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बेकाबू

12. सारी ग़लतियाँ माफ़

दो रातें बीत चुकी थीं जागते जागते, इन दिनों स्कूल भी नहीं गया था,

बड़ी मुश्किल से बैग उठाया और ठीक तीन दिनों बाद आज स्कूल आया,

मिताली से नज़रें नहीं मिला पा रहा था, बातें मिताली की हर दिन से ज्यादा क्लोज वाली थी पर मै आज जिंदगी में पहली बार खुद के क्लोज ही नहीं था,

मेरी नज़र सोनल की जगह पर पड़ी जो खाली थी,

वो अाई नहीं थी,

और तो और, शर्मा सर भी नहीं आए थे,

मिताली से पूछा " सर नहीं आए?"

"हां , तुम जबसे गायब हो तब से सर भी नहीं आए।"

"अच्छा।"

कुछ सोचते हुए मैंने मिताली से फिर पूछा,

"सर क्यों नहीं अा रहे?"

"पता चला है वो घर में सीढ़ियों पर से गिर गए तो कंधे पर चोट अाई है।"

इस बीच मेरा सर से बहुत लगाव हो गया था, मै उनके घर पहुंच गया वहां पता चला वो अभी भी अस्पताल में भर्ती है,

मैं अस्पताल पहुंचा मिलने के लिए,

वहां सभी को एक साथ मिलने जाने की इजाज़त नहीं थी तो मै बाहर बैठा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था,

पास में एक अधेड़ उम्र का जोड़ा बैठा आपस में बात कर रहा था,

पत्नी " ये लड़की भी, अच्छे भले लड़के को बेवजह फंसा गई।"

पति " अरे ,आज कल की युवा पीढ़ी जान देने को भी नहीं डरती, हम तो किसी के लिए चवन्नी तक देने में डरते थे।"

पत्नी "अब देखो लड़की बच गई तो ठीक है वरना लड़का तो गया।"

ये बात सुनकर मुझे अपना डर सताने लगा कि सोनल स्कूल नहीं अाई थी, कहीं मेरे चक्कर में वो भी कोई ऐसा वैसा कदम ना उठा ले,

मेरा नम्बर अा गया, मै सर से मिलने गया सर ने स्वस्थ वाले हाथ से मेरे सिर पर हाथ फेरा, पता नहीं क्या अजीब रिश्ता था सर से दिन पे दिन और अपने होते चले जा रहे थे, उनके मेरे प्रति प्यार और सम्मान ने एक बार मुझे सोचने को मजबुर कर दिया कि मेरी पढ़ाई का उद्देश्य सही तो है ना?

मेरे घरवाले , रिश्तेदार , टीचर्स , यहां तक की दोस्त यार भी मुझे एक अच्छा इंसान मानने लगे थे जो आगे चलकर समाज के लिए कुछ अच्छे काम करेगा, जबकि मेरे मूल विचार इसके विपरित थे, समाज को जो मेरा चेहरा दिख रहा था वो मेरा असली चेहरा था नहीं ,मेरे अच्छे पढ़ाई लिखाई के पीछे का कारण एक लड़की का प्यार पाना मात्र था, एक पल ये भी लगा कि अपनी इज्ज़त बन गई है लड़की वड़की का रास्ता छोड़कर दुनिया में कुछ अच्छा कर दिखाने का रास्ता अपनाते है, पर नहीं जी नहीं , भारत में अच्छी पढ़ाई अच्छी नौकरी के लिए होती है अच्छी नौकरी अच्छी छोकरी के लिए होती है , तो मै क्यूं गलत कर रहा हूं, दूसरों में और मुझमें फर्क बस इतना सा तो है , वो जॉब लग जाने के बाद वधु ढूंढ़ते है मैने पहले से ही ढूंढ़ ली है, इसमें बुरा क्या है ।

मेरे लिए विज्ञान एक सब्जेक्ट भर था जिसमें अच्छे स्कोर मिताली तक पहुंचा सकते थे, कभी इस दृष्टिकोण से तो सब्जेक्ट्स को , लिया ही नहीं की विज्ञान पर अच्छी पकड़ हो सकता है देश का अगला महान वैज्ञानिक बना सकती है, जो देश को पूरे विश्व में अलग पहचान दिला सकती है आय हाय इतनी बड़ी बड़ी बातें मेरे छोटे मुंह से बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती ,

खैर अभी तो मेरी पढ़ाई अब्दुल कलाम से प्रेरित ना होकर सलमान खान से प्रेरित ज्यादा लग रही थी,

मैं हॉस्पिटल से लौट रहा था तो आज मेरे मन में सिर्फ मिताली का नहीं उसकी सौतन सोनल का भी विचार था, जैसे मैने ना चाहते हुए भी उसके साथ सात फेरे ले लिए हों,

मैं हैरान था कि वो स्कूल नहीं अाई , मेरे दिमाग में नकारात्मक विचारों का सैलाब शुरू हुआ,

अगले दिन मुझसे रहा नहीं गया मैंने मिताली से पूछ ही लिया,

"मिताली , सोनल स्कूल क्यों नहीं अा रही?"

"हां काफी समय हो गया ना?"

उसने कहा,

"हां , इसीलिए पूछा।"

मिताली ने गणित लगाया

"हम्म3 Full stop तुम नहीं आए थे उस दिन से नहीं अा रही है।"

उसका ऐसा कहना मतलब चोर की दाढ़ी में तिनका दिखाने जैसा लगा,

ये भी कोई दिन गिनने का तरीका है, मुझे तो डरा ही दिया था उसने,

वो बोली,

" आज पूरे आठ दिन हो गए उसे नहीं आए।"

मैंने झट से कहा"हां वरना वो तो रोज आती है।"

मिताली ने मेरी चुटकी लेते हुए कहा,

"तुम बड़ा ध्यान रखते हो उसके आने नहीं आने का, हां?"

मैंने भी शक ना हो और बात यहीं खत्म हो जाए इसलिए हंस के बात टाल दी।

"मै आज शाम को उसके घर जाकर पता करती हूं ।"

मैंने थम्स अप करते हुए ओके का इशारा किया।

, रात को अपने कमरे में मैं बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था, की क्या करूं सोनल के साथ फिलहाल मजे मार लिए जाए , या रियल में उसका प्रपोज स्वीकार कर लिया जाए, क्या दोनों को साथ में घुमा सकते है ? , या मिताली और मेरे बीच कोई तीसरा नहीं अा सकता, काफी रात हो गई थी , उधर से मां की आवाज़ अाई "बेटा क्यों ये लाइट बंद चालू कर रहा है सो जा या पढ़ ले।"

मैंने तुरंत लाइट बंद कर दी ,फाइनली बंद ;पर मेरी आंखे अभी खिड़की के बाहर आसमान के तारों को गिन रही थी,

अब तक एक विकल्प तो बाहर हो चुका था जिसमें सोनल का फायदा उठाने वाला खयाल आया था, क्यूंकि मैंने सही रास्ते पर चलने का फैसला लिया था,

सुबह के चार बज चुके थे , मैंने आखिरकार सारे विकल्पों पर सोचने के बाद फैसला लिया कि मिताली ही मेरा प्यार है और हर कीमत पर उसे पा कर ही रहूंगा, सोनल मुझे भले प्यार करती हो पर उससे कई ज्यादा प्यार मै मिताली से करता हूं, वो बेकाबू शाम एक बीती रात है उसे मुझे भूल जाना चाहिए,

सोने के पहले , रोज की तरह

" आई लव यू मिताली " बोल कर सो गया।

अगले दिन से मैंने उस शाम के बाद ढली रात के बाद आज नई सुबह देखी जिसमें मुझे वापस डेडीकेटेड राहुल दिखा जो मिताली को पाने की दिशा में हर रोज सफ़र करता था ।

स्कूल जाते ही सबसे पहले सोनल दिख गई आज वो स्कूल अाई थी , मन में सोचा चलो कुछ ऐसा वैसा तो नहीं हुआ जिसका डर सता रहा था, उसने उस दिन के बाद कभी आगे होकर मुझसे बात नहीं की नहीं मैंने उससे की,

इससे एक बात तो समझ में अाई थी, की क्लास रूम भी तो दुनिया ही है जहां बहुत सारे परिवेश इक्कठा होते हैं और आपस में मिल कर एक छोटा समाज बना लेते है,

इस लिहाज से देखा जाए तो क्लास में टॉपर्स के कमाए गए परसेंटेज , समाज में धनी लोगों द्वारा कमाए गए पैसों के समान , होते है, और समानता तो यह है कि दोनों ही जगह हाई क्लास में लोगों को दिखने वाला चेहरा असली चेहरे से अलग होता है, कोई सोच नहीं सकता था कि मै और क्लास की टॉपर सोनल का ये भी एक चेहरा हो सकता था, आज यदि पुराना राहुल होता तो बिना कुछ करे भी बदनाम होता क्यूंकि क्लास वाली समाज का एक गरीब छात्र जो होता,

इसलिए कहा जाता है कि क्लास में पढ़ाकू और समाज में कमाऊ पुतों कि सारी गलतियां माफ होती है।,

13. बस इससे आगे नहीं..

अगले हफ्ते से दसवीं बोर्ड की परीक्षा शुरू हो रही है,

प्रिपरेशन लीव लग चुकी है, इस साल क्लास में परफॉर्मेंस अच्छा रहा पर टॉप पर सोनल ही रही मुझे दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था,

शर्मा सर की क्लास का ही कमाल था जो इतना भी मै कर पाया था, सोनल ने भी उस दिन के बाद से एक्स्ट्रा क्लास आना बंद कर दिया था, मैं अकेला ही पढ़ता रहा और सर उसी जोश और जज्बे के साथ मुझे अकेले ही पढ़ाते रहे,

अब से मुझे उन्होंने बैग लेकर घर बुला लिया, और रात दिन पढ़ाई करवाई , खाने पीने सोने सबका इंतजाम उन्होंने मेरा कर दिया था,

एग्जाम शुरू हुई इस बार सोनल को मेरी नकल पर्चियां सरकाकर हेल्प करने की जरूरत नहीं थी, मै सक्षम था,

अंदर से इतना आत्मविश्वास पहली बार महसूस हो रहा था ,

आज मेरी आंखो में वो दिन अगाए जब राहुल एग्जाम हाल में लेट ,पर्चियां समेटते हुए घुसता था , मन में डर लिए की पास भी हो पाऊंगा या नहीं, आज राहुल बदल चुका था इतने में मिताली रूम में एंटर हुई, उसे देख कर मानो जोश दुगुना हो चुका था लक्ष्य सामने था,

पता नहीं क्यों डिस्कवरी चैनल पर आज तक ये नहीं बताया गया कि एक नर कि नज़र जैसे ही मादा पर पड़ती है तो नर कि कार्य करने की क्षमता अचानक से दुगुनी हो जाती है,

पेन के रूप में अस्त्र और ज्ञान के रूप में शस्त्र दोनों साथ थे,

आज का एग्जाम बहुत अच्छा गया।

इसी तरह सारे एग्जाम अच्छे गए।

आखरी परीक्षा वाले दिन मिताली को स्कूल के सुनसान कोने में लेकर गया ,हम बातें करने लगे,

" मैंने पूछा आगे कौन सा सब्जेक्ट लोगी?"

उसने कहा"मैथ्स तो मेरा अच्छा है नहीं तो बायो;और तुम?"

मैंने उसकी आंखो में देखा और कहा

"जो तुम बोलो।"

उसने भोहें उचका कर कहा,

"हैं.. मै कैसे बताऊंगी की तुम्हे आगे क्या पढ़ना चाहिए?"

"तो ये तो बता सकती हो ना कि मुझे आगे क्या बनना चाहिए?"

उसने थोड़ा सोचा और कहा ,

"बहुत सारे ऑप्शन्स है डॉक्टर, इंजिनियर , सी ए.. बहुत सारे है , और बाकी मुझसे ज्यादा नॉलैजियस तो तुम हो ।"

वो शायद मेरे प्यार से बेखबर थी, भोलेपन से सब कहे जा रही थी, मैंने उससे पूछ लिया,

" तुम्हारा ड्रीम बॉय कौन हो सकता है?"

"मेरा..??"

इतने में वो पलकें झुका कर इधर उधर देखने लगी, शायद मामला अब उसके दिमाग में स्पष्ट होते जा रहा था,

मैंने कहा,"बोलो भी"

वो जैसे कहीं खो सी गई थी एकदम जागी,

"हां.. हां.. वैसे तुम ये सब मुझसे क्यूं पूछ रहे हो?"

" क्योंकि मै3 Full stopक्योंकि मैं.." मेरे शब्द लड़खड़ाने लगे आगे बोलते नहीं बन रहा था, वो मेरी आंखो में घूरने लगी थी, उसकी काजल भरी सुंदर आंखे मेरी बैचेनी बढ़ा रही थी, तभी वो सुर्ख लाल होंठों को मेरे कान तक लाई,

और धीरे से कहा,

, "अाईअाईटियन"

वाह ! जो मेरी इच्छा और काबिलियत है वही लक्ष्य दे दिया गया।

वो पलटकर जाने लगी,

मैंने उसका हाथ पकड़ा, वो पलटी नहीं बल्कि दूसरी तरफ मुंह करके ही बोल पड़ी,

" राहुल मेरी छुट्टियां काटना और मुश्किल होजाएगा प्लीज हाथ छोड़ दो।"

"क्यों मुश्किल हो जाएगा।"

"तुम सब जान कर भी अनजान क्यों बनते हो?"

"इंतजार में मजा है।"

" इंतजार मत करो , इंतजाम करो।"

"कैसा इंतजाम।"

"राहुल मै लड़की हूं,हर बात तो खुल कर बता नहीं सकती ना ।"

आज ऐसा लग रहा था जैसे मै अपनी पत्नी मिताली से बात कर रहा था,

उसकी सांसे तेज़ हो चुकी थी , मैंने उसका हाथ थामे रखा था,

"मैं भी राहुल हूं , राहुल जो सोच लेता है वही करता है।"

मैंने फिल्मी स्टाइल में हाथ घमाया और उसे बाहों में भर लिया, आज मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं हो पा रहा था कि मैंने उस मिताली को जिसने मुझसे बहुत नफ़रत की थी मेरी बाहों में ले आया था, इंसान चाह ले तो कुछ भी कर सकता है,

उसने मेरे सीने पर अपना सर इस तरह रखा की वो दुनिया की सबसे महफूज़ जगह पर हो,

और हो भी क्यों ना उसका राहुल उसके लिए कुछ भी कर सकता था।

इतने में उसने कहा,

"राहुल चलें घर , इतना काफी है ना।"

"काफी तो नहीं अभी बहुत कुछ बाकी है।"

"बाकी बचा बाद में ।"

"बाद में कब?"

, "पगलू बिना प्रपोज के किसी लड़की को इतनी देर अपनी बाहों में भर लिया , ऐसा होता है क्या?"

"ओह! तो कैसा होता है?"

"पहले लड़की को प्रपोज करते है वो हां या नहीं जवाब देती है , जब वो हां कह दे तो फिर आगे की परमिशन होती है।"

"और अगर ना कह दे तो?"

उसने घबराकर कहा,

"वो तुम्हे ना क्यों कहेगी?"

फिर ठिठक कर , नकली खांसी करते हुए बोली,

"नहीं तो नहीं।"

"ओह! थैंक्यू ये सब बताने के लिए।"

"यू आर वेल कम" और मिताली ने व्यांगात्मक हंसी हसी,

"लेकिन मिताली ये तो बताओ बाद में कब?"

"तुम सच्ची बहुत पागल हो राहुल , मै जब बोलूंगी तब करेंगे आगे, बस ओके बाय ।"

मैं मन ही मन हंस रहा था, अनजान बनने का मजा ही कुछ और है,

प्रपोज करूंगा मिताली सही समय आने दो जब तुम मुझे मना ही नहीं कर पाओगी और ऐसा गिफ्ट दूंगा कि तुम उस दिन बहुत खुश हो जाओगी मैंने मन ही मन सोचा।

मैं घर पहुंचा और जब संडे पापा घर आए,

एक दम कॉन्फिडेंट हो कर कहा पापा मुझे आई आई टी में जाना है, तो आईआईटी जे ई ई की प्रेप करनी है,

पापा ने ठहाका लगा कर कहा "बेटा आई आई टी कोई खेल है क्या?

एन आई टी तक तो सोच सकता हूं , बट अाई आई टी बहुत अलग चीज़ है वो टॉपर्स की लड़ाई है, तुम तो अभी अपनी क्लास में भी बड़ी मुश्किल से टॉप कर पाते हो,"

"पापा मै कर लूंगा।"

"ठीक है ग्यारहवीं से ही कोटा चले जाओ अच्छी तैयारी हो जाएगी।"

, मै भला मिताली को छोड़ कर, कैसे जा सकता था?

" पापा मै ना ,बारहवीं के बाद जाऊंगा।"

पापा ने ऐसे जवाब दिया जैसे कि अब तो उन्हें पक्का पता हो कि उनका बेटा तो स्टेट के या रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग करले वो ही बहुत है।

"ओके इट्स योर्स लाइफ।"

मुझे ये सब कुछ मिताली के लिए करना था, कोशिश थी कि जितना ज्यादा मिताली के साथ वक़्त बीता सकूं बीता लूं फिर, आईआईटी की तैयारी में लगा की फिर एकदम फोकस्ड हो कर पढ़ने लगूंगा, और लक्ष्य हासिल करके ही दम लूंगा।,
 
14. मिलन अभी आधा अधूरा है

गर्मी की छुट्टियों में हम कभी चाट के ठेले पर तो कभी रेसटोरेंट्स में मिलते रहे एक बार फेस कवर करके सिनेमा हॉल भी गए।

मुलाकातों में ये समझ आया कि मिताली एक फन लविंग टाइप की लड़की है, उसे घूमने फिरने का शौक है, वो विदेश जाना चाहती है, और खूब मस्ती करना चाहती है लाइफ में, कूप मंडुक नहीं बनना चाहती, उसके ख़्वाब बहुत बड़े थे , जो शायद मुझे ही पूरे करने थे।

एक बार हमारे छोटे से शहर में खुले नए रेस्टोरेंट में हमारे जैसे चोरी छुपे मिलने वाले प्रेमी युगलों के लिए प्राइवेसी की खास प्रयोजन किया गया, वहां शहर की कई प्रेम कहानियां जन्म लेती थी और मर जाया करती थी,

मिताली और मैं भी पहली बार इतनी प्राइवेसी वाली जगह पर डेट करने आए थे,

आज मिताली का जो रूप टपक रहा था, ऐसा लग रहा था कि आज ही मेरा प्रण तोड़ दूं और प्रपोज करके आगे की चीज़ें भी हासिल कर लूं ,

पर सेक्सी मिताली एक तरफ राहुल का प्रण एक तरफ़ मैंने अपने आप को संभाला,

मिताली स्किन फिट जीन्स पर , हल्के गुलाबी रंग का टॉप पहनी थी हर बार की तरह मेहरुनी स्ट्रिप वाला क्रॉस पर्स लटका हुआ , और मलाई जैसी चिकनी और गोरी कलाई पर ब्लैक पट्टे की रिस्ट वॉच पहनी थी,

कोल्ड काफी के सिप के साथ उसने कहा,

"राहुल ऐसा नहीं लगता कि हम दोस्ती से आगे निकल चुके हैं।"

मैंने उसकी तरफ देख कर कहा

" नहीं तो , तुम्हें लगता है ऐसा?"

"नहीं मैं तो बस ऐसे ही तुम्हें चेक कर रही थी,तुम कहीं मेरे लिए सीरियसली तो नहीं हो रहे हो ।"

और मेरी तरफ देख कर वो मुस्कुरा दी।

मैंने कहा ;

"वैसे तुम्हे किस तरह के लड़के पसंद है?"

ये पहली बार था जब मैने उससे सीधे ऐसा सवाल किया था , वरना अब तक तो बस कक्षा आठ की उस घटना के आधार पर ही मिताली की पसंद का अंदाज़ा लगाया था,

" मुझे स्मार्ट टाइप के लड़के पसंद है जो सिर्फ दिखने में ही स्मार्ट ना हो बल्कि दिमाग से भी स्मार्ट हो, मौज मस्ती वाले , बट सोशियल रिस्पेक्ट भी अच्छी होना चाहिए, मेरी तरह घूमने फिरने का शौक होना चाहिए, मेरी तरह एडवेंचर पसंद हो , यार ना वो मेरे साथ चले ना तो आस पास के लोग देखें , वैसे तुम ये सब क्यूं जानना चाहते हो?"

लो इतनी लंबी प्रसेंटेशन के बाद ये पूछना और बाकी रह गया था कि, तुम ये सब क्यूं पूछ रहे हो?

"क्यूं मैं अपनी सबसे अच्छी दोस्त की पसंद नहीं जान सकता?"

मिताली ने कनखियों से देखा और कहा

"क्यों ,दोस्त की पसंद क्यों नहीं बन सकते ?"

और नज़रें झुका कर अपनी कॉफी का आखरी सीप लिया,

, अब मेरी बोलती बंद थी, इतना रोमांटिक समा अपनी तुच्छ सी कमिटमेंट की वजह से एन्जॉय नहीं कर पा रहा था, मुझे शायद भगवान ने ही ज़िद्दी बनाकर भेजा है।

मैं कहीं खो सा गया था तभी उसने मेरी आंखो के सामने चुटकी बजाकर कहा,

"मिस्टर साढ़े सात बज गए है चलना नहीं है क्या?"

मै एकदम से जागा हाय कहां खो गया था,

"हां चल।"

मैंने बिल उठाया और काउंटर की तरफ चल दिए,

"अब कब मिलेंगे मिताली?" मैंने पूछा,

"अब रिजल्ट के बाद ।"

" ओह ! हां नेक्स्ट वीक रिजल्ट आने वाला है ।"

"सो उसके बाद मिलते है?"

मैं मन ही मन सोच रहा था कि क्या पता तुमसे मिल भी पाऊंगा या नहीं क्यूंकि रिजल्ट में यदि फर्स्ट नहीं आया तो मेरे ख़ुद से वादे के अनुसार मुझे ये दुनियां छोड़नी थी।

"ओके, मिताली।" मैंने उसे इस कदर जी भर कर देखा कि वो खुद ही बोल पढ़ी,

"अब बस भी करो राहुल ।"

,

मिलते है रिजल्ट वाले दिन । बाय।,

, Edit, boxसे कटे वे दिन
 
15 . बेवकूफ ज़िद

ज़िद करो दुनियां बदलो तो बहुत सुना था, पर नादान ज़िद नादान उम्र में कब गंभीर ज़ख्म दे जाए कहा नहीं जा सकता था, ज़िद भी समझदारी वाली अच्छी लगती है।

कल रिजल्ट का दिन है, आज मां से थोड़ी ज्यादा बातें करनी है पता नहीं कल हो ना हो,

आज मैंने मां के साथ बैठकर खाना खाया ,वो भी बहुत उनसे ज़िद के बाद, वरना बेचारी तवे से उतरी रोटियां खिलाते हुए रह जाया करती है,

खाना खाते हुए मां ने बताया,

"बेटा तू बहुत मिन्नतों से हुआ था ,तेरे पापा ने सत्रह पीपे घी से भोलेनाथ का अभिषेक किया था।"

मैं सोच में पड़ गया कि मेरे मां बाप ने मेरे लिए कितना कुछ किया और मै उनके लिए क्या कर रहा हूं।

मां ने कहा,

"रात रात भर रोता था ,पापा तुझे गोद में लेकर बाहर चुप कराते हुए घूमते थे।"

"क्या सच मुच मां?"

"हां।"

"और इतना ज़िद्दी था कि जो चीज़ लेने की ज़िद पकड़ ले तो लेकर ही मानता था, मैं हसकर तेरे पापा से कहती थी कि बिल्कुल आप पर गया है।"

मुझे बड़ा गर्व हुआ की मै पापा पर गया हूं, वो भी तो जो सोच लेते हैं वही करते हैं , मैं कौन सा गलत कर रहा हूं?

मैं बस शीशे के सामने अपनी काया को आखिरी बार ठीक से देखने को हुआ ही था कि अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई , मां ने दरवाज़ा खोला तो एक बुज़ुर्ग आदमी चेहरे पर मुस्कान और माथे पर पसीना लिए खड़ा था,

मां ने पूछा "कहिए क्या काम है?"

बुज़ुर्ग आदमी ने लिफाफा थमाते हुए कहा" मैडम जी हम राहुल बाबा की स्कूल के चपरासी है, प्रिंसीपल साहब ने ये देने भेजा है।"

मां ने वो लिफाफा लिया और उसे खोला तो उसमे लिखा था, " बड़े ही हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि राहुल पांडेय ने कक्षा दसवीं राज्य की बोर्ड परीक्षा में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, इस उपलक्ष्य पर स्कूल प्रशासन उन्हें सम्मानित करने एवं प्रेस नोट के लिए आज शाम चार बजे उन्हें अपने माता पिता के साथ आमंत्रित करता है।"

मां ने ऊंची आवाज़ में यह पत्र जैसे ही पड़ा कि मै भावुक हो कर रो पड़ा , जब हम किसी लक्ष्य का पीछा करने में जी जान लगा दे और वो मिल जाए तो अक्सर भावनाएं बांध तोड़ कर बहने लग जाती है। मां की आंखों में भी ख़ुशी के आंसू थे, उन्होंने पापा के ऑफिस खबर भिजवाई पापा को यकीन ना हुआ उनके लिए ये कोई चमत्कार से कम नहीं था, वो अपने बेटे को एक साधारण विद्यार्थी की तरह देखते रहे थे उन्हें ऐसे असाधारण परिणाम की उम्मीद कम थी ,उन्होंने पूरे स्टाफ में मिठाई बांटी , पापा तो नहीं अा पाए पर मैं और मां बड़े ही फक्र के साथ स्कूल पहुंचे, मेरी आंखो में यादों का वो हिस्सा घूम गया , जब मां और मैं आखिरी बार सोच रहे थे कि , रिजल्ट उन्हे बाहर बोर्ड पर दिख जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं था, ये मेरी और शर्मा सर का संयुक्त परिश्रम का फल था जो मेरा रिजल्ट बाहर बोर्ड पर नहीं अख़बार के मुख्य पृष्ठ पर छपने को था,

जब स्कूल गया तो वहां पता चला आज मै किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं था, मेरे इंटरव्यू को कवर करने अलग अलग अखबार और रेडियो के पत्रकार उपस्थित थे,

अगले दिन जब खबर छपी तो रिश्तेदारों और नजदीकियों के फोन , पत्र और मिलने आने वालों का तांता लग गया,

मिताली का सर गर्व से ऊंचा था , उसने घर में सभी को बताया "ये तो मेरा सबसे खास दोस्त है", बस शायद बेचारी यही नहीं बोल पा रही होगी की ये मेरा दोस्त से भी ज्यादा कुछ है,

इधर एक ऐसे व्यक्ति का फोन आया जिसका सोच भी नहीं सकते थे, वो था मयंक का फोन, उसने कहा,

" राहुल मैं सोच भी नहीं पा रहा ,ये सब कैसे किया तुमने? मै स्कूल में था तब तक तो तुम पढ़ने लिखने वाले नहीं थे?"

मैने कहा " बस तुम्हीं मेरी प्रेरणा हो।"

वो हंसा और उसने ऐसी बात कह दी कि , शायद दुनियां में वो अकेला इंसान था जिसने मेरे इस कार्य के पीछे छुपे फल का सही अंदाज़ा लगाया था, उसने कहा

"मैं या मिताली का मुझसे बात करना?"

मैं हड़बड़ा गया " नहीं यार ऐसा नहीं है सोचा अब कैरियर के लिए थोड़ा सिंसियर हो जाऊं।"

"खैर ! बहुत बहुत बधाई दोस्त।"

"थैंक्यू भाई।"

मैं उससे पूछता कि वो कहां है और आगे क्या करने वाला है उसने फोन कट कर दिया,

मुझे ऐसा लग रहा था मानो मै मौत के मुंह से निकल कर आया हूं , शहर, दुनिया , रिश्ते सब कुछ नए लग रहे थे, शर्मा सर के यहां जाकर उनके पैर छुए वही एक शक्स थे जिन्होंने मेरी सारी कमजोरियां दुर की और जो बच गई उसे मजबूती में कैसे बदला , जाए उसके भी गुर दिए, वो मेरे सिर्फ शिक्षक ही नहीं मेरे अब से गुरु बन गए थे,

अब बारी थी उससे मुलाकात की जिसके लिए ये सब किया था, वैसे भी रिजल्ट के बाद मिलने की डेट फिक्स्ड थी।,
 
16. प्रपोज़ डे

हम अक्सर स्कूल के पीछे मिलते थे जहां चहल पहल कम रहा करती थी,

आज मुझे उसका इंतजार करते हुए काफी समय होगया था , मेरी आंखे उसके दीदार को बेताब थी, मैंने टाइम पास करने के लिए वही काम किया जो भारतीय गलियों के रोमियो अक्सर किया करते हैं , दीवार पर ईंट के टुकड़े से उसके और मेरे नाम का फर्स्ट लेटर लिख कर दिल बना कर उसमे तीर लगाया,

वो अा चुकी थी मैंने दीवार पर बने चित्र को ढंक लिया ,और मिताली के सामने खड़े हो गया,

" हाय.."

उसका वही पुराने अंदाज़ में ओ हाई कह कर अपनी जुल्फों को उंगलियों से पीछे करना ऐसा लग रहा था मानो मै इसी पल को जीने के लिए धरती पर जन्मा हूं।

आज पीले रंग के स्लीव लेस कुर्ते पर लाल रंग की नेट की चुन्नी और लाल रंग की लेगिन के नीचे, व्हाइट कलर की सैंडल्स क्या ग़ज़ब ढा रही थी , उसने हाथ में चेरी कलर की रीस्ट वॉच पहनी थी और उसी कलर का क्रॉस बेल्ट पर्स भी टांगा हुआ था,

उसे देख कर बस ऐसा लगा कि कोई परी सामने खड़ी हो , इस चांद सी महबूबा को देखते देखते,

किसी ने कहा " मुंह तो बंद करो अंकल "

मैंने इधर उधर देखा ना, मैं हूं ना मूवी चल रही थी ना कोई शाहरुख खान आस पास दिखाई दिया, वो शायद मेरे मन की आवाज़ थी,

"ऐ .... हैलो...।"

मेरी तंद्रा भंग हुई वो मेरी आंखो के सामने चुटकी बजा रही थी,

" हें... हें.."

मैंने होश संभाला ,

"मिस्टर कहां खो गए?"

" नहीं कुछ नहीं बस यूंही।"

" कांग्रेट्स मिस्टर टॉपर।"

"ओह थैंक्यू .."

उसने कहा "चले कहीं?"

मैंने कहा

"एक मिनिट "

मै अपने बनाए हुए चित्र के सामने से हटा और मिताली के पीछे जाकर खड़ा हो गया,

वो उस चित्र को देख कर स्तब्ध रह गई,

मैंने धीरे से उसके कान में कहा ,

" आई लव यू मिताली..."

ये शब्द वही शब्द थे जिनके लिए मैंने अपने आप को इतना बदला , इतनी मेहनत की,

आज उसके कानों पर जैसे ये शब्द पड़े उसने पलटकर

मुझे अपनी बाहों में भर लिया,

और मेरे कान के पास अा कर सर्गोशी करते हुए कहा

"आई लव यू टू" और मेरे गाल पर किस किया,

हम आज से दोस्ती से ऊपर उठ कर प्रेमी जोड़ों में शुमार हो गए थे, मै और वो रेस्टोरेंट में चल दिए,

आज वाकई प्राइवेसी की बहुत ज्यादा जरूरत महसूस हो रही थी,

हम कोने कि टेबल पर दुनिया से छुप कर बैठ गए,

, उसने कहा,

"आई कांट बिलीव की तुम वही राहुल हो जो एट्थ में हुआ करते थे , कितने बदल गए हो ना तुम।"

मेरा मन खिल खिला उठा , यही तो सुनना चाहता था वो भी मिताली के मुंह से, और आगे तो उसने ऐसी बात कह डाली कि मेरी सारी मेहनत जैसे एक पल में अपना सारा इनाम पा गई हो ,

" मिस्टर टॉपर तुमने पूछा था ना मुझे कैसा लड़का चाहिए, एक्जेक्ट तुम्हारे जैसा।"

उसकी शर्मीली नजरें शायद मुझे हसबैंड की तरह ट्रीट करने लगी थी,

मैं तो बस इन लम्हों को ज्यादा से ज्यादा अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहता था,

" पर राहुल एक बात बताओ , तुमने प्रपोज करने में इतना वक़्त क्यों लगाया?"

मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा,

" क्यूंकि तुम्हे पढ़ने लिखने वाले लोग पसंद थे ना तो मैंने खुद से वादा कर लिया था कि जब तक मै प्रपोज नहीं करूंगा जब तक मै टॉप नहीं कर लेता, और फिर राहुल जो ठान ले वो तो करके है रहता है।"

"ओह ! तो तुमने मुझे पाने के लिए ये सब किया, लड़ाकू से पढ़ाकू बन गए ?"

" ऑब्वियसली.."

" सच में तुम बहुत पागल हो राहुल ।"

कोल्ड कॉफी की स्ट्रा को अपने होंठो से दूर कर उसने कहा,

" राहुल सच में यार तुम मेरे लिए कितने डेडीकेटेड हो, रियली आई , लव यू यार।"

मैंने भी एक सवाल बदले में पूछ लिया ,

" और तुम?"

" ये भी कोई पूछने की बात है...एक लड़की जब ही हां करती है जब वो लड़के के प्रति पूरी तरह समर्पित होती है , लड़कों की तरह टाइम पास नहीं करती।"

मैंने हौले से उसका हाथ अपने हाथों में लिया , और अपने होंठो को उसके कोमल हाथ पर धर चूमा,

उसने मेरी आंखों में झांक कर एक सवाल किया,

" तुम हमेशा मुझे ऐसे ही चाहोगे ना ?"

मैंने उसके हाथ को अपने हाथों के बीच रख कर कहा,

"इससे भी ज्यादा, उम्र के साथ मेरा प्यार भी बढ़ता ही जाएगा मिताली , ये ज़िन्दगी तो बस तुम्हारे नाम कर दी है मैंने।"

" तुम कभी दुर मत जाना राहुल मुझसे वरना अब मै जी नहीं पाऊंगी।"

" नहीं जान कभी नहीं होगा ऐसा।"

एक दम सीरियस हो चुके मूड को भंग करते हुए उसने पूछा,

" अच्छा हम शादी के बाद कहां चलेंगे?"

"मैंने कहां जहां तुम कहो?"

" हम्म..वैसे स्विट्जरलैंड कैसा रहेगा?" उसने पूछा।

" वो तो बहुत ही बढ़िया रहेगा , चारों तरफ बर्फ, फिल्मों जैसा नज़ारा, हीरोइन जैसी बीवी, हीरो जैसा पति, और फिल्मों जैसी किस..और फिर..।"

" बस , बस बस... अभी शादी नहीं हुई है।"

" अरे तो सोचने भी नहीं दोगी क्या?"

"नहीं शादी के पहले तो सोचना भी मत, वो सब का।"

" वाह! ठीक है।"

मैंने गर्दन नीचे करके कुछ सोचा, और कहा,

" परीक्षा के आखिरी दिन वाली मुलाकात में तुमने कहा था कि , आगे का बाद में जब मै कहूंगी, तो वैसे आप कब करेंगी आगे का?"

"धत्त , तुम लड़कों को ना एक ही बात सुझती है..."

मैंने आंख मारते हुए कहा,

"उसके सिवा रखा ही क्या है दुनिया में...तुम और मै भी इसी की देन है।"

"स्टॉप थिस राहुल , चेंज दि टॉपिक।"

" ओके!"

"वैसे शादी के बाद हमारी ज़िंदगी कितनी अच्छी होगी ना, बड़े शहर में रहेंगे, तुम इंजिनियर मै डॉक्टर रोज शॉपिंग करने जायेंगे, बढ़िया हॉटेल्स में खाना खायेंगे, अपने पास मंहगी वाली लगजरी कार होगी , हम ना हर साल अब्रॉड ट्रीप पर जाया करेंगे...."

"तुम्हे नहीं लगता अपने सपने पूरे करने के लिए हमें बहुत मेहनत भी करनी पड़ेगी?"

" करेंगें ना जानू , हम मिलकर करेंगें अपने सारे सपने साकार करेंगें।"

आज रात भर मिताली की बातें मेरे कानों में विंड चाइम की सुरीली घंटियों की तरह गूंजती रही , नींद की तो जैसे दीवाली की छुट्टियां लग गई हो, चली गई थी आंखो से, सिर्फ मिताली का खयाल होता था ,

गाने और भी सुरीले होते चले गए ।,

17. शादी से पहले गृहप्रवेश

कब देखते देखते बारहवीं कक्षा अा गई पता ही ना चला, स्कूल लाइफ ख़त्म होने को थी, अब ना वो दोस्त रहेंगे जो आसानी से रोज मिल जाया करते थे, ना वो मिताली साथ जो सुबह के सात बजे से दोपहर के ढाई बजे तक होता था,

बारहवी भी बोर्ड एग्जाम थी उसमें मैंने टॉप तो ना कर सका लेकिन स्टेट की मेरिट लिस्ट में मै टॉप टेन में बरकरार रहा,

इन दो सालों की रिलेशनशिप में मिताली और मै दो जिस्म और एक जान कि तरह हो गए थे, समय के साथ उसका यौवन समुद्र की बड़ी लहरों के समान होता जा रहा था , हमारे छोटे शहर का कोई एक लड़का नहीं था जिसकी जुबां पर मिताली के ख़ूबसूरती के चर्चे नहीं थे,

जहां से मिताली निकल जाए और कोई लड़का मूड कर उसे ना देखे ऐसा भला कैसे हो सकता था,

इस बीच बहुत से लड़कों ने मिताली को अप्रोच किया था,

पर नाकामयाबी ही हाथ लगी, रही बात रास्ता रोकने की , तो मिताली के बड़े भैया से सभी को बहुत डर लगता था,

कई जानकर लड़कों को तो पहले ही पता था, कि उसपे डोरे डालना वक़्त बर्बाद करने से ज्यादा कुछ नहीं है, क्यूंकि उसका पहले से ही बॉय फ्रैंड है,

कल का दिन हमारी ज़िन्दगी का बहुत खास दिन होगा क्योंकि परसो से हम इंदौर जा रहे हैं एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए, वो मेडिकल एंड मै आई आई टी के लिए,

तो एक छोटा सा प्रोग्राम रखा है, मां से कहकर इडली सांभर बनवाया है जो हम दोनों की ही फेवरेट डिश है,

इसी बहाने मिताली को घर बुलवाया है , मां को बड़ी ही चतुराई से कन्विंस किया है कि वो मेरी सिर्फ अच्छी दोस्त है कहकर ......

मिताली अगले दिन घर अाई, उसने मां को नमस्ते किया,

मां ने उसको अंदर आने का कहा,

मिताली बहुत ही डरी हुई थी , उसे अन्दर से ये को लग रहा था कि होने वाली सास के सामने खड़ी हूं,

मेरी मां ने उसका ऐसा इंटरव्यू ले डाला कि शायद ही कोई तथ्य शेष रह गया होगा पूछने के लिए,

आई ए एस एग्जाम की तरह चले बीस मिनिट के लगातार इंटरव्यू के बाद बात खाना खाने की अाई,

मां खाना लगाती तब तक तो वो खुद ही पीछे पीछे किचन में पहुंच गई,

"लाइए ना अंटी मै आपकी हेल्प करती हूं..."

"अरे, रहने दे बेटा तुझे तो उम्र भर करना ही है, अभी तो तेरे बैठे बैठे खाने के दिन चल रहे हैं।"

"हां अंटी पर घर पर भी मैं ही करती हूं ।"

"अच्छा चल ठीक है एक काम कर ये जग उठा कर पानी भर ले और गिलास ले जा।"

मिताली जग लेकर अाई मैंने उसको देख कर व्यंगतमक मुस्कान दी,

उसने भी मुझे जीभ चिढ़ाती हुई गई और ग्लास ले कर अाई,

दो पल मेरे मन को ऐसा लगा जैसे हमारी शादी हो गई हो और हम साथ रह रहे हों,

, "वाऊ अंटी! आपने तो बहुत ही टेस्टी खाना बनाया है।"

मैंने कहा,

"मां अमेजिंग है , इंदौर में उनका खाना बहुत मिस करूंगा।"

"हां यार सच मै सुना है होस्टल में बहुत बेकार खाना मिलता है।"

मां ने स्माइल किया, मां ने पूछा,

" वैसे तुम लोगों की दोस्ती कब से है?"

"वैसे तो नाईंथ से है बट अच्छी दोस्ती टेंथ से हुई।"

दोनों ने साथ में कहा,

हमारा शाम को गणेश मंदिर में मिलने का प्रोग्राम भी था,

खाना हो गया थोड़ी बातों के बाद जैसे ही मां इधर उधर होती मै उसके माथे पर किस कर देता, वो मुझे धक्का देकर मां के देख लेने का डर जताती....

थोड़ी देर बाद वो अपने घर चली गई,

बात तो ये थी कि मां खुद उसकी ख़ूबसूरती को देखकर दंग रह गई थी,

जब वो गई तो मां ने सबसे पहला शब्द कहा,

"ये इंदौर में कहां रहेगी?"

"मां वो गर्ल्स होस्टल में रहेगी, उसके कोचिंग के पास वाले।"

"अच्छा।"

"लड़की के ख्वाब तो बहुत ऊंचें हैं ।"

मैंने मन में सोचा कि मेरे कौनसे छोटे है मां,

"हां ... हां... मां वो क्या घर में सब लाड़ प्यार से रखते है ना।"

"नहीं ऐसे तो लड़की समझदार और व्यावहारिक है अच्छी है ।"

मां ने ऐसा बोलकर जैसे मुझे हरी झंडी दिखा दी थी, मां ने भले ना दिखाई हो पर मैंने तो जरूर उसे हरी झंडी ही समझा था, मैंने मन में कहा मां तेरी बहू ही तो है।

शाम को मंदिर में आज मुझसे पहले वो पहुंच गई थी,

हर बार की तरह स्टाइलिश जीन्स पर लॉन्ग टी शर्ट पहनी हुई वो किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लग रही थी,

, आज चहरे पर शहर छोड़ने का ग़म अलग ही छलक रहा था,

उसने और मैंने दर्शन किये गणपति बप्पा से मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना भी की और बाहर अा कर , मंदिर के पीछे बने गार्डन का एक कोना पकड़ कर बैठ गए,

वो आज कुछ बोले बिना ही मेरी गोद में सर रख कर हल्की सी टिक गई, कुछ देर हम एक दूसरे से बिना कुछ कहे एक दूसरे के एहसास को खुद में संजोते रहे,

मैंने बात शुरू की,

"मिताली, तुम आज गुमसुम सी क्यों लग रही हो।"

"नहीं तो।"

"मुझे तो लग रही हो।"

"बस यार कल से घर छूट जाएगा , बहुत याद आएगी सब की।"

"मेरी भी ?"

" तुम मेरे सब में नहीं हो क्या?"

" ओ सॉरी ।"

"अब हम भी रोज कहां मिल पाएंगे?"

" सो तो है पर कुछ समय के बाद हम हमेशा के लिए एक जो होजाएंगे तब?"

"हां लेकिन उसके बीच कितना बड़ा वक़्त है राहुल।"

"हां यार, मायूस तो मैं भी हूं पर कल के चक्कर में हम आज की मुलाकात क्यों मिस कर रहे हैं।"

" हां सही कहा, वैसे तुम्हारी मम्मी मतलब मेरी होने वाली सास बहुत तेज़ लगी मुझे तो।"

"क्यों ?"

" अरे! कितने तो सवाल किए ,मुझे तो लगा जैसे मै कोई इंटरव्यू में बैठी हूं।"

"मां ऐसी लगती है पर अंदर से दिल पूरा मोम है यूं पिघल जाता है चुटकियों में।"

, "वो मुझे थोड़ी पारंपरिक सोच वाली सोच वाली महिला लगी।"

"हां वो तो है ,पर वक़्त के साथ सब बदल जाता है।"

" हमारी जाति अलग अलग है कहीं कोई दिक्कत दिक्कत तो ना आएगी ना?"

" नहीं आएगी ,और आएगी तो भी क्या हुआ , प्यार किया तो डरना क्या....."

" अच्छा इंदौर में हमारे मिलने जुलने का कैसा रहेगा?"

"देखो मिताली तुमने बहुत सही बात निकाली है मै सोच ही रहा था कुछ कहने की।"

मैंने मिताली को गोद से उठा दोनों कंधे पकड़ कर फेस टू फेस किया , आंखों में झांकते हुए कहा,

"मुझे बहुत मेहनत करनी होगी यदि हमारे सपने साकार करना है तो, जितने अच्छे कॉलेज से पढूंगा उतनी अच्छी जॉब मिलेगी वो भी जल्दी और हम दोनों फिर जल्दी से शादी कर पाएंगे।"

मिताली की आंखों में आंसू थे और चेहरे पर मुस्कुराहट,

"तो मैंने तय किया है कि मुझे जी तोड़ मेहनत करनी है, हम सन्डे को फोन पर बात कर लिया करेंगे और मंथ में एक बार मिल लिया करेंगे, मै मोबाइल भी नहीं ले रहा हूं, पापा के दोस्त है उनका लड़का मेरा रूम मेट रहेगा उसका नम्बर मै दे दूंगा तुम्हे।"

"मैं कैसे रहूंगी तुम्हारे बिना राहुल , आदत हो चुकी है मुझे तुम्हारी।"

"देखो मैं हूं राहुल जो सोच लेता हूं करके रहता हूं किसी कीमत पर नहीं चाहता कि आई आई टी के सिलेक्शन से हाथ धोया जाए, ये सब तुम्हारे लिए ही तो है ना मिताली।"

"हां तुम अपना खयाल रखना , ज्यादा मेहनत के चक्कर में तबियत मत खराब कर लेना।"

मैंने सीना ठोकते हुए कहा

"हां मेरी जान, तुम्हारा चेहरा है ना यहां बसा है यहां, जब तक मंजिल नहीं मिल जाती सनकी राहुल को चैन नहीं आएगा।"

"तुम ना बहुत जुनूनी हो राहुल सच में यार।"

, " बस मै तो वैसा ही हूं जो तुम्हे पसंद है।"

उसने मुझे अपने कोमल हाथ की मुट्ठी बना कर कंधे पर मारी,

देखते देखते बात किस तक पहुंच गई, उन रसीले होंठो में कब मेरे होंठ गूंथ गए पता ही नहीं चला,

इतना लंबा किस तो शायद टी वी में भी नहीं बताते होंगे,

उसने बदन में जैसे आग लग गई थी , सांसे लम्बी हुई , पर जोश में हाेंश खोने के पहले ही होश अा गया था,

उसकी शर्मीली नज़रें झुक गई थी,

"आई लव यू राहुल, कभी धोखा मत देना मुझे।"

"पागल कहीं की तू है तो मेरी जहान है , तू सब कुछ है मेरा आई लव यू टू माय जान।"

एक दूसरे को छोड़ने का मन नहीं कर रहा था, पर वक़्त हमेशा अपनी मर्जी चलता है, सूरज की कम होती रोशनी, हमारे हाथों को एक दूसरे से धीरे धीरे दुर करती जारही थी , उसकी उंगलियां जैसे ही संपर्क खोने को थी अंधेरा हो चुका था, मैंने फिर हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और ज़ोर से गले लगा लिया कुछ देर के आलिंगन के बाद बिना मुड़े अपने अपने रास्ते चल दिए,

यदि मुड़कर एक दूसरे को देख लेते तो कदम वहीं की वहीं जम से जाते ।

स्कूल के बाद छूटा घर हमारी बेपरवाह ज़िन्दगी को कभी वापस नहीं करता,

ये तो बस एक कहने कि बात होती है कि बस यूं कॉलेज मिला यूं नौकरी लगी यूं शादी हुई और सेटल होने के साथ ही मां बाप साथ रहने लगे, दर असल इसके बीच एक बहुत बड़ा अरसा होता है, और इसके बीच ज़िन्दगी के बहुत सारे ड्रामास छुपे होते है, मकसद के लिए निकले लोगों की तादाद मकसद पहुंचने वालों से कइयों गुना ज्यादा होती है।

कल की शाम इंदौर में होगी , तीन कमरे का घर नहीं दस बाई दस के खाली एक कमरे में, खाने में कुछ खास नहीं वही रोज के रोटी सब्जी होंगे।,
 
18. ये कहाँ गये हम...

इंदौर में नया दोस्त मिला ,वो पापा के दोस्त का लड़का था निखिल , गोरा दीप ऊंचा पूरा बड़ा हैंडसम दिखता था, रूम में समान जमाते जमाते शाम हो गई कुछ किताबें पहले ही खरीद ली थी कुछ कोचिंग से बताने वाले थे,

भूख लगने लगी थी,

कभी मां की याद, पापा की याद, और स्पेशियली मिताली के साथ आखरी मुलाकात बार बार आंखों में घूम रही थी,

इस बीच मैंने शर्मा सर को भी बहुत याद किया , सफलता के सफर में प्रकाश स्तंभ बनकर आए थे,

" हे राहुल चलें बाहर कुछ खा कर आएं ?" निखिल ने कहा,

"ओके बट मां ने शाम का भी खाना रख दिया था तो इसे भी खा सकते है।"

" ओ वाउ ! घर का खाना है तो फिर कौन बाहर जाए?"

वो ऐसा खुश हो गया जैसे मैंने उसे ताज़ में इन्वाइट कर दिया हो, मैंने उससे आगे इस संबंध में पूछने के बजाए खाना निकाला और हम खाने बैठ गए।

वो ऐसे खा रहा था जैसे सालों का भूखा हो,

खाना ख़त्म करने के बाद उसने पूछा,

"सॉरी यार तू भूखा तो नहीं रहा ना?"

मैंने मन में सोचा रह तो गया हूं पर ऐसे कैसे स्ट्रेट बोल दूं,

"नहीं यार, बाकी रात में मुझे भूख लगती है तो कुछ ला कर रख लेते है।"

"ओके चल।"

हम निकल गए मार्केट,

उसने बताया

"बहुत दिनों बाद घर का खाना खाया यार , मज़ा आ गया।"

"ऐसा क्यों?" मैंने पूछा ।

"मेरी मम्मी नहीं है ना, हमेशा बाहर खाता हूं या पापा के हाथ का बना, फिर बोर्डिंग स्कूल में चला गया ।"

"ओह सॉरी दोस्त।"

"कोई नहीं यार, दो सालों पहले मौसी के घर खाया था ऐसा टेस्टी खाना उसके बाद अब, वैसे अंटी बहुत टेस्टी खाना बनाती है।"

"चल मुझे खुशी हुई , यार तुझे खाने में मज़ा आया तो।"

हमने एक दूसरे को ताली दी,

अचानक उसका फोन बजा,

"हेल्लो माई डार्लिंग....सुन मै रात में कॉल करता हूं ना ।"

कॉल कट करके उसने मुझे देखकर मुस्कुरा दिया,

मैंने पूछा "जीएफ ?"

उसने आंख मारी और हां का इशारा किया,

" तेरी भी है?"

मैंने हां में सर हिलाया,

उसने मुझे हौले से हाथ पर मुक्का मारा,

उसने पूछा "कहां रहती है वो?"

"फिलहाल तो इंदौर में।"

"ओह तेरी तो मज़े है, ले आईओ रूम पर,जब मन करे ।"

"नहीं यार पहले कैरियर सेट होजाए उसके बाद पर्मानेंट लाऊंगा।"

"अरे क्या हुआ आज कल तो सब चलता है, वैसे भी लड़कियां भी नहीं रुकती शादी तक, हमे ही देख ले सब हो गया हमारे बीच।'

"अरे यार मेरी वाली ऐसी नहीं है , नो मींस नो वाली है।"

"सब वैसे ही होती है ब्रो...वो मनाना पड़ता है थोड़ा।"

, " हम्म..."

वो समझ गया था कि शायद मै उसकी बात से सहमत नहीं हूं,

"एनी वे, इट् डिपेंड्स अपोन यू..."

अगले दिन से क्लासेज शुरू हो गई, शेड्यूल इतना टाइट था कब हफ्ता निकल गया पता ही नहीं चला , आखिरकार पहला संडे अा ही गया,

मैंने मिताली को निखिल के फोन से फोन मिलाया,

"हेल्लो , कैसे है?"

"ओह माय गॉड इतने दिनों बाद तुम्हारी आवाज़ सुन रही बहुत अच्छी , तुम बताओ कैसे हो?"

"मैं तुम्हारे बिना कैसा हो सकता हूं।"

"ओह जानू, सच्ची बहुत मिस किया मैंने तुम्हे, वैसे ये किसका नम्बर है।"

" मेरे रूममेट निखिल का नम्बर है सेव कर लेना मै इसी से लगाऊंगा।"

"तुम भी ना एक मोबाइल ले लो खुद पे कंट्रोल रखना बस।"

" वही तो नहीं है मुझे।" मैंने थोड़े उस वाले सेंस में कहा।

" वो तो रखना ही पड़ेगा, जनाब।"

"हां तो रखे हुए है, वरना आज मिलने प्लान नहीं बना लेते।"

"तो क्यों नहीं बनाया , तुम्हे देखे हुए कितना समय हो गया।"

" वो तो मुझे भी बहुत मन कर रहा है मिलने का, एक काम करते है नेक्स्ट वीक पार्क में मिलते है।"

"ओके ये सही रहेगा।"

"तुम्हारा कैसा चल रहा है माय डार्लिंग।"

" अच्छा चल रहा है दोस्त बन गए है, सुबह से जाते है कोचिंग शाम को आ जाते है, बहुत पढ़ाई है यार।"

"तो इधर भी यही हाल है बच्चु।"

"लेकिन यार इतना आसान नहीं है राहुल डॉक्टर बनाना , एक से एक लोग पड़े है यार, पता नहीं मै कर भी पाऊंगी या नहीं?"

"डोंट वरी तुम कर लोगी , वैसे भी तुम्हारे पति को तुम्हारी कमाई , की जरूरत नहीं है माय स्वीटू।"

उसने मुझे फोन पर ही किस किया ,

"मै जानती हूं ; पर सपनें भी तो कोई चीज़ हैं आई लव यू माय जानू "

"लव यू टू ।"

काफी देर हो गई बात करते करते, निखिल की गर्ल फ्रेंड का फोन वेटिंग में बहुत देर से अा रहा था आज उसकी क्लास लगा देगी उसकी गर्ल फ्रेंड , पर हम तो इतने दिनों के भूखे थे

मैंने कहा ,

" नेक्स्ट मंथ तुम्हारा बर्थडे है, साथ में सेलिब्रेट करें?"

"ओके! कहां?"

"मेरे रूम पर?"

" कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी ना?"

"अरे ना कोई नहीं पूछता, यहां कौन अा रहा कौन जा रहा।"

"ओके फिर ठीक है ,पहले पार्क में तो मिलें।"

"ओके माय मीतू आई विल वेट फ़ॉर नेक्स्ट संडे, टेक केयर लव यू ।"

"लव यू टू मेरी जान ध्यान रखना ।"

निखिल ने मेरे फोन कट करते ही कहा , अरे जल्दी दे भाई तू खटिया खड़ी करवाएगा मेरी,

मैंने उसे हंसते हुए फोन दे दिया।

मैंने मन में सोचा ,क्या करूं मैं भी ले लूं क्या एक फोन ,

नो ....नहीं लूंगा राहुल जो सोच लेता है वही करता है। कॉलर खड़ी करके रूम में चल दिया ।

इतने दिनों बाद अनजान शहर में कुछ अपनापन लगा जब मिताली से बात हो सकी और एहसास हुआ कि वो भी यहीं रहती है।

,

अब अगला संडे कब आएगा, यार...,
 
19. बड़े शहर की पहली मुलाक़ात

ये हफ्ता वाकई बहुत लंबा था, इंतजार मानो अपना कद दिखाने पर तुला हो,

जैसे तैसे संडे आया आज मै बहुत दिनों बाद मिताली के सामने आने वाला था , शेव , हेयर कट सब ओके था, एक दम मस्त वाला परफ्यूम लगाया और निकल पड़ी सवारी ,

पार्क पहुंचा वो नहीं दिखी , मेरे पास तो फोन भी नहीं था ,

नया शहर था और पहली बार मै यहां वाले पार्क आया था, पार्क बड़ा ही सुन्दर था हमारे यहां के पार्क से एकदम अलग,

छोटे शहरों के पार्क अंकल आंटी के मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक के लिए बने होते है, उससे इतर ये कपल फ्रेंडली पार्क का नज़ारा तो ग़ज़ब ही था,

यहां आकर पता चला कि टीवी पर दिखने वाली मॉडल्स , हमारी ही धरती पर होती है इन्हीं किन्हीं युवतियों में से ही कोई शैंपू और साबुन के विज्ञापनों में नज़र आती है, इतनी खूबसूरत लड़कियां ,एक से एक फेस कट एक से एक फिगर , उनका ड्रेस अप देखलो जैसे वस्त्र उद्योग नवाचार के लिए इन्हीं के संपर्क में बना रहता हो, किसको देखें किसको छोड़े समझ ही नहीं आता, अपनी वाली को छोड़ कर ज़माने भर की सुंदरियां दिखाई दे गई,

पार्क में मेहंदी की झाड़ियों के वर्गाकार पार्टीशन बने थे,

मैंने एक तरफ नजर दौड़ाई तो एक कपल पब्लिक प्लेस पर , प्राइवेट प्लेस वाले काम कर रहा था अचानक मेरी नज़र उस लड़की से मिल गई, उसने शर्म से खुदको दुप्पटे से ढंक लिया,

उसी बीच जैसे ही मै मुड़ा और एकदम से भॊ की आवाज़ ने मुझे डरा दिया , वो मिताली थी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी, "तुम डर गए थे ना ?" उसने पूछा,

" नहीं मै कन्फर्म कर रहा था कि धक्का दूं की नहीं कहीं तुम तो नहीं हो।"

वैसे मैंने चालाकी दिखाई ,

आज तो मिताली की खूबसूरती इस तरह थी जैसे कि फूड चैन वालों ने देसी तड़के वाला पिज़्ज़ा ईजाद किया हो, ये बात तो है अर्द्धशहरी लड़कियों की खूबसूरती का जायका कुछ और ही होता है, सलिकेमंद सलवार सूट पर लेटेस्ट हेयर कट मिताली को और भी खबसूरत बना रहा था,

"नो , झूठ "

"हां मैं डर गया था बस, देखो मुझे बुखार अा गया डर के मारे।"

उसने भी दोनों हाथों की हथेलियों को मेरे गालों पर रख द दिया,

" कहां है बुखार झुटू बोल रहे हो ....."

" बुखार तो अा गया है इश्क़ का बुखार अा गया है, "

" मैंने उसकी हथेलियों को चुम लिया...."

उसने शरमा कर नज़रें झुका ली,

" तुम बहुत क्यूट लग रही हो जान "

" यू टू ।"

"चलें कहीं बैठे?"

"ओके ! वैसे ना राहुल अपने शहर में ऐसा मिलना कितना मुश्किल होता था ना? हर वक़्त बस डर ही लगा रहता था कि कोई देख न ले।"

" हां सही कहा , और यहां तो किसी को फुरसत ही नहीं है किसी को देखने की, अभी मैंने देखा वहां उस कोने में एक कपल बैठा था पूरा बाज़ार फ़ैला के ,लड़के की गोद में बैठी लड़की ने पैरों पर दुपट्टा औढ़ा था "

, " सच्ची ????"

" वैसे ये लड़कियों को कोई डर नहीं कभी कुछ हाेजाए शादी के पहले ही तो...."

मैंने सहमति मै सर हिलाया, और हम एक कोना पकड़ कर बैठ गए,

"तुम पर शहर का असर दिखने लगा है, मिताली।"

"क्यूं बस हेयर कलर करवाए है और थोड़े छोटे करवा लिए।"

" वही तो , एक पल मुझे लगा कि मेरी मिताली कहीं खो गई।"

" तुम्हारी मिताली कहीं नहीं जाएगी तुम्हे छोड़ कर , हुलिया बदलने से जज़्बात थोड़ी बदल जाते।"

" वाह आज कल बड़ी बड़ी बातें आने लग गई है।"

" तो तुम क्या स्कूल वाली मिताली समझते हो मुझे अब भी?"

" तू मेरे लिए कभी बड़ी नहीं होगी , मै तुझे हमेशा वैसा ही रखूंगा , बच्चा।"

मैंने उसके गालों पर हाथ रखा।

" लास्ट मुलाकात याद है ना, कितनी रिस्क उठा कर भरे पार्क में किस किया था।"

" हां याद है और फिर घर आकर मुझे बहुत गिल्ट फील हुआ था राहुल ।"

"क्यों हम प्यार करते है, इतना तो चलता है।"

"वो तो है पर पता नहीं मुझे इन सब चीज़ों से फोबिया है।"

" फोबिया? कैसा फोबिया?"

" मेरी बड़ी सिस्टर का पता है ना , वो उसने सुसाइड एग्जाम में फेल होने की वज़ह से नहीं बल्कि प्रेगनेंट होने की वज़ह से किया था, वो सब बातें मेरे दिमाग में घूम जाती है, मुझे तुम्हें तरसाने में कोई मज़ा थोड़ी आता है ।"

मेरी आंखें फटी थी, उसने मेरी तंद्रा भंग करते हुए कहा,

" राहुल ! तुम समझ रहे होंगे ना?"

इस बार मेरे चुप रहने पर उसे लगा मुझे अन्दर से अच्छा नहीं लगा, तो उसने मुझे

होंठों पर लंबा वाला किस किया,

, हम रेस्टोरेंट गए और कॉफी ली , स्नैक्स खाए अब बात होनी थी नेक्स्ट वेडनसडे को अा रहे मिताली के बर्थडे की ,

मैंने शुरू किया,

" फिर तुम मुझे यहीं पर मिल जाना ट्यूजडे इवनिंग को?"

" वो क्यूं?"

" अरे ! बर्थडे सेलिब्रेट नहीं करना है क्या?"

"ओह तो वो वेडनेस डे को है।"

" तो क्या घंटे दो घंटे प्रोग्राम रहेगा बस ?"

"और नहीं तो क्या ?"उसने कहा,

" अरे पागल फूल नाईट रहेंगे साथ में।"

" राहुल प्लीज़ ।"

" प्लीज़ वलीज़ कुछ नहीं , वैसे भी वहां अपने शहर में कुछ नहीं कर पाते थे, थोड़ी आज़ादी का मज़ा तो लो"

" पर...."

" मुझपे भरोसा नहीं हो तो कोई बात नहीं.."

"अरे! तुम तो बुरा मान गए , चलो ओके बाबा, पर एक शर्त है ...."

" क्या ?"

" एक बेड पर नहीं सोएगें ?"

" ओके ! डरपोक कहीं की ,शादी के बाद भी ऐसा ही करेगी क्या?"

उसने मेरी चुटकी लेते हुए हां में अपना सर हिलाया।

मैंने भी मजाक में उसे मुंह चिढ़ा दिया ,

उसने कहा" सुनो एक इंपॉर्टेंट बात है...."

इतने में उसका फोन बजा,

" हेल्लो, हां एक काम कर तू पार्क के साइड में जॉनी कैफे पर अा फिर मुझे कॉल कर।"

" किसका फोन था?"

" अरे वो मेरी रूममेट, श्वेता स्कूटी से मुझे ड्रॉप कर गई थी, लेने आने का पूछ रही है।"

" कहां की है?"

, " ग्वालियर की है , उसके पापा तहसीलदार है , अच्छी लड़की है।"

" अच्छा सुन क्या इंपॉर्टेंट बात बता रही थी?"

" ओह वो ये , इधर कान लाओ..."

" मैं ना , तुमसे बहुत प्यार करती हूं... हाहाहा.... "

" वाह ! इधर कान लाना..."

" क्या ? मै तो श्वेता से प्यार करता हूं.... हाहहा...."

उसने गुस्से से मेरी तरफ देखा,

" खबरदार अगर मेरे सिवा किसी और के बारे में सोचा भी तो।"

" ओह ज्वेलस ...."

वो उठ कर जाने लगी , मैंने हाथ पकड़ा और कहा,

" तू ही तो मेरे जीने की वज़ह है मिताली जिस दिन तू मेरी जिंदगी में नहीं होगी , मै इस जहान में कहीं नहीं होऊंगा मै , आई लव यू।"

उसने मेरे होंठो पर हाथ रख कर चुप करा दिया ,

" आई लव यू टू , एंड बाय मिलते है ट्यूजडे शाम को खयाल रखना अपना राहुल मेरी जान ।"

मेरे लफ्जों को आवाज़ का साथ ना मिल पा रहा था , बस हाथ हिला कर मिताली को बाय बाय कर रहा था,

इतना लंबा इंतजार था , बस इतनी छोटी सी मुलाकात के लिए,

घड़ी देखी नौ बज गए थे , जबकि हम पांच बजे से आए हुए थे ।,
 
20. लवशुदा रात

आखिरकार वो शाम बड़े कठिन इंतज़ार के बाद अा ही गई , निखिल ने मुझे बाइक की व्यवस्था करवा दी ।

मैं मिताली को तय जगह और समय पर लेने पहुंचा,

इधर निखिल ने उस रात कहीं और काटने की व्यवस्था भी लगे हाथ कर रखी थी,

दुनियां का दस्तूर है कि किसी कि मदद करने से आपका सामाजिक दायरा बढ़ता है, जब आपको किसी चीज की जरूरत होती है लोग भी एहसान उतारने मौका नहीं चूकना चाहते,

जब मिताली अाई तो बहुत ही ख़ूबसूरत लग रही थी वन पीस पहन रखा था जो घुटनों से बस थोड़ा ही नीचे था,

ब्लैक और रेड मिक्स वन पीस। के नीचे गोरे गोरे पैर बड़े ही सेक्सी लग रहे थे,

समझ नहीं आ रहा था किस विचार धारा को अपनाई जाए, छोटे कपड़े क्राइम को बढ़ावा देते है वो वाली या महिलाओं को आज़ादी होनी चाहिए अपनी पसंद से कपड़े पहनने की , हमें हमारी सोच सही रखनी चाहिए,

इन उलझनों के बीच हाई हेलो जैसी औपचारिकताएं निभाते हुए हम एक गाड़ी पर हो लिए,

जब उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो ऐसा लगा जैसे, जिन्दगी कंधे पर हाथ रख पूछ रही हो बन्दे अब तो खुश है???

मैंने बात शुरू की,

" तुम चुप क्यों हो ?"

" कुछ नहीं डर लग रहा है..."

" वो क्यों?"

" कुछ नहीं थोड़ी नर्वसनेस है, और कुछ नहीं ..."

" अरे! ऐसे जो मुझसे डरोगी तो प्यार कैसे करोगी...."

"ज्यादा ख़्वाब मत देखो ऐसा वैसा कुछ नहीं होने वाला है हां... "

मैं हंस दिया,

उसने मुझे चिमटी काटी, मेरे मुंह से आऊ कि आवाज़ निकल गई...

" कैसा लगा ?" उसने पूछा,

" दर्द हुआ.."

" अब अाई समझ..."

" हां.."

" तो फ़िर ... मै बायो की स्टूडेंट हूं , थियोरी से प्रैक्टिकल इमैजिन् कर लेती हूं...."

मै उसके सेंस ऑफ ह्यूमर से अचंभित हो गया...

और साथ ही कन्फ्यूजन ये होगया की मिताली , वो सब के लिए राज़ी है क्या, या यूंही मेरी छेड़ ले रही है,

खैर पहले तो बर्थडे सेलिब्रेशन होना था,

जैसे ही रूम पर पहुंचे कमरा खोला तो , गुब्बारे लगे हुए थे, केक , का डब्बा रखा हुआ था, उसके ऊपर अठारह की मोमबत्ती भी डब्बे के ऊपर चाकू के साथ रखी थी,

हम दोनों अन्दर आए और अच्छे से देखा तो टेबल के नीचे, बीयर की दो बॉटल और , कॉन्डम्स के दो पैकेट रखे थे,

अन्दर अा कर दरवाज़ा बंद कर लिया,

सारी व्यवस्था दोस्त निखिल ने लगाई थी, भला हो कि मिताली कि नज़र बीयर और कॉन्डम्स के पैकेट पर नहीं पड़ी वरना वो तो बिखर ही जाती....

अच्छा हुआ वो वॉश रूम चली गई जब तक मैंने उठा कर इन सब चीज़ों को छुपा लिया....

जैसे ही वो बाहर आयी मै केक सजा कर हैप्पी बर्थडे कर रहा गा रहा था,

उसके चेहरे पर जो ख़ुशी थी, वो मन की गहराइयों तक जा कर मोहब्बत का लेप लगा रही थी ,

बहुत किस्मत वाले होते है वो, जिन्हें कोई लड़की अपने प्यार से नवाज़ती है,

मैंने हाथों में उसका हाथ थामे केक कट करवाया,

हमने एक दूसरे को केक खिलाया भी और लगाया भी,

उस समय रेडियो बॉक्स मनोरंजन का एक बेहतरीन साधन था जिसमें सिटी के एफ एम बैंड पर बहुत ही शानदार गाने आते थे,

,

मैंने रेडियो ऑन कर दिया,

और मिताली का हाथ थाम कर,

आंखों में झांकते हुए कहा ,

" मिताली आई लव यू.... तुम मेरी ज़िन्दगी हो , मेरी हर सांस में तुम ही समाई हो , आज तक किसी भाषा में कोई शब्द शायद इज़ाद ना हुआ होगा जो मेरी मोहब्बत को बयां कर सके..." मैंने उसे फिल्मी स्टाइल में एक घुटने पर झुक कर रेड रोज़ और एक छोटे बॉक्स में रखे गिफ्ट के साथ इज़हार किया ....

उसने मुस्कुराते हुए मुझे उठाया और कहा

" थैंक्यू राहुल , मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए, मेरे चेहरे की मुस्कुराहट हो तुम..."

हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर पलंग पर बैठ गए,

और पीछे से रेडियो में बहुत ख़ूबसूरत गाना आया ,

कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो ,क्या कहना है ....क्या सुनना है... मुझको पता है, तुमको पता है.........

और वाकई समय का ये पल थम सा गया था,

कुछ और रोमांटिक गानों के बीच हमारे होंठ कब एक दूसरे के होंठों से चुंबक की तरह चिपक गए पता ही ना चला, सांसे लम्बी और लंबी होती जा रही थी हाथ और हाथ की उंगलियां बेकाबू होने लगे थे, ये पल सोनल के साथ बीते पलों से भी ज्यादा उत्तेजित होता जा रहा था,

जबकि घड़ी में अभी सिर्फ अभी आठ बजे थे , अभी तो सारी रात , बाकी थी,

मदहोशी हमारी तब भंग हुई, जब अल्ताफ राजा का गाना बज उठा ,

थोड़ा इंतजार का मज़ा लीजिए.....

बात तो अल्ताफ़ मिया ने सही कही थी, जब तय है एक दूसरे से शादी करना, तो सुहाग रात के मज़े को दस बाय दस कमरे में , इन कामचलाऊ व्यवस्थाओं के साथ क्यों मारना??

हम दोनों ही वर्जिन है, कूदरत के इन नायाब और अंतरंग पलों को किसी खूबसूरत जगह , खूबसूरत माहौल में ख़ूबसूरत बिस्तर जो फूलों से सजा हुआ हो, उस पर पूरे जोश और ख़ूबसूरती में बिताया जाना ठीक होगा,

शायद उसे और मुझे ये समझदारी भरा खयाल एक साथ दिल में आया, और हम आगे बढ़ने से रुक गए,

मिताली कहा,

" राहुल मैंने तुम पर बहुत भरोसा किया है, उसे कभी तोड़ना मत,"

" आई प्रॉमिस कभी नहीं टूटेगा कभी ।"

मैंने उसकी आंखों में आंखें डाल फिर पूछा

" अगर तुमने तोड़ा तो??"

" जो सज़ा दोगे मंज़ूर होगी..."

उसके नज़रे झुकाई और मुझसे लिपट गई,

हम खाना रास्ते से पैक करवा कर लाए थे,

खाना खाने के बाद उसने गिफ्ट खोला , जिसमें सुंदर सा ब्रेसलेट , था, उसने पहन के देखा उसकी गोरी चिकनी कलाई पर वो इतना खूबसूरत लग रहा था कि बस,

रात और काली होती जा रही थी, जब दो जवान बदन बंद कमरे में एक दूसरे के करीब हो तो दुर रहना मुश्किल हो जाता है,

बातें करते करते तीन बज गए थे, अब मिताली कि आंखों में नींद छाने लगी,

मैंने कहा ,

" सो रही हो?"

" हां यार कल सुबह जल्दी जाना है, कोचिंग भी है"

मैंने बेमन उसे कहा,

" ओके एस यू विश...."

वो ऊपर पलंग पर सो गई, मैंने उसके साइड वाले निखिल के बेड पर सोया,

ये ही कोई चार बजे होंगे और मै करवटें बदल बदलकर परेशान था मैंने उठकर मिताली कि तरफ देखा तो वो भी कुछ बेचैन सी लग रही थी,

मै उसके करीब जा कर लेट गया , इस बार उसने कोई रोक टोंक नहीं की बल्कि मेरे ऊपर हाथ रख दिया शायद आधी नींद में थी वो,

एक अजीब सी लहर पूरे शरीर में दौड़ रही थी, और टीन ऐज वाली रिस्क अपने चरम पर पहुंच गई थी, और देखते ही देखते दोनों बदन बेकाबू होते चले गए,

तभी मुझे अचानक निखिल के रखे सेफ्टी पैकेट याद आए मै उसे लेने गया और मेरा पहला मौका था इसलिए उसे इस्तेमाल करता , जब तक बेकाबू तन अपने काबू में आने लगे, होश वापस आने लगा, मिताली ने कहा;

" प्लीज़ राहुल अब इससे आगे शादी के बाद ...."

मै भी मान गया,

" ओके " कहकर मैने लोअर टी शर्ट पहन ली।

रात भर कैसे और किस हाल में कटी , किस तरह दो प्यासे जिस्म नदी के किनारे आकर भी कुछ समाज के उसूलों और कुछ खुद की शर्तों से बंधे हुए प्यासे बैठे रह गए ये वो जानती थी या मैं जानता था,

देखते - देखते सुबह हो गई , मै उसे उसके हॉस्टल के बाहर छोड़ आया, शायद प्यास ना बुझ पाने की कसमसाहट सिर्फ़ लड़कों ही नहीं लड़कियों को भी होती है ये जब पता चला जब , उसने जाते - जाते मुझसे कहा,

" राहुल अब और नहीं रहा जाएगा, तुम अच्छे से पढ़ाई करो हमे जल्दी से शादी करनी है ना...."

उसने पहली बार खुद से आगे होकर किस दी थी और मुड़ कर चली गई, इधर मै हर बार की तरह बाय बाए का हाथ हिलाता रहा ।,
 
21. दुनियाँ लेन देन समझती है बस

आज कल के व्यवहार लेन देन के लिए होते है, चूंकि निखिल ने मेरी मदद की थी उसके पीछे वजह थी कि उसकी गर्ल फ्रेंड जब आए तो मैं भी उसकी मदद करूं , अगले संडे उसकी गर्ल फ्रेंड का इंदौर आने का प्रोग्राम बना,

वो संडे आ ही गया, आज तुलना का नियम जान पड़ा, मेरा संडे कितनी देर से आया था, और इसका संडे तो यूं चुटकियों में आ गया अब मैं कहां ढूंढूं रहने की जगह,

निखिल ने मुझसे कहा कि "

प्लीज़ यार तू थोड़ा इंतज़ाम करले आज सोने का कहीं , मै निकिता को स्टेशन लेने जा रहा हूं , उधर से खाना खाते हुए आएंगे हम दोनो..."

कांच में बाल संवारते हुए उसने कहा,

"सुन तू भी खाना खा लेना और ये पर्ची ले जा पास के मेडिकल से समान ले आना भाई मै लेट हो गया हूं उसके सामने लूंगा तो अच्छा नहीं लगेगा।"

मैंने हां में सर हिलाया और रात गुजारने की जगह दिमाग में तलाशते हुए , मुंह पर कपड़ा बांधकर मेडिकल स्टोर पहुंचा , मेडिकल वाले को पर्ची पकड़ा दी,

पता नहीं क्या क्या टूल्स होते है, इस क्षेत्र के आज पता चले थे,

कॉन्डम्स के पांच पैक , स्टेमिना की टैबलेट बाप रे ये अच्छा हुआ कि उस वक्त मेरे पास उतने पैसे पॉकेट में निकल गए,

मैं जैसे ही मुड़ा, मिताली सामने रोड़ के उस पार स्कूटी के पास खड़ी थी फोन पर बात कर रही थी और उसकी सहेली मेडिकल स्टोर की तरफ़ आ रही थी,

भला हो मेरे चेहरे पर कपड़ा बंधा था, ये क्या अजीब इत्तेफाक है, मुझे कक्षा आठ के स्टेशनरी पर बुक्स लेने जाने वाले दिन याद आ गए ।

मैं वहां से भागने में कामयाब रहा, रूम पर पहुंचकर तय जगह पर निखिल का सारा रोमेंस का टूल बॉक्स रख दिया और ताला लगाकर चाबी लॉफ्ट के ऊपर रख दी, फिर वहां से चल पड़ा , कुछ समझ नहीं आ रहा था कोई विकल्प नहीं सूझ रहा था ,

तभी मुझे निखिल और उसकी गर्ल फ्रेंड आते हुए दिखे,

निखिल ने गाड़ी रोकी मेरे पास , उसकी गर्ल फ्रेंड तो क्या हॉट और सेक्सी थी कि कोई पुरुष उसके चेहरे से ज्यादा तो चेहरे के नीचे देखे, अब ये प्रकृति की देन थी उसे या निखिल की कहा नहीं जा सकता था,

मैंने निखिल से बहाना बनाकर पूछा,

"भाई मैं बस अभी ही शहर आया हूं कोई जान पहचान का हो तो उसके यहां ठहरा दो रात?"

उसने भी कहा " ओके"

निखिल ने फोन लगाया,

" अरे हेमंत कहां हैं??"

उसने कहा "इंदौर में ही हूं..."

, "एक काम कर बाइक लेकर मेरे रूम पर आ ..."

" ठीक है भाई आता हूं..."

हेमंत बाइक ले कर आ गया,

मै उसके साथ उसके रूम पर गया,

नीचे मकान मालिक का लड़का निकला दरवाज़े से और हेमंत से पूछा,

" कौन है ये?

" भाई है गांव से आया है ...."

वो लड़के ने मुझे बड़े ही अलग अंदाज़ में देखा,

थोड़ी देर बाद वो ऊपर आ गया रूम में और बातें करने लगा, होगी उसकी उम्र लगभग पच्चीस छब्बीस साल,

मुझे कहता " ओके दोस्त .. चलो खाना साथ में खायेंगे..."

भूख तो जोरो से लगी थी, कुछ खाए बिना ही आ गया था,

मैंने हेमन्त की तरफ़ देखा तो उसने इशारे से बताया कि वो पहले ही खाना खा चुका है,

मैंने नहीं खाने का इशारा किया, मैंने भी उस लड़के को बिना कोई औपचारिकता निभाते हुए हां कर दिया और साथ चल दिया , हेमंत का रूम पहली मंज़िल पर था, जबकि नीचे मकान मालिक रहते थे,

मैं सीढ़ियों तक पहुंचा होऊंगा बालकनी में आ कर हेमंत कुछ इशारे कर रहा था ,मुझे समझ नहीं आया और मै समझने का बहाना कर नीचे चला गया,

उस लड़के ने पेट भर स्वादिष्ट खाना खिलाया इतने दिनो बाद घर का खाना खाने को मिला था,

फिर उसका घर दिखाने का बोला वो, मैं उसके साथ जैसे ही रूम में गया उसने दरवाज़ा लगा दिया, और गंदी हरकतें शुरू कर दी , वो गे , था, मै जैसे तैसे जान छुड़ाकर भागा वहां से ऊपर, तब पता चला की हेमंत इसी का इशारा कर रहा था,

सुबह हो गई मै जल्दी से उठकर , हेमंत को छोड़ने का बोलने लगा, हेमंत ने मुझे चौराहे तक छोड़ा वहां से सिटी बस पकड़कर मैं रूम पहुंचा,

वहां ताला लगा था, जैसे ही मैंने लॉफ्ट से चाबी ली और दरवाज़ा खोला ,

पूरे रूम में कॉन्डम्स और बीयर की बोतलें दिखी,

बेड तो ऐसा बिखरा पड़ा था कि मुझे मुंह चिढ़ा रहा हो , देखो सीखो इसे कहते हैं प्यार,

और मन ही मन गुस्सा ये आ रही थी कि निखिल तो पलंग तोड़ू प्यार करके निकल लिया, अब ये समेटने का काम कौन करेगा मैं???

एक ओर ये भी लग रहा था कि मिताली और मुझे ये हसीन मौका कब मिलेगा???

लेकिन जब भी मिलेगा मैं इससे बेहतर परफॉर्मेंस दूंगा ये तो पक्की बात है मैंने मन में सोचा,

इस तरह संडे बीत गया मंडे आ गया। ,

22. वो शाम

आज शाम मेरी और निखिल की थोड़ी इसी बात को लेकर बहस भी हो गई, लेकिन कुछ भी बोलो निखिल जैसे बेफिक्र लड़के, व्यावहारिक हम जैसे पढ़ाकू लोगों से ज्यादा होते है, शायद इसलिए हम जैसे इंजिनियर बनते हैं और इनके जैसे मिनिस्टर बनते हैं।

उसने कंधे पर हाथ रख सॉरी बोल बुलाकर मेरा सारा गुस्सा हवा कर दिया और और मॉल घुमाने और उसकी तरफ़ से पिज़्ज़ा खिलाने ले गया,

हम मॉल पहुंचे पहली बार मॉल एक दम सही टाइम पर आए थे, लोगों की भीड़ लगी थी, नवजवां शादीशुदा - गैर शादीशुदा सभी बड़े रोमांटिक हो कर सॉफ़्टी खा रहे थे,

एक जोड़ा जिसमे लड़की बहुत शॉर्ट कपड़े पहनी थी, वो लड़के के गले लिपटी हुई थी, बड़ा मज़ा आ रहा था ये दृश्य देखने में , हम लड़के इसे नयन सुख प्राप्ति के नाम से जानते है, यही क्रिया करते करते हम एक बहुत सुंदर शो रूम के पास पहुंचे वहां पर अपने प्रेमी प्रेमिका को देने के लिहाज़ से ढेर सारे गिफ्ट आइटम थे,

हमारे जैसे लोगों को आदत होती है मॉल में देखते सब है लेते एक चीज़ नहीं, अच्छा शो रूम वाले भी अपनी ड्यूटी बराबर बजाते है ,पास आ कर खड़े हो जायेंगे पूछेंगे क्या चाहिए, इतना पीछे पड़ जायेंगे कि फालतू आदमी को जब तक गेट के बाहर ना कर दें जब तक मीठा बोल बोलकर उसकी बेज्जती करते रहते है,

देखिए सर ये टेडी ओनली टेन थाऊजेंट रूपीस का है इस पर ऑफर चल रहा है सेवन थाऊजेंट में मिल जाएगा सर, सेल्स पर्सन ने मेरी तरफ़ आते हुए कहा,

तभी उस शो रूम के पास थोड़ी अंधेरी जगह थी कोने में , निखिल की उल्लू जैसी आंखों ने कमाल का जोड़ा ढूंढ निकाला, उसने मुझे कोहनी मारते हुए उधर का इशारा किया,

लड़का लड़की एकदम पेशोनेटली लीप किस कर रहे थे,

हमें देखकर मजा आगया,

निखिल ने मेरी चुटकी लेते हुए कहा;

" तू देख ले मैं तो अभी ही डिस्चार्ज हो कर आया हूं.."

और मेरी तरफ़ देख कर हंस दिया मैंने भी उसे मुक्का मारने का इशारा किया ;

" ये ऐसा पब्लिक प्लेस में करने की हिम्मत कहां से आती है इन लोगों में...."

उसने कहा " हर कोई तेरे और मिताली जैसा बेवकूफ नहीं होता पानी का ग्लास हाथ में रख, प्यास प्यास चिल्लाए..."

" अरे शादी का चार्म ख़त्म हो जाएगा और तो कुछ बात नहीं है दोस्त..."

निखिल ने मेरी हथेली पकड़ी और हथेली कि तरफ़ देखते हुए हथेली से कहा,

" भाभी जी अभी आपको सेवानिवृत होने में बहुत समय है।"

मैंने उसे मज़ाक में मुक्का दिया, और हम आगे निकल लिए जब उस कपल के पास पहुंचे तो वाकई बहुत हॉट था, पर जैसे ही किस ख़त्म हुआ और लड़की ने चेहरा इधर किया मै ज़मीन पर बैठ गया,

,

और आंखो से टपटप आंसू बहने लगे, वो लड़की और कोई नहीं मिताली थी किसी और लड़के के साथ, उसने मुझे देख लिया, और शर्म से सिर झुका कर उस लड़के के साथ वहां से बिना मुझे कुछ कहे चल दी,

इधर मेरा रो रोकर बुरा हाल होता जा रहा था, पैरों तले ज़मीन खिसक चुकी थी, राहुल के साथ इतना बड़ा धोखा हुआ , आंखे गुस्से से लाल हो रही थी,

निखिल पूछता ही रह गया क्या हुआ ?

मैंने बस एक इशारा किया और मुंह से बस एक शब्द निकल पाया वो था, " मिताली...."

मैंने जिसके लिए इतना कुछ बदला , जिसे अपनी जान से बढ़कर माना, जिसे पाना एक मात्र मेरा लक्ष्य रह गया था, जिसकी खातिर मैं जी रहा था,वो मुझे इतना बड़ा धोख़ा दे गई, मेरे रात दिन एक कर मेरिट में आने से लेकर आई आई टी की कोचिंग में टॉप करने तक के सफ़र में मेरे माता पिता की खुशहाल जिंदगी से पहले मैंने मिताली और मेरी सुखमय वैवाहिक ज़िन्दगी देखी,

मुझे तो अपनी आंखों से भी भरोसा उठ गया कि ये ऐसी चीज़े दिखा कैसे पा रही थी,

मैं ज़ोर से चिल्लाया " मिताली....."

और पास रखी नक़ली लकड़ी की बंदूक लेकर उसे मारने दौड़ा तब ही उसने सहम कर मेरी तरफ़ देखा ,आस पास लोग भी मुझे देखने लगे , मुझे निखिल ने मुझे संभाला और सब्र रखने का इशारा किया,

उधर मिताली और उसके नए बॉय फ्रेंड के बीच बहस होने लगी मुझे लेकर,

मिताली भंडा फूटने का मलाल करते हुए माथे पर हथेली रखी हुई थी,

, मुझे निखिल घर लेकर आगया और हर समय मेरी स्थिति ठीक ना हो जाने तक मुझे नज़र में रखता रहा,

दोस्त निखिल जैसे होते है, वो खुद मेरी वज़ह से कोचिंग नहीं गया,

मैं तीन दिन से खाना नहीं खा रहा था, और बस मिताली का नाम लेकर रोता जा रहा था,

निखिल भी मिताली कि हरकत से बहुत नाराज़ था,

निखिल शराब लेकर आया और मुझे पीने को कहा,

मैं भी उस दिन सब कुछ भूल कर अंगूर कि बेटी को अपना लिया,

निखिल ने कहा "

तेरा बदला लेंगे उस धोखेबाज़ से और ज़रूर लेंगे, उतावला मत हो शांति से काम ले , वैसे भी तू क्यों अपनी लाइफ बर्बाद करे, तूने थोड़ी धोखा दिया है, उसने तुझे धोखा दिया है, अपने आप को तू क्यों परेशान कर रहा है, दुःख दे तो ऐसा दे की सारे दुःख फीके लगे उसके सामने, पर ख़ुद को नहीं उस खुदगर्ज को जिसकी वज़ह से तू ये सब भोग रहा है ।"

मेरी आंखों में खून का लाल रंग उतर आया था, सीने में धधक रही थी बदले कि आग, जो कभी दिल में मोहोब्बत की गर्माहट हुआ करती थी , इसलिए मुझे निखिल की बात पूरी तरह से ज़ेहन में उतर पा रही थी,

मै तैयार था मिताली को धोखे की सज़ा देने को,

राहुल तो राहुल ही है , हर काम जुनून के साथ करता है मैंने मन में सोचा।

रात भर उसके लिए प्लान बनाता रहा, सुबह तक प्लान तैयार था, , एक - एक बारीकी ध्यान रखी थी मैंने।,
 
23. अब देख मुझे

अगले दिन मैंने बचाई हुई पॉकेट मनी से एक मोबाईल फोन ख़रीदा, मिताली को कॉल किया, जैसे ही उसकी आवाज़ आई उधर से ,

" हेलो..."

" हाय..."

" आवाज़ पहचानी?" मैंने पूछा।

उसने डर के मारे फोन रख दिया, किस मुंह से बात करती बेचारी, मैंने उसे मैसेज किया,

" एक आखरी बार बात करलो।"

उसने मैसेज में ही रिप्लाई दिया ,

" ओके, कॉल मी "

मैंने कॉल किया उसने बात की,

" बोलो क्या बात करनी थी?" उसने कहा ।

" कुछ नहीं एक आखरी बार आवाज़ सुनना थी , और ???"

" राहुल और के आगे कुछ है बोलने को??"

" हां है, सॉरी उस दिन मॉल में जो कुछ हुआ ।"

" इट्स ओके।"

" सुनो एक बात और है वो ये कि मिताली मै तुमसे दूर नहीं रह सकता, उस दिन की बात का मुझे धक्का तो लगा है बहुत ज़ोरो से लगा है, पर मैंने ठंडे दिमाग से सोचा की ऐसे में मै तुम्हें हमेशा के लिए खो दूंगा , तो क्यों न दोस्त बनकर ही तुम्हारे साथ रहूं जरूरी तो नहीं दो लोगों के बीच शादी और प्यार का ही रिश्ता हो ।"

उसने इस बात के लिए सहमति जताई और कुछ शर्तें रख दी,

" कुणाल को मेरा फोन बिसी आए पसंद नहीं है, तो बीच में कभी भी फोन काट कर उसका फोन अटेंड करूं तो परेशान मत करना बुरा मत मानना, और सुनो संडे हम साथ रहते है उनकी छुट्टी होती है तो फोन मत लगाना,"

ऐसे शब्द सुनकर मेरे आंसू बहते चले जा रहे थे कि कोई इतना कैसे बदल सकता है , मेरे साथ तो मिताली ने हमेशा खुद की शर्त रखी और आज कुणाल के साथ हर बात कुणाल की मानने को तैयार है,

आगे कहा उसने,

"हां समय रहते मैं तुम्हारे बारे में मैं उन्हें बता दूंगी पर तुम कभी कुणाल से रूबरू नहीं होंगे, ये सब प्रॉमिस करते हो तो दोस्ती आगे बढ़े, बोलो है मंजूर?"

मैंने हामी भरी, उधर मिताली से ऐसा लगा जैसे उसकी बहुत बड़ी टेंशन हट गई जो मेरी तरफ से उसे हो रही थी, उसने पुराने अंदाज़ में बाय किया ।

मेरा पूरा ध्यान पढ़ाई से हट गया,दिन पे दिन कोचिंग से तड़ी ले कर मैं मिताली के खाली समय को संभलता जिसमें उससे बातें करके मैं नज़दीक रह सकूं,

असल में मिताली को शहर की हवा अपने साथ बहा ले गई थी, उसकी बातों से ऐसा लगता था कि पहले ही उसे एहसास हो गया हो कि वो डॉक्टर नहीं बन पाएगी,

मेरी वक्त की पाबंदी काम आई, अब थोड़ा समझ में आने लगा था कि गलती असल में मेरी तरफ़ से भी हुई थी इन प्यार के रिश्तों को सींचने के लिए अपना बहुमूल्य समय भी देना होता है, देखो ग़लती सुधरी तो अब हालात भी सुधरते नज़र आ रहे है , पर धोखा बहुत बुरी चीज़ है ये दो जिंदगियों की जान निकाल देता है।,
 
24. मिताली के फ्लैट पर

धीरे - धीर दोस्ती गहरी और गहरी होती चली गई, मिताली हम दोनो के उन प्यार भरे लम्हों को भूल चुकी थी जो उसने नगर से महानगर तक मेरे साथ बिताए थे,

अब मैं उसकी ज़िन्दगी में एक नए रूप में खड़ा था, उसका सबसे अच्छा दोस्त, जो कुणाल और उसके बारे में सुनता समझता और मेरा उसकी हर शर्त पूरी करना उसके मन में मेरे प्रति विश्वास दिला गया, मेरे साथ मिताली बड़ी महफूज़ सा महसूस करती थी,

उसने मुझे कहा कि

"इस संडे तुम फ़्लैट पर आ जाओ , अपनी बातें वैसे भी बहुत लंबी होती है, आमने सामने बैठकर गप्पे लड़ाएंगे।"

" पर कुणाल रहेगें तो?"

" नहीं वो लखनऊ गए है अपने घर , तो कोई टेंशन नहीं।"

"ओके मै आता हूं, पर गर्ल्स हॉस्टल में कैसे आऊंगा?"

" अब मैं वहां नहीं रहती ,बोला तो था फ़्लैट में आने का, मैं कंचन नगर में फ़्लैट में रहती हूं, तुम चौराहे पर पहुंचकर फोन करना मै वहीं लेने आ जाऊंगी।"

" ओके",

कहकर फोन काट दिया मैंने,

फ़्लैट में अकेली रहती है, इसने तो हद ही कर दी , कितनी धोखेबाज लड़की निकली, मेरे साथ साथ अपने मां बाप को भी धोखा दे रही है, पता नहीं कुणाल के साथ कितनी बार प्यास बुझा चुकी होगी, इधर मैं उसके सपने देखता रहा, अच्छा होता उस रात ही सब कुछ कर देता उसके साथ, खैर अब जो हुआ सो हुआ अब आगे बढ़ना है, सब कुछ प्लान के हिसाब से चल रहा था,

मैं संडे को मिताली के फ़्लैट पहुंचा, मेरा शक ग़लत निकला उसके साथ एक और लड़की रहती थी,

मिताली ने उससे मिलवाया,

"ये मेरी रूममेट रूपल है" मुझसे कहा।

" और ये मेरा बेस्ट फ्रेंड राहुल है, हम दोनो एक ही शहर से है।" उसने रूपल को मेरा परिचय दिया।

मन तो कहा हम दोनो कभी हम दोनो एक ही सपने भी देखा करते थे कह दूं पर छोड़ो,

हम तीनों वहां बैठ कर काफी देर तक बातें करते रहे , फिर खाना बनाया और खाया,

मिताली ने कहा,

" हॉस्टल में खाने की बड़ी दिक्कत थी, इसलिए फ्लैट ले लिया।"

" अच्छा , यहां अच्छा है मैं मिलने तो आ सकता हूं।"

उसने भी ताली दे कर ठहाका लगाया,

मिताली की बर्तन साफ करने की बारी थी इसलिए उसने खाना बना कर बर्तन साफ़ किए जब तक मैं और रूपल आगे बालकनी में बैठ कर बातें करते रहे,

" तुम कहां से हो?" मैंने पूछा।

" लखनऊ।"

" ओह! कुणाल भी वहीं से है।"

" हां मेरे कुछ घर छोड़कर ही रहता है।"

अच्छा तो ये थी परेशानी की जड़ जरूर इसी ने इन दोनो का टांका भिड़ाया है,

, मैंने कुछ ही देर में उसे बातचीत में इतना इंप्रेस कर लिया कि हमने एक दूसरे का नम्बर भी ले लिया,

" कुणाल आते होंगे ना यहां?"

" हां आते है ।"

" कब ?"

" संडे , और फिर ये दोनों दिन भर बाहर रहते है, रात को दस बजे घर आते है।"

" अच्छा।"

उतने में मिताली आ गई रूपल उठ कर चली गई हम दोनो कमरे में आकर बात करने लगे,

" वैसे कुणाल से तुम्हारी दोस्ती कब हुई?"

"बर्थडे पार्टी में।"

" किस की?"

" रूपल की।"

सही पकड़ा यही है वो वज़ह ! रूपल ।

" उन्होंने आगे होकर मुझसे बात की और उस दिन मेरी गाड़ी खराब थी तो रूपल ने मुझे हॉस्टल से उन्हें ही कार लेकर लेने भेजा और फिर हमारी बातों का सिलसिला चल पड़ा।"

" ओह ग्रेट ।"

मैंने नकली ख़ुशी ज़ाहिर की,

" यू नो राहुल , बहुत अच्छे है वो बहुत ध्यान रखते है मेरा, मेरे मुंह से निकलने के पहले वो चीज़ मेरी आंखों के सामने होती है सिर्फ उनकी वजह से।"

मैंने मुस्कुरा दिया और कहा,

" तुम बहुत लकी हो जो तुम्हे ऐसा बॉय फ्रेंड मिला।"

" हां शायद, पर उससे भी ज्यादा लकी मै इस मामले में हूं की तुम्हारे जैसा दोस्त मिला है।"

उसने नज़रें नीचे झुकाई और कहा,

" राहुल तुम्हारी जगह कोई और होता ना तो क्या से क्या हो जाता, , थैंक्स राहुल ।"

उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे, इस बार उसके आंसुओ की कीमत मेरे दिल में पानी से भी कम थी, पर मैंने जताया ऐसे की इन अनमोल आंसुओं के गिरने से मै बहुत दुःखी हूं,

देखते ही देखते मिताली मेरे गले लग गई,

" मैंने एक अच्छा प्रेमी ही नहीं पाया बल्कि उससे अच्छा दोस्त भी पाया है अपनी जिंदगी में।" उसने मुझसे कहा।

सन्डे ख़त्म हुआ और मैं अपने रूम पर आ गया, कुछ सुलझी हुई बातें और अनसुलझे किस्से मेरे दिमाग में पैर पसार कर बैठे थे, निखिल से सारी चर्चा होती निखिल खुद के अनुभव मुझे बताता मै अपने दिमाग से और भी अच्छी चालें चलता , इसी तरह मिताली और मेरी दोस्ती ज़मीन से टेक ऑफ कर आसमान में पहुंच चुकी थी।

पर इधर मेरी कोचिंग छूटती जा रही थी, घरवालों को क्या पता था कि बेटा वहां क्या कर रहा है,

मैंने भी सोच लिया कि दूसरे बच्चों की तरह बोलकर दुर हाे जाऊंगा की इंडिया में बहुत कॉम्पिटिशन है, या किस्मत साथ नहीं थी, या फिर सबसे बढ़िया की किस्मत में इससे भी कुछ अच्छा लिखा होगा भगवान ने मेरे लिए।,
 
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