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वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के नितंब के पास हाथ रखा तो आशना की साँस एकदम रुक गयी. वीरेंदर ने आशना के नितंब के पास पड़े टवल को झट से उठा लिया और हाथ पोंछते बोला: यहाँ पर किसी को अपने आप पर गुमान हो गया है और उन्हे लगता है कि हम उनके बिना रह नहीं पाएँगे.
वीरेंदर की इस हरकत पर आशना मुस्कुरा दी.
आशना: एक काम बताऊ, करोगे????
वीरेंदर की आँखे चमक उठी.
वीरेंदर: नेकी और पूछ पूछ. बोलो क्या करवाना हैं, मेरा मतलब क्या करना है????
आशना: मुझे सहारा देकर वॉशरूम तक ले चलिए.
वीरेंदर(मुस्कुराते हुए अपनी कमर पर हाथ रख कर): इस काम का मेहनताना क्या मिलेगा??
आशना: तो आप मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाएँगे?
वीरेंदर: ज़रूर उठाउंगा. जब तुम मेरी शराफ़त का भरपूर फ़ायदा उठा रही हो तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि मैं तुम्हारी मजबोरी का फ़ायदा उठाऊ.
आशना: मैने कब उठाया आपकी शराफ़त का फ़ायदा???
वीरेंदर: यह मेरी शराफ़त ही तो है कि अभी तक तुम्हारे साथ कुछ किया नहीं. अगर अपनी करने पर उतर आउ तो अभी के अभी तुम्हे यहीं दबोच कर अपने अरमान पूरे कर लूँ.
आशना: ओह, अब बात समझ मे आई, तभी मुझे इस सुनसान जगह लेकर आए हो कि अपने मन की भी कर लो और किसी को मेरी चीखें भी ना सुनाई दे, बड़े आए शरीफ कहीं के.
वीरेंदर: यही तो चाल थी जानेमन, अच्छा हुआ तुम पहले नहीं समझी वरना आज भी मेरी रात ऐसे ही गुज़रती.
आशना: प्लीज़ जानू ले चलिए ना वॉशरूम, आइ वॉंट टू रिलीव माइसेल्फ.
वीरेंदर: तो मुझे कब रिलीव करोगी?
आशना: सोचती हूँ ना. प्रेशर के कारण तो दिमाग़ भी काम नहीं कर रहा.
वीरेंदर ने झट से आशना के उपर से चद्दर हटाई और पलक झपकते ही उसे अपनी मज़बूत बाहों मे उठा लिया. आशना ने वीरेंदर के मसल्स पर हाथ फेरते हुआ कहा: इंप्रेस्ड.
वीरेंदर: बहुत ताक़त हैं इन बाज़ुओं मे जानेमन.
आशना: आइ नो, जब आपने मुझे अपने नीचे दबा रखा था तभी पता चल गया था कि मेरा तो हिलना भी बेकार है.
वीरेंदर: चलो अच्छा है कि तुम जान गयी कि " तुम्हारा मुझ से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है".
वॉशरूम के दरवाज़े के पास पहुँचकर वीरेंदर ने पूछा "यहीं उतार दूं या अंदर ले चलूं"?
आशना: शरमा क्यूँ रहे हो जानू, अंदर चलो ना. प्लोमिश, मैं आपके साथ कुछ ग़लत नहीं करूँगी.
मुस्कुराते हुए वीरेंदर, आशना को लेकर वॉशरूम मे दाखिल हुआ.
आशना(टाय्लेट सीट के पास): बस यहीं उतार दीजिए, आगे मैं मॅनेज कर लूँगी.
वीरेंदर ने उसे नीचे उतारा और बोला: आइ आम ऑल्वेज़ अट युवर सर्विस मॅम, और बताइए क्या हुकुम है मेरे लिए.
आशना: ओह, टवल तो मैं बेड पर ही भूल आई हूँ, आप प्लीज़ मेरे लिए टाउल लेकर आइए.
वीरेंदर: जो हुकुम बेगम साहिबा. आख़िर मेवा खाना है तो सेवा तो करनी ही पड़ेगी.
वीरेंदर बातरूम से बाहर निकल कर बेड के पास पड़े हुए टवल को उठाकर जैसे ही मुड़ने को हुए, उसके कानो मे क्लिक की आवाज़ आई. वीरेंदर जब तक दौड़ कर दरवाज़े के पास पहुँचा तब तक आशना उसे अंदर से लॉक कर चुकी थी.
वीरेंदर: तिस इन नोट फेयर गुड़िया.
आशना: मेरे शरीफ सैयाँ, आप तो सच मे ही बहुते सीधे हैं और यह कहकर वो ज़ोर से हँसने लगी.
वीरेंदर(उखड़े स्वर् मे): यार गाली दे रही हो या तारीफ कर रही हो?
आशना बस खिलखिलाकर हँसती रही.
वीरेंदर: बाहर तो आओ, जितना हंस रही हो उतना ही ना रुलाया तो मेरा नाम भी वीरेंदर शर्मा नहीं.
आशना: जानू, अब तो मैं आराम से एक डेढ़ घंटे के बाद ही आउन्गि तब तक आप बोर होकर या तो सो जाएँगे या आपकी उत्तेजना आपकी खीज बढ़ने के साथ कम हो जाएगी.
वीरेंदर बुरा सा मुँह बनाकर वापिस मुड़ा ही था कि उसके कदम ठिठक गये.
वीरेंदर: लेकिन एक डेढ़ घंटे तुम वॉशरूम मे करोगी क्या???
आशना: पानी गरम होने मे आधा घंटा तो लग हे जाएगा ना.
वीरेंदर: तो????
आशना: इसका जवाब भी अपनी प्यारी साली साहिबा से ही ले लीजिए.
वीरेंदर: गॉड आइडिया, वाह यार तुम मेरा कितना ख़याल रखती हो.
आशना बस मुस्कुरा दी.