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मासूम बहु Incest(sasur-bahu)

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मासूम बहु Incest(sasur-bahu)

वक़्त भी क्या क्या खेल दिखता है ,अभी दो साल पहले की ही बात है जब मेरी माँ का देहांत हो गया था,लगा की जैसे दुनिया ही लूट गई ,मेरी मा ही थी जिनसे मेरे दिल का रिश्ता था ,वो मेरे और पिता जी के बीच संवाद का माध्यम थी ,मेरे पिता जी फौज में थे बहुत ही अनुशासित जीवन का पालन करने वाले और बहुत ही कड़क उनसे मेरे कभी नही बनी ,मैं उनसे इतना डरता था की उनके सामने होने से हकलाने लगता था वो भी मुझे बिल्कुल भी पसन्द नही करते थे ,मैं उनके जैसा नही था उन्हें एक कड़क मर्द चाहिए था और मैं एक सामान्य सा लड़का था जो जोर से चिल्लाने से ही डर जाया करता था ,मैं अपनी मा पर गया था,उनकी कोमलता शायद औरत होने के कारण सबको बहुत पसंद आती थी लेकिन मेरी कोमलता मेरे पिता को बिल्कुल भी पसन्द नही थी ,मैं हमेशा ही अपनी मा के पल्लू में छिपकर रहा करता था,कुछ चाहिए तो अपनी मा से मांगता वो मेरे पिता से कहती थी ,

“उसे मेरे सामने आने से इतना डर क्यो लगता है ,अब वो बड़ा हो गया है जो कहना है मेरे सामने आ कर कहे “ये आवाज अक्सर मेरे कानो में पड़ा करती थी ,पिता जी लंबे चौड़े और भारी भरकम शरीर के मालिक थे और साथ ही उनका व्यक्तित्व बहुत ही जानदार था,अक्सर लडकिया उनपर मर जाया करती थी ,वो मेरे लिए कितने भी सख्त क्यो ना रहे पर माँ की हर बात वो मान ही लिया करते थे ,वो माँ से बहुत प्यार करते थे और कभी उनपर रौब झड़ते हुए मैंने उन्हें नही देखा वो आखरी समय में भी उनका बहुत ख्याल रखते थे,यही वजह थी की जब माँ ने अपनी आखरी इच्छा रखी तो वो ना नही कर पाए …

“मेरे जाने के बाद विकास की शादी कर देना ,ये तो तुमसे नही कह पायेगा लेकिन मेरे जाने के बाद वो बेसहारा ना हो जाय ,और इस घर में एक लड़की का होना जरूरी है “माँ ने जब ये बात कही थी तो मेरे और पिता जी के आँखों में आंसू आ गए ,माँ के जाने के कुछ ही महीनों के बाद मेरी शादी कर दी गई ,मैं शहर में एक साफ्टवेयर इंजीनियर था और शहर में ही रहता था ,पिता जी गांव में रहकर गांव की खेती देखते थे ,ना मेरी कभी इतनी हिम्मत हुई की मैं उन्हें अपने साथ शहर आने का निमंत्रण दु ना ही वो खुद से कभी शहर आये ,लेकिन सब कुछ बदलने वाला था ,ये बदलाव आया मेरी पत्नी की वजह से नेहा …

रूप की रानी और मासूमियत की देवी नेहा ,गांव की लड़की थी,बेहद ही सुंदर ,मेरी अच्छी नॉकरी और मेरे परिवार की इज्जत का परिणाम थी नेहा,एक बड़े किसान परिवार से आयी थी और संस्कारो से भरी हुई थी ,घर आने के कुछ ही दिनों में उसने ना जाने क्या जादू चला दिया ,वो मेरे और पिता जी के दिलो में राज करने लगी ,मैं तो उसकी सुंदरता पर मोहित था ही ,पिता जी भी उसे बेहद प्यार किया करते थे,उसने कुछ ही दिनों में मेरी मा की जगह ले ली ,लेकिन अब मुझे गांव से शहर जाना था …

“पिता जी आप भी चलिए ना हमारे साथ “

नेहा सर में घूंघट डाले पिता जी के सामने खड़ी थी जो अभी एक आराम कुर्सी में बैठे थे,नेहा का चहरा साफ दिख रहा था वो नई दुल्हन के लिबास में ही रहना पसंद करती थी ,हाथो में भरी चूड़ियां और मांग में भरा हुआ सिंदूर . हाथो में एक ट्रे था जिसमे पानी का एक ग्लास और चाय का कप था ,पिता जी ने पहले पानी पी फिर चाय का कप पकड़ते हुए कुर्सी में पसर गए ,

“नही बहु यहां बहुत काम है ,और इस गांव में ही तो मेरा सबकुछ है इसे छोड़कर कैसे जा सकता हु ,यहां बसी यादे ….”बस वो इतना ही बोल पाए

“तो क्या हम आपके अपने नही है “

पिता जी के होठो पर मुसकान आ गई

“बेटा ये तुमसे किसने कह दिया की तुम मेरे अपने नही हो ,लेकिन अभी अभी तो तुम दोनो ही शादी हुई है ,थोड़ा प्रिवेसी भी तो चाहिए तुम दोनो को ,और यहां मेरी सेवा करने के लिए नॉकर भी तो है “

नेहा के आंखों में आंसू आ गए थे

“क्या मेरे होते हुए आपकी सेवा नॉकर किया करेंगे ,”वो सुबकते हुए बोली ,पिता जी खड़े हो गए और उसके सर पर अपना हाथ फेरने लगे ,नेहा पिता जी के छातियों तक ही आ रही थी ,

“अरे बेटा उदास क्यो हो रही हो ,मैं आऊंगा ना तुमसे मिलने के लिए ,लेकिन अभी नही अभी तुम दोनो जाओ अपनी गृहस्थी सम्हालो “

पिता जी मेरी तरफ देखने लगे ,अचानक उनके चहरे में आये भाव से मेरा कलेजा कांप गया ,वो मुझसे कभी इतने प्यार से बात नही करते थे …

“विकास “

“जी जी पिता जी “मैं हकलाया जिससे नेहा थोड़ी हँस पड़ी ,जिससे मैं और भी नर्वस हो गया

“अगर बहु को कोई भी शिकायत हुई तो …..”

“जी जी पिता जी ,”

नेहा सर गड़ा कर हँसने लगी वही पिता जी नेहा को देखकर मुस्कुराने लगे ………...conti....................
 
गांव से शहर आकर मुझे बहुत ही हल्का महसूस हुआ ,गांव में पिता जी की उपस्तिथि में मुझे बंधा हुआ सा फील होता था ,लेकिन मेरे बीवी के लिए चीजे बिल्कुल ही अलग थी ,वो हमेशा ही गांव में पली बढ़ी थी बड़े से घर में रहने की आदत ,खुला हुआ आंगन ,बड़े बड़े खेत और बगीचे और शहर में मेरा 2bhk का घर ,जितना बड़ा यहां पर गार्डन था उतनी तो मेरे घर की बाड़ी थी जंहा हम सब्जियां बोया करते थे,उसे ये सब कुछ अजीब सा लग रहा था ,लेकिन वो अपनी पूरी कोशिस कर रही थी ,मैं एक साफ्टवेयर} इंजीनियर था और मेरे आसपास के लोग भी अधिकतर IT के लोग थे ,उनका रहन सहन सब नेहा से अलग ही था,वो साड़ी से लिपटी हुई ,हल्का घूंघट डाले जब मेरे फ्लेट से निकलती थी तो लोग उसे अजीब नजरो से देखते थे,ऐसा नही था की वो पढ़ी लिखी नही थी ,उसने भी ग्रेजुएशन किया था लेकिन माहौल का फर्क उसे रास नही आता था,उसके बावजुद उसके मिलनसार स्वभाव और गांव से मिला हुआ अपनत्व की भावना से उसने अपने आस पास के लोगो का दिल जितना शुरू कर दिया था ,मेरा शमशान सा घर अब बगीचे की तरह महकने लगा था,लोग मुझे भाभी जी के पति के रूप में जानने लगे थे ,मेरे घर में आसपास की औरते आने जाने लगी थी ,और ये सब 1 ही महीने में होना शुरू हो गया था,नेहा को लोग बहुत पसन्द करते कारण था की वो खुलकर लोगो की मदद करती ,मैं एक बुझा हुआ आदमी था वही नेहा एक जिंदादिल महिला……

इधर हमारा शाररिक आकर्षण भी एक दूसरे के लिए बढ़ने लगा था ,उसकी चंचलता,सादगी और प्यार ने मुझे उसका दीवाना बना दिया था ,मैं उसका गुलाम ही होता जा रहा था,उसकी हर अदा मुझे उसका दीवाना बना देती ,मेरे दोस्त भी मेरी किश्मत पर रक्स करने लगे थे,वो गदराए हुए जिस्म की मलिका थी,जिसे वो अधिकतर अपनी साड़ी से ढककर ही रखती ,कालोनी की दूसरी औरतों के कहने पर उसने अभी अभी सलवार पहनना भी शुरू कर दिया था लेकिन कम ही ,मैंने भी अपनी तरफ से उसे खोलने की बहुत कोशिस की और उसके लिए नए नए डिजाइनर अंडरगारमेंट्स उसे लाकर दी ,उसके पुराने अंडरगारमेंट्स को फेकना पड़ा तब जाकर वो नए पहनना शुरू की ,और समय के साथ साथ ही वो बिस्तर पर भी खुलने लगी थी,जब वो बस अपने पेंटी और ब्रा में होती तो उसका बदन जानलेवा हो जाता था,दूध में सिंदूर मिले रंग सी उसकी त्वचा और भरा हुआ शरीर मेरे पसीने ही छुड़ा देता,लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका शर्माना था,उसकी शर्म सचमे जानलेवा थी ,वो अपने पत्नी के धर्म को बखूबी निभाती और गर्म होने पर पूरा साथ देती थी…

उसके अंदर का जानवर जब बाहर आता तो मेरे लिए भी उसे सम्हालना मुश्किल हो जाता,वो ठहरी गांव की तुस्त दुरुस्त गदराई लड़की ,जिसका पूरा जीवन ही मेहनत के कामो में निकला था वही मैं एक मरियल सा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ,उसकी ताकत के सामने मैं अधिकतर ही फीका पड़ जाता था ,लेकिन गांव में मिले उसके संस्कारो ने शाररिक सुख को कभी भी हमारे बीच का बहस बनने नही दिया ,उसे जितना भी मैं दे पाया मैंने दिया और उसे जितना मिला वो उसमे ही बहुत खुस रही,कभी कभी मुझे इसका अफसोस भी होने लगा था ,मैं उसके सामने टिक ही नही पता था,मैंने कुछ तरीके खोजे जिससे मैं उसे संतुस्ट कर पाउ,जैसे की सेक्स से पहले उसकी योनि को खूब चाटना,उंगली करना ,फोरप्ले में ज्यादा समय देना और जब वो झरने वाली हो तब अपने लिंग को उसके अंदर घुसना ,वो इससे संतुस्ट हो जाती थी ,लेकिन एक मर्द की तरह मैं उसे रगड़ नही पता था,सप्ताह दो सप्ताह में उसे रगड़ने के लिए कुछ दवाईया लेता,जाहिर है की मैं दवाई रोज नही ले सकता था क्योकि उनका साइड इफेक्ट नपुंसकता ही होता है,दवाइयों के असर में मैं मर्द बन जाता था लेकिन फिर भी नार्मल सेक्स का मजा दवाई वाले सेक्स में नही होता,फिर भी हम दोनो खुस थे एक दूसरे की बहुत इज्जत और प्यार करते थे ,एक दूसरे का ख्याल रखते थे ,कुल मिलाकर एक परफेक्ट कपल की तरह समाज हमे देखने लगा था …….

वो पिता जी को बहुत याद करती लगभग रोज ही उनसे बात करती थी,मैं इससे दूर ही रहता था,अब शहर आये हमे 3 महीने हो चुके थे ,आखिर पिताजी को भी अपनी बहु से दूरी बर्दास्त नही हुई और खेती का काम निपटते ही उन्होंने कुछ दिनों के लिए शहर आने का मन बनाया ……..

नेहा ने ये खबर मुझे सुनाई ,मैं ना ही ज्यादा खुस था ना ही दुखी,ऐसे भी मैं सुबह से काम पर निकल जाता और शाम को आता था ,अब मैं थोड़े और देर से काम कर पाऊंगा क्योकि अब मुझे घर आने की कोई जल्दी नही होगी,मैं मन में ही सोच कर हँस पड़ा ….

सफेद शर्ट और नीला जीन्स ,रौबदार मूंछे ,सफेद पड़ने को हुए बाल ,सलीके से पहने गए काले जूते,जो दर्पण की माफिक चमक रहे थे,चौड़ी छाती जिसका पता शर्ट के ऊपर से भी लगाया जा सकता था ,आंखों में काला रेबेन का चश्मा,हाथो में टाइटन की महंगी घड़ी ,वो किसी बड़े अधिकारी की तरह रौबदार लग रहे थे,जब वो ट्रेन से उतारे तो मैं और नेहा मुह फाडे उन्हें देखने लगे ,पिता जी को हमने ऐसे वेशभूषा में कभी नही देखा था ,लेकिन मुझे याद आया की वो जब फ़ौज में थे और माँ जिंदा थी तो वो माँ को पूरा देश घुमा चुके थे,वो गांव में आने के बाद से गांव की वेशभूषा अपना चुके थे ,

“ऐसे क्या देख रहे हो ,जैसा देश वैसा भेष “उन्होंने अपना लगेज मुझे थामते हुए कहा ,हम दोनो ही उनके पैरो में झुक गए ..उन्होंने नेहा के सर पर हाथ फेरा जो की बहुत ही खुस दिख रही थी ,

“कैसी हो बेटी तुम्हे देखे जैसे सादिया बीत गई “

“अच्छी हु बाबूजी आप तो बहुत ही हेंडसम लग रहे है “वो चहकी ,पीली साड़ी में गहनों से ढकी हुई और घूंघट किये हुए उसका चहरा कुंदन की तरह दमकने लगा था…

बाबूजी उसके मुस्कुराते हुए खिले चहरे को देखकर और भी खुस हो गए और उन्होंने प्यार से उसके गालो पर हाथ फेर दिया,मैं समझ सकता था की वो नेहा को बहुत ही प्यार करते है,

“मैं समान गाड़ी में रखता हु “

हमने एक ओला किराए पर लिया था ,

“तू खुद की गाड़ी क्यो नही ले लेता “

बाबूजी और नेहा पीछे की सीट पर बैठे थे वही मैं सामने ड्राइवर के साथ ,

“बाबूजी जरूरत नही है “

मैं थोड़ा डरते हुए कहा

“अरे ऐसे कैसे तू हमेशा से नालायक है,बहु मैं तुम्हारे लिए गाड़ी लूंगा और जब तक मैं यहां हु तुम्हे चलना भी सीखा दूंगा “

मैं उनकी बात काटने की हिमाकत कैसे कर सकता था,

“सच्ची बाबुजी “

नेहा फिर से चहकी ,ऐसा लग रहा था जैसे किसी बच्ची को उसके बाप ने चॉकलेट दे दी हो ,

“हाँ बिल्कुल अभी तो मैंने फसल बेची है ,बहुत पैसा है मेरे पास बैंक में ,और मेरी बच्ची यहां किराए की गाड़ी में घूम रही है “

हे भगवान काश कभी बाबुजी ने मेरे ऊपर इतना प्यार दिखाया होता ,

“बिकास अभी चलो ,हम गाड़ी लेकर ही घर जाएंगे”

मैं हड़बड़ाया

“बाबुजी अभी “

“क्यो सुनाई नही देता क्या “

“जी जी “मैंने ड्राइवर को इशारा किया जो की हमारी बात सुनकर मुस्कुरा रहा था,उसने गाड़ी मारुति के शोरूम में ले जाकर रोक दी और बाबुजी ने तुरंत एक Swift Dzire खरीद कर नेहा को गिफ्ट कर दी ,मेरा बापू है तो दिलदार आदमी ,पहली बार मुझे उनके फैसले से बहुत खुसी हुई क्योकि गाड़ी तो मेरे नीचे ही आनी थी ,अभी तो मैं उसे चलते हुए घर भी ले आया अब कल से शुरू होनी थी नेहा की ट्रेनिंग …..continue.
 


पिता जी के आने के बाद घर का माहौल ही बदल गया था,नेहा ऐसे खुस थी जैसे कोई मिल का जादू आ गया हो ,वो दिन भर ही उससे चिपकी रही,यहां आने के बाद और मेरे और उसके सहेलियों के कहने के बाद से ही उसने साड़ी पहनना बंद कर दिया था लेकिन आज वो फिर से अपनी सहेजी हुई साड़ियां निकाल कर रख ली,वो फिर उसी भेष में घूमने लगी जो वो शादी के बाद घुमा करती थी ,वही हाथो में भरी चूड़ियां ,मांग में गढ़ा सिंदूर आदि आदि ….

रात पिता जी के पास बैठकर वो गांव के बारे में सब पूछने लगी जैसे की सालो हो गए हो उसे गांव छोड़े ,पता नही पिता जी को भी क्या हो गया था की वो उससे इतने प्यार से व्यवहार करते ,मुझसे तो कभी सीधे मुह बात तक उन्होंने नही की थी ,रात बीती और पिता जी के कारण मैं सेक्स से वछित रह गया,नेहा ने मुझे बस इतना ही कहा की जब तक पिता जी है कोई सेक्स नही छोटा सा घर है अगर उन्हें पता चल गया तो ,....

मैं तो कंडोम का फैमली पैक लेकर रखे हुए था ,अभी उनमे 20-25 कॉन्डोम पड़े ही थे ,सोचा था की 15-20 दिन में खत्म हो जाएगा लेकिन अब लगा की ये महीना तो गया,सुबह मैं जल्दी से तैयार हो कर ऑफिस गया और देर से वापस आया ,मेरा बॉस तो इस बात को लेकर बहुत ही खुस हुआ लेकिन मैं थककर चूर हो चुका था ,दरवाजा नेहा ने खोला और उसे देख कर मेरा दिमाग ही ठनक गया,वो सलवार में थी ,हाथो में वैसे ही चूड़ियां और मांग में वैसा ही सिंदूर लेकिन साड़ी के जगह सलवार .मेरी नजर की परेशानी समझ कर वो बोल पड़ी..

“पिता जी ने कहा पहनने को “मेरी आंखे और चौड़ी होती उससे पहले ही पिता जी की दमदार आवाज मेरे कानो में पड़ी

“बहु को शहर ले आया लेकिन रखना गांव की तरह ही चाहता है ,इतना पढा लिखा है और अपनी पत्नी को थोड़ी भी छूट नही देता,ये तेरी पत्नी है कोई गुलाम नही ,अब बहु वो सब कुछ पहनेगी जो शहर की लडकिया पहनती है समझा …”

वो डांटने के अंदाज में बोले

“लेकिन पिताजी मैं तो “

“चुप रहो ,इतना पढ़ाया लिखाया लेकिन अभी भी दिमाग तेरा गवार का ही है “

नेहा उनकी बात सुनकर हल्के हल्के हँसने लगी ,मैं गुस्से से उसे देखा वो मुझे आंख मार कर अंदर चली गई …

रात मैं उसका इंतजार करता रहा ,12 बजे वो कमरे में आयी और मेरे बाजू में आकर लेट गई

“अच्छा डांट खिला दिया तुमने “वो जोरो से हँसी ,और मेरे सीने से जा लगी

“आज पिता जी मुझे गाड़ी सीखने ले गए थे ,तो उन्होंने कहा की जैसा देश वैसा भेष अब ऐसे कपड़े मत पहना कर और मुझे सलवार खरीदने की बात करने लगे,मैंने कहा की मेरे पास तो बहुत से कपड़े है तो वो यहां आकर मेरी अलमारी देखने लगे,”नेहा का चहरा लाल हो गया था ,मुझे समझ नही आया क्यो

“तो क्या हुआ तुम ऐसे क्यो शरमा रही हो ,”

“ओहो आपने कभी मेरी अलमारी देखी है क्या ?”वो थोड़े गुस्से में बोली ,मैंने ना में सर हिलाया

“जा के देखो “

मैं झट से उठाकर उसकी अलमारी खोली ,ओ माई गॉड ..इतने दिनों में मैंने उसे बहुत सी सेक्सी पेंटी और ब्रा गिफ्ट की थी ,इंटरनेट से एक से बढ़कर एक बेबीडॉल मांगवाए थे,जिसमे से कई को तो पहनी भी नही थी,वो सभी वँहा खुले पड़े थे , बाकी के कपड़े तह किये हुए रखे थे ,उसमे उसके सेक्सी नाइट गाउन्स भी थे.मुझे पिता जी पर गुस्सा भी आया की कोई ऐसे कैसे किसी की पर्शनल चीजो को देख सकता है …

मैं वापस आया तो नेहा मुस्कुरा रही थी

“जब उन्होंने सब देखा ही था तो मुझे क्यो डांटा “

वो फिर से मुस्कुराई

“क्योकि जब उन्होंने ये सब देखा तो मैं बहुत ही घबरा गई थी ,और जब उन्होंने आश्चर्य से पूछा की ये सब तुम्हारा है और तूम इसे पहनती हो तो मैं डर कर बोल दी की नही ये सब हमसे पहले यहां रहने वाली लड़कियों का है, आपको ये सब पसंद नही तो मैं इसे नही पहनती ,और वो यानी की आप इसे फेंकने की सोच रहे है ,वो गुस्से में बोले की आने दो उसे तुम्हे क्या गुलाम समझता है की जो वो बोलेगा वही तुम पहनोगी,उन्होंने कहा तूम इसे पहना करो और तुम्हारी मर्जी हो तो और कपड़े ला दूंगा ये दुसरो के कपड़े क्यो पहनोगी ,अब आप ही बताओ मैं क्या कह सकती थी “

उसकी मासूम से जवाब ने मुझे चुप करा दिया था

“लेकिन ये क्या बात हुई वो कैसे तुम्हारे पर्सनल चीजो को देख सकते है “मैं हल्के से भुनभुनाया ,वो हँसी

“अच्छा तो कल बता दूंगी क्या उन्हें की आप ऐसा बोल रहे थे “मैं बुरी तरह से हड़बड़ाया

“पागल हो क्या”वो खिलखिलाकर हँस पड़ी

“अच्छा तो आज गाड़ी सीखने गए थे क्या हुआ आज “वो एक अजीब नजर से मुझे देखने लगी

“अरे क्या हुआ ???”

“कुछ नही बाबुजी ने मुझे थोड़ा सा सिखाया और खुद भी चला कर दिखाया ,वो बोल रहे थे की कुछ ही दिन में मैं अच्छे से सिख जाऊंगी “

नेहा ने कभी मुझसे झूट नही कहा था लेकिन आज जब वो बोल रही थी उसकी नजर नीचे थी ,मैं समझ नही पाया की वो मुझसे क्या छुपा रही है ,लेकिन कुछ तो था खैर जो भी हो बाबुजी उसके साथ थे तो मुझे डरने की क्या जरूरत थी ,मैं उसके पास आने लगा लेकिन वो मुझे झटके से दूर कर दी

“बाबुजी है “उसने मझे समझने वाले अंदाज में कहा और मैं मन मसोज कर ही रह गया ... continue...............

 
ऑफिस से आकर दरवाजा खटखटाया और जब दरवाजा खुला तो साथ ही मेरा मुह भी खुला हुआ रह गया,नेहा मेरी संस्कारी ,शर्मीली नेहा ,साड़ी में लिपटे रहने वाली नेहा ,बस एक फ्रॉक में घूम रही थी ,वो मुझे देखकर थोड़ी शरमाई ,आश्चर्य तो ये था की इस कपड़े के होने का भी मुझे पता नही था,रात मुझे पता चला की आज वो और बाबुजी शॉपिंग के लिए गए थे और वहां उसने ये सब खरीदा था,वो इस मॉर्डन ड्रेस में इतनी कमाल की लग रही थी की मुझे अपनी ही किस्मत पे नाज होने लगा था,मेरी शादी के समय कुछ लड़कियों के पारखी दोस्तो ने मुझे कहा था की तेरी किस्मत बहुत ही अच्छी है जो तुझे इतनी अच्छी लड़की का साथ मिला ,आज वो बात मेरे समझ में आ रही थी ,नेहा कमाल की लग रही थी ,इसके सभी रंग मैं देख रहा था,वो आज जरूरत से ज्यादा ही शर्मा रही थी लेकिन मुझसे ना की बाबुजी से ,मेरे बैडरूम में आ जाने के बाद भी वो एक घंटे तक उनके रूम में बैठी हुई उनसे बतियाती रही ,और मुझे रोज की तरह सेक्स से साफ साफ मना कर दिया ,रोज तो मैं खुद को सम्हाल ही लेता था लेकिन आज उसके रूप को देखकर मेरे अंदर का जानवर बार बार जाग रहा था और मैं कुछ भी नही कर पा रहा था,.......

“ओह बाबुजी “

“अरे मेरी कोमल कोमल बहु ,”

“छोड़िए ना “

“क्यो अच्छा नही लग रहा है क्या “

“बहुत ही अच्छा लग रहा है लेकिन वो आ जाएंगे तो “

“अरे वो साला क्या करेगा ,वो मर्द भी है क्या ,मेरी चौड़ी छातियों में तुझे मजा आता है की उसकी “

“बाबुजी आपकी बालो से भरी चौड़ी छाती मुझे आपके मर्द होने का अहसास देती है वो तो किसी लड़की के जैसे लगते है जब से मैं आपके बांहो में आयी हु ,”

“तो खोल दु तेरी फ्रॉक “

“ह्म्म्म”

बाबुजी का हाथ सीधे नेहा के फ्रॉक के अंदर चला गया ,..

“नही …..”

“क्या हुआ ,अरे क्या हुआ आप ऐसे कांप क्यो रहे हो ,इतना पसीना क्यो आ रहा है “

मैंने चारो ओर देखा ,है भगवान ये कैसा सपना था ,मेरा चहरा पसीने से भरा हुआ था दिल की धड़कने बहुत ही तेज थी और सबसे बड़ी बात लिंग पूरी तरह से अकड़ा हुआ था,मैंने पूरे कमरे में एक नजर डाली ,ac अभी भी चालू था,

“क्या हुआ आपको “नेहा थोड़ी डर गई थी

“कुछ भी नही बस ऐसे ही तुम सो जाओ “

मैं पानी का एक ग्लास पी कर सोने लगा ,...

ये क्या था और सबसे बड़ी बात क्यो था ,मैं अपने खयालो में खो गया ,कालेज के दिनों में मैं बहुत सेक्स स्टोरीज़ पढ़ा करता था,उनमे से मेरा फेवरेट जेनर था cuckold ,उसमे मेरे जैसी की कंडीसन होती थी ,अगर मैं बाबुजी को मर्द मान लू तो एक ताकतवर मर्द एक कमजोर से मर्द की बीवी को उसके सामने से सेक्स करता है और कमजोर मर्द इसे देखकर उत्तेजित हो जाता है ,बीवी सुंदर होती थी और ताकतवर मर्द के व्यक्तित्व से बहुत ही प्रभावित भी होती थी ,लगभग ऐसी ही सिचुएशन मेरे साथ हो रही थी लेकिन यहाँ सामने कोई मर्द नही था सामने मेरे बाबुजी थे जो की नेहा से बच्चों की तरह प्यार करते है ,

क्या सचमे ,मेरे दिमाग ने कहा ,नही नही तू साले परवर्टेड इंसान ऐसे रिस्तो के बारे में भी गलत सोच रहा है ,लेकिन कुछ भी कहो ये सोचकर मेरा लिंग तो तन चुका तन चुका था और बेहद ही बुरी तरह से तना हुआ था,नेहा सेक्स दे नही रही थी शायद इसी का नतीजा था जो मेरे अवचेतन मन ने अपनी दमित कामनाओं का प्रक्षेपण मेरे सपनो में किया था ,जो भी मैं उसी सपने को फिर से सोच सोच कर जोरो से हिलाना शुरू किया और सच में मुझे बड़ा ही मजा आया ,

दूसरे दिन ऑफिस बहुत ही बोझील सा हो गया था ,बार बार वही तस्वीरे सामने आ रही थी ,इतने दिनों तक मैं रोज ही देर तक ऑफिस में पड़ा रहता था ,तो आज जल्दी जाने के बात सोची बॉस भी मान गया ,मैं दोपहर में ही घर पहुच गया ,अभी कोई 4 ही बजे थे ,बाबुजी के आने के बाद से मैं 9-10 बजे तक ही आता था ,नीचे कार गायब थी शायद दोनो कही गए थे ,घर में ताला लगा था मेरे पास दूसरी चाबी थी तो मैं उससे दरवाजा खोल अंदर आ गया ,फ्रेश होकर अपने सोचा थोड़ा आराम कर लू फिर सोचा यार कही घूम के आउ तो थोड़ा ठिक लगे ,भीड़ भाड़ वाला इलाका था लेकिन पास ही एक गार्डन और उससे लगा हुआ खेल का मैदान था ,शाम होने पर गार्डन में भीड़ ज्यादा हो जाती थी वही मैदान में कुछ सेहत पसंद लोग जोग्गिग किया करते थे,मैं पैदल ही वहां पहुचा ,शाम का हल्का अंधेरा था और मैदान में दूर एक गाड़ी दिखाई दे रही थी जो धीरे धीरे चल रही थी ,मुझे वो गाड़ी पहचानते देर ना लगी वो हमारी ही गाड़ी थी जरूर पिताजी यहां नेहा को ड्राइविंग सीखने लाये होंगे,दोपहर के वक़्त खेलने वाले बच्चों से ये मैदान भरा होता है ,अभी कुछ कुछ खाली था लेकिन फिर भी भीड़ थी ,मुझे उहे देखकर डर लगने लगा क्योकि कही नेहा किसी से टकरा ना जाय ,कुछ बच्चे अभी भी खेल रहे थे ,,मैं चलता हुआ उनके पास जाने लगा मैं थोड़ी ही दूर में था नेहा गाड़ी चलाने में मसरूफ थी वही पिता जी का हाथ बार बार नेहा के हाथो को छू रहा था जो की स्टेरिंग में था ,वो थोड़ी देर तक उसे पकड़े रहते खासकर जब जब कोई मोड़ लेना हो ,वो डर के उछलती ,जिसने कभी स्कूटी भी नही सीखी थी से कर की स्टेरिंग में बैठा दो तो यही हाल होता है ,सब कुछ ठिक ही तो लग रहा था ,नेहा ने आज फिर से कोई नई ड्रेश पहनी थी ,वो क्या था वो तो समझ नही आ रहा था लेकिन मुझे लगा की वो हो ना हो फ्रॉक ही होगा ,,वो इतनी खुस दिख रही थी की उसके चहरे में जो मेरी नजर जमी तो जम सी ही गई ,प्यारी सी मेरी जान ,और खड़ूस से मेरे बाबुजी ,थोड़ी देर तक यू ही चलने के बाद वो थामे और पोजिशन चेंज किया ,फिर गाड़ी दौड़ाते हुए चले गए ,उन्होंने मुझे देखा भी नही था ,मैं थोड़ा प्रकृति का मुआयना करता है घूम रहा रहा था ,सच में भागदौड़ भरी जिंदगी में हम प्रकृति से बहुत ही दूर निकल जाते है ,

तभी मेरे पास फोन आया ,

“आप कहा हो “

“क्या हुआ “

“आप ऑफिस से आ गए हो क्या आपके कपड़े रखे है “

“हाँ पास वाले गार्डन में हमने चले आया “

“ओह ठिक है ,तो जल्दी आ जाओ साथ ही खाना खा लेंगे ..”

“अरे बाबुजी …”नेहा समझ गई ,

“ह्म्म्म अब बच्चे हो क्या जो ऐसे डरते हो चलो आ जाओ मैं बाबुजी को बता रही हु की हम साथ ही खाना खाएंगे “वो मेरी बात सुने बिना ही फोन पटक दी ,...मैं डरता हुआ घर आया और बड़ी मुश्किल से सामने बैठ के खाना खा पाया ,उसके बाद के मैं कभी भी जल्दी घर आने के बारे में नही सोचा और ऐसे ही वो महीना बीत गया ,नेहा के पास मॉर्डन कपड़ो की ढेर थी जिसे पहनने में वो बिल्कुल भी नही शर्माती थी ,और बाबुजी के जाने का दिन भी आ गया,नेहा अब ज्यादा मॉर्डन हो चुकी थी ,ज्यादा खुली हुई ,बस एक चीज था पूरे महीने मुझे सेक्स नही मिला था ,लेकिन फिर भी मैं खुस था ,स्टेशन में माहौल गमगीन था ,नेहा उनसे लिपट कर रो रही थी इन एक महीनों ने उन्हें बहुत पास ला दिया था ,वो आज खुद ही गाड़ी चलाते हुए आयी थी,जाने से एन वक्त पहले बाबुजी ने मुझे अपने पास बुलाया ,और नेहा से थोड़ा दूर मुझे ले गए …

मैं बहुत डरा जैसे की कोई बड़ा गुनाह तो मुझसे नही हो गया लेकिन उनका लहजा बहुत ही शांत था,

“देखो बिकास तूम तो नालायक हो लेकिन मेरी बहु सोना है और तुम्हारे हाथ में मैं उसे छोड़कर जा रहा हु,....अगर कोई भी ऊपर नीचे हुई ,या तुमने उसे फिर से किसी भी बात को लेकर बांधने की कोशिस की तो ……..तुम समझदार हो ..”

गाड़ी में बैठकर चले गए और मैं समझने की कोशीस ही करने लगा की साला आखिर मेरी क्या गलती है ,बिना किसी बात के ही मुझे सुना के चले जाते है समझते क्या है अपने को ,लेकिन फिर भी मैं कुछ नही बोल पाया …..cont..............
 
बाबू जी के जाने के बाद से ही मेरा चहरा फक्क पड़ा हुआ था नेहा को समझते देर नही लगी,

“बाबुजी ने कुछ बोल दिया क्या “

मैं सोफे में बैठा था,वो मेरे पास आकर बैठ गई ,मेरे आंखों में पानी था

“बचपन से लेकर आज तक उन्होंने कभी शाबासी के दो शब्द भी नही कहे ,तुम्हारे लिए उनके मन में प्यार है लेकिन मैं ….और तुम ही बताओ की क्या मैं तुम्हें कुछ कमी होने देता हु ,क्या तुम्हे मुझसे किसी भी तरह की कोई भी परेशानी है ? क्या मैंने तुम्हे कभी भी बांधने की कोशिस की और वो जाते जाते भी मुझे सुना कर चले गए “

नेहा बड़े ही प्यार से मेरा सर अपने सीने में रखती है और बड़े ही प्यार से उसे सहलाती है

“आप बहुत ही अच्छे है लेकिन बाबुजी को हमेशा से चाहते थे की उनका बेटा उनके जैसे रहे ,तगड़ा और एक मर्द की तरह ,वो तो आपको अपनी तरह बनाना चाहते थे लेकिन आप मां जी के जैसे निकल गए बहुत ही कोमल स्वभाव के ,अब देखिए ना आपकी गलती नही थी तो भी आप उनके सामने चुप खड़े थे ,मर्द की तरह क्या आप उनसे ये नही कह सकते थे की आपकी कोई भी गलती नही है ,”

“तो क्या मैं मर्द नही हु “

मैं उसके चहरे को देखने लगा ,वो एक कुटिल सी मुस्कान अपने चहरे में ले आई की मेरे दिल के तार तार बिखर गए ,जैसे वो मुझसे कह रही हो की नही आप मर्द नही है ,मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे जलील कर दिया हो ,वो बस मुस्कुराती रही

“लीजिये पानी पी लीजिये “

“नही पीना मुझे पानी ,”मैं गुस्से से अपने रूम में चला गया ,और नेहा अपने काम में बिजी हो गई ,थोड़े देर बाद जब मेरा गुस्सा उतरा तो मुझे याद आया की मैंने महीने भर से नेहा से सेक्स नही किया है ,मैं झट से उठा और दराज खोला जंहा मैंने अपने कॉन्डोम का फैमली पैक रखा था,ये क्या बस 5 ही बचे थे ,ये तो कम से कम 20-25 रहे होंगे ,

मैं इसी असमंजस में था की नेहा कमरे में आ गई ,वो मुझे कॉन्डोमस को देखता हुआ पाकर मुस्कुराई

“बाबुजी गए नही की आपको शरारत सूझ गई “वो एक कुटिल मुस्कान से मुस्काई पता नही उसने ये कहा से सीखा था लेकिन ये मुस्कान बड़ी ही अजीब थी इसमें एक टीस सी थी जो की सीधे मेरे दिल को चिर देती थी ,

“ये तो 20-25 थे “

“वो बाबुजी देख ना ले इसलिए फेक दिए “

वो बड़े ही इत्मीनान से बोली

“तो ये पांच “

“अरे मुझे पता थी की बाबुजी के जाने के बाद ढूंढोगे इसलिए छिपा के रखे थे,आज ही वहाँ रखे है “वो शरारती मुस्कान से मुस्कुराई लेकिन उसके जवाब से मेरा दिल बाग बाग हो गया था,

मैं उसके पास आया और उसे बिस्तर में पटक दिया लेकिन वो तो मांसल देह की सुंदरी थी जिसके अंदर मुझसे बहुत ज्यादा ताकत थी ,वो मुझे उलटे ही पटक दी

“रुको तो थोड़ा मैं अभी आयी “वो खड़ी हुई और जाकर कुछ कपड़े उठाकर बाथरूम में चली गई …

थोड़ी देर बाद जब वो आयी तो मैं उसे देखता ही रह गया,वो एक झीनी सी नाइटी में थी जो उसके जांघो के ऊपर था ,काले कलर की नाइटी उसके मांसल बदन में कमाल की लग रही थी,मैं तो मुह फाडे उसे देखता ही रह गया,उसने काले कलर की ही पेंटी पहने हुई थी जो की उसके पारदर्शी नाइटी से झांक रही थी और बिना ब्रा के उसके उजोर गोर रंग के कारण बाहर झांक रहे थे वो इतनी मादक लग रही थी की मुझे लगा मैं अभी ही गिर ना जाऊ,वो मेरे पास आयी और मेरे बाजू में बैठ गई ,तभी मुझे याद आया की ये जो वो पहने हुई है वो सब ही नया है ,

“ये कब खरीदा “

“वो ...वो बाबुजी ने लेके दिया “

मेरा हलक सुख गया ,बाबुजी ने अपनी बहु को सेक्सी नाइटी और पेंटी गिफ्ट किया ,

“क्या हुआ वो बड़े ही शौकीन है ,वो इसे खरीद कर लाये और जब मैंने उन्हें ये पहन के दिखाया तो वो बहुत ही खुस हुए ,”

मुझे यकीन नही हो रहा था की ये मेरे घर में क्या हो रहा था ,मेरे बाबुजी मेरी बीवी को इन कपड़ो में देख कर खुस हो रहे थे और मेरी बीवी उन्हें ये पहन कर भी दिखा रही थी,

“तुम उन्हें ये पहन कर दिखती थी “

“हा वो ये वाला बहुत ही पसंद करते थे ,इसीलिये तो आज इसे पहना “

“ये वाला मतलब ,और भी था क्या “

मैं बौखला गया था ,लेकिन नेहा के चहरे में वही कमीनी वाली मुस्कान खिल गई ,उसने उंगली आलमारी की तरफ दिखाई

“वो पूरा भरा हुआ है ऐसे कपड़ो से “

मैं बुरी तरह से चौक गया

“लेकिन क्यो “

मेरा हलक सुख चुका था,मैं थूक गटक रहा था,पसीना मेरे चहरे में तैर रहा था और एक अजीब सी चीज की नेहा को इस तरह बाबू जी के सामने सोच कर ही मेरा लिंग तन रहा था ..

नेहा मेरे पास आयी और उसके जिस्म की गर्मी का अहसास मुझे होने लगा ,

“क्योकि वो मर्द है असली मर्द ,”

वो मेरे कानो में फुसफुसाई ,ये वही लड़की थी जिससे मेरी अभी अभी शादी हुई थी ,जो मेरे एक इशारे में कुछ भी करने को तैयार होती थी ,वो मुझसे ऐसा बोलेगी मुझे तो अपने कानो पर ही यकीन नही आ रहा था

“जानते हो उनके पसीने की बु इतनी बेहतरीन है की कोई भी लड़की उनकी दीवानी हो जाय,और उनके शरीर का एक एक कसाव ,और …”

वो रुकी उसने अपना हाथ मेरे लिंग पर रखा जो की नेहा की बातो से तना हुआ था,वो उसे मसली

“ओह ,”

“और उनका लिंग ….आपसे तो दुगुना होगा ,और वो सभी कॉन्डोम उन्होंने ही खत्म किया है ,मेरे ऊपर “

वो बोली और खिलखिला के हँस पड़ी ,मैं स्तब्ध सा बैठा ही रहा ,मैं गुस्से में आग बबूला हो गया मैं उसके बालो को कसकर पकड़ लिया और उसे झापड़ में मारने ही वाला था की वो चीखी

“खबरदार ...अगर मेरे ऊपर हाथ लगाया तो सोच लो ,बाबू जी आपका क्या हाल करेंगे “

मैं एक अजीब से डर से भर गया था मेरे हाथ अपने ही आप ढीले पड़ गए ,मैं रोने के कगार पर था ,

“अब समझ आया की असली मर्द क्या होता है ,तुम तो उनका नाम सुनकर भी काँपने लग गए हो ,तो खुद ही सोचो की एक लड़की किसे चुनेगी उसे जो अपने बाप का नाम सुनकर ही काँपने लगता है या उसे जिसका नाम सुनकर उसका जवान बेटा भी कांप जाता है “

उसके तिस्कार भरे शब्द ने मुझे अंदर तक झंझोर कर रख दिया ,मैं रोने लगा ,ये मेरी बीवी थी ,मेरी सुशील बीवी जिसे मैं दिलो जान से प्यार करता था …

“मैं हमेशा ही सोचता था की तुम मेरी मा की जगह को पूरी करोगी जो मुझे कोई दुख होने नही देती थी ,जो मुझे बाबू जी के गुस्से से बचा कर रखती थी “

नेहा फिर से जोरो से हँसी लेकिन इस बार उसकी हँसी में एक गुस्सा भी था

“मैं तुम्हारे माँ की ही तो जगह हु ,तुम्हारी माँ भी तो रोज रात को उनके नीचे आती रही होगी क्यो “वो चुप हो गई ,और मैं पागल ,इतना बेइज्जत मैं कभी नही हुआ था ,मैं अपने ही कमजोरी पर रो रहा था ,थोड़ी देर कमरे में किसी की आवाज नही आयी ,आखिर नेहा मेरे पास आकर बोली …

“रोने की कोई बात नही है ,ऐसा हमारे बीच कुछ भी नही हुआ ,ये कॉन्डोम सच में मैंने फेक दिए थे ,और ये सब पिताजी ने नही मैंने ही खरीदे थे पिताजी से छुपकर सोचा था की इन बातो से आपके अंदर का मर्द तो जागेगा लेकिन नही पिता जी का गुस्सा सही है ,मुझे भी उनके जैसा पति चाहिए ,अगर कोई दूसरा होता तो मेरी क्या मजाल थी की मैं आपके सामने ये सब बोल पाती ,आप तो उनका नाम सुनकर ही काँपने लगे “वो सुबकने लगी ,उसने जो बोला वो सच या झूट मुझे नही पता लेकिन उसके आंसू तो असली ही थे,

“आपको क्या पता मुझे कैसा लगता होगा जब वो मेरे ही सामने आपको डांटते है और आप गलती ना होने के बाद भी चुप चाप सब कुछ सुनते हो ,वो मेरे सामने आपकी बुराई करते है की उन्हें एक मर्द चाहिए था और आप क्या पैदा हो गए “

इस बार नेहा का रोना और भी बढ़ गया था ,जो जोरो से रोने लगी थी और मेरे बाजू में ही आकर बैठ गई थी ,मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा लेकिन उसने उसे हटा दिया ,

“छूना नही मुझे ,मैं उन्हें अपने पिता की तरह मानती हु लेकिन मेरा पति ही नामर्द है और वो …..”

नेहा चुप हो चुकी थी ,मैं उसे आंखे फाडे देख रहा था ,नेहा मेरी तरफ घूमी

“बाबुजी उतने अच्छे नही है विकास जितने लगते है “

अब मेरा माथा और भी भनक गया ,ये तो उनकी दीवानी थी अब इसे क्या हुआ

“वो मेरा फायदा उठाने की कोशिस करते थे ,उन्होंने जब कंडोम का पैकेट देखा तो वो मुझसे अजीब सवाल करने लगे जैसे की क्या इसे बिकास खत्म कर पता है ,क्या वो सब कर पता है ,मुझे बहुत ही बेकार लगा इसलिए मैंने सब फेक दिया ,वो कभी कभी मुझे छूने की कोसीसे करते ,पहले तो मुझे कोई भी बुराई नही लगी लेकिन बाद में वो मेरा हाथ भी सहलाते थे ,तो कभी मेरी ……..”वो चुप हो गई ,मैं उसके चहरे को देखे जा रहा था

“जांघ ,और कभी अंदर हाथ ले जाने की कोशिस करते थे “वो फिर से फफक के रो पड़ी

“क्या सच में ये सब जान कर भी तुम्हारा खून नही खोलता बिकास ,”वो रोते रोते मुझे पूछने लगी

मैं क्या कहता ,क्या करता ,मेरे दिल में जो उनका ख़ौफ़ था ,क्या मैं सच में एक नामर्द हो गया हु ,मैंने खुद से कहा ,मुझे खामोश देखकर नेहा और भी तडफ गई

“तो क्या मैं उनकी रंडी बन जाऊ क्या यही तुम्हे पसंद आएगा ,मैंने उन्हें इतने मुश्किल से रोका था ,ये सोचा था की जब मेरे पति को पता चलेगा तो उसका खून खोल जाएगा ,वो मेरी हर बेज्जती का बदला लेगा लेकिन मैं ही मूर्ख थी ,जो पीने पिता के साथ अपनी बीवी को सेक्स करते सोच कर ही अपना लिंग खड़ा कर रहा है वैसा नामर्द कैसे मेरी रक्षा करेगा,सच ही कहते थे बाबुजी की तुम नामर्द हो और तुम्हारे ये सब जानने से क्या हो जाएगा ,तुम्हारी इतनी औकात ही नही की तुम अपनी बीवी की जवानी को सम्हाल सको ,मुझे मेरा जवाब मिल गया बिकास ,और जब तुममें इतनी हिम्मत नही तो तुम इस जवानी के लायक भी नही हो ,जिसे छीनना है वो छीन ही लेगा,हा तुम्हारा बाप इसे तुम्हारे सामने ही भोगेगा और तुम नामर्द से देखते रहना ….”

वो गुस्से में बोली और वँहा से चले गई दरवाजा जोरो से बजा मूर्खों जैसे बस नेहा की बातो को ही सोचता रह गया था ,क्या वो सच कह रही थी ,लेकिन उसके और बाबुजी के व्यवहार से तो मुझे कभी कोई ऐसी बात नही लगी,क्या उसने उनके साथ सेक्स किया या जैसा वो बोल रही थी की बाबुजी ने कोशिस की लेकिन उसने मना कर दिया ...मैं बस सोचता ही रह गया लेकिन एक बात थी की जो भी हुआ हो बाबुजी से लड़ने की हिम्मत मैं नही जुटा पाया था………

continue................
 
6

एक सप्ताह से नेहा ने मुझे हाथ तक लगाने नही दिया था,मैं और भी बेचैन हो गया था क्योकि नेहा का कहना था की एक मर्द बनकर अपने ही पिता के सामने खड़ा हो जाऊ,जितने भी बार वो मुझसे ये कहा करती मैं और भी बेचैन हो जाता ,अगर नेहा झूट बोल रही हो और बाबुजी ने ऐसा कोई भी काम नही किया हो तो क्या होगा,लेकिन अगर नेहा सच बोल रही हो तो ….क्या मैं उनसे लड़ पाऊंगा,क्या मैं इसकी कोशिस भी करूँगा,क्या होगा मुझे नही पता लेकिन कुछ तो होना ही था,जो शायद मैं बर्दास्त ना कर पाउ,क्या ये बाबुजी और नेहा की ही कोई तरकीब थी जैसा की उन स्टोरीज़ में होता है की एक पति अपनी पत्नी को दूसरे से सेक्स करता देखने में मजबूर हो जाय...जो भी हो मैं अब भी नेहा को मनाने में लगा था लेकिन फिर से एक कांड हो गया,

बाबुजी का फोन आया उन्होंने नेहा को गांव बुलाया था ,

“लेकिन मुझे तो छुट्टी नही है “

मैं बेचैनी से कह गया ,

“तो मैं उन्हें मना कर दु “नेहा ने तिरिस्कार भरे निगाहो से मुझे देखा ,

“मैं कोसिस करता हु छुट्टी लेने की “

नेहा के चहरे में एक मुस्कान आ गई ,वो अजीब नजरो से मुझे घूर रहि थी ,अब वो मुझे नामर्द तो नही कहती लेकिन फिर भी जितनी हो सके मुझसे दूर ही रहा करती थी

“क्या हुआ तुम ऐसे क्यो हँस रही हो “

“तुम सच में अपने बाबुजी से डरते हो या तुम्हे भी मजा आता है अपनी बीवी को दूसरे के साथ देखकर “

“नेहा “मैं और भी लज्जित हो गया ,लेकिन मेरा सर भी नीचे हो गया था

“अगर ऐसी ही बात थी तो बोल देते तुम्हारे बाबू जी को गांव में मुझे नही बुलाना पड़ता ,मैं भी जानती हु की वो मुझे बुला कर क्या करना चाहते है लेकिन सोच लो …..अब मेरे मन में हमारी शादी को लेकर कोई भी दुविधा नही है ,अब मैं उन्हें नही रोकने वाली जब मेरा पति ही ये नही चाहता तो मैं क्यो फालतू में अपने मजे को खराब करू “

उसने एक एक बोल मेरे दिल में कटार की तरह चल रहे थे ,मैं शर्म से गड़ा जा रहा था मेरे आंखों में आंसू आ गए ,शायद नेहा को भी मेरा दिल दुखा कर कोई खुसी नही हुई थी वो मेरे पास आयी और अपने हाथो को मेरे गले में डाल कर मुझे अपने ओर खिंच ली ,ये सप्ताह में पहला दिन था जब वो मुझसे यू गले मिली थी ,वो मेरे बालो को ऐसे सहला रही थी जैसे कोई मा अपने बच्चे के बालो को प्यार से सहलाये ,

“मैं तो तुम्हारी ही बनकर पूरी जिंदगी बिताना चाहती हु लेकिन तुम ये क्या कर रहे हो अपने डर के सामने हमारे रिस्तो का सौदा कर रहे हो आखीर कब तक मैं उनसे बच पाऊंगी,या तुम्हे ये लग रहा है की मैं झूट बोल रही हु ,तुम्हे तो लगता होगा की तुम्हारा बाप बहुत ही पवित्र है या वो अपनी ही बहु साथ ऐसा कैसे कर सकता है ,मैं खुद को कब तक सम्हाल पाऊंगी हमारा समाज कभी भी मर्दो को गलत नही मानता,अगर मैं गांव में जाकर हल्ला भी मचाया तो हो सकता है वँहा के लोग मुझे ही गलत बना दे ,और तुम अगर मेरे साथ नही रहोगे तो …….तो उसकी हिम्मत और भी बढ़ जाएगी,प्लीज् मेरे साथ चलो “उसकी बातो में एक दर्द का अहसास था,अगर ऐसा है तो नेहा मुझसे बहुत प्यार करती है और मैं कैसे सिर्फ अपने डर के कारण उसे जलील होने दूंगा,मेरे दिल ने मुझसे ढेरों सवाल कर दिए

“हा मैं तुम्हे किसी के भी सामने जलील नही होने दूंगा,मैं तुम्हारे साथ रहूंगा,लेकिन अभी तो मुझे कोई भी छुट्टी नही मिल पाएगी ,मैं क्या करू ,क्या हम कुछ दिनों के बाद नही जा सकते,मैं तुम्हे वँहा अकेले नही भेजना चाहता “मेरे आंखों से आंसू सुख चुके थे और मेरे दिल में पहली बार एक हिम्मत का अहसास जन्म ले रहा था ,मैं अपने पिता से अगर नेहा सही है तो मारकर भी उसे बचाने की ठान ली लेकिन नेहा सही है या गलत इसका फैसला कौन करेगा,हो सकता है की नेहा ही पिता जी को भड़का रही हो ,लेकिन उनके यहां रहते हुए तो मुझे नही लगा ,ऐसे ये भी तो नही लगा की नेहा दुखी है ,या ये दोनो के मील जुले प्लान का कोई हिस्सा था,खैर मुझे छुट्टी चाहिए थी ,मेरे पास गांव में बहुत जमीन थी और मैं उसका अकेला ही हकदार था,लेकिन मैं गांव में नही रहना चाहता था इसलिए यहां आके रह रहा था,मेरे लिए इस नॉकरी के कोई खासे मायने भी नही थे ,मैंने सोच लिया अगर छुट्टी नही मिली तो नॉकरी ही छोड़ दूंगा ,नेहा आज खुस थी पहली बार उसने मेरे अंदर एक मर्द को जन्मते हुए देखा था,वो मेरे गालो में एक भरपूर चुम्मन जड़ दिया ..

“आप छुट्टी का कल बताइये मैं कल ही निकल जाऊंगी आप जल्दी से आ जाना हो सके तो कल साथ ही चले जाएंगे “

दूसरे दिन मैंने अपने मैनेजर से बात की उसने मुझे दो दिन बाद एक इम्पोर्टेन्ट काम खत्म करके जाने और वॉर्क फ्रॉम होम की परमिशन दे दी ,नेहा शाम को ही निकल गई ,और मुझे जल्दी आने का कह गई,वो फिर से अपने सादे लिबास में थी ,वही साड़ी घूंघट चूड़ियां ,मांग में भरपूर सिंदूर आदि...मैं ऑफिस से सीधे स्टेशन ही आया था उसे छोड़ने ,मैं थका हुआ अपने घर पहुचा ,मेरे लिए ये दो दिन बहुत ही मुश्किल होने वाले थे,मैं जाकर नेहा की आलमारी खोला,और देखकर ही चौक गया क्योकि अंदर उसके वेस्टन कपड़े तो थे लेकिन उसकी एक भी पेंटी और नाइटी नही थी ,वो अपने सभी सेक्सी अंतःवस्तो को ले गयी थी सिर्फ एक लाल कलर की पेंटी वहां पड़ी थी जिसमे एक कागज रखा दिखा लिखा था

‘अगर समय में नही आये तो सभी कपड़ो का मजा तुम्हारा वो बाप ही लेगा ,यही याद दिलाने को ये पेंटी छोड़ जा रही हु ‘

ये मेरी बीवी थी मेरी मासूम बीवी जो अब इतनी खतरनाक हो गई थी,पता नही ये दो दिन वो दोनो क्या करेंगे,नेहा की अदाओं से तो मुझे लगता था की वो मुझे जला रही है ,लेकिन क्या उसके आंसू भी नकली थे ,कहते है की कभी सुना था त्रिया चरित्र के बारे में आज देख भी रहा था,एक अंतर्द्वंद दिमाग में चल रहा था जिसका कोई भी हल मेरे पास नही था मैं भी गांव जाने को बेकरार था,मैंने फैसला कर लिया था अगर नेहा गलत होगी तो उसे तलाक दे दूंगा,अगर बाबुजी गलत होंगे तो पोलिस में भी जाना पड़े लेकिन नेहा को बचाऊंगा,फिर कभी गांव नही जाऊंगा लेकिन उनसे हमेशा के लिए ही रिश्ता तोड़ दूंगा,और अगर दोनो ही गलत हुए ????????????

तो शायद उन स्टोरीज की तरह मुझे भी वो सब देख कर मजे लेना पड़ेगा,क्या सच में मैं मजे ले पाऊँगा या मेरा जमीर जागेगा,और दोनो को सजा देगा,क्या होगा मुझे नही पता बस दो दिन का इंतजार और था सब कुछ ही पता चल जाना था

 


7

चिट्ठी को पड़ने के बाद मैं गुस्से में आकर उसे डस्टबीन में फेक दिया लेकिन मेरे हाथो में नेहा की पेंटी भी थी,मैं उसे भी फेकने ही वाला था की मुझे उसके रेशमी कपड़े का अहसास हुआ,और मेरे हाथ रुक गए,मैंने उसे प्यार से छुवा और वो बड़ा ही उत्तेजक था,नेहा के साथ सेक्स किये कई दिन हो गए थे ,अब वो पेंटी भी मुझे इतना मजा दे रही थी,मैंने उसे अपनी नाक से लागकर जोर से सूंघा ,नेहा के सूखे हुए रस की थोड़ी सी खुसबू(या बदबू )मेरे नाक में भर गई,साली ने इसे धोया भी नही था,शायद ये मेरे लिए ही था,मेरी प्यारी सी लगने वाली बीवी इतनी चालक होगी मैं तो सपने में भी नही सोच सकता था,रात मैं उस पेंटी को ही अपने लिंग से लगा कर हिलाने लगा ,और ये सोच सोच कर मेरा लिंग और भी अकड़ जाता की बाबुजी नेहा के साथ क्या कर रहे होंगे…,दूसरा दिन भी काम में बीत गया अभी भी नेहा की कोई खबर नही थी ,शाम मैंने उसे फोन लगाया उसके मोबाइल में 5 रिग चले गए लेकिन उसने नही उठाया मैं और भी बेचैन हो गया था,शाम रात में बदल गई जब नेहा का काल आया ,

“मैंने तुम्हे इतना काल किया …”

“मैं काम में थी जी,आप कैसे हो ..”

नेहा इतनी नार्मल थी ,

“अरे तुम इतनी नार्मल हो ?बाबुजी ने कुछ किया तो नही ना “

वो हल्के से हँसी

“वो मेरे ससुर है उनकी मर्जी ,और आप को कैसे फिक्र हो रही है मेरी ,अभी तक कहा थे “

नेहा मुझे जलाने का कोई भी मौका नही छोड़ती थी

“ठीक क्या रहेंगे वो ,मेरे आते ही छेड़छाड़ शुरू कर दिए ,कल से बस धोती पहने घूम रहे है घर में “

“वो तो घर में धोती ही पहनते है ना “

“हाँ लेकिन अंदर तो कुछ पहनते है ,अभी तो बस जानबूझ कर मुझे अपना सामान दिखाते फिर रहे है,”

नेहा की बात से मैं थोड़ी देर को चुप हो गया ,समझ ही नही आ रहा था की क्या जवाब दु

“क्यो चुप हो गए……..ऐसे उनका हथियार है तो जानदार,आपसे तो डेढ़ गुना होगा “नेहा की हँसी से मेरे दिल में अजीब सी कसक उठी लेकिन दिल के किसी कोने में एक अजीब सा अहसास भी हुआ मानो मैं इन बातो से उत्तेजित हो रहा था,मेरी बीवी किसी गैर के हथियार की तारीफ कर रही थी वो भी मेरे सामने ,

“क्या सोच रहे हो “नेहा की आवाज ने मेरा ध्यान भंग किया

“कुछ कुछ भी तो नही “मैं थोड़ा हड़बड़ाया

“ये तो नही सोच रहे हो की अगर वो मेरे अंदर गया तो मुझे कैसा लगेगा ,ऐसे सच बताऊ दिन भर से मैं यही सोच रही थी हा हा हा “नेहा ने एक ठहाका मारा ,लेकिन ये मेरे लिए कोई खुसी की बात नही थी ,मेरी बीवी किसी और से चुदने की बात कर रही थी वो भी मेरे सामने ,मुझे नेहा के ऊपर गुस्सा आया ,

“ये क्या बत्तमीजी …”

“सुनो ना आज जानते हो क्या हुआ “नेहा मेरे बात को आधे में काट दी ,मेरे दिल में ये जानने की तो उत्सुकता थी की आखिर क्या हो गया

“क्या “मैं बुझे हुए स्वर में बोला

“आज बाबुजी ने मुझे आकर पीछे से पकड़ लिया,मैं साड़ी में ही थी ,और जानते हो “नेहा चुप हो गई और मैं बेचैन हो कर रह गया,मैं आगे तो सुनना चाहता था लेकिन ,,,लेकिन ये नेहा से कैसे कहता,की मैं ये सब सुनना चाहता हु ,मेरी चुप्पी को नेहा समझ गई वो भी जानती थी के इससे मुझे मजा भी आता है और गुस्सा भी लेकिन मुझे ये समझ नही आ पा रहा की किसका साथ दु,गुस्से का या मजे का ..

“जानते हो ,उनका वो सच में बहुत मजबूत है,जब वो मेरे पिछवाड़े में गड़ा ना “वो धीरे से एक एक शब्द में पूरा जोर देकर बोल रही थी ,

“तो ऐसे चुभ रहा था जैसे की कोई लकड़ी हो ,आपका तो नरम हो जाता है”वो फिर से खि खि कर हँसने लगी,मेरी तो गांड ही जल गई थी ,झांटो का सुलगना क्या होता है ये मुझे अभी पता चल रहा था,

“मैं रख रहा हु “

“ऐसे कैसे पूरी बात नही सुनोगे क्या “

नेहा ने फिर से एक बम फेका

“क्या “मैं अपने स्वर को रूखा बनाने की कोसीसे कर रहा था लेकिन मेरा मुह सुख चुका था और आवाज ऐसे भी नही निकल रही थी ,लिंग पूरी तरह से अकड़ा हुआ था और सांसे अनियंत्रित तो रही थी,

“कुछ नही आपको नींद आ रही होगी जाओ सो जाओ “जरूर उसके चहरे में इस वक्त एक कातिलाना मुस्कुराहट होगी ,मैं कहना चाहता था की बताओ ना लेकिन नही कह पाया ,

“ओके जान रखु फोन “नेहा ने बड़े ही प्यार से कहा ,मैं जानता था की वो क्या कहना चाहती थी ,मैं कुछ भी नही कहा

“अच्छा तो सुन लो वरना रात भर नींद नही आएगी ,उन्होंने कहा की वो मुझे आपके सामने भी ...यानी मुझसे कहा की तुम डरो नही विकास कुछ भी नही कर पायेगा,और वो मुझे आपके सामने ,,,...”नेहा कितनी भी बेवफा या बेफिक्र क्यो ना हो जाए कुछ लाज तो उसके अंदर अभी भी बाकी था

“क्या ?”आखिर मैंने पूछ ही लिया

“वो मुझे आपके सामने भी चोद ….”नेहा चुप हो गई और मैं सब कुछ समझ गया,ये मेरी गांव की सीधी साधी बीवी थी जो मुझे बता रही थी की उसका लवर जो की मेरा बाप भी है वो उसे मेरे सामने चोदने में भी नही चुकेगा और मैं सिर्फ देखता रह जाऊंगा किसी मुर्दे की तरह मैं बस ….

“ऐसा नही होगा ,मेरे जिंदा रहते ऐसा कभी नही होने दूंगा “मैं गर्जा पहली बार मैंने नेहा के सामने इतना गुस्सा दिखाया था ,नेहा तो खुस ही हो गई

“सच में ,आप ऐसा करोगे “क्या वो रो रही थी ,क्या नेहा सचमे भोली भाली है और मेरा खड़ूस बाप ही उसको बिगाड़ने में तुला हुआ है …..

“हा मेरी जान मैं तुम्हे रुसवा नही होने दूंगा “मुझे उधर से नेहा के रोने की आवाज सुनाई दिया

“काश आप इतनी हिम्मत पहले दिखाते तो ….तो शायद मुझे यहां नही आना पड़ता ,अब जल्दी से यहां आओ ना जाने वो कल क्या गुल खिलाये और आके मुझे उसके हाथो से बचाओ वरना जो पेंटी दी थी याद है ना …”वो रोते रोते हँस पड़ी ..

तभी किसी ने उसका दरवाजा खटखटाया

“आ गया बुड्डा चलो रख रही हु ,जी बाबुजी आयी “

उसने मेरे जवाब की इंतजार किये बिना ही काल रख दिया ,और मुझे बेचैन ही छोड़ दिया ,तड़फने लगा था,आखिर इस वक्त बाबुजी को नेहा से क्या काम आ गया,अगर आज ही वो उसके साथ जबरदस्ती किये तो ….नही मुझे कुछ तो करना ही पड़ेगा ,मैंने आधे घण्टे बाद फिर से नेहा को फोन किया कोई भी जवाब नही ,एक घण्टे बाद फिर से काल किए लेकिन फिर से कोई जवाब नही ,मेरा बीपी बढ़ने लगा था ,मैं लगातार उसे फोन करने लगा लेकिन कोई भी जवाब नही मिला,आखिर में मैंने हिम्मत की और बाबुजी के फोन में काल किया ये मेरे लिए बहुत ही मुश्किल हो रहा था,हर रिंग के साथ मेरे दिल की धड़कने बढ़ रही थी लेकिन किसी ने फोन नही उठाया ,2 बार काल करने के बाद बाबुजी के फोन में काल करने की मुझे हिम्मत ही नही हुई ,मैं फिर इस नेहा के पास काल किया लेकिन कोई जवाब नही मुझसे अब सह पाना मुश्किल हो गया था ,मेरे दिमाग में बार बार नेहा की प्यारी सी चुद में बाबुजी का बड़ा सा हथियार घुसता हुआ दिखाई देने लगा था एक तरफ ये सब सोच कर ही मेरे दिल की धड़कने बढ़ रही थी तो दूसरी तरफ मेरा लिंग भी अकड़ने लगा था ,आखरी मैंने फैसला किया की नॉकरी माँ छुड़ाए मैं गांव जाऊंगा और अभी जाऊंगा,मैंने थोड़े कपड़े तुरंत पैक किये और कार से गांव की ओर निकल पड़ा ,4-5 घंटे का रास्ता था ,लेकिन मैं जितने जल्दी हो सके वँहा पहुचना चाहता था ….

 
8

काली रात थी और टिमटिमाते हुए जुगनुओं के बीच मैं गांव पहुचा समय बहुत हो चुका था लगभग 12 बज चुके थे,पूरे गांव में सन्नाट पसर गया था ,ऐसे भी यहां 8-9 बजे ही लोग सो जाया करते है,मैं अपनी उम्मीद से पहले ही पहुच गया था,इतनी तेज गाड़ी मैने कभी भी नही चलाई थी ,मेरा घर गांव से थोड़े दूर में था ऐसे भी वँहा अधिकतर बड़े घर गांव से थोड़े दूर में बसे थे ,मेरा घर भी उनमे एक था जिसमे बड़ा सा बगीचा था और दो मंजिली इमारत थी,ऐसे तो चारो ओर घेरा किया हुआ था लेकिन शांत इलाका होने के कारण चोरी के डर से मुक्क्त था,बस जंगली जानवरो से फसल को नुकसान ना हो जाए इसलिए तारो से घेर दिया गया था ,मैंने कर अपने घर के बाहर रोकी मुख्य इमारत और गेट के बीच अच्छी खासी दूरी थी ,पिता जी का सपना था की एक बंगले जैसा घर हो ,वो बंगला तो नही बन पाया लेकिन एक फार्महाउस जैसा जरूर बन गया था मैं बाहर खड़े होकर फिर से नेहा को फोन लगाया लेकिन कोई जवाब नही पाकर मैं कार वही छोड़कर दरवाजे से खुदकर अंदर गया ,मुझे तो घर का कोना कोना पता था अगर कोई दरवाजा नही खोला तो भी मेरे पास कुछ साधन थे की मैं अंदर जा सकता था ,जब मैं इमारत के पास आया तो पिता जी के कमरे की लाइट जलते हुए दिखाई दी ,उनका कमरा ग्राउंड फ्लोर में था,पहले मैंने अपने कमरे को चेक किया जो की फर्स्ट फ्लोर में था लेकिन वँहा की लाइट बंद थी ,मैं पिता जी के कमरे के पास पहुचा और अंदर झांकने की कोशिश करने लगा,खिड़कियां बंद थी ,और मुझे कुछ सूझ नही रहा था मेरे दिमाग में एक तरकीब आयी मैं अपने बगीचे से बांस की बानी सीढ़ी पकड़ लाया और ऊपर के छोटी खिड़की से अंदर देखने लगा ,नजारा पूरी तरह से साफ था,और मेरा दिल पूरी तरह से टूटा हुआ ,...

अंदर नेहा बाबुजी के लिंग को अपने मुह में डाले हुए अपना सर हिला रही थी ,किसी भी तरह से ये तो नही लग रहा था की वो किसी भी मजबूरी में है ,वो एक झीनी सी नाइटी पहनी हुई थी वही बाबुजी पूरी तरह से नंगे बिस्तर में सोए पड़े थे,नेहा ने सच कहा था की उनका हथियार मेरे हथियार से कही बड़ा और मजबूत है,उनकी छाती की चौड़ाई भी कमाल की थी ,इस उम्र में भी वो असली मर्द लग रहे थे ,नेहा का कोमल शरीर बिस्तर से नीचे घुटनो के बल बैठा हुआ था,बिस्तर की हालत देखकर वो लगता था की कुछ राउंड हो चुके है नेहा की पेंटी बिस्तर के एक ओर पड़ी थी तो ब्रा बिस्तर से नीचे,यानी ये लोग फिर से कारनामा करने वाले थे और नेहा कुछ देर पहले ही अपने नंगे जिस्म में ये नाइटी डाली होगी,और दोनो में से किसी का फिर से मूड बन गया होगा ,मेरे लिए इससे ज्यादा देखना कठिन था आखिर मैं क्या देख रहा था अपनी ही बीवी को अपने ही पिता के साथ ये सब करते ,और मैं क्या कर सकता था मार डालू दोनो को ?????

तलाक दे दु ???? क्या करू …….

मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका था और जो भी मुझे समझना था मैं समझ चुका था मैं चुप चाप उठा और सीढ़ी को उसके स्थान में रख जैसे आया था वैसे ही वँहा से निकल गया ,कार को जंगलो की ओर घुमा दिया और एक सुनसान सी जगह में रोक लिया ,नीचे उतरा और जोरो से चिल्लाय ..

“आआआआ “मेरे आंखों में आंसू फुट गए ये उस मजबूरी के आंसू थे जो मैं इतने दिनों से सह रहा था,मुझे बड़ी जोरो से शराब या सिगरेट की तलब लग रही थी ,ऐसे तो सालो से मैंने इन्हें हाथ भी नही लगाया था लेकिन कालेज के समय की थोड़ी लत अभी भी बाकी थी,मैं सोच में पड़ा हुआ था की क्या करू घने जंगल में यू अंधेरी रात को मैं अकेला कार के बाहर बैठा था ,लेकिन मेरे दिल में थोड़ा भी डर नही था ,मैं यू ही ना जाने कितने देर यू ही बैठा हुआ था ,की मेरे मोबाइल की रिंग बजी मैं बहुत ही थका हुआ था ,शायद यू ही बैठे हुए मुझे नीद आ चुकी थी ,स्क्रीन में देखा तो नेहा का फोन था अभी 4 बज रहे थे ,यानी बाबुजी के उठाने का समय था,वो जरूर उठकर उसे भी अभी उठाये होंगे और रात भर चुदने के बाद अभी वो अपने ……….हमारे कमरे में गई होगी ..

“हलो अपने काल किया था मैं सो गई थी “

“मादरचोद फोन रख “

मैं एक स्वाभाविक से अंदाज में बोला

“हैल्लो हैल्लो ..क्या क्या कहा अपने “शायद नेहा को भी ये कभी यकीन नही होता की मैं ऐसा भी कुछ बोल सकता हु

‘मैंने कहा मादरचोद फोन रख “

थोड़ी देर को एक शांति फैल गई

“क्या हुआ आपको “

वो धीरे से बोली

“समझ नही आता क्या बोल रहा हु ,”

“आप ठीक तो हो ना “

“तेरी मा की चुद साली रंडी तुझे क्या मतलब की मैं ठीक हु या नही हु फोन रख “

और मैंने फोन रख दिया ,उसके बाद मेरे मोबाइल में लगभग 50 बार ही नेहा का फोन आया लेकिन मैंने नही उठाया ,मैं गाड़ी चलता जंगल के और भी अंदर चला गया जंहा पर मुझे आदिवासियों का निवास मिल गया ,मैं उन जगहों से बहुत ही परिचित था ,लगभग 5 बज चुके थे और मेरे लिए यहां दारू मिलना बहुत ही सरल था ,वो लोग खुद ही दारू बनाया करते थे,लेकिन वो किसी भी अनजाने व्यक्ति को तो देंगे नही मैं सोचने लगा की आखिर क्या किया जाय,तभी एक लड़का मेरी ही उम्र का मेरे पास अपनी गाड़ी रोकता है,वो एक बुलेट में था ,

“कुछ ढूंढ रहे हो “वो एक नार्मल शहर का आदमी लग रहा था

“हाँ दारू चाहिए थी “

वो हँसने लगा

“10 बजे देशी मिल जाएगी अंग्रेजी के लिए तो 30 किलोमीटर दूर के कस्बे में जाना होगा “

“ना ही देशी चाहिए ना विदेशी यहां आदिवासी का बनाया हुआ भी मिल सकता है “

वो मुझे घूरने लगा

“जंगल के इतने अंदर सिर्फ दारू पीने तो कोई नही आता यार और शक्ल से तो तुम बेवड़े भी नही लग रहे हो “वो फिर से हँसने लगा और उसकी बात सुनकर मेरे होठो में भी एक फीकी मुस्कान आ गई मैं कुछ भी नही बोला लेकिन थोड़ी चुप्पी के बस वो बोल पड़ा

“अच्छा चलो यहां का मुखिया मेरे पहचान का है ,उसके घर चलते है,कुछ पैसे है “

मैंने हा में सर हिलाया

“ऐसे 2-3 सौ की दारू भी बहुत हो जाएगी ,शुध्द देसी घर में बनाया हुआ मजा आ जाएगा ,”

मैं उसके साथ चला गया,मुखिया कहने का ही मुखिया था,गिनकर 10-15 घर का गांव होता है जंगलो में ,शहरी को देखकर या तो वो बहुत ही आवभगत करते है या दूर से ही नमस्कार कर देते है,पास भी नही फटकते ,वो मुखिया उसके पहचान का था वो उसने हमारी बहुत खातिरदारी की ,वो हमे एक दूसरे घर में ले गया जो की एक झोपडा ही था ,महुए की भीनी भीनी गंध मेरे नाक में जाने लगी थी बिल्कुल ताजा अभी अभी बना हुआ महुआ की शराब ,मेरे दिल ने वाह कहा ,उसने 2-3 लीटर लेकर हमारे सामने रख दिया ,वो उससे ही कुछ एक अलग भाषा में बात करने लगा ,

“इसके साथ कुछ और लोगे “

“सिगरेट मिल जाय तो “

“यार तुम भी यहां कहा की सिगरेट ,मेरा मतलब था की देशी मुर्गा वगैरह “मैंने हा में सर हिलाया वो उससे कुछ बात करके मेरे पास ही बैठ गया ,

“मेरा नाम हरीश है और तुम्हारा “

“मैं बिकास “

“कहा से ?”

वो अपनी जेब से मुस्कुराते हुए सिगरेट निकाला ,मैंने उसे घूरा तो वो मुस्करा दिया

“इमरजेंसी के लिए बचा कर रखी थी ,लग रहा है यही इमरजेंसी है”वो मुस्कुराया

मैंने उसे अपने शहर का नाम बताया वो भी वही काम करता था और यहां पास के ही गांव का रहने वाला था,यंहा कुछ काम से जा रहा था की दारू पीने के चस्के में यहां चला आया था ,जाम बनते गए और उससे मेरी दोस्ती बढ़ती गई ,हमने मिलकर 1.5 लीटर खत्म कर दिया था और अब उठने की हालत भी नही थी ,

“यार बिकास तू अगर यहां रुकना चाहे हो रुक जा ,मुखिया को मैं बोल दूंगा की तुझे जो चाहिए वो लेकर दे दे “

जाम अब भी जारी था ,मैंने भी हामी भर दी ,मुझे यहां आये लगभग 1 घंटे हो चुके थे ,नेहा ने फोन करना बंद कर दिया था और मैं भी बहुत रिलेक्स फील कर रहा था ,मैं पूरी तरह से टाइट था,तभी मेरा फोन फिर से बजा स्क्रीन में देखने की कोशिस को तो बाबुजी का फोन था ,मैंने उसे कान से लगाया ..

“हैल्लो “

“नालायक कहा है तू बहु इतना फोन लगा रही है,”मुझे रात की सभी बात याद आ गई

“चुप कर साले बुड्ढे ,मादर... “मैं फोन रख दिया ,उसके बाद मेरे पास कोई भी फोन नही आया था ,ना जाने ये हिम्मत कहा से आ गई ये दारू का नशा था या नेहा की बेवफाई का ……..

 


9

“ये किसके ऊपर गुस्सा निकाल रहे हो ,”

मेरे कुछ देर पहले ही बने हुए दोस्त जो की अब मेरा अजीज हो चुका था की बात पर मेरा ध्यान गया ,

“मेरा बाप था “

मैंने थोड़े बुझे हुए स्वर में कहा,ऐसे तो नशा अपने सुरूर में था लेकिन फिर भी सालो से जिस आदमी के सामने दबते हुए आ रहा था उससे ऐसी बात करना ….थोड़ा तो मैं सम्हाल ही गया ..

“बाप से कोई ऐसे बात करता है “वो हैरान था

“जब बाप ऐसा हो तो ऐसे ही बात करना चाहिए “मेरी आवाज में एक गुस्सा था जिसे शायद हरीश में भांप लिया था ..

“ऐसा क्या हो गया “उसने ऐसे जोर दिया जैसे की वो मेरे लिए कुछ कर सकता है ,ऐसे भी जो आदमी ऐसी जगह में मुझे दारू पिलाये उसके लिए तो दिल में एक भाईचारा उमड़ ही जाता है,मैंने शुरुवात की ,दारू खत्म हो चुकी थी,चिकन खत्म हो चुका था और मुखिया ने और शराब ला दी थी ,मेरी बात चलती रही वो ध्यान से सुनता रहा जैसे हम दोनो ही नशे में नही है हम गंभीरता से बात कर रहे थे ,मेरी जुबान तो लड़खड़ा रही थी लेकिन मैं गंदी गंदी गालिया बोलने में कोई भी हिचक नही दिखा रहा था,

“ओह ऐसे बाप को तो मार ही देना चाहिए “

हरीश की बात से मैं थोड़ा दंग रह गया

“और नही तो क्या मुझे नही लगता की लड़की की कोई गलती है,वो तो बेचारी ...तुम अपने बाप को कुछ कहते नही और वो बेचारी ठहरी गांव की सीधी साधी लड़की ,तेरे बाप के आने से पहले तो वो कितनी शर्मीली थी फिर उसे क्या हो गया ,सब उसकी ही करामात है वो ही छेड़ता हो गया और उसके दबाव में आकर ही वो बेचारी ये सब कर रही है…”

हरीश एक अनजान शख्स मेरे परिवार के बारे में कैसे फैसला कर सकता है ,लेकिन उसकी बात भी सही थी ,

“लेकिन …”

“लेकिन क्या देखो मैं तो अनजान हु और मुझे तुम्हारे परिवार से क्या लेकिन तुमने जितना बताया है उससे तो यही लगता है,”

हरीश मुझे बहुत ही अपना सा लग रहा था ….

“लेकिन अब मैं क्या करू “मैं एक अनजान शख्स से पूछ रहा था की मुझे क्या करना चाहिए ..

“यंहा रहो और अपने घर पर नजर रखो ,देखो समझो की आखिर कौन गलत है अगर तुम्हारी बीवी गलत है वो उसे तलाक दो ,तुम्हारा बाप गलत है तो उसे सजा दो की वो याद रखे,मर्द बनो यार ,”

‘और दोनो ही गलत हुए तो ,जैसा की मुझे लगता है “

उसके चहरे में हँसी आ गई,वो अपना हाथ पीछे कर कुछ निकालता है,वो एक रिवाल्वर था ,जिसे देख कर मेरे होशं ही गुम हो गए ,

“तो ये लो दोनो को ही ठोक दो ,तुम तो यहां हो ही नही ,और बाकी की फिक्र मत करो ,मार कर अपने काम में निकल जाना किसी को कुछ भी पता नही लगेगा,बाकी मेरा नंबर रख लो मैं सब सम्हाल लूंगा “

“तुम पागल हो गए हो “

मेरी आंखे फट गई ,भले ही मैं नशे में था लेकिन इतना भी तो नही था की अपने बीवी और पिता को मार दु ..

“हा हा तो और क्या कर सकते हो ,तुम्हारी बीवी की गुलाबी चुद में कोई अपना तगड़ा सा लौड़ा घुसा रहा है और तुम हाथ में हाथ धरे बैठे रहोगे “

उसकी बातो में व्यंग था एक अजीब सा व्यंग ,उसकी मुस्कुराहट मेरे जेहन में बस गई जैसे वो मुझे चिढ़ा रहा हो

“चुप रहो वरना तुम्हे ही मार दूंगा “मैं जोरो से चिल्लाया और वो जोरो से हंसा

“मर्द बन जाकर अपनी पत्नी को सम्हाल और अपने बाप से लड़ ,मुझे मार के क्या मिलेगा “

मैं गुस्से को पी गया था ,वो उठा और जाने लगा

“यही रुक जा ,जो चाहिए होगा वो मिल जाएगा ,शाम को निकल जाना जासूसी करने “

वो ये कहता हुआ निकल गया और में आखिरी घुट पीता हुआ बस सोच में डूबा रहा ……….

शाररिक और मानसिक थकान ने मुझे गहरी नींद में धकेल दिया था ,जब उठा तो सर बहुत ही भारी था,शाम के 5 बज रहे थे ,मुखिया जी ने बहुत सेवा की मैं तैयार होकर हरीश की बातो के बारे में सोचने लगा ,और अपनी कर उठाकर फिर से जासूसी करने निकल गया ,8 बज चुके थे और घना अंधेरा छाया हुआ था ,मैं फिर से उसी तरह कूदकर अंदर गया,आज मेरे कमरे की बत्ती भी जल रही थी ,शायद वो दोनो अभी हाल में होंगे क्योकि सोने का समय तो हुआ नही था ,या मेरी बात को उन्होंने थोड़ा गंभीरता से लिया हैऔर सतर्क हो गए है,मैं धीरे से पिछले दरवाजे को खोलता हुआ अंदर गया ,वो अभी खाने की टेबल पर बैठे थे ,दोनो ही शांति से खाना खा रहे थे,

उनका खाना खत्म होते ही बाबुजी ने नेहा को इशारा किया और वो सर झुकाए खड़ी रही ,

“क्या हुआ रे रंडी चल आजा मेरे कमरे में “इतना बोलकर वो चले गए ,मेरे खून में थोड़ा उबाल आया मैं उनके सामने जाकर नेहा को बचाना चाहता था लेकिन मैं रुक कर देखने लगा मैं देखना चाहता था नेहा का रिएक्शन ,वो हल्के से हा में गर्दन हिला कर बर्तनों को समेटने लगी ,बाबुजी अपने कमरे में जा चुके थे ,मुझे नेहा की सिसकिया सुनाई दे रही थी ,मेरे दिल में नेहा के लिए एक सहानुभूति का भाव जाग गया,.और मैं उसे जाकर जकड़ लेना चाहता था लेकिन मैं रुक गया ,आखिर कैसे मैं कहता की मैं तुम्हे छिपकर देख रहा था लेकिन मैं कुछ भी नही किया ,लेकिन आज तो मुझे कुछ करना था ,सबसे पहले तो मैं ये ही जानना चाहता था की आखिर दोनो कहा तक पहुचे और साथ ही ये भी क्या सच में नेहा ऐसा कुछ कर रही है ,अभी तो पूरी बात समझना भी बाकी था,मैं चुप हो देखने लगा,कही दिल के किसी कोने में तो मैं नेहा को रंडी की तरह व्यवहार करते हुए भी देखना चाहता था ,लेकिन बस मेरे लिए ही और शायद बाबुजी के लिए ????

नेहा काम खत्म कर पहले तो हमारे कमरे में गई और फिर बाबुजी के कमरे में चली गई ,वो कपड़े बदल कर आयी थी ,एक झीनी सी नाइटी डाले हुए वो बाबुजी के कमरे में गई ,उसकी काले रंग की नाइटी में उसके काले रंग की पेंटी की झलक साफ दिख रही थी लेकिन उसने ब्रा तो नही पहनी थी ,

एक मानव का सहज स्वभाव होता है की जब वो किसी लड़की को ऐसी अवस्था में देखे तो चाहे लड़की कोई भी हो उसके मन एक हलचल तो उठ ही जाती है ,ये तो मेरी बीवी थी जो आज किसी और के लिए तैयार हुई थी लेकिन सच में मेरे दिल में भी एक टिस सी उठ गई ,साली ये दारू भी गजब की चीज होती है ,जब तक चढ़ी रही तब तक शेर होते हो उतारने की बाद पहले से ज्यादा कमजोर हो जाते हो साथ ही सेक्स की भूख भी थोड़ी बढ़ जाती है,दोनो ही असर मुझपर भी हो रहा था ,कल कहा मैं मारने मारने की बाते सोच रहा था और आज देखो मैं फिर से वही पुराना आदमी हो गया,लेकिन मुझे लग रहा था की मैं पहले से और भी जायद कमजोर हो गया हु ,दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी नेहा ने सभी लाइट बंद कर दी ,मेरे लिए ये अच्छा ही था क्योकि अब मैं और भी आराम से सब कुछ देख सकता था ना जाने मैं कितने देर ये सब देख पाता ,नेहा के कमरे में जाने के बाद ही मुझे आवाजे सुनाई देनी शुरू हो गई,

“साली रंडी बहुत समय लगा दिया “

“बाबुजी वो “

“मादरचोद मैं तेरा बाबुजी नही हु तेरा मालिक हु ,स्वामी बोल मुझे “

“जी स्वामी “नेहा की दबी हुई आवाज ने मुझे और भी जोरो से झकझोर दिया ,नेहा की सिसकिया मेरे कानो में पड़ने लगी थी ,और मुझसे बर्दास्त करना अब बाहर होने लगा था,हा मैं डरपोक हो सकता हु लेकिन इतना तो नही की मैं ऐसा अन्याय सह पाता,जो आदमी नेहा को बेटी बेटी कहता था आज वही ऐसे व्यवहार कर रहा था,मैं कमरे के और नजदीक गया ,मेरा दिल सुन्न हो गया क्योकि दरवाजा पूरी तरह से खुला हुआ था,वैसे भी उन्हें यहां किसका डर था ,मैं तुरंत ही छिप गया,बाहर के अंधेरे ने मुझे छिपा लिया था ,और कमरे की रोशनी मुझे सब कुछ दिखा रही थी,

“अरे मेरी जान रोती क्यो हो ,तुमने ही तो कहा था की एक मर्द जैसे मेरे ऊपर हुकुम चलाओ ,और अब रोने लगी “बाबुजी की इस बात ने फिर से मेरा दिमाग खराब कर दिया ,

क्या ??????????

नेहा ने कहा था ,????

“हा लेकिन मुझे कभी कभी गंदा लगता है “नेहा की मासूम सी आवाज मेरे कानो में पड़ी ,मेरी मासूम सी नेहा के चहरे में अब भी वही मासूमियत टपक रही थी जिसे देखकर मैं उसका दीवाना हुआ था ,लेकिन ये मासूम सी लड़की ऐसे निकलेगी ये मैंने नही सोचा था,

“तो क्या ऐसा नही करू “

“आप कीजिये ना ,लेकिन मेरे रोने या चिल्लाने से मेरे ऊपर दया मत किया कीजिये ,मुझे बाद में अच्छा लगने लगता है ,”वो हल्के से मुस्कुराई ,जिससे मेरा दिल चूर चूर हो गया

“साली तू है ही रंडी जबसे तुझे पहली बार देखा था तब ही समझ गया था ,की तू चोदने के लिए सही माल है लेकिन सोचा नही था की तू इतनी बड़ी रंडी निकलेगी ,इसीलिए तेरी शादी उस झाटु से करवाया था “

बाबुजी के हँसने की आवाज से मेरा और भी टूट गया,मेरा ही बाप मेरे बारे में ये सोचता है

“लेकिन मैं तो आपकी बहु हु ना और वो तो आपका बेटा है फिर मेरे साथ ऐसा क्यो किया “आश्चर्य जनक रूप से नेहा फिर से रोने लगी इसबार वो जोर जोर से रो रही थी

“मैं तो आपको अपने पिता के समान समझती थी सोचती थी की मायके से ज्यादा प्यार मुझे ससुराल में मिलेगा,लेकिन आपने तो मुझपर ही डोरे डालने लगे मुझे एक सीधी साधी लड़की से एक रंडी के जैसे बना दिया “

“हा हा हा “बाबुजी के ठहाकों से पूरा कमरा ही गूंज गया

उन्होंने नेहा को अपने मजबूत बांहो में जकड़ लिया ,और उसके स्तनों को सहलाने लगे ,नेहा की पीठ बाबुजी के चौड़ी छातियों में सटी हुई थी और जो की बालो से भरी हुई थी और वो सर उठाये बाबुजी को देख रही थी ,बाबुजी पीछे से हाथ लाकर नेहा के मजबूत और उठे हुए स्तनों में अपने हाथ फिरा रहे थे ,नेहा के चहरे के भाव भी बदल रहे थे ,कई भावनाएं उसके चहरे में आकर चले जाते,डर,प्यार,वासना,छिड़ ,हवस ,दर्द ,रोमांच और मजा सब कुछ था उसके चहरे में कभी ये तो कभी वो ,थोड़े देर की मालिस ने नेहा को बेचैन कर दिया था ,...”कहे का बेटा और काहे की बहु ,बिकास मेरा बेटा नही है “

क्या ???मेरे कान खड़े हो गए

“मैं एक फौजी था और उसकी माँ से बहुत ही प्यार करता था लेकिन वो साली मुझे भाव ही नही देती थी,वो किसी दूसरे लड़के को प्यार करती थी ,लेकिन मैं तो ठहरा कमीना ,मुझे तो वो चाहिए ही थी ,मैंने धोखे से उन दोनो का ब्रेकअप करा दिया ,जब दोनो घर से भागने वाले थे तो मैंने लड़के को ही मरवा दिया ,उसकी माँ को लगा की उसका प्रेमी उसे धोखा दे दिया ,तब मैं उसका सहारा बन गया ,लेकिन शादी के बाद मुझे पता चला की वो पहले से ही प्रैग्नेंट थी,ना ही मैंने उसे कुछ कहा ना ही उसने कुछ बताया लेकिन मेरे लिए उसके बच्चे के लिए कभी भी प्यार नही आया ,मुझे वो मिल गया जो मुझे चाहिए था,उसे हमेशा ही लगता था की मैं यही समझता हु की विकास मेरा बेटा है लेकिन मैं जानता था की वो उसकी मा की अय्याशी का नतीजा थी ,इसलिए वो भी उसी लड़के की ही तरह निकला डरपोक ,”

बोलते बोलते उनके चहरे में गुस्सा भर गया और मैं जमीन में बैठा हुआ रोने लगा ,अब उसका हाथ नेहा के योनि को पेंटी के ऊपर से जोरो से मसलने लगा था लेकिन नेहा के चहरे में कोई भी भाव नही उभर रहे थे जिसे बाबुजी ने भी समझ लिया था ,

“क्या हुआ तुम मुर्दो जैसे क्यो हो गई “

“मुझे अब पता चला की आप ऐसा क्यो कर रहे हो,आप बदला ले रहे हो ,उनकी माँ से ….उनसे ...लेकिन उनका क्या दोष है ?”

“उसका क्या दोष है ???वो पाप की निशानी है ,जिंदगी भर मैं उससे बदला लेना चाहता था लेकिन अब जाके मुझे सुकून मिला है “

“वो पाप की नही प्यार की निशानी है “

“चुप साली रंडी “बाबुजी ने एक जोर का थप्पड़ नेहा के गालो में लगा दिया जिससे वो बिस्तर में गिर पड़ी...

मैं अभी भी रो ही रहा था ,मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं करू तो क्या करू

“आपने मेरे प्यार को भी मारा है ,मेरे प्रेमी से दूर कर मुझे विकास जी के साथ शादी के बंधन में बांध दिया,मैं उनके लिए वफादार थी तब अपने मुझे धमकाकर अपने साथ ऐसा रिश्ता बनाने में मजबूर कर दिया ,अभी तक मैं आपके इशारों में नाचती थी लेकिन अब और नही “नेहा खड़ी हो रही थी लेकिन बाबुजी उसके ऊपर चढ़ गए और उसके पेंटी को पकड़कर खिंचने लगे वो छटपटाती रही लेकिन उन्होंने पेंटी को फाड़ ही डाला ,नेहा की नाइटी अब उसके कमर के ऊपर थी और बाबुजी पूरी तरह से नंगे हो चुके थे,उनके अकड़े हुए लिंग ने नेहा की योनि को मसलना शुरू कर दिया था ,जैसे जैसे उनका दबाव बढ़ता नेहा की छटपटाहट कम होते जाती थी ,

“बोल रंडी तू मेरी रंडी है की नही ..”

“नही मैं किसी की पत्नी हु मेरे साथ ऐसा मत करो “नेहा रोने लगी

“तो तेरी चूत से ये पानी क्यो बह रहा है “बाबुजी ने व्यंग मारते हुए कहा

“ओह नही बाबुजी ऐसा मत करो मैं आपकी बहु ….आह बा...बु,,..जी ओह”

पूरा लिंग ही नेहा के अंदर समा चुका था और नेहा ने बाबुजी के पीठ को अपने बांहो समा लिया था,नेहा मजे में थी वो सिसकिया ले रही थी बाबुजी उसे पेले जा रहे थे ,वो आह आह कहे जा रही थी ,मैं उठखडा हुआ और कमरे के दरवाजे के पास पहुचा ,नेहा आँखे बंद किये मजे ले रही थी वही बाबुजी जानवरो की तरह अपनी बहु की चुद फाड़ने में लगे थे ,

बाबुजी नेहा के ऊपर चढ़े हुए थे जिससे नेहा का चहरा मेरी ओर था,नेहा ने हल्के से आंखे खोली मैं उसे साफ साफ दिख रहा था ,मेरे आंखों से आंसू अब भी झड़ रहे थे ,हम दोनो की ही नजरे मिली और नेहा के चहरे में एक मुस्कुराहट आ गई ,

“आह और जोरो से बाबुजी चोदो अपनी बहु को और जोरो से “

नेहा ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा ,बाबुजी जिसे बावले ही हो गए

“मादरचोद साली रंडी ,तुझे चोदता हु ,देख देख ना कभी तेरा वो प्रेमी तुझे कभी किया होगा ना ही तेरा पति ,ओह आह “

उसका कमर जोरो से चल रहा था और नेहा मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी ,लेकिन उस मुस्कुराहट में एक गुस्सा समाया हुआ था ,गुस्से से तपती हुई उसकी आंखों को देखते ही मेरा दिल ही रुक गया ,जिसे उसकी इज्जत लूटी जा रही हो और मैं बस देख रहा हु ,

“मेरा पति नामर्द है बाबुजी चोदो मुझे “

नेहा ने जोरो से कहा और उसके आंखों में आंसू छलक गए ,वो अब भी मुझे देख रही थी ,उसकी इस बात ने मेरे दिल को चिर दिया था ,मैं इतना असहाय तो कभी नही था मैं एक नामर्द हु ??

“वो मादरचोद क्या चोदेगा तुझे अब तो तू बस मेरी ही रांड बन कर रहेगी ,रोज तुझे उसके सामने ही चोदूँगा आने दे उस साले को …छिनाल माँ का नामर्द बेटा ..आह,आह …”

“विकास नही “नेहा घबराई

“आआआ “

बाबुजी की चीख निकली ,उनके सर से खून बह रहा था ,मेरे हाथो में एक रॉड था जिसे मैंने पूरी ताकत से उनके सर पर दे मारा था ,उन्होंने मेरे साथ जो किया लेकिन माँ के बारे में बोलकर गलती कर दी मेरे लिए अब सहना मुश्किल हो गया था ,पास ही रखे एक लोहे के रॉड को मैंने दे मारा था ,नेहा तुरंत उन्हें छोड़कर खड़ी हो गई थी ,सर से बहते हुए खून के साथ वो पलटे और मुझे आश्चर्य से देखा ,हम दोनो की नजरे मिली ही थी की मैंने फिर से हाथ घुमाया और रॉड जाकर उसके जबड़े से लगा और उनका जबड़ा उखड़ गया ,और एक आखिरी वॉर आधा माथा ही फट गया था ,थोड़ी देर छटपटाने के बाद ही वो मर गए …………….

नेहा ने मुझे देखा और मैंने नेहा को उसके आंखों में आंसू भी थे और प्यार भी ,लेकिन मेरे दिलो दिमाग में बस शांति थी ……..

continue,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
एक साल के बाद ……..

बाबुजी की हत्या किये एक साल बीत चुका था ,मैं आज जेल से छूटने वाला था,ये एक साल शायद मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे एक साल साबित हुए ,जेल का एक साल और सबसे अच्छा जी हा,जीवन की नई सच्चाइयों को समझने और सहने का जो मौका मिला जिनसे मैं अब तक अनजान ही था,एक अदन सा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही तो था जो अपनी माँ के पल्लू में छिपा हुआ अपनी जिंदगी जी रहा था फिर अपनी पत्नी के पल्लू में ,मेरे पिता जी जो की मेरे बायोलॉजिकल पिता नही थे उनसे डरते हुए ही मैंने अपनी जिंदगी गुजार दी थी लेकिन अब किसी का डर ही नही रह गया था,ना ही कोई जेल की चारदीवारी डरा सकती थी ना ही कोई सजा…

जेल में भी मुझे इज्जत से देखा जाता था क्योकि मैं कोई अपराधी नही था मुझे सजा हुई थी मेरी पत्नी के बलात्कारी को मारने की ,कोर्ट के ये प्रूव हो चुका था की मैंने अपनी पत्नी को बचाने के लिए ही अपने पिता पर वॉर किया था,और मेरे वकील ने कमाल ही कर दिया था,मेरा वकील हरीश ,जिससे मेरी दोस्ती दारू के कारण हो गई थी,कोर्ट ने मुझसे माफी मांगते हुए मुझे रिहा किया था,भारतीय अदालत में देर है पर अंधेर नही ,जेल में भी सभी मेरे अच्छे मित्र बन चुके थे कुछ की आंखों में तो आंसू भी था जब उन्हें पता चला की मैं बाहर जा रहा हु ,वो सभी बड़ी बड़ी गलतियों की सजाए पा रहे थे लेकिन इंसान तो आखिर इंसान ही होता है,आक्रोश में आकर की गई एक गलती की सजा जिंदगी भर भुगतनी पड़ती है,कोमल हृदय के लोग भी संजीदा मुजरिमो की जिंदगी बसर कर रहे थे ……..

जेल की गेट से आज मैं पहली बार पूरी तरह से आजाद होकर बाहर निकल रहा था ,बाहर नेहा और हरीश मेरे इंतजार में थे,मुझे देखते ही नेहा भागते हुए मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गई ,दोनो के ही आंखों में आंसुओ के धार थे ,उसने बड़े ही प्यार से मेरे गालो को चूमा ,

“आपको आजाद देखकर अच्छा लगा “

“हम्म चलो अब हमे कम से कम कोर्ट जाने से तो छुट्टी मिल गई “मैं हंसा और दोनो भी

“ऐसा नही है विकास बाबू अभी आपकी आखिरी पेशी कोर्ट में होनी बाकी है”

हरीश के चहरे में एक अर्थपूर्ण मुस्कान आ गई और वो मेरे गले से लग गया ,

“कैसे हो मेरे दोस्त “

“हमेशा की तरह ही बढ़िया “

“तो चले “

“चलो “

……………………

कोर्ट में मजिस्ट्रेट हमारे सामने बैठा था,हरीश और नेहा के साथ साथ मेरे भी चहरे में खुसी खिल रही है ,हम तीनो ने एक पेपर में साइन किया ..

“बधाई हो आप दोनो आज से पति पत्नी “

मजिस्ट्रेट ने बड़े ही प्यार से कहा …

नेहा की आँखों से आंसू छलक रहे थे ,वो सीधे हरीश के गले से लग गई ,ना जाने कितने सालो का इंतजार आज सच हो गया था ,दोनो ने मुझे देखा उनकी ये खुसी देखकर मेरे भी नयन भर आये थे दोनो ही मेरे गले से लग गए ……

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मेरे फ्लेट में गाजे बाजे बज रहे थे और कुछ खास दोस्तो के साथ हम पार्टी कर रहे थे ,दो कारण थे एक मेरे छूटने की खुसी और दूसरी मेरी पत्नी की दूसरी शादी...मेरे दोस्त इस फैसले पर आश्चर्य से भरे हुए पहुचे थे,लेकिन मुझे देखकर ही उन्हें यकीन हो गया था की जो हो रहा है सही हो रहा है,मैं इन एक सालो में पूरी तरह से बदल गया था ,खुसी मेरे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गई थी ,

जब बाबुजी को मैंने मारा था तब मुझे ये भी नही पता था की आखिर सही कौन है और गलत कौन लेकिन कड़ियां खुलने लगी ,...मैं अपने बॉस जो की अब मेरे अच्छे दोस्त भी थे को सुनाने लगा ..

“नेहा जब स्कूल में थी तब से ही उसका पहला प्यार हरीश था ,दोनो ही साथ पढ़े और बड़े हुए लेकिन सामाजिक मर्यादा ने दोनो को मिलने नही दिया ,जब नेहा का यौवन अपने अंगड़ाइयां भर रहा था तब उसपर बाबुजी की नजर पड़ी ,जिसका परिणाम था की बाबुजी नेहा के प्रति आसक्त हो गए ,वो उसे पाने की हर सम्भव कोसीसे करने लगे,लेकिन जल्द ही उन्हें ये अहसास हो गया की ये लड़की उनके हाथ में नही आने वाली और इसका कोई प्रेमी भी है,माँ के देहांत के बाद तो बाबुजी खुले सांड की तरह हो गए और जो चीज उन्हें पसंद थी उसे वो हर कीमत में पाना चाहते थे,उन्होंने नेहा के पिता से दोस्ती बड़ाई और उन्हें नेहा और हरीश के बारे में बतलाया ,जिससे उसके पिता भड़क गए और उसकी पढ़ाई पर रोक लगा दिया ,समाज में बदनामी का डर नेहा के पिता जी को सताने लगा था की बाबुजी ने अपना पासा फेका और दोस्ती के खातिर उन्होंने नेहा को मेरी बीवी बनाना स्वीकार किया,नेहा के बाबुजी भी अपने को बाबुजी के अहसानो के नीचे दबा हुआ मानने लगे ,और नेहा ने भी अपने भाग्य से समझौता करके घर वालो की बात माननी स्वीकार कर ली ,नेहा एक सीधी साधी सी लेकिन बहुत ही समझदार लड़की थी ,वो हरीश से शादी के कुछ दिनों पहले से दूरी बनाने लगी लेकिन हरीश को ये नागवार गुजरा ,वो उससे मिलने की कोशिस करने लगा ,नेहा ने उसे स्प्ष्ट शब्दो में समझा दिया की वो अब किसी और की होने जा रही है और वो उसे भूल जाय ,

हरीश के पास भी अब कोई चारा नही था लेकिन वो नेहा से दूर नही जाना चाहता था उसने मेरे बारे में पता किया और इसी शहर में आकर रहने लगा,जंहा मेरा जॉब था,उसने वही पर अपनी वकालत शुरू कर दी …..

इधर नेहा ने भी अपने पत्नी और बहु का धर्म बखूबी निभाया ,वो बाबुजी के हर अदा को बाप जैसा प्यार समझने लगी ,उस बेचारी को क्या पता था की उनके मन में क्या चल रहा है,लेकिन उसे तब तक शक भी ना हुआ जब तक बाबुजी शहर नही आये ,कार चलाने के बहाने से वो उसे छूने लगे थे ,नेहा ने उसे गलत नही समझा लेकिन फिर उनका छूना बढ़ने लगा तब जाकर नेहा को शक होने लगा,वो उसे वो कपड़े दिलवाते जो की एक ससुर कभी अपनी बहु को लिए नही लेता ,और फिर उनकी छेड़छाड़ बढ़ने लगी,नेहा समझदार लड़की थी उसने मुझतक कोई भी बात आने नही दी ,वो बाबुजी को समझकर ही शांत करवाना चाहती थी लेकिन उन्होंने उसे डराया की वो मुझे नेहा के प्रेमी के बारे में बता देंगे,और फिर उसपर वो जुल्म करेंगे जो की उसने सोचा भी नही होगा,नेहा जानती थी की मैं बाबुजी से कितना डरता हु,वो उनके सामने विवश सी होने लगी,

शॉपिग करते हुए नेहा को हरीश मिला और दोनो फिर से एक दूसरे के संपर्क में आये नेहा ने हरीश का नंबर लिया और उससे बात करने लगी,वो बाबुजी के बारे में उसे बताया और मेरे कमजोरियों से उसे अवगत कराया,हरीश एक वकील था साथ ही उसे नेहा के भविष्य की भी फिक्र थी,उसने ही उसे आईडिया दिया की बाबुजी को कुछ दिनों तक दूर रखे और मुझे उनके खिलाफ भड़काए की मैं कुछ कर सकू ,मैं उन्हें रोकू ...नेहा को मुझसे उम्मीद तो नही थी लेकिन हरीश के कहने पर उसने मुझे जलाना शुरू किया फिर उसने वो सब बता दिया जो की वो छुपा के रखी थी,लेकिन मैं तो ठहरा डरपोक आदमी ,नेहा ने बाबुजी के जाने के बाद भी पूरी कोशिस की कि मेरे अंदर थोड़ी हिम्मत आ जाए ,वो थोड़ी कामियाब तो रही लेकिन बाबुजी ने उसे अपने पास बुला लिया ,वो चाहती तो शायद नही जाती लेकिन नेहा के पिता जी ने भी उसके ऊपर फोर्स करना शुरू कर दिया की ससुर जब अकेले है तो तुम दोनो को कुछ दिन वँहा भी रहना चाहिए ,

अकेले वहां जाने के बाद तो नेहा की हालत और भी खराब होने लगी,नेहा ने हरीश को बोल रखा था की अगर कुछ ऐसी वैसी बात हुई तो वो उसे फोन करेगी लेकिन बाबुजी ने उसे मौका ही नही दिया ,वही हरीश अभी शहर में ही था,बाबुजी ने नेहा के साथ जबरदस्ती की और उसे अपने नीचे ले आये ,ये बात उस दिन की थी जब मैं वहां पहुचा ,नेहा के लिए उनकी बात मानने के सिवाय कोई चारा ही नही था,उन्होंने नेहा की वीडियो भी बनाई,जो की कोर्ट में सबूत के तहत पेश की गई थी ,उसमे भी साफ पता चल रहा था की बाबुजी ने नेहा के साथ जबरदस्ती की थी और उसका वीडियो बना कर उसका यौन शोषण कर रहे थे,उसी दिन रात मैं आया और ये सब देखकर बौखला गया ,नेहा बाबुजी की बात मानने को मजबूर थी जो वो उसे कहने को कहते वो कहती जो करने को कहते करती,मैं बौखलाया हुआ जंगलो में चला गया जब मेरी बात नेहा से हुई ,मुझे अपसेट देखकर नेहा ने हरीश से मुझे ढ़ंढने को कहा वो मेरे फ्लेट आया लेकिन मैं वँहा नही था वो मुझे ढूंढता हुआ जंगल पहुचा जंहा उसकी मुझसे मुलाकात हुई ….बाकी की कहानी वैसी है जो की हम जानते है,मुझे नेहा की आँखों में सच्चाई दिखाई दी और मैंने बाबुजी को मार डाला ……मुझे इसके लिए जेल हो गई,नेहा ने मुझे शादी से पहले के अपने और हरीश के रिस्ते में सब कुछ बताया और हरीश ने ही मेरा केस लड़ा,मुझे उसके लिए एक सहानुभूति तो थी ही लेकिन मैं नेहा के बलिदान से बहुत ही प्रभावित था,वो जब तक मेरे साथ थी मेरे लिए वफादार थी ,शादी के बाद उसने अपने बचपन के प्यार से भी दूरी बना ली,ये मेरी ही गलती थी की मैं उसे प्रोटेक्ट नही कर पाया ...मुझे अपने किये इस पाप के प्रायश्चित करने की एक युक्ति सूझ गई और मैंने नेहा और हरीश को एक दूसरे से शादी करने को कहा,वो दोनो ही कई महीनों तक ना नुकुर करते रहे लेकिन आखिर में वो मेरी जिद के सामने मान ही गए ,मैंने नेहा को तलाक दिया,लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी की वो शादी तब तक नही करेंगे जब तक की मैं जेल से छूटकर नही आ जाता ,तो हमने आज की तारीख फिक्स कर ली ..



मेरी बात के खत्म होते ही सभी लोग तालिया बजाने लगे ,हरीश ने एक जाम मुझे दिया और हम सभी इन्जॉय करने लगे…

…………………

रात का समय था और मैं अपने फ्लेट के गेस्ट रूम में लेटा हुआ था,सभी मेहमान जा चुके थे ,आज पूरे साल बाद मुझे इतना कोमल बिस्तर नशीब हुआ था ,आज ही नेहा और हरीश की शादी ही थी लेकिन हरीश के फ्लेट में काम चलने के कारण वो दोनो ही मेरे ही फ्लेट में रुके हुए थे,आज वो मेरे कमरे में सोने वाले थे ,मुझमे इतनी भी हिम्मत नही थी की मैं उनकी सुहाग की सेज सजता ,नेहा के लिए दिल के किसी कोने में पत्नी वाला भाव अभी भी मेरे अंदर था ,मैं अपने खयालो में ही खोया था की दरवाजा खुला,नेहा अब अपने कपड़े चेंज कर चुकी थी वो एक सामान्य सी साड़ी में थी लेकिन हमेशा की तरह ही बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ,उसके हाथो में दूध का एक ग्लास था,जिसमे उसने केसर डाला हुआ था,

“हम आज यहां रुक रहे है आपको इससे तकलीफ तो नही होगी “उसने मुझे दूध देते हुए पूछा ,

“मैं कभी नही चाहुगा की तुम्हारी सुहागरात हमारे कमरे में हो “मेरे चहरे में एक शरारत भरी मुस्कान थी

“आप पागल हो गए हो क्या ,आपको लगता है की मैं हमारे बिस्तर में ये सब ...छि छि ,नही “

उसके चहरे में शर्म दौड़ गई थी

“आज से वो तुम्हारा पति है”

“आज से नही जब वो मुझे अपने घर ले जाएंगे तब से ,और हमने मिलने को सालो इंतजार किया है ,एक दिन और सही ,”

उसके चहरे में भी एक मुस्कान आ गई

“तो आज मेरे साथ ….”मैंने उसे शरारत भरे लहजे में पूछा

“छि कितने गंदे हो आप ,अब मैं उनकी पत्नी हु,चलो दूध पियो और सो जाओ “वो वहां से भागी लेकिन उसका चहरा शर्म से लाल हो गया था ..

“अरे सुनो मैं मजाक कर रहा था “

वो पलटी

“मैं जानती हु ,आप मेरे साथ कभी गलत नही कर सकते “उसने बड़े ही प्यार से कहा और वँहा से चली गई…

ये मेरी पत्नी ..सॉरी पूर्व पत्नी थी ,इतनी मासूम इतनी प्यारी ,जिसपर आंखे मूंदकर भी भरोसा किया जा सकता था,...

मेरी मासूम पत्...सॉरी पूर्व पत्नी …

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नेहा के जाने के बाद मैं उसकी भोली बातो को याद कर रहा था की मुझे याद आया की यही वो कमरा था जंहा बाबुजी रहा करते थे,मैंने पूरे कमरे पर एक नजर डाली ,उनका कोई भी समान यंहा पर नही था,मैं पास पड़ी मेज पर पहुचा बस कुछ पुस्तके रखी थी ,मेज में बने दराज को खोलकर देखा वो भी खाली था ,तभी मुझे याद आय की बाबुजी की एक आदत थी….वो अपनी इम्पोर्टेन्ट चीजो को दराज में नही उसके ऊपर किसी टेप से चिपकाकर रखते थे,मैंने ऊपर हाथ फेरा मुझे कुछ नही मिला ,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,बाबुजी सच में बड़े ही चतुर व्यक्ति थे एक लड़की के हवस ने उन्हें डूबा दिया ,दराज के ऊपर ही सतह अलग लकड़ी की बनी हुई थी मतलब की ऊपर वो मेज का निचला हिस्सा नही था,मैं दराज को निकाल कर मेज के नीचे झुका और उसे ध्यान से देखने लगा,हल्के से ठोकने पर ही मुझे उसके खोखले होने का अंदाज लग गया था मतलब यहां कुछ तो होगा जो वो सभी से छुपाना चाहते थे,मेरी थोड़ी ही कोशिस काम आयी और वो हिस्सा एक ओर सरका अंदर टेप से चिपका कर एक पिस्तौल रखी गई थी ,शायद किसी इमरजेंसी के लिये ,मैंने उसे निकाला,पिस्तौल के हत्थे में कागज में लपटि कोई छोटी सी चीज चिपकी हुई थी,मैंने उसे निकाल कर देखा तो वो मोबाइल की मेमोरी चिप थी,4gb ,मेरे चहरे में मुस्कान फिर खिल गई ,पता नही इन 4gb में था क्या ????मैंने उसे अपने मोबाइल में लगाया और उसमे रखे वीडियो को देखने लगा,जैसे जैसे वीडियो आगे बढ़ रहा था ,मेरे पेट में हलचल होने लगी थी ,मेरी धड़कनों ने बढ़ना शुरू कर दिया था,मैं उस पिस्तौल को उठा सीधे ही नेहा के कमरे में पहुचा,अंदर से हँसने की आवाजे आ रही थी.नेहा की आवाज मुझे स्पष्ट सुनाई दे रही थी…..

“ठरकी बाप का चुतिया बेटा “नेहा जोरो से हँस पड़ी

“अरे धीरे उठ गया तो “

“कल दोपहर तक नही उठेगा दूध में 5 गोलिया डाल दी है,2 गोली में ही उसका क्या होता था तुम्हे तो पता है “

दोनो फिर से हँसने लगे ,मेरे सामने वीडियो का हर चित्र घूम गया था ,मैंने दरवाजे को जोरो से लात मारी

“क क कौन है “हरीश की डरी हुई आवाज आई

“दरवाजा खोलो “

मैं दहाड़ा और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला सामने नेहा एक नाइटी में थी वही हरीश एक निकर और बनियाइन में देखने से ही पता लग रहा था की उन्होंने ये जल्दी जल्दी में पहना है…….

मैंने पिस्तौल की नोक सीधे हरीश के माथे पर ठिका दिया ...

continue..............
 
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