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जथूरा ऐसा चाहता है तो वो हमें इस कालचक्र से स्वयं ही निकाल सकता है।”
वो मजबूर है। नहीं निकाल सकता।”
क्यों?”
“अपनी मर्जी से वो किसी को भी कालचक्र में फंसा सकता है, परंतु कालचक्र में फंसे व्यक्ति को, कालचक्र से बाहर निकाल पाना उसके बूते से बाहर की बात है। जब कोई कालचक्र में फंसता है तो कालचक्र की भीतरी शक्तियां सक्रिय हो उठती हैं, जिन पर जथूरा का कोई अधिकार नहीं है। फिर तो वो ही होगा जो कालचक्र की शक्तियां चाहेंगी।”
जथूरा या तुम हमें कालचक्र से बाहर निकालने को व्याकुल क्यों हो?"
मैंने अपनी वजह तुम्हें बता ही दी है और जथूरा भी नहीं चाहता कि तुम लोग का पूर्वजन्म में प्रवेश हो। तुम लोग अगर पूर्वजन्म में प्रवेश कर जाओगे तो जथूरा की ताकतों से तुम लोगों का झगड़ा होगा। जथूरा सोचता है कि ऐसा होने पर उसका कीमती समय बर्बाद होगा। उसके सेवकों का वक्त बर्बाद होगा।”
तो तुम चाहते हो कि जथूरा का वक्त बर्बाद न हो।”
मैंने जथुरा की सोंचों को पढ़ा है।”
“तुम भी तो चाहते हो कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न करें।”
“अवश्य चाहता हूं। क्योंकि जथूरा से कोई मुकाबला नहीं कर सकता। वो आज के वक्त की महाशक्ति हैं।” पेशीराम ने गम्भीर स्वर में कहा“मुझे तुम लोगों की चिंता है। आने वाले बुरे वक्त को मैं रोकना चाहता हूं।”
क्या तुमने आने वाले वक्त की झलक देखी है?”
नहीं। मैंने भविष्य में नहीं झांका। अपने विचार ही व्यक्त कर रहा हूं।” पेशीराम बोला।
“तुम्हें भविष्य में झांकना चाहिए था। शायद जीत हमारी हो।”
अब भविष्य में झांकने का वक्त निकल चुका है। वैसे तुम्हें मेरी राय मान लेनी चाहिए।” ।
देवराज चौहान से इस बारे में बात की?"
“देवा से तभी बात करूंगा, जब तुम्हारी हा हो। हमेशा तुम्हारी तरफ से ही समस्या आती है मिन्न।”
“मुझे अब पीछे हटना गंवारा नहीं।” मोना चौधरी ने ठोस स्वर में कहा।।
“मैं जानता था मिन्नो कि तू मेरी बात नहीं मानेगी।” ।
जथूरा हमारे रास्ते में आया। उसी ने हमसे झगड़ा किया। पीछे हटना है तो वो हटे, हम क्यों हटें?”
“वों ताकतवर है।” “जो होगा देखा जाएगा। मैं इससे डरती नहीं।”
तुम्हारा क्या बिचार है परसू। क्या तुम मिन्नों को समझाओगे कि...।”
मैं मोना चौधरी के जवाब से सहमत हूं पेशीराम।” “तुम और नील सिंह को तो मिन्नो की बात कभी गलत लगती नहीं।
पहले जन्म में भी, मिन्नों की बात पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेते थे
और अब भी वो ही सब कुछ है। कुछ भी तो नहीं बदला।” | मोना चौधरी कह उठी।।
हमारे पास वक्त कम है पेशीराम। हमें जाना है।”
जबर्दस्ती तो मैं कर नहीं सकता। लेकिन आज तुम्हें एक बात कहना चाहूंगा मिन्नो।”
कहो।”
मैंने हमेशा तुम्हें रोका है कि देवा से झगड़ा नहीं करो। परंतु आज कहूंगा कि देवा से झगड़ा कर ।” ।
मोना चौधरी चौंकी। पारसनाथ के माथे पर बल पड़े।
तू सच में बूढ़ा हो गया है पेशीराम।” मोना चौधरी के होंठों से निकला।
पेशीराम मुस्कराया।
क्या कहना चाहता है तू? सीधी तरह बता।” “जथूरा ने कालचक्र का वक्त कम कर दिया है। सिर्फ आज की रात बाकी है कालचक्र की, उसके बाद कालचक्र सिमट जाएगा, अपने में। परंतु आज की रात फैसले की है।”
कैसे फैसले की?”
वो मजबूर है। नहीं निकाल सकता।”
क्यों?”
“अपनी मर्जी से वो किसी को भी कालचक्र में फंसा सकता है, परंतु कालचक्र में फंसे व्यक्ति को, कालचक्र से बाहर निकाल पाना उसके बूते से बाहर की बात है। जब कोई कालचक्र में फंसता है तो कालचक्र की भीतरी शक्तियां सक्रिय हो उठती हैं, जिन पर जथूरा का कोई अधिकार नहीं है। फिर तो वो ही होगा जो कालचक्र की शक्तियां चाहेंगी।”
जथूरा या तुम हमें कालचक्र से बाहर निकालने को व्याकुल क्यों हो?"
मैंने अपनी वजह तुम्हें बता ही दी है और जथूरा भी नहीं चाहता कि तुम लोग का पूर्वजन्म में प्रवेश हो। तुम लोग अगर पूर्वजन्म में प्रवेश कर जाओगे तो जथूरा की ताकतों से तुम लोगों का झगड़ा होगा। जथूरा सोचता है कि ऐसा होने पर उसका कीमती समय बर्बाद होगा। उसके सेवकों का वक्त बर्बाद होगा।”
तो तुम चाहते हो कि जथूरा का वक्त बर्बाद न हो।”
मैंने जथुरा की सोंचों को पढ़ा है।”
“तुम भी तो चाहते हो कि हम पूर्वजन्म में प्रवेश न करें।”
“अवश्य चाहता हूं। क्योंकि जथूरा से कोई मुकाबला नहीं कर सकता। वो आज के वक्त की महाशक्ति हैं।” पेशीराम ने गम्भीर स्वर में कहा“मुझे तुम लोगों की चिंता है। आने वाले बुरे वक्त को मैं रोकना चाहता हूं।”
क्या तुमने आने वाले वक्त की झलक देखी है?”
नहीं। मैंने भविष्य में नहीं झांका। अपने विचार ही व्यक्त कर रहा हूं।” पेशीराम बोला।
“तुम्हें भविष्य में झांकना चाहिए था। शायद जीत हमारी हो।”
अब भविष्य में झांकने का वक्त निकल चुका है। वैसे तुम्हें मेरी राय मान लेनी चाहिए।” ।
देवराज चौहान से इस बारे में बात की?"
“देवा से तभी बात करूंगा, जब तुम्हारी हा हो। हमेशा तुम्हारी तरफ से ही समस्या आती है मिन्न।”
“मुझे अब पीछे हटना गंवारा नहीं।” मोना चौधरी ने ठोस स्वर में कहा।।
“मैं जानता था मिन्नो कि तू मेरी बात नहीं मानेगी।” ।
जथूरा हमारे रास्ते में आया। उसी ने हमसे झगड़ा किया। पीछे हटना है तो वो हटे, हम क्यों हटें?”
“वों ताकतवर है।” “जो होगा देखा जाएगा। मैं इससे डरती नहीं।”
तुम्हारा क्या बिचार है परसू। क्या तुम मिन्नों को समझाओगे कि...।”
मैं मोना चौधरी के जवाब से सहमत हूं पेशीराम।” “तुम और नील सिंह को तो मिन्नो की बात कभी गलत लगती नहीं।
पहले जन्म में भी, मिन्नों की बात पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेते थे
और अब भी वो ही सब कुछ है। कुछ भी तो नहीं बदला।” | मोना चौधरी कह उठी।।
हमारे पास वक्त कम है पेशीराम। हमें जाना है।”
जबर्दस्ती तो मैं कर नहीं सकता। लेकिन आज तुम्हें एक बात कहना चाहूंगा मिन्नो।”
कहो।”
मैंने हमेशा तुम्हें रोका है कि देवा से झगड़ा नहीं करो। परंतु आज कहूंगा कि देवा से झगड़ा कर ।” ।
मोना चौधरी चौंकी। पारसनाथ के माथे पर बल पड़े।
तू सच में बूढ़ा हो गया है पेशीराम।” मोना चौधरी के होंठों से निकला।
पेशीराम मुस्कराया।
क्या कहना चाहता है तू? सीधी तरह बता।” “जथूरा ने कालचक्र का वक्त कम कर दिया है। सिर्फ आज की रात बाकी है कालचक्र की, उसके बाद कालचक्र सिमट जाएगा, अपने में। परंतु आज की रात फैसले की है।”
कैसे फैसले की?”