आशना ने वीरेंदर की आँख से निकले मोती को जैसे ही अपने कंधे पर महसूस किया, उसके अंतर्मन से एक हूक उठी. इस से पहले के कोई भाव आशना पर हावी होता, आशना ने बेड पर पड़ा टवल उठाकर वीरेंदर के हाथ मे देते हुए कहा: यह लीजिए.
वीरेंदर ने एक बार आशना को कस कर गले लगाया और फिर आशना से पीछे हटते हुए उसकी आँखो मे देख कर बोला: यह टवल आँसू पोछने के लिए नहीं लाया हूँ मैं.
आशना ने सवालिया नज़रों से वीरेंदर की तरफ देखा और फिर जैसे ही उसे वीरेंदर की मनोदशा का आभास हुआ उसने शरमा कर धीरे से स्वीकृति मे गर्दन हिलाई और आँखें बंद करके बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी. वीरेंदर भी आशना की बगल मे लेट गया और टवल को उठाकर आशना की जाँघो के जोड़ मे रखकर आशना की नमी को सोखने लगा.
आशना(एकदम आँखें खोलते हुए): आउच.
वीरेंदर: क्या हुआ????
आशना(शिकायती लहज़े मे): टवल बहुत खुरदुरा है???
वीरेंदर: टवल तो मुलायम ही है लेकिन लगता है वो जगह कुछ ज़्यादा ही सिल्की टच लिए हुए है.
आशना की आँखें मुस्कुराते हुए फिर से बंद हो गयी. टवल को बेड की एक तरफ रख कर वीरेंदर उठा और आशना के सामने आकर बेड पर खड़ा हो गया. आशना ने शरमा कर एक नज़र वीरेंदर की तरफ देखा और फिर आँखों मे डर के भाव लिए उसके विकराल लिंग की तरफ़ देखा. वीरेंदर मुस्कुराते हुए अपनी टाँगो को मोड़ कर घुटनो के बल बैठने लगा. स्वीकृत भाव दिल मे लिए धीरे धीरे आशना की जाँघो की दूरी बढ़ती गयी और वीरेंदर के लिए जन्नत के द्वार खुल गया. वीरेंदर इस वक्त आशना की टाँगो के बीच घुटनों के बल बैठा हुआ था.
आशना के नूरानी चेहरे पर शरम और डर के मिले जुले भाव आ रहे थे. जहाँ शरम से उसका चेहरा लाल सुर्ख हो चुका था वहीं डर के मारे उसकी आँखें एक दम कस कर बंद हो चुकी थी. वीरेंदर ने धीरे से आशना की जाँघो के जोड़ मे अंदरूनी हिस्से को छुआ तो आशना ने अपने हाथों से कमर के पास बेड शीट को कस कर पकड़ लिया.
वीरेंदर: गुड़िया.
आशना (धीरे से मदहोश आवाज़ मे): जी.
वीरेंदर: खोलो ना.
आशना ने झट से आँखें खोल कर वीरेंदर को देखा और उसे हैरानी से देखते हुए धीरे से पूछा: क्या???
वीरेंदर: बस अब ठीक है, आँखें खोलने के लिए ही बोल रहा था.
आशना के होंठो पर मुस्कान आ गयी.
आशना(शरमाते हुए): आँखे क्यूँ खुलवाई आपने.
वीरेंदर: मैं चाहता हूँ कि जब मैं तुम्हे अपनी बनाने के लिए आगे बढ़ूँ तो तुम्हारी आँखो मे अपने लिए "निस्चल प्रेम" देख सकूँ.
आशना ने इस बार बिना आँखे झुकाए वीरेंदर की तरफ मुस्कुरा कर देखा और बोली: आज की रात तो आपके लिए सब कुछ दिल से खोलने को बेकरार हूँ वीर.
वीरेंदर(महॉल को नॉर्मल बनाने के लिए): ऐसा क्या???तो चलो फिर डॉगी स्टाइल मे आ जाओ. सबसे पहले उसी को खोलता हूँ जिसने मेरा चैन छीना है.
आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए वीरेंदर की जाँघ पर एक चपत लगाई.
वीरेंदर: अरे तुमने ही तो कहा था कि सब कुछ खुलवाने के लिए तैयार हो.
आशना बस शरमा दी.
वीरेंदर ने बिना देर किए आशना की मखमली मांसल टाँगो को उठाकर कर अपनी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिया. आशना के दिल की धड़कन एकदम तेज़ हो गयी.
आशना(सहमी हुई): भैया, प्लीज़ आहिस्ता कीजिएगा.
वीरेंदर के पूरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ गयी. उसके लिंग मे और भी कड़ा पं आ गया जब उसने देखा कि उसकी आँखों के सामने उसकी गुड़िया एक दम निर्वस्त्र अवस्था मे अपने दिल मे अपने भाई के प्रति समर्पण भाव लिए अपना सब कुछ खोले हुए उसे आगे बढ़ने को उत्साहित कर रही थी.
वीरेंदर(रोमांचित होते हुए): डॉन'ट वरी, तुम्हे थोड़ा भी दर्द नहीं होगा.
आशना हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखती है.
वीरेंदर(चेहरे पर गंभीरता लाते हुए): स्स्सोररी, म्म्मेतरा मतलब है कि , आइ आइ मीन टू से कि तुम्हे दर्द तो होगा लेकिन होश मे आने के बाद. जब तक बेहोश रहोगी तब तक तुम्हे कुछ भी फील नहीं होगा.
वीरेंदर ने अपनी बात पूरी करने की गरज से बिना कुछ सोचे समझे यह कह दिया. उसे पता ही नहीं लगा कि उसके मुँह से क्या निकल गया.
आशना ने अपनी आँखो को बड़ा करके वीरेंदर की तरफ रोते अंदाज़ मे देखा और बोली: मुझे हिम्मत देने की बजाए आप और भी डरा रहे हो.
वीरेंदर(अपने आप को संभालते हुए): कम ऑन गुड़िया, यू आर आ बिग गर्ल नाउ. आइ नो यू कॅन टेक मी ऑल अप टू दा हिल्ट इन वन गो. यू हॅव टू गुड़िया, यू हॅव टू. आइ कॅन'ट रेज़िस्ट नाउ. यू आर सच आ टीज़ इन ऑल दीज़ डेज़. अब मैं तुम्हारे अंदर समा जाना चाहता हूँ. तुम्हारे हर अंग को अपने हाथ से अपने होंठो से और अपने इस खिलोने (अपने लिंग की तरफ इशारा करते हुए) से प्यार करना चाहता हूँ गुड़िया.
आशना(हैरानी से एक दम चीखते हुए): क्या????? इन वन गो????नो भैया, आइ वॉंट टू फील यू इंच बाइ इंच, नो नीड टू हरी. मैं खुद भी अब बर्दाश्त करने की हालत मे नहीं हूँ मगर डरती हूँ आपके इस जानवर से. आइ लव टू टेक इट अप टू दा हिल्ट बट प्लीज़ बी जेंटल, आइ आम ऑल युवर्ज़.
टेक माइ चर्री आस स्लोली ऐज पासिबल, आइ वॉंट टू सवौर दा मोमेंट फॉर होल ऑफ माइ लाइफ. मुझे गुड़िया से आशना बनने की प्रक्रिया को खूब एंजाय करना है भैया.(यह बात पूरी करते करते आशना की आवाज़ मे मदहोशी बढ़ चुकी थी)
वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के होंठो को चूमा और बोला: डॉन'ट वरी, युवर वीर ईज़ हियर टू प्रोटेक्ट यू आंड टू केर ऑफ ऑल यू वॉंट..
यह कह कर वीरेंदर ने अपने लिंग को अपने हाथ से डाइरेक्षन देकर आशना की योनि के मुँह पर रखा. आशना की योनि की गर्माहट पाकर वीरेंदर के जिस्म मे प्रवाहित लहू उसके लिंग में एकत्रित होने लगा. वीरेंदर के गरम सुपाडे को अपनी योनि के मुख पर महसूस करते हे आशना के दिल को भी ठंडक पहुँची और उसके दिल-ओ- दिमाग़ से दर्द के बादल एक दम छाँट गये.
वीरेंदर ने हल्का सा धक्का लगाया तो आशना एक दम चिहुन्कि और वीरेंदर का लिंग नीचे की तरफ खिसक गया. आशना की साँसें तेज़ चल रही थी. वीरेंदर की साँसों के शोर से ऐसा लग रहा था कि जैसे वो बहुत दूर से भाग कर आया हो. वीरेंदर ने अपने हाथ से एक बार फिर से अपने अस्त्र को निशाने पर रखा लेकिन इस बार का बार भी चूक गया.
आशना, वीरेंदर की आँखों में बढ़ रही हवस को देख कर व्याकुल हो उठी थी. वो वीरेंदर को जल्द से जल्द इस तपिश से मुक्त करवाना चाहती थी. आख़िर उसके जिस्म मे बढ़ रही ज्वाला भी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी. प्यार के भूखे दो नग्न जिस्म एक दूसरे से अपने जिस्म को ठंडक पहुँचाने के लिए प्रयासरत थे मगर यह विलंब उनकी बेकरारी को बढ़ा रहा था. तीसरी बार के असफल प्रयास के बाद तो वीरेंदर खीज उठा.
वीरेंदर: यार बहुत टाइट हो तुम, अंदर जा ही नहीं रहा. मैं तो थक गया हूँ.
आशना ने झट से अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए वीरेंदर के सुलगते लिंग को पकड़ लिया. आशना का नरम कोमल हाथ अपने लिंग पर महसूस करते ही वीरेंदर के जिस्म मे एक बार फिर से उत्तेजना हावी हुई. आशना ने वीरेंदर के लिंग को अपनी योनि से सटा कर आँखों के इशारे से आगे बढ़ने को कहा. वीरेंदर ने आशना की जाँघो को पकड़ कर धक्का लगाया लेकिन नतीजा इस बार भी वही. वीरेंदर के लिंग का सुपाडा आशना की तंग दरार मे समा ही नहीं पा रहा था.
वीरेंदर का लिंग फिसल कर एक बार फिर से आशना के नितंभो की दरार से जा टकराया.
वीरेंदर ने खीजते हुए कहा: यार तुम्हारी गान्ड है ही इतनी मस्त कि मेरे लंड को अपनी तरफ बार बार खींच रही है.
वीरेंदर के मुँह से इस प्रकार के शब्द सुनकर आशना को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उसके शरीर से सेक्स का ज्वालामुखी फूट पड़ा हो.
आशना(उत्तेजना की चरम सीमा पर): अया वीर, आपको जो पसंद है ले लीजिए. मैं आपकी हूँ, आपका हक़ है मेरे जिस्म के हर हिस्से पर.
वीरेंदर ने भी सॉफ महसूस किया कि आशना उसकी बात से और भी ज़्यादा गरम हो उठी है. आशना ने झट से वीरेंदर के लिंग को पकड़ा और एक बार फिर से अपनी योनि पर दबा दिया. वीरेंदर ने सॉफ महसूस किया कि आशना की योनि से आग दहक रही है.वीरेंदर के लिंग को अपनी योनि पर सेट करके इस बार आशना ने आँखो की बजाए होंठो का सहारा लिया.
आशना : आ जाइए भैया, समा जाइए अपनी गुड़िया के अंदर.
वीरेंदर ने इस बार धक्का लगाया तो वीरेंदर का सुपाडा कुछ हद तक अंदर जाकर फिर से फिसल गया.
आशना(वीरेंदर की तरफ देख कर): मेरे दर्द की परवाह मत कीजिए भैया, इसी दर्द के लिए ही तो मैं तड़प रही हूँ. अब यह दूरी बर्दाश्त नहीं कर पाएगी आपकी यह गुड़िया वीर. मैं चाहे चीखू-चिल्लाऊ, चाहे छटपटाऊ लेकिन आप रुकिएगा मत. यकीन मानिए आपका दिया हुआ यह दर्द मुझे एक ऐसी जन्नत मे ले जाएगा कि मैं ज़िंदगी भर के लिए आपकी कायल हो जाउन्गी. मैं आपके हर दर्द को बाँट लूँगी भैया बस अपनी गुड़िया को यह दर्द दे दीजिए.
इस बार जैसे ही आशना ने वीरेंदर के लिंग को पकड़ना चाहा, वीरेंदर ने आशना के हाथ से अपना लिंग छुड़ाया और बिना कुछ बोले उसे आशना की योनि पर सेट कर दिया. आशना साँस रोके आने वाले पल के लिए दिल-ओ-जान से तैयार थी. वीरेंदर के इस रौद्र रूप को देख कर उसकी आँखें चमक उठी थी.
सच ही तो है हर लड़की बिस्तर पर अपने पति का यही रौद्र रूप ही तो चाहती है.
वीरेंदर ने अपने लिंग को आशना की योनि से सटा कर अपनी कमर पर दबाव बना कर एक करारा धक्का मारा तो गुड़िया के गले से एक ज़ोरदार चीख निकली. इस से पहले कि उसकी चीख कमरे से बाहर जाकर कहीं गुम हो जाती, वीर ने अपने होंठ गुड़िया के होंठो पर रख दिए. गुड़िया की चीख वीर के गले मे ही घुट कर रह गयी. वीर का सारा सुपाडा करीब करीब 1.5" तक गुड़िया मे समा चुका था. गुड़िया के हाथ बिस्तर मे धन्से हुए थे.
गुड़िया दर्द से बहाल हो चुकी थी. वीर को पीछे धकेलने की लाख कोशिशों के बावजूद उसे सफलता नहीं मिली. वीर ने उसकी कमर को कस कर बेड से दबा रखा था जिस कारण गुड़िया हिल भी नहीं पा रही थी.