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माँ का प्यार

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मुझे खुशी के साथ कुछ चिंता ही हुई दूर कहीं जाकर घर बसाना अब ज़रूरी था साथ ही बापू और भाई बहन के पालन का भी इंतज़ाम करना था

शायद कामदेव की ही मुझपर कृपा हो गयी एक यह कि अचानक बापू एक केस जीत गये जो तीस साल से चल रहा था इतनी बड़ी प्रॉपर्टी आख़िर हमारे नाम हो गयी आधी बेचकर मैंने बैंक में रख दी कि सिर्फ़ ब्याज से ही घर आराम से चलता साथ ही घर की देख भाल को एक विधवा बुआ को बुला लिया इस तरफ से अब मैं निश्चिंत था

दूसरे यह कि मुझे अचानक आसाम में दूर पर एक नौकरी मिली मैंने झट से अपना और माँ का टिकट निकाला और जाने की तारीख तय कर ली माँ ने भी सभी को बता दिया कि वह नहीं सह सकती कि उसका बड़ा बेटा इतनी दूर जाकर अकेला रहे यहाँ तो बुआ थी हीं सबकी देखभाल करने के लिए इस सब बीच माँ का रूप दिन-बा-दिन निखर रहा था ख़ास कर इस भावना से उसके पेट में उसी के बेटे का बीज पल रहा है, माँ बहुत भाव विभोर थी

हम आख़िर आकर नई जगह बस गये यहाँ मैंने सभी को यही बताया कि मैं अपनी पत्नी के साथ हू हमारा संभोग तो अब ऐसा बढ़ा कि रुकता ही नहीं था सुबह उठ कर, फिर काम पर जाने से पहले, दोपहर में खाने पर घर आने के बाद, शाम को लौटकर और फिर रात को जब मौका मिले, मैं बस अम्मा से लिपटा रहता था, उस पर चढा रहता था

माँ की वासना भी शांत ही नहीं होती थी कुछ माह हमने बहुत मज़े लिए फिर आठवें माह से मैंने उसे चोदना बंद कर दिया मैं उसकी चुनमूनियाँ चूस कर उसे झडा देता था और वह भी मेरा लंड चूस देती थी घरवालों को मैंने अपना पता नहीं दिया था, बस कभी कभी फ़ोन पर बात कर लेता था

आख़िर एक दिन माँ को अस्पताल में भरती किया दूसरे ही दिन चाँद सी गुडिया को उसने जन्म दिया माँ तो खुशी से रो रही थी, अपने ही बेटे की बेटी उसने अपनी कोख से जनी थी वह बच्ची मेरी बेटी भी थी और बहन भी माँ ने उसका नाम मेरे नाम पर राज़ी रखा

इस बात को बहुत दिन बीत गये हैं अब तो हम मानों स्वर्ग में हैं माँ के प्रति मेरे प्यार और वासना में ज़रा भी कमी नही हुई है, बल्कि और बढ़ गई है एक उदाहरण यह है कि हमारी बच्ची अब एक साल की हो गयी है और अब माँ का दूध नहीं पीती पर मैं पीता हू माँ के गर्भवती होने का यह सबसे बड़ा लाभ मुझे हुआ है कि अब मैं अपनी माँ का दूध पी सकता हू

इसकी शुरूवात माँ ने राज़ी छह माह की होने के बाद ही की एक दिन जब वह मुझे लिटा कर उपर चढ कर चोद रही थी तो झुककर उसने अपना निपल मेरे मुँह में देकर मुझे दूध पिलाना शुरू कर दिया था उस मीठे अमृत को पाकर मैं बहुत खुश था पर फिर भी माँ को पूछ बैठा कि बच्ची को तो कम नहीं पड़ेगा वह बोली "नहीं मेरे लाल, वह अब धीरे धीरे यह छोड़ देगी पर जब तूने पहली बार मेरे निपल चूसे थे तो मैं यही सोच रही थी कि काश, मेरे इस जवान मस्त बेटे को फिर से पिलाने को मेरे स्तनों में दूध होता आज वह इच्छा पूरी हो गयी"

माँ ने बताया कि अब दो तीन साल भी उसके स्तनों से दूध आता रहेगा बशर्ते मैं उसे लगातार पीऊँ अंधे को चाहिए क्या, दो आँखें, मैं तो दिन में तीन चार बार अम्मा का दूध पी लेता हू ख़ास कर उसे चोदते हुए पीना तो मुझे बहुत अच्छा लगता है

समाप्त
 
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