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भाभी का बदला

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कुछ सेकेंड्स के बाद, मुझे भैया के सूसू करने की आवाज़ सुनाई दी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और भैया के लंड के बारे में मेरे दिमाग़ में आ रहे विचारों को दूर करने की कोशिश करने लगी. “कल रात में नींद में ना जाने मैने कैसे कैसे सपने देखे,” भैया एक मिनिट बाद बोले.

मैने खास कर अपने गला सॉफ किया, और शवर के पानी से कुल्ला किया. भैया को कैसे पता चला कि मैने कैसे कैसे सपने देखे हैं, लेकिन तभी मेरी समझ में आया कि वो अपने सपनों की बात कर रहे हैं. मैं सोचने लगी, ना जाने हम दोनो में से किस के सपने ज़्यादा खराब थे. किसी तरह हिम्मत कर के मैने पूछा, “ऐसा क्या देख लिया सपने में?”

“सच कहूँ, तो मुझे भी पता नही, बस ये ही याद है, कि कुछ अजीब तरह का सपना था, और उस सपने में तुम भी थी, संध्या,” भैया ने कूल रहते हुए जवाब दिया.

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा, मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया. मुझे कुछ सूझ ही नही रहा था, कि भैया की बात का क्या जवाब दूं. लेकिन कुछ बोलना तो ज़रूरी था, मैने किसी तरह से कहा, “अच्छा भैया.”

भैया हंसते हुए बोले, "हां. मुझे अब भी कुछ तस्वीरें याद हैं, लेकिन ज़्यादा डीटेल याद नही."

"ठीक है, अगर याद आ जाए तो डीटेल भी बता देना," मैने सभ्य रहते हुए जवाब दिया, मेरा सिर अब भी घूम रहा था.

"संध्या, शवर को चालू ही रहने देना, तुम्हारे बाद मैं भी शवर ले ही लेता हूँ,” भैया ने बाहर निकलते हुए कहा.

मैने शवर करने के बाद, भैया के लिए उसको चालू ही छोड़ दिया, और तौलिया लपेट कर अपने रूम में भाग आई. मैने अपने रूम में आकर, डोर को लॉक कर दिया, और कुछ देर तक अपनी साँसों को नॉर्मल करने की कोशिश करने लगी, और फिर कॉलेज जाने के लिए ड्रेस पहनने लगी.

जब मैं तय्यार होकर, किचन में पहुँची, तब तक भैया तय्यार होकर, बाहर जाने की लिए, वहाँ पहले ही पहुँच चुके थे. भैया की कार रिपेर होने गयी थी, और मेरे पास मेरी 800 थी. भैया को मुझे ही उनके ऑफीस छोड़ते हुए अपने कॉलेज जाना था. हम दोनो ने एक एक कप चाइ पी, और फिर साथ ही बाहर निकल गये. जब हम बाहर निकले, तब जाकर मुझे पता चला, कि बाहर तो बारिश हो रही है.

भैया ने आसमान की तरफ देखते हुए बोला, “चलो अब इन टीवी वालों की प्रिडिक्षन सही निकलने लगी है.”

मैने भी आसमान की तरफ देखते हुए कहा, “लगता है ये बारिश तो देर तक चलेगी, कार धीरे धीरे चलाकर, चलते ही हैं, आप लाते हो जाओगे थोड़ा.”

हम दोनो मेरी 800 में बैठ कर चल दिए. मेरे दिमाग़ में अभी भी जो कुछ कल रात हुआ ता, वो चल रहा था, और वो सोच सोच कर मैं गरम होती जा रही थी. मैं भैया की तरफ ना देखने की बार बार नाकाम कोशिश कर रही थी. थोड़ी देर बाद भैया ने पूछा, कॉलेज से घर कितने बजे आ जाओगी?

थोड़ी देर बाद भैया ने पूछा, कॉलेज से घर कितने बजे आ जाओगी?

मैने भैया की तरफ देखते हुए जवाब दिया, “दोपहर 2 बजे तक.”

मैने भैया की तरफ देखा, मैने उनको मेरी तरफ घूरते हुए पाया. थोड़ी देर बाब भैया का ऑफीस आ गया, भैया ने उस दिन कार से बाहर निकलने से पहले मुझे किस किया, ऐसा वो जनरली करते नही थे. मैं कार में बैठकर, उनको दूर जाते देखती रही.

भैया का बदन एक दम गठीला था, भैया मेरे से बस कुछ ही इंच ज़्यादा लंबे होंगे, और उनके भी मेरी तरह काले घने बाल थे. हालाँकि वो उनको फ़ौजी कट में रखते थे, और वो मुझ से थोड़ा ज़्यादा साँवले थे. भैया की आँखों में एक अजीब सी कशिश और गहराई थी. सब कुछ मिला कर वो बेहद हॅंडसम थे.

भैया को उनके ऑफीस छोड़कर मैं अपने कॉलेज चली गयी, और क्लास ओवर होने के बाद, मैं घर का खाने पीने का थोड़ा सामान बिग बाज़ार से लेकर शाम को 4 बजे घर वापस आ गयी. भैया के ऑफीस से लौटने में अभी बहुत टाइम था, और करीब 2-3 घंटे मेरे पास अकेले में, अपनी तरह से बिताने के लिए मैं फ्री थी.

घर आने के बाद, मैने माल से खरीदे हुए सामान को टेबल पर रखा, और सोफे पर लेट गयी.

टीवी ऑन कर के बहुत सारे चॅनेल ट्राइ किए, लेकिन कुछ भी इंट्रेस्टिंग नही मिला, मैने हार कर एमटीवी लगा लिया, और आँखे बंद कर आराम से गाने सुनने लगी, और सोने की कोशिश करने लगी. मैं थका हुआ महसूस कर रही थी, मैने फ्रिड्ज में से निकाल कर कोल्ड ड्रिंक पी, और फिर से सोफे पर लेट गयी. थोड़ी देर बाद जब फिर भी नींद नही आई, तो इस सब से बोर होकर, मैने सोने से पहले चूत को ठंडा कर, उसमे से पानी निकालकर झड्ने के बाद, हमेशा अच्छी नींद आने के सफल प्रयोग को अपनाने का फ़ैसला किया.

मैने अपने बेडरूम में आकर, सबसे नीचे वाली ड्रॉयर को खोला. मैं जो ढूँढ रही थी, वो चीज़ मुझे नही मिली, मुझे याद भी नही आ रहा था कि लास्ट टाइम मैं कब झडि थी. मुझे झुंझलाहट होने लगी. मुझे लगा जब तक भैया घर लौटें, उस से पहले मुझे मज़ा कर लेना चाहिए.

मैं मन ही मन खुश होते हुए, गुनगुनाने लगी, और अपनी सारी ड्रॉयर्स को खंगालाने लगी. और आख़िर में मुझे वो चीज़ मिल ही गयी जिसकी मुझे तलाश थी, वो रब्बर का वाइब्रटर वाला लंड.

इसमे अलग से छोटा सा रब्बर का लंड निकला हुआ था, और वो भी वाइब्रट करता था. डिल्डो में तो वायब्रेटर लगा ही था, जो कि चूत के अंदर मज़ा देने के लिए था. ये एक सेक्स टॉय था, जो मेरी एक सहेली ने मुझे गिफ्ट दिया था.

 
मैने बेड पर चढ़ने से पहले घड़ी देखी. अभी भी बस 4 ही बजे थे, यानी कि अभी भी करीब 2 घंटे से पहले भैया नही आने वाले थे. इसलिए मैने अपने रूम का डोर भी बंद नही किया.

मैने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और पूरी तरह नंगी हो गयी. मैने सारे कपड़ों का फर्श पर एक ढेर बना दिया. हालाँकि मौसम थोड़ा सर्द था, लेकिन बेड पर लेट कर, कंबल ओढ़ने के बाद अच्छा लग रहा था. मैने वाइब्रटर को दोनो हथेलियों से पकड़ा, जिस से वो भी थोड़ा गरम हो जाए, अभी वो पकड़ने पर ठंडा लग रहा था.

जैसे जैसे मेरे शरीर में गर्माहट आने लगी, मैं एक हाथ से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. दूसरा हाथ अभी भी वाइब्रटर को पकड़े हुए उसकी ठंड दूर कर रहा था. मुझे महसूस हुआ, कि अगर मैं थोड़ी देर अपनी चूत को और सहला लूँ, तो फिर वाइब्रटर को चिकना करने की ज़रूरत नही पड़ेगी. मेरी उंगलियाँ मेरी चूत को सहलाते हुए उसके साथ छेड़खानी कर रही थी. मैं अपने हाथ को अपने पेट पर फिराती हुई, अपनी चूंचियों तक ले आई. मैं अंगूठे से निपल के चारों तरफ गोल गोल घुमाने लगी, ऐसा करने से मेरे शरीर में आनंद की लहर दौड़ गयी.

जैसे ही मैं दोनो निपल्स को मसलना शुरू किया, मेरी दोनो टाँगों के बीच अजीब सी मस्ती छाने लगी. अब वाइब्रटर गरम हो चुका था, मैने उसको अपनी छाती के पास लाकर उसे स्विच ऑन कर लिया. तुरंत उसके वाइब्रेशन्स से मेरी चूंचियाँ हिल गयी, और मेरे मूँह से आहह निकल गयी. मैं बेड पर लेटे हुए ही कराहने लगी, और मेरी चूत पनियाने लगी. मैने अपनी दोनो टाँगों को आपस में चिपका लिया, और एक अजीब से आनंद की अनुभूति का मज़ा लेने लगी.

इस फोरप्ले का मज़ा लेते हुए, मैं बहुत ज़्यादा गरम हो चुकी थी. मैं उस वाइब्रटर को नीचे अपने पेट के पास और फिर नीचे अपनी टाँगों के बीच ले गयी, ऐसा करते हुए मैं थोड़ा घबराई. जैसे ही मैने उसके आगे वाले हिस्से को अपने अंदर घुसाया, मेरी मानों साँस ही रुक गयी. मैने दूसरे हाथ से अपने निपल्स को सहलाना जारी रखा, और उस रब्बर के लंड को अपनी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी.

"ऊऊहह," मैं ज़ोर से कराही, जैसे ही उस डिल्डो के अग्र भाग ने मेरी चूत को चौड़ा करते हुए अंदर घुसने का प्रयास किया. दर्द तो कुछ ज़्यादा नही हुआ, हालाँकि वो डिल्डो अच्छा ख़ासा मोटा और लंबा था, और मैने वैसे भी उसको शायद पिछले एक साल से यूज़ नही किया था.

अभी डिल्डो मेरी चूत में आधा ही घुसा था, तभी मुझसे उसका दूसरा बटन दब गया. और वो मेरी चूत में गोल गोल रोटेट करने लगा. इस अचानक मिले आनंद की वजह से मूँह से चीख निकल गयी. हे भगवान... क्या मज़ा आ रहा था. "म्म्म्मम... ऊऊऊहह,” मैने कराहते हुए अपने आप से कहा. उस डिल्डो का आगे का आधा हिस्सा मेरी चूत में हलचल मचा रहा था. और हर रोटेशन के साथ, वो मेरी चूत की उपर वाले हिस्से को छू जाता, जिस की वजह से मेरा मज़ा दो गुना हो जाता.

मैं दुविधा में ही, कि इतना जल्दी झड आऊँ या फिर ऐसे ही मज़े लेती रहों, लेकिन वासना ने मेरी दुविधा को आसान कर दिया. मैं झड्ना चाहती थी, मुझसे और इंतेजार बर्दाश्त नही हो रहा था. मैने वाइब्रटर का एक और बटन दबाया, जिस से वो बाहर वाला छोटा सा लंड भी वाइब्रट करने लगा, और डिल्डो को अपनी चूत में और अंदर तक घुसा लिया. जैसे ही उसका अगला हिस्सा मेरी चूत में और अंदर घुसा, मेरी आअहह निकल गयी, और मेरे पेट तक आनंद की एक लहर सी दौड़ गयी.

मैने वाइब्रटर को और अंदर तक घुसा लिया. मैं ह्म्म्म्म की आवाज़ सुन पा रही थी, जो कि उस छोटे वाले लंड के मेरे चूत के दाने को छूने की वजह से आ रही थी. मैने अपने होंठों पर जीभ फिराई, और फिर उसको और अंदर घुसा लिया. मेरी गान्ड अपने आप उपर चलने लगी थी. मुझे लगा कि मैं बस अब झड्ने ही वाली हूँ. मुझे मालूम था कि बस कुछ ही देर में मैं झड जाउन्गि. मैं ज़ोर ज़ोर से तेज तेज साँसें ले रही थी, और मेरे दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी. मैने डिल्डो को और अंदर घुसाया और फिर एक ज़ोर की साँस ली.

मेरी चूत में घूमता हुआ वो डिल्डो मेरे पूरे बदन में आनंद के लहरें पैदा कर रहा था. मेरी आँखें खुल ही नही रही थी. अपने आप मेरे मूँह से कराहें निकल रही थी, लेकिन मुझे इस बात की तसल्ली थी, कि मेरी आवाज़ों को कोई सुन नही रहा है, क्यूंकी पूरे घर में मैं अकेली थी. मैने डिल्डो को फिर से अपनी चूत में अंदर घुसाया, और फिर वो आराम से पूरा मेरी चूत में घुस गया. "उहह अहह," मेरे मूँह से एक दबी हुई आवाज़ निकली. और उस छोटे से बहार निकले हुए लंड ने मेरी चूत के दाने को च्छेड़ना शुरू कर दिया. मैं तो सातवें आसमान पर पहुँच चुकी थी, वो मेरी चूत के दाने को कभी उपर नीचे कभी गोल गोल करके मसल्ते हुए छेड़ रहा था. मेरे सारे शरीर में एक झुरजुरी सी दौड़ गयी. मेरे चेहरे पर खुशी की एक मुस्कान फेल गयी, और मूँह से कराह निकल गयी. मुझे मालूम था, और मुझे महसूस भी हो रहा था कि, मैं झड्ने के बेहद करीब पहुँच चुकी थी. मैने डिल्डो को थोड़ा उपर किया, जिससे उस चूत वाले हिस्से ने मेरी चूत के दाने को और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया. मेरे मूँह से एक हल्की सी चीख निकल गयी.

मेरे शरीर में एक गरम सी लहर सी दौड़ गयी. मैं हाँफ रही थी, और काँप रही थी. मैं बस झड्ने ही वाली थी. बहुत मज़ा आ रहा था. मैने अपनी साँस को रकते हुए डिल्डो को अंदर तक अपनी चूत में घुसाया.

और फिर वो यकायक रुक गया

ये क्या हुआ? मेरे दिमाग़ को समझने में थोड़ा टाइम लगा, मैने किसी तरह अपनी आँखें खोली, और आसपास देखा. रूम मे सब कुछ पहले जैसा ही था. फिर मैने अपनी टाँगों के बीच नज़र दौड़ाई, वहाँ डिल्डो मेरी चूत में अभी भी फँसा हुआ था, लेकिन वो वाइब्रट नही कर रहा था. बॅटरीस ख़तम हो गयी थी. हां!

निराश होकर मैने वाइब्रटर को अपनी चूत में से बाहर निकाला, और उसके बॅटरी के उपर वाले कॅप को खोला. ट्रिपल आ बॅटरीस. मैने उसको पिल्लोस के उपर फेंका और अपने रूम से निकल कर किचन की तरफ चल दी. मुझे मालूम था एक्सट्रा बॅटरीस कहाँ रखी हुई हैं. मैने किचन की उपर वाली ड्रॉयर को खोल कर उसमे से 4 बॅटरीस निकाल ली. मैं मुस्कुराते हुए अपने बेडरूम की तरफ चल दी.

तभी, घर का मैन डोर ओपन हुआ और धीरज भैया अंदर घुस आए. मेरे मूँह से एक चीख निकल गयी, और वो मुझे चौंक कर घूर कर देखने लगे. मैं पूरी नंगी थी. मैं घबराहट में हिल भी नही पा रही थी. और भैया की नज़रें मेरी चूंचियों पर से हट ही नही रही थी.

आख़िर में, वो थोड़ा हँसे और बोले, "मुझे नही मालूम था कि घर में मेरी छोटी बहना की पार्टी चल रही है!" और फिर भैया अपनी जीन्स का बटन को खोलने का प्रयास करने लगे.

 
मुझे थोड़ा होश आया, तो मैं भाग कर अपने बेडरूम में पहुँच गयी, और डोर को पीछे से बंद कर दिया. कुछ मिनिट्स के बाद, भैया की आवाज़ मेरे रूम के डोर के पास से सुनाई दी, “हे, संध्या मैं तो मज़ाक कर रहा था, हां डिन्नर के लिए तुमने क्या बनाया है?”

मैं बहुत घबराई हुई थी, और शर्मिंदा भी थी. लेकिन भैया के मजाकिया अंदाज ने फिर से माहौल थोड़ा हल्क कर दिया था. मैने भी मजाकिया लहजे में कहा, "इट'स आ सर्प्राइज़, लेकिन वो तुमको नंगे होकर ही खाना पड़ेगा."

"ओह,मेरी प्यारी बहना, तो फिर ये वो वाली पार्टी है!" भैया हंसते हुए बोले.

मैं भी हंस पड़ी. मेरी शर्मिंदगी थोड़ी कम हो रही थी. मैने वाइब्रटर में नयी बॅटरी डाली, और जल्दी से उसको चेक किया, और फिर उठा कर रख दिया. मैने फिर जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने, और डोर की तरफ बढ़ चली. डोर को खोलने से पहले मैं थोड़ा रुकी, एक गहरी साँस ली. झडने के इतना करीब पहुँचने की वजह से अब भी मेरे पेट और चूत में अजीब सी खुजली हो रही थी.

कुछ सेकेंड्स के बाद, मैने डोर खोला, और ड्रॉयिंग रूम में आ गयी, और चुपचाप खड़ी हो गयी. भैया सोफे पर अध लेटे होकर टीवी देख रहे थे, उन्होने अपने पैर सेंटर टेबल पर रखे हुए थे. उन्होने मेरी तरफ देखा, और आँख मार दी, और फिर से टीवी देखने लगे. भैया एक दम नंगे थे, पूरे नंगे.

मैं अपनी नज़रें वहाँ से हटा ही नही पा रही थी. मैने धीरज भैया को इस तरह नंगा पहले कभी नही देखा था, बचपन के बाद कभी नही. लेकिन उस गठीले शरीर के 19 साल के नव युवक को सोफे पर पूरा नंगा होकर सोफे पर बैठा देखना, मेरे लिए किसी आश्चर्य से कम नही था. मैं भैया की बाहों के डोले देख रही थी, और उनके पेट पर सलमान ख़ान की तरह उभरे हुए 3 पॅक्स. भैया का शरीर मेरी उमीद से कहीं ज़्यादा गठीला था. शायद भैया 6 पॅक्स बनाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन भैया के पूरा नंगा होने के बाद भी यदि मैं उनके पेट को घूरती, तो इसका कोई सेन्स नही था.

मेरी आँखें अपने आप भैया के लंड पर खिसक आई. वो वाकई में काफ़ी बड़ा था, और एक दम पर्फेक्ट. अभी जब कि वो खड़ा हुआ नही था, फिर भी मैने जितने बॉय फ्रेंड्स के जब तक लंड चूसे थे, उन सब से बड़ा था. हे भगवान, भैया ने मेरी तरफ देखा, और मुझे अपने लंड को घूरता हुआ पाकर मुस्कुरा दिए. मैं अपने मूँह में आए पानी को अंदर सटक लिया.

"उः, ये सब क्या है भैया?" मैने किसी तरह पूछा. लेकिन मेरी आँखें अभी भी उनके लंड पर ही जमी हुई थी. जैसे ही मेरी तरफ़ देखने को थोड़ा सा घूमे, मेरी नज़रें उनकी दोनो टाँगो के बीच पहुँच गयी.

भैया कुटिल मुस्कान के साथ बोले, “मैने सोचा, जब मैने तुमको नंगा देख लिया है, तो मैने सोचा हिसाब बराबर करने के लिए तुम भी मुझको नंगा देख ही लो. अब तुमको शर्मिंदगी नही होगी.”

मैने हां में सिर हिलाते हुए बोला, “उः, थॅंक्स भैया.चलो अब जल्दी से कपड़े पहन लो, मैं तो मज़ाक कर रही थी, आप ने तो सीरियस्ली ले लिया.” मैं अपनी नज़रें किसी तरह वहाँ से हटा कर किचन में आ गयी. मुझे एक एक कदम उठाने में बहुत कोशिश करनी पड़ रही थी. जब तक मैं गॅस बरनर तक पहुँची, मेरी साँस फूल चुकी थी.

कुछ मिनूटों के बाद भैया भी किचन में आ गये. मैने एक गहरी ठंडी साँस ली, जब मैने देखा कि वो अपने पूरे कपड़े पहने हुए हैं. मैने भैया के कंधे पर एक हल्का सा चपत लगाया, और भैया मेरे को देख कर हंस पड़े. भैया ने फ्रिज में से 2 लीटर की कोक की प्लास्टिक बॉटल निकाली और उसको दो ग्लासस में भर लिया, उन्होने मुझसे पूछा भी नही कि मुझे पीनी है या नही. जब उन्होने कोक का एक ग्लास मेरी तरफ बढ़ाया, तो मैने उस ग्लास को पकड़ते हुए कहा, थॅंक्स भैया.

कोक को पीने के बाद हम दोनो ही थोड़ा रिलॅक्स नज़र आए. और हम पहले की तरह बात करने लगे, हँसने और मज़ाक करने लगे. भैया एक नयी मूवी की डीवीडी लाए थे, उसको उन्होने डीवीडी प्लेयर में लगाया और हम दोनो सोफे पर बैठकर मूवी देखने लगे. उसके बाद मैं किचन में डिन्नर बनाने लगी. भैया जोक्स सुना सुना कर मुझे बहुत हंसा रहे थे.

जब हम दोनो डाइनिंग टेबल पर डिन्नर करने के लिए बैठे, तो भैया ने यकायक पूछा, “हे, संध्या, वैसे ही एक बात बताओ, जब मैं शाम को घर आया था तो तुम नंगी होकर क्या कर रही थी?”

ये सुनकर मैं तो शरम से लाल हो गयी. मैं मन ही मन कोई बहाना सोचने लगी. लेकिन इस से पहले की मैं कोई जवाब देती, भैया बोले, “और वो बॅटरीस लेकर कहाँ जा रही थी?”

मेरा मूँह खुला का खुला ही रह गया, और उसमे से कोई आवाज़ नही निकली. मुझे मालूम नही था कि भैया वो बॅटरीस मेरे हाथ में देख चुके हैं. मेरा चेहरा लाल हो चुका था, और मेरी शर्मिंदगी बयान कर रहा था. हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, और भैया ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे. "ओह माँ, ओह माँ, ओह माँ," बोलते हुए वो बहुत देर तक हंसते रहे.

मैने भैया की बाँह पर फिर से एक चपत लगाई और बोली, “सुधर जाओ भैया!”

वो फिर से हंसते हुए बोले, "मैने तुमको अपना वाइब्रटर रीचार्ज करते हुए पकड़ लिया, इसलिए तुमको मुझपर गुस्सा आ रहा है उः... ? या इसलिए कि मैने तुम्हारे उस वाइब्रटर के साथ वाले प्लान में खलल डाल दिया इसलिए?"

उनकी उस कुटिल मुस्कान देख कर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन मैं कुछ कर नही सकती थी, इसलिए मैं भी खिसियाकर हँसने लगी. मैने चालाकी से जवाब दिया, “ दोनो वजह से.”

ये जवाब सुनकर भैया चुप हो गये. एक मिनिट के लिए. फिर वो अपना गला सॉफ करते हुए खाँसते हुए बोले, “अगर तुम चाहो तो मैं कुछ देर के लिए बाहर चला जाता हूँ, जिस से तुम अपने उस ....... “दोस्त”.... के साथ थोड़ा टाइम बिता सको.

 
मैने भैया को घूरकर देखा. लेकिन मेरी नज़र उनकी लंड वाली जगह पर टिकी हुई थी. मैं ये देख कर खुश हो गयी कि उनका लंड खड़ा हो कर, उनकी पॅंट में बड़ा सा टेंट बना रहा था. भैया ने मेरी तरफ देखा, और फिर दूसरी तरफ देखते हुए फिर से खाँसकर अपना गला सॉफ किया.

“ये क्या है?” मैं ऐसा पूछने से अपने आप को रोक नही पाई.

"उः," थोड़ा शरमाते होते हुए वो बोले. अब भैया को परेशान करने की मेरी बारी थी.

"उः हुह, कुछ तो बोलो?" मैने भैया को छेड़ते हुए कहा.

भैया ने अपनी गर्दन हिलाई, मैने फिर से नीचे देखा, और एक गहरी साँस ली. भैया का लंड और ज़्यादा तन कर बड़ा हो चुका था, और वो और ज़्यादा खड़ा हो रहा था. भैया ने पूरा शरीर घूमा कर दूसरी तरफ मूँह कर लिया, उनका चेहरा भी लाल हो रहा था. मैने उनको और ज़्यादा शर्मिंदा ना करना ही ठीक समझा, हालाँकि इस सब से मेरे शरीर में भी कुछ कुछ होने लगा था.

मैं खुद भी गरम होने लगी थी. हां, वो वाइब्रटर को अपनी चूत में घुसाकर बीच में ही रुकने और झड ना पाने की वजह से भी. मैने अपने सिर को हिलाया, और डिन्नर की प्लेट में से रोटी का एक और टुकड़ा तोडा. कुछ देर बाद हम दोनो डिन्नर कर लिया, और मैने कॉफी बना ली. कॉफी के मग लेकर हम दोनो ड्रॉयिंग रूम में सोफे पर बैठकर कॉफी पीने लगे. भैया ने कॉफी पीते हुए अपने एक हाथ से लंड के उभार को छुपा रहे थे.

"तुम्हारा ये अभी भी खड़ा हुआ है ना?" मैने बेशरम होते हुए पूछा.

भैया थोड़ा हिचकिचाए और बोले, "हां, बैठ ही नही रहा."

मैने भैया की तरफ देखकर मूँह बनाया. मेरा दिमाग़ भैया के लंड से पानी छूटते हुए की तस्वीरों की कल्पना करना लगा, और मैने भी वहाँ से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया. मेरा चेहरा बेहद गरम और लाल हो चुका था, मैने अपने चेहरे के सामने अपना हाथ हिला कर थोड़ी हवा की. फिर हिम्मत करके भैया से पूछा, “लास्ट टाइम, आपने किसी लड़की के साथ कब किया था?”

भैया ने कॉफी की एक चुस्की लेते हुए बोला, “कॉलेज की एक लड़की के साथ, करीब 3 मैने पहले.”

"ओह, बहुत दिन हो गये. शायद मुझे ऐसा नही पूछना चाहिए था," मैं बोली.

भैया ने अपने कंधे उन्च्काये और बोले, “नही, इसमे ग़लत बात क्या है?”

मैं भी सब कुछ जानने को उत्सुक हो चुकी थी, और थोड़ा बिंदास महसूस कर रही थी, मैने पूछा, “क्या इस तरह हम दोनो का ऐसी बात करना नॉर्मल है, और उसको देखो?” मैने भैया के खड़े लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा.

"क्या संध्या, हम दोनो क्या सारी रात मेरे लंड के बारे में बात करके ही गुज़ार देंगे क्या?” भैया ने बड़े प्यार से बोला. शायद वो बहुत ज़्यादा शर्मा रहे थे.

"उः, आपने ही शुरुआत की थी, उसको मुझे शाम को दिखाकर," मैने उनको याद दिलाया.

"गुड पॉइंट," भैया बोले.

एक मिनिट के बाद, मैने पूछा, "तो तुम इसको लंड बोलते हो?"

भैया ने कंधे उँचकाते हुए कहा, "हां, कभी कभी. कभी मैं इसको लंड लंड बोलता हूँ. लेकिन ज़्यादातर मैं इसके बारे में बात करता ही नही हूँ, इसलिए कहना बड़ा मुश्किल है."

मैने अपना सिर हिलाकर भैया की बात से सहमति जताई, फिर मैने उनसे पूछा, “तो क्या ये नॉर्मल है?”

"क्या नॉर्मल है?" भैया ने पूछा. जैसे कि उनके समझ में ना आया हो कि मैं क्या पूछ रही हूँ.

"वो," मैं बोली, मैने उनके पॅंट में बने टेंट की तरफ एक उंगली से इशारा करते हुए कहा. उन्होने वहाँ से अपना हाथ हटाया, और मैने उनके लंड के उभार का एक बार फिर से दीदार किया, जो पॅंट को फाड़ देने के लिए बेताब हो रहा था.

"नही ऐसा नही है," आख़िरकार वो बोल ही पड़े. भैया मेरी तरफ देखना अवाय्ड कर रहे थे. और मुझे इस वजह से उनके लंड को उभार को निहारने का भरपूर मौका मिल रहा था. कुछ देर बाद मुझे एहसास हुआ, कि मैं अपने सगे बड़े भाई के लंड को निहार रही हूँ. और वो भी लगातार निहारे जा रही हूँ.

मैने भैया के चेहरे की तरफ देखा, वो मुझे ही देख रहे थे. मैने उनकी शरम को दूर करने के लिए थोड़ा मुस्कुरा दिया. मैने भैया की तरफ थोड़ा सो झुकता हुए पूछा, “लेकिन भैया ये अभी भी खड़ा क्यूँ हुआ है?”

"हे भगवान, संध्या ये तो मुझे भी पता नही है! शायद या तो कुछ गड़बड़ है, या फिर मैं कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड हो गया हूँ, मुझे भी नही पता!" भैया ने बिना मेरी तरफ देखे, अपना बचाव किया.

मैने थोड़ा और आगे झुक कर भैया की जाँघ पर हाथ रखा, और फिर धीरे से बोला, “मैं आपको अपसेट नही करना चाहती, बस मैं तो ये जानने को उत्सुक थी.”

 
ये सुनकर भैया थोड़ा रिलॅक्स हुए, और मेरी तरफ देखा. फिर उन्होने अपने कंधे उन्च्काये और दूसरी तरफ देखते हुए बोले, “मैं एक लड़का हूँ, और लड़कों के साथ ऐसा हो जाता है. हमेशा मेरा इस पर कंट्रोल नही रहता.”

मैने भैया के चेहरे की तरफ देखा, वो मुझे ही देख रहे थे. मैने उनकी शरम को दूर करने के लिए थोड़ा मुस्कुरा दिया. मैने भैया की तरफ थोड़ा सो झुकते हुए पूछा, “लेकिन भैया ये अभी भी खड़ा क्यूँ हुआ है?”

"ओह हो, संध्या ये तो मुझे भी पता नही है! शायद या तो कुछ गड़बड़ है, या फिर मैं कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड हो गया हूँ, मुझे भी नही पता!" भैया ने बिना मेरी तरफ देखे, अपना बचाव किया.

मैने थोड़ा और आगे झुक कर भैया की जाँघ पर हाथ रखा, और फिर धीरे से बोला, “मैं आपको अपसेट नही करना चाहती, बस मैं तो ये जानना चाहती थी.”

ये सुनकर भैया थोड़ा रिलॅक्स हुए, और मेरी तरफ देखा. फिर उन्होने अपने कंधे उन्च्काये और दूसरी तरफ देखते हुए बोले, “मैं एक लड़का हूँ, और लड़कों के साथ ऐसा हो जाता है. हमेशा मेरा इस पर कंट्रोल नही रहता.”

मैं थोड़ा पीछे हुई, और धीरे से बोली, “लेकिन और लड़कों के कंपॅरिज़न में आपका ये काफ़ी बड़ा है."

"क्या कह रही हो संध्या!" भैया धीरे से चीखते हुए बोले.

मैं खिलखिलाई और बोली, "सच में, मैं सीरीयस हूँ."

"ठीक है, संध्या लेकिन अगर हम बातों का टॉपिक चेंज कर लें, तो कैसा रहेगा?" धीरज भैया सुझाव देते हुए बोले.

"सॉरी. मैं कुछ ज़्यादा ही क्यूरियस हो गयी थी. आइ'म सॉरी," मैं धीरे से बोली.

भैया ने कंधे उँचकाते हुए कहा, "इट'स फाइन. आइ'म ओके."

"एक बात पूछूँ भैया?" मैने पूछा, कुछ बात जानने के लिए मैं कुछ ज़्यादा ही उत्सुक हो गयी थी.

भैया गुर्राते हुए बोले, "मुझे लगता है तुम मानोगी नही, चलो पूछ, क्या पूछना है."

"क्या उनको दर्द होता है?" मेरे मूँह से अपने आप निकल गया.

"हुह?" भैया ने कन्फ्यूज़ होकर पूछा.

"जब आप सेक्स करते हो, तो क्या आपकी गर्लफ्रेंड को दर्द नही होता?" मैने पूछा. मैं पता नही इतनी उस दिन इतना ज़्यादा बेशरम कैसे हो गयी थी, मैं बहुत ज़्यादा उत्सुकता जाहिर कर रही थी.

"उः, नही मुझे तो ऐसा नही लगता. और मैने कभी इस बारे में सोचा भी नही," भैया ने जवाब दिया.

ये सुन कर मैं थोडा खामोश हो गयी, और इस बारे में सोचने लगी. मेरे दिमाग़ में तरह तरह की तस्सीरें उभरने लगी, सारी शरारत भरी तस्वीरें.

"लेकिन संध्या तुमने ऐसा क्यूँ पूछा?" धीरज भैया ने सर्प्राइज़ होते हुए पूछा.

मैने अपने कंधे उन्च्काये और बोली, "मुझे लगता है उनको दर्द होता होगा, सीरियस्ली ये बहुत बड़ा है."

"तो मेरी बहना क्या मैं इसको कॉंप्लिमेंट समझू?" धीरज ने पूछा.

"हां कॉंप्लिमेंट ही दे रही हूँ भैया?" मैने बिना कुछ सोचे तुरंत जवाब दिया.

"हम दोनो ने इस तरह की बातें पहले कभी नही की हैं," भैया बोले.

मेरा चेहरा भी शरम से लाल हो गया. "हां आप सही कह रहे हैं भैया" मैं धीरे से बोली.

"आइ डॉन'ट रियली माइंड," भैया बोले.

"डॉन'ट माइंड व्हाट?" मैने पूछा.

धीरज भैया ने मेरी तरफ देखा और बोले, "मुझे तुम्हारे साथ सेक्स की बातें करने में कोई शरम नही है और क्या.”

मुझे लगा कि भैया सही कह रहे हैं, मुझे भी उनके साथ सेक्स की बात करने में कोई शरम नही आ रही थी. हम दोनो के बीच शरम की दीवार टूट चुकी थी. मैं भी भैया से सेक्स की बातें कर के बहुत कंफर्टबल और रिलॅक्स महसूस कर रही थी. और जैसे जैसे हम दोनो सेक्स की बातें कर रहे थे, मैं गरम होती जा रही थी.

"मुझे भी नही है," मैं टीवी की तरफ देखते हुए फुसफुसाई, मुझे पता नही था, टीवी पर क्या प्रोग्राम चल रहा था.

"लास्ट टाइम तुमने सेक्स कब किया था?" धीरज भैया ने मेरे से पूछा.

"मुझे तो आप से भी ज़्यादा टाइम हो गया," मैने जवाब दिया. शायद 6 महीने से भी ज़्यादा हो गये हैं. ज़्यादातर मुझे कोई फरक नही पड़ता. लेकिन अब इस तरह उत्तेजित होने के बाद, इस बात का एहसास हो रहा था, कि मैने पिछले काफ़ी लंबे समय से सेक्स नही किया है.

"बहुत मुश्किल है, इतने दिनो तक रहना, मुझे तो ऐसा ही लगता है" भैया बोले.

मैने भी अपने कंधे उन्च्काये और बोईइ "सच कहूँ तो आज से पहले मैने भी कभी इस चीज़ पर इतना ज़्यादा ध्यान ही नही दिया."

"ओह," भैया बोले. "और अब क्या तुमको इस चीज़ का एहसास हो रहा है?"

मैं ये सुनकर थोड़ा हिचकिचाई. मेरे दिमाग़ में एक बात चल रही थी कि हम दोनो की ये बातें ना जाने कहाँ जाकर ख़तम होंगी. लेकिन क्या इस प्रश्न का कोई मतलब था? क्या मुझको अपने सगे बड़े भाई से इस तरह की बातें करनी चाहिए थी? लेकिन मुझको लग रहा था कि ऐसा करने में कोई बुराई नही है. ये सब सोचकार मैने बोला, “हां थोड़ा थोड़ा.”

 
भैया कुछ नही बोले पूरे एक मिनिट बाद, मैने भैया की तरफ देखा और उनको मेरी तरफ देखता हुआ पाया. फिर वो बोले, “शायद इस सब की शुरूवात वहाँ से हुई है, जब से मैने तुमको नंगा देखा है.”

"हां, शायद. लेकिन वो सब मेरी ग़लती थी. आपका इस में कोई कुसूर नही है," मैने जवाब दिया. मुझ थोड़ी शर्मिंदगी तो हुई, लेकिन मैने उसको तुरंत अपने दिमाग़ से दूर कर दिया.

"आइ डॉन'ट केर," भैया बोले. "मेरा मतलब आइ डॉन'ट केर कि मैने तुम को वो सब करते हुए देख लिया. मेरा मतलब मेरे को उस समाया वहाँ पर नही होना चाहिए था. तुम घर पर अकेली थी, मुझको इस तरह नही घुस कर आना चाहिए था, ये मेरी ही ग़लती थी."

मैं भैया को एकटक देखती रही. जिस तरह से वो बातें कर रहे थे, मुझे वो सब सुनकर बहुत अच्छा फील हो रहा था. हालाँकि मैं भैया के साथ हमेशा ही कंफर्टबल फील करती हूँ, लेकिन आज से पहले हम दोनो ने इस तरह की बातें पहले कभी नही की थी. आख़िर में मैने बोला, “आप बहुत अच्छे हो भैया.”

भैया मेरी तरफ देखकर मुस्कुराए, और फिर टीवी की तरफ देखने लगे, हालाँकि मुझे मालूम था कि वो टीवी सच में देख नही रहे हैं. कुछ मिनिट्स के बाद, भैया ने एक ऐसा सवाल पूछा , कि मुझे उनकी तरफ देखने के लिए बाध्य होना पड़ा. भैया ने पूछा, “क्या कभी तुमने कभी सपने में सेक्स किया है?”

अभी हाल ही में जो मैने सपना देखा था, वो मुझे याद आ गया. उस सपने में जो कुछ मैने देखा था, उसकी सारी डीटेल्स मेरे दिमाग़ में घूमने लगी, वो सब याद करके मेरी चूत गीली होने लगी, और मैने अपने दोनो टाँगों को आपस में चिपका लिया. मैने भैया के सवाल का तो कोई जवाब नही दिया. कुछ देर बाद भैया बोले, “तो मैं ना समझू या हां?”

"हूँ," मेरे मूँह से निकल गया.

भैया टीवी की तरफ देख रहे थे. लेकिन मेरी तरफ से कोई सॉफ जवाब ना मिलने से वो थोड़ा नाराज़ थे. उनको मालूम था कि मैं उनके सवाल को अवाय्ड कर रही हूँ. ऐसा अक्सर सगे भाई बेहन में होता है, तुमको अच्छा लगे या बुरा, लेकिन आप एक दूसरे को अच्छी तरह पहचानते हो.

भैया शायद बिना पूछे मानने वाले नही थे. उन्होने पूछा, “तुमको अच्छा लगा?”

मैने नीचे फर्श की तरफ देखा, फिर सोफे को, फिर टीवी को, भैया को छोड़कर सब तरफ देखा. मैं इसका जवाब देने में असहज हो रही थी. मैं अपने सपने के बारे में सोचने लगी. मैने भैया के बारे में सपना देखा था, और हम दोनो सेक्स करने के बहुत नज़दीक पहुँच गये थे. मैं भैया के सुंदर चेहरे को निहारने लगी. मुझे लगा मेरा जवाब हां ही है, और मैं ये जवाब दे भी सकती थी. लेकिन मेरा जवाब हमारी बातों को किस दिशा में ले जाएगा, पता नही. मैं नर्वस हो रही थी. किसी तरह मैने धीरे से जवाब दिया, “हां.”

भैया थोड़ा हिचकिचाए और फिर पूछा, "सपने में क्या हुआ था?"

मैं थोड़ा घबरा गयी. मैं भैया से झूठ नही बोलना चाहती थी. मैं ये सोच रही थी कि कैसे बिना झूठ बोले उनके इस सवाल का जवाब दूं. मैं सच बोलकर भी कुछ भी जाहिर नही करना चाहती थी. मैं मन ही मन अपने आप को समझाने लगी, संध्या, वो बस एक सपना था, ऐसा नही है कि तुमने अपने भैया के साथ वाकई में सेक्स किया हो, लेकिन मैं अपने आप को दिलासा नही दे पा रही थी.

आखिकार मैं उठ कर खड़ी हो गयी. भैया मेरी तरफ देखने लगे, मैं बोली, “मैं बहुत थक गयी हूँ, अब मैं सोने जा रही हूँ.”

भैया ने आँखों में नाराज़गी भरकर मुझे देखा, लेकिन मुझे रोका नही. मैं पहले बातरूम गयी, और फिर जल्दी से कपड़े चेंज कर के सोने के लिए तय्यार हो गयी. कुछ मिनिट्स के बाद, मैं बेड पर लेटी हुई, दिन भर जो कुछ हुआ उसके बारे में सोचने लगी.

मैं आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी. बाहर से आती हुई टीवी की आवाज़ मुझे सुनाई दे रही थी, लेकिन कुछ समझ में नही आ रहा था. मेरे दिमाग़ में बहुत कुछ चल रहा था. जैसे ही मैं सोने की कोशिश करती, बहुत सारी तस्वीरें मेरे दिमाग़ में घूम जाती. भैया का वो सेक्स और सपने के बारे में पूछना, सेक्स और सपना. ऊओह. मैं टूटने लगी थी, फिर किसी तरह मुझे नींद आ ही गयी, और नींद भी कम रोचक नही थी.

मैने सपने में देखा, मैं एक सॉफ्ट गद्दे पर लेटी हुई हूँ. ठंडी ठंडी हवा चल रही है, चारों तरफ पहाड़ हैं और हरियाली के बीच वो कॉटेज बही हुई है. लेकिन मैं अकली नही हूँ, कोई है जो मेरे साथ है.

वो मेरे पास ही खड़ा है, उसकी पीठ मेरी तरफ है. मैं उसको जानती हूँ, और वो मुझे. मैं ये सोचकर मंद मंद मुस्कुरा रही हूँ, कि वो बस कुछ ही पलों में मेरे साथ बेड पर आ जाएगा. मैं उसके बदन को अपने शरीर के पास महसूस करना चाहती हूँ. मैं उसकी त्वचा की गर्माहट चाहती हूँ, उसकी वो बलिष्ठ बाहों में समा जाना चाहती हूँ.

वो मेरी तरफ घूमा. उसका नाम धीरज था, वो मेरा सगा बड़ा भाई था. मेरा प्यार. मैं कंबल के अंदर छटपटाने लगी, और अपने नंगे बदन को उस सॉफ्ट गद्दे पर मचलते हुए महसूस करने लगी. मैं चाहती थी कि वो मेरे पास आए, लेकिन मैं ऐसा ज़ोर से नही बोलना चाहती थी. ठीक भी था. लेकिन वो समझ रहा था. उसने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को देखता है.

मैने एक गहरी साँस ली, और उसके बदन से आ रही खुसबु को महसूस करने की कोशिश करने लगी. वो अभी भी मुझसे दूर था. मेरा दिल कह रहा था, मेरे पास आ जाओ. मैं उस से मेरे पास आने की भीख माँग रही थी, लेकिन बोल नही पा रही थी. उसने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में वासना थी. फिर उसने अपना हाथ नीचे लेजाकर अपनी पॅंट के बटन को खोल दिया. मैं फिर से छटपटा उठी. उसने अपनी पॅंट अंडरवेर समेत नीचे सरका दी, मुझे उनका वो लंड दिखाई देने लगा, जिसके प्यार में ना जाने कब से थी. उनका लंड एक दम पर्फेक्ट था. मैं कराह उठी.

धीरज भैया धीरे से मेरी तरफ बढ़ने लगे, जैसे ही आगे बढ़े उनका लंड हिलने लगा. उनका लंड पहले से ही आधा खड़ा हुआ था. मेरी चूत गीली होने लगी थी, मैं वासना में डूब चुकी थी. मैं भैया के और पास आने का इंतेजार करने लगी. वो बेड के पास खड़े हो गये, मेरे से बस 2 फीट की दूरी पर. मेरी नज़रें उनकी दोनो टाँगों के बीच केंद्रित थी. मैं उनके लंड को पूरा खड़ा होते देख रही थी. फिर मैं उनके चेहरे की तरफ देखा.

हां में गर्दन हिलाकर, धीरज भैया मेरे पास बेड पर आकर लेट गये. और अपने उपर कंबल को ओढ़ लिया, और मेरे पास आ गये. उनका शरीर गरम था, और जैसे ही हम दोनो के स्पर्श का एहसास हुआ, मेरे शरीर में कंपकपि सी दौड़ गयी. ये ठंड वाली कपकपी नही थी, लेकिन मेरा शरीर कह रहा था कि अब बर्दाश्त नही होता, जल्दी कुछ करो. मैं चाहती थी कि वो मुझे अपने हाथों से छूए. मैं चाहती थी कि वो मुझे खींच कर अपने से चिपका ले, मैं उसको महसूस करना चाहती थी.

 
आख़िर में भैया ने अपना एक हाथ मेरे पेट पर रख दिया. उनके ऐसा करते ही, मेरे शरीर में तो जैसे आग ही लग गयी. मुझे मालूम था, मैं टाँगो के बीच गीली हो चुकी हूँ. उन्होने हल्के से अपना हाथ मेरे पेट पर फिराया, मेरे शरीर में तरंग सी दौड़ गयी, और आग बढ़ गयी. मैं कराहने लगी, और उनसे चिपकने की कोशिश करने लगी.

भैया मेरी नाभि के चारों तरफ गोल गोल हाथ फिराने लगे. उनकी ये हरकत मेरे शरीर में उत्तेजना पैदा कर रही थी. मैं उनके और ज़्यादा करीब खिसक आई. उन्होने अपना हाथ कुछ इंच उपर उठाया, और ऐसे करते ही उनका हाथ मेरी दोनो चूंचियों को छू गया. फिर उन्होने अपना सिर नीचे कर के मेरी छाती के पास ले आए, और अपने होंठों से मेरे निपल्स को जकड कर, उनको चूसना शुरू कर दिया. मेरी छाती गरम होने लगी. उनका ऐसा करते ही, मेरा शरीर अपने आप उपर उठ कर तीर कमान बन गया.

उनके होंठों का मेरे निपल्स को चूसने का एहसास मुझे पागल कर रहा था. तभी वो अपनी जीभ से मेरे निपल्स के उपर फिराने लगे. मैं कराही, “ऊऊहह.” लेकिन वो नही रुके. उनके पैर मेरे हिप्स को दबाने लगे, और फिर वो मेरे उपर चढ़ आए. मैं उनके लंड को अपने हिप्स पर महसूस कर रही थी. उनका गरम गरम बड़ा लंड कड़क होकर खड़ा हुआ था, और मेरी दोनो टाँगों के बीच प्रेकुं से गीला कर रहा था,

“मज़ा आ रहा है,” उन्होने पूछा. लेकिन ये कोई सवाल नही था.

“म्म्म्मम,” मैने जवाब दिया, और उनसे चिपक गयी. मैं चाहती थी कि वो मेरी चिकनी चूत के गीले पन का एहसास करें, लेकिन मुझे नही मालूम उन्होने इसकी तरफ ध्यान दिया था या नही. वो मेरी बाहों को अपने हाथों से सहलाने लगे. मुझे थोड़ी गुदगुदी हुई, लेकिन मैं हिली डुली बही. बहुत मज़ा आ रहा था. मैं उनकी बालिश्ट बाहों में पिघलने लगी, और मेरा शरीर गरम होने लगा. मैं उनको अपने अंदर महसूस करना चाहती थी.

धीरज भैया अपनी टाँगों से मेरी टाँगें सहलाने लगे. मैं काँप उठी. उनका लंड गरम हो चुका था, और मेरे चुतड़ों के उपर दबाव बना रहा था. मैं अपनी गान्ड को घुमाकर उसको अपने हिप्स से मसल्ने लगी, और महसूस करने लगी. वो बहुत गरम था. लेकिन मेरी समझ में नही आ रहा था कि अब आगे क्या करूँ.

लेकिन भैया ने मेरी वो दुविधा भी दूर कर दी. जब मैं आगे क्या होने वाला है उसका इंतेजार कर रही थी, भैया मेरी दोनो टाँगों के बीच आ गये, उनका गरमा गरम लंड बीच में झूल रहा था, मैं उसकी गर्माहट को महसूस कर रही थी. मैं फिर से छटपटा उठी.

लेकिन भैया ने मेरी वो दुविधा भी दूर कर दी. जब मैं आगे क्या होने वाला है उसका इंतेजार कर रही थी, भैया मेरे दोनो टाँगों के बीच आ गये, उनका गरमा गरम लंड बीच में झूल रहा था, मैं उसकी गर्माहट को महसूस कर रही थी. मैं फिर से छटपटा उठी.

तभी किसी शोर की आवाज़ ने मेरा सपना तोड़ दिया. ये किस चीज़ की आवाज़ थी? मैने सिर उठा कर देखा, और नींद से जागने की कोशिश की. मैं उस कॉटेज की दुनिया से निकल कर अपने बेडरूम में आ गयी, और वास्तविकता को पहचानने लगी. वो आवाज़ फिर से सुनाई दी, वो किसी के कराहने की थी.

मैं मन ही मन मुस्कुराते हुए, बेड से उठ गयी. मैं धीरे से अपने रूम से बाहर निकली, और नीचे ड्रॉयिंग रूम की तरफ चल दी. मैने वहाँ भैया को सोफे पर देखा, टीवी अभी भी ओं था. टीवी की रोशनी में मैं भैया का चेहरा हल्का सा देख पा रही थी.

भैया फिर से कराह उठे, मेरे टाँगों के बीच झुरजुरी दौड़ गयी. मुझे एहसास हुआ की मैं उठाने के बाद अभी भी गरम थी. मैं कामुक हो रही थी. जो सपना मैने देखा था, उसके बाद ऐसा होना लाजमी था. और वो सपना अभी भी मेरे दिमाग़ में ताज़ा था. भैया का इस तरह कहराहने की आवाज़ मुझे पागल कर रही थी.

 
मैने देखा धीरज भैया का शरीर थोड़ा हिला और फिर रुक गया. मैं नही चाहती थी कि भैया मुझे उनको इस तरह चोरी से देखते हुए पकड़ें. मुझे नही मालूम था वो जाग रहे हैं या सो रहे हैं. लेकिन मैने सोचा कि अगर मैं यकायक वहाँ पहुच जाउन्गि तो यदि वो जाग रहे होंगे तो मैं कुछ कहने की स्थिति में होंगी. चुपचाप छुप कर देखने से पकड़े जाने का ख़तरा था.

थोड़ी सी हिम्मत कर के मैं ड्रॉयिंग रूम में अंदर आ गयी, और सोफे के पीछे रुक गयी. मैने भैया के चेहरे की तरफ देखा, उनकी आँखें बंद थी. टीवी की रोशनी में मैं उनके चेहरे पर आ रहे एक्सप्रेशन्स को देख पा रही थी. भैया सो रहे थे, और गहरी साँसें ले रहे थे, उनके होंठ खुले हुए थे.

मैं एक पल भैया के बदन को निहारती रही, उन्होने गर्दन तक कंबल ओढ़ रखा था, लेकिन ब्लंकेट में से उनके कुछ अंग बाहर निकले हुए थे. भैया का शरीर बहुत सेक्सी था, इस चीज़ पर मैने पहले कभी गौर नही किया था. लेकिन जिस तरह के सपने मैं पिछले कुछ दिनों में देख रही थी, मैं भैया को उन नज़रों से देखने लगी थी, जिस तरह पहले उनको कभी नही देखा था. जैसे क़ि वो मुझे अब आकर्षक लगने लगे थे, उनका सब कुछ आकर्षक था. इस वक़्त मैं इस बात को स्वीकार कर रही थी.

धीरज भैया थोड़ा कराहे, मेरी नज़र फिर से उनके चेहरे की तरफ चली गयी. उनका मूँह अभी भी खुला हुआ था, और ऐसा लग रहा था, कि उनका सिर थोड़ा झुका हुआ है. मैने गौर से देखा, उनकी आँखें पूरी तरह बंद थी, और वो वैसे भी हिल डुल नही रहे थे. मैने अपनी नज़रें नीचे दौड़ाई, ये देखने को कि कहीं उनके हाथ नीचे तो नही हैं. तभी मेरी नज़र उनके खड़े होकर तने हुए लंड पर पड़ी, तो कंबल में टेंट बना रहा था. मेरा मूँह खुला का खुला ही रह गया, और मैने एक गहरी साँस ली. मेरी टाँगों के बीच भी कुछ कुछ अच्छा सा फील होने लगा.

तभी यकायक मेरे मन में भैया को झड्ते हुए देखने की इच्छा उत्पन्न हुई. मानो मैं किसी नशे में थी, और उस नशे की मुझे कल रात से लत लग चुकी थी. मैं वहीं पर चुप चाप खड़ी रही, और उनके बदन की हरकतों को निहारने लगी, और उन संकेतों को देखने लगी, जिन से ये लग रहा था कि भैया को आनंद मिल रहा है. वो फिर से कराहे, और मेरे शरीर ने भी रेस्पॉंड करना शुरू कर दिया. भैया के नग्न शरीर की तस्वीर मेरे दिमाग़ में घूमने लगी. मेरी टाँगों के बीच अजीब मस्ती चढ़ने लगी. मेर अंदर मुझे अपने आप को छूने की तीव्र इच्छा जागने लगी.

धीरज भैया के चेहरे पर नज़र पड़ते ही मुझे एहसास हुआ, कि उनके चेहरे पर अलग ही भाव थे, और थोड़ी शिकन भी आ रही थी. उनकी साँसें भी तेज तेज चल रही थी. वो फिर से कराहे, और उनके शरीर में भी कुछ हलचल हुई. उनकी कमर उपर की तरफ उठने लगी. मैं फिर से उनकी दोनो टाँगों के बीच बने टेंट को देखने लगी. मैं कल्पना करने लगी कि मैं उनका लंड देख रही हूँ, बस लंड का उपरी हिस्सा. जो उनके शरीर से बहुत इंच उपर उठा हुआ था. मैं एक बार फिर से भैया के लंड के साइज़ से मन्त्र मुग्ध हो गयी.

मुझे एहसास हुआ कि मेरी चूत से पानी टपकने लगा है. मैं अपने आप को टच करना चाहती थी. मैने अपनी दोनो जांघे चिपका ली, और उन दोनो को इस कदर भींच लिया, कि वो मेरी चूत के दाने को छूने लगी. मुझे एहसास हुआ कि मेरी साँसें बहुत तेज़ी से चल रही थी. भैया एक बार फिर से कराहे और मेरी नज़रें फिर से उनके चेहरे को देखने लगी. वो अब भी सो रहे थे. जैसे ही मैने उनको देखा , “उहह,” वो कराह उठे.उनका शरीर अकड़ने लगा था, और उनकी कमर उपर उठ कर तीर कमान बना रही थी. हां वो झड रहे थे, मैं छटपटा उठी. मैं बारी बारी उनके खड़े होकर तने हुए लंड और उनके चेहरे को देखने लगी. मैं देखना चाहती थी कि झड्ते समय उनके चेहरे पर कैसे भाव आते हैं, और मैं उनके लंड से निकलते हुए पानी को भी देखना चाहती थी.

मैने अपना सिर हिलाया, मैं ये क्या कर रही थी. मैं अपने भैया के लंड से निकले पानी को देखना चाहती थी? मुझे अपने आप से घृणा होने लगी. लेकिन मेरी टाँगों के बीच जो आनंद मिल रहा था, वो मेरे इन सब सवालों को बेरहमी से दबा रहा था. भैया फिर से जो से कराह उठे, “ऊऊऊहह,”

मेरी टाँगों के बीच आनंद की लहर ने आग लगा रखी थी. अब मुझ से बर्दाश्त करना नामुमकिन था. मैं जल्दी से अपने बेडरूम में भाग कर आ गयी, और अपनी पॅंट उतारकर बेड पर फेंक दी. मैने बेड के नीचे से उस वाइब्रटर को निकाला. मुझे इस बात की प्रसन्नता हुई कि मैने उसकी बॅटरीस पहले ही चेंज कर दी थी. मुझे अब गरम होने के लिए कुछ भी करने की ज़रूरत नही थी. मैं उसको तुरंत ऑन करके चालू किया और अपने अंदर घुसा लिया. मैं तुरंत कराहने लगी, और अपने आप को झड्ता हुआ महसूस करने लगी, जिस उफान का मैं इंतेजार कर रही थी, वो उफान आ चुका था, जो बहुत देर से उबल रहा था.

मैने उस छोटे लंड वाले वाइब्रटर को तो ऑन भी नही किया था. मुझे उसकी ज़रूरत भी नही पड़ी. मैं ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी, मेरा शरीर काँप रहा था. मैं उसको अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगी, मेरी चूत आनंद में अपने आप खुल बंद हो रही थी. मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था, और मैं हाँफ रही थी. मैं अपनी आवाज़ो और कराहों को धीमा निकालने का प्रयत्न कर रही थी, जिस से धीरज भैया कहीं सुन ना लें.

लेकिन वो जाग ही गये. “संध्या?” नीचे ड्रॉयिंग रूम में से उनकी आवाज़ आती हुई सुनाई दी. तभी मुझे एहसास होते ही मैने अपने रूम का दरवाजा खुला छोड़ दिया है. शिट, ये मैने क्या कर दिया, वाइब्रटर अभी भी मेरे अंदर घुसा हुआ था, और बज़्ज़ कर रहा था. वो तुरंत समझ जायेंगे कि मैं क्या कर रही थी. लेकिन शायद मुझे अब इस बात की परवाह नही थी. लेकिन मैं चाहती थी कि वो मेरे रूम से चले जायें. मैं झड्ने से बस कुछ सेकेंड्स ही डोर थी. शिट !

"संध्या?" उन्होने मेरे कमरे में दाखिल होने के बाद फिर से आवाज़ लगाई.

आखिकार मैने पानी आँखें खोल ही दी, और हाथ नीचे लेजाकर वाइब्रटर को बटन से ऑफ कर दिया. उसको मैं अभी भी अपने अंदर महसूस कर रही थी. “क्या है? मैने पूछा. मेरी आवाज़ में तल्खी थी.

वो एक मिनिट तक कुछ नही बोले. मैने देखा वो ड्रॉयिंग रूम की तरफ देख रहे थे. जब वो मेरी तरफ घूमे, फिर बोले, “मैं अभी एक सपना देख रहा था.”

ओह. "उः, ओके," मैने जवाब दिया. मेरे समझ में नही आया, कि मैं और क्या बोलूं.

वो कुछ सेकेंड्स नीचे फर्श की तरफ देखते रहे फिर बोले, “क्या मैं तुमसे एक मिनिट बात कर सकता हूँ?”

मेरे शरीर को जो आनंद मिल रहा था उसकी वजह से मेरी आँखे बंद थी. मैं अपने शरीर में उठ रही उन लहरों के थमने तक करीब आधा मिनिट इंतेजार करती रही, और फिर से अपनी आँखें खोल दी. मैने धीरज भैया की तरफ देखा और बोली, “हां बताओ, क्या हुआ?”

 
भैया ने एक कदम और बढ़ाया और मेरे रूम में अंदर आ गये, मैने कंबल को अपनी गर्दन तक उपर खींच लिया. मुझे उस वाइब्रटर के अभी भी मेरी चूत में घुसे होने से हल्का हल्का दर्द हो रहा था, लेकिन मैने भैया की तरफ अपना ध्यान केंद्रित किया. हालाँकि ये आसान नही था, क्यों कि मेरे अपने आप झड्ने के इस पूरे कार्यक्रम की फॅंटेसी में वो भी शामिल थे. मेरा गुर्राने का मन हुआ..

"ह्म?" मैने सवाल भरी आवाज़ निकाली.

भैया एक कदम और मेरे पास आ गये, मेरे बेड के और ज़्यादा करीब. मैने एक गहरी साँस ली, और अपने आप पर और अपनी भावनाओं पर काबू करने का प्रयास करने लगी. वो थोड़ा और करीब आ गये, वो अब मेरे से बस कुछ ही फीट की दूरी पर थे. फिर वो बोले, “मुझे पता नही पिछले कुछ समय से कैसे अजीब अजीब सपने आ रहे हैं.”

ओह? मुझे कुछ समझ में नही आया कि क्या कहूँ. मेरे शरीर में गुदगुदी हो रही थी. सब कुछ उल्टा पुल्टा लग रहा था. लेकिन भैया मेरे से बात करना चाहते थे, इसलिए मैने अपनी भावनाओं पर किसी प्रकार काबू रखा. और फिर बोली, “ किस तरह के सपने?”

भैया मेरे और नज़दीक आ गये, और मेरे बेड के निचले हिस्से से अब उनका पैर छू रहा था. वो शून्य में ताक रहे थे. जब वो बोले, तो बड़ी शांति से उन्होने जवाब दिया, “ऐसे सपने जो कि मुझे नही आने चाहिए.”

मैने बस ओके कहा, मैं चाहती थी कि वो अपने आप मुझे और ज़्यादा बतायें.

"आइ'म सॉरी, मैने तुम को जगा दिया संध्या," वो एक मिनिट बाद बोले.

मैने अपने कंधे उन्च्काये और बोली, “कोई बात नही, वैसे भी मैं सो नही रही थी.” क्या उनको पता था कि उनके आने से पहले मैं अपने छूट में वाइब्रटर घुसा के झड्ने की कोशिश कर रही थी.

धीरज भैया मुस्कुराए, और बेड पर मेरे पैरों के पास बैठ गये. वो अभी भी शून्य में ताक रहे थे, शायद वो सोच रहे थे कि आगे क्या बोलूं, या कैसे बोलूं. मैं थोड़ा उपर खिसक कर बैठ गयी, और उनको देखने लगी. ये सब क्या हो रहा था? क्या वो मुझे बताने वाले थे कि वो चुदाई के सपने देख रहे हैं.

"आपने सपने में क्या देखा?" मैने पूछा

भैया ने बहुत देर तक कोई जवाब नही दिया. उन्होने अपना मूँह खोला, और फिर बिना कुछ बोले बंद कर लिया, उनके चेहरे पर शिकन आ गयी थी. वो क्या नही बोल पा रहे थे? वो जो कुछ भी था, मुझे बता सकते थे. मैने उनको बोलने के लिए उकसाया, “अब बोलो भी भैया.”

धीरज भैया ने एक गहरी साँस ली, और बोले, “सेक्स.”

"हां, मुझे मालूम है," मैने बिना कुछ सोचे जवाब दिया.

उन्होने अपना सिर मेरी तरफ घुमाया, और बोले, “तुमको मालूम है?”

शिट! मेरे कुछ समझ में आया कि अब क्या करूँ, मैं बोली, “हां मैने आवाज़ें सुनी थी.”

"ओह," वो बोले, और दूसरी तरफ देखने लगे. मेरे रूम में रोशनी थोड़ी हल्की थी, इसलिए मालूम नही पड़ था कि शरम से उनका चेहरा लाल हो चुका है या नही. लेकिन शायद हो चुका था.

"सॉरी," मैं बोली. "मुझे इस से कोई फरक नही पड़ता, मेरा मतलब, मुझे नही लगता इसमे कुछ ग़लत है .” मैने उनकी शरम को कम करने की कोशिश की.

भैय ने मेरी तरफ देखा. "तुमने क्या कुछ देखा?"

आह शिट, मैं इस बात को आगे नही बढ़ाना चाहती थी. “उः मैने कुछ नही देखा. बस तुम्हारी आवाज़ें सुनी थी, और मैने अनुमान लगाया कि तुम सेक्स कर रहे हो. मैने उसको नज़र अंदाज कर दिया.” मेरी इन बातों में काफ़ी कुछ झूठ था, लेकिन मैं और कर भी क्या सकती थी.

"अच्छा, मुझे तो ये सुनकर शरम आ रही है," भैया बोले.

मैने अपने कंधे उँचका दिए. “तुमको शरम नही आनी चाहिए,” मैं बोली, ये सोच कर कि अभी भी मेरी चूत में डिल्डो घुसा हुआ है. ये सोच कर मैं मंद मंद मुस्कुरा उठी.

"ऐसा तुम क्यों कह रही हो?" उन्होने पूछा.

मैने एक गहरी साँस ली. मैं बातों के इस सेन्सिटिव टॉपिक को चेंज करना चाहती थी, लेकिन मैं असफल हो रही थी. और अब मैं निर्णायक स्थिति में पहुँच चुकी थी. क्या मैं झूठ बोलूं और भैया को सोने के लिए वापस भेज दूं, या फिर सब कुछ सच सच बता दूं, और भगवान से सब कुछ ठीक करने की प्रार्थना करूँ.

मैने सच बोलना ही बेहतर समझा.

"उः, तुमको शरम नही आनी चाहिए भैया क्यों कि..." मैं आगे कुछ नही बोल पाई. मैं उनको ये सब कैसे बता सकती थी कि मैं अभी अभी क्या कर रही थी. भैया मेरी तरफ एकटक देख रहे थे, और जब तक देखते रहे, जब तक मैने धीरे से बोला, "मैं भी सेक्स के ही सपने ही देख रही थी."

 
भैया की आँखों में चमक आ गयी, और वो पूरी तरह खुल गयी. फिर उन्होने पूछा, “तो फिर वो वाइब्रटर की ही आवाज़ थी, जो मैने सुनी थी.”

मैने अपनी आँखें बंद कर ली, और मूँह में आए थूक को अंदर सटक लिया. मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. बिना कुछ सोचे, मैने अपने एक हाथ नीचे ले जाकर, डिल्डो को थोड़ा सा अड्जस्ट करने का प्रयास किया. मैने कोशिश की भैया को इस बात का पता ना चले, या वो ऐसा करते मुझे देख ना लें. लेकिन रूम में इतना कम उजाला था, कि उनको शायद ही पता चले. मैने खिसक कर अपने शरीर को भी थोड़ा अड्जस्ट किया. मेरी उंगली उस डिल्डो को नीचे से पकड़ कर, थोड़ा सा हिलाकर अड्जस्ट करने लगी.

लेकिन मेरी किस्मत ही खराब थी, ऐसा करने से वाइब्रटर का पवर बटन दब गया, और बज़्ज़ बज़्ज़ की आवाज़ आने लगी. एक दम मिले इस आनंद से मेरी आँखें बंद होने लगी. किसी तरह मैने उस बटन को ढूँढा और उसको ऑफ किया. आँखें खोलने से पहले मैं बहुत देर तक तेज तेज साँसें लेती रही.

धीरज भैया की नज़रें मेरी चूत वाली जगह पर थी, और वो आँखें फाड़ फाड़ के उस जगह देख रहे थे. मैने एक गहरी साँस बाहर छोड़ी और बोली, “ओके तो ये तो शरम वाली बात थी.” मेरा चेहरा लाल हो रहा था.

धीरज भैया ने अपना सिर हिलाया और मेरी तरफ देख कर फुसफुसाए, "नही इसमे शरमाने वाली कोई बात नही है."

मैने अपने कंधे उँचका दिए. मुझे शरम आ रही थी. लेकिन पता नही क्यों मैं उतनी ज़्यादा शर्मिंदा नही थी, जितना कि मुझे होने चाहिए था. “ये एक आक्सिडेंट था,” मैं धीरे से बोली.

भैया दूसरी तरफ देखने लगे, खिड़की की तरफ. वो बोले, “मुझे सपने के बारे में ज़्यादा तो कुछ याद नही, लेकिन संध्या तुम उस सपने में ज़रूर थी.”

हुह? मैं एक दम चौंक गयी. मेरी आँखें खुली की खुली ही रह गयी. मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. क्या भैया मेरी धड़कनों को सुन रहे थे? मेरी चूत में फँसे उस डिल्डो की वजह से मैं छटपटा रही थी. मैं बेहद गरम हो चुकी थी. बहुत ज़्यादा गरम. जब कोई भाई अपनी बेहन से कहे कि वो उसके सपने देखता है, और वो भी सेक्स के, तो आप क्या कहोगे. वैसे भैया ने क्या कहा था? यही कि मैं उनके सपने में थी, लेकिन उन्होने ये नही बताया कि मैं क्या कर रही थी. मैने पूछा “उः, भैया मैं आपके सपने में क्या कर रही थी?”

भैया ने सिर हिलाया, और बोले “पता नही.”

मुझे समझ में नही आया कि वो सच बोल रहे हैं या झूठ, या फिर इस निषेध विषय पर चर्चा करने से बच रहे थे. उनको इस बात का बिल्कुल पता नही था, कि मैं भी ऐसे ही सपने देख रही हूँ. पता नही हम दोनो क्या कर रहे थे?

मैने अपनी नर्वुसनेस को काबू में करते हुए पूछा, “क्या हम दोनो सेक्स कर रहे थे?”

धीरज भैया ने झट से अपना सिर मेरी तरफ घुमाया. वो कुछ नही बोले, जिस से मेरी धड़कन और ज़्यादा बढ़ गयी. मैने अपनी साँसें रोक ली. फिर वो बोले, “शायद... पता नही... संध्या. मुझे ये सब तुमको नही बताना चाहिए था.” उन्होने फिर से अपने मूँह दूसरी तरफ कर लिया.

मैं अपने होंठ को काटने लगी, और फिर कंबल में से ही अपने पैर के पंजे से भैया के पैर को छूआ. भैया ने मेरे पैर की तरफ देखा. मैं धीरे से बोली, “इट्स ओके भैया. अगर तुम इस बारे में सोच रहे हो तो, मैं अपसेट नही हूँ.

"क्या सच में तुम अपसेट नही हो?" भैया ने पूछा.

मैने हां में गर्दन हिल दी. भैया ने कनखियों से मुझे देखा, और हम दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा उठे. हालाँकि, हम दोनो भाई बेहन की लड़ाइयाँ लड़कर ही बड़े हुए थे. लेकिन हम दोनो परिवार में बाकी सब से कहीं ज़्यादा, एक दूसरे के बेहद करीब थे. हम दोनो एक दूसरे की ग़लतियों को भी आसानी से माफ़ कर देते थे. लेकिन इस केस में, मुझे नही लग रहा था कि किसी को माफ़ करने की कोई ज़रूरत थी. जब हम दोनो ने एक ही जुर्म किया था.

भैया आख़िर में उठ कर खड़े हुए, और डोर की तरफ चल दिए. वो बोले, “चलो अब सो जाओ संध्या. मेरी सपने वाली बातों को सुनने के लिए थॅंक यू.”

मैने फिर से अपना होंठ काटा, और धीरे से बोली, “वेट.”

भैया डोर के पास रुक गये और घूम कर मेरी तरफ देखा. मैं ना जाने क्या बोलने वाली थी, मुझे खुद यकीन नही हो रहा था. लेकिन अपने आप मेरे मूँह से शब्द निकला रहे थे, “क्या आज रात मेरे पास रुकोगे?”

भैया ने चेहरा बनाया, वो थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गये. "तुम्हारे साथ रुकू?" उन्होने पूछा.

मेरे चेहरे पर खून दौड़ आया. मैं कुछ बोल ना पाई, बस अपनी गर्दन हिला दी.

भैया के चेहरे पर कन्फ्यूषन और शिकन जल्द ही दूर हो गयी, और वो मेरे पास आने लगे. मैने पहली बार ध्यान दिया कि उन्होने सफेद टी शर्ट और स्वेट पॅंट पहन रखी थी. जब वो मेरे बेड की साइड पर आ गये, मुझे शरम आने लगी. मैने अपने सगे बड़े भैया को अपने बेड में आमंत्रित किया था. हालाँकि, इसमे कोई बुराई नही थी. मैने उनको सेक्स करने के लिए तो बुलाया नही था. लेकिन जिस तरह से अभी अभी उन्होने जो कुछ स्वीकार किया था, उसके बाद सब कुछ बदल चुका था.

धीरज भैया ने मेरी तरफ देखा, और फिर बेड की तरफ, और अपनी आइब्रो उपर की तरफ की. मैने हां में सिर हिलाया, और भैया कंबल के अंदर घुस आए. तभी भैया के स्वेटपेंट का कॉटन वाला कपड़ा मेरी नंगी टाँगों को छूने लगा, तभी मुझे एहसास हुआ कि मैने नीचे कुछ पहन ही नही रखा था. हां मैं नंगी थी, और मेरी चूत में डिल्डो फँसा हुआ था.

इस सब की वजह से क्या कुछ हो सकता है, ये सोचकर मैने अपनी आँखें बंद कर ली. और मैं अपने साए बड़े भाई के साथ बेड पर लेटी हुई थी. मैने नीचे से आधी नंगी थी, और वाइब्रटर मेरी टाँगों के बीच मेरी चूत में घुसा हुआ था. और उपर से, अभी अभी भैया ने मेरे सामने स्वीकार किया था, कि वो मेरे साथ सेक्स के सपने देखते हैं. आज राज कुछ रोचक होने वाला था.

मुझे एक और बात का एहसास हो रहा था, कि भैया का इस तरह मेरे पास लेटना मुझे अच्छा लग रहा था. भैया के शरीर में गर्माहट थी, हालाँकि हम दोनो के शरीर बस थोड़ा सा ही टच कर रहे थे, लेकिन मैं उस गरमाहट को महसूस कर रही थी. मेरा बेड 4 बाइ 6 फीट का था, इसलिए वो इतना बड़ा था कि हम दोनो को ज़्यादा पास होने की ज़रूरत नही थी. हालाँकि भैया अभी भी मेरे और करीब आ सकते थे, और मुझे भी इसमे कोई आपत्ति नही होती. लेकिन मैने कुछ भी ना बोलने में ही भलाई समझी.

धीरज भैया ने ही कुछ बोलकर बात चीत शुरू की. और जो कुछ उन्होने बोला, वो सुनकर मैं काँप उठी. भैया बोले, “तुम अगर चाहो तो वो ख़तम कर सकती हो, जो तुम कर रही थी.”

"भैया आप कैसी बात कर रहे हो?" मैने पूछा.

मैने कंबल को हिलता हुआ महसूस किया, जैसे ही भैया थोड़ा सा हीले, और बोले, “मैने ये नही कह रहा हूँ कि तुम करो ही, लेकिन अगर तुम करना चाहती हो तो मुझे कोई आपत्ति नही है.”

मैने अपना सिर घुमाकर उनकी तरफ देखा. कमरे में हल्की सी रोशनी थी, लेकिन मैं भैया के सुंदर सा मुखड़ा देख पा रही थी. भैया पीठ के बल लेटे हुए छत की तरफ देख रहे थे, “मैं अगर वो करूँ, तो आप क्या करोगे?”

भैया ने मूँह के अंदर आए थूक को अंदर सटका और बोले, “शायद मैं भी वो ही करूँगा.”

"शायद?" मैने पूछा.

भैया ने अपनी आँखें बंद कर ली, और एक गहरी साँस ली. फिर बोले, “मैं करूँगा, लेकिन यदि तुम चाहो तो नही करूँगा.”

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. मेरे शरीर में गुदगुदी होने लगी. और तभी मुझे उनका सुझाव पसंद आ गया. मैने फुसफुसा कर कहा, “आइ डॉन’ट माइंड.”

धीरज भैया ने मेरी तरफ करवट ले ली, और मैं भैया की आँखों में देखने लगी, और मेरे अंदर काम वासना जाग कर चरम पर पहुँच गयी. वो बस मुझ से कुछ ही इंच दूर थे. और मैं उनसे कह रही थी, “कर लो भैया.”

धीरज भैया मेरी तरफ कुछ सेकेंड्स तक देखते रहे, और फिर मैने देखा क़ि उन्होने अपनी एलास्टिक वैस्टबंद वाली स्वेट पैंट को नीचे कर के उतार दिया. मैं और भैया अब दोनो नीचे से नंगे थे. और अब दोनो साथ साथ हॅस्ट मैथुन करने वाले थे. एक साथ.

 
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