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बेनाम सी जिंदगी compleet

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आकांक्षा की डायरी पढ़ कर तो ऐसा लग रहा था कि एक लड़की होना कितना मुश्किल हैं. अपने तो क्या खाली लंड ही संभालना पड़ता है. खून तो नही निकलता ना?

मैं जैसे जैसे आगे पढ़ते गया मुझे ऐसा एहसास होने लगा कि मैं किसी बिल्कुल अंजानी लड़की के बारे मे पढ़ रहा हूँ नाकी अपनी सग़ी,छोटी बेहन के बारे मे. वो क्या सोचती हैं? क्यू सोचती हैं? क्या चाहती हैं? हां! सिर्फ़ मेरे और उसके रिश्ते के बारे मे मैं सही था कि वो मुझे हेट करती हैं. उतना ही जितना मैं उसे हेट करता हूँ. या करता था?? मैं अपने आपसे ही पूछने लगा. उसके सपने, उसके दिल मे किसके लिए क्या चलता हैं, वो किसके बारे मे क्या सोचती हैं ये पढ़ कर मुझे एक अजीब सी फीलिंग आने लगी. जैसा की आप जानते हैं कि मैं और वो कभी भी आपस मे बात नही करते थे. क्या इसलिए मैं वो, असली मे कुछ बिल्कुल भी नही जानता? मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था मगर एक दिलासा था कि सिर्फ़ मैं नही, आकांक्षा भी मुझसे बात नही करती. दोनो सगे भाई बेहन होकर भी एक दूसरे से इतना अंजान थे हम.

मे: आगे पढ़ा जाए..

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आज मेरा पीरियड स्टार्ट हुआ. मम्मी ने जो ट्रैनिंग दी थी अब समझ आई कि क्यू दी थी? पॅड खून के लिए लगाया जाता हैं. सुबह बाथरूम मे टाँगो के बीच खून देख कर मैं डर गयी. मगर मैं ये एक्सपेक्ट ही कर रही थी. मुझे फिर भी थोड़ा सा रोना आ गया. मगर अब मैं बड़ी हो गयी हूँ. बात बात पे रो नही सकती. आटीस्ट सबके सामने तो नही. इन कुछ दिनो मे मुझे कयि सारी बाते पता चली. मुझमे कैसे कैसे चेंजस आएगे और अब क्या क्या झेलना होगा. तक़लीफ़ से कम नही लग रहा मुझे ये कुछ. कल ही निशा से बात की इस बारे मे. निशा मुझसे कुछ मंत्स बड़ी हैं तो वो जानती हैं काफ़ी चीज़े. सर्प्राइज़िंग्ली! निशा को कोई तक़लीफ़ महसूस नही होती इस बारे मे. उल्टा वो तो काफ़ी खुश लगती हैं. हम कल रिसेस मे बैठे थे कॅंटीन के बाहर.

निशा: अर्रे यार, अककु..! तू भी ना! फालतू मे टेन्षन ले रही. बेस्ट टाइम हैं ये अपनी लाइफ का बेबी.. एंजाय कर.

आकांक्षा : क्या खाक एंजाय करू निशा?? परेशान हो गयी हूँ मैं इस सब से. मुझे नही होना बड़ा. तुझे पता भी हैं कि कितना दर्द होता हैं उस टाइम?

निशा: किस टाइम?

आकांक्षा : अर्रे वोही.. जो मुझे हुआ था कुछ दिनो पहले.

निशा: अया...पीरियड? ऐसा बोल ना बुद्धू..

आकांक्षा : हां वोही..

मैने याद करते हुए कहा कि मम्मी ने भी कही थी इन्हे पीरियड्स कहते हैं. मैं ज़मीन पर बैठ कर अपने घुटने पे सिर रख कर बैठ गयी. निशा मेरे साइड मे मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोली;

निशा: अर्रे मेरी रानी.. ऐसा कुछ नही.. अच्छा चल! एक सीक्रेट बताऊ?

आकांक्षा : ह्म्म्म्म ??

निशा मेरे एक दम करीब आकर बोली;

निशा: मेरा अभी पीरियड चल रहा हैं.

मैं उसकी बात सुनके चौंक सी गयी.

आकांक्षा : म..एम्म..मगर कैसे? और.. ब्लड?? पेन?? तू ठीक तो हैं ना?

निशा मुझे शांत करते हुए बोली;

निशा: अर्रे शांत होज़ा!! शांत होज़ा.. चल मेरे साथ.. दिखाती हूँ तुझे कुछ.

मैं कुछ कहती उससे पहले ही निशा मुझे खीचते हुए टाय्लेट मे लेकर आई.

आकांक्षा: क्या??

निशा: शूऊ!!! कीप क्वाइट.

हम कुछ देर ऐसी ही टाय्लेट मे खड़े रहे. निशा अपने बाल ठीक कर रही थी, हाथ धो रही थी. इन शॉर्ट टीपी कर रहे थे. लोल! कुछ देर बाद टाय्लेट मे की सारी लड़किया एक एक करके जाने लगी. हम ऐसे दिखा रहे थे कि कुछ बात कर रहे हैं..... जब टाय्लेट मे से सब गर्ल्स चली गयी, निशा ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे एक टाय्लेट स्टॉल मे ले गयी और डोर लॉक कर दिया..

मे: अर्रे क्या कर रही हैं तू? पागल हो गयी क्या? जाने दे मुझे.. सरक!

निशा ने जैसी मेरी बात सुनी ही नही और मेरे कंधो पे हाथ रख कर मुझे ज़बरदस्ती कॉमोड पर बैठा दी. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था मगर निशा को देख कर सॉफ पता चल रहा था कि उसके दिमाग़ मे कुछ चल रहा हैं. मैने सोचा कि चलो देख ही लेते हैं क्या हैं तो और तभी निशा ने झट्से अपनी स्कर्ट उपर उठा दी..

आकांक्षा : सस्शीई!! पागल.. नीचे कर..

निशा: शट अप! देख चुप चाप.

मैने अपनी गर्दन मोड़ ली तो निशा ने एक हाथ से मेरी नज़र फिर से उसकी स्कर्ट की तरफ ज़बरदस्ती घुमा दी. मैं देखने लगी. ऑफ-वाइट कलर की पैंटी पहनी थी उसने जिसपे फ्लवर्स का डिज़ाइन था. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा हैं ये सब? मैं बस निशा की पैंटी को देखे जा रही थी. उसकी गोरी गोरी थाइस पर बोहोत जच रही थी पैंटी. उतने मे ही;

निशा: अबे पैंटी देखने नही बोली मैने तुझे.. पहली बार देख रही क्या? अंदर देख..

आकांक्षा : हुहह?

निशा: ओफफफूओ!!

इतना कह कर निशा ने मेरा हाथ पकड़ कर उसकी पैंटी के ठीक बीच मे ले गयी. मेरा हाथ काँप रहा था. पता नही क्यूँ? पसीना आएगा ऐसा लग रहा था मगर आ नही रहा था, दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. चेस्ट मे कुछ अजीब ही खिचावट महसूस हो रही थी. मैं बोहोत डर रही थी. ये सब क्या हो रहा हैं मुझे?? मैं अपने ही ख़यालो मे थी तो निशा बोली;

निशा: देखी??

मैने अपने हाथ से निशा की पैंटी चेक की..बहुत ही सॉफ्ट लग रही थी. इतनी सॉफ्ट तो नही होती पैंटी. मेरी तो नही थी. मैं कुछ समझी नही ये बात देख कर निशा ने मेरा हाथ छोड़ दिया. मैं तुरंत हाथ निकाल ली. निशा ने अपनी स्कर्ट भी नीचे करली और बाहर चली गयी. मैं पुतले जैसी वही बैठी रही और कुछ वक़्त मे निकल कर;

आकांक्षा: क्या दिखा रही थी तू? मुझे कुछ समझ नही आ रहा.

निशा: उल्लू!! पॅड पहनी हूँ मैं..

आकांक्षा : स्कूल मे??

निशा: हाँ तो यही तो फ़ायदा हैं. कही भी पहन सकते हो.. पता भी नही चलता कि पहना हैं कुछ. सिंपल.. देख बेबी, पहली बार मैं भी डर गयी थी ब्लड देख कर.मगर तू मत डर. मुझे दीदी ने समझाया और मैं तुझे समझा रही हूँ. पेन के लिए पिल्स भी मिलती है. तेरी मम्मी से बोल, ला देगी वो.कुछ नही होता. ओके?

आकांक्षा : ह्म्म्मा...ओके..

निशा: अरे अब क्या चल रहा दिमाग़ मे तेरे? कुछ पूछना हैं और?

आकांक्षा : हां.. वो... वो...

निशा: हां पूछ ना!

 
इतना कह कर निशा मेरे एक दम करीब आ गयी. इतने करीब कि उसके साँसे महसूस कर पा रही थी मैं. मुझे कुछ अजीब लग रहा था. मगर मैने ध्यान नही दी.

आकांक्षा : वो.. उधर... वहाँ.. ब...ब्ब..बाल भी आते हैं?

मेरी बात पे निशा ज़ोर्से हँस पड़ी. मुझे तो कुछ समझा नही. मैने कुछ फन्नी तो कहा नही थी. जब उसका हँसना हो गया तो वो मेरे गले मे अपने दोनो बाहे डाल कर बोली;

निशा: हां बेबी! आते हैं ना. और सिर्फ़ वहाँ नही.. यहा भी आते हैं..

निशा ने उसकी बगलो की ऑर इशारा करते हुए कहा. और उसे ऐसा लगा कि जैसे मुझे समझा नही तो उसने झट से अपना हाथ उपर किया,उसकी शर्ट की बाह को एक दम पीछे ली, कंधो तक और बोली;

निशा: सी?

मैं घूर रही थी निशा की बाँह को. मुझसे कही ज़्यादा बाल थे उसके. उसकी गोरी बाहो मे काले काले बाल आ गये थे. मुझे तो भी उसके 10% भी नही थे.

निशा: दोनो जगह पर बाल आते हैं. इतना ही नही, हम अब जैसे जैसे बड़ी होगी वैसे वैसे हमारे टॉप छोटे होने लगेगे हमें..

मैं निशा की बात समझ गयी और शरमा के नीचे देखने लगी..

निशा: आहे हाए मेरी शर्मीली..

निशा मुझे छेड़ने लगी..

निशा: तुझे कुछ भी बात करनी हो तो मुझसे बोल. अगर तेरे काम नही आई तो क्या खाक बेस्ट फरन्ड मैं तेरी?

आकांक्षा : थॅंक्स यार!

हम दोनो ने एक दूसरे को हग किए.. मुझे बोहोत अच्छा लग रहा था कि निशा जैसी दोस्त हैं मेरी जो समझती हैं मुझे और हेल्प भी करना चाहती हैं. कुछ देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए तो वो बोली;

निशा: उम्म्म.. तू कुछ जल्दी ही बड़ी हो रही हैं लगता.

और वो मेरी चेस्ट की ओर घूर्ने लगी. इससे पहले मैं कुछ कहती या करती निशा का हाथ मेरी चेस्ट पे आ गया और थोड़ा सा प्रेशर देते हुए वो मुझसे बोली;

आकांक्षा : जल्दी ही खर्चा करना पड़ेगा तेरे कपड़ो पे..

निशा का हाथ मेरे चेस्ट पर आते ही जैसे मुझे कुछ चुभा अंदर.. करेंट लगा ऐसा. आखे ज़रा धुंधली हो गयी कुछ सेकेंड्स के लिए. और वोही फीलिंग आने लगी जो कुछ देर पहले टाय्लेट स्टॉल मे आ रही थी. मगर पहले से स्ट्रॉंग. लेग्स भी अजीब से फील होने लगे, जैसे की कोई गुड़गुली कर रहा हैं टाँगो मे.. सच कहूँ तो टाँगो के बीच मे. मैं ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगी. कुछ देर मे मूह धोकर हम टाय्लेट से निकल आए. घर आते वक़्त भी मुझे अजीब लग रहा था. ऐसा लग रहा था कि थोड़ी सी हवा मे हूँ. और पैरो के बीच ख़ास कर के ऐसा लग रहा था कि जैसे....जैसे.. जैसे आज ही आक्टिव हुई हूँ मैं.

जान महसूस हो रही थी टाँगो के बीच. घर आई और सीधा रूम मे आकर मैं बेड पर लेट गयी. अब भी दिल तोड़ा तेज़ी से धड़क रहा था.पेट मे गुड़गुली हो रही थी. मेरे पैर अपने आप ही हिल रहे थे और तभी मुझे कुछ एहसास हुआ. मैं बेड पर से उठ गयी, खड़ी हो गयी और मिरर के सामने जाकर स्कर्ट को कमर तक उपर उठा कर देखी तो पता नही मगर मेरी पैंटी के बीच पानी कहाँ से आ गया? क्योकि थोड़ी सी भीग गयी थी पैंटी...

मैने डाइयरी साइड मे रखी. नॅचुरली, लंड बाबा तो उठ कर खड़े हो चुके थे. आकांक्षा की चढ़ती जवानी के बारे मे खुद उसीके शब्दो मे सुनने के बाद मेरा लंड बिल्कुल सल्यूट कर रहा था मुझे. मज़ा आ गया पढ़के उसकी डाइयरी. अब तो रोक पाना मुश्किल ही था....

'सम्राट!!??'

मे: शिट!!

मैं तो भूल ही गया कि पायल उपर सो रही हैं. मैने जल्दी से डाइयरी छुपा दी सोफे के नीचे. अगर पायल मुझे देख लेती तब तो मेरी बाट लग जाते. अच्छा हुआ एक ही डाइयरी लेकर आया था मैं.

मैं फट से उपर की ओर भागा ऑर अपनी रूम का डोर अनलॉक कर दिया. पायल दरवाजा ठोक रही थी. डोर खोलते ही वो बाहर आई;

पायल: कब से आवाज़ दे रही हूँ? मर गया था क्या? और ये डोर क्यू लॉक कर दिया.......

वो आगे बोलने से पहले ही रुक गयी और मेरे लंड की ओर देखने लगी. मेरा लंड 90 के आंगल मे खड़ा था..

पायल: हे भगवाअनन!!! क्या करू मैं तेरा? दिन रात ऐसा ही रहता है क्या?

 


मैने नीचे देखा. अब मैं पायल को समझाऊ तो कैसे कि लंड सुबह सुबह खड़ा क्यू था? मैने कुछ सोचा और कहा;

मे: मैं कुछ नही कर सकता. सभी लड़को का प्राब्लम हैं ये? सच कहूँ तो श्राप हैं. हर रोज़ सुबह सुबह ऐसा ही हाल होता हैं. 1-2 घंटो तक तो खड़ा रहता ही हैं इस तरह से. नॅचुरल हैं ये.

पायल की शक़्ल देख कर लग तो नही रहा था कि वो मेरी बात मान गयी मगर फिर भी उसने आखे मटकाते हुए चुप रहना ही ठीक समझा.

पायल: अच्छा सरक साइड मे अब! लेट हो गया एक तो..

इतना कह के वो मुझसे घिसते हुए बाथरूम की ओर जाने लगी. ऑफ कोर्स नंगी!

मे: अब तू ऐसा करेगी तो ये कुछ शांत नही बैठने वाला. वैसे ही क्या कम हार्ड हैं जो तू सुबह सुबह ऐसी जन्नत दिखा रही है..

पायल चलते चलते मूडी और मुझे जीभ दिखा कर बाथरूम मे घुस गयी. एक तो आकांक्षा की डाइयरी और पायल की सुहानी गान्ड. एक लंड भला कितना कुछ सहेगा? कुछ तो राहत मिलनी चाहिए ना? सो मैं भी पायल के पीछ पीछे बाथरूम की ओर चला गया. वो डोर बंद ही करने वाली थी उतने मे मैने अपनी टाँग अड़ा दी बीच मे..

पायल: पतच्छ.. क्या कर रहा हैं? बंद करने दे ना..

मैने डोर को थोड़ा और पीछे खोलते हुए कहा;

मे: हमारे घर मे रूल हैं.. सुबह सुबह कोई बाथरूम का डोर बंद नही करता. माइ होम, माइ रूल्स.

पायल: अहहहाहा...! बकवास ना कर और जाने दे... प्लीज़...ज़ोर की आई हैं..

मे: कॉन ज़ोर की आई है?

पायल अपनी छोटी उंगली दिखाते हुए इशारा करने लगी.

मे: हाँ तो कर ना! मैने कब मना किया? इसमे डोर क्यूँ लॉक करना पड़ता है?

पायल: सम्राट.. मार खाएगा तू सुबह सुबह

पायल अपने दाँत पीसते हुए बोली;

मे: कोशिश करले.

पायल ने फाइनली हार मान ली.

पायल: ठीक हैं.. अब क्या छुपाना.. देख ले मुझे सूसू जाते हुए.. कमीना हैं एक नंबर का तू..

वो डोर के पीछे से हट गयी. और सीधा जाकर कॉमोड पे बैठ गयी. मैं डोर से कंधा टिका कर खड़ा हो गया.. मैने असली मे कभी किसी लड़की को सूसू जाते नही देखा था. आज फर्स्ट टाइम था. टू बी ऑनेस्ट मुझे तो समझ ही नही आता कि इनका मेकॅनिसम कैसा हैं. मूतने के लिए एक होल स्पेशल.. पता नही क्या सीन हैं तो! बट मेरे सामने का सीन बड़ा फन्नी था. अब कुछ देर पहले पायल को ज़ोर की लगी थी. मगर अभी ऑलमोस्ट 1 मिनट हो गया था.. नो सूसू..

मे: क्यू मेडम?! क्या हुआ?

पायल: चुप कर कुत्ते.. सब तेरी वजह से हैं.. जा ना.. प्लीज़..

मैं वही खड़ा रहा..

मे: ओह्ह्ह! पर्फॉर्मेन्स इश्यू.. कोई बात नही.. वेट कर लेते हैं..

पायल: यार! क्या दुश्मनी हैं तेरी मुझसे..

मे: प्यार हैं पगली ये तो..

पायल: ये क्या प्यार? सूसू करने नही दे रहा.. शिट!! अब नही होगी..

तभी मुझे कुछ याद आया..

मे: सूसू करनी हैं?

पायल: नही.. भजिए तलने हैं..

मे: हाहाहा!! सच्ची करनी हैं?

पायल: देख! मार खाने तो तू वाला हैं ही.. सो चुप बैठ अब.!

मे: अर्रे बोल ना!

पायल: हाँ.. करनी हैं.. तो? जा अब यहाँ से.

मैं बाथरूम मे चला गया और पायल के हाथ पकड़ के उसे खड़ा कर दिया.. ये मैने एक पॉर्न मे देखा था. बड़ा सेक्सी लगा था मुझे..

पायल: क्या कर रहा हैं?

मे: आज तुझे सुसू करता हुआ.. इतना सूसू करेगी तू आज कि 2 दिन नही कर पाएगी

पायल: हुहह??

मैने उसे अनसुना कर दिया और जब पायल खड़ी हो गयी तब;

मे: टर्न अराउंड प्लीज़..

पायल: व्हाट दा फक आर यू डूयिंग?

मे: अभी पता चल जाएगा..

इतना कह के मैने सीधा पायल की चूत पर अपना लंड टिका दिया.. अब सुबह सुबह अपना लंड खड़ा होता हैं, मगर लड़कियो की चूत नॉर्मल ही रहती हैं. नॅचुरली अचानक लंड महसूस होने से पायल चौंक गयी और वो मेरी ओर मूढ़ कर बोली;

पायल: क्या कमिनपन्ति हैं यार ये? एनफ नाउ! जा अब. सीरीयस हूँ मैं. दिन भर तुझे यही सूझता क्या? गेट आउट..

मे: शूऊ!! डू यू ट्रस्ट मी?

पायल: आइ साइड गेट आउट... जा अब

मे: डू यू ट्रस्ट मी?

 


पायल कुछ बोली नही. मैं समझ गया जवाब क्या हैं.. मैं हाथ से उसे पलटने का इशारा किया और दोबारा से लंड उसकी चूत पे लगा दिया. वो ज़रा सी सिहर सी गयी. मैने धीमे से अपना लंड उसकी चूत पर घिसना शुरू किया.. उपर नीचे.. उपर नीचे.. असर सॉफ था. पायल की साँस तेज़ होने लगी और कुछ 1 मिनट बाद उसकी चूत भी भीग गयी.. सिसकिया निकलने लगी.. सफिशियेंट गीली हो गयी थी चूत. मैने पायल की कमर को पीछे की ओर खीचा और उसे हाथ को फ्लश टॅंक के उपर रखने को कहा. अभी पायल थोड़ी घुस्से मे ही थी मगर को-ऑपरेट कर रही थी.मैने थोड़ा सा थूक लंड पे लगाया और एक तगड़े झट्के से लंड को पायल की चूत मे पेल दिया..

पायल: सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्साआआआआआआआआआआहह....उूउउम्म्म्मममम..

पायल की मखमली चूत को मेरे लंड ने गुड मॉर्निंग कह दिया.. एक बार लंड अंदर घुस जाए तो काम ख़त्म करके ही निकलता हैं, ये बात तो लड़किया भी जानती हैं. और पायल को भी अच्छा लगने लगा जैसे जैसे मैं झट्के मारते गया..

मे: आ..आह.आह.आह.आह..आह...इसिस्स..अहहहहः..

ठप ठप की आवाज़ बाथरूम मे जल्द ही गूंजने लगी. कुछ मिनट मे ही पायल की सिसकिया मोन्स मे बदल गयी.

पायल: उम्म्म्म......म्म्म्मचमममममम...अयाया...आआआहह... आाआईयईईई.......आआई..आआई..आऐईयईईईई...आआ..ययइईईसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...

मैं स्पीड बढ़ाता गया और धक्के मारता गया..

पायल: आआआआआ........आआआआआवउुुुुुुुुुुुुुुुुुउउम्म्म्मममममममममममममममम.... यस..यस..यस..येस्स्स.स.........आआआआआअहगगगगगगगगगगगग..

पायल अब अपनी कमर हिलाने लगी थी. कुछ ही देर मे उसका ऑर्गॅज़म आने ही वाला था.. बट इस बार उसे ज़्यादा स्ट्रॉंग ऑर्गॅज़म महसूस होगा..

मैं लंबे धक्के मारने लगा और अब पायल नज़दीक आ रही थी ऑर्गॅज़म के.. मैने उसकी कमर को जाकड़ लिया...क्योकि मैं जानता था कि कुछ देर मे पायल मुझसे दूर जाने की कोशिश करेगी ही. मैने स्पीड बढ़ा दी.

पायल: आआआआहह.. आ...आआआआअहह...उउउम्म्म्मम... या..या.....य्ाआअ.... आआआआआआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.....!!!!!! सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्साआआआआआआआआअम्ररररराआाटतततत्त.... आआ.. आौ.अओ..आौ...आआआआवउ.....म्म्म्मईममममाआआआआआअ.....

पायल की ऑर्गॅज़म की चीखे पूरे घर मे घूमने लगी. नॉर्मली मैं भी अब तक झड जाता हूँ मगर अभी काफ़ी कंट्रोल से मैं रुका था. पायल का ऑर्गॅज़म होने के बाद भी मैं नही रुका और झट्के मारते गया. पायल की चूत इतनी सेन्सिटिव हो गयी थी कि मेरा छोटा सा झट्का भी उसे कुछ अजीब फील हो रहा था और मैं तो पूरा लंड पेल रहा था अंदर..

पायल: सस्स्टूप्प....एयाया...स्स्टोप... सम्राट....स्टॉप.... रुक्क...अया.....आअहह...

 


मैं नही रुका और झट्के मारते गया. जैसा सोचा था पायल मेरी कमर पे अपने हाथ पीछे करके धकेलने लगी अपने आपको मुझसे अलग करने के लिए. मगर मेरी पकड़ मज़बूत थी. मैं झट्के मारते गया और सिर्फ़ 10 वे झट्के पर ही;

पायल: स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्साआआआआआआआआआआआआआआआआआआआऐईईईईईईई उूुुउउइईईईईईईईईईईईईईईईई

'फिसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स' की लंबी आवाज़ के पायल की चूत ने मूत की पिचकारी छोड़ दी. उसका मूत सीधा मेरे लंड पे आ गया. गरम मूत और गरम चूत.. समझ जाओ दोस्तो.. मैने उसी सेकेंड लंड बाहर निकाल के पीचकारी पायल की गान्ड पे छोड़ दी और पायल की टांगे डगमगाने लगी और वो सीधा जाकर कॉमोड पे बैठ गयी.. उसका सारा मूत बाथरूम मे फैल गया. मैं तो जैसे नहा लिया उसके मूत मे टाँगो के नीचे तक. पायल बेहद ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी. जैसे हार्ट अटॅक आया हो. पॉर्न मे देखा था तभी मैं समझ गया था कि अगर लड़की मूत दी चोद्ते वक़्त, मतलब उसे बेहद ही स्ट्रॉंग ऑर्गॅज़म हुआ हैं. और सच ही था. पायल पूरे 5 मिनट तक कॉमोड के उपर बेजान होकर पड़ी रही और मैं पीछे की वॉल से टिक कर खड़ा था. कुछ देर बाद जब होश ठिकाने आए तो मैं नीचे झुक कर पायल की पीठ पर चूमने लगा और उसकी कमर से उसे पकड़ कर उसे उपर उठाया और अपनी तरफ उसे घुमाया. पायल के होंठो पर एक मंद मुस्कान थी. साँसे अब भी तेज़ थी मगर मैं समझ गया कि ये बोहोत सॅटिस्फाइ हो गयी हैं अभी. वो मेरे सीने पर पैर टिका कर खड़ी थी और मेरे हाथ उसकी गान्ड पर घूम रहे थे धीरे धीरे. 5 मिनट के साइलेन्स के बाद वो बोली;

पायल: सच कहा था तूने. अब तो 2 दिन तक नो सूसू...

हम हँसने लगे. मैने पीछे शवर ऑन कर दिया और पानी हमारे जिस्मो के बीच से बहने लगा.

कहते हैं जो होता हैं अच्छे के लिए ही होता हैं. मैं पहले इस बात को कभी नही मानता था. क्योकि जब भी कुछ होता, मेरी गान्ड चुद ही जाती थी. मगर अब लगता हैं कि सच ही कहते हैं. नेहा से ब्रेक अप के बाद उस वक़्त तो लगा नही था कि कभी मैं लाइफ मे सच मे खुश रह पाउन्गा या नही. मगर आज ऐसा लग रहा हैं कि, “नही यार! लाइफ सही हैं. टेन्षन नही हैं!”. बाथरूम सेक्स के बाद हम साथ मे ही नहाए. पायल रेडी होकर कुछ ही देर मे चली गयी. जाने से पहले मेन डोर पे हम ने एक बड़ा ही पॅशनेट किस शेयर किया. उसे जाते हुए देख रहा तो लगा कि साला इस गान्ड को कितना भी क्यू ना प्यार कर लूँ, चाट लूँ, मार लूँ,... कम ही हैं. पायल की गान्ड के ख़यालो मे ही मैं घर मे वापिस आ गया.

मैं अब भी डिसाइड कर रहा था कि आज कॉलेज जाना हैं या नही? पायल जाते जाते ऑर्डर देकर गयी की चुप चाप कॉलेज आ. मैं टोपी पहनते हुए हाँ कर दिया मगर सच कहूँ तो मेरा तो मूड आज सिर्फ़ आकांक्षा की डाइयरी पढ़ने का हैं. एक अनोखी सी एग्ज़ाइट्मेंट थी एक जवान होती लड़की के दिल और दिमाग़ मे क्या चल रहा हैं ये जानने की. ख़ासकर जब वो आपकी बेहन हो. मैने सोचा जाने दो आज कॉलेज.. कॅन्सल. वैसे भी कुछ ख़ास तो चल रहा हैं नही. क्यू टाइम वेस्ट करना. मैने मैने डोर अच्छे से लॉक कर दिया. कपड़े तो क्या, सिर्फ़ एक शॉर्ट पहनी थी. एक झट्के मे निकाल कर सोफे पर फेक दी और आकांक्षा की डाइयरी लेकर सीधा अपने रूम मे जाने ही वाला था कि मैं आकांक्षा की रूम की ओर मूड गया. सोचा कि क्यू ना उसके ही रूम मे उसकी डाइयरी पढ़ी जाए. और सेकंड्ली आकांक्षा के रूम मे नंगा होकर, उसकी डाइयरी पढ़ने मे और डेफनेट्ली उसकी ही पैंटी लेकर मूठ मारने मे जो मज़ा आता वो मैं मिस नही करना चाहता था. सो मैं आकांक्षा की रूम मे चला गया और उसके बेड पर जाकर सेट्ल हो गया.

 
लड़कियो के रूम मे हमेशा एक कंफर्ट होता हैं. सॉफ्ट सॉफ्ट चीज़े, धीमी सी एक खुश्बू. अब आकांक्षा कल से घर मे नही थी. मगर फिर भी स्मेल अब भी थी जैसे उसकी. लंड सेमी हार्ड तो था ही. आज कल बैठने का नाम ही नही ले रहा लंड. थोड़ा थोड़ा खड़ा होता ही हैं हर टाइम. मैने फिर से डाइयरी पढ़ना स्टार्ट कर दिया. अगेन कुछ दिनो तक कुछ इंट्रेस्टिंग नही दिखा. यूषुयल बाते, स्कूल, पढ़ाई, राजीव के बारे मे, कहीं लिखा था कि वो डॉक्टर बनना चाहती हैं.. मैं फटाफट सब पढ़ते गया जब तक एक दिन;

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आज मैं बोहोत ही एंबरएस्स हो गयी हूँ. मेरी लाइफ का सबसे बुरा दिन था आज. पता नही कैसे अपना मूह दिखा पाउन्गी अब मैं सबके सामने. आज थर्स्डे था तो स्कूल मे आज सिविल ड्रेस पहनने की पर्मिशन रहती हैं. मैं आज लास्ट वीक खरीदा हुआ टॉप पहन कर गयी थी. वाइट कलर का टॉप और ब्लू कलर की जीन्स. मुझे बोहोत पसन्द हैं वो टॉप. मैं चाहती थी कि राजीव मुझे देखे इस आउटफिट मे इसलिए मैं आज पहली बार थोड़ा सा मेक अप भी करके गयी थी. मैं स्कूल पहुँच और क्लास मे एंटर होते ही राजीव की नज़र मुझ पर पड़ी. मैं देख कर ही समझ गयी कि वो मुझे देख रहा हैं और फिर उसने मुझे स्माइल भी दी. मैं बोहोत खुश हुई और निशा के पास चली गयी.

निशा: ओये होये! आज तो मार ही डालेगी तू.

आकांक्षा: चुप कर! गेस व्हाट? उसने मुझे आते ही देखा और स्माइल भी दी.

निशा: तो? कौनसी बड़ी बात हैं? आज तो तुझे कोई भी लड़का देखेगा तो स्माइल तो क्या पप्पी भी दे देगा!

निशा ने मुझे छेड़ते हुए कहा. मैं शरमा गयी. क्या सच मे इतनी सुंदर दिख रही थी मैं आज? मुझे नही पता. निशा तो ऐसे ही कहती रहती हैं हमेशा. पागल हैं वो! क्लास शुरू हो गयी. रिसेस मे हम ने लंच कर लिया और मैं वॉशरूम की ओर चली गयी. टाय्लेट की और जब हाथ धोने गयी तो मैने मिरर मे अपने आप को देखा. और भी गर्ल्स थी टाय्लेट मे. मैं उनसे अपने आप को कंपेर करने लगी. कोई मोटी, कोई काली, कोई भद्धि, कोई एक दम दुबली... और मैने अपने आपको देखा. निशा सच ही कहती हैं शायद. मैं एक दम गोरी हूँ, गोल चेहरा हैं मेरा. काले रेशम जैसे बाल और बड़ी बड़ी आखे. बाकी गर्ल्स से तो मैं बोहोत सुंदर दिख रही थी. मुझे थोड़ा सा घमंड सा फील हुआ. मैं अपने आप पे ही मुस्कुराने लगी और हाथ धोकर बाहर निकल आई. गर्ल्स टाय्लेट के जस्ट ऑपोसिट साइड ही बाय्स टाय्लेट हैं. मैं जैसे ही बाहर निकली उसी वक़्त सामने देखती हूँ तो राजीव भी बाहर आ रहा था टाय्लेट से. पता नही क्यू मगर उसको देख कर मेरी साँसे अपने आप तेज़ हो जाती हैं. उसके बाल, उसकी चाल... हआयाई! सब कुछ एक दम स्पेशल हैं. स्टाइलिश! मैं वही खड़ी होकर उसकी ओर घूर्ने लगी. पहले तो राजीव का ख़याल नही गया मगर जब उसने मुझे देखा तो वो भी रुक गया और स्माइल करने लगा.

हम दोनो पागल जैसे एक दूसरे की ओर स्माइल कर रहे थे. मुझे अंदर से गुदगुदी होने लगी, दिल जैसे ज़ॉरज़ोर से धड़क रहा था और मेरी चेस्ट पर दस्तक दे रहा था. आखे थोड़ी घूमने लगी और मैं समझ गयी कि कुछ दिन पहले जैसा एहसास हुआ था आज भी कुछ ऐसा ही होने वाला हैं. राजीव अब भी मुझे देख रहा था. वो थोड़ा आगे आया और बोला;

राजीव: नाइस ड्रेस!

बॅस! इतना ही कहा और मेरा तो मूह जैसे बंद हो गया, दिमाग़ भी! मैं पागलो जैसी स्माइल करने लगी और तभी मैने देखा कि राजीव की नज़र अब मेरे चेहरे पर नही थी . वो नीचे देख रहा था बड़े ध्यान से कुछ. मैने उसकी नज़र का पीछा किया और मैं समझ गयी कि वो मेरी चेस्ट की ओर देख रहा हैं. मैने भी नीचे देखी चेस्ट की ओर... और... पता नही कैसे मेरे निपल्स एक दम हार्ड हो गये थे और वाइट टॉप मे से सॉफ दिख रहे थे. मैं शरम से पानी पानी हो रही थी.. मुझे तो जैसे रोना आने वाला था. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था. राजीव क्या सोचेगा मेरे बारे मे. मैं वहाँ से जल्दी से 'थॅंक यू' कहके निकल गयी.

राजीव वही खड़ा था. किसी तरह मैं स्कूल मे बैठी और जैसे ही घर आई मुझे रोना आ गया. ऐसा क्यू हुआ?! मेरी किस्मत ही खराब हैं. मुझे बोहोत रोना आ रहा था. कुछ समझ नही आ रहा कि अब मैं कैसे अपना मूह दिखाउन्गा स्कूल मे. मैने वो टॉप निकाल कर ज़मीन पर फेक दी और वैसे ही बेड पर लेट गयी. कुछ वक़्त बाद मुझे कुछ एहसास हुआ और मैं मिरर के सामने चली गयी. अपने आपको देखने लगी. ऑफ वाइट कलर की मॅक्सी मेरे बॉडी पे सूट कर रही थी. मैने धीरे धीरे मॅक्सी उपर करते हुए निकाल दी. आज पहली बार मैं अपने आप को मिरर मे देखी. टॉपलेस! अजीब सा उभार आने लगा हैं मेरी चेस्ट मे. जो अभी कुछ महीनो पहले छोटे छोटे पायंट्स थे अब वो बड़े होने लगे हैं. लाइट पिंक कलर के मेरे निपल्स अब बड़े होने लगे हैं. और उसके आस पास का सर्कल भी अब फैल रहा हैं. मैं और करीब चली गयी मिरर के और अपने आप को देखने लगी.

कुछ ही देर मे मुझे थोड़ा खीचव सा महसूस होने लगा और पेट मे एक गुद्गुलि सी होने लगी. नोट एग्ज़ॅक्ट्ली पेट बट थोड़ा नीचे. मेरी टाँगो के बीच मे. मेरे निपल्स धीमे धीमे हार्ड होने लगे. पहले भी थे मगर अब मैं महसूस कर रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसे कि एक मीठी चुभन हो छाती मे मेरे. दिल ज़ोर ज़ोर से धंडकने लगा. मैं ड्रेसर की सीट पर बैठ गयी. मैं नही जानती कि क्या हो रहा था मगर जो भी हो रहा था अच्छा लग रहा था. जब कहीं खुजली होती हैं तब टच करने की जो फीलिंग आती हैं दिल मे वैसी फीलिंग्स मुझे आने लगी, मेरा दिल अब इतनी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था कि मैं महसूस कर पा रही थी अपनी धड़कनो को. मेरी आखे मेरे कड़े निपल्स पर टिकी थी, पैर एक दूसरे पर घीसने लगे धीरे से और आख़िर कार मैने हार मान ही ली और....और छू लिया अपने निपल्स को. आआअहह...सी अपने आप निकल गयी मेरे होंठो से और दांतो के बीचे मेरे होंठ दब गये. अजीब सा नशा आ रहा था मुझे जैसे ही मैं अपने निपल्स को छू रही थी. सारी ज़िंदगी वो वही थे जहाँ आज हैं मगर आज कुछ अजीब फील हो रहा था, कुछ अच्छा. मैने दोनो हाथ को अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच मे अपने दोनो निपल्स को मसलना शुरू कर दिया. ऐसा लग रहा था कि जैसे की कोई मेरे दिमाग़ मे कह रहा हो यह सब करने के लिए. मेरी मांदिया अब एक दूसरे को कस्स्स्के मसल रही थी. टाँगो के बीच अब मुझे फिर से वोही फीलिंग आने लगी थी जो उस दिन आ रही थी. एक हल्का सा गीलापन मुझे महसूस हुआ तो मैं डर गयी और रोकना चाहती थी, मगर मेरे हाथ ना रुक रहे थे और मेरे निपल्स भीक माँग रहे थे मेरे हाथो के सामने अपने आप को मसलवाने के लिए. एलेक्ट्रिक शॉक मुझे कभी लगा नही मगर वैसी ही फीलिंग मुझे अपने जिस्म मे आने लगी.. मेरी कमर पीछे की ओर और मेरी चेस्ट अब आगे की ओर निकल गयी. आखे अपने आप बंद हो गयी, होंठ सूखने लगे और मेरी जीभ उनकी प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश करने लगी.

 


मेरी साँसे तेज़ होने लगी, पता नही डर से या किसी और रीज़न से. ऐसा लगने लगा कि कोई बस आकर मुझे पकड़ ले अपनी बाहो मे और... और.. और पता नही क्या करे..मगर ये अजीब भूक मुझे महसूस होने लगी.. चाह कर भी मैं अपने आप को रोक नही पा रही थी. सुकून ही ऐसा मिल रहा था..मैं अब और भी ज़ोर से अपने निपल्स को मसल्ने लगी और तभी दरवाजे पर नॉक किया किसी ने तो मैं अपनी दुनिया मे से बाहर आई.'

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मैने पेज पलटा...

मे: भैनचोद!!!

वही पे डाइयरी ख़त्म हो गयी.. मैने अपनी लंड की ओर देखा.. एक पिन कोई मार देता तो लंड फट जाता. अभी अभी मैने अपनी बेहन ने कैसे पहली बार अपने मम्मे छुए और कैसे उसकी चूत भीगी वो पढ़ा.. शिट!! काश पायल होती.. उसकी चूत को आर पार फाड़ देता मैं.. खड़ा लंड एक बड़ी ही फ्रस्ट्रेटिंग चीज़ होती हैं. जब तक शांत ना करो, झाट कही दिमाग़ नही लगता.. मैं पागलो की तरह मूठ मारने लगा. 5-6 झट्के और दूध के जैसा मेरा कम आकांक्षा की डाइयरी पे गिर गया. दिल छाती से बाहर आ जाए इतनी तेज़ी से पटक रहा था अपने आप को.

मे: फेवववव.... वाआह!!!! मज़ा आ गया.

बुज़्ज़्ज़्ज़....बुज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़....बुज़्ज़्ज़्ज़....बुज़्ज़्ज़्ज़.....

'हुहह??'

मैं एक झट्के मे उठ गया.. देखा तो मोबाइल वाइब्रट कर रहा था. आस पास देखा, आकांक्षा की डाइयरी ज़मीन पे गिरी थी,कुछ पन्ने चिपके हुए थे. मेरे होंठो पे हल्की सी मुस्कान आ गयी वो देख कर. मैं सोफा चेर पे बैठे बैठे ही सो गया, वैसे ही नंगा. मोबाइल देखा..

'चूतिया कॉलिंग'..

मैने कॉल आन्सर किया.

मे: हेलो!!

आकांक्षा: तूने मेरा रूम लॉक किया या नही? तुझसे कहा था कि लॉक करने के बाद मुझे कॉल करना.. समझ नही आता क्या? उल्लू की दम..

जी हाँ.. मैने अपने मोबाइल मे अपनी बेहन का नाम 'चूतिया' रखा हैं..लॉल..

मे: कुछ हेलो ही होता हैं या नही? कुत्ते के जैसी सीधा भोकने लगी?

आकांक्षा: जो कहा वो बता पहले..लॉक किया या नही??

मे: ऐसा क्या हैं तेरे रूम मे जो इतनी जान अटकी हैं तेरी?

आकांक्षा: मैं तेरी जान ले लुगी.. पहले बता लॉक किया या नही?

मे: वेल, इट्स आ फोन.. सो टेक्निकली तू मेरी जान नही ले सकती.. न्ड यस! किया तेरा गंदा रूम लॉक मैने..

आकांक्षा: अर्ररघग... चुप कर.. तेरी रूम गंदी.. तू गंदा..जा!

इतना कह कर मेडम ने फोन रख दिया. ना हेलो कहती ना बाइ बोलती.. चूतिया..कुछ ही सेकेंड्स मे मम्मी का कॉल आया.

मे: हेलो?? हाँ मम्मी!

मम्मी: ह्म्म्म .. क्या चल रहा? कॉलेज नही गया आज?

मे: नही..गया था.. जल्दी आ गया..अभी जस्ट आया हूँ. आकांक्षा का कॉल आया था. दिमाग़ खा रही थी.

मम्मी: ऐसा नही कहते.. सब ठीक हैं घर पे?

मे: हां.. डोंट वरी.. क्या होगा!? सब मस्त हैं. शादी तो आज ही हैं ना?

मम्मी: नही.. आज मेहंदी हैं. कल शादी होगी. परसो सब हम यहाँ से निकल जाएगे.

मे: ओह्ह्क.. करो एंजाय..

मम्मी: ह्म्म.. घर का ध्यान रखना.. बाइ

मे: हाँ बाइ..

मैने फोन वापिस से सोफे पे फेक दिया. बेचारी आकांक्षा…जिस वजह से वो रूम लॉक करने के लिए कह रही हैं वो तो मैने ऑलरेडी देख लिया हैं. मैने ज़मीन पर पड़ी हुई डाइयरी उठा कर वापिस बॉक्स मे रख दिया और उसके बाद की नेक्स्ट डाइयरी उठा कर पढ़ना शुरू किया.

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बेस्ट डे ऑफ माइ लाइफ. आज राजीव ने मुझसे बात की. खुद आकर.

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मे:फक…कंप्लीट नही की पागल ने..

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…….और सिर्फ़ बात ही नही उसने मुझे उसकी बर्थ’डे पार्टी मे इन्वाइट भी किया. वाउ… बहुत सारी शॉपिंग करनी हैं मुझे पार्टी के लिए. मैं सबसे सुंदर दिखना चाहती हूँ उसके लिए. इतनी सुंदर की देखते ही वो मुझसे भी प्यार करने लगे. जितना कि मैं उससे करती हूँ. आख़िर कार मुझे कोई मिल ही गया जो मुझसे सच्चा प्यार करेगा. आइ अम सो हॅपी..मेरी लाइफ अब एक दम पर्फेक्ट होने वाली हैं. राजीव जैसा बाय्फ्रेंड मुझे मिलेगा. स्कूल मे जब पहली बार देखा था उसे तभी मुझे उससे प्यार हो गया था. लोग सच ही कहते हैं, उपर से ही जोड़िया बनके आती हैं. वरना मेरे बिना कुछ किए राजीव भी मुझसे प्यार नही करने लगता. थॅंक यू भगवान जी!! मैं कल ही निशा के साथ जाकर कुछ अच्छा सा ड्रेस खरीदुन्गी. ओह्ह्ह.. आइ आम सो एक्सक्फिटेड.. लव यू राजीव.

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.मे: ये ल्ल्लो… इसकी तो लव स्टोरी शुरू हो गयी..क्या बोर आइटम हैं ये भी. अच्छा ख़ासा मज़ा आ रहा था..

आगे के कुछ दिन ‘राजीव’ के प्यार मे ही लिखती रही मेडम. सच मे लड़को का प्यार न्ड लड़कियो का प्यार बोहोत अलग होता हैं.. जहा हम लड़के सेन्सिबल चीज़े पसंद करते वहाँ गर्ल्स की आधी बातें हवा मे ही रहती हैं. झान्ट समझ नही आती कि क्या चाहती हैं तो.. मैं आगे आगे पढ़ता गया. आक्वा ब्लू कलर का एक ड्रेस खरीद लाई थी वो ऐसा लिखा था आगे. हाँ. याद हैं मुझे. आक्च्युयली क्यूट दिखती हैं वो उस ड्रेस मे. बड़ा सूट करता था उसे वो ड्रेस. कुछ इंट्रेस्टिंग नही दिखा आगे तो मैं बोर हो गया. वैसे भी काफ़ी देर से पढ़ रहा था तो सोचा कि कुछ और किया जाए. मैने उठ कर सीधा अपनी रूम मे चला गया

मे: ह्म्म्म्म …अब क्या किया जाअए…??!!

मैने सोचा क्यू ना कुछ देर बाहर चला जाउ. कोई मूवी देख कर आ जाता हूँ. 4 घंटे के बाद पायल भी फ्री हो जाएगी तो चोदना तो हैं उसको.. सीधा इधर ही आने वाली हैं वो. मैने कपड़े पहने और मूवी देखने चला गया. ऐसी ही कोई हॉलीवुड मूवी थी. ‘दा डार्केस्ट अवर’ नाम की. चूतिया मूवी थी. भैनचोद कुछ सेन्स ही नही बन रहा था मूवी मे. हाँ. हेरोयिन माल थी वैसे. बट एक हॉट सीन नही..

मे: शिट.. पैसे वेस्ट हो गये…

मैने टाइम देखा..1पीएम. पायल आती ही होगी 2 बजे तक घर. मैने सोचा क्यूँ ना कुछ शॉपिंग की जाए अपनी नेक्स्ट चोदुम्पत्ति राउंड के लिए.. मैने सबसे पहले सीधा मेडिकल स्टोर गया. शॉप मे थोड़ी भीड़ थी तो सोचा कि किसी और मेडिकल स्टोर मे चला जाउ. आस पास देखा. दूर दूर तक कोई मेडिकल स्टोर नही दिख रहा था. मैने सोचा कि वेट कर लेता हूँ थोड़ा. कुछ देर मे खाली हो ही जाएगा स्टोर. तो मैं बाहर ही रुक गया स्टोर के. 5 मिनट बाद भीड़ ज़रा कम हुई तो मैं अंदर गया. अंकल थे काउंटर पे.. मैं बाहर जाते लोगो के बीचे मे से रास्ता बनाता हुआ स्टोर मे गया..

 


मे: ओह्ह्ह..भैनचोद.. कहाँ गया..?

जो अंकल अभी काउंटर पे थे,वो पता नही कहाँ चले गये. मैने इधर उधर देखा.. नही दिखा..तभी एक आवाज़ आई..

“ भैया?? क्या चाहिए?”

मैं देखने लगा की आवाज़ कहा से आ रही तो. मगर कोई दिखा नही..फिर एक बार आवाज़ आई..

“हेलो?? क्या माँगता आपको?”

मैने फिर से इधर उधर देखा.. तभी काउंटर के उपर किसी का हाथ दिखा.. मैं ज़रा आगे हो गया तो देखा कि 1 10-11 साल का बच्चा काउंटर पे था. मैने सोचा कि अब ये क्या मुसीबत हैं.. इससे क्या कॉंडम मांगू मैं? मैने उससे कहा

मे: उम्म्म..अंकल कहाँ गये??

बच्चा: आपको क्या चाहिए? बोलो मुझे..

मैने सोचा यार ये तो क्या पीछे लग गया… अब इसको कहूँ तो क्या कहूँ.. मैने दबी आवाज़ मे कहा;

मे: बॅंड एड हैं?

बच्चा: हुहह?? क्या चाहिए??

ये क्या चूतियापा हैं साला..

मे: बेटा कोई बड़ा नही हैं? मुझे कुछ दवाई चाहिए थी.. कोई बड़ा होगा तो बुलाओ प्लीज़..

जैसे ही मैने ये कहा, वो बच्चा चूहे जैसा काउंटर के नीचे से निकल कर सीधा अंदर की रूम मे चला गया.

मे: लगता हैं किसी को बुलाने गया हैं..

मेरी जान मे जान आई. मैं शॉप मे इधर उधर उधर देखने लगा… मेडिकल स्टोर मे इतनी दवाइया होती हैं, मुझे हमेशा से ये लगता था कि इन लोगो को सब याद कैसे रहता. कोई डाटाबसे भी नही हैं दवाई की पोज़िशन का कि कौन सी कहाँ हैं.. मुश्किल काम हैं साला. मुझे किसी के आने की आवाज़ आई. मैं समझ गया कि अंकल आ गये. मैं कुछ पढ़ रहा था तो मैने बिना देखे ही कह दिया,

मे: भैया. मूड्स हैं?

मेरा कॉंडम माँगना और चूड़ियो की आवाज़ मेरे कान पर आना, बस 1 सेकेंड का डिफ़रेंस था.. मैने झट्से देखा..

मे: सस्स्स्स्स्स्स्सस्स….क्या गान्डु नसीब हैं बे..

“जी??”

सामने से एक 27-28 साल की लड़की आई स्टोर मे और बोली;

“ जी क्या चाहिए आपको?”

मैं एक ही नज़र मे समझ गया कि ये अंकल की बीवी हैं. पक्की मारवाड़ी स्टाइल की साड़ी पहनी थी. गेहूए कलर का उसका बदन ग्रीन कलर की साड़ी की नीचे छुपने की असमर्थ कोशिश कर रहा था. मेरा एक मारवाड़ी फ्रेंड था, टिपिकल राजस्थानी. दुकान वाले. मैं जब भी उसकी शॉप पे गया मैने एक बात नोटीस की. वो ये कि मारवाड़ी औरते ब्रा नही पहनती.. और ये भी वैसी ही थी. मगर इसका ब्लाउस ऐसा भरा था कि जैसे पानी का बलून. निपल का शेप सॉफ नज़र आ रहा था ब्लाउस के नीचे से… मैं एक टक उसके मम्मे को घूर रा था..

“हेलो?? क्या चाहिए आपको?”

मैं होश मे आया.. अब इसको भी कैसे कॉंडम मांगू??

मे: जीए..वो… वो…अंकल नही हैं..

आंटी: नही.. वो मार्केट मे गये हैं माल लाने को..

साला..चूतिया.. इतना अच्छा माल छोड़के माल लेने गया..

आंटी: क्या चाहिए आपको??

मे: जी वो.. वो….

मुझे कुछ सूझ नही रहा था..

मे: यहाँ और कोई मेडिकल हैं आस पास??

आंटी: क्यू? आप बताओ तो क्या दूं? हमारे दुकान मे सब मिलता है..

मैने भी सोचा की यार.. मेडिकल चलाती है.. कॉंडम तो नॉर्मल चीज़ लगती होगी इसको.

मे: वो.. मूड्स हैं आपके पास??

मैने जो ही मूड्स माँगा, उसकी नज़र नीचे झुक गयी शरम से.. लग गये लोड्‍े..

मे: जाने दीजिए.. कोई बात नही..

आंटी: रूको.. हैं हैं.. म..एम्म..मूड्स हैं..

इतना कह के वो मूडी.. और भाई मूडी तो कयामत आ गयी ऐसा लगा.. क्या गान्ड थी उसकी.. वाह.. एक दम पर्फेक्ट सेमिसर्कल दिख रहा था मुझे.. साड़ी मे से भी सॉफ देख पा रहा था. उसने फट से नीचे से एक कॉंडम का पॅक निकाल के मेरे सामने रख दिया..

मे: जीए.. वो.. यह वाला नही.. अल्ट्रा थिन वाला चाहिए…

अब तो आंटी शरमा के लाल हो गयी थी.. मैने भी सोचा कि लेकर भाग जाता हूँ.

मे: कोई बात नही.. ये लीजिए.. पैसे..

उतने मे फिर मूडी और कॉंडम का दूसरा पॅक मेरे सामने रख दिया..अल्ट्रा थिन.

मे: ओह्ह.. हैं आपके पास.. गुड..

अब वो मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखने लगी.. ऐसा लग रहा था कि अभी शटर डाल दूं शॉप का न्ड ले लूँ उसको.. मैने पैसे दिए और इससे पहले लंड खड़ा होता, मैं निकल गया. जाते जाते एक नज़र डाली उसपे.. अब भी स्माइल कर रही थी..

मे: नेक्स्ट टाइम भी यही से ले जाउगा कॉंडम..

इतना कह के मैने बाइक स्टार्ट की और सीधा घर की ओर निकल पड़ा.

घर आया, सबसे पहले आकांक्षा की डाइयरीस उठाकर अंदर रखी.रूम क्लीन किया,थोड़ा सेट किया. टाइम देखा…

मे: ह्म्म..ऑलमोस्ट आएगी ही अभी..

 
15 मिनट मे पायल आती ही होगी. मैने सोचा थोड़ा फ्रेश हो जाता हूँ. जल्दी से मैं बाथरूम मे गया, शवर ऑन किया और नहा कर बाहर निकला ही बाथरूम मे से कि डोर बेल बजी.

मे: ऊहह..राइट ऑन टाइम.

मैं टवल मे ही डोर ओपन करने गया.

“तू तबसे नंगा ही हैं??” मेरे डोर खोलते ही पायल ने कहा.

मे: नही नही.. तबसे नही. अभी तू आने वाली थी इसलिए जस्ट लेटेस्ट मे नंगा हुआ हूँ. मैने सोचा की शुभ काम मे देरी कैसी?

इतना कह कर मैने पायल का हाथ पकड़ कर उसे घर मे खीच लिया और वो सीधा मेरे सीने से आकर टकरा गयी. बॅस दरवाजा बंद करने ने की देरी थी कि हम दोनो एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे.

मे: उम्म्म…डेरी मिल्क खाकर आया हैं कोई लगता हैं. अकेले अकेले??

पायल के होंठो पर मैं टेस्ट कर पा रहा था चॉक्लेट का..

पायल: यप! मैने सोचा कि क्यू पैसे वेस्ट करना तेरे लिए चॉक्लेट लेने मे. आख़िर तू खाने तो कुछ और ही वाला हैं ना??

मे: ह्म्म्म .. अब एक्सट्रा जुवैसी चाहिए कुछ..

पायल: ठीक हैं..छोड़ मुझे.. कपड़े गीले हो रहे हैं..

मे: ओह्ह्ह..ऐसा क्या?? लेम्मे हेल्प देन.

पायल ने एक टील कलर का शर्ट पहना थी.. मैने उसका उपर का बटन खोलते हुए उसे कहा. बटन खोलते ही उसकी कोमल सी स्किन सामने आ गयी. हम दोनो एक दूसरे को किस करने लगे. उसके हाथ मेरे बालो से खेल रहे थे और मैं उसकी शर्ट का एक एक बटन खोल रहा था.. जैसे जैसे बटन खुल रहे थे वैसे वैसे पायल का जिस्म नंगा होने लगा. अंदर उसने वाइट कलर की ब्रा पहनी थी जो उसके दूधिया बदन पर पर्फेक्ट सूट कर रही थी. मैं पायल के होंठो से नीचे सरकते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा,फिर ब्रा के ठीक उपर और आख़िर कर उसकी क्लीवेज को चाटने लगा.. पायल अब कसमसा रही थी, उसका एक हाथ पागलो की तरह मेरे बालो मे घूम रहा था और दूसरा हाथ मेरे सीने को नोच रहा था. मैने अपनी कमर को आगे धक्का मारते हुए अपने लंड को उसकी थाइस पे रगड़ना स्टार्ट किया…हॉल मे हमारी चुम्माचाटी की आवाज़े गूंजने लगी, दोनो की साँसे तेज़ हो गयी थी अब रुकना इंपॉसिबल था. मेरा लंड पत्थर जैसा कड़ा होकर टवल मे से बाहर निकल गया था.. मैने पायल को ज़मीन पर से उठाया और सोफे पे ले जाकर पटक दिया..

पायल: ओफफ्फ़…आराअम से यार! कही नही जा रही मैं…

मे: कोशिश भी मत करना..

इतना कह कर मैने टवल को नीकाल कर फेक दिया..

पायल: उम्म्म्म..यूम्ममी!!

पायल किसी भूकि बच्ची की तरह मेरे लोड्‍े पे टूट पड़ी और बड़े ही प्यार से लोड्‍े के हेड को चूसने लगी.

मे: आआहह…सस्स्स्स्स्सस्स…दिस ईज़ सो पर्फेक्ट…

पायल: उम्म्महममम्म!!

पायल ने मूह मे लंड ठूंसते हुए कहा. उसकी नरम जीभ मेरे लंड को चाट रही थी… इतनी सॉफ्ट और वॉर्म..आअहह..क्या बताऊ!! मैं पायल के सर के पीछे हाथ रख कर धक्के मारते हुए उसके मूह को चोदने लगा.. कुछ ही देर मे मेरा सबर टूट गया और मैं पायल के मूह मे ही झड गया…

पायल: ओफफफू! सम्राट!! वॉर्निंग तो दिया कर उल्लू…

मैने साँस किसी तरह काबू मे करते हुए कहा;

मे: तू चान्स देगी तब ना…

पायल अपनी तारीफ़ सुन कर मुस्कुरा दी और मैने उसकी खुली शर्ट को उसके जिस्म के उतार कर फेक दिया.. 5 सेक मे उसकी ब्रा भी उसकी शर्ट से जा मिली और पायल मेरे सामने टॉपलेस बैठी थी.. कितनी भी बार क्यूँ ना देख लूँ,, जी नही भरता मेरा..मैं तुरंत नीचे झुक कर पायल के निपल्स को चूसने लगा और एक हाथ को पायल की जीन्स मे डाल कर उसकी पैंटी पे घुमाने लगा.. उसकी चूत की गर्मी पैंटी के बाहर भी महसूस कर पा रहा था मैं इस तरह से पायल का जिस्म गरम हो गया था.. पायल खुद खड़ी हो गयी और जीन्स और पैंटी एक साथ निकालते हुए बोली;

पायल: टॉर्चर मत कर…इससस्स.स

अब हम दोनो नंगे थे.. बिना कुछ सोचे मैने अपना लंड सीधा पायल की चूत मे घुसा दिया,,

पायल: आआअहह…उऊउककच…आग्ग..म्माआ…

हम दोनो की कमर झट्के मारने लगी.. पायल की आखे बंद थी, होंठ खुले हुए, वो स्वर्ग मे की अप्सरा थी और मैं उसकी चूत मे… हमारे जिस्म एक दूसरे से टकराने लगे,होंठ चिपक गये, आखे बंद थी.. पसीना टपकने लगा मगर हम आसमान मे थे.. पायल की चूत बिल्कुल ही सॉफ्ट और स्मूद थी. गरम इतनी कि दूध भी उबल जाए.. मैं झट्को पे झट्के मारने लगा..

मे: अया…स्सी..इसस्स.इसस्स….ऊऊ….हह…प्प्प्पाआ…ल्ल्ल्ल्ल

उसके नाख़ून मेरी पीठ मे गढ़ गये थे. दर्द हो रहा था मगर जो सुख मिल रहा था उसके आगे कुछ नही था.. मैं पायल की गान्ड को मसल्ने लगा और उसके निपल्स को चूस्ते हुए उसे चोदने लगा..

 
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