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आशना को जब सारी बात समझ आई तो वो वीरेंदर की सोच और तेज़ दिमाग़ से काफ़ी इंप्रेस हुई.
आशना: अब तो हमारे पास उसका कन्फेशन भी है, हम पोलीस स्टेशन जाकर बीना के मर्डर मे बिहारी को पकड़वा सकते हैं.
वीरेंदर: हां बिल्कुल पकड़वा सकते हैं लेकिन उस से मेरे दिल को तसल्ली नहीं मिलेगी. उसने मेरी जान पर बुरी नज़र डाली है, उसे इतनी आसान सज़ा नहीं दिलवाउंगा.
आशना: वीर मुझे डरा लगता है इस बिहारी से. आप प्लीज़ यह रेकॉर्डिंग पोलीस को जाकर दे दीजिए ताकि वो जल्द से जल्द पोलीस की गिरफ़्त मे आ जाए.
वीरेंदर: ऐसा करने से यह बात उस से छुपि नहीं रहेगी कि हम ने ही उसे फँसाया है. अगर उसे इस बात का पता चल गया तो वो कोर्ट मे हमारे रिश्ते को बदनाम करने से पीछे नहीं हटेगा, इसलिए हमे वोही करना होगा जो हम ने पहले से सोच रखा है.
आशना(कुछ देर सोचने के बाद): ओके डीटेक्टिव साहब, जैसा आप कह रहे हैं वैसा ही होगा.
रात करीब 11:30 बजे जब बिहारी आश्वस्त हो गया कि वीरेंदर और आशना गहरी नींद सो रहे हैं, उसने दूध के गिलास मे बेहोशी की दवाई मिलाई और पोर्च की तरफ चल दिया. उसने वहाँ पर रखा एक टोल बॅग उठा लिया.
बिहारी(बॅग से स्क्रयू ड्राइवर और हथोडा निकालते हुए): मेरे शेरो, आज तुम्हे फिर से इस्तेमाल करने का वक्त आ गया है. बीना की मौत के बाद अब तुम्हे रागिनी का काम भी तमाम करना है. ज़रूरत पड़ी तो तुम्हे वीरेंदर के खिलाफ भी इस्तेमाल करूँगा, उसके बाद तुम हमेशा के लिए आज़ाद हो जाओगे. एक बार मुझे आज़ादी दिला दो, उसके बाद तुम्हारी पूजा किया करूँगा. बॅग को वहीं रखकर, बिहारी ने स्क्रूड्राइवर कुर्ते की जेब मे डाला और हथोडे को पाजामे की साइड मे छिपा कर उसे कुर्ते से ढक लिया.
दूध का गिलास हाथ मे लेकर वो सर्वेंट्स क्वॉर्टर की तरफ बढ़ गया. बिहारी ने दरवाज़े का लॉक खोला और धीरे से अंदर घुस गया. कमरे मे काफ़ी अंधेरा था. एक कोने मे कुर्सी से बँधी हुई रागिनी को उसने एक चद्दर से ढका रखा था. इन चार दिनो मे उसने रागिनी को बेहोशी की दवाई खिलाकर काबू मे किया हुआ था. होश आने पर वो चिल्ला ना पाए इसके लिए उसने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस रखा था और फिर उसके होंठों पर टेप लगाकर उसे सील कर दिया था. इन चार दिनो मे रागिनी की हालत बदतर हो चुकी थी. ठीक से साँस ना ले पाने के कारण और सही ढंग से खाना ना खा पाने के कारण उसकी हालत बहुत नाज़ुक हो चली थी.
हालाँकि बिहारी ने उसके हाथ पाँव बाँध रखे थे लेकिन जिस हालत मे बिहारी ने उसे पहुँचा दिया था अगर वो बँधी ना भी होती तो भी उसकी टाँगो मे इतनी जान नहीं थी कि वो खड़ी भी हो सकती. बिहारी उसे ज़िंदा रखने के लिए जब कुछ खिलाने के लिए उसके मुँह से कपड़ा निकालता तो नशे और कमज़ोरी के कारण वो चीख भी नहीं पाती. बिहारी ने उसके सर पर किसी ज़ोरदार चीज़ से प्रहार किया था जिस कारण उसके सर से काफ़ी खून बह गया था.
बिहारी ने लाइट जलाने के लिए स्विच को ऑन किया लेकिन लाइट नहीं जली.
बिहारी: साली अब इस लाइट को क्या हो गया?
बिहारी ने बाहर आकर देखा तो पाया कि सर्वेंट्स क्वॉर्टर्स की सर्विस लाइन की एक वाइयर अशोका ट्री पर झूल रही थी.
बिहारी: धत्त तेरे की, साली यह तो रागिनी से भी पहले लूड़क गयी. खैर कोई बात नहीं, अगर इसके आख़िरी दर्शन ना भी कर पाए तो कोई बात नहीं, मेरे दिल मैं तो वैसे भी आशना ही बसी है.
रागिनी पर से कंबल हटाकर, बिहारी ने रागिनी को आवाज़ लगाई. रागिनी की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई.
बिहारी: रागी, उठो देखो मैं तुम्हारे लिए दूध लाया हूँ. मुझे माफ़ कर दो जो मैं तुम्हारे साथ ऐसा सलूक कर रहा हूँ. लेकिन मैं क्या करूँ, तुम मेरा साथ नहीं दे रही तो मुझे यह सब करना पड़ा. चलो अब दूध पी लो, आज मैं तुम्हे आज़ाद कर दूँगा.
बिहारी ने महसूस किया कि कमरे मे अजीब तरह की दुर्गंध फैली हुई है.
बिहारी: साली यह कहीं मेरे मारने से पहले ही तो नहीं मर गयी? ऐसी दुर्गंध तो किसी मरे हुए शरीर के सड़ने से ही आती है.
बिहारी ने रागिनी के कंधे को झटक कर हिलाया तो वो उसकी गर्दन एक तरफ लूड़कती चली गयी. बिहारी की चीख निकल गयी. माथे पर एक दम से पसीने की बूँदें आने लगी.
बिहारी: साली यह तो पहले से ही मरी पड़ी है. पता नहीं साली ने कब प्राण त्याग दिए, कल शाम को तो ठीक ही लग रही थी. चलो अच्छा है खुद ही मर गयी वरना मुझे अपनी ही बीवी का कत्ल करने का गम सारी ज़िंदगी रहता.
बिहारी ने उसकी नब्ज़ देखी तो वो बंद पड़ी थी.
बिहारी: लग तो यही रहा है कि साली मर गयी है, अब तो जल्द से जल्द इस लाश को ठिकाने लगाना होगा वरना इसकी बदबू कहीं आस-पास ना फैल जाए.
बिहारी ने रागिनी की लाश को उठाकर गाड़ी मे लोड किया और चल पड़ा उसे ठिकाने लगाने. करीब 40-50 मिनट की दूरी तय करने के बाद वो यमुना नदी के किनारे पर पहुँचा. यह इलाक़ा झुग्गी झोंपदियों से घिरा था और इस वक्त वहाँ का महॉल काफ़ी सुनसान था. मज़दूर तबके के लोग दिन भर काम करने के बाद थके मान्दे अपनी अपनी झुग्गियों मे गहरी नींद मे सोए हुए थे. बिहारी ने वहाँ पहुँचते ही कार की हेडलाइट्स बंद कर दी जिस कारण उसे सुनियोजित जगह तक गाड़ी ले जाने मे काफ़ी समय लगा.
एक अच्छी सी जगह देखकर बिहारी ने रागिनी की लाश को डिकी से बाहर निकाला.
बिहारी: वैसे लगता तो नहीं लेकिन अगर यह साली ज़िंदा हुई और किसी के हाथ लग गयी तो मेरे लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकती है.
बिहारी ने जेब मे पड़ा स्क्रूड्राइवर निकाला और लगातार कयि वार रागिनी के शरीर पर कर दिए. रागिनी के जिस्म से हल्की सी आह भी नहीं निकली. उसके बाद उसने हथोडे से उसके सर पर कयि वार किए और जब आश्वस्त हो गया कि अब किसी भी कीमत पर रागिनी ज़िंदा नहीं है तो उसकी लाश को पानी मे धकेल दिया. लाश कुछ देर धीरे धीरे बहती रही और जैसे ही पानी की गहराई बढ़ी, लाश ने गति पकड़ ली और पानी के साथ तेज़ी से बहने लगी. लाश कभी पानी के नीचे जाती तो कभी उपर की तरफ तैरने लगती. बिहारी जानता था कि सुबह तक लाश किसी ऐसी जगह पहुँच जाएगी जहाँ उसकी शिनाख्त करने वाला कोई ना होगा
.
अपने हाथ और कपड़ों को सॉफ करके वो घर आकर अपने कमरे मे चैन की नींद सो गया. उसे विश्वास था कि अब उसकी मंज़िल दूर नहीं.
करीब तीन बजे रात को बिहारी चौंक कर उठा. उसे आशना के चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थी. बिहारी झट से उठा और उपर उसके रूम की तरफ भागा. आशना के कमरे के बाहर वीरेंदर भी खड़ा था और दरवाज़े को लगातार खटखटाए जा रहा था.
वीरेंदर: आशना, क्या हुआ? दरवाज़ा खोलो. क्यूँ चिल्ला रही हो?
आशना(चिल्लाते हुए): मुझे बचाओ वीरेंदर ब...... बे......... बीना का भूत मुझे मार डालेगा.
इतना सुनते ही बिहारी का सर चकराने लगा. वीरेंदर लगातार दरवाज़ा पीट रहा था. बिहारी भी वीरेंदर का साथ देते हुए: बिटिया दरवाज़ा खोलो, तुम्हे कुछ नहीं होगा.
आशना: अब तो हमारे पास उसका कन्फेशन भी है, हम पोलीस स्टेशन जाकर बीना के मर्डर मे बिहारी को पकड़वा सकते हैं.
वीरेंदर: हां बिल्कुल पकड़वा सकते हैं लेकिन उस से मेरे दिल को तसल्ली नहीं मिलेगी. उसने मेरी जान पर बुरी नज़र डाली है, उसे इतनी आसान सज़ा नहीं दिलवाउंगा.
आशना: वीर मुझे डरा लगता है इस बिहारी से. आप प्लीज़ यह रेकॉर्डिंग पोलीस को जाकर दे दीजिए ताकि वो जल्द से जल्द पोलीस की गिरफ़्त मे आ जाए.
वीरेंदर: ऐसा करने से यह बात उस से छुपि नहीं रहेगी कि हम ने ही उसे फँसाया है. अगर उसे इस बात का पता चल गया तो वो कोर्ट मे हमारे रिश्ते को बदनाम करने से पीछे नहीं हटेगा, इसलिए हमे वोही करना होगा जो हम ने पहले से सोच रखा है.
आशना(कुछ देर सोचने के बाद): ओके डीटेक्टिव साहब, जैसा आप कह रहे हैं वैसा ही होगा.
रात करीब 11:30 बजे जब बिहारी आश्वस्त हो गया कि वीरेंदर और आशना गहरी नींद सो रहे हैं, उसने दूध के गिलास मे बेहोशी की दवाई मिलाई और पोर्च की तरफ चल दिया. उसने वहाँ पर रखा एक टोल बॅग उठा लिया.
बिहारी(बॅग से स्क्रयू ड्राइवर और हथोडा निकालते हुए): मेरे शेरो, आज तुम्हे फिर से इस्तेमाल करने का वक्त आ गया है. बीना की मौत के बाद अब तुम्हे रागिनी का काम भी तमाम करना है. ज़रूरत पड़ी तो तुम्हे वीरेंदर के खिलाफ भी इस्तेमाल करूँगा, उसके बाद तुम हमेशा के लिए आज़ाद हो जाओगे. एक बार मुझे आज़ादी दिला दो, उसके बाद तुम्हारी पूजा किया करूँगा. बॅग को वहीं रखकर, बिहारी ने स्क्रूड्राइवर कुर्ते की जेब मे डाला और हथोडे को पाजामे की साइड मे छिपा कर उसे कुर्ते से ढक लिया.
दूध का गिलास हाथ मे लेकर वो सर्वेंट्स क्वॉर्टर की तरफ बढ़ गया. बिहारी ने दरवाज़े का लॉक खोला और धीरे से अंदर घुस गया. कमरे मे काफ़ी अंधेरा था. एक कोने मे कुर्सी से बँधी हुई रागिनी को उसने एक चद्दर से ढका रखा था. इन चार दिनो मे उसने रागिनी को बेहोशी की दवाई खिलाकर काबू मे किया हुआ था. होश आने पर वो चिल्ला ना पाए इसके लिए उसने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस रखा था और फिर उसके होंठों पर टेप लगाकर उसे सील कर दिया था. इन चार दिनो मे रागिनी की हालत बदतर हो चुकी थी. ठीक से साँस ना ले पाने के कारण और सही ढंग से खाना ना खा पाने के कारण उसकी हालत बहुत नाज़ुक हो चली थी.
हालाँकि बिहारी ने उसके हाथ पाँव बाँध रखे थे लेकिन जिस हालत मे बिहारी ने उसे पहुँचा दिया था अगर वो बँधी ना भी होती तो भी उसकी टाँगो मे इतनी जान नहीं थी कि वो खड़ी भी हो सकती. बिहारी उसे ज़िंदा रखने के लिए जब कुछ खिलाने के लिए उसके मुँह से कपड़ा निकालता तो नशे और कमज़ोरी के कारण वो चीख भी नहीं पाती. बिहारी ने उसके सर पर किसी ज़ोरदार चीज़ से प्रहार किया था जिस कारण उसके सर से काफ़ी खून बह गया था.
बिहारी ने लाइट जलाने के लिए स्विच को ऑन किया लेकिन लाइट नहीं जली.
बिहारी: साली अब इस लाइट को क्या हो गया?
बिहारी ने बाहर आकर देखा तो पाया कि सर्वेंट्स क्वॉर्टर्स की सर्विस लाइन की एक वाइयर अशोका ट्री पर झूल रही थी.
बिहारी: धत्त तेरे की, साली यह तो रागिनी से भी पहले लूड़क गयी. खैर कोई बात नहीं, अगर इसके आख़िरी दर्शन ना भी कर पाए तो कोई बात नहीं, मेरे दिल मैं तो वैसे भी आशना ही बसी है.
रागिनी पर से कंबल हटाकर, बिहारी ने रागिनी को आवाज़ लगाई. रागिनी की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई.
बिहारी: रागी, उठो देखो मैं तुम्हारे लिए दूध लाया हूँ. मुझे माफ़ कर दो जो मैं तुम्हारे साथ ऐसा सलूक कर रहा हूँ. लेकिन मैं क्या करूँ, तुम मेरा साथ नहीं दे रही तो मुझे यह सब करना पड़ा. चलो अब दूध पी लो, आज मैं तुम्हे आज़ाद कर दूँगा.
बिहारी ने महसूस किया कि कमरे मे अजीब तरह की दुर्गंध फैली हुई है.
बिहारी: साली यह कहीं मेरे मारने से पहले ही तो नहीं मर गयी? ऐसी दुर्गंध तो किसी मरे हुए शरीर के सड़ने से ही आती है.
बिहारी ने रागिनी के कंधे को झटक कर हिलाया तो वो उसकी गर्दन एक तरफ लूड़कती चली गयी. बिहारी की चीख निकल गयी. माथे पर एक दम से पसीने की बूँदें आने लगी.
बिहारी: साली यह तो पहले से ही मरी पड़ी है. पता नहीं साली ने कब प्राण त्याग दिए, कल शाम को तो ठीक ही लग रही थी. चलो अच्छा है खुद ही मर गयी वरना मुझे अपनी ही बीवी का कत्ल करने का गम सारी ज़िंदगी रहता.
बिहारी ने उसकी नब्ज़ देखी तो वो बंद पड़ी थी.
बिहारी: लग तो यही रहा है कि साली मर गयी है, अब तो जल्द से जल्द इस लाश को ठिकाने लगाना होगा वरना इसकी बदबू कहीं आस-पास ना फैल जाए.
बिहारी ने रागिनी की लाश को उठाकर गाड़ी मे लोड किया और चल पड़ा उसे ठिकाने लगाने. करीब 40-50 मिनट की दूरी तय करने के बाद वो यमुना नदी के किनारे पर पहुँचा. यह इलाक़ा झुग्गी झोंपदियों से घिरा था और इस वक्त वहाँ का महॉल काफ़ी सुनसान था. मज़दूर तबके के लोग दिन भर काम करने के बाद थके मान्दे अपनी अपनी झुग्गियों मे गहरी नींद मे सोए हुए थे. बिहारी ने वहाँ पहुँचते ही कार की हेडलाइट्स बंद कर दी जिस कारण उसे सुनियोजित जगह तक गाड़ी ले जाने मे काफ़ी समय लगा.
एक अच्छी सी जगह देखकर बिहारी ने रागिनी की लाश को डिकी से बाहर निकाला.
बिहारी: वैसे लगता तो नहीं लेकिन अगर यह साली ज़िंदा हुई और किसी के हाथ लग गयी तो मेरे लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकती है.
बिहारी ने जेब मे पड़ा स्क्रूड्राइवर निकाला और लगातार कयि वार रागिनी के शरीर पर कर दिए. रागिनी के जिस्म से हल्की सी आह भी नहीं निकली. उसके बाद उसने हथोडे से उसके सर पर कयि वार किए और जब आश्वस्त हो गया कि अब किसी भी कीमत पर रागिनी ज़िंदा नहीं है तो उसकी लाश को पानी मे धकेल दिया. लाश कुछ देर धीरे धीरे बहती रही और जैसे ही पानी की गहराई बढ़ी, लाश ने गति पकड़ ली और पानी के साथ तेज़ी से बहने लगी. लाश कभी पानी के नीचे जाती तो कभी उपर की तरफ तैरने लगती. बिहारी जानता था कि सुबह तक लाश किसी ऐसी जगह पहुँच जाएगी जहाँ उसकी शिनाख्त करने वाला कोई ना होगा
.
अपने हाथ और कपड़ों को सॉफ करके वो घर आकर अपने कमरे मे चैन की नींद सो गया. उसे विश्वास था कि अब उसकी मंज़िल दूर नहीं.
करीब तीन बजे रात को बिहारी चौंक कर उठा. उसे आशना के चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थी. बिहारी झट से उठा और उपर उसके रूम की तरफ भागा. आशना के कमरे के बाहर वीरेंदर भी खड़ा था और दरवाज़े को लगातार खटखटाए जा रहा था.
वीरेंदर: आशना, क्या हुआ? दरवाज़ा खोलो. क्यूँ चिल्ला रही हो?
आशना(चिल्लाते हुए): मुझे बचाओ वीरेंदर ब...... बे......... बीना का भूत मुझे मार डालेगा.
इतना सुनते ही बिहारी का सर चकराने लगा. वीरेंदर लगातार दरवाज़ा पीट रहा था. बिहारी भी वीरेंदर का साथ देते हुए: बिटिया दरवाज़ा खोलो, तुम्हे कुछ नहीं होगा.