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भाभी का बदला

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"ऐसा मज़ा पहले कभी नही आया, हुह?" बुआ ने मुस्कुराते हुए कहा, उनकी आँखे बता रही थी, कि उनके शरीर के अंदर अभी भी बहुत आग और गर्मी बाकी है. मैं कुछ नही बोला, मेरे दिमाग़ में तरह तरह के ख्याल चल रहे थे. अभी अभी बुआ ने मेरे लंड को चूस कर मेरे माल निकाला है, ये बात मेरे दिमाग़ में चल रही थी, साथ ही साथ, ये बात भी चल रही थी कि मैं बुआ को जल्द से जल्द चोदना चाहता हूँ.

"मैं भी सूसू करके आता हूँ...." ऐसा कहते हुए, मैं रूम से बाहर निकलने ही वाला था, तभी मुन्नी बुआ मुझे जाते देख, एक शरारत भरी मुस्कान अपने चेहरे पर ले आई. जैसे ही मैं उठ कर खड़ा हुआ, बुआ बोली, “जल्दी वापस आ जाओ, अभी तुम्हे मेरी चूत का स्वाद भी चखना है... पहले चाटी है, कभी किसी की चूत?”

“नही... बुआ, आज से पहले किसी ने ऐसा मौका ही नही दिया, आप बता देना कैसे क्या करना है.” मैने एक बार फिर से झूठ बोला. बुआ अब भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

"डॉन'ट वरी, मैं तुम को सब सिखा दूँगी. फिर कहीं तान्या को विश्वास ही नही होगा, कि तुमने ये सब कहाँ से सीखा!" मुन्नी बुआ बोली. ऐसी बातें सुनकर, मेरा लंड जो कुछ मिनिट्स पहले ही माल निकालकर ठंडा पड़ा था, फिर से खड़ा होने लगा. मुझे सूसू बड़ी ज़ोर से लगी थी, मैं जल्दी से लंड को हाथ में पकड़ कर बाथरूम की तरफ चल दिया...

जब मैं पेशाब कर के अपने रूम में पहुँचा, मुन्नी बुआ अपनी दोनो टाँगें खोल के लेटी हुई थी, और मेरा इंतेजार कर रही थी. मैं दरवाजे में से मुन्नी बुआ को अपने आप से खेलते हुए देखा, “हे भगवान...... मुन्नी बुआ!” बस ये ही मेरे मूँह से निकला.

"यहाँ आओ," बुआ बोली. "कभी किसी लड़की की चूत देखी है?"

मैने ना में सिर हिलाया. मेरा गला सूखने लगा था और मैं अपना होश खोने लगा था.

"तो फिर तुमको सीख लेना चाहिए," बुआ ने अपनी टाँगों को और ज़्यादा फैलाते हुए कहा.

मैं बुआ की तरफ फेस करके, उनकी दोनो टाँगों के बीच चमक रही गीली चूत को देखते हुए, बेड के किनारे पर बैठ गया. मुन्नी बुआ अपनी चूत को अपने हाथों से फैलाते हुए, मुझे अपनी गीली चूत के दोनो फांकों के बीच उपर उस गुलाबी दाने को दिखाने लगी.

"मैं इसको चूत का निपल कहती हूँ," बुआ ने उसको सहलाते हुए दोस्ताना अंदाज में समझाते हुए कहा. "जब मैं अपने निपल्स छूती हों, तो यहाँ खुजली होने लगती है,” बुआ ने चूत के दाने पर उंगली घुमाते हुए नशीले अंदाज में कहा . “और जब मैं इस चूत के दाने पर अपनी उंगली फिराती हूँ, इस तरह.... तो मेरे निपल्स खड़े हो जाते हैं. और अगर कोई इस पर अपने जीभ फिराए तो और ज़्यादा अच्छा लगता है. याद है, मैं जब तुम्हारे लंड को चूस रही थी, तब कैसा लग रहा था? मूठ मारने से ज़्यादा मज़ा आ रहा था ना?” मैं बस चुप चाप बैठे हुए, हां में गर्दन ही हिला पाया. “ठीक उसी तरह, मुझे भी अच्छा लगता है, जब कोई मेरे साथ उस तरह करता है. तो फिर राज, अब तुम सीखना चाहोगे, कैसे करते हैं?”

"ओह हां बुआ!" मैं एक गहरी साँस लेते हुए कहा. "दिखाओ बुआ, दिखाओ मुझे!" मैने उत्सुकता से पूछा. मैं बुआ की दोनो टाँगों के बीच आराम से बैठ गया. बुआ की चूत मेरे चेहरे से बस कुछ इंच दूर थी, मैं सब कुछ अपने अंदर समाहित कर रहा था, बुआ की चूत की खुश्बू, चुदाई से पहले हवस की महक, जो बहुत मादक थी, और मैं बुआ को चोदने की हवस के नशे में डूबता जा रहा था.

"बस वैसा ही करते रहो, जैसा मैं तुम से कहूँ," बुआ फुसफुसाते हुए बोली. "मैं तुम्हे आज ऐसा चूत चाटना सिखाउन्गि, कि लड़कियाँ तुम्हारे से चूत चटवाने का इंतेजार किया करेंगी."

मैने अपने सिर पर बुआ के हाथ का हल्का सा दबाव महसूस किया, वो मुझे अपनी गरम गरम चूत की तरफ गाइड कर रही थी. अपने आप, मैने अपनी जीभ को नुकीला करके, जीभ के टिप को चूत के दाने को छेड़ दिया. “धीरे धीरे” मुन्नी बुआ ने सिखाते हुए कहा. “अपनी जीभ को एक पंख की तरह समझो. और उसको इस तरह घिसो जैसे मेरी चूत को कोई पंख फिरा कर छेड़ रहे हो.” मैने वैसा ही किया, और जान बूझकर जीभ ज़्यादा दबाव नही डाला, और किसी तरह का घर्षण नही होने दिया.

”हां राज, ऐसे ही, बहुत बढ़िया, बस ऐसे ही करते रहो मेरी जान, बससस्स आईसीई हीईिइ!” मैने चूत के दाने को हल्के से छेड़ा, और फिर कुछ मिनिट्स तक, बस ज़रा सा उसको छूता रहा. “थोड़ा अपनी जीभ को घुमा सकते हो?” बुआ ने पूछा.

मैने हां में सिर हिलाते हुए, बुआ की पूरी चूत को चाट लिया.

बुआ खिलखिला उठी. “बढ़िया. तुम्हे मालूम है, कैसे लगा था जब मैने तुम्हारे लंड के निचले हिस्से को चाटा था?” मैने फिर हन में सिर हिलाया, और फिर से पूरी छूट को चाट लिया, और मेरी जीएभ छूट के स्पर्श का आनंद लेने लगी.

बुआ फिर से खिलखिल्ला उठी, “व्हूफ...जान, बहुत मज़ा आ रहा है, लेकिन इसको बाद के लिए बचा के रखो,” बुआ ने मुझसे सीख दी. “मैं चाहती हूँ कि तुम अपनी जीभ को घुमा कर, मेरी चूत के दाने को उसमे लपेट लो, और फिर उसको फँसा के थोड़ा उपर नीचे करो... एक बार फिर से... धीरे हल्के से.”

मैने वैसे ही किया, अपनी जीभ से उस चूत के दाने के संवेदनशील हिस्से को चोदने लगा.

बुआ अब ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगी, और खुश होकर मीठी मीठी आहे भरने लगी. “ऐसे ही चोद दो मेरी जान, ऐसे ही, पर्फेक्ट!” बुआ धीरे से करहाई. “अब ऐसा करो, तुम थोड़ा उपर आ जाओ और अपने हाथों से मेरे निपल्स से खेलना शुरू कर दो, और नीचे वैसे ही अपनी जीभ से करते रहो.”

मैने अपने दोनो हाथ उपर की तरफ बढ़ा कर, बुआ के दोनो मम्मों को अपनी हथेलियों में भर लिया, और फिर मज़े से उनकी सॉफ़टनेस्स्स और फर्मनेस का अंदाज़ा लगाने लगा, और फिर उनको दबाने, मींजने लगा, और अपनी उंगलियों को उनके उपर घुमा घुमा कर, बुआ के हार्ड निपल्स, जो खड़े हो चुके थे, उनको उंगली और अंगूठे से उत्तेजित होकर उत्सुकता में मींजने लगा, जिस से वो और ज़्यादा खड़े होने लगे.

मुन्नी बुआ अब और ज़ोर से साँसें ले रही थी, और बीच बीच में उनकी साँस फूल भी जाती थी, मैं अब भी बुआ की चूत के दाने को अपने जीभ से छू छू कर छेड़ रहा था.

“ओके राज... अब चूसना शुरू करो. इस चूत के दाने को अपने मूँह मे ले लो, और फिर आराम से इसको चूसना शुरू करो.”

 
जैसा बुआ ने कहा था, मैने वैसा ही किया, मैने उनके चूत के दाने को अपने होंठों के बीच लेकर, जैसा उन्होने कहा था कि ये दाना उनकी चूत का निपल है, ऐसा इमॅजिन करते हुए, मैं उसको ऐसे चूसने लगा, मानो मैं उनके मम्मों के निपल को चूस रहा हूँ. मेरा चेहरा उनकी चूत पर धंसा हुआ था, उनकी चूत से निकल रहे लिसलिसे पानी की खुश्बू मेरे नाथूनों में भर रही थी. मैं चूस रहा था, चूसे जा रहा था, चाट रहा था, और अपने होंठों से चूत के दाने को मसल रहा था. मुन्नी बुआ अब गुर्राने की आवाज़ निकालने लगी थी, और अब बोल कर कोई इन्स्ट्रक्षन नही दे रही थी. बुआ की आहें, कराहें, और गुर्राने की आवाज़ मुझे बता रही थी, कि उनको क्या चीज़ अच्छी लग रही है, और उनको किस चीज़ की ज़रूरत है. मैं बीच बीच में अपनी जीभ की हरकत बदल रहा था, उनकी चूत के दाने को जीभ के नुकीले टिप से जीभ को लहराकर छेड़ता, तो कभी जीभ से चूत के दाने को पूरी तरह से चाट लेता, मानो किसी स्त्री के चूत रूपी खेत, जिसकी गीली ज़मीन पर अपनी जीभ से हल चला रहा हूँ, बुआ की चूत पर बार बार ढेर सारा रस जमा हो जाता, उसको मैं फिर से चाट लेता, चाट कर सब कुछ सॉफ कर देता और एक बार फिर से इस प्रक्रिया को शुरू कर देता. मैने बुआ के हाथ को अपने सिर पर महसूस किया, उनकी उंगलिया मेरे बालों में कंघी कर रही थी, और मेरे चेहरे को अपनी चूत की तरफ इतना धक्का दे रही थी, कि मुझे साँस बड़ी मुश्किल से आ रही थी. मुन्नी बुआ गुर्राई, इस बार थोड़ा ज़्यादा ज़ोर से. एक बार फिर से गुर्रायि.. और फिर जल्दी जल्दी साँसें लेकर हाँफने लगी.

"राज अब! अब! मुझे अपनी जीभ से चोद दो! चोद दो राज! चूसो, और ज़ोर से चूसो! चोद दो! राज चोद दो! निकाल दो मेरा पानी!” मुन्नी बुआ चीखते हुए बोली.

मैं थोडा अचकचाया. मुझे विश्वास नही हुआ कि कोई चुदाई के आनंद में इतना ज़ोर से चीख कर दूसरे के कान भी फाड़ सकता है. मुन्नी बुआ मेरे बालों को पकड़ के खींचने लगी, इतना ज़ोर से, कि मुझे दर्द भी हुआ; मैने महसूस किया कि बुआ के दोनो पैर मेरे को जकड रहे हैं, मेरा चेहरा मानो उनकी जांघों के बीच, और सिर उन दोनो पैरो के बीच फँस गया हो. जिस तरह से बुआ की चूत ने ढेर सारा चूत का पानी मेरे चेहरे पर छोड़ा, उसकी मुझे बिल्कुल उम्मीद नही थी. मैं तो जैसे डूब रहा था... डूबे जा रहा था, और इस बेशक़ीमती लम्हे का आनंद ले रहा था...

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मैं अपनी पीठ के बल सीधा लेट गया, मुन्नी बुआ मेरी कमर पर सवारी करते हुए बैठ गयी. मुझे चूमते हुए, बुआ ने पहले मेरे होंठ, नाक और यहाँ तक कि आँखों के पास लगे अपनी चूत के पानी को चाट कर सॉफ किया. मैं बुआ की चूत की महक में खोया हुआ था, उनकी चूत के रस की महक ने मेरे सारे चेहरे को अपनी चूत की पानी रूपी क्रीम लगाकर महका रखा था.

“आप इतना ज़्यादा कैसे छोड़ सकती हो?” मैने किसी तरह पूछा, मुझको खुद पर विश्वास नही हो रहा था , जो कुछ मैने देखा था. ये बात सुनकर बुआ ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी.

"ओह.. राज, आज ना जाने कितने सालों के बाद, इतना अच्छी वाली हुई हूँ, मैं तो जैसे भूल ही गयी थी,” बुआ ने मेरे उपर निढाल होकर लेटते हुए कहा. मैं बुआ के मम्मों का दबाव अपनी छाती पर महसूस कर रहा था. मैं बुआ के तेज़ी से धड़कते हुए दिल की धड़कन को महसूस कर रहा था, मैने हाथ बढ़ाकर बुआ की गान्ड की गोलाईयों को हथेलियों में कस के पकड़ लिया, और उनको दबाने और मसल्ने लगा. जब मैं थोड़ा खिसका, तो ऐसा लगा जैसे मेरा लंड बुआ की चूत के छेद को छू रहा है. बुआ के अभी अभी झड़ने के कारण, चूत बेहद गीली थी, चूत का पानी मेरे लंड को भी गीला कर रहा था, जैसे ही मैने उपर की तरफ एक झटका मारा, मैने अपने लंड को बुआ की चूत के बाहरी होंठों के बीच घुसता हुआ महसूस किया.

"नही, अभी नही," मुन्नी बुआ फुसफुसाते हुए बोली, हालाँकि वो भी अपनी गान्ड को हिला के, अपनी चूत को मेरे लंड के उपर घुमा रही थी, उनकी चूत मेरे लंड को चूम रही थी, और चूत के होंठ मेरे लंड को जैसे चूस रहे हो. "मेरे इन मम्मों को चूसो राज. मेरे इन निपल्स को चूसो, मेरी जान," बुआ ने भीख माँगते हुए कहा.

मैने बुआ के मम्मों को पकड़ कर, मैं उनकी मालिश करने लगा, उनको सहलाने लगा और उनके मस्त खड़े निपल्स के साथ खेलने लगा. और मम्मों को अपने होंठों से दबाने लगा, मैं हर एक निपल को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा, और कभी उसको मूँह के अंदर घुमाने लगा, फिर उस पर जीभ फिराने लगा. मैं इस आनंद का भरपूर मज़ा ले रहा था, क्या मस्त मज़ा आ रहा था, मैं बस बुआ के मम्मों को अपने मूँह में भरने का आनंद ले रहा था. तभी बुआ फिर से थोड़ा हिली, मैं इस के लिए बिल्कुल तय्यार नही था. मेरा लंड थोड़ा टेढ़ा होकर झुक गया. मैने बुआ की चूत की फांकों को खुलता हुआ महसूस किया, और मेरे लंड को निगलते हुए, बस एक पल को ऐसा लगा, जैसे ये ही जन्नत है, बुआ ने झुक कर, लंड को पूरा गहराई तक अंदर ले लिया.

"बेहनचोद!" मेरे मूँह से अपने आप निकला. "बेहन की चूत!"

मैं एक बार को बुआ के मम्मों के बारे में एक दम भूल गया, मैं अपने आप को भूल गया. उस समय बस मुझे बुआ की चूत ही मेरे अस्तित्व का सवाल बन चुकी थी, मानो चूत से निकला मर्द, चूत में अपने लंड को डालने के लिए पागल हुआ जा रहा हो. मेरा लंड बुआ की गरम गरम चूत में आराम से घुसा हुआ था, मुन्नी बुआ भी अपनी चूत की हवालात में बंद लंड जैसे क़ैदी को गिरफ्तार करके बहुत खुश हो रही थी. “ज़ोर से चोदो राज ! चोद दो ! चोद दो! चोद दो राज ! बुआ चीखते हुए बोली.

नीचे से चूत में उपर की तरफ धक्कों का बुआ भरपूर सहयोग दे रही थी, और मेरे हर झटके का चूत को कभी जकड के, और कभी फैला के ढीला छोड़ते हुए, अपनी गान्ड को हिला हिला कर भरपूर सहयोग दे रही थी. मैं उपर की तरफ झटके मार मार के अपने लंड को ज़्यादा से ज़्यादा बुआ की चूत के अंदर पेलने का प्रयास कर रहा था.

"चोद दो राज!" बुआ बार बार चीख चीख के बोल रही थी. मेरा लंड बुआ की चूत में पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था, बुआ पागल होकर, अपनी गान्ड को कभी साइड में तो कभी उपर नीचे, कभी आगे पीछे उछाल कर मेरे लंड पर उछल रही थी. जिस तरह से बस की चूत मेरे लंड को चूस रही थी, उनकी चूत से निकली चिकनाहट ने मेरे लंड पर एक परत चढ़ा दी थी, जिस के कारण, मेरे टट्टों की गोलियों में से पानी उपर चढ़कर निकलने को बेताब हो रहा था, मैं इस अपार आनंद, खुशी और उतेजना में सब कुछ भूल चुका था.

”हां, राज, हो जाओ... निकाल दो अपना पानी !” बुआ ने चीखते हुए कहा, वो मेरे चरम पर पहुँचने को मेरे से पहले ही पहचान गयी थी. “भर दो मेरी चूत को अपने वीर्य के पानी से, भर दो... भर दो मेरी चूत को..!” मैं अपने सुपाडे के छेद में से पानी की धार को निकलता हुआ महसूस कर रहा था. एक, दो , तीन जोरदार पिचकारियों के साथ मैं वीर्य की धार बुआ की चूत में निकाल कर चरम पर पहुँच गया, और बुआ की चूत को अपने वीर्य के पानी से भर दिया.

"ओह हां...हां! हां!" मुन्नी बुआ ने चीखते हुए कहा. मैं बुआ की चूत में गहराई तक लंड को घुसाए हुए था, और चूत को सिंकूड़ते हुए, छोटा होते हुए महसूस कर रहा था. मैं अपनी पिचकारियों को लंड की नोंक पर बने छेद में से निकलता हुआ महसूस कर ही रहा था, तभी बुआ की चूत से निकले उस अमृत जैसे पानी के दरिया को महसूस किया, और मेरे लंड के वीर्य के पानी और बुआ की चूत से निकले हुए पानी एक दूसरे में मिल गये, और एक झरने की तरह, चूत में से एक झाग वाला, थोड़ा गाढ़ा, चिपचिपा, वो मिश्रण, जो हम दोनो के च्ररम पर पहुँचने का गवाह था, चूत के मूँह में से बहकर नीचे गिरने लगा.

एक बार फिर से बुआ, मेरे उपर गिर कर लेट गयी. मुझे उनके शरीर का बोझ, बिल्कुल महसूस नही हो रहा था. मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा चुका था, बुआ के मूँह से निकल रही संतुष्टि भरी आहें, मुझे बेहोशी जैसी हालत में कहीं से आती हुई सुनाई दे रही थी.....

 
मैं सुबह काफ़ी लेट सो कर उठा, वैसे भी आज सनडे था. मैने सोचा चलो अच्छा है आज कॉलेज तो नहीं जाना. लेकिन मुझे दोपहर में अपनी नयी नयी लगाई हुई फॅक्टरी पर तो जाना ही था. सारी रात मुन्नी बुआ ने मेरे साथ बिताई थी. मुझे सब कुछ याद आ रहा था. बुआ मेरे पास से कब चली गयी, मुझे पता भी नही चला. अब जब मैं सो के उठा था, तब मुझे मालूम पड़ा, कि बुआ मेरे पास नही है. किसी तरह आलस में मैं उठ कर बैठा, और अपने लंड को अचरज से देखने लगा. और मन ही मन अपने लंड से पूछने लगा. “क्यों, मज़ा आया ना कल रात?” मेरा लंड उन यादों को ताज़ा करते हुए फिर से खड़ा होने लगा. मेरे दिमाग़ में एक दम ख्याल आया, “बुआ कहाँ है?”

मैं बेड से उतर कर, वैसे ही नंगे पैर, बाथरूम की तरफ चल पड़ा, वहाँ पहुँच कर इंग्लीश स्टाइल की सीट की लिड को उपर उठाते समय मुझे याद आया, कल ही तो बुआ इस पर बैठकर सूसू कर रही थी. बस इतना सा ख्याल मेरे दिमाग़ में आते ही, मेरा लंड फुल फॉर्म में आ गया. जब लंड खड़ा हुआ हो तो, सूसू करना कितना मुश्किल होता है, केवल मर्द ही समझ सकते हैं. किसी तरह बहुत देर तक पतली सी धार मार कर, मैने अपने आप को रिलीव किया. फिर अपने बेडरूम में आकर मैने एक शॉर्ट्स पहना, बिना किसी बॉक्सर या अंडरवेर के, और बिना टी-शर्ट पहने मैं नीचे किचन की तरफ चल दिया. किचन में से मुझे आलू की परान्ठे की खुश्बू आ रही थी. मुझे ज़ोर की भूख भी लगी थी, मैं तुरंत किचन में घुस गया. उनकी पीठ मेरी तरफ थी; मैने पीछे से जाकर उनके मम्मों को अपने हाथों में कस के दबा लिया, और साथ ही साथ उनकी गर्दन को चूमने लगा.

"राज? ये तुम क्या कर रहे हो?" मम्मी ने एक दम चौंकते हुए कहा.

मैं एक झटके में पीछे हट गया. एक दम बद-हवास, घबराया हुआ, और सकते में. मैं बस वहाँ से भागने ही वाला था. तभी वो हँसी... वो मेरी मम्मी की हँसी नही थी... बल्कि मुन्नी बुआ की थी. मैं मम्मी और मुन्नी बुआ के बात करने के लहजे में, एक हल्के से फ़र्क को समझ चुका था. लेकिन मम्मी और मुन्नी बुआ एक दूसरे की नकल एक दम हू-बहू उतार लेती थी. लेकिन जिस तरह से वो एक दम अलग-अलग पर्सन होते हुए एक दूसरे की इतनी अच्छी नकल उतार लेती थी और वैसी ही आवाज़ निकाल लेती थी, वाकई में अविश्वसनीय था, और उसी धोखे में कुछ देर पहले मैं फँस चुका था.

“बहनचोद... आगे से ऐसा कभी मत करना!” मैने किसी तरह कहा, मेरे पैर अभी भी काँप रहे थे, मैं वहीं पर किचन में रखी एक चेयर पर धम्म्म्म से बैठ गया. मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था. मेरा चेहरा लाल हो चुका था, किसी तरह मैं होश में आने का प्रयास कर रहा था, और मुन्नी बुआ मेरे को देख के ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी.

“एक चीज़ तो तुम को समझ में आ गयी होगी, कि थोड़ी सावधानी बरता करो,” बुआ ने मुझे समझाते हुए कहा. “मान लो अगर मैं सही में तुम्हारी मम्मी होती तो? फिर क्या होता?” बुआ ने पूछा, बुआ सही कह रही थी, और ये बात मेरे भी समझ में आ रही थी.

"आइ'म सॉरी, आप सही कह रही हो बुआ. मुझे ऐसा नही करना चाहिए था,” बुआ की मुस्कुराहट ने मेरी सारी घबराहट को दूर कर दिया.

"चलो कोई बात नही," बुआ ने बोलना सुरू किया, "लेकिन राज, मैं जब तक यहाँ रुकी हुई हूँ, हम को कोई ऐसा काम नही करना चाहिए, जिंदगी में वैसे ही बहुत परेशानियाँ हैं, मैं नही चाहती कि मेरे और तुम्हारी मम्मी के बीच कोई प्राब्लम खड़ी हो जाए. जो कुछ हम ने किया, उसमें मुझे तो बहुत मज़ा आया, यदि हम आगे भी वो करते रहना चाहते हैं, तो हम को सब कुछ बहुत सावधानी के साथ करना होगा. हम को बहुत, बहुत ज़्यादा सावधान रहना होगा.

”एक बार फिर....आइ’म सॉरी बुआ, ऐसा फिर कभी नही होगा.” बुआ को अपने आगे लगे बटन वाले नाइट गाउन के बटन को खोलते हुए मैं देखने लगा. बुआ ने शायद बस ये ही पहन रखा था.

"एहितियात के तौर पर, आगे से, हमेशा मैं तुम्हारे पास आया करूँगी,” बुआ ने प्रपोज़ किया. इस तरह, कोई रिस्क भी नही रहेगा... और आज जैसा तुमने किया, इस तरह के आक्सिडेंट होने की संभावना भी ख़तम हो जाएगी. ठीक है?” बुआ ने गाउन को उतारते हुए कहा, मैं बुआ के गाउन को ज़मीन पर गिरते हुए और बुआ के नग्न शरीर को निहारने लगा.

"ठीक है," मैं थोड़ा शरमाते हुए अपनी ग़लती मानते हुए बोला.

"अभी.... भूख लगी है क्या?" बुआ ने पूछा. "कुछ खाने को चाहिए?" किचन में पड़ी दूसरी चेयर को खींच कर, बुआ ने अपना एक पैर, घुटने पर से मॉड्कर, अपनी टाँगें फैलाए हुए, उस पर रखते हुए पूछा.

"बहुत भूख लगी है!" मैं बुआ की चूत को चाटने के लिए झुकते हुए बोला. ब्रेकफास्ट तो बाद में भी कर लेंगे, ब्रेकफास्ट की माँ की चूत.

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मैं उस दिन फॅक्टरी से जल्दी घर आ गया. मम्मी पापा की कार, पोर्च के नीचे खड़ी थी, मैने अपनी कार उनकी कार के पीछे खड़ी कर दी. “चलो अच्छा है, कम से कम पता तो चल गया कि मम्मी पापा आ गये हैं,” मैने सोचा, और मेन डोर की तरफ चल दिया. मेन डोर एक दम, अचानक से खुल गया. जैसे ही मैने डोर खुला, पापा हाथ में सूटकेस पकड़े हुए, बाहर निकलते हुए दिखाई दिए, मैने उनके पीछे आती मम्मी से पूछा, “पापा कहाँ जा रहे हैं?”

मैने जान बूझकर पापा से नही पूछा था, क्योंकि हमारे घर में ये मान्यता है कि यदि कोई घर से बाहर जा रहा हो, तो उसको टोकते नही हैं. सवाल तो मैने मम्मी से पूछा था, लेकिन जवाब पापा ने दिया, तुम्हारी नयी फॅक्टरी के लिए जो मशीन जर्मनी से इम्पोर्ट करनी थी, उसकी इम्पोर्ट लाइसेन्स इश्यू हो गया है. लेकिन एक बार मैं जर्मनी में खुद जाकर मशीन को और सेल्लर को देखकर और मिलकर तसल्ली कर लेना चाहता हूँ, इसीलिए फ्रॅंकफर्ट जा रहा हूँ. 10 दिनों में लौट आउन्गा. “मेरे पीछे से इस घर में तुम ही अकेले मर्द होगे, तो अपनी मम्मी और मुन्नी बुआ का ध्यान रखना,” पापा ने मुस्कुराते हुए कहा.

“ओके पापा, आप चिंता ना करें, हॅव आ सेफ जर्नी,” मैने मन ही मन खुश होते हुए कहा.

पापा की हाइट मुझ से ज़्यादा थी, उन्होने जाने से पहले प्यार में, मेरे सिर पर मेरे बालों को तितर बितर करते हुए, हाथ फिरा दिया, मानो कह रहे हो, तुम अब बड़े हो गये हो, मुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नही.

पापा के कार गेट से बाहर निकालने के बाद, जब मैं गेट को बंद कर के लौटा, तो देखा मम्मी और बुआ, ड्रॉयिंग हॉल में बैठ कर बातें कर रही थी. जैसे ही मैं दाखिल हुआ, वो दोनो चुप हो गयी. ये बात मुझे अच्छी नही लगी, इसका मतलब वो दोनो मेरे बारे में बातें कर रही थी, और चाहती थी, कि मैं उन बातों को ना सुनूँ. मैने एक झलक में दोनो की तरफ देखा, और फिर ध्यान से बुआ को देखा, लेकिन उनके एक्सप्रेशन बिल्कुल नॉर्मल थे.

"आओ राज, बैठो, कैसा रहा आज का दिन?" मम्मी ने पूछा. मैने गौर किया, कि सवाल पूछते समय, मम्मी के गाल थोड़े लाल हो गये थे. फिर मुझे होश आया, कि मुझे सवाल का जवाब देना है. लेकिन एक बार फिर, मम्मी ने बुआ की तरफ देखते हुए बस हल्का सा मुस्कुरा दिया, उस प्यार भरे अंदाज में जैसा वो हमेशा करती थी.

"सब ठीक रहा मम्मी. मैं उपर वाले बाथरूम में." मैने बुआ की तरफ देखते हुए कहा, वो थोड़ा परेशान सी लगी, लेकिन इसकी कोई वजह नही थी. मुझे उनका ऐसे देखना, ठीक उसी तरह लगा, जैसे उन्होने सुबह, मेरे से उनको मम्मी समझने की ग़लती करने के बाद, मुझे बुआ ने देखा था.

"जाओ नहा लो, हम यहाँ पर बैठ कर बातें कर रहे हैं," बुआ ने ज़ोर देते हुए बोला, और बस एक वाक्य में ही बहुत कुछ बोल गयी.

" राज, मैं पास की ग्रोसरी शॉप से कुछ सामान लेने जा रही हूँ, तुमको खाने के लिए कुछ मंगाना तो नही है?" मम्मी ने पूछा.

"नही मम्मी, मुझे कुछ नही मंगाना है, आज सुबह वैसे ही कुछ ज़्यादा खा लिया था,” मैने बोलते हुए बुआ की तरफ देखा. बुआ ने गुस्से में मेरी तरफ देखा, और ऐसा लगा जैसे वो कह रही हो, कि अगर मैने कुछ ना बोला होता तो बेहतर होता. तभी उसी वक़्त मुझे पछतावा भी हुआ, कि शायद मैने अपना गुस्सा और झुंझलाहट बुआ पर बेकार में उतार दी थी, लेकिन इस बात की संभावना बिल्कुल नही थी कि जो कुछ मैं इशारों में बोल गया था, वो मम्मी के समझ में आया हो.

"ओह...इस से पहले की मैं भूल जाऊं, ये लो अपने एअर रिंग्स वापस ले लो,” मम्मी ने बुआ के वो एअर रिंग्स उतारते हुए हंसते हुए कहा, “और थॅंक यू मुझे एक रात उधार देने के लिए.”

मैं घूमकर, सीढ़ियों की तरफ चल दिया, और एक बार में दो-दो सीढ़ियों पर छलाँग लगाते हुए अपने रूम में पहुच गया. और फिर अपने सारे पहने हुए कपड़ों को उतार के, उछालकर एक कोने में फेक दिया. बस अंडरवेर पहने हुए, मैं तौलिया उठाकर, बातरूम में घुस गया. फिर इंग्लीश स्टाइल की टाय्लेट सीट पर बैठकर, लंड को सहलाते हुए, उसे खड़ा करके, मूठ मारने की तय्यारी करने लगा...

जब मैं नहाकर बाहर निकला तो मैं बिल्कुल फ्रेश फील कर रहा था. सिर्फ़ तौलिया लपेटे हुए जब मैं अपने रूम में घुसा तो बेड पर मुन्नी बुआ नीचे पैर लटका कर बैठी हुई थी, और शायद मेरा इंतेजार कर रही थी. बुआ को अकेले वहाँ मैने बैठा देखा, मैने वो टवल भी हाथ से छोड़ कर, उसे नीचे सरक कर, गिर जाने दिया. मैने जान बूझकर, बुआ से पूछा, “मम्मी कहाँ है?”

"पास से ही शॉपिंग करने गयी है. लेकिन पहले तुम ये बताओ, कि वो सब तुम क्या बोल रहे थे?” मुन्नी बुआ ने अपनी पहली उंगली मेरी तरफ करते हुए पूछा. मैने शरम से अपने ग़लती स्वीकार करते हुए, अपना सिर नीचे झुका लिया.

"आइ'म सॉरी. लेकिन शायद मुझे पसंद नही आयी कि कोई पीठ पीछे मेरे बारे में बातें करे," मैने सीधा सपाट उत्तर दिया.

"तुम पता नही क्या ऊट पटांग सोच रहे हो, कि ना जाने हम दोनो तुम्हारे बारे में क्या क्या बातें कर रहे थे? कि कैसे मैने कल तुम्हारे लंड को चूसा? या कैसे कल तुमने पहली बार मेरी चुदाई की? क्या तुम ये सोच के परेशान हो?" बुआ ने ऊँची आवाज़ में पूछा.

"नही... बुआ ऐसा कुछ नही... मैं ऐसा कुछ नही सोच रहा. मैं इतना बेवकूफ़ भी नही हूँ!" मैं ये बोलते हुए अपने मन ही मन रीयलाइज़ भी कर रहा था, कि शायद मैं थोड़ा बेवकूफ़ सही में हूँ. बस मुझे इसी बात की चिंता थी, कि जो कुछ मैने मुन्नी बुआ के साथ शेयर किया है, वो मम्मी को उसमे से कितना बता रही हैं.

" राज तुम एक बात सुनो, और समझ लो, कि तुम्हारी मम्मी, किसी भी और माँ की तरह, तुम्हारे बारे में चिंता करती हैं. वो तुमको प्यार करती हैं... ये तुमको भी पता है. और तुम को ये भी पता है कि वो तुम्हारे लिए हमेशा भला ही चाहती है.

 
"हां, वो तो मुझे मालूम है." मैने नीचे, अपने पैरों की तरफ देखते हुए बोला, मैं बुआ की आँखों में आँखें डाल कर बात करने की हिम्मत नही जुटा पा रहा था. “लेकिन... आपने उनको क्या क्या बताया?” मैने पूछा, मुझे ये जाने बिना चैन नही पड़ रहा था कि उन दोनो में मेरे बारे में क्या क्या बातें हुई. ये सुनकर मुन्निी बुआ हँसने लगी.

"ठीक है, मैं बताती हूँ, तुम्हारी मम्मी बस ये जानना चाहती थी कि क्या तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है, या बस अभी तक उपर उपर तक ही सीमित हो. उन्होने मुझसे बस ये पूछा था.”

"आप मज़ाक कर रही हो? क्या सच में उन्होने ऐसा पूछा था? लेकिन क्यों?"

"क्यों कि उनको पता है कि तुम बहुत सीधे हो, और लड़कियों के साथ ज़्यादा कंफर्टबल फील नही करते हो. वो तुमको बचपन से जानती हैं. और उनको ये भी पता है, कि बहुत दिनों से तुम तान्या से मिलजुल भी नही रहे हो. उनको शायद लगा होगा, कि हम दोनो एक दूसरे से सारी बातें कर लेते हैं, तो हो सकता है तुमने मुझे कुछ बताया हो.”

"आपने मम्मी को क्या बताया?" मैने पूछा. मुन्नी बुआ एक कुटिल मुस्कान की शरारत से मुस्कुराइ.

"बस वो ही जो वो सुनना चाहती थी. मैने बताया कि मुझे नही लगता कि तुमने आज तक एक भी लड़की ना चोदि हो."

"क्या? आपने ये कह दिया?"

"ओह... बात को समझो राज, मैने पक्के तौर पर कुछ नही कहा. बस ये कहा कि मुझे शक़ है, कि तुम चुदाई कर चुके हो. मैने ऐसा कुछ डीटेल में नही बताया कि तुम किस लड़की को कब और कहाँ चोद चुके हो. लेकिन मैने ये ज़रूर बता दिया, कि सेक्स के मामले में तुम उस्ताद हो, उस एरिया में तुम्हारी मम्मी को चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है.

"लेकिन वैसे, मम्मी को मेरी सेक्स लाइफ के बारे में चिंता करने की क्या ज़रूरत है?"

"ज़रूरत है, क्यों कि वो नही चाहती कि तुम्हारी जिंदगी में कुछ भी ग़लत हो, जिसके लिए बाद में पछताना पड़े,” मुन्नी बुआ ने अनुभवी अंदाज में कहा. कुछ देर तक हम दोनो में से कोई कुछ नही बोला, रूम में शांति छा गयी. लेकिन मुझे पता था, कि वो बहुत कुछ मम्मी को बता चुकी है, बहुत कुछ.

"आपने और क्या क्या बातें की?" मैने पूछा.

"तुमको तो मालूम ही है राज, मैं किस हाल में अकेलेपन से बोर होकर जी रही हूँ. लेकिन पता नही मुझे तुमको ये बताना चाहिए या नही, लेकिन सच ये है कि तुम्हारे पापा भी दूध के धुले हुए नही हैं!"

"आप कहना क्या चाहती हो बुआ?"

"मैं ये कहना चाहती हूँ कि.... तुम्हारी मम्मी को तुम्हारे पापा के किसी औरत के साथ चल रहे चक्कर के बारे में पिछले एक साल से मालूम है."

"पापा...?"

मुन्नी बुआ ने हताशा में अपना सिर हिलाया.

"इसी वजह से कुछ दिनों के लिए मैं यहाँ पर रहने के लिए आई थी, राज. ऐसा नही है कि मैं घूमने या चेंज के लिए यहाँ पर आई थी. सच में, मैने इस बारे में बहुत सोचा, और कोई रास्ता ढूँढने की कोशिश की. और जिस तरह से तुम्हारी मम्मी इस दौर से गुजर रही थी, उसको भी किसी के साथ की ज़रूरत थी.”

"लेकिन वो दोनो तो एक दूसरे के साथ हमेशा बहुत खुश रहते हैं, आपने तो देखा ही था कल रात. आप को नही लगता, वो दोनो या तो जबरदस्त आक्टिंग कर रहे हैं, या फिर बहुत खुश हैं. मेरे तो कुछ समझ में नही आ रहा.”

“हां, तुम सही कह रहे हो राज, तुम्हारी मम्मी के मुताबिक, पिछले एक साल में पहली बार उन्होने आपस में इस तरह का व्यवहार किया है. और जहाँ तक तुम्हारी मम्मी को हाल फिलहाल की याद है, शायद पहली बार तुम्हारे पापा ने उनको कोई ऐसा गिफ्ट दिया है. तुम्हारी मम्मी के अनुसार, डाइमंड का प्रेज़ेंट तो एक तरह से "आइ'म सॉरी" प्रेज़ेंट था. और शायद था भी. हो सकता है, उनकी मॅरीड लाइफ में सब खुशियाँ लौट आयें, और हो सकता है, कि शायद कभी ना लौटें. इस दुनिया में कोई पर्फेक्ट नही है, ना तो तुम्हारे मम्मी पापा. ना ही तुम...ना ही मैं. और शायद कोई नही!"

"आप सही कह रही हो बुआ, मैं भी इस बात को मानता हूँ," मैं बुआ से बोला. "लेकिन आप जैसा बता रही हैं, ऐसा कैसे हो सकता है कि मम्मी और पापा ने पिछले एक साल से सेक्स किया ही ना हो?”

"तुम्हारी मम्मी ने तो मुझे ऐसा ही बताया राज, और साथ में कुछ और भी. तुम को तो शायद मालूम ही है कि तुम्हारी मम्मी आज भी कितनी कामुक और सेक्सी हैं, और अगर नही मालूम तो सुन लो कि तुम्हारी मम्मी को भी अपने शरीर की आग को ठंडा करने के लिए वो सब चाहिए, जो कि मुझे चाहिए.

तुम्हारी मम्मी की भी ज़रूरतें हैं, ख्वाहिश हैं, मैं इस बात को बेहतर समझ सकती हूँ, हम दोनो की एज में ज़्यादा डिफरेन्स भी नही है. वो ना जाने कितने दिनों से अपने आप पर काबू रखे हुए हैं, लेकिन अगर उनके सब्र का बाँध टूट गया, और उसने किसी और के साथ संबंध बना लिए, फिर सब कुछ हाथ से निकल जाएगा. तुम समझ रहे हो मैं क्या कह रही हूँ?”

 
मैं समझ रहा था. लेकिन जो कुछ मैने सुना, मुझे अपने कानों पर विश्वास नही हो रहा था. मैं सपने में भी नही सोच सकता था, कि मेरी मम्मी किसी और के साथ संबंध बनाएगी. मेरी मम्मी उस तरह की नही थी, और ना ही उनका स्वाभाव और कॅरक्टर उस तरह का था. मैने ये सब बातें जब मुन्नी बुआ को बोली, तो थोड़ी देर बुआ सुनती रही, फिर बोली, “राज, तुम्हारी मम्मी की जिस्मानी जारूरतें जो कि पूरी नही हो रही हैं, किसी भी और नॉर्मल औरत की ही तरह हैं.”

“अब हम बेकार में टाइम वासे कर रहे हैं, तुम्हारी मम्मी ना जाने कब शॉपिंग से लौट कर आ जायें. अब बिना टाइम वेस्ट किए, तुम यहाँ आओ, मैं तुम्हारे लंड को चूस लेती हूँ.” बुआ तो जैसे वियाग्रा की तरह थी, अभी थोड़ी देर पहले तो मैं मूठ मार के आया था, लेकिन जैसे ही उन्होने मुझे अपने मम्मे दिखाए, मेरा लंड फिर तन के खड़ा हो गया, मानो मैने शिलाजीत खा रखी हो.

बुआ बेड के किनारे पर बैठे हुए, मेरे लंड पर अपनी जीभ फिरा कर उसे गीला करने लगी, और फिर अपनी जीभ लंड के सुपाडे पर फिराने लगी, मैने देखा बुआ ने वो डाइमंड के एअर रिंग्स पहन रखे थे. “बुआ, हम क्यों ना एक तरकीब निकालें, जिस से ग़लती होने की संभावना बिल्कुल ना रहे?” मैने पूछा.

“कैसी तरकीब? तुम कहना क्या चाहते हो?” मेरे लंड को अपने मूँह में घुसाए हुए ही बुआ ने पूछा.

“आपके ये एअर रिंग्स. मैं आप के इन एअर रिंग्स को देख के आप को पहचान लूँगा, कि ये आप ही हो.”

बुआ लंड को चूस्ते हुए, हंस को बोली, ये तो बहुत इंट्रेस्टिंग है.

"ठीक है, मैं हमेशा इन एअर रिंग्स को पहने रहूंगी, जिस से ये ख़तरा तो नही रहेगा, कि ग़लती से तुम पीछे से जाकर अपनी मम्मी के मम्मों को ही ना दबाने लगो.”

"बुआ, विश्वास करो, ऐसा फिर कभी नही होगा,"मैने कॉन्फिडेंट्ली कहा. "मुझसे ऐसी ग़लती फिर कभी नही होगी."

“ऐसी ग़लती अब करना भी मत, अब बहुत बातें हो गयी. तुम क्या चाहते हो मैं क्या इसको चूसति ही रहूं?” बुआ ने कामुक अंदाज में कहा. मैने अपने मूँह पर ताला लगा लिया, और अपने हाथ नीचे ले जाकर, बुआ के मम्मों को दबाने और मसल्ने लगा. आअहह... मम्मों को दबाने का मज़ा ही कुछ और है, मैने मन ही मन सोचा. “बक्चोदि से ये लाख गुना बेहतर है.....!”

अगले कुछ दिनों तक मैने और बुआ ने, जो भी मौका मिला उसका भरपूर फ़ायदा उठाया. हालाँकि मैं बुआ से ज़्यादा एक्सपीरियेन्स्ड था, लेकिन फिर भी मैने बुआ से बहुत कुछ सीखा. तान्या से अब फोन पर बातें होने लगी थी, वो भी फिर से मेरे साथ फ्लर्ट करने लगी थी. मैं हमेशा बुआ से के साथ ज़्यादा से ज़्यादा टाइम बिताने का प्रयास करता.

उस दिन मैं जब घर लौटा तो शाम के 7 बज रहे थे. जैसे ही मैं घर के अंदर घुसा, मैने देखा, कि पापा की कार वहाँ नही थी, मैं जल्दी से मेन डोर से अंदर दाखिल हुआ, मैं सोच रहा था, शायद पापा किसी डिन्नर पार्टी में गये हैं. भूख तो मुझे भी लग रही थी, मैं जल्दी से किचन में घुसा, घुसते हुए मैं किसी से बस टकराते टकराते बचा, मैने सोचा शायद मम्मी से टकराया हूँ, तभी मेरी नज़र उन डाइमंड एअर रिंग्स पर पड़ी. “मुन्नी बुआ!” “आपको पता है मम्मी पापा कहाँ गये हैं?”

मैने पूछा. बुआ कुटिल मुस्कान के साथ बोली, “तुम्हारे पापा मुंबई किसी बिज़्नेस ट्रिप पर गये हैं. तुम्हारी मम्मी उनको एरपोर्ट तक छोड़ने गयी हैं. बस थोड़ी देर पहले आ जाते तो तुम्हारी मुलाकर हो जाती.”

"मम्मी कब तक लौट कर आएँगी?" मैने शरारात भरे लहजे में पूछा.

"उनको तो अभी 2-3 घंटे लगेंगे,” मुन्नी बुआ ने जब ये बोला यो उनकी आँखों में चमक आ गयी. बुआ ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा “चलो आज तुम्हारे मम्मी पापा के बेड पर करते हैं, जिस से कुछ अलग स्पेशल लगेगा, फिर जानें हम कब मिलें?.”

मैने पूछा, “क्यों बुआ, इतनी जल्दी, क्या हुआ?”

बुआ ने थोड़ा उदास होते हुए बताया, “राजीव क्रिस्मस की छुट्टियों पर घर आ रहा है.”

"शिट." मैं कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से बोल गया, मुझे अपनी फीलिंग्स को इस तरह एक्सप्रेस नही करना चाहिए था. “मैं आप को बहुत मिस करूँगा बुआ,” मैं बुआ का हाथ पकड़ते हुए बोला. फिर हम दोनो मम्मी पापा के बेडरूम में चले गये.

बेडरूम में पहुँच कर मैं बोला, “तो फिर आज की इस शाम को यादगार बना देते हैं.” मुन्नी बुआ थोड़ा मुस्कुराइ, लेकिन मैं देख रहा था, वो थोड़ा परेशान और नर्वस थी.

" राज, चिंता मत करो, थोड़े दिनों में तुम्हारी शादी हो जाएगी, सब ठीक हो जाएगा. और वैसे भी मैं इस बार की तरह कभी इतने ज़्यादा दिनों तक यहाँ रुकने वाली नही हूँ. कुछ साल बाद जब तुम्हारे बच्चे हो जाएँगे तो वो मुझे दादी-दादी बुलाया करेंगे, जैसे तुम मुझे बुआ-बुआ बुलाते थे.

"तो ठीक है फिर... तो आज की ये शाम हम दोनो के लिए बहुत ज़्यादा स्पेशल है !” मैने बुआ का हाथ फिर से अपने हाथों में लेते हुए कहा. फिर बुआ ने अपना गाउन उतारना शुरू कर दिया. मुझे बिल्कुल सर्प्राइज़ नही हुआ, कि बुआ ने गाउन के नीचे कुछ भी नही पहना हुआ था. मैने भी जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतारे और बुआ के साथ बेड पर लेट गया.

"मुझे प्यार करो राज...बहुत देर तक, धीरे धीरे. मैं इसको अपने आंदार बहुत दिनों तक समेटे रखूँगी, मुझे इसकी बहुत ज़रूरत पड़ने वाली है.” मैं समझ रहा था बुआ क्या कहना चाह रही हैं; उनको किसी मर्द के साथ सेक्स करने का सुख ना जाने अब कब मिलने वाला था, मैं ये बात जानता था.

"ठीक है, तो फिर मैं आज आपको वो सब दिखाता हूँ जो कुछ पिछले कुछ दिनों में, सच में मैने बस आप से ही सीखा है, “ मैं बोला. फिर कामुक, हवस भरे अंदाज में बोला, “पहले मैं थोड़ी आपकी छूट चाट लेता हूँ.”

"ओह राज...बहुत मज़ा आएगा," मुन्नी बुआ बोली. "हां, प्लीज़...आ जाओ तो फिर!" मैं बुआ की दोनो टाँगों के बीच घुस गया, और बुआ ने किस तरह उनकी चूत को मज़ा देना सिखाया था, उसको याद करने लगा. मुन्नी बुआ कराह रही थी, आहें भर रही थी, और उनका पेट उपर नीचे हो रहा था, वो अपनी गान्ड उपर की तरफ उठा रही थी. बुआ बहुत ज़्यादा गरम हो गयी थी, जल्दी ही बुआ मेरे मस्त चूसने से अच्छी वाली झाड़ के दो बार पानी छोड़ गयी. फिर बुआ मेरे लंड को चूस ने लगी, मैं सातवें आसमान पर पहुँच गया, बहुत मज़ा आ रहा था, मेरे लंड को बुआ बहुत अच्छी तरह चूस रही थी. फिर मैने बुआ के उपर आते हुए, अपने फन्फनाते लंड को बुआ की गीली चूत में घुसा दिया, हम दोनो के शरीर इस तरह रिक्ट कर रहे थे, मानो हम कितने सालों से एक दूसरे के साथ चुदाई कर रहे हो. हम दोनो करीब 2 घंटे तक मम्मी पापा के बेड पर चुदाई करते रहे. तभी गेट खुलने और कार की आवाज़ सुनाई दी, हम दोनो सतर्क हो गये, और समझ गये कि हमारा तिलिस्मी साथ अब शायद ख़तम हो चुका है. हम दोनो ने फटाफट अपने अपने कपड़े संभाले.

 
“तुम जल्दी से अपने रूम में जाओ, और वहाँ पर जाकर अपने कपड़े पहन लेना, थोड़ी देर मैं तुम्हारी मम्मी को बातों में उलझाती हूँ, इस से तुम को थोड़ा टाइम मिल जाएगा, और फिर ऐसे बहाना मारते हुए नीचे आना, जैसे अभी सो कर उठे हो” बुआ ने अपना गाउन पहनते हुए कहा. मैने वैसा ही किया, और थोड़ी देर बाद, मैं नीचे उतर के आया, मम्मी और बुआ किचन में खड़े होकर चाइ पीते हुए बातें कर रही थी.

"बुआ कल सुबह जा रही हैं," मम्मी बोली.

"हां, बुआ मुझे बता रही थी," मैने उबासी लेते हुए कहा. "बुआ आप कितने बजे जाओगी, मैं टॅक्सी वाले को फोन कर देता हूँ?"मैने पूछा. मुझे मालूम था कि कल मेरी कॉलेज में एक अर्ली क्लास है, जहाँ तक होगा, बुआ मेरे कॉलेज जाने के बाद ही जाएगी.

"जल्दी ही निकलुन्गि, मैने टॅक्सी वाले को फोन कर दिया, उसी टॅक्सी वाले को जो छोड़ने आया था, सुबह 10 बजे वो आ जाएगा. तुम कॉलेज कितने बजे जाओगे? बुआ ने पूछा. मैने बताया मैं तो कल सुबह 11 बजे जाउन्गा, फिर तो आप मेरे कॉलेज जाने से पहले, आप को गुड बाइ तो कर ही दूँगा. मैने आगे बढ़ कर एक मासूम सी पप्पी बुआ के गालों पर दे दी.

"आइ'ल्ल मिस यू," मैने अपने दिल से निकलती हुई आवाज़ में बोला.

"आइ'ल्ल मिस यू टू," बुआ बोली, और ये कहते हुए उनकी आँखों से आँसू की बूँद उनकी आँखों के किनारों पर आ गयी. "लेकिन चिंता मत करो, मैं तुम लोगों से मिलने फिर से जल्दी हो आउन्गि, रियली बहुत जल्दी" बुआ वादा करते हुए बोली.

मम्मी और बुआ के गालों पर एक एक पप्पी लेकर मैने दोनो को गुडनाइट विश किया, और उपर अपने रूम में जाकर सो गया.

सुबह उठने और फ्रेश होने के बाद मैने बुआ के साथ करीब आधा घंटा बिताया. हम दोनो ने एक आख़िरी सुबह की चाइ साथ साथ पी, फिर मैं अपने कॉलेज चला गया. जाने से पहले, जब मम्मी किचन में थी, मैं बुआ से धीरे से बोला "थॅंक यू फॉर एवेरितिंग". तभी बाहर टॅक्सी के आने की आवाज़ सुनाई दी. मैने बुआ के दोनो सूटकेस टॅक्सी में ले जाकर रख दिए.

जाने से पहले मैने बुआ के गाल की हर बार से थोड़ी लंबी पप्पी ली, फिर मम्मी और बुआ ने एक दूसरे को हग किया, और बुआ टॅक्सी में जाकर बैठ गयी. मम्मी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी, और मेरी कमर में हाथ डाल कर, टॅक्सी को दूर जाते हुए देखने लगी. जैसे ही मैने मम्मी की तरफ देखा, मैने गौर किया, मम्मी बे मुन्नी बुआ की डाइमंड एअर रिंग्स पहन रखी थी.

"आपने ये एअर रिंग्स क्यों पहन रखी हैं?" मैने उत्सुकता में पूछा.

"ओह. मुन्नी बुआ चाहती थी कि मैं ही इनको पहनूं, वो जाने से पहले मुझे कुछ स्पेशल देना चाहती थी.."

"वाउ, मुझे तो लगता है, उन्होने आपको अपनी बहुत स्पेशल चीज़ दी है, जिसे वो बहुत प्यार करती थी."

"इसको तुम नही समझोगे राज ,शायद कभी नही, या पता नही कब......."

बुआ के जाने के बाद, बस मैं और मम्मी घर में अकेले रह गये, पापा को मुंबई ट्रिप को 10 दिन हो चुके थे, लेकिन सब कुछ फाइनल करने में, अभी कुछ दिन और लगने वाले थे. मम्मी रोज सुबह 7 बजे मुझे मेरे रूम में चाइ का कप लेकर आती, और मुझे उठाती, और फिर वहीं बेड के किनारे पर बैठ जाती. और मुझे अपने हाथों से झकज़ोर्ते हुए कहती “इतना बड़ा हो गया है, अभी भी इसको माँ उठाने आए, उठ जा अब, 7 बज गये हैं.” रोजाना, वो ही टाइम, सेम रुटीन हो गया था.

"हे मोम." मैं कंबल के नीचे, पलटी मार लेटा जब मम्मी मेरे को कंधे से पकड़ के हिलाती, मेरे हिप्स पर चपत लगाती और मेरी गर्दन पर पप्पी लेती. “बस मम्मी थोड़ी देर और... “ रोजाना का ये ही नाटक था.

"ठीक है," मम्मी बोलती. "तुम आज कॉलेज लेट ही जाना. अगर टाइम पर कॉलेज नही जाना तो फिर अड्मिशन ही क्यों लिया था?"

"क्या ये रोजाना सुबह सुबह."मैं उबासी लेते हुए, अपने बॉक्सर्स को पहने बिस्तर से उठता, चाइ पीता, और सीधा बाथरूम में घुस जाता. रोजाना का मानो ये एक नियम बन चुका था.

कुछ हफ्ते पहले एक रात, मम्मी को किसी ज़रूरी फॅमिली फंक्षन में जाना था. जैसे ही मम्मी शाम को गयी , मैने तान्या को फोन मिलाया, और उसे मेरे घर आने के लिए मिन्नतें की, किसी तरह वो तय्यार हुई. मैं बाजार से अपने लिए स्ट्रॉंग बियर और तान्या के लिए ब्रीज़ेर खरीद लाया था. जब वो शाम को आ गयी तो पहले हम दोनो ने बातें करते हुए बियर और ब्रीज़ेर पी, और फिर मेरे रूम में सेक्स किया. जब वो चली गयी, तो मैं नशे में अपने बेड पर सो गया, मुझे मालूम था कि मम्मी के पास डोर की ड्यूप्लिकेट कीस हैं.

जब मुझे होश आया, मुझे सुनाई दिया, “राज, अब उठ भी जाओ!!”

"बहनचोद...." अभी भी थोड़ा हॅंगओवर बाकी था.

"उठ जाओ, राज, उठो." उन्होने अपना एक हाथ से मेरे कंधे हिलाए और दूसरे हाथ से मेरे हिप्स, और फिर मुझे ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी.

"ओके, उठ गया मम्मी, उठ गया!" जैसे ही मैं कंबल हटा के उठ के खड़ा हुआ, मम्मी थोड़ा पीछे हट गयी. मैने मम्मी को ज़ोर से साँस लेते हुए सुना, मैने उनकी तरफ देखा. वो मेरे लंड की तरफ देख रही थी. मैने नीचे देखा. शिट ! तान्या के जाने के बाद, मैं नंगा ही सो गया था. और अब मैं, सुबह सुबह के हार्ड ऑन के साथ उनके सामने नंगा खड़ा था; पूरा 7 इंच का लंड उनकी तरफ पॉइंट कर रहा था. मैं एक दम मूर्ति बन गया, मम्मी की नज़र मेरे लंड पर से हट ही नही रही थी.

"शिट, मम्मी, आइ'म सॉरी!" मैं जल्दी से बेड पर चढ़ा और अपने उपर कंबल ओढ़ लिया.

"यह क्या?" मम्मी एक दम हिल ही नही रही थी. वो मानो किसी और ही दुनिया में पहुँच चुकी थी.

"मुझे याद ही नही रहा कि मैने कपड़े नही पहन रखे हैं."

"अच्छा..." वो मानो फिर से याकायक होश में आई, और मेरे पास बेड पर बैठ गयी. उन्होने अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया- मेरे खड़े हुए लंड के बहुत पास. “राज, मैने जो कुछ तुम्हारी देखने वाली चीज़ थी, वो सब देख ली है..., और वो भी थोड़ी देर तक नही, बहुत देर तक. तुम वाकई में बहुत बड़े हो गये हो. इसमे शरमाने की कोई बात नही है.

"ईईहह, मम्मी, मुझे इस बात की शरम आ रही है कि मैं आपके सामने खड़ा था, जब मेरा वो खड़ा हुआ था.

"बेटा, ऐसा होना तुम्हारी उमर में नॉर्मल बात है. मैं तुम्हारी मम्मी हूँ, मैं तुमको बहुत प्यार करती हूँ, और तुम को मुझसे शरमाने की कोई ज़रूरत नही है. उन्होने मुझे के छोटी सी झप्पी दी, और फिर खड़ी हो गयी. “चलो, बेटा अब नहा लो.” वो बेड से थोड़ा दूर खड़ी हो गयी, और इंतेजार करने लगी.

 
थोड़ा शरमाते हुए, मैने कंबल हटाकर बेड से नीचे उतर आया. जैसे ही मैं खड़ा हुआ , मैने देखा कि मम्मी अभी भी मेरे लंड को एक टक देख रही हैं. जब तक मैं चल कर बाथरूम तक जाता, मम्मी ने अपनी दोनों बाहें मेरे गले में डाल दी, और मुझे एक बहुत प्यारी झप्पी दे दी. जैसे ही मैं मम्मी को झप्पी देने लगा, मुझे महसूस हुआ, मेरा लंड मम्मी के नाइट्गाउन के उपर से उनकी जांघों के बीच दबाव बना रहा है. “आइ लव यू, राज,” मम्मी बोली.

"मी टू, मम्मी."

मम्मी ने फिर मुझे छोड़ दिया, मैं भी चाइ का कप उठा कर बाथरूम की तरफ चल दिया, मैं अब भी महसूस कर रहा था, मम्मी की नज़रें मेरी गान्ड पर थी. हमेशा की तरह, मैने नहाते हुए शवर के नीचे मूठ मारने लगा, लेकिन आज मूठ मारते समय मेरे दिमाग़ में वो सब ही घूम रहा था, कैसे मम्मी मेरे तने हुए लंड को देख रही थी. जब मैं झडा तो आज पिछले कुछ दिनों से ज़्यादा वीर्य निकला. मुझे मूठ मारने में भी ज़्यादा मज़ा आया, मैने सोचा ये तरकीब अच्छी है, फिर से ट्राइ करेंगे.

***

अगली सुबह जब मम्मी मारे कमरे में आई, मैं आज फिर से नंगा ही सो रहा था. मैने उठ कर चाइ का कप पकड़ लिया. “लगता है नंगे सोने में तुम को ज़्यादा अच्छी नींद आती है,” मम्मी बोली.

“हां, मुझे तो कपड़े उतार कर ही अच्छी नींद आती है,” मैं बोला.

“मुझे भी,” मम्मी बोली. मैने मम्मी की तरफ देखा. वो फिर से मेरे खड़े हुए लंड को देख रही थी. तभी उन्होने अपनी नज़रें उठा के मेरी तरफ देखा, और उनका चेहरा लाल हो गया. “मेरा मतलब... मेरा कहने का मतलब था, कि मैं भी सारे कपड़े उतार कर नंगी ही सोती हूँ.”

मैने उनके नाइट्गाउन की तरफ देखा.

“हां, लेकिन उठने के बाद, मैं चाइ बनाकर तुमको उठाने से पहले कुछ पहन लेती हूँ.”

“क्यों, मम्मी? जब आप पापा के साथ कपड़े उतार कर सोती हैं, तो क्या मेरे सामने ऐसे आने में क्या परेशानी है, और वैसे भी आज कल पापा तो घर पर हैं भी नही. आप ही ने तो कहा था इसमे शरमाने वाली कौन सी बात है.” मैने चाइ की चुस्की लेते हुए बोला.

“उम्म... नही बेटा, हरगिज़ नही, क्योंकि.... क्योंकि मैं तुम्हारी माँ हूँ.” जब मम्मी ये बोल रही थी, तब भी वो मेरे खड़े हुए लंड को निहारने से अपने आप को नही रोक पा रही थी. मेरे को अपने गुप्तांगों का प्रदर्शन करना हरगिज़ अच्छा नही लगता, लेकिन मम्मी के सामने नंगा रहने में मुझे अब मज़ा आने लगा था. जब मम्मी मेरे खड़े हुए लंड को देखती , तो मेरे को एक अजीब से रोमांच का अनुभव होता.

"ठीक है, मम्मी,"मैं बोला. मैने मम्मी की एक झप्पी ली, और अपने लंड के दबाव को उनके उपर महसूस किया. मम्मी ने मुझे झप्पी देते हुए, मेरे नंगे हिप्स पर एक हल्की सी चपत लगा दी, और फिर हाथों से सहला दिया. फिर मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया, एक बार फिर से सोचने लगा, कैसे मम्मी मेरे खड़े हुए लंड को और मेरे नंगे बदन को देखती हैं...

***

अगली सुबह जब मम्मी मुझे उठाने को मेरे रूम में आई, तो वो भी नंगी थी. मैं एक दम बेड से उतर कर खड़ा हो गया, हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा. मेरा मूँह खुला का खुला ही रह गया. क्या मस्त शरीर था मम्मी का, पतली लंबी टाँगें, पतली कमर, मस्त उभार लिए हुए मम्मे, उनके निपल्स खड़े हुए थे. सबसे पहले मेरे दिमाग़ में ये ही आया, कि वो इतनी हॉट नही हैं, लेकिन तभी मुझे मेरे रूम में मम्मी की सेक्सी मादक सुगंध का एहसास हुआ. मेरी मम्मी गरम हो रही थी.

जब हम एक दूसरे को निहार रहे थे, मेरा लंड जो सोया हुआ था, तुरंत हरकत में आकर खड़ा होने लगा. मम्मी उसको देख रही थी, कैसे वो धीरे धीरे खड़ा हो रहा है, और फिर तन कर पूरे 7 इंच का हो गया, और फिर मम्मी की तरफ पॉइंट कर के देखने लगा.

"अब तो ठीक है, राज?" मम्मी बोली. मम्मी थोड़ा शरमा रही थी, शायद इस डर से की कहीं मैं चौंक ना जाऊं, या कहीं ऐसा ना हो कि मुझे उनका नग्न शरीर पसंद ना आए. “मुझे नंगा रहना पसंद है राज, और फिर कल की हमारी बातों को याद करके मैने सोचा, कि अपने ही बेटे से अपने शरीर को छुपाना तो बेवकूफी है.

"हां, मम्मी,ऑफ कोर्स इट'स ओके. वाउ..., आप तो बहुत सुंदर हैं, मुझे तो मालूम ही नही था, आप तो मॉडेल बन सकती थी.”

वो थोड़ा शरमा गयी, और उनके गाल गुलाबी हो गये, फिर वो थोड़ा साइड से हुई, तो मुझे उनकी गोल गोल टाइट गान्ड के दर्शन हो गये. जब वो फिर से घूम कर मेरे सामने सीधी खड़ी हो गयी, तब मुझे पहली बार एहसास हुआ कि, उनकी चूत एक दम चिकनी थी, उस पा एक भी बाल नही था- या तो उन्होने शेव किया था, या फिर वॅक्सिंग. उनके मम्मे और गान्ड एक दम टाइट कसे हुए थे.

"थॅंक्स, बेटा. आइ ट्राइ टू स्टे इन शेप."

"बहुत सही, मम्मी. यू'आर हॉट! मैं आप से एक बात पूछूँ? उन के मम्मे की तरफ इशारा करते हुए मैने पूछा, ये इतने टाइट कैसे हैं? मैं बातों को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाना चाहता था, ना जाने फिर कब मुझे अपनी मम्मी का खूबसूरत नग्न शरीर देखने का मौका मिले.

"नही बेटा ये तो नॅचुरली ऐसे ही हैं," वो बोली.

हालाँकि, वो मुझ से बातें कर रही थी, लेकिन उनकी नज़र अब भी मेरे लंड पर ही थी. मैने नीचे की तरफ देखा, मैं इतना ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था, कि मेरा लंड 45 डिग्री का आंगल बना कर फन्फना रहा था. मेरी हर धड़कन के साथ, लंड उपर नीचे होकर सलामी दे रहा था. इतना ज़्यादा कड़क आज ये पहली बार हुआ था. जब हम दोनो उसको देख रहे थे, तभी सुपाडे के छेद में से एक प्रेकुं की बूँद बाहर निकल आई, और अपने पीछे एक लंबा धागा बनाते हुए ज़मीन पर गिर गयी. जब मैने मम्मी की तरफ देखा, तो वो अपने होंठों पर जीभ फिरा रही थी.

"मैं आप से एक बात और पूछूँ, मम्मी? आपके वहाँ पर एक भी बाल नही है.... वहाँ नीचे, आप शेव करती हो क्या?"

मेरे लंड पर से अपनी नज़र हटाते हुए मम्मी बोली, नही बेटा, हर महीने वो मेरी कज़िन सिस्टर उमा, जो मेरे गाँव के पास किसी नर्सिंग होम में नर्स है, वो घर पर आकर मेरी वॅक्सिंग कर जाती है. बेचारी ग़रीब है, मैं भी उसको पैसे कपड़ों से मदद करती रहती हूँ.

"लेकिन आप वॅक्सिंग करती क्यों हैं?" मैने पूछा.

"ओह, वॅक्सिंग करने से मुझे सॉफ सुथरा और सेक्सी फील होता है. और तुम्हारे पापा को भी चिकनी ही पसंद है, और वैसे भी चिकने होकर कुछ चीज़ें करने में ज़्यादा मज़ा आता है.” जैसे ही मम्मी ने ये बोला, उनका हाथ अपने आप अपनी चिकनी चूत की तरफ चला गया. मुझे लगा मेरा पानी तभी निकल जाएगा, मेरे मूँह से हालाँकि सी एक आहह निकल गयी. तभी मम्मी को एहसास हुआ, कि वो क्या कर रही हैं, उन्होने तुरंत अपना हाथ वहाँ से हटाया, और फिर थोड़ा शरमा गयी. हवा में अब और ज़्यादा मादक खुश्बू फैल चुकी थी.

 
"मैं समझ गया, मम्मी." मैने नीचे अपने लंड और टट्टो की तरफ देखा. “मुहे भी अपनी वॅक्सिंग करवा लेनी चाहिए. उमा मौसी क्या मेरी भी वॅक्सिंग कर देंगी. ऐसा नही था, कि मैं वॅक्सिंग करवाना चाहता था, मुझे वो बाल उखाड़ने का दर्द बर्दाश्त करना बिल्कुल अच्छा नही लगता, मैं तो ये चाहता था कि मम्मी मुझे वहाँ छू कर देखें.

"इस बारे में बाद में सोचेंगे...चलो अभी जाकर नहा लो, बेटा."

"ओके, मम्मी," मैं बोला. मैने आगे बढ़कर उनकी एक झप्पी ली. मैं मम्मी से बस थोड़ा ही लंबा था, और जब झप्पी देते हुए हमारे नग्न शरीर एक दूसरे से चिपक रहे थे, तब मेरा लंड मम्मी की चिकनी चूत को छू रहा था. मुझे उनकी त्वचा पर अपने प्रेकुं की चिकनाई का एहसास हुआ. वो थोड़ा सा काँपी और फिर मुझे ज़ोर की झप्पी दे दी. जब उनका हाथ मेरे हिप्स पर प्यार भारी चपत लगा रहा था, तब मैने भी अपना हाथ उनकी नंगी गान्ड पर फिरा दिया. वो फिर से थोड़ा सा काँपी, और फिर मुझे हल्का सा धक्का देकर दूर कर दिया.

मैं चाइ का कप उठाकर बाथरूम की तरफ चल दिया, मेरा खड़ा हुआ लंड मुझे रास्ता दिखा रहा था.......

अगले कुछ दिनों तक, मम्मी नंगी ही मेरे लिए सुबह की चाइ लेकर मेरे रूम में आती, और मैं भी अपने बेड से नंगा ही उतरता. मुझको इस सब में बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी नींद पहले ही खुल जाती, और मैं मम्मी के आने का इंतेजार करने लगता. जब मैं उठता तो मेरा लंड तन कर खड़ा होता, मम्मी उसको देख देख कर गरम हो जाती. हम दोनो एक दूसरे को नंगे होकर जो झप्पी देते, वो सारे दिन की सबसे अच्छी चीज़ होती, मेरे को अपना लंड दिखाने में अब मज़ा आने लगा था.

अगले दिन मैने कुछ नया करने की सोची. मंडे को, मैं जल्दी उठ गया, मेरा लंड तन कर खड़ा हुआ था, मैने आज बाथरूम की जगह बेड में ही मूठ मारने का प्लान बनाया. मैने अपने कानों पर एंपी3 प्लेयर के हेडफोन्स लगा लिए, लेकिन एंपी3 प्लेयर को ऑन नही किया. मैने कंबल को अपने उपर से हटा कर, अपने नंगे शरीर को सारा उघाड़ते हुए, अपनी आँखें बंद कर ली, और धीरे धीरे अपने खड़े हुए लंड की पूरी लंबाई को सहलाने लगा.

जब मम्मी मेरे रूम में दाखिल हुई, मैने हेडफोन लगाए हुए ही, उनके कराहने की आवाज़ सुनी. उनको तो ऐसा ही लगा होगा, जैसे कि मैं म्यूज़िक सुनते हुए, आँखें बंद कर के मूठ मार रहा हूँ. मम्मी की आँखें मेरे लंड पर टिक गयी, और उन्होने बेड के पास रखे स्टूल पर चाइ का कप रख दिया. मैने सोचा अब वो चली जाएँगी, लेकिन वो वहीं पर खड़ी रही, और बस कुछ फीट की दूरी से मुझे मूठ मारते देखने लगी.

मैने अपनी आँखें बंद करे हुए ही, अपना दूसरा हाथ लंड की निचले हिस्से पर ले जाकर, अपनी गोलियों को सहलाने लगा. मैने एक आहह की आवाज़ सुनी, और फिर मम्मी का हाथ अपनी बिना झान्टो वाली चिकनी चूत पर पहुँच गया, और दूसरे हाथ से वो अपने निपल्स को सहलाने लगी. सारे रूम में सेक्स की मादक गंध भर चुकी थी, पहले से कहीं ज़्यादा. मैं अपनी मम्मी को ही गरम कर रहा था.

मैं बहुत एग्ज़ाइटेड हो चुका था. मम्मी के सामने मूठ मारने के कारण उत्तेजना और ज़्यादा बढ़ चुकी थी. मैं सोच रहा था, कि वो मेरे झड़ने तक मुझे देखती रहेंगी, लेकिन यकायक उनको कमरे से बाहर जाता देख, मैं निराश हो गया. मुझे लगा कि मेरे ऐसा करने से वो शरमा गयी हैं, या फिर अपने ही सगे बेटे को मूठ मारते देखना शायद कुछ ज़्यादा ही हो गया था. लेकिन बस एक मिनिट बाद, वो एक छोटी से शीशी हाथ में लेकर लौटी. वो मेरे पास बेड पर ही बैठ गयी, और अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया.

मैने थोड़ा चौंकने का नाटक करते हुए कहा, “ओओओह्ह्ह, आइ’म सॉरी मम्मी,” मैने एक हाथ से लंड को पकड़े हुए ही, दूसरे हाथ से अपने हेडफोन्स हटाए.

"दट'स ओके, बेटा." उन्होने मेरे तने हुए लंड की तरफ देखा, और अपने होंठों पर जीभ फिराई. “जो तुम कर रहे हो, वो तुम्हारी उमर के लड़कों के लिए नॅचुरल और हेल्ती चीज़ है. मैं इसको और ज़्यादा एंजायबल बनाने के लिए तुम्हारे लिए एक चीज़ लाई हूँ.

उन्होने अपने हाथ में पकड़ी हुई शीशी उपर उठा के दिखाई, मैने पढ़ा, उस पर लिखा था, “जॉनसन्स बेबी आयिल.”

"हां," उन्होने शीशी का ढक्कन खोलते हुए कहा. "मैं भी इसे उसे करती हूँ जब मैं...ये सब कुछ अच्छे से चिकना कर देता है." उन्होने शीशी में से एक बूँद अपनी हथेली पर निकाल के अपने दोनो हथेलियों पर रब किया, और फिर वो हथेली मेरी बाँह पर घिसी. “देखा, एक बार उसे करना चाहोगे?” उन्होने वो शीशी मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा.

"हां, क्यों नही," मैं बोला."लगा दो आप."

उन्होने मेरी तरफ देखा, और बोली, "तुम्हारा मतलब, मैं ये लगाऊं?"

"हां, तो क्या हुआ," मैं बोला. मुझे लगा शायद वो उसकी एक दो बूँद मेरे लंड पर डाल देंगी, या फिर मेरी हथेली पर टपका देंगी. लेकिन उन्होने, उसकी कुछ बूँदें अपनी एक हथेली पर ली, और फिर दोनो हथेलियों को आपस में मल लिया. मैं मम्मी के हाथों को मेरे फन्फनाते हुए लंड की तरफ बढ़ता हुआ देखने लगा.

जब उनके हाथों ने मेर लंड को छुआ तो मेरे मूँह से आहह निकल गयी. मुझे बहुत अच्छा लगा! पहले उन्होने दोनो हाथों से मेरे लंड को सहलाया, और थोड़ा सा घुमाते हुए उपर नीचे करने लगी, और बेबी आयिल से पूरे लंड को चिकना करने लगी. फिर वो अपना एक हाथ, मेरी गोलियों पर ले गयी, और बेबी आयिल से मेरे टट्टों को भी चिकना कर दिया, उनका दूसरा हाथ मेरे लंड पर अपना काम जारी रखे हुए था.

मैने उनके चेहरे की तरफ देखा, वो घूर कर देख रही थी, कैसे उनके हाथ को मेरे तने हुए लंड पर उपर नीचे, बेबी आयिल की चिकनाहट में फिसल रहे हैं. उनकी साँसें भी तेज तेज चलने लगी थी, और उनके निपल्स भी खड़े हो गये थे. फिर वो मेरे लंड से हाथ हटा कर, खड़ी हो गयी.

“अब ठीक है, अब तुम को और ज़्यादा आसानी रहेगी,” मम्मी बोली.

“प्लीज़ मम्मी, बहुत मज़ा आ रहा है, आप ही कर दो ना प्लीज़!”

उन्होने बिना कुछ बोले, मुझे घूर के देखा, मुझे लगा की कहीं मैने कुछ ज़्यादा ही डिमॅंड तो नही कर लिया. लेकिन तभी, वो फिर से बेड पर बैठ गयी, और मेरे तने हुए लंड को फिर से अपने हाथ में ले लिया. जैसे ही वो मेरे लंड को अपने हाथ से उपर नीचे करने लगी, मेरे मूँह आहह ऊहह की आवाज़ें निकलने लगी.

मैं कराहते हुए बोला, “ओह मम्मी, हां ऐसे ही” और वो जल्दी जल्दी अपना हाथ मेरे लंड पर चलाने लगी. बेबी आयिल की वजह से और ज़्यादा मज़ा आ रहा था, सूखा सूखा मूठ मारने से कहीं ज़्यादा. और उसकी वजह से आवाज़ भी आ रही थी, मम्मी का हाथ जैसे उपर नीचे होता, फॅक फॅक, स्लिप स्लॅप की आवाज़ आती. कुछ देर बाद, मुझ से बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया, और मैं बोला, “मम्मी, मैं बस होने ही वाला हूँ.”

जवाब में उनके मूँह से बस एक आहह निकली, और वो अब तेज़ी से मूठ मारने लगी. मेरी गोलियों की बेचैनी अब उपर की तरफ बढ़ती जा रही थी, मेरे पेट और पैरो की तरफ. शुपाडे के छेद में से निकलते वीर्य के पानी की पहली पिचकारी को मैं देख रहा था, पहली पिचकारी बड़ी ज़ोर से निकली, पानी करीब डेढ़ फीट उपर तक हवा में गया, और फिर मेरे पैरों और मम्मी की बाहों पर गिर गया.

"ओह्ह! आआआः! आआआः! गॉड! आआआः!" मेरे मूँह से अपने आप तरह तरह की आवाज़ें निकल रही थी, और मेरा लंड पानी की पिचकारी पर पिचकारी छोड़ के मुझे और मम्मी की बाहों को गीला कर रहा था. मैं झड़ते हुए परम सुख में खोते हुए, मम्मी की पीठ पर हाथ रख के ज़ोर से दबाने लगा.

"हां बेटा,हो जाओ" वो फुसफुसाई.

मैं इतना ज़ोर से झडा था, कि मानो मुझे तारे नज़र आ गये हो, और मैं करीब करीब बेहोश सा हो गया था. कुछ देर बाद, धीरे धीरे, मुझे कुछ सॉफ दिखाई देने लगा, और मेरे लंड ने वीर्य के पानी की पिचकारियाँ मारना बंद किया. मम्मी के हाथ ने भी अब मूठ मारना बंद कर दिया था, और वो अपने अंगूठे से, मेरे लंड के सुपाडे के उपर वीर्य को मल रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था.

"ठीक है, अब अच्छा फील कर रहे हो?" मम्मी ने पूछा.

मैं किसी तरह साँस लेते हुए बोला, “मम्मी, मज़ा आ गया. ये बेबी आयिल तो कमाल की चीज़ है, और जब कोई दूसरा कर रहा हो, तो और भी ज़्यादा मज़ा आता है.”

उन्होने मेरी तरफ देखा, वो अब भी मेरे लंड के सुपाडे को अपने अंगूठे से गोल्गोल घुमा कर घिस रही थी. “क्या तुम ये रोज करते हो, बेटा?”

“हां, ज़्यादातर नहाते समय बाथरूम में.”

वो दूसरी तरफ देखने लगी, और कुछ देर खामोश रहने के बाद बोली, “अगर तुम चाहो तो... मैं हर रोज तुम्हारे लिए ये कर सकती हूँ, राज.”

"आप मज़ाक तो नही कर रही ना,"मैं बोला. "क्या आप रोज मेरे लिए ये करोगी? लेकिन?"

उन्होने फिर से मेरी तरफ देखा. “हां , बेटा. क्योंकि तुम्हे इसकी ज़रूरत है, और मैं तुमको बहुत प्यार करती हूँ.. और वैसे भी मुझे भी तो.... ऐसा कर के मज़ा आया."

"कभी कभी मैं एक दिन में दो या तीन बार कर लेता हूँ,” मैने आशा भरी आवाज़ में कहा.

वो हँसी और उठ कर खड़ी हो गयी. “हम को शुरुआत में बस सुबह उठने तक ही सीमित रखना होगा.” जब वो ये बोल रही थी, तभी उनकी बाहों से मेरे वीर्य का पानी नीचे टपकने लगा. “मैं सॉफ करने के लिए कुछ लेकर आती हूँ,” वो बोली.

 
जब वो बाहर जा रही थी, मैं उनकी मस्त गान्ड को देखने लगा, और जब वो सॉफ करने का कपड़ा और टवल लेकर लौट कर आई, तो उनके मस्त मम्मों को हिलते हुए देखने लगा. वो मेरे पास बैठ कर मेरे लंड को पोंछने लगी, मेरी गोलियों को, मेरे पैरों को, और फिर अपनी बाहों और हाथों को पोंछ कर सॉफ किया.

"तुम्हारा ये तो अब भी खड़ा है," वो बोली.

"हां, इस सब देख कर मैं बहुत एग्ज़ाइटेड हो रहा हूँ."

"मैं, भी बेटा,"वो बोली. "चलो, अब नहा लो."

मैने खड़े होकर, उनकी एक झप्पी दी. इस बार मैने अपने दोनो हाथों को उनकी गान्ड की गोलाईयों पर रख कर, उनको अपनी तरफ दबा लिया. वो कराह उठी, जब उनकी चूत के उपर मेरे खड़े लंड ने दबाव डाला, तो मम्मी ने अपनी बाहों को मेरे कंधों पर रखते हुए, एक छोटी से पप्पी दी, और फिर मुझे दूर कर दिया. “चलो, जाओ अब,” वो बोली.

मैं ठंडी हो चुकी छाई के कप को लेकर बातरूम की तरफ चल पड़ा.

अगले दो तीन दिनों तक वैसे है चलता रहा, मेरी खूबसूरत मम्मी नंगी होकर सुबह 7 बजे मेरे रूम में दाखिल होती, वो अपने साथ एक सॉफ करने के लिए कपड़ा और बेबी आयिल की शीशी साथ में लाती. वो मेरे कंबल को हटा कर मेरे को नंगा कर देती, और फिर अपने हाथों से मेरे लंड और टट्टों पर बेबी आयिल लगाती. वो मेरे लंड को जब तक सहलाती रहती, जब तक कि तन कर लक्कड़ ना बन जाए, और फिर प्यार से अपने अनुभव का भरपूर उपयोग करते हुए, जब तक मूठ मारती, जब तक कि मैं पानी ना छोड़ दूं. मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी.

मैं मम्मी के मम्मों को दबाना चाहता था, मैं उनकी चूत के साथ खेलना चाहता था, लेकिन कहीं एक डर था, कि कहीं मम्मी नाराज़ ना हो जायें, और जो कुछ वो कर रही हैं, उसको भी करना कहीं बंद ना कर दें.

चौथे या पाँचवे दिन, वो अपने नियत समय पर नंगी होकर मेरे कमरे में आ गयी, लेकिन आज उनके हाथों में वो कपड़ा और बेबी आयिल की शीशी नही थी. बहनचोद! कहीं मम्मी मेरा मूठ मारना बंद तो नही करने वाली? मेरे तन कर खड़ा हुआ लंड तो उनके स्पर्श के लिए पागल हो रहा था.

"मम्मी?" मैं बोला.

वो मुस्कुराइ, और बोली, “चिंता मत करो राज, मैं अब भी तुम्हारी देखभाल जारी रखूँगी, लेकिन मैने सोचा, चलो आज थोड़ा अलग तरीके से करते हैं, क्यों ठीक है?”

कंबल दूर हटाते हुए, वो मेरे पैरों के बीच आ गयी, और मेरे खड़े हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया.

"आज क्या सूखा सूखा ही करोगी क्या?"मैने पूछा.

"अर्रे ऐसा कुछ नही है." और ऐसा कहते हुए, उन्होने झुक कर मेरे लंड के सुपाडे को अपने प्यारे से मूँह में भर लिया.

“ओह मम्मी,” मैने गहरी साँस लेते हुए कहा. मैं देख रहा था, कैसे उन्होने अपना सिर झुका कर नीचे कर रखा था, और फिर उपर कर लिया, और फिर नीचे, और बार बार ऐसे ही करने लगी. उन्होने अपनी जीभ से पूरे लंड को सारी लंबाई तक चाट लिया, फिर सुको मूँह में भर लिया, और उसको अपने सिर को तब तक नीचे झुकाती रही, जब तक पुर 7 इंच की लंबाई उनके मूँह में नही चली गयी, और उनके होंठ लंड की जड़ को ना छूने लगे. मेरी सग़ी मम्मी मेरे लंड को चूस रही थी. मुझे कितना अच्छा लग रहा था, उसको शब्दों में बयान करना मुश्किल है.

"मम्मी, आप जब मेरे लंड को अपने मूँह में लेती हो तो बहुत मज़ा आता है!"

उन्होने जवाब में बस एक आअहह की आवाज़ निकाली. वो पूरी मेहनत से मेरे लंड को चूस रही थी, उनका सिर उपर नीचे हो रहा था, और वो अपने होंठों से सारी हवा चूस के लंड के उपर ऐसा शून्य का स्थान बना रही थी, जिस से बहुत मज़ा आ रहा था. फिर उन्होने अपना एक हाथ मेरे लंड की जड़ के चारों तरफ लपेट कर, होंठों के साथ उपर नीचे करने लगी. वो मेरे लंड के हर हिस्से पर मेहनत कर रही थी.

और इस से वो ही हुआ, मेरी गोलियों में उबाल आना शुरू हो गया.

"मम्मीयीई, मैं बस होने ही वाला हूँ!" मैं सोच रहा था की वो मेरे लंड को अपने मूँह में से बाहर निकाल देगी, लेकिन उन्होने एक बार फिर से कराहते हुए, लंड को और ज़ोर से जल्दी जल्दी चूसना शुरू कर दिया. मेरे लंड का लावा उनके मूँह में ही निकल गया.

"आआआआः! मम्मी!" हर बार की तरह मेरे मूँह से अजीब अजीब आवाज़ें निकलने लगी. मम्मी ने अपना एक हाथ मेरे पैर पर रख दिया. मेरा लंड अभी भी उनके मूँह में ही था, और मुझे मालूम था कि वो मेरे वीर्य के पानी को पी रही हैं. बस ये सोच के ही बहुत मज़ा आ रहा था, कि मेरी सग़ी मम्मी, मेरे वीर्य के पानी को पी रही हैं. मैं अब शांत हो चुका था, और मेरे मूँह से निकल रही अजीब आवाज़ें भी बंद हो गयी थी.

"ओह्ह्ह," मैं बोला.

मम्मी ने मेरा लंड अपने मूँह में से निकालते हुए मुझे देखा, मैने देखा की उनके निचले होंठ से वीर्या की एक हल्की सी लाइन तपाक रही है. जब हम एक दूसरे को देख रहे थे, तभी उन्होने अपनी जीभ से वीर्य की उस बूँद को चाट लिया. उन्होने उसको अपने मूँह में एक पल को रखा, और फिर उसको पुर मूँह में जीभ से फिराया, और फिर सतक लिया. मेरे अंदर एक सिरहन सी दौड़ गयी, वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा उठी.

"मज़ा आया?" उन्होने पूछा.

"आप बस पूछे ही मत, मम्मी? क्या हम रोजाना ऐसा नही कर सकते?"

उन्होने हंसते हुए कहा, “कर तो सकते हैं.”

फिर वो थोड़ा झुकी, और मेरे लंड के सुपाडे पर आ चुकी वीर्य की बची हुई कुछ बूँदों को चाट लिया और उनको भी सटक लिया. उन्होने मुझे बनावटी गुस्से में देखा, और बोली, “ये तो अभी भी खड़ा हुआ है.”

मैने थोड़ा नीचे होकर उनको बाहों से पकड़ लिया, और अपने उपर लिटा लिया, हम दोनो के चेहरे बिल्कुल एक दूसरे के सामने थे. “ये इस लिए खड़ा हुआ है, क्यों कि आप हो ही इतनी खूबसूरत,” मैं बोला. मेरा बाँया हाथ उनकी गान्ड की गोलाईयों को सहलाने लगा, और मेरे सीधे हाथ ने उनके सिर को पकड़ के नीचे कर लिया, जिस से हम किस कर सकें. जैसे ही हमारे होंठ मिले, उनकी आँखें बंद हो गयी, और मेरी जीभ ने उनकी जीभ से मिलन करने के लिए, उनके दोनो होंठों को अलग अलग कर दिया. वो ज़ोर ज़ोर से कराहने लगी, गले से घुटि घुटि कराहने की आवाज़ें आने लगी. और जब हम फ्रेंच किस कर ही रहे थे, तभी उनकी गीली चूत मेरे लंड से जा टकराई.

तभी उन्होने अपनी दोनो आँखें खोल दी, और मुझसे दूर हो गयी, मानो अभी अभी जागी हो.

"तो फिर, उम्म...मज़ा आया! मुझे लगता है...लगता है अब जल्दी से तयार होकर कॉलेज चले जाओ, हे हे." और वो उठ कर खड़ी हो गयी. "मैं आज चाइ बनाना तो भूल ही गयी; मैं अभी बना कर लाती हूँ, जब तक तुम नहा लो."

मैं भी खड़ा हो गया. "मम्मी,मैने कोई ग़लती कर दी क्या?"

"नही, बेटा, मैं तो... लेकिन हम को केर्फुल रहना चाहिए. तुम समझ रहे हो ना?"

"हां मम्मी, शायद," मैं बोला. जो मैं समझ रहा था, वो शायद ये था, कि मम्मी मेरा पानी निकाल के मेरी मदद तो कर रही हैं, लेकिन वो मर्यादा की उस सीमा को नही तोड़ना चाहती. लेकिन ऐसा करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था.

मैने आगे बढ़कर उनकी एक झप्पी ले ली, इस बात का ख्याल रखते हुए, कि मेरा लंड उनकी चूत वाली जगह छू रहा हो. मैने उनकी गान्ड की गोलाईयों को अपने हाथों में भरते हुए, उनको अपनी तरफ खींच लिया, और अपनी गान्ड को थोड़ा हिलाने लगा, जिस से मेरा लंड उनकी चूत के मूँह को सहला सके. “आइ लव यू, मम्मी,” मैं बोला, और उनको किस करने के लिए थोड़ा झुक गया. एक बार फिर से, मम्मी की आँखें बंद हो गयी, और उनके होंठ खुल गये, और हम एक दूसरे से चिपक के फ्रेंच किस करने लगे.

उन्होने कराहते हुए, अपने दोनो हाथ मेरी गान्ड पर रख के मुझे अपने और अंदर खींच लिया, और वो भी अपनी गान्ड हिलाने लगी, जिस से मेरा तना हुआ लंड अब उनकी चूत के मुंहाने पर और बेहतर रगड़ मारने लगा. उस समय मुझे लगा, कि अगर मैं उनको बेड के सहारे घोड़ी बना डून, तो शायद वो मुझे छोड़ लेने देंगी, और मुझे ये भी पता था की ऐसा करने में कितना मज़ा आएगा. लेकिन मैं मर्यादा की उस रेखा को अपनी तरफ से पहल कर के नही तोड़ना चाहता था. मैं उनसे दूर हो गया, उन्होने अपनी आँखें खोल दी.

"राज?" वो बोली.

"मम्मी, मैं अब नहाने जाता हूँ,"मैं बोला. "आइ लव यू."

"ओह, आइ लव यू टू, बेटा." मेरी तरफ देखते हुए वो मुस्कुराते हुए बोली.

मैं धीरे धीरे दरवाजे से बाहर निकल कर, बाथरूम की तरफ बढ़ने लगा, मैं आशा कर रहा था, कि वो मुझे आवाज़ देकर बुला लेंगी....... लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ....

सनडे को दोपहर में, जब मैं अपने रूम में बेड पर लेट कर कुछ पढ़ रहा था, मम्मी मेरे रूम में आई, और मेरे पास बेड पर बैठ गयी, और मेरे शॉर्ट्स को खोलने लगी. मैं बोला, “मम्मी.”

वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराइ, और मेरे शॉर्ट्स को नीचे खींच दिया, और मेरा लंड बाहर निकाल दिया. “बेटा, मैं पिछले कयि दिनों से देख रही हूँ, तुम्हारा एक बार होने के बाद भी खड़ा रहता है, मुझे लगता है तुमको रोजाना एक बार से ज़्यादा “ट्रीटमेंट” की ज़रूरत है. तभी उन्होने नीचे झुक कर मेरे मुरझाए हुए लंड को अपने मूँह में भर लिया.

 
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