बिहारी लगातार रागिनी के मम्मे दबाए जा रहा था और बीच बीच मे उन्हे मुँह से चूस भी लेता. रागिनी ने उसके लंड को अपनी चूत के उपर रखकर रगड़ना शुरू कर दिया.बिहारी एक पक्का खिलाड़ी था, वो जानता था कि रागिनी जैसी लड़की को जितना तडपा कर चोदेगा वो उतनी ही जल्दी उसकी गुलामी स्वीकार कर लेगी, आख़िर उसने आशना और बीना को अपने बिस्तर तक लाने का रास्ता भी तो सॉफ करना था. बिहारी चाहता था कि रागिनी उसकी किसी भी गतिविधि मे कोई काँटा ना बने और हर काम मे उसका साथ खुशी खुशी दे. रागिनी की मासूमियत, खूबसूरती, कातिल जवानी और सेक्स के प्रति इतना रुझान बड़ा काम आ सकता था. रागिनी सच मे सेक्स के प्रति काफ़ी रुझान रखने वाली लड़की थी. जिस बात से वो हमेशा डरती थी वो डर आज की रात हमेशा के लिए निकालने वाला था.और एक बार अगर किसी काम को करने का डर दिल से निकल जाए तो फिर तो उसे बार बार करने का दिल चाहता है. बिहारी भी चाहता था कि आज की रात ही रागिनी के दिल का डर भी निकाल दे और उसे एक ही रात मे इतना बेशरम बना दे कि वक्त आने पर वो किसी के भी सामने अपनी चूत परोस सके. हालाँकि इस बारे मे बिहारी ने बीना से कोई बात नहीं की थी लेकिन उसके दिल मे रागिनी को लेकर एक अलग साज़िश का अंकुर फुट चुका था.
रागिनी: प्लीज़ विराट, मैं मर जाउन्गी.
बिहारी -- देखो रागिनी मेरा यह पहली बार है और मुझे काफ़ी डर लग रहा है, पता नहीं तुम इसे ले भी पाओ या नहीं. देखो मुझे ग़लत ना समझना, मैं भी तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ लेकिन मुझे नहीं लगता कि मेरा लंड तुम्हारी चूत के लिए बना है.
रागिनी ने दयनीय नज़रो से बिहारी को देखा और बोली: डाल दो ना विराट, ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा, मैं चीखूँगी ही ना. तुम मेरी परवाह मत करना, मैं जितना मर्ज़ी चीखू चिल्लाऊ, तुम मुझे रौन्द्ते रहना, मैं तुमसे नाराज़ नही होउंगी.
बिहारी: यह डॉक्टर. बीना ने मुझे कहाँ फसा दिया है, ना वो मुझे तुमसे मिलाती और ना मैं तुम्हारा हुस्न देख कर तुमपर फिदा होता.
रागिनी: अब जो हो गया सो हो गया, अब मैं तुम्हारी पत्नी हूँ. मैं खुली टाँगो से आपको आमंत्रित कर रही हूँ "विराट, आओ और तोड़ दो मेरी सील, मार लो मेरी चूत".
रागिनी अब बिल्कुल बेशर्मी पर उतर आई थी. आख़िर एक गरम औरत सेक्स के नशे मे क्या क्या कर सकती है बिहारी अच्छे से जानता था. बिहारी ने ज़ोर से रागिनी के मम्मे दबाए तो रागिनी के हाथो से बिहारी का लंड छूट गया.
बिहारी (मन मे सोचते हुए): साली ने कितनी ज़ोर से पकड़ा था, मेरी तो सांस ही अटक गई थी.
बिहारी ने थोड़ा नीचे होकर रागिनी के पेट को चूमते हुए अपने तपते होंठ रागिनी की नाभि पर रख दिए. रागिनी के बदन मे तरंगे उठने लगी और उसका पूरा शरीर थर थर काँपने लगा. रागिनी का गला सूख चुका था. नाभि मे जीभ फिराते हुए बिहारी ने अपने लिंग को अड्जस्ट करते हुए अपना शरीर बेड पर टिका दिया और रागिनी की जांघे उठा कर उन्हे घुटनो से मोड़ कर उसके पैर बिस्तर पर टिका दिए. बिहारी के अगले कदम को सोच कर रागिनी ने शरम के मारे अपने आधे शरीर को कंबल से ढक लिया.इस वक्त बिहारी कंबल के अंदर उसकी टाँगो के बीच था. पेट के बल लेटे होने के कारण बिहारी की छाती के बाल रागिनी की कोमल योनि को तरंगित कर रहे थे और रागिनी की योनि का पानी बिहारी की छाती के बालो को भिगो रहा था.
बिहारी को अपनी छाती पर गीले पन का एहसास हुआ तो उसने सोचा: बेचारी कितनी गीली हो गई है, कहीं यह लंड ना मिलने से मर ही ना जाए. रागिनी की आँखों से आँसू बहकर उसके गालो से होते हुए उसके गले से नीचे बह रहे थे. वो चुदना चाहती थी पर उसका विराट उसे इस सुख से वंचित रख रहा था. वो एक दम खामोश हो गई थी. अपने इन्ही ख़यालो मे रागिनी खोई हुई थी कि कुछ ऐसा हुआ जिस से एक उसकी बड़ी बड़ी आँखे एक दम और खुल गई, उसका सिर पीछे को मूड गया और उसके लाल सुर्ख होंठ गोलाई लेते हुए "ऊऊऊऊऊऊओह " करके खुल गये.
बिहारी ने अपने होंठ रागिनी की योनि के होंठों पर रख दिए थे. रागिनी को यह एहसास सीधा उसे जन्नत मे ले गया और बिहारी ने यूँ तो कितनी ही चूतें चकी थी लेकिन इस अन्छुइ चूत मे तो बात ही कुछ और थी. वो पागल कुत्ते की तरह रागिनी की चूत पर कूद पड़ा, उसने यह भी ना सोचा कि रागिनी उसके इस हमले के लिए तैयार भी है कि नहीं. रागिनी की तो सांस ही अटक गई. काफ़ी देर बाद जब उसे सांस आई तो उसके होंठों से बस एक ही शब्द निकला "आआआआआआआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआहहहहहहहहहााअ आआआआआआआआअहह उूुुुुुुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ अहाहाआआआआआअहहाहह ब्ब्ब्ब्ब्बबबस्साब्स्सब्बबससाआआअस" और इतना कहते ही रागिनी की चूत का बाँध टूट गया.
बिहारी उस का सारा पानी पी गया. बिहारी रागिनी की कुँवारी चूत ऐसे चाट रहा था जैसे कोई बहुत दिन से भूखा उंगलियाँ चाट चाट कर खाना खा रहा हो. रागिनी ने कस कर तकिये को अपने दाँतों मे दबोच लिया.
बिहारी ने झट से कंबल एक तरफ फैंका और रागिनी की जाँघो पर नीचे की तरफ हाथ रखकर बिहारी ने उसके पैरो को हवा मे उठाया और रागिनी की कमर को हवा मे उठाकर उसकी चूत से लेकर गान्ड के छेद तक चाटना शुरू कर दिया.
बिहारी ने अपनी जीब रागिनी की चूत से भिड़ा दी लेकिन अन्चुदि चूत मे जीभ अंदर कैसे घुसती. रागिनी का शरीर काँपने लगा. बिहारी ने अपने खुरदुरे हाथ उसकी गान्ड पर फेरते हुए अपनी जीभ रागिनी की चूत पर चलानी जारी रखी और अपनी जीभ से ही उसकी चूत चोदने लगा. बिहारी की सख़्त जीभ रागिनी की नाज़ुक योनि के मुँह पर बार बार ठोकर मार रही थी और रागिनी के नितंब अपने आप हवा मे थिरकने लगे. बिहारी ने उस गुलाबी चूत पर आक्रमण तेज़ कर दिया तो रागिनी ने भी बिहारी की जीभ से ताल मिलाते हुए अपनी गान्ड उछालना शुरू कर दिया. बिहारी ने जब देखा कि रागिनी अपनी गान्ड उछालने लगी है तो उसने 4-5 बार उसकी नन्ही सी चूत पर उपर से नीचे अपनी जीभ फेरी और रागिनी की क्लाइटॉरिस को अपने होंठों मे लेकर उसे अपनी जीभ से चुबलाने लगा.
रागिनी जैसी कुँवारी अन्छुइ लड़की यह सब बर्दाश्त ना कर पाई और उसकी चूत से कमरस छलक उठा जिसे बिहारी ने चाट चाट कर सॉफ कर दिया. रागिनी निढाल होकर बेड पर गिर गई. शाम से उसकी चूत ने इतना पानी बहाया था कि उसके बदन मे अब जान ही नहीं रही थी. बिहारी ने उसे बिना चोदे ही निहाल कर दिया था. रागिनी के दिल मे बिहारी के लिए इज़्ज़त और प्यार और भी बढ़ गया था, रागिनी सोचने लगी कि विराट कितने अच्छे इंसान हैं, मेरे डर को देखते हुए उन्होने अपना लंड मेरे अंदर नहीं डाला और मुझे बिना चोदे ही निहाल कर दिया.
तभी उसके अंदर से आवाज़ आई "रागिनी तू इतनी सेल्फिश कब से हो गई, जिस इंसान ने तुझे सड़क से उठाकर अपने महल की रानी बनाया, तुझे इज़्ज़त दी और तेरे डर के कारण तुझे बिना चोदे ही कामसुख दिया, क्या तू उस इंसान को ऐसे हे तड़पता छोड़ देगी, धिक्कार है तुझपर रागिनी धिक्कार है.
बिहारी: रागी.
रागिनी: जी.
बिहारी: थक गई हो क्या?
रागिनी:हुउन्ण, प्यास भी लगी है.
बिहारी: आज सारी प्यास भुजा दूँगा तुम्हारी.
रागिनी: आअहह, विराट पानी पीना है, गला सूख गया है.
बिहारी: गन्ना चुसोगी???
रागिनी ने शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों से ढक लिया और "ना" मे गर्दन हिलाई.
बिहारी ने उठकर उसे पानी का ग्लास दिया तो रागिनी ने झट से उसे खाली कर दिया.
बिहारी: तुम तो बहुत प्यासी हो, लेकिन लगता है अब तुम मे जान ही नहीं रही.
रागिनी: विराट, पता नहीं क्यूँ पर बड़ी थकान महसूस हो रही है.
बिहारी:ठहरो मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने को लाता हूँ.
रागिनी: नहीं विराट, आप रहने दीजिए, मुझे बताइए मैं ले आती हूँ.
बिहारी:आज तुम कुछ काम नहीं करोगी, आज मैं तुम्हारी सेवा करूँगा और फिर मेवा खाउन्गा.
रागिनी: मैं तो धन्य हो गई आप को पति के रूप मे पाकर, आप जब चाहे मेरा मेवा खा सकते हैं.
बिहारी:भूख तो मुझे भी लग गई है, तुम आराम करो मैं कुछ हल्का सा लेकर आता हूँ.
रागिनी ने हां मे सिर हिलाया. रागिनी ने अपने शरीर को कंबल में ढका और बिहारी बाहर जाने लगा.
रागिनी: विराट, सुनिए.
बिहारी ने पलट कर रागिनी को देखा और पूछा: "क्या"??
रागिनी: वो आप बिल्कुल नंगे हैं, कुछ पहन लीजिए ना.
बिहारी: अपने ही घर मे कैसी शर्म और वैसे भी हमारे सिवा कोई और तो घर में है नही तो फिर अपनी ही बीवी से क्या शरमाना.
रागिनी(मुस्कुराते हुए): आप सच मुच बड़े बेशरम हैं.
बिहारी: वो तो मैं हूँ ही और देखो तुम्हे भी तो बना दिया ना मैने बेशरम.