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मेरा दिमाग़ घूम रहा था, मैने भैया की तरफ देखा, मेरे बदन में भी कुछ कुछ होने लगा था, मैं गरम होने लगी थी. मैने उनकी लंड की जगह नज़र डाली, उसने अब भी खड़ा होकर, पाजामे में टेंट बना रखा था. “आपके वीर्य का पानी, ये ही कहना चाह रहे थे ना?” मैने पूछा.
भैया ने हां में अपनी गर्दन हिलाई और बोले, "हाँ, क्या वो ज़्यादा अच्छा लगा?"
"नही" मैं बोली. "मुझे आपके लंड को अपने मूँह में महसूस करना बहुत ज़्यादा अच्छा लगा, जब मैं उसको चूस रही थी." इस तरह भैया के सामने बोलने के बाद, मेरा फिर से उसको चूसने का मन करने लगा. ऐसा आज पहली बार हुआ था.
मेरे शब्दों का शायद भैया पर भी असर हुआ था. उन्होने बेड पर अपने बैठने की पोज़िशन ठीक की, और हाथ से अपने लंड को पाजामें में ढंग से सेट किया. “बहुत गरम हो रहा है...मेरा ये,” उन्होने एक गहरी साँस लेते हुए बोला.
मैं थोड़ा सा भैया की तरफ झुकी, और उनकी तरफ देखा, “हां, मुझे पता चल रहा है," मैं बोली.
"और मेरे लंड से निकला वीर्य का पानी?" भैया ने पूछा.
"हां तो उसका क्या?" मैने पूछा.
"क्या तुमको वो.... अच्छा लगा?" भैया ने धीरे से सवाल किया.
"लेकिन अब तो मेरे सवाल करने की बारी है?" मैं बोली.
"ओह, हां. सॉरी, तुम पूछो," भैया ने माफी भरे लहजे में कहा.
मैने एक मिनट सोचा, और कोई दूसरी तरह का सवाल सोचने लगी. लेकिन मेरा ध्यान भैया के लंड के उपर से हट ही नही रहा था. मैं भैया के लंड को ही एक तक देख रही थी. फिर मैं फुसफुसा कर बोली, “मुझे आपका ये बहुत अच्छा लगा. जैसे मैने सोचा था उस से भी कहीं ज़्यादा अच्छा. मैने पहली बार जो किया था, उस से ये कहीं बहुत बेहतर और अलग था.”
"क्या अलग था?" भैया ने पूछा.
मैने अपने कंधे उचकाये और बोली, "उस लड़के का बहुत कड़वा लगा था. मैं अंदर निगल ही नयी पाई. और फिर उसके बाद मैने उसको अपने मूँह में दोबारा नही लिया."
"और मेरे वाले का टेस्ट कैसा था?" उन्होने उत्सुकता से पूछा.
मुझे भैया के वीर्य का स्वाद अच्छी तरह से अभी भी याद था. मैं धीरे से बोली, “आपका तो थोड़ा सा स्वीट था, लेकिन ज़्यादा नही. वो भी थोड़ा कड़वा था, लेकिन ज़्यादा स्ट्रॉंग नही. मुझे लगता है, इसका जनरली टेस्ट ऐसा ही होता होगा. लेकिन फिर भी यदि कंपेर करना हो तो उस लड़के का टेस्ट ऐसा था जैसे ब्लॅक कॉफी पी रहे हो, और आप वाले का ऐसा जैसे कि नॉर्मल दूध वाली कॉफी.”
धीरज भैया मेरी बातों को सुनकर हँसने लगे, मैं भी थोड़ा सा हँसी. मैने भैया के लंड को देखते हुए, अपने होंठों पर जीभ फिराई. अब जिस तरह से हम दोनो खुल कर बातें कर रहे थे, मेरे फिर से भैया के लंड को चूसने का मन कर रहा था.
"मेरे ख्याल से अब तुम्हारी बारी है," धीरज भैया एक गहरी साँस लेते हुए बोले.
मैने उनके चेहरे की तरफ देखा, उनकी आँखें बंद थी, और वो थोडा परेशान लग रहे थे. मैने पूछा, “भैया क्या आपका मन कर रहा है, आपका अभी भी खड़ा हुआ है?”
भैया ने हां में गर्दन हिलाई और बोले, “हां.”
"एक से दस तक के स्केल पर आपका कितना मन कर रहा है?" मैने पूछा. मैं थोड़ा सा उठकर अपने घुटनो पर बेड पर ही बैठ गयी. मुझे आभास भी नही हुआ, कि मैं कब उस पोज़िशन में जा पहुँची. फिर मैं धीरे से भैया की तरफ बढ़ी, मेरी नज़र लगातार भैया के लंड पर ही टिकी थी.
भैया ने फुसफुसाकर जवाब दिया, “पंद्रह.”
जैसे ही मैने उनके घुटनों को छूआ वो ठिठक गये, और फिर हल्का सा कराह उठे. मैने भैया के चेहरे की तरफ देखते हुए पूछा, “मैं उसको देख सकती हूँ?”
धीरज भैया ने अपना हाथ नीचे लेजाकर बिना झिझक के, अपने पाजामे के नाडे को खोला. मैने उनकी सहायता करते हुए, उनको पाजामे और बॉक्सर्स को एक साथ टाँगों में से निकालने में उनकी मदद की. भैया का लंड अब पूरी तरह से स्वतन्त्र होकर, दोनो टाँगों के बीच सलामी मारने लगा. मैं उसको घूर कर देखने लगी, और उसके शेप और साइज़ को निहारने लगी. वो वाकई मैं बहुत मस्त था.
"मुझे आपका ये लंड बहुत अच्छा लगता है," मैं बोली. फिर मैने अपना एक हाथ बढ़ाकर उसको अपनी मुट्ठी में भर लिया. भैयआ के मूँह से आहह निकल गयी. मैं खिसक कर भैया के और नज़दीक आ गयी.
मैं भैया के लंड की बनावट को गौर से देखने लगी. उनका लंड तीन अलग अलग सेक्षन्स में बनता हुआ था. नीचे जड़ से उपर बढ़ते हुए, करीब एक चौथाई लंबाई के बाद लंड की स्किन का कलर थोड़ा सा चेंज हो रहा था. उसके उपर वाला हिस्सा जो कि हल्का सा गुलाबी था, वो सुपाडे तक पहुँच रहा था, और ये सबसे लंबा भाग था, जो शायद 5 इंच के करीब लंबा होगा. उनका लंड मोटा भी बहुत था, और बस किसी तरह मेरी मुट्ठी में आ रहा था. और सबसे उपर वो नुकीला सुपाड़ा सबसे ज़्यादा चौड़ा था. वो किसी मशरूम की टोपी की तरह लग रहा था. ये मुझे सबसे ज़्यादा पसंद था. वो थोड़ा गहरा गुलाबी था, क्योंकि वो सबसे ज़्यादा हार्ड भी था.
भैया ने हां में अपनी गर्दन हिलाई और बोले, "हाँ, क्या वो ज़्यादा अच्छा लगा?"
"नही" मैं बोली. "मुझे आपके लंड को अपने मूँह में महसूस करना बहुत ज़्यादा अच्छा लगा, जब मैं उसको चूस रही थी." इस तरह भैया के सामने बोलने के बाद, मेरा फिर से उसको चूसने का मन करने लगा. ऐसा आज पहली बार हुआ था.
मेरे शब्दों का शायद भैया पर भी असर हुआ था. उन्होने बेड पर अपने बैठने की पोज़िशन ठीक की, और हाथ से अपने लंड को पाजामें में ढंग से सेट किया. “बहुत गरम हो रहा है...मेरा ये,” उन्होने एक गहरी साँस लेते हुए बोला.
मैं थोड़ा सा भैया की तरफ झुकी, और उनकी तरफ देखा, “हां, मुझे पता चल रहा है," मैं बोली.
"और मेरे लंड से निकला वीर्य का पानी?" भैया ने पूछा.
"हां तो उसका क्या?" मैने पूछा.
"क्या तुमको वो.... अच्छा लगा?" भैया ने धीरे से सवाल किया.
"लेकिन अब तो मेरे सवाल करने की बारी है?" मैं बोली.
"ओह, हां. सॉरी, तुम पूछो," भैया ने माफी भरे लहजे में कहा.
मैने एक मिनट सोचा, और कोई दूसरी तरह का सवाल सोचने लगी. लेकिन मेरा ध्यान भैया के लंड के उपर से हट ही नही रहा था. मैं भैया के लंड को ही एक तक देख रही थी. फिर मैं फुसफुसा कर बोली, “मुझे आपका ये बहुत अच्छा लगा. जैसे मैने सोचा था उस से भी कहीं ज़्यादा अच्छा. मैने पहली बार जो किया था, उस से ये कहीं बहुत बेहतर और अलग था.”
"क्या अलग था?" भैया ने पूछा.
मैने अपने कंधे उचकाये और बोली, "उस लड़के का बहुत कड़वा लगा था. मैं अंदर निगल ही नयी पाई. और फिर उसके बाद मैने उसको अपने मूँह में दोबारा नही लिया."
"और मेरे वाले का टेस्ट कैसा था?" उन्होने उत्सुकता से पूछा.
मुझे भैया के वीर्य का स्वाद अच्छी तरह से अभी भी याद था. मैं धीरे से बोली, “आपका तो थोड़ा सा स्वीट था, लेकिन ज़्यादा नही. वो भी थोड़ा कड़वा था, लेकिन ज़्यादा स्ट्रॉंग नही. मुझे लगता है, इसका जनरली टेस्ट ऐसा ही होता होगा. लेकिन फिर भी यदि कंपेर करना हो तो उस लड़के का टेस्ट ऐसा था जैसे ब्लॅक कॉफी पी रहे हो, और आप वाले का ऐसा जैसे कि नॉर्मल दूध वाली कॉफी.”
धीरज भैया मेरी बातों को सुनकर हँसने लगे, मैं भी थोड़ा सा हँसी. मैने भैया के लंड को देखते हुए, अपने होंठों पर जीभ फिराई. अब जिस तरह से हम दोनो खुल कर बातें कर रहे थे, मेरे फिर से भैया के लंड को चूसने का मन कर रहा था.
"मेरे ख्याल से अब तुम्हारी बारी है," धीरज भैया एक गहरी साँस लेते हुए बोले.
मैने उनके चेहरे की तरफ देखा, उनकी आँखें बंद थी, और वो थोडा परेशान लग रहे थे. मैने पूछा, “भैया क्या आपका मन कर रहा है, आपका अभी भी खड़ा हुआ है?”
भैया ने हां में गर्दन हिलाई और बोले, “हां.”
"एक से दस तक के स्केल पर आपका कितना मन कर रहा है?" मैने पूछा. मैं थोड़ा सा उठकर अपने घुटनो पर बेड पर ही बैठ गयी. मुझे आभास भी नही हुआ, कि मैं कब उस पोज़िशन में जा पहुँची. फिर मैं धीरे से भैया की तरफ बढ़ी, मेरी नज़र लगातार भैया के लंड पर ही टिकी थी.
भैया ने फुसफुसाकर जवाब दिया, “पंद्रह.”
जैसे ही मैने उनके घुटनों को छूआ वो ठिठक गये, और फिर हल्का सा कराह उठे. मैने भैया के चेहरे की तरफ देखते हुए पूछा, “मैं उसको देख सकती हूँ?”
धीरज भैया ने अपना हाथ नीचे लेजाकर बिना झिझक के, अपने पाजामे के नाडे को खोला. मैने उनकी सहायता करते हुए, उनको पाजामे और बॉक्सर्स को एक साथ टाँगों में से निकालने में उनकी मदद की. भैया का लंड अब पूरी तरह से स्वतन्त्र होकर, दोनो टाँगों के बीच सलामी मारने लगा. मैं उसको घूर कर देखने लगी, और उसके शेप और साइज़ को निहारने लगी. वो वाकई मैं बहुत मस्त था.
"मुझे आपका ये लंड बहुत अच्छा लगता है," मैं बोली. फिर मैने अपना एक हाथ बढ़ाकर उसको अपनी मुट्ठी में भर लिया. भैयआ के मूँह से आहह निकल गयी. मैं खिसक कर भैया के और नज़दीक आ गयी.
मैं भैया के लंड की बनावट को गौर से देखने लगी. उनका लंड तीन अलग अलग सेक्षन्स में बनता हुआ था. नीचे जड़ से उपर बढ़ते हुए, करीब एक चौथाई लंबाई के बाद लंड की स्किन का कलर थोड़ा सा चेंज हो रहा था. उसके उपर वाला हिस्सा जो कि हल्का सा गुलाबी था, वो सुपाडे तक पहुँच रहा था, और ये सबसे लंबा भाग था, जो शायद 5 इंच के करीब लंबा होगा. उनका लंड मोटा भी बहुत था, और बस किसी तरह मेरी मुट्ठी में आ रहा था. और सबसे उपर वो नुकीला सुपाड़ा सबसे ज़्यादा चौड़ा था. वो किसी मशरूम की टोपी की तरह लग रहा था. ये मुझे सबसे ज़्यादा पसंद था. वो थोड़ा गहरा गुलाबी था, क्योंकि वो सबसे ज़्यादा हार्ड भी था.