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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



आशना, वीरेंदर की बात का अंदाज़ा लगाते हुए मायूस हो जाती है और धीरे से बोलती है: तो क्या मैं सो जाउ????

वीरेंदर(आशना की तरफ बढ़ते हुए): नींद आई है तो सो जाओ, मुझे जो करना है मैं तो कर कर ही रहूँगा.

वीरेंदर की बात सुनकर आशना के चेहरे पर एक बार फिर से मुस्कान तैर जाती है. अंधेरे के बावजूद भी वीरेंदर आशना के चेहरे पर खिली मुस्कान महसूस लेता है और बोलता है: मुस्कुरा लो जितना मुस्कुराना है मेरी जान. आज तो जान निकाल कर ही रहूँगा तुम्हारी.

आशना: धत्त!!! क्या ऐसे भी किसी दुल्हन को डराया जाता है उसकी सुहाग सेज पर???

वीरेंदर(आशना के पास बेड पर बैठते हुए): मेरे ख़याल से पहले से आगाह कर देना ठीक रहता है. बाद मैं झगड़ने से तो अच्छा ही है.

आशना: मैं क्यूँ झगडूंगी अपनी जान से.

वीरेंदर: आशना की बगल में लेट जाता है और उसके सर के पास अपना हाथ ले जाता है. आशना की साँस एक दम अटक सी जाती है. उसकी आँखें एक दम बंद हो जाती है. तभी उसके कानो में क्लिकक की आवाज़ आती है और आशना की आँखें एक दम खुल जाती हैं. आँखें खुलते ही आशना की आँखें एक दम फैल जाती हैं.

बेड पोस्ट के दोनो एंड्स पर लगी दो ट्यूबलाइट्स झिलमिला उठती हैं, जिस कारण आशना और वीरेंदर एक दूसरे को सॉफ देख सकते हैं. आशना क्यूट सा मुँह बनाकर वीरेंदर की तरफ देखती है और वीरेंदर आशना की आँखो में देख कर कहता है: तुम्हे क्या लगा था कि मैं पहली ही रात में लाइट भुजा दूँगा????मेरी गुड़िया, आज के बाद तो हमारे बेडरूम की लाइट कभी बंद होगी ही नहीं.

आशना(शरारत भारी नज़रों से): तो फिर मुझे सोने केलिए किसी और कमरे में जाना पड़ेगा.

वीरेंदर: तुम कहीं भी जाओ लेकिन मेरा हक तो मुझसे कोई छीन ही नहीं सकता.

आशना(आँखें बंद करके): जी मेरे सरताज.

वीरेंदर: आशना.

आशना:हुउन्न्ञन्.

वीरेंदर: आओ ना.

आशना ने कस कर अपनी आँखें बंद कर ली और धड़कते दिल से वीरेंदर के अगले कदम का इंतज़ार करने लगी. थोड़ी देर तक वीरेंदर ने कोई हरकत नहीं की. आशना की बेचैनी बढ़ती जा रही थी.

वीरेंदर: आशना, सुनो तो.

आशना(आँखें बंद रखते हुए): जी.

वीरेंदर: मेरे पास आओ ना जान.

आशना के शरीर में कोई हरकत नही हुई.

थोड़ी देर बाद वीरेंदर बोला: गुड़िया, मेरे पास आ ना.

वीरेंदर के मुँह से इतना सुनते ही आशना वीरेंदर की तरफ करवट लेकर उस से लिपट जाती है. दोनो के बदन जब मिलते हैं तो जैसे एक दम से बिजली कड़कती है और दोनो के कान में दूर कहीं घंटियों का शोर सुनाई देता है. दूर दूर से घंटियों का शोर उन्हे एक दूसरे के और नज़दीक खींच रहा था जैसे वो इतने पास आ जाना चाहते हो कि इस शोर मे एक दूसरे की धड़कनों को सुन पाए. एक दूसरे को कस कर गले लगाने के बाद कब उनके होंठ एक दूसरे से मिले यह उन्हे पता ही नहीं चला. जी भर कर एक दूसरे के होंठो का रस चूसने के बाद जब उनकी साँसों का उफान उनके बस से बाहर हुआ तो दोनो सांस लेने के लिए एक दूसरे से जुदा हुए.

इस वक्त दोनो पीठ के बल बिस्तर पर सीधे लेटे हुए अपनी अपनी सांसो को नियंत्रित करने में लगे थे जबकि वीरेंदर का बाया हाथ और आशना का दाया हाथ एक दूसरे को ऐसे कस के पकड़े हुए थे जैसे कि वो अब कभी एक दूसरे से जुदा नहीं होंगे. काफ़ी देर तक अपनी साँसों को नियंत्रित करने के बाद जब आशना को होश आया तो उसने धीरे से चेहरे को घूमाकर वीरेंदर की तरफ देखा.वीरेंदर के चेहरे पर आए संतुष्टि के भाव देख कर उसके दिल को असीम आनंद मिला.

ठीक उसी वक्त वीरेंदर ने भी अपने चेहरे को घूमाकर जब आशना के चेहरे की तरफ देखा तो आशना के चेहरे पर आए नूर को देख कर उसके दिल में भी आनंद की लहरें उठने लगी.

आशना(नज़रें झुका कर): क्या देख रहे है वीर????

वीरेंदर: अपनी गुड़िया के चेहरे में आए नूर को देख रहा हूँ. देख रहा हूँ कि कितनी संतुष्टि है इन आँखो में, कितना नूर है इस चेहरे पर.

आशना: सब आपके साथ का असर है वीर. आपके बिना मैं बिल्कुल अधूरी हूँ.

वीरेंदर: और मैं तो यह सोच रहा हूँ कि अब तक मैं तुम बिन जी कैसे रहा था .

आशना: जो बीत गया, उसके बारे में सोच कर क्यूँ अपने दिल को दुखायें वीर. आज से हम एक हैं और अब हमे कोई जुदा नहीं कर सकता.

वीरेंदर: जानती हो, मैं तुम्हे अपनी पत्नी के रूप मैं पाकर बहुत खुश हूँ.

आशना: मैं आपको भैया के रूप में पाकर भी खुश थी और अब अपने जीवन साथी के रूप में पाकर तो धन्य हो गयी हूँ.

वीरेंदर: अच्छा. तो अब ज़रा यह बताएँगी कि आपको खुश ही रहना है या धन्य भी होना है.

आशना(मदहोशी में): मुझे लगता है कि हमे दोनो ऑप्षन्स एंजाय कर लेने चाहिए.

वीरेंदर ने आशना की तरफ सरक कर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपने से सटा लिया.

आशना: यह क्या कर रहे है वीर, मेरी ड्रेस खराब हो जाएगी.

आशना की इस बात को सुनकर वीरेंदर की पकड़ आशना पर और कस गयी.

वीरेंदर: अभी तो सिर्फ़ ड्रेस की हालत बिगाड़ रहा हूँ, आज रात तो पता नहीं क्या क्या बिगड़ने वाला है.

आशना: आहह, प्लीज़ छोड़िए मुझे वीर, यही ड्रेस मुझे शादी में भी पेहननी है.

वीरेंदर: तो क्या हुआ, मैं तुम्हे बिल्कुल ऐसी ही दूसरी ड्रेस ले दूँगा.

आशना: आप भी ना भैया, हमेशा बुद्धू ही रहोगे. भला शादी का जोड़ा कोई लड़की कैसे बदल सकती है. प्लीज़ थोड़ी देर के लिए छोड़िए, मैं थोड़ी देर में आती हूँ ना आपके पास.

वीरेंदर: अरे यार यह क्या बात हुई.

 


आशना(धीरे से हंसते हुए): धीरज रखिए भैया, आपकी ही हूँ और सारी उमर आपके पास ही रहना है.

वीरेंदर: जानता हूँ कि तुम मेरी हो लेकिन फिर भी तुम्हे इतने करीब पाकर अपने आप मैं कंट्रोल नहीं रख पाता हूँ मैं.

आशना: यह बात कहने के लिए थॅंक्स बट अभी प्लीज़ मुझे चेंज करने दीजिए उसके बाद जो जी में आए करिएगा, मैं बिल्कुल मना नहीं करूँगी.

वीरेंदर: पक्का ना???

आशना: प्लोमिश भैया. चेंज करने के बाद आपकी यह "गुलिया" आपको किशी भी काम के लिए मना नहीं कलेगी".

यह कह कर आशना ने एक बॅग उठाया और वॉश रूम की तरफ चल दी.

वीरेंदर: हाई ज़ालिम इतना मटक मटक कर मत चल, कहीं आज की रात कोई गुस्ताख़ी ना हो जाए.

आशना ने बिना पीछे मुड़े अपना चेहरा वीरेंदर की तरफ घुमाया, बॅग अपने कंधे पर पीछे की तरफ फैंका और बोली: जा जा आवारा आशिक कहीं का.

यह कह कर आशना वॉशरूम की तरफ मटक मटक कर चल दी.

वीरेंदर: हाई मर जावां तेरी इस अदा ते गोरी.

आशना को वॉश रूम में गये अभी कुछ ही देर हुई थी कि आशना का मोबाइल बज उठा. वीरेंदर ने आशना के सेल को उठा कर देखा और आशना से बोला: आशना, त्रिवेणी का फोन आया है क्या कहूँ उसे????

आशना: कहना क्या है, आपकी साली है, बात कर लीजिए. अगर मुझ से बात करनी हो तो उसे बोलना कि थोड़ी देर में काल करती हूँ.

वीरेंदर ने जैसे ही कॉल रिसीव करके फोन कान से लगाया, त्रिवेणी बोली: यार जीजू की बड़ी याद आ रही थी, बात करवा दे ना थोड़ी देर के लिए.

वीरेंदर, त्रिवेणी की बात सुन कर एक दम हैरान हो गया. उस से कुछ बोलते नहीं बना.

त्रिवेणी: जल मत यार, बात करवाने मैं तेरा क्या जाएगा.

वीरेंदर ने अपने आप को संभाला और मुस्कुराते हुए बोला: जी बोलिए साली साहिबा, इतनी रात को आपको हमारी कमी क्यूँ महसूस हुई???

वीरेंदर की आवाज़ सुनकर, त्रिवेणी एक दम बौखला गयी.

त्रिवेणी: जी, जी वो मैं वो जी मैं तो बस........

वीरेंदर: अरे क्या हुआ साली साहिबा, आप तो एक दम भीगी बिल्ली बन गयी. इतनी मुश्किल से आप के साथ अकेले बात करने का मोका मिला है और आप हैं कि शर्मा रही हैं. अरे प्यार का इज़हार शरमा कर नहीं खुलकर करना चाहिए.

यह सुनकर त्रिवेणी के गले से एक दम चीख निकल गयी. त्रिवेणी की चीख सुनकर वीरेंदर खिल खिलाकर हंस दिया.

वीरेंदर: यह क्या साली साहिबा, आपका तो शॉर्ट सर्क्यूट हो गया इतने से ही. अरे जीजू हैं आपके, कुछ तो हक़ बनता है हमारा.

त्रिवेणी ने जब देखा कि वीरेंदर उसका मज़ाक उड़ा रहा है तो झट से अपने आप को नियंत्रित करते हुए बोली: क्या जीजू एकलौती साली हूँ आपकी और आप उसका भी मज़ाक उड़ा रहे हैं. सोच लीजिए, अगर साली नाराज़ हो गयी तो फिर तो हमारी बहना से भी हाथ धोना पड़ सकता है.

वीरेंदर: ना साली साहिबा ना, ऐसा ज़ुल्म मत करना. कितने अरसे बाद जाकर एक लड़की मिली है वो भी हाथ से निकल गयी तो मैं तो किसी को मुँह दिखाने लायक भी नहीं रहूँगा.

वीरेंदर की बात सुनकर त्रिवेणी खिलखिलाकर हंस दी.

त्रिवेणी: आब आए ना सही लाइन पर.

वीरेंदर: लाइन पर ना आऊ तो क्या करूँ, भगवान ने इतनी सेक्सी और हॉट साली जो दी है तो उसे खोना थोड़े ही चाहूँगा.

त्रिवेणी: कहाँ है आशना, ज़रा उसे भी तो बताऊ कि जीजू मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हैं.

वीरेंदर: अपनी बहना से बात करनी है तो थोड़ा वेट करना पड़ेगा. वो अभी वॉश रूम मे है.

त्रिवेणी: वॉश रूम????क्या किया अपने मेरी बहना के साथ जो इस वक्त उसे वॉश रूम जाना पड़ा.

वीरेंदर: अपनी एक लौति साली की कसम अभी तक कुछ नहीं किया लेकिन.......

त्रिवेणी : लेकिन क्या जीजू.

वीरेंदर: अरे यार, तुम लेकिन भी नहीं समझती.

त्रिवेणी: यू मीन जीजू कि आप दोनो............ वाउ, आशना ईज़ सो लकी.

वीरेंदर: अभी भी टाइम है, हां कर दो. उसकी जगह तुम भी लकी हो सकती हो.

त्रिवेणी: नो थॅंक्स बट थॅंक्स फॉर दा ऑफर. मुझे हमेशा दुख रहेगा मगर मैं किसी और को अपना दिल दे चुकी हूँ यार.

वीरेंदर: वैसे तुम दोनो की जोड़ी तो एक दम सुपर्ब है.

त्रिवेणी: थॅंक्स, यॅ आइ नो, आइ आम वेरी मच लकी टू गेट हिम ऐज माइ लाइफ पार्ट्नर..

तभी वॉशरूम से आशना की आवाज़ आती है.

आशना: वीर, ज़रा मेरे लिए दूसरे रूम से खाना ला दोगे, मुझे बूख लग रहा है.

त्रिवेणी(आशना की आवाज़ सुनकर): जीजू ज़रा इसे बोल दीजिए कि आज की रात खाना कम ही खाए.

वीरेंदर: ऐसा क्यूँ यार?????? तुम्हारी बहना भी मुझे ऐसी ही कुछ हिदायत दे रही थी.

त्रिवनेई: चलो एक डॉक्टर. होने के नाते मेरी एक सलाह मुफ़्त में आपके लिए.

वीरेंदर: बोलिए डॉक्टर. साहिबा.

त्रिवेणी: "खाली पैट मुर्गा ज़्यादा देर तक लड़ सकता है" और यह कह कर त्रिवेणी ने फोन काट दिया.

वीरेंदर हैरान सा कभी मोबाइल की तरफ देखता तो कभी त्रिवेणी की कही हुई बात का मतलब निकालने की कोशिश करता. जैसे ही उसे त्रिवेणी की बात समझ आई, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. वीरेंदर( मन में): थॅंक्स साली साहिबा फॉर दा इन्फर्मेशन.

 


वीरेंदर ने फोन को बेड पोस्ट पर रखा और दूसरे रूम में रखा खाने का पॅकेट लेने चला गया. जैसे ही वीरेंदर रूम से बाहर निकला, आशना ने वॉशरूम का दरवाज़ा खोला और तेज़ कदमों से बेड की तरफ भागी. बिस्तर पर आकर उसने झट से एक पिंक कलर की रेशमी चद्दर जो कि बेड के सिरे पर अच्छी तरह से फोल्ड करके रही हुई थी, उठाई और उस से अपने बदन को कवर किया और फिर बेड पोस्ट पर रख अपने मोबाइल को उठाकर त्रिवेणी का नंबर. डाइयल कर के आराम से तकिये पर सर रख कर लेट गयी.

थोड़ी देर बेल बजने पर त्रिवेणी ने फोन रिसीव किया और रिसीव करते ही बोली: जीजू थॅंक्स कहने की कोई ज़रूरत नहीं है, यह तो मेरा फ़र्ज़ था आपको बताना कि आप मेरी बहना को खुश कैसे रख सकते हैं.

आशना(हैरानी से): क्या????क्या बताया तुमने वीरेंदर को???

त्रिवेणी: ओह शिट!!! आज का टाइम ही खराब है. पहले आशना समझ कर ज़ीजु से उल्टा सीधा बोल दिया और अब जीजू साली का राज़ बहना के सामने खुल गया.

आशना(हंसते हुए): ऐसी कॉन सी खिचड़ी पक रही है जीजा और साली में???

त्रिवेणी: हम जीजा साली में तुम ना ही आओ तो ठीक है वरना जीजू ने ऑफर तो दे ही दी है मुझे.

तभी वीरेंदर रूम में एंटर करता है.

आशना(वीरेंदर की तरफ देखते हुए, त्रिवेणी से): ऐसी क्या ऑफर दे दी तुम्हे वीर ने???

त्रिवेणी: आए हाए, जीजू अब वीरेंदर से वीर हो गये.

आशना का चेहरा एक दम गुलाबी हो गया.

त्रिवेणी: रहने दे रहने दे बच्चू, जीजू ने मुझे सब बता दिया है. चल "ऑल दा बेस्ट फॉर युवर न्यू लाइफ".

आशना(शरमाते हुए): थॅंक्स, आइ विल कॉल यू टुमॉरो.

त्रिवेणी: अच्छा अब रखती हूँ.

आशना: बाइ.

त्रिवेणी: अच्छा सुन, जाते जाते एक फ्री की अड्वाइज़ ले ले. इस से पहले कि आशना कुछ बोलती त्रिवेणी बोली: जम कर साथ देना जीजू का, कल सुबह अगर जीजू से तेरी कोई शिकायत आई तो फिर मैं साली होने का हक़ अदा करने से पीछे नहीं हटूँगी. यह कहते ही त्रिवेणी ने फोन काट दिया.

आशना के चेहरे के बदलते रंग को देख कर वीरेंदर मंद मंद मुस्कुरा रहा था. आशना ने फोन साइड पर रखा और बोली: बड़ी बातें हो गयी जीजू साली में. सुना है कि काफ़ी ऑफर्स भी दे दिए गये.

वीरेंदर: हमारा बंपर प्राइज़ तो बस आपके लिए ही है.

आशना: अच्छा जी. मेरे पीछे से अपनी साली के साथ फ्लर्ट और मेरे सामने आते ही सिग्नल मेरी तरफ.

वीरेंदर: अब क्या करूँ जब तक सही जागे कनेक्षन नहीं बनेगा तब तक तो आगे पीछे से सिग्नल कॅच होते ही रहेंगे ना. अच्छा छोड़ो यह सब बातें और खाना खा लो नहीं तो ठंडा हो जाएगा.

आशना: लेकिन मुझे तो भूख ही नहीं है.

वीरेंदर: हैं???? लेकिन तुमने ही तो कहा था.

आशना खिल खिला कर हंस दी.

वीरेंदर: ओ तेरी, तो इसका मतलब मुझे एक साजिश का शिकार बनाया गया है ताकि मेरी गुड़िया वॉश रूम से निकल कर बिस्तर तक आराम से आ सके और बीच रास्ते में उसके साथ कोई छेड़खानी ना हो.

आशना ने वीरेंदर को ठैन्गा दिखाया और हंसते हुए वीरेंदर को चिडाने लगी.

आशना(हंसते हुए): कहा था ना कि आप बुद्धू हो.

वीरेंदर: कंप्लीट्ली अग्री वित यू माइ डार्लिंग. लेकिन याद करो एक दिन तुमने मुझे जंगली और लोफर भी कहा था. बुद्धू तो तुमने प्रूव कर ही दिया है, बाकी की क्वालिटीस मैं खुद ही प्रूव किए देता हूँ. यह कह कर वीरेंदर ने खाने का पॅकेट टेबल पर रखा और आशना की आँखो में देखते हुए अपनी अचकन की हुक्स खोलने लगा.

आशना ने शरमाती नज़रों से धीरे से गर्दन ना में हिलाई.

वीरेंदर: सॉरी, मैं मजबूर हूँ गुड़िया. अब मुझे अपने आप पर लगाए इल्ज़ाम प्रूव करने ही होंगे.

 


आशना ने शरम से अपनी आँखें बंद कर ली. सारे कमरे में बस उसे अपने दिल की धड़कने और वीरेंदर के कपड़ों का शोर सुनाई दे रहा था. थोड़ी देर बाद उसे वीरेंदर के कपड़ों का शोर आना बंद हो गया. आशना के दिल की धड़कन एक दम बढ़ गयी. आँख बंद रख पाना उसके लिए बहुत मुश्किल हो रहा था मगर उसकी आँख खोलने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी.

वीरेंदर के कदमों की आहट धीरे धीरे बढ़ रही थी जिस से वो अनुमान लगा सकती थी कि वीरेंदर उसके करीब आ रहा है. आशना ने चद्दर को अपने बदन के नीचे दबा रखा था.

लाल चूड़े से सजी गोरी बाहें चद्दर से बाहर चद्दर को कस कर पकड़े हुए थी. आशना के जिस्म में तरंगे उठने लगी. इस वक्त वीरेंदर आशना के बिल्कुल पास पहुँच चुका था. जैसे ही आशना को बिस्तर के हिलने का एहसास हुआ, गुलाबी रंग उसके चेहरे से लेकर उसके पाँव तक बिखर गया.

बिस्तर पर बैठने के बाद वीरेंदर बोला: तो फिर कहाँ से शुरू करूँ मैं अपनी गुड़िया को अपनी क्वालिटीस जताना.

आशना के होंठो पर हल्की सी मुस्कान आ गयी लेकिन उसके लबों से कोई शब्द नहीं निकल पाया.

वीरेंदर: लगता है मुझे खुद ही पहल करनी पड़ेगी, मेरी गुड़िया तो डर के मारे दुब्कि पड़ी है.

यह कहते ही वीरेंदर ने आशना के हाथों से चद्दर का एक सिरा पकड़ लिया. आशना ने घबरा कर एक दम आँखें खोली और वीरेंदर की तरफ मदहोश आँखो से देखते हुए बोली: प्लीज़.

वीरेंदर: डॉन'ट वरी, आइ विल डेफनेट्ली प्लीज़ यू.

आशना ने अपनी बड़ी बड़ी आँखे खोलकर वीरेंदर की तरफ देखा और जैसे ही उसे वीरेंदर की बात का मतलब समझ आया, झट से बोली: जी नहीं, मेरा कहने का मतलब है कि प्लीज़ ऐसा मत करो.

वीरेंदर: भाई वाह!!! सुहाग रात है और बेगम साहिबा बोल रही हैं कि कुछ मत करो. चलो जो बेगम साहिबा की मर्ज़ी, अब ज़्यादा ज़ोर ज़बरदस्ती भी की तो शायद कल से एक कमरे में सोना भी दुश्वार हो जाए. हम तो चले सोने.

यह कहकर वीरेंदर जैसे ही बस्तर से उठने को हुआ, आशना ने झट से वीरेंदर का हाथ पकड़ लिया और बोली: हाई राम, आप तो सच में बड़े भोले हो.

वीरेंदर(आशना की तरफ देखते हुए): तो और क्या करूँ, तुम्हे दुखी थोड़े कर सकता हूँ.

आशना ने वीरेंदर के हाथ को खींच कर उसे अपने पास लिटा दिया और अपनी गोरी बाहें वीरेंदर के गले में डाल कर अपने से सटाते हुए बोली: मेरे शोना भैया, अपनी गुड़िया को दुखी देख भी नहीं सकते और उसे खुश करते भी नहीं.

वीरेंदर ने झट से अपना चेहरा उठाकर आशना की नज़रों में देखा और भोला सा चेहरा बना कर बोला: रहने दो जान, तुम शायद मेरी गुस्ताखियाँ बर्दाश्त ना कर पाओ. मैं तुम्हे दर्द नहीं देना चाहता.

आशना ने मदहोशी में आँखें मूंदते हुए कहा: अब इस दर्द की ख्वाहिश बस आप से ही है वीर. ठुकराइए मत और हक से अपने अरमान पूरे कीजिए.

वीरेंदर: अरमान???? बस मेरे ही अरमान हैं, तुम्हारे कोई अरमान नहीं हैं इस रात तो लेकर गुड़िया.

आशना: बहुत से अरमान हैं वीर और मेरा सबसे बड़ा अरमान इस वक्त मेरी बाहों में है.

आशना के पूरे समर्पित रूप को देख कर वीरेंदर ने उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा. वो जानता था कि आशना उसके लिए कुछ भी कर गुज़रेगी. वीरेंदर ने अपनी बाज़ू उठाकर आशना की कमर पर रखी और उसे अपनी तरफ पलट कर अपने से सटा लिया.

वीरेंदर: लव यू गुड़िया, लव यू मोर दॅन एनितिंग इन दिस वर्ल्ड.

आशना: मी टू वीर, आप के सिवा मेरा और है ही कॉन इस दुनिया में. मेरा तन और मेरा मन बस आपके लिए ही है.

वीरेंदर ने अपनी एक टाँग उठाकर उसका घुटना आशना के हिप्स पर रखा और उस से चिपक गया जिस से उसका जागृत अवस्था में आया हुआ लिंग आशना की नाभि में चुभने लगा.

आशना ने शरमा कर वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: यह शैतान क्यूँ मुँह उठाए खड़ा है???

वीरेंदर: शायद यह किसी को ढूँढ रहा है.

वीरेंदर ने अपने हाथ के दबाब से आशना को अपने साथ सटाया तो आशना आह कर उठी.

आशना: अया, समझा दीजिए इसे अभी मंज़िल बहुत दूर है. बहुत से बंधन हैं अभी इसकी राह में.

वीरेंदर: चिंता की कोई बात नहीं, आज सारे बंधन तोड़ कर यह अपनी मंज़िल में समा जाएगा.

आशना के होंठो से एक हुक सी निकली. वीरेंदर का हाथ आशना की कमर से लेकर कुल्हों तक मर्दन कर रहा था. आशना मदहोशी की दुनिया में खो चुकी थी. मदहोशी में आकर उसने वीरेंदर के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और ज़ोर लगा कर उन्हे चूसने लगी.

प्यार के इस उफान में किसने किसके होंठो को कितनी बार काटा यह उन्हे होश नहीं था बस दोनो एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश में ऐसे हो गये थे जैसे बहुत दूर से भाग कर आए हो. जैसे ही आशना ने साँस लेने के लिए अपने आपको पीठ के बल किया, वीरेंदर ने अपना हाथ आशना के दाए उभार पर रख कर ज़ोर से दबा दिया.

आशना अभी अपनी सांस काबू भी नहीं कर पाई थी कि वीरेंदर की इस हरकत ने उसकी साँसों की रवानगी ही रोक दी. आशना का बदन एक दम अकड़ गया और उसका बदन असीम आनंद में गोते खाने लगा. वीरेंदर ने अपने मर्दाना हाथों से चद्दर के उपर से ही आशना के दुग्ध कलश का मर्दन शुरू कर दिया. आशना, आनंद के गोते खाकर जैसे ही धरती पर वापिस लौटी तो हक़ीकत जान कर वो शरम-ओ-हया से दोहरी हो उठी.

 


वीरेंदर ने आशना को एक बार फिर से अपनी तरफ पलटा और एक टाँग उसपर चढ़ा कर आशना के बाए उभार पर अपने होंठ रख दिए. आशना के लिए यह सब असहनीय था. आशना के जिस्म में तरंगों का संचार एक दम बढ़ गया था. आवेश में आकर उसके अपने बदन से चद्दर हटा कर दूर फैंक दी. चद्दर हटते ही आशना का अर्ध नग्न यौवन देख कर वीरेंदर की आँखें चुन्धिया गयी.

एक छोटे से पारदर्शी लिबास में लिपटी आशना की संगमरमरि काया किसी का भी कलेजा मुँह में लाने के लिए काफ़ी थी. आशना के बदन से लिपटा हुआ गहरे गुलाबी रंग का लिबास उसके घुटनों से उपर तक ही था जो कि उसकी कमर से एक पतली सी डोरी से बँधा हुआ था. कंधों को ढक पाने में असमर्थ लिबास इस वक्त आशना के बदन से लिपट कर अपने आप को गौरर्वान्वित महसूस कर रहा था.

लिबास के अंदर आशना ने अपनी देह के कामुक अंगों को एक बहुत ही महीन लाइनाये से ढका हुआ था. लाइट पिंक कलर की लाइनाये आशना के बदन से ऐसी चिपकी थी कि देखने वाला एक बार में धोखा खा जाए कि आशना अपने पूरे नग्न रूप में है. आशना के इस कामुक रूप को देख कर वीरेंदर भी कहाँ अछुता रहने वाला था.

अपनी आँखो से अपनी गुड़िया के अर्धनग्न जिस्म को देख कर उसे अपने भाग्य पर गर्व हो रहा था. आशना के कामुक रूप को देख कर वीरेंदर के लिए रुक पाना अब नामुमकिन था. वीरेंदर, झट से उठा और आशना पर झपट पड़ा.

आशना: आह, धीरे वीर, आपकी ही हूँ. हमेशा हमेशा के लिए आपकी गुड़िया.

आशना की बातें वीरेंदर के लिए आग मे घी का काम कर रही थी. आशना ने अपनी टाँगे खोल कर वीरेंदर के शरीर को अपनी गिरफ़्त मे कस लिया . वीरेंदर के दोनो हाथ अब आशना के उभारों को अपनी गिरफ़्त मे ले चुके थे और आशना उसके नीचे दबी कसमसा रही थी. वीरेंदर ने अपने हाथों का जादू चलाते हुए आशना के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और अपने निचले शरीर को भी आशना की टाँगो के बीच रगड़ने लगा. इस तिहरी मार से आशना भी एक दम आवेश मे आ गयी और उसकी कमर खुद ब खुद हवा में झटके खाने लगी. इस बार स्मूच का सिलसिला ज़्यादा देर तक ना चल सका.

कारण: दोनो में उत्तेजना और बेकरारी इतनी बढ़ गयी थी कि अब एक दूसरे के होंठों का रस चूसने मे किसी को दिलचस्पी नहीं थी.

वीरेंदर ने अपने हाथों की पकड़ जैसे ही आशना के उभारों पर मज़बूत की तो आशना तड़प उठी और अपनी कमर हवा मे उठाकर एक दम धनुष की तरह अकड़ गयी. चरम सुख मे लिप्त आशना को यह होश भी नहीं रहा कि अपने साथ उसने वीरेंदर को भी हवा मे उठा रखा है. जैसे ही चरम सुख के घेरे से वो बाहर आई, आशना के मुँह से निकला: उई माँ, मेरी कमर. मर गयी मैं वीर, पागल कर दिया है आपने मुझे.

वीरेंदर, आशना के सीने पर सर रख कर: कमर की याद अब आई है, तब नहीं सोचा जब मुझे भी अपनी कमर पर झूला झूला रही थी.

आशना ने प्यार से वीरेंदर की पीठ पर मुक्का मारा और बोली: सच में बहुत बेशरम हैं आप वीर. मेरी जान निकल रही है और आपको मज़ाक सूझ रहा है.

वीरेंदर आशना के सीने पर कुछ देर खामोश लेटा रहा. थोड़ी देर बाद वीरेंदर बोला: गुड़िया.

आशना: जी.

वीरेंदर: तुम बहुत हसीन लग रही हो इस ड्रेस मे.

आशना(मदहोशी में): बस हसीन लग रही हूँ???

वीरेंदर ने आशना के सीने से सर उठा कर आशना के चेहरे की तरफ देखा और बोला: अभी और ज़्यादा तारीफ करने के मूड में नहीं हूँ. कहीं ज़्यादा तारीफ करके मैं और ज़्यादा एग्ज़ाइटेड ना हो जाउ.

आशना: हटो, गंदे कहीं के . आपको तो तारीफ करना भी नहीं आती.

वीरेंदर खिलखिला कर हंस दिया और बोला: मेरी गुड़िया, तुम इस वक्त इतनी हॉट और सेक्सी लग रही हो कि अगर जल्द ही कुछ ना किया तो मैं बहुत जल्द अपने कपड़े गंदे कर दूँगा.

आशना ने शरमा कर वीरेंदर को अपने साथ सटा लिया और बोली: हॅव पेशियेन्स मिस्टर. वीरेंदर, अभी आपकी गुड़िया को आपकी बहुत ज़रूरत है.

वीरेंदर अपना एक हाथ आशना के कान के पीछे से फिराते हुए उसके गले तक ले गया.

आशना: आह वीर, क्या कर रहे हो. मैं फिर से अपने होश खो दूँगी.

वीरेंदर ने ड्रेस के उपर से ही अपना हाथ गले से सरकाते हुए आशना के वक्षों की बीच की घाटी मे रख दिया और आशना की आँखो में देखने लगा. आशना ने शरमा कर नज़रें झुका ली और काँपति आवाज़ में पूछा: क्या इरादा है???

वीरेंदर: इरादा तो बिल्कुल नेक है हमारा. सोच रहा हूँ यह ड्रेस तुमने आज ही ली है तो खराब क्या करनी तो क्यूँ ना इसे भी उतार दें.

आशना ने शरारत भरी नज़रों से वीरेंदर की ओर देखा और बोली: आपको सच मे ड्रेस की चिंता है या यह आपकी कोई चाल है.

वीरेंदर: मैं बुद्धू भला कोई चाल कहाँ चल सकता हूँ.

आशना(हंसते हुए): सच में बड़ा भोला सनम है मेरा.

 


वीरेंदर ने ड्रेस की एकमात्र डोरी जो कि आगे की तरफ थी उसे पकड़ कर हल्के से खींचा तो डोरी बिना किसी रुकावट के खुलती चली गयी. नाइटी का कपड़ा इतना सिल्की था कि डोरी के खुलते ही ड्रेस के सिरे सरक कर दोनो साइड पर गिर गये. आशना की आँखें शरम से बंद हो गयी और वीरेंदर की आँखें आश्चर्य से खुल गयी. वीरेंदर की आँखो के आगे जो मंज़र था उसकी उसने कयि बार कल्पना की थी लेकिन उसकी हर कल्पना उसकी आँखो के सामने प्रत्यक्ष नज़र से बहुत ही फीकी थी.

आशना के छलकते उभारों को लाइट पिंक कलर की एक छोटी सी हाफ कप ब्रा ने जाकड़ रखा था. आशना के सख़्त हो चुके निपल्स ब्रा के महीन कपड़े के कारण नुमाया हो रहे थे. अनायास ही वीरेंदर के होंठ अपनी मंज़िल की ओर बढ़ चले. जैसे ही वीरेंदर के तपते होंठ आशना के ब्रा से कवर्ड निपल्स पर पड़े, आशना के जिस्म ने हिलकोरे खाना शुरू कर दिया और उसके गले से घुटि घुटि सी चीखें निकलने लगी.

वीरेंदर किसी बच्चे की तरह आशना के दोनो उभारों को चूसने लगा. आशना की कमर फिर से हवा मे चलने लगी. वीरेंदर भी बेताबी की चरम सीमा तक पहुँच चुका था. आशना ने अपनी कमर उठा कर अपने बदन के नीचे दबी नाइटी को पकड़ा और अपने जिस्म से खींच कर उसे एक ओर उछाल दिया. आशना की इस हरकत से वीरेंदर और भी जोशीला हो उठा.

आदमी को जोश दिलाने के लिए, बेड पर औरत द्वारा की गयी ऐसी कोई भी हरकत कारगर साबित हो जाती है. वीरेंदर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. अब वीरेंदर के मर्दाना शरीर के नीचे आशना केवल एक ब्रा और पैंटी मे रह गयी थी जबकि वीरेंदर अभी भी अंडर-शर्ट और एक लूज़ पॅंट में था. आशना ने तड़प्ते हुए अपने हाथ वीरेंदर की कमर से अंडरशर्ट के सिरे मे फसाए और उसे खींच कर उतार फेंका.

वीरेंदर का नंगा सीना जैसे ही आशना के मखमली जिस्म के नग्न भाग से मिला दोनो की रो से एक साथ एक आह निकली. आशना के उभारों को जी भर कर चूसने के बाद वीरेंदर आशना के उपर से उठा और घुटनों के बल आशना की टाँगो के बीच बैठ गया. आशना की पलकें अनायास ही मूंद गयी.

वीरेंदर की आखों के आगे आशना का अर्ध नग्न जिस्म किसी मस्त नागिन की तरह बलखा रहा था. आशना के यौवन पर नज़र पड़ते ही वीरेंदर के लिंग ने बग़ावत कर दी और वीरेंदर को अपने दर्द का एहसास और भी अकड़ कर करवाया. वीरेंदर बेसूध सा आशना के जिस्म को देखे जा रहा था. सुडोल वक्षों के नीचे पतली कमर और फिर पतली कमर के नीचे भारी नितंब आशना के पीठ के बल लेटने के कारण और भी फैल गये थे. भारी नितंबो के नीचे आशना की मांसल लेकिन खूबसूरत साँचे मे ढली हुई जांघे और सबसे अद्भुत आशना के मासूम चेहरे पर स्वीकृति के भाव देख कर वीरेंदर उस जिस्म को भोगने को आतुर हो उठा.

संसारिक बंधानो से उपर उठ कर वीरेंदर ने अपनी पॅंट की हुक को खोला और एक झटके मे उसे उतार दिया. आशना को बेड हिलने से और कपड़ो की आवाज़ से पता चल चुका था कि वीरेंदर ने अगला कदम उठा लिया है. उसका दिल घड़घड़ हो रहा था लेकिन आँखें खोलने की उसकी हिम्मत जवाब दे गयी थी.

वीरेंदर का शरीर बेशक गथीला था लेकिन आशना जैसी छुइ मुई बदन वाली लड़की के आगे वो एक हट्टे कट्टे सांड़ की छवि दे रहा था. आवेश में आकर वीरेंदर ने अपना अंडरवेर भी उतार फेंका और उस विशाल देह के साथ उसके विशालकाय लिंग का संपूर्ण रूप वीरेंदर को किसी देव की आकृति प्रदान कर रह था.

अंडरवेर से बाहर निकलते ही वीरेंदर की नज़र जब अपने लिंग पर पड़ी तो उसके विकराल रूप को देख कर उसके दिल मे आशना के लिए एक पल के लिए दया के भाव आए लेकिन अगले ही पल आशना के जिस्म के सुख को भोगने की चाहत मे उसने उन भावों को दरकिनार किया.

(यहाँ पर मैं मेल्स की फीलिंग्स को सलाम करना चाहूँगी, सब ऐसे ही होते हैं)

वीरेंदर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर आशना ने धीरे से आँखें खोलनी चाही तो ठीक उसी वक्त वीरेंदर ने अपने घुटने फैला कर अपनी कोहनियाँ आशना के कंधे के इर्द गिर्द रख दी जिस कारण वीरेंदर का चेहरा आशना के चेहरे के ठीक उपर को आ गया. आशना का दिल ज़ोर से धड़क उठा. उसकी रही सही हिम्मत भी जवाब दे गयी. आशना अभी इस बात से बिल्कुल अंजान थी कि वीरेंदर पूर्ण रूप से नग्न उसके उपर उकड़ू पड़ा है.

वीरेंदर का लिंग अकड़ कर उसकी नाभि से 2" तक उपर सट कर चिपका हुआ था. वीरेंदर ने अपने होंठ आशना के कान के पास ले जाकर कहा: गुड़िया.

आशना: हुउन्ण.

वीरेंदर: खुश तो हो ना???

आशना(आँखें बंद रखे ही): आप से भी ज़्यादा और यह कहकर आशना ने अपनी बाहें वीरेंदर के इर्द गिर्द लपेट ली.

 


आशना की मखमली बाहें जैसे ही वीरेंदर के मर्दाना शरीर के इर्द गिर्द लिपटी तो दोनो के बदन मे उत्तेजना अपने उफान पर आ गयी.वीरेंदर ने अपने घुटनों पर झुके झुके ही अपने शरीर के अगले भाग को आशना के शरीर से मिला दिया और एक राहत की सांस ली. आशना के जिस्म का मखमली कोमल एहसास वीरेंदर के दहकते बदन मे सुकून की मीठी लहर दौड़ा गया. आशना ने भी मदहोशी में वीरेंदर को अपने से सटा लिया और उसकी बालों से भरी नंगी पीठ पर अपने कोमल हाथ फिराने लगी.

आशना के हाथ फेरने की तड़प से वीरेंदर समझ गया कि आशना भी मिलन के लिए तड़प रही है.

वीरेंदर ने आशना के होंठो को चूम कर उसके कान में कहा: गुड़िया ज़रा थोड़ी देर के लिए पलटो ना.

आशना ने वीरेंदर की बात का मतलब समझ कर बिना कुछ बोले अपने शरीर को धनुष की तरह बिस्तर से उठा लिया. वीरेंदर, आशना का इशारा समझ गया.

आशना: लीजिए वीर, आपकी गुड़िया आपके प्रेम सुख के लिए तड़प रही है.

आशना की आवाज़ में आई कंपकपाहट को देख कर वीरेंदर भी समझ गया कि जिसका उन्हे बेसब्री से इंतज़ार था वो गाड़ी आ गयी है. वीरेंदर ने अपने हाथ पीछे लेजाकर आशना की ब्रा की हुक्स से उलझा दिए लेकिन इस बंधन तो खोलने का हुनर वीरेंदर में कहाँ था. वीरेंदर ने दो तीन बार कोशिश की लेकिन असमर्थ रहा.

वीरेंदर: लगता है कि आज सब कुछ फाड़ना ही पड़ेगा.

आशना ने शरमा कर वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: आप मर्द लोग तो प्यार की भाषा समझ ही नहीं सकते.

वीरेंदर: इस मुकाम पर आकर कोई सबर करे भी तो कैसे करे. मेरे पास मेरे सपनो की परी बाहें फैलाए मेरे आगोश मे है और मैं उसके नाज़ुक अंगों की एक झलक के लिए तड़प रहा हूँ.

आशना, वीरेंदर की बात सुनकर मुस्कुरा दी.

आशना: चलिए मैं आपकी मदद किए देती हूँ, आख़िर मिलन के लिए तड़प तो मैं भी रही हूँ.

यह कहकर आशना ने वीरेंदर को अपने से थोड़ा उपर उठने का इशारा किया. वीरेंदर ने अपने शरीर का भार अपनी हथेलियों और अपने घुटनों पर रखा तो आशना ने बड़ी नज़ाकत से अपने जिस्म को पलटा. आशना को पलटता देख वीरेंदर के लिंग ने एक आह भरी. आशना के विशाल मांसल नितंबों के बीच फसि एक छोटी सी पैंटी अपने छोटा होने पर शर्मिंदा हो रही थी और उसकी जाँघो के दोनो ओर बँधी रेशम की डोरियाँ ऐसे लहरा रही थी जैसे वीरेंदर को निमंत्रण दे रही हो कि आओ और हमे बंधन से मुक्त करके सारे बंधनों से मुक्त हो जाओ.

आशना पलट कर पेट के बल लेट गयी लेकिन इस बार उनसे अपनी जांघे कस कर मिला रखी थी जिस कारण वीरेंदर ने अपनी टाँगें उठाकर आशना की थाइस के इर्द गिर्द कर दी. वीरेंदर ने बड़ी होशियारी से अपने शरीर का वज़न अपने घुटनों पर रखा और अपने शरीर के अगले भाग को झुका कर कोहनियों के बल हो गया. आशना की संपूर्ण नग्न पीठ पर ब्रा की एक पतली सी स्ट्रीप थी और उस स्ट्रीप में छुपि हुक्स उसे चॅलेंज कर रही थी. वीरेंदर ने आशना के कान के पास अपना चहरा लेजाकर कहा: खोल दूं या फाड़ दूं????

आशना: आअहह, जो मन में है कर लीजिए, आपकी गुड़िया तो बस आपके मिलन के लिए बेकरार है. आपकी यह दासी आपकी हर अदा की दीवानी है वीर.

वीरेंदर ने अपनी उंगलियाँ ब्रा की पट्टी में फँसाई और अंगूठे की मदद से एक झटके में दोनो हुक्स खोल कर पट्टी को छोड़ दिया. पट्टी को छोड़ते ही ब्रा के सिरे एक दूसरे से ऐसे दूर जा गिरे जैसे वो कब से छूटना चाह रहे हो लेकिन किसी ने उन्हे जकड रखा हो. ब्रा खुलने के एहसास से ही आशना का बदन सिहर उठा. आज ज़िंदगी में पहली बार उसकी आँखो के सिवा कोई उसके वक्षों का पूर्ण दीदार करने वाला था. आशना के मन में एक संतुष्टि थी कि जिस राजकुमार की उसने कल्पना की थी उस से भी कहीं बढ़कर आज उसका वीर उसके साथ है.

आशना ने धीरे से हरकत करके अपने कंधे से ब्रा स्ट्रॅप्स को हटाया और बाकी का काम वीरेंदर ने ब्रा को एक ओर उछाल कर पूरा कर दिया. आशना ने शरम के मारे अपने हाथ अपने चेहरे के आस पास कर लिए थे. वीरेंदर ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए आशना की बगल में अपने हाथ पहुँचा दिए और जैसे ही उसके हाथों में आशना के सख़्त मखमली उभार का कुछ हिस्सा स्पर्शित हुआ, आशना और वीरेंदर दोनो की साँसें तेज़ चलने लगी. आशना ने कोई विरोध नहीं किया लेकिन रह रह कर उसके बदन में तरंगे उठने लगी.

आशना के समर्पित भाव को देख कर वीरेंदर के मन में खुशी का संचार हुआ और उसने आशना की बाज़ू को पकड़ कर उसे फिर से पीठ के बल करना चाहा. आशना ने झट से अपने हाथ अपनी बगल में लेजाकर बिस्तर पर रखी गुलाब की पन्खुडियो को मुट्ठी में भर लिया और इस से पहले कि वीरेंदर उसे पलट पाता उसने झट से अपने हाथों को अपने वक्षों पर रख दिया. वीरेंदर के सामने जो नज़ारा था उसे देख कर वीरेंदर की उत्तेजना में और बढ़ोतरी हुई.

आशना की कलाईयों को पकड़ कर उसने धीरे से उन्हे एक दूसरे से दूर कर दिया और उसके सामने लाल गुलाब की नाज़ुक पन्खुडियो से आधे ढके हुए आशना के वक्ष निर्वस्त्र अवस्था में थे. आशना ने झट से अपनी हथेली अपनी पलकों पर रख दी हालाँकि उसकी आँखें मस्ती में पहले से ही बंद थी मगर उस वक्त उसे शायद यही सबसे उचित लगा. हाथों को अपनी आँखो तक पहुँचाने में आशना को जितना वक्त लगा उतने वक्त के लिए आशना के दूध से भरे कलश ऐसे थिरके कि उनमे हो रही हलचल काफ़ी देर तक उन गुम्बदो पर दिखाई दी.

अब दोनो में से कोई भी बोल नहीं रहा था. दोनो ही जानते थे कि अब बातों से छेड़खानी का वक्त ख़तम हो चुका है. अब तो नज़ाकत भरी हरकतों से एक दूसरे को प्यार जताना है. वीरेंदर ने अपना चेहरा आशना के उभारों के पास लेजाकर होंठों को गोल करके हल्के से फूँक मारी तो गुलाब की हल्की फुल्की पंखुड़ियों ने आशना के वक्षों को ढकने से इनकार करते हुए उसके प्रेमी के लिए दृश्य को मन मोहक बना डाला.

आशना के एकदम गोल और कड़े उभार गुलबीपन लिए हुए छोटे छोटे पिंक निपल के साथ सर उठा कर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया का डट कर सामना करने के लिए तैयार दिख रहे थे. वीरेंदर ने बारी बारी से दोनो निपल्स को चूमा तो आशना के हाथ वीरेंदर की पीठ पर रैंगने लगे. वीरेंदर ने अपनी जीभ निकाल कर दोनो निपल्स को चाटा तो आशना तड़प उठी.

आशना ने वीरेंदर को अपने साथ भींच लिया जिस कारण वीरेंदर का शरीर आशना के शरीर से जा मिला. वीरेंदर का लिंग आशना की योनि से लगता होता हुआ उसकी नाभि के उपर के हिस्से को छू रहा था जबकि वीरेंदर की मर्दाना छाती आशना के उभारों को कुचल रही थी.दोनो के नंगे सीने मिलते ही उन्हे स्वर्गिक सुख की अनुभूति हुई. दोनो के दिल की धड़कनें एक दूसरे से टकरा कर अपनी अपनी बेकरारी ज़ाहिर कर रही थी.

आशना का चेहरा वीरेंदर के कंधे से चिपका हुआ था. वीरेंदर ने मदहोशी में आशना के कान में कहा: आशना, अब बर्दाश्त नहीं होता, बना लूँ ना तुम्हे अपना.

आशना ने भी काँपति आवाज़ में जवाब देते हुए कहा: मैं तो कब से आप को अपना मान चुकी हूँ वीर, आओ और अपनी गुड़िया पर अपने प्यार की मुन्हर लगा दो. इस से पहले कि मैं तड़प तड़प कर मर जाउ वीर, मुझे अपने आगोश में ले लो और मेरे अरमान अपने अरमानों के साथ जोड़ कर मुझे जन्नत में ले चलो.

वीरेंदर ने अपने हाथ आशना की कमर पर रखे और उसे प्यार से सहलाने लगा. आशना का सारा जिस्म झंझणा उठा. वीरेंदर के बलशाली शरीर के नीचे वो कमसिन कली मचलने लगी. वीरेंदर ने धीरे धीरे अपने हाथ आशना की कमर से नीचे खिसकाये और जैसे ही उसके हाथ में आख़िरी बंधन की उलझन आई उसने सिरे से पकड़ कर उलझन को पलक झपकते ही सुलझा लिया.

 


आशना के जिस्म पर बचा एकमात्र कपड़ा भी अपनी पकड़ खो चुका था. इस एहसास ने दोनो प्रेमियों के दिल-ओ-दिमाग़ पर लगी संसारिक दुविधाओं को भी पलक झपक कर हवा में उड़ा दिया. वीरेंदर ने पैंटी के एक सिरे को पकड़ा तो आशना ने अपने नितंब हवा मे उठाकर इस बंधन का भी वही हश्र करने की मौन स्वीकृति दी जैसा कि बाकी बांधनो का हुआ था. कुछ ही क्षणों में आशना के अमृत से लथपथ पैंटी हवा में झूलती हुई बाकी के बांधनो के बीचे गिरी पड़ी गर्व से प्रेमी युगल को निहार रही थी.

पहली बार किसी की आँखो के सामने पूर्ण रूप से नग्न होने का भी एक अलग ही एहसास होता है. चेहरे पर शरम के भाव आ जाते हैं और दिल चीख चीख कर कहता है "डरो मत, आगे बढ़ो". इस एहसास में हर शख़्श अपने साथी के चेहरे के हाव भाव ज़रूर निहारता है और हमेशा हमेशा के लिए उन्हे अपनी रो में उतार लेता है. यह एहसास वो मरते दम तक नहीं भूल पाता. इस पहले एहसास से हो तो लाख अंधेरे में भी अपने साथी के चेहरे पर आए नूर को महसूस किया जा सकता है.

वीरेंदर ने अपने आप को आशना के जिस्म से थोड़ा नीचे सरकाया और अपने होंठ आशना के दूध से भरे कलश पर रख दिए. आशना ने अपनी आँखो के साथ साथ अपनी जांघे भी कस कर बंद कर रखी थी. वीरेंदर ने अपनी टाँगों खोल कर आशना के जिस्म पर अपने लिए जगह बना रखी थी. इस अवस्था में वीरेंदर के लिंग का निचला भाग सीधा आशना की योनि के कटाव के उपर आ चुका था. आशना वीरेंदर के लिंग की दस्तक महसूस कर रही थी.

लिंग की अकड़ से वो महसूस कर सकती थी कि वो काफ़ी परेशानी में है और किसी भी कीमत पर आज नहीं झुकेगा.आशना को अपनी योनि के ठीक पास लिंग का एहसास सपनो की दुनिया मे ले जाने को व्याकुल हो रहा था लेकिन आशना बार बार अपने सपनो को परे करते हुए हक़ीकत का लुफ्त लेने को व्याकुल हो रही थी.

सच ही तो था आज की रात सपनो की रात नहीं बल्कि उन्हे पूरा करने की रात थी और हर लड़की होश संभालते ही इस रात की तमन्ना में जाने कितना वक्त बिता देती है. हर रोज़ एक नये सिरे से एक नया ख्वाब बुनती है और फिर अगले दिन उसी ख्वाब मे थोड़ी तमन्ना और थोड़ा रोमांच और जोड़ कर उसे फिर से एक नये सिरे से शुरू करती है.

आज उन सारे अरमानों को सच करने की रात थी. आशना अपने ख़यालों से बाहर निकली जब वीरेंदर ने उसके निपल पर हल्के से दाँत गढ़ा दिए.

आशना: सस्स्स्सिईईईईईई, आआआः वीर, पागल कर दिया है आपने मुझे.

वीरेंदर: पागल तो मैं हो गया हूँ आशना. तुम्हारा जिस्म जैसे अपने आप में चाँदनी का नूर लपेटे हुए मेरे दिल को ठंढक दे रहा है और इस ठंढक मे इतनी तपिश है कि तुम्हारे अंदर समा जाने की कामना पल पल प्रबल होती जा रही है. तुम्हारा एक एक अंग नायाब है. मेरी कल्पना से परे मेरी किस्मत से बढ़कर हो तुम.

आशना मचलने के सिवा और कुछ ना कर पा रही थी. मन ही मन में वीरेंदर के मुँह से पानी तारीफ सुनकर उसकी कसमसाहट और बेकरारी बढ़ती चली जा रही थी. आशना उस कगार पर पहुँच चुकी थी जिस कगार पर जाने कितनी महबूबाओ ने अपने महबूब को बिना किसी विरोध के अपने आप को समर्पित कर दिया.

आशना ने वीरेंदर के बालों में उंगलियाँ फसा कर सहलाना शुरू कर दिया. वीरेंदर थोड़ा सा और नीचे सरका और अपने होंठ आशना की नाभि पर रख दिए. आशना की पतली कमर और बलखाने लगी और आशना ने अपने बचाव में अपनी साँस रोक कर अपनी नाभि को नीचे की तरफ दबा दिया. ऐसा करने से आशना के उभार और भी उन्नत रूप इख्तियार कर गये.

वीरेंदर ने अपने हाथ आशना के उन्नत उभारों पर रख कर उन्हे धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. सहवास की आग में तड़प रही "गुड़िया" को यह कोमल एहसास मंज़ूर नही हुआ और उसने अपने हाथ वीरेंदर के हाथों पर कस कर उसे अपने दुग्ध कलशो के मर्दन का आग्रह किया.

एक सच्चे प्रेमी की तरह वीरेंदर ने आशना के आग्रह को स्वीकार किया और अपनी गिरफ़्त उन वक्षों पर बढ़ा दी. आशना के हाथ हवा मे उठे और एक दम अपनी कमर के पास गिर कर बेड शीट पर कस गये.

वीरेंदर लगातार अपनी जीभ को आशना की नाभि में चलाए जा रहा था. वीरेंदर के हाथों और जीभ के जादू से आशना की कमर एक बार फिर से धीरे धीरे गतिमान होने लगी. जैसे ही वीरेंदर को आशना के जिस्म में आने वाले तूफान का आभास हुआ वीरेंदर ने अपनी कोहनियों के बल होकर अपने हाथ आशना के हवा में उठ रहे नितंबो के नीचे रख दिए और अपने होंठो को ज़ोर से भींची हुई मखमली जाँघो के जोड़ पर रख दिया.

आशना की कमर ऐसे चलने लगी जैसे उसमे कोई स्वचालित मोटर लगी हुई हो. वीरेंदर के अगले कदम का एहसास होते ही आशना ने वीरेंदर के चेहरे पर अपने हाथ रख दिए और वीरेंदर को अपने उपर खींचने का असफल प्रयास करने लगी.

वीरेंदर: मत रोको मुझे गुड़िया, आज जी भर कर प्यार करने दो.

आशना:आआहह, वीररर नहिन्न्ननणणन्, प्लीआसस्सीईई.

वीरेंदर ने अपने होंठो को और कस कर दबा दिया और अपनी जीभ निकाल कर जाँघो के जोड़ से भिड़ा दिया.

 
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