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मस्त मेनका पार्ट-7
गतान्क से आगे...............
सुबह के 5 बज रहे थे.मेनका पूरी तरह से नंगी बेख़बर सो रही थी.बगल मे राजा साहब अदलेते से जागे हुए थे & उसकी जवानी को निहार रहे थे,वो भी पूरी तरह नंगे थे बस उनकी कलाई पर 1 सोने का ब्रेस्लेट चमक रहा था.ब्रेस्लेट के बीच मे चमकता सूरज बना था जोकि उनका राजचिन्ह भी था.यही वो चीज़ थी जोकि मेनका ने बॉमबे मे उनसे छिपा कर खरीदी थी ताकि उन्हे सर्प्राइज़ दे सके.कल रात आख़िरी बार की चुदाई के बाद उसने अपने हाथों से ये उन्हे पहनाया था.
राजा साहब मेनका को देखने लगे.सोते वक़्त कितनी मासूम लग रही थी.उसकी बड़ी-2 छातियो के बीच उनकी दी चैन चमक रही थी.साँसों के कारण उसकी चूचिया उपर नीचे हो रही थी . ये नज़ारा देख कर राजा साहब का सोया लंड फिर जागने लगा & उनका दिल किया कि अपने होठ अपनी बहू के निपल्स से लगा दें.पर तभी उन्हे समय का ध्यान आया,थोड़ी देर बाद दोनो को ऑफीस भी जाना था.अगर अभी वो मेनका को चोद्ते तो आज वो ज़रूर ऑफीस मिस कर देती जोकि वो बिल्कुल नही चाहते थे.
उन्होने 1 लंबी साँस भरी & उठकर क्लॉज़ेट के रास्ते अपने कमरे मे चले गये.फिर वहाँ से मेनका की नाइटी & नेकलेस लाकर उसके बेड पे रख दिया & इस बार फाइनली अपने बेडरूम मे चले गये & क्लॉज़ेट के उस सीक्रेट रास्ते को बंद कर दिया.
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राजकुल ग्रूप के ऑफीस के कान्फरेन्स हॉल मे राजा साहब अपने एंप्लायीस को डील के बारे मे & डील के पैसों से उन्हे मिलने वाले बोनस के बारे मे बता रहे थे,"..और अब 1 आखरी अनाउन्स्मेंट.अभी तक कंपनी का केवल 1 वाइस-प्रेसीडेंट था कुंवर विश्वजीत सिंग पर आज से 2 वी-पी होंगे & दूसरी वी-पी होंगी कुँवारानी मेनका सिंग."तालियों की गड़गढ़त से हॉल गूँज उठा,"...आज के बाद अगर हम ऑफीस मे ना हो तो हमारी जगह आप कुँवारानी को ही अपना सबसे बड़ा बॉस समझिए.ये सारी बातें थी जोकि आपका जानना ज़रूरी था.अगले 2-3 दीनो मे बोनस की रकम आपके सॅलरी अकाउंट्स मे जमा करा दी जाएगी.थॅंक यू."
मीटिंग के बाद मेनका राजा साहब के ऑफीस चेंबर मे बैठी थी,"क्या ज़रूरत है हमे वी-पी बनाने की?"
"अरे भाई,वैसे ही तुम 1 वी-पी की सारी ज़िम्मेदारियाँ उठाती हो तो बना भी दिया.",पास आकर उसे चेर से उठाया & बाहों मे कस लिया.
"क्या कर रहे हो?कोई आ जाएगा.",मेनका छूटने की कोशिश करने लगी.चेहरे पर घबराहट & शर्म के मिले-जुले भाव थे.
"हमारे ऑफीस मे बिना हमारी इजाज़त के कोई नही आ सकता.",राजा साहब ने उसके होठ चूम लिए.
"प्लीज़,यश मुझे डर लग रहा है.पागल मत बनो,ऑफीस है किसी को पता चल गया तो ग़ज़ब हो जाएगा."
"हम पर भरोसा रखो,तुमसे ज़्यादा तुम्हारी फ़िक्र करते हैं.",& एक बार फिर उसके होंठ चूमने लगे.उन्होने अपने हाथों से नीचे से उसकी साड़ी उठानी शुरू कर दी.मेनका फिर कसमसाई,"..प्लीज़..",पर राजा साहब ने उसे अनसुना करते हुए साड़ी कमर तक उठा दी & अपने हाथों से उसकी पॅंटी मे कसी गांद की फांको को मसल्ने लगे.
वैसे ही उसकी गांद पकड़ कर चूमते हुए उन्होने उसे डेस्क पर बैठा दिया & खुद उसके सामने चेर पर बैठ गये & 1 झटके मे उसकी पॅंटी उतार दी.मेनका कुच्छ कह पाती इस से पहले ही उसकी जंघे उसके ससुर के कंधे पे थी & उनके होठ उसकी चूत पे जा लगे.
"ऊओ...ऊ..",मेनका की सिसकारी निकल गयी.उसने अपनी जांघों मे अपने ससुर को भीच लिया & अपने हाथों से उनके सर को अपनी चूत पर दबाने लगी.राजा साहब के मुँह ने उसकी चूत को चाटना,चूमना &चूसना चालू कर दिया & हाथ उसकी ब्लाउस मे कसी चूचियों को दबाने लगे.मेनका मस्त हो गयी पर मन के किसी कोने मे पकड़े जाने का डर भी था.वो जल्दी से जल्दी झड़ना चाहती था & राजा साहब इसमे उसकी पूरी मदद कर रहे थे.थोड़ी ही देर मे मेनका ने अपनी गंद डेस्क से उठा दी & अपने होठ काट अपनी सिसकारियों को ज़ब्त करते हुए अपने ससुर का मुँह अपने हाथों से अपनी चूत पे और दबा दिया & झाड़ गयी.
राजा साहब उठे,अपनी पॅंट खोली & अपना लंड निकाल कर डेस्क पर बैठी मेनका की गीली चूत मे डाल दिया.लंड घुसते ही मेनका उनसे लिपट गयी &उनके धक्कों का मज़ा उठाने लगी,थोड़ी ही देर मे उसकी गंद फिर हिलने लगी.उसके होठ अपने ससुर के होठों से लगे थे & हाथ उनके पूरे शरीर पर फिर रहे थे.राजा साहब ने अपने हाथ नीचे से उसकी गंद पर कस दिए थे.दोनो चुदाई मे पूरी तरह डूब गये & थोड़ी ही देर मे दोनो के शरीर झटके खा कर झाड़ गये.
दोनो वैसे ही लिपटे 1 दूसरे को चूम रहे थे कि राजा साहब का मोबाइल बजा.
"हेलो."
"दुष्यंत बोल रहा हू,यशवीर.तुम्हारे केस के बारे मे कुच्छ बात करनी थी."
"हा,भाई.बोलो,क्या पता चला?",राजा साहब ने अपना लंड अपनी बहू की चूत से खीच लिया पर उनका खाली हाथ अभी भी उसका सर सहला रहा था.
"भाई तुम शहर आ जाओ तो तुम्हे अच्छी तरह सारी बात समझा दू.",मेनका ने डेस्क से उतर कर अपने ससुर की आएडियों पे गिरी पॅंट को उठा कर उन्हे वापस पहना दिया.
"ठीक है,दुष्यंत.हम बस अभी निकलते हैं.",फोन काट कर उन्होने मेनका को अपने पास खींच कर चूमा & उसकी आँखों मे उठे सवाल का जवाब दिया.,"1 बहुत ज़रूरी काम से शहर जाना पड़ रहा है.रात तक लौट आएँगे .घबराईए मत.चिंता की कोई बात नही है.",उन्होने ज़मीन पर पड़ी पॅंटी उसे थमाई.
मेनका उसे ले बाथरूम चली गयी.जब बाहर आई तो राजा साहब ने उसे गुडबाइ किस दी & चले गये.
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शहर के 5-स्टार होटेल के उस कमरे मे राजा साहब अपने जिगरी दोस्त के साथ बैठे थे पर कमरे मे उनके अलावा 1 नौजवान भी था.
"यश,ये मनीष है.तुम्हारा केस यही इन्वेस्टिगेट कर रहा है.और ये राजा यशवीर सिंग हैं,मनीष."
मनीष ने उन्हे प्रणाम किया तो राजा साहब ने जवाब मे सर हिलाके उस नौजवान को ठीक से देखा.
"इसकी उम्र पर मत जाना,यश.मेरे सबसे काबिल बन्दो मे से है ये.",दुष्यंत वेर्मा फिर मनीष से मुखातिब हुए,"मनीष अब तुम सारी रिपोर्ट हम दोनो को दो."
"जी सर.",मनीष ने बोलना शुरू किया,"सर,मैने राजपुरा & शहर की उन सभी जगहो पर जाकर तहकीकात की जहा कुंवर साहब का आन-जाना था.शुरू मे मुझे कहीं कोई सुराग नही मिला कि आख़िर उन्हे ड्रग कौन देता था.शहर के अपने मुखबिरो के ज़रिए मैने पता लगाया तो पाया कि यहा का किसी डीलर ने तो कभी उनसे कोई सौदा नही किया था.फिर राजपुरा जैसी छ्होटी जगह ये डीलर्स तो जाने से रहे.1 आदमी के बिज़्नेस के लिए यहाँ का अपना हज़ारों का नुकसान-ये कोई सेन्स नही था."थोडा रुक कर मनीष ने पानी का 1 घूँट लिया.
"..मैने अपना ध्यान राजपुरा पर लगा दिया.मुझे पता चला कि कुंवर आदिवासियों के गाओं महुआ की शराब लेने जाते थे.और यही किस्मत से मेरे हाथ 1 बड़ा सुराग लग गया.आदिवासियों ने बताया कि कुंवर के अलावा भी 1 शहरी आदमी था जोकि उनसे महुआ ले जाता था.उन्होने 1 बार उसे कार मे बैठे कुंवर से कुच्छ बाते करते हुए भी देखा था.जब मैने उसका हुलिया,नाम आदि पूचछा तो कुच्छ खास नही पता चला."
"..फिर 1 दिन मैं इसी सुराग के फॉलो-उप के लए उन आदिवासियों के पास गया.वाहा 1 आदिवासी जो शहर मे नौकरी करता था,बैठा हुआ था & अपने कॅमरा मोबाइल से फोटो खिच रहा था.फोन मे कुछ प्राब्लम आई तो उसने मुझे दिखाया.देखा तो पाया कि मेमोरी फुल है.मैने उसे कहा कि कुछ फोटोस डेलीट करनी पड़ेगी."
"..उसने कहा कि वो बताता जाएगा & मैं फोटोस डेलीट करता जाऊं.फोटोस डेलीट करते हुए मेरी नज़र 1 फोटो पर पड़ी.उसमे 1 गोरा-चितता शहरी था.बाकी सारे फोटो उन आदिवासीयो के थे तो फिर ये शहरी कौन था?"राजा साहब गौर से मनीष को सुन रहे थे.
"..उस आदिवासी ने बताया कि यही वो आदमी था.और यही वो फोटो है,सर.",मनीष ने अपना लॅपटॉप ऑन कर स्क्रीन राजा साहब की तरफ कर दी.फोटो मे 3 आदिवासी बैठे हंस रहे थे& पीछे फोटो के कोने मे वो शहरी था.राजा साहब के दिमाग़ मे उस इंसान का चेहरा छप गया.
"क्या गॅरेंटी है मनीष कि यही इंसान ड्रग डीलर है?"
"ये राजा साहब.",मनीष ने 1 छ्होटा सा पॅकेट आगे बढ़ाया जिसमे 1कॅप्सुल था.,"ये 1 बार इसकी जेब से गिर गया था & महुआ बेचने वाले आदिवासी ने दवा समझ कर अपने पास रख लिया था & फिर भूल गया था.इस आदमी की बात चलने पर उसे याद आया तो मुझ से इस 'दवा' के बारे मे पुच्छने लगा."
"वेल डन,मनीष.आइ'एम प्राउड ऑफ यू.",दुष्यंत वेर्मा ने उसकी पीठ ठोनकी.
"मनीष,आपने कमाल का काम किया है.हम चाहते हैं कि इस इंसान को ढूँढने मे आप हमारी मदद करें.",राजा साहब ने उस से हाथ मिलाया.
"सर,ये भी कोई कहने की बात है.जब तक पता ना चल जाए मैं भी चैन से नही बैठूँगा."
"..पर यश ये कौन हो सकता है?वही जाबर का साथी?"
"पता नही,दुष्यंत समझ नही आ रहा.जब्बार का कहने को तो धंधा प्रॉपर्टी डीलिंग का है पर असल मे डिस्प्यूटेड प्रॉपर्टीस को बिकवाना,किसी की प्रॉपर्टी पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर उस से पैसे ऐंठना ये उसका असल काम है.मशहूर है कि उसकी जेब मे 1 चाबियों का गुच्छा है जिस से कि दुनिया का कोई भी ताला खुल सकता है."राजा साहब ने ग्लास उठा कर पानी पिया,"..पर ड्रग्स...ये मेरी भी समझ मे नही आ रहा.इस तस्वीर वाले आदमी को भी पहली बार देखा है.पर मेरा मन कहता है कि इस के तार जब्बार से ही जुड़े हैं.पर कैसे?"
"ये मनीष पता लगा ही लेगा.तुम चिंता छ्चोड़ो.चलो कुच्छ खाते हैं."
रात के 11:30 बज रहे थे पर राजा साहब अभी तक नही आए थे.शाम 7 बजे फोन आया था कि वो खाना खा कर आएँगे पर किसी भी हाल मे 10 बजे तक आ जाएँगे.मेनका 1 छ्होटा-सा वाइट केमिसोल जोकि बस उसकी पॅंटी को ढके हुए थे, पहने बेचैनी से अपने कमरे मे चहलकदमी कर रही थी.अपने मोबाइल से वो लगातार अपने ससुर का मोबाइल ट्राइ कर रही थी पर बार-2 स्विच्ड ऑफ का मेसेज आ रहा था.क्लॉज़ेट का रास्ता उसने खोल दिया था & उसकी नज़रे बार-2 वाहा जा रही थी.
तभी कार की आवाज़ आई,राजा साहब लौट आए थे.नीचे से नौकरों को बाहर कर दरवाज़ा बंद करने की आवाज़ आई तो मेनका अपने बिस्तर पर चादर ओढ़ कर लेट गयी.अपनी पीठ उसने क्लॉज़ेट की तरफ कर ली.वो गुस्से मे पागल हो रही थी.
थोड़ी देर बाद राजा साहब क्लॉज़ेट के रास्ते उसके कमरे मे दाखिल हुए,वो पूरे नंगे थे.राजा साहब ने चादर उठाई & लेट कर मेनका को पीछे से अपनी बाहों मे जाकड़ लिए.,"जाओ,मुझे सोने दो.",मेनका ने उनका हाथ हटा दिया.
"क्या हो गया?"
"कुच्छ नही.हमे नींद आ रही है."
"नही तुम नाराज़ हो.क्या ग़लती हो गयी भाई?",उन्होने फिर उसे जाकड़ लिया & पीछे से अपना नंगा बदन उसकी पीठ & गंद से चिपका दिया.
"1 तो इतनी देर कर दी,उपर से फोन भी नही उठा रहे थे & पूछते हो क्या ग़लती की!"
"फोन डिसचार्ज हो गया था & कहा था ना कि ज़रूरी काम था,उसी मे देर हो गयी.अब गुस्सा छ्चोड़ो & प्यार करो.",उनका दाया हाथ उसकी पॅंटी मे घुस गया & बाया उसकी गर्दन के नीचे आ गया & वही से उसकी चूचिया दबाने लगा.
अपनी गांद पे अपने ससुर का लंड महसूस करते ही मेनका ने अपना हाथ पीछे ले जा कर उसे पकड़ लिया & हिलाने लगी.,"क्या कम था.......आन्न...न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह?"राजा साहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को रगड़ रही थी.
"वक़्त आएगा तो सब बताएँगे,मेनका.अभी बस हमे प्यार करो."राजा साहब ने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाया & दोनो एक-दूसरे को जमकर चूमने लगे.मेनका 1 बार झाड़ चुकी थी.राजा साहब ने उसका केमिसोल & पॅंटी उसके जिस्म से अलग किए & पीछे से करवट लिए हुए ही अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया & उसकी पीठ से चिपक कर धक्के मारने लगे.उनका लंड मेनका के जी स्पॉट से रगड़ खा रहा था & वो दुबारा झाड़ गयी.
राजा साहब ने बिना उसकी चूत से लंड निकाले उसे घुटनो के बल उल्टा खड़ा कर दिया .मेनका का सर तकिये मे धंसा हुआ था & गंद हवा मे उठी हुई थी.उसके ससुर का लंड जड़ तक उसकी चूत मे डूबा हुआ था & उनके हाथ उसकी गंद & चूचियो को मसल रहे थे.राजा साहब ने उसे इसी पोज़िशन मे चोदना शुरू कर दिया,मेनका मस्ती मे झूम रही थी.
डॉगी स्टाइल मे चोद्ते-2 राजा साहब ने ऐसे ज़ोरदार धक्के मारे कि मेनका बिस्तर पर पेट के बल गिर पड़ी.राजा साहब भी धक्के रोके बिना उसके उपर लेट गये,अपने हाथ उसके नीचे ले जाकर उसकी चूचियाँ दबाने लगे & लगे अपनी बहू की चुदाई करने.मेनका ने अपना सर उठाकर पीछे घुमाया तो राजा साहब ने अपने होठ उसके होठों से लगा दिए.
दोनो एक-दूसरे को चूमते हुए चुदाई कर रहे थे.मेनका ने अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया & अपने ससुर के होठों को कस लिया,वो झाड़ गयी थी & तभी राजा साहब ने भी उसकी चूचियो पे अपनी पकड़ बहुत मज़बूत कर दी &1-2 धक्के लगा कर उसकी चूत मे अपना पानी छ्चोड़ दिया.
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"बिज़्ज़रे" नाइटक्लब खचाखच भरा था.म्यूज़िक & लोगों की बातचीत का शोर था & क्लब के बार के सामने ड्रिंक्स लेनेवालों की भीड़ जमा थी.
"एक्सक्यूस मी..मेराड्रिंक..",वो छ्होटा-सा ब्लॅक ड्रेस पहने लड़की बारटेंडर को अपना ऑर्डर देने की कोशिश कर रही थी पर इस भीड़ & शोर मेउसका ध्यान उस लड़की की तरफ जा ही नही रहा था.माजिद सुलेमान की नज़रे उस लड़की के ड्रेस से झाँकती गोरी टाँगों & जांघों के हिस्से को घूर रही थी.
"ये लीजिए अपनी ड्रिंक.",उसने भीड़ मे से हाथ बढ़ा कर बारटेंडर से 1 ग्लास लिया & उस लड़की को पकड़ाया.
"थन्क्यौ.",माजिद ने डिस्को लाइट्स मे उस लड़की का चेहरा देखा-बला की खूबसूरत थी & ड्रेस के गले मे से झाँकता उसका क्लीवेज..उफ्फ!
"मुझे माजिद कहते हैं."
"हाई!आइ'म रोमा.",उसने माजिद से हाथ मिलाया.
"आप अकेली आई यहाँ?"
"नही.अपनी सहेली & उसके बाय्फ्रेंड के साथ आई थी.पता नही दोनो कहा गायब हो गये."
"आप अपने बाय्फ्रेंड के साथ नही आई?"
"मेरा ब्रेक-अप हो गया है."
"आइ'म सॉरी."
"नो यू शौउल्ड़न'ट बी.आइ'म नोट.उसने मुझे किसी ओर के लिए छ्चोड़ दिया."
"ओह.वो शर्तिया बेवकूफ़ इंसान होगा जिसने आपके जैसी हसीन लड़की को छ्चोड़ दिया.तो आप फिर से सिंगल हैं?"
"तारीफ के लिए शुक्रिया.जी हा,मैं सिंगल हू.और आप?"
""मैं भी."
"आप क्या करते हैं?"
"मैं टॅक्सी-ड्राइवर हू."
"जी?!"
"जी.मैं 1 चार्टर एरक्रॅफ्ट कंपनी.मे पाइलट हू.जो लोग प्लेन्स हाइयर करते हैं उन्हे उनकी मंज़िल तक पहुचाता हू."
"ओह्ह.",दोनो हँसने लगे."आप बहुत मज़किया हैं,मिस्टर.माजिद?"
"प्लीज़ नो मिस्टर. & नो आप."
"ओक.तो तुम पाइलट हो.कितना एग्ज़ाइटिंग काम है.बहुत मज़ा आता हाओगा ना प्लेन उड़ाने मे...
...और ऐसी ही बातों से रोमा उर्फ मलिका ने उस पाइलट को शीशे मे उतारना शुरू कर दिया.