और उन दोनो ने कपड़े पहने और वापिस घर की तरफ चल दिए.
रीत और विकी की नज़दीकियाँ भी बढ़ने लगी थी. अब वो घंटो एक दूसरे से बात करते रहते थे. रीत तो बस बात बात पे विकी को बोलती रहती थी कि वो ये सब हरक़तें छोड़ दे. और विकी भी उसकी हां में हां मिलाता रहता था क्योंकि अभी तक रीत के संगमरमर के जिस्म को उसने हाथ तक नही लगाया था. अब रीत के मस्त जिस्म को भोगने के लिए वो रीत की बातें मान रहा था और उसके सामने उसने सिग्रेट वगेरा पीना छोड़ दिया था. क्यूंकी रीत को ये सब पसंद नही था. रीत भी खुश थी क्यूंकी विकी उसकी बातें मान रहा था और उसे अपना विकी को सुधारने वाला सपना आसान लगने लगा था.
आज विकी बहुत खुश था क्योंकि आज रीत उसके साथ मूवी देखने जाने वाली थी. बड़ी मुश्क़िल से उसने रीत को मनाया था. वो मन में सोच रहा था कि आज हो ना हो वो रीत के मखमली जिस्म के अंगों को मसल कर रहेगा. उधर रीत को थोडा डर ज़रूर लग रहा था क्यूंकी आज से पहले वो कभी किसी लड़के के साथ ऐसे मूवी देखने नही गई थी. क्यूंकी विकी ही उसका पहला प्यार था और शायद आख़िरी भी. लेकिन फिर भी वो खुश थी कि आज वो अपने प्रेमी के साथ मूवी देखने जा रही थी. सुबह से ही उसके शरीर में फुर्ती दिखाई दे रही थी. वो सब काम जल्दी जल्दी निपटा रही थी. और सब काम निपटा कर वो अपने गोरे बदन को मल मल कर नहाई और फिर उस गोरे बदन पे महरूण कलर का सलवार कमीज़ पहन लिया जो कि उसके शरीर के उपर पूरा फिट था और उसके अंग उसमे से बाहर निकल कर गिरने को हो रहे थे. वो अपनी स्कॉटी लेकर कॉलेज पहुँची और स्कूटी पार्क की और कॅंटीन की तरफ़ चल पड़ी. सामने विकी अपने दोस्त दिपु और बॉब्बी के साथ बैठा था. रीत को देखते ही तीनो के मूह में पानी आ गया और दिपु बोला.
दिपु-अरे हिट्लर क्या किस्मत पाई है तूने. देख तो साली आज कितनी मस्त लग रही है.
बॉब्बी-हां यार हिट्लर आज साली बचनी नही चाहिए. देख साली के मम्मे कैसे उच्छल कर बाहर गिरने को हो रहे हैं.
विकी-अबे सालो चुप करो वो यहीं आ रही है.
रीत उनके पास आकर.
रीत-हेलो विकी, हाई दिपु न्ड बॉब्बी.
विकी-हाई रीत चलें क्या.
रीत-ओके लेट'स गो.
विकी ने उन दोनो से विदा ली और रीत को लेकर अपनी बाइक की तरफ चल पड़ा.
दिपु और बॉब्बी जाते टाइम रीत के रगड़ खाते चुतड़ों को देख रहे थे और बातें कर रहे थे.
डिपु-अरे यार जब इसके बड़े बड़े और गोरे गोरे चुतड़ों के बीच हिट्लर का लंड जाएगा तो क्या सीन होगा.
बॉब्बी-हां यार क्या किस्मत पाई है साले ने कितनी मस्त लोंड़िया चोदने को मिल रही है साले को.
उधर रीत और विकी थियेटर में पहुँच चुके थे. और एक कॉर्नर में जाकर वो दोनो बैठ गये थे. मूवी शुरू हो चुकी थी और रीत मूवी देखने में व्यस्त थी. लेकिन विकी का ध्यान मूवी में ना होकर रीत के जिस्म पे था और वो सोच रहा था कि शुरुआत कैसे करे. उसने थोड़ी हिम्मत करते हुए रीत का हाथ पकड़ लिया और उसे धीरे धीरे सहलाने लगा. रीत मूवी देखने में मस्त थी. तभी विकी ने हाथ बढ़ाते हुए रीत की जाँघ पे टिका दिया और उसपे फिराने लगा. रीत की टाँग एकदम से काँपी और उसने अपनी टाँग दूसरी ओर खिसका ली और विकी का हाथ हटा दिया. रीत ने अपनी टाँग दूसरी टाँग के उपर चढ़ा ली और ऐसा करने से रीत का विकी की तरफ वाला चूतड़ थोड़ा उँचा उठ गया और विकी ने धीरे से अपना हाथ उसके टाँग उठाने से सामने आए उसके चूतड़ पे रख दिया और उसे चूतड़ और सीट के बीच घुसने लगा. रीत एकदम चौंक गई और उसने अपनी टाँग फिर से नीचे कर ली. लेकिन ऐसा करने से विकी का हाथ उसके दोनो चुतड़ों के नीचे दब गया. विकी की उंगलिया रीत के चुतड़ों की दरार में थी. रीत थोड़ा उपर उठी और उसने विकी का हाथ अपने चुतड़ों के नीचे से निकाल दिया और फिर से बैठ गई. और विकी के चेहरे के पास अपना मूह लेज़ाकार बोली.
रीत-विकी प्लीज़ ये सब मत करो.
रीत के चेहरे को अपने नज़दीक पाकर विकी ने एकदम से उसका चेहरा अपने दोनो हाथों में पकड़ लिया. रीत बिल्कुल बौखला गई अब उसे पता था कि विकी क्या करेगा. विकी ने अपना चेहरा बिल्कुल रीत के चेहरे के पास कर लिया. अब उनके चेहरे बिल्कुल आमने सामने थे. रीत अपना चेहरा विकी के हाथों में से छुड़ाना चाहती थी मगर विकी ने मज़बूती से उसे पकड़ रखा था. अब विकी अपने चेहरे को रीत के चेहरे की तरफ लेज़ाने लगा और रीत ने उसके होंठों को अपने होंठों की तरफ आता देख अपनी आँखें बंद कर ली और फिर कुछ ही सेकेंड में विकी के होंठ रीत के गुलाबी लरज़ते होठों के उपर थे.
विकी और रीत के होंठ आपस में मिले हुए थे और विकी के हाथ रीत का चेहरा थामे हुए थे. रीत थोड़ा कस मसा रही थी मगर विकी के द्वारा उसके चेहरे को मज़बूती से थामे होने की वजह से वो कुछ नही कर पा रही थी. विकी ने रीत के निचले होंठ को अपने होंठों में क़ैद कर रखा था और वो उसे प्यार से चूस रहा था. रीत को भी अब मज़ा आने लगा था. ये रीत का पहला चुंबन था.
क्यूंकी आज से पहले किसी मर्द ने चुंबन तो दूर उसे हाथ तक नही लगाया था. विकी ही पहला ऐसा मर्द था जो रीत के गुलाबी होंठों का रस चूस रहा था. विकी अब रीत के होंठ को ज़ोर ज़ोर से अपने होंठों से मसल्ने लगा था. रीत भी अब थोड़ा उसका साथ देने लगी थी और उसके हाथ विकी के बालों के बीच पहुँच चुके थे. विकी अब रीत के होंठ को चूसने के साथ साथ काटने भी लगा था.
विकी के होंठ को काटने की वजह से रीत को अब मज़े के साथ साथ थोड़ा दर्द भी हो रहा था. लेकिन वो फिर भी अपने प्रेमी का साथ दे रही थी. विकी इतनी मस्त हसीना को चूस्ते हुए अपने होश गँवा बैठा था और उसकी हवस अब जालिम सी होने लगी थी. और वो अब ज़ोर ज़ोर से रीत के होंठ को चूसने और काटने लगा था.
रीत का होंठ और उसका मूह विकी द्वारा बेरेहमी से उसके चूसे जाने की वजह से दर्द करने लगा था और अब उसके लिए ये दर्द सहना मुश्क़िल हो रहा था. मगर विकी को इसकी कोई परवाह नही थी वो पूरी मस्ती से रीत के निचले होंठ को चूसे जा रहा था. रीत अब छटपटाने लगी थी और अपने हाथों से विकी को अपने से दूर धकेल रही थी उसकी आँखों में से दर्द के कारण आँसू निकल आए थे. विकी भी अब उसकी परेशानी समझ चुका था और उसने धीरे से आख़िरी चुंबन लेते हुए रीत के होंठों को अपने होंठों से आज़ाद कर दिया था.
पूरे 10मिनट तक विकी ने रीत के गुलाबी लरज़ते होंठों का रस्पान किया था. विकी ने जैसे ही रीत को छोड़ा था तो रीत सीधी होकर बैठ गई और उसने अपना चेहरा नीचे कर लिया और अपने हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और भारी भारी साँसें लेने लगी. उसे अपने होंठों के पास कुछ गीला महसूस हुया उसने जब ध्यान से देखा तो वो खून था जो कि विकी ने उसके होंठों को बुरी तरह चूस चूस कर निकाल दिया था. अब रीत को विकी के उपर बहुत गुस्सा आ रहा था और साथ ही साथ प्यार भी क्योंकि उसने कभी सोचा भी नही था कि उसका पहला चुंबन इतना जबरदस्त होगा.
अब उसकी विकी की तरफ देखने की हिम्मत नही हो रही थी. और वो वैसे ही अपने हाथों से अपना चेहरा छुपाये बैठी थी. सामने मूवी चल रही थी मगर अब ना तो विकी का उसमे कोई ध्यान था और ना ही रीत का. विकी अब सोच रहा था कि आगे कैसे बढ़ा जाए. उसका लंड उसकी पॅंट में पूरे उफान पर था. और हो भी क्यूँ ना. कुछ ही देर पहले उसने एक मदमस्त हसीना के मस्त गुलाबी होंठों को बुरी तरह चूसा था. विकी ने फिर से अपना हाथ रीत की जांघों की तरफ बढ़ा दिया था. और उसका हाथ रीत की चूत के पास उसकी दोनो जांघों के बीच पहुँच चुका था.
अपनी जांघों पे हाथ महसूस होते ही रीत फिर से चौंक उठी थी और उसने अपनी जांघों को कस कर भींच लिया था. और अब विकी का हाथ उसकी जांघों के बीच फस चुका था. रीत वैसे ही चेहरा छुपाये बैठी थी और अपने प्रेमी की इस हरकत पर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. विकी धीरे धीरे अपना हाथ रीत की चूत की तरफ बढ़ने लगा था. जांघों के बीच फसा होने के कारण उसे बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी. विकी का हाथ अपनी चूत की तरफ बढ़ता महसूस कर रीत की साँसें फिर से फूलने लगी थी और उसकी टाँगें भी काँपने लगी थी. रीत की टाँगों का कंपन विकी को महसूस हो रहा था.
वो सोच रहा था कि इस की चुदाई का तो मज़ा ही कुछ और होगा. उसका हाथ आगे बढ़ता हुआ अब रीत की सलवार में क़ैद उसकी चूत पे पहुँच चुका था और उसने देखा कि रीत की सलवार भी उसकी चूत के पानी से भीग चुकी थी. और चूत पर विकी का हाथ महसूस करते ही रीत एकदम से कंपकपा उठी थी और उसने अपने हाथ अपने चेहरे पर से हटाकर विकी के हाथ को पकड़ लिया जो कि उसकी चूत पे था. और अपने चेहरे पे मुस्कान लिए हुए विकी की तरफ देखकर अपना सिर ना में हिलाने लगी. विकी को भी लगा कि जल्द बाज़ी ठीक नही है. उसने अपना हाथ रीत की चूत पर से हटा दिया और रीत के दोनो हाथों का पकड़कर उसे फिरसे अपनी ओर खींच लिया. अब फिरसे उन्दोनो के होंठ मिल चुके थे और विकी जी भर के उन्हे चूस रहा था.
विकी को भी अपने होंठों पे गीलापन महसूस होने लगा था. उसने रीत के होन्ट छोड़े और उसने देखा कि रीत के होंठ के एक कोने से खून निकल रहा था. वो अपनी जीभ से उसके होंठ के कोने से निकल रहे खून को चाटने लगा और उसे चाट चाट कर सॉफ कर दिया. रीत विकी की इस हरकत पे मुस्कुरा रही थी. तभी थियेटर में लाइट'स ऑन हो गई और रीत झट से विकी से अलग हो गई. मूवी का इंटर्वल हो गया था. मगर अब रीत और विकी दोनो का मन मूवी देखने का नही कर रहा था. वो बाहर निकले और विकी की बाइक घर की तरफ चल पड़ी.
रीत अपने रूम में बेड के उपर उल्टी लेटी हुई थी. उसने एक ब्लॅक टी-शर्ट और पिंक पाजामा पहना हुया था. उसने हाथ में एक मिरर पकड़ा हुया था और अपना चेहरा उसमे देख रही थी. वो अपने होंठों को देख रही थी जिनका आज विकी ने रस निचोड़ डाला था. भले ही उसके होंठों का रस विकी ने चूस लिया था. लेकिन फिर भी उसके होठों की लाली कायम थी. और कम होने की वजह और बढ़ गई थी. रीत मन में बहुत खुश थी. क्योंकि उसे आज से पहला कभी इतना अच्छा एहसास नही हुआ था.
उसे विकी के उपर बहुत प्यार आ रहा था. जैसे कि हम कहते हैं कि जब एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को छोड़ देता है तो प्रेमिका उसपे और भी ज़्यादा मोहित हो जाती है. ऐसा ही कुछ रीत के साथ हो रहा था. भले ही विकी ने अभी उसे छोड़ा नही था. लेकिन जिस तरह से उसने रीत को चूसा था. उससे ही रीत के मन में वो एहसास जाग उठे थे जो उसने आज से पहले कभी महसूस नही किए थे. उसने अब मिरर को साइड पे रख दिया था और एक तकिया अपनी बाहों में भरकर आँखें बंद किए हुए विकी के उस चुंबन को याद कर रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
उधर विकी अपने दोस्त बॉब्बी और दिपु के साथ बैठा था.
दिपु-हां तो हिट्लर भाई कैसी रही मुलाक़ात बदल दी क्या छमिया की चाल.
बॉब्बी-अरे यार दिपु ये हिट्लर उस रीत की चल कैसे बदल देगा. कुछ समझ नही आया.
दिपु-अबे साले जब हिट्लर ने उसकी कुँवारी चूत में लंड डालकर उसे बेरेहमी से चोदा होगा तो दर्द के कारण उस से चला कहाँ जाएगा तो चल तो बदल ही जाएगी.
फिर तीनो हँसने लगे.
हिट्लर-अरे यार अभी कहाँ साली शरमाती बहुत है.
बॉब्बी-मतलब कुछ नही किया.
हिट्लर-अबे साले हिट्लर किसी लड़की के साथ थियेटर के अंधेरे में हो और वो भी रीत जैसी कुँवारी लोंड़िया के साथ और कुछ हो ना ऐसा कभी हो सकता है.
डिपु-अबे साले क्या किया बताएगा भी कुछ.
हिट्लर-साली के होंठ चूस चूस कर खून निकाल दिया.
दिपु-हाए रे क्या किस्मत पाई है तूने इतनी मस्त हसीना के होंठ. आआहाआ अगर मुझे चूसने को मिलते तो मेरा तो पॅंट में ही पानी निकल जाता.
बॉब्बी-हिट्लर यार उस से आगे भी कुछ किया या नही.
विकी-आगे कहाँ बढ़ने दिया साली ने. मैने तो साली की चूत पकड़ ली थी सलवार के उपर से ही पर वो साली नखरा करने लगी और ना नुकर करने लगी. मैने भी सोचा जल्दबाजी ठीक नही सो छोड़ दिया.
दिपु-सही किया यार ऐसी लड़की पहले पहले ज़रूर शरमाती हैं लेकिन फिर बाद में बहुत मज़े से चुदवाती हैं.
उधरजिम्मी ने कोमल को अपनी बातों में बहला फुसला लिया था. और अब वो उसे चोदने की तैयारी में था. उसने कोमल को कॉल की और उधर से कोमल की आवाज़ आई.
कोमल-हां जानू कैसे हो.
जिम्मी-बहुत बुरा हाल है डार्लिंग.
कोमल-अच्छा जी. तो...
जिम्मी-तो क्या जानू इलाज़ करो ना.
कोमल-मेरे पास कहाँ है इलाज़.
जिम्मी-डार्लिंग तुम्हारी टाँगों के बीच ही है मेरा इलाज़. और कल मुझे इलाज़ करवाना है तुमसे.
कोमल-मुझे कोई इलाज़ नही करना.
जिम्मी-क्यूँ जानू. इतना भी मत तडपाओ.
कोमल-तड़पने की बात नही जानू तुम अपने दोस्तो के सामने ही उस दिन शुरू हो गये थे लॉन में. और तो और तुमने मेरी पॅंट तक उतार दी थी उनके सामने. वो क्या सोचेंगे मेरे बारे में यार.
जिम्मी-अरे इतनी सी बात जानू. ओके कल हम दोनो अकेले जाएँगे ओके.
कोमल-ओके मगर जाओगे कहाँ.
जिम्मी-अरे यार हमारा बंगला है एक शहर से थोड़ा बाहर वहाँ पे चलेंगे.
इधर प्रीति और अमित के बीच सेक्स संबंध तो बन ही चुके थे. अब उन्हे बस अपनी शादी की फिकर थी. अमित को कोई दिक्कत नही थी. उसका परिवार अमीर था उसके घरवाले उसे कुछ नही कहते थे वो अपनी मर्ज़ी से जहाँ चाहे शादी कर सकता था. मुसीबत थी तो वो सिर्फ़ प्रीति को थी. अमित के लिए ये काम जितना आसान था प्रीति के लिए उतना ही मुश्क़िल. अब प्रीति की किसी ऐसे मौके की तलाश में थी जब वो अपने परिवार वालो को बता सके कि वो अमित से शादी करना चाहती है.
लेकिन ऐसा मौका उसे मिलना मुश्क़िल था. उसके माता पिता को उसकी और अमित की शादी के लिए मनाना इतना मुश्क़िल नही था मुश्क़िल था तो वो हिट्लर को मनाना. कीनकी प्रीति जानती थी कि अगर अमित और उसके रिश्ते के बारे में विकी को पता चला तो वो अमित के साथ मार पीट पर उतर आएगा और यही वो चाहती नही थी. और इसी उम्मीद पर दिन काट रही थी कि कुछ ऐसा हो जाए जिस से सब कुछ सही हो जाए.
जिम्मी और कोमल जिम्मी की गाड़ी में जिम्मी के बंगल की तरफ जा रहे थे. कोमल ने आज ब्लॅक टॉप और ब्लू टाइट जीन्स पहनी थी. उसका शरीर उनमे कसा हुआ था. और जब से जिम्मी ने आज उसे देखा था तब से ही उसका लंड खड़ा था.
वो बहुत खुश था क्यूंकी आज वो एक जबरदस्त माल को चोदने वाला था. वो दोनो बंगले में पहुँच चुके थे. और सीधे ड्रॉयिंग रूम में जाकर बैठ गये थे. जिम्मी ने कोमल को खींचा और वो उसकी गोद में आ गई और जिम्मी उसके होंठों को चूमने लगा. कोमल भी उसका साथ देने लगी.
जिम्मी के हाथ टॉप के उपर से ही कोमल के बड़े बड़े मम्मे दबाने लगे जिस के कारण कोमल के मूह से सिसकियाँ फूटने लगी. मगर वो सिसकियाँ उसके और जिम्मी के मूह के बीच ही दब कर रह गई क्यूंकी दोनो के होंठ जुड़े होने की वजह से 'उंह' जैसे आवाज़ें ही कोमल के मूह से निकल पा रही थी.
जिम्मी ने उसे थोड़ा दूर हटाया और उसका टॉप निकाल दिया और अपनी टी-शर्ट भी उतार कर फेंक दी. कोमल ने नीले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. जिम्मी ने ब्रो को उपर उठाया और उसके बड़े बड़े संतरे जैसे मम्मे को बाहर निकाल लिया और उन्हे चूसने लगा. काफ़ी देर वो उन्हे चूस्ता रहा और कोमल उसका सिर पकड़ कर अपने मम्मों पे दबाती रही.
फिर जिम्मी ने उसे दूर हटाया और अपना लंड उसे निकालने को कहा. कोमल ने मुस्कुराते हुए जिम्मी की पॅंट के बटन और ज़िप को खोला और जिम्मी का फन फनाता हुआ लंड बाहर निकाल लिया. वो पूरा काला था और पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा था. कोमल ने अपने होंठ उसपे टिका दिए और जिम्मी की तरफ देखा वो उसे ही देख रहा था.
जिम्मी ने एक आँख दबाते हुए उसे पूरा अंदर लेने के लिए कहा. और कोमल लंड को पूरा अपने होंठों में जकड़ने लगी. जिम्मी को अपना लंड उसे कसे होंठों में महसूस करके बहुत मज़ा आ रहा था. कोमल काफ़ी देर उसका लॉडा चुस्ती रही. फिर जिम्मी ने उसे उपर उठा लिया और उसकी जीन्स का बटन खोल दिया और झट से जीन्स नीचे कर दी.
नीचे एक ब्लू कलर की पैंटी ने कोमल की चूत को ढक रखा था. जिम्मी ने उसे भी नीचे सरका दिया. कोमल ने अपने हाथों से अपनी जीन्स और पैंटी अपनी टाँगों में से बाहर निकाल दी और अब उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नही था. जिम्मी ने भी अपनी पॅंट उतरी और कोमल को गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ लेजाने लगा.
और बेडरूम में उसे बेड पे लिटा दिया और खुद उसके उपर लेट गया. उसने अपना लंड कोमल की चूत पे सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा और लंड काफ़ी हद तक अंदर घुस गया.
जिम्मी-अरे जानू ये तो फटाक से अंदर चला गया. लगता है काफ़ी आवाजाही है इस रास्ते पे.
कोमल के पास कोई जवाब नही था. क्यूंकी जिम्मी की बात सच थी वो स्कूल टाइम में ही 3-4 लड़को से जमकर चुद चुकी थी.
जिम्मी धड़ा धड़ धक्के लगाने लगा था कोमल हल्का हल्का कराह रही थी. 5मिनट तक चूत चोदने के बाद जिम्मी के मन में आया क्यूँ ना साली की गान्ड मारी जाए.
और उसने कोमल को उठाया और घुटनो के बल बेड पे झुका दिया. उसना अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल दिया और धक्के मारने लगा. उसने अपनी एक उंगली गीली की और उसे कोमल की गान्ड के सुराख पे रख दिया और उसे वहीं मसल्ने लगा.
कोमल थोड़ी डर गई मगर वो अपनी चूत की चुदाई के मज़े में व्यस्त थी.
तभी अचानक जिम्मी ने अपना लंड निकाला और कोमल की गान्ड के छेद पे रखकर एक धक्का दिया और उसका थोड़ा सा लंड अंदर घुस गया. कोमल के मूह से एक जोरदार चीख निकली जो कि पूरे बंगले में सुनाई दी.
कोमल-जिम्मी ये क्या कर रहे हो प्लीज़ निकालो मुझे दर्द हो रहा है.
जिम्मी-अरे जानू आगे वाला छेद तो तुम्हारा पूरा खुला है उसमे मज़ा नही आता. मुझे तो आज तुम्हारी गान्ड ही मारनी है.
और वो हल्के हल्के धक्को के साथ लंड अंदर सरकाने लगा. गान्ड के छेद के किनारों पे थोड़ा खून भी दिखने लगा. मगर जिम्मी बिना परवाह के लंड अंदर बाहर करने ल्गा. और जोरदार धक्के लगाने लगा. कोमल का हाल बहाल हो गया और उसकी आँखों से आँसू निकल आए.
और उसकी दर्दनाक सिसकियाँ पूरे घर में गूंजने लगी. मगर जिम्मी धक्के लगाता रहा. कोमल की चूत पानी छोड़ने लगी और वो आगे बेड में अपना मूह गढ़ाए झड़ने लगी. फिर कुछ ही देर में जिम्मी ने भी अपना सारा पानी कोमल की गान्ड में भर दिया और लंड बाहर निकाल लिया और तब जाकर कोमल को थोड़ी राहत मिली. फिर जिम्मी ने कोमल को 2 बार और चोदा और फिर वापिस अपनी गाड़ी में उसे उसके घर के पास वाले बस स्टॉप पे उतार दिया.
विकी अपने रूम में बैठा था. रात के 10 बज रहे थे. उसने अपना मोबाइल उठाया और रीत को कॉल की.
रीत-हेलो विकी.
विकी-हाई जानू कैसी हो.
रीत-मैं ठीक हूँ तुम बताओ.
विकी-हमारा तो बुरा हाल है जानू.
रीत-अरे बुरा हाल है तो डॉक्टर के पास जाओ.
विकी-अरे यार डॉक्टर के पास हमारा इलाज़ कहाँ.
रीत-तो और किसके पास है.
विकी-एक लड़की के पास है.
रीत-अच्छा जी तो कोई और ढूंडली क्या.
विकी-हां यार है एक.
रीत-अरे अरे कॉन है वो मैं तुम्हे जान से मार दूँगी.
विकी-जानेमन तुम ही तो हो और 1 बार मेरे पास तो आओ फिर भले ही जान से मार देना.
रीत-नही नही तुम्हे जान से मारकर मुझे क्या मिलेगा.
विकी-तो क्या करना चाहती हो मेरे साथ.
रीत-मुझे कुछ नही करना है मुझे सिर्फ़ विकी चाहिए सिर्फ़ विकी कोई हिट्लर-विटलेर नही.
विकी-अरे जानू हिट्लर तो बन ना पड़ता है. अब भरे बेज़ार में तुम्हारे साथ कोई बत्तमीजी करे तो क्या मैं चुप चाप देखता रहूं.
रीत-मेरा ये मतलब नही था विकी. मेरा मतलब था कि तुम अपने घर का भी तो थोड़ा ख़याल करो. अपने माँ बाप का अपनी बेहन का.
विकी-तुम क्या समझती हो कि मुझे उनका फिकर नही है.
रीत-विकी फिकर कई तरफ से करना पड़ता है सिर्फ़ ये नही कि तुम्हारी बेहन को अगर कोई छेड़ता है तो उसे पीट दिया. विकी उसकी शादी की उमर हो रही है. और तुम अपनी फॅमिली इनकम तो जानते ही हो कितनी कम है.
विकी-बस बस अब छोड़ो ये सब बातें.
रीत ने भी सोचा कि अब आगे बात करना सही नही है.
रीत-ओके तो बताओ और क्या बात करनी है.
विकी-ह्म्म्म्म बात ये है कि. क्या कल हम घूमने चले.
रीत-अच्छा जी तो ये बात है. पर मैं मूवी देखने नही जाउन्गी किसी भी कीमत पर.
विकी-क्यूँ यार उस दिन इतनी मस्त तो मूवी थी.
रीत-वाह जी वाह तुम्हे पता भी है कि स्टोरी के हीरो-हेरोईएन कॉन थे.
विकी-हां हां मुझे पता है.
रीत-बताना ज़रा कॉन थे.
विकी-हीरो था हिट्लर विकी आंड हीरोइन थी नवरीत देओल(रीत).
रीत-ओह अच्छा जी. ये नवरीत कोन्सि हीरोयिन है जी. पहले कभी नही सुना इसके बारे में.
विकी-अरे यार क्या बताऊ बहुत ही मस्त आक्ट्रेस है. बहुत कमाल का फिगर है साली का.
रीत थोड़ा गुस्से से.
रीत- विकी ये साली क्या है.
विकी होश में आते हुए.
विकी-अरे अरे सॉरी जानू.
रीत-विकी तुम्हारी यही बातें मुझे अच्छी नही लगती.
विकी-मैने सॉरी बोल तो दिया यार.
रीत-हर बार ग़लती कर देते हो और फिर सॉरी बोल देते हो इस का क्या फ़ायदा. अपनी उस ग़लती से सीख लो ताकि फिर कभी ग़लती ना हो.
विकी-अब जाने भी दो बाबा तुम भी बस किसी टीचर की तरह लग जाती हो.
रीत हंसते हुए.
रीत-अच्छा तो अब मैं टीचर लगने लगी तुमको.
विकी-और क्या जब देखो लेक्चर देने लग जाती हो.
रीत-अगर मेरे लेक्चर को कभी ध्यान से सुना होता तो अब तक तुम गधे से इंसान बन जाते.
विकी-वाह अब मैं गधा लगता हूँ तुम्हे.
रीत-और क्या तुम गधे ही तो हो.
विकी-चलो ठीक है जो आप समझो. वैसे भी मेरा वो गधे जैसा ही है.
रीत-वो क्या?
विकी-समझ नही आई क्या जानू कि वो क्या होता है.
रीत बात को समझ कर चौंकते हुए.
रीत-तुम भी पूरे कुत्ते हो.
विकी-अरे यार कभी गधा बोलती हो कभी कुत्ता बोलती हो. वैसे कुत्ते का भी छोटा नही होता.
रीत-विकी मैं तुम्हे कच्चा चबा जाउन्गी.
विकी-अरे तुम आओ तो सही चबाने फिर देखते है कॉन चबाता है.
रीत-अच्छा जी ऐसी बात है.
विकी-हंजी ऐसी ही बात है.
रीत-वैसे मुझे हल्के में मत लेना मैं भी कम नही हूँ.
विकी-अरे जानू तुम तो वाकई कम नही हो. क्या हुस्न दिया है उपर वाले ने. अगर कोई ग़लती से तुम्हे नंगी देख ले तो मर भी सकता है.
रीत शरम से लाल हो गई.
रीत-तुम ना मुझसे मार खाओगे अब. ये तुम्हारी जीभ कुछ ज़्यादा ही चलने लगी है.
विकी कलाज में अपने दोस्त दिपु और बॉब्बी के साथ बैठा रीत की बातें कर रहा था. उसे आज रीत का बेसब्री से इंतेज़ार था. क्योंकि आज उसने सोच रखा था कि आज तो वो रीत की सील हर हाल में तोड़कर रहेगा.
उसने आज सुबह ही ड्रग्स ले ली थी. क्योंकि उसने सुन रखा था कि नशा करने से आदमी का लंड जल्दी जल्दी नही झड़ता और इसी लिए उसने सुबह ही अपने एक दोस्त से ड्रग्स ले ली थी आज वो रीत को बुरी तरह से चोदना चाहता था.
उधर रीत भी आज खूब तैयार होकर आई थी. उसने लाल रंग का छुरीदार सलवार कमीज़ पहना था जिसमे वो किसी दुल्हन से कम नही लग रही थी. उसके कपड़े उसके जिस्म पे पूरे टाइट थे और उसके जिस्म के साथ चिपके हुए थे.
जिसके कारण उसके मम्मे और चुतड़ों की शेप हर एक को मस्त कर रही थी. उसने अपनी स्कॉटी कलाज की पार्किंग में खड़ी की और कॅंटीन की तरफ चल पड़ी क्योंकि उसे पता था कि विकी अपने दोस्तो के साथ अक्सर वही पे होता था. दिपु ने जब रीत को अपनी तरफ आते देखा तो उसने विकी को कोहनी मारते हुए कहा.
दिपु-देख साले आज लौंडिया पूरी दुल्हन बन कर आई है.
बॉब्बी-हां यार विकी आज तो सुहागरात मना डाल.
विकी-तुम फिकर मत करो आज चाहे जितने भी नखरे दिखाए आज तो इसकी सील तोड़ कर रहूँगा.
दिपु-ये पकड़ हमारे फ्लॅट की चाबी. हमने वहाँ पे कॅमरा वगेरा लगा दिया है और हां शाम 5 वजे से पहले पहले काम निपटा लेना. फिर 6 पे मम्मी पापा आ जाते हैं.
विकी-ओके ओके मैं निपटा लूँगा. ओके मैं चलता हूँ.
विकी रीत की तरफ चल देता है.
विकी-जानेमन आज क्या मार डालने का इरादा है इतनी मस्त बनकर आई हो.
रीत-चुप करो तुम्हे बस यही सूझता रहता है.
विकी-ओके तो चलो चलते हैं.
रीत-पर जाना कहाँ है ये तो बताओ.
विकी-अरे कहीं तो जाएँगे ही. चलो अब.
वो और रीत बाइक की तरफ चल देते हैं.
जैसे ही वो बाइक पर बैठ कर निकलने लगते हैं तो जिम्मी अपनी बाइक लेकर वहाँ पहुँच जाता है. और रीत को विकी की बाइक पे बैठी देखकर सीटी बजाता है और बोलता है.
जिम्मी-बड़ी मस्त बन कर आई है आज तो बुलबुल.
विकी बाइक से उतरने लगता है तो रीत उसे रोक देती है और चलने के लिए बोलती है.
विकी को भी किसी लफडे से ज़्यादा रीत की चुदाई में इंटेरेस्ट होता है और वो चल देता है.
विकी बाइक को सीधा दिपु के फ्लॅट की तरफ ले जाता है और वहाँ पहुँचकर बाइक रोक देता है. रीत बाइक के रुकते ही पूछती है.
रीत-ये कहाँ पे ले आए मुझे विकी.
विकी-अरे तुम अंदर तो चलो.
वो दोनो घर के अंदर की तरफ चल देते है. अंदर जाकर विकी घर को अंदर से लॉक कर देता है. उसे ऐसा करते देख रीत सब कुछ समझ जाती है. वैसे उसे सब मालूम ही होता है कि विकी उसे क्यूँ घूमने लेजाना चाहता था. इसलिए वो सोचती है कि विकी ही उसका पहला प्यार है और वो उसे ना नही करेगी कुछ भी करने के लिए. मगर फिर भी यहाँ तक हो सकेगा वो उसे रोकेगी. वो विकी को कहती है.
रीत-ये क्या कर रहे हो विकी.
विकी आगे बढ़ता है और रीत को बाहों में भर लेता है उसके दोनो हाथ रीत की कमर पे होते हैं और वो उसकी आँखों में देखता हुआ कहता है.
विकी-रीत आज मैं तुम्हे जी भरके प्यार करना चाहता हूँ बोलो क्या तुम करने दोगि.
रीत का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है.
रीत-विकी प्लीज़ ऐसी बातें मत करो.
विकी उसकी गर्दन को चूमने लगता है और अपने हाथ उसकी कमर पे फिराने लगता है. रीत की चूत में करेंट दौड़ने लगता है.
विकी रीत को गोद में उठा लेता है और बेडरूम में ले जाता है. और वहाँ ले जाकर बेड पे उसे लेटा देता है और उसके होंठों पे अपने होंठ टिका कर एक जबरदस्त किस करता है और फिर उसे छोड़ कर सीधा खड़ा हो जाता है.
विकी-तुम यहीं बैठो जानू मैं कुछ खाने को लेकर आता हूँ फ्रीज़ में से.
विकी बेडरूम से बाहर निकलता है और सीधा बाथरूम में जाकर ड्रग्स ले लेता है. फिर वो फ्रीज़ में से कुछ खाने की चीज़े निकाल कर रीत को देता है और दोनो खाने लगते है.
खाने ख़तम होते ही विकी रीत के उपर चढ़ जाता है और उसे बेड पे लिटा कर खुद उसके उपर आ जाता है और रीत के होंठ चूसने लगता है. रीत नीचे कसमसाने लगती है. विकी के दोनो हाथ रीत की कमीज़ में क़ैद मम्मो पे पहुँच जाते है और वो उन्हे मसल्ने लगता है. वो एक हाथ नीचे ले जाता है और सीधा रीत की चूत पे फिराने लगता है. रीत अपनी टाँगों को आपस में कस लेती है. विकी हाथ को थोड़ा उपर करता है और झटके से रीत का नाडा खोल देता है.
(विकी ने हाथ उपर करते हुए रीत की सलवार का नाडा झटके के साथ खोल दिया)
नाडा खुलते ही रीत एकदम से चौंकी और उसने विकी को अपने उपर से एक साइड को धकेल दिया और बेड से उठ कर खड़ी हो गई और अपना नाडा बाँधने लगी. अब विकी बेड पे बैठा था और रीत उसकी तरफ पीठ किए खड़ी थी और अपनी सलवार का नाडा बाँध रही थी. विकी ने अपनी दोनो टाँगें बेड से नीचे लटका दी और रीत की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी और खींच लिया रीत अब अपना नाडा बाँध चुकी थी अब विकी के सामने रीत की सलवार में क़ैद उसके गोल गोल कसे हुए चूतड़ थे जो कि कमर के नीचे से पीछे की तरफ कुछ ज़्यादा ही निकले हुए थे और रीत के शरीर का यही वो पार्ट था जो कि चलने से जब थिरकता था तो अच्छों अच्छों के लंड की पिचकारियाँ छूट जाती थी.
विकी ने अपना चेहरा रीत के चुतड़ों के पास किया और उन्हे हल्के हल्के चूसने लगा. अपने चुतड़ों पे विकी के मुख का स्पर्श पाते ही रीत फिर से कामुक होने लगी. वो अपने हाथों से विकी के हाथों को खोलने का प्रयास कर रही थी जिन्होने उसकी कमर को जाकड़ रखा था मगर विकी के मर्दाना हाथो के आगे उसके नरम हाथों की पेश नही चल रही थी. विकी ने उसकी कमर को जाकड़ रखा था और अपना चेहरा रीत के चुतड़ों में घुसा रखा था और उसके चुतड़ों का बाहर को निकला हुआ भाग अपने होंठों में दबा दबा कर चूस रहा था.
रीत की आँखें बंद होने लगी थी और उसके हाथ भी अब विकी के हाथों को हटाने की बजाए उसके हाथों के उपर थम से गये थे. रीत की चूत उसके खुद के प्रेम रस से भीगने लगी थी. वो इतनी ज़्यादा मदहोश हो चुकी थी कि उसके दिमाग़ ने काम तक करना बंद कर दिया था. ऐसा एहसास उसे आज से पहले कभी नही हुआ था विकी ही एक मात्र एसा मर्द था जिसे उसके रस भरे जिस्म को चखने का मौका मिल रहा था.
विकी तो अब पूरी तरह से पागल हो चुका था.
उसके दोनो हाथ अब रीत की कमर की उपर से हट कर पीछे रीत के गोल गोल चुतड़ों पे पहुँच चुके थे और बेदर्दी से उन्हे मसल्ने लगे थे. विकी के हाथ ऐसे रीत के चूतड़ मसल रहे थे जैसे कोई आता गूँध रहा हो. रीत की दोनो टाँगें काँपने लगी थी अब उसके लिए ये सब सह पाना मुश्किल हो रहा था वो अपने आप थोड़ा आगे को झुक गई थी जिसकी वजह से विकी के सामने उसके चूतड़ एक मटके की शेप में आ गये थे.
रीत की टाँगें काँप रही थी और उसे लग रहा था जैसे उसके अंदर से कुछ लावा की तरह उठ रहा है और उसकी चूत की तरफ बढ़ रहा है. जैसे ही वो लावा रीत की चूत के रास्ते बाहर आने लगा तो उसे अपनी टाँगों पे खड़े रहने मुश्क़िल हो गया और वो सिसकिया भरती हुई पीछे हट कर विकी की गोद में बैठ गई और झड़ने लगी. पूरी तरह से झड़ने के बाद जब उसने थोड़ी राहत महसूस की तो उसे अपने चुतड़ों पे कुछ चुभता महसूस हुए. जब उसके दिमाग़ में आया कि वो विकी का लंड है तो उसका चेहरा फिर से शर्म से लाल हो गेया. और वो फटाक से खड़ी हो गई.
विकी ने फिर से उसे पहले की तरह जाकड़ लिया और फिरसे उसके चूतड़ चूसने लगा. रीत को अब बहुत शरम आ रही थी और वो बोली.
रीत-विकी प्लीज़ छोड़ दो ना.
विकी-उम्म्म जानू चुप चाप खड़ी रहो आगे तो असली मज़ा है.
रीत ने सोचा कि विकी को समझाने का कोई फ़ायदा नही है.
विकी ने अपने हाथ आगे किए और रीत की सलवार का नाडा खोल दिया और नाडा खुलते ही सलवार थोड़ी ढीली होकर नीचे सरक गई और रीत ने अपने हाथ नीचे लेज़ाकर उसे पकड़ने की कोशिश की मगर उसके हाथों के वहाँ पहुँचने से पहले ही विकी ने सलवार खींच कर रीत के पैरों में कर दी और फिर उसके कमीज़ का पल्ला उठाया तो उसके सामने वाइट पैंटी में क़ैद रीत के सुडौल चूतड़ उसके सामने आ गये.
विकी ने पैंटी के किनारों में हाथ डाला और उसे भी सरका कर सलवार के पास पहुँचा दिया. रीत अब नीचे से बिल्कुल नग्न हो चुकी थी. उसके नीचे का नज़ारा देख कर विकी मदहोश हो गया और जब रीत ने सोचा कि नीचे से वो बिल्कुल नंगी एक मर्द जो कि उसका प्रेमी है उसके सामने खड़ी है तो वो एक बार फिर से शरम से भर गई.
विकी ने अब अपना चेहरा फिर से उसके चुतड़ों में घुसा दिया और उसके गोरे और मुलायम चुतड़ों को अपने दाँतों से काटने लगा. रीत के मूह से दर्द की और आनद की मिली जुली सिसकियाँ निकलने लगी. विकी एकदम से खड़ा हुआ और रीत को अपनी तरफ घुमा लिया और उसके होंठ चूसने लगा और अपने हाथों से उसके चूतड़ मसल्ने लगा.
कुछ देर चूतड़ मसल्ने के बाद उसने रीत के कमीज़ को दोनो तरफ से पकड़ा और झटके के साथ बाहर निकाल दिए. अब रीत के शरीर पे केवल ब्लॅक ब्रा थी जिसमे उसके गोरे और गोल गोल मम्मे क़ैद थे जिन्हे आज तक किसी मर्द ने छुआ तो क्या देखा तक नही था. विकी ने हाथ पीछे किया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और उसकी ब्रा निकाल दी अब रीत बिल्कुल नंगी अपने प्रेमी के सामने खड़ी थी. विकी इस हुस्न की मालिका को पीछे हटकर ध्यान से देखने लगा.
वाह क्या नज़ारा था. रीत ने क्लिप लगाकर अपने बालों को बाँध रखा था. उसके नीचे उसका चेहरा जो कि शरम से लाल था. नीचे उसके गोरे और गुलाबी निपल्स वाले मम्मे जो कि पूरे टाइट थे नीचे कमर के पास से दोनो तरफ को निकले हुए उसके नितंब जो कि पीछे की तरफ फैले हुए थे. उसके नीचे रीत की गुलाबी चूत जिसपे फिलहाल रीत ने दोनो हाथ रखे हुए थे.
विकी एक टक रीत को देख रहा था. विकी को अपनी तरफ ऐसे देखता पाकर रीत बोली.
रीत-ऐसे क्या आँखें फाड़ फाड़ कर देख रहे हो.
विकी-देख रहा हूँ कि भगवान ने तुम्हे बहुत फ़ुर्सत में बनाया होगा. तुम्हारे हर अंग का अपना ही एक अलग सा नज़ारा है. हर अंग एक दूसरे से बढ़कर है.
रीत-बस बस अब ज़्यादा तारीफ मत करो और चलो यहाँ से.
विकी उसकी तरफ बढ़ता है और बोलता है.
विकी-डार्लिंग इतनी जल्दी अभी तो बहुत कुछ होना बाकी है.
विकी ने अपनी टी-शर्ट निकल दी और रीत विकी की मर्दाना मज़बूत छाती को देखने लगी. वो भाग कर विकी के गले लग गई और विकी की छाती में अपना चेहरा छुपा लिया.
विकी धीरे धीरे उसके चुतड़ों पे हाथ फिराने लगा. फिर उसने रीत को पीछे किया और अपने हाथों में उसके दोनो मम्मे थाम लिए और उन्हे मसल्ने लगा. रीत अपने हाथ से विकी के हाथों को अपनी छातियों पर से हटाने लगी मगर वो उन्हे नही हटा पाई.
फिर विकी ने उसे कस कर अपनी बाहों में भींच लिया. रीत के मम्मे विकी की छाती में चुभने लगे. विकी ने अपने एक हाथ से अपनी पॅंट की बेल्ट और बटन खोल दिया और पॅंट नीचे सरका दी और अपने टाँगों में से निकाल दी. उसके लंड ने अंडरवेर का तंबू बना रखा था. फिर उसने अंडरवेर नीचे किया और रीत का हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रख दिया. रीत विकी के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर एकदम सकपका गई और उसने अपना हाथ लंड पे से हटा लिया.
विकी-पाकड़ो ना रीत.
रीत-मुझे नही पकड़ना.
विकी ने भी ज़्यादा टाइम खराब करना ठीक नही समझा और रीत को गोद में उठा लिया और बेड पे लिटा दिया. वो उसकी दोनो टाँगों के बीच आ गया और रीत की दोनो टाँगें पकड़ कर खोल दी और उसकी टाँगें खुलते ही रीत की गुलाबी चूत जिसके उपर छोटे छोटे बाल थे विकी के सामने आ गई. रीत की चूत बिल्कुल टाइट थी और रस टपका रही थी. एक कच्ची कली आज खिल कर गुलाब बन ने के लिए तैयार थी. विकी ने अपना लंड रीत की चूत के उपर रखा और उसके उपर फिराने लगा.
चूत पे लंड लगते ही रीत ने अपनी टाँगों को बंद करना चाहा मगर विकी उसकी टाँगों के बीच था इसलिए वो नही कर पाई. उसने अपनी चूत की तरफ देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गई क्योंकि उसकी चूत पे जो लंड टिका हुआ था वो बहुत बड़ा और मोटा था उसका साइज़ कम से कम 8'' लंबा और 3'' मोटा था. इतना बड़ा लंड उसकी छोटी सी चूत में जाएगा यही सोच कर रीत बुरी तरह से डर गई और उसका पूरा शरीर काँपने लगा. विकी को जब रीत का कंपन महसूस हुआ तो उसने पूछा.
विकी-क्या हुआ रीत.
रीत-विकी ये इतना बड़ा अंदर नही जाएगा.
विकी हँसने लगा और बोला.
विकी-तुम देखती जाओ रीत की ये साँप कैसे अंदर घुसने की जगह बनाएगा.
फिर विकी ने एक हल्का सा धक्का दिया और उसके लंड का थोड़ा सा सुपाडा अंदर घुस गया और रीत के मूह से एक दर्द भरी सिसकी निकली. विकी ने एक और धक्का दिया और थोडा सा लंड और अंदर चला गया. अभी भी आधे से ज़्यादा लंड बाहर था मगर रीत की तो जान निकली जा रही थी. विकी ने एक और ज़ोर दार झटका दिया और आधे से ज़्यादा लंड अंदर घुस गया.
रीत की चूत में से एक खून की धार निकली और उसके चुतड़ों की दरार के बीचो बीच नीचे को जाने लगी. रीत की आँखों से आँसू बहने लगे और वो ज़ोर ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी. विकी आगे को झुका और रीत के होंठ अपने होंठों में क़ैद करके उसकी दर्द भरी सिसकियाँ रोक दी. फिर विकी ने आख़िरी जोरदार प्रहार किया और उसका लंड जड़ तक अंदर घुस गया और रीत उसके नीचे तड़पने लगी और वो बुरी तरह से मचलने लगी.
अब विकी ने थोड़ा लंड पीछे किया तो रीत को थोड़ी राहत महसूस हुई. फिर विकी ने धीरे से लंड अंदर सरका दिया और अंदर बाहर करने लगा. कुछ ही मिनिट्स में उसकी स्पीड बढ़ गई और वो तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा. रीत को भी अब मज़ा आने लगा और उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया. अब विकी पूरा जंगली बन गया था और वो बहुत स्पीड से धक्के मार रहा था.
पूरा कमरा रीत की चीखों और सिसकियों से गूँज़ रहा था. विकी ने रीत की दोनो टाँगें पकड़ी और उन्हे और उपर उठा दिया अब रीत के दोनो घुटने उसके चेहरे के दोनो तरफ थे. एक तरह से विकी ने रीत को फोल्ड कर दिया था. उसकी चूत पूरी खुलकर विकी के सामने आ गई थी. विकी ने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे. वो पूरा उपर उठता और फिर जोरदार धक्का रीत की चूत में मार रहा था उसकी स्पीड बहुत बढ़ चुकी थी.
रीत को लग रहा था कि जैसे अभी उसकी जान निकल जाएगी. मगर विकी बिना रीत की हालत का ख्याल किए बिना जनवरो की तरह उसे चोद रहा था. रीत का चेहरा उसके आँसुओं से भीग चुका था. उसको इसी तरह धक्के मारते हुए पूरे 30मिनट बीत चुके थे. उसने देखा रीत की सिसकियाँ और चीखें बंद हो चुकी थी. जब उसने रीत की तरफ देखा तो वो आँखें बंद किए पड़ी थी.
वो बेहोश हो चुकी थी. विकी ने टेबल पे से पानी का गिलास उठाया और उसके मूह पे उडेल दिया और कुछ ही देर में रीत को होश आ गया. होश आते ही विकी फिर से उसी तरह बेदर्दी से रीत को चोदने लगा. फिर से रीत की सिसकियाँ कमरे में गूंज़्ने लगी. कोई 10मिनट चोदने के बाद विकी के लंड से प्रेम रस की बौछार निकली और सीधी रीत की चूत में समा गई. साथ ही साथ रीत की चूत ने भी अपना प्रेम रस बाहर उडेल दिया. रीत ने कस कर विकी को अपने साथ भींच लिया और उनके होंठ आपस में जुड़ गये.
रीत और विकी बिल्कुल नग्न अवस्था में पड़े थे और वो एक दूसरे से चिपके हुए थे और उनके होंठ आपस में उलझे हुए थे. ना तो रीत को मान विकी के होंठो को छोड़ने का हो रहा था और ना ही विकी रीत के होंठ आज़ाद करना चाहता था. वो दोनो 10मिनट तक एकदुसरे को प्यार से चूमते रहे. फिर रीत ने अपने होंठ अलग किए और विकी की आँखों में देखने लगी और बोली.
रीत-विकी सच सच बताओ तुमने आज कोई नशा किया था क्या.
विकी-अरे ऐसे क्यूँ पूछ रही हो जानेमन.
रीत-तुमने मेरा बुरा हाल कर दिया था विकी यहाँ तक कि मुझे बेहोश कर दिया था और तुम्हारी ये लाल आँखें बता रही हैं कि तुमने कोई नशा किया था.
विकी-अरे छोड़ो ना ये सब बातें तुम ये बताओ कि मेरी डार्लिंग को मज़ा आया या नही.
रीत शरमाते हुए.
रीत-ह्म्म्म्मम बहुत मज़ा आया. और तुम्हे पता है विकी आज मैं एक बात से बहुत खुश हूँ.
विकी-कौन सी.
रीत-विकी मैं इस बात से खुश हूँ कि जिसे मैने अपना ये शरीर पहली दफ़ा सौंपा वो कोई और नही बल्कि वो है जिसे मैं अपनी जान से भी ज़्यादा चाहती हूँ.
विकी को कुछ अज़ीब सा लगा. वो बिना कुछ बोले रीत की आँखों में देखने लगा और उन्ही में खो गया. भले ही अभी तक विकी के दिल में रीत के लिए कोई प्यार व्यार नही था मगर फिर भी पता नही क्यूँ आज उसे रीत बहुत प्यारी लग रही थी और उसने रीत को कस कर भींच रखा था. वो दोनो काफ़ी देर तक ऐसे ही पड़े रहे.
फिर रीत ने विकी की छाती में मुक्का मारते हुए कहा.
रीत-विकी चलो अब घर भी जाना है मुझे.
विकी को भी लगा कि अब टाइम काफ़ी हो गया है और उन्हे चलना चाहिए. रीत उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी. उसे थोड़ी चलने में मुश्क़िल हो रही थी और वो टाँगों को थोड़ा चौड़ा कर के चल रही थी. विकी रीत को ऐसे चलते देख मुस्कुराने लगा और उसे अपने दोस्त की कही हुई बात याद आ गई कि 'ऐसी चुदाई करना कि रीत की चाल बदल जाए' फिर उसने चादर पे देखा तो उसपे खून के निशान थे जो कि रीत की चूत के फटने पे निकला था. विकी ने वो चादर उठाई और उसे धोने के लिए डाल दिया और दिपु को फोन कर दिया कि चादर को अपने मम्मी से बचा कर धो देना.
रीत बाथरूम से बाहर निकली तो उसने अपने सारे कपड़े पहन लिए थे.
विकी ने जब उसे देखा तो उसका मन फिर से उसे चोदने को होने लगा मगर अब ये मुमकिन नही था क्यूंकी उन्हे जल्दी जाना था. उसने आगे बढ़कर रीत को एकबार और जबरदस्त किस किया और फिर खुद कपड़े पहन लिए और वो घर की तरफ निकल पड़े.
उधर आज प्रीति को अमित से पता चल चुका था कि उसके भाई का किसी रीत नाम की लड़की के साथ चक्कर है. उसने रीत के कॅरक्टर के बारे में कॉलेज में पता किया तो उसे ये जान कर बहुत खुशी हुई कि रीत बहुत ही अच्छी और समझदार लड़की है. अब उसे कुछ उम्मीद दिखने लगी थी की शायद रीत विकी को बदल दे. मगर ये सब अभी वक़्त की मुट्ठी में क़ैद था. आने वाले वक़्त में क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नही जा सकता था. लेकिन एक उम्मीद ज़रुस बँध गई थी जो कि कुछ अच्छा होने का संकेत दे रही थी.
कोमल जिम्मी से कई दफ़ा चुदवा चुकी थी और अब जिम्मी ने उसे अपने पालतू कुत्तों के सामने डालने का फ़ैसला कर लिया था. और इसी सिलसिले में उसने कोमल को कल अपने फार्म हाउस पे बुलाया था और अपने दोनो दोस्तो को भी वहाँ पे आने को बोला था. और उन तीनो ने मिलकर कल कोमल का गंगबांग का प्लान किया था.
वैसे कोमल को इस से कोई प्रेशानि नही थी कि उसे कॉन कॉन चोद रहा है वो तो बस चुदाई की शौकीन थी. उसे चुदाई का चरका स्कूल में ही लग चुका था जब उसी की क्लास के एक लड़के ने पहले उसे प्यार में डाला और फिर खूब चोदा था और फिर अपने 3 दोस्तो से भी चुदवाया था. एकसाथ इतने लंडों से चुदने के कारण उसकी भूख कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई थी. कई दफ़ा तो वो स्कूल में लड़को के साथ पकड़ी भी जा चुकी थी.
लेकिन अब कल जो उसके साथ होने वाला था उसका उसे अंदाज़ा तक नही था.
कोमल जिम्मी के फार्महाउस में पहुँच चुकी थी. वो सीधा अंदर चली गई और ड्रॉयिंग रूम में पहुँच कर उसने देखा कि जिम्मी टीवी देख रहा था. वो उसके पास गई और उसकी गोद में बैठ गई और जिम्मी ने भी बाहों में भर लिया और अपने होंठ उसके होंठों पे टिका दिए. काफ़ी देर तक वो एक दूसरे के होंठ चूस्ते रहे फिर जिम्मी ने उसकी टी-शर्ट निकाल दी और फिर उसके नीचे ब्लू ब्रा भी निकाल दी अब उसके बड़े बड़े मम्मे जिम्मी के सामने झूलने लगे.
जिम्मी ने बारी बारी दोनो को जी भर कर चूसा और फिर उसने कोमल को खड़ी किया और उसकी जीन्स खोल दी और नीचे ब्लू पैंटी में क़ैद कोमल की चूत पानी छोड़ रही थी. जिम्मी उसकी चूत को मसल्ने लगा और फिर उसने कोमल की पैंटी भी निकाल दी अब कोमल बिल्कुल नंगी हो चुकी थी. जिम्मी ने भी अपने कपड़े निकाल दिए और कोमल को सोफे के उपर झुकने का इशारा किया.
कोमल सोफे की पीठ के उपर हाथ रख कर झुक गई और जिम्मी ने अपना लंड पीछे से कोमल की चूत में डाल दिया. और तेज़ तेज़ धक्के धक्के लगाने लगा. उन्हे चुदाई करते करते अभी 5मिनट ही हुए थे कि ड्रॉयिंग रूम के दरवाज़े पर बहादुर और जीतू खड़े कोमल को दिखाई दिए. कोमल झुकी हुई थी और जिम्मी उसे चोद रहा था और वो दोनो बिल्कुल नंगे अपने लंड हाथ में लिए कोमल को घूर रहे थे. कोमल एकदम से खड़ी हुई और अपने कपड़े उठती हुई बोली.
कोमल-ये यहाँ क्या कर रहे हैं जिम्मी.
जिम्मी-अरे जानू आओ ना इन्हे देखने दो.
कोमल-जिम्मी मैं ऐसी लड़की नही हूँ.
जिम्मी ने एक जोरदार थप्पड़ उसकी गाल पे जड़ दिया और बोला.
जिम्मी-साली सती सावित्री बनती है हमने तेरा पूरा रेकॉर्ड चेक किया है साली कितने ही लड़के तो तुझे तेरे स्कूल में चोद चुके हैं. चुप चाप हमे खुश कर दे वरना ऐसा हाल करेंगे की याद रखेगी.
कोमल की आँखों से आँसू छलकने लगे मगर अब इन आँसुओं का असर किसी पर होने वाला नही था. वो तीनो कोमल की तरफ बढ़े और उसके हाथ से उसके कपड़े छीन कर फेंक दिए अब कोमल के पास कोई रास्ता नही था उसने को-ओपरेट करना ही सही समझा.
जीतू उसके पीछे गया और उसे पीछे से बाहों में भर लिया और पीछे से ही अपना लंड कोमल की चूत में पेल दिया. कोमल आगे को झुक गई और उसने बहादुर का लंड मूह में ले लिया और चूसने लगी और जिम्मी का लंड हाथ से पकड़कर सहलाने लगी.
फिर उसने जिम्मी का लंड मूह में ले लिया और बहादुर का हाथ से सहलाने लगी. पीछे से जीतू धड़ा धड़ धक्के लगाता रहा फिर उन्होने पोज़िशन चेंज की और बहादुर पीछे जाकर कोमल की चूत चोदने लगा और जीतू और जिम्मी एक साथ अपने लंड उसके मूह में घुसाने लगे. कोमल अब कभी जिम्मी का लंड चुस्ती तो कभी जीतू का.
फिर जिम्मी ने पीछे से जाकर अपना लंड कोमल की गान्ड में डाल दिया और उसकी गान्ड मारने लगा. कोमल को अब दर्द होने लगा मगर उस से कहीं ज़्यादा उसे मज़ा आ रहा था. जिम्मी का मूसल लंड जड़ तक उसकी गान्ड में उतर रहा था. पूरा कमरा उन चारो की आवाज़ों से गूँज रहा था. फिर उन्होने कोमल को वहाँ पे पड़े एक मेज़ पे लिटाया और जीतू उसकी टाँगों के बीच पहुँच गया और उसकी टाँगें हवा में उठा दी और अपना लंड उसकी गान्ड में डाल दिया.
बहादुर उसके पेट पर बैठ गया और अपना लंड कोमल के दोनो मम्मों के बीच फसा दिया और कोमल अपने मम्मे उसके लंड पर कसने लगी और बहादुर उसके मम्मे चोदने लगा. जिम्मी अब सोफे पर बैठा अपनी महबूबा को चुदते हुए देखने लगा. फिर बहादुर उसके पेट पर से उतरा और जीतू की जगह पहुँच गया और कोमल की गान्ड मारने लगा.
कोमल इस बीच 2 बार झड चुकी थी और उसे लग रहा था की वो एक बार और झड़ने वाली है और हुआ भी ऐसा ही उसकी चूत एक बार फिर से पानी छोड़ने लगी. बहादुर के धक्के भी अब तेज़ होने लगे और वो उसकी गान्ड में ही झड गया और फिर जीतू ने अपना लंड कोमल की चूत में पेल दिया और कुछ ही मिनिट में वो उसकी चूत में ही ढेर हो गया. वो दोनो जाकर सोफे पर बैठ गये और फिर जिम्मी उठा और कोमल को अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया.
कमरा अंदर से बंद किया और कोमल को बेड पे लिटा कर उसके उपर सवार हो गया और उसे घोड़ी बनाकर कोमल की गान्ड चोदने लगा काफ़ी देर वो उसे चोदता रहा और जब उसे लगा कि वो झड़ने वाला है तो उसने अपना लंड निकाला और उसकी चूत में डाल दिया. उसने अपना सारा पानी कोमल की चूत में भर दिया और कोमल भी चौथी दफ़ा झड़ने लगी. फिर वो दोनो बाहर निकले तो बहादुर और जीतू अपने कपड़े पहन चुके थे. कोमल ने बिना उन से नज़र मिलाए कपड़े पहने और जल्दी से वहाँ से निकल गई.