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माँ का पल्लू (दा मिस्टेक)
घर मे पूरा सन्नाटा फेला हुआ था.... माँ रो रो फर्श पे सो गई थी..... और क्यू ना हो जिसका पति भरी जवानी मे मर गया हो उसपे क्या बीतेगी ये वही जानती है......
मेरा नाम रवि हे मे 18 साल का हूँ और 11थ मे पढ़ता हूँ मेरे पापा की मौत कार आक्सिडेंट मे हो गई जो सिर्फ़ 40 साल के थे. मेरी माँ नामिता 38 साल की है और एक टीचर भी है...
पापा की मौत को 4 दिन हो हो गये फिर भी माँ को कोई होश नही था सभी विधिया पूर्ण हो गई थी सिर्फ़ पापा की अस्थियो को गंगा मे बहाना था और पंडित जी ने कहा था. कि शीघ्र ही इनकी अस्थिया बहा देना चाहिए हम देल्ही. मे रहते है इसलिए अस्थिया बहाने के लिए हमे वाराणसी जाना पड़ेगा पर माँ को देखते हुए मुझे नही लगता था कि वो आपाएगी पर ये भी ज़रूरी था.....
अगली सुबह हम ट्रॅवेल मे बैठ के निकल पड़े.पूरे सफ़र मे माँ ने मुझसे कोई बात नही की उन्हे काफ़ी सदमा लगा था.....
हम रात के 8 बजे एक गाओं मे उतरे जिससे हमे वहाँ एक और लोकल बस करके वाराणसी जाना था....
माँ ने सुबह से कुछ खाया नही था हमने एक होटेल मे जाके थोड़ा खा लिया तब तक बस आ चुकी थी....
और हम दोनो माँ बेटे वहाँ बैठ गये. पर ये क्या बस पूरी तरह भरी हुई थी आगे से लेकर पीछे तक भीड़ ही भीड़ थी... मे और माँ जेसे तेसे अंदर आ गये पर बस के अंदर तो खड़े होने लायक भी जगह नही थी और उपर से एक गंदी बदबू आ रही थी तब मेने बस के कंडक्टर से बात की कि मेरी माँ सुबह से ट्रॅवेलिंग कर रही हे और उनकी तबीयत भी खराब है क्या आप उनके लिए थोड़ी जगह बना देंगे....
कंडक्टर--- कोई बात नही बेटा तुम्हारी माँ को इस सीट पे बिठा दो..
और कंडक्टर ने एक आदमी को उठा कर माँ को सीट दे दी और मे माँ के पास खड़ा हो हो गया....
मेने आसपास देखा तो सभी लोग मुझे और माँ को घूर रहे थे क्यू कि वहाँ हम ही सबसे अलग लग रहे थे...
मुझे अजीब सा लगा... . पर मेने सोचा चलो माँ को तो जगह मिल गई...मैं तो खड़ा भी नही हो पा रहा था एक आदमी मुझे आगे धक्का लगाता तो दूसरा पीछे... मे तो परेशान हो गया....
मुझे भी दिन भर की थकान की कारण नींद आने लगी और मेरा सर अगले शख्स के कंधे पर लग रहा था...
पर तभी मुझे एक झटका लगा....
मुझे अपने नितंब पर कुछ महसूस हुआ और मुझे समझने मे ज़्यादा देर नही लगी कि वो किसी का लंड है....मे थोड़ा सहम गया और अपनी कमर को आगे कर दिया पर अगली ही पल मुझे फिर से लंड महसूस होने लगा मुझे समझ नही आया कि क्या करूँ... अब तो आगे खिसक भी नही सकता.. . पर सोचा शायद मेरे नितंब लगने से उसका लंड खड़ा हो गया होगा अब उसकी भी भूल नही है ये ह्यूमन नेचर ही है तो मेने अब ज़्यादा कोई अवरोध नही किया और नही कर सकता था पर जेसे 2 वक़्त गुजर रहा था उस शक्स अब ज़्यादा ही ज़ोर से मेरे नितंब मे अपना लंड घुसा रहा था पर मेने सोचा इसका लंड इतना टाइट क्यू हो गया जेसे कोई ब्लू फिल्म देख के खड़ा हो गया हो...
मेने तिरछी नज़र से उस शक्स को देखना चाहा कि ये कौन हे पर जब मेने उसको देखा तो उसका ध्यान कहीं और था मेने उसके नज़रों का पीछा किया तो मेरे तो होश ही उड़ गये.....
हे भगवान वो तो माँ की ओर देख रहा था और मुझे समझ भी आ गया कि. उसका लंड क्यू खड़ा हो गया क्यू की माँ का आँचल उसके शरीर से गिर गया था और माँ के स्तन पूरी तरह उजागर हो गये थे.... माँ पूरी नींद मे थी जिससे उसको कोई होश नही था....
माँ ने ब्लॅक कलर का ब्लाउस पहना था. जो काफ़ी छोटा था माँ सिटी मे रहने के कारण हमेशा. काफ़ी स्टाइलिश कपड़े पहनती थी चाहे वो जीन्स टी शर्ट हो या फिर सारी ब्लाउस और ये ब्लाउस भी काफ़ी डीप था जिससे माँ के भारी भरकम स्तन समा नही पा रहे थे... लगभग 70% स्थान बाहर थे... माँ बोहोत अधिक गोरी होने के कारण. काले ब्लाउस मे. उनके स्तन छुप नही पा रहे थे...
मेने आसपास नज़र दौड़ाई तो सिर्फ़ वो व्यक्ति ही नही पर बस के लगभग आधे लोग माँ को घुरे जा रहे थे.... और मेरे अगले वाला शक्स तो अपने लंड पर लगायर हाथ घुमा रहा था....
और मेरे पीछे वाला अब भी लगातार. मेरे नितंब मे अपना औज़ार गढ़ा रहा था...
मे ने चाहा कि मे जाके माँ को उठा दूं पर पता नही अंदर से मन ही नही मान रहा था....मेने भी माँ के स्तन को इतना गौर से. नही देखा था वो सच मे काफ़ी बड़े थे लगभग 38 के तो होंगे ये दृश्य देख के मे भी खोता जा रहा था और माँ के स्तन ही नही बल्कि माँ की नाभि भी सॉफ दिखाई दे रही थी... माँ की नेवेल बोहोत ही डीप और बड़ी थी वो इतनी बड़ी थी कि एक छोटे बच्चे का लंड आराम से उसके अंदर आ जाए....
माँ के साँस लेने के साथ साथ स्तन से लेके माँ की नाभि उपर नीचे होती वो दृश्य वाकई बोहोत सेक्सी था....मे भी अब लोगो के साथ माँ के बदन को घूर्ने लगा और इसका असर मेरे लंड पर होने लगा.... अब मेरा औज़ार भी सावधान मुद्रा मे खड़ा था.... जिसके मेरा लंड अब मेरे आगे खड़े शक्स को लगने लगा... मे थोड़ा पीछे हुआ पर पीछे होते ही पिच्छले वाले का लंड मेरे नितंब मे चुभने लगा और उसने फिर ज़ोर से एक धक्का मारा जिसके साथ ही मेरी कमर आगे की ओर हो गई और मेरा लंड सीधा आगे वाले व्यक्ति के नितंब मे जा लगा... मे थोड़ा दर गया क्यू कि मेरे लंड का अगला सुपाडा उसके नितंब मे था....
उस शख्स ने पिछे मुड़कर मेरी और देखा मे थोड़ा डर गया.... पर उसने. मुझे देख के हल्की स्माइल दी शायद वो भी समझ गया था कि मेरा लंड क्यूँ खड़ा है...
मेरा लंड जो उसके नितंब मे फसा हुआ था उसने आगे से और मेरे लंड पर थक्का मारा....वो भी माँ की जवानी से गरम था...अब मे दोनो के बीच सॅंडविच बन गया था एक मेरी गान्ड मार रहा था और दूसरा मेरे लंड पे अपनी गांद रगडे हुए मुझे और गरम करने लगा उपर से माँ के बदन भी मुझे गरम करने लगा. मुझे तो एसा लगा जेसे मे हवा मे उड़ रहा हूँ..... ये सिलसिला लगभग 1 घंटे तक चलता रहा और धीरे2 भीड़ कम होने लगी और बस लगभग खाली हो गई अब बस मे वो दो शख्स मे और माँ और कंडक्टर- ड्राइवर थे.....
वो दोनो मेरे दाएँ और बाए बैठ गये माँ सामने बैठी थी जो अब भी नींद मे ही थी
और कंडक्टर पहली सीट पे आगे की और मुँह करके बैठा था.....
मे और वो दोनो लोग माँ को अब भी घुरे जा रहे थे कि तभी मेरे दाए बैठे शख्स ने मेरी जाँघ पर हाथ फेरते हुए कहा ये कॉन है बेटा???
मेने लडखडाते हुए जवाब दिया माँ है....
ह्म्म्म्म... बहुत गरम माल है.... और उसने मुझे आँख मारी...
मे कुछ नही बोल पाया... अगले ही पल उसने मेरा लंड पॅंट के उपर से पकड़ लिया. और दबाना शुरू कर दिया... मुझे बोहोत अच्छा लग रहा था और मेने अपनी आँखे बंद कर ली....
तब वो बोला तेरी माँ को कभी नंगी देखा है बबुआ???
मेने आँखे बंद रहते ही ना बोला....
अरे बड़े बब्चक हो एसी माल को नंगा नही देखा... चलो कोई बात नही हम आज तोहार ये हसरत भी पूरी कर देंगे....
ये बोलते ही मेने अपनी आँख खोल दी जेसे ही मेने आँख खोली मे हेरान रह गया क्यूँ कि वे दोनो अब अपनी धोती उतार चुके थे और एक हाथ से अपना मूसल जेसा लंड हिला रहे थे.... इतने बड़े लंड मेने आज तक नही देखे थे वे लगभग9/10 इंच होंगे...
एक ने कहा क्या टुकूर- टुकूर देख रहे हो बाबुवा....कभी देखे नही हो का....
मेने मन मे कहा इनके सामने तो मेरा लंड एक चूहे जेसा है. तभी दूसरे शख्स ने मेरी पॅंट को ज़ोर से खिचा जिसके साथ मेरी अंडरवेर भी निकल गई..... और मेरा लंड भी आज़ाद हो गया जो अब पूरी तरह हवा मे खड़ा था.....
मेरा लंड देख वो दोनो हँसने लगे अरे येतो अभी बच्चा है.... कितना छोटा है....
मेरा लंड भी 7 इंच का था पर उन लोगो के सामने छोटा ही था....पर उनसे ज़्यादा गोरा था....
दूसरे ने कहा कि. वैसे भी शहरी लोगो के लोड्े छोटे ही होते है....अब इसके बाप का भी इतना बड़ा होगा और एसी माल को चोदने के लिए हमारे जेसा ही लोड्ा चाहिए ना....
क्या चोदना माँ को???
मेने उनसे कहा नही तुम एसा नही कर सकते....
तभी दूसरे ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे हिलाना शुरू कर दिया मे फिरसे जोश मे आने लगा....
और उसने बोला क्यूँ बबुआ तुम अपनी माँ को नही चोदना चाहते का?? क्या तुम अपनी माँ को नंगी नही देखना चाहते हो का??? तुम नही देखोगे कि तुम जहाँ से पेदा हुए हो वो चूत केसी दिखती है???
उसकी बाते मुझे पागल कर रही थी और मे भी जोश मे आकेबोलने लगा हाँ..... हाँ.....
अब वो खड़ा हो के मेरे पीछे आ गया और अपने लंड को मेरी गान्ड पर रगड़ने लगा मे इसके लंड की कठोरता महसूस. कर पा रहा था और उसका दूसरा हाथ अब भी मेरे लंड पर ही घूम रहा था.... उसका एसा करना मुझे पागल बना रहा था....
तभी दूसरा सीधा माँ के पास जाने लगा और माँ के मूड कर पास खड़ा हो गया और अपना लंड माँ के मूँह घुसाने की कोशिस करने लगा अगले ही पल उसके लंड का सुपाडा माँ के सुर्ख होंठो के अंदर था.... उसने फिर से ज़ोर लगाया जिससे पूरा लंड माँ के मुँह से हो कर गले तक पहुँचा दिया ऐसा करते ही माँ को ज़ोरदार ख़ासी आई और इसका लंड सीधे माँ के मुँह के बाहर आ गया....
अब माँ जाग चुकी थी माँ की पहली नज़र जो गई. वो मेरे उपर थी अब सीन ये था कि. मे माँ के सामने नंगा खड़ा हुआ एक शक्स मेरे लंड को हिला रहा है और साथ ही मेरी गान्ड मे अपना लंड रगड़ रहा था वही दूसरा शक्स माँ के सामने अपना लंड पकड़े हुए खड़ा हे....
ये सीन देख कर माँ का चेहरा भौचक्का रह गया एसा लगा जेसे माँ को 440 वॉट का करेंट लगा हो.....
तभी माँ के मुँह से जोरदार आवाज़ आई
रवववीिइ...........
माँ की आवाज़ इतनी. ज़ोरदार थी कि ड्राइवर ने सुनते ही तुरंत ब्रेक दबा दिया.....
ऐसा करने से मे सीधा माँ के उपर गिर गया और मेरा लंड माँ के नाभि मे घुस गया मुझे एसा लगा जेसे की कुवारि चूत मे मेरा लंड फस गया हो..... और साथ ही मेरे मुँह से भी एक दर्द भरी चीख निकली..... ये चीख इसलिए नही निकली कि मेरा लंड माँ की नाभि मे फस गया बल्कि इसलिए निकली कि जब मे गिरा मेरे साथ वो शख्स भी गिरा जो मेरे पीछे खड़ा था और जो अभी तक मेरी गान्ड मे अपना लंड रगड़ रहा था वो सीधा एक ही झटके मे मेरी गान्ड को. चीरते हुए आधा लंड घुस गया था.......
तभी ड्राइवर - कंडक्टर दौड़ते हुए पीछे आ गये....
जब उन लोगो ने पिछे आ कर ये सीन देखा. तो वो लोग जाग पर ही जम गये.... ड्राइवर ने चिल्लाते हुए कहा --- तुम लोग क्या कर रहे हो ये???
कंडक्टर--- लगता है ये साले आदिवासी इस औरत की इज़्ज़त लूटना. चाहते है???
कंडक्टर-- पर ये लड़का तो इसका बेटा है ये क्यूँ नंगा. है??
ड्राइवर-- देखते क्या हो लगाओ पोलीस को फोन जब पोलीस की मार पड़ेगी ना तब सुधरेंगे ये आदिवासी साला इनकी वजह से यूपी का. नाम खराब होता है. कुत्ते साले....
कंडक्टर अपना मोबाइल निकाल कर फोन लगाने लगा कि तभी उनमे से एक शख्स चिल्लाया "अरे हरिया देखता क्या है पकड़ इस कंडक्टर को"
और हरिया नाम के उस आदमी ने कंडक्टर को ज़ोरदार मुक्का मारा और एक ही मुक्के मे उसे नीचे गिरा दिया वो सच मे बोहोत हॅटा कट्ता आदमी था
हरिया-- राजू भैया अंदर से कट्टा निकालो...
यानी दूसरे का नाम राजू था... राजू ने अपनी बॅग से एक देसी गन निकाली और सीधे. ड्राइवर के सर पे लगा दी...
राजू-- देखो बाबू चुपचाप खड़े रहो वरना तुम दोनो को यही मार के फेंक देंगे समझे ना....
घर मे पूरा सन्नाटा फेला हुआ था.... माँ रो रो फर्श पे सो गई थी..... और क्यू ना हो जिसका पति भरी जवानी मे मर गया हो उसपे क्या बीतेगी ये वही जानती है......
मेरा नाम रवि हे मे 18 साल का हूँ और 11थ मे पढ़ता हूँ मेरे पापा की मौत कार आक्सिडेंट मे हो गई जो सिर्फ़ 40 साल के थे. मेरी माँ नामिता 38 साल की है और एक टीचर भी है...
पापा की मौत को 4 दिन हो हो गये फिर भी माँ को कोई होश नही था सभी विधिया पूर्ण हो गई थी सिर्फ़ पापा की अस्थियो को गंगा मे बहाना था और पंडित जी ने कहा था. कि शीघ्र ही इनकी अस्थिया बहा देना चाहिए हम देल्ही. मे रहते है इसलिए अस्थिया बहाने के लिए हमे वाराणसी जाना पड़ेगा पर माँ को देखते हुए मुझे नही लगता था कि वो आपाएगी पर ये भी ज़रूरी था.....
अगली सुबह हम ट्रॅवेल मे बैठ के निकल पड़े.पूरे सफ़र मे माँ ने मुझसे कोई बात नही की उन्हे काफ़ी सदमा लगा था.....
हम रात के 8 बजे एक गाओं मे उतरे जिससे हमे वहाँ एक और लोकल बस करके वाराणसी जाना था....
माँ ने सुबह से कुछ खाया नही था हमने एक होटेल मे जाके थोड़ा खा लिया तब तक बस आ चुकी थी....
और हम दोनो माँ बेटे वहाँ बैठ गये. पर ये क्या बस पूरी तरह भरी हुई थी आगे से लेकर पीछे तक भीड़ ही भीड़ थी... मे और माँ जेसे तेसे अंदर आ गये पर बस के अंदर तो खड़े होने लायक भी जगह नही थी और उपर से एक गंदी बदबू आ रही थी तब मेने बस के कंडक्टर से बात की कि मेरी माँ सुबह से ट्रॅवेलिंग कर रही हे और उनकी तबीयत भी खराब है क्या आप उनके लिए थोड़ी जगह बना देंगे....
कंडक्टर--- कोई बात नही बेटा तुम्हारी माँ को इस सीट पे बिठा दो..
और कंडक्टर ने एक आदमी को उठा कर माँ को सीट दे दी और मे माँ के पास खड़ा हो हो गया....
मेने आसपास देखा तो सभी लोग मुझे और माँ को घूर रहे थे क्यू कि वहाँ हम ही सबसे अलग लग रहे थे...
मुझे अजीब सा लगा... . पर मेने सोचा चलो माँ को तो जगह मिल गई...मैं तो खड़ा भी नही हो पा रहा था एक आदमी मुझे आगे धक्का लगाता तो दूसरा पीछे... मे तो परेशान हो गया....
मुझे भी दिन भर की थकान की कारण नींद आने लगी और मेरा सर अगले शख्स के कंधे पर लग रहा था...
पर तभी मुझे एक झटका लगा....
मुझे अपने नितंब पर कुछ महसूस हुआ और मुझे समझने मे ज़्यादा देर नही लगी कि वो किसी का लंड है....मे थोड़ा सहम गया और अपनी कमर को आगे कर दिया पर अगली ही पल मुझे फिर से लंड महसूस होने लगा मुझे समझ नही आया कि क्या करूँ... अब तो आगे खिसक भी नही सकता.. . पर सोचा शायद मेरे नितंब लगने से उसका लंड खड़ा हो गया होगा अब उसकी भी भूल नही है ये ह्यूमन नेचर ही है तो मेने अब ज़्यादा कोई अवरोध नही किया और नही कर सकता था पर जेसे 2 वक़्त गुजर रहा था उस शक्स अब ज़्यादा ही ज़ोर से मेरे नितंब मे अपना लंड घुसा रहा था पर मेने सोचा इसका लंड इतना टाइट क्यू हो गया जेसे कोई ब्लू फिल्म देख के खड़ा हो गया हो...
मेने तिरछी नज़र से उस शक्स को देखना चाहा कि ये कौन हे पर जब मेने उसको देखा तो उसका ध्यान कहीं और था मेने उसके नज़रों का पीछा किया तो मेरे तो होश ही उड़ गये.....
हे भगवान वो तो माँ की ओर देख रहा था और मुझे समझ भी आ गया कि. उसका लंड क्यू खड़ा हो गया क्यू की माँ का आँचल उसके शरीर से गिर गया था और माँ के स्तन पूरी तरह उजागर हो गये थे.... माँ पूरी नींद मे थी जिससे उसको कोई होश नही था....
माँ ने ब्लॅक कलर का ब्लाउस पहना था. जो काफ़ी छोटा था माँ सिटी मे रहने के कारण हमेशा. काफ़ी स्टाइलिश कपड़े पहनती थी चाहे वो जीन्स टी शर्ट हो या फिर सारी ब्लाउस और ये ब्लाउस भी काफ़ी डीप था जिससे माँ के भारी भरकम स्तन समा नही पा रहे थे... लगभग 70% स्थान बाहर थे... माँ बोहोत अधिक गोरी होने के कारण. काले ब्लाउस मे. उनके स्तन छुप नही पा रहे थे...
मेने आसपास नज़र दौड़ाई तो सिर्फ़ वो व्यक्ति ही नही पर बस के लगभग आधे लोग माँ को घुरे जा रहे थे.... और मेरे अगले वाला शक्स तो अपने लंड पर लगायर हाथ घुमा रहा था....
और मेरे पीछे वाला अब भी लगातार. मेरे नितंब मे अपना औज़ार गढ़ा रहा था...
मे ने चाहा कि मे जाके माँ को उठा दूं पर पता नही अंदर से मन ही नही मान रहा था....मेने भी माँ के स्तन को इतना गौर से. नही देखा था वो सच मे काफ़ी बड़े थे लगभग 38 के तो होंगे ये दृश्य देख के मे भी खोता जा रहा था और माँ के स्तन ही नही बल्कि माँ की नाभि भी सॉफ दिखाई दे रही थी... माँ की नेवेल बोहोत ही डीप और बड़ी थी वो इतनी बड़ी थी कि एक छोटे बच्चे का लंड आराम से उसके अंदर आ जाए....
माँ के साँस लेने के साथ साथ स्तन से लेके माँ की नाभि उपर नीचे होती वो दृश्य वाकई बोहोत सेक्सी था....मे भी अब लोगो के साथ माँ के बदन को घूर्ने लगा और इसका असर मेरे लंड पर होने लगा.... अब मेरा औज़ार भी सावधान मुद्रा मे खड़ा था.... जिसके मेरा लंड अब मेरे आगे खड़े शक्स को लगने लगा... मे थोड़ा पीछे हुआ पर पीछे होते ही पिच्छले वाले का लंड मेरे नितंब मे चुभने लगा और उसने फिर ज़ोर से एक धक्का मारा जिसके साथ ही मेरी कमर आगे की ओर हो गई और मेरा लंड सीधा आगे वाले व्यक्ति के नितंब मे जा लगा... मे थोड़ा दर गया क्यू कि मेरे लंड का अगला सुपाडा उसके नितंब मे था....
उस शख्स ने पिछे मुड़कर मेरी और देखा मे थोड़ा डर गया.... पर उसने. मुझे देख के हल्की स्माइल दी शायद वो भी समझ गया था कि मेरा लंड क्यूँ खड़ा है...
मेरा लंड जो उसके नितंब मे फसा हुआ था उसने आगे से और मेरे लंड पर थक्का मारा....वो भी माँ की जवानी से गरम था...अब मे दोनो के बीच सॅंडविच बन गया था एक मेरी गान्ड मार रहा था और दूसरा मेरे लंड पे अपनी गांद रगडे हुए मुझे और गरम करने लगा उपर से माँ के बदन भी मुझे गरम करने लगा. मुझे तो एसा लगा जेसे मे हवा मे उड़ रहा हूँ..... ये सिलसिला लगभग 1 घंटे तक चलता रहा और धीरे2 भीड़ कम होने लगी और बस लगभग खाली हो गई अब बस मे वो दो शख्स मे और माँ और कंडक्टर- ड्राइवर थे.....
वो दोनो मेरे दाएँ और बाए बैठ गये माँ सामने बैठी थी जो अब भी नींद मे ही थी
और कंडक्टर पहली सीट पे आगे की और मुँह करके बैठा था.....
मे और वो दोनो लोग माँ को अब भी घुरे जा रहे थे कि तभी मेरे दाए बैठे शख्स ने मेरी जाँघ पर हाथ फेरते हुए कहा ये कॉन है बेटा???
मेने लडखडाते हुए जवाब दिया माँ है....
ह्म्म्म्म... बहुत गरम माल है.... और उसने मुझे आँख मारी...
मे कुछ नही बोल पाया... अगले ही पल उसने मेरा लंड पॅंट के उपर से पकड़ लिया. और दबाना शुरू कर दिया... मुझे बोहोत अच्छा लग रहा था और मेने अपनी आँखे बंद कर ली....
तब वो बोला तेरी माँ को कभी नंगी देखा है बबुआ???
मेने आँखे बंद रहते ही ना बोला....
अरे बड़े बब्चक हो एसी माल को नंगा नही देखा... चलो कोई बात नही हम आज तोहार ये हसरत भी पूरी कर देंगे....
ये बोलते ही मेने अपनी आँख खोल दी जेसे ही मेने आँख खोली मे हेरान रह गया क्यूँ कि वे दोनो अब अपनी धोती उतार चुके थे और एक हाथ से अपना मूसल जेसा लंड हिला रहे थे.... इतने बड़े लंड मेने आज तक नही देखे थे वे लगभग9/10 इंच होंगे...
एक ने कहा क्या टुकूर- टुकूर देख रहे हो बाबुवा....कभी देखे नही हो का....
मेने मन मे कहा इनके सामने तो मेरा लंड एक चूहे जेसा है. तभी दूसरे शख्स ने मेरी पॅंट को ज़ोर से खिचा जिसके साथ मेरी अंडरवेर भी निकल गई..... और मेरा लंड भी आज़ाद हो गया जो अब पूरी तरह हवा मे खड़ा था.....
मेरा लंड देख वो दोनो हँसने लगे अरे येतो अभी बच्चा है.... कितना छोटा है....
मेरा लंड भी 7 इंच का था पर उन लोगो के सामने छोटा ही था....पर उनसे ज़्यादा गोरा था....
दूसरे ने कहा कि. वैसे भी शहरी लोगो के लोड्े छोटे ही होते है....अब इसके बाप का भी इतना बड़ा होगा और एसी माल को चोदने के लिए हमारे जेसा ही लोड्ा चाहिए ना....
क्या चोदना माँ को???
मेने उनसे कहा नही तुम एसा नही कर सकते....
तभी दूसरे ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे हिलाना शुरू कर दिया मे फिरसे जोश मे आने लगा....
और उसने बोला क्यूँ बबुआ तुम अपनी माँ को नही चोदना चाहते का?? क्या तुम अपनी माँ को नंगी नही देखना चाहते हो का??? तुम नही देखोगे कि तुम जहाँ से पेदा हुए हो वो चूत केसी दिखती है???
उसकी बाते मुझे पागल कर रही थी और मे भी जोश मे आकेबोलने लगा हाँ..... हाँ.....
अब वो खड़ा हो के मेरे पीछे आ गया और अपने लंड को मेरी गान्ड पर रगड़ने लगा मे इसके लंड की कठोरता महसूस. कर पा रहा था और उसका दूसरा हाथ अब भी मेरे लंड पर ही घूम रहा था.... उसका एसा करना मुझे पागल बना रहा था....
तभी दूसरा सीधा माँ के पास जाने लगा और माँ के मूड कर पास खड़ा हो गया और अपना लंड माँ के मूँह घुसाने की कोशिस करने लगा अगले ही पल उसके लंड का सुपाडा माँ के सुर्ख होंठो के अंदर था.... उसने फिर से ज़ोर लगाया जिससे पूरा लंड माँ के मुँह से हो कर गले तक पहुँचा दिया ऐसा करते ही माँ को ज़ोरदार ख़ासी आई और इसका लंड सीधे माँ के मुँह के बाहर आ गया....
अब माँ जाग चुकी थी माँ की पहली नज़र जो गई. वो मेरे उपर थी अब सीन ये था कि. मे माँ के सामने नंगा खड़ा हुआ एक शक्स मेरे लंड को हिला रहा है और साथ ही मेरी गान्ड मे अपना लंड रगड़ रहा था वही दूसरा शक्स माँ के सामने अपना लंड पकड़े हुए खड़ा हे....
ये सीन देख कर माँ का चेहरा भौचक्का रह गया एसा लगा जेसे माँ को 440 वॉट का करेंट लगा हो.....
तभी माँ के मुँह से जोरदार आवाज़ आई
रवववीिइ...........
माँ की आवाज़ इतनी. ज़ोरदार थी कि ड्राइवर ने सुनते ही तुरंत ब्रेक दबा दिया.....
ऐसा करने से मे सीधा माँ के उपर गिर गया और मेरा लंड माँ के नाभि मे घुस गया मुझे एसा लगा जेसे की कुवारि चूत मे मेरा लंड फस गया हो..... और साथ ही मेरे मुँह से भी एक दर्द भरी चीख निकली..... ये चीख इसलिए नही निकली कि मेरा लंड माँ की नाभि मे फस गया बल्कि इसलिए निकली कि जब मे गिरा मेरे साथ वो शख्स भी गिरा जो मेरे पीछे खड़ा था और जो अभी तक मेरी गान्ड मे अपना लंड रगड़ रहा था वो सीधा एक ही झटके मे मेरी गान्ड को. चीरते हुए आधा लंड घुस गया था.......
तभी ड्राइवर - कंडक्टर दौड़ते हुए पीछे आ गये....
जब उन लोगो ने पिछे आ कर ये सीन देखा. तो वो लोग जाग पर ही जम गये.... ड्राइवर ने चिल्लाते हुए कहा --- तुम लोग क्या कर रहे हो ये???
कंडक्टर--- लगता है ये साले आदिवासी इस औरत की इज़्ज़त लूटना. चाहते है???
कंडक्टर-- पर ये लड़का तो इसका बेटा है ये क्यूँ नंगा. है??
ड्राइवर-- देखते क्या हो लगाओ पोलीस को फोन जब पोलीस की मार पड़ेगी ना तब सुधरेंगे ये आदिवासी साला इनकी वजह से यूपी का. नाम खराब होता है. कुत्ते साले....
कंडक्टर अपना मोबाइल निकाल कर फोन लगाने लगा कि तभी उनमे से एक शख्स चिल्लाया "अरे हरिया देखता क्या है पकड़ इस कंडक्टर को"
और हरिया नाम के उस आदमी ने कंडक्टर को ज़ोरदार मुक्का मारा और एक ही मुक्के मे उसे नीचे गिरा दिया वो सच मे बोहोत हॅटा कट्ता आदमी था
हरिया-- राजू भैया अंदर से कट्टा निकालो...
यानी दूसरे का नाम राजू था... राजू ने अपनी बॅग से एक देसी गन निकाली और सीधे. ड्राइवर के सर पे लगा दी...
राजू-- देखो बाबू चुपचाप खड़े रहो वरना तुम दोनो को यही मार के फेंक देंगे समझे ना....