बिहारी: मैने गाँव मे अपने एक दोस्त को फोन करके पूछा था मालिक, लेकिन वो वहाँ पहुँची ही नहीं.
वीरेंदर: तो कहाँ गयी होगी वो?
बिहारी: हो सकता है मालिक वो यहाँ से निकल कर कहीं और चली गयी हो. जवान लड़की है, किसी के प्यार मे पड़कर यहाँ से भाग निकलने के लिए उसने मुझसे झूठ बोला होगा.
वीरेंदर: अगर ऐसे हुआ तो आप उसके घर वालो को क्या जवाब देंगे काका?
बिहारी: भला इसमे मैं क्या कर सकता हूँ मालिक. उसकी ही मर्ज़ी नहीं थी इस घर मे रहने की तो मैं उसे ज़बरदस्ती यहाँ कैसे रख सकता था.
वीरेंदर- ह्म्म्म्म , लेकिन मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा. अचानक से जैसे हमारे घर को किसी की नज़र लग गयी हो.
बिहारी खामोश रहा.
वीरेंदर, आशना को उसके रूम मे ले गया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया. नीचे आकर वीरेंदर ने बिहारी को एक की चैन दिया.
वीरेंदर: काका इस ट्रिप पर आपके लिए कुछ ख़ास तो नहीं ला सका. यह एक की चैन ही लाया हूँ आपके लिए, आप घर की ज़रूरी चाबियाँ इसी की-चैन मे पिरो लीजिए, आपको काफ़ी परेशानी होती होगी सभी चाबियों को संभाल कर रखने मे.
बिहारी ने वीरेंदर से की चैन ले लिया और मन मे सोचने लगा: अब तो बहुत जल्द घर की तिजोरिओं की सारी चाबियाँ ही इस की चैन मे डालूँगा.
वीरेंदर ने बिहारी को आशना का ध्यान रखने को कहा और खुद ऑफीस जाने के लिए निकल गया. वीरेंदर के जाते ही उसकी साँस मे साँस आई.
बिहारी: चिंता मत कर वीरेंदर तेरे इस बेशक़ीमती छल्ले मे तो मैं घर की बेशक़ीमती तिजोरियों की चाबियाँ ही रखूँगा, बस जल्दी से आशना का वेहम दूर हो जाए और तुम दोनो एक दूसरे के इतने करीब आ जाओ कि दुनिया के सामने जब तुम्हारा सच आए तो तुम्हे मुँह दिखाने की जगह भी ना मिले. सोचा था कि काम हो जाने के बाद रागिनी को रानी बना कर रखूँगा और आशना को अपनी रखैल बनाकर लेकिन रागिनी की किस्मत मे तो कुछ और ही लिखा था शायद. अब तो बहुत जल्द ही उसे मारना होगा. अफ़सोस तो बहुत होगा उसे मारने का. तुम्हारी दौलत के लिए पहले बीना की और अब रागिनी की बलि चढ़ती है तो चढ़ जाने दो, आख़िर आशना तो बच ही जाएगी मेरी प्यास भुजाने के लिए. कसम से एक बार उसे चोद कर जन्नत का नज़ारा तो ज़रूर करूँगा.
बिहारी: आज तो रागिनी को खाना खिलाने की भी ज़रूरत नहीं, आख़िर साली को आज रात मारना जो है.
ऑफीस का काम ख़तम करके वीरेंदर शाम को थोड़ा देर से घर पहुँचा. बिहारी ने उसे बताया कि आशना सारा दिन अपने कमरे में आराम करती रही और उसने कुछ खाया भी नहीं.
वीरेंदर जब आशना के रूम मे पहुँचा तो उसे देख कर आशना उठकर बैठ गयी. वीरेंदर ने दरवाज़ा बंद किया और आशना की तरफ देख कर मुस्कुराया.
वीरेंदर: तुम तो कमाल की आक्ट्रेस हो यार. उसे अभी तक हम पर कोई शक नहीं हुआ. अच्छा है इसी बहाने आज तुमने सारा दिन रेस्ट किया, आख़िर रात को तो जागना ही है.
आशना ने शरमा कर नज़रें झुका ली और वीरेंदर की तरफ देख कर बोली: मुझे नहीं लगता कि, बिहारी पर इस बात का कोई भी असर पड़ा है कि मुझे बीना का भूत दिखाई दिया.
वीरेंदर: क्यूंकी बिहारी ने उसे खुद मारा है बस उस मर्डर को एक ऐक्सीडेंट का रूप दे दिया.
आशना: क्या, क्या कह रहे हैं आप? इस बात का तो हमारे पास कोई सबूत नहीं है कि बीना का मर्डर हुआ है.
वीरेंदर: सब समझा दूँगा डार्लिंग, रात को ज़रा गहरा तो लेने दो. बस बिहारी को सब काम निपटा लेने दो. बीना के ना सही लेकिन उसके भूत तो आज ज़रूर नाचेंगे.
आशना: मुझे बहुत भूख लगी है वीरेंदर. आपके कहने पर मैने बीमार होने का नाटक तो कर लिया लेकिन भूख के मारे जान निकल रही है.
वीरेंदर ने अपना बॅग खोला और आशना को खाने का पॅकेट थमा दिया.
वीरेंदर: जब तक तुम कुछ खा लो तब तक मैं फ्रेश होकर आता हूँ.
वीरेंदर के जाते ही आशना ने डोर लॉक कर दिया. वीरेंदर फ्रेश हो चुका था और बिहारी ने उसे चाइ भी पिला दी थी. वीरेंदर ने बिहारी को खाने के लिए मना कर दिया था. वीरेंदर जानता था कि आशना उसके बिना खाना नहीं खाएगी.
बिहारी ने सोच रखा था कि आज की रात आशना और वीरेंदर को खाने मे नींद की दवाई मिला कर खिला देगा ताकि वो निसचिंत होकर रागिनी को ठिकाने लगा सके लेकिन वीरेंदर ने उसके इस मंसूबे पर पानी फेर दिया.
बिहारी ने खाना खाया और किचन की सफाई करके अपने रूम मे चल दिया.
वीरेंदर ने आशना के रूम मे जाकर आशना के साथ डिन्नर किया और फिर वीरेंदर ने आशना को एक हेडफोन दिया कान से लगाने के लिए.
आशना: यह क्या है वीर?
वीरेंदर ने आशना के कान मे हेडफोन लगाया और अपनी जेब से एक ट्रांसमीटर निकाल कर उसका बटन ऑन कर दिया.
आशना वीरेंदर की तरफ हैरानी से देखने लगी. वीरेंदर ने आशना को खामोश रहने का इशारा किया और उसे ध्यान से सब सुनने के लिए कहा.जैसे जैसे आशना सुनती रही उसकी आँखें हैरानी से खुलती चली गयी.
सारी रेकॉर्डिंग सुनकर, आशना ने हेडफोन कान से निकाला और वीरेंदर की तरफ हैरानी से देखने लगी: छी कितना कमीना इंसान है यह वीर. मेरे बारे मे कितना गंदा सोचता है यह. इसे तो मैं अपने हाथों से मारूँगी.
वीरेंदर मुस्कुराया और आशना की तरफ देख कर बोला: इसमें उस बेचारे का भी कोई दोष नहीं, तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि तुम्हे जो भी देखेगा, कम से कम एक बार छुने के लिए तो तडपेगा ही.
वीरेंदर की बात सुनकर आशना ने वीरेंदर की तरफ गुस्से से देखा और उसे मारने के लिए दौड़ी.
वीरेंदर ने उसे पकड़ कर अपने से चिपका लिया और बोला: चिंता मत करो गुड़िया, तुम्हारा यह वीर हर उस हाथ को काट देगा जो तुम्हे छुने के लिए उठेगा.
आशना ने भी वीरेंदर को कस कर जकड लिया और बोली: वीर मुझे बहुत डर लग रहा है. यह तो बहुत खरनाक आदमी है. बीना को इसी ने मारा है और अब रागिनी को भी मारने वाला है. तभी आशना को जैसे कुछ याद आया हो.
आशना: वीर लेकिन आपने यह रेकॉर्डिंग कब की?
वीरेंदर: तुम्हे याद है जब हम नोएडा से वापिस आने के लिए निकले थे, मैं एक शॉप पर रुका था.
आशना: हाँ लेकिन.......
वीरेंदर: पूरी बात तो सुनो जानेमन, सब समझ आ जाएगा.
उस शॉप से मैने एक की चैन लिया.
आशना: लेकिन की चैन का इस रेकॉर्डिंग से क्या संबंध है?
वीरेंदर: यार तुम सवाल बहुत करती हो. सुनो तो सही.
उस के चैन के अंदर मैने एक पॉवेरफ़ुल्ल माइक्रोफोन फिट कर दिया है और यह ट्रांसमीटर (अपने हाथ मे पकड़े ट्रांसमीटर की तरफ इशारा करते हुए) इस के चैन क आस पास हो रही सारी बातें रेकॉर्ड कर एक चिप में स्टोर कर देता है. मैने वो की चैन बिहारी को गिफ्ट कर दिया था. जिस कारण उसकी अपने आप से की हुई बातें इस में रेकॉर्ड हो गयी.