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भाभी ने थियेटर में ले लिया भाग – 2

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Administrator
Staff member
कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि भाभी को पटना में कोई काम था तो भैया किसी कारण से उनके साथ न जा सके और मुझे बोल दिया. मैं भाभी के साथ चला गया और काम होने के बाद कोई साधन न मिलने के कारण हम वहीं रुक गए और फिर मूवी देखने चले गए. वहां हाल में भाभी मेरा लन्ड चूसने लगीं. अब उसके आगे –

हम जैसे ही कमरे के अन्दर घुसे वैसे ही भाभी डोर लॉक करने लगी तो मैंने उन्हें पीछे कमर से पकड़ लिया और उनके बाल हटा कर गर्दन को चूमने लगा.

तो भाभी ने कहा – बड़ी जल्दी है तुझे!

फिर मैंने भाभी को ऐसे ही बिस्तर पर धकेल दिया और उनके होंठ चूसने लगा. आह्ह यारों, क्या मस्त एहसास था!
फिर भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे बालों में हाथ फिराने लगीं. मैं फिर भाभी को बाइट करने लगा और कमीज के ऊपर से ही उनके मम्मों को मसलता रहा.

वाह क्या मम्मे थे उनके! एक दम कोमल – कोमल. फिर मैंने भाभी को मेरे कपड़े निकालने के लिए कहा और
उन्होंने बिना देर किए मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. जिससे मैं सिर्फ़ अंडरवियर में रह गया था. फिर मैंने भी भाभी का शर्ट निकाल दिया और अब भाभी सिर्फ़ ब्रा में रह गईं थीं।

अब मैं फिर भाभी को किस करने लगा और ब्रा के ऊपर से ही उनके मम्मों को दबाता रहा. भाभी भी पूरा मजा ले रही
थीं और मेरे होंठों को काट रही थीं.

तभी मैंने भाभी से कहा – भाभी, बहुत प्यासी लग रही हो?

तो भाभी ने कहा – तेरी सोच से भी ज्यादा प्यासी हूँ मेरी जान. इसके सिवा एक औरत को और चाहिए ही क्या होता है.

मैंने कहा – फिर तो आज मैं आपको पूरा मस्त मजा दूँगा भाभी. आज तो आप एक दम खुश ही हो जाओगी.

अब फिर मैंने भाभी की ब्रा निकाल फेंकी और उनके मम्मों को हाथ में लेकर बेतहाशा चूसने लगा. इस वजह से भाभी तो भी ऐसे तड़पने लगीं जैसे उनके तन – बदन में आग लगी हुई हो. मैं फिर उनके पेट, गर्दन, होंठ, कमर और हर जगह चूमने लगा. भाभी लगातार सिसक रहीं थीं. अब वह अपने पैरों को बिस्तर पर घिसने लगी थीं.

तभी भाभी ने मुझसे कहा – अब तू नीचे आ जा और मुझे भी कुछ मज़े लेने दे.

इतना कह कर वो मेरे ऊपर चढ़ गईं और मेरे पूरे शरीर को चाटने लगीं. सच में यार, उनके नंगे शरीर से चिपकने में मुझे मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था. वो लगातार मुझे चाट रहीं थी और फिर चाटते हुए मेरे लंड पर पहुँच गईं और ऊपर से उसे पकड़ कर बोलीं – कितना मोटा है रे तेरा.

मैंने कहा – मेरा मत बोल ये तेरा ही है मेरी जान. निकाल ले इसे और निकाल कर चूस ले.

अब वो मेरे लन्ड को निकाल कर पागलों की तरह चूसने
लगीं. मुझे तो मानो जन्नत ही मिल गई थी. कितना मजा आ रहा था यारों मैं आप लोगों को बता ही नहीं सकता. अब मैंने उनके सर को पकड़ कर उनके मुँह में एक – दो झटके
भी मार दिए और फिर मैं झड़ भी गया.

वो मेरा सारा रस पी गईं और लंड को चाटने लगीं. लगभग 5 मिनट तक मेरा लंड चूसने के बाद वो मेरे ऊपर फिर से लेट गईं और मेरे होंठो को चूसने लगीं. अब मैं भी उनसे एक दम लिपट गया था. फिर मैंने भाभी की दोनों टाँगों को फैला दिया और उनकी चूत पर हाथ फेरने लगा. फिर उनकी पैन्टी के ऊपर से ही लंड घिसने लगा. मेरा मन तो कर रहा था कि अभी पूरा का पूरा लन्ड उनकी चूत में घुसा दूँ, लेकिन मैं खुद को कंट्रोल किये रहा.

भाभी लगातार आवाजें निकाल रहीं थीं, ‘अ आहह, आह उम्म्म’ वो करती रहीं. फिर वो अपनी उंगली मेरे मुँह में देने
लगीं और टाँगों तो हिलाते हुए भाभी बोलीं – अब और आग मत लगा बहनचोद. जल्दी डाल दे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी.

मैंने कहा – अभी नहीं, अभी थोड़ा इंतज़ार करो.

अब मैंने भाभी की पैन्टी निकाल दी जिससे उनकी चिकनी चूत मेरे सामने आ गई. जिस पर बिल्कुल भी बाल नहीं थे. मैं उनकी चूत में उंगली करने लगा. जिस कारण भाभी मस्त होकर थोड़ा चिल्लाने लगीं ‘आहह, ओह्ह’ और मैं उनकी चूत चाटने लगा. अब तो मानो भाभी पागल ही हो गईं हों. वो मेरा सर अपनी चूत में बहुत ज़ोर से दबाने लगीं और सिसकियाँ भरने लगीं.

मैं उनकी चूत को मज़े लेकर चाटता रहा. अब उनकी चूत से पानी आने लगा. भाभी बार – बार मुझसे चोदने के लिए कह रहीं थीं. अब मैं भी समझ गया कि भाभी अब बिल्कुल
गर्म हो चुकी हैं इसलिए मैंने देर न करते हुए उनकी चूत पर अपना लंड रख कर एक ही झटके में अपना पूरा लन्ड घुसेड़ दिया.

मेरे इस जबरदस्त झटके से भाभी की तो जान ही मानों निकल गई और वह बहुत तेज़ से चिल्ला पड़ीं – आह माँ चोद दी. बहन की लन्ड मुझे नहीं चुदना है तुझसे.

फिर मैंने जल्दी से उनके मुँह पर हाथ रख दिया और उनके
ऊपर ही पड़ गया. भाभी की आंखों से आँसू आने लगे थे. जिससे मैं एकदम शांत होकर उनके ऊपर लेटा रहा और लगातार उन्हें किस करता रहा. फिर 5 मिनट बाद जब भाभी को कुछ आराम हुआ तो मैंने लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया और भाभी मस्त होकर आहें भरने लगीं.

अब फिर मैंने स्पीड बढ़ाई और ज़ोर – ज़ोर से भाभी को चोदने लगा. भाभी को अब बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और वह मुझे और ज़ोर से चोदने के लिए कहने लगीं थीं. मैं उन्हें करीब 20 मिनट तक चोदता रहा और फिर भाभी ने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून चुभा दिए.

ऐसा लग रहा था जैसे कि भाभी तो मेरी दीवानी हो गईं हैं. वह बोलने लगीं – आज तू मेरी चूत ऐसे फाड़ दे कि मुझे कोई होश ही ना रहे. आज तो तू बस मुझे चोदता जा.

मैंने भी ऐसा ही किया और उनसे बोला – मेरी जान, चिंता न कर, आज तू क्या तेरी माँ भी चुद जाएगी मुझसे.

अब मैं एक दम कुत्तों की तरह उन्हें चोदने लगा और भाभी ऐसे ही मज़े लेती रहीं. अब तो वह अपनी गाण्ड को भी ऊपर-नीचे करने लगीं थीं. अब मैंने भाभी को घोड़ी बनने को कहा और उनकी गाण्ड मारने की बात की. तो भाभी ने घोड़ी बन कर मुझसे कहा – आज तू जो चाहे कर ले मेरे साथ. मार भी दे मुझे. अब तो मैं हमेशा के लिए बस तेरी हूँ.

फिर मैंने भाभी की गाण्ड पर थोड़ा सा तेल लगाया और थोड़ा तेल अपने लंड पर भी लगाया और अपना लंड उनकी गाण्ड पर रख कर एक ज़ोर का झटका मारा. मेरा आधा लंड उनकी गांड़ के अन्दर चला गया. जिससे भाभी ज़ोर से चिल्लाई.

उनकी गाण्ड बहुत टाइट थी. शायद उन्होंने पहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई थी. लेकिन उनके चूतड़ बहुत मुलायम थे. मुझे तो जैसे जन्नत ही मिल गई. मैंने एक और झटका मारा और पूरा लंड उनकी गाण्ड में डाल दिया. भाभी ने फिर से आवाज़ निकालनी शुरू कर दी. अब मैं भाभी की गाण्ड बुरी तरह मारने लगा. पूरे कमरे ने ‘पच्च – पच्च’ की आवाज़ आने लगी थी.

भाभी की सिसकारियों से मेरा पूरा मूड बन गया और उनकी गाण्ड मार – मार कर मैंने उनका पूरा छेद खोल दिया था. अब मैं उनकी गाण्ड पर ‘पट्ट – पट्ट’ करके थप्पड़ मारने लगा. जिस पर भाभी हँसने लगीं और मुझसे बोलीं – मेरे
राज़ा आज तूने मुझे जीना सीखा दिया. अबसे मैं बस तेरी हूँ. जब चाहे जो चाहे कर लेना मेरे साथ.

मैंने फिर भाभी की गाण्ड काफ़ी देर तक मारी और उनकी गाण्ड में ही झड़ गया. अब मैं थक चुका था. इस कारण मैं वहीं पर उनके ऊपर ही लेट गया.

उसके बाद अगले दिन हम लोग अपने घर चले आये लेकिन अब तो मैं जब भी घर जाता हूँ तब हमेशा मौके की तलाश में रहता हूँ और मौका मिलते ही भाभी को चोद कर अपना गर्म – गर्म वीर्य उनकी चूत में भर देता हूँ.
 
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