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मासूम बहु Incest(sasur-bahu)

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मेरे हाथो में बाबुजी की पिस्तौल थी और उसकी नोक पर था हरीश का सर,वो और नेहा डर से कांप रहे थे,मेरे चहरे में आया हुआ गुस्सा थोड़ी देर में ही मुस्कान में बदल गया,और मैं ठहाके मार कर हँसने लगा,वो दोनो ही मुझे बड़े ही आश्चर्य से देखने लगे थे,

“बहुत कमाल का खेल खेला है तुम दोनो ने,मेरे हाथो अपने रास्ते का सबसे बड़ा कांटा हटवा दिया ,और अब आजादी से सारी दुनिया के सामने शादी भी कर लिए,वाह वाह,......लेकिन क्या तुमने सोचा की मेरे ऊपर क्या बीत रही है,मुझे कैसा लग रहा होगा,मैं पूरे एक साल जेल के पीछे रहा,अपने पिता के कत्ल की जुर्म में …..ठिक है की वो मेरे पिता नही थे लेकिन फिर भी उन्होंने हो तो मुझे पाला था,”मेरे आंखों में आंसू आने लगे,

“और तुम,तुम्हे तो मैंने जान से ज्यादा चाहा था,तुम कितनी मासूम थी कितनी प्यारी सी और ये सब ….”मैं फफक पड़ा मेरे हाथ ढीले पड़ गए और मैं बिस्तर में बैठ कर ही रोने लगा,हरीश अब मेरे सामने खड़ा था ,

कुछ देर तक तो हम यू ही रहे,थोड़ी देर बाद नेहा मेरे पास आयी और अपने घुटनो को जमीन से लगा कर मेरे सामने बैठ गई ,

“मैं जानती हु की आप मुझे गलत समझते है और हा हमने गलत किया लेकिन हम एक दूसरे को बचपन से प्यार करते आ रहे है,हमारे प्यार को तोड़ने वाला,हमे एक दूसरे से अलग करने वाला और मेरी अस्मिता को भंग करने की कोसिस करने वाला एक ही आदमी है,उसे तो इसकी सजा मिलनी ही थी”

नेहा का स्वर थोड़ा ठंडा हो चुका था

“और जो उस वीडियो में था क्या वो गलत था,जो मैंने अपने कानो से अभी अभी सुना…..”

मैं हल्की आवाज में ही बोल पाया

“वो सब सही है,और हम दोनो भी तुम्हारे सामने है,तुमने हमारे लिए जो किआ है वो कोई भी नही कर सकता और अब तुम जब सच जान ही चुके हो तो तुम जो भी सजा हमे देना चाहते हो वो दे दो ,हम दोनो ही हर सजा के लिए तैयार है,”

हरीश बोल पड़ा,उसकी बात से मैं थोड़ा हंसा लेकिन उस हँसी में बहुत सा दर्द छुपा हुआ था….

“क्या सजा चाहते हो ,और मैं कौन होता हु तुम्हे सजा देने वाला,एक चुतिया आदमी..”

मेरी आवाज में ठंडापन आ गया था,

“नही मुझे माफ कर दीजिये जो मैंने आपके लिए ऐसे शब्दो का प्रयोग किया,”अब नेहा रोने लगी थी,

“मैं जानना चाहता हु ,और जब मैं सब कुछ सही सही जान लूंगा तभी मुझे थोड़ी शांति मिलेगी….”

नेहा ने अपना चहरा उठाकर मेरी ओर देखा और कहना शुरू किया,वो दोनो चाहते तो मेरे हाथो से बंदूक छीन सकते थे या कुछ और कर सकते थे लेकिन उनके इस व्यवहार ने मुझे थोड़ी राहत दी ,

नेहा ने अपनी कहानी शुरू की मैंने उसे टोक दिया

“वो बताओ जो मैं नही जानता “

“हमारी शादी के बाद भी मैं और हरीश एक दूसरे से अलग नही हुए थे,बाबुजी ने मेरी शादी यही सोच कर करवाई थी की मैं गांव की एक मासूम सी लड़की हु और मुझे फसाना उनके लिए बहुत ही आसान होगा लेकिन मेरे सीधे होने के बावजूद मैं हरीश के प्यार में पागल थी और हम दोनो के जिस्मानी रिस्ते तो हमारे किशोरावस्था आने की बाद से ही शुरू हो गए थे जिससे बाबुजी अवगत नही थे,शादी के बाद उन्होंने मुझपर प्यार छिड़कना शुरू कर दिया था,मैं मन मार कर ही उनका साथ देने लगी वो मुझे जिस्मानी तौर पर उत्तेजित करने की कोसीसे करते थे ,वो सोचते थे की मैं एक भोली भली लड़की हु और मुझे उनकी हरकतों के बारे में कुछ भी नही पता लेकिन मैं सब कुछ समझती थी ,तभी हरीश को भी ये पता लग गया की बाबुजी ने ही हमारे रिस्ते को तुड़वाया है,मेरे दिल में आपके लिए सहानभूति और प्यार हमेशा से ही था लेकिन आपके दब्बू स्वभाव के कारण मैं कुछ भी ऐसा नही कर पा रही थी इसके लिए आपको जगाना जरूरी था,शुरू में हमने सोचा था की आपको सब कुछ बता दिया जाय लेकिन आपके बाबुजी के सामने आपकी स्तिथि को जानकर हम दोनो ने चुप ही रहने का फैसला कर लिया ,बाबुजी की छेड़छाड़ बढ़ते जा रही थी वही हरीश और मैं जो की एक दूसरे से अलग होने की पूरी कोशिस कर रहे थे,इसी कारण अलग भी नही हो पा रहे थे ,आपकी कमजोरी के कारण मैं जिस्मानी रूप से संतुस्ट भी नही हो पाती थी ,ऐसे में मेरे लिए आपके प्रति वफादार रहना भी मुश्किल हो रहा था,इसी बीच हम गांव छोड़कर शहर आ गए ,हरीश ने मेरे ही कारण यहां अपना ऑफिस खोल लिया,हम एक दूसरे से मिलने लगे शुरू में तो हम एक दूसरे के लिए बस एक अच्छे दोस्त ही थे लेकिन मेरी मजबूरियों और हरीश के मेरे लिए प्यार ने हमदोनो को फिर से एक दूसरे के करीब लाया,लेकिन फिर भी मैं हरीश से जिस्मानी संबध नही बनाना चाहती थी ,लेकिन वो अब घर आने लगा था,जब उसे ये पता चला की आप मुझे संतुस्ट भी नही कर पाते तो वो मेरे करीब आने लगा,हम पहले तो बस एक दूसरे के बांहो में घंटो बिताते थे लेकिन फिर हम एक दिन हमारे होठ मील गए और साथ ही हम दोनो एक दूसरे में पहले की ही तरह मिल गए…….”

कमरे में शांति थी एक अजीब सी बेचैन करने वाली शांति ,अब नेहा उसकी पत्नी थी लेकिन मेरे लिए ये दिल तोड़ने वाली बात थी,आज उसने कबूल ही कर लिया था की वो हरीश के साथ क्या क्या करती थी ,नेहा मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे बालो में हाथ फेरने लगी ,

“मैं आपको बहुत ही प्यार करती हु ,आप सच मानिए या नही “

मैंने उसे अजीब नजरो से देखा ,वो सफेद झूट बोल रही थी अभी अभी उसने सब कुछ काबुल किय मुझे फसाया और अभी वो मुझे प्यार करने की बात कर रही है ,

“मैं आपके लेपटॉप में देखा था की आपको क्या पड़ना पसंद है ,हमे लगा की हो ना हो आप के अंदर ये चाहत है की मैं किसी और मर्द से संबंध बनाऊ और आप हमे देखे,हम पहले वही करने की सोच रहे थे,ताकि हमे भी कोई परेशानी ना हो और आपके साथ मेरा संबंध भी बना रहे लेकिन तभी बाबुजी आ गए ,हमारे लिए फिर से एक मुश्किल आ पड़ी ,उनका स्वाभव तो इस बार और भी खतरनाक हो गया था,वो मुझे कार सीखने के बहाने इधर उधर छूने लगे थे ,लेकिन उनकी भी इतनी हिम्मत नही हो रही थी की वो सीधे मुझसे कुछ कह पाए,लेकिन उस दिन सबकुछ बदल गया ……..

हरीश से मेरी जुदाई बर्दास्त नही हो रही थी तो जब आप ऑफिस गए थे तो मैंने बाबुजी को वही दवाई दिया जो की आपको देती थी,हरीश और मैं इसी कमरे में एक दूसरे के प्यार में दुबे हुए थे और ना जाने कैसे बाबुजी की नींद खुल गई उन्होंने बाहर से सब कुछ सुना और पीछे से ना जाने कैसे रोशनदान से ही अपने मोबाइल से हमारी शूटिंग कर ली,पहले तो उन्होंने हरीश के जाने का इंतजार किया लेकिन उसके बाद…………….

उसके बाद उन्होंने सीधे मेरे कमरे में आकर मेरे कमर को पीछे से पकड़ लिया मैं चीखी तो वो मुझे गालिया देने लगे …

‘मादरचोद अपने यार से चुदवा रही है और मेरे सामने सती सावित्री बन रही है’

मैं गिड़गिड़ाने लगी उन्होंने मुझे वो क्लिप दिखाई मेरे पास अब और कोई भी चारा नही बचा था इसके की मैं वो सब करू जो वो चाहते है,उन्होंने मेरी साड़ी मेरे कमर से अलग कर दी और मेरे पेट को चूमने लगे ,मैं रोती रही लेकिन वो …

‘साली कमाल की है तू ,काश ये सब मुझे पहले ही पता चल जाता तो तेरे साथ ही रोज सुहागरात मनाया करता,लेकिन कोई बात नही अब भी देर नही हुई है अब तुझे अपने बच्चे की माँ बनाऊंगा ‘

उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और हर जिस्म को अपने जीभ से गिला करने लगे ,मैं ना चाहते हुए भी गीली हो रही थी और उनके मर्दाना बदन को अपने जिस्म से सटा रही थी मैं रो तो रही थी लेकिन मेरे योनि से आग की जलन ने मुझे उनके नीचे होने में कोई दिक्कत नही होने दी ,उस दिन उन्होंने मुझे खूब रगड़ा,आपकी बीवी उस दिन दो मर्दो के साथ संभोग कर चुकी थी और आप अपने ऑफिस में थे ,बाबुजी की एक बात तो अच्छी थी की वो आपसे और हरीश से भी ज्यादा ताकतवर थे और वो मुझे पीसकर रख देते थे,पहले मैंने इसे अपने तक ही रखने की सोची लेकिन ,उन्होंने मर्यादाओ को लांघना शुरू कर दिया,वो बाहर भी मेरे साथ एक वेश्या के तरह वर्ताव करते,आपके पूरे कॉन्डोम को उन्होंने ही खत्म किया था,जब आप ऑफिस में होते या फिर जब आप सोए होते तो आपकी बीवी उनके नीचे अपनी जवानी को मसला रही होती थी ,उन्होंने एक सुनसान जगह में कार में भी मुझे चोदा था,और बगीचे में भी ,कई बार उन्होंने मुझे अपने वीर्य से नहला भी दिया और मुझे भर भी दिया ,......”

मैं और हरीश दोनो ही नेहा की ओर मुह फाडे देख रहे थे ,नेहा के चहरे में ये सब याद करके एक उत्तेजना सी आ गई थी ,उसका चहरा मादक हो गया था ,वो एक झीनी सी नाइटी में थी जिसके अंदर कुछ भी नही पहने होने के कारण उसके जिस्म का हर भराव साफ साफ दिख रहा था,हाथो में भरी हुई चूड़ियां माथे की काली बिंदी और मांग में भरा हुआ सिंदूर उसे और भी आकर्षक और उतेजक बना रहा था,और उसके मुह से मादक आवाज में ये सब सुनकर मेरे और हरीश के लिंगो ने भी झटके मारने शुरू के दिए थे जो की हमारे ढीले निकर में बने टेंट से साफ ही समझ आ रहा था ,नेहा ने मेरे लिंग को अपने एक हाथ से पकड़ा क्योकि उसका दूसरा हाथ हरीश के लिंग को सहला रहा था ,

“आह ,”मेरे मुह से अचानक ही निकल गया था नेहा ने बोलना शुरू किया,

“सच तो ये है की मुझे बाबुजी के साथ बहुत ही मजा आने लगा था क्योकि जो तुम दोनो ही नही कर सकते वो उन्होंने मेरे साथ किया ,वो तुम दोनो के बराबर थे,लेकिन उन्होंने अति करना शुरू कर दिया हद तो तब हो गई जब उन्होंने हरीश को घर बुलाया और उसके सामने ही मुझे चोदा,और ये बस मुझे देखते हुए अपना लंड ही हिला रहा था,लेकिन तब ही मुझे एक और भी चीज समझ आई की हरीश को भी मुझे दूसरे से चुदते हुए देखना पसंद था,लेकिन इसके बाद हम दोनो ही रोया करते थे,बाबुजी अपने मकसद में कामियाब हो रहे थे,उन्होंने मुझे अपने प्रेमी के सामने चोदा था और अब वो मुझे मेरे पति के सामने चोदना चाहते थे,लेकिन मैं नही चाहती थी की आपको भी ये दर्द सहना पड़े जो की हरीश को सहना पड़ा था,क्योकि मैं जानती हु की भले ही लिंग के खड़े रहने तक ये चीजे अच्छी लगे पर ये आत्मा हो ही मार देती है ,मैं नही चाहती थी की मेरे दोनो प्यार उस कुत्ते के गुलाम बन जाए और वो जब चाहे जैसे चाहे मुझे आप दोनो के सामने रौदे ,इसलिए मैंने उन्हें रास्ते से हटाने का प्लान बनाया ,मैं उन्हें गांव में मार देना चाहती थी ,जब वो मुझे आपके सामने चोदने की तैयारी कर रहे थे,उन्होंने कहा था की उसके मन में मेरा डर इतना हो जाए की वो कुछ बोल ही ना पाए एक बार वो मेरे गेयर में आ गया फिर कुछ भी करना नही पड़ेगा,मैं अब बाबुजी के सामने एक रंडी की तरह व्यवहार करने लगी थी ताकि उन्हें मेरे ऊपर शक ना हो ,उन्हें लग रहा था की मैं उनका साथ दे रही हु लेकिन असल में मैं उन्हें मरना चाहती थी ,हरीश ने मुझे कहा था की अगर मैं गांव में उन्हें मार दूंगी और उनके ऊपर बलात्कार का जुर्म लगा दूंगी तो वो मुझे बचा सकता है,हम दोनो ने ही ये प्लान किया था की आपके आने से पहले ही ये काम हो जाना चाहिए,और इसी लिए मैंने आपके दिमाग में ये बात डाल दी की मैं अभी तक उनके नीचे नही आयी हु लेकिन जल्द ही वो मुझे जबरस्ती अपने नीचे ले आएंगे,दो दिनों तक उन्होंने मुझे खूब चोदा क्योकि घर में बहुत से काम करने वाले थे और उनके रहते मैं कुछ नही कर सकती थी लेकिन फिर उन्होंने सब को छुट्टी पर भेज दिया ताकि जब आये तो आपके ऊपर वो अपना अधिकार आसानी से जमा सके ,यही वो वक्त था जब मुझे अपना काम करना था,लेकिन मुझे पता चला की आप घर से निकल चुके हो ,मैंने हरीश को आपके ही पीछे लगा रखा था,हम दोनो ने ही प्लान बदलने की सोची क्योना आप ही बाबुजी को मार दे,लेकिन इसके लिए ये जरूरी था की आपके अंदर का मर्द बाहर आये और मुझे आपके ऊपर थोड़ा तो भरोषा था,लेकिन पहले दिन आप सिर्फ देख कर ही चले गए ,आप जब रोशनदान से हमे देख रहे थे तो मुझे और बाबुजी दोनो को ही पता था की आप हमे देख रहे हो ,वो इससे खुस थे ,लेकिन उन्हें ये उम्मीद नही थी की आप सुबह होते ही इतने खतरनाक मूड में आ जाएंगे,उन्होंने दूसरे दिन पूरे दिन आपका इंतजार किया ,की आप आये लेकिन उधर हरीश आपको दारू पिला रहा था और आपके दिमाग में ये बात डाल रहा था की आपको अपने बाबुजी को मार देना चाहिए,अगर आप उन्हें नही मारते तो शायद मैं उन्हें मार देती क्योकि अब समय कम था और मेरे सहने की सीमा भी खत्म होने लगी थी,मैंने वो रोड कमरे में लाकर रखा था,फिर जो हुआ वो तो आप जानते ही हो ,......अब मैंने कितना सही किया या गलत ये तो मुझे नही पता लेकिन जो भी किया कही ना कही सिर्फ हम दोनो के लिए ही नही आपके भी भलाई के लिए किया ,चाहे बाबुजी कितने बड़े मर्द क्योना हो जो की मुझे सच्चे अर्थों में संतुस्ट करते थे लेकिन प्यार तो मैंने आप दोनो से ही किया है और उन्होंने मुझे बलात्कार से ही पाया था ना ही प्यार से ,मुझे अपने जिस्म की प्यास पर भी घृणा आने लगी थी ,अब मुझे कोई भी ग्लानि नही है,मैंने जो भी किया वो अपने प्यार के लिए ही किया ,वरना अगर मुझे बस अपनी वासना की फिक्र होती तो मैं आप दोनो को ही बस बाबुजी का गुलाम बनने देती आप दोनो बस मेरे चुद से उनका वीर्य साफ किया करते,और वो आपके ही सामने आपके प्यार को रौंदा करते ………..”

बोलते बोलते नेहा के आंखों में आंसू आ गए थे,वो हमारे निकर से हमारा लिंग निकाल कर सहला रही थी लेकिन अब उसके हाथ थम चुके थे,वो भीगी हुई आंखों से मेरी ओर देखने लगी

“मैं आपसे बहुत प्यार करती हु ,आप मेरे पति थे ,लेकिन मैं हरीश से भी बहुत प्यार करती हु वो मेरा पहला प्यार है,मेरे लिए आप दोनो को ही छोड़ना कठिन है ,शायद मैं आप दोनो की ही गुनहगार हु लेकिन अगर हो सके तो मुझे अपना लो ,जिंदगी भर दोनो ही मेरे पति और प्रेमी बनकर रहो,मैं जानती हु की बाबुजी के जिस्म से संभोग करने के बाद मेरे लिए आप में से एक के साथ ही जीवन भर रहना संभव नही है,कोई एक मुझे संतुस्ट नही कर पायेगा,हो सके तो दोनो ही मिलकर मुझे संतुस्ट करो …”

वो हमारे लिंग को जोरो से दबाती है अब उसके चहरे में फिर से मादकता थी वही हम दोनो के चहरे में मुस्कान ,मैं और हरीश एक दूसरे के चहरे को देखने लगे …

“तूने मेरी बीवी को मेरे पीठ पीछे बहुत चोदा है ,लेकिन अब मैं तेरी बीवी को तेरे ही सामने चोदूँगा,इतनी सजा तो तुझे मिलनी ही चाहिए ”

नेहा हँस पड़ी वही हरिश थोड़ा नर्वस हो गया लेकिन वो भी तैयार था ,नेहा अपने को बिस्तर में डाल के फैल गई ,मैं उसके कोमल और कठोर वक्षो को मसलने लगा,वो आहे भर रही थी ,हरीश उसके सर के पास जाकर उसके मुह में अपना लिंग घुसाने लगा,वो उसे किसी लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी ,

मैंने उसके नाइटी को उसके जांघो से ऊपर तक सरकाया और उसके गीले योनि में अपना लिंग सहलाया ,उसने आह भरकर मेरे सर को पकड़ लिया ,आज ना जाने मेरे लिंग में ऐसी अकड़ कहा से आ गई थी,मेरी बीवी आज मेरे साथ एक प्रेमी की तरह चुदने वाली थी वही जो लड़का कभी नेहा का प्रेमी हुआ करता था वो आज उसका पति था,जो की सामने खड़े अपनी नई बीवी को अपने प्रेमी से चुदते हुए देखने वाला था,नेहा अब हरीश के लिंग को छोड़कर मेरे होठो में अपने होठो को घुसने लगी हम दोनो ही एक दूसरे के होठो को खा रहे थे और हरीश बिस्तर के पास खड़ा अपने लिंग को सहला रहा था ,मैंने अपने लिंग को थोड़ा और सरकाया और वो आज सालो के बाद नेहा की योनि में समा गया,इतने दिनों से मैं इसका इंतजार कर रहा था ,मैं आज गजब की फुर्ती दिखा रहा था,क्योकि पूरे साल मैंने अपने शरीर पर ही ध्यान दिया था,मेरे शरीरी की ताकत पहले से काफी बढ़ चुकी थी और इसका अंदाज मेरे तेज और मजबूत धक्कों से नेहा को भी हो रहा था…

“आह अगर इतना पहले ही चोदते तो मैं किसी और के साथ क्यो जाती आह आह आह “

नेहा पूरी तरह से गर्म हो कर शांत हो चुकी थी ,और मैं अपना लावा उसके अंदर छोड़ रहा था ,मैं थोड़े देर के लिये नेहा से अलग हुआ जब हरीश ने कमान सम्हाली अब वो अपने लिंग से नेहा की कि चुद फाड़ रहा था,नेहा आहे भर रही थी ,मैं उन्हें देखकर फिर से तन गया ,मुझे एक गहरी सी जलन भी हो रही थी मैं और हरीश दोनो ही एक दूसरे से ज्यादा अच्छा होने की कोशिस कर रहे थे जिसका पूरा मजा नेहा उठा रही थी ,हरीश के बाद फिर से मैं आया और मेरे बाद फिर से हरीश हम तीनो ही थकने का नाम ही नही ले रहे थे,जब तक की हम उठाने के बिल्कुल भी काबिल नही रहे तब तक हमने नेहा की चुदाई की,नेहा की भी हालत खराब हो गई थी,आखिरी बार मैं नेहा के अंदर झड़कर एक रन से हरीश से जीत गया ……..

एक सप्ताह के बाद ……..

हरीश के नए फ्लेट में प्रबेश की पार्टी थी और पास के ही अंकल आंटी भी आये हुए थे ,सभी बुजुर्ग नेहा के व्यवहार से बहुत ही खुस दिख रहे थे,वो उन्हें अपनी खुद की बहु की तरह प्यार दे रहे थे,एक आंटी नेहा को देखकर बहुत ही भावुक हो गई,नेहा सर ढंके हुए साड़ी और सिंदूर और हाथो में चूड़ी और पैरो में पायल पहने किसी नई दुल्हन ही लग रही थी ..

“बेटा हरीश तू कितना खुसनशिब है की तुझे इतनी संस्कारी बीवी मिली ,सच में कितनी मासूम है बहु …”

हम तीनो की नजरे मिली और हमारे चहरे में मुस्कान खिल गया

‘मासूम बहु’ मेरे होठो से अनायास ही निकला ……..

********* समाप्त **********

 
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