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भाभी का बदला

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उनका इतना सब करने से मेरा लंड खड़ा हो गया, और बस कुछ ही पलों में मैं कराहते हुए अपने मूँह से अजीब अजीब आवाज़ें निकालने लगा, और अपना माल मम्मी के सॉफ्ट, गरम मूँह में निकाल दिया. उन्होने थोड़ा सा अपना मूँह खोले हुए ही मेरी तरफ देखा, और मैने देखा कि वो मेरे वीर्या को अपने सारे मूँह में अपनी जीभ से फिरा रही हैं. उन्होने अपनी आँखें बंद कर ली, और फिर सारा माल सटक गयी, और फिर अपने होंठों पर जीभ फिराई और मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.

"वाउ, मम्मी, थॅंक्स!" मैं बोला. "लेकिन..."

"लेकिन क्या, बेटा?"

"जब आप कपड़े पहने रहती हो तो उतना मज़ा नही आता. आपके नंगे शरीर को देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है."

"ओह. तो इसमें कौन सा टाइम लगने वाला है." वो उठ कर खड़ी हुई, और तुरंत अपने सारे कपड़े उतार दिए, और फिर मेरे पास नंगी होकर लेट गयी. मैने उनकी टाँगों को अपनी दोनो टाँगों के बीच फँसाने का प्रयास किया, लेकिन वो पलट कर साइड से लेट गयी, और अपनी गान्ड मेरी तरफ कर दी.

”राज, मैं तुमको बताना चाहती हूँ, कि जब भी तुम्हारा मन करे, मैं हमेशा तुम्हारी हेल्प करने को तय्यार हूँ. हाथ से, मूँह से.... जैसा भी तुम चाहो. और दिन में जितनी बार भी चाहो.”

मैने भी पलट कर, पहली बार अपने हाथ उनके सेक्सी मम्मों पर रख दिए. मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा, "एम्म्म, बहुत अच्छा लग रहा है!" वो बोली. वो मेरे और करीब आकर मुझसे चिपक गयी, और मेरा लंड उनकी गान्ड की दरार में घुसने लगा. मैं उनके दोनो मम्मों से खेलने लगा, और उनके हार्ड हो चुके निपल्स पर ज़्यादा ध्यान देने लगा. फिर मेरा हाथ नीचे जाके चूत के होंठों से खेलने लगा. वो थोड़ा कराही और अपनी गान्ड मेरे खड़े हुए लंड के उपर दबा दी.

"मम्मी, क्या मैं जिस तरह से आप को छू रहा हूँ वो सही है?"

उन्होने एक गहरी साँस ली, और फिर मेरी तरफ करवट ले ली, उनका चेहरा अब मेरे सामने था. “नही बेटा. हम जो कुछ भी पिछले कुछ दिनों से कर रहे हैं वो कुछ भी सही नही हैं.”

“लेकिन, मेरा मतलब था...”

“मुझे मालूम है, लेकिन मुझे बोलने दो. हम जो कुछ भी कर रहे हैं वो सगे संबंधियों में यौन संपर्क है, इसको अँग्रेज़ी में ‘इन्सेस्ट’ कहते हैं. तुमने सुना है इस शब्द के बारे में?

“हां,” मैं बोला.

हमारा समाज इन्सेस्ट को ग़लत मानता है, क्योंकि जब सगे संबंधियों के बच्चे होते हैं, तो उनके बीमार होने की संभावना ज़्यादा होती है.

“मुझे मालूम है, मैने पढ़ा है.”

“और वैसे भी, लोगों को डर रहता है, कि अगर माँ बाप अपने बच्चों के साथ सेक्स करेंगे, तो बच्चे बिगड़ जाएँगे, उनका दिमाग़ खराब हो जाएगा.”

“ऐसा मेरे साथ कुछ नही होगा, मम्मी.”

“मुझे मालूम है, राज. तुम बहुत कुछ मेरे जैसे ही हो.”

मैं मम्मी की आगे बोलने का इंतेजार करने लगा.

"बेटा, मैं हमेशा से ऐसे दकियानूसी पुराने ख़यालात वाली नही रही हूँ."

"मम्मी, आप तो हमेशा मॉडर्न ही रही हो!"

“मेरी एक बात सुनो. मैने पहली बार सेक्स, शादी के बाद तुम्हारे पापा के साथ ही किया, मैं शादी पर बिल्कुल कुँवारी थी. मुझे सेक्स बहुत पसंद था, मैं शादी से पहले अपनी उंगली से हस्तमैथुन करती थी. लेकिन शादी के बाद मुझे सेक्स का ऐसा चस्का लगा, कि मैं और तुम्हारे पापा रोजाना सेक्स करते थे. मुझे लगता है मेरी सेक्स की भूख और लॅडीस से कहीं ज़्यादा है. मुझे रोजाना सेक्स की ज़रूरत होती है.” मम्मी थोड़ा देर रुकी और फिर बोली, “जैसा कि मुन्नी बुआ ने तुमको बताया ही होगा, कि तुम्हारे पापा का पिछले एक साल से किसी औरत के साथ चक्कर चल रहा है, वो मुझे अब इग्नोर करने लगे हैं. पिछले एक साल से मैं अपनी सेक्स की ज़रूरत किसी तरह दबा कर उस पर कंट्रोल कर रही हूँ. लेकिन उस दिन मैने जब तुम्हारा खूबसूरत नंगा शरीर देखा, और तुम्हारा लंबा लंड, तो मुझे अपने आप पर कंट्रोल नही हुआ, राज.”

मैं इस सब को सुन कर थोड़ा भौंचक्का रह गया था. मैने मम्मी के मूँह से लंड या इस इस तरह का कोई शब्द कहते हुए नही सुना था. ज़्यादा से ज़्यादा वो “ओह, शिट” ही कहती थी, जब कुछ घोर अनपेक्षित हो जाए.

“सब कुछ इतना धीरे धीरे हुआ कि संभलने का मौका ही नही मिला. पहले, तुमने हर सुबह अपने नंगे शरीर को दिखाना शुरू किया, मैने अपने मन को समझाया, कि इसमे ऐसी कोई ख़ास बुराई नही है, फिर तुम मुझे नंगा देखने की ज़िद करने लगे, फिर भी मैने सोचा कि चलो ये भी ठीक है. लेकिन फिर जब मैने तुम्हे मूठ मारते हुए देखा, तो मेरा मन किया, कि क्यों ना ये काम मैं ही तुम्हारे लिए कर दूँ, और तुमने भी मेरे लिए सब कुछ आसान कर दिया. और वैसे भी, अगर एक माँ, जो अपने बेटे से बेहद प्यार करती हो, वो अपने बेटे की खुशी और उसको थोड़ा आराम पहुँचाने के लिए, अगर ऐसा कुछ करती है, तो इसमे क्या बुराई है?”

“आप सही कह रही हो, मम्मी!”

“और वैसे भी मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आता है, तो तुम्हारा लंड अपने मूँह में लेना तो स्वाभाविक था. हाथ से हिलाने से अच्छा तो चूसना ही है, एंड रिज़ल्ट तो वो ही निकलना है, लेकिन अगर हम दोनो को ऐसा कर के और ज़्यादा अच्छा लग रहा हो, तो ठीक है ना?”

"हां मम्मी, आप सही कह रही हो." उनकी ये गंदी गंदी बातें मुझे और ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी.

“और वैसे भी मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आता है, तो तुम्हारा लंड अपने मूँह में लेना तो स्वाभाविक था. हाथ से हिलाने से अच्छा तो चूसना ही है, एंड रिज़ल्ट तो वो ही निकलना है, लेकिन अगर हम दोनो को ऐसा कर के और ज़्यादा अच्छा लग रहा हो, तो ठीक है ना?”

"हां मम्मी, आप सही कह रही हो." उनकी ये गंदी बातें मुझे और ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी.

वो बेड पर पीठ के बल सीधी हो कर लेट गयी, और छत की तरफ देखने लगी. “ आज कुछ देर पहले जब तुम मेरी चूत से खेल रहे थे, तो मेरे दिमाग़ में एक बात सॉफ हो गयी थी, कि मैं तुम से चुदवाना चाहती हूँ. मैं तुम्हारे मस्त मोटे लंबे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती हूँ, और वो भी अभी इसी वक़्त. क्या तुम ऐसा करोगे, बेटा? क्या तुम बिना ज़्यादा सोचे, और बिना अपना ज़्यादा दिमाग़ खराब किए हुए अपनी मम्मी को चोदोगे?”

"ओह मम्मी..." मैने उनके उपर करवट लेते हुए, उनको एक जोरदार जी भर के किस कर लिया और बोला, “मैं तो जाने आपको कब से चोदना चाहता था, लेकिन मैं तो आपको छूने से डरता था!”

 
उन्होने भी मुझे किस किया और अपने से चिपका लिया. “इसमें डरने की क्या बात है, राज. तुम मुझे कहीं भी छू सकते हो, और जो चाहे मेरे साथ कर सकते हो. लेकिन अभी, इसी वक़्त, मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत में चाहिए.” उन्होने मेरे खड़े और तने हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया, और उसके सुपाडे को अपनी गीली चूत के होंठों पर रख दिया. “क्या तुमने आज से पहले कभी किसी को चोदा है, बेटा?”

मैं अब काँपने लगा था, जैसे ही मुझे एहसास हुआ कि उनकी गीली चूत का रस मेरे लंड को भिगो कर चिकना कर रहा है. “हां, मम्मी एक दो बार किया है... लेकिन मुझे ऐसा लगता है, कि मैं ज़्यादा अच्छे से नही कर पाता.”

वो थोड़ा खिलखिलाई. “ तुम विश्वास करो, सब कुछ ठीक होगा. और हम दोनो प्रॅक्टीस करके और ज़्यादा एक्सपर्ट हो जाएँगे, हम खूब प्रॅक्टीस करेंगे. लेकिन मैं तुम को पहले की बता दूँ, मैं बहुत ज़्यादा आवाज़ें निकालती हूँ, और मैं नोचती, खंसोटती और काटती भी ज़्यादा हूँ. मैं चुदाई करवाते समय मानो पागल हो जाती हूँ. तो फिर तय्यार हो?” ऐसा कहते हुए, वो थोड़ा खिसक कर उपर हो गयी, और मेरे लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के गीले, मुलायम होंठों के बीच घुसने लगा. हम दोनो के मूँह से एक साथ, आआआह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल गयी.

"ओह, येआः!" मैं बोला. शायद बोलने की जगह मैं चीखा. "वाह, मम्मी, आप तो बहुत ज़्यादा टाइट हो... तान्या से भी ज़्यादा!"

“ये तो कुछ भी नही है,” वो बोली, “बस थोड़ी देर रूको...” उन्होने मेरी गान्ड की गोलाईयों को अपने दोनो हाथों में पकड़ कर, अपनी तरफ दबा लिया, अब मेरा पूरा 7 इंच का लंड उनकी चूत में घुस चुका था.

जैसा मैं फील कर रहा था उसको शब्दों में बयान नही किया जा सकता. वो इतनी ज़्यादा टाइट थी, कि मानो मेरा लंड किसी मुलायम, टाइट शिकंजे में जकड चुका हो. उनकी धीरे धीरे कराहने की आवाज़ अब ज़ोर की आवाज़ों में बदलने लगी थी. उनकी चूत की मसल्स को मैं अपने लंड को जकड़ते हुए महसूस कर रहा था. वो अजीब अजीद आवाज़ें निकालते हुए अपने सिर को इधर उधर करने लगी.

मुझे लगा कि मम्मी बस झड्ने ही वाली हैं, जबकि मैने तो अभी झटके लगाने शुरू भी नही किए थे.

"मम्मी, आप ठीक हो ना?" मैने पूछा.

उन्होने मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में थोड़े से आँसू से आ गये थे, और उनकी साँसें भी सामान्य नही थी. वो हान्फते हुए बोली, “हां, मैं ठीक हूँ.” उन्होने मेरी गान्ड पर ज़ोर लगाते हुए मेरे लंड को और ज़्यादा अपने अंदर घुसा लिया. “चोदो, बेटा, अब चोद दो मुझे!” मैं अब अपनी गान्ड हिलाने लगा, और धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ने लगा. “ज़ोर से बेटा !! चोद दो मुझे!!” वो अपनी गान्ड को उछाल उछाल के मेरे लंड को और ज़्यादा अंदर लेने का प्रयास करने लगी, वो मेरी स्पीड से दोगुनी स्पीड से अपनी गान्ड उछाल रही थी.

मेरे को अंदाज़ा हो गया, और मेरी भी समझ में आ गया, मैं भी उनकी चूत के द्वार पर ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा, और एक पिस्टन की तरह मेरा लंड उनकी चूत के अंदर बाहर होने लगा. मैं इस बीच उनकी चूत को अपने लंड के गिर्द खुलता और फिर से सिकुड़ता महसूस कर रहा था, और उनकी चूत से निकलते हुए लिसलिसे गीलेपन से अपने लंड को गीला होते हुए महसूस कर रहा था. मेरे लंड को ऐसा महसूस हो रहा था मानो वो किसी शिकंजे में जकड चुका है, मुझे नही मालूम था कि मैं कितनी देर अपने आप को रोक पाउन्गा, लेकिन फिर भी मैं झटके पर झटके मारे जा रहा था. मेरे माथे पर आई पसीने की बूँदें, अब मेरे चेहरे पर गिरने लगी थी.

"हां, हां!!" वो चीख रही थी. "भगवान, हे भगवान, राज, चोद दो मुझको !! राज चोद दो मुझे, अंदर तक डाल दो अपने लंड मेरी चूत में, मुझे अपनी रंडी बना ले !! भगवान, हे भगवान, आाआघ!!!" उनकी आवाज़ें अब थोड़ा स्थाई रूप ले चुकी थी, सब कुछ मिश्रित था, कराहना, चीखना, और गंदी बातें, और उनके हाथों की उंगलियों के नाख़ून मेरी पीठ में चुभ रहे थे. मुझे विश्वास नही हो रहा था कि ये औरत और कोई नही बल्कि मेरी प्यारी सग़ी माँ है ! “मेरे इन मम्मों को चूसो बेटा, आअहह, काट लो इन मम्मों को !!’

मैं अपने लंड को उनकी चूत में पेलते हुए, उनके दोनो निपल्स को चूसने और काटने लगा, कुछ देर बाद लगा, कि मैं भी अब झडने वाला हूँ.

"मम्मी ,मैं होने ही वाला हूँ." मैं जैसे ही अपना लंड उनकी चूत से बाहर खींचने ही वाला था, उन्होने मेरी गान्ड की गोलाईयों को अपने दोनो हाथों से पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया.

"ना! इसको बाहर निकालने की तो सोचना भी मत, हिम्मत भी मत करना ! मैं चाहती हूँ कि तुम मेर अंदर ही हो जाओ, मैं तुम्हारे वीर्य के पानी को अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ, मुझे इस की सख़्त ज़रूरत है !!”

उन्होने अपने दोनो पैर मेरे गिर्द जकड लिए, और मेरे लंड पर नीचे लेटे हुए ही उछल उछल कर उसको और जल्दी जल्दी अपने अंदर बाहर करने लगी, मानो मेरे लंड में से दूध निकाल रहीं हो, और मुझे अपना वीर्य छोड़ने पर मजबूर कर रही हो.

"ओके, मम्मी, ये लो... अभी इसी वक़्त... उन्नघ. आह! आह!! हे भगवान, मम्मी ! ओह!! मैं झड रहा हूँ!!" मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और उस चरम आनंद का मज़ा लेने लगा. मुझे मालूम था कि मेरा ज़्यादा पानी नही निकलेगा, लेकिन महसूस ऐसा हो रहा था, मानो मैं उनकी चूत में वीर्य के पानी की नदियाँ बहा रहा हूँ. वो अनुभूति अविश्वसनीय थी, मैं उस परम आनंद में, मानो कुछ पलों के लिए इस दुनिया में ही नही था.

"हां, बेटा, हां!!" वो चिल्लाई. “भर दो अपने लंड के पानी से अपनी मम्मी की चूत को !! तुम भी मेरे साथ ही हो जाओ, बेटा !! हे भगवान, हां, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, मैं तुम को अपने अंदर झाड़ते हुए महसूस कर रही हूँ!!!"

आख़िर में हम दोनो ही झड चुके थे. उन्होने अपनी गान्ड को मेरी तरफ उँचकाना बंद कर दिया था, और में बेसूध उनके उपर लेटा हुआ था. हम दोनो ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रहे थे, और मेरी छाती उनके पसीने से गीले हो चुके मम्मों को दबा रही थी, मैं, हम दोनो की तेज़ी से चल रही दिल की धड़कनों को सुन रहा था. मम्मी अब थोड़ा होश में आ गयी थी, और वो मुझे देख रही थी.

“ओह, राज बेटा, आइ’म सो सॉरी. मैं अपना इतना ज़्यादा होश खोने देना नही चाहती थी. तुम ठीक तो हो ना?”

“हां मम्मी, मैं ठीक हूँ.”

मुझे मालूम है, मैं कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से चीखते हुए ना जाने क्या क्या बकने लगती हूँ, मुझे होश ही नही रहता. मैने कुछ ग़लत तो नही बोला ना?”

“हां, वो सब थोड़ा अलग तरह का था... लेकिन मुझे अच्छा लगा. मुझे आप जो कुछ कर रही थी, बहुत अच्छा लग रहा था. मम्मी...... आप अच्छी वाली हो गयी ना?”

वो ठहाका मार कर हँसने लगी. मैने सोचा, शायद वो इसलिए हंस रही हैं कि शायद मैं उनकी चुदाई उतनी अच्छी नही कर पाया. मेरा चेहरा लाल हो गया, और मैं अपना लंड, उनकी चूत से बाहर निकालने लगा, लेकिन उन्होने मेरी गान्ड पर हाथों से दबाव डाल कर, मुझे अंदर ही डाले रखने का इशारा किया.

“सॉरी बेटा, मैं तुम्हारे उपर नही हंस रही हूँ. तुम ने तो मेरी कमाल की चुदाई की! तुम तो कमाल का प्यार करते हो. मैं तो इसलिए हंस रही थी, कि मैं तो पहली बार उसी टाइम झड गयी थी, जब तुमने अपने लंड मेरे अंदर घुसाया था, और जब तक तुम नही झडे, और तुमने हिलना बंद नही किया, ना जाने मैं तो कितनी बार हो गयी. मैं तो इसी तरह होती हूँ. मैं जब चुदवाती हूँ, तो मैं तब अक ना जाने कितनी ही बार हो जाती हूँ, जब तक मेरी चूत वीर्य की धार से भर ना जाए. थोड़ा अजीब है, हैं ना?”

मैने उनको किस कर लिया. “कुछ अजीब नही है मम्मी, ये तो बहुत अच्छा है. अच्छी बात ये है कि आप इतनी ज़्यादा बार हो जाती हो. मुझे ऐसा करके, और सुन कर बहुत अच्छा लग रहा है, और ये सोच कर कि मैं आप के साथ ऐसा कर रहा था.”

"मेरे इस तरह ज़ोर ज़ोर से चीखने से तुमको परेशानी तो नही हुई बेटा?”

"नही, मम्मी, मैं तो और ज़्यादा मज़ा आ रहा था. बस वो सोच के ही मेरा तो दोबारा करने का मन कर रहा है."

"तो फिर ठीक है!" उन्होने अपने हाथ को हम दोनो के बीच लाकर मेरे लंड को नीचे से अपनी मुट्ठी में भर लिया, और अपनी गान्ड हिलाने लगी. "अभी एक बार फिर से करोगे?"

"वाउ, मम्मी. और हमेशा आप मुझसे कहती रहती हो, कि मेरा कभी मन नही भरता!"

"ओह, मुझे लगता है, तुम्हारी मुन्नी बुआ सही ही कह रही थी...” ऐसा कहते हुए वो मेरी तरफ कुटिलता से मुस्कुराइ, लेकिन जैसे ही मैं लंड को अंदर बाहर करने लगा, उनकी मुस्कान, आहों और कराहों में बदलने लगी.

"लगता है मुन्नी बुआ ने आप को सब कुछ बता दिया है," मैं एक ज़ोर का झटका मारते हुए बोला.

मम्मी फिर से अपनी गान्ड उछालने लगी, और पानी छोड़ने लगी. "हां, ओह, हां राज, चोद दो मुझे, डाल दो अपना मोटा लंड मेरी चूत में !! निकाल दो अपना पानी अपनी मम्मी की चूत में, जैसे उस दिन तुमने मेरे चेहरे पर निकाला था, हे भगवान, बेटा, ज़ोर से चोदो !!”

जिंदगी बिंदास है.... बस सब किस्मत की बात है......

 
पापा के बिज़्नेस ट्रिप पर से लौटने के बाद, सब कुछ नॉर्मल चल रहा था, मेरे को और मम्मी को जब भी मौका मिलता, हम दोनो अपनी प्यास बुझा लेते. इस चीज़ का हम दोनो विशेष ख्याल रखे हुए थे कि पापा को किसी तरह से कोई भी शक ना हो जाए. पापा के सामने मम्मी मेरे साथ वैसे ही पेश आती, जैसे पहले आती थी. सुबह जब चाइ देने आती, तब भी नाइट्गाउन को ठीक तरह से पहन कर आती.

एक दिन फॅक्टरी में मेरे हाथों पर खौलता हुआ, एक केमिकल गिर गया, जिस से मेरे दोनों हाथ जल गये. मुझे मेरा स्टाफ तुरंत ही पास के नर्सिंग होम ले गया, मम्मी पापा भी जल्दी है वहाँ पर पहुँच गये. वहाँ डॉक्टर्स ने दोनो हाथों पर मेडिसिन लगा कर पट्टी बाँध दी, और बताया कि चिंता की कोई ख़ास बात नही है, बस एक या डेढ़ हफ्ते में ठीक हो जाएगा. लेकिन हर तीसरे दिन, बॅंडेज चेंज कराने के लिए, और प्रोग्रेस मॉनिटर करने के लिए नर्सिंग होम आना होगा.

“आप समझ रहे हैं ना, कि ये अब अगले कुछ दिनों बहुत सारे काम अपने आप नही कर पाएगा,” डॉक्टर ने मम्मी पापा को बताया.

“ओह… मुझे भी तब एहसास हुआ कि डॉक्टर सच बोल रहे हैं,, मैने अपने दिमाग़ में सोचा.

“कुछ ऐसे प्राइवेट काम, जैसे बाथरूम जाना, या कुछ और, उन सब कामों में इसको किसी की मदद की ज़रूरत होगी,” डॉक्टर बोले.

“ह्म्म्म. तो फिर हमको क्या करना चाहिए, डॉक्टर?”मैने पूछा.

“सीधी सी बात है, तुम को अपनी शरम अब ताक पर रखनी होगी. और वो सब काम जो तुम अपने हाथों से आसानी से कर लेते थे, अब इन बॅंडेज की वजह से नही कर पाओगे.”

मम्मी पापा की तरफ देखते हुए डॉक्टर बोला, “कुछ ऐसे काम, जैसे कि पॅंट या जीन्स का बटन लगाना, या नहाना, या सॉफ करना. मेरी तो सलाह ये ही होगी कि आप किसी नर्स को 10-15 दिनों के लिए 24 घंटों के लिए अपने घर पर रख लें.”

“हालाँकि ये आसान नही होगा, लेकिन कुछ दिनों की लिए तुम्हे शरम जैसी चीज़ को भूलना होगा,” डॉक्टर ने सलाह दी.

जब हम घर आ रहे थे, तो कार में बैठ कर हम तीनो इस बारे में बातें करने लगे. मम्मी ने बताया कि कल, यानी नेक्स्ट डे तो मम्मी और पापा दोनो, एक हफ्ते के लिए किसी बिज़्नेस मीटिंग में शिमला जा रहे थे. ऐसे में किसी अंजान नर्स को घर पर अकेले छोड़ना ठीक नही होगा. पापा भी इस बात से सहमत थे.

तभी मम्मी को याद आया, कि उनकी कज़िन सिस्टर उमा, जो कि विडो है और गाँव में रहती है, वो नर्सिंग का कोर्स कर के, गाँव के पास ही के किसी कस्बे के नर्सिंग होम में नौकरी कर रही है, क्यों ना उसे ही बुला लिया जाए. वो जान पहचान की भी है, और मम्मी पापा के जाने के बाद कोई चिंता भी नही रहेगी.

“लेकिन मम्मी मैं मौसी के सामने, नही बिल्कुल नही!!” मैं ज़ोर से बोला.

“देखो बेटा, बस कुछ दिनों की ही तो बात है, जब तक ये बॅंडेजस उतर नही जाती. मैं और तुम्हारे पापा, तुम्हारी सब हेल्प करेंगे, और मौसी भी तो अपनी ही हैं. ये तो अच्छा है तुम्हारे कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही हैं” मम्मी बोली.

“ठीक है, जैसा आपको अच्छा लगे” मैने गुस्से में बोला. “ना जाने कैसे निकलेंगे ये मेरे 10-15 दिन!”

शाम को मौसी को टॅक्सी भेजकर मम्मी ने गाँव से बुलवा लिया, और उनको सारी सिचुयेशन समझा दी.

जब मम्मी उमा मौसी को समझा रही थी तभी मैं वहाँ पर आ गया, मैने उनको बातें करते हुए सुना, “देखो उमा, राज को इन सब चीज़ों की आदत डालनी होगी,” मम्मी ने उमा मौसी को समझाते हुए कहा. “ मुझसे तो ये सब काम होते नही, नर्सों वाले, जैसे कि उसकी पॅंट नीचे करके उस से पेशाब कर्वाओ, या फिर सॉफ करो...”

“ऊह..मम्मी..मुझे टाय्लेट जाना है... “ मैं शरम से अपना चेहरा लाल करते हुए बोला.

“ओ.के.” उमा मौसी बोली, और मुझे अपने साथ टाय्लेट में ले गयी.

कुछ देर बाद, हम बाहर आकर ड्रॉयिंग हॉल में बैठ गये.

“सब ठीक रहा? मम्मी ने पूछा.

मैं कुछ बोलता उस से पहले ही उमा मौसी बोली, “शरमाता बहुत है राज, और वो भी मुझसे, मैं तुम्हारी मौसी हूँ बेटा, और मेरा तो काम भी नर्स का ही है.”

उमा मौसी के रुकने का इन्तेजाम, डॉली दीदी के रूम में कर दिया था. रात को डिन्नर करने के बाद, उमा मौसी अपने रूम में चली गयी, और मुझे बता गयी कि जब भी मुझे उनकी ज़रूरत हो, मैं उनको बुला लूँ. जब मैं अपने रूम में पहुँचा, तो मेरे पीछे पीछे मम्मी भी आ गयी. और मुझे समझाने लगी, कि मुझे उमा मौसी से शरमाने की कोई ज़रूरत नही है, किसी तरह से ये 10-15 दिन निकाल लो, फिर सब ठीक हो जाएगा. मुझे मम्मी ने 3-4 दिन तक अपने आप पर काबू रखने को कहा, जब तक की वो शिमला से लौट नही आती.

“बेटा, किसी तरह से ये एक हफ़्ता निकाल लो, फिर जब मैं लौट आउन्गि, तुम्हारी सारी ज़रूरतें पूरी कर दूँगी. उमा मौसी के साथ ठीक से पेश आना, वो मेरी रिश्तेदार भी हैं, और अगर कुछ उपर नीचे हो गया,तो रिश्तेदारों में मूँह दिखाने लायक नही रहेंगे. लेकिन तुम्हारी उमर ही ऐसी है, कि भूल होते हुए देर नही लगती. थोड़ा ध्यान रखना, बेटा. वैसे मैं उमा को भी समझा दूँगी.”

मम्मी पापा सुबह मेरे उठने से पहले ही शिमला के लिए निकल गये थे. जब मैं उठ कर नीचे आया, तो मौसी किचन में कुछ बना रही थी.

“मौसी..मुझे बाथरूम जाना है” मैं बोला.

“ओह..हां आओ बेटा.” मौसी ने स्वाभाविक सा जवाब दिया.

जब हम बाथरूम में पहुँचे तो मैं वहाँ पर खड़ा हो गया. उमा मौसी एक पल को थोड़ा सहमी, और फिर हिम्मत कर के आगे बढ़ी. उमा मौसी ने मेरे पीछे आकर मेरे शॉर्ट्स को नीचे खींच दिया, और ऐसा लगा मानो वो मेरी तरफ देख ही ना रही हो. वो मेरे सूसू करने का इंतेजार करने लगी और जब मैने सूसू कर लिया, तो उन्होने मेरे शॉर्ट्स को फिर से उपर खींच दिया.

 
“देखा, सब कुछ सही तरीके से हुआ ना, मैने कुछ देखा भी नही !!” मौसी ने थोड़ा झूठ बोलते हुए कहा. हालाँकि मुझे मालूम चल गया था कि उनकी नज़र मेरी गान्ड को प्रशन्शा भरी नज़रों से देख रही थी, लेकिन वो इस बारे में अंजान बन रही थी.

“हां, मौसी ये ठीक रहा!” मैने बाहर निकलते हुए जवाब दिया.

जब हम दोनो ने ब्रेकफास्ट कर लिया, तो मैने नहाने के बारे में पूछा.

“ओह…मौसी अब आप मुझे नहलाओगी कैसे?”

“इसमे सोचने वाली क्या बात है, तुम बस अपने अंडरवेर में बाथरूम में आ जाओ, और मैं भी गाउन पहन कर आ जाती हूँ” मौसी ने समझाते हुए कहा.

हम दोनो अपने अपने कमरे में जाकर और डोर बंद कर के कपड़े चेंज करने लगे. मैने तो सारे कपड़े उतार कर बस अपनी कमर पर एक तौलिया लपेट ली, और अपनी बॅंडेजस पर बाँधने को दो पोलिथीन की थैलियाँ ले ली.

जब मैं बाथरूम में पहुँचा, तो मैने देखा मौसी वहाँ पर एक पुरानी सी ब्रा और वाइट कलर की पैंटी पहने हुए, पहले ही वहाँ पर खड़ी हैं. उनकी पैंटी बहुत पुराने स्टाइल की थी. लेकिन वो इस सब में भी बेहद आकर्षक लग रही थी. उनकी इस उमर में भी फिगर लाजवाब था, वो दुबली पतली थी, पेट हल्का सा निकला हुआ था, उनके मम्मे भरपूर रसभरे गुदाज थे, वो लटके हुए नही थे, जैसा कि इस उमर में काई लॅडीस के साथ हो जाता है. उनकी गान्ड उनके शरीर के अनुपात में काफ़ी भारी थी लेकिन उन पर बहुत फॅब रही थी. उनके भूरे भूरे बाल उनके कानों तक आ रहे थे, बीच में एक या दो बाल सफेद भी दिखाई दे रहे थे. वो अपनी उमर के हिसाब से अब भी बेहद कमाल और चिकनी माल लग रही थी. मेरा तो एक बार को उन को इस रूप में देख कर दिमाग़ ही खराब हो गया.

“आप के गाउन का क्या हुआ?” मैने पूछा.

“ओह, मुझे लगा अब तुम्हारे सामने क्या फॉरमॅलिटी करना, तुम तो अपने ही हो,वैसे भी वो बेकार में गीला हो जाता,”वो बोली.

“चलो आप ने कुछ तो पहन रखा है” मैं उनको छेड़ता हुआ बोला.

“तुम भी अंडरवेर पहन के ठीक से नहा तो नही पाओगे, क्यों?” उन्होने पूछा.

“हां इसीलिए मैने तो बस ये तौलिया ही लपेट रखी है” मैं बोला.

“ऐसा नही है कि मैं किसी मर्द को पहली बार नंगा देख रही हूँ” मौसी मज़ाक में बोली.

“हां आप के प्रोफेशन में तो ये लगा ही रहता होगा, लेकिन जवान लड़कों के साथ ऐसा कम हो होता होगा, क्यों मौसी?” मैने पूछा.

“तुमको मालूम नही है राज, मेरे इस प्रोफेशन में मैं किन सब हालातों से गुजर चुकी हूँ, लेकिन ये दुनिया वैसी की वैसी ही है” मौसी ने थोड़ा सीरीयस और थोड़ा मज़ाक करते हुए कहा.

“मौसी” मैं नाराज़ होने की आक्टिंग करते हुए बोला.

“चलो, सीरीयस बातें छोड़ो, और अपने काम शुरू करो” मौसी बोली.

उन्होने वो दोनो पोलिथीन की थैलियाँ ली, और मेरे हाथ पर लगे बॅंडेजस पर लपेट दी, और उनको किनारे से टेप से चिपका दिया. ये बहुत अजीब लग रहा था.

“मौसी आप एक बार घूम जाओ और दूसरी तरफ देखो, जब मैं तौलिया उतार दूँगा, उसके बाद आप की तरफ पीठ कर लूँगा.”

“हां, ठीक है, ” मौसी ने कहते हुए मेरी तरफ पीठ कर ली.

जब मैने तौलिया उतार कर मौसी की तरफ अपनी पीठ कर ली , तो मैने कहा, ओके मौसी अब आप नहला दो. मौसी ने जैसे ही मेरी तरफ देखा, वो मुझे नंगा खड़ा देख खिलखिला कर हँसने लगी. फिर वो अपने हाथों में साबुन मलने लगी, उनकी नज़र अब भी मेरी मस्त चिकनी गान्ड की गोलाईयों पर थी.

मौसी जल्दी ही मेरी बाहों और कंधों पर साबुन मलने लगी. बीच बीच में वो थोड़ा रुक जाती. फिर उन्होने मेरे बालों और पैरों पर साबुन लगाया, और फिर मेरी छाती पर. आख़िर में उन्होने मेरी गान्ड पर साबुन लगाने के लिए हल्के से गान्ड की दरार में हाथ घुसाया. ऐसा लगा जैसे वो भी इस काम को करने से थोड़ा घबरा रही हो. वो मेरी गान्ड को सॉफ तो करना चाहती थी, लेकिन समझ नही पाआ रही थी, की कहाँ से शुरू करूँ.

“उः..बेटा…अब सब जगह साबुन लगा दिया है... बस उन प्राइवेट पार्ट्स को छोड़ कर” वो बोली

“ओह, मौसी! ठीक है, आप उनको रहने ही दो?” मैं भी थोड़ा घवराते हुए बोला.

“हां, लेकिन उन पार्ट्स की सफाई भी तो ज़रूरी है!” वो बोली

“उनको हम बस पानी से ही क्यों ना सॉफ कर लें?” मैने आशा भरे लहजे में कहा.

“लेकिन सिर्फ़ पानी से तो सॉफ नही हो पाएँगे, तुम ये तो नही चाहते कि तुम को इन्फेक्षन हो, क्या ऐसा चाहते हो?” उन्होने पूछा.

“नही, मौसी हरगिज़ नही” मैं थोड़ा झिझकते हुए जवाब दिया.

“मैं जितना जल्दी हो उतना जल्दी ये सब कर दूँगी.” मौसी भरोसा दिलाते हुए बोली.

 
दोस्तो मैं काफ़ी दिनों से देख रहा हूँ हमारे पाठक फिर से हौंसलाअफजाई करना भूलते जा रहे हैं दोस्तो एक अच्छा पाठक वही होता है जो लेखक की मेहनत के फलस्वरूप दो शब्द लेखक या कहानी के लिए लिख दे . पर ज़्यादातर पाठक तो बस कहानी पढ़ते हैं ...............................

 
मौसी ने फिर से साबुन अपने हाथ में लिया, और घूम कर मेरे टट्टों पर साबुन लगाते हुए उपर की तरफ बढ़ने लगी. दोनो टाँगों के बीच के हिस्से पर वो जल्दी जल्दी साबुन लगाने लगी, बिना ज़्यादा देर किसी भी एक हिस्से पर रुके हुए.

और फिर वो ही हुआ, जो नही होना चाहिए था, जैसे ही मौसी ने मेरे लंड पर हाथ लगाया, वो फूँकार मार का खड़ा होना शुरू हो गया, और पूरी तरह खड़ा होकर, मौसी के हाथों में आ गया. उन्होने जल्दी से मेरे खड़े हो चुके लंड पर उपर से नीचे तक साबुन लगाया, और फिर अपने हाथ को दूर हटा लिया.

“उः…चलो अब पानी से धो लो” मौसी ने किसी तरह बोला.

“मौसी..” मैने बोलना शुरू किया “आइ’म सॉरी! मुझे इसी बात का ही डर था!”

“ठीक है बेटा” मौसी बोली, उनकी आवाज़ में कंपन्न था. “ये सब तो बिल्कुल नॉर्मल है”

“हां, लेकिन आप के साथ नही!” मैने अपनी ग़लती मानते हुए कहा.

“लेकिन, ये उन बातों को नही समझता!” मौसी ने मज़ाक करते हुए कहा.

“मुझे बहुत शरम आ रही है!” मैं बोला “मैं तो चाहता था क़ी ये उसी समय बैठ जाए!”

“बेटा, ठीक है.” मौसी बोली और फिर पूछा, “तुमको दर्द तो नही हो रहा?”

“नही, ऐसा कुछ नही है. मैं चाह कर भी इस के बारे में कुछ नही कर सकता” मैं अपने दोनो हाथों पर बँधी बॅंडेज को दिखाते हुए बोला.

“ओह!” वो मेरी बातों का मतलब समझते हुए बोली. “मैने तो इस बारे में सोचा ही नही था. क्या तुम वो अकसर वो करते हो?”

“मौसी!!” मैने थोड़ा तेज आवाज़ में कहा. “आप भी मौसी हद करती हो... लेकिन जब भी मुझे ज़रूरत होगी... मैं अपने आप कर लूँगा..”

“ठीक है, बेटा…उह्म…लेकिन क्या तुमने सोचा है... कि तुम वो कैसे करोगे?” मौसी ने चिंता करते हुए पूछा.

“नही, सच बताऊं तो सोचा तो नही है,” मैं थोड़ा झिझकते हुए बोला. “मैं कोशिश करूँगा कि मैं एग्ज़ाइटेड ना होऊ.”

“चलो... अब तौलिया से पोंछ देती हूँ” मौसी ने टॉपिक चेंज करते हुए कहा.

मौसी जब मुझे तौलिया से पोछ रही थी, तो मैने देखा कि उनकी ब्रा और पैंटी भी भीग चुकी है, और भीगने के बाद उनका कपड़ा सेमी ट्रॅन्स्परेंट हो गया है, मौसी ने जब मुझे इस तरह देखते हुए पाया, तो झट से उन्होने मुझे एक तौलिया अपने उपर लपेटने को दी, और वो गीली तौलिया जिस से मुझको वो पोछ रही थी, उसको अपनी छाती के उपर लपेट लिया.

मैने तुरंत अपने उपर उस तौलिया को लपेट लिया, और बॅंडेज बँधे हाथों से ही उसको किसी तरह खोंस कर स्थिर कर लिया. मौसी ने फिर से अपनी गीली तौलिया से मेरे उन हिस्सों को पोछना जारी रखा, जो अभी तक गीले थे, लेकिन मौसी मेरे लंड से दूरी बनाए रखे हुए थी. जैसे ही वो मेरी जांघों को पोंछने के लिए आगे बढ़ी, उनकी समझ में आ गया, कि मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ है.

मैं अपने रूम में पहुँच गया, मौसी मेरे पहनने वाले कपड़े लेकर मेरे पीछे पीछे आ गयी, मेरे रूम में आते ही उनके सामने में आ गया, कि मैं उन कपड़ों को अपने आप पहनने की स्थिति में नही हूँ, और मुझे उनकी हेल्प की ज़रूरत होगी. मैने मौसी की तरफ पीठ फेरते हुए, उस तौलिया को गिरा दिया, और मौसी ने आगे बढ़ते हुए, मेरे शॉर्ट्स में मेरे दोनो पैरों को घुसाने में मदद करते हुए, उसको पहना कर उपर खीच दिया. हालाँकि, उपर खींचते समय, शॉर्ट्स मेरेखड़े हुए लंड से थोड़ा टकराया.

“एहमम!” मेरे मूँह से आवाज़ निकल गयी, जब शॉर्ट्स मेरे तने हुए लंड को छूते हुए अपनी सही जगह पर फिट हुआ.

मुझे लगा मौसी भी थोड़ा सॉरी फील कर रही थी, लेकिन वो भी ज़्यादा कुछ नही कर सकती थी.

मौसी मेरे रूम से तुरंत बाहर निकल गयी.... और मैं उनको जाते हुए देखता रहा....

उस रात हम दोनो डिन्नर कर के अपने अपने रूम में सोने चले गये. जब मैं टाय्लेट जाने के लिए बाहर निकाला, तो मैने मौसी को मोबाइल पर किसी से बात करते हुए सुना, शायद वो मेरी मम्मी से बात कर रही थी. मौसी मम्मी को नहाते हुए जो कुछ हुआ था, वो सब बता रही थी. मैं दरवाजे से कान लगाकर, उनकी बातें सुनने लगा, मम्मी की आवाज़ उतना सॉफ तो नही सुनाई दे रही थी, लेकिन फिर भी मैं अंदाज़ा लगा रहा था, वो क्या कह रही हैं.

मम्मी: अर्रे उमा, ये सब तो जवान लड़कों के साथ होता ही है, लड़कों के हॉर्मोन्स इसी उमर में तो पूरे जोश में होते हैं, उनका तो बस किसी भी बहाने से खड़ा हो जाता है.

उमा मौसी: हां दीदी, वो तो मैं समझती हूँ, लेकिन राज के हाथों पर बॅंडेज बँधे होने के कारण, वो अपने आप कैसे हल्का हो, मैं तो ये ही सोच रही थी.

मम्मी: बस थोड़े दिनों की ही तो बात है, कर लेगा किसी तरह अपने आप पर काबू

उमा मौसी: दीदी, क्या मैं उसकी किसी तरह से मदद नही कर सकती?

मम्मी: लेकिन किस तरह से?

उमा मौसी: जैसे कि मैं उसकी उस जगह पर सफाई ही ना करूँ

मम्मी: नहीं, ऐसा करना तो सही नही होगा, उसका हाथ से हिलाकर पानी निकालने के अलावा और कोई सल्यूशन नही है, लेकिन ऐसा करना भी तुम्हारे लिए सही नही होगा

मम्मी: चलो अब सो जाओ, गुड नाइट, बाकी कल सुबह बातें करेंगे

 
अगली सुबह, सब कुछ ठीक से हुआ, मौसी ने मुझे टाय्लेट यूज़ करने में हेल्प किया, फिर हम दोनो ने ब्रेकफास्ट किया. 10 बजे के करीब, जब मैने मौसी से मुझे नहलाने के लिए कहा, तो मौसी के चेहरे पर एक अलग तरह के भाव आ गये.

मौसी ने बीते हुए कल की तरह ही बाथरूम में जाके मुझे नहलाना शुरू किया, सब जगह साबुन लगाने के बाद, बस अब वो लंड और टट्टों वाली जगह ही साबुन से सॉफ करने के लिए बची थी. जैसे ही मौसी ने हाथों में साबुन मलकर, उस जगह हाथ लगाया, मेरे शरीर में एक अलग तरह की हरकत होने लगी. मौसी इसको जल्द से जल्द ख़तम करना चाहती थी, लेकिन जैसे ही मौसी ने मेरी जाँघ के अन्द्रुनि हिस्से पर हाथ लगाया, मेरा लंड खड़ा होने लगा ! मौसी ने फिर जल्दी से सारे हिस्से पर साबुन मल दिया, और जल्दी से लंड की लंबाई पर अपना साबुन से सना हुआ हाथ फिरा दिया.

“उहह!” मेरे मूँह से अपने आप आवाज़ निकल गयी.

“तुम ठीक हो राज?” मौसी ने पूछा.

“हां” मैं किसी तरह बोला. “लेकिन... इसको हिलाकर हल्का नही हो पा रहा हूँ, बस ये ही प्राब्लम है.” पता नही ये मेरे हाथ कब ठीक होंगे.

“लगता है मेरे बेटे को किसी की नज़र लग गयी, इतनी छोटी सी उमर में इतना अच्छा बिज़्नेस कर रहा है. आजकल लोग दूसरों से बहुत जलते हैं, उनसे देखा नही जाता, कोई दूसरा उनसे ज़्यादा तरक्की कैसे कर रहा है. खुद से तो मेहनत होती नही, और खुद तो कभी कुछ कर नही पाए अपनी जिंदगी में, पर दूसरों को देख कर जलते रहते हैं, ऐसे ही किसी नामुराद की नज़र लगी होगी. तू चिंता मत कर जल्दी ही ठीक हो जाएगा, उपर वाला ऐसे कलमूहों को अपने आप सबक सिखा देता है, ऐसे हरामियों के कभी औलाद नही होती,” मौसी मुझे समझाते हुए बोली.

“हां, अब तुम तय्यार होकर, अपने बेड पर लेट कर आराम करो, सब ठीक हो जाएगा.” मौसी ने फिर से मुझे समझाते हुए कहा.

“ऐसा करने से कुछ नही होगा मौसी, जब तक इन गोलियों में से पानी नही निकलेगा, ये ऐसे ही मुझे परेशान करेंगी, आप को तो इस सब के बारे में मालूम ही होगा?” मैं बोला.

“हां मुझे मालूम है, मैने इस के बारे में पढ़ा भी है, और देखा भी है...” मौसी ने थोड़ा रुकते हुए बोला, वो शायद मेरी सिचुयेशन समझ रही थी.

“बस, आप सही समझ रही हो मौसी” मैं बोला.

“ओह. बेटा ! आइ’म सो सॉरी. बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ?” मौसी ने पूछा.

“मुझे तो कुछ समझ में नही आता” मैं बोला. “आप ऐसा कुछ भी मत करो, जो आपको लगता हो कि आपको नही करना चाहिए.”

मेरे शब्द मौसी के दिल को छू गये, और वो थोड़ा सोच में पड़ गयी.

“ठीक है, बेटा..अम…लेकिन ये बड़ी विचित्र परिस्थिति है.” मौसी ने आगे बोलते हुए कहा “क्या मैं तुम्हारे वहाँ पर उपर नीचे कर के साबुन लगा दूं, जब तक तुम्हारा पानी नाही निकल जाता, और तुमको आराम नही मिल जाता?”

मौसी कुछ पलों के लिए खामोश हो गयी, शायद उनको अपने आप पर विश्वास नही हो रहा था, कि वो क्या कुछ बोल गयी थी, लेकिन वो मुझे परेशान होते हुए नही देखना चाहती थी.

“आप वो ही कह रही हो ना मौसी, जो कुछ मैं सुन रहा हूँ?” मैने पूछा, मेरी पीठ अभी भी मौसी की तरफ थी.

“हां” मौसी ने बात को वहीं पर ख़तम करने के अंदाज में बोला.

“मैं…मैं चाहकर भी नही कह पा रहा हूँ, कि इस की कोई ज़रूरत नही है... लेकिन...” मैने कुछ बोलना चाहा

“ष्ह्ह्ह्ह्ह!” करते हुए मौसी ने मुझे चुप करा दिया, और अपने हाथों में साबुन मलने लगी.

मौसी ने मेरे लंड को फिर से अपने साबुन से सने हाथों से पकड़ लिया, और उसे पूरी लंबाई तक उपर नीचे कर के सहलाने लगी, इस तरह करने से इतना घर्षण ज़रूर पैदा हो रहा था, जो मेरे लिए काफ़ी था.

मौसी के इस तरह हल्के से छूने की वजह से मेरे मूँह से अपने आप आवाज़ निकल गयी “ओह”.

जल्दी ही मेरी कमर भी हिलने लगी, और मेरा लंड मौसी के हाथों में आगे पीछे होने लग्गा, तभी मेरी गान्ड भी सिंकूड गयी, और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकल के बाथरूम की दीवार पर लगी टाइल्स पर गिर गयी. मौसी अब भी अपना हाथ आगे पीछे कर रही थी, वो ऐसा जब तक करती रही, जब तक मैं शांत नही हो गया, और मेरी कमर ने हिलना बंद नही कर दिया.

“अब ठीक है?” मौसी ने मेरे लंड पर से अपना हाथ हटाते हुए पूछा.

“हां…पहले से बेहतर है” मैने साँस लेते हुए बोला.

फिर हम दोनो ने बिना कुछ ज़्यादा बात किए, और तौलिया से पोछने के बाद, कपड़े पहन कर हम दोनो बाहर आ गये. इस बार शॉर्ट्स पहनाते समय, किसी तरह की कोई परेशानी नही हुई.

उस सारे दिन मेरा मूड बहुत अच्छा रहा, और मैने और मौसी ने ढेर सारी बातें की, मैने उनकी किचन में बहुत हेल्प भी की. मौसी को भी मेरी हेल्प करके अच्छा फील हो रहा था.

बातों बातों में मौसी बोली, “राज इसके बारे में किसी को कुछ मत बताना, ख़ास तौर पर अपनी मम्मी को, नही तो ना जाने वो क्या सोचेंगी.”

“आप बेफिकर रहें मौसी, ये बात बस हम दोनो के बीच ही रहेगी, किसी को कुछ पता नही चलेगा,” मैं मौसी को भरोसा दिलाते हुए बोला.

“और वैसे भी, मैने तो बस तुम्हारी हेल्प करने के लिए ये सब किया है, कौन सा हम ये सब रोजाना करने वाले हैं,” मौसी बोली.

मेरे मन में बहुत कुछ आया, लेकिन मैं कुछ भी नही बोला, बस मुस्कुरा कर रह गया.

अगले दिन, सुबह ब्रेकफास्ट करने के बाद मैने मौसी से मुझे नहलाने के लिए बोला क्यूंकी दोपहर में मेरे कुछ फ्रेंड्स आने वाले थे. मौसी ने कहा, “तुम चलो, मैं अभी आती हूँ.”

 
मैं जब बाथरूम में अपने कपड़े उतार रहा था, तो मुझे लगा कि मेरी गले की नस चढ़ गयी है. मुझे अपनी गर्दन घुमाने में दर्द महसूस होने लगा.

तब तक मौसी भी बाथरूम में आ चुकी थी, उन्होने मुझे उस अवस्था में देखा तो पूछा, “क्या हुआ, कोई परेशानी है क्या, मैं कुछ हेल्प करूँ?”

“लगता है, कपड़े उतारते समय, मेरी गर्दन की नस चढ़ गयी है, आल नहलाते हुए वहाँ थोड़ी मालिश कर देना, ठीक हो जाएगी,” मैं बोला.

“हां हां क्यों नही,” मौसी ने बाथरूम में अंदर घुसते हुए बोला.

जैसे ही मौसी ने मेरी पीठ और गर्दन की मालिश करनी शुरू की, उनके मूँह से आहह की आवाज़ आई. मैने पूछा, “क्या हुआ मौसी?”

“कुछ नही, बस ये ब्रा गीला होने के बाद थोड़ा चुभ रही है,” मौसी समझाते हुए बोली.

“आप इसको उतार क्यों नही देती?” मैने पूछा.

“क्या कहा??” मौसी ने पूछा, मानो वो मुझे ठीक से सुन नही पाई हो.

“उसको उतार दो ना. मैं नही देखूँगा, वैसे भी मेरी पीठ आपकी तरफ है,” मैं बोला.

“उः, समझ नही आता, क्या करूँ” मौसी ने जवाब दिया, लेकिन उनकी बात से लगा कि वो मेरे सुझाव से सहमत हैं.

“ओह अब उतार भी दो, मैं सही में पीछे मुड़कर नही देखूँगा,” मैने कहा.

मौसी ने एक पल सोचा, और फिर अपने आप को थोड़ा राहत महसूस करवाने के लिए, अपनी ब्रा का हुक अपने दोनो हाथ पीछे ले जाकर खोल दिया, और अपने कंधों से झटक दी, झटकने के कारण वो नीचे आकर उनके हाथों में आ गयी, मौसी ने उसे अपने हाथों से उसे बाथरूम के डोर से बाहर फेंक दिया, और एक राहत की साँस ली.

मौसी ने मुझे नहलाना और मालिश करना जारी रखा, और इस बीच उनके मम्मों के निपल्स मेरी पीठ पर बीच बीच में छूने लगे. मुझे इस बात का आभास हुआ कि मौसी के निपल्स धीरे धीर सख़्त होते जा रहे हैं. शायद मैं और मौसी दोनो इस मौके का पूरा फ़ायदा उठा रहे थे. लेकिन मैं इस बारे में कुछ भी प्रतिक्रिया नही दे रहा था.

मौसी अब बस मेरे को जल्दी से जल्दी नहलाने पर ध्यान दे रही थी.

जैसे ही मौसी ने मेरे पैरों के उपर साबुन लगाना शुरू किया, उनका ध्यान मेरे खड़े होकर फूँकार मारते हुए लंड पर गया. एक जवान लड़के की ज़रूरतों को शायद वो भी समझ रही थी. मौसी ने मेरी गान्ड को सॉफ करने के बाद, एक बार फिर से मेरे पैरों की तरफ हाथ बढ़ाया.और अपने दोनो हाथों में साबुन मलने लगी. फिर एक बार अपनी साँस रोक कर उन्होने जल्दी जल्दी मेरे लंड और टट्टों पर साबुन लगाने के लिए अपने हाथों को आपस में मलने लगी.

“व्हुूहह” मौसी के हाथ का स्पर्श पाते ही मेरे मूँह से अपने आप आवाज़ निकल गयी.

मौसी ने तुरंत वहाँ से हाथ हटाकर मुझे अपने आपको पानी से धोने के लिए कहा.

“उः, मौसी?” मेरे मूँह से अपने आप आवाज़ निकल गयी

“हां बेटा?” मौसी ने जवाब दिया, शायद वो भी नर्वस थी, ये सोचकर कि मुझे किस चीज़ की ज़रूरत है.

“उः, मौसी... प्लीज़ एक बार और कर दो ना?” मैने पूछा.

मौसी मेरी सिचुयेशन समझ रही थी, और ये भी समझ रही थी, कि मैं फिर से वो ही चाहता हूँ, जो उन्होने कल किया था.

“क्या सचमुच तुमको ज़रूरत है?” मौसी ने पूछा. “मैने तो सोचा कुछ दिन अब तुम शांत रहोगे.”

“ऐसा नही है मौसी” मैने जवाब देते हुए कहा, “मुझे तो हर रोज इस की ज़रूरत पड़ती है.”

“ओह” मौसी बोली, और बिना किसी बनावट के बोली, “तो फिर मुझे लगता है...ठीक है.”

मौसी ने फिर से अपने हाथों में साबुन मला, और मेरे खड़े हुए लंड को पकड़ लिया. जैसे जैसे वो अपना हाथ मेरे लंड की लंबाई पर चला रही थी, और शायद कोशिश कर रही थी, कि मेरा पानी जल्दी से जल्दी निकल जाए. मौसी अपने दिमाग़ में कुछ और सोचते हुए, और शायद बिना कुछ सोचे, मेरे लंड को हिलाए जा रही थी.

“ओह!” मेरे मूँह से आवाज़ निकली और मेरा लंड झटका मारकर मौसी के हाथों में फैल कर मोटा होने लगा.

और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकलकर बाथरूम की दीवार की टाइल्स पर जा गिरी, मौसी ने अब लंड को हिलाना बंद कर दिया, और मेरे लंड को हाथ में थोड़ा और ज़ोर से पकड़कर, मेरे शांत होने का इंतेजार करने लगी.

फिर मौसी ने अपना हाथ हटाकर अपने हाथों को धोया, और बोली, “तुम यहीं पर रूको, मैं कपड़े पहन कर आती हूँ.” जैसे ही मैने अपने उपर टवल लपेटी, मैं बोला, “ठीक है मौसी.” मैं कल से थोड़ा ज़्यादा बेशरम होकर बाथरूम से बाहर निकला. मैने मौसी से अपने आप को बिना किसी शरम के तौलिया से पुछवाया. जैसे ही कपड़े पहनाने की बारी आई, मौसी की नज़र फिर से मेरे आधे खड़े लंड पर जा टिकी. मौसी ने तुरंत मेरा शॉर्ट उपर किया, और मैं वहाँ से चला गया. जैसे ही मैने थोड़ा पीछे घूमकर देखा, मौसी अपनी तौलिया हटाकर अपने हार्ड हो चुके निपल्स को देख कर ज़ोर ज़ोर से साँसें भर रही थी.....

 
उस दिन दोपहर में मेरे कुछ दोस्त घर पर मुझसे मिलने आए, हमने टीवी देखा और बातें की, मौसी जब किचन में हमारे लिए खाना बना रही थी. मैं जब मौसी से किसी प्रकार की हेल्प करने के लिए पूछने के लिए किचन में पहुँचा, तो मैने देखा, मौसी मेरी मम्मी से मोबाइल पर बात कर रही थी. मैं वहीं पर खड़ा होकर उनकी बातें सुनने लगा. मम्मी ने बताया कि हो सकता है उनको लौटने में थोड़े दिन और लग जायें, वो मौसी से रुकने की रिक्वेस्ट कर रही थी, और मेरे बारे में पूछ रही थी.

“राज को नहलाने में अब तो कोई दिक्कत नही हो रही?” मम्मी ने पूछा.

“ओह... नही दीदी,” सब ठीक चल रहा है, और वो हमारे बीच जो चल रहा था, उस को छिपा गयी.

अगले दिन सुबह 9 बजे, मैं और मौसी जब डॉक्टर के पास गये, तो डॉक्टर ने मेरे हाथों को एग्ज़ॅमिन करने के बाद, रिकवरी की प्रोग्रेस पर संतोष जताया, और मेरी बॅंडेजस छोटी कर दी, और एक दो दिन में पूरी तरह खोलने के बारे में बताया.

इस बार जो बॅंडेज बाँधी उसमे मेरी उंगलियाँ खुली हुई थी. मौसी मेरी उंगलियाँ खुली देख खुश हो गयी, और शायद सोचने लगी कि अब मैं अपने आप नहा सकूँगा.

लौट कर उमा मौसी किचन में ब्रेकफास्ट बनाने लगी, और फिर हम दोनो जब डाइनिंग टेबल पर बैठ कर शांति से ब्रेकफास्ट खा रहे थे, और एक दूसरे की तरफ देख भी नही रहे थे. ब्रेकफास्ट करने के बाद मैं अपने रूम में चला गया.

करीब एक घंटे जब मैं अपने रूम से निकला, तो मैने बस शॉर्ट ही पहना हुआ था, और मेरे हाथों में तौलिया थी.

मौसी ने जब मुझे ऐसे देखा, तो मानो एक बार को चौंक गयी, और शायद समझ गयी कि मुझे क्या चाहिए.

“उः…मौसी… मुझे नहला दो ना प्लीज़, फिर मैं अपने दोस्त के घर जाउन्गा,” मैने मौसी की मनुहार करते हुए कहा.

“हां... बेटा, अभी चेंज करके नहलाती हूँ, तुम बाथरूम में चलो...” मौसी बोली.

कुछ देर बाद मैं शवर चालू करके, मौसी का बाथरूम में वेट करने लगा, मौसी थोड़ी देर बाद सिर्फ़ वाइट कलर की चड्डी पहने मुझे नहलाने के लिए बाथरूम में दाखिल हुई. वो आज थोड़ा घबरा रही थी, अंदर घुसते समय उन्होने एक गहरी लंबी साँस ली. मेरी पीठ मौसी की तरफ थी, और मैं अपना चेहरा उपर कर के शवर के पानी को अपने चेहरे पर गिरने दे रहा था, मुझे एहसास हुआ कि मौसी मेरी गान्ड को निहार रही है, जैसे ही मैने गर्दन घुमा कर देखा, मौसी दूसरी तरफ देखने लगी.

मौसी ने अपने हाथों में साबुन मलना शुरू कर दिया, और मैं उनको ऐसे करता देखने लगा. जैसे ही मौसी ने मुझे साबुन लगाने के लिए मेरी बाहों को छुआ, मेरा शरीर में कुछ कुछ होने लगा, और वो अकड़ने लगा. मौसी जल्दी जल्दी मेरी बाहों और छाती पर साबुन मलने लगी, मौसी के हाथ भी थोड़ा काँप रहे थे, और उनकी साँसें भी उखड़ने लगी थी. मौसी ने मेरी पीठ और फिर टाँगों पर साबुन लगाते हुए, उपर आते हुए मेरी गान्ड पर भी साबुन लगा दिया.

“उः…राज... अब घूम जाओ और अपनी पीठ को धो लो,” मौसी बोली.

जैसे ही मैं मौसी की तरफ घूमा, मेरा खड़ा हुआ लंड मौसी के पेट से जा टकराया. मेरे लंड के छूते ही मौसी थोड़ा अचकचाई. मैं अपनी पीठ पर लगे साबुन को शवर के पानी से धो रहा था, ऐसे करते हुए कई बार मेरी छाती मौसी के मम्मों को छू जाती, और उनके निपल्स मेरी छाती से दब जाते, मौसी मेरे खड़े लंड के दबाव को अपने पेट पर महसूस कर रही थी.

मौसी के निपल्स अब कड़े होने लगे थे, और उनको कुछ समझ में नही आ रहा था. मैं मौसी के मस्त मम्मों को निहार रहा था. फिर मैने अपने हाथ बढ़ा कर हल्के से उनके दोनो मम्मों को छूआ, और निपल्स के उपर अपनी उंगली गोल गोल घुमाने लगा.

“रुक जाओ, राज,” मौसी धीरे से बोली, उनकी साँसें उखड़ रही थी, और उन्होने अपने हाथ, मेरे हाथों के उपर रख दिए.

मैने मौसी की आँखों में आँखे डाल कर देखा, मेरी आँखों में हवस भरी हुई थी. और फिर थोड़ा आगे बढ़कर और थोड़ा झुक कर मौसी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मौसी थोड़ा कसमासाई, और अपने उपर काबू करने का प्रयास करने लगी. मैने उन्हे प्यार से चूमा, और उनके गुलाबी होंठो पर अपने होंठ फिराने लगा, और उनके और थोड़ा पास आ गया. मौसी की चल रही तेज साँसों को मैं अपनी छाती पर महसूस कर रहा था, मैने मौसी को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा, ऐसे करने से मेरा लंड ने उनके पेट पर एक घिस्सा मार गया.

मौसी का शरीर अब वासना के तूफान में बहकर, जवाब देने लगा था, और वो भी वासना के दलदल में फँसती जा रही थी. उनके दिमाग़ में जो अंतर्द्वंद चल रहा था, उसके बावजूद वो मेरी किस का जवाब देते हुए, अपने होंठों का दबाव मेरे होंठों पर बढ़ाने लगी थी. मैने उनकी कमर को जकड़ते हुए, उनको और ज़ोर से चूमना शुरू कर दिया, मेरी जीभ मौसी के होंठों के उपर हरकत कर रही थी, और मौसी ने बिना को विरोध किए, अपने दोनो होंठों को खोल दिया, जिस से मेरी जीभ अब अंदर घुस कर, मौसी की जीभ से अठखेलियाँ करने लगी, हम दोनो के मूँह आपस में बेतहाशा चिपके हुए थे.

मौसी ने अब विरोध करना बिल्कुल बंद कर दिया था, और वो पूरी तरह वासना की गिरफ़्त में आ चुकी थी. उन्होने अपनी बाँहें मेरी कंधे पर डाल दी, और मुझे ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी, और अपने होंठों को मेरे होंठों पर घिसने लगी. हमारे भीगे हुए शरीर एक दूसरे से चिपके हुए थे, और हम एक दूसरे को बेतहाशा चूमे जा रहे थे, पूरे बाथरूम में हमारी वासना भरी आवाज़ें गूँज रही थी.

मैं और मौसी दोनो ही वासना की एक ऐसी लहर में बहते जा रहे थे, जिसका अनुभव हमने पहले कभी नही किया था. मेरे शरीर की हर एक नस में आग लगी हुई थी, और मैं मौसी को इस तरह से किस किए जा रहा था, जिस से उनका अपने उपर से नियंत्रण समाप्त हो चुका था. मौसी की चूत में भी आग लग चुकी थी, और वो पनियाने लगी थी.

 
मेरे हाथ मौसी की पीठ को सहला रहे थे, और मेरा खड़ा हुआ लंड मौसी के पेट पर दस्तक मार रहा था. मेरे हाथ उनकी पीठ को सहलाते हुए, उनकी पैंटी तक जा पहुँचे, और उसके अंदर घुस कर, उनकी गोलाईयों पर जम गये. मेरी उंगलियाँ उनकी गान्ड की गोलाईयों को दबाने लगी, उनको मसलने लगी, और हल्के हल्के अपनी तरफ खींचने लगी. मेरा फन्फनाता हुआ लंड, मानो मौसी के पेट में छेद करने को तय्यार था, और ज़ोर ज़ोर से उस से टकरा रहा था. मौसी ने स्वतः ही अपना सीधा पैर उठा कर मेरे पाएर के गिर्द लपेट लिया, और मेरा लंड अब पैंटी के उपर से ही उनकी चूत के सीधे संपर्क में आ गया.

जैसे ही मेरे लंड ने उनकी चूत के बाहरी होंठों को पैंटी के उपर से छुआ, मौसी के निचले शरीर में मानो करेंट दौड़ गया. और वो लंड के उपर अपने आप को घिसने लगी, और उनका पूरा ध्यान, अब निचले हिस्से पर केंद्रित हो गया. जैसे ही मैने मौसी की पैंटी में उंगलियाँ फँसा कर उसको नीचे खिसकाया, मौसी ने अपना पैर सीधा कर लिया, जिस से पैंटी आसानी से नीचे उतर सके, मैने पैंटी को थोड़ा और नीचे किया, उसके बाद वो अपने आप नीचे गिर पड़ी. हम दोनो ये बात जानते थे कि जो कुछ भी हम कर रहे हैं, वो ग़लत है, लेकिन वासना ने सही ग़लत सोचने की शक्ति को समाप्त कर दिया था. जैसे ही पैंटी के ज़मीन पर गिरने की आवाज़ आई, हम दोनो के शरीर के निचले भाग फिर एक दूसरे से चिपक गये. मेरे लंड का मौसी की चूत को छूने का एहसास, मेरे लंड को फऩफनाने पर मजबूर कर रहा था, और मौसी की चूत पानी छोड़ कर गीली हुए जा रही थी, हम दोनो के शरीरों में आग लगी हुई थी.

हम दोनो अब भी किस कर रहे हे, एक बार फिर से मौसी ने अपना दायां पैर उठा कर मेरे उपर लपेट लिया. और मेरे फन्फनाते हुए लंड को अपने हाथ से पकड़ते हुए, मौसी ने उसे अपनी पनिया रही गीली चूत के मुहाने पर रख दिया. एक बार को मौसी के हाथ काँप गये, जैसे ही मेरे लंड ने उनकी चूत की गीली फांकों को अलग अलग किया, और अंदर घुसने का प्रयास किया. हम दोनो वासना के इस खेल में अंधे हो चुके थे, और अपने शरीर में लगी आग को भुजाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तयार थे. मौसी ने फिर से मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर फिट किया, और मेरे लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के द्वार को चीरता हुआ सुरंग में अंदर घुस गया.

तभी मैने मौसी के चुतड़ों को ज़ोर से दबाते हुए उनको अपनी तरफ खींचा, जिस से मेरा लंड उनकी चूत की और ज़्यादा गहराई तक अंदर घुस गया, और मौसी की चूत की दीवार को जब तक चौड़ाता रहा, जब तक कि पूरा अंदर नही घुस गया, मेरी टट्टों की गोलियाँ मौसी की गान्ड को चुने लगी. मैं मौसी की चूत को अपने लंड पर सिंकूड़ता और फैलता हुआ महसूस कर रहा था, हम दोनो को चुदाई का असली मज़ा आ रहा था.

जिस तरह की पोज़िशन में हम दोनो थे, उस स्थिति में ज़्यादा हिलना डुलना संभव नही था, और यदि कुछ करते भी, तो गिरने या चोट लगने का ख़तरा बहुत ज़्यादा था. मौसी ने अपना दूसरा पैर भी उठा लिया और मेरे गिर्द लपेट लिया, और अपने आप को ज़मीन से उपर उठा लिया. मैने पीछे होकर दीवार का सहारा लिया, और मौसी की चूत में अपने लंड से ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. हालाँकि मैं मौसी की चूत में ज़्यादा अच्छे से घिस्से नही मार पा रहा था, लेकिन फिर भी बस ये ही सोच कर कि हम दोनो जो कर रहे हैं वो ग़लत काम है, हम दोनो बेहद उत्तेजित हो चुके थे, और मौसी बस झड्ने ही वाली थी. मौसी ने अपनी चूत को मेरे लंड के उपर घिसा, और चूत की दीवार पर मेरे लंड को घिसते हुए महसूस करने लगी. मैने किस को तोड़ते हुए, थोड़ा नीचे झुक कर मौसी की मम्मों के निपल्स को चूसना शुरू किया.

मौसी की चूत का दाना मेरे लंड के सुपाडे पर पर घिस रहा था, इस की वजह से मौसी उत्तेजना की नयी उँचाइयों पर पहुँचती जा रही थी. जैसे ही मौसी की चूत ने झड्ते हुए पानी की धार छोड़ी, सारा बाथरूम उनकी आहों से गूँज उठा. मौसी का शरीर अकड़ गया, और वो निढाल होकर मुझसे चिपक गयी.

“ऊऊऊओह हह!!!!!!! !!!!!!! मौसी कराही, जैसे ही वो बार बार झड कर चूत से पानी की धार छोड़ने लगी.

मेरा फन्फनाता हुआ लंड मौसी की चूत को घिस रहा था, और फिर उसने वीर्य के पानी की धार से मौसी की चूत की दीवारों को वीर्य के पानी से गीला कर दिया. हम दोनो अब भी एक दूसरे से चिपके हुए थे, और काँप रहे थे, और एक साथ झड्ने के परम सुख के आनंद का एहसास कर रहे थे.

जैसे जैसे मेरे लंड ने और मौसी की चूत ने पानी छोड़ना बंद किया हम दोनो होश में आने लगे, और फिर असलियत में आते हुए सोचने लगे, ये हम दोनो क्या कर बैठे थे.

मौसी ने धीरे से अपने दोनो पैर, जो मेरे गिर्द लपेटे हुए थे, उनको उतारकर नीचे रखा. मैने मौसी की चूत में से अपने लंड को बाहर निकलते हुए महसूस किया, और जैसे ही वो पूरा बाहर निकला, एक हल्की सी प्लॉप की आवाज़ सुनाई दी. हम दोनो वहाँ पर वैसे ही एक पल को अजीब सिचुयेशन में खड़े रहे, और एक दूसरे से दूर होने लगे.

“उः..राज... तुम...जाकर टवल से पोंछ लो और कपड़े पहन लो...:” मौसी बिना मेरी तरफ देखे हुए फुसफुसाते हुए बोली.

“हां” मैने भी छोटा सा जवाब दिया.

मैं जल्दी से अपने आप को टवल से पोछा और बाथरूम से निकल कर अपने रूम में आ गया. मुझे बहुत आत्म ग्लानि हो रही थी, जिस चीज़ के लिए मम्मी मना कर के गयी थी, वो ही ग़लत काम मैं अपनी मौसी के साथ कर चुका था. मैं उस दिन सारे टाइम अपने रूम में ही रहा. मैं मौसी के साथ सेक्स करके, आज बहुत दिनों बाद ढंग से झडा था, और मुझे थकान भी हो रही थी, और जो कुछ हुआ था उसके कारण क्या कुछ हो सकता है... इसी सोच में डूबकर बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था....

अगली सुबह उठकर मैं सबसे पहले डॉक्टर के पास अपनी बॅंडेज खुलवा कर जब वापस घर आया, तो मेर हाथों को बिना बॅंडेजस के देख कर मौसी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, शायद वो भी इस सब से फ्री होकर, अपनी पुरानी दुनिया में, गाओं वापस लौटना चाहती थी.

मम्मी पापा एक दिन बाद वापस आने वाले थे, और जो कुछ मेरे और मौसी के बीच हुआ था, उसके बाद हम दोनो अभी भी पश्चाताप से उबर नही पाए थे, लेकिन जिस आनंद की प्राप्ति हम दोनो को हुई थी वो अविश्वसनीय थी. मैने डिसाइड किया, कि अब इस बारे में मौसी से बात कर ही लेनी चाहिए, और जो कुछ हुआ उसको भूलकर आगे सोचना चाहिए. हो सकता है हम दोनो कुछ दिनों के बाद इस घटना को भूल जायें. लेकिन क्या ये इतना आसान था?

मौसी किचन में ब्रेकफास्ट बना रही थी, मैं ड्रॉयिंग हॉल में सोफे पर बैठ कर न्यूसपेपर पढ़ने लगा, तभी मौसी वाइट पिंक फूलों वाला गाउन पहने हुए, किचन से निकल कर मेरे पास आई और दूसरे सोफे पर बैठते हुए पूछा, “डॉक्टर को दिखा आए, कैसा रहा?”

मैने अपने दोनो हाथों को बिना बॅंडेजस के दिखाते हुए बोला, “अब सब ठीक हो गया मौसी, देखो.” मेरी नज़र मौसी के गाउन पर टिकी हुई थी, मुझे इस तरह देख, मौसी थोड़ा शरमा गयी.

 
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