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मस्तानी भाभियाँ

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मस्तानी भाभियाँ

मेरी उम्र 19 साल है और हाइट 5’2″.. वजन 55 किलो.. औसत बॉडी है.. और लण्ड भी अच्छा-खासा लम्बा और मोटा है.. एकदम मस्त सफेद और लण्ड का टोपा लाल है।

मेरा गाँव वहाँ से 40 किलोमीटर दूर था.. जहाँ पर यह अनोखी घटना घटी।

बात आज से 3 महीने पहले की है। उन दिनों में अपने पुराने गाँव में गया हुआ था जिसकी आबादी करीब 3 हजार लोगों की थी।

गाँव में मेरे चाचा चाची, उनके दो बेटे और बहुएँ रहते हैं।

यह कहानी उन कहानी उन्हीं दो भाभियों से जुड़ी हुई है।

मेरी बड़ी भाभी का नाम रूपाली है.. और फिगर साइज 35-29-36 का है.. दूसरी भाभी का नाम भारती है। उनकी उम्र 25 साल.. रंग मीडियम सांवला.. फिगर 34-26-34 का कन्टाप माल हैं।

दोनों भाभियाँ बहुत सेक्सी हैं।

क्योंकि गाँव में इतनी आजादी नहीं होती है, लोग बहुत संकुचित तरीके से रहते हैं। औरतों को बाहर निकलना कम ही रहता है, सिर्फ सब्जी ही लेने जाती हैं या कभी तालाब पर पानी भरने या कपड़े धोने.. और हाँ हगने के लिए तो जरूर जाती हैं।

हमारे चाचा के घर के पीछे ही एक तालाब है जो कि कुछ ही दूरी पर है, बीच में और किसी का घर नहीं था। सिर्फ कुछ बड़े-बड़े पेड़ थे।

हमारी भाभी उधर ही कपड़े धोने जाती थीं।

सभी भाभियाँ काम बांट लेती थीं, कोई रसोई.. तो कोई कपड़े धोने का.. तो कोई बर्तन और सफाई का।

तो जैसे ही मैं गाँव गया, उन सभी लोगों ने मेरा बड़े प्यार से स्वागत किया।

मेरी भाभियाँ मजाक भी करने लगीं कि बहुत बड़ा हो गया है.. शादी के लायक।

मैंने जाकर सभी से मिलने के बाद सोचा थोड़ा फ्रेश होता हूँ, मैंने अपनी बड़ी भाभी से बोला- मुझे नहाना है।

उन्होंने बोला- इधर नहाना है या तालाब पर जाना है?

मैंने कहा- अभी इधर ही नहा लेता हूँ। तालाब कल जाऊंगा।

तो वो बोलीं- ठीक है..

उन्होंने पानी रख दिया।

मैं दोनों भाभियों को देख कर उत्तेजित हो गया था, मैंने बड़ी भाभी को याद करते हुए मुठ मारी और नहा कर जैसे ही वापस आया, बड़ी भाभी बोलीं- क्यों देवर जी इतनी देर क्यों लगा दी। कहीं कोई प्रॉब्लम तो नहीं.. अगर हो तो बता देना.. शायद हम आप की मदद कर सकें।

ऐसा बोल कर दोनों भाभियाँ हँसने लगीं।

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और ख़ुशी भी हुई।

दूसरे दिन सुबह मैं 7 बजे उठा, नाश्ता किया।

तभी बड़ी भाभी कपड़े की पोटली बना कर तालाब पर धोने को जाने लगीं, वो बोलीं- चलो देवर जी तालाब आना है क्या?

मैं तो वही देख रहा था कि कब मुझे वो बुलाएँ।

मैंने ‘हाँ’ कहा और अपने कपड़े और तौलिया लेकर उनके साथ चल पड़ा।

रास्ते में वो बड़ी खुश दिख रही थीं, उन्होंने थोड़ी इधर-उधर की बातें भी की।

जब हम तालाब पहुँचे तो…

हे भगवान.. यह मैं क्या देख रहा हूँ.. मेरी तो आँखें फ़टी की फ़टी रह गईं.. वहाँ पर 10-15 औरतें थीं और उन सबमें से 6-7 ने तो ऊपर ब्लाउज ही नहीं पहना हुआ था।

मेरे कदम रुक ही गए थे।

भाभी ने पीछे मुड़ कर देखा और बोलीं- क्यों देवर जी क्या हुआ.. रुक क्यों गए?

मुझे मालूम था कि वो मेरे रुकने की वजह जानती थीं.. लेकिन जानबूझ कर मुझसे ऐसा पूछ रही थीं।

मैं बोला- भाभी यहाँ पर तो..

यह बोल कर मैं रुक गया।

भाभी ने पूछा- क्या.. यहाँ पर तो क्या?

मैं बोला- सब औरतें नंगी नहा रही हैं.. मैं कैसे आऊँ?

भाभी बोलीं- तो उसमें शर्म की क्या बात है.. तुम अभी इतने बड़े कहाँ हो गए। चलो अब जल्दी करो।

मैं तो चौंक गया।

वहाँ जाते ही सभी औरतें मुझे देखने लगीं और भाभी से पूछने लगीं- कौन है री ये लड़का? बड़ा शर्मीला है।

भाभी ने बोला- यह मेरा देवर है, शहर से आया है। अभी ही जवान हुआ है.. इसी लिए शर्मा रहा है। मैंने तो इनसे बोला है कि शर्माओ मत.. ये सब बाद में देखना ही है न!

यह सुनते ही सभी औरतें हँसने लगीं।

मुझे अब पता चला कि गाँव में भी औरतें मॉडर्न हो गई हैं और गंदी-गंदी बातें करती हैं।

उनमें से एक ने मेरी भाभी से बोला- क्यों री.. देवर से हमारा परिचय नहीं कराएगी क्या?

तो भाभी ने उन सभी से मेरा परिचय करवाया।

मेरा ध्यान बार-बार उन नंगी औरतों के दूधों पर ही चला जाता था।

तो वो भी समझने लगी थीं.. कि मैं क्या देख रहा हूँ।

उनमें से एक मीडियम साइज की 26 साल की औरत ने मुझे बोला- क्यों रे तूने आज तक कभी बोबा नहीं देखा.. जो घूर रहा है?

इस पर मेरी भाभी और दूसरी सभी औरतें हँसने लगीं।

मेरी भाभी ने बोला- हाँ शायद.. क्योंकि घर पर भी वो मेरे बोबे को घूर रहा था.. तो इसीलिए उसे यहाँ पर लाई हूँ.. ताकि सब कुछ खुल्लम-खुल्ला देख सके।

फिर उन्होंने मुझसे बोला- देवर जी देख लेना.. जी भर के.. बाद में शहर में ऐसा मौका नहीं मिलेगा।

इस पर सभी औरतें हँसने लगीं।

अभी ऐसी बातों से मेरे लण्ड की हालत खराब हो गई थी।

तभी मेरी भाभी ने कहा- देवर जी कब तक देखोगे.. आप यहाँ पर नहाने आए हैं.. न कि बोबे देखने..

अब मेरी हिम्मत भी थोड़ी खुल गई थी- भाभी ऐसा दिखाओगी तो कोई भला नहाने में समय क्यों गंवाएगा?

भाभी- ठीक है.. फिर देखो.. लेकिन ये सब तो तुम नहाते हुए भी देख सकते हो।

यह आइडिया मुझे अच्छा लगा।

लेकिन तकलीफ ये थी कि पानी में कैसे जाऊँ.. क्योंकि.. मेरा लण्ड बैठने का नाम नहीं ले रहा था।

तभी भाभी ने बोला- सोच क्या रहे हो कपड़े निकालो और कूद पड़ो पानी में..

मैं- ठीक है भाभी।

अब मैंने भी शर्म छोड़ दी, जो होगा देखा जाएगा.. सोच कर मैंने अपना शर्ट और पैंट उतार दिया।

अब मैं सिर्फ निक्कर में था, उसमें से मेरा लम्बा लण्ड साफ़ दिख रहा था.. वो भी उठा हुआ।

मेरे लण्ड का टोपा निक्कर के किनारे से थोड़ा ऊपर आ गया था।

जैसे ही उन सभी औरतों को दिखा.. तो भाभी और सभी औरतें मुझे घूरने लगीं।

भाभी- देवर जी, ये क्या तंबू बना रखा है अपनी निक्कर में?

मैं- क्या करूँ भाभी आप सभी ने तो मेरी हालत खराब कर दी है।

भाभी- आप मेरा नाम क्यों ले रहे हो? मैंने तो अभी कपड़े उतारे भी नहीं हैं।

मैं- हाँ वही तो अफ़सोस है।

और मैं हँसने लगा।

भाभी- लगता है आपकी शादी जल्द ही करनी पड़ेगी।

सभी औरतें हँसने लगीं।

मैं पानी में चला गया, मुझे वहाँ पर बड़ा मजा आ रहा था, मैं सोच रहा था कि हमेशा ही मेरा दिन ऐसा ही कटे।

इतने सारे चूचों के बीच मुझे मुठ मारने की इच्छा हो रही थी.. लेकिन मैं सभी के सामने नहीं मार सकता था.. वो भी पानी में..

शायद मेरी परेशानी को भाभी समझ रही थीं।

उन्होंने मुझे मजाक में कहा- देवर जी आप उसका जोश कम करो.. निक्कर फट जाएगी।

उधर ऐसी मजाक से मेरी हालत और खराब हो रही थी लेकिन उन लोगों को मस्ती सूझ रही थी।
 
भाभी ने नीचे बैठ कर कपड़े धोना चालू किए।

उनकी बैठने की पोजीशन ऐसी थी कि उनके घुटनों से दब कर उनके बोबे ब्लाउज से बाहर आ रहे थे और दोनों बोबों के बीच की बड़ी खाई दिखाई दे रही थी।

ब्लाउज उनके बोबों को समाने के लिए काफी नहीं था। उसका गला भी बहुत बड़ा था.. जिससे उनकी आधी चूचियाँ बाहर दिख रही थीं। चूची भी क्या गजब की थीं.. मानो दो हवा के गुब्बारे हों.. वो भी एकदम सफेद जैसे दिख रहे थे।

बस पूरा खाने को दिल कर रहा था।

मैं लगातार उनके बोबे देखे जा रहा था।

तब पता नहीं कब भाभी ने मेरे सामने देखा और हमारी नजरें मिलीं.. जिससे भाभी बोलीं- मुझे पता है देवर जी आप मेरी चूचियाँ देखना चाहते हैं तभी तो बार-बार घूर रहे हैं।

वे ऐसा बोल कर हँस पड़ीं.. और बोलीं- लो आपकी ये इच्छा मैं अभी पूरी कर देती हूँ।

यह बोल कर उन्होंने अपने पैरों को सीधा किया और मेरी तरफ देख कर मेरे सामने अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगीं। ब्लाउज भी कितना तंग था कि उनको शायद हुक खोलने में मुश्किल हो रही थी..

और वो मेरी तरफ देख कर बार-बार मुस्कुरा रही थीं।

आखिर उनका ब्लाउज का हुक खुल गया.. उसके बाद दूसरा.. उसके बाद तीसरा.. करके चारों हुक खोल दिए.. और उन्होंने ब्लाउज को वैसे ही रहने दिया।

उनके बोबे कपड़ों से ढके थे.. लेकिन उनकी लंबी लकीर दिख रही थी.. जो किसी के भी लण्ड का पानी खींचने के लिए काफी थी।

उन्होंने मेरी तरफ मुस्कुरा कर खुद ही अपने बोबों को दोनों हाथों से सहलाया और दो साइड से ब्लाउज अलग कर दिया।

बाद में उन्होंने अपने कंधे ऊपर करके ब्लाउज उतार फेंका।

अब उनके हाथ पीछे की ओर गए और उन्होंने अपनी ब्रा का हुक भी खोल दिया।

वो ब्रा भी अब उनके हाथों में थी और उनके दूधिया बोबे हवा में लहराने लगे। बोबे भी जैसे हवा में आजाद होकर आजाद महसूस कर रहे हों.. वैसे हिलने लगे।

उनके निप्पल मीडियम साइज के और एकदम काले थे। दोनों बोबों के बीच में कोई जगह नहीं थी और एक-दूसरे से अपनी जगह लेने के लिए जैसे लड़ाई कर रहे थे।

वो नजारा देखने लायक था.. मेरी आँखें वहाँ से नजरें हटाने का नाम नहीं ले रही थीं।

उन्होंने वो देख लिया और बोलीं- क्यों देवर जी अब बराबर है न.. हुई तसल्ली?

मैं बस हैरान होकर देखे ही जा रहा था।

बाकी औरतें उनकी हरकत से हँसने लगीं।

मेरा लण्ड अब मेरे काबू में नहीं था। तभी एक आंटी जो कि करीब 35 साल की थीं, उन्होंने भाभी को कहा- क्यों बेचारे को तड़पा रही हो.. ऐसा देख कर बेचारे के लण्ड से पानी निकल रहा होगा।

उनकी बात भी सही थी, शायद वो ज्यादा अनुभवी जो थीं.. इसीलिए आदमी के हालात समझती थीं।

वैसे मेरी भाभी भी कोई कम अनुभवी नहीं थीं.. लेकिन वो मजा ले रही थीं।

मैं भाभी को बोला- भाभी आप मत तड़पाओ मुझे.. मुझे अभी रहा नहीं जा रहा है।

भाभी बोलीं- क्यों रहा नहीं जा रहा है..? मतलब क्या हो रहा है?

मैं भी बेशर्म होकर बोला- भाभी मेरा लण्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है।

वो हँसते हुए बोलीं- सबर करो देवर जी.. उसका इलाज भी मेरे पास है.. देखते हैं कि कैसे नहीं बैठता है आपका वो.. लण्ड।

वो फिर कपड़े धोने लगीं।

मैं फिर उनके और दूसरी औरतों के बोबे देखते हुए फिर से नहाने में ध्यान लगाने लगा।

लेकिन मेरा ध्यान बार-बार उन सभी के बोबे और जाँघों के बीच में ही अटक जाता था।

कई औरतों का पेटीकोट तो घुटने तक ऊपर होने की वजह से उनकी जाँघें साफ़ दिख रही थीं.. और बोबे घुटने में दबने से इधर-उधर हो रहे थे।

मैं नहाना छोड़कर कहीं पेड़ के पीछे जाकर मुठ मारना चाहता था, मैं भाभी को बोला- भाभी.. मैं अब थक गया हूँ और मुझे भूख भी लगी है.. तो मैं घर जा रहा हूँ।

भाभी बोलीं- अभी से क्यों थक गए तुम और भूख लगी है.. तो तुम्हें कहीं और जाने की जरूरत नहीं है.. इधर ही तुम अपनी भूख मिटा लो।

ऐसा बोल कर उन्होंने बाजू वाली को बोला- क्यों री रसीली.. तेरे बोबे में अभी दूध आ रहा है या नहीं?

रसीली ने जवाब दिया- हाँ भाभी, आ रहा है।

भाभी बोलीं- जरा उसका तो पेट भर दे.. अपनी गोदी में लेकर!

यह सुन कर बाकी सब औरतें हँस पड़ीं।

भाभी बोलीं- जरा मेरे देवर का पेट भर दे.. अपनी गोद में लेकर!

सुन कर बाकी औरतें हंस पड़ीं।

मैं तो हैरान रह गया।

तभी रसीली की आवाज आई- आओ भैया इधर..

मैं शर्मा रहा था..

तो उसने मुझसे बोला- शर्माने की क्या बात है.. तुम्हारे भैया भी तो रोज ही पीते हैं.. अगर एक दिन तूने पी लिया तो खत्म थोड़ी ही होगा.. बहुत आता है इनमें।

मैं धीरे-धीरे आगे बढ़कर उसके पास गया।

वो पैरों को मोड़कर बैठ गईं और अपनी गोद में मेरा सर रखने को बोला।

मैंने वैसा ही किया.. क्योंकि अब मेरे पास कोई चारा नहीं था।

मेरे निक्कर में से बार-बार मेरा टोपा दिख रहा था।

मैं जैसे ही उनकी गोद में लेटा.. उसने अपने ब्लाउज के बटन खोलने चालू कर दिए।

एक.. दो.. तीन.. करके सभी बटन खोल दिए और ब्लाउज को दूर हटा कर अपने एक हाथ में बोबे को पकड़ा, अपने निप्पल को खुद दबाया.. तो जैसे एक फव्वारे की तरह दूध की धार मेरे पूरे चेहरे को भिगो गई.. मुझे बहुत ही मजा आया।

मैंने भी निप्पल को दो उंगली में लेकर दबाया.. तो फिर से वैसे ही दूध की पिचकारी उड़ती हुई मेरे चेहरे को भिगोने लगी।

अब मैंने अपना मुँह निप्पल के सामने रख दिया और उसे फिर से दबाने लगा.. तो मेरे मुँह में उसके शरीर का अमृत जाने लगा और उसका टेस्ट.. वाह क्या मीठा था.. एकदम मीठा..

तो मैं वैसे ही निप्पल को दबाने लगा और दूध पीने लगा।

बाद में उसने अपना निप्पल धीरे से मेरे मुँह में दे दिया और सिसिया कर बोली- ले.. अब चूस इसे..

मैं भी उसे चूसने लगा।

मैंने सोचा कि ऐसे ही पूरी जिंदगी दूध ही पीता रहूँ.. मेरे मुँह में दूध की धार भर रही थी। जैसे ही थन को मसकता.. पूरी धार मेरे मुँह में आ जाती।

मुझे रसीली भाभी का दूध पीने में बहुत ही मजा आ रहा था और वो भी अपनी दो उंगलियों में निप्पल लेकर दबातीं.. जिससे और दूध मेरे मुँह में आ जाता।

थोड़ी देर दूध पीने के बाद जब वो बोबे में खत्म हो गया.. तो मैंने भाभी को वो बताया।

उन्होंने दूसरी तरफ होने का बोला और दूसरा बोबा मेरे मुँह में दे दिया।

दूसरे बोबे से दूध पीते वक्त मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैं अपने हाथों से दूसरे बोबे की निप्पल अपनी दो उंगली में लेकर दबा देता.. जिससे रसीली भाभी की एक मादक आवाज आती थी ‘आह्ह्ह.. आआह्ह..’

यह देख कर भाभी भी उधर बैठे-बैठे अपने बोबे दबा देती थीं।

शायद उन्हें भी सेक्स करने का मन कर रहा था।

दूसरी सब औरतें अपने काम में से टाइम निकाल कर हमें देख लिया करती थीं।

तभी रसीली भाभी के दूसरे बोबे में भी दूध खत्म हो गया।

जब मैंने बताया तो वो बोलीं- अभी आधा लीटर पी गए.. अब तो खत्म होगा ही।

उनके ऐसा बोलने से सभी औरतें हँस पड़ीं।

उसकी बात भी सही थी। मैं आधा लीटर तो पी ही गया होऊँगा और मेरा पेट भी भर गया था। लगता था शायद शाम तक मुझे खाना ही नहीं पड़ेगा।

तभी रसीली भाभी बोलीं- देवर जी भूखे तो नहीं न अब.. वरना और भी हैं.. चाहो तो और दूध का इंतजाम कर देती हूँ।

मैं बोला- नहीं भाभी.. बस मेरा पेट पूरा भर गया है।

 
अभी भी मैं रसीली भाभी का बोबा चूस रहा था। तो रसीली भाभी बोलीं- रूपा.. लगता है ये मेरे बोबे ऐसे नहीं छोड़ेगा.. तुम इसे मेरे घर लेकर आना.. उसको पूरा भोजन और चोदन करा दूँगी।

रूपा भाभी हँस कर बोलीं- हाँ वो ठीक रहेगा.. लेकिन अभी तो हमारा मेहमान है।

फिर मैं दूध पीते-पीते रसीली भाभी के पेटीकोट के नाड़े पर अपना हाथ ले जाने लगा.. जिसे देख कर वो बोलीं- अभी नहीं.. घर आना आराम से करेंगे।

मैंने बोला- सिर्फ एक बार मुझे तुम्हारी ‘वो’ देखनी है।

रसीली भाभी बोलीं- वो मतलब..

मैं- मतलब आपकी चूत..

रसीली भाभी- अभी देख के क्या करोगे.. इधर तो कुछ होने वाला नहीं है।

मैं- हो भले कुछ ना.. लेकिन पता तो चलेगा कि पूरी दुनिया जिसमें समा चुकी है.. वो चीज कैसे होती है।

वो यह सुन कर हँस-हँस कर पागल हो गईं और मेरी भाभी को बोलीं- देख रूपा ये क्या बोल रहा है.. इसे मेरी चूत देखनी है.. और बोलता है कि मुझे वो देखना है.. जिसमें पूरी दुनिया समा चुकी है।

यह सुनकर वो और दूसरी अब औरतें हँसने लगीं।

रूपा भाभी- हाँ.. तो बता दे न.. वो भी क्या याद करेगा और रोज तेरे नाम की मुठ मारता रहेगा।

रसीली भाभी- अरे मेरे होते हुए क्यों मुठ मारेगा बेचारा.. कल ले आना मेरे घर.. धक्के ही लगवा दूँगी।

रूपा भाभी- ठीक है.. लेकिन अभी का तो कुछ कर..

रसीली भाभी- हाँ अभी तो मैं उसे मेरी मुनिया के दर्शन करा देती हूँ.. ताकि उसके मुन्ने को पता चले कि कल उसे कौन से ठिकाने पर जाना है और अभी मैं उसका केला चूस कर रस भी पी लेती हूँ.. गुफा में कल प्रवेश करवाऊँगी।

ऐसा बोल कर उन्होंने अपना पेटीकोट कमर तक ऊंचा कर दिया और अपनी रेड कलर की जालीदार पैंटी उतारने ही वाली थीं कि..

मैं- रहने दो.. मैं उतारूँगा।

रसीली भाभी- हाँ भाई, तू उतार ले।

उनके ऐसा बोलते ही मैंने अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया और उनकी चूत का उभार महसूस करने लगा।

पहली बार मैं किसी औरत की चूत छू रहा था.. चूत का उभार भी क्या गजब था.. जैसे बड़ापाव हो।

चूत के बीच में एक लकीर जैसा था.. और दोनों साइड एकदम चिकने गोलाईदार होंठ थे। मुझे तो जन्नत जैसा अनुभव लग रहा था।

मैंने साइड में से उंगली डालकर उनकी पैंटी को खींचकर उनकी लकीर को महसूस किया.. वो तो बस मेरे सामने ही देख रही थीं और मैं उनकी चूत की दुनिया में जैसे डूब गया था।

रसीली भाभी बोलीं- ऐसे ही चड्डी के ऊपर से ही देखोगे या उतारकर भी देखना है?

मैं जैसे होश में आया- हाँ भाभी जी..

ऐसा बोलकर मैंने उनकी पैंटी नीचे सरकाई और उतार फेंकी।

हे भगवान.. अब समझ में आया कि सभी मर्द चूत के पीछे क्यों भागते हैं.. शायद मैं भी उन लोगों की दुनिया में आ गया था।

उनकी चूत एकदम साफ़ थी.. मुझे मालूम था कि औरतों को भी झांटें होती हैं।

लेकिन फिर भी मैंने भोला बनकर रसीली भाभी से पूछा- भाभी जी मैंने सुना था कि औरतों की भी झांटें होती हैं लेकिन आपकी तो नहीं हैं?

वो हँसकर बोलीं- हाँ होती है न.. लेकिन मैंने आज साफ़ की थीं.. शायद मेरे पति से ज्यादा लकी तुम हो.. जो उनसे पहले तुमने मेरी बिना झांटों वाली चूत देख ली।

बस मैं तो उनकी चूत पर हाथ फेरने लगा और चूत का हर एक कोना देखने लगा। मैं अच्छे से देखना चाहता था.. तो मैंने उनकी ऊपर से लेकर नीचे तक चूत को महसूस किया.. जैसे मैंने चूत की दोनों गोलाईयाँ खोलीं.. बीच में दो होंठ जैसे खुलने लगे।

मैंने अंजान बनकर रसीली भाभी से पूछा- भाभी जी ये बीच में लटका हुआ क्या है?

रसीली भाभी- उसे चूत का दाना कहते हैं।

मैं आश्चर्य से बोला- क्या इसे ही दाना कहते हैं?

रसीली भाभी- हाँ मेरे राजा.. इसको चूसने से औरत को होंठ चुसाने से भी ज्यादा मजा आता है।

मैं- तो क्या मैं इसे अभी चूस लूँ?

रसीली भाभी- नहीं.. अभी सिर्फ देखो.. कल घर आकर जो करना हो सो कर लेना.. मैं मना नहीं करूँगी.. इधर सब आते-जाते रहते हैं।

मैं- ठीक है.. लेकिन मेरे इस केले का तो कुछ कर दो।

रसीली भाभी- ठीक है.. मैं अभी ही इसका रस निकाल देती हूँ।

मैं- तो देर किस बात की है.. ले लो तुम मेरा केला..

ऐसा बोलते ही उन्होंने मेरी निक्कर नीचे उतार दी और मेरा फड़फड़ाता हुआ लण्ड हाथ में पकड़ लिया।

ये मेरा पहली बार था.. इसीलिए बहुत गुदगुदी हो रही थी।

रसीली भाभी ने मेरे टोपे की चमड़ी को ऊपर-नीचे किया।

पहली बार में किसी और से मुठ मरवा रहा था.. वो भी किसी औरत से.. मेरा लण्ड काबू में नहीं था।

मैंने उनसे बोला- जल्दी करो भाभी.. मुझसे रहा नहीं जाता।

रसीली भाभी बोलीं- रुको भी.. इतनी भी क्या जल्दी है.. अभी तो सिर्फ हाथ ही लगाया है.. जब मुँह में लूँगी.. तो क्या होगा।

मैंने अंजान बनते हुए कहा- क्या इसे भी मुँह में लिया जाता है?

रसीली भाभी- हाँ..

और ऐसा बोल कर वो मेरे लण्ड की चमड़ी ऊपर-नीचे करने लगीं और मुठ मारने लगीं।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

उधर रूपा भाभी ये सब देख रही थीं.. जब मेरा ध्यान उन पर पड़ा तो मेरा शर्म से मुँह लाल हो गया।

मैं रसीली भाभी के हर एक झटके का आनन्द उठा रहा था।

रसीली भाभी के मुठ मारने से मेरी उत्तेजना और बढ़ गई थी और वीर्य की एक बून्द टोपे पर आ गई थी।

यह देखते ही रसीली भाभी ने मेरी मुठ मारना छोड़ दी।

एक बार तो मुझे लगा कि वो ऐसा मुझे क्यों आधे रास्ते में छोड़ रही हैं.. लेकिन तुरंत ही वो मेरे लण्ड पर झुक गईं.. और मेरा टोपा अपने मुँह में ले लिया।

मेरे तो जैसे होश उड़ गए और इतना मजा आने लगा कि अब मैं सातवें आसमान पर था।

धीरे-धीरे उन्होंने मेरा लण्ड पूरा मुँह में भर लिया और ‘चपर-चपर’ चूसने लगीं।

मेरी तो हालत खराब होती जा रही थी।

वो मुँह में जीभ फेरतीं.. तो कभी चप-चप करके चाटतीं।

अब तो वे जीभ से मेरे गोटे भी चूसने लगीं।

फिर से उन्होंने मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया और जड़ तक चूसने लगीं।

अब मेरा सब्र का बाँध टूटने वाला था, मुझे लगा कि मेरा वीर्य निकलने वाला है।

मैंने रसीली भाभी को बोला- भाभी जी छोड़ दो.. अब मेरा निकलने वाला है।

लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ.. क्योंकि वे सुना-अनसुना करके मेरा लण्ड चूसती रहीं।

अब मुझे क्या था.. मैं तो बिंदास होकर लौड़ा चुसाने का आनन्द लेने लगा।

अब मेरा पूरा बदन सिकुड़ने लगा, भाभी जी को मालूम हो गया और वो और जोर से चूसने लगीं।

तभी मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी.. वीर्य की धार सीधे उनके गले में जाने लगी।

मेरा लण्ड ऐसे 7-8 झटके मारते रहा.. लेकिन उन्होंने मेरा लण्ड नहीं छोड़ा और पूरा वीर्य पीने लगीं।

बाद में मेरे लण्ड को पूरा चाट-चाट कर साफ़ कर दिया।

अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए बोलीं- आपका पानी तो बहुत मीठा है।

मैं- होगा ही न.. पहली बार आपने चखा है।

रसीली भाभी- कैसा लगा देवर जी?

मैं- बहुत अच्छा.. ऐसा मजा मैंने पहले कभी नहीं लिया था.. आपने तो मुझे जन्नत की सैर करा दी।

रसीली भाभी- अभी सही जन्नत तो बाकी है। वैसे आपका लण्ड भी बहुत मस्त है। मेरे पति का तो सिर्फ अंगूठे जैसा है.. जब कि आप का तो पूरा डंडा है डंडा..

मैं- हाँ.. वो तो है।

मुझे अब पता चला कि पूरी दुनिया चूत में क्यों डूबी हुई है।

 
तभी रूपा भाभी बोलीं- चलो देवर जी.. अब बहुत मजा किया.. घर जाने में देर हो जाएगी तो कहीं सासू माँ इधर ना आ जाएँ।

रसीली भाभी भी बोलीं- जाओ मेरे राजा.. कल आना.. बाकी की जन्नत भी देख लेना।

भाभी बोलीं- चलो देवर जी बस.. मैं दो मिनट में नहा लेती हूँ.. फिर हम चलते हैं।

मैं- भाभी मुझे भी आपके साथ नहाना है।

रूपा भाभी- ठीक है.. तुम भी आ जाओ।

मैं वैसे ही नंगा उनके पास चला गया, सभी औरतें मुझे ही देख रही थीं।

मैं अब पानी में घुस गया.. भाभी ने किनारे पर बैठ कर मेरे सामने ही स्टाइल में पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट ‘सररररर..’ से नीचे गिर गया।

मैं तो देख के हैरान था, लगता ही नहीं था कि वो दो बच्चों की माँ थीं, पतली कमर नीचे जाते इतने बड़े कूल्हों में समा जाती थी कि बस…

उनके कूल्हे एकदम बड़े और गद्देदार थे और चूत वाला हिस्सा पूरा गीला था। शायद कपड़े धोने से उनकी पैंटी गीली हो गई थी। पैंटी एकदम सफेद होने की वजह से और गीली होने की वजह से उनकी चूत की लकीर साफ़ दिख रही थी।

तभी उन्होंने मेरे सामने ही दो साइड से दो उंगलियां डाल कर उन्होंने धीरे से पैन्टी को नीचे उतारना चालू किया और अपनी पैंटी को उतार दिया।

वाउ.. क्या नजारा था.. उनकी चूत चमक रही थी.. एकदम सफाचट.. जैसे अभी ही शेविंग की हो।

वैसे बीच में से उनकी चूत के होंठ बाहर दिख रहे थे और लगता था कि मुझे बुला रहे हों.. आओ मुझे चूसो।

होंठ के साइड की मुलायम दीवारें जो कि एकदम चिकनी दिख रही थीं.. वो नीचे जाकर अदृश्य हो जाती थीं.. और गाण्ड के छेद से मिल जाती थीं।

चूत की दीवार इतनी दबी हुई थी कि ऐसा लगता था जैसे पहले कभी वो चुदी ही ना हों।

धीरे-धीरे वो मस्त चाल से मेरी तरफ बढ़ रही थीं और आखिर में पानी में घुस गईं..

उन्होंने पानी में आते ही मुझे बोला- एक चूत से जी नहीं भरा.. जो दूसरी देख रहे हो.. सारे मर्द ऐसे ही होते हैं।

मैं- तो उसमें गलत क्या है.. भगवान ने चूत बनाई इसी लिए है ताकि मर्द उसे देख सकें.. चाट सकें और फाड़ सकें।

रूपा भाभी- हाँ देवर जी.. मेरी चूत में भी बहुत खुजली होती है.. और तुम्हारे भैया से वो मिटती ही नहीं.. क्या तुम मेरी खुजली मिटाओगे?

मैं- भला.. आपका ये गद्देदार शरीर.. कोई मूर्ख ही होगा जो चोदने को ‘ना’ बोले।

रूपा भाभी- ठीक है.. मैं आज घर जाकर तुम्हें मजे कराती हूँ। रात को तुम तैयार रहना।

मैं- हाँ भाभी.. लेकिन अभी आपका नंगा बदन देख कर मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है.. देखो रसीली भाभी के चूसने के बावजूद भी ये फिर से खड़ा हो गया है।

रूपा भाभी- लण्ड होता ही ऐसा है.. गड्डा देखा और खड़ा हुआ।

यह कह कर वो जोर से हँसने लगीं।

मैं- भाभी क्या आपके बोबे छू सकता हूँ?

रूपा भाभी- अरे यह भी कोई पूछने की बात है.. छुओ क्या.. चूसो.. जितना चूसना है उतना..

फिर मैंने सीधे ही अपने मुँह में भाभी का एक निप्पल भर लिया और दूसरे हाथ से पानी में उनकी चूत ढूंढने लगा।

उनकी फड़कती चूत मुझे तुरंत मिल गई.. एकदम चिकनी गीली-गीली सी..

जैसे ही मैंने निप्पल चूसा.. मेरे मुँह में दूध की धार बहने लगी।

यह मेरे लिए सरप्राइज था तो मैंने मुँह हटा कर भाभी से पूछा- आपके बोबे में भी दूध आ रहा है?

रूपा भाभी- हाँ.. क्यों कैसा लगा उसका टेस्ट?

मैं- बहुत बढ़िया.. लेकिन फिर आपने मुझे रसीली भाभी का दूध क्यों पिलाया.. आपके पास भी तो था न?

रूपा भाभी- ये मैं तुम्हें सरप्राइज देने वाली थी और वैसे भी इस बहाने आपको दूसरी औरत के बोबे का मजा भी देना चाहती थी।

मैं- भाभी.. आप मेरा कितना ख्याल रखती हैं।

और ऐसा बोल कर मैं फिर उनका दूध पीने लगा।

उधर रसीली भाभी भी ये सब देख कर गर्म हो गई थीं, वो हमारे बाजू में आईं और बोलीं- कम पड़े तो बोलना.. इसमें फिर से दूध भर गया है।

मैं बोला- वाउ.. ऐसा लगता है.. कि मुझे आज घर पर खाना नहीं पड़ेगा।

यह बोल कर मैं कभी रूपा भाभी का.. और कभी रसीली भाभी के बोबे चूस रहा था।

इतना दूध तो मैंने अपनी माँ का भी नहीं पिया होगा।

दोनों के 36 इंच के बोबे पूरा दूध से भरे थे और मैं उनको चूस-चूस कर खाली कर रहा था। दूध का टेस्ट एकदम मीठा और थोड़ा खारा था।

तभी रूपा ने बोला- मजा आ रहा है न देवर जी?

ऐसा बोल कर मेरे मुँह में लगे बोबे को खुद दबा-दबा कर भाभी मुझे तेज धार से दूध पिलाने लगीं। निप्पल से निकलती हर पिचकारी मेरे मुँह में गुदगुदी कर रही थी। मुझे लगा कि मैं सारी उम्र बस दूध ही पीता रहूँ।

बीच-बीच में मैं रूपा भाभी की चूत में उंगली डाल कर उन्हें छेड़ देता तो उनकी ‘आह..’ निकल जाती।

थोड़ी देर बाद दूध पी लिया.. तो भाभी बोलीं- चलो अब चलते हैं.. बाकी घर जाकर करेंगे।

रसीली भाभी भी नहाकर बाहर निकल आईं, अपने शरीर को तौलिये से पौंछा और ब्रा पहनने लगीं, बाद में ब्लाउज.. पैंटी.. पेटीकोट और फिर साड़ी पहनी।

रूपा भाभी- लगता है देवर जी, नंगी लड़की देख कर आपका मन अभी नहीं भरा है.. आपका कुछ करना पड़ेगा।

अचानक वो मेरे लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगीं.. उनमें अभी भी वासना भरी हुई थी जैसे बरसों की प्यासी हों।

वो तो रसीली भाभी से भी अच्छा चूस रही थीं।

जब वो पूरा लण्ड मुँह में लेकर जीभ का स्पर्श करातीं.. तो मेरे आनन्द की सीमा नहीं रहती।

ऐसे ही चूसने के बाद मेरा वीर्य निकलने की तैयारी ही थी.. जो भाभी को मैंने बोला भी.. लेकिन उन्होंने भी मेरे लण्ड को निकाला नहीं और चूसना चालू रखा।

दो मिनट बाद मेरे शरीर अकड़ गया और मेरा रस भाभी के मुँह में ही छूटने लगा.. वो गटागट मेरा सारा वीर्य पी गईं।

बाद में मेरे सुपारे को साफ़ करके बोलीं- अभी कैसा लग रहा है देवर जी?

मैं- भाभी आप बहुत अच्छी हैं.. मुझे बहुत मजा आया.. अब तो बस एक बार आपको चोदना है।

भाभी मुस्कुरा कर बोलीं- वो भी हो जाएगा.. बस थोड़ा धीरज रखो।

बाद में भाभी और मैं फटाफट फिर से नहा कर बाहर निकल आए और कपड़े पहन कर घर की ओर चल दिए।

दूसरी भाभी रूपा भाभी को देख कर मुस्कुरा दीं.. शायद उनको रूपा भाभी के इरादों का अंदाजा था।

उन्हीं में से एक भाभी मुझसे बोलीं- क्यों देवर जी, कैसी लगी हमारी बहती हुई नदी?

वो धीमे-धीमे हँसने लगीं.. मुझे तो उनकी डबल मीनिंग की बात सुनकर आश्चर्य हुआ.. कि सारी ही एक जैसी हैं।

रूपा बोलीं- भाभी लगता है देवर जी ने नदियों में डुबकी नहीं लगवाई.. है.. लगवाई होती तो कुछ ज्यादा खुश हो जाते।

अब मैं स्माइल देकर बोला- भाभी ऐसा नहीं है.. अभी तो सिर्फ मैंने नदी को दूर से देखा है.. इसमें डुबकी लगाना बाकी है।

वो दोनों मेरी बात सुनकर हँस पड़ीं और भाभी बोलीं- तो जल्द ही लगा लेना लाला.. कहीं पानी सूख ना जाए।

मैं- नहीं भाभी.. मैंने नदी ध्यान से देखी है.. उसका पानी सूखने वाला नहीं है।

तो रूपा भाभी मुझे देखने लगीं और भाभी को बोलीं- लगता है एक ही दिन में नदी को नाप लिया है देवर जी ने.. लेकिन शायद उन्हें मालूम नहीं कि इन गहरी नदी में कई लोग डूब भी जाते हैं।

मैं- हाँ.. लेकिन मैंने ग़ोता लगाना सीख लिया है।

तभी दादी आ गईं और हम सब दूसरी बातें करने लगे।

दादी के आने से मैं भाभी से बोला- भाभी, मैं गाँव में थोड़ा घूम कर आता हूँ।

भाभी के बदले दादी बोलीं- हाँ.. जा बेटा.. थोड़ा ध्यान रखना बेटा और दोपहर को टाइम पर 12 बजे से पहले घर आ जाना।

मैं- ठीक है दादी जी।

मैं फिर उधर से चला गया। गाँव में पदर (जहाँ बस-स्टैंड होता है और बुजुर्ग लोग बैठने आते हैं) था.. वहाँ जाकर एक पान की दुकान से मैंने सिगरेट ली। हालांकि मैं रोज नहीं पीता.. कभी महीने में एक-दो बार पी लेता हूँ।

थोड़ी देर इधर-उधर घूमने के बाद मैं 12 बजे घर वापस आ गया, आकर खाना खाया।

तब भारती भाभी बर्तन धोने लगीं, मैं देख रहा था कि उनके भारी स्तन घुटनों से दबने से आधे बाहर छलक रहे थे, शायद वो मुझे जानबूझ कर दिखा रही थीं।

क्योंकि जैसे ही दादी जी आईं.. उन्होंने अपने पैर सही कर लिए और दूध को ढक लिए।

दादी के जाने के बाद उन्होंने मुझे एक सेक्सी स्माइल दी.. मैं भी मुस्कुरा दिया।

तभी भारती भाभी मेरे दोनों भाईयों का टिफिन पैक करके आईं और वो खेत में देने जा रही थीं।

तभी दादी ने भारती भाभी को बोला- भारती बेटा.. जरा इसको भी साथ ले जा.. वो भी खेत देख लेगा।

मेरे मन में तो अन्दर से लड्डू फूटने लगे। शायद वो भी खुश थीं.. क्योंकि वो पलट कर मेरे सामने मुस्कुरा दीं।

मैं तो तैयार ही था.. तो चल पड़ा अपनी मस्तचुदक्कड़ भाभी के साथ..

 


घर से निकलते ही भारती भाभी ने मुझसे पूछा- क्यों देवर जी कोई लड़की पटाई है या नहीं?

मैं- नहीं भाभी..

भारती भाभी- क्यों?

मैं- कोई मिली ही नहीं..

कुछ देर शांति के बाद उन्होंने मुझसे फिर पूछा- कैसा रहा आज का नदी का स्नान.. रूपा भाभी ने सिर्फ नहलाया या कुछ और भी..

यह बोल कर वो रूक गईं।

मैं- कुछ और का मतलब?

भारती भाभी- ज्यादा भोले मत बनो.. जब तुम पदर में घूमने गए थे तो रूपा ने मुझे सब बताया था।

अब हैरानी की बारी मेरी थी, ये लोग आपस में सब शेयर करते हैं?

आश्चर्य भी हुआ.. लेकिन मैंने अपने आपको जाहिर नहीं किया।

मैं- आप सब जानती हैं.. फिर क्यों पूछ रही हैं.. लगता है आप भी रूपा भाभी की तरह भूखी हैं?

अब उनके चेहरे पर मुस्कान आई, उन्हें शायद मेरे ऐसे जवाब का अंदाजा नहीं था।

फिर भी वो बोलीं- हाँ मैं भी भूखी हूँ। तुम्हारे भैया कहाँ रोज चढ़ते हैं.. मेरे ऊपर..

मैं उनकी ऊपर चढ़ने वाली गाँव की भाषा पर खुश हुआ। लेकिन सोचा कि गाँव की भाषा में ऐसे ही बोलते होंगे.. चढ़ना और उतरना.. जैसे लुगाई न हो कोई ट्रेन हो।

मैं- तो आप क्या अपनी जवानी को शांत करने के लिए करती हैं?

भारती भाभी- और क्या कभी कभी हम दोनों मिलकर एक-दूसरे की चाट देते हैं। कभी गाजर कभी मूली डाल कर अपनी आग शांत कर लेते हैं। वैसे आपको पता नहीं होगा.. मेरे पति नामर्द हैं। रूपा को बच्चा हुआ.. लेकिन मुझे नहीं हो रहा।

मैं- क्यों किसमें प्रॉब्लम है?

भारती भाभी- मैंने चोरी छिपे चेकअप करवाया.. मेरा तो नॉर्मल आया.. पर वो अपने चेकअप के लिए तैयार नहीं हैं।

मैं- भाभी उनसे बच्चा नहीं होता.. लेकिन चुदाई तो हो ही सकती है न?

भारती भाभी- हाँ लेकिन ऐसा होने के बाद हमारे संबंध में वो मिठास नहीं रही.. जो पहले थी। वो भी उसकी चिंता में दुबले होते जा रहे हैं और जब महीने में एक बार चढ़ते भी हैं तो बस दो मिनट में झड़ जाते हैं। दोनों भाई भी तुम्हारी और भाभियों की चुदाई कभी-कभी ही करते हैं। उनको इस सबमें दिलचस्पी नहीं रही। फिर बातों-बातों में हम दोनों देवरानी-जेठानी को एक-दूसरे की हालत पता चली और धीरे-धीरे हम मिलकर आनन्द उठाने लगे। जब तुम घर आए तो हमें थोड़ी आशा की किरण दिखने लगी कि शायद हम दोनों तुमसे चुद जाएँ।

मैं- भाभी आप फ़िक्र नहीं करना.. अब मैं आ गया हूँ.. और दोनों को चोद कर तृप्त कर दूँगा।

तो मेरी उस बात पर उनकी हँसी निकल गई।

मैं- भाभी, एक सवाल पूछूँ आपसे? ये ‘एम सी’ क्या होता है?

भारती भाभी- वो हर एक औरत को होता है.. जब एक महीना होता है.. तो उसका बीज बनता है.. और अगर बच्चा नहीं ठहरता है.. तो ‘एम सी’ में निकल जाता है। लेकिन अगर बच्चा रह गया तो एम सी नहीं आती है।

मैं- वो दिखने में कैसा होता है?

भारती भाभी- बस लाल रंग का खून ही होता है। लेकिन उस टाइम औरत को पेड़ू (पेट का नीचे और चूत के ऊपर का भाग) में थोड़ा दर्द होता है।

मैं- भाभी भगवान ने मर्दों के लिए ये बोबे बहुत अच्छे आइटम बनाए हैं.. दिल करता है कि बस दबाते ही रहें और उसमें से निकलते दूध को पीते ही रहें।

भारती भाभी हँसकर बोलीं- हाँ वो तो है सभी मर्दों को औरतों में वही सबसे ज्यादा पसंद आता है। वैसे क्या तुमने रूपा का दूध पिया?

मैं- हाँ..

भारती भाभी- कैसा लगा?

मैं- बहुत मीठा.. भाभी क्या आप मुझे दूध पिलाओगी?

भारती भाभी- धत पगले कहीं के.. दूध ऐसे थोड़ी ही आता है।

मैं- तो कैसे आता है?

भारती भाभी- अरे वो तो बच्चा पैदा होने के बाद आता है।

मुझे यह मालूम नहीं था, सोचा आज यह नया जानने को मिला।

मैं- तो आप भी माँ बन जाओ न।

भारती भाभी- मैं तो तैयार ही हूँ.. लेकिन तुम्हारे भैया..

मैं- लेकिन मैं तो हूँ न..

भारती भाभी- हाँ वो तो मैं भूल ही गई थी। लेकिन कहीं उनको शक हो गया तो?

मैं- शक कैसे होगा.. क्योंकि उन्होंने खुद का चेकअप नहीं करवाया है.. और अपने को बराबर ही मानते हैं।

भारती भाभी- हाँ वो सही है.. मैं तुम्हारा बच्चा पैदा करूँगी और आपको दूध भी पिलाऊँगी।

मैंने रास्ते में कई बार उनके बोबों को भी दबाया था। होंठों भी छुआ और गाण्ड पर भी हाथ फिराया। वो नाराज होने वाली तो थीं नहीं.. और बातों-बातों में खेत भी आ गया।

भाभी ने सबको खाना खिलाया और सब फिर से काम में लग गए। बड़े भाई को बाद में किसी काम से तुरंत शहर जाना था.. तो वो निकल गए।

दूसरे वाले भी यानि की भारती के पति खेत में काम करने के लिए चले गए। अभी खेत में सिर्फ भारती के पति ही थे। लेकिन वो बहुत दूर थे। हमारे खेत में हमारा तीन कमरे और रसोई का मकान भी था.. जिसमें हम सभी ने खाना खाया था।

भैया के जाने के बाद मैंने भाभी से पूछा- क्यों क्या ख्याल है आपका?

वो बोलीं- किस बारे में?

मैं- चुदाई के बारे में।

भारती भाभी- यहाँ पर?

मैं- क्यों क्या ख्याल है आपका चुदाई के बारे में!

भारती भाभी- यहाँ पर?

मैं- हाँ.. तो उसमें क्या है.. वैसे भाई भी अभी खेत में दूर हैं.. और वैसे भी वो मुझे छोटा ही समझ रहे हैं। चोदते वक्त अभी गए तो उसे मुझ पर शक नहीं होगा, हम दरवाजा बंद करके सोएंगे।

भारती भाभी खुश होकर बोलीं- ठीक है.. मैं गेट बंद करके आती हूँ।

वो जैसे ही गेट बंद करके आईं.. मैंने उनको अपनी बाँहों में ले लिया, सीधा साड़ी का पल्लू पकड़ कर साइड में कर दिया।

भाभी ने पीले रंग का ब्लाउज पहना था, मैंने उनके बोबे दबोच लिए.. वो बोलीं- धीरे देवर जी.. भागी नहीं जा रही हूँ.. इधर ही रहूँगी।

मैंने उनके बोबे के बीच में मेरा मुँह घुसा दिया और उनकी चूचियों की खुशबू लेने लगा, दोनों हाथों से उन्हें मेरे मुँह पर दबाने लगा। क्या मस्त अनुभव था इतने नर्म गुब्बारे जैसे थे कि बहुत मजा आ रहा था।

उनके बोबों की क्या मस्त मादक खुश्बू थी.. दिखने में एकदम टाइट.. मसकने में मुलायम चूचे थे.. और एकदम खड़े हुए दिख रहे थे। पीले ब्लाउज में से उनका ऊपरी हिस्सा थोड़ा डार्क दिख रहा था।

मैंने मजाक में पूछा- भाभी ये ब्लाउज इधर काला क्यों है?

वो शरमा गईं और बोलीं- खुद ही देख लो। मेरी नजर वहाँ तक नहीं जा रही है।

मैं- उसके लिए मुझे इसे खोलना पड़ेगा।

वो बोलीं- तो खोल लो ना.. किसने रोका है.. मैं तो अपना सब कुछ तुमसे खुलवाना चाहती हूँ।

मैं बहुत एक्साइटेड हो गया और उनके हुक को सामने से खोलने लगा। एक..दो..तीन.. करके सब हुक खोल दिए। मुझे मालूम था कि उन्होंने नीचे ब्रा नहीं पहनी है.. क्योंकि तभी वो ऊपर का हिस्सा काला लग रहा था।

जैसे संतरे का छिलका निकलता है.. वैसे मैंने धीरे से ब्लाउज के दोनों हिस्सों को बोबों से हटाया।

वाह क्या नजारा था.. भारती भाभी के बोबे तो रूपा भाभी से भी टाइट थे। क्योंकि उनको अब तक बच्चा नहीं हुआ था। एकदम सफेद.. उनकी नोक थोड़ी डार्क और निप्पल छोटे-छोटे चने के दाने जैसे और एकदम कड़े थे, जैसे बोल रहे हों कि आओ जल्दी से मुझे चूसो।

मैं तो कण्ट्रोल नहीं कर पाया और सीधा बिना सोचे ही मुँह में निप्पल लेकर चूसने लगा।

मैं एक बोबा चूस रहा था और चूसते-चूसते दबा भी रहा था, दूसरे हाथ से दूसरा बोबे के निप्पल को दो उंगली में लेकर दबा रहा था।

भाभी के मुख से धीमी धीमी सिसकारियाँ निकल रही थीं।

धीमे-धीमे उन पर सेक्स का नशा चढ़ने लगा और सिसकारियाँ भी बढ़ने लगीं।

अब वो बेफ़िक्र होकर ‘आह्ह.. ओह्ह.. और चूसो देवर जी.. काट लो पूरा..’ करके आनन्द ले रही थीं।

मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और साड़ी उतार फेंकी। पेटीकोट उतारने की जरूरत नहीं थी.. बस उठाने की आवश्यकता थी।

जैसे मैंने उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, अचानक उन्हें क्या हुआ कि मुझे धक्का देकर गिरा दिया.. और खुद बिस्तर से नीचे उतर कर सामने खड़ी हो गईं।

उन्होंने अपना पेटीकोट उठाया और दो उंगली डाल कर पैंटी उतार दी.. फिर तेजी से पलंग पर चढ़ कर पेटीकोट फैलाया और सीधा मेरे मुँह पर बैठ गईं.. जिससे मुझे बाहर का कुछ दिख नहीं रहा था.. क्योंकि चारों और पेटीकोट था और सामने उसका वो सेक्सी पेट.. वाउ.. मैं तो उनके इस सेक्सी अंदाज से हैरान रह गया।

तभी और कुछ सोचता उससे पहले उन्होंने मेरा सिर पकड़ कर सीधा अपनी चूत में दबा दिया।

मैं भी चूत खा जाने वाला था, मैं तो उनकी फांकों को खोलकर जीभ से ‘सटासट’ चाटने लगा।

क्या रस टपक रहा था उनका.. एकदम चिपचिपा.. लेकिन टेस्टी भी, मैं तो बस चाटता ही रहा और वो मजे से अपनी चूत चटवाती रहीं।

तभी वो बोलीं- मुझे मूत लगी है.. क्या आप मेरा मूत पियोगे?

मैं- हाँ भाभी.. आपकी इतनी सुंदर चूत का मूत भी कितना टेस्टी होगा.. जल्दी मेरे मुँह में धार दे दो।

वो बोलीं- छी: गंदे कहीं के.. मैं तो मजाक कर रही थी।

मैं- ये गंदा नहीं होता।

वो चुप हो गईं और सीधे उन्होंने मेरे मुँह में मूत की धार लगा दी.. ‘सीईईई..’ करके उनका मूत मेरे मुँह में जा रहा था।

वो जो मूतने की आवाज थी.. वो बड़ी सेक्सी थी ‘सीईईई..’ मैं तो बस बिना रुके उनका मूत पिए जा रहा था।

जब उन्होंने मूतना खत्म किया.. तो मैं आखरी बून्द तक चाट गया जिससे उनकी चूत और साफ़ हो गई।

उन्होंने अपना पेटीकोट उठाकर मेरे मुँह को देखा। जब नजरें मिलीं.. वो शर्मा गईं.. और हल्के से मुस्कुराने लगीं।

अब उनकी हालत खराब थी। वो बर्दाश्त करने की हालत में नहीं थीं। उन्होंने अचानक उठ कर मेरी चड्डी पर हमला किया और तुरंत ही मेरा लण्ड निकाल कर उसकी मुठ मारने लगीं।

मेरा लण्ड एकदम टाइट था और लोहे की तरह गर्म भी। उन्होंने दो-चार बार हिलाने के बाद तुरंत ही मुँह में ले लिया। मेरा लम्बा लौड़ा उनके मुँह में पूरा नहीं जा रहा था.. फिर भी वो बहुत अन्दर लेकर चूसने लगी थीं।

मैंने भाभी को बोला- मुझे भी मूतना है।

तो लण्ड बाहर निकाल कर बोलीं- मेरे मुँह में ही मूत लो, तुमने मेरा मूत पिया.. तो मैं भी तुम्हारा पियूँगी।

ऐसा बोल कर फिर से मेरा लण्ड मुँह में ले लिया।

मैंने भी तुरंत मूतना चालू कर दिया, वो धार सीधे उसके हलक में जा रही थी।

मेरा मूत पीते वक्त उन्होंने मेरा लण्ड गले तक जो डाल रखा था।

उनकी साँसें रुक गई थीं। मेरा मूत सीधा ही उनके गले में जा रहा था। मूतना खत्म होते ही वो हाँफने लगीं.. क्योंकि उन्होंने सांस रोक रखी थी।

 
थोड़े समय बाद फिर से मेरा लौड़ा चूसने लगीं।

मैंने उनको बोला- अब मुझे चोदना भी है.. ऐसे ही करती रहोगी.. तो मुँह में झड़ जाऊंगा।

वो- कोई बात नहीं.. आप मुँह में ही झड़ जाओ।

उनके ऐसे बोलते ही मैंने उनका सर पकड़ कर मुँह चोदने लगा। वो ‘आह.. ओह..’ कर रही थीं क्योंकि लौड़े के मुँह में होने के कारण उनकी आवाज गले में ही दब जाती थी।

फिर मैंने स्पीड बढ़ा दी और मेरे लण्ड से वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी.. वो सीधे गटक गईं, मेरे लण्ड से एक भी बून्द को बाहर नहीं गिरने दिया और चूसना चालू रखा।

वो जैसे थकती ही नहीं थीं। चूसना तो ऐसे था कि जैसे बड़ा टेस्ट आ रहा हो, फिर से मेरे लौड़े को सहलाने लगीं।

फिर वो पलटीं.. और लंड चूसते-चूसते ही मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दी। हम अब 69 के पोज में थे। मुझे पता था कि मुझे अब क्या करना है।

मैं अभी चूत को चाटने लगा, चूत की दोनों पंखुड़ियों को अलग करके चूसने लगा और उनके दाने पर जीभ फेरने लगा।

उनकी सिसकारियाँ अब बढ़ रही थीं, वो बड़ा आनन्द ले रही थीं.. मेरा भी लौड़ा अब दूसरे राउंड के लिए तैयार था।

वो इस बात को शायद समझ गई थीं, वो भी अब सीधा लेट गईं.. और मुझे अपने ऊपर खींच लिया।

वो खुद की टांगें चौड़ी करके लेटी हुई थीं, उन्होंने मुझे दोनों टाँगों के बीच में ले लिया।

अब मैंने उनके होंठ चूसना चालू किए। उनके होंठों पर चिकनाई लगी हुई थी.. जो कि मेरे वीर्य की थी, तो मैंने भी अपने वीर्य का स्वाद चखा.. मैं बस उनके होंठों को चूसे जा रहा था।

मैं एकाध बार उनके कान के पीछे भी चूम लेता.. तो वो अकड़ जाती थीं। शायद वो उसकी सबसे ज्यादा सेंसटिव जगह थी। मैं समझ गया था तो मैं बार-बार उनके कान की लौ को चूस लेता था.. कभी उनकी गर्दन पर भी चूम लेता था।

धीरे-धीरे में नीचे की ओर बढ़ा और मैंने उनके हाथों को फैला दिया.. और उनकी बगलों को सूँघने लगा।

औरतों की बगल की खुश्बू बहुत अच्छी होती है, नशा करने वाली.. जो हमें आकर्षित करती है।

मैं उनकी बगलों को चाटने लगा।

बारी-बारी से दोनों बगलों को चाटने के बाद में उनके बोबों पर आया। एक बोबे के निप्पल को मैंने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। साथ ही मैं दूसरे बोबे के निप्पल को उंगली में लेकर दबा रहा था।

धीरे-धीरे उनकी मादक आवाजें बढ़ने लगीं- देवर जी.. आह्ह.. अब मत तड़पाओ मुझे.. बस भी करो.. अब चोद भी दो मुझे.. आह.. म्मम्म.. उईईउ.. डालो.. न.. आह.. ओह..

उनकी आवाज पूरे कमरे गूंज रही थी- प्लीज डालो ना राजा.. मत तड़पाओ अब..

वो अपनी कमर हिलाकर एकदम चुदासी सी हो गईं.. लेकिन मैं उन्हें और तड़पाना चाहता था। मैंने बोबों को चूसना चालू ही रखा और अब मैं उनकी चूत पर आ गया, चिकनी चूत को चूसने लगा.. साथ में बोबों को भी दबा रहा था.. तभी वो एकदम से भड़क उठीं।

मुझे पूरी ताकत से मुझे नीचे गिरा दिया और बोलीं- साले भड़वे.. पता नहीं चल रहा है तेरे को चोदने को..

मैं तो उनके मुँह से गाली सुन कर उनकी ओर देखता ही रह गया.. वो झपट कर मेरे ऊपर चढ़ गईं। पेटीकोट को चारों और फैला कर उन्होंने मेरा लण्ड एक हाथ में पकड़ा और धीरे-धीरे लण्ड पर बैठने लगीं।

लण्ड ‘फ़चाक..’ करते हुए उसकी दीवारों को चीरते हुए अन्दर घुस गया, उसके साथ ही उनकी हल्की सी चीख भी निकल गई- उईईईई.. माँमआ..

वो उसी हालत में दो मिनट बैठी रहीं.. क्योंकि उसको थोड़ा दर्द भी हुआ था, पहली बार इतना बड़ा लण्ड ले रही थीं।

वे थोड़ी देर शांत बैठी रहीं, फिर उन्होंने धीमे-धीमे ऊपर-नीचे होना चालू किया और मुझसे अपनी प्यासी मुनिया चुदाने लगीं।

मैं भी उनके रसीले बोबों को दबाने लगा.. कभी निप्पल के दाने को दो उंगली में लेकर दबा देता.. तो उनकी ‘सीईईईई.. उईमुइ मुम्म.. थोड़ा धीरे.. मेरे राजा..

आवाज निकलती और ‘आहआह.. आह.. आह..’ करके वे मुझे चोदने लगीं।

जब लण्ड अन्दर या बाहर जाता तो ‘फच.. गच..’ की आवाज आती थी.. जो मुझे पागल करने के लिए काफी थी।

धीमे-धीमे उनकी स्पीड बढ़ रही थी, मैं समझ गया कि वो अब झड़ने वाली हैं.. तो मैं भी नीचे से सहयोग देते हुए झटके लगा देता था।

ऐसे ‘गचागच’ चोदने से मैं भी अब चरम सीमा के नजदीक था, वो अब भी स्पीड में ऊपर-नीचे होने लगीं.. और अचानक उन्होंने मेरी छाती को भींच लिया और ठंडी पड़ गईं।

लेकिन मैं अभी झड़ा नहीं था.. तो मैंने उन्हें सीधा लिटाया और ‘गचागच’ शॉट मारने लगा.. जिस कारण से मैं भी तुरंत झड़ गया।

मैंने उनसे पूछा भी नहीं कि मेरा वीर्य कहाँ गिराऊँ.. क्यों कि मुझे ही तो उसे माँ बनाना था और अभी वो सेफ पीरियड में भी नहीं थीं।

मैंने अपने माल की पिचकारी अन्दर ही छोड़ दी।

मेरे गर्म वीर्य की धार से वो अपने कूल्हों को इधर-उधर करने लगीं.. शायद उन्हें बहुत मजा आ रहा था।

मैंने 5-6 झटकों के बाद वीर्य छोड़ना बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद मैं उनको चूमने लगा और बालों को सहलाने लगा।

वो बहुत ही खुश होकर बोलीं- तुम अब पूरे मर्द बन गए हो.. मुझे तुम्हारे बच्चे की माँ बनने में ख़ुशी होगी। हम रोज एक बार किया करेंगे.. ताकि बच्चा रह जाए।

मैं बोला- ठीक है भाभी.. हम ऐसा ही करेंगे।

भारती भाभी खुश हो कर बोली- तुम अब पूरे मर्द हो गये हो.. मुझे तुम्हारे बच्चे की माँ बनने में खुशी होगी। हम दोनों हर रोज एक बार जरूर सेक्स किया करेंगे.. ताकि मैं गर्भवती हो जाऊँ।

मैंने जवाब दिया- ठीक है भाभी.. हम ऐसे ही रोज करेंगे।

भारती भाभी को चोदने के बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और घर गए।

घर आते ही रूपा भाभी ने मजाक करना चालू कर दिया, रूपा भाभी तो मुझे डांटने का ढोंग करते हुए बोलीं- देखो देवर जी तुमने मुझे धोखा दिया और मेरे से पहले इनकी ले ली। इतना भी सब्र नहीं कर सकते थे।

वो यह कह कर हँसने लगीं।

बाद में बोलीं- कोई बात नहीं अभी रात होने दो.. फिर देखना मैं तुम्हारी कैसे बजाती हूँ।

अब शाम के 5 बज रहे थे। क्योंकि हमारी चुदाई में ही 2 घण्टे चले गए थे। एक घंटा करीब घर तक चल कर आने में लगा था। गांव में शाम को 6 बजे ही खाना बनाना चालू कर देते हैं और 6:30 तक खा भी लेते हैं। आठ बजे तो सब सो ही जाते हैं।

यहाँ पर मेरे सोने का इंतजाम हॉल में किया गया था.. क्योंकि घर में 3 कमरे थे। एक बड़ा हॉल था.. रसोई और बड़ा आंगन था। चाचा-चाची हॉल के बाजू में आंगन में सोये हुए थे, दोनों को नींद भी गहरी आती थी।

मैं हॉल में सोने के लिए गया। मेरे मंझले वाले भाई खेत में ही थे.. आज छोटे वाले भाई ट्रेक्टर रिपेयर करने में लगे हुए थे और बड़े वाले भाई भी शहर से नहीं आए थे क्योंकि वो शहर से रात को नहीं निकले, वहीं किसी रिश्तेदार के घर रुक गए थे और उन्होंने फोन करके भाभी को बता दिया था।

भारती भाभी और सोनिया भाभी के कमरे में जाते वक्त मुँह बिगड़ा हुआ था क्योंकि आज वो मेरे से मजे नहीं ले सकती थीं।

मुझसे ‘सॉरी’ बोलकर वो मुँह बिगाड़ के अन्दर चली गईं क्योंकि अन्दर उन्हें वही पुराना लण्ड और वो भी छोटा सा मिलने वाला था।

उधर रूपा भाभी मेरे पास आईं और हँस कर बोलीं- रात को तुम्हारे हल से मैं अपनी जमीन खोद लूँगी.. अभी थोड़ा सो लो।

मैं भी खुश हो गया और सो गया।

रात को मेरे लण्ड को कोई चूस रहा हो वैसा मुझे लगा.. मैंने देखा कि वो कोई और नहीं रूपा भाभी ही थीं।

मैंने सोने का ढोंग चालू रखा और वो और जोर से लौड़ा चूसने लगीं।

अब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उनका सर पकड़ कर अपने लण्ड को स्पीड से उनके मुँह में अन्दर-बाहर करने लगा। वो भी खुश थीं और ‘लपालप’ लण्ड चूस रही थीं।

फिर लण्ड चूसना छोड़ कर वो धीरे से बोलीं- चलो मेरे कमरे में आ जाओ.. वहाँ तुमसे टांगें चौड़ी करके चुदवाती हूँ।

मैं उनके पीछे चला गया। कमरे में जाते ही मैंने सीधा ही उनके चूचों पर हमला कर दिया और जोर से मम्मों को दबा दिया।

उनकी चीख निकलते-निकलते रह गई, शायद उन्होंने चीख दबा ली थी.. ताकि कोई उठ न जाए।

वो बोलीं- धीरे से देवर जी..

मैं तो बस पागलों की तरह उनके बोबों को दबा रहा था, चूचों में मस्त दूध भरा हुआ था। मैं तो बस बहते दूध को देखता रहा और पीता रहा।

मैंने उनकी नाईट गाउन पूरा निकाल दिया था, सिर्फ अब वो पैंटी में थीं।

मैं उनकी चूत को ऊपर से महसूस करना चाहता था।

मैंने बोबे चूसना चालू रखा और दूसरे हाथ को बोबे से हटा कर चूत पर ले गया। वो मखमली पैंटी एकदम चिकनी थी और हाथ फेरने से उनकी चूत की लकीर साफ़ महसूस होती थी।

मैं उस लकीर में एक उंगली ऊपर-नीचे करके घिसने लगा। जिससे उनको मजा आने लगा और उनकी सिसकारियाँ बढ़ने लगीं, उनके मुँह से ‘आह.. आह.. उमम्म..’ की आवाजें आने लगीं।

पैंटी के साइड के किनारे से मैंने पैंटी को थोड़ा खिसकाया और असली चूत को महसूस किया, वो गीली हो गई थीं।

मैंने एक उंगली से उनके छेद को टटोला.. गीला होने की वजह से मैंने उंगली को धीमे से उसमें घुसेड़ दिया।

उनके मुँह से एक कामुक सिसकारी निकल गई और उन्होंने पेट को ऊपर उठा लिया।

शायद वो अब चुदने की तैयार थी।

मैंने उंगली को अन्दर-बाहर करना चालू किया और निप्पल को चूसना भी चालू रखा। लेकिन अब तो उन्हें इतना तड़पाना था कि वो खुद मुँह से बोलें कि मेरे राजा मुझे अब चोद दो।

मैंने उंगली को अन्दर-बाहर करना चालू रखा, वो सिसकारियाँ ले रही थीं।

उधर मैं बार-बार बोबे के निप्पल चूसता था.. नीचे चूत में उंगली भी अन्दर-बाहर हो रही थी।

फिर मैंने बोबे को चूसना छोड़ कर उनकी पैंटी की खुशबू सूंघने लगा। वाह.. क्या खुशबू थी।

मैंने उनकी जाँघों को उठा कर उनकी पैंटी को उतार दिया और उनके ऊपर उलटा हो गया.. जिससे मेरा लण्ड उनके मुँह के पास हो गया था।

वो मेरा इतना बड़ा लण्ड देख कर बोलीं- देवर जी इतनी कम उम्र में इतना बड़ा लण्ड?

मैं- हाँ भाभी.. मुठ मार-मार कर बड़ा हो गया है।

वो हँसने लगीं और मेरा इरादा समझ कर उन्होंने लण्ड की चमड़ी को ऊपर-नीचे करके लण्ड का टोपा अपने मुँह में ले लिया।

मैं अब अकड़ गया था.. क्योंकि लण्ड के टोपे पर जीभ के टच से मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया था।

वो धीरे-धीरे लण्ड को चूसने लगीं। पहले सिर्फ टोपे को चूसा लेकिन बाद में पूरा का पूरा मूसल मुँह में ले लिया। मैं भी उधर उनकी चूत के होंठों को चूस रहा था।चूत के होंठ के साइड में मांसल गोल उभार काफी मस्त थे।

कुछ देर चूसने के बाद वो खुद बोलीं- मेरे राजा अब रहा नहीं जा रहा.. प्लीज चोदो मुझे.. आह.. आह.. और ना तड़पाओ.. म्मम्मीईईई..

वो अब तड़प रही थीं, अब मुझे उन पर तरस आ गया, मैंने चूत को चूसना रोक कर अब उनकी टाँगों को अलग किया और उनके ऊपर चढ़ गया।

हालांकि मैं भारती भाभी को चोद चुका था इसलिए रूपा भाभी का छेद ढूंढने में तकलीफ नहीं हुई।

मैंने सीधा उनकी चूत पर लण्ड रख दिया और एक हल्का धक्का मारा.. जिससे उनकी एक हल्की सिसकारी निकल गई।

 
मेरा एक इंच जितना लण्ड उनकी चूत में घुस गया था। मैंने उन्हें हाथों पर किस करना चालू किया और हाथों से बोबों को दबाने लगा।

वो जब नीचे से कूल्हे उठाने लगीं.. मैं समझ गया कि वो अब धकाधक चुदना चाहती हैं।

मैं थोड़ा ऊपर को हुआ और मेरा एक इंच फंसा हुआ लण्ड बाहर निकाल लिया। फिर जोर से एक बार और शॉट मारा.. जिससे उनके मुँह से सिसकारी निकल गई- आह आह आह.. उइम्म.. ईईईईम..

मैंने फिर से लण्ड बाहर निकाल कर फिर शॉट मारा.. जिससे मेरा लण्ड अबकी बार कुछ अधिक अन्दर चला गया।

वो तो बस मस्ती से भर गईं, उनकी मादक सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं।

फिर मैंने और एक शॉट मारा.. जिससे मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में घुस गया। वो मेरे लण्ड के टोपे को अपने गर्भाशय तक महसूस कर रही थीं, उनके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकलना चालू ही थीं।

अब मैं पूरा लण्ड बाहर निकालता और पूरा एक ही झटके में घुसा देता जिससे उनका पेट और कूल्हे ऊपर उठ जाते थे।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी चालू की.. और ‘फचक फचक’ की आवाज से चुदाई होने लगी। उनकी चूत के पानी से मेरा लण्ड आसानी से अन्दर-बाहर हो रहा था।

उनकी चूत की दीवारें इतनी टाइट थीं कि मेरे लण्ड पर अच्छा दबाव महसूस हो रहा था.. जैसे कि किसी कुंवारी लड़की को चोद रहा हूँ।

कुछ देर झटके मारने के बाद मेरे लण्ड ने भी अन्दर होली खेलनी चालू कर दी। मेरी पिचकारी सीधे उनके गर्भाशय से जा टकराई।

मेरा गर्म-गर्म वीर्य जाने से उनके मुँह से संतुष्टि भरी आहें निकल रही थीं।

मैं भी झड़ने से उनके ऊपर लेट गया, मैं अब थोड़ा थक गया था।

वो मेरे बालों को सहलाती हुई बोलीं- मेरे राजा वाह.. तूने तो कमाल कर दिया.. इतना मजा आज तक मेरे पति ने भी मुझे नहीं दिया। तुम्हारा वो गर्म वीर्य.. जो चूत के अन्दर स्पीड से छूट रहा था.. जैसे कि पिस्तौल से गोली चली हो.. आह्ह.. तुमने तो मेरे पूरे शरीर को हल्का कर दिया। तू तो इतनी से उम्र में भी एक मर्द से कम नहीं है।

उनकी यह बात सुनकर मैं शर्मा गया। मैंने नाईट लैंप की रोशनी में उनकी चूत को देखा। वो चुदाई से कुछ सूज गई थी। मुझे उनको संतुष्ट देख कर ख़ुशी हुई।

वो बोलीं- आपको पता ,है मैंने आज तक अपने पति के होंठों और लण्ड को नहीं चूसा है.. ना ही उन्होंने मेरी चूत को चाटा है.. मालूम है क्यों?

मैं- क्यों?

वो बोलीं- क्योंकि वो मादरचोद सिर्फ अपनी हवस मिटाने के लिए ही मेरे ऊपर चढ़ता है.. और खुद का पानी निकालने के बाद सीधा होकर सो जाता है। कभी यह नहीं सोचता कि उसकी बीवी को मजा आया कि नहीं.. कि मेरी बीवी का पानी छूटा या नहीं.. बस खुद का निकल गया तो काम खत्म.. और वो अपनी सफाई भी नहीं रखते हैं.. जिससे मुझे उनका लण्ड मुँह में लेना पसंद नहीं है। वैसे उसने कभी मुझे मुँह में दिया भी नहीं है। मैंने भी कभी बोला भी नहीं।

मैं मन्त्र मुग्ध सा उनकी बातों को सुन रहा था।

फिर भाभी बोलीं- चलो कपड़े पहन कर बाहर सो जाओ, कहीं तुम्हारी चाची जाग न जाएँ।

मैं कपड़े पहन कर बाहर सोने आ गया।

कुछ दिन रोज सुबह खेत में भारती भाभी की चुदाई करता और रोज रात को रूपा भाभी की चूत मारता।

दोनों भाभियाँ काफी होशियार थीं, उन्होंने मुझे दूसरे दिन से नदी पर कपड़े धोने और नहाने के लिए साथ में नहीं लिया.. क्योंकि वो दोनों अपनी चुदाई में किसी तीसरी औरत का हिस्सा नहीं चाहती थीं इसलिए मैं रसीली भाभी को चोद नहीं पाया।

लगभग 7 दिन मैंने दोनों को मस्त चोदा और अपने शहर वापस आ गया.. पर आते-आते मैंने दोनों भाभियों से वादा लेकर आया हूँ कि अगली बार गांव की 2-4 नई प्यासी चूतों का जुगाड़ जरूर जमा कर रखना।

मित्रो, अगली बार जब गाँव जाऊंगा.. तब का अनुभव आप को जरूर भेजूंगा।

 
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