• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

माया ने लगाया चस्का complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


वो जोर से खासी तो मेरा वीर्य उसके मुह से छलक के बहार टपक ने लगा. वो बड़ी नशीली आँखों से मुझे बेशरम निगाहों से देखते हूँ ए मुस्कुरा रही थी और अपनी जबान से कभी मेरा वीर्य चाट रही थी थी तो कभी उससे सुघ रही… अचानक उस्सने मेरे गिले लंड को फिर से मुह में लपक लिया. में तो ढेर हो के बिस्तर पे पड़ा था. यह मेरी जिन्दगी का पहैला डिस्चार्ज था की मेने किसी के साथ सेक्स करते हूँ ए अनुभूत किया हो. बापरे सेक्स में कितना आनद होता है यह माया ने मुझे एहसास कराया. मेरी तो आंखे बन्ध थी. पर वो मुझे कहा छोड़नेवाली थी. वो बोली

माया: आह्ह तेरी खुश्बू कितनी अच्छी है. वो फिर से चाट ने लगी…. मेरे लंड को दो मिनट में फिर से खड़ा कर दिया उसको पूरा सूखने भी नहीं दिया.. फिरसे मेरा लंड कड़ा होके अपनी जवानी में मस्त होने लगा था. वो मेरे लोडे को अपने मुह में लोलीपोप की तरह अन्दर खीचते हूँ ए अपने होठो में दबाते हूँ ए चूस रही थी और मेरी तो जान निकलकर मानो लंड तक आ गयी थी. में माया माया थोड़ी देर तो रुको….चिलता हूँ ए कांप रहा था वो अब मानो मेरे लिए थोडा असह्य था, मुझे लंड के अन्दर जोर से जटके लग रहै थे और मेरी आंखे मुद ने लगी थी. मेरा लौवड़ा लाल चटक हो गया था और मेरा उपरी चमड़ी का शील टूट चूका था. वो कभीकभी मेरे लंड पे अपने दांतों से भी रगड़ मारती थी तो कभी अपनी गीली जबान मेरे अधखुले सुपाडे पर फेर रही थी. में आंखे बन्धकर तड़प रहा था, उसने अपने मुह में मेरा पूरा लंड भर भर के आगे पीछे करने की स्पीड बढाने लगी.. मेरे दिमाग में एक अजीब सा नशा छा रहा था. मेरा बदन अकड़ ने लगा तो उसने अपने मुह में मेरे लंड को आगे पीछे करने की स्पीड और भी बढादी. मेरे पाव को और फैला के वो बिच में आ गयी मानो उस्सने कभी लंड देखा ही न हो और सायद मिलने वाला ही न हो ऐसे वो मेरे लंड को खा रही थी.

में: माया आग लगी है… आई लव यु…… मेरी रानी मे तेरा गुलाम बन गया… और जोर से और जोर से रगडो माया, मुझे अपने अन्दर ले लो ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माया माया ऐसे चिल्ला रहा था की गांड की तरफ से कुछ जटके आने लगे. में अभीभी चीखा रहा था. जोर से और जोर से.. वो अपने मुह में मेंरे लंड को जबान से चिप्काके आगेपीछे करने लगी लगभग ५ – ६ मिनट में मेरे बदन में बिजली का करंट लगा, मुझे गांड की और से जोरदार जटके महसूस हूँ ए, मेने अपने पैर सिकुड़े और चीख पड़ा….

ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माँ…या….में फिर से…….. मुझे पकड़ो पर उसने इसे अनसुना करते हूँ ए अपने मुह से धक्के चालू रखे. थोड़ी देर तो मुजे लगा जान चली जाएगी, में निहाल हो कर अपनी आँखों को मूंदते हूँ ए उसके सर को पकड़ने नाकाम कोशिस करने ही जा रहा था के मुझे एक जोर का जटका लगा और मेरे लंड मेसे गर्मागर्म वीर्य की जबरदस्त पिचकारी छुटी और उसका पूरा मुह फिर से चिकनाई से भर गया. वो फिरसे थोडा खांसी.., मेरी तो मानो जान निकल गयी और में निढाल होके अपने पैरो को बिस्तर ढीला छोड़ थोड़ी देर आंखे बन्धकर ढेर हो गया. मुझे जिन्दगी की यह दूसरीबार चरमसीमा प्राप्त हूँ ई और में जैसे इंसान बेहोश होते है ऐसी अवस्था में आंखे बन्ध करके बिस्तर पर पड़ा रहा.. माया मेरा पूरा लंड चप चप चाट के साफ़ करने लगी. वो अभीभी मेरे लंड को छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी.. उसने कहा

माया: यार विकी मुझे तेरे लोडे की गंध बहूँ त मीठी लगती है. तेरा वीर्य कितना खुशबूदार है, तेरे लंड को कच्चा चबा के काट के खा जाने दिल कर है…वो अपने होठो से मेरा वीर्य ऊँगली में लेके सूंघने लगी. बाद में उठकर बाथरूम में अपना मुह धो ने चली गयी और में ऐसे ही पूरा का पूरा नंगा बेहाल बिस्तर पर आंखे बन्धकर पड़ा था.

 
पर मेरे मन को एक गजब की शांति मिल गयी. मेंरी चीखे अब शांत हो गयी…. यारो आज में सेक्स करते हूँ ए दो बार जड़ा था… एक शांति का एह्स्स्सास. कमरे में भी शांति हो गयी और बाथरूम में नल से पानी की आवाज़ आ रही थी. वो अपने आप को सायद साफ कर रही थी. बिखरे हूँ ए बिस्तर पे में एक घायल सैनिक की तरह पड़ा था. मानो आज मेरा रेप हूँ आ था.

में शांति से बिस्तर पर पड़ा था और माया बाथरम में मुह साफ़ कर रही थी के तभी मेन दरवाजे पे जोर से दस्तक हूँ ई. मेरी तो गांड फट गयी, मे जट उठा और अपने कपडे ढूंढ़ने लगा और माया को दबी आवाज़ में कहा.

में: माया मर गए कोई आ गया लगता है, देखो कोई दरवाजे पर दस्तक दे रहा है…. माया जल्दी से नेपकिन से अपना चेहरा साफ़ करती हूँ ई बहार निकली, वो भी डरी हूँ ई थी की आखिर कोन आ गया!!! वो मुझे बाथरूम में छुपाकर डर के माँरे कापते हूँ ए दरवाजे पे गयी. दरवाजा खोला तो उसकी सहैली सरोज थी जो बिलकुल हमारे मकान से सटे मकान में रहती है. माया को दरवाजे से हटाते हूँ ए वो जबरन अन्दर घुस आई और उसने माया को नजदीक बुलाकर कहा

सरोज: (दबी आवाज में) माया मेरे कमरे से सटी तुमारी खिड़की से मुझे अजीब-अजीब सी आवाजे सुनाई दी तो में भाग कर तुजे बताने आई हूँ की तुमारे कमरे की आवाज़ बहार तक आ रही है कोई सुन लेगा. उसने आंख मरते हूँ ए कहा..

सरोज: क्यों क्या हो रहा है मायादेवी????!! मैंने ऐसी तड़पनेवाली कसकती आवाज़ इतने साल में तुमारे कमरे से कभी नहीं सुनी. क्या है मेरी जान???? माया हडबडाते हूँ ए…

माया: न न नही ऐसा तो कुछ भी नहीं…. घर में कोई है ही नहीं तो आवाज़ कैसी..???!!! त त तू जा…..ऐसा कुछभी नहीं है. सरोज ने मेन दरवाजा बन्ध किया और जबरन माया के कमरे की और आ गयी. वो उसकी बहूँ त अच्छी सहैली थी. वो दोनों अक्सर छत पे दोनों मकान के बिच की दिवार के पास खड़ी रहकर घंटो तक फुसफुसाती रहती..दोनो बहूँ त ही अच्छी सहैलिया थी.

सरोज: ओह्ह्ह्ह तो मायादेवी कोई नहीं है तो फिर आप सजधज के क्या कर रही थी??? खिलाडियो से खेल??? अगर कुछ नहीं ने तो तेरा रंग क्यों उतरा हूँ आ है. और ये तेरे गाल पे क्या चिपका है??? उसने उसके गालपे चिपके मेरे वीर्य को अपनी ऊँगली पे लिया और उसे सूंघने लगी… और वो कमरे की अन्दर की और बढ़ने लगी. माया ने उसका हाथ पकड़ा और चिढ़ते हूँ ए……

माया: सरू प्लीज कुछ नहीं है तू बेकार में मुजपे शक कर रही हो, और मेरे गालो पे दूध की मलाई चिपकी थी जो अभी दूध पीते हूँ ए लगी होगी, में साबुन से मुह धो रही थी तो साबुन आँखों में जाने से मेरी आवाजे आ रही होगी मेरी माँ!!!!

सरोज: अच्छा तुजे पता है ना में बड़ी चुदक्कड हूँ , मेने कहीयो के पानी छुड़ा दिए है!! समजी… मुझे उल्लू न बना. बता अन्दर कौन है, बताती है या में अन्दर जा के उसकी पिटाई कर के पुरे मोहल्ला जमा करदू. अभी तो केवल शाम के ७.३० बजे है महारानी.

में अन्दर से सब सुन रहा था और मेरी तो गांड फट रही थी और मेरा दिल डर के मरे जोर-जोर से फड़क रहा था. वो लगभग हमारे कमरे में आ चुकी थी. वो कमरे की हालत देखकर बोल उठी..

सरोज: साली जूठी ये कैसी बू आ रही है और यह तेरे बिस्तर की हालत देख कोई भी कह सकता है की यहाँ तू अकेली नहीं…, बोल कोन था तेरे साथ…???? बोलदे वरना मुझसे बुरा कोई ना होगा.

माया: ओह सरू कोई भी तो नहीं… तू यार खामखा मुजपे शक कर रही है.. अगर कोई होता तो पगली में तुजे न बतानी, तुजसे मेरी कोई बात छिपी है क्या??..

 
सरोज: साली तो ये तेरे गालो पे जो चिपका था और खडकी से सिसकिया सुनाई दी वो क्या भुत की थी? वो जोर से धमकी भरे शब्दों में बोली……. मेने मैंन दरवाजा बन्ध किया है और में माया की खास सहैली हूँ और जो भी अन्दर छिपा है वो मेहरबानी करके बहार आये. अगर मेने उससे ढूढ़ लिया तो बहूँ त बुरा होगा..

माया: सरू कोई नहीं यार मुजपे भरोशा नहीं क्या? वो बिचारी सरोज को गीड-गिडा रही थी. उससे हाथ जोड़कर मिन्नते कर रही थी. यार तू जा कुछ नहीं…

सरोज: तुम बहार आते हो या में अन्दर आऊ??? अगर पकडे गए तो तुमदोनो का हाल बुरा होगा ये लास्ट वार्निंग है. माया ने उसके कान के पास जाकर कुछ कहा. तो और भी चिल्लाई.

सरोज: अच्छा तो ये बात है आने दे भैया भाभी को.. यह सुनकर में जट से बहार निकला, में बरमूडा और टी शर्ट पहने हूँ ए था.

में: नहीं प्लीज़ दीदी ऐसा मत करना, मैंने भी लाचारी से हाथ जोड़े..

सरोज: प्लीज़ के बच्चे, में तेरी दीदी नहीं साली हूँ समजा, मुझे दीदी कहा तो तेरा रेप कर भाईचोद बन जावुगी, इतना छोटा है पर मेरी भोली सहैली को फसा दिया?!! साले १२-१३ साल से वो तड्पी है पर भाई की इज्ज़त को देखते हूँ ए कभी बहार नहीं गयी और साले तूने उसको फुसला के उसको ठोकने भी आ गया.. (में गभराया, मुझे बात बिगडती दिख रही थी).

माया: नहीं सरोज उससे कुछ मत कहै यार वो निर्दोष है. वो उसे मेने …….. यार वो ऐसा नहीं वो अभी कुवारा है. उसने किसी को किस तक नहीं किया. वो ऐसा नहीं अभी भी बच्चा है.

सरोज: ओह्ह्ह मेरी जान….. दोनों में इतना प्यार भी हो गया? एक दुसरे को बचाने के लिए आगे आ रहै हो. सालो आने दो भैया को.. वो हमदोनो को ब्लैकमेल करते हूँ ए मेरे पास आई, मेरा कान पकड़ कर बोली साले इसने १२-१३ सालो में जो नहीं किया वो तूने ३० दिनों में करवा लिया. उसने कस में बरमूडा में ही मेरा लोडा पकड़ लिया और मेरे होंठ पर जोर से किस कर ली..

माया: सरोज बहूँ त हो गया..(वो गुस्से में आ गयी) उसने मुझे बाही में लेके बड़े गर्व से कहा

माया: हां में इससे दिल से चाहती हूँ इसे अपना पति मानती हूँ , उससे मत छु… और तुजसे क्या छुपाना…… में भी तो तेरी सब बात जानती हूँ …

सरोज: माया देख तो सही ये तुजसे १०-१२ साल छोटा लगता है. पर क्या चिकना माल है…. यार उसकी मजबूत बाहों में मुझे भी जरा जुलने दे मेरी जान….फिर माया को मुरजाया चेहरा देख शांत हो कर बोली….

सरोज: यार में तेरे दिल का हाल जानती हूँ , और मुझे यह भी पता है की तुजे छोटे मर्द पसंद है… वो फु फु करती हस पड़ी.. सॉरी मेरी जान में तेरी फिरकी ले रही थी. पर क्या तीर मारा है. मस्त चिकन अकेले ही खा रही हो और हमें दावत भी नहीं, साली चुदद्द्कड़…में तो तुम दोनों की मजाक कर रही थी सालो तुमारे सह्मे हूँ ए चहैरे तो देखो. सालो तुम दोनों की कैसी फट रही है. प्यार भी डर के करते हो छोटे जीजू…????!!!

मेरी जान में जान आई, माया ने कस के उसके बाल खिचे और कहा.—

माया: (दबी आवाज में) साली हरामखोर तूने हमको डरा ही दिया.. उससे खीच के बिस्तर धक्का देके उसपर चड गयी और उसके गालो को नोचने लगी.. सरोज की बच्ची आज तू गयी.. वो चिल्लाई..

सरोज: आःह्ह्ह माया दुखता है…. छोड़ मुझे. साली तुजे कुछ करना भी नहीं आता. अच्छा है मुझे सुनाई दिया वरना आज तो तू किसीके हाथ पकड़ी जाती. साली चुडेल में तुजे बचाने आई और तू मुझे ही मारती है? रुक में अभी चिल्लाती हूँ .. माया ने उसके मुह हाथ रख कर उससके गालो को चुमके कहा….

माया: सरोज मेरा प्यार मेरी यार मेरी अच्छी दोस्त है न, अपना मुह मेरे लिए बन्ध नहीं रखेगी मेरी रानी..

सरोज: एक शर्त पे में चुप रहूगी.. यार बहूँ त दिनों से चूत में बड़ी खुजली हो रही है, यार जब से डाइवोर्स हूँ आ है, चोदने को नहीं मिल रहा और मेरी भी तेरे जैसी हालत है. तेरे मेसे थोडा मक्खन मुझे भी खिला दे यार दोनों मिलबाट के मक्खन खाएगे, उसने मेरे सहमे हूँ ए चहैरे की तरफ देखते हूँ ए मुझे आंख मारी. क्यों जीजू दो खाओगे??? या एक से ही पेट भर गया????

 
माया: नहीं सरोज ये अभी छोटा है यार इससे कुछ नहीं पता. में उससे प्यार करती हूँ प्लीज यार हमें आज की रात कुछ लम्हे साथ बिताने दे मेरी माँ. देख मेरी शादी ६ महीने में एक बूढ़े से हो जाएगी, मैंने ये जब से आया है तब से नाम बताये बिना तुजे कहा था न के शायद मुझे मेरा प्यार मिल गया है, ये वोही विकी है जो छत वाले कमरे में रहता है, ये पढता है और अभी १९ साल का ही है. वो इतना जयादा सेक्स नहीं कर सकता उससे कुछ नहीं आता प्लीज मेरी माँ अब तू जा आज बड़ी मुश्किल से मोका मिला है, हमें प्यार करने दे.मेरी माँ !!! वो दो के साथ सेक्स कैसे करेगा…. उससे कुछ हो जायेगा….. हमें बक्स दे मेरी माँ…..

मेरा हाथ पकड़ अपनी और खीचके मुझे अपनी बाहों में भीचकर सरोज बोल उठी-

सरोज: ना मेरे प्यारे चिकने जीजू पे मेरा भी आधा हक़ बनता है मेरी जान. इसे तो में भी आधा खाऊगी क्यों जीजू??…में तेरी साली हूँ मेरे छोटे जीजू. वो मुझे चूमने लगी (मुझे तो समज में नहीं आ रहा था क्या करू, पकडे गए थे) तो माया अचानक उसपे जपट पड़ी पड़ी मुझे उनसे छुडाते हूँ ए..

माया: सरू अब तो हद्द कर रही हो यार मजाक छोड़ और जा.

सरोज: न ना मेरी जान में सीरियस हूँ , आज तो तेरा माल आधा में भी खाऊगी, वर्ना तू भी भूखी रहैगी बोल मेरी जान क्या करना है???? क्यों लला क्या खयाल है?? यह साली मेहेंगी पड़ेगी मेरे प्यारे जीजू….

माया: सरू तुजे में हाथ जोडती हूँ तू जा मेरी माँ, उस बिचारे को क्यों परेशान करती हो???. आज जा…तू, कल से जो तू कहैगी वोही होगा और अब खिड़की से कोई आवाज़ नहीं आएगी.

सरोज: यार कुछ करने नहीं देती न सही पर देखने तो दे… में अपने नाईट ड्रेस पहन अभी आई. तेरी कसम किसी को नहीं कहूँगी मुझे तेरे कमरे सोने दे में तुम दोनो के केवल देखूंगी बस.. और अगर रात के वक्त कोई आ भी जाए और अगर में तेरे साथ होउंगी तो कोई शक भी नहीं करेगा…इसे अहिस्तासे सीडिया चढ़ा देंगे… (माया सोचने लगी और धीरे से बडबडाइ) साली चुद्दकड़ मुझे एक रात भी अकेले अपने प्यार के साथ सोने नहीं देगी.. (मादरचोद है साली) माया ने प्रश्नसूचक निगाहों से मेरी तरफ देखा…

में: यार कोई मुझे तो पूछो, में कोई बाँट के खाने वाली चीज़ हूँ जो आपस में मेरा बटवारा कर रही हो. में बोला

में: माया यह यहाँ तेरे साथ सोती है सोने देना, अच्छा है किसी को हम पे शक नहीं होगा… (मैंने माया को चुपकेसे आंख मारी और वो बोल उठी.

माया: ठीक है तू जल्दी कपडे बदल कर आजा. देर न करना मुझे दरवाजा बन्ध करना है…

सरोज: यार २० मिनट लगेगी मुझे नहाना है, तुम लोग तब तक खाना खा लो नहा लो अच्छा रहैगा (उसने माया को आंख मारी) क्यों ठीक होगा न जानू. हम सहमत हूँ ए और वो दोड़ती हूँ ई गयी और माया ने फिर से दरवाजा बन्ध कर दिया..

माया: चैन की साँस लेते हूँ ए. साली बहूँ त ही चूदकड़ है विकी तुजे पता नहीं. एक बार रात को में उसके साथ सोई थी. साली ने मुझे काट काट कर सुजा दिया था. उससे मर्द न मिले तो वो लडकियों से भी काम चला लेती है. साली ने अपने भतीजे, देवर, बहनोई और सीमा को भी नहीं छोड़ा. उस्सने सीमा को लेस्बियन बना दिया है.

माया: एक आईडिया है. यह तुजे सीमा तक आसानी से पंहूँ चा देगी. यार इससे दोस्ती कर ले. पर मुझे चिंता है वो आज रात तेरी हालत ख़राब कर देगी. वो कुतिया की तरह काट खाती है….. जा तू पहले नहा ले फिर हम खाना खाते है. मैंने तेरे लिए अंडे की अच्छी अच्छी आइटम्स बने है. …..

में ऊपर नहा ने चला गया…१५ मिनट में में नहाके निचे आया और हम दोनों ने मजे से खाना खाया और दूध पिया.

 
माया: आई लव यू विकी में जिंदगीभर तेरा एहसान नहीं भूलूंगी. में तेरी दासी बनके रहू गी मेरे राज्जा. उसने मुझे अपनी बाहों में लेके अपने ओठ मेरे ओठो से लगा दिए और चूसने लगी. अब तो मुझे भी लिप किस आ गया था तो मेंने अपने जबान उसके मुह में घुसेड कर उसकी जबान से अपनी जबान टकराने लगा,…. फिर दरवाजे पे दस्तक हूँ ई.. माया नाराज होते हूँ ए

माया: आ गयी साली चुद्ककड़… रंडी.. (उसने गेट खोला और सरोज अन्दर आ गयी.) सरोज ने ब्लैक गाउन पहना था. सरोज भी मस्त लग रही थी. अब सरोज के बारे में बतादू ….

सरोज एक मुक्त खयालवाली मनचली चंचल लड़की है. उसने अपनी १४ साल की उम्र में पहला सेक्स अपने से ८ साल बड़े एक लड़के से किया था. उसके आलावा उसने अपने पड़ोस की किसी कुवारी लड़की, शादीशुदा भाभी, आंटी या सहैली को नहीं छोड़ा था. वो ३१ साल की सेक्सी ५-६” कद की, लम्बे घने बाल थे उसके, ३६ २५ ३७ का मस्त फिगर, नशीली आंखे, मस्त गुलाबी गाल. लाल चटक होठ… वो भी क़यामत से कम नहीं थी. उसकी ऐसी चाल चलन से उसका पति नाराज था और उसका तलाक हो गया था. वो माया को पाने की कब से फिराक में थी. एक रात उस्सने माया को अपने घर बुलाकर बहूँ त समजाया पर वो उसके साथ प्यार से नहीं मानी. उस रात उसने माया पर पूरी रात जबरदस्ती की, उससे नोचा काटा पर माया नहीं मानी. क्योकि माया की पसंद अपने से छोटे मर्द थे जो में उससे मिल गया वो भी घर के अन्दर. सरोज ने माया नहीं मानी तो सीमा को फसाकर उससे लेस्बियन बना कर रख दिया. वो सीमा को रात रात भर चोदती है. सीमा और उसकी बहूँ त पटती है इतना मेरे जान में आ गया था. जब में वहा नहीं रहता था तो सीमा वोही कमरे में सोती थी और सरोज अपनी छत से वहा आ जाती थी और रात रात भर दोनो एक दुसरे की चूत को चाट चाट कर अपनी वासना संतोषती थी.

आतेही उसने मुझे कस के जकड़ा और मुझे चूमा.. हाई जीजू.. मेरे लोअर में हाथ डाल के मेरे लौव्ड़े को पकड़ लिया.

सरोज: वाव क्या मस्त मुसल है…. माया की चूत को इतना ठोक की साली लाइन पे आ जाये.. वेसे वो मेरा माल है जीजू. आज हरामजादी को इतना चोद की उसकी चूत का भोसडा बन जाये और एक नंबर की चुद्दाकड़ बन जाये. वो मेरे लोडे को मुठियाने लगी ही थी की माया आ कर बोली तूने सिर्फ देखने का वादा किया था. इसे छोड साली…. हमसब जोर से हंस पड़े और माया के कमरे में गए. माया ने अपने बिस्तर को निचे डाल दिया ताकी निचे तीनो आराम से सो सके.

सरोज: (मेरे लंड को पकड़ते हूँ ए) वाव क्या मस्त मुसल है….मजा आ जायेगा मेरी जाआअन्न्न्न्न्न्न्न्न्. माया की चूत को आज रात इतना ठोक की साली लाइन पे आ जाये..

सरोज: देख जीजू वेसे तो माया मेरा माल है पर आज साली को इतना चोद है की उसकी चूत का भोसडा बन जाये और उसे इतना चिर दे के साली दूसरी बार लोडे लेना भूल जाये. साली मुझसे भागकर कितना दूर जा सकी बोल.

 
मेरे लोडे को मुठियाने लगी ही थी की माया आकर बोली…

माया: एई सरू की बच्ची तूने सिर्फ देखने का वादा किया था. इसे छोड साली…. वो मेरा पति है… तू साली सिर्फ आधी घरवाली है समजी…छोड़ इसे….

सरोज: आधी उसकी और तेरी तो पूरी हू. और साली मादरचोद आधी तो हूँ ना….बस चूत चाटने काम आये और अन्दर की थोड़ी खुजली मिटा दे तो भी चलेगा…. क्यों जानू..????.

हमसब जोर से हंस पड़े और मेन गेट पे ताला लगा के हम कमरे में गए..माया ने अपने कमरे से दो बड़े बिस्तर को बाजु वाले बड़े कमरे में निचे डाल दिए थे ताकि किसीको बहार आवाज न आये.. वो कमरा अन्दर कोने में था और बड़ा साफ़ सुथरा और खाली था. वहा पानी की ठंडी बोतल, तेल बोतल और क्रीम पड़े थे. मैंने अपने जेब से पान और कंडोम भी वहा रख दिए. माया ने अच्छा प्लानिंग किया ताकी निचे तीनो आराम से सो और चोद भी सके.

सरोज बड़े प्यार से मुजे लिपट कर चूमने लगी.. धीरे धीरे उसने मेरा टी शर्ट को उतर फेका, उसकी जबान मेरे मुह घुस के चपक चपक चल रही थी. उसकी नशीली आंखे मेरी आँखों में तडपते हूँ ए देख रही थी. गजब की प्यास थी और बड़ा गर्म था उसका बदन, सांसे तेज और वो वासना की मारी कॉप रही थी साली. अहिस्ता से उसने अपना एक हाथ से मेरी बरमूडा को जटके के साथ खीच निचे उतार दिया. में अब में केवल अपने काले निक्कर में था. उसने निक्कर के ऊपर से ही मेरे तने हूँ ए लौड़े को दबोचकर मुझे तडपना सुरु कर दिया. में काप रहा था, मेरे बदन से मानो बिजली का २३० वोट का करंट पास हूँ आ हो, मेरे लंड में गजब की गुदगुदी हो रही थी और मेरे लौव्ड़े के अन्दर से जटके आ रहै थे. में आंखे मूंद पाव फेलाकर मजे ले रहा था, आह्ह क्या एहसास था..!! तभी माया ने उसको पीछे से जकड़ा और उसकी चुचिया पिछेसे जोर से रगड़ते हूँ ए उसके कंधे को चूमना सुरु कर दिया. सरोज की यह कमजोरी वो जानती थी, सरोज एकदम कसमसा उठी और उसने मुझे छोड़ माया को लपका.. जोकि उसकी फेवरिट थी. उसने जोर से माया को अपनी बाहों लिया और उसे लिप लॉक किस कर दी. और अपनी जबान उसके मुह में डाल माया की जबान को जोर से खीच बड़ी बेदर्दी से उसे चूस रही.. दोनों जोस में एक दूसरेको बेतहासा चूमने लगी और में तो बस साइड कलाकार हो कर दोनो तड़प और प्यार महसूस कर उसे देखने का लुफ़्त ले रहा था. दोनो एक दुसरे की जबान को चूसे जा रही थी. चप चप पुच पुच. चप चप गपक गपक गपाक, साथ में अहिस्ता अहिस्ता मीठी आहै बहर रही थी..ऊऊम्म्म…..स्स्सल्ली इस्सस मा….आउच…आःह्ह्ह, काट मत…सुरु..उम्म्म्म सी स चप चप चप पुच…पचाक..चप सी सीस स्स्स्स माँ.. या… तू…. ने…… मु… जे…. इ.. तना….. त.. ड…. पा.. या… क्यों…….. जा…. न…. आह्ह्हह्ह. वो दोनो इतनी मदहोश होक चूम रही थी के शायद मुझे भूल गयी हो…सरोज माया के बालो को तो कभी उसके मांसल बूब्स को सहलाते सहलाते धीरे धीरे उसके गाउन की ज़िप खोलने लगी और उसने माया की गाउन फक से उतार फेकी. माया ने अन्दर कुछ नहीं पहना था तो साली पूरी की पूरी नंगी हो चुकी. माया को नंगी देख सरोज और भी नशे में मस्त हो गयी. वो उसके को पागलो की तरह उसके बड़े बड़े जुलते स्तनों को जोर दबोच उसकी गुलाबी टाइट निप्पलो काट ने लगी…

माया: आउच…सुरु यार धीरे…खून निकलकर पी जाओगी क्या??? ओह्ह्ह्ह सुरु मजा आ रहा है…. यार तेरे काटने से मेरी चूत में लवक लवक जटके आ रहै है, अन्दर गुदगुदी होती है.. अरे साली रंडी धीरे…..ओह्ह्ह्ह माँ फिर काट लिया सीस सीस ओह्ह माँ….. सीस आआआआआआआह्ह्ह..

सरोज उसे भूखी शेरनी की तरह बेदर्दी से नोच के खा रही थी…मैंने सोचा अगर औरते ऐसे आपसमे चुदवाने लगी तो साला हम मदों का क्या होगा… पर असल में सरोज माया को मेरे लिए तैयार कर रही थी.. उसे एक्दम गर्म कर राही थी और बिच बिच में मुझे आख मर रही थी…

 


कमरे में तो बस आहै, हलकी चीखो से गूंज रहा था….पुच……पुच.. उम्ह्ह्ह अहह इस्स्स्सस, आःह्ह्ह मेरीईईइ माआआयाआअ ऊह्ह्ह्ह पुच.. पुच्च्च्च.. चप्प्प्पप चु चु ऊऊह्ह्ह.. चूऊ…. त….. पा…. नी….छो…. ड…. र.. ही… है… छोड़ सा… ली… में.. क्या… चु…. द्वौ.. उ…… गी….

सरोज: माया मेरी जान तूने मुझे बहूँ त तद्पाया माआअ ओह्ह्ह….. उसने गापक से उसकी चूत में अपनी ऊँगली घुसाई और गाली देते हूँ ए…साली चिकनी चूत…. तू तो मरेगी.. साली….मादरचोद..

सरोज ने माया की गुलाबी उन्नत और कठोर निप्पल मुह में ले कर जोर जोर से काटते हूँ ए चूसने लगी और बाये स्तन को घुमाघुमाँ कर दबोच रही थी. मुझे लगा माया मर जाएगी….माया आंखे बन्धकर सिसिया रही थी.

माया: ऊऊह्ह्ह मेरे लला ओह्ह्ह सुरु मुझे कंपकपी और मीठा दर्द हो रहा है…. विकी तू भी आजा मेरी जान…वरना यह मुझे आज तेरे हाथ में नहीं…आआ ने देगी…आज वो अपनी भड़ास निकालेगी रंडी साली….

सरोज: आजा .. मेरे छोटे जीजू आजा…चल तुजे चोदने अच्छे अच्छे दाव सिखादु आजा …..

मेंने जाके माया के बाये स्तन को अपने मुह में लिया और अपने एक ऊँगली उसकी भारी चुतड के बिचमे उसकी गांड की छेद घुसने लगा और सरोज की तरह उसकी चुचिको दबोचते हूँ ए थोडा और जोर से खीच खीच उसकी निप्पलो को चूसने लगा…मुझे भी नशा चढ़ गया था और में भी पागलो की तरह उसकी गांड के छेद खोल खोल उसमे ऊँगली घुसा रहा था. माया को बुरी तरह से दबोचकर मानो उसका रेप कर रहै थे पर वो माया को दुगना आनंद दे रहा था. वो नशे में चिल्लाने और आहै ले ने लगी और जोस में आके उसने सरोज की नाईटी खोल कर उतार फेका दिया. साली चुद्दाकड़ ठहर अभी चीरती हूँ तेरी चूत और गांड….वो दोनों नंगी और मस्ती में थी और दोनो के मस्त कुल्हे पीछे से थपक थपक जुल रहै थे. वो कभी मुझे तो कभी सरोज को..

माया: व्वव्व्वीक्क्कक्की ल्लाआआअ चूस बस ऐसे ऐसे ही… आआआआआआआह्ह्ह सुरु चूस साली अबतो तुजे मेरे पके आम खिला रही ऊह्हऊऊऊऊऊऊ आआह्ह्ह्ह स स स स स सी सीस सी सी साली कबसे मेरे पीछे पड़ी थीईइ. ओह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह लालाआआआ उम्म्मम्म हां हा ऐसे…जोर…. से….. साआली सुरु आज तूने मुझे खा ही लिया हरामखोर…..आआआआआज्ज्ज ओह्ह्ह्हह्ह ऊऊम्म्म उह्ह्ह सी स स सी सीस सी सीस…. साली चूत में तेरे नाख़ून चुभते है अहिस्ता….मुझे कुती समजा है क्या…उसने सरोज के चुतड पर जोर से चपत मारी ठपाक………. सरोज उसकी दुश्मनी माया की चूत पे उतर रही थी. उसने एक की जगह दो उंगलिया घुसेड दी गापाक……

वो सरोज के चुतड को अपनी हथेलियो से जोर जोर से थोक रही थी थप थप थप और उधर उसकी मस्त चूत से चिकना पानी बह रहा था. इस चिकनाई ने उसकी गुलाबी चूत को और सेक्सी बना रही थी. वो बड़े जोस में चील्ला रही थी, उसकी चूत में जटके आ रहै थे, और वो बारी बारी अपनी आंखे मुद कर अपनी चूत की ऊपर भग को ऊँगली से खुजा रही थी.

माया: चूस साली रंडी पुर्र्र्ररी करले आज तेरी इच्छा आआआआआअह्ह्ह्ह सा……..ली जोर से काट…. फाड़ दे मेरी चु……अह्ह्ह्हह्ह. सरोज ने चूत से ऊँगली निकालकर उसे चाट ने लगी… उसने ऊँगली निकाली तो मैंने घुसेड दी..गप्प्……

माया: ओह्ह्ह्ह लल्ल्ला अहिस्ता….. ऊपर ले रगड़,,,,,हां आआआआआआआह्ह्ह जोर से ललाआ आआआआआआआह्ह्ह……जोरसे ऊपर की और…. हा.. बस वहा… जल्दी…कर…बस ऐसे…..आह्ह्ह माआआयाआअ …..ऊऊफ़्फ़्फ़ सीस सीस ….आ….गे….ज…रा…औ….र…द..बा..के…. र….गड़……हा बस वही…..यस….हा बस वो……मसल……….हाफ्ते हूँ ए…हां ब..स..उफ्फ्फ सी सी इसी तरह……वाओ ….आआह्ह्ह

 


सरोज उसकी चुचियो को अपने दांतों से काट ने लगी थी. माया अब एक हाथ से कभी मेरे बालो को तो कभी लौव्ड़े को सहला रही थी और एक हाथ से सरोज के मांसल कुलहो को अपनी हथेलियों से थोक रही थी. ठाप ठाप ठाप ठाप ठाप….. एक तरफ चूसने की आवाज़ पुच पुच पुच पचाक चप चप स्लर्प स्लर्प पच …..उधर सरोज सरोज की गर्म सांसे उसकी चूची से टकरा रही थी… वो पागलो की तरह माया को चूसे ही नहीं खाये जा रही थी…

पुच चप स्लर्प स्लर्प चिट चु चप चप चप उह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सी सीस सी. कमरा दोनो की मीठी आहटो से गूंज रहा था. क्या नशीला माहोल था!!!!!. मेरी पहली चुदाई और वो भी दो दो लडकियों से… आज मुझे स्वर्ग का आनंद मिल रहा था. मुझे सीमा याद आ रही थी…

माया: आआह्ह्ह्ह उईई ओह्ह्ह आआअ माआआ ऐसे ही जोर से खाजा स्स्स्सूउर…. ललाआआ खीच के चूस आह हाआअ ओह्ह्ह्ह

सरोज ने उसे धका देकर बिस्तर पे सुलाया और मर्दों की तरह उसपे चढ़ कर उसकी दोनों भारी चुचिया रगड़ते रगड़ते मुझे कहा….

सरोज: (हाफ्ते हूँ ए, कम्पते स्वरों में) आजा मेरे छोटे दुल्हे तुजे अब चूत चुसना सिखादु.. उसका चेहरा लाल हो गया था. वो काप रही थी, बड़े ही नशे में थी. उससके कुल्हे लाल चटक हो गए थे. उसने माया के कुलहो को उठाया और निचे तकिया रखा ताकि उसकी चूत का छेद ठीक से ऊपर आये और खुल के फूल की तरह खिल जाये.. मैंने पहैली बार इतनी नजदीक से चूत के लाल चटकक फाको को देखा… ओह्ह्ह्हह्ह क्या मस्त चूत थी माया की…. उसकी गुलाबी कसी हूँ ई चूत के ऊपर की लाल पंखुड़िया एकदम बन्ध थी उसे सरोज ने खोला. वो शिलपैक माल थी यारो. अब मुझे ग्यात हूँ आ लड़के चूत के पीछे इतना पागल क्यों है..!!!!?? उसकी चूत को देख मेरे मुह में पानी आ गया , मेरे लंड का तो हाल बहूँ त बुरा ही था. उसपे जटके आया रहै थे और वो तन के निक्कर पे अपना सर याने सुपाडा थोक रहा था. उधर माया और सरोज की चूते चीकना पानी छोड़ रही थी, उसकी कसी हूँ ई चूत मुलायम जाट से ढकी और भी मस्त लग रही थी जिसे देखकर मेरा लंड जटके देता हूँ आ ऐसा तन गया की मुझे लगा इसके अन्दर का खून लंड की नसों को फाड़ कर बहार आ जायेगा. उसके मखमली जाटे भी चूत के पानी से गिले थे. सरोज ने उसकी उभरी गुलाबी चूत की पंखुड़ी को लपक के अपने मुह में ली तो वो चीलाई. इस्स्स्स, उईईईए……. सरोज उसपे अपनी जबान बड़े प्यार से घुमा कर रगड़ रही और उसे तडपा रही थी. वो अपने दातो को उसपे दबाते हूँ ए…

सरोज: स्स्सल्ल्ली आज तुजे काट के खाउंगी ले साली मादरचोद… मुझे तूने बहूँ त ललचाया पर…. ले साली रंडी.

सरोज ने अपनी जबान को नोकिली कर माया की चूत के फाको को चोदने लगी, और…. में उसको बड़ी बेताबी से उसे देखकर चूत चाटना शिख रहा था. सरोज बड़ी बेदर्दी से माया की चूत काट काट के चूस रही थी और अन्दर अपनी जबान घुसेड रही थी. बड़ी हैवान हो कर उसे काट रही और खुद भी तड़प रही थी. एक भूखी शेरनी जैसे हिरन को काट काट के खा रही हो…

सरोज: आआह्ह साली माया तेरी चूत का रस काफी मीठी है. उम्म्म्म ला इसे खा खा के चिर दू….

लपक लपक चप चप चप गपक गपक गपाक…. चप चप सी सी स स स स स.

 


माया: ओह्ह्ह्ह साली मदरचोद… मुझे अन्दर जटके… आआ रहै है उईई मा स स स स स स सी सी सीस सीस सीस उफ्फ्फ्फ़ जोर से लालाआअ अआजा मुझे अपनी बाहों में ले ले अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सुसुस्सूरूरु मुझे बहूँ त कुछ हह ह्ह्ह हो रहा है है सीस सी सीस इस्सस सीस इस्स्सस ओफ्फ्फ्फ़ आःह्ह्ह स.आआआआआआआह्ह्ह.

मेने भी कस के उसकी निप्पल को मुह में लेके काटना सुरु किया तो वो उछल पड़ी और वो अपने पैरो से सरोज का चेहरा दबोच कर चूत की तरफ दबाने लगी और मेरे सर को खीचकर अपने चुचियो की और दबाने लगी….

माया: मम्मा आआआआआआआह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ हैईई आऔच…..आह्ह्ह सीस इसी तरह ज्जोर्र्रसे जोर से ऐसे चूस लअला लल्ल ओह्ह्ह्ह माँ में मर गयीई ह्हहहहह ऊऊम्म्म सु….रु… विकी ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह मा….र…. दो…….गे हा हा हा हा सुरु तेरे दांत चुभते है साली मार देगी धीरे आआअह्ह्ह्ह सु ऊऊउ ह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हम्म्म्म सु सस उस उस स स स स सु सी सीस सीस सीस

माया की चूत और चुचियो की एक जोरदार और जबरदस्त चुदाई हो रही थी. वो मछली की तरह तड़प रही थी.. कमरे में एक जोरदार जंग चल रही थी और नशे का आलम था. दोस्तों, यह कहानी लिखते हूँ ए इतने सालो बाद भी मेरा लंड कड़ा हो कर पानी छोड़ रहा है में तुम्हे क्या कहू..

वो अपने कमर ऊपर उठाकर सरोज को और मेरे चेहरे को अपने स्तनों पर दबाकर आंखे बन्धकर कम्पते हूँ ए लब्जो से हमें थैंक्स कह रही थी और सरोज को गालिया भी दे रही थी.

माया: स्स्सल्ली रंडी ने आखिर मुझे नहीं बक्शा अह्ह्ह्हह्ह साली मुझे आखिर चोद के ही छोड़ा…. ओह्ह्ह विकी खाजा मेरे लाल हह्ह्ह्हा आःह्ह्ह uऊऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़ चाट साली…. बना दे मेरे विकी को भी एक नंबर का पति, साली तू जानती है एक औरत को कैसे सुख दिया जाता है.

वो सरोज को बिच बिच में पिट रही थी. और सरोज उसका बदला चूत से ले रही थी. कमरे मीठी सीत्कार और चूसने आवाज़ थी बस….

चप चप मुह्ह्ह्ह आआह्ह्ह सी सी सी सस उस सीस सीस सस माँ ह्ह्ह्हह खा साली खा ….सीस ईईस ईईस्स्स ओह्ह्ह्हह माँ सुरु ऊऊऊ विकीईईईईईई बस ऐसे सिख गया मेरे लाल्ल्ला वाह्ह बस ऐसे ऐसे अह्ह्ह्ह ह़ा तुम दोनोनोनो अह्ह्ह्ह मु….जे…… की……त…..ना…… आ…..न….द दे र…है…हो कमीनो आआआअह सी सीस सीस चपक चपक चपक गपाक गपाक चु चु चप चप……उईई सीस…….

लगभग ८-१० मिनट हम उसको रेंगते और बेदर्दी रगड़ते रहै…पता नहीं अब मुझे भी माया दया नहीं आ रही थी. में भी अपने दांतों कश्मशाके उसे रेंग रहा था..

माया: हा ब…..स… ऐसे अह्ह्ह अह्ह्ह इस्स्स्सस्स्स ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ल….लाआआआआअ ह्ह्हह्हह्ह्ह्सिस

अंत में उसका पूरा बदन एक दम अकड़ा और उसने खीच के मुझे बुरी तरह से अपने चुचियो पे दबोचा और जोर से चिलाई…आआह्ह्ह्ह सी सीस सीस लला कस के………..ओह्ह्ह्हह माँ आआआआआआआह्ह्ह और जोरदार जटको के साथ कापते हूँ ए, अपने पैरो को सिकुड़ते हूँ ए जड़ गयी….

माया: हाआआआआअ माआअ सु सस रू में मरीईईईईई ईईई ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ विई लाआअ मुझे अपने स्तनों पे जकड़ के जड़ गयी…….. उसने सरोज के मुह में अपना गरमागरम कामरस छोड़ दिया.. सरोज बड़े प्यार से कुतिया की तरह अपनी जबान से उस्क्की चूत चाट रही थी….

माया: माँ……………..में मरीईईईई ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फ्फफ्फ्फ़

मैंने उसके होठ पे अपने होठ जड़ दिए और उसे चुप करा दिया…

 


माया आंख बन्ध कर बिस्तर पे ढेर हो गयी… उसे पसीना छुट गया था.. वो जोरो से हाफ रही थी, उसका तनबदन तप के लाल लोहा बन के हमें जला रहा था. वो ऐसी बिलकुल नंगी मचलती मछली सा तडपते हूँ ए शांत हो गयी…. उसकी आंखे बन्ध थी और में उसकी जोरदार लपेट में था… इस अवस्था में वो और भी मस्त लग रही थी.

सरोज: देखा मेरे राजा चूत ऐसे चाटते है. अब तुजे मेरी चूत ऐसे ही चाटनी है. माया की छाती से खीचकर उसने मुझे अपनी नंगी छाती से चिपका कर मेंरे गले को चुमते हूँ ए दातो से मेरे कंधे और गले को काटा तो मेरा तना हूँ आ लाल चटक लवड़ा ९० डिग्री के ऊपर खड़ा हो गया. में कांप उठा…

में: ऊफ्फ सुरु…..अहिस्ता आह्ह्ह्ह

वो घुटनों के बल बैठ गयी और मेरा निक्कर खीचके मुझे भी पूरा नंगा कर दिया. मेरा ६ इंच बड़ा लाल चटक लंड बहार आते ही जुलने लगा. उसने लपककर मेरे लंड को अपने मुह में खीच लिया (जैसे नाग चूहै को खा लेता है..) वो मेरा लंड पूरा का पूरा अपने मुह में घुसेड़कर अन्दर उस पर अपनी जबान रगड़ रही थी. वो मेरे लौव्ड़े को अपनी गीली जबान से मलते हूँ ए खीच खीच कर चूस रही थी.

चप चाप पुच पुच की आवाज़ आने लगी.. साली थकती ही नहीं थी. बस पुच पक पक पुच चप गप्प गपाक गपाक गप्प पूउच पुच्च्च पुच्च्च पुचच्च्च्च चप चप गु गुप गुप….की आवाज़ आ रही थी. में बहूँ त तड़प रहा था…मेरे लंड में सनसनी हो रही…थी में कही का न रहा… में खड़ा भी नहीं रह सकता था… ओह्ह्ह्हह सस.सु…रु….में…री…जा…न………..

में भी जोस में आके उसका चेहरा पकड़ कर उसे आगे पीछे करने लगा. कमरे में बस पु..च.. प..क पक पु..च प…क पु….च. मेरी आंखे बन्ध थी और सांसे तेज, एक जबरदस्त चिंगारी मेरे लंड पे लग रही ऐसा एह्सास मुझे कभी बही मिला, बिजली का जटका मेरे लंड पे जटके दे दे कर उससे एक मीठा दर्द दे रहा था.. पु…च पु…च प्चुह पक पक स्लर्प स्लर्प स्लर्प स्लर्प पुच पुच….. निचे उसकी चुचिया और उपर से चुतड हवा में जुल रहै थे.. वो तो बस मेरे लंड को खाए जा रही थी. क्यो ना हो.. ६-७ महीने बाद उसे ऐसे बिना जाटे कर ६ इंच का मस्त लंड चोदने को मिला था. वो कोई मौका गवाना नहीं चाहती थी. एक तरफ मेरा लंड और एक तरफ माया उसकी जान जो उसे बड़े अच्छे नसीब से आज अच्छी तरह से मिल गयी थी. वो तो बस पुच पुच पपुच पक पक पक चप चप चप……..

अचानक उसने मेरे लोडे को बहार निकाल और चीलाई……

सरोज: साला तू जड़ता क्यों नहीं….??? इतना बड़ा लौड़ा मेरी जान लेगा क्या…

एसे में कैसे जड़ जाता… मुझे माया ने थोड़ी देर पहले ही मेरे लंड को चूसचूस के जड़वाया था. पर सरोज बहूँ त ज्यादा आनंद दे रही थी. उसकी चूत भी एकदम गीली थी. उसपे एक भी बाल नहीं था उसकी गुलाबी चूत भी बड़ी सुदर दिख रही थी. मेरा लंड एक दम टाइट हो के लोहा हो गया था. और वो थक गयी थी. उसे और कुछ न सुजा तो उसने साइड पे पड़ी तेल की बोतल उठाई और उसमे से तेल निकाल कर मेरे लौड़े पे उसे जोर से मलने लगी…

जब मेरा लंड एकदम कड़ा लोहै जैसा और तेल से जोरदार चिकना हो गया तो उसने मुझे माया की और लेके इसके पैरो के पास घुटनों के बल बिठा दिया.

सरोज: चल मेरी मायादेवी सुहागरात के लिए तैयार हो जा…. तेरा असली साजन तेरी चूत में अपनी बारात ले जा रहा है…..

 
Back
Top