे महसूस करना चाहता हूँ तुम मेरे लंड पे करो तो नबीला अपनी योनी को मेरे लंड के पास करके पेशाब करने लगी नबीला के गर्म गर्म पेशाब ने मुझे मदहोश कर दिया था मेरे लंड पे पेशाब गिरने के कारण लंड झटके खा रहा था। अजीब मस्त मज़ा आ रहा था। फिर पेशाब करने के बाद मैंने नबीला की योनी को पानी से धोया और नबीला ने मेरे लंड अच्छी तरह धोया और फिर मैं उसे उठा कर बेडरूम में लाकर बेड पे लिटा दिया और खुद भी बेड पे लेट गया। मैंने उठ कर कमरे की लाइट ऑनलाइन और नबीला को देखा तो वह मुझे देख कर शरमा गई और मुंह अपने खाथों में छिपा लिया। नबीला का नंगा शरीर कमाल का था। फिर मैंने कहा नबीला मेरी जान शर्मा क्यों रही हो पत्नी अपने पति से शरमाती तो नहीं है। फिर नबीला ने मेरी ओर देखा और मुस्कुरा दी। फिर मेरी नज़र बेड की चादर पर गई तो उसके ऊपर काफी खून लगा था
मैंने कहा नबीला यह क्या तो नबीला ने कहा भाई देख लिया है ना अपनी बहन का कुँवारापन आपकी बहन का यह सबूत है और दूसरी तुम्हारी पत्नी है जो शादी पहले ही अपना मुंह काला करवा चुकी है। मैंने नबीला से कहा, हां तुम सच कह रही हो। लेकिन अब तुम चिंता मत करो उन माँ बेटी मैं सीधा कर दूंगा। फिर मैंने अलमारी से एक दर्द की क्रीम ली और लाइट बंद करके फिर से बेड पे आ गया और नबीला से कहा मेरी जान थोड़ा अपनी टांगों को खोलो मैं क्रीम लगा देता हूँ दर्द के लिए तुम्हें कुछ देर बाद काफ़ी आराम मिल जाएगा
नबीला ने अपनी टाँगें खोल दी मैंने योनी के ऊपर और थोड़ा अंदर वाली साइड पे क्रीम अच्छी तरह लगा दिया और फिर नबीला के साथ लेट गया। थोड़ी देर बाद नबीला बोली भाई आपने ज़ुबैदा और उसकी माँ के लिए क्या सोचा है। तो मैंने कहा नबीला मेरी जान मेरी एक लंबी और मज़ेदार योजना है जिसमें मुझे तुम्हारी मदद की भी जरूरत होगी। तो नबीला बोली भाई मैं तो हर वक्त आप के साथ हूँ आप बताओ करना क्या है। मैंने कहा नबीला मुझे अब पहले चाची को अपने नीचे लेकर आना है और उसकी एक बार जमकर ठुकाई करनी है। नबीला बोली भाई तुम क्या कह रहे हैं आप को उस गश्ती के साथ भी करना है ??????
मैंने कहा नबीला चाची हमारे परिवार की नहीं है लेकिन ज़ुबैदा और साना तो हमारे चाचा की बेटियां हैं उसका वंश और सम्मान है। कल को अगर कोई उनकी इज़्ज़त खराब करता है तो उनके साथ हमारे चाचा की इज्जत भी खराब होगी सब लोग यही कहेंगे जैसा पिता वैसी बेटी और तुम तो जानती हो हमारा चाचा ऐसा नहीं था। तो नबीला बोली हां भाई ये तो सच है। लेकिन चाची साथ करने से आपको क्या फायदा होगा। तो मैंने कहा नबीला अगर ज़ुबैदा हमारी बात नहीं मानती तो अपनी माँ की सुनेगी इसलिए ज़ुबैदा को ठीक करने और रस्ते पे लेकर आने के लिए उसकी माँ को पहले मुझे अपने साथ सेट करना होगा जब ज़ुबैदा की माँ की कुछ दिन जमकर चुदाई करूँगा तो वह मेरी हो जाएगी और मेरे लंड की दीवानी हो जाएगी तो मैं उसकी मदद से ज़ुबैदा को काबू करूँगा और उसे राजी करके लाहौर से वापस गांव ले आऊँगा। और जब वह दोनो यहां आ जाएंगे तो ज़ुबैदा का स्वयं ही उस लड़के से संबंध खत्म हो जाएगा और मैं भी ज़ुबैदा और उसकी माँ को चोद कर ठंडा कर दिया करूंगा। जब दोनों माँ बेटी को लंड मिलता रहेगा तो खुद ही उस लड़के को भूल जाएँगी और ज़ुबैदा भी फिर घर में ही रहा करेगी। और इस तरह ये मामले ठीक हो जाएगा। तो नबीला बोली भाई आप चाची के साथ कब और कैसे करोगे। तो मैंने कहा ज़ुबैदा को वापस आने दो फिर कुछ दिन के लिए इस्लामाबाद की बोलकर लाहौर चला जाऊँगा। वहाँ 3 से 4 दिन ज़ुबैदा की माँ के पास रहूंगा और वहाँ ही चाची को काबू कर लूँगा। एक बार चाची की योनी में अपने लंड की सैर करवा दी फिर देखना कैसे हर बात उससे मनवा लूँगा।
नबीला बोली लेकिन भाई अगर यह सब ठीक हो गया तो क्या आप मुझे फिर भूल जाएंगे और मेरे साथ नहीं करोगे तो मैंने नबीला को लंबी सी फ्रेंच किस की और कहा नबीला तुम मेरी जान हो। ज़ुबैदा और चाची को ठीक करना अपनी प्रतिष्ठा और परिवार को बचाने के लिए है। ज़ुबैदा रहेगी तो मेरी पत्नी लेकिन मेरे दिल की राजकुमारी सिर्फ तुम ही रहोगी। जब मेरी जान का मन करेगा मैं अपनी जान की दिल जान से सेवा और प्यार करूँगा
नबीला मेरी बात सुनकर बोली भाई आपको नहीं पता आप ने यह बात कहकर मुझे कितनी बड़ी खुशी दे दी है और मुझे किस करने लगी। फिर नबीला बोली भाई लेकिन इस काम में मेरी आपको क्या मदद की जरूरत होगी। तो मैंने कहा नबीला मेरी जान ज़ुबैदा और चाची के लिए तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं होगी। मुझे तो तुम्हारी किसी और काम के लिए आवश्यकता होगी। तो नबीला बोली भाई किसके लिए खुलकर बताओ भाई
मैंने कहा तुमने मुझे जमीला बाजी वाली बात बताई थी ना तो नबीला बोली हां बताई थी लेकिन जमीला बाजी की बात का क्या मतलब है। मैंने कहा तुमने कहा जफर भाई शाजिया बाजी के साथ करते हैं इसलिए अब जमीला बाजी के साथ कुछ नहीं करते और जमीला बाजी बेचारी कब से ज़यादती का सामना कर रही है। नबीला ने कहा, हां यह सच है तो। मैंने कहा तुम नहीं चाहती हो कि जफर भाई शाजिया बाजी की छोड़कर जमीला बाजी को खुश करे और उनके साथ पहले जैसा ही प्यार करे और ध्यान रखे। नबीला ने कहा हां भाई क्यों नहीं मैं तो खुद यही चाहती हूं लेकिन यह होगा कैसे। तो मैंने कहा देखो इसके लिए पहले शाजिया बाजी की व्यवस्था करना होगी
बात यह है कि शाजिया बाजी एक हॉट औरत है और उन्हे एक और मजबूत लंड की ज़रूरत होती है वह चाहती है जब उसका दिल करे कोई उसको जमकर चोदे और उसके अंदर की गर्मी को दूर करे इसके लिए समाधान है तुम वैसे भी तो शाजिया बाजी से बात करती हो। लेकिन तुम उससे थोड़ी खुली गपशप करो उसे थोड़ा विश्वास में लो और फिर उनके मुंह से ही शाजिया बाजी और जफर भाई वाले संबंध के बारे में बात उगलवा लो जब वो पूरी तुम्हारे नियंत्रण में आ जाएगी और तुमसे अपनी सारी बातें शेयर करे तो फिर तुम धीरे धीरे उसे मेरे बारे में विश्वास दिलाओ और मेरे साथ संबंध बनाने के लिए उसे राजी करो उसे बाथरूम वाला किस्सा जिसमें तुम ने मेरे लंड को देखा था और ज़ुबैदा और मेरे बीच उस दिन वाला किस्सा जिसमें उसने मेरे लंड पकड़ा हुआ था और बताओ उसे मेरे बारे में गर्म करो और मेरे लंड के बारे में बताओ जब वो पूरी तैयार हो जाय जब तुम्हे लगे वो मेरे लंड को लेने के लिए तैयार है तो मुझे बता दो फिर मैं उसके थोड़ा हाथ आदि लगाकर थोड़ा गर्म गर्म मजाक करके उसकी योनी मार लूँगा और जब शाजिया बाजी एक बार मेरे लंड को अपनी योनी में अंदर करवा लेगी तो वह मेरी ही हो जाएगी और जफर भाई को भूल जाएगी और वैसे भी तुमने कहा था न कि जमीला बाजी ने ज़ुबैदा को कहा था मेरे पति का लंड वसीम से छोटा है।
इसलिए जब शाजिया मेरा लंड लेगी तो वह जफर भाई को भूल जाएगी। फिर मैं शाजिया की योनी की आग को ठंडा कर दिया करूँगा और शाजिया बाजी फिर कम ही जफर भाई के पास जाएगी तो जफर भाई खुद ही बाजी से फिर प्यार करने लगेगा। नबीला मेरी बात सुन बोली भाई आप का प्लान है तो शानदार लेकिन तुम को तो मेरी ज़ुबैदा और उसकी माँ और शाजिया बाजी सब की योनी मिला करेगी आपकी ईद हो जाएगी। लेकिन भाई जमीला बाजी के लिए में शाजिया वाला काम जरूर करूंगी चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े। भाई आप बेफिक्र हो जाएं सारा प्लान समझ गई हूँ मैं कल से ही इस योजना पर अमल करना शुरू कर दूंगी ताकि जल्द से जल्द शाजिया बाजी जफर भाई की जान छोड़ दे और जफर भाई फिर से बाजी जमीला का ख्याल रखे और प्यार करे जिस के लिए वह कब से ज़ुल्म का सामना कर रही हैं।
नबीला कुछ देर के लिए चुप हो गई थी। फिर खुद ही कुछ देर बाद बोली भाई आप से एक बात पूछूँ आप सच सच जवाब देंगे तो मैंने कहा जान तुम से क्यों झूठ बोलूँगा तो नबीला बोली भाई आप को जमीला बाजी कैसी लगती हैं। मैंने कहा अच्छी लगती हैं वो हमारी सबसे अच्छी बाजी हैं। लेकिन तुम क्यों पूछ रही हो। तो नबीला बोली भाई किसी और मामले में पूछ रही हूँ।
मैंने कहा क्या मतलब है किसी और मामले में तो वह बोली भाई आप तो जानते हो जमीला बाजी ने ज़ुबैदा को अपने बारे में जो कहा था आपको याद नहीं है क्या। मैंने कहा हां मुझे याद है लेकिन तुम्हारे लिए क्या मतलब है खुलकर बात करो। तो नबीला ने कहा भाई जब ज़ुबैदा ने जमीला बाजी अपने लंड के बारे में बताया था तो जमीला बाजी ने आगे कहा था कि मेरे नसीब में ऐसा लंड कहां है काश वसीम मेरा पति होता तो मैं उसका लंड दिन रात मेरी योनी और गाण्ड में लेती। तो भाई आप ही सोचो आपके लंड की सुनकर बाजी की भावनाओं को तो आप समझ ही गए होंगे। और आप खुद बाजी को अपने इस लंड का मज़ा दे दो तो वो आपकी दीवानी हो जाएगी और उन्हें आप से सुख मिल जाएगा अगर जफर भाई कभी कभी उन्हें प्यार नहीं भी करते तो वह आप तो पूरा कर सकते हैं।
मैं नबीला की बात सुनकर हक्का रह गया। मैंने कहा नबीला यह तुम क्या कह रही हो जमीला बाजी के साथ यह सब कैसे कर सकता हूँ वह हमारी बड़ी बाजी हैं। तो नबीला बोली भाई मैं भी तो आपकी सगी बहन हूँ मेरे साथ भी तो आपने किया है तो आप चाची के साथ भी करोगे और शाजिया बाजी के साथ करोगे जब हर किसी को खुश कर सकते हो तो जमीला बाजी के साथ क्यों नहीं कर सकते वह बेचारी भी प्यार की भूखी हैं वह तो मुझसे भी ज्यादा इस बात की ज़रूरत महसूस करती हैं कितने समय से वो अपने साथ अन्याय सहन कर रही हैं आप उन्हें ये मज़ा देकर उनको कितना खुश कर सकते हैं शायद आपको नहीं पता है। उन्हें आपके लंड का ज़ुबैदा से वैसे ही पता चल चुका है जब उन्हें वास्तव में वही लंड मिलेगा तो वह खुशी से पागल हो जाएंगी।
मैंने कहा नबीला तुम्हारी सारी बातें ठीक हैं लेकिन बाजी मेरे लिए कैसे राजी होंगी। तो नबीला बोली भाई ये आप मुझ पे छोड़ में बाजी जमीला और आपका काम में करवा के दूँगी उन्हें में राजी कर लूंगी बस आप राजी हो जाएं। मैंने कहा नबीला अगर अपनी जान नबीला को खुश कर सकता हूँ तो जमीला बाजी भी मेरी बहन और जान हैं मुझे कोई समस्या नहीं है तो नबीला खुश हो गई और बोली- भाई आजने आप मेरा दिल जीत लिया है आज मैं बहुत खुश हूँ। मैंने कहा नबीला तुम्हारे और बाजी जमीला के लिए जान भी हाजिर है। तो वह खुशी से मुझे चूमने लगी। फिर धीरे से बोली भाई मेरी गाण्ड में आपके लंड के लिए कब से खुजली हो रही है। आप अपनी बहन की इस गाण्ड का कुछ करो।
मैंने कहा जान मैं तो तैयार ही तैयार हूँ लेकिन जान गाण्ड में योनी से भी ज्यादा तकलीफ होगी। तो वह बोली भाई आप के लिए हर दर्द मंजूर है। आप थोड़ा लोशन लगा लेना फिर मेरी गाण्ड मार लेना बाद में यह वाली क्रीम लगा लूँगी में ठीक हो जाऊँगी। बस आप अब मेरी गाण्ड में अपना लंड डालो। मैंने कहा ठीक है तो मेरे लंड की एक अच्छी सी चुसाइ लगाओ और थोड़ा गीला और टाइट कर दो फिर घोड़ी बन जाओ मैं तुम्हारी गाण्ड मारूँगा। नबीला ने उठकर मेरे लंड को फिर मुंह में ले लिया और चुसाइ लगाने लगी और 5 मिनट में मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया। फिर मैंने कहा जान घोड़ी बन जाओ। तो वह घोड़ी बन गई मैंने कोठरी में रखा ज़ुबैदा का लोशन लिया और उसे अपने लंड पे अच्छी तरह लगाकर गीला कर लिया और फिर बाद में नबीला की गाण्ड पे लोशन लगाकर नरम उंगली से गाण्ड के अंदर भी लोशन लगाकर नरम किया फिर मैंने घुटनों के बल बैठ कर अपने लंड को नबीला की गाण्ड के छेद पर रखा और हल्का सा झटका दिया लेकिन लंड लोशन की वजह से फिसल गया तो मैंने फिर अपना लंड गाण्ड के छेद पे सेट किया और अपने दोनों खाथों से नबीला की गान्ड को थोड़ा खोला और इस बार पहले से जोर का झटका लगाया तो मेरे लंड की टोपी पूरी नबीला की गाण्ड में चली गई। नबीला के मुंह से चीख निकली हाईईईईईईईईईईईईईई एह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह भाईईईईईईईईईईईईई मर गई। भाई और नहीं डालना रुको।
वहाँ ही रुक गया। फिर कुछ देर कोई हरकत नहीं की तो कुछ देर बाद मैंने कहा जान अगर सहन नहीं हो रहा तो मैं बाहर निकाल लेता हूँ। तो नबीला बोली भाई नहीं बाहर नहीं निकालना में सहन कर लूंगी एक न एक दिन तो अंदर लेना ही है। भाई आप धीरे धीरे अंदर करो झटका नहीं लगाना मैंने कहा अच्छा ठीक है। फिर मैंने धीरे धीरे आगे लंड दबाना शुरू किया मैं आराम से अंदर करने लगा लगभग 2 मिनट की मेहनत से लगभग आधे से अधिक लंड अंदर घुस चुका था। नबीला ने अपने हाथ पीछे करके मेरे पेट पे रख कर बोली भाई रुको बहुत दर्द हो रहा है। ऐसे लग रहा है जैसे कोई चाकू से मेरी गाण्ड को चीर कर जा रहा हो। मैंने कहा जान आधे से अधिक अंदर जा चुका है बस थोड़ी हिम्मत करो तो बाकी एक ही झटके में अंदर करवा लो जो दर्द होगा अब एक बार ही होगा
। नबीला ने कहा ठीक है भाई आप बाकी का एक झटके में अंदर कर दो। मैंने कहा जान झटके मारने से तुम्हें दर्द होगा शायद तुम्हारी चीख निकल जाएगी तो एक काम करो अपना मुंह तकिए में दबा लो फिर एक ही झटके में अंदर कर दूंगा। नबीला ने आगे रखे तकिए में अपने मुँह रख कर दबा लिया मैंने नबीला की गाण्ड को अपने हाथों से खोला और फिर बहुत जोरदार झटका मारा और पूरा लंड नबीला की गाण्ड में घुसा दिया
नबीला के मुंह से एक जोरदार चीख निकली थी लेकिन तकिए में मुंह की वजह से दब गई लेकिन मुझे गों गों गों की आवाज सुनाई दी। मैं सहम सा गया था क्योंकि नबीला इस वक्त गंभीर संकट में थी मैं वहाँ ही रुक गया और कोई हरकत नहीं की लगभग 5 से 7 मिनट तक मैंने इंतजार किया फिर नबीला ने तकिए से मुंह उठाया और बोली भाई दुख बहुत रहा है लेकिन आप धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दो। मैं बड़ी सावधानी से लंड अंदर बाहर करने लगा कोई 5 मिनट तक लंड प्यार से धीरे धीरे अंदर बाहर करता रहा ताकि नबीला को अधिक दर्द ना हो। जब लंड गाण्ड में काफी हद तक एडजस्ट हो गया तो नबीला ने कहा भाई अब एक बार तेज करो अब कुछ बेहतर है। मैंने अपने झटके तेज कर दिए नबीला की गाण्ड बहुत टाइट थी उसकी गाण्ड ने मेरे लंड को काफी मजबूती से अंदर पकड़ कर रखा हुआ था। लंड फंस फंसकर अंदर जा रहा था। नबीला के मुंह से अब सुख भरी सिसकियाँ निकल रही थीं। आह ओह आह ओह आह ओह ओह आह आह। और धक्के पे धक्के लगा रहा था। कुछ देर बाद में खड़ा होकर गाण्ड मारने लगा इस स्थिति में लंड अंदर जड़ तक उतर जाता था नबीला के मुंह से आह आह आह की आवाज निकल रही थीं।
मुझे नबीला गाण्ड मारते हुए 10 मिनट से अधिक समय हो गया था मेरे पैरो की अब हिम्मत जवाब देने लगी थी मैं अपनी पूरी ताकत से लंड गाण्ड के अंदर बाहर करने लगा नबीला की आवाज भी तेज हो गई थीं कमरे में धुप्प धुप्प की आवाज और नबीला की सिसकियाँ आह आह आह ओह ओह आह ओह पूरे कमरे में गूंज रही थीं तो अधिक मैंने 2 से 3 मिनट नबीला की गाण्ड मारी जब वीर्य निकलने लगा मैंने नबीला से पूछा जान पानी कहाँ निकालू तो वह बोली अंदर ही निकालो। मैंने 2 से 3 झटके और मारे और नबीला की गाण्ड में मेरा वीर्य छोड़ दिया मुझे ऐसे लग रहा था जैसे नबीला की गाण्ड में वीर्य का सैलाब निकल आया था। मैं और नबीला ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर मुंह के बल लेट गए लंड अभी नबीला की गाण्ड के अंदर ही था। काफी देर बाद मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और नबीला के ऊपर से हट कर साथ में लेट गया। फिर मैं और नबीला बिना बात किए हुए 15 मिनट तक ऐसे ही ही लेटे रहे। फिर बाद में नबीला ने ही बात शुरू की बोली भाई आज तो मज़ा आ गया मैं आज का मज़ा और तुम्हे नहीं भूल सकती। आज जो आप ने आराम दिया है उसके लिए मैं कितने साल से इंतजार में थी। और मुझे खुशी है कि ये शांति मुझे अपने भाई से मिली है। फिर हम यूं ही लेट कर बातें करते रहे। नबीला ने कहा भाई क्रीम लगा दो ना दर्द हो रहा है।
मैंने क्रीम नबीला की गाण्ड और उसके छेद में अच्छी तरह लगा दी तो मैंने कहा जान रात के 3 बज गए हैं अब आप थोड़ा आराम करो मैं तुम्हें अम्मी के जागने से पहले तुम्हारे कमरे में छोड़ आऊँगा। सुबह तुम्हें गोलियाँ ला दूंगा वह खा लेना इससे कोई समस्या नहीं होगी बच्चे होने का डर नहीं होगा। नबीला ने कहा ठीक है भाई लेकिन मुझे अभी आपकी बाँहों में सुबह तक सोना है आप अम्मी की चिंता मत करो वह 10 बजे से पहले नहीं उठेंगी क्योंकि मैंने रात को उन्हें दूध में 1 नींद की गोली दे दी थी।
मैंने कहा नबीला यह तुम क्या कह रही हो। तो नबीला बोली भी अगर ऐसा नहीं करती तो रात को मेरी आवाज और चीख सुनकर उनको अपने कमरे में आ जाना था तो जो होना था.वो आप भी पता है। मैंने कहा यह तुम ठीक कह रही हो।
फिर मैंने कहा नबीला एक बात कहूँ तो नबीला ने कहा हां भाई कहो क्या कहना है। मैंने कहा नबीला मुझे अच्छी गाण्ड जमीला बाजी की लगती है। तो नबीला हंसने लगी और बोली भाई मुझे पता है। मेरी गाण्ड अभी जमीला बाजी जितनी नहीं है उनकी गाण्ड जफर भाई से मरवा मरवा इतनी मस्त और बड़ी हो गई है। अब आप मेरी भी दिनरात मार मार के जमीला बाजी जैसी बना देना। मैं उसकी बात सुनकर हंसने लगा। और फिर मैंने सुबह 8 बजे के मोबाइल पे अलार्म लगा दिया और दोनों बहन भाई नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सो गए। । ।
मेरी आँख उस वक्त खुली जब अलार्म बजा मैंने उठ कर देखा तो नबीला अब तक सोई हुई थी सुबह की रोशनी में उसका दूध जैसा शरीर चमक रहा था उसकी नरम मुलायम और रूई जैसी गाण्ड को देखकर मेरा लंड एक बार फिर सिर उठाने लगा लेकिन मैंने अपनी भावनाओं पे काबू पाया क्योंकि सुबह वक्त था गली मोहल्ले में सब लोग आ जा रहे होते थे और सुबह के वक्त कोई भी घर आ सकता था या अम्मी भी उठ सकती थी। इसलिए मैंने अपना इरादा छोड़ दिया और उठ कर बाथरूम में चला गया और बाथरूम का उपयोग करके फिर नहाने लगा और अच्छी तरह नहा धोकर फ्रेश हुआ और फिर कपड़े पहन कर बाहर आ गया बेड पे देखा तो नबीला बदस्तूर सोई हुई थी मुझे अपनी बहन पे बहुत प्यार आया। मैं बेड पे जाकर उसके साथ बैठ गया और धीरे से उसके बालों में उँगलियाँ फेर कर उसके होंठों पे एक कस दी तो नबीला भी जाग उठी और मेरी गर्दन में हाथ डाल कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को मुंह में लेकर फ्रेंच किस करने लगी
लगभग 2 मिनट तक वह किस करती रही फिर मैं ही उससे अलग हुआ और बोला नबीला मेरी जान सुबह हो गई है। और अम्मी भी किसी वक्त उठ सकती हैं अब फिर से यह काम असंभव है तुम भी उठो और नहा धोकर फ्रेश हो जाओ और बेड की चादर भी बदल दो किसी ने देख लिया तो बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी . नबीला ने कहा भाई मेरे अंदर अभी नशा खत्म नहीं हुआ है दिल करता है आपको अपने से कभी अलग न करूं। लेकिन अब तो मजबूरी है लेकिन बाद में आप के देख लंड को देखूँगी
मुझे उसकी बात सुनकर हँसी आ गई और मैंने कहा अच्छा मेरी जान बाद की बाद में देखी जाएगी फिलहाल अब तो उठो और जाकर फ्रेश होजाओ लेकिन यह चादर पहले चेंज करो। नबीला फिर बेड से उठी और पहले अपने कपड़े पहने और फिर ज़ुबैदा की अलमारी से नई चादर निकाली और पुरानी खून वाली चादर एक साइड पे करके नई वाली चादर ऊपर डाल दी और फिर खून वाली चादर लेकर कमरे से भी चली गई मैं वहाँ ही बेड पे बैठ गया और टीवी लगा लिया और समाचार सुनने लगा लगभग 10 बजे के करीब नबीला मेरे लिए नाश्ता लेकर मेरे कमरे में आ गई। इस वक्त वह बहुत प्यारी लग रही थी, उसने काले रंग की सूती सलवार कमीज पहनी हुई थी उसका पाजामा काफी अधिक टाइट था और वह नाश्ता मेरे सामने रख कर मेरे साथ ही बैठ गई। और फिर अपना मुंह मेरे मुंह के करीब लाकर मेरे होंठ पे एक किस की और बोली सुप्रभात भाई और बोली आज हम जीवन साथी की तरह एक साथ नाश्ता करेंगे।
मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा पड़ा और मैंने कहा क्यों नहीं जान। और फिर हम दोनों नाश्ता करने लगे नाश्ता करके नबीला ने बर्तन उठा लिए और जाने लगी तो मैंने पूछा नबीला अम्मी उठ गई हैं नबीला ने कहा भाई जब मैं नाश्ता लेकर आ रही थी तो उस वक्त वह उठकर बाथरूम में जा रहीं थीं अब मैं जाकर उन्हें भी नाश्ता देती हूं आज मुझे कपड़े धो ने हैं। और वह यह बोल कर बाहर चली गई और मैं टीवी देखने में व्यस्त हो गया। लगभग 12 बजे के समय मैंने ज़ुबैदा कॉल की तो उसकी माँ ने फोन उठाया और अभिवादन के बाद मैंने पूछा चाची ज़ुबैदा ने कब वापस आ ना है तो उन्होंने कहा कि वह कल वापस आ जाएगी उसकी तबीयत खराब हो गई थी और हम लोग मरी नहीं जा सके वह अब भी सोई हुई है। मैंने कहा ठीक है चाची उसे कहना जब कल घर से निकलेगी तो मुझे बता दे मैं स्टेशन पे जा कर ले आऊँगा।
चाची ने कहा हां बेटा में बोल दूंगी। चाची ने कहा बेटा तुम भी कभी लाहौर हमारे पास आ जाया करो मैं भी तुम्हारी चाची हूँ कभी हमारे लिए समय निकाल लिया करो। मेरे दिमाग में तुरंत एक विचार आया और मैंने कहा चाची में जरूर आऊँगा वैसे भी मुझे लाहौर एक जरूरी काम है कुछ दिन बाद आउन्गा तो टॉयस ओर भी चक्कर लगाऊँगा। चाची ने कहा हां बेटा जरूर आना मुझे तुमसे और भी कुछ जरूरी बातें करनी हैं। मैंने कहा जी जरूर और फिर कुछ यहाँ वहाँ की बातें कर फोन बंद कर दिया। फिर मैंने टीवी बंद किया और कमरे से बाहर निकल आया बाहर आंगन में आया तो अम्मी सब्जी काट रही थीं और नबीला एक साइड पे वॉशिंग मशीन लगाकर कपड़े धो रही थी। जब उसकी मेरे साथ नजर मिली तो अम्मी से नज़र बचाकर मुझे मुंह के इशारे से किस कर दी में यह देखकर मुस्कुरा पड़ा और अम्मी को बोला- मैं ज़रा बाहर तक जा रहा हूँ मुझे कुछ जरूरी काम है खाने तक आ जाऊँगा । और फिर घर से बाहर निकल आया। और अपने दोस्तों के पास आ गया और उनके साथ बैठकर गपशप लगाने लगा। लगभग 2 बजे तक दोस्तो के साथ बैठकर गपशप लगाता रहा और फिर उठकर घर आ गया दरवाजे पे दस्तक दी तो नबीला ने दरवाजा खोला और मैने घर में प्रवेश किया तो नबीला ने कहा भाई खाना तैयार है हाथ मुंह धोकर आओ खाना खाते हैं। और नबीला की बात सुनकर अपने रूम में आ गया और फिर अपने शौचालय से मुंह हाथ धोकर बाहर जहां अम्मी और नबीला खाना खा रहे थे मैं भी वहाँ ही बैठ गया और खाना खाने लगा। खाने के दौरान अम्मी ने पूछा बेटा ज़ुबैदा ने कब वापस आ ना है तो मैंने कहा अम्मी मैंने आज उसे कॉल की थी तो चाची ने फोन उठा लिया था उनसे पूछा तो वह कहती हैं ज़ुबैदा कल वापस आ जाएगी वह बीमार हो गई थी। अम्मी ने कहा बेटा तुम खुद जाकर ले आते तो मैंने कहा अम्मी मुझे कुछ दिन बाद अपने काम से लाहौर जाना है इसलिए 2 बार चक्कर नहीं लगा सकता था इसलिए मैं नहीं गया वह कल आ जाएगी में उसे स्टेशन से लेकर आऊँगा। फिर कुछ देर यहाँ वहाँ की बातें होती रही और फिर खाना खाकर अपने बेडरूम में आ गया। और अपने बेड पे आकर लेट गया और टीवी लगा लिया लगभग 3 बजे के करीब नबीला मेरे कमरे में आई और अंदर आकर दरवाजा बंद किया और आकर मेरे साथ बेड पे आकर चिपक कर लेट गई। और बोली भाई आप सच कह रहे हो कल वह कंजरी ज़ुबैदा वापस आ रही है। तो मैंने कहा हां नबीला यह सच है लेकिन तुम क्यों गुस्सा हो रही हो। मैंने तुम्हें पहले भी कहा था अब तुम मेरी जान हो उसके साथ तो बस एक जीवन साथी वाला रिश्ता है।
नबीला ने कहा तो भाई जब ज़ुबैदा आ जाएगी तो आप मुझे कब प्यार करोगे। उसके आने के बाद तो वैसे भी मुश्किल हो जाएगा। मैंने कहा जान तुम चिंता क्यों करती हो। मेरी जान को प्यार जरूर मिलेगा जब मेरी बहन को प्यार की जरूरत होगी तुम ज़ुबैदा के दूध या पानी में भी नींद की गोली मिला दिया करना और फिर नबीला को आँख मार दी। नबीला मेरी बात सुनकर चहक उठी और मेरे होंठों को अपने होंठों में ले लिया और चूसने लगी। फिर नबीला ने सलवार के ऊपर से मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और मेरा लंड सहलाने लगी। इसके कुछ देर लंड सहलाने के कारण मेरा लंड एकदम टाइट हो गया
नबीला ने कहा भाई क्या एक राउंड लगा लें। तो मैंने कहा नबीला अम्मी बाहर ही होंगी जाग रही होंगी। तो नबीला बोली भाई अम्मी अपने कमरे में सो गई हैं वे 5 से पहले नहीं उठेगी अभी कुछ देर पहले वह सोई हैं। आप बस मुझे अब आगे योनी से कर लो गाण्ड में रात को कर लेना। मैंने कहा अच्छा चलो ठीक है और फिर मैं उठ कर अपनी सलवार उतारने लगा ऊपर केवल मैंने बनियान पहनी हुई थी नबीला ने भी जल्दी से अपनी शर्ट उतारी तो नीचे उसने कुछ भी नहीं पहना हुआ था उसके शर्ट उतार ने से उसके मोटे मम्मे उछल कर बाहर आ गए और फिर उसने एक ही झटके में अपनी सलवार भी उतार दी अब नबीला पूरी नंगी मेरे सामने बैठी थी। मैंने उसकी योनी को देखा तो उसकी योनी से उसकी जवानी का रस निकल रहा था मैंने अपनी उंगली उसकी योनी के लबों पे फेरी तो नबीला के मुंह से एक कामुकता भरी सिसकी निकल गई और मेरी उंगली भी नबीला की जवानी के गर्म रस से गीली हो गई
मैंने अपनी उंगली को अपनी नाक के पास लाकर सूँघा तो मुझे एक भीनी सी खुशबू आ रही थी मैं बहक सा गया मैंने अपनी ज़ुबान लगाकर उसका परीक्षण किया तो मुझे नशा सा चढ़ गया मैं अपनी उंगली को मुंह में लेकर सारा रस चाट गया फिर नबीला ने मेरे मुंह से मेरी उंगली निकाल कर एक बार फिर अपनी योनी के अंदर फेरी और इस बार मेरी उंगली पकड़ कर अपने मुँह में लेकर चाट गई। और फिर बोली भाई कैसा लगा अपनी बहन की जवानी का रस तो मैंने कहा नबीला तुम्हारे रस में भी और तुम्हारे शरीर में एक नशा है जो जितना मर्जी कर लो दिल नहीं भरता।
फिर नबीला मेरे सामने आकर घोड़ी बन गई मैं अपनी टाँगें खोल कर बेड के साथ टेक लगा कर बैठा हुआ था नबीला ने मेरा लंड हाथ में पकड़ कर उसे कुछ देर हाथ से सहलाया और फिर अपनी टोपी को मुंह में ले लिया और टोपी के आसपास ज़ुबान गोल गोल घुमाने लगी और बीच में कभी कभी मेरी टोपी के छेद पे जब अपनी जीभ की नोक को रगड़ देती तो मेरे शरीर में एक करंट दौड़ जाता था। काफी देर तक टोपी अपने मुंह से मालिश करने के बाद नबीला ने धीरे धीरे लंड मुंह में लेना शुरू कर दिया वह बेचारी इस काम में अनाड़ी थी इसलिए बीच में कभी कभी अपने दाँत भी मार देती थी जिससे मुझे हल्की सी लंड पे टीस सी उठ जाती थी। लेकिन वह अपनी पूरी कोशिश कर रही थी मुझे उसके दाँत महसूस न हो। फिर मैंने देखा नबीला ने लगभग आधा लंड मुंह में लिया था तो उससे जहां तक संभव हो सका लंड मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। वो अपनी ज़ुबान की पकड़ से मेरे लंड को मुंह में कस लेती थी जिससे मेरे मुंह से सुख भरी सिसकी निकल जाती थी। लगभग 5 से 7 मिनट के अंदर ही नबीला ने जानदार चुसाइ लगा मेरे लंड को लोहे जैसा सख्त बना दिया था।
फिर मैंने खुद उसे रोक दिया और उसके मुंह से अपना लंड बाहर निकालकर उससे कहा कि मैं सीधा हो कर लेट जाता हूँ तुम ऊपर से आकर लंड के ऊपर बैठो जैसे तुम्हारा मन करे और जितना दिल करे लंड अपने अंदर लो। नबीला अपनी टाँगें दोनों ओर करके मेरी जांघों के ऊपर बैठ गई तो मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और थोड़ा ऊपर उठकर अपनी योनी के छेद को मेरे लंड की टोपी पे सेट किया और फिर अपनी योनी को लंड के ऊपर दबाने लगी लेकिन इस स्थिति में उसे थोड़ी तकलीफ हो रही थी तो उसने लंड को बाहर निकाला और मेरे लंड को मुंह में लेकर अच्छी तरह अपनी थूक से गीला किया तो कुछ थूक निकाल कर अपनी योनी के छेद मे लगा दिया और उसके बाद फिर लंड को अपनी योनी के छेद पे सेट किया और एक झटका दिया तो मेरा आधा लंड टोपी समेत उसकी योनी में चला गया उसका शरीर संतुलन में नहीं रहा था जिससे झटका तेज लगा ..और लंड एक ही झटके में आधा अंदर हो गया। नबीला मुंह से आवाज आई हााे भाई मर गई। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
मैंने उसके शरीर को पकड़ लिया और उठ कर बैठ गया और बोला नबीला मेरी जान तुम अब यहाँ ही रुक जाओ कोई हरकत मत करो। लगभग नबीला 2 मिनट तक ऐसे ही रुकी रही मैंने भी उसके शरीर को पकड़ा हुआ था तो मैंने कहा नबीला मैंने भी तुम्हें पकड़ रखा है तुम धीरे धीरे नीचे बैठ जाओ नबीला ने ऐसा ही किया वह हल्का हल्का अपने शरीर को नीचे मेरे लंड के ऊपर दबा रही थी। लगभग 2 मिनट की मेहनत से नबीला मेरा पूरा लंड अपनी योनी में ले चुकी थी। और उसने अपना सर मेरे कंधों पे रख लिया था और लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी। जब नबीला को काफी आराम हो गया तो बोली भाई आपका लंड बहुत लंबा है मेरे पेट तक महसूस हो रहा है। मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा पड़ा और बोला मेरी जान इस लंड से ही तो तुम्हें आराम भी मिलता है। फिर मैंने कहा जान अगर अब कुछ आराम हुआ है तो अपने शरीर को ऊपर नीचे हरकत दो और लंड अंदर बाहर लो। नबीला मेरी बात सुनकर धीरे धीरे मेरे लंड के ऊपर ही हरकत करने लगी शुरू में धीरे धीरे वह आधा शरीर उठा कर ऊपर नीचे होती रही लेकिन जब लंड ने रास्ता बना लिया तो वह पूरा शरीर उठाकर लंड अंदर बाहर लेने लगी
लंड की टोपी तक अपने शरीर को उठाती और फिर नीचे होकर पूरा लंड जड़ तक अंदर ले लेती उसे इस स्थिति में लंड लेते हुए 5 मिनट से अधिक का समय हो चुका था गति न इतनी तेज थी न इतनी धीमी थी फिर अचानक ही नबीला ने अपनी स्पीड तेज कर दी थी उसके मुँह से सुख भरी सिसकियाँ निकल रही थीं। आह आह ओह ओह आह ओह आह ओह आह भाई गई आह भाई गई। और अधिक तेज तेज झटके से लंड अंदर लेने से उसकी योनी काफी अधिक पानी छोड़ दिया था उसका गर्म गर्म पानी उसकी योनी से निकल कर बाहर मेरे लंड के ऊपर भी रिस रहा था। मुझे एक अजीब सा नशा चढ़ गया था। मैं नबीला को आगे से लेटा कर खुद घुटनों के बल बैठ गया अब नबीला पैर मेरे कंधेपे थे मैं थोड़ा और आगे झुक गया अब उसके पैर नबीला के मम्मों से टच हो रहे थे मेरा पूरा लंड नबीला की योनी के अंदर था मैंने भी जोश में आ कर धक्के लगा दिए।
नबीला भी गाण्ड उठा उठा कर साथ दे रही थी कमरे में शरीर आपस में टकराने की वजह से धुप्प धुप्प की आवाजें गूंज रही थी। और नबीला की सिसकियाँ भी पूरे कमरे में गूंज रही थीं आह आह ओह आह ओह ओह आह आह।हाईईईईईई
मैंने आगे होकर नबीला के मुंह में अपना मुंह डाल दिया ताकि उसकी आवाज कमरे से बाहर न जा सके और मैं धक्के पे धक्के लगा रहा था मेरा लंड नबीला की योनी की जड़ तक जाकर टकरा रहा था। मुझे नबीला को इस स्थिति में चोद ते हुए लगभग 5 मिनट हो गए थे। अब मुझे भी अपने लंड की कोशिकाएँ फूलती हुई महसूस हो रही थीं। मैंने अब तूफानी झटके लगाने शुरू कर दिए नबीला का शरीर मेरे जानदार झटकों की वजह से बुलबुला उठा था उसके मुंह से भी जोश और खुशी भरी आवाजें निकल रही थीं लेकिन उसका मुंह मेरे मुंह में होने की वजह से आवाज बाहर नहीं निकल पा रही थी 3 से 4 मिनट के जानदार झटकों से मैंने अपने वीर्य का लावा नबीला की योनी के अंदर छोड़ दिया नीचे नबीला का शरीर भी बुरी तरह कांप रहा था वह भी दूसरी बार अपना पानी छोड़ चुकी थी। अब मैं उसके ऊपर ही लेट कर हाँफने लग रहा था और नबीला भी नीचे से लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी। फिर जब नबीला की योनी ने मेरे लंड धन की आखिरी बूंद को भी निचोड़ लिया तो मैं अपना लंड बाहर निकालकर नबीला के साथ ही लेट गया और अपनी आँखें बंद कर ली .
मुझे पता ही नहीं चला कब सो गया और कब नबीला मेरे शरीर पे चादर डाल कर कमरे से बाहर चली गई थी। शाम लगभग 6 बजे के करीब मेरी आंख खुली में बेड से उठा और बाथरूम में घुस गया नहा धोकर फ्रेश हुआ और अपने कमरे से बाहर निकल आया बाहर आंगन में अम्मी और नबीला बैठी बातें कर रही थीं। नबीला ने मुझे देखा तो उठकर किचन में जाने लगी और बोली भाई आपके लिए चाय लाती हूँ और जाते हुए अम्मी से नज़र बचाकर मुझे स्माइल दी और मुंह से किस कर रसोई में चली गई। मैं उसकी इस हरकत पे मुस्कुरा पड़ा। फिर अम्मी ने कहा बेटा कल कितने बजे ज़ुबैदा ने आना है।
मैंने कहा मैं अभी थोड़ी देर में उसे फोन करके पूछ लेता हूँ तो कल जाकर स्टेशन से ले आऊंगा। इतनी देर में नबीला चाय ले आई। और मुझे चाय देकर अम्मी के साथ ही खाट पे बैठ गई। नबीला अम्मी से थोड़ा हटकर पीछे बैठी थी और मुझे बड़ी ही नशीली नज़रों से देख कर मुस्कुरा रही थी। उसकी एक मुस्कान मेरी जान से बढ़कर थी। फिर मैं वहाँ बैठकर काफी देर अम्मी के साथ यहाँ वहाँ की बातें करता रहा पता ही नहीं चला कि कब 8 बज गए। मैंने अम्मी से कहा कि मैं ज़ुबैदा को फोन करके पूछ लेता हूँ वह कुल कितने बजेपहुँचे जाएगी और फिर मैं अपने कमरे में आ गया।
मैंने ज़ुबैदा को फोन करके पूछ लिया था कि वह कब आएगी। में बैठा टीवी देख रहा था तो नबीला मेरे कमरे में आई और बोली भाई खाना तैयार है बाहर आओ खाना ख़ालो और वह फिर बाहर चली गई। मैं बेड से उठा मुंह हाथ धोकर बाहर खाना खाने बैठ गया। खाना खाकर छत पे थोड़ी देर टहलने के लिए चला गया और छत पे ही लगभग 1 घंटे तक टहलता रहा घड़ी में समय देखा 10 बजने वाले थे। छत से उतर कर अपने रूम में आ गया और टीवी लगा कर बैठ गया। आज सप्ताह का ख़ास वाला दिन था देखा केबल वाले ने अपने किसी चैनल पे एक सेक्सी इंग्लिश फिल्म लगा दी थी। मैंने लाइट ऑफ की और दरवाजा बंद करके देखने लगा दरवाजे को लॉक नहीं किया मुझे पता था नबीला जरूर आएगी लगभग 11 बजे के करीब नबीला ने चुपके से मेरे बेडरूम का दरवाजा खोला और अंदर आकर दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी। और चलती हुई मेरे साथ आकर मेरे बेड पे मेरे साथ चिपक कर लेट गई।
कुछ देर टीवी देखती रही और मेरे सीने पे हाथ फेरती रही। मैंने सलवार और बनियान पहनी हुई थी वह बनियान में हाथ डाल कर मेरे सीने पे हाथ फेर रही थी। फिर मैंने उसे थोड़ा अपने साथ लगाकर उसे होंठ पे किस किया और पूछा नबीला कभी इस तरह की सेक्सी इंग्लिश फिल्म देखी हैं। तो वह बोली भाई एक दो बार ही अपने कमरे में टीवी पे देखी हैं जब आप बाहर होते थे और ज़ुबैदा लाहौर गई होती थी लेकिन ज्यादा देर नहीं देख सकती थी फिल्म देख कर मुझे कुछ कुछ होने लगता था और मेरे पास कोई होता नहीं था जो मज़ा कर सकूँ। लेकिन आप की वह कंजरी पत्नी लगभग रोज़ रात को देखती थी। यह केबल वाला शनिवार और रविवार के दिन गंदी गंदी इंग्लिश फिल्म लगाता है। और ज़ुबैदा बड़े शौक से देखती है और कई बार जब देख रही होती थी तो पूरी नंगी हो कर अपनी योनी में उंगली डाल कर मज़ा भी लेती थी तो मैंने देखा फिल्म में एक बड़ा ही गरम-गरम सीन आया लड़का लड़की को खड़ा करके खुद उसकी योनी के आगे बैठकर योनी चाट रहा था। मैंने कहा जान क्या तुम्हें यह अच्छा लगता है। तो नबीला कहा हां भाई बहुत अच्छा लगता है क्या आप भी मेरे साथ ऐसा कर सकते हैं।
मैंने कहा मेरी जान के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। मैंने कहा तुम उल्टा लेट कर अपना मुंह टीवी की ओर कर लो और अपनी टांगों को थोड़ा खोल दो मैं पीछे से तुम्हें मजा देता हूँ तुम फिल्म देखकर भी मजा लो और नीचे से मुझे भी मजा लो। नबीला खुश हो गई और उठकर मुझे होंठों पे किस किया और फिर झटपट अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई और जिस स्थिति में मैंने कहा था उसमें होकर लेट गई। मैं ने भी पीछे होकर थोड़ा उसके पैरों को खोला और अपना मुँह आगे करके पहले अपनी ज़ुबान नबीला की गाण्ड की दरार में फेरी तो नबीला के शरीर को एक झटका लगा और पीछे मुंह करके बोली यह कैसा मजाक था।???????
मैंने कहा जान अभी आगे आगे देखो कैसा कैसा मज़ा आता है। इस स्थिति में नबीला की गाण्ड का छेद ऊपर था और योनी का छेद नीचे था . फिर मैंने फिर से अपनी ज़ुबान पे थूक जमा करके नबीला की गाण्ड के हॉल को खोलकर अपनी ज़ुबान फेरी तो नबीला के मुंह से लंबी सी सिसकी निकल गई कुछ देर तक यूं ही नबीला की गाण्ड की दरार में जीभ फेरकर उसकी गाण्ड के छेद की मालिश करता रहा नबीला के मुंह से सुख भरी सिसकियाँ निकल रहीं थीं। फिर नबीला की योनी के लबों पे ज़ुबान फेरी तो नबीला के शरीर में करंट दौड़ गया मैं उसकी योनी के लबों को इस तरह ही अपनी जीभ से चाटता रहा। फिर मैंने अपने दोनों हाथ की उंगलियों से उसकी योनी के लबों को खोला और अपनी जीभ अंदर करके फेरने लगा नबीला का शरीर झटके खाने लगा। फिर तो मैंने अपनी जीभ से नबीला की योनी की चुदाई करनी शुरू कर दी। शुरू में धीरे धीरे अपनी जीभ योनी के अंदर बाहर करता रहा लेकिन फिर नबीला की तेज सिसकियाँ सुन कर मुझे और जोश आ गया था मैं अपनी जीभ को उसकी योनी के अंदर बाहर करने लगा।
लगभग 2 मिनट के अंदर ही नबीला का शरीर कांपने लगा और झटके खाने लगा और उसने ढेर सारा अपनी योनी का माल मेरी जीभ के ऊपर ही छोड़ दिया। फिर मैंने भी कुछ देर बाद अपना मुँह हटा लिया और उठकर बाथरूम में चला गया और मुंह हाथ धोकर फिर आकर नबीला के साथ बेड पे लेट गया। नबीला उठकर बाथरूम में चली गई और जाकर अपनी साफ सफाई करके वापस आकर नंगे बदन ही मेरे साथ फिर से चिपक कर लेट गई और बोली- भाई आपकी ज़ुबान में जादू है। मुझे बड़ा मज़ा आया हाई मेरी योनी को आज पहली बार किसी नरम नरम चीज ने अपना अहसास कराया है और मेरा ढेर सारा पानी निकला है। भाई मज़ा आ गया हाई भाई मेरी चूत आज खुल कर रोई है पर रोकर भी बहुत खुश है आज मेरी चूत .
दोस्तो आज इस काहनी को यही विराम देते हैं अगला अपडेट अगली बार
दोस्तो उम्मीद करता हूँ कि ये कहानी आपको फुल एंजाय करा रही होगी
मैंने कहा हां नबीला मेरी जान मुझे पता है किसी भी औरत को मर्द की ज़ुबान से अपनी योनी की मालिश करवाना बहुत अच्छा लगता है . नबीला ने आगे होकर मेरी सलवार का नाड़ा खोला और मेरी सलवार को मेरी टांगों से निकालकर खींचकर उतार दिया और बेड के दूसरी तरफ रख दिया और फिर मेरे सीने पे अपना सिर रखकर और अपनी एक टांग मेरे पैर के ऊपर रखकर चिपक गई और अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया। और बोली भाई आपने लाहौर कब जाना है। और क्या आप लाहौर चाची वाले काम के लिए ही जा रहे हो। मैंने कहा नबीला मैं ज़ुबैदा के लौट जाने के 4 या 5 दिन के बाद इस्लामाबाद का बहाना बनाकर लाहौर चला जाऊँगा मैं ज़ुबैदा को इस्लामाबाद का ही बताऊँगा। और हाँ में लाहौर चाची के लिए ही जा रहा हूँ। मुझे अब जल्दी से जल्दी चाची वाले मुद्दे को हल करके उन्हें वापस यहाँ लेकर आना है। ताकि परिवार और बाहर वालों को चाची की किसी भी बात का पता लगने से पहले उन्हें यहां गांव में सेट कर दूँ। न वह लड़का चाची से मिलेगा और न ही कोई समस्या बनेगी और वैसे भी चाची आग जब मैं खुद ठंडा करता रहूंगा तो किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी
नबीला ने कहा भाई भी 1 या 2 दिन बाद शाजिया बाजी वाले मुद्दे पे काम शुरू करती हूँ। ताकि जमीला बाजी की शांति लौट सके।
मैंने नोट किया नबीला के काफी देर लंड सहलाने के कारण मेरे लंड में काफी जान आ गई थी। फिर नबीला उठकर थोड़ा आगे झुक गई और मेरे लंड अपने मुंह में ले लिया और उसकी चुसाइ लगाने लगी। नबीला लगभग 5 मिनट तक लंड मुंह में लेकर अलग तरह से चुसाइ लगाती रही अब मेरा लंड लोहे की रॉड की तरह बनकर सलामी दे रहा था। नबीला ने कहा भाई एक मिनट रुको में आई वह बेड से उठी और कुंडी खोल कर बाहर चली गई और 2 मिनट के बाद जैतून के तेल की बोतल ले कमरे में आ गई और अंदर प्रवेश कर कुंडी लगा दी।
जब मैं सऊदी से वापस आता था तो जैतून का तेल हर बार लेकर आताथा। और बेड पे आकर बोतल से तेल निकालकर पहले मेरे लंड पे अच्छी तरह लगाया और उसे गीला कर दिया और फिर मुझे बोतल दी और मेरे आगे घोड़ी बन कर मुझसे बोली भाई तेल निकालकर मेरी गाण्ड के छेद के अंदर लगाकर नरम और गीला कर दो और फिर लंड अंदर करो। मैंने बोतल लेकर तेल निकालकर नबीला की गाण्ड पे पहले लगाया उसकी गांड की दरार में लगाकर गीला किया तो नबीला की मोरी को खोलकर इसमें डायरेक्ट बोतल से थोड़ा तेल अंदर गिराकर फिर अपनी एक उंगली को नबीला की गान्ड के छेद के अंदर करके उसे गोल गोल घुमा कर उसकी अच्छी तरह मालिश किया फिर कुछ और तेल डाल कर नरम और किया अब मेरी बड़ी वाली पूरी उंगली आराम से नबीला की गाण्ड में अंदर बाहर होने लगी थी। फिर मैंने तेल की बोतल को एक साइड पे रख कर घुटनों खड़ा हो गया नबीला तो पहले ही घोड़ी बनी हुई थी।
मैंने नबीला की गाण्ड के हॉल को खोलकर अपने लंड को नबीला गाण्ड के छेद पे सेट किया और एक झटका मारा और पिच की आवाज से मेरे लंड का टोपा नबीला की गाण्ड में घुस गया नबीला के मुंह से एक कामुकता भरी आह निकल गई । तेल लगाने की वजह से नबीला की गाण्ड काफी नरम हो गई थी। फिर मैंने धीरे धीरे अपना लंड नबीला की गाण्ड के अंदर दबाना शुरू कर दिया। हक़ीकत ये थी कि नबीला की गाण्ड काफी टाइट थी नबीला की गाण्ड के छेद के अंदर की दीवारों ने मेरे लंड को अपनी ग्रिप में लिया हुआ थानबीला का शरीर भी नीचे से कसमसा रहा था और वो अपनी गाण्ड को बन्द कर लेती थी कभी ढीला छोड़ देती थी।
जहां दर्द सहन नहीं होता वो गाण्ड को दबा लेती और जहां थोड़ा आराम मिलता अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ देती . मैं भी इस संघर्ष में अपना आधा लंड उसकी गान्ड के अंदर कर चुका था। फिर पता नहीं नबीला के मन में क्या आया और उसने पूरी ताकत के साथ अपनी गाण्ड को पीछे मेरे लंड की ओर धक्का दिया और मेरा लंड एक झटके में ही उसकी गाण्ड के अंदर तक उतर गया और नबीला मुंह से एक दर्द भरी आवाज़ निकली हाइईईईईईईईईईई ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह भाई मैं मर गई। और फिर तुरंत बोली भाई अब आप कोई हरकत न करना मुझे थोड़ा आराम मिलने दो फिर अंदर बाहर करना। मैं उसकी बात सुनकर वहाँ ही रुक गया।
लगभग 5 मिनट तक इस स्थिति में ही रहा और कोई हरकत नहीं की। फिर नबीला की आवाज आई भाई अब कुछ बेहतर है अब लंड अंदर बाहर करो। मैंने अपने लंड को टोपी तक बाहर खींचा और बोतल से कुछ तेल अपने लंड पे गिरा दिया और फिर लंड अंदर बाहर करने लगा। धीरे धीरे लंड गाण्ड के अंदर बाहर कर रहा था। लगभग 4 से 5 मिनट के बाद ही मेरा लंड गाण्ड के अंदर काफी आराम से अंदर बाहर होना चालू हो चुका था। और अब नबीला को भी मज़ा आ रहा था क्योंकि अब उसके मुंह से सुख भरी सिसकियाँ निकलना शुरू हो गईं थीं। बड़े ही आराम से लंड अंदर बाहर कर रहा था नबीला भी अब गाण्ड को आगे पीछे गति दे रही थी। फिर कुछ देर और धक्के लगाने के बाद मैं अपने पैरों पे खड़ा हो गया और थोड़ा आगे झुक कर मैंने अपनी बड़ी वाली उंगली नबीला की योनी के अंदर घुसा दी। और दूसरे हाथ से नबीला का एक मम्मा पकड़ लिया और अपने धक्कों की गति को तेज कर दिया हम दोनों को काफी पसीना भी आ चुका था इसलिए जब हमारे शरीर आपस में टकराए तो धुप्प धुप्प की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। और दूसरी तरफ अब अपनी उंगली योनी के अंदर बाहर कर रहा था।
नबीला को दोनों ओर से मज़ा मिलने की वजह से बहुत ज्यादा जोश चढ़ गया था वह सुख भरी आवाज में बोलने लगी भाई और तेज करो और तेज करो आज फाड़ दो अपनी जान की योनी और गाण्ड भाई मुझे अपनी पत्नी बना लो मुझे अपने बच्चे की माँ बना लो वह पता नहीं क्या क्या बोलती जा रही थी। लेकिन मेरा जोश उसकी बातों से और अधिक बढ़ चुका था मैंने उसकी गाण्ड के अंदर अपने तूफानी झटके लगाने शुरू कर दिए और 4 से 5 मिनट के बाद मैंने अपने वीर्य की बाढ़ को उसकी गाण्ड के अंदर छोड़ दिया था और नीचे से नबीला की योनी ने अपना गर्म गर्म ढेर सारा पानी छोड़ दिया था। में नबीला के ऊपर ही गिर गया और नबीला मेरे वजन से नीचे गिर गई और हम एक दूसरे के ऊपर उल्टा होकर गिर कर लेट गए मेरा लंड बदस्तूर नबीला की गाण्ड के अंदर था। काफी देर तक मैं यूं ही नबीला के ऊपर लेटा रहा। फिर जब मेरी कुछ सांसें बहाल हो गईं तो वहां से उठकर नबीला के साथ ही लेट गया नबीला अब भी काफ़ी तकलीफ़ में थी। काफी देर बाद उठकर वह बाथरूम गई और 10 मिनट के बाद अपनी सफाई करके वापस आकर बेड पे लेट गई।
फिर मैं उठा और बाथरूम गया और सफाई करके वापस आकर नबीला के साथ लेट गया। नबीला मेरे सीने पे उल्टा होकर लेट गई और पता नहीं कब सो गई और मैं भी सो गया था लगभग सुबह 5 बजे मेरी नींद खुली तो देखा नबीला मेरे सीने पे ही नंगी हो कर सोई हुई है। मैंने उसे आराम से एक तरफ लेटा दिया और एक चादर उसके शरीर पे डाल कर खुद भी उससे सट कर सो गया।
सुबह लगभग 9 बजे मेरी नींद खुली तो देखा नबीला बेड पे नहीं थी। और जो चादर मैंने नबीला ऊपर ऊढाई थी वह अब मेरे शरीर पे थी। फिर मैं बेड से उठा और बाथरूम चला गया नहा धोकर फ्रेश हुआ और कपड़े बदलकर टीवी लगा कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद नबीला नाश्ता लेकर आ गई और नाश्ता रख कर मेरे सामने बैठ गई और मेरे साथ ही नाश्ता करने लगी मैं पूछा अम्मी उठ गई हैंतो नबीला ने कहा अभी थोड़ी देर पहले ही उठी हैं मैंने उन्हें नाश्ता करवा दिया है। फिर नबीला ने कहा भाई आज आप कंजरी कब लेने जा रहे हो तो मैंने कहा दिन के 1 बजे उसने आना है। 12 बजे स्टेशन के लिए निकल जाऊंगा। तो नबीला ने कहा भाई मुझे आज जमीला बाजी के घर छोड़ के अपने स्टेशन पे चले जाना। मैंने कहा ठीक है तुम तैयार हो जाना मैं तुम्हें रास्ते में छोड़ दूंगा। फिर नबीला ने कहा भाई आप को कुछ दिन मेरे बिना रहना होगा। मैंने पूछा क्यों क्या हुआ तुम कहीं जा रही हो। तो नबीला कहा भाई मैं कहीं भी नहीं जा रही दरअसल आज से मेरे दिन शुरू हो रहे हैं तो मैं आप से प्यार नहीं करवा सकती। मैं नबीला की बात समझ गया मैंने कहा मेरी जान कोई बात नहीं जब तुम्हारे दिन सही हो जाएंगे तो मुझे प्यार कर लेना। फिर मैं और नबीला नाश्ता करते हुए यहाँ वहाँ की बातें करते रहे फिर जब हमने नाश्ता खत्म कर लिया तो नबीला बर्तन उठाकर ले गई। और मैं भी हाथ धो कर टीवी चला कर बैठ गया। लगभग 11: 30 पे टीवी बंद किया और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होकर तैयार हो कर कमरे से बाहर निकल कर नबीला को आवाज़ दी वह भी अपनी चादर लेकर अपने कमरे से बाहर निकल आई। वह पहले से ही तैयार थी। अम्मी आंगन में बैठीं थीं और नबीला से पूछने लगी तुम कहाँ जा रही हो तो नबीला ने कहा अम्मी मैं बाजी की ओर जा रही हूँ उन्होंने बुलाया था कोई काम था। मैं थोड़ी देर तक वापस आ जाऊँगी।
फिर मैंने मोटर बाइक निकाली और नबीला को साथ लिया और वहाँ से निकल आया। नबीला को बाजी जमीला घर के बाहर छोड़कर में मुल्तान स्टेशन की ओर चल दिया। लगभग 1 बजने में अभी 15 मिनट बाकी थे जब मैं स्टेशन पे पहुंचा था। मैंने मोटर बाइक को एक तरफ खड़ा किया और पैदल चलता हुआ स्टेशन के अंदर चला गया जहां पे ट्रेन आकर रुकती थी। वहाँ ही रखे हुए बेंच पे बैठ गया और ट्रेन का इंतजार करने लगा। लगभग 1 बजकर 5 मिनट पे मुझे ट्रेन की आवाज सुनाई दी। और फिर अगले 5 मिनट में ट्रेन स्टेशन पे आकर रुकी और उसमें से अलग सवारियाँ बाहर निकलने लगीं। लगभग 5 मिनट के बाद ही मुझे ट्रेन की दूसरी बोगी से ज़ुबैदा बाहर निकलती हुई दिखी मैं बेंच से उठा और उसके पास चला गया उसने मुझे देखा और सलाम किया और हम दोनों ने एक दूसरे का हाल पूछा तो मैंने उसका बैग उठा लिया और उसे साथ लेकर स्टेशन से बाहर जहां अपनी मोटर बाइक खड़ी की थी वहाँ ले आया और फिर मैंने उसका बैग आगे मोटर बाइक की टंकी पे रखा और खुद बैठ गया फिर ज़ुबैदा भी पीछे बैठ गई। मैंने मोटर बाइक स्टार्ट की और घर की ओर चल पड़े।
स्टेशन से घर तक का मोटर बाइक यात्रा में लगभग 40 से 45 मिनट का था। जब ज़ुबैदा को लेकर वापस आ रहा था तो जब हम शहर से बाहर आए तो मैं ज़ुबैदा पूछा तुम्हारी तबियत को क्या हुआ था। तो वो बोली कुछ खास नहीं था बुखार चढ़ गया था 3 दिन तक बुखार के कारण तबियत ठीक नहीं रही। मैंने कहा अच्छा अब तबियत कैसी है। अगर ठीक नहीं है तो रस्ते में डॉक्टर को दिखाकर घर चले चलते है। तो ज़ुबैदा ने कहा नहीं रहने दें मेरी तबियत अब कुछ बेहतर है मैंने जो लाहौर से दवा ली थी वह ले रही हूँ वह साथ भी ले आई हूं इससे काफी फर्क है अगर फर्क नहीं पड़ा तो फिर डॉक्टर जाँच करवा लेंगे तो मैंने कहा चलो ठीक है जैसे तुम्हारी इच्छा मेंने कहा चाची कैसी हैं उन्हें भी साथ ले आती वह भी यहां कुछ दिन रह लेती तो ज़ुबैदा ने कहा अम्मी ठीक हैं
ज़ुबैदा ने बताया मैंने कहा था लेकिन वो कहती हैं घर में कोई नहीं है घर अकेला छोड़ कर नहीं जा सकती तो यूं ही बातें करते करते घर नज़दीक पहुँच गए जब जमीला बाजी के घर के करीब पहुंचा तो मैंने बाइक वहाँ पे रोक दी .ज़ुबैदा सवालिया नजरों से मुझे देखने लगी मैंने अपने मोबाइल से नबीला के नंबर पे कॉल मिलाई तो थोड़ी देर बाद नबीला ने कॉल पिक की तो मैंने पूछा नबीला तुम कहाँ हो बाजी के घर हो या घर चली गई हो। तो नबीला ने कहा भाई अभी 15 मिनट पहले घर आई हूँ तुम कहाँ हो खैर तो है। मैंने कहा हां सब ठीक है ज़ुबैदा को लेकर वापस आ रहा था तो सोचा तुम बाजी घर ही होगी तो तुम्हें भी साथ घर ले जाऊँगा। चलो ठीक है मैं घर आ रहा हूँ। मैंने फोन बंद करके जेब में रखा मोटर बाइक स्टार्ट की और घर की ओर चल पड़ा ज़ुबैदा को भी सवाल का जवाब मिल चुका था उसने कोई सवाल नहीं किया और फिर 10 मिनट के बाद में और ज़ुबैदा घर पहुंच गए मैंने मोटर बाइक का हार्न बजाया तो नबीला ने तुरंत दरवाजा खोला मैं बाइक को लेकर अंदर चला गया और आंगन में एक ओर खड़ा कर दिया ज़ुबैदा भी अंदर आ गई और अम्मी आंगन में ही बैठी थीं। ज़ुबैदा उनके गले लगकर मिली और नबीला को भी मिली मैंने देखा ज़ुबैदा को देखकर नबीला का मूड ऑफ हो गया था। फिर ज़ुबैदा सब से मिल कर अपने कमरे में चली गई। मैं भी उसका बैग उठा कर अपने कमरे में आ गया। जब कमरे में प्रवेश किया तो ज़ुबैदा शायद बाथरूम में थी मैं भी बैग अलमारी में रख कर बेड पे चढ़ कर लेट गया।
थोड़ी देर बाद ज़ुबैदा बाहर निकली तो उसके बाल गीले थे शायद वह नहा कर फ्रेश होकर बाहर निकली थी। फिर वह ड्रेसिंग टेबल के पास जाकर अपने बाल सुखा ने लगी। और बाल सुखा कर अपने बालों में कंघी कर रही थी। तभी नबीला ने कमरे में प्रवेश किया उसके हाथ में चाय की ट्रे थी। इसमें 2 कप चाय के रखे थे। और चाय टेबल पे रख कर बोली भाई आप चाय पी लें खाना तैयार होने वाला है फिर बाहर आकर खाना खा लें। मैंने कहा ठीक है वह फिर बाहर चली गई। मैंने अपना चाय का कप उठा लिया और चाय पीने लगा ज़ुबैदा भी अपने बालों में कंघीकरके उसने अपना चाय कर कप उठा लिया और दूसरी तरफ से बेड पे आकर बैठ गई और चाय पीने लगी। मैंने ज़ुबैदा से पूछा तुम्हारी बहन साना का क्या हाल है क्या वह घर आती रहती है। तो ज़ुबैदा ने कहा हां, वह ठीक है और घर भी महीने या 2 महीने के बाद चक्कर लगा लेती है कभी कभी अम्मी भी जाकर 1 दिन के लिए उसके पास चली जाती हैं अभी 1 महीना पहले भी घर आई हुई थी। कहती है समय नहीं मिलता पढ़ाई पहले है। फिर ज़ुबैदा ने कहा आप सुनाएं आप कैसे हैं मुझे याद भी नहीं किया। मैं ज़ुबैदा के इस सवाल से बौखला सा गया क्योंकि वास्तव में मैंने उसे याद नहीं किया था
क्योंकि जब मुझे इस बारे में बात पता चली थीं और फिर जब नबीला मेरे इतने करीब हो गई थी उसने मुझे ज़ुबैदा के बारे में सोचने से ही नहीं दिया। मैं अभी ज़ुबैदा के सवाल का जवाब ही सोच रहा था तो ज़ुबैदा ने कहा क्या हुआ आप किन सोचों में गुम हैं। मैंने कोई मुश्किल सवाल पूछ लिया है।
मैंने कहा नहीं मुश्किल सवाल नहीं है लेकिन इतना भी जरूरी नहीं है। अगर तुम्हारी चिंता न होती तो तुम्हें फोन भी नहीं करता और मैं तो तुम्हें लेने जा रहा था लेकिन तुमने ही कहा था तुम नहीं आओगी और अम्मी के साथ कुछ दिन के लिए मरी जा रही हो तो ज़ुबैदा ने कहा हां अम्मी ने सोचा था और अम्मी पहले इस्लामाबाद जाएँगी तो वहां से साना को साथ लेकर कुछ दिन के लिए मरी चले जाएंगे वो भी खुश हो जाएगी और हमारा भी मौसम बदल जाएगा। लेकिन फिर मैं बीमार हो गई और हमारी योजना नहीं बन सकी . फिर मैं और ज़ुबैदा यहाँ वहाँ की बातें करते रहे और लगभग 2 बजे नबीला कमरे में आई और बोली- आप आ जाएं खाना लग गया है और वह यह बोल कर बाहर चली गई। मैं बेड से उठा हाथ धोकर ज़ुबैदा को बोला हाथ धोकर आओ भोजन तैयार है। वह बाथरूम में चली गयी मैं बाहर आ गया जहां पे खाने लगा था अम्मी और नबीला वहाँ ही बैठे थे फिर 2 मिनट बाद ही ज़ुबैदा भी आ गई। फिर हम सब ने मिलकर खाना खाया और भोजन समाप्त होकरकरके फिर अपने कमरे में आ गया और नबीला और ज़ुबैदा किचन का काम करने लग गईं
लगभग 3 बजे ज़ुबैदा काम निपटा कर कमरे में आ गई और आकर दरवाजा बंद कर दिया और आकर बेड पे बैठ गई तो फिर उठी अलमारी से अपना बैग निकाला और उसकी जेब से अपनी दवाई निकाल कर पानी के साथ अपनी दवाई खाने लगी मैं बेड पे लेटा हुआ था और उसे देख रहा था। फिर वह दवाई खाकर मेरे साथ ही लेट गई और बोली- मुझे पता है आप को मेरी जरूरत है, लेकिन मैं 1 या 2 दिन में पूरा ठीक हो जाऊँगी तो आप जो कहेंगे करूंगी। अब के लिए माफ कर दें। मैंने कहा बात नहीं ऐसी कोई बात नहीं है तुम बीमार हो तुम आराम करो जब तुम्हारा अपना दिल करे तो मुझे बता देना। फिर वह मेरी बात सुन कर खुश हो गई और आगे होकर मेरे होंठ पे किस कर दी और फिर करवट बदल कर लेट गई मैं भी थोड़ा थक गया था मुझे भी नींद आ गई और मैं भी सो गया। फिर 2 दिन ऐसे ही बीत गए और कुछ खास नहीं हुआ न ही मेरी नबीला से कोई लंबी-चौड़ी बात हो सकी।
फिर 1 दिन दोपहर को अपने बेड पे लेटा हुआ था लगभग 3 बजे का समय होगा जब ज़ुबैदा अपना काम निपटा कर कमरे में आई और दरवाजा बंद कर मेरे साथ बेड पे आकर लेट गई और मेरे होंठ पे किस देकर बोली वसीम आज मैं बिल्कुल ठीक हूँ आज रात मुझे आपके प्यार की जरूरत है। तो मैंने कहा ठीक है मुझे कोई समस्या नहीं है। फिर रात को खाना आदि खाकर छत पे चला गया और थोड़ी देर टहलता रहा तो 10 बजे के करीब नीचे अपने कमरे में आ गया। ज़ुबैदा अब भी कमरे में नहीं आई थी। मैंने टीवी ऑन किया और कमरे की रोशनी को बंद कर के बेड पे टेक लगाकर बैठ कर टीवी देखने लगा। लगभग आधेघंटे के बाद ज़ुबैदा कमरे में आई और आ कर दरवाजा बंद कर दिया और बाथरूम में चली गई और 5 मिनट बाद बाथरूम से वापस आ गई और बेड के पास आकर अपने कपड़े उतारने लगी और अपने सारे कपड़े उतार कर पूरी नंगी हो कर बेड पे आ गई और मेरे साथ चिपक गई मैंने भी सिर्फ सलवार और बनियान पहनी हुई थी। उसने सलवार के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे होंठ पे किस कर बोली वसीम कितने दिनों से तुम्हारे बिना दिन गुजार रही हूं। मुझे आपकी बहुत याद आई थी मैं कब की वापस आ जाती क्या करूँ में बीमार हो गई थी। और साथ ही सलवार के ऊपर से ही मेरा लंड को भी सहला रही थी। मैंने कहा मैं तो 2 साल बाहर था तब तुम कैसे गुजारा करती थी। मेरे इस सवाल पे वह बौखला गई और थोड़ी देर चुप हो गई। फिर हिम्मत इकट्ठा करके बोली वह तो पता होता था आपने 2 साल वापस नहीं आना है इसलिए उंगली से ही अपनी प्यास बुझा लेती थी। अब तो आप यहाँ आ गए हैं जब पता हो तो नज़दीक है बंदा तो ज़्यादा याद आती है .
मैं ज़ुबैदा की बात सुनकर हैरान था कितनी आसानी से झूठ बोल कर वह अपने आप को सच्चा बना लेती है। फिर मैंने कहा, हां यह बात तो है। फिर मैंने अपनी सलवार भी उतार दी और नीचे में भी पूरा नंगा हो गया था। कुछ देर मेरा लंड सहलाने के कारण अर्द्ध हालत में खड़ा चुका था। फिर ज़ुबैदा ने आगे होकर मेरे लंड को मुंह में ले लिया और उसकी चुसाइ लगाने लगी। ज़ुबैदा का चुसाइ लगाने का स्टाइल काफी अच्छा था। वह वैसे ही अच्छा होना ही था पता नहीं कितने लंड मुंह में लेकर चुसाइ लगाने का अनुभव था। अब नबीला बेचारी उसका मुकाबला कहाँ कर सकती थी। ज़ुबैदा लंड बड़े ही स्टाइल से मुंह में लेकर चुसाइ लगा रही थी। लगभग 5 से 7 मिनट के अंदर ही उसकी जानदार चुसाइ ने मेरे लंड के अंदर जान डाल दी थी लंड तन कर खड़ा हो गया था। फिर मैंने ज़ुबैदा से कहा बेड के नीचे खड़ी हो जाओ और एक पैर ऊपर बेड पे रख लो और एक जमीन पर रख लो मैं पीछे से योनी के अंदर करता हूं।
वह तुरंत ही मेरी बताई हुई स्थिति में खड़ी हो गई मैं ज़ुबैदा के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर ज़ुबैदा की योनी के छेद पे सेट किया और फिर अपने दोनों हाथों से उसकी गाण्ड को पकड़ कर जोर का झटका मारा मेरा आधा लंड ज़ुबैदा की योनी के अंदर चला गया ज़ुबैदा झटका लगने से थोड़ा आगे हो गई। और उसके मुँह आह की आवाज निकल गई। फिर मैंने फिर से एक और जोरदार झटका मारा और पूरा लंड ज़ुबैदा की योनी की जड़ तक उतार दिया। ज़ुबैदा के मुंह से फिर आवाज़ आई हेययीयियीयियी अम्मिईीईईईईईईई जी। फिर मैं कुछ देर रुक कर लंड ज़ुबैदा की योनी के अंदर बाहर करने लगा शुरू में मैंने अपनी स्पीड धीरे ही रखी जब लंड काफी चिकना हो गया तो मैंने अपनी गति तेज कर दी अब ज़ुबैदा के मुंह से भी सुख भरी आवाज़ें निकल रही थीं। आह आह ओह आह ओह ओह आह। । और ज़ुबैदा भी अपने शरीर को आगे पीछे कर के लंड को अंदर बाहर करवा रही थी। ज़ुबैदा ने एक बार अपना पानी छोड़ दिया था जिसके कारण उसकी योनी के अंदर काफी गीलापन हो चुका था जब मेरा लंड अंदर जाता था तो पिच पिच की आवाज कमरे में गूंज रही थीं। इस स्थिति में मेरे पैरों की भी हिम्मत जवाब देने लगी थी इसलिए मैं पूरी ताक़त से लंड के अंदर बाहर करने लगा दूसरी ओर ज़ुबैदा की सिसकियाँ भी पूरे कमरे में गूंज रही थीं और 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरे लंड ने अपना माल ज़ुबैदा की योनी के अंदर छोड़ना शुरू कर दिया था और ज़ुबैदा भी दूसरी बार अपना पानी मेरे साथ ही छोड़ चुकी थी। जब मेरा सारा पानी निकल चुका तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। और बेड पर बैठ गया ज़ुबैदा वैसे ही आगे होकर बेड पे गिर पड़ी और कुछ देर लम्बी लम्बी सांसें लेती रही फिर मैं उठ कर बाथरूम चला गया और अपनी साफ सफाई कर कमरे में आ कर अपनी सलवार पहन कर बेड पे लेट गया । मैंने देखा थोड़ी देर बाद ज़ुबैदा भी हिम्मत करके उठी और बाथरूम चली गई और फिर 10 मिनट बाद वापस आई और आकर अपने कपड़े पहन कर मेरे साथ ही बेड पे लेट गई तो मुझे पता ही नहीं चला कब आंख लग गई और मैं सो गया।
सुबह जब मैं उठा तो बेड पे देखा ज़ुबैदा नज़र नहीं आ रही थी घड़ी में समय देखा तो सुबह 10 बज गए थे। मैं बेड से उठा और बाथरूम में घुस गया और नहा धोकर फ्रेश हो गया .बाहर निकला तो ज़ुबैदा नाश्ता लेकर बैठी मेरा इंतजार कर रही थी। मैने बालों में कंघी की और फिर ज़ुबैदा के साथ बैठकर नाश्ता करने लगा। नाश्ता करके ज़ुबैदा बर्तन उठाकर बाहर चली गई। मैं बेड पे टेक लगाकर बैठ गया और टीवी लगा कर देखने लगा। लगभग 12 बजे के समय मैंने उठकर टीवी बंद किया और कमरे से निकल कर बाहर आंगन में आ गया वहाँ मेरी नजर शाजिया बाजी पे पड़ी वह आंगन में खाट पे बैठी अम्मी के साथ बातें कर रही थी। और नबीला अम्मी के पीछे बैठी अम्मी के सिर में तेल लगाकर मालिश कर रही थी। फिर जब शाजिया बाजी की नज़र मेरे ऊपर पड़ी तो मुझे देख कर उन्होने एक दिल कश मुस्कान दी और बोली- क्या हाल है वसीम आजकल नज़र ही नहीं आते हैं। हम भी तुम्हारे रिश्तेदार हैं कभी हमें भी समय दे दिया करो कभी हमारी ओर भी चक्कर लगा लिया करो।
मैं खाट के पास रखी कुर्सी पे बैठ गया और बोला बाजी मैं ठीक हूँ बस थोड़ा व्यस्त था इसलिए चक्कर नहीं लगा और यह बोलकर मैंने नबीला को देखा तो उसने मुझे आँख मार दी। फिर मैंने कहा बाजी आप सुनाएं आप कैसी हैं आप भी काफी कमजोर हो गई हैं। लगता है दूल्हा भाई की याद में कमजोर हो गई हैं। दूल्हा भाई सुनाएं वे कैसे हैं। मैंने देखा मेरी इस बात से शाजिया का थोड़ा मूड ऑफ हो गया था। और थोड़ा रुक कर बोली वह भी ठीक होंगे उन्हें कौन सा मेरी परवाह है अगर होती तो मुझे यहाँ अकेला रहने देते।
मैंने कहा बाजी आप नाराज क्यों हो रही हैं हम सब हैं न आप की चिंता करने के लिए। मेरी इस बात पे मैंने देखा शाजिया बाजी ने अपने होठों को थोड़ा काट कर मुझे नशीली नज़रों से देखा और फिर फिर अम्मी के साथ यहाँ वहाँ की बातें करने लगी। थोड़ी देर बाद ज़ुबैदा सबके लिए चाय बना कर ले आई। और सबसे चाय पीने लगे . मैं ने चाय समाप्त की और घर में बोल कर बाहर दोस्तों के पास गपशप लगाने के लिए चला गया। दोस्तों के पास समय गुजार कर लगभग 2 बजे जब घर लौट रहा था तो मुझे शाजिया बाजी सड़क के कोने पे मिली दोपहर का समय था गली में सन्नाटा था कोई बंदा न नही था शाजिया बाजी ने मुझे देखा और रास्ते में ही रोक लिया और बोली वसीम कभी हमारी ओर चक्कर लगा लिया करो हम भी तुम्हारे अपने हैं। हर समय ज़ुबैदा में ही घुसे रहते हो थोड़ा बाहर की भी दुनिया देखो और भी बहुत अच्छी अच्छी दुनिया है जहां फुल मज़ा मिलता है। कभी हमें भी अपनी सेवा का मौका दें।
मैं शाजिया बाजी के खुल्लम खुला निमंत्रण पे हैरान रह गया लेकिन एक मायने में खुश भी था चलो अच्छा ही हुआ शाजिया बाजी पे ज़्यादा समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। मैंने कहा शाजिया बाजी आप को अपने पति को छोड़ कर और किसी की सेवा का ख्याल आ गया है। तो शाजिया बड़े ही खुमार भरी आवाज़ में बोली उसे कहाँ शौक है सेवा करने का वह तो बस सेवा करवा कर दूसरों को गर्म छोड़कर अपनी राह ले लेता है। अब बंदा किस किस को अपने दिल का दुख बताये अब कोई दिल का दुख सुने तो बताऊं कि जीवन में कितना अलगाव और घुटन है।
मैंने कहा शाजिया बाजी आप चिंता क्यों करती हैं। मैं हूँ ना आप का दुख बांटने के लिए अलगाव को समाप्त करने के लिए आज से पहले तो आपने कभी कुछ कहा ही नहीं तो कैसे पता चलेगा आप की क्या समस्या है। शाजिया मेरी बात सुनकर एकदम लाल हो गई और खुश हो गई और बोली वसीम पूरे परिवार में एक तू ही है जिसने मुझे पहचाना है मेरी परेशानी को समझा है। अब समय निकालकर कभी चक्कर लगाओ मैं तुम्हें अपना दुख बताना चाहूंगी। मैंने कहा ठीक है बाजी में जरूर चक्कर लगाऊँगा। फिर वहां से घर आ गया। दरवाजा नबीला ने खोला अंदर सब मेरा ही खाने के लिए इंतजार कर रहे थे। हाथ धोकर उनके साथ बैठ कर खाना खाने लगा। खाना खाकर अपने कमरे में आ गया और बेड पे लेट गया और आंखें बंद करके शाजिया बाजी की कही हुई बातों पे विचार करने लगा। और पता ही नहीं चला कब नींद आ गई और सो गया