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पहले जहां चबूतरा था, वहां अब नीचे जाने को सीढ़ियां नजर आ रही थीं। नीचे रोशनी थी।
"हमें रास्ता मिल गया।” जगमोहन खुशी-भरे स्वर में कह उठा।
“आओ।” देवराज चौहान खाली हुई जगह की तरफ बढ़ता कह उठा—"हमने जथूरा को ढूंढ लिया है शायद।" ___
“शायद नहीं।”
मोना चौधरी आगे बढ़ी—“पक्का ढूंढ़ लिया
देवराज चौहान सीढ़ियां उतरने लगा। मोना चौधरी भी। बाकी सब उनके पीछे थे।
"चल छोरे। जथूरो को देखो हो कि वो किसो पोजिशन में हौवे।"
"चल बाप।” लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा भी आगे बढ़े।
"वो भूतना जिन्न भी पीछे-पीछे आ रहा है।" सपन चड्ढा बोला।
"हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा कमीना।"
"वो सुन रहा होगा हमारी बातें।” कहकर सपन ने पीछे देखा।
मोमो जिन्न उन्हें ही देख रहा था। परंतु चेहरे पर मुस्कान थी। ___
“अब तो मुस्करा रहा है साला। कहीं उसमें इंसानी इच्छाएं फिर से तो नहीं आ गईं।"
“पीछे मत देख, बला को दूर ही रहने दे।"
सब सीढ़ियां तय करके नीचे पहुंचे तो उन्हें ठिठक जाना पड़ा।
वो काफी बड़ा कमरा था। फर्नीचर के नाम पर टूटी-फूटी कुर्सियां पड़ी थीं।
जथूरा वहां मौजूद था।
उसकी दाढ़ी इस हद तक बढ़ी थी कि पूरी छाती तक फैल रही थी। ___ काली और सफेद थी उसकी दाढ़ी। शरीर पर मैली हो रही धोती लिपटी थी। ___
“जथूरा महान है।" मोमो जिन्न ने कहा और आगे बढ़कर उसके कदमों में झुक गया—“तुम जैसा दूसरा कोई नहीं जथूरा।"
जथूरा की आंखों में खुशी के आंसू चमक उठे। “तुम्हें देखकर प्रसन्नता हुई मोमो जिन्न। कितनी खुशी की बात है कि देवा-मिन्नो अपने पूर्वजन्म में आ गए और मुझे आजाद कराया।"
मोमो जिन्न उठ खड़ा हुआ।
"पिताजी।” तवेरा की रुलाई फूट पड़ी। वो दौड़ी और जथूरा के गले से जा लगी।
जथूरा की आंखों से आंसू बह निकले। “तवेरा, मेरी बेटी।”
"पिताजी।" "तू ठीक तो है ना मेरी बच्ची?"
“मैं ठीक हूं। पोतेबाबा ने पिता बनकर मेरा खयाल रखा।"
"ये तो कितनी अच्छी बात है।” जथूरा ने उसकी पीठ थपथपाकर, उसे अलग किया और देवराज चौहान, मोना चौधरी को देखकर खुशी-भरे स्वर में कह उठा__"मैंने तम्हें पहचान लिया है देवा-मिन्नो। तुम सबको पहचान लिया है, नील सिंह, परस, जग्गू, गुलचंद, बेला, भंवर सिंह, त्रिवेणी, तुम सब मेरे अपने तो हो।" ___
“मैं तुमसे बात करना चाहता हूं जथूरा।” देवराज चौहान ने कहा।
"कहो।”
"तुम्हें आजाद कराने की मेरी शर्त है।”
“आजाद तो पिताजी हो गए हैं।" तवेरा कह उठी।
"नहीं। अभी मैं आजाद नहीं हुआ।” जथूरा बोल पड़ा—“महाकाली का तिलिस्म अभी पूरी तरह टूटा नहीं।"
“क्या बाकी है पिताजी?"
"देवा-मिन्नो जब मुझे छू लेंगे, तभी मैं पूरी तरह महाकाली की कैद से मुक्त हो सकूँगा।"
"ओह ।”
“तुम कहो देवा क्या कहना चाहते हो। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि तुम्हारी बात मान लूं।"
"दो शतें हैं तुम्हारी आजादी की। एक तो ये है कि तुम्हें अपने पिता से विरासत में मिली शक्तियों का बंटवारा अपने भाई सोबरा
से करना होगा। क्योंकि उनका हकदार वो भी है।"
“मैं ऐसा ही करूंगा।” जथूरा ने गम्भीर स्वर में कहा। __
“दूसरी शर्त ये है कि तू हादसों का निर्माण करके, उन्हें हमारी दुनिया में नहीं भेजेगा।”
"ये समस्या वाली बात है।” जथूरा कह उठा।
"क्यों?" __
"मैं हादसों का देवता हूं। मुझे अपना काम करते रहना होगा।" जथूरा बोला।
“आजादी चाहते हो तो तुम्हें ऐसा नहीं करना होगा।"
“हादसों का निर्माण करके, तुम्हारी दुनिया में भेजना मेरा काम है। मेरा कर्म है। इससे मैं पीछे नहीं हट सकता।” जथूरा ने सोच-भरे गम्भीर स्वर में कहा—“कोई बीच का रास्ता निकालो तो मैं हामी भर सकता हूं।"
“मैं बताती हूं बीच का रास्ता।" “बोल मिन्नो।”
जथूरा ने मोना चौधरी को देखा।
“तम नए हादसों का निर्माण बहुत कम करोगे।"
"ठीक है।"
"और पुराने हादसों को हमारी दुनिया में भेजने की रफ्तार भी बहुत कम कर दोगे।"
“ये भी ठीक है।” जथूरा ने सहमति से सिर हिलाया।
"ये बाद में अपनी बात से पीछे भी हट सकता है।” पारसनाथ ने कहा।
"नहीं परस। जथुरा जो बात कहता है, खरी कहता है।"
"हमें रास्ता मिल गया।” जगमोहन खुशी-भरे स्वर में कह उठा।
“आओ।” देवराज चौहान खाली हुई जगह की तरफ बढ़ता कह उठा—"हमने जथूरा को ढूंढ लिया है शायद।" ___
“शायद नहीं।”
मोना चौधरी आगे बढ़ी—“पक्का ढूंढ़ लिया
देवराज चौहान सीढ़ियां उतरने लगा। मोना चौधरी भी। बाकी सब उनके पीछे थे।
"चल छोरे। जथूरो को देखो हो कि वो किसो पोजिशन में हौवे।"
"चल बाप।” लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा भी आगे बढ़े।
"वो भूतना जिन्न भी पीछे-पीछे आ रहा है।" सपन चड्ढा बोला।
"हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा कमीना।"
"वो सुन रहा होगा हमारी बातें।” कहकर सपन ने पीछे देखा।
मोमो जिन्न उन्हें ही देख रहा था। परंतु चेहरे पर मुस्कान थी। ___
“अब तो मुस्करा रहा है साला। कहीं उसमें इंसानी इच्छाएं फिर से तो नहीं आ गईं।"
“पीछे मत देख, बला को दूर ही रहने दे।"
सब सीढ़ियां तय करके नीचे पहुंचे तो उन्हें ठिठक जाना पड़ा।
वो काफी बड़ा कमरा था। फर्नीचर के नाम पर टूटी-फूटी कुर्सियां पड़ी थीं।
जथूरा वहां मौजूद था।
उसकी दाढ़ी इस हद तक बढ़ी थी कि पूरी छाती तक फैल रही थी। ___ काली और सफेद थी उसकी दाढ़ी। शरीर पर मैली हो रही धोती लिपटी थी। ___
“जथूरा महान है।" मोमो जिन्न ने कहा और आगे बढ़कर उसके कदमों में झुक गया—“तुम जैसा दूसरा कोई नहीं जथूरा।"
जथूरा की आंखों में खुशी के आंसू चमक उठे। “तुम्हें देखकर प्रसन्नता हुई मोमो जिन्न। कितनी खुशी की बात है कि देवा-मिन्नो अपने पूर्वजन्म में आ गए और मुझे आजाद कराया।"
मोमो जिन्न उठ खड़ा हुआ।
"पिताजी।” तवेरा की रुलाई फूट पड़ी। वो दौड़ी और जथूरा के गले से जा लगी।
जथूरा की आंखों से आंसू बह निकले। “तवेरा, मेरी बेटी।”
"पिताजी।" "तू ठीक तो है ना मेरी बच्ची?"
“मैं ठीक हूं। पोतेबाबा ने पिता बनकर मेरा खयाल रखा।"
"ये तो कितनी अच्छी बात है।” जथूरा ने उसकी पीठ थपथपाकर, उसे अलग किया और देवराज चौहान, मोना चौधरी को देखकर खुशी-भरे स्वर में कह उठा__"मैंने तम्हें पहचान लिया है देवा-मिन्नो। तुम सबको पहचान लिया है, नील सिंह, परस, जग्गू, गुलचंद, बेला, भंवर सिंह, त्रिवेणी, तुम सब मेरे अपने तो हो।" ___
“मैं तुमसे बात करना चाहता हूं जथूरा।” देवराज चौहान ने कहा।
"कहो।”
"तुम्हें आजाद कराने की मेरी शर्त है।”
“आजाद तो पिताजी हो गए हैं।" तवेरा कह उठी।
"नहीं। अभी मैं आजाद नहीं हुआ।” जथूरा बोल पड़ा—“महाकाली का तिलिस्म अभी पूरी तरह टूटा नहीं।"
“क्या बाकी है पिताजी?"
"देवा-मिन्नो जब मुझे छू लेंगे, तभी मैं पूरी तरह महाकाली की कैद से मुक्त हो सकूँगा।"
"ओह ।”
“तुम कहो देवा क्या कहना चाहते हो। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि तुम्हारी बात मान लूं।"
"दो शतें हैं तुम्हारी आजादी की। एक तो ये है कि तुम्हें अपने पिता से विरासत में मिली शक्तियों का बंटवारा अपने भाई सोबरा
से करना होगा। क्योंकि उनका हकदार वो भी है।"
“मैं ऐसा ही करूंगा।” जथूरा ने गम्भीर स्वर में कहा। __
“दूसरी शर्त ये है कि तू हादसों का निर्माण करके, उन्हें हमारी दुनिया में नहीं भेजेगा।”
"ये समस्या वाली बात है।” जथूरा कह उठा।
"क्यों?" __
"मैं हादसों का देवता हूं। मुझे अपना काम करते रहना होगा।" जथूरा बोला।
“आजादी चाहते हो तो तुम्हें ऐसा नहीं करना होगा।"
“हादसों का निर्माण करके, तुम्हारी दुनिया में भेजना मेरा काम है। मेरा कर्म है। इससे मैं पीछे नहीं हट सकता।” जथूरा ने सोच-भरे गम्भीर स्वर में कहा—“कोई बीच का रास्ता निकालो तो मैं हामी भर सकता हूं।"
“मैं बताती हूं बीच का रास्ता।" “बोल मिन्नो।”
जथूरा ने मोना चौधरी को देखा।
“तम नए हादसों का निर्माण बहुत कम करोगे।"
"ठीक है।"
"और पुराने हादसों को हमारी दुनिया में भेजने की रफ्तार भी बहुत कम कर दोगे।"
“ये भी ठीक है।” जथूरा ने सहमति से सिर हिलाया।
"ये बाद में अपनी बात से पीछे भी हट सकता है।” पारसनाथ ने कहा।
"नहीं परस। जथुरा जो बात कहता है, खरी कहता है।"