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आशना वीरेंदर द्वारा हो रही इस वाइल्ड फक्किंग से निहाल हो रही थी लेकिन उसकी आग कम होने की बजाए और भड़क रही थी. वीरेंदर भी कहाँ पीछे हटने वाला था. वो लगातार किसी मशीन की तरह अपनी पिस्टन को आशना के एंजिन मे दौड़ाए जा रहा था. जी भर कर आशना को इस पोज़ मे फक करने के बाद वीरेंदर ने आशना को बिस्तर पर पटक दिया और खुद उसकी टाँगों को हवा मे उठाकर अपने दहक्ते लिंग को उसकी योनि मे उतार दिया. आशना के गले से एक लंबी आह निकली और वीरेंदर ने फिर से ताबड़तोड़ धक्कों के साथ आशना को जन्नत तक ले जाने का काम शुरू कर दिया.
आशना के बार फिर से चरम सुख तक पहुँची मगर वीरेंदर के धक्कों मे कोई कमी नही आई. आशना तक कर चूर हो चुकी थी मगर वो वीरेंदर का बखूबी साथ दिए जा रही थी. वीरेंदर की उत्तेजना मे कोई कमी नहीं आ रही थी.उसका हर धक्का पहले से अधिक बलवान होने लगा. आशना का सारा बदन थिरक रहा था. वीरेंदर द्वारा हो रहे इस मर्दन से आशना निहाल हो चुकी थी. उसके मन में हर जनम में वीरेंदर को ही अपने जीवन साथी के रूप मे पाने की इच्छा जागृत होने लगी.
आशना की टाँगें दुखने लगी तो वीरेंदर ने उसे चौपाया की पोज़ मे कर दिया और पीछे से उसकी योनि मे लिंग उतार दिया. आशना के नितंबों को कसकर पकड़ कर वीरेंदर ने एक बार फिर से रफ़्तार पकड़ ली. सारे कमरे मे आशना की आहों की और ठप ठप की आवाज़ गूँज रही थी.इस घमासान फक्किंग को शुरू हुए करीब करीब आधा घंटा हो चला था. आशना के जिस्म मे अब और सहने की ताक़त नहीं बची थी.
आशना: आअह भैयआ, कम ऑन, कम इन मी.भर दीजिए अपनी गुड़िया की कोख को और मुझे अपने प्यार के रस से सींच दीजिए.
आशना की व्याकुलता और बेकरारी देख कर वीरेंदर ने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी. आशना की आहें अब चीखों मे तब्दील होने लगी थी. तभी वीरेंदर ने कसकर उसके नितंबों को पकड़ लिया और उसके लिंग से वीर्य के फव्वारे छूट पड़े. वीर्य की धारा का परवाह इतना बलशाली था कि आशना को वीर्य की हर बूँद अपनी कोख पर गिरती हुई प्रतीत हुई. आशना की कोख को लगातार अपने वीर्य से भरते हुए वीरेंदर ने आशना के नितंबों को हाथ की थपकी से लाल सुर्ख कर दिया. हर थपकी से आशना के नितंब थिरकते और वीरेंदर के लिंग से इस नज़ारे के रोमांच से वीर्य उसकी कोख मे अर्जित होता.
तूफान थमा और कमरे मे एक ज़ोरदार चीख गूँजी. यह चीख दोनो के गले से निकली हुई संतुष्टि भरी आह का मिश्रण थी. दोनो ही अपनी अपनी मंज़िल को पाकर और अपनी हसरत को जीकर आनंदित थे.
वीरेंदर आशना के उपर ही गिर पड़ा. साँसें संभालते ही आशना ने वीरेंदर से कहा: वीर, आइ थिंक आइ विल बी प्रेग्नेंट बिफोर और लीगल हनिमून.
वीर ने मुस्कुरा कर उसके बालों मे उंगलियाँ फिराई और बोला: कल ही मैं तुम्हारे लिए प्रोटेक्षन का इंतज़ाम कर दूँगा.
आशना: व्हाट डू यू मीन कि मेरे लिए. प्रोटेक्षन तो आपको यूज़ करनी चाहिए.
वीरेंदर: माइ डार्लिंग गुड़िया, साइन्स ने बहुत तरक्की कर ली है. किसी बेचारे को क़ैद करने से बेहतर है की खुल के मज़े लो और एक छोटी सी टॅबलेट खा लो.
आशना: जाओ हटो, प्रोटेक्षन भी मुझे ही लेनी लड़ेगी और आपके उस बेचारे के बारे मे तो मैं ही जानती हूँ कि वो कितना बेचारा है.
वीरेंदर: चलो कोई बात नहीं, तुम कहती हो तो टॅबलेट मैं ही खा लूँगा.
वीरेंदर की बात सुनकर आशना मुस्कुरा पड़ी और उस से चिपक कर बोली: आपकी ख़ुसी के लिए कुछ भी करूँगी. आख़िर आप मेरे वीर जो हैं और "भैया का ख़याल तो मैं ही रखूँगी".
रात भर चली दिलों की हसरतों को पूरा करने की होड़ मे जहाँ आशना के जिस्म का एक एक अंग वीरेंदर के पौराष प्रेम से अपनी अन्भुज प्यास मिटाने की असफल और अथक कोशिश कर रहा था वहीं वीरेंदर के जिस्म का पोर पोर आशना के होंठों की छाप से सराबोर हो चुका था.
सुबह जब दोनो फ्रेश होकर नीचे आए तो मोहित नाश्ते की टेबल पर उनका ही वेट कर रहा था. रागिनी किचन मे मसरूफ़ थी. मोहित के लिए इस वक्त आशना और वीरेंदर को फेस कर पाना मुश्किल हो रहा था. वो शरम से गढ़ा जा रहा था. आख़िर कल रात उसने भी तो रागिनी के साथ मिलकर अपने दिलों के अरमान पूरे किए थे.
वीरेंदर को मोहित के पास जाने का इशारा कर आशना किचन की तरफ चल दी.
रागिनी नाश्ता तैयार करने मे बिज़ी थी. आशना के कदमों की आहट सुनकर रागिनी के दिल की धड़कने भी बढ़ गयी और आशना की तरफ देखे बिना ही बोली: दीदी, सिर के लिए आलो के परान्ठे बना दूं?
आशना: हां बना दो.
रागिनी: और आप के लिए?
आशना: मेरे लिए भी वोही बना दो.
रागिनी ने हैरानी से आशना की तरफ देखा और बोली: आप खा लेंगी? यह कहकर रागिनी ने अपना चेहरा फिर से आगे की तरफ मोड़ लिया.
रागिनी के इस सवाल पर आशना मुस्कुराइ और बोली: जिस इंसान को रिझाने के लिए डाइयेटिंग करती थी उसे तो मेरा भरा हुआ शरीर ही पसंद है.
आशना की बात सुनकर रागिनी ने चौंक कर आशना की तरफ देखा और दोनो की नज़रें मिली. एक दूसरे की आँखों मे रात भर ना सो पाने की थकान लेकिन चेहरे पर आए नूर और प्यार की संतुष्टि देख कर दोनो ही मुस्कुरा उठी और आशना ने आगे बढ़ कर रागिनी के हाथ पकड़ लिए. रागिनी की नज़रें अनायास ही झुक गयी.
आशना: तुम खुश तो हो ना रागिनी?
रागिनी ने नज़रें झुकाए हे आशना को शरमा कर हां मे जवाब दिया.
आशना: तुम्हारी खुशी मे तुम्हारी आँखों मे देखना चाहती हूँ.
रागिनी ने जब पलकें उठाई तो उसकी पलकें भीग चुकी थी.
रागिनी: दीदी, औरत और मर्द के बीच क्या रिश्ता होता है इसका सही मायने मे अर्थ मुझे कल मोहित से पता चला. पता नहीं मैं उनके काबिल हूँ भी या नहीं लेकिन उनसे अच्छा जीवन साथी मेरे लिए मिल पाना नामुमकिन है.
आशना ने उसकी आँखों से आँसू पोंछ कर उसे अपने सीने से लगा लिया और बोली: तू तो मेरी ननद है. याद हैं ना तेरा कन्यादान वीर ने करना है.
रागिनी ने हां में गर्दन हिलाई.
आशना: अच्छा यह सब छोड़, पहले तू यह बता कि मोहित तुझे खुश तो रखेगा ना?
आशना की बात का मतलब समझते ही रागिनी ने आशना को कस कर सीने से लगा लिया और धीरे से बोली "बहूत खुश रखेंगे वो मुझे दीदी".
आशना: अच्छा चल अब जल्दी से नाश्ता तैयार कर देते हैं. कहीं यह मुर्गे खाली पेट फिर से कोई शरारत करने के मूड मे ना आ जाए.
दोनो एक दूसरे की आँखों मे देख कर हंस दी. नाश्ते के साथ ही आशना ने न्यूज़ चैनल भी लगा दिया.
हर लोकल न्यूज़ चॅनेल पर एक ही हेडलाइन थी. "डॉक्टर. बीना का कातिल क़ानून के शिकंजे मे. एक प्राइवेट डीटेक्टिव एजेन्सी ने अपने दम पर केस की छानबीन करके हत्यारे को धर दबोचा."
न्यूज़ चॅनेल के मध्यम से ही उन्हे पता चला कि पोलीस ने उसे कल रात ही गिरफ्तार कर लिया था. बिहारी अपना मानसिक संतुलन खो बैठा था और वो पोलीस कस्टडी मे ही रहेगा. जैल मे ही उसका इलाज करवाया जाएगा.
आशना और वीरेंदर मन ही मन अपनी कामयाबी पर खुश थे.