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मामा जी को समझ आ चुकी थी कि मुझे गांड का छेद चटवाने में मज़ा आ रही है. तब मामा ने अपने दोनों हाथ से मेरे दोनों चूतड़ कस कर पकड़ कर फैला दिए और मेरी गांड के छेद को जीभ से सहलाने लगे.
मैं आँख बंद कर के ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी और सोचने लगी अगर गांड चटवाने में गांड के अंदर इतनी गुदगुदी हो रही है तो गांड मरवाने में कितना मज़ा आएगा. वैसे भी मैंने कल रात मामा से वादा किया था कि आज रात मामा जी को गांड मारने दूँगी, गांड के अंदर की गुदगुदी से मेरी चूत से गर्म रस निकालने लगी थी, शायद मैं झर गयी थी, खड़े होने की वजह से सारा रस मेरी जाँघों पे बह गया था और जाँघ गीली हो गयी थी.
मामा जी भी समझ गये कि एक बार मेरा रस निकल चुका है इसलिए चुदाई कर देनी चाहिए.
मामा जी खड़े हो गये और अपने लंड पे ढेर सारा थूक लगाया, मेरी गांड और चूत पे भी ढेर सारा थूक लगा दिया. मेरे चूतड़ थूक से पूरे गीले हो गए थे. मामा जी ने अपना गीला लंड मेरी चूत पे सटा दिया. मैं स्लैब की ओर झुकी हुई थी किचन में, अचानक से मामा जी ने धक्का मारा, आधा लंड मेरी चूत में घुस गया. मुझे दर्द होने लगा क्योंकि मेरी चूत अभी भी बहुत कसी हुई थी, मामा आधा लंड ही अंदर बाहर करने लगे.
फिर अचानक से एक और जोरदार धक्का मार दिया तो मामा जी का पूरा का लण्ड मेरी चूत को चीरते हुए मेरी चूत में समा गया, मैं दर्द से कराहने लगी. मामा ने लंड को चूत में घुसा छोड़ दिया और मेरी दोनों चूचियों के निप्पल को पीछे से सहलाने लगे, मेरी चुची में एक तरंग सी दौड़ने लगी जिससे मेरी चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा.
मामा अब धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगे, मुझे मज़ा आने लगा.
कुछ ही देर में मामा ने मेरी चुदाई की रफ़्तार तेज़ कर दी, मामा जी की जाँघें ज़ोर ज़ोर से मेरे चूतड़ों पर टकराने लगी, मेरे चूतड़ गीले होने के वजह से किचन में ज़ोर ज़ोर की पच पच की आवाज़ गूंजने लगी, मेरी भी उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज़ किचन में गूंजने लगी.
थोड़ी देर पीछे से चुदाई करने के बाद मामा ने मुझे अपनी ओर चेहरा करके स्लैब पर बैठा दिया और मेरी दोनों जाँघें फैला कर फिर से चूत चाटने लगे, थोड़ी देर चूत चाटने के बाद मामा ने सामने से मेरी चूत में लंड घुसा दिया और खड़े खड़े मेरी चुदाई करने लगे. स्लैब पे बैठ कर मैंने भी मामा को अपने दोनों पैर से लॉक कर लिया और दोनों हाथ से मामा के गले को पकड़ लिया.
चूंकि मामा खड़े खड़े चुदाई कर रहे थे इसलिए मामा अपने दोनों हाथ से मेरी कमर लॉक करके ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे.
10 मिनट तक चुदाई करने के बाद मामा ने रफ़्तार बढ़ा दी, मैं समझ गयी कि मामा का रस निकलने वाला है, इस चुदाई के दौरान मेरा तो दो बार रस निकल चुका था इसलिए मैं भी चाहती थी कि मामा जी जल्दी झड़ जायें क्योंकि मेरी चूत में दर्द सा होने लगा था. रफ़्तार बढ़ने के साथ ही मैंने अपने बदन को और कड़ा कर लिया, मामा को और ज़ोर से लॉक कर लिया, इससे मेरी चूत और कस गई, मामा जी का लंड मेरी चूत के अंदर कस कर रगड़ खाने लगा.
कुछ ही देर में मामा के लंड ने अपना सारा रस मेरी चूत में उड़ेल दिया, मामा जी पसीना पसीना हो गये थे, थक कर खड़े खड़े मेरे गले से लिपट गये, मैं स्लैब पर ही बैठी रही, मेरे होंठ मामा जी के कान के पास थे. मैं अपने दाँतों से मामा जी के कान को काटने लगी, मामा भी मुझे गले पे चूमने लगे.
मैं धीरे से मामा के कान बोली- आपकी झांट के बाल बड़े बड़े हो गये हैं साफ कर लीजिएगा. आज मुझे आपका पूरा लंड जड़ तक चाटना है.
मामा जी भी मेरी कान में बोले- तुम भी आज शाम से रात की चुदाई तक सू सू रोक कर रखना.
मैंने पूछा- क्यूँ?
तो मामा बोले- कुछ अलग तरह से चुदाई करनी है.
मैं तो मामा जी की चुदाई की दीवानी हो गयी थी इसलिए हर बात मानने को मैं तैयार थी, मैं बोली- ठीक है रोक कर रखूँगी.
फिर हम दोनों अलग हुए, मामा जी फ्रेश होने बाथरूम चले गये, मैं पूरे कपड़े पहन कर किचन में चाय नाश्ता बनाने लगी.
यहाँ तक की सेक्स स्टोरीज आपको कैसी लगी
मैं आँख बंद कर के ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी और सोचने लगी अगर गांड चटवाने में गांड के अंदर इतनी गुदगुदी हो रही है तो गांड मरवाने में कितना मज़ा आएगा. वैसे भी मैंने कल रात मामा से वादा किया था कि आज रात मामा जी को गांड मारने दूँगी, गांड के अंदर की गुदगुदी से मेरी चूत से गर्म रस निकालने लगी थी, शायद मैं झर गयी थी, खड़े होने की वजह से सारा रस मेरी जाँघों पे बह गया था और जाँघ गीली हो गयी थी.
मामा जी भी समझ गये कि एक बार मेरा रस निकल चुका है इसलिए चुदाई कर देनी चाहिए.
मामा जी खड़े हो गये और अपने लंड पे ढेर सारा थूक लगाया, मेरी गांड और चूत पे भी ढेर सारा थूक लगा दिया. मेरे चूतड़ थूक से पूरे गीले हो गए थे. मामा जी ने अपना गीला लंड मेरी चूत पे सटा दिया. मैं स्लैब की ओर झुकी हुई थी किचन में, अचानक से मामा जी ने धक्का मारा, आधा लंड मेरी चूत में घुस गया. मुझे दर्द होने लगा क्योंकि मेरी चूत अभी भी बहुत कसी हुई थी, मामा आधा लंड ही अंदर बाहर करने लगे.
फिर अचानक से एक और जोरदार धक्का मार दिया तो मामा जी का पूरा का लण्ड मेरी चूत को चीरते हुए मेरी चूत में समा गया, मैं दर्द से कराहने लगी. मामा ने लंड को चूत में घुसा छोड़ दिया और मेरी दोनों चूचियों के निप्पल को पीछे से सहलाने लगे, मेरी चुची में एक तरंग सी दौड़ने लगी जिससे मेरी चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा.
मामा अब धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगे, मुझे मज़ा आने लगा.
कुछ ही देर में मामा ने मेरी चुदाई की रफ़्तार तेज़ कर दी, मामा जी की जाँघें ज़ोर ज़ोर से मेरे चूतड़ों पर टकराने लगी, मेरे चूतड़ गीले होने के वजह से किचन में ज़ोर ज़ोर की पच पच की आवाज़ गूंजने लगी, मेरी भी उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज़ किचन में गूंजने लगी.
थोड़ी देर पीछे से चुदाई करने के बाद मामा ने मुझे अपनी ओर चेहरा करके स्लैब पर बैठा दिया और मेरी दोनों जाँघें फैला कर फिर से चूत चाटने लगे, थोड़ी देर चूत चाटने के बाद मामा ने सामने से मेरी चूत में लंड घुसा दिया और खड़े खड़े मेरी चुदाई करने लगे. स्लैब पे बैठ कर मैंने भी मामा को अपने दोनों पैर से लॉक कर लिया और दोनों हाथ से मामा के गले को पकड़ लिया.
चूंकि मामा खड़े खड़े चुदाई कर रहे थे इसलिए मामा अपने दोनों हाथ से मेरी कमर लॉक करके ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे.
10 मिनट तक चुदाई करने के बाद मामा ने रफ़्तार बढ़ा दी, मैं समझ गयी कि मामा का रस निकलने वाला है, इस चुदाई के दौरान मेरा तो दो बार रस निकल चुका था इसलिए मैं भी चाहती थी कि मामा जी जल्दी झड़ जायें क्योंकि मेरी चूत में दर्द सा होने लगा था. रफ़्तार बढ़ने के साथ ही मैंने अपने बदन को और कड़ा कर लिया, मामा को और ज़ोर से लॉक कर लिया, इससे मेरी चूत और कस गई, मामा जी का लंड मेरी चूत के अंदर कस कर रगड़ खाने लगा.
कुछ ही देर में मामा के लंड ने अपना सारा रस मेरी चूत में उड़ेल दिया, मामा जी पसीना पसीना हो गये थे, थक कर खड़े खड़े मेरे गले से लिपट गये, मैं स्लैब पर ही बैठी रही, मेरे होंठ मामा जी के कान के पास थे. मैं अपने दाँतों से मामा जी के कान को काटने लगी, मामा भी मुझे गले पे चूमने लगे.
मैं धीरे से मामा के कान बोली- आपकी झांट के बाल बड़े बड़े हो गये हैं साफ कर लीजिएगा. आज मुझे आपका पूरा लंड जड़ तक चाटना है.
मामा जी भी मेरी कान में बोले- तुम भी आज शाम से रात की चुदाई तक सू सू रोक कर रखना.
मैंने पूछा- क्यूँ?
तो मामा बोले- कुछ अलग तरह से चुदाई करनी है.
मैं तो मामा जी की चुदाई की दीवानी हो गयी थी इसलिए हर बात मानने को मैं तैयार थी, मैं बोली- ठीक है रोक कर रखूँगी.
फिर हम दोनों अलग हुए, मामा जी फ्रेश होने बाथरूम चले गये, मैं पूरे कपड़े पहन कर किचन में चाय नाश्ता बनाने लगी.
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