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Guest
बहुत देर बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे इस तरह बिना उसकी पर्मिशन के उसे घूर्ना नही चाहिए, मैं फिर से पलट के बाथरूम में चला गया. मैने ठंडे पानी का नल खोल के अपने चेहरे पर कुछ छींटे मारे. कुछ देर बाद तान्या डोरवे में आ गयी, और स्माइल करने लगी... मैं उसे बाथरूम में घुसने देने के लिए साइड में हो गया.
उस सुबह हम दोनो ने कुछ और बातें की, और तान्या ने मुझे कॉलेज तक कार से ड्रॉप करने का ऑफर किया. तान्या के मोबाइल पर उसके बहुत सारे फॅमिली मेंबर्ज़ के कॉल आ रहे थे, मैने वहाँ से निकलने में ही अपनी भलाई समझी. हालाँकि, तान्या की आँखें मुझे जो शुक्रिया कह रही थी, उसके लिए मैं दीदी की सही सलाह का आभारी था. तान्या को ये बात समझ में आना बहुत ज़रूरी था कि वो मैं ही हूँ जो उसकी हिफ़ाज़त कर सकता हूँ और उसे जब ज़रूरत हो मैं उसको प्रोटेक्ट करने के लिए हमेशा तय्यार हूँ.
मेरी कॉलेज की कार पार्किंग तक ड्रॉप करने तक की ड्राइव में तान्या पूरी तरह खामोश रही, लेकिन ये बहुत ही अंतरंग और ऐसे खामोशी थी जो हम दोनो समझ रहे थे. शब्दों में बयान करने के लिए उन पलों में कुछ नही बचा था. मैने ड्राइव कर रही तान्या का बाँया हाथ पकड़ा, और उसने मेरा... हम दोनो ने एक दूसरे के हाथ को दबा दिया...
कार से निकलने से पहले तान्या ने मुझे अब तक की तीसरी किस दी... ये किस अब तक की सबसे ज़्यादा लंबी और गहरी थी... पहली दोनो किस्सस से कहीं ज़्यादा बेहतर और सच्ची...
जब मैं अपने घर पहुँचा, दीदी मेरे से मिलने को इतना ज़्यादा आतुर थी कि इस से पहले की मम्मी पापा को मालूम चले कि मैं आ गया हूँ, वो दरवाजे से ही खींच कर मुझे अपने बेड रूम में ले गयी.
दीदी ने डोर को बंद करते हुए और बेड पर बैठते हुए पूछा, तो फिर कैसा रहा?
मैं दीदी को वो सब बताने लगा जो कुछ तान्या ने मुझे बताया था- लेकिन ज़्यादा विस्तार में नही. दीदी भी ज़्यादा डीटेल में जानने को उत्सुक नही थी, दीदी समझ गयी कि जो कुछ हमारे बीच बातें हुई थी वो तान्या के लिए प्राइवेट थी. लेकिन वो मेरे पूरी रात के स्टे के बारे में जानने को उत्सुक थी, ख़ास तौर पर हमने कैसे कब और कितना लंबा किस किया. दीदी हमारे किस का डिस्क्रिप्षन सुन के थोड़ा नर्वस हुई, लेकिन वो बहुत खुश थी.
दीदी (थोड़ा असुरक्षित होते हुए): शायद मुझे ऐसा नही पूछना चाहिए... लेकिन क्या उस को किस करते समय तुम को वैसा ही फील हुआ.... जैसा मेरे को किस करते समय फील होता है?
मैने कुटिल मुस्कान के साथ दीदी की तरफ हाथ बढ़ाया, दीदी जब मैं आपको किस करता हूँ तो मैं बयान नही कर सकता, जो फीलिंग होती है उसको शब्दों में नही कहा जा सकता... वो बस बहुत ....
दीदी के चेहरे पर एक स्वीट स्माइल फैल गयी. दीदी बोली, मुझे मालूम है, मुझे ऐसे कंपेर करने के लिए नही कहना चाहिए, आइ’म सॉरी.
मैने फिर से कुटिल मुस्कान के साथ कहा, दीदी आपकी अड्वाइस बिल्कुल पर्फेक्ट थी. थॅंक यू, मुझे अपनी बेवकूफी भरी हरकतों से बाहर निकालने के लिए.
दीदी ने खिलखिल्लाते हुए कहा, और बड़ी बेहन किस काम आएगी?
मैं दीदी के रूम से निकल के अपने रूम में आ गया, मैने अपने धुले हुए कपड़े लिए और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ चल दिया. रास्ते में पापा ने मुझे पकड़ लिया और मुझे चिढ़ाते हुए पूछा, कल रात किस दोस्त के यहाँ थे जनाब? डॉली बता रही थी किसी दोस्त के यहाँ कंबाइंड स्टडीस कर रहे हो. अगली बार से उस दोस्त का नाम और मोबाइल नंबर जाने से पहले बताने का ध्यान रखना. पापा ने बताया कि वो आज मम्मी के साथ खन्ना अंकल के गाओं जा रहे हैं, जहाँ उनके पिताजी रहते थे और वो कल एक्सपाइर हो गये हैं. हालाँकि ये मुझे पहले से पता था.
मैने बाथरूम में जाकर अपने धुले हुए कपड़ों को खूँटि पर टांगा, और फिर शवर चला के नहाने लगा, गुनगुने पानी से शरीर को बहुत आराम मिल रहा था, सारी थकान और टेन्षन दूर हो रही थी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और पानी जो मेरे चेहरे पर गिर रहा था, वो अपने साथ मेरी सारे विचारों और दुविधाओं को अपने साथ बहा के ले जा रहा था.
मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी, मैने पानी के नीचे से अपना चेहरा हटाया और फिर सुनने लगा. मैने इग्नोर करते ऊए सोचा शायद टवल या कुछ और गिर गया होगा. जैसे ही मैने अपना चेहरा फिर से पानी के नीचे किया, मुझे फिर से एहसास हुआ कि बाथरूम में मेरे अलावा भी कोई और है.
मुझे विश्वास नही हुआ. मैं थोड़ा रिलॅक्स होना शुरू ही हुआ हा, और अब फिर से मेरे दिमाग़ में हज़ारों सवाल घूमने लगे. अपने दिमाग़ में चल रहे सवालों का जवाब ढूँढने के लिए मैने शवर बंद किया, और घूम के देखा, वहाँ बाथरूम के डोर के पास दीदी खड़ी हुई थी, और वहीं अपनी पॅंट उतारते हुए थोड़ा झुकी हुई थी. दीदी ने मेरी तरफ कातिल मुस्कान के साथ देखा.
तुमने मुझे सुना नही था क्या? मैं दीदी को कुछ जवाब देने की स्तिथि में नही था, फिर दीदी ने अपनी पॅंट उतारी और फिर पैंटी, फिर अपनी टी-शर्ट को गले में से निकाला और ब्रा का हुक खोल दिया, मैं दीदी को अपना मूँह खोले देखे जा रहा था. दीदी ने मेरे पास आकर पूछा, मैं भी तुम्हारे साथ में ही नहा लूँ?
मैं तुरंत शवर के नीचे से साइड में हो गया, और दीदी को शवर के नीचा आने के लिए जगह बना दी. दीदी गजब की लग रही थी- एक दम नंगी, उनके निपल एक दम हार्ड थे, और हिप्स के उपर पैंटी के एलास्टिक की एक लाल धारी बनी हुई थी. अपने बालों का पोनीटेल बनाते हुए दीदी ने मुझे देख के स्माइल किया.
दीदी, आप क्या.... मेरा मतलब..., मैं कुछ बोलने की कोशिश करने लगा, और अपने सर्प्राइज़ और कन्फ्यूषन को व्यक्त करने के लिए शब्दों को ढूँढने लगा.
कुटिल मुस्कान के साथ दीदी फुसफुसाई, धीरे बोलो मम्मी पापा सुन ना लें! अभी वो गये नही हैं. दीदी मेरे पास आई, मैं कुछ और पीछे हो गया जिस से दीदी पूरी शवर के नीचे आ जाएँ... ये सब बहुत अजीब लग रहा था. दीदी आगे बोली, मैने सोचा क्यों ना कल रात की कामयाबी के लिए तुम्हे सर्प्राइज़ दिया जाए.
मैं धीरे से बोला, सब कुछ आप की हेल्प की वजह से ही संभव हो पाया, दीदी. दीदी मेरे और करीब आ गयी, मैने थोड़ी जगह तो दी, लेकिन जान बूझ कर दीदी के पास में ही रहा.
उस सुबह हम दोनो ने कुछ और बातें की, और तान्या ने मुझे कॉलेज तक कार से ड्रॉप करने का ऑफर किया. तान्या के मोबाइल पर उसके बहुत सारे फॅमिली मेंबर्ज़ के कॉल आ रहे थे, मैने वहाँ से निकलने में ही अपनी भलाई समझी. हालाँकि, तान्या की आँखें मुझे जो शुक्रिया कह रही थी, उसके लिए मैं दीदी की सही सलाह का आभारी था. तान्या को ये बात समझ में आना बहुत ज़रूरी था कि वो मैं ही हूँ जो उसकी हिफ़ाज़त कर सकता हूँ और उसे जब ज़रूरत हो मैं उसको प्रोटेक्ट करने के लिए हमेशा तय्यार हूँ.
मेरी कॉलेज की कार पार्किंग तक ड्रॉप करने तक की ड्राइव में तान्या पूरी तरह खामोश रही, लेकिन ये बहुत ही अंतरंग और ऐसे खामोशी थी जो हम दोनो समझ रहे थे. शब्दों में बयान करने के लिए उन पलों में कुछ नही बचा था. मैने ड्राइव कर रही तान्या का बाँया हाथ पकड़ा, और उसने मेरा... हम दोनो ने एक दूसरे के हाथ को दबा दिया...
कार से निकलने से पहले तान्या ने मुझे अब तक की तीसरी किस दी... ये किस अब तक की सबसे ज़्यादा लंबी और गहरी थी... पहली दोनो किस्सस से कहीं ज़्यादा बेहतर और सच्ची...
जब मैं अपने घर पहुँचा, दीदी मेरे से मिलने को इतना ज़्यादा आतुर थी कि इस से पहले की मम्मी पापा को मालूम चले कि मैं आ गया हूँ, वो दरवाजे से ही खींच कर मुझे अपने बेड रूम में ले गयी.
दीदी ने डोर को बंद करते हुए और बेड पर बैठते हुए पूछा, तो फिर कैसा रहा?
मैं दीदी को वो सब बताने लगा जो कुछ तान्या ने मुझे बताया था- लेकिन ज़्यादा विस्तार में नही. दीदी भी ज़्यादा डीटेल में जानने को उत्सुक नही थी, दीदी समझ गयी कि जो कुछ हमारे बीच बातें हुई थी वो तान्या के लिए प्राइवेट थी. लेकिन वो मेरे पूरी रात के स्टे के बारे में जानने को उत्सुक थी, ख़ास तौर पर हमने कैसे कब और कितना लंबा किस किया. दीदी हमारे किस का डिस्क्रिप्षन सुन के थोड़ा नर्वस हुई, लेकिन वो बहुत खुश थी.
दीदी (थोड़ा असुरक्षित होते हुए): शायद मुझे ऐसा नही पूछना चाहिए... लेकिन क्या उस को किस करते समय तुम को वैसा ही फील हुआ.... जैसा मेरे को किस करते समय फील होता है?
मैने कुटिल मुस्कान के साथ दीदी की तरफ हाथ बढ़ाया, दीदी जब मैं आपको किस करता हूँ तो मैं बयान नही कर सकता, जो फीलिंग होती है उसको शब्दों में नही कहा जा सकता... वो बस बहुत ....
दीदी के चेहरे पर एक स्वीट स्माइल फैल गयी. दीदी बोली, मुझे मालूम है, मुझे ऐसे कंपेर करने के लिए नही कहना चाहिए, आइ’म सॉरी.
मैने फिर से कुटिल मुस्कान के साथ कहा, दीदी आपकी अड्वाइस बिल्कुल पर्फेक्ट थी. थॅंक यू, मुझे अपनी बेवकूफी भरी हरकतों से बाहर निकालने के लिए.
दीदी ने खिलखिल्लाते हुए कहा, और बड़ी बेहन किस काम आएगी?
मैं दीदी के रूम से निकल के अपने रूम में आ गया, मैने अपने धुले हुए कपड़े लिए और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ चल दिया. रास्ते में पापा ने मुझे पकड़ लिया और मुझे चिढ़ाते हुए पूछा, कल रात किस दोस्त के यहाँ थे जनाब? डॉली बता रही थी किसी दोस्त के यहाँ कंबाइंड स्टडीस कर रहे हो. अगली बार से उस दोस्त का नाम और मोबाइल नंबर जाने से पहले बताने का ध्यान रखना. पापा ने बताया कि वो आज मम्मी के साथ खन्ना अंकल के गाओं जा रहे हैं, जहाँ उनके पिताजी रहते थे और वो कल एक्सपाइर हो गये हैं. हालाँकि ये मुझे पहले से पता था.
मैने बाथरूम में जाकर अपने धुले हुए कपड़ों को खूँटि पर टांगा, और फिर शवर चला के नहाने लगा, गुनगुने पानी से शरीर को बहुत आराम मिल रहा था, सारी थकान और टेन्षन दूर हो रही थी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और पानी जो मेरे चेहरे पर गिर रहा था, वो अपने साथ मेरी सारे विचारों और दुविधाओं को अपने साथ बहा के ले जा रहा था.
मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी, मैने पानी के नीचे से अपना चेहरा हटाया और फिर सुनने लगा. मैने इग्नोर करते ऊए सोचा शायद टवल या कुछ और गिर गया होगा. जैसे ही मैने अपना चेहरा फिर से पानी के नीचे किया, मुझे फिर से एहसास हुआ कि बाथरूम में मेरे अलावा भी कोई और है.
मुझे विश्वास नही हुआ. मैं थोड़ा रिलॅक्स होना शुरू ही हुआ हा, और अब फिर से मेरे दिमाग़ में हज़ारों सवाल घूमने लगे. अपने दिमाग़ में चल रहे सवालों का जवाब ढूँढने के लिए मैने शवर बंद किया, और घूम के देखा, वहाँ बाथरूम के डोर के पास दीदी खड़ी हुई थी, और वहीं अपनी पॅंट उतारते हुए थोड़ा झुकी हुई थी. दीदी ने मेरी तरफ कातिल मुस्कान के साथ देखा.
तुमने मुझे सुना नही था क्या? मैं दीदी को कुछ जवाब देने की स्तिथि में नही था, फिर दीदी ने अपनी पॅंट उतारी और फिर पैंटी, फिर अपनी टी-शर्ट को गले में से निकाला और ब्रा का हुक खोल दिया, मैं दीदी को अपना मूँह खोले देखे जा रहा था. दीदी ने मेरे पास आकर पूछा, मैं भी तुम्हारे साथ में ही नहा लूँ?
मैं तुरंत शवर के नीचे से साइड में हो गया, और दीदी को शवर के नीचा आने के लिए जगह बना दी. दीदी गजब की लग रही थी- एक दम नंगी, उनके निपल एक दम हार्ड थे, और हिप्स के उपर पैंटी के एलास्टिक की एक लाल धारी बनी हुई थी. अपने बालों का पोनीटेल बनाते हुए दीदी ने मुझे देख के स्माइल किया.
दीदी, आप क्या.... मेरा मतलब..., मैं कुछ बोलने की कोशिश करने लगा, और अपने सर्प्राइज़ और कन्फ्यूषन को व्यक्त करने के लिए शब्दों को ढूँढने लगा.
कुटिल मुस्कान के साथ दीदी फुसफुसाई, धीरे बोलो मम्मी पापा सुन ना लें! अभी वो गये नही हैं. दीदी मेरे पास आई, मैं कुछ और पीछे हो गया जिस से दीदी पूरी शवर के नीचे आ जाएँ... ये सब बहुत अजीब लग रहा था. दीदी आगे बोली, मैने सोचा क्यों ना कल रात की कामयाबी के लिए तुम्हे सर्प्राइज़ दिया जाए.
मैं धीरे से बोला, सब कुछ आप की हेल्प की वजह से ही संभव हो पाया, दीदी. दीदी मेरे और करीब आ गयी, मैने थोड़ी जगह तो दी, लेकिन जान बूझ कर दीदी के पास में ही रहा.