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उसी क्षण एक काली कार बस स्टॉप पर आ रुकी। उसके काले शीशे थे। | वो ही कार, जो उसके दिमाग ने देखी थी। जगमोहन बुरी तरह चौंका।
तभी उस कार का पीछे वाला शीशा नीचे हुआ तो जगमोहन स्तब्ध रह गया। वो ही युवक भीतर बैठा दिखा जो उसके मस्तिष्क ने देखा था। जगमोहन का हाल बुरा हो चुका था अब तक।
उस युवक ने आंख मारकर युवती से कहा।
चलना है?
” तीन हजार ।”
“दो दूंगा।” ।
“ठीक है।” कहकर युवती कार की तरफ बढ़ने को हुई। युवक ने कार का दरवाजा खोल दिया।
इससे पहले कि युवती आगे बढ़ती, जगमोहन ने झपटकर उसकी कलाई पकड़ ली।।
“छोड़ो मुझे।” युवती हड़बड़ाकर बोली।
“उसके साथ मत जाओ।” जगमोहन कह उठा।
मेरी उससे बात हो चुकी है। पहले तुम बात करते तो, मैं तुम्हारे साथ...।” ।
“इस कार का एक्सीडेंट होने वाला है।” जगमोहन तेज स्वर में बोला–“तुम मर जाओगी।”
“बकवास मत करो। वो मुझे दो हजार दे रहा है। मैं तुम्हारे साथ जाने वाली नहीं ।” युवती ने क्रोध से कहकर, अपनी कलाई छुड़ाई और आगे बढ़कर, खुले दरवाजे से कार में जा बैठी।
युवक ने दरवाजा बंद किया और दांत दिखाकर जगमोहन को देखा।
इस कार से बाहर निकल जाओ।” जगमोहन चीखा–“कार का एक्सीडेंट होने वाला है।”
युवक हंसा। उसी पल कार आगे बढ़ गई। जगमोहन होंठ भींचे कार को जाता देखने लगा।
तभी जगमोहन की आंखें फैल गईं। सामने से आता ट्रक, जिसका कि अचानक बैलेंस बिगड़ गया था, वो अपनी जगह छोड़कर, एकाएक उलटी दिशा में आने लगा। सामने काली कार थी। जो कि आगे बढ़ रही थी।
बचो-ऽऽऽ” जगमोहन गला फाड़कर चिल्लाया। बस स्टॉप पर खड़े अन्य लोगों की निगाह भी उस तरफ उठी।
यही वो पल था जब तेज रफ्तार से आता ट्रक, कार को रौंदता चला गया।
जगमोहन ठगा-सा खडा रह गया। टक्कर की ऐसी आवाज उभरी जैसे बम फटा हो। आधी कार ट्रक के नीचे जा धंसी थी। इसके साथ ही ट्रैफिक रुकने लगा। लोग इकट्ठे होने लगे।
| जगमोहन पागलों की तरह कार की तरफ दौड़ा।
अभी पूरी तरह वहां भीड़ इकट्ठी नहीं हुई थी। कार के पास पहुंचकर वो ठिठक गया। कार का पीछे वाला दरवाजा अधखुला हुआ था। भीतर उस युवती की उसी तरह लाश पड़ी नजर आई जैसे कि उसने देखा था और उसी सीट पर बगल में मौजूद युवक बुरी तरह घायल हुआ, तड़प रहा था।
तभी लोगों ने वहां इकट्ठा होना शुरू कर दिया था।
जगमोहन भीड़ से बाहर आया और वापस चल पड़ा। इस वक्त वो ही जानता था कि उसकी क्या हालत हुई पड़ी है। युवती का चेहरा बार-बार उसकी आंखों के सामने घूम रहा था। उसने युवती को रोकने की भरपूर चेष्टा की परंतु वो नहीं रुकी थी। उसे रोकने की थोड़ी और कोशिश करनी चाहिए थी। उसने सोचा।
जगमोहन वापस उस इमारत के अहाते में खड़ी कार की ड्राइविंग सीट पर जा बैठा। बेहद अजीब-सी हालत हो रही थी उसकी। सिर घूमा हुआ लग रहा था। आंखों के सामने रह-रहकर वो एक्सीडेंट और युवक-युवती का चेहरा आ रहा था। क्या हो गया था उसे? उसे कैसे पता चल गया कि आने वाले वक्त में वो बुरी घटना होने वाली है? * जगमोहन ने सिर को झटका दिया।
परंतु ये सब कुछ उसके दिमाग से बाहर न निकल रहा था। जो हुआ वो उसके लिए कम हैरत की बात नहीं थी। वो अभी तक बीती बातों को न पचा पा रहा था।
आखिरकार जगमोहन ने गहरी सांस ली और फोन निकालकर रमजान भाई के नम्बर मिलाने लगा। तुरंत ही रमजान भाई से बात हो गई।
“तू किधर है, अचानक भाग क्यों गया तू?” रमजान भाई की आवाज कानों में पड़ी।
तभी उस कार का पीछे वाला शीशा नीचे हुआ तो जगमोहन स्तब्ध रह गया। वो ही युवक भीतर बैठा दिखा जो उसके मस्तिष्क ने देखा था। जगमोहन का हाल बुरा हो चुका था अब तक।
उस युवक ने आंख मारकर युवती से कहा।
चलना है?
” तीन हजार ।”
“दो दूंगा।” ।
“ठीक है।” कहकर युवती कार की तरफ बढ़ने को हुई। युवक ने कार का दरवाजा खोल दिया।
इससे पहले कि युवती आगे बढ़ती, जगमोहन ने झपटकर उसकी कलाई पकड़ ली।।
“छोड़ो मुझे।” युवती हड़बड़ाकर बोली।
“उसके साथ मत जाओ।” जगमोहन कह उठा।
मेरी उससे बात हो चुकी है। पहले तुम बात करते तो, मैं तुम्हारे साथ...।” ।
“इस कार का एक्सीडेंट होने वाला है।” जगमोहन तेज स्वर में बोला–“तुम मर जाओगी।”
“बकवास मत करो। वो मुझे दो हजार दे रहा है। मैं तुम्हारे साथ जाने वाली नहीं ।” युवती ने क्रोध से कहकर, अपनी कलाई छुड़ाई और आगे बढ़कर, खुले दरवाजे से कार में जा बैठी।
युवक ने दरवाजा बंद किया और दांत दिखाकर जगमोहन को देखा।
इस कार से बाहर निकल जाओ।” जगमोहन चीखा–“कार का एक्सीडेंट होने वाला है।”
युवक हंसा। उसी पल कार आगे बढ़ गई। जगमोहन होंठ भींचे कार को जाता देखने लगा।
तभी जगमोहन की आंखें फैल गईं। सामने से आता ट्रक, जिसका कि अचानक बैलेंस बिगड़ गया था, वो अपनी जगह छोड़कर, एकाएक उलटी दिशा में आने लगा। सामने काली कार थी। जो कि आगे बढ़ रही थी।
बचो-ऽऽऽ” जगमोहन गला फाड़कर चिल्लाया। बस स्टॉप पर खड़े अन्य लोगों की निगाह भी उस तरफ उठी।
यही वो पल था जब तेज रफ्तार से आता ट्रक, कार को रौंदता चला गया।
जगमोहन ठगा-सा खडा रह गया। टक्कर की ऐसी आवाज उभरी जैसे बम फटा हो। आधी कार ट्रक के नीचे जा धंसी थी। इसके साथ ही ट्रैफिक रुकने लगा। लोग इकट्ठे होने लगे।
| जगमोहन पागलों की तरह कार की तरफ दौड़ा।
अभी पूरी तरह वहां भीड़ इकट्ठी नहीं हुई थी। कार के पास पहुंचकर वो ठिठक गया। कार का पीछे वाला दरवाजा अधखुला हुआ था। भीतर उस युवती की उसी तरह लाश पड़ी नजर आई जैसे कि उसने देखा था और उसी सीट पर बगल में मौजूद युवक बुरी तरह घायल हुआ, तड़प रहा था।
तभी लोगों ने वहां इकट्ठा होना शुरू कर दिया था।
जगमोहन भीड़ से बाहर आया और वापस चल पड़ा। इस वक्त वो ही जानता था कि उसकी क्या हालत हुई पड़ी है। युवती का चेहरा बार-बार उसकी आंखों के सामने घूम रहा था। उसने युवती को रोकने की भरपूर चेष्टा की परंतु वो नहीं रुकी थी। उसे रोकने की थोड़ी और कोशिश करनी चाहिए थी। उसने सोचा।
जगमोहन वापस उस इमारत के अहाते में खड़ी कार की ड्राइविंग सीट पर जा बैठा। बेहद अजीब-सी हालत हो रही थी उसकी। सिर घूमा हुआ लग रहा था। आंखों के सामने रह-रहकर वो एक्सीडेंट और युवक-युवती का चेहरा आ रहा था। क्या हो गया था उसे? उसे कैसे पता चल गया कि आने वाले वक्त में वो बुरी घटना होने वाली है? * जगमोहन ने सिर को झटका दिया।
परंतु ये सब कुछ उसके दिमाग से बाहर न निकल रहा था। जो हुआ वो उसके लिए कम हैरत की बात नहीं थी। वो अभी तक बीती बातों को न पचा पा रहा था।
आखिरकार जगमोहन ने गहरी सांस ली और फोन निकालकर रमजान भाई के नम्बर मिलाने लगा। तुरंत ही रमजान भाई से बात हो गई।
“तू किधर है, अचानक भाग क्यों गया तू?” रमजान भाई की आवाज कानों में पड़ी।