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बिहारी ने लाइट बंद की और उसे अंधेरे में बस कदमों की आहट सुनाई दी.
थोड़ी देर बाद, आशना: बिहारी लाइट जला दो लेकिन ध्यान रखना कि कहीं इस बार तुम्हारी पिचकारियाँ ना छूट जायें.
बिहारी ने धड़कते दिल से लाइट ऑन की और फर्श की तरफ देखा. फर्श की तरफ देखते ही उसे झटका लगा.आशना वहाँ पर नहीं थी, तभी उसे आशना के खिलखिला कर हँसने की आवाज़ आई. बिहारी ने आवाज़ की तरफ देखा तो उसकी धड़कन रुकते रुकते रह गई और लंड से पिचकारी निकलते निकलते रुक गई. इस बार आशना साइड पर रखे हुए एक सोफे पर बिल्कुल उसी अंदाज़ मे लेटी थी जैसे की थोड़ी देर पहले वो फर्श पर लगे बिस्तर पर. इस बार उसके हसीन बदन पर नाइटी गायब थी और एक स्काइ कलर की बहुत ही शॉर्ट स्कर्ट उसने पहनी हुई थी जो कि उसके नितंबों को मामूली सा ढके हुए थी. इस अवस्था में बिहारी को आशना की गुलाबी रंग लिए हुए चूत भी दिखाई दे रही थी.
बिहारी: आआआअहह मालकिन बस करो अब और ना तडपाओ नहीं तो मेरा सच मे हार्ट फैल हो जाएगा.
आशना खिलखिलाकर हँसने लगी.
आशना: अभी से यह हाल है तो सोचो जो मैं आगे करने वाली हूँ, तुम तो सच मुच ही पागल हो जाओगे.
बिहारी: अब क्या करने का इरादा है तुम्हारा आशना.
आशना: बस देखते जाओ. लाइट बंद कर दो बिहारी.
बिहारी: में साहब रहने दो ना कहीं सच मच में पानी ना निकल जाए.
आशना: यह हमारा हुकुम है, लाइट बंद कर दो.
बिहारी ने एकदम से लाइट बंद कर दी. इस बार भी बिहारी को कदमों की आहट सुनाई दी. बिहारी का कलेजा मुँह को आने को था.
आशना: चलो अब लाइट जला दो और मार लो अपनी आशना की गान्ड.
बिहारी ने इस बार एक लंबी सी साँस ली और काफ़ी डरते हुए लाइट जलाई. लाइट ऑन करते हुए उसके हाथ कांप रहे थे. उसने जैसे ही लाइट ऑन की उसे अपने पीछे से आवाज़ आई. "आँखे बंद करके घूम जाओ बिहारी",
बिहारी ने कस कर आँखें बंद कर ली और घूम गया.
आशना: अब धीरे धीरे आँखें खोलो. लेकिन धीरे धीरे खोलना, फिर ना कहना कि मैने तुम्हे सचेत नहीं किया.
बिहारी ने धड़कते दिल से आँखें खोलना शुरू की, उसके माथे पर पसीना सॉफ देखा जा सकता था. जैसे ही बिहारी की नज़र आशना पर पड़ी वो हक्का बक्का रह गया और उसके लंड ने एक के बाद एक पिककारियाँ छोड़नी शुरू कर दी.
आशना उस वक्त इस अवस्था में बेड के पास खड़ी थी और उसकी गदराई गान्ड बिहारी की नज़रों के सामने थी. आशना का चेहरा पीछे की तरफ मुड़ा हुआ था और वो कामुक नज़रों से बिहारी को देख रही थी.
बिहारी के लंड से निकलते हुए लावे को देख कर आशना मुस्कुरा उठी और बोली: तू तो गया काम से बिहारी, अब कैसे चोद पाएगा आशना की गान्ड कुँवारी. बिहारी के लंड से लगातार वीर्य की बौछार हो रही थी और आशना अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए बोली: साले इतना माल बेकार कर दिया, थोड़ा दम रखता तो यह सारा माल मेरे किसी छेद में निकाल रहा होता.
रागिनी फर्श पर लगे बिस्तर पर पैट के बल लेट गई और बिहारी की तरफ देख कर सेक्सी आवाज़ में बोली "काका आशना को नहीं चोदोगे क्या"???? क्या आप भी इस शेर की तरह खोखले हो गये हो????
आशना के कामुक अंदाज़ से बिहारी की आह निकल गई लेकिन उसका लंड सुस्त पड़ने लगा था.
यह कह कर रागिनी बेड पर चढ़ गई और पेट के बल लेट कर अपनी कोहनियो पर अपने शरीर का वज़न रख कर बिहारी की तरफ देखने लगी और बोली: क्या आप भी वीरेंदर की तरह मुझे गरम कर के छोड़ देंगे.
बिहारी: मालकिन आपके इस अप्सरा समान सौंदर्य को देख कर मेरे लंड से रहा नही गया और आँसू बहा बहा कर अपनी व्याकुलता का परिचय देने लगा.
आशना: मेरी चूत भी तो कब से व्याकुल है ज़ालिम, अब इसका क्या करूँ.
बिहारी: मालकिन आप मेरे लोड्े को तैयार करो तब तक मैं आपकी चूत की खुजली मिटाने की कोशिश करता हूँ. यह कह कर बिहारी आशना की तरफ झपटा.
रागिनी ने झट से पलटा मारा और बिहारी बेड के उपेर जा गिरा.
आशना: इतना उतावला पन नहीं बिहारी. जा पहले अपने लंड को अच्छे से धोकर आ.
बिहारी: साली ज़्यादा नाटक ना कर वरना मेरे लंड का सारा माल तेरे मुँह मे छोड़ दूँगा.
आशना(डरने का नाटक करते हुए): माफ़ करना काका, वो क्या है ना कभी वीर्य से सना हुआ लंड चूसा नहीं ना तो इस लिए मुँह से निकला गया.
बिहारी: सुन ले रांड़, अगर मुझ से चुदवाना है तो मेरा माल भी पीना पड़ेगा.
आशना: नहीं नहीं काका यह मत करना, मैं मर जाउन्गी.
बिहारी: सोच ले नहीं तो चली जा मेरे कमरे से.
रागिनी: काका इतना नाराज़ क्यूँ होते हो अपनी आशना से, ले लूँगी आपका लंड अपने मुँह मे और पिला देना अपना सारा वीर्य मुझे लेकिन मुझे ताड़पता हुआ ना छोड़ो. आओ मेरी प्यास भुजा दो.
बिहारी: अब आई ना लाइन पर साली. चल आजा मेरे उपर और अपनी चूत मेरे होंठों पर टिका दे.
आशना ने अपनी टाँगें बिहारी के कंधे के इर्द-गिर्द कर के अपनी फड़कती हुई गुलाबी चूत बिहारी के होंठों पर रख दी और आआआः करते हुए गप्प से बिहारी का नरम पड़ चुका लोड्ा अपने मुँह में ले लिया.
आशना और बिहारी दोनो का बदन थोड़ी देर के लिए थिरका और फिर वो दोनो एक दूसरे को हराने मे जुट गये. आशना बिहारी के सुपाडे की चमड़ी को पूरी तरह से नीचे खींच कर उसके लिंग को अपने होंठों से चूस रही थी और अपनी जीभ से उसे चुबला रही थी. वहीं बिहारी भी अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसा कर कभी अपनी जीभ से आशना की क्लिट को चुबलाथा तो कभी जीभ लंबी करके उसे चूत में धकेल देता. रह रह कर दोनो के जिस्मों मे तरंगे उठ रही थी और वो अपना संतुलन खो रहे थे.बिहारी ने आशना की चूत से उंगली निकली तो आशना ने अपने नितंबों को थिरका कर इसका विरोध किया.