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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



आशना को कुछ गड़बड़ लग रही थी पर वो डॉक्टर. तो थी नहीं जो इस बीमारी का कारण जान सकती. उसने खाना खाने के बाद प्लेट्स संभाली और काका को आवाज़ लगा कर कहा कि बर्तन उठा कर सॉफ कर दें. फिर वीरेंदर अपने कमरे की तरफ चल पड़ा और आशना अपने कमरे में चली गई.

काफ़ी दिनो से थकि होने के कारण आशना को बेड पर लेटते ही गहरी नींद ने अपने आगोश में ले लिया. आशना की नींद खराब की उसके मोबाइल की रिंगटोन ने " ज़रा-ज़रा टच मी टच मी टच मी ओ ज़रा- ज़रा किस मी किस मी किस मी". आशना ने अलसाए हुए रज़ाई(क्विल्ट) से अपने चेहरे को कस के ढक लिया ताकि रिंगटोन की आवाज़ उसके कानों तक ना पड़े मगर मोबाइल लगातार बजे जा रहा था. कुछ देर बाद झल्ला कर उसने फोन उठाया और स्क्रीन पर नंबर. देखने लगी. जैसे ही उसकी नज़र स्क्रीन पर पड़ी कॉल डिसकनेक्ट हो गई. आशना का मन आनंदित हो गया. आशना ने मोबाइल तकिये के पास रखा और सोने के लिए आँखें बंद ही की थी कि एक बार फिर से मोबाइल बजने लगा. अब तक आशना की नींद टूट चुकी थी, उसने स्क्रीन पर नंबर. देखा, डॉक्टर. बीना का फोन था. फिर आशना ने घड़ी की तरफ देखा, 7:00 बज चुके थे. आशना ने कॉल रिसीव की और बीना ने उसका और वीरेंदर का हाल जानने के बाद फोन काट दिया. हालाँकि उनकी बातचीत कुछ ज़्यादा देर नहीं चली पर बीना ने उसे एक हिदायत देते हुए कहा कि जो भी करना है जल्द से जल्द और सोच समझ कर करना. उसने इस बात पर खास ज़ोर दिया कि वीरेंदर को ना पता चले कि वो उसकी बेहन है क्यूंकी हो सकता है वीरेंदर ज़्यादा गुस्से में आ जाए और उसकी सेहत पर इसका उल्टा असर पड़े.

फोन अपनी पॅंट की पॉकेट मे रखने के बाद आशना ने अपनी न्यू जॅकेट जो कि लाइट ब्राउन कलर की थी उसे पहन लिया. शाम को काफ़ी ठंड हो गई थी. आशना अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, वो अपने रूम मे ही बैठ कर टीवी देखने लगी और आगे क्या करना है वो सोचने लगी. करीब 2 घंटे तक काफ़ी सोचने के बाद उसके सिर में दर्दे होने लगा. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो अब क्या करे. कैसे वीरेंदर भैया से उनकी शादी की बात करे और सबसे बड़ा सवाल कि शादी करने के लिए लड़की कहाँ से लाई जाए. अंत में आशना ने वीरेंदर को ही कुरेदना ठीक समझा और उसके कमरे में जाने की सोची.

आशना टीवी ऑफ करके अपने कमरे से बाहर निकली ही थी के उसे बिहारी काका वीरेंदर के रूम से खाने की ट्रे लिए निकलते हुए दिखे.

आशना: काका वीरेंदर ने खाना खा लिया क्या?

काका: हां बिटिया, तुम्हारे लिए भी उपर ही ले आउ. आज बहुत ठंड है, अपने कमरे में ही खा लो.

आशना कुछ देर सोचती रही फिर बोली ठीक है काका, आप खाने मेरे रूम में लगा दें, मैं थोड़ी देर वीरेंदर के रूम से होके आती हूँ, उन्हे दवाई खिला दूं.

काका: ठीक है.

आशना आगे बढ़ी ही थी कि उसके पैर एक दम रुक गये,

उसके रुके कदमों को देख कर काका ने उसे सवालिया नज़रो से देखते हुए इशारे से पूछा कि क्या हुआ.

आशना: वो काका वीरेंदर जी पूरे कपड़े तो पहने हैं ना?

काका: हां तुम सुरक्षित हो जाओ. काका के इस जवाब से आशना शरम के मारे ज़मीन मे गढ़ी जा रही थी. उसके बाप समान एक आदमी उसे यह समझा रहा था कि जिस आदमी के पास वो जा रही है वो उसे कुछ भी नहीं करेगा.

काका: बिटिया, जब वीरेंदर बाबू का हो जाए तो हमारा भी एक काम करना.

आशना एक दम चौंकी काका की बात सुनकर. बिहारी ने बहुत जल्दी बात संभालते हुए कहा कि बिटिया मेरा मतलब है कि जब वीरेंदर बाबू दवाइयाँ खा लें तो तुम मेरे कमरे में नीचे आना, तुमसे कुछ ज़रूरी बातें करनी हैं. आशना जल्द से जल्द यहाँ से निकलना चाहती थी उसने अपनी गर्दन हां में हिलाई और वीरेंदर के रूम की तरफ चल दी.

बिहारी नीचे आ गया और अपने मोबाइल को ऑन करके एक नंबर. डाइयल किया. कुछ देर बाद वहाँ से किसी ने फोन उठाया. बिहारी धीमी आवाज़ में "चिड़िया के मन में आग डाल रहा हूँ, अब आगे बोलो जब वो मेरे कमरे में आए तो क्या करना है. कुछ देर बिहारी चुप चाप उसकी बात सुनता रहा और फिर बोला ऐसा ही होगा. फिर बिहारी बोला: बहुत दिन हो गये हैं, अब तो दिन में मिलना भी मुस्किल है जब तक इस चिड़िया के पर ना कट जाएँ, अगर मूड है तो आज रात को आ जाओ नहीं तो मुझे आज फिर से हिलाकर ही सोना पड़ेगा. थोड़ी देर सामने वाले की बात सुनकर बिहारी बोला: तो मैं क्या यहाँ ऐश कर रहा हूँ. पिछले 10 दिन तो खूब ऐश की हम दोनो ने. कभी तुम यहाँ तो कभी मैं वहाँ. पर अब मेरा घर से निकलना ख़तरे से खाली नहीं होगा. चिड़िया चालाक लगती है, थोड़ा सा भी इधर उधर हुआ तो ख़तरा होगा, इसी लिए अब कुछ दिन तो तुमको ही यहाँ पर आना होगा. बिहारी ने कुछ देर सुनने के बाद सामने वाले को बोला: मैं दरवाज़ा खोल दूँगा तुम सेधे मेरे कमरे में आ जाना. वीरेंदर को तो नींद की गोलियाँ दे चुका हूँ दूध में. चिड़िया को भी दूध पिलाकर सुला दूँगा फिर जशन होगा. तुम ठीक 12:00 बजे पहुँच जाना. इतना कह कर उसने फोन काटा, उसे स्विचऑफ किया और आशना के लिए खाना लेने किचन में चला गया.

बिहारी काका पिछले 25 साल से शर्मा परिवार के घर पर नौकर था, काफ़ी ईमानदार और काम मे लगन होने के कारण उसके साथ शर्मा परिवार में एक फॅमिली मेंबर की तरह बिहेव किया जाता. वो कभी किसी को कोई शिकायत का मोका नहीं देता. दिखने मे कोई 45 का एक तगड़े शरीर का मालिक था. बचपन मे गाँव मे पला बढ़ा होने के कारण मेहनत उसके खून मे थी और वो थोड़ी मेहनत अपने शरीर पर भी किया करता. इस उम्र मे भी वो सुबह जल्दी उठ कर घर मे बने पीछे जिम मे कुछ देर शरीर के लिए मेहनत करता और काफ़ी हेल्ती भी ख़ाता. बस उसकी यही आदत के कारण वो आज भी किसी भी औरत या लड़की पे भारी पड़ता. उसने शादी नहीं की क्यूंकी उसे शादी की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, क्यूंकी जब तक शर्मा परिवार मे सब ठीक था, वो घर की नौकरानियों को खूब रगड़ता. फिर उस आक्सिडेंट के बाद वीरेंदर ने घर के सभी नौकर नोकारानियों को घर से दूर एक बस्ती मे बसा दिया जिससे बिहारी वीरेंदर से नफ़रत करने लगा था. उसने वीरेंदर को बहुत समझाया कि कम से कम एक नौकरानी को यहीं रहने दे ताकि वो घर के काम मे उसकी मदद करे पर कोई भी नौकरानी रुकने को तैयार नहीं हुई. उन्हे रहने के लिए बस्ती मे मकान, वीरेंदर से पगार और बिहारी से छुटकारा जो मिल रहा था.

 
बिहारी तो पहले, पूरा दिन भर सर्वेंट क्वॉर्टर्स मे ही रहता. कभी किसी नोकरानी को तो कभी किसी नोकरानी को अपने कमरे मे बुलाकर बहाल कर रहा होता. वो घर मे सर्वेंट्स का हेड था तो कभी किसी की हिम्मत नहीं हुई उसकी शिकायत करने की. एक बार एक नोकरानी ने शिकायत करके उसे घर से निकालने की कोशिश भी की पर बिहारी ने उसके पति को पैसे देके उसी नोकरानी को बदचलन साबित करके घर से धक्के देके निकलवा दिया था. बाद मे पता लगा कि उसके पति ने भी उसे तलाक़ दे दिया था. इस डर से कोई भी उसके खिलाफ नहीं बोलता. सारे नोकरो के जाने के बाद बिहारी तो जैसे भूखे शेर की तरह हो गया था. वो रोज़ रात को अपना पानी निकाल कर सो जाता पर इस से उसकी आग और भड़क रही थी. लेकिन जल्द ही उसकी ज़िंदगी मे एक ऐसी औरत आई जो अपनी नज़र शर्मा परिवार की जायदाद पर रखती थी. एक बार वो हवेली मे आई तो बिहारी से उसकी मुलाकात हुई. उस औरत ने जल्द ही बिहारी की आँखों मे हवस देख ली और उसे फसा लिया.

बस यहाँ से शुरू हुआ उनका वीरेंदर की जायदाद को हथियाने का एक चक्रव्यूह. वो औरत भी बिहारी जैसा दमदार मर्द पाकर खुश थी. दोनो अक्सर घर पर मिलने लगे जब वीरेंदर ऑफीस होता और धीरे धीरे उन्होने वीरेंदर की जायदाद हड़पने के प्लान पर अमल करना शुरू कर दिया. लेकिन आशना के यूँ अचानक आ जाने से उन्हे अपना प्लान असफल होता नज़र आ रहा था क्यूंकी वीरेंदर की वसीयत के मुताभिक अगर आशना घर वापिस लौट आती है तो 50% शेर उसका होगा और अगर वो लौट के ना आए तो सारा शेयर वीरेंदर की वाइफ और बच्चों को जाएगा (यह वसीयत वीरेंदर ने अपने परिवार की मौत के तुरंत बाद बनवा ली थी और तब तक उसे यही लगता था कि रूपाली उससे शादी करेगी). वसीयत मे एक यह क्लॉज़ भी था कि अगर किसी कारण वीरेंदर की मौत आशना के लौटने से पहले या वीरेंदर की शादी होने से पहले हो जाती है तो सारी ज़ायदाद एक ट्रस्ट को सौंप दी जाएगी.

आशना के आ जाने से बिहारी और उस औरत की एक मुश्किल बढ़ गई थी और एक आसानी भी हो गई थी. मुश्किल यह थी कि अगर आशना वीरेंदर के सामने उसकी बेहन बनकर जाएगी तो 50% शेयर उसका हो जाएगा और तब उनका सारी जायदाद पर हाथ सॉफ करने का सपना अधूरा रह जाएगा पर आसानी यह हो गई कि आशना वीरेंदर के सामने उसकी बेहन बनकर नहीं जाना चाहती थी (जी हां, ठीक सोचा अपने, बिहारी जानता है कि आशना वीरेंदर की बेहन है. वो यह सब कैसे जानता है उसके लिए पढ़ते रहिए), जिस कारण उनके दिमाग़ में एक नया प्लान बना. वीरेंदर जैसे चालाक और समझदार आदमी को तो अपने बस मे करना उनके लिए नामुमकिन था पर आशना को इस झूठ के ज़रिए वो ब्लॅकमेल कर सकते थे. तो उन दोनो ने प्लान किया कि किसी तरह आशना वीरेंदर की सेक्षुयल नीड्स को पूरा करे या वो ऐसे हालत पैदा करें कि आशना मजबूर हो जाए अपने भैया का बिस्तर गरम करने के लिए तो फिर वो वीरेंदर का काम तमाम करके आशना को वीरेंदर की बीवी साबित करके उससे वसीयत बदलवा सकते हैं. इससे दो फ़ायदे होंगे, एक तो यह कि आशना कभी अपना मूह नहीं खोल पाएगी और दूसरा यह कि अगर आशना ना होती तो उन्हे किसी और लड़की की मदद लेनी पड़ती जो कि ख़तरनाक भी साबित हो सकता था.

तो यह था उनका नया प्लान, जो उन्होने आशना के आने के बाद बनाया, उनका पहले का प्लान भी काफ़ी ख़तरनाक और दमदार था. वीरेंदर के खाने में वो कभी कभी कुछ अफ़रोडियासिक का एक मिश्रण मिला दिया करते थे जिससे वीरेंदर की सेक्स करने की इच्छा भड़क उठे और वो फ्रस्टेट होके किसी भी औरत या लड़की को अपना शिकार बना डाले. इस से यह होता कि सेक्षुयल असॉल्ट के जुर्म में वीरेंदर जैल जाता और यह दोनो पीछे से सारा माल सॉफ कर जाते मगर इस में किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी क्यूंकी वीरेंदर ऑफीस से घर और घर से ऑफीस बस इन्ही दो जगह जाता था और दोनो ही जगह कोई भी लड़की काम नहीं करती थी. बिहारी ने कई बार वीरेंदर को किसी औरत या लड़की को नौकरानी रखने के लिया मनाना चाहा पर वीरेंदर ने हर बार मना कर दिया. वीरेंदर अपनी सेक्षुयल ज़रूरतें खुद भी पूरी करने में असमर्थ था, शुरू शुरू में एक बार उसने काफ़ी एग्ज़ाइटेड होकर अपने लिंग को हाथो से ठंडा करने की कोशिश भी की पर उसके लिंग की सील बरकरार होने से यह उसके लिए काफ़ी कष्टदायक रहा. उसके बाद तो वीरेंदर ने तोबा कर ली थी. जिस भी दिन बिहारी काका को उस दवाई की डोज दे देते, वो काफ़ी उत्तेजित रहता और यही वजह है कि कई बार उसे दोपहर का खाना खाते खाते एकदम बैचनी होने लगती और वो अपने कपड़े उतार फैंकता. बिहारी काका अक्सर उसे 10-15 दिन बाद एक डोज दोपहर के खाने में दे देते जब भी कभी वीरेंदर घर पर लंच करता. उन्होने दोपहर का ही वक्त इसलिए चुना था कि जब डेढ़ दो घंटे बाद इसका असर बिल्कुल ज़्यादा हो तो उस वक्त वीरेंदर के बाहर जाकर कोई ग़लती करने के चान्सस ज़्यादा रहते पर वीरेंदर पर तो रूपाली का धोखा इस कदर हावी हो चुका था के वो घंटो अपने कमरे में ही खोया खोया बैठा रहता और अपनी उत्तेजना को दबाने की कोशिश करता रहता.इसी फ्रस्टेशन के चलते ही कुछ दिन पहले उसे एक माइनर सा अटॅक आया था जिस कारण वो हॉस्पिटल पहुँचा. दवाइयों के सहारे कुछ दिन तक तो उसे ठीक रखा जा सकता था पर अब यह सिचुयेशन उसके लिए काफ़ी ख़तरनाक साबित हो रही थी. बिहारी जानता था अगर इससे पहले कुछ ना किया तो वीरेंदर की वसीयत के मुताबिक उसका सारा पैसा एक ट्रस्ट में चला जाएगा जिसे वो हरगिज़ मंजूर नहीं करता. उसी चाल के सिलसिले में उसने आशना को उसने अपने कमरे में बात करने के लिए बुलाया था.

आशना को वीरेंदर के कमरे से अपने कमरे मे आए हुए एक घंटे के करीब हो गया था. बिहारी सोच रहा था कि अब तक आशना ने खाना खा लिया होगा. बिहारी अपने कमरे के दरवाज़े पर खड़ा होकर उपर की तरफ ही देख रहा था कि उसे आशना के रूम का दरवाज़ा खुलने का आभास हुआ, वो फॉरन अपने कमरे में घुस गया और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया. करीब पाँच मिनिट तक वेट करने के बाद भी जब आशना उसके रूम मे नहीं आई तो उसे हैरानी और परेशानी दोनो होने लगी. अब तो बिहारी को डर भी लगने लगा था क्यूंकी 11 बजने वाले थे और करीब 12 बजे उस औरत ने भी आना था.

बिहारी अजीब की कशमकश में था कि उसका दरवाज़ा धीरे से नॉक हुआ. बिहारी एक दम अपनी जगह से उठा और दरवाज़ा खोल दिया जो कि पहले से ही थोड़ा खुला था.

बिहारी: नॉक करके क्यूँ शर्मिंदा करती हो बिटिया यह तुम्हारा ही कमरा, मेरा मतलब घर है जब चाहे किसी भी कमरे में आ- जा सकती हो. आशना को झटका लगा जब बिहारी ने उसे कहा कि यह उसका ही घर है. बिहारी को भी अपनी ग़लती का एहसास हो चुका था. उसने जल्दी से बात बदलते हुए कहा कि कुछ दिनो तक जब तक मालिक ठीक नहीं हो जाते तब तक तो तुम यहीं पर रुकेगी तो तब तक यह घर उसी का हुआ ना. बिहारी ने बड़ी चालाकी से अपनी बात पलट दी थी.

अंदर आते ही आशना की नज़र बिहारी के कमरे पर पड़ी, बड़ा ही सॉफ सुथरा और घर के बाकी कमरो की तरह काफ़ी आकर्षक कमरा था. सुख-सुविधाओ से सुसज्जित कमरे मे हर एक वस्तु मौजूद थी. हर एक चीज़ जो इंसान की ज़रूरत होती है वो सब उस कमरे मे मौजूद थी जो कि बिहारी का रुतबा इस घर मे बयान कर रही थी. आशना हैरान थी कि एक नौकर का कमरा भी इतना सुंदर हो सकता है. खैर वीरेंदर को इसका होश ही कहाँ था कि घर मे क्या हो रहा है, उसे तो बस काम और सिर्फ़ काम से मतलब था.

 


बिहारी: बैठो बिटिया मैं तुम्हारे लिए पानी लाता हूँ.

आशना: नहीं काका अभी पीकर ही आई हूँ.

बिहारी: बहुत लेट हो गई तुम, मुझे लगा शायद सो गई होगी. मैं भी सोने ही वाला था कि तुम आ गई.

आशना: नहीं काका वो डॉक्टर. बीना का फोन आया था, वीरेंदर के ट्रीटमेंट के बारे मे समझा रही थी.. आशना ने बड़ी सफाई से झूठ बोल दिया जबकि वो यही सोचे जा रही थी कि बिहारी काका ने उसे अपने कमरे मे क्यूँ बुलाया है.

बिहारी: कोई बात नहीं, बैठो.

आशना बेड के पास लगे सोफे पर बैठ गई. उसके आगे मेज़ पर एक शराब की बोतल और खाली ग्लास रखा था. शराब काफ़ी महँगी लगती थी और ग्लास में कुछ शराब होने के कारण आशना समझ चुकी थी कि काका शराब पी रहे थे. आशना बड़ा अनकंफर्टबल फील कर रही थी काका के आगे. वो डर रही थी कि अगर काका ने कोई ग़लत हरकत की तो वो कैसे अपने आप को सच्चा साबित कर पाएगी क्यूंकी वीरेंदर तो उस से यही पूछेगा इतनी रात को आशना उसके कमरे मे क्या कर रही थी.

बिहारी: वो माफ़ करना बिटिया कभी कभी पी लेता हूँ जब बहुत ज़्यादा खुश होता हूँ या बहुत ज़्यादा उदास. आज तो मेरी लिए खुशी का दिन है, मालिक ठीक होकर घर पर आ चुके हैं.

आशना: कोई बात नहीं काका.

बिहारी उसके लेफ्ट साइड पर आके सोफे के साथ लगे बेड पर बैठ गया. आशना ने वोही दोपहर वाली पिंक टी-शर्ट पहनी थी और जॅकेट वो उपर ही भूल आई थी. बिहारी उसके लेफ्ट साइड पर बैठा था जिस से बिहारी की नज़र आशना के क्लीवेज पर पड़ी जो कि आशना के बैठने से बाहर की तरफ उभर आई थी. आशना ने झट से काका की नज़रें पढ़ ली पर वो इसी वक्त कुछ रियेक्शन करती तो उसे खुद भी ज़िल्लत उठानी पड़ती और काका भी झेन्प जाते.

आशना: बोलिए काका, क्या कम था आपको मुझसे.

बिहारी उसकी आवाज़ सुनकर एक दम अपना ध्यान आशना के बूब्स से हटाता है और बोलता है.

बिहारी: अब तुम्हें ही कुछ करना होगा मालिक के लिए.

आशना: मैं समझी नहीं.

बिहारी: देखो मैं ज़्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं पर जितना डॉक्टर. ने मुझे बताया उससे मैं यह अंदाज़ा तो लगा ही सकता हूँ कि वीरेंदर बाबू को कोई बीमारी नहीं है. बस उनकी कुछ ज़रूरतें हैं जो पूरी नही हो रही.

आशना ने सिर झुका कर कहा: लेकिन काका मैं इस बारे मे उनकी क्या मदद कर सकती हूँ.

बिहारी: देखो आशना, इतनी नासमझ तो तुम हो नहीं कि मेरी बात का मतलब ना समझो पर खैर कोई बात नहीं मैं तुम्हे समझाता हूँ. आशना एक दम हैरान होकर बिहारी काका की तरफ देखने लगी क्यूंकी दिन भर बिटिया-बिटिया बुलाने वाले काका एकदम उसका नाम लेकर बात कर रहे थे.

आशना डर के मारे काँपने लगी. बिहारी उसकी हालत समझते हुए बोला: डरो नहीं, मैं तुमसे कोई भी काम ज़बरदस्ती नहीं करवाउंगा पर अगर तुम वीरेंदर बाबू को पूरी तरह ठीक करने मे मेरी मदद करो तो मैं वादा करता हूँ कि तुम्हें ज़िंदगी भर काम करने की ज़रूरत ही नहीं रहेगी. आशना मूह फाडे बिहारी की बातें सुन रही थी, उसके गले से शब्द ही नही निकल पा रहे थे. वो काका की बातों का मतलब भली भाँति समझ रही थी. उसके दिल के किसी कोने में यह ख़याल तो कुछ दिनों से घर कर ही गया था पर वो इसे नकार रही थी, आख़िर वीरेंदर भाई था उसका. पता नहीं काका क्या क्या बोले जा रहे थे पर उनकी आख़िरी बात ने उसे चौंका दिया "आशना अगर तुमने मेरी बात मान ली तो मैं वादा करता हूँ कि वीरेंदर बाबू तुम्हे अपनाए या ना अपनाए पर मैं तुम्हें समाज मे इज़्ज़त दिलवाउन्गा और ज़रूरत पड़ने पर तुम्हारे बच्चो को मैं अपना नाम देने को तैयार हूँ. आशना का पहले तो मन किया कि खैंच के एक ज़ोरदार थप्पड़ बिहारी के गाल पर मारे पर उसने अपने आप को रोक लिया, क्यूंकी अगर बात बिगड़ गई तो फिर आशना को अपनी सफाई देनी मुश्किल हो जाएगी कि वो इतनी रात को बिहारी के कमरे में बिहारी काका से साथ क्या कर रही थी जब कि बिहारी इस समय शराब पी कर धुत था.

बिहारी अपनीी बात बोलकर चुप हो गया और आशना की तरफ देखने लगा. आशना की साँसे तेज़ चल रही थी जिससे उसके उन्नत वक्ष उसकी टी-शर्ट मे हिल रहे थे. बिहारी बड़े ही ध्यान से उन्हे एकटक देखे जा रहा था. आशना ज़्यादा देर तक वहाँ बैठ ना सकी क्यूंकी अब उसे बिहारी काका की हवस भरी नज़रो मे उतावलापन नज़र आ रहा था. वो उठकर जैसे ही जाने को हुई. बिहारी बोला: कोई जल्दी नहीं है, तुम सोच समझ कर फ़ैसले लो. लेकिन इतना याद रखना कि तुम्हे मालामाल कर देंगे और तुम्हे अपनाने के लिए मैं तो हूँ ही ना अगर वीरेंदर बाबू ने तुम्हे बाद मे ठुकरा भी दिया तो. एक एक शब्द आशना की आत्मा को छल्नि कर रहा था. आशना दौड़ कर सीडीयाँ चढ़ने लगी तो बिहारी ने आवाज़ लगा कर कहा कि उपर आपके रूम मे दूध भी रखा है. अगर पिया नहीं तो अब पीकर सो जाना, नींद अच्छी आ जाएगी. आशना ने कोई जवाब नहीं दिया और भाग कर अपने कमरे मे आई और अंदर आते ही आशना धडाम से बेड पर पेट के बल गिरी और सिसक उठी.

यह उसके साथ क्या हो रहा है. क्यूँ वो इस जगह आई, वो तो बहुत खुश थी अपनी उस छोटी सी दुनिया मे. वहाँ उसे कोई पाबंदी नहीं थी, वो वहाँ पर एक आज़ाद ज़िंदगी जी रही थी मगर यहाँ आते ही उसकी ज़िंदगी ने एक अलगा ही रुख़ ले लिया था. पहले उसे अपने ही भाई के घर मे झूठ बोलकर घुसना पड़ा और फिर अब वो अपनी नौकरी भी छोड़ चुकी थी. हालाँकि आशना के लिए नयी नौकरी ढूँढना कोई बड़ा मुश्किल काम नहीं था. अभी भी एक एरलाइन्स का ऑफर उसके पास था मगर वो यहाँ से जा भी तो नहीं सकती थी वीरेंदर को इस हालत मे छोड़कर. वो यह भी जानती थी कि यहाँ रुकना भी उसके लिए ठीक नहीं रहेगा. आख़िर वो कब तक वीरेंदर से सच छुपाकर रखेगी. उसे वीरेंदर से सच बोलने मे भी अब कोई प्राब्लम नहीं थी पर वो परेशान थी तो बिहारी की बातों से. कैसे उस इंसान ने सॉफ शब्दों मे आशना को समझा दिया कि उसे वीरेंदर की रखैल बनकर इस घर में रहना पड़ेगा और अगर वीरेंदर ने आशना से बेवफ़ाई की और इस सौदे मे वो प्रेग्नेंट हो गई तो बिहारी उससे शादी करके उसके बच्चों को अपना नाम दे देगा आशना काफ़ी देर तक सोचती रही और घुट घुट कर रोती रही. फिर उसे नीचे मैन दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई. आशना ने सोचा बुड्ढ़ा शराब पीकर कहीं जा रहा होगा. आशना जो कि बिहारी की इज़्ज़त करती थी उसकी इस हरकत से बिहारी उसकी नज़रो से गिर चुका था. वो जान चुकी थी बिहारी की गंदी नज़र उसके जिस्म पर है. उसने बिहारी की आँखों मे हवस के लाल डोरे तैरते देखे थे जब वो उससे बात कर रहा था. आशना मन मैं सोचने लगी कि हवस इंसान को कितना अँधा बना देती है. वो इंसान यह भी नही सोचता कि सामने उसकी बेटी है या बेटी जैसी कोई और.

काफ़ी देर यूँही अपना मन हल्का करने के बाद आशना उठी और मूह धोने के लिए बातरूम मे चली गई. वॉशरूम मे मूह धोते हुए उसकी नज़र अपने चेहरे पर पड़ी. उसने अपने आप को ध्यान से देखा और सोचने लगी : क्या मैं इतनी खूबसूरत हूँ कि एक बूढ़ा इंसान भी मेरी तरफ आकर्षित हो सकता है. ऐसा सोचते सोचते आशना रूम मे आई और शीशे के सामने खड़ी होकर अपने आप को देखने लगी. अपने जिस्म को प्यासी नज़रो से देखते हुए उसके गाल लाल होने लगे और उसकी साँसे भारी होने लगी. आज कितने दिन हो गये थे उसे अपने आप से प्यार किए हुए. यह सोचते ही आशना के शरीर मे एक बिजली की लहर सी दौड़ गई और अनायास ही उसके हाथ अपनी टी-शर्ट के सिरो को पकड़ कर उपर उठाते चले गये.

आशना ने टी-शर्ट सिर से निकाल कर उसे एक तरफ़ उछाल दिया और फिर अपनी पॅंट के बटन खोलने लगी. आशना का दिल काफ़ी ज़ोरों से धड़क रहा था, उसने पॅंट भी टी-शर्ट के पास उछाल दी और टेबल पर रखे दूध को एक ही घूँट मे पीकर रज़ाई मे घुस गई. आशना ने जैसे ही आँखे बंद की उसके हाथ अपने आप ही उसके अन्छुए कुंवारे बदन पर हर जगह छाप छोड़ने लगे. आशना की एग्ज़ाइट्मेंट बढ़ती ही जा रही थी. अपने ब्रा कप अपने बूब्स से हटा कर उसने अपने गुलाबी निपल्स को अपनी उंगलियो मे कस लिया जिससे वो और भी तन कर खड़े हो गये जैसे चीख चीख कर बोल रहे हों कि आओ और घोंट दो हमारा गला. जैसे ही आशना ने निपल्स पर अपनी गिरफ़्त बढ़ाई उसके गले से एक आह निकली जो कि एक घुटि चीख का रूप लेकर उसके होंठों तक आ पहुँची. आशना बहुत ही ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो चुकी थी. वो सेक्स के नशे मे अपने बूब्स को लगातार मरोड़ रही थी. आशना ने हाथ पीछे लेजाते हुए अपने ब्रा के हुक्स खोल दिए और ब्रा को अपने कंधे से निकाल कर एक ओर उछाल दिया. अब आशना केवल एक पैंटी मे रज़ाई के अंदर रह गई थी. आशना ने अपने पैर के पंजो पर वेट डाल कर अपनी आस को हवा मे उठाया और धीरे धीरे से अपनी पैंटी भी उतार दी. जैसे जैसे पैंटी उसके बदन का साथ छोड़ रही थी आशना की साँसें तेज़ होने लगी. पैंटी को एक साइड पर फैंकते ही उसने अपनी दोनो टाँगे ज़ोरे से भींच ली जैसे कोई उसकी इस हरकत को देख रहा हो.वो इस वक्त ऐसा महसूस कर रही थी कि वो इस कमरे मे अकेली नहीं कोई और भी उसके साथ है. इस सोच ने उसे और भी रोमांचित कर दिया. उसका चेहरा एक दम आग उगल रहा था और निपल्स तन कर डाइमंड की तरह हार्ड हो गये थे. आशना जानती थी कि अब वो नहीं रुक पाएगी. धीरे धीरे आशना के थाइस का फासला बढ़ता गया और एक वक्त ऐसा आया कि आशना की दोनो टाँगो के बीच काफ़ी जगह बन गई. आशना ने अपने बाएँ हाथ की छोटी उंगली अपनी पुसी की दर्रार मे चलानी शुरू कर दी. लेकिन उसकी पुसी के बाल उसे पूरी तरह उलझाए हुए थे. धीरे धीरे उसने बालों को एक साइड करके अपनी उंगली के लिए जगह बनाई और जैसे ही उसने दरार मे उंगली उतारने की कोशिश की वो दर्द से कराह उठी. एग्ज़ाइट्मेंट मे उसने उंगली ज़्यादा अंदर घुसा दी थी. आशना ने फॉरन उंगली बाहर निकाली और उंगली की तरफ देखने लगी. आशना मन मे सोचते हुए: यह छोटी सी उंगली अंदर घुसने मे इतनी तकलीफ़ करती है तो तब क्या होगा जब इस मे कोई अपना पेनिस डालेगा. यह ख़याल आते ही उसे वीरेंदर की याद आ गई. आज तक आशना ने सिर्फ़ अपने आप को ही प्यार किया था पर आज उसे एक दम वीरेंदर की याद आ जाने से उसके तन बदन मे आग बढ़ने लगी. आशना ने लाख कोशिश की कि वो वीरेंदर के बारे मे ना सोचे पर इस वक्त दिल- दिमाग़ पर हावी हो रहा था. वीरेंदर का ख़याल आते ही उसकी हथेली अपनी पुसी पर चलने लगी. जैसे ही आशना ने अपनी आँखें बंद की उसे वीरेंदर का चेहरा दिखाई दिया और बस इतना काफ़ी था उसे उसके अंजाम तक पहुँचाने के लिए. उसकी आस हवा मे 5-6 बार उठी और फिर धीरे धीरे उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा. जैसे ही आख़िरी धार उसकी पुसी ने छोड़ी आशना की आँखों के आगे बिहारी का चेहरा घूम गया. आशना ने डर कर एकदम आँखे खोल दी. धीरे धीरे उसने अपनी सांसो पर काबू पाया और फिर अच्छे से रज़ाई लेकर नींद की आगोश मे चली गई.

अपने ही घर मे आशना का अपने साथ यह पहला प्यार था. वो जानती थी कि ऐसे कई दिन आएँगे जब उसे अपना सहारा बनना पड़ेगा क्यूंकी आशना जब भी फ्री होती उसे मास्टरबेशन करने का मन करता. उसे देख कर कोई सोच भी नहीं सकता था कि इतनी भोली भली सी दिखने वाली लड़की सेक्स मे इतना इंटेरेस्ट रखती होगी.

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pata nahi kyo mujhe ye lagta hai ki kahani sabhi readers ko pasand nahi aa rahi hai . shayad isiliye kisi bhi reader ka koi response nahi mil raha hai . isse behatar hai main ye kahani yahi band kar dun .
 
चलिए दोस्तो इस पॉइंट को भी देख लेते हैं

पहला तो यह कि जब आशना ने रात को मैन दरवाज़े के खुलने की आवाज़ सुनी तो उस वक्त वो औरत दबे पाँव बिहारी के रूम मे घुस गई. उस औरत के रूम मे घुसते ही बिहारी ने जल्दी से कमरे का दरवाज़ा बंद किया और फिर टूट पड़ा उस औरत पर. बिहारी केवल एक अंडरवेर मे बैठ कर शराब पी रहा था और शराब के नशे मे चूर था. उसका लिंग तो आशना के झूलते हुए वक्षों को देख कर ही अकड़ने लग गया था.जब उस औरत ने कमरे में कदम रखा था तो बिहारी दरवाज़े की तरफ लपका और जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ उस औरत को अपनी गोद मे उठा कर नरम मुलायम बेड पर पटक दिया. दिखने मे वो औरत ज़्यादा उम्र की नहीं थी. कोई 36-37 साल की उम्र की वो औरत दिखने मे एक अच्छे घर से लगती थी. उसके ड्रेसिंग स्टाइल से यही लगता था कि वो काफ़ी मॉडर्न फॅमिली से बिलॉंग करती होगी. उस औरत ने बिहारी को रोकते हुआ कहा कि पहले काम की बात कर लें मेरे राजा.

फ्रेंड्स यहाँ से आगे मैं कुछ ऐसे वर्ड्स यूज़ करने जा रही हूँ जो मेरे नेचर मे तो नहीं पर कहानी को देखते हुए या आपके टेस्ट को ध्यान मे रखते हुए उन्हे यूज़ करना पड़ेगा. शायद इसके द्वारा मैं आप सब को बिहारी और उस औरत की मानसिक स्तिथि के अवगत करवा सकूँ और आप अपने मन मे उनकी एक छवि बनाने मे कामयाब हो सकें.

बिहारी: वो बातें भी होती रहेंगी, पहले इसे तो संभाल, यह कहते ही उसने अपना अंडरवेर उतार फैंका और उस औरत के मूह पर दे मारा.

बिहारी: देख साली पिछले दो दिन से तेरे नाम की मूठ मार मार कर यह अंडरवेर भी भर दिया पर तुझे इस पर दया नहीं आई.

उस औरत ने मुस्कुराते हुए कहा: तुम्हे देख कर लगता है कि तुम्हारा हमेशा खड़ा ही रहता है और यह कहकर बिहारी के आधे खड़े लंड को पकड़ कर कहने लगी, देखो तो क्या हाल बना रखा है तुमने इसका. बिहारी ने एक गरम सांस छोड़ी और उसकी ओर एक कदम बढ़ाया. एक कदम आगे आने से उसका लंड उस औरत के मूह से थोड़ा ही दूर रह गया. बिहारी अपना हाथ उसके सिर पर रखते हुए उसके मूह को अपने लंड के पास खींचने की कोशिस करने लगा. उस औरत ने कामुक नज़रों से बिहारी को देखा और फिर नज़रें उसके लंड पर रखकर अपने होंठों पर जीभ फेरने लगी.

बिहारी: ले खा जा साली, पूरा खा ले.

इतना सुनते ही उस औरत ने अपना मूह खोला और गप्प से उसका लंड अपने मूह मे ले लिया. बिहारी खड़े खड़े ही काँप गया. उसका लंड उस औरत के मूह मे अपनी औकात दिखाने लगा और कुछ ही सेकेंड्स मे वो अपनी पूरी औकात मे आ गया. उस औरत को लंड मूह मे रखने मे काफ़ी कठिनाई हो रही थी. 4" मूह के अंदर और करीब 2-2.5" बाहर रखते हुए वो अपना मूह आगे पीछे करने लगी. बिहारी तो जैसे सातवें आसमान मे उड़ रहा था. उसने आगे झुक कर उस औरत की कमीज़ मे हाथ डाल कर उसकी 36" तनी हुई चूचियाँ कस कर पकड़ ली. उस औरत ने भी पैंतरा बदला और उसके टॅट्टो को हाथो से मरोड़ने लगी.

बिहारी: धीरे से साली,

उस औरत ने लंड मूह से बाहर निकालते हुए कहा: इतने से ही डर गये क्या. फोन पर तो बड़ी बातें छोड़ रहा था.

बिहारी: फोन पर बातें छोड़ रहा था साली अब तुझे चोदुन्गा फिर देखता हूँ तेरा दम. यह कह कर उसने उस औरत को बेड से उठाया और उसकी कमीज़ का सिरा पकड़ कर उसे उतार दिया. कमीज़ के बाद उसने उस औरत को बाहों मे भर कर उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को नीचे सरका दिया.कुछ पलों के लिए वो औरत थोड़ी कसमसाई और फिर अपने आप को ढीला छोड़ दिया. बिहारी ने धीरे धीरे स्ट्रॅप्स पर दबाव बनाते हुए उसकी सफेद ब्रा उसकी कमर तक पहुँचा दी और उसके नंगे सीने मे उस औरत की चुचियों के नुकेले निपल्स धँस गये. बिहारी ने उसे और कस कर पकड़ लिया और उस औरत ने भी अपनी बाहों की गिरफात में उसे बाँध लिया. बिहारी ने पीछे से उसकी 38" गान्ड पर अपने हाथ रख लिए और उसे अपनी तरफ दबाने लगा. जिससे उसका 8" का लोड्‍ा उस औरत की चूत पर अपनी दस्तक देने लगा. वो औरत पूरी तरह से गीली हो गई थी. उसकी चूत से रस टपक कर उसकी पैंटी पूरी भिगो चुका था. बिहारी ने उसे एकदम पलटा दिया और उसकी पीठ से चिपक गया. उसने अपने होंठ उस औरत के कान के पिछले हिस्से पर रखे तो वो औरत और सिहर गई. उसकी आँखें बंद हो गई थी और होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर रही थी. बिहारी ने उसकी सलवार का नाडा खोल कर ढीला किया तो उसकी सलवार एक दम से उसके पैरो में गिर पड़ी. उस औरत ने एक कदम आगे बढ़ाया और सलवार को पैरों से आज़ाद कर के वो बेड की तरफ चल दी. अब वो सिर्फ़ एक लसेदर पैंटी मे रह गई और उसकी ब्रा उसकी कमर मे झूल रही थी.बिहारी ने उसे पीछे से पकड़ा और घुमा कर बाहों मे उठा लिया. बिहारी की ताक़त का अंदाज़ा इस से ही लग जाता है कि कैसे उसने एक औरत को अपनी बाहों मे उठा रखा था. उसे बेड तक लेजाने मे उसे थोड़ी भी दिक्कत ना हुई और फिर उसने उसे बेड पर पटक दिया. वो औरत तो बस किसी दासी की तरह उसकी हर हर्केत बर्दाश्त कर रही थी. बिहारी ने उसे बेड के किनारे पर खींच कर उसकी टाँगे घुटनो से मोड़ दी और खुद उसकी टाँगो के बीच मूह रखकर फरश पर बैठ गया.

बिहारी ने उसकी चूत की खुसबु की एक लंबी सांस ली और फिर धीरे से उसकी सफेद पैंटी को उसकी चूत के एक साइड पर कर दिया. एक बार के लिए तो वो औरत थोड़ा चिहुनकि पर फिर शांत पड़ गई. उसे आने वाले क्षण का इंतज़ार था. बिहारी को चूत चूसना सबसे ज़्यादा पसंद था. उसका बस चले तो वो पूरी रात चूत ही चूस्ता रहे. तभी उस औरत के हलक से एक छोटी सी चीख निकली जब उसे महसूस हुआ कि बिहारी ने अपने होंठ उसकी तपती हुई चूत पर रख दिए हैं. बिहारी पहले तो होंठों से उसकी चूत चूस्ता रहा और वो औरत अपनी सिसकारिओ को रोकने की नाकाम कोशिश करती रही. काफ़ी देर तक चूत चूसने के बाद वो औरत बोली " 69 मे आओ". बिहारी उसकी बात सुनकर ज़मीन से उठा और अपने कपबोर्ड से वीडियो कॅमरा लेकर उसके सर के पीछे आ गया. वो औरत भी सीधा हुई और अपनी टांगे खोल कर घुटनो से मोड़ ली. बिहारी बिल्कुल उसके सिर से पीछे खड़ा था. उस औरत ने अपने शरीर को थोड़ा पीछे खिसकाया और अपना मूह उसकी टाँगो मे फसा दिया. उस औरत ने झट से अपना मूह खोला और बिहारी के टॅट्टो को अपने मूह मे ले लिया. बिहारी इस के लिए तैयार नही था वो तो वीडियो कॅमरा की सेट्टिंग मे लगा था.

कॅमरा अड्जस्ट करने के बाद बिहारी ने उसे टेबल पर बेड की तरफ ज़ूम करके रखा और बेड के पास आकर बिहारी ने अपने दोनो पैर उसके कंधो के इर्द गिर्द रखे और अपने शरीर को झुकाने लगा. अपने लोड्‍े को ठीक उसके होंठों पर रखकर उसने अपना मूह उसकी चूत की तरफ बढ़ा दिया. बिहारी का लोड्‍ा अपने मूह मे लेते ही वो औरत किसी कुतिया की तरह उस पर बुरी तरह से टूट पड़ी. बिहारी ने भी अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत पर हमला शुरू कर दिया. काफ़ी देर तक एक दूसरे को चूसने के बाद बिहारी बोला. क्या लगती हो चूत पर आज भी वैसे की वैसे ही टाइट माल है साली.

उस औरत ने मूह से लंड निकालते हुए कहा कि मेरी चूत टाइट नहीं है यह तो तुम्हारा लोड्‍ा ही इतना बड़ा और मोटा है कि हर बार ऐसा लगता है कि मैं पहली बार चुद रही हूँ. बिहारी काफ़ी देर उसे इस मुद्रा मे चूस्ता रहा. उसके लंड मे उबाल आने लगा तो वो उसके उपर से हट गया और उसे उठाकर सोफे की दोनो साइड्स पर उसके घुटने रखकर उसे उल्टा बिठा दिया. बिहारी ने पलट कर अपने चेहरे को उसकी गान्ड के नीचे रखा और उसकी बड़ी गान्ड का सहारा लेकर सोफे से अपनी पीठ की टेक लगा ली जिस से उसका चेहरा सीधा उस औरत की चूत तक पहुँच गया. वो औरत तो बिहारी के इस आसन से निढाल हो गई और लगातार अपनी चूत उसके होंठों पर रगड़ने लगी.

करीब पाँच मिनिट तक ऐसे ही उसकी चूत चूसने के बाद जब वो औरत और बर्दाश्त ना कर सकी तो वो वहाँ से उठ खड़ी हो गई. बिहारी भी मन मार कर उठ गया. चूत चुसाइ से उसका मन कभी भरता ही नहीं. उस औरत ने बिहारी का लंड पकड़ा और उसे बेड की तरफ ले गई. बेड के पास उसे लेजा कर उसे पीठ के बल लिटा दिया और अपने होंठों पर जीब फिरने लगी. फिर उसने भी बेड पर अपने लिए जगह बनाई और बिहारी के लंड को चूसना शुरू कर दिया. बिहारी की आँखें बंद होने लगी. उसका लंड काफ़ी सख़्त हो गया और नसें भी उभर आई.

चूत चुसाइ से वो औरत तो पहले से ही बहाल थी. बिहारी भी अब और तड़पेने के मूड मे नहीं था. उसने बालो से पकड़ कर उसे अपने उपर खींच लिया और उस औरत ने अपने नाज़ुक हाथो से रास्ता दिखाते हुए उसका लंड अपनी चूत मे प्रवेश करवाना शुरू किया. लंड को अंदर लेते ही उस औरत ने ज़ोरदार तरीके से उसकी सवारी करनी शुरू कर दी पर बिहारी जैसे चूत के रसिया पर इसका कोई असर ना हुआ.

करीब 10 मिनिट की ज़ोरदार चुदाई के बाद वो औरत थकने लगी तो बोली,"मुझे अपने नीचे लो मैं थक गई हूँ".

इतना सुनकर बिहारी उपर से हटा और उसकी टाँगों मे आकर अपनी पोज़िशन ले ली. बिहारी ने अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया. यह तो शूकर है कि उपर दोनो नीद की गोलियाँ खाकर सो चुके थे वरना इस चीख से तो अब तक उनकी नींद टूट चुकी होती.

 


औरत: हरामी थोड़ा धीरे कर ना, बीवी थोड़े हूँ तेरी.

बिहारी: रानी कुछ टाइम की ही बात रह गई है फिर तू मेरी बीवी भी बनेगी.

औरत: ऐसा सोचना भी मत. मैं तो अपने पति के साथ ही रहूंगी. काम होने के बाद हम दोनो अलग हो जाएँगे. और फिर तभी मिला करेंगे जब मुझे तुम्हारे लोड्‍े की ज़रूरत पड़ेगी.

बिहारी: वाह साली, तुझे तो तेरे पति का लंड मिल जाएगा पर मेरा क्या. मुझे इस उम्र मे अब लड़की कहाँ से मिलेगी. चल कोई बात नहीं मैं अपना जुगाड़ कर ही लूँगा लेकिन कभी कभी टेस्ट चेंज करने तुझे बुला लिया करूँगा.

औरत: मेरे बस मे होता तो तुझे कभी छोड़ कर नहीं जाती पर समाज का क्या करूँ. इतनी इज़्ज़त कमाने के बाद ऐसी कोई हरकत करूँगी तो लोगों को शक हो सकता है हम दोनो पर, इसीलिए हम मिला तो करेंगे मगर ऐसे ही जैसे अभी मिलते हैं.

बिहारी लगातार धक्के लगाए जा रहा था. उस औरत ने भी अपनी गान्ड उठाकर उसके धक्कों का जवाब देना शुरू कर दिया था.

औरत: आज का दिन कैसा रहा हमारे प्लान का.

बिहारी: मैने उसके दिमाग़ मे बात डाल दी है, कुछ दिन तो वो नकारेगी फिर वो ज़रूर मान जाएगी, मुझे पूरा यकीन हैं.

औरत: इतना आसान नहीं है, वो भाई है उसका. इसके लिए हमे कल से ही एक और प्लान पर अमल करना होगा और उसने सारा प्लान बिहारी को समझा दिया.

बिहारी: साली तू बड़ी छिनाल है. बेहन को भाई से चुदवाकर ही रहेगी.

औरत: तभी तो हमारा सपना पूरा होगा. लेकिन मुझे एक बात का डर है

बिहारी ने सवालिया नज़रो से उसे देखा और धक्के लगाने जारी रखे

औरत: आशना अभी बहुत छोटी है या यूँ समझ लो कि वो अभी बच्ची है, सिर्फ़ 20 साल की ही तो है वो और वीरेंदर एक पागल घोड़ा. क्या आशना वीरेंदर को झेल पाएगी ?

बिहारी ने हैरानी से उसे देखते हुए पूछा " क्या मतलब"?

औरत: मैने खुद अपनी आँखों से हॉस्पिटल मे उसका ट्राउज़र उतार कर उसका लोड्‍ा देखा था ( जी हां वो औरत कोई और नहीं बीना ही है, डॉक्टर, बीना. आगे से मैं उसका नाम ही यूज़ करूँगी).

बिहारी: साली छीनाल, अपने सारे पेशेंट्स के लोड्‍े चेक करती हो क्या.

बीना: नहीं वो तो अभय ने मुझे बताया कि वीरेंदर के लोड्‍े की सील अभी तक टूटी नहीं है तो मुझे यकीन नहीं हुआ. इसलिए एक रात को मैने चेक किया तो वाकई उसके लोड्‍े की सील अब तक बरकरार है. इससे यह साफ पता चलती है कि ना तो उसने अभी तक मूठ मारी है ना ही कभी किसी लड़की को चोदा है.

बिहारी: मुझे तो लगा था कि वीरेंदर ने रूपाली को चोद दिया होगा पर वो तो ऐसे ही हाथ से निकल गई साली. (जी हां बिहारी जो के अनपढ़ होने का नाटक करता था उसने वीरेंदर की सारी डाइयरी पढ़ी थी और उस दिन भी जान भुज कर उसने यह डाइयरी वीरेंदर के कमरे मे बेड पोस्ट पर रख दी थी कि जब आशना वहाँ आए तो वो उसे पढ़े और वीरेंदर की ऐसी हालत जान कर वो उसके लिए परेशान हो ताकि बिहारी और बीना उसे अपने प्लान के मुताबिक ढाल सकें). बिहारी अब तक बीना को चोदे जा रहा था. बीना दो बार झाड़ चुकी थी पर बिहारी था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

बीना: आज क्या बात है आधा घंटा हो गया तुम रुकने का नाम नहीं ले रहे.

बिहारी अपने चेहरे पे कुटिल मुस्कान लाते हुए: जो दवाई मैं अपने दुश्मन को खिलाता हूँ आज थोड़ी सी मैने भी चख ली है.

बीना: क्या?.

बिहारी: हां, मेरी जान आज तो तेरा बॅंड बजा कर छोड़ूँगा.

बीना जानती थी कि बिहारी अभी जल्दी झड़ने वाला नहीं है. वो दवाई थी ही ऐसी कि एक मामूली आदमी भी बिना रुके किसी भी औरत को घंटो चोद सकता था.

बीना: मेरा तो बुरा हाल हो गया है. थोड़ी देर रुक जाओ, फिर बाद में कर लेना.

बिहारी: चुप चाप लेटी रह नहीं तो गान्ड भी चोद दूँगा. याद है ना वो दिन जब मैने पहली बार तेरी गान्ड मारी थी, उस दिन से लेकर आज तक तूने गान्ड को हाथ भी नही लगाने दिया.

बीना: गान्ड कोई ऐसे मारी जाती है जैसे तू उस दिन मार रहा था. कितनी बुरी तरह रगडी थी मेरी गान्ड तूने, मैं तो 4-5 दिन ठीक से बैठ भी नहीं पाई थी.

बिहारी: आज तो हमे अपने प्लान की ढाल भी मिल गई है, आज तो तेरी गान्ड बनती ही है.

बीना जो कि काफ़ी थक गई थी और उसकी चूत भी छीलनी शुरू हो गई थी अजीब सी कशमकश में पड़ गई थी. अगर "ना" करती है तो चूत का बुरा हाल हो जाता और अगर "हां" करती है तो गान्ड का. लेकिन उसकी चूत मे उठ रहे दर्द को देखते हुए उसे अपनी गान्ड देना ही बेहतर समझा.

बीना: चल आज इस खुशी के मोके पर तू मेरी गान्ड भी मार ले मगर तेल लगा कर और प्यार से, नहीं तो आज के बाद मेरी गान्ड को भूल ही जाना.

बिहारी तो जैसे एकदम खिल उठा. उसे गान्ड मारना बहुत पसंद था और वैसे भी बीना की गान्ड एकदम38" की गोल गदराई हुई गान्ड थी,

बिहारी: ठीक है चल कुतिया बन जा मैं तेल लेकर आता हूँ. इतना कह कर बिहारी उसके उपर से उठा और अपना लंड बीना की चूत से खींच लिया.

बीना ने राहत की साँस ली. बिहारी नंगा ही किचन मे गया और तेल एक कटोरी मे डाल कर ले आया. बिहारी ने ढेर सारा तेल उसकी गान्ड में डालकर उंगली से उसे खूब चिकना किया और फिर अपने लोड्‍े को तेल लगा कर भिड़ा दिया उसे बीना की गान्ड से. बीना का पहला गान्ड एक्सपीरियंस भी बिहारी के साथ काफ़ी दर्दनाक था उसे अपनी गान्ड को रिलॅक्स रखने में मुश्किल आ रही थी.

बिहारी: थोड़ा रिलॅक्स करो और यकीन रखो आज मैं तुम्हें गान्ड मे वो मज़ा दूँगा कि तुम हर बार मुझसे अपनी गान्ड मरवाने की विनती करोगी. बीना ने अपनी गान्ड के सुराख को ढीला छोड़ा और तकिये मे मूह छिपा लिया. उसने दाँतों से बेड की चद्दर को पकड़ रखा था और अपने हाथो से कस कर तकिये को पड़के हुए वो आने वाले पल के लिए तैयार थी.

 


बिहारी ने लंड का सुपाडा बीना की गान्ड के सुराख मे लगा कर हल्के हल्के दबाव डालना शुरू किया. हल्का हल्का दबाव डालने से और तेल की चिकनाहट से उसका सुपाडा बीना की टाइट गान्ड मे उतारने लगा. बीना दर्द से छटपटाने लगी पर यह दर्द अब तक सहन करने लायक था. जैसे ही लंड का सुपाडा एक दम से उसके गान्ड मे घुसा बीना का सर उछल कर उपर को हुआ और गान्ड पीछे दब गई जिससे बिहारी का लोड्‍ा और अंदर घुस गया.

बीना: बिहारी बस ऐसे ही आहिस्ता-आहिस्ता उफुफूफफफफफफफफ्फ़. थोड़ा रूको, सांस लेने दो अहााहह.

इस बार बिहारी ने कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई और वहीं रुक गया. वो बीना की गान्ड से हाथ नहीं धोना चाहता था. उसे बीना की गान्ड से बेहद प्यार था. ऐसी फैली हुई गान्ड देख कर एक बार अपने होश खो चुका था लेकिन इस बार वो काफ़ी सावधान था, बीना को थोड़ा रिलॅक्स होते देख कर उसने एक ज़ोर का झटका मारा और आधा लंड उसकी गान्ड की गहराई मे उतार दिया. बीना का सिर से लेकर कमर तक का हिस्सा कुछ देर हवा मे झूल गया मगर उसने कोई शिकायत नहीं की, शायद उसे भी मज़ा आना शुरू हो गया था.

बिहारी ने ज़्यादा देर ना करते हुए एक और ज़ोरदार शॉट मारा और जड तक अपने पूरा लंड बीना की तंग गान्ड मे घुसा दिया. बिहारी के बड़े बड़े टटटे बीना की चूत को चूम रहे थे. इस आख़िरी धक्के से बीना की गान्ड मे एक तेज़ दर्द की लहर दौड़ गई मगर इस मीठे दर्द ने उसे स्वर्ग मे पहुँचा दिया और वो एक बार फिर से झड़ने लगी. बीना तो पहले ही बिहारी के चोदने की कला की कायल थी लेकिन आज जिस तरह से बिहारी ने ताक़त और सूझबूझ से बीना की गान्ड मे अपना लंड उतारा था बीना तो जैसे स्वर्ग मे ही पहुँच गई. कुछ देर बाद बीना की गान्ड से सुपाडे तक लंड निकाल कर बिहारी ने एक और ज़ोरदार शॉट के साथ पूरा लंड पेल दिया. बीना तो हर धक्के के साथ आगे को खिसक जाती. बिहारी ने उसकी नाज़ुक गोल गान्ड को अपने हाथो से थाम कर उसकी सवारी करनी शुरू कर दी. बीना के टाइट छेद ने उसका लंड फँसा कर रखा था और उस पर बीना ने अपने सुराख को खोलना सिकोड़ना शुरू कर दिया जिससे बिहारी भी पागल हो उठा और उसने बीना की ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी. बीना मस्ती में कराह रही थी. अगर बिहारी पहली बार ही इतना सयम बरतते हुए उसकी गान्ड चोदता तो अब तक बीना कई बार उसे अपनी गान्ड दे चुकी होती.

बिहारी जैसा दमदार मर्द पाकर बीना धन्य हो गई थी. वहीं बिहारी भी बीना जैसी हसीन और हाइ सोसाइटी की औरत को पा कर सातवें आसमान पर था. उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे कभी कोई हाइ सोसाइटी की औरत भी मिलेगी, वो तो बस नौकरानियो को चोद कर ही खुश था, बीना जैसी औरत के बारे मे तो उसने सोचा भी नही था.

बीना: अब हमे जल्द ही कुछ करना पड़ेगा ताकि हम सारा माल हथिया सकें, मैं अब तंग आ गई हूँ इस रोज़ की ज़िंदगी से. उमर ढलती जा रही है, अब बस ऐश करनी है.

बिहारी: काम हो जाने के बाद आशना का क्या करना है?

बीना: तुम क्या कहते हो?

बिहारी: मैं तो चाहता हूँ कि वीरेंदर की मौत के बाद मैं उसे अपनी रखैल बना कर रखूं, साली बहुत गरम चीज़ है. क्या मम्मे और गान्ड पाई है साली ने.

बीना: कुत्ता कहीं का, जहाँ हड्डी देखी वहीं लार टपकना शुरू.

बिहारी: डार्लिंग तुम्हे जलने की ज़रूरत नहीं है, तुम्हारे हिस्से का प्यार तुम्हे मिलता रहेगा.

बीना: अपने हिस्से का प्यार तो मैं छीन ही लूँगी मगर मुझे इस बात का डर है कि कहीं वीरेंदर का लोड्‍ा लेने के बाद वो वीरेंदर से पहले ही ना मर जाए. उसका साइज़ कोई मामूली नहीं है.

बिहारी: अरे यार तुम बार बार उसके साइज़ को लेकर डर क्यूँ रही हो, कहीं तुम्हे उसे लेने का मन तो नहीं कर रहा. वैसे भी आज तक कोई औरत चुदने से मरी है क्या?

बीना: मैं तो मर ही जाउ उसके साइज़ से. ढीलेपन में भी कोई 6 इंच लंबा और 3.5" मोटा था. मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि खड़ा होने के बाद कम से कम 8-9" लंबा और 4-4.5" मोटा ज़रूर होगा. आशना की उम्र के हिसाब से यह उसके लिए बहुत बड़ा होगा. हां अगर वो पहले से खेली खाई होती तो फिर डरने की कोई बात नही होती, मगर मुझे यकीन है कि भाई की तरह बेहन भी पूरी कुँवारी है.

बिहारी: फिर तो आशना मेरे किसी काम की नहीं रहेगी.

बीना: क्या तुम सचमुच में आशना को रखैल बना कर रखना चाहते हो.

बिहारी: मैं तो यह सोच कर ही रोमांचित हो जाता हूँ कि एक 20 साल की लड़की जो कि एयिर्हसटेस्स है मेरे नीचे होगी और मैं उसे चोदुन्गा.

बीना की गान्ड चोदते चोदते बिहारी को करीब आधा घंटा हो चुका था. आशना का ख़याल आते ही वो उसे मन ही मन नंगा करने लगता है और बीना की ज़ोरदार चुदाई शुरू कर देता है. पिछले एक, सवा एक घंटे की चुदाई से बीना बहाल सी हो गई थी. उसमे अब बोलने की हिम्मत भी नहीं बची थी. वो बस गान्ड हवा मे उठाए बिहारी के झड़ने का इंतज़ार कर रही थी. बिहारी की स्पीड से वो समझ गई कि बिहारी करीब है.

बीना: यॅ, कम ऑन, कम ऑन रज्जा, भर दो अपना सारा रस आशना की गान्ड मे( बीना जैसी खेली खाई औरत ने ताड़ लिया था कि बिहारी के मन मे इस वक्त आशना का जिस्म घूम रहा है). मार लो उसकी कुँवारी नरम गान्ड और बना लो उसे अपनी रंडी.

इतना सुनते ही बिहारी के वीर्य का बाँध टूट गया और वो झर झर करता बीना की गान्ड में अपना लावा उगलने लगा. करीब डेढ़ मिनिट तक उसके लंड से वीर्य निकल कर बीना की गान्ड भरता रहा और फिर उसके बाद पहले बीना बेड पर और फिर उसके उपर बिहारी धडाम से गिर गया. इतनी ठंड में भी दोनो के शरीर पसीने से नहा गये थे. 10 मिनिट तक दोनो अपनी अपनी साँसे ठीक करने में लगे रहे. थोड़ी देर बाद बीना उठी और अटॅच्ड बाथरूम मे घुस गई. उसने अच्छे से अपने आपको को सॉफ किया. गान्ड और चूत को धोया और बाहर आ गई.

बिहारी उसे देखते हुए सोच रहा था कि कैसी किस्मत पाई है उसने पहले तो एक डॉक्टर. मिली चोदने को और अब कुछ ही दिनों मे उसकी झोली मे एक 20 साल की लड़की होगी जिसे वो दिन रात चोदता ही रहेगा.

बीना बाथरूम से बाहर आने के बाद अपने कपड़े पहनने लगी. बिहारी उसे देखे जा रहा था. एकदम साफ रंग और दाग रहित शरीर की मल्लिका अभी कुछ देर पहले उसके बेड पर नंगी लेटी हुई थी और वो उसे चोद रहा था. उसे अपनी किस्मत पर गुरूर हो रहा था. कपड़े पहनने के बाद बीना ने अपने बॅग से एक पॅकेट निकाल कर बिहारी को दे दिया.

बीना: यह लो और कल से काम शुरू कर दो. वीरेंदर की तरह आशना को भी इस पाउडर की पहले थोड़ी थोड़ी सी डोज ही देना ताकि कुछ ही दिनों में वो इसकी आदि हो जाए और फिर जैसे ही इसकी डोज बढ़ाई जाए तो उसके पास नंगी होकर वीरेंदर के पास जाने के सिवा और कोई रास्ता ही ना रहे. कुछ ही दिनों मे वीरेंदर के दमदार लोड्‍े से तुम्हे एक सील पॅक चूत चुदते हुए देखने को मिलेगी, और हां मुझे सारी रेकॉर्डिंग चाहिए आशना की चूत उधघाटन की.

बिहारी: जो हुकुम मेरी सरकार और उसने वो पॅकेट उससे ले लिया.

बीना: अभय 15 दिन के टूर पर है, तब तक मैं रोज़ कुछ रातो के लिए तुम्हारे पास आउन्गी तुम्हे अपनी गान्ड देने और अगर इस बीच ही हमारा प्लान काम कर गया तो हम दोनो ही मिलकर उनके मिलन को अपनी आँखों से देखेंगे और रेकॉर्ड करेंगे.

बिहारी केवल मुस्कुरा कर रह गया आने वाले दिनों को सोच कर.

बीना 3:30 बजे तक हॉस्पिटल मे अपने रूम मे लेटी हुई आगे के प्लान के बारे मे सोच रही थी.

 


अगली सुबह सबसे पहले जागने वालो मे बिहारी था बाकी दोनो तो नींद की गोलियो के असर से अभी भी सपनो की दुनिया में खोए हुए थे. जहाँ वीरेंदर पिल्लो को अपने साथ ऐसे चिपकाए सोया था जैसे कि वो किसी लड़की को अपने बदन के अंदर समा लेना चाहता हो वहीं आशना ने भी एक पिल्लो अपनी टाँगों के दरमियाँ ऐसे जाकड़ रखा था जैसे वो उसे अपना सारा रस पिला देना चाहती हो. सुबह के करीब 7:00 बजे बिहारी की नींद खुली. घड़ी की तरफ देखते ही वो हड़बड़ा कर उठा और नंगा ही बाथरूम में जाकर अपने सुबह के कृत्य करने मे मसरूफ़ हो गया. करीब 20 मिनिट मे वो नहा धो कर बाथरूम से बाहर निकला और कपड़े पहन कर कमरे को अस्त-व्यस्त छोड़ कर किचन की तरफ चल दिया चाइ बनाने.

बिहारी के कमरे मे कोई जाता नहीं था सो इसलिए उसने कमरे की हालत सुधारने का नहीं सोचा. चाइ को गॅस पर रखने के बाद वो उपर की तरफ पहुँचा वीरेंदर को जगाने.

जैसे ही वो वीरेंदर के दरवाज़े को नॉक करने को हुआ, उसे एक झटका लगा. उसने देखा कि आशना का दरवाज़ा हल्का सा खुला है (आपने पढ़ा ही होगा कि रात को जब आशना अपने कमरे मे आई तो वो सीधा आकर बेड पर लेट गई थी. वो दरवाज़ा लॉक करना भूल गई थी). बिहारी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई और वो दबे पावं वहाँ पहुँचा. उसने धीरे से दरवाज़े को धकेला तो दरवाज़ा खुलता चला गया. बिहारी ने झाँक कर देखा तो पाया कि आशना बेसूध होकर सोई है.

उसका पूरा शरीर रज़ाई से ढका है और वो काफ़ी सिकुड कर सो रही है. शायद ठंड के कारण वो ऐसी हालत मे सोई थी. बिहारी के दिमाग़ मे रात को बीना के द्वारा बताया हुआ प्लान दौड़ गया और वो फॉरन कमरे मे प्रवेश कर गया. तेज़ी से आगे बढ़ते हुए उसके पैर किसी चीज़ मे फँसे और वो मूह के बल गिरते गिरते बचा. लेकिन फिर भी वो हाथो के बल नीचे गिर ही गया .गिरते ही उसके हाथो मे किसी चीज़ का एहसाह हुआ.रूम मे हल्की हल्की रोशनी थी, उसने अपने हाथ से उस चीज़ को पकड़ा तो उसके हाथो मे एक ऐसी चीज़ लगी जिस से उसकी आँखें चमक उठी और उसने उस चीज़ को पास ले जा कर उसे चूम लिया. जी हां, वो आशना की ब्रा थी जो रात को उसने उतार कर फैंक दी थी. काफ़ी देर उसे चूसने के बाद उसे ध्यान आया कि वो गिरा कैसे.

तेज़ी से उठ कर देखा तो उसके लंड मे करेंट दौड़ गया. उसके पैरों मे पड़ी आशना की पैंटी चीख चीख पर गवाही दे रही थी कि आशना रज़ाई के अंदर बिल्कुल नंगी सोई है. बिहारी के दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया. उसका मन हुआ कि अभी रज़ाई मे घुस कर आशना से लिपट जाए और उस कमसिन कली को फूल बनाकर उसके जिस्म पर अपनी पहली मोहर लगा दे पर किसी तरह उसने अपने आप पर काबू पाया. पहले वो काम तो कर ले जो वो करने आया है.

उसने इधर उधर नज़र घुमाई और जल्द ही उसे अपनी मंज़िल मिल गई. एक मेज़ पर पड़े आशना के बॅग की तरफ वो लपका और उसके पास पड़े हॅंडबॅग को उठा कर उसने उसकी ज़िप खोली और उसके अंदर से एक छोटा सा हॅंड बॅग निकाल कर अपने कुर्ते की जेब मे रख लिया. बॅग की ज़िप बंद करके उसने वो बॅग दोबारा वही उसी जगह रख दिया. काम हो जाने के बाद बिहारी आशना के बेड की ओर मुड़ा तो उसे झटका सा लगा. आशना ने रज़ाई से अपनी गोरी बाजुए बाहर निकाल ली थी, कंधे से थोड़ा से नीचे तक उसका मखमली शरीर बिहारी की आँखों के सामने था. ऐसा पहली बार हो रहा था कि बिहारी के सामने एक खूबसूरत लड़की रज़ाई के अंदर बिल्कुल नंगी पड़ी थी पर वो हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था आगे बढ़ने की. बिहारी का पूरा शरीर काँपने लगा और इस से पहले कि वो अपने होश खो देता उसने तेज़ी से आशना की ब्रा और पैंटी उठाई और झट से कमरे के बाहर आकर धीरे से कमरे का दरवाज़ा वैसे ही बंद कर दिया जैसे वो पहले था. वो जानता था कि सुबह की ठंडी हवा मे आशना अब ज़्यादा देर तक सो नहीं सकेगी. दरवाज़ा बंद करके वो नीचे किचन मे आया तो चाइ तैयार थी. उसने गॅस बंद की और अपने कमरे मे जाकर अपनी अलमारी की सेफ मे वो हॅंड बॅग रख दिया और साथ ही अपने साथ लाई हुई आशना की पिंक जालीदार पैंटी और ब्रा भी रख दी.

अलमारी को बंद करके उसने सेफ की चाबी छुपा दी और दो कप मे चाइ डाल कर, कप को ट्रे मे रखकर वो उपर की तरफ चल पड़ा. वीरेंदर के दरवाज़े की ओर जाकर उसने वीरेंदर को आवाज़ लगाई.

बिहारी: छोटे मलिक उठिए चाइ तैयार है. कुछ देर वहाँ खड़े रहने के बाद उसने फिर आवाज़ लगाई और फिर धीरे से दरवाज़े पर नॉक की पर उसे कोई हलचल महसूस नहीं हुई. उसने इस बार ज़ोर से दरवाज़ा पीटा तो वीरेंदर की अलसाई भरी आवाज़ आई, काका "एक मिनिट अभी खोलता हूँ". इतना कहकर जब वीरेंदर उठा तो एक बार तो सर्द लहर से वो वहीं तिठुर कर रह गया. फिर उसे ख़याल आया कि रात को बाथरूम से आके तो वो बिल्कुल नंगा ही सो गया था. उसने झट से अलमारी से एक पॅंट और टी-शर्ट निकाली और उसे पहन कर दरवाज़ा खोल दिया.

वीरेंदर: आइए काका, वो आज नींद बहुत गहरी आई थी इस लिए आपकी आवाज़ सुन नही पाया.

बिहारी: कोई बात नहीं मालिक, यह लीजिए चाइ पीजिए मैं आशना बिटिया को भी जगा कर आता हूँ.

वीरेंदर: काका तुम ट्रे मुझे दे दो आशना को चाइ मैं दे देता हूँ.

इतना सुनते हे बिहारी को जैसे साँप सूंघ गया. उसने तो सोचा था कि वीरेंदर चाइ पीने के बाद बाथरूम चला जाएगा और वो आशना के कमरे मे जाके पहले तो उसके रूप को निहारेगा और फिर उसे जगा कर उसके नंगे शरीर का मुयायना करेगा पर यहाँ तो सारा खेल ही उलट गया.

वीरेंदर: क्या हुआ काका?

बिहारी (वर्तमान मे आते हुए): कुछ नहीं मालिक, जैसा आपको ठीक लगे और यह कह कर उसने चाइ की ट्रे वीरेंदर को थम दी.

वीरेंदर ने ट्रे साइड मे रखी और जल्दी से बाथरूम मे घुस गया. जैसे ही वीरेंदर बाथरूम मे घुसा, बिहारी मन मार कर नीचे जाने को हुआ तो एक बार फिर वो लड़खड़ाते हुए नीचे गिरने ही वाला था के उसने अपने आप को संभाल लिया. उसने सीधे खड़ा होकर देखा तो वीरेंदर के अंडरवेर मे उसका पैर फँसा हुआ था. बिहारी ने झल्ला कर अपने पैर को हवा मे उछाल दिया जिससे वीरेंदर का अंडरवेर सीधा एक मेज़ के उपर जाकर गिरा, आधा मेज़ पर आधा हवा मे झूलने लगा. बिहारी (मन में): साले दोनो रात को अंडरवेर उतार कर सोते हैं, क्या भाई -बेहन की जोड़ी है? बाथरूम मे पानी की आवाज़ बंद हुई ही थी कि बिहारी लपक कर कमरे से बाहर आ गया और चुपके से सीडीयो के पास बने एक छोटे से स्टोर मे जाकर वीरेंदर का आशना के कमरे मे घुसने का इंतज़ार करने लगा. वो देखना चाहता था कि वीरेंदर कैसा रिएक्ट करता है जब वो आशना को नंगी सोते हुए देखेगा

उधर जिस वक्त बिहारी वीरेंदर के रूम का डोर नॉक कर रहा था, उसी वक्त आशना की नींद खुल गई थी. उसका सिर काफ़ी दर्द कर रहा था. नींद खुलते ही उसे कल रात वाले सारे वाक्यात याद आ गये. उसका दिल बिहारी के लिए नफ़रत से भर गया और फिर रात को अपने शरीर के साथ खेली प्रेम क्रीड़ा का ख़याल आते ही उसे एक झटका लगा. वो तो बिल्कुल नंगी ही सो गई थी. वो फॉरन बेड से उठी और अपने कपड़े ढूँडने लगी. जैसे ही उसकी नज़र दरवाज़े पर पड़ी. आशना के दिल ने धड़कना बंद कर दिया था, उसे याद आया कि कैसे वो रात को कमरे मे आते ही बिस्तर पर गिर पड़ी और फुट-फुट कर रोने लगी थी. वो इतनी लापरवाह कैसे हो गई कि उसे दरवाज़ा लॉक करने का ख़याल ही नहीं रहा. कहीं कोई आ जाता तो?.

आशना ने झट से दरवाज़ा लॉक किया और अपने कपड़े ढूँडने लगी. सर्दी और शरम की वजह से वो कांप रही थी. आशना ने रात को उतारे कपड़ो पर ध्यान ना देते हुए जल्दी से बॅग से दो एक जोड़ी नये कपड़े और अंडरगार्मेंट्स का सेट निकाला और बाथरूम की तरफ भागी. बाथरूम मैं आकर उसने जल्दी से टवल लपेटा और चैन की सांस ली. आशना का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था. वो सोच रही थी कि आज ना जाने क्या हो जाता अगर वो टाइम पर ना जागती तो. अभी वो ब्रश करके टाय्लेट यूज़ करने ही वाली थी कि उसके दरवाज़े पर नॉक हुआ.

आशना ने गुस्से से चिल्लाकर कहा: क्या है काका?

एक पल के लिए तो वीरेंदर भी सहम गया, लेकिन फिर उसने कहा. आशना दरवाज़ा खोलो मैं हूँ "वीरेंदर", आओ दोनो चाइ पीते हैं. वीरेंदर की आवाज़ सुनते ही आशना का मन खिल उठा. आज वीरेंदर खुद उसके लिए चाइ लाया था. उसका चेहरा शरम से लाल हो उठा. उसने बड़े शर्मीले अंदाज़ मे कहा, " वीरेंदर मैं नहा रही हूँ थोड़ी देर मे तुम्हारे रूम मे ही आती हूँ. वीरेंदर उसे बाइ बोल कर अपने रूम मे चला गया.

वहाँ बिहारी की हालत ना खुश होने लायक थी और ना दुखी होने लायक. खुश वो इसलिए नहीं था क्यूंकी आशना ने दरवाज़े पर वीरेंदर को बिहारी समझ कर काफ़ी गुस्से से बात की थी और दुखी वो इस लिए नहीं था क्यूंकी जो वो देखना चाहता था वो वीरेंदर भी नहीं देख पाया था क्यूंकी आशना नींद से जाग चुकी थी और उसने दरवाज़ा भी लॉक कर दिया था.

बिहारी ने मन मे सोचा: फुदक ले साली अगर अपने लंड पर तुझे ना नचाया तो मेरा भी नाम बिहारी नहीं और वैसे भी कुछ दिन की बात ही रह गई है तब तक तो तेरी पैंटी मे ही मूठ मारूँगा और तेरे मम्मों से लगी तेरी अंगिया को चूस चूस कर खा जाउन्गा. बिहारी नीचे चला गया और थोड़ी देर बाद आशना भी तैयार होकर वीरेंदर के रूम मे चली आई.

आशना ने दरवाज़ा नॉक किया तो वीरेंदर ने उसे कहा कि " अंदर आ जाओ आशना, दरवाज़ा खुला है". आशना ने दरवाज़ा खोला और अंदर आ गई. आज वीरेंदर ने फुल स्लेव वाइट टी-शर्ट और ब्लॅक जीन्स पहनी थी और आशना भी एक टाइट वाइट टी-शर्ट और स्किन टाइट ब्लॅक जीन्स मे थी. दोनो एक दूसरे को देख कर चौंके और दोनो ही मुस्कुरा दिए.

आशना: लगता है आज सनडे के दिन यह हमारा ड्रेस कोड है.

 
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