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'सस्स्स्सिईईईईईईईई....'पोप्प्प'!!...आअम्म्म्ममममममम...'
एक पोप की आवाज़ के साथ मेरा लंड पायल की चूत मे से निकल गया. डिन्नर हो गया था. पेट भर के खाना खा लिया था पायल ने.
पायल:उम्म्म...टेस्टी खाना बनाती आंटी तो.
इतना कह के वो मेरी गोदी मे से उठ गयी और मुझे ऐसा लगा जैसे कुछ बोहोत ही ख़ास छिन गया हो मुझसे. मगर मैं कुछ कहता उससे पहले ही पायल बोली;
पायल: हाथ धोकर आती हूँ.
मैने हां मे मंडी हिला दी और पायल को किचन की ओर जाते देखने लगा. चाहे मैं लाख बार भी उसकी गान्ड को क्यूँ ना देख लूँ मगर मेरा जी नही भरता कभी. और भरेगा भी कैसे? थी ही इतनी मादक और रसीली गान्ड पायल की. मैं भी उठा कर वाशबेसिन की ओर चला गया. हाथ धोए और किचन की ओर जाने लगा. किचन मे देखा तो पायल डिशेष वॉश कर रही थी.
मे: अर्रे! रहने दे..कल बाई आएगी तो सॉफ कर देगी.
मगर मेरी बात का जैसे पायल पे कोई फ़र्क ही नही पड़ा हो. वो बिना मुड़े ही बोली;
पायल: 1 तो डिश हैं. उसमे क्या बड़ी बात हैं. 2 मिनट का काम हैं!
मैं सोचने लगा कि किस्मत भी क्या कमाल खेल खेलती हैं. कल तक मैं नेहा के बारे मे सोच सोच कर अपने आपको कोस रहा था और इस बात पर मेरा विश्वास हो गया था कि अब मेरी ज़िंदगी मे कोई लड़की आ ही नही सकती. और आज मेरे किचन मे एक निहायती खूबसूरत लड़की,नंगी, डिशेष धो रही हैं. मैं पायल के साइड मे जाके खड़ा हो गया और उसकी ओर देखने लगा. पायल के डिशेष वॉश करना हो गये तो उसका ख़याल इस बात पे गया.
पायल: क्या देख रहा हैं? पैसे नही माँगने वाली समझ डिशस धोने के..रिलॅक्स!
मैं भी मुस्कुरा दिया पायल की इस बात पे. पायल ने नॅपकिन से हाथ पोंछे और बोली;
पायल: यार! हाथ ड्राइ हो गये हैं. तेरे पास माय्स्चुरिज़र हैं?
मैं पायल की ओर ऐसे देखने लगा जैसे उसने चाइनीस मे कुछ कहा हो.
मे: मेरे पास कहाँ से होगा?
पायल: शिट! रफ लग रही स्किन. बाथ के बाद हमेशा माय्स्चुरिज़र लगाती हूँ मैं. गड़बड़ मे लाना भूल गयी.
मैने पायल के हाथ को थामा और अपने गालो पर घुमाया..
मे: मुझे तो नही लग रहे हर्श या ड्राइ.. स्टिल सॉफ्ट.
वो अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली;
पायल: तू भी ना! देख ना..कहीं होगा तो. प्लीज़!
तभी मुझे कुछ याद आया;
मे: उम्म्म... तू जा उपर, मैं लेकर आता हूँ माय्स्चुरिज़र.
पायल: शॉप से? अरे रहने दे..
मे: नही. .. आकांक्षा के रूम मे हो सखता हैं.
पायल: हां बट उसको बुरा नही लगेगा मैने यूज़ की तो?
मे: बुरा तो तब लगेगा जब उसे पता चलेगा. एक दिन मे ऐसा कितना यूज़ कर लेगी तू?
पायल: ह्म्म्म .वो तो हैं.
मे: जा अब रूम मे. मैं आता हूँ लेकर.
इतना कह कर मैने पायल की गान्ड पर एक हल्की सी चपत मार दी जो वो एक्सपेक्ट कर ही रही थी ऐसा लगा मुझे..
पायल उपर चली गयी. मैने पानी की बॉटल भरी,डोर चेक किया और आकांक्षा के रूम की ओर जाने लगा. आकांक्षा का रूम अनलॉक्ड ही था. मैने रूम खोला और सीधा उसके ड्रेसर के पास चला गया. माय्स्चुरिज़र सामने ही रखा था. मैने वो उठा लिया और चुप चाप रूम से बाहर निकलने ही वाला था. सच कहता हूँ. मगर ये साला खुराफाती लंड. अब इसके आगे कौन्से मर्द की चली हैं जो मेरी चलेगी? मैने सोचा कि अब उस शैतान के रूम मे आ ही गया हूँ तो ज़रा तान्कझाँक भी हो ही जाए. मैने रूम का डोर थोड़ा सा धकेल दिया. अब मैने आकांक्षा के रूम के बारे मे तो आप लोगो को बताया ही हैं. पिंक आंड पिंक ओन्ली. मैने आस पास देखा. एक तरफ उसका स्टडी टेबल था.
मे: हुहह! पड़े पड़े सड़ रहा हैं टेबल.. यूज़ तो कभी करती नही होगी मेडम.
एक पोप की आवाज़ के साथ मेरा लंड पायल की चूत मे से निकल गया. डिन्नर हो गया था. पेट भर के खाना खा लिया था पायल ने.
पायल:उम्म्म...टेस्टी खाना बनाती आंटी तो.
इतना कह के वो मेरी गोदी मे से उठ गयी और मुझे ऐसा लगा जैसे कुछ बोहोत ही ख़ास छिन गया हो मुझसे. मगर मैं कुछ कहता उससे पहले ही पायल बोली;
पायल: हाथ धोकर आती हूँ.
मैने हां मे मंडी हिला दी और पायल को किचन की ओर जाते देखने लगा. चाहे मैं लाख बार भी उसकी गान्ड को क्यूँ ना देख लूँ मगर मेरा जी नही भरता कभी. और भरेगा भी कैसे? थी ही इतनी मादक और रसीली गान्ड पायल की. मैं भी उठा कर वाशबेसिन की ओर चला गया. हाथ धोए और किचन की ओर जाने लगा. किचन मे देखा तो पायल डिशेष वॉश कर रही थी.
मे: अर्रे! रहने दे..कल बाई आएगी तो सॉफ कर देगी.
मगर मेरी बात का जैसे पायल पे कोई फ़र्क ही नही पड़ा हो. वो बिना मुड़े ही बोली;
पायल: 1 तो डिश हैं. उसमे क्या बड़ी बात हैं. 2 मिनट का काम हैं!
मैं सोचने लगा कि किस्मत भी क्या कमाल खेल खेलती हैं. कल तक मैं नेहा के बारे मे सोच सोच कर अपने आपको कोस रहा था और इस बात पर मेरा विश्वास हो गया था कि अब मेरी ज़िंदगी मे कोई लड़की आ ही नही सकती. और आज मेरे किचन मे एक निहायती खूबसूरत लड़की,नंगी, डिशेष धो रही हैं. मैं पायल के साइड मे जाके खड़ा हो गया और उसकी ओर देखने लगा. पायल के डिशेष वॉश करना हो गये तो उसका ख़याल इस बात पे गया.
पायल: क्या देख रहा हैं? पैसे नही माँगने वाली समझ डिशस धोने के..रिलॅक्स!
मैं भी मुस्कुरा दिया पायल की इस बात पे. पायल ने नॅपकिन से हाथ पोंछे और बोली;
पायल: यार! हाथ ड्राइ हो गये हैं. तेरे पास माय्स्चुरिज़र हैं?
मैं पायल की ओर ऐसे देखने लगा जैसे उसने चाइनीस मे कुछ कहा हो.
मे: मेरे पास कहाँ से होगा?
पायल: शिट! रफ लग रही स्किन. बाथ के बाद हमेशा माय्स्चुरिज़र लगाती हूँ मैं. गड़बड़ मे लाना भूल गयी.
मैने पायल के हाथ को थामा और अपने गालो पर घुमाया..
मे: मुझे तो नही लग रहे हर्श या ड्राइ.. स्टिल सॉफ्ट.
वो अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली;
पायल: तू भी ना! देख ना..कहीं होगा तो. प्लीज़!
तभी मुझे कुछ याद आया;
मे: उम्म्म... तू जा उपर, मैं लेकर आता हूँ माय्स्चुरिज़र.
पायल: शॉप से? अरे रहने दे..
मे: नही. .. आकांक्षा के रूम मे हो सखता हैं.
पायल: हां बट उसको बुरा नही लगेगा मैने यूज़ की तो?
मे: बुरा तो तब लगेगा जब उसे पता चलेगा. एक दिन मे ऐसा कितना यूज़ कर लेगी तू?
पायल: ह्म्म्म .वो तो हैं.
मे: जा अब रूम मे. मैं आता हूँ लेकर.
इतना कह कर मैने पायल की गान्ड पर एक हल्की सी चपत मार दी जो वो एक्सपेक्ट कर ही रही थी ऐसा लगा मुझे..
पायल उपर चली गयी. मैने पानी की बॉटल भरी,डोर चेक किया और आकांक्षा के रूम की ओर जाने लगा. आकांक्षा का रूम अनलॉक्ड ही था. मैने रूम खोला और सीधा उसके ड्रेसर के पास चला गया. माय्स्चुरिज़र सामने ही रखा था. मैने वो उठा लिया और चुप चाप रूम से बाहर निकलने ही वाला था. सच कहता हूँ. मगर ये साला खुराफाती लंड. अब इसके आगे कौन्से मर्द की चली हैं जो मेरी चलेगी? मैने सोचा कि अब उस शैतान के रूम मे आ ही गया हूँ तो ज़रा तान्कझाँक भी हो ही जाए. मैने रूम का डोर थोड़ा सा धकेल दिया. अब मैने आकांक्षा के रूम के बारे मे तो आप लोगो को बताया ही हैं. पिंक आंड पिंक ओन्ली. मैने आस पास देखा. एक तरफ उसका स्टडी टेबल था.
मे: हुहह! पड़े पड़े सड़ रहा हैं टेबल.. यूज़ तो कभी करती नही होगी मेडम.