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भाभी का बदला

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बहुत देर बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे इस तरह बिना उसकी पर्मिशन के उसे घूर्ना नही चाहिए, मैं फिर से पलट के बाथरूम में चला गया. मैने ठंडे पानी का नल खोल के अपने चेहरे पर कुछ छींटे मारे. कुछ देर बाद तान्या डोरवे में आ गयी, और स्माइल करने लगी... मैं उसे बाथरूम में घुसने देने के लिए साइड में हो गया.

उस सुबह हम दोनो ने कुछ और बातें की, और तान्या ने मुझे कॉलेज तक कार से ड्रॉप करने का ऑफर किया. तान्या के मोबाइल पर उसके बहुत सारे फॅमिली मेंबर्ज़ के कॉल आ रहे थे, मैने वहाँ से निकलने में ही अपनी भलाई समझी. हालाँकि, तान्या की आँखें मुझे जो शुक्रिया कह रही थी, उसके लिए मैं दीदी की सही सलाह का आभारी था. तान्या को ये बात समझ में आना बहुत ज़रूरी था कि वो मैं ही हूँ जो उसकी हिफ़ाज़त कर सकता हूँ और उसे जब ज़रूरत हो मैं उसको प्रोटेक्ट करने के लिए हमेशा तय्यार हूँ.

मेरी कॉलेज की कार पार्किंग तक ड्रॉप करने तक की ड्राइव में तान्या पूरी तरह खामोश रही, लेकिन ये बहुत ही अंतरंग और ऐसे खामोशी थी जो हम दोनो समझ रहे थे. शब्दों में बयान करने के लिए उन पलों में कुछ नही बचा था. मैने ड्राइव कर रही तान्या का बाँया हाथ पकड़ा, और उसने मेरा... हम दोनो ने एक दूसरे के हाथ को दबा दिया...

कार से निकलने से पहले तान्या ने मुझे अब तक की तीसरी किस दी... ये किस अब तक की सबसे ज़्यादा लंबी और गहरी थी... पहली दोनो किस्सस से कहीं ज़्यादा बेहतर और सच्ची...

जब मैं अपने घर पहुँचा, दीदी मेरे से मिलने को इतना ज़्यादा आतुर थी कि इस से पहले की मम्मी पापा को मालूम चले कि मैं आ गया हूँ, वो दरवाजे से ही खींच कर मुझे अपने बेड रूम में ले गयी.

दीदी ने डोर को बंद करते हुए और बेड पर बैठते हुए पूछा, तो फिर कैसा रहा?

मैं दीदी को वो सब बताने लगा जो कुछ तान्या ने मुझे बताया था- लेकिन ज़्यादा विस्तार में नही. दीदी भी ज़्यादा डीटेल में जानने को उत्सुक नही थी, दीदी समझ गयी कि जो कुछ हमारे बीच बातें हुई थी वो तान्या के लिए प्राइवेट थी. लेकिन वो मेरे पूरी रात के स्टे के बारे में जानने को उत्सुक थी, ख़ास तौर पर हमने कैसे कब और कितना लंबा किस किया. दीदी हमारे किस का डिस्क्रिप्षन सुन के थोड़ा नर्वस हुई, लेकिन वो बहुत खुश थी.

दीदी (थोड़ा असुरक्षित होते हुए): शायद मुझे ऐसा नही पूछना चाहिए... लेकिन क्या उस को किस करते समय तुम को वैसा ही फील हुआ.... जैसा मेरे को किस करते समय फील होता है?

मैने कुटिल मुस्कान के साथ दीदी की तरफ हाथ बढ़ाया, दीदी जब मैं आपको किस करता हूँ तो मैं बयान नही कर सकता, जो फीलिंग होती है उसको शब्दों में नही कहा जा सकता... वो बस बहुत ....

दीदी के चेहरे पर एक स्वीट स्माइल फैल गयी. दीदी बोली, मुझे मालूम है, मुझे ऐसे कंपेर करने के लिए नही कहना चाहिए, आइ’म सॉरी.

मैने फिर से कुटिल मुस्कान के साथ कहा, दीदी आपकी अड्वाइस बिल्कुल पर्फेक्ट थी. थॅंक यू, मुझे अपनी बेवकूफी भरी हरकतों से बाहर निकालने के लिए.

दीदी ने खिलखिल्लाते हुए कहा, और बड़ी बेहन किस काम आएगी?

मैं दीदी के रूम से निकल के अपने रूम में आ गया, मैने अपने धुले हुए कपड़े लिए और नहाने के लिए बाथरूम की तरफ चल दिया. रास्ते में पापा ने मुझे पकड़ लिया और मुझे चिढ़ाते हुए पूछा, कल रात किस दोस्त के यहाँ थे जनाब? डॉली बता रही थी किसी दोस्त के यहाँ कंबाइंड स्टडीस कर रहे हो. अगली बार से उस दोस्त का नाम और मोबाइल नंबर जाने से पहले बताने का ध्यान रखना. पापा ने बताया कि वो आज मम्मी के साथ खन्ना अंकल के गाओं जा रहे हैं, जहाँ उनके पिताजी रहते थे और वो कल एक्सपाइर हो गये हैं. हालाँकि ये मुझे पहले से पता था.

मैने बाथरूम में जाकर अपने धुले हुए कपड़ों को खूँटि पर टांगा, और फिर शवर चला के नहाने लगा, गुनगुने पानी से शरीर को बहुत आराम मिल रहा था, सारी थकान और टेन्षन दूर हो रही थी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और पानी जो मेरे चेहरे पर गिर रहा था, वो अपने साथ मेरी सारे विचारों और दुविधाओं को अपने साथ बहा के ले जा रहा था.

मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी, मैने पानी के नीचे से अपना चेहरा हटाया और फिर सुनने लगा. मैने इग्नोर करते ऊए सोचा शायद टवल या कुछ और गिर गया होगा. जैसे ही मैने अपना चेहरा फिर से पानी के नीचे किया, मुझे फिर से एहसास हुआ कि बाथरूम में मेरे अलावा भी कोई और है.

मुझे विश्वास नही हुआ. मैं थोड़ा रिलॅक्स होना शुरू ही हुआ हा, और अब फिर से मेरे दिमाग़ में हज़ारों सवाल घूमने लगे. अपने दिमाग़ में चल रहे सवालों का जवाब ढूँढने के लिए मैने शवर बंद किया, और घूम के देखा, वहाँ बाथरूम के डोर के पास दीदी खड़ी हुई थी, और वहीं अपनी पॅंट उतारते हुए थोड़ा झुकी हुई थी. दीदी ने मेरी तरफ कातिल मुस्कान के साथ देखा.

तुमने मुझे सुना नही था क्या? मैं दीदी को कुछ जवाब देने की स्तिथि में नही था, फिर दीदी ने अपनी पॅंट उतारी और फिर पैंटी, फिर अपनी टी-शर्ट को गले में से निकाला और ब्रा का हुक खोल दिया, मैं दीदी को अपना मूँह खोले देखे जा रहा था. दीदी ने मेरे पास आकर पूछा, मैं भी तुम्हारे साथ में ही नहा लूँ?

मैं तुरंत शवर के नीचे से साइड में हो गया, और दीदी को शवर के नीचा आने के लिए जगह बना दी. दीदी गजब की लग रही थी- एक दम नंगी, उनके निपल एक दम हार्ड थे, और हिप्स के उपर पैंटी के एलास्टिक की एक लाल धारी बनी हुई थी. अपने बालों का पोनीटेल बनाते हुए दीदी ने मुझे देख के स्माइल किया.

दीदी, आप क्या.... मेरा मतलब..., मैं कुछ बोलने की कोशिश करने लगा, और अपने सर्प्राइज़ और कन्फ्यूषन को व्यक्त करने के लिए शब्दों को ढूँढने लगा.

कुटिल मुस्कान के साथ दीदी फुसफुसाई, धीरे बोलो मम्मी पापा सुन ना लें! अभी वो गये नही हैं. दीदी मेरे पास आई, मैं कुछ और पीछे हो गया जिस से दीदी पूरी शवर के नीचे आ जाएँ... ये सब बहुत अजीब लग रहा था. दीदी आगे बोली, मैने सोचा क्यों ना कल रात की कामयाबी के लिए तुम्हे सर्प्राइज़ दिया जाए.

मैं धीरे से बोला, सब कुछ आप की हेल्प की वजह से ही संभव हो पाया, दीदी. दीदी मेरे और करीब आ गयी, मैने थोड़ी जगह तो दी, लेकिन जान बूझ कर दीदी के पास में ही रहा.

 
दीदी नीचे देख रही थी. मैने पहले इस पर ध्यान नही दिया, लेकिन दीदी मेरे लंड की तरफ देख रही थी, जो पूरा खड़ा होकर दीदी की तरफ पॉइंट कर रहा था. दीदी ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा, मुझे लगा कि तुम बहुत दिनों से अपने पर काबू रखे हुए हो, और सोचा क्यों ना तुम्हारी थोड़ी हेल्प कर दी जाए. लगता तो ऐसा है, जैसे तुम भी मुझे एक्सपेक्ट कर रहे थे. दीदी ने मेरे बॉडीवाश की बॉटल को अपने हाथ में ले लिया, और हंसते हुआ पूछा, साबुन लगाऊं तुम को?

मैने अपनी आँखें बंद कर ली और हल्की से सिसकी लेते हुआ कहा, दीदी आप मज़ाक तो नही कर रही ना?

फिर से हंसते हुए दीदी ने बॉटल में से थोड़े सा साबुन की ड्रॉप अपने दोनो हाथों के बीच लेकर उसको घिस घिस के झाग बनाने लगी.

दीदी: साची बोलूं तो मैं यहाँ आई ही इसलिए थी क्योंकि मुझे लगा तुम्हे किसी चीज़ की ज़रूरत है. थोड़ा झिझकते हुए दीदी ने मेरी तरफ देखा, और मेरी आँखों में आँखें डाल दी. फिर साबुन की बॉटल को नीचे रख दिया, और मुझे पीछे घूमने का इशारा किया.

ये बहुत विचित्र और पागलों जैसा लग रहा था, दीदी मेरी गर्दन और कंधों पर हाथ में आए साबुन को लगा रही थी. एक हाथ से मेरे एक कंधे को पकड़कर दूसरे हाथ से मेरे दूसरे कंधे पर साबुन मल रही थी. ऐसा मेरे होश में पहली बार हो रहा था कि कोई दूसरा मेरे को नहलाए, और वो भी कोई अंजान नही, बल्कि मेरी सग़ी बड़ी बेहन. लेकिन दीदी अच्छे से साबुन लगा रही थी. मैं सीधा खड़ा हुआ था, पानी मेरी छाती पर गिर रहा था, दीदी धीरे लेकिन रगड़ रगड़ के मेरी पीठ पर साबुन मल रही थी, दीदी का हाथ अब मेरी गान्ड की गोलाईयों पर से होता हुआ मेरे जांघों पर पहुँच गया था.

दीदी: अच्छा, अब घूम जाओ

हालाँकि मैने सुन लिया था, लेकिन मानो मेरे शरीर पेरलाइज़ हो गया था. जब मुझे होश आया तब तक घूम चुका था, मुझे कुछ याद नही, कब और कैसे. मेरी पीठ पर पानी गिर रहा था, और साबुन के झाग को धो रहा था, दीदी मेरे सामने नंगी खड़ी थी, दीदी के हाथों पर भी साबुन के झाग लगे हुए थे. दीदी मेरे और पास आई, कुछ ज़्यादा ही पास आ गयी. मैने थोड़ा बॉडीवाश अपने हाथ में लिया और अपनी गर्दन और कंधों पर मल के झाग बनाने लगा, गिरते हुए साबुन के झागों को दीदी मेरी छाती के साइड में और पेट पर मलने लगी.

फिर दीदी मेरे सामने घुटनों पर बैठ गयी.

दीदी ने थोड़ा बॉडीवाश की ड्रॉप हाथ में ली और मेरी जांघों और टट्टों पर मलने लगी, फिर अपने हाथ को दोनो टाँगों के बीच से पीछे की तरफ ले गयी और मेरी गान्ड पर साबुन भरा हाथ फिराने लगी. दीदी ने अपने फ्री लेफ्ट हॅंड को मेरी जाँघ पर रख दिया, और दूसरे राइट हॅंड को दोनो टाँगों के बीच घुसा रखा था, दीदी का चेहरा मेरे खड़े लंड से बस कुछ इंच की दूरी पर था. दीदी अपना हाथ अंदर की तरफ ले गयी, फिर मेरी जांघों के अन्द्रुनि तरफ और फिर उपर करते हुए दीदी ने मेरी बॉल्स को अपने हाथ में हल्के से पकड़ लिया. हल्के से दीदी ने लटक रही टट्टों की थैली को अपनी साबुन से चिकनी हुई उंगलियों से सहलाया, और फिर मेरे फूँकार मार रहे लंड की तरफ देखा, दीदी की इन हरकतों से लंड और ज़्यादा उग्र रूप ले चुका था. दूसरा हाथ भी दीदी मेरे लंड की तरफ ले आई. और फिर यकायक, हल्की सी सिसकी भरते हुए दीदी ने अपना मूँह खोला, अपनी आँखें बंद की, और अपने धधकते हुए होंठों के बीच मेरे नंगे लंड को भर लिया.

दीदी अपने मूँह में मेरे लंड को अंदर ले जाते हुए, अपनी जीभ मेरे सुपाडे पर घिस रही थी.

मेरे लंड को ज़्यादा से ज़्यादा अंदर ले जाते हुए दीदी के होंठ मेरे लंड के बींचो बीच थम गये.

दीदी अब भी मेरे गोलियों से अपने साबुन से चिकने हाथों के साथ खेल रही थी, और मेरे लंड को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मूँह में ले जाने का प्रयास कर रही थी, जब तक की मेरा लंड दीदी के टॉन्सिल्स को छूने ना लगा.

शवर से निकलता पानी मेरी पीठ के उपर से बह रहा था, दीदी मेरे सामने बैठकर मेरे लंड को अपने मूँह में ज़्यादा से ज़्यादा अंदर ले जाने का प्रयत्न कर रही थी. साबुन की खुश्बू हवा में थी, और दीदी के पानी से भीगे हुए बाल दीदी की पीठ में लटो का रूप लेकर चिपके हुए थे. मेरे लंड की पूरी लंबाई तक, दीदी अपनी जीभ से मेरे लंड को चाट के, उसका स्वाद ले चुकी थी. अपने होंठों को थोड़ा पीछे करते हुए मेरे लंड को सुपाडे को अपनी जीभ के उपर लाते हुए दीदी उसको ऐसे चूसने लगी जैसे किसी लॉलीपोप को चूस रही हो. मेरे मूँह से गुर्राने की आवाज़ निकलने लगी, दीदी ने अपना चेहरा उठा के मेरी तरफ देखा, और फिर मेरी आँखों के सामने मेरे पूरे लंड को जड़ तक अपने मूँह के अंदर ले गयी.

ये सब मेरे लिए ज़रूरत से ज़्यादा था. मैं अब बहुत मज़े कर चुका था. मैने अपना लंड दीदी के मूँह में से निकाला और दीदी को उपर खींच के, अपने से चिपका के दीदी को जोरदार किस करने लगा. दीदी ने मेरी इस चिपकने का बराबर जवाब दिया, और मुझे दीदी को दीवार पर सटा का पूरा मौका दिया. मैं दीदी को दीवार से सटा के, उसके पूरे शरीर के हर भाग पर, जहाँ मेरा मन करे, हाथ फिराने लगा. मैं दीदी को भूखे शेर की तरह किस करते हुए दीदी की पानी से भीगी चूंचियों को अपने हाथों से दबाने लगा, और दोनो चूंचियों को आटे की तरह गूँथने लगा. मैं दीदी के ज़ोर ज़ोर से साँस लेने के कारण पंसलियों को फूलते और ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर होते देख रहा था. मैने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर दीदी के एक हिप्स को अपनी हथेली में भर के मसलना शुरू कर दिया, मैं हिप्स की गोलाईयों को ज़्यादा से ज़्यादा अपनी हथेली में भरने का प्रयास करने लगा. दीदी ने अपने हाथों से मेरी पीठ को जकड लिया, और अपने और ज़्यादा जितना करीब हो सके कर लिया, दीदी महसूस कर रही थी कि मेरा हाथ अब उसकी गान्ड की गोलाईयों से फिसल कर आगे आते हुए, झान्टो के ट्राइंगल पर होते हुए अब दीदी की चूत की तरफ बढ़ चुका है. मैं झान्टो की लकीर के साथ साथ अपने हाथ को दीदी की दोनो टाँगों के बीच आगे बढ़ाने लगा, आगे स्किन सॉफ्ट और थोड़ी गीली थी. मैने अपनी उंगलियाँ दीदी की स्वागत कर रही चूत के अंदर घुसा दी, और एक उंगली को हल्का सा मोड़ के चूत के दाने को सहलाने लगा, दीदी ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगी, और उपर नीचे होते हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी. मेरा लंड दीदी के पेट के उपर दस्तक मार रहा था. और मैं दीदी की दोनो टाँगों के बीच, दीदी की चूत में ज़्यादा से ज़्यादा अपनी उंगलियों से आग लगाकर, जान बूझ कर अपने लंड को दीदी के पेट के उपर घिस रहा था.

 
दीदी अब होश खोती जा रही थी, ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी, और अपनी चूत पर मेरी उंगली की हर हरकत पर मचल उठती. मैने दीदी को ज़ोर से पकड़ा और गर्दन पर किस करने लगा. दीदी ने अपने हाथ से मेरे सिर को कस के पकड़ लिया, और मचलते हुए मेरे बालों और गर्दन पर हाथ फिराने लगी. तभी दीदी का शरीर अकड़ने लगा, दीदी ने अपने उंगलियों के नाख़ून मेरी पीठ और गर्दन में गढ़ाने शुरू कर दिए. दीदी के मूँह से हल्की हल्की आवाज़ें निकलने लगी, फिर ज़ोर से कराहने की आवाज़, दीदी के पैर इस कदर काँपने लगे, यदि मैने संभाला हुआ ना होता तो शायद वो गिर ही जाती. दीदी की गान्ड अपने आप आगे पीछे होने लगी, दीदी ने अपना सिर मेरी गर्दन में घुसा दिया और फिर अह्ह्ह्ह.... की आवाज़ आई. मेरी उंगलियों अब भी दीदी की चूत के साथ अठखेलिया कर रही थी. दीदी का शरीर एक बार फिर से अकड़ गया, और दीदी कयि बार झड गयी. दीदी ने ढेर सारे ओर्गम एक साथ फील किए.

ऐसा लग रहा था मानो दीदी के नाख़ून मेरी स्किन में छेद कर देंगे. दीदी अब थोड़ा शांत हो रही थी, वो अब भी थोड़ा काँप रही थी, लेकिन पहले से कम. मैने जल्दी से संभाल के दीदी के उपर से अपने हाथ हटाए और दीदी को फिर से घुटनों पर बैठा दिया, दीदी ऐसा करने के लिए तुरंत मान गयी. पानी अभी भी मेरी पीठ पर बह रहा था, मैं अपने लंड को दीदी के चेहरे की तरफ पॉइंट कर के मूठ मारने लगा, दूसरे हाथ से मैं दीदी के सिर को पकड़े था. दीदी अब भी तेज तेज साँसें ले रही थी, लेकिन उसकी नज़रें मेरे लंड पर थी, जिसको मैं दीदी के चेहरे के बिल्कुल सामने हिला के, आगे पीछे कर के मूठ मार रहा था.

मुझे लगा अब मैं भी झड़ने वाला हूँ, मैने बिना रोके सारी धार को दीदी के इंतेजार कर रहे चेहरे पर गिरने दिया. पहली पिचकारी दीदी के गाल और होंठों पर गिरी, दीदी ने सर्प्राइज़ होकर तुरंत अपनी आँखों को बंद कर लिया, फिर थोड़ा आगे आकर अपना मूँह खोल दिया, मैं अगली पिचकारी को दीदी के खुले मूँह में, दूर अंदर टॉन्सिल तक मारने से नही रोक पाया. दीदी थोड़ा खाँसी, अगली पिचकारी फिर से दीदी के गाल पर गिरी, लेकिन दीदी ने तुरंत फिर से अपना मूँह खोल दिया, मैने थोड़ा आगे झुक कर अपने लंड का सुपाड़ा दीदी के निचले होंठ पर रख के लंड को आगे पीछे करने लगा, मैने ढेर सारे वीर्य के उछालों को दीदी के मूँह में उंड़ेल दिया. जब मैं झड गया, तो दीदी पीछे की तरफ झुक गयी, और मैं अचंभित रह गया जब मैने देखा दीदी बिना कुछ सोचे, मूँह में भरे मेरे सारे वीर्य को एक घूँट में अंदर सटक गयी. मैं देखता रह गया, दीदी ने अपने चेहरे पर जमा वीर्य को हाथो से पोंच्छा और फिर पानी से धो दिया.

मैं भूल गया कि कब मैने शवर बंद कर के बाथरूम से बाहर निकला. सब कुछ बहुत जल्दी हुआ था, हम दोनो थक गये थे. ऐसा करने में मज़ा तो बहुत आया, एक दूसरे के साथ इस तरह नंगे होकर हम और ज़्यादा करीब आ गये थे. जो कुछ हम दोनो ने अभी किया था उसके बाद मुझे अपने रूम में जाते हुए बहुत खुशी हो रही थी. अपने रूम में आकर मैने एक मॅगज़ीन पढ़ने की कोशिश की, फिर उसे एक तरफ फेंक के छत की तरफ देखने लगा, और मंद मंद मुस्कुराने लगा.....

फ्राइडे को तान्या अपने दादू की उठावनी, तेरहवीं और बाकी रस्मों को अटेंड करने के लिए गाँव चली गयी. मैं और तान्या रोजाना मोबाइल पर बातें करते, और जिस दिन से मैने तान्या के अपार्टमेंट में एक रात गुजारी थी उसके बाद उसकी आवाज़ सुन कर अच्छा लागता था कि वो अब नॉर्मल और ठीक होने लगी है, और कभी कभी मेरे साथ मज़ाक भी कर लेती थी. मैं अपने दिल ही दिल में ये बात जानता था कि ये बस दीदी ही हैं जो मुझे इस सब में मेरी हेल्प कर रही हैं. जब भी मैं दीदी को बुलाता, वो तुरंत चली आती, चाहे वो उस वक़्त मॅगज़ीन या किताब पढ़ रही हो, या फिर कोई और काम कर रही हो. कभी कभी तो मैं बस लेट के दीदी के एसपरियेन्स और गयाँ को बस बेड पर लेट हुए सुनते रहता. दीदी जिस तरह से मेरी हर रूप में हेल्प कर रही थी, उस पर शायद कोई विश्वास ना करे, और इसी वजह से मैं दीदी को और ज़्यादा प्यार करने लगा था. हम दोनो की परवरिश जिस कंफर्टबल माहौल में हुई थी, उसमे ये बिल्कुल अजीब नही लगता था कि मैं दीदी की पीठ को सहला रहा हूँ जब दीदी फोन पर बात कर रही हो या दीदी मेरी पीठ पर हाथ फिराए, जब कभी हम एक साथ लेटे हुए बोर हो रहे हों.

सॅटर्डे की सुबह वो बहुत हसीन थी, जब मम्मी पापा तो शॉपिंग करने के बहाने, दोनो एक साथ थोड़ा टाइम स्पेंड करने गये थे. दीदी और मैने थोड़ा बाहर निकल कर लॉन में घूमने लगा, झूले पर बैठ कर झूले और फिर एक बड़ी सी बॉल के साथ कॅच कॅच खेला. दोपहर में मम्मी पापा वापस आ गये, दीदी जब नहा रही थी, उस टाइम मैं और पापा लंच के बाद टीवी पर एक मूवी देख रहे थे. रात को 8 बजे हम सबने एक साथ डाइनिंग टेबल पर बैठ के डिन्नर किया, फिर थोड़ा और टीवी देखने के बाद मम्मी पापा आज थोड़ा जल्दी ही अपने बेडरूम में सोने के लिए चले गये, हम दोनो सोफे पर बैठ कर उन दोनो को जाते हुए देख के मूँह छुपा के धीरे धीरे हँसने लगे. थोड़ी देर बाद जब मैं शवर लेने चला गया, जब मैं वापस लौटा तब तक दीदी अपने रूम में जा चुकी थी.

मैं केवल तौलिया लपेटे हुए दीदी के रूम में पहुँचा, मेरा वहाँ ज़्यादा देर तक रुकने का इरादा नही था, लेकिन दीदी से इधर उधर की बातें करते करते टाइम का पता ही नही चला. मेरे बाल अब सूख गये थे. जब मैने कहा अचाहा चलता हूँ, टाइम काफ़ी हो गया है, दीदी ने घड़ी की तरफ देखा.

हां, अब हमको सो जाना चाहिए, दीदी ने अंगड़ाई लेते हुए कहा. दीदी ने देखा कि मैं दीदी के शरीर पर किस जगह घूर रहा हूँ, ये देख वो मुस्कुरा गयी. मैं शरमा गया और खिसियाते हुए हँसने लगा.

दीदी: राज, तुम मुझको कपड़े बदलते हुए देखना चाहोगे?

मैं शरमा कर हंसते हुए बोला, हां दीदी, सच में आज आप बहुत सुंदर लग रही हैं.

दीदी मेरा कॉंप्लिमेंट सुन के मुस्कुराइ और बोली, मैं भी तुम्हारे बारे में यह ही सोच रही थी.

हम दोनो ही थोडा शरमा गये लेकिन जब एक दूसरे की तरफ देखा तो दोनो की आँखों में चमक थी. दीदी निचला होंठ नर्वस्ली दानों से काटते हुए, अपने हाथ से टी-शर्ट को नीचे से पकड़ के उपर उठाया और अपने गले में से उपर कर के निकाल दिया, दीदी ने ब्रा नही पहन रखी थी, दीदी की मस्त चूंचियाँ मेरी आँखों के सामने थी. दीदी ने फिर अपनी पैंट की एलास्टिक में अपनी उंगलियाँ फँसाई और उसे अपने हिप्स और टाँगों से नीचे कर दिया, दीदी अब मेरे सामने सिर्फ़ वाइट पैंटी में खड़ी थी. मैं दीदी के शरीर के हर हिस्से, ख़ासकर उभारों को को आँखें फाड़ फाड़ के देख रहा था, और दीदी को अपने सामने अपनी पैंटी उतारते हुए देख रहा था.

जैसे ही दीदी की पैंटी ज़मीन पर गिरी, मैने तुरंत आगे बढ़ कर दीदी को पकड़ के बेड पर लिटा दिया. हम दोनो हंसते हुए बेड पर गिर पड़े, दीदी के बालों ने हम दोनो के चेहरों को ढक लिया. दीदी ने करवट लेते हुए अपना चेहरे मेरी तरफ किया और अपने बालों को ठीक करते हुए पीछे की तरफ किया. मैं दीदी के पास मज़े से लेटे हुए दीदी की साइड पर हाथ फिराने लगा, और दीदी के शरीर की बनावट और उतार चढ़ाव को महसूस करने लगा. दीदी ने जब मुझे उनकी चूंचियों के दर्शन का आनंद लेते हुए देखा तो फिर से अपना होंठ काटा, मैने थोड़ा डरते हुए अपनी उंगलियाँ दीदी की चूंचियों पर रखी, मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही रहा जब दीदी ने मुझे अपनी चूंचियों पर उंगलियाँ फिराने से नही रोका. मैने धीरे से निपल को छुआ और पिंकिश ब्राउन निपल को टाइट होते हुए देखने लगा. दीदी ने अब की बार अपना होंठ ज़ोर से काटा जब मैने दीदी के निपल को सहलाते हुए अपने अंगूठे और पहली उंगली के बीच लेकर हल्का सा दबाया. दीदी थोड़ा पीछे हुई और अपनू चूंची को मेरे चेहरे के पास ले आई, मैं भी थोड़ा आगे खिसक गया और अपने होंठों को चूंची पर रख दिया. किसी छोटे बच्चे की तरह मैं दीदी के निपल को मूँह में भर भर के चूसने लगा,और अपने हाथों से मम्मों को सहला कर दबाने लगा. दीदी ने सिसकते हुए अपनी आँखें बंद कर ली.

दीदी की चूंची को मैं ज़ोर ज़ोर से किस करने लगा और अपनी जीभ से निपल के साथ खेलने लगा. मेरा लंड खड़ा हो चुका था, मैने चूंची पर से हाथ को हटा कर दीदी की साइड पर फिराते हुए नीचे ले जाने लगा, फिर पेट के उपर ले गया. दीदी ने करवट ली और पीठ के बल सीधी लेट गयी, जिस से मुझे जगह मिल सके. मैने दीदी के पेट के उपर बीच में वहाँ हाथ फिराने लगा जहाँ से पंसलियाँ ख़तम होती हैं और झाटों का खेत शुरू होता है.

दीदी फिर थोड़ा खिसकी और अपने घुटनों को मोड़ लिया, और अपनी टांगे दोनो तरफ फैला दी. मैं इशारा समझ गया, मैने एक हाथ से चूंची को सहलाना और दबाना जारी रखा, और दूसरे हाथ की उंगलियों को दीदी की चूत की हल्की सी गीली फांकों पर फिराने लगा. मैं उंगलियों की टिप से चूत की फांकों के बीच छेद पर भी घिसने लगा. कुछ मिनिट्स के बाद जब दीदी गरम होने लगी तो चूत चिकनी होने लगी और चूत के अंदर वाले लिप्स भी बाहर निकल आए.

दीदी को नंगा देख कर मैं पागल हो गया था, मैने खड़े होकर अपनी टवल खोल के दूर फेंकी और फिर दीदी के पैरों की तरफ मूँह कर के इस प्रकार लेट गया कि मेरा सिर दीदी की झान्टो के पास था. दीदी ये देख खिलखिलाई, फिर अपने पैर थोड़े और चौड़े कर दिया, और मेरे लंड को पकड़ लिया और लंड को छू छू कर देखने और महसूस करने लगी. दीदी की गोरी गोरी टाँगों और जांघों के बीच छुपे खजाने को देखने के लिए मैने सिर झुकाया, और बस दीदी के नग्न शरीर को निहारने लगा. मैं हाथ से धीरे, हल्के से दीदी के कोमल शरीर को छूकर उसकी सॉफ्टनेस को महसूस करने लगा. दीदी की झान्टो के घुंघराले ब्लॅक ब्राउन बालों को निहारने लगा, और उस मादक खुश्बू में डूब गया. दीदी भी मुझे ठीक उसी तरह छू रही थी – और मेरे लंड की बनावट को महसूस कर रही थी, उसकी लंबाई का अपने हाथो में पकड़ कर अंदाज़ा लगा रही थी, और सुपाडे को अंगूठे की टिप से छू के देख रही थी.

मैने अपनी उंगलियों से दीदी की चूत की फांकों को अलग कर चूत के दोनो होंठों को निहारने लगा. मैने चूत के दोनो होंठों को इतना अलग कर दिया कि अब चूत के उपर उठकर निकला हुआ दाना दिखाई दे रहा था. जैसे ही उस दाने को मैने अपने अंगूठे की टिप से दबाया, और गोल गोल घुमाने लगा, दीदी मस्त होकर मचलने लगी. दीदी ने भी जवाब में अपना अंगूठा मेरे लंड के सुपाडे के बेस, यानी जहाँ से सुपाड़ा गोल गोल शेप लेकर लंड से अलग होकर उठता है, वहाँ पर रख दिया और उस जगह सहलाने लगी. मेरे शरीर में आनंद की लहर सी दौड़ गयी, मैने इस चीज़ पर गौर ही नही किया कि दीदी भी मेरी तरह ही काँप रही है.

 
मैं दीदी की चूत और उसके दाने के साथ अब ज़ोर ज़ोर से खेलने लगा और दीदी भी मेरे लंड के साथ वैसा ही कर रही थी, दोनो के मूँह से आनंद भरी कराहें और सिसकियाँ निकल रही थी. मुझे ये देख के विश्वास ही नही हुआ कि दीदी की चूत के लिप्स अब अब और ज़्यादा फूल गये हैं, और नीचे दोनो अब अलग अलग होकर, उन्होने चूत के मूँह को और ज़्यादा खोल दिया है. मानो किसी गुलाब के फूल की पंखुड़ियों पर जमी ओवेयर (ड्यू) की बूँदों की तरह, चूत से निकल रहा चिकना पानी चूत के दोनो होंठों पर जम रहा था, तभी एक बूँद चूत के होंठ पर बहती हुई, फिर जांघों पर से होती हुई बेड पर टपक गयी.

दीदी के हिप्स और टाँगें अब उपर नीचे होना शुरू हो गयी थी, दीदी की कराहने और सिसकियों की आवाज़ें मैं सुन रहा था. तभी दीदी के कराहने की आवाज़ बंद हो गयी, और मैने अपने लंड को गीला और गरम जगह महसूस किया, दीदी ने मेरे लंड को अपने मूँह मे ले लिया था और उसे प्यार से चूस और चाट रही थी. कुछ ही पलों बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ. दीदी भी बस झड ही रही थी, और काँप कर ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी, और मेरे लंड के सुपाडे को मूँह में भरकर अपने सिर को आगे पीछे कर रही थी. मैने गुर्राने की आवाज़ के साथ, इस से पहले कि मैं संभलता, अपने वीर्य की जोरदार धार दीदी के मूँह के अंदर छोड़ दी. दीदी अब भी मेरे लंड को मूँह में भर के आगे पीछे कर रही थी, और मैं अपना वीर्य उसमें उंड़ेले जा रहा था. दीदी अब होश में थी, और उसका अपनी बॉडी पर कंट्रोल था, दीदी पूरी जान लगा के मेरे लंड से पानी की आख़िरी बूँद को निचोड़ रही थी.

जब पानी की आख़िरी बूँद तक निकल गयी, तब दीदी ने हल्के से मेरे लंड को अपने मूँह में से निकाला.

थोड़ी देर हम वैसे ही पस्त होकर वहीं लेटे रहे. दीदी मेरे वीर्य को जब एक भी बार थूकने के लिए नही हिली, तो मैं शरमा गया कि दीदी आज फिर मेरे वीर्य को पी गयी है. आख़िर में मैं उठा और सीधा होकर दीदी के फेस टू फेस होकर लेट गया. दीदी अपनी पीठ के बल सीधी लेट गयी, और मैं साइड से दीदी के पास, दीदी को सहलाता हुआ लेट गया.

हम वैसे ही बहुत देर तक बिना कुछ बोले शांत लेटे रहे.

दीदी: क्या हम ये ठीक कर रहे हैं?

मैं कुछ देर चुप रहने के बाद बोला, दीदी आप कहना क्या चाहती हो?

दीदी (अपनी दोनो आइब्रोज को पास लाकर छत की तरफ देखते हुए): भाई बेहन को ये सब नही करना चाहिए. हम को एक दूसरे के इतने ज़्यादा करीब नही आना चाहिए.

मैने दीदी के पेट पर उंगली फिराते हुए कुछ सोचते हुए कहा, मैने इस बारे में बहुत सोचा है.

दीदी ने अपना चेहरा मेरे तरफ घुमा लिया, जब मैं ये सब समझा रहा था.

किसी और के साथ जब तक की आप उसको ठीक से जान ना लो, तब तक हम अपना असली चेहरा उसको नही दिखाते. क्योंकि आप उस को अभी ठीक से जानते नही हो, आप वो सब करने का प्रयत्न करते हो, जो उसको अच्छा लगता हो, और उसकी तरह ही आक्टिंग करने लगते हो, जिस से वो आपको पसंद करने लगे. हमेशा नही, लेकिन ज़्यादातर ऐसा ही होता है.

दीदी ने हां में सिर हिलाया, मानो उसके सब समझ में आ गया हो.

मैने आगे बोलते हुए कहा, हम दोनो एक दूसरे को बचपन से जानते हैं. हम एक दूसरे के बारे में सब कुछ जानते हैं, और एक दूसरे को स्वीकार भी करते हैं. हमारे बीच किसी तरह का कोई ढोंग नही है, हम एक दूसरे से कुछ नही छुपाते, जो कुछ असलियत है वो एक दूसरे के सामने है. हद है कि अगर हम दोनो एक दूसरे के करीब आते हैं, तो ये ग़लत समझा जाता है. दुनिया में बाकी लोग अपनी असलियत छुपा कर जब किसी के साथ संबंध बनाते हैं, जब कि दूसरा भी अपनी असलियत छुपा रहा है, उसको जायज़ समझा जाता है.

दीदी: मेरी क्लास में बहुत सी लड़कियाँ अमीर लड़कों के साथ सब कुछ करवाती हैं, जिनको वो पसंद भी नही करती, बस इसलिए कि उनको कॉलेज में अटेन्षन मिलती रहे और उनको अकेलापन ना महसूस हो.

राज: हां दीदी... चाहे जो भी कारण हो, हम दोनो एक दूसरे के साथ कंफर्टबल हैं, और इस करीबी को पसंद करते हैं. हमारा दिल एक दम सॉफ है. हम दोनो में से कोई भी किसी तरह का ढोंग नही कर रहा. मेरा मतलब है, हम दोनो को मालूम है की एक दिन हमारी शादी हो जाएगी और शादी के बाद हम किसी और के साथ प्यार और ये सब करेंगे, जैसा हम दोनो अभी एक दूसरे के साथ करते हैं.

अब हम दो जिस्म और एक जान हो चुके हैं, जो हमको करीब ला रहा है, एक भाई बेहन की तरह नही, बल्कि एक लड़का और लड़की की तरह. जितना मैं तुम्हे पाना चाहता हूँ, उतना ही तुम भी मुझे पाना चाहती हो, दीदी मैं आपको गहराई तक जानना चाहता हूँ.

कुछ देर हम दोनो शांत रहे, और फिर चाँदनी रात में एक दूसरे को गले लगा लिया.

दीदी का हाथ मेरी छाती से होता हुआ मेरे कंधे पर आ गया, दीदी थोड़ा झुकी और फिर मुझे किस कर लिया.

मैने भी दीदी को बाहों में भरकर किस किया.

दीदी अपनी बाहें मेरे गले में से निकाल के मेरी छाती पर ले आई, और मुझे अपने उपर खींच लिया. संकोच में दीदी अपने दोनो पैरो को कुछ देर जोड़ के लेटे रही, फिर अपनी टाँगें अलग अलग कर के चौड़ा दी, अब मैं पूरी तरह दीदी की उपर आकर, दीदी को पकड़ के किस करने लगा.

हम एक दूसरे के साथ इस अवस्था में पूरी तरह खो चुके थे. हमारे नंगे शरीर एक दूसरे से चिपके हुए थे, हमारे होंठों से होंठ मिले हुए थे, और एक दूसरे के शरीर को हम सहला सहला के फील कर रहे थे. मुझे पता ही नही चला कि इतना समय बीत चुका है जो कि मेरे लंड को दोबारा खड़ा होने के लिए पर्याप्त था, मुझे बिना बताए लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था. जिस तरह से मैं दीदी के उपर था, दीदी के शरीर मेरे नीचे उत्तेजक रूप में हिल डुल रहा था, वो मेरे लंड को खड़ा करने के लिए बहुत था, मेरा लंड खड़ा होकर दीदी की कोमल जगह को छू रहा था. दीदी अपनी गान्ड उठा उठा के लंड को अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी, मैं भी गान्ड को हिला के, आगे की तरफ दीदी के उपर दबा रहा था.

मैने दीदी के होंठों पर से अपने होंठ हटाए और नीचे दीदी की गर्दन पर किस करने लगा, और कुछ इंच नीचे आ गया. दीदी मस्ती में कराही जैसे ही मैने दीदी के उपरी कंधों पर होंठ रखे, और अपने हाथों को दीदी के पीछे ले गया. मैने अपनी गान्ड को कयि बार आगे पीछे किया, फिर मुझे लगा कि लंड का सुपाड़ा दीदी की चूत की फांकों के बीच घुस रहा है.

मेरे लंड के दीदी की चूत पर दस्तक देने के साथ ही दीदी का शरीर अकड़ने लगा, लंड के सुपाडे को दीदी की गरम चूत ने अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया था.

दीदी: राज, तुम अंदर घुसा रहे हो...

दीदी की गर्दन से अपने होंठों को दूर करते हुए मैं फुसफुसाया, हां मुझे मालूम है दीदी...

दीदी थोड़ा परेशान थी, लेकिन उनका शरीर अब सॉफ्ट हो रहा था

दीदी: मेरी जान.... राज.... क्या कर रहे हो...

मैने एक और ज़ोर से धक्का मारा, दीदी की चूत की झिल्ली मेरे लंड को आगे बढ़ने से रोक रही थी, लेकिन धीरे धीरे चूत खुलती जा रही थी. दीदी फिर से अकड़ने लगी.

मैने फुसफुसा कर कहा, हां दीदी... मुझे मालूम है... दीदी को और टाइट पकड़ते हुए, मैं अपने हिप्स को आगे की तरफ बढ़ाते हुए धकेलने लगा.

दीदी ने हान्फ्ते हुए कहा... राज ये ग़लत है... तभी चूत की झिल्ली फट गयी.

मेरी दीदी की चूत का द्वार अब खुल चुका था, और मेरा लंड उसमे प्रवेश कर चुका था. चूत का गीलापन और दीदी के दिल से निकलती आवाज़ सुन कर मैं आगे बढ़ रहा था. दीदी ने फिर से एक ज़ोर की साँस ली, और मूँह से एक चीख सी निकल गयी, जैसे ही लगा कि दोनो शरीर अब एक हो चुके हैं. मेरा लंड दीदी की चुदने को तय्यार चूत में गोते लगाने लगा, हम एक साथ हिल रहे थे, काँप रहे थे, एक दूसरे को जकड़े हुए थे, किस कर रहे थे और रो रहे थे....

दो शरीर अब एक हो चुके थे, हमारे दिल एक हो चुके थे, एक दम पूरी तरह से.

हम बिल्कुल मन्त्र मुग्ध थे. कभी ना टूटने वाली गाँठ की तरह हमारे शरीर जुड़े हुए थे. चाँदनी में हमारे नंगे शरीर चमक रहे थे, दोनो के मूँह से दबी हुई मीठी कराहने की आवाज़ें निकल रही थी. मैने अपने हाथों में दीदी की चूंचियों को भर लिया. फिर मूँह पास ले जाकर उनको चाट चाट कर मूँह में भरने लगा, फिर दीदी की गर्दन, दीदी के होंठ सब को चूमने और चाटने लगा. दीदी ने अपनी कमर उपर उठा दी, मैं हाथो से दीदी की सारी पंसलियों को महसूस कर रहा था जैसे जैसे दीदी अकड़ रही थी. दीदी अपने नाखूनों को मेरी पीठ में जोरों से दबा रही थी, फिर नीचे लाकर मेरे हिप्स को पकड़ के, अपने और ज़्यादा अंदर घुसाने के लिए अपनी तरफ खींचने लगी.

 
दीदी अपने पैर फैला के चौड़ा के लेटी थी, हमारी झान्टे एक दूसरे के साथ गीली होकर उलझ गयी थी. हम दोनो की झान्टो के घुंघराले बालों का कलर भी ही एक जैसा ब्लॅक ब्राउन था, मानो ये बता रहा हो कि हम दोनो बेहन भाई हैं. मैने दीदी के गालों पर आँसू देख महसूस किया कि मेरी आँखों से भी आँसू निकल रहे हैं. हम दोनो ने आज वो कर दिया था, जिसकी ना जाने कब से तमन्ना थी.

मदहोशी के साथ एक दूसरे को चूम्ते हुए हम मानो किस को किसी मदिरा की तरह पी रहे थे, हम इस नशे में टल्ली हो चुके थे. भाई- बेहन, भाई- बेहन, भाई- बेहन... एक दूसरे के नशे का पान कर रहे थे... प्यार कर रहे थे....

दीदी के मूँह से निकल रही आवाज़ों को मैं उनके उपर अपने होंठ रख के शांत कर रहा था, लेकिन कुछ देर बाद इस की किसको परवाह थी. अच्छा हुआ मम्मी पापा को हमारी कराहने की, गुर्राने की, और धीरे धीरे रोने की आवाज़ें सुनाई नही दी.

दीदी किसी ठंडी स्प्रिंग की तरह टाइट होने लगी, दीदी की हर मांसपेशी सिकुड़ने लगी, दीदी काँप रही थी, शेक कर रही थी- जब तक कि वो झड नही गयी. दीदी ने एक गहरी साँस ली और अपने शरीर से मेरे को एक जोरदार झटका मारा, दीदी के हिप्स अपने आप आगे पीछे होकर बार बार सिंकूड़ते और फिर खुल जाते, बार बार, बार बार, कयि बार मेरे लंड को ज़्यादा से ज़्यादा अपने अंदर लेने की कोशिश करते. दीदी की चूत की दीवार मेरे लंड को टाइट्ली जकड़े हुए कभी फैल जाती और कभी सिंकूड जाती, चूत ने गरम गरम पानी छोड़ना शुरू कर दिया, जो मेरी स्किन पर बह रहा था. दीदी ने अपना चेहरा मेरी गर्दन में घुसा दिया और धीरे धीरे सिसक कर रोने लगी.

दीदी ने फिर मुझे चौंका दिया, मेरे सिर को अपनी तरफ खींच के दीदी ने मुझे जबरदस्त किस किया, आज तक का सबसे दमदार. दीदी का सारा शरीर मुझे ज़्यादा से ज़्यादा अपने अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था. दीदी के पैर के दोनो पंजे मेरी गान्ड को चारों तरफ से घेर के मेरे लंड को, चूत के ज़्यादा से ज़्यादा अंदर घुसा कर रोके हुए थे. हालाँकि अब हम झटके और धक्के नही मार रहे थे, लेकिन दीदी के शरीर ने अभी भी मुझे जकड रखा था, और मुझे अपने ज़्यादा से ज़्यादा अंदर लेने की कोशिश कर रहा था. मेरी धड़कने बढ़ने लगी... मेरा लंड फूँकार मारने लगा... टट्टों के अंदर मेरी गोलियाँ उपर चढ़ आई, मैने तुरंत अपने आप को पीछे खींच के दूर किया, लंड बस बाहर निकला ही था कि मानो ज्वाला मुखी फट गया हो, लंड से निकलती धार ने दीदी की गीली गरम चूत के होंठों पर वीर्य उंड़ेल दिया. दीदी के पैर अभी भी मुझे लंड को चूत के अंदर घुसाने का इशारे कर रहे थे, लेकिन मुझे मालूम था कि मुझे ऐसा नही करना चाहिए, जैसे ही लंड से वीर्य की आख़िरी बूँद बाहर निकली, मैने दीदी को लंड को अपने अंदर ले जाने दिया – इस बार एक दम फिसल के बिना किसी रुकावट के गीली चूत के अंदर लंड फटाक से घुस गया.

एक दूसरे को बाहों में लिए, हान्फ्ते हुए, और कड़ी मेहनत के बाद आराम करते हुए, आज के इस दो शरीरों के मिलन के बारे में सोचने लगे.

गहराती हुई रात में, धीरे धीर हम नींद के आगोश में जाने लगे, दोनो शरीर अभी भी चिपके हुए थे. भाई बेहन एक दूसरे की बाहों में सो रहे थे. भाई बेहन के शरीर दो प्यार करने वालों की तरह एक हो चुके थे...

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तान्या अपने दादाजी के फ्यूनरल जो पास में उनके गाँव में हुआ था, उस के नेक्स्ट डे वापस आ गयी, उसके मम्मी और डॅड दो हफ्तों के बाद सारे क्रिया करम कराकर लौटने वाले थे. तान्या ने मुझे फोन किया और उसके अपार्टमेंट में उस के साथ 2-3 रात सोने के लिए कहा, तान्या की बुआजी 2-3 दिन में उसके साथ रहने के लिए आने वाली थी, जब तक कि उसके मम्मी पापा लौट नही आते. मैं तुरंत तय्यार हो गया, मैने मम्मी पापा को इनफॉर्म किया कि मैं आज रात अपने दोस्त के घर ही रात में रुकुंगा, क्यों कि वो अकेला है और हम कंबाइंड स्टडीस करेंगे.

मैं जब मम्मी पापा के साथ ये सब बातें कर रहा था, दीदी वहाँ खड़ी खड़ी मुस्कुरा रही थी. जब मम्मी पापा वहाँ से चले गये तो दीदी ने मुझ से पूछ के कन्फर्म किया, तान्या के यहाँ जा रहे हो?

मैने बस हां में सिर हिलाया

दीदी: एंजाय आंड हॅव फन, वैसे कल से मैं भी 3 दिनों के लिए अपने क्लासमेट्स के साथ स्टडी टूर पर जा रही हूँ. टेक केर.

मैं रात में खाना खाकर तान्या के घर रात को 10 बजे पहुँच गया, तान्या ने मुझे काफ़ी वॉर्म्ली रिसीव किया, और एक वेलकम किस भी दी. हम दोनो कुछ देर टीवी देखते रहे, कॉलेज की और फ्रेंड्स की बातें करते रहे. अभी मैं तान्या के साथ इतना ज़्यादा फ्रॅंक नही हुआ था कि हम सेक्स या रोमॅंटिक बातें कर सकें.

रात में करीब 12 बजे तान्या ने मुझे अपना गेस्टरूम दिखाया और मुझसे वहाँ सोने के लिए कहा. मुझे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मुझे दीदी की सिखाई हुई वो सलाह याद आने लगी, कि लड़की के पीछे पड़े रहो, कभी ना कभी तो ज़रूर देगी. मैं गेस्टरूम में सो गया और तान्या अपने बेड रूम में.

रात में करीब 1:30 बजे मुझे कुछ अजीब सी आवाज़ें सुनाई दी और मेरी नींद खुल गयी. ठक ... ठक ... ठक ... ठक... मेरे कुछ समझ में नही आया ये कैसी आवाज़ें थी. मैं अब पूरी तरह जाग चुका था, मैं ध्यान लगाकर सुनने लगा, कि कहीं ये आवाज़ हवा की वजह से किसी चीज़ के अपार्टमेंट की दीवार से टकराने की तो नही है, लेकिन नही ये कुछ और ही आवाज़ थी.

ठक...ठक...ठक... ये आवाज़ अब ज़ोर से और अब थोड़ा जल्दी जल्दी होने लगी थी, मैं ठक... ठक.. की स्पीड पर ध्यान लगाने लगा. मैं बेड से उठा, अपनी आँखों को मसला और फिर डोर खोल के बाहर हॉल में आ गया. सारे अपार्टमेंट में बस मैं और तान्या ही थे, मैने फिर ध्यान लगा कर सुना, आवाज़ अब थोड़ी धीमी हो गयी थी, मैं किचन में गया, फ्रिड्ज से पानी की एक बॉटल निकाली और लाइट ऑन कर दी.

कुछ तो था जो मेरी समझ में नही आ रहा था, आवाज़ हालाँकि धीमी तो हो गयी थी... लेकिन फिर से... ठक...ठक...ठक...ठक... तेज हो गयी. ये सब हो क्या रहा था? मैने ज़्यादा अपने दिमाग़ पर ज़ोर ना डालते हुए, लाइट बंद की और अपने गेस्टरूम की तरफ चल दिया.

जब मैं तान्या के रूम के सामने से गुजरा तो आवाज़ उसके रूम के अंदर से आती हुई लगी. मेरे मूँह से निकला बेहनचोद....

 
मैने उसके डोर के पास जाकर डोर के नॉब को घुमाकर खोलने की कोशिश की, तो पता चला कि डोर अंदर से लॉक है. रूम के अंदर तेज आवाज़ में योयो हनी सिंग के गाने चल रहे थे, लेकिन वो ठाकठकठकठक... ठाकठक.. की आवाज़ को ढकने के लिए काफ़ी नही था. रूम के बाहर खड़े होकर आवाज़ सॉफ सुनाई दे रही थी.

मैने डोर को नॉक किया, लेकिन म्यूज़िक की आवाज़ में तान्या को सुनाई नही दिया. वो ठक... ठक..की आवाज़ अब लाउड और फास्ट हो गयी थी, मैने ज़ोर से आवाज़ लगाई, तान्या... दरवाजा खोलो...

ठक... ठक.. की आवाज़ थोड़ा धीमी हुई और फिर तेज़ी से और ज़ोर से स्पीड से होने लगी. मैं पागलों की तरह डोर की तरफ देख रहा था. मैने डोर के नॉब को एक हाथ से ज़ोर से घुमाया, और डोर को धक्का मार के हिलाते हुए ज़ोर से चिल्लाया.... तान्या ... दरवाजा खोलो...

एक और ठक की हल्की सी आवाज़ सुनाई दी, और फिर कुछ अजीब सी आवाज़ें, फिर तान्या ने दरवाजा खोला, और मुझे देखकर बोली, क्या हुआ?

यहाँ पर इस समय क्या कर रहे हो?

तान्या थोड़ी अपसेट नज़र आई, फिर बोली, मैं फर्निचर को मूव कर रही थी, लगता है तुम डिस्टर्ब हो गये, आइ’म सॉरी, सो जाओ..., इतना कहकर वो बाथरूम की तरफ चली गयी.

मैं कुछ बोलता उस से पहले तान्या ने डोर बंद किया और बाथरूम में घुस गयी. उसके जाने के बाद मैने तान्या के रूम का डोर खोला और अंदर झाँक के देखा. लास्ट टाइम जब मैं यहाँ आया था, उसके बाद से कोई चेंज तो नज़र नही आ रही था, सभी चीज़ें व्यवस्थित तरीके से रखी हुई थी. मैने सोचा, कुछ तो गड़बड़ है, रूम के अंदर स्मेल भी कुछ अलग ही तरह की आ रही थी, हालाँकि तान्या का रूम एक दम सॉफ सुथरा था.

मैं हताश होकर अपने हाथों और घुटनों पर बैठकर नीचे चारों तरफ देखने लगा. यहाँ से कुछ अलग ही नज़ारा नज़र आ रहा था. मेरे मूँह से निकला ओह...बेहनचोद... तान्या के रूम के कोने में जो लकड़ी की डेस्क रखी थी, उसका एक किनारा तान्या के रूम और गेस्टरूम की कामन दीवार के साथ लगा था. जब मैं उस डेस्क के पास गया तो नीचे कुछ गीला गीला महसूस हुआ, मैने उस पर उंगली घुमा कर अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघने की कोशिश की, क्या मादक स्मेल थी. तान्या यहाँ पर क्या कर रही होगी? मैने अपनी नाक फर्श पर रखकर उस गीली जगह को सूंघने की कोशिश की, लंबी साँस लेकर सूंघने की कोशिश की. उस जगह से आ रही स्मेल मादक और नशीली थी, जो मुझे अच्छी लगी.

मैं तान्या की ड्रॉयर्स और आल्मिराह चेक करने लगा, पहली बार में कुछ नही मिला. फिर मैं अगली बार स्लोली और केर्फुली अंदर तक हाथ डाल के चेक करने लगा.

बेहन की चूत.... ढेर सारी पॅंट्स के नीचे एक डिल्डो रखा था... कोई छोटा मोटा नही... बहुत बड़ा डिल्डो... असली लंड से दो गुना मोटा और लंबा. डिल्डो का सुपाड़ा बहुत बड़ा था, और उस को असली फीलिंग देने के लिए नसें (वेन्स) उसके सब तरफ बनी हुई थी. और डिल्डो के बेस में एक बड़ा सा सकशन कप, किसी चीज़ पर फिक्स करने के लिए बना था. मेरे मूँह से फिर निकल गया ओह्ह्ह्ह बेहनचोद...

पता नही क्या सोच के डिल्डो को अपनी नाक के पास लाकर सूंघने लगा. इसमे वैसी की स्मेल आ रही थी जैसी कि उस फर्श की गीली जगह से आ रही थी. मैने सावधानी से डिल्डो वहीं पर रख दिया. फिर मैने डोर लॉक किया और डोर फ्रेम को देखा, मुझे अपनी पुरानी कर्तूते याद आ गयी और उस लॉक को देखते ही मैं समझ गया कि इसको स्टूडेंट आइकार्ड फँसा के खोला जा सकता है, क्योंकि दरवाजा पुराना था और चौखट और डोर के बीच आइकार्ड डालने लायक जगह बची हुई थी.

मैं चुपचाप अपने रूम में आ गया और तान्या के डिल्डो यूज़ करने के बारे में सोचने लगा. मेरे दिमाग़ में चल रहा था, शायद क्योंकि तान्या के कोई भाई नही है इसलिए उसके पास डिल्डो यूज़ करने के सिवाय और कोई चारा भी नही था. उसकी भी शारीरिक ज़रूरतें हैं. मैं कल्पना करने लगा कैसे तान्या डेस्क पर बैठ के डिल्डो को अपनी चूत में लेती होगी, और वो जब ऐसा कर रही होगी तो उसकी बड़ी मोटी सी गान्ड मेरे गेस्टरूम की तरफ रही होगी. ये सोच के मेरा लंड खड़ा हो गया. ज़्यादा गंदे विचार ना लाते हुए ये सोचने लगा कि तान्या कितनी भोली और शर्मीली है, चाहती तो वो मुझे सिड्यूस कर के चुदवा भी सकती थी. लेकिन शायद वो हमारी होने वाली शादी से पहले अपनी इमेज मेरी नज़रों में खराब नही करना चाहती थी.

मैं अपने अगले कदम की प्लॅनिंग बनाते हुए सो गया.

मैं तान्या को रंगे हाथों पकड़ने के लिए इतना ज़्यादा बेचैन था. अगली रात को तान्या के रूम सो कोई आवाज़ नही आई. तीसरी रात, जो कि शायद मेरी तान्या के साथ उसके घर पर आख़िरी होने वाली थी, क्योंकि नेक्स्ट डे तान्या की बुआजी आ रही थी, मैने एक प्लान बनाया.शाम को बाहर से मैं अपने लिए बियर लेकर आया, और डिन्नर करने के बाद ऐसे नाटक करने लगा, मानो बियर पीने के बाद मुझे कितनी तेज नींद आ रही हो. मैं रात को 10 बजे ही गेस्टरूम में सोने चला गया, और गहरी नींद में सोने की नौटंकी करने लगा.

कुछ देर बाद तान्या धीरे से मेरे रूम में आई, और चेक किया कि मैं गहरी नींद में सो गया हूँ या नही. अब मुझे यकीन हो गया कि आज तान्या ज़रूर डिल्डो को अपनी चूत में लेगी, क्यों कि कल से बुआ जी के आने के बाद ऐसा करना थोडा मुश्किल हो जाएगा.

थोड़ी देर बाद तान्या के रूम से हल्की हल्की 'ठक..ठक' की आवाज़ आने लगी, मैं समझ गया कि तान्या डिल्डो को डेस्क पर फिक्स करके अपनी चूत में डिल्डो घुसा रही है. मैं अपने रूम से निकल कर जब तान्या के रूम के डोर पर पहुँचा तो 'ठक..ठक' की आवाज़ और ज़ोर से सुनाई देने लगी, 'ठक' की आवाज़ के साथ तान्या की हल्की हल्की "उंफ" के साथ कराहने की आवाज़ भी आ रही थी, लग रहा था कि तान्या जब अपनी चूत को नीचे डेस्क पर फिक्स रब्बर के लंड को अंदर ले रही होगी तब ये आवाज़ निकलती होगी. ठक/उंफ की आवाज़ लगातार आ रही थी. आज तान्या खुल के मज़े ले रही थी. लगता था कल रात कुछ ना कर पाने की कमी वो आज पूरी कर रही है.

 
मैने धीरे से डोर नॉब को घुमा के देखा, वो ज़रा भी नही घूमा. संभाल के मैने अपने कॉलेज के आइ-कार्ड को डोर फ्रेम और प्लाइबोर्ड के डोर मे बीच की दरार में घुसा दिया. मेरा लेफ्ट हॅंड डोर की नॉब को घुमा रहा था, और राइट हॅंड से आइ-कार्ड से सही जगह प्रेशर डाल रहा था, कुछ देर ट्राइ करने के बाद डोर एक इंच खुला, मैने ज़ोर लगा के एक इंच और खोल दिया, तान्या की आवाज़ें अब सॉफ सुनाई देने लगी.

सब कुछ जैसा सोचा था वैसे ही हुआ, डोर धीरे से खुला और तान्या मेरी आँखों के सामने थी, तान्या अपना सिर नीचे झुका के पता नही अपने घुटनों को या अपनी चूत में फँसे डिल्डो को देख रही थी. तान्या के मूँह से जैसी आवाज़ें निकल रही थी, उस से सॉफ था कि वो सेक्स के दौरान उसके मूँह से अपने आप मस्त आवाज़ें निकलती है, जिस पर उसका कोई कंट्रोल नही है. ठक/"ऊओ", "म्म्म्ममम", ठक/"ऊफ्फ", "उःम्म्म्म" ठक/"उंफ".

धीरे से मैं तान्या के रूम में दाखिल हुआ, और सावधानी से डोर को बंद कर दिया. तान्या एक दम नंगी थी और उसके 34+ साइज़ के मम्मे लटक के हिल रहे थे. मैने सही समय का इंतेजार करते हुए, जब तान्या चूत में डिल्डो को फँसाकर गान्ड को उछालने लगी, तब मैं बोला, वाह...

ठक/"ओआफ!", जैसे ही तान्या की चूत में डिल्डो चूत के छेद को चीरता हुआ अंदर घुसा, तान्या ने चेहरे को उपर उठाया, "राज ! व्हाट! ओहगोड! आइ ... ओह ... नो!" तान्या का चेहरा एकदम लाल हो गया, वो वैसे की वैसे चूत में रब्बर के लंड को फँसाए मूर्ति बन गयी, मानो मैने उसे स्टॅच्यू कह दिया हो.

मैं तान्या को उसी वक़्त चोदना चाहता था, लेकिन मैं 2 मिनिट में इस को ख़तम नही करना चाहता था. मैने कहा, तान्या रूको मत, बस मेरे इस को अपने मूँह में लेकर चूस्ति रहो, और उसके उपर अपना काम करती रहो. क्यों ठीक है? ऐसा कहते हुए मैं अपने हाथ से बॉक्सर्स को खोलने लगा, और फिर नीचे कर दिया. जैसे ही बॉक्सर्स को मैने नीचे किया वो एलास्टिक में थोड़ा फँसने के कारण किसी स्प्रिंग की तरह झटका मारके फूँकारता हुआ मेरे पेट पर लगा.

नही, राज, प्लीज़ नही....,तान्या बोली जब मैं उसकी तरफ बढ़ने लगा. मेरे खड़े लंड को देख के जो उसके चेहरे की तरफ पायंटेड था, तान्या ने धीरे से कहा, ओह राज.

मुझे लगा तान्या मेरे को बॉक्सर्स उतारते हुए देखकर थोड़ा आयेज झुक गयी है, फिर जब उसने मेरे लंड को देखा तो फिर अपनी गान्ड को 2-3 इंच पीछे कर के डिल्डो को फिर से अपने अंदर ले लिया. शायद तान्या को इस चीज़ का एहसास भी ना हुआ हो. तान्या के मूँह से अपने आप शब्द निकलने लगे, "ओह राज! तुम ... तुम्हारा वो ... हाईईइ ... कितना सुंदर है!"

तान्या के सामने घुटनों पर बैठकर मैं बोला, मेरे लंड को चूसो, और अपनी चुदाई जारी रखो. जब मैं ये सब कह रहा था तब तान्या ने आँखे उठाकर मेरी तरफ देखा भी नही.तान्या की नज़रें मेरे लंड पर टिकी हुई थी, जिस तरह से वो तान्या के चेहरे के सामने, मेरी हर साँस के साथ झटके मार मार के फूँकार मार रहा था.

धीरे से तान्या थोड़ा आगे आई और अपना मूँह खोल दिया, तान्या के गुलाबी होंठ मेरे लंड के सुपाडे पर घूमने लगे. तान्या ने डिल्डो पर अपना, उपर नीचे होना बंद कर दिया, और मेरे लंड का बारीकी से निरीक्षण करते हुए अपनी जीभ मेरे सुपाडे पर फिराने लगी. फिर मुझे विश्वास नही हुआ, तान्या ने थोडा और आगे बढ़कर मेरे पूरे लंड को, नीचे जड़ तक अपने मूँह में भर लिया.

मेरे लंड को मेरी आँखों के सामने तान्या के मूँह में गायब होते देख, मेरे मूँह से अपने आप निकल गया... ओःः बेहनचोद... मुझे लगा तान्या डिल्डो का इस्तेमाल चूत में घुसाने के साथ साथ और भी बहुत तरीकों से करती होगी. मुझे विश्वास नही हुआ तान्या इतना आसानी से मेरे इतने लंबे लंड को अपने मूँह में पूरा ले लेगी. मैं जानता था, कि हालाँकि मेरा लंड, इस डिल्डो से तो छोटा है, पर नॉर्मल पॉर्न मूवीस में दिखाए गये नॉर्मल की लंड की तरह 7 इंच का है.

"उम्म्म्ममम," की आवाज़ निकालते हुए तान्या मेरे लंड को अंदर तक ले जाकर चूसने लगी और उस डेस्क पर फिक्स लंड को आधा बाहर निकाल दिया.

मेरे खुद के गुर्राने की आवाज़ "शिट यस," ने तान्या के कराहने की आवाज़ को कवर करने की कोशिश की लेकिन हम दोनो अब एक साथ हारमॉनिक म्यूज़िक बजा रहे थे. तान्या के हाथ काँप रहे थे, जैसे ही वो बार बार पीछे होती और फिर आगे झुकती, अपनी डिल्डो से चुदाई के साथ साथ मेरे लंड की चुसाइ भी चालू थी. तान्या की आँखें अपने होंठों के बीच फँसे मेरे लंड पर टिकी थी, और मुझे ऐसा लग रहा था कि वो अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है.

 
तान्या की पीठ पर थोड़ा झुकने के बाद मेरा हाथ उसके नीचे पहुँच गया और तान्या की चूत के आगे पीछे होते हुए, चूत के दाने को मसल्ने लगा. पहली बार छूने पर तो तान्या थोड़ा उछल ही गयी, फिर उसने मेरी तरफ अपनी गर्दन उठा के देखा, और ज़ोर ज़ोर से कराहने लगी. तान्या बस झड़ने ही वाली थी, मैं भी झड़ने के और ज़्यादा करीब था, मैं उसकी चूत के दाने को सहला कर अपने साथ झड़ने के लिए तय्यार कर रहा था. मेरे को शायद ज़्यादा मेहनत की ज़रूरत नही थी.

"ओह गॉड तान्या, रुकना मत ! ओह शिट, मैं बस झड़ने ही वाला हूँ!" मैने कराहते हुए कहा.

"उम्म्म्म ह्म्म्म्म," तान्या ने मेरे लंड को मूँह में भर के आवाज़ निकाली, तान्या अपनी गान्ड हिला हिला के अब अपनी चूत को रब्बर के लंड पर ज़ोर ज़ोर से घिस रही थी. किसी तरह तान्या अपनी चूत में डिल्डो को ज़्यादा अंदर बाहर कर रही थी, और अपने मूँह में डिल्डो के कंपॅरिज़न में काफ़ी छोटे लंड को अपने मूँह में गले तक अंदर बाहर कर रही थी. तान्या अब तेज़ी से अपने हिप्स को आगे पीछे उपर नीचे करने लगी, साथ ही साथ मेरे लंड से पानी निकालने की कोशिश कर रही थी.

मेरी उंगलियाँ अभी भी तान्या की चूत के दाने के साथ खेल रही थी, साथ साथ में अपनी गान्ड को आगे पीछे कर के अपने लंड को ज़्यादा से ज़्यादा तान्या के मूँह में घुसाने की कोशिश कर रहा था. "ओह गॉड, मैं बस झड़ने ही वाला हूँ!" मेरी गोलियाँ टट्टों के उपर तक चढ़ गयी थी, और फिर मैने वीर्य का फवारा तान्या के मूँह के अंदर छोड़ दिया.

"म्म्म्मम ह्म्म्म्म वआहम्म्म उम्फ, ओअंफ़, म्म्म्मम, ह्म्म्म्म," करते हुए तान्या के मूँह से आवाज़ें निकली, लेकिन मेरी उम्मीद से कहीं बेहतर तान्या ने मुझे ब्लोवजोब देकर मेरे लंड को चूसा और चाटा था.

तान्या के मूँह में अभी भी मेरा करीब 2 इंच लंड मूँह के अंदर था, और आधा डिल्डो चूत के अंदर घुसा था. मैं महसूस कर पा रहा था कि कैसे उसने अपने आप पर काबू पाया होगा जब वो भी झड रही थी, उसकी चूत की मांसपेशियाँ कभी सिंकूड कर और कभी ढीली होकर ऑर्गॅज़म पर पहुँच रही थी, ठीक उसी वक़्त मेरा लंड तान्या के मूँह में वीर्य की पिचकारियाँ छोड़ रहा था. तान्या ने सारे वीर्य को एक घूँट में सक लिया, और अपनी जीभ को मेरे लंड पर फिर भी फिराती रही.

फिर तान्या ने एक गहरी साँस ली, अपने चरम सुख पर पहुँचने के बाद, यकायक ढेर होकर अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया. हर थोड़ी देर बाद तान्या मेरे साथ हिल जाती और एक सिसकी उसके मूँह से निकल जाती, मेरे लंड को थोड़ा सा करीब 2 इंच, अभी भी तान्या ने अपने मूँह में भर रखा था.

बेहनचोद... मेरे मूँह से फिर यही निकला, जब मैने देखा कि तान्या अब भी मेरे लंड के सुपाडे को अपने जीभ से चाट रही है, मेरे पूरे शरीर में सनसनी सी दौड़ गयी, मैं अपने हाथों को पीछे ले जाकर टिका लिया, और घुटनों के बल बैठे हुए ही, आगे क्या होगा इसके बारे में सोचने लगा. तान्या लंबी और गहरी साँसें ले कर, हाँफ रही थी और धीरे धीरे कराह रही थी. तान्या ने आगे झुक कर अपनी एल्बोस पर आ गयी, जब तक कि डिल्डो उसकी खुली चूत के छेद से पूरा बाहर नही निकल गया. डिल्डो चूत से बाहर निकालने के बाद, डेस्क पर फिक्स होने के कारण मस्त होकर लहराने लगा, और करीन 10 सेकेंड अक हिलता रहा.

हे भगवान, तान्या कराही और फिर अपनी पीठ को सहारा देते हुए मेरी तरफ देखा, और बोली, तुम अंदर कैसे आए? तान्या को अब सब कुछ समझ में आ चुका था, सिचुयेशन पूरी तरह से उसके कंट्रोल में थी.

"ऐसे ही."

"क्यों?"

"तुमको ऐसा करते पकड़ने के लिए," मैने धीरे से कहा, और अपनी साँस पर काबू पाने का प्रयास करने लगा. तान्या ने जब मेरी तरफ नज़र उठा के देखा, तो मैं बोलता चला गया, तान्या, मैं तुम्हारी चुदाई ना जाने कब से करना चाहता था , तुमको अब उस रब्बर के लंड की ज़रूरत कभी नही पड़ेगी.

राज, मेरी शादी तुम्हारे साथ होने वाली है, तान्या ने कहा और मैने हां में सिर हिला दिया.

राज: तान्या तुम को भी तो मेरे लंड के पानी को पीने का आज मौका मिला, मुझे तो बहुत अच्छा लगा..

तान्या: थॅंक्स, आज पहली बार असली चीज़ को चूसने का मौका मिला, राज तुम्हारा वो बहुत अच्छा है. तान्या थोड़ा खिसक कर मेरे और पास आ गयी. राज, क्या ये सब शादी से पहले सही है?

राज: हां, क्यों नही, तुमने तो पिल ले ही रखी हैं, और हम दोनो में से किसी को स्ट्ड है नही तो फिर प्राब्लम क्या है?

तान्या: मुझे विश्वास नही होता, मैं ये सब शादी से पहले तुम्हारे साथ कर रही हूँ.

राज: तान्या ये तुमने खरीदा कहाँ से?

तान्या: ऑनलाइन, और डेलिवरी अपने हॉस्टिल वाली फ्रेंड के रूम पर करवा ली, सिंपल.....

राज: तान्या, तुम को नही लगता, तुम को उस रब्बर के लंड की जगह असली लंड को अपनी चूत में लेना चाहिए? तान्या अपने निचले होंठ को दाँतों से काट रही थी. मैने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, और तुम्हे उसमे कोई मेहनत भी नही करनी पड़ेगी.

तान्या की नज़र मेरे लंड पर गयी, गहरी साँस लेते हुए तान्या बोली, हे भगवान, तुम्हारा ये अब भी खड़ा है, अभी अभी तो तुम्हारा ढेर सारा माल मैने पिया है जो तुमने मेरे मूँह में निकाला था फिर भी?

मैने शरारत भरे लहजे में कहा, ये ही तो मैं भी कह रहा हूँ, मैं तुमको वाकई में चोदना चाहता हूँ! ये उसी बात का जीता जागता सबूत है.

हम दोनो ने मेरे लंड की तरफ देखा, जो पूरी तरह खड़ा होकर, उछल उछल के मेरी बात से सहमति जाता रहा था. तान्या ने आगे बढ़कर धीरे से मेरे लंड को सहलाया, तान्या के हाथ लगाते ही मेरे शरीर में कुछ कुछ होने लगा. तान्या की आइ ब्रोव्स थोड़ा चढ़ गयी, मानो वो किसी गहरी सोच में हो, फिर उसने उपर मेरी आँखों में देखा, और एक आख़िरी बार मेरे लंड को दबा दिया.

"ओके, लेकिन हम एक डील कर लेते हैं," तान्या बोली. "मैं तुमको शादी से पहले आज एक पहली और आख़िरी बार करने दूँगी, वो भी केवल इसलिए कि मैं ये जानना और महसूस करना चाहती हूँ कि असली का मज़ा कैसा होता है, जब ये अंदर जाएगा तो कैसा लगेगा, लेकिन एक बार से ज़्यादा मैं तुमको नही करने दूँगी."

मैं तुरंत तय्यार हो गया, और अपने मन में सोचा, कभी नही से तो एक बार ही अच्छा है. साथ ही साथ इस बात के लिए भी कॉन्फिडेंट था कि अगर तान्या ने एक बार मेरे लंड का स्वाद चख लिया तो रब्बर के लंड को भूल जाएगी. मैने खड़ा होकर, अपना एक हाथ तान्या की तरफ बढ़ाया, ताकि वो सपोर्ट लेकर खड़ी हो सके. तान्या के नज़रें मेरे लंड के उपर से हट ही नही रही थी, जब तक वो सीधी खड़ी नही हो गयी. मैने अपने बॉक्सर्स को अपने पैरो में से पूरी तरह से निकाला और तान्या को सहारा देकर बेड तक ले गया. बेड के पास जाकर मैने तान्या के उपर से हाथ हटाया और अपनी टी-शर्ट को अपने गले में से निकाल के फेंक दिया, अब मैं तान्या, जो कि शायद मेरी होने वाली बीवी थी, उस के सामने एक दम नंगा खड़ा था.

हाई राम, राज, मैं बहुत नर्वस हो रही हूँ, इतना कह कर तान्या ने एक लंबी साँस ली.

राज: मैं भी

तान्या: अब क्या करना है?

राज: उम्म... चलो बेड पर आ जाओ.

"ओह," तान्या ने धीरे से हंसते हुए कहा. "ठीक है जैसा तुम चाहो, हुह." मैं तान्या के खूबसूरत शरीर को झिझकते हुए बेड की तरफ बढ़ते हुए देखता रहा. तान्या बेड पर अपनी पीठ के बल, हाथों से अपनी चूत को छिपाते हुए लेट गयी, और शरमाते हुए उसके गाल गुलाबी हो गये थे, उसने मुझसे पूछा, अब क्या करना है?

अब मेरी बारी थी, कैसे एक लड़की, जो शायद आज से पहले कभी नही चुदि है, उसे कैसे इस के लिए तयार करूँ. मैं तुरंत अपने लंड को तान्या की चूत में डाल के, उसकी दबा के चुदाई करने लिए तय्यार था, लेकिन शुरूवात कहाँ से करनी है, इसी सोच में डूबा था. धीरे से मैं तान्या के पास बेड पर चढ़ा, और उसकी चूत के फूले हुए होंठों को देखने लगा जो डिल्डो से घिस घिस के लाल हो चुके थे. थोड़ा रोमॅंटिक होते हुए, मैं तान्या के फेस की तरफ जाकर, उसकी एक किस लेने के लिए झुका.

ओह, राज, प्लीज़ जल्दी करो, मैं ये सब करवाने के लिए एक बार तय्यार हुई हूँ, लेकिन इस का मतलब ये नही है कि तुम अभी से मुझे अपनी बीवी समझ लो, प्लीज़ जो करना है जल्दी करो, और तान्या ने दूसरी तरफ अपना मूँह फेर लिया.

मैने मन ही मन सोचा, अगर तान्या ऐसा चाहती है तो ऐसे ही सही, मैने भी बिना किसी चीज़ की परवाह करते हुए, तान्या के नीचे की तरफ आ गया और उसकी दोनो टाँगों के बीच अपना चेहरा घुसा दिया, तान्या की चूत मेरे चेहरे से बस 8 इंच दूर थी. तान्या ने अपने हाथों से मेरे माथे को दूर होने के लिए धक्का दिया.

तान्या(एक लंबी साँस लेते हुए) : राज, उस डिल्डो को देख के क्या तुम्हारे समझ में नही आ रहा कि मेरे को एग्ज़ाइट करने की कोई ज़रूरत नही है. मैने उस रब्बर के लंड की तरफ देखा जो तान्या की चूत से निकले रस से भीगा हुआ था.

राज: ओह्ह तान्या, मैने तो इस चीज़ पर ध्यान ही नही दिया

 
तान्या के मूँह से एक सिसकी निकल गयी जब मैने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर लगाया और चूत के क्रॅक के उपर थोड़ा सा घिसा. मैं एक दो बार आगे पीछे हुआ, जिस से मेरा लंड उसकी चूत से निकल रहे रस से भीग कर थोड़ा गीला हो जाए. तभी तान्या अपना हाथ नीचे ले आई और मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ के मेरी आँखों में आँखें डाल के बोली, "राज, अगर चुदाई करनी ही है तो इतना सोचो मत."

हां... मैं बस इतना ही एक गहरी साँस लेते हुए बोल पाया.

तो फिर ठीक है, तान्या ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ के अपनी चूत के छेद पर लगाया, और करीब 3 इंच तक अपनी चूत के अंदर ले लिया. मेरे लंड को तान्या की चूत में घुस कर एक अलग ही डिफरेंट टाइप का आनंद मिला.

मैने अपनी गान्ड करीब 2 इंच पीछे करके फिर आगे धक्का मारा, और जब तक दबाता रहा, जब तक कि मेरा पूरा का पूरा लंड, तान्या की फूली हुई चूत में नही चला गया. मैने थोड़ा रुक कर तान्या की आँखों में देखा, और चेक किया कहीं ऐसा करते हुए वो पछता तो नही रही है. जब मैने उसके चेहरे पर स्माइल देखी तो मैने जोश में आकर अपना पूरा लंड उसकी चूत से बाहर निकाल के, एक बार फिर से उसकी चूत में अंदर घुसा दिया.

"ओह्ह्ह्ह राज्ज्जज्ज्ज,” तान्या कराहते हुए बोली, जैसे ही मैने जड़ तक लंड को उसकी चूत में घुसाया. करीब 5 सेकेंड बाद मैने फिर से लंड को बाहर खींच लिया और फिर पूरा पेल दिया, हम दोनो के शरीर अब एक हो चुके थे. करते रहो राज, तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है राज, डिल्डो के साथ ऐसा मज़ा नही आता, तुम्हारा लंड तो गरम गरम है, वो तो ठंडा होता है.... आहह... तुम्हारे लंड को अपनी चूत में... आह बड़ा मज़ा आ रहा है... रूको राज.... कुछ मत करो प्लीज़. कुछ देर ऐसे ही डाले रखो, मैं तुम्हारे लंड को अपनी चूत के अंदर महसूस करना चाहती हूँ !

मुझे आज तक दीदी के अलावा किसी लड़की की चूत नही मिली थी, तान्या की गरम गरम चूत में लंड डालकर बड़ा मज़ा आ रहा था. लंड को पूरा उसमे घुसाए हुए, उसकी चूत को महसूस कर रहा था, तान्या की चूत ने मेरे लंड को जकड रखा था, तान्या की चूत कभी थोड़ा ढीला करके फिर ज़ोर से मेरे लंड को जकड लेती. चूत में लंड डालने का आनंद ही कुछ और है.

मैं कुछ सोच रहा था, जब तान्या की आवाज़ से मैं होश में आया, वाउ, मुझे विश्वास नही हो रहा कि तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंदर है, उस डिल्डो जितना मोटा तो नही है, लेकिन मज़ा उस से ज़्यादा दे रहा है. तान्या ने आँखों में झाँकते हुए कहा, फिर एक गहरी साँस लेते हुए बोली, अच्छा चलो अब धक्के लगाना शुरू करो. चोद दो, चोद दो मुझे.... राज..

"अभी करता हूँ, तान्या." मैने अपने हिप्स को धीरे से इतना पीछे किया कि बस लंड का सुपाड़ा चूत के अंदर रह गया. और फिर ज़ोर से पूरा अंदर घुसा दिया, मैं इस तरह उसी स्पीड से बार बार करने लगा. जैसे ही लंड पूरा जड़ तक चूत में घुसता, तान्या सिसक उठती.

हर बार वैसे ही पूरा बाहर निकाल के उसी स्पीड के साथ मैं तान्या को चोद रहा था. मुझे तान्या को छोड़ने में बड़ा मज़ा आ रहा था. एक बार लंड को बाहर निकालते हुए मैने कहा, तान्या तुम बहुत सुंदर हो, और फिर एक थॅप के साथ लंड अंदर घुसा दिया.

"ऊआफ़!" वो कराही

मैने पीछे होकर फिर एक धक्का मारा... ज़ोर से !

ओअफ़फ्फ़! हां राज ... चोदो मुझे ! ओह गॉड रुकना मत प्लीज़!

तान्या सोच क्या रही थी? मेरा रुकना तो अब संभव ही नही था, अगर मेरा लंड खड़ा रह सकता तो मैं तो उसे दिन रात चोदता ही रहता. अब जब उसने ना रुकने की रिक्वेस्ट की थी, तो मेरा उसे मनाने का फ़र्ज़ था. मैने अपना फेस नीचे कर के तान्या के राइट निपल को किस करने और चूसने लगा, तान्या का निपल तुरंत पायंटेड और कड़ा होकर खड़ा हो गया.

"ओह राज ... सक माइ टिट्स! हार्डर ... सक देम हार्डर! ओह दट'स गुड!"

तान्या ने अपने पैर मेरी गान्ड के चारो तरफ लपेट लिए, और अपने हाथों से मेरी बाहों को टाइट पकड़ लिया, और ज़ोर ज़ोर से खुशी से कराहने लगी. मैं अपने मूँह में कभी एक निपल तो कभी दूसरे निपल को चूस रहा था, और अपने हाथ से फ्री चूंची को दबा रहा था. तान्या की चूंचियाँ वाकई में बहुत मस्त थी ! मैने जैसे ही लेफ्ट निपल को मूँह में लिया और तेज़ी से अपनी जीभ को निप्पल के उपर घुमाने लगा, फिर एक ज़ोर का झटका मार के मैने अंदर तक लंड को घुसाते हुए अपने हिप्स का पूरा बोझ उसकी चूत पर डाल दिया.

"ओह!" तान्या ने ज़ोर से एक लंबी साँस मेरे कानों में छोड़ी. तान्या का शरीर थरथराने लगा और वो चिल्ला के बोली, "ओह शिट! राज डॉन'ट ... ओह गॉड डॉन'ट स्टॉप!" उसकी चूत ने मेरे लंड को जकड लिया और वो मेरे नीचे लेटे हुए काँपने लगी. फिर वो ज़ोर से कुछ देर तक एक साँस में कराहती रही, उसका शरीर अकड़ने लगा और वो ज़ोर ज़ोर से अपने शरीर को उछाल उछाल के काँपने लगी. फिर एक दम ठंडी पड़ गयी, उसके हाथ निढाल होकर बेड पर गिर पड़े, उसके पैर अभी भी मेरी गान्ड के गिर्द अभी भी लिपटे हुए थे, क्यों कि उसने दोनो पैरों के पंजों को आपस में फँसा रखा था.

तान्या के पैर मेरी गान्ड के गिर्द अभी भी लिपटे हुए थे, क्यों कि उसने दोनो पैरो के पंजों को आपस में फँसा रखा था.

मैं तान्या के उपर लेट कर इस दृश्य को अपने दिमाग़ में क़ैद कर रहा था. मैने अभी अभी कुँवारी तान्या को चोदा था, और वो झड़ने के बाद नंगी होकर मेरे सामने लेटी पड़ी थी. अलग होने से पहले मैने उसके एक निपल को अंतिम बार हल्के से चूसा, और फिर सिर उठा के उसकी आँखों में देखा, उसकी आँखें अभी भी आधी बंद थी, और वो किसी और ही दुनिया में थी. लोहा जब गरम हो तभी चोट करनी चाहिए, ये सोच मैने झुक कर उसको किस कर लिया, हमारी जीभ उसके अधखुले होंठों से मुश्किल से छू पाई. कुछ पलों के बाद तान्या ने मुझे किस किया, और अपनी जीभ मेरे मूँह के अंदर घुसा दी, और कराहने लगी.

जैसे जैसे हमारी किस गहरी होती जा रही थी, मेरी गान्ड फिर से हिलते हुए आगे पीछे होने लगी, और हर बार करीब 3 इंच लंड बाहर आकर फिर से चूत में घुस जाता. बीच बीच में तान्या की चूत की पकड़ मेरे लंड पर बढ़ जाती और वो मेरे मूँह में कराह उठती. मेरे झटके अब 5-6 इंच के हो चुके थे, तान्या ने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी, मेरे होंठों पर अपने होंठों का और ज़्यादा दबाव बढ़ा दिया, और मैं और ज़्यादा ताक़त से झटके मारने लगा. जो कुछ हो रहा था वो अविश्वसनीय था.

"ये क्या कर रहे हो राज," होंठों को चिपकाए हुए वो बोली, हमारी डील सिर्फ़ चोदने की हुई थी, किस करने की नही. इस से पहले कि मैं कुछ बोलता तान्या ने अपनी जीभ मेरे मूँह में घुसा दी, और हम अब तक की बेस्ट किस कर रहे थे. हम दोनो का अब अपने उपर कोई कंट्रोल नही था, हमने एक दूसरे से चिपकते हुए बेड पर रोल किया, अब मैं नीचे और तान्या उपर थी. तभी तान्या ने अपना फेस मेरे से उपर किया और सीधे होकर मुझ पर बैठ गयी.

तान्या ने शरारती लहजे में मुझे देखा और फिर धीरे से बोली, मुझे नही मालूम था कि इतना मज़ा आएगा, तुमने मुझको बहुत अच्छा वाला किया है, थोड़ी देर और अपने आप पर कंट्रोल करो, प्लीज़ मुझे एक बार और कर दो. तान्या अपनी गान्ड को हिला के और गोल गोल घुमा के मेरे लंड के उपर चूत को घिस रही थी, साथ ही साथ वो 5 इंच के करीब अपनी चूत को उपर उठाती और फिर नीचे होकर मेरे लंड को फिर से पूरा अंदर ले लेती. ऐसा मेरे साथ पहली बार हो रहा था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

मैने तान्या की तरफ स्माइल करते हुए देखा, और फिर अपनी गान्ड उठा के उपर की तरफ झटका मारते हुए कहा, जानू एक बार क्या तू जितनी बार कहेगी उतनी बार चोद चोद के पानी निकाल दूँगा.

"ओह शिट राज, मुझे मालूम है तुम मेरी बहुत देर तक अच्छी वाली चुदाई कर सकते हो, लेकिन आज अपने कॉन्फिडेन्स को प्रूव कर के दिखाओ कब तक चोद सकते हो !

मैने तान्या को पकड़ के बेड पर लिटाया और फिर से उस के उपर चढ़ गया. ओके, तुमको ऐसे ही चाहिए ना! मुझे नही मालूम था कि मैं क्या करने वाला हूँ, और कब तक उसकी चुदाई कर पाऊँगा. लेकिन इतना ज़रूर मालूम था कि आज मेरा तान्या को चोदने का सपना साकार हो रहा था और मेरा जल्दी रुकने का कोई प्लान नही था.

 
मैने बेड पर ज़बरदस्ती थोड़ी ज़्यादा जगह बनाते हुए, तान्या के हिप्स को पकड़ के उठा दिया, अब उसकी गान्ड मेरी जांघों पर रखी थी, और उसके पैर मेरे पीछे हो गये थे. मैं अब अपने हिप्स को ढंग से हिला के, ठीक से झटके लगा पा रहा था, जिस से तान्या के जी-स्पॉट को छू कर (जब पहली बार छुआ तभी समझ में आ गया) तान्या में जोरदार उत्तेजना पैदा हो रही थी. हर बार जैसे ही मेरे लंड उस स्पेशल जगह को छूता, उसके मूँह से सिसकी निकल जाती और उसके पैर तनाव में आकर खींच जाते. आख़िरकार उसने किसी तरह अपने पैर मेरी कमर के गिर्द लपेट लिए.

करीब 3 मिनिट उसी पोज़िशन में रहने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि तान्या की चूत बाहर उभर के मेरी तरफ देख रही है. मैं उसकी दोनो चूंचियों को मसल रहा था, मैं अपना दाँया हाथ उसके शरीर की कोमल त्वचा पर उंगलियाँ फिराता हुआ नीचे लाने लगा, तान्या ने मेरी तरफ आँखों में आँखें डाल के देखा. मैने उसकी चूत के दाने पर उंगली लगाई ही थी कि तान्या सिसकी, "ओह गॉड!"

"अच्छा लगा?"

मेरी उंगलियाँ तान्या की चूत के दाने पर घूम रही थी और वो हल्के हल्के गुर्राते हुए कह रही थी, "ओह राज, ऐसे ही करते रहो! ओह शिट बहुत मज़ा आ रहा है! ओह यआः, अपना लंड मेरी चूत में डाल के हिलाते रहो और इस को ऐसे ही घिसते रहो प्लीज़."

मैं थोड़ा मुस्कुराया और उसकी चूत के दाने को थोड़ा और ज़ोर से मसल्ने लगा, बीच बीच में उस छोटे से बटन को अपनी पहली उंगली और अंगूठे के बीच लेकर पकड़ के हल्का सा पिंच कर देता. मेरी इन हरकतों ने तान्या पर गजब का असर किया था, मेरे टट्टों के अंदर गोलियों में भी उबाल आने लगा था. मैं इतना जल्दी नही झड़ना चाहता था, और चाहता था कि मैं जब भी झडू तो तान्या मुझसे फिर से चुदने के लिए भीख माँगे.

तान्या अब ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी, और जैसे ही मेरा लंड उस जगह को छूता उसके मूँह से सिसकी निकल जाती, "उंघ!", या ऐसा ही कुछ और. मैं चूत के दाने को अब भी मसल रहा था, मेरे हिप्स के झटके अब थोड़े छोटे हो गये थे, क्यों कि मैं तान्या की उत्तेजना वाली जगह पर ज़्यादा ध्यान दे रहा था. करीब 30-40 बार "उंघ" आवाज़ निकालने के बाद, तान्या चिल्ला उठी "ओह शिट! ओह राज, मैं बस छूटने वाली हूँ! ओह! ओह! हां राज ऐसे ही... हां... हां...ऐसे... ओह राज!"

तान्या को ऐसी हालत में, और उसी अंदाज में चोदते रहना मुश्किल ही नही शायद नामुमकिन था, लेकिन मैने किसी तरह जारी रखा. तान्या ने अपने हाथो की उंगलियाँ मेरी जांघों में गढ़ा रखी थी, मैने नीचे देखा तो तान्या के चेहरे पर चरम सुख के तृप्ति भरे बाव थे. जब मुझे विश्वास हो गया कि तान्या अब पूरी तरह झड चुकी है, मैने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत के दाने से हटाई, और अपने लंड को उसकी चूत में पूरा घुसेड दिया.

तान्या ने अपनी आँखें झपकाते हुए खोली और फिर वो मुझे ढूँढने लगी. मेरे चेहरे को देख के उसने एक संतुष्टि भरी साँस बाहर छोड़ी और फिर गहरी साँस अंदर ली. "वाउ! मज़ा आ गया! डिल्डो से कहीं ज़्यादा मज़ा आया, मैने बहुत बार डिल्डो अपने अंदर लिया है लेकिन ऐसा मज़ा पहले कभी नही आया. आज सबसे अच्छी तरह हुई हूँ.

"थॅंक्स, तान्या."

"ओह नो, राज, थॅंकयू तो मुझे बोलना चाहिए! लेकिन एक बात बताओ, ये जो तुम अपना मेरे अंदर मज़े से घुसा के बैठे हो, ये अब दोबारा पानी कब छोड़ेगा? आइ मीन... मुझे मालूम है... अभी थोड़ी देर पहले ही मैने इसका निकाला हुआ ढेर सारा पानी पिया है, लेकिन कोई भी लड़की थोड़े टाइम बाद कन्फ्यूज़ हो ही जाएगी, अगर वो किसी लड़के का पानी अपनी चूत में लंड डलवाने के बाद भी नही निकाल पाए.

राज: तान्या, तुम बेकार में परेशान मत हो, मैं जब पानी छोड़ूँगा तो तुम्हारी पूरी चूत को पानी से भर दूँगा, लेकिन ये जो तुमने एक मौका दिया है, उसे मैं पूरी तरह एंजाय करना चाहता हूँ.

"ऑश्ह्ल ... शायद मैने कुछ ज़्यादा जल्दी डिसिशन ले लिया, बस एक बार करने का बोल के." तान्या ने नीचे की तरफ देखा, जहाँ हमारे दो शरीर एक दूसरे के साथ जुड़े हुए थे, उसकी शरीर में बिजली दौड़ गयी, और फिर शरमाते हुए मेरी तरफ देखा. "हम कुछ ऐसा बीच का रास्ता निकालते हैं, जो दोनो को सूट करे!"

"ये बात तुम अब बोल रही हो, तान्या!" मैने उसके पैरों को अपने उपर से थोड़ा ढीला करते हुए कहा, जिस से मैं पोज़िशन बदल सकूँ. मैं अपने घुटनों पर बैठ गया, और तान्या के पैरो की पिंडालयों को अपने कंधे पर रख लिया, और अपने लंड को पूरी लंबाई तक उसकी चूत में पेल दिया. "बेहनचोद क्या कसी हुई टाइट चूत है !" मेरे मूँह से अपने आप निकल गया.

"सोचो, यह तो जब है, जब इसमे वो डिल्डो जाने कितनी बार अंदर घुस चुका है !"

मैं ये बात सुन कर हंसा, और फिर अपनी बात को सही ठहराने के लिया एक ज़ोर का झटका मारा, और बोला, प्लीज़ अब उस रब्बर के लंड से मेरे लंड की तुलना बंद करो, वो तो नकली है, अभी तो बस असली लंड के मज़े लो.

तान्या (हंसते हुए): हां, असली का मज़ा ही कुछ और है. असली लंड का मज़ा लेने के बाद, नकली चीज़ को कौन याद रखेगा.... राज, अब चुप हो जाओ और जल्दी से एक बार और चोद दो... प्लीज़

"मेरा इतना छोटा भी नही है, ठीक साइज़ का है."

"नही राज, तुम्हारा छोटा नही है, आहह बहुत मज़ा आ रहा है ! तुम्हारे लंड को अपनी चूत में महसूस कर के बड़ा अच्छा लग रहा है. ये कितना गरम है! गॉड आइ लव दट! वो डिल्डो तो कभी गरम ही नही होता, पागल सा! ऊवू यॅ, ऐसे ही चोदते रहो राज; अच्छे से अंदर तक!"

 
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