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मा की मस्ती compleet

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इधर अंदर आरती और रमण की रस लीला चल रही थी,उधर बाहर से मनु ये सब अपनी आँखों से साफ-2 देख रहा था,और बेचेन होता जा रहा था,उसके लंड ने एक बार तो पानी गिरा दिया था,पर वो ढीला बिल्कुल नही हुआ था,वैसे भी उसको पता था कि आज उसको अपनी मा की लाइव ब्लू फिल्म देखने को मिलने वाली है,तो इसलिए उसके लंड का तनाव कम होने का नाम ही नही ले रहा था,जब एक बार झड़ने के बाद उसके लंड ने थोड़ी सी राहत ली और जो दर्द उसके लौडे मे हो रहा था,वो थोड़ा सा कम हुआ तब उसको होश आया,और अब उसने अपनी पॅंट को बिल्कुल ही अपने शरीर से अलग कर दिया,उसने सोचा कि जब अंदर मा ही नंगी हो रही है तो फिर वो भी आज का सारा नज़ारा नंगे हो कर आराम से देखेगा,पर जब वो पॅंट को निकाल रहा था तब उसका हाथ पॅंट मे पड़े हुए कैमरे पर पड़ा,और उसको ध्यान आया कि डिजिकम तो उसकी जेब मे ही पड़ा है,उसने वो निकाल कर अपने हाथ मे ले लिया,

अंदर कमरे मे उन लोगों ने कोई भी लाइट बंद नही की थी और वो दोनो ही बिल्कुल खुले आम वासना का खेल खेल रहे थे,क्यूंकी उनको किसी के आने का तो कोई डर ही नही था,इसलिए मनु ने भी अपना कॅमरा निकाल कर अंदर की तरफ कमरे मे चल रही लाइव फिल्म की फोटो खींचना शुरू कर दिया,जब उसने अपने कैमरे को अपनी माँ की चूत पर ज़ूम किया तो वो बिल्कुल उसकी आँखों के सामने आ गयी और उसको ऐसे महसूस हुआ की वो बिल्कुल उसके ही आगे है,उसको अपनी मम्मी की चूत का गुलाबी छेद भी नज़र आ रहा था,क्यूंकी अंदर रमण ने उसको खोल रखा था और वो उस छेद को ही निहारे जा रहा था,तब मनु को भी मौका मिल गया अपनी मा की नंगी चूत को साफ-2 देख सके,अपनी मा की नंगी चूत को यूँ अपने सामने देख कर उसके मूह मे भी पानी आ गया,और उसका दिल भी अपनी मा की चूत का रस पीने के लिए बेताब हो गया,पर अभी ये संभव नही था,इसलिए वो उस बात को छोड़ कर फिर से अपने कैमरे से आपनी मा की चूत की तस्वीरें लेने लगा,फिर उसने अपने कैमरे को थोड़ा उपर करके अपनी माँ के मोटे-2 मम्मों पर ज़ूम किया और वो उनकी भी फोटो लेने लगा,आज तो मनु की लॉटरी ही लग गयी थी,उसकी माँ ऐसे नंगी सिर्फ़ मिनी स्कर्ट पहन कर सोफे पर पड़ी हुई थी,और उसका टीचर उसकी ही माँ की जवानी के मज़े ले रहा था,और वो इन सब को अपनी नंगी आँखों से और अपने कैमरे की आँखों से देख रहा था,इस सब से उसका लंड फिर से बहुत कड़क हो गया,बल्कि ऐसे हो गया कि अगर उस टाइम कोई उस पर चोट करे तो वो बिल्कुल टूट कर बिखर जाए वो इतना कड़क हो गया था.

अब मनु ने कैमरे को एक हाथ मे ले कर दूसरे हाथ से अपने लौडे को संभालना शुरू किया तो वो बहुत ही गरम हो रखा था,वो अपने लंड पर अपना हाथ आगे पीछे करने लगा,पर अब वो बहुत जल्दी झड़ना नही चाहता था,इसलिए उसने लंड पर अपने हाथ को धीरे-2 ही उस पर फिराया,पर इस-से उसको कोई तसल्ली नही मिल रही थी

मनु इतना गरम हो गया था कि अब उसका लंड उसके कंट्रोल मे ही नही था,और ना चाहते हुए भी अब उसका हाथ अपने लंड पर तेज़-2 आगे पीछे होने लगा था,और उसका दूसरा हाथ पहले से ही अपनी मा की चूत की चुसाइ की फोटो खींचने मे लगा हुआ था,अब मनु के लंड ने दुबारा से उल्टी करने की तैयारी कर ली थी,और उसके लंड और जिस्म की नसें फिर से बुरी तरह से खिंच गयी थी,फिर ग़लती उसकी भी नही थी अंदर सीन ही इतना गरमा-गरम चल रहा था,उसकी माँ सोफे पर टाँगे चौड़ी करके और अपनी चूत खोले लेटी हुई थी और रमण उसकी चूत को अपने दोनो हाथों से खोल कर अपनी जीभ से चाटे ही जा रहा था,और इस चटाई से उसकी मा बहुत तेज़ी से सिसकियाँ ले रही थी और तरह-2 की वासनामई आवाज़ें निकाल रही थी,अब मनु से सहन नही हुआ और उसके लंड ने फिर से पिचकारी छोड़ दी,और जैसे ही उसके लंड ने पानी छोड़ा उसके मूह से एक तेज़ आह निकली,आह मम्मी के नाम की.

मनु की आवाज़ तो बहुत तेज़ थी,पर अंदर तो उस-से भी तेज़-2 आवाज़ें आ रही थी,इसलिए मनु की आवाज़ उन आहों मे ही दब गयी,पर मनु ने जब अंदर नज़र डाली कि उसकी आवाज़ से किसी को कुछ भी सुनाई नही दिया है तो वो वहीं पर फर्श पर बैठ गया,दो बार जल्दी-2 झड़ने से उसके अंदर ताक़त की उसको कुछ कमी महसूस हो रही थी,पर अंदर जो चल रहा था,वो उसको चैन से नही बैठने देने वाला था.

इधर अंदर रमण अब आरती की चूत मे अपनी पूरी की पूरी जीभ डाल कर उसको तेज़ी से चूस रहा था,और आरती तरह -2 की आवाज़ें निकाले जा रही थी,अब रमण से भी सहन नही हो रहा था,तब उसने भी अपनी पॅंट को एक हाथ से ढीला किया और अपनी पॅंट को थोड़ा सा नीचे कर के अपने लंड पर अंडरवेर के उपर से ही हाथ रखा,तो उसका लंड ऐसे झटके मारने लगा जैसे कि वो बिफ़्फ़र गया हो कि उसको अब तक चूत मे क्यों नही डाला,पर रमण ने उस पर धीरे-2 हाथ फेर कर जैसे उसको समझाया कि अभी जितनी तसल्ली करेगा आगे उतना ही मज़ा आएगा,फिर वो अपनी जीभ से ही आरती की चूत को इतनी तेज़ी से चाटने लगा कि जैसे उसकी चुदाई कर रहा हो,अब आरती भी उपानी चूत को उपर उठा कर रमण के मूह पर दबा रही थी,और बड-बड़ा रही थी कि इसको खा जाओ इसको फाड़ डालो अब मुझसे सहन नही हो रहा,तभी उसका जिस्म एकदम तन गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया,रमण को तो ऐसा लगा कि जैसे चूत मे बाढ़ ही आ गयी हो,पर वो फिर भी उसको चाटता ही रहा और वो सारा पानी पी गया,अब आरती को अपना जिस्म कुछ हल्का महसूस हो रहा था,और एक बार पानी निकल जाने से उसका नशा जो कि शराब और वासना का मिला जुला था कुछ काम हो गया था.

 


जब आरती की चूत का सारा पानी निकल गया तब उसने अपनी हालत की तरफ देखा तो एक बार तो उसके होश उड़ गये कि वो कहाँ है और क्या कर रही है,ऐसे नंगी हालत मे वो किसी गैर मर्द के आगे कैसे लेटी हुई है,अब उसको अपने आप पर शरम आने लगी और वो सोफे से उठने की कोशिस करने लगी,पर रमण था कि वो अब भी उसकी चूत को चाटे ही जा रहा था,इस कारण वो उठ नही पा रही थी,तब उसने रमण का सिर पकड़ कर उसको साइड किया,अब रमण को समझ आया कि आरती का पानी निकल गया है,और उसकी मस्ती एक बार शांत हो गयी है.

पर रमण तो पुराना खिलाड़ी था उसको पता था कि अगर अभी इसको छोड़ा तो बाद मे ये चुदवाने मे फिर से नखरा करेगी,इसलिए वो आरती की चूत को अपनी जीभ से चाटे ही जा रहा था,जिस-से कि वो फिर से जोश मे आ जाए और इस बार रमण उसकी चूत मे अपना मूसल घुसा कर उसकी कुटाई कर ही दे.

आरती ने जब देखा कि रमण तो उसकी चूत पर से हट ही नही रहा तो वो रमण को बोली कि रमण ये तुम क्या कर रहे हो,हटो यहाँ से ,पर रमण ने तो जैसे कुछ सुना ही नही और वो और तेज़ी से अपनी जीभ आरती की चूत मे आगे पीछे करने लगा,अब आरती को भी फिर से मज़ा आने लगा और उसको फिर से जोश आ रहा था.

फिर आरती ने जब सारी सेचुयेशन के बारे मे दुबारा से सोचा तो उसको लगा कि अब जब वो यहाँ तक आ ही गयी है और इस हालत मे रमण के सामने पड़ी है तो अब उसको भी सब कुछ भूल कर अपनी जवानी का मज़ा ले ही लेना ,चाहिए,अब और ज़्यादा शरमाने से कुछ भी नही होगा,और फिर जब एक बार वो रमण के सामने नंगी हो ही गयी तो अब यहाँ से वापस लौटना नामुमकिन है.

ये सोच कर आरती ने भी अपने विरोध को छोड़ दिया और अब वो रमण के साथ सहयोग करने लगी,जब रमण ने देखा कि अब आरती का विरोध बंद हो गया है और वो सपोर्ट कर रही है,तो उसने भी अपना सिर उसकी चूत से उपर किया और आरती की आँखों मे झाँक कर देखा तो उसको वहाँ पर वासना ही नज़र आई,तो वो फिर उसकी चूत पर झुक गया.

आरती भी जो अब तक कुछ नशे मे ही मस्ती कर रही थी अब पूरे होश मे चूत की चुसाइ का मज़ा ले रही थी,अब उसको अपनी चूत की चुसाइ से कोई एतराज़ नही था,और अब जो उसकी सिसकियाँ थी वो पहले से ज़्यादा रोमांचित करने वाली थी,वो जब रमण के कानो मे पड़ी तो रमण समझ गया कि अब आरती ने सारी स्थितियो को कबुल कर लिया है और अब वो अपनी चूत की चुदाई मे भी उसका सहयोग करेगी

जब रमण ये समझ गया कि अब आरती पूरी तरह से सब समझ कर चुदने के लिए तैयार है तो उसने अपना मूह उसकी चूत पर से हटा लिया,पर उसका पूरा मूह आरती की चूत के रस से भीगा हुआ था,और वो रस उसके पूरे मूह पर लगा हुआ था,रमण ने अपने मूह को फिर आरती के मूह के पास किया तो आरती को उसके मूह से अपनी ही चूत की भीनी-2 खुसबू आ रही थी,तो जब रमण ने अपना मूह आरती के मूह के पास किया तो उसने भी अपना मूह आगे करके रमण के मूह को चूम लिया,फिर दोनो ने अपने होठ आपस मे मिला दिए ,जब आरती ने उसके होठों को चूसा तो उसे अपनी ही चूत के रस का नमकीन स्वाद आया,तो एक बार तो उसे अच्छा नही लगा पर जब रमण उसके होठ चूस्ता ही रहा तो उसको भी वो स्वाद अच्छा लगने लग गया और वो अपनी ही चूत के रस को चूसने लगी,फिर उसने अपने होठ रमण के होठों से अलग किया और वो रमण के सारे मूह पर लगे हुए चूतरस को अपनी जीभ से चाटने लगी,अब तो आरती को मज़ा आने लगा था,और वो रमण के सारे चेहरे को ही अपनी जीभ से चाटे जा रही थी,रमण भी समझ गया कि आरती को अपनी चूतरस का स्वाद पसंद आ गया है तो उसने आरती की पैंटी जो कि साइड मे पड़ी हुई थी,और आरती के चूतरस से बुरी तरह से भीगी हुई थी,उसको उठा कर चूत वाले हिस्से को आरती के मूह पर लगा दिया,आरती को पहले तो समझ नही आया कि ये क्या है,पर फिर जब उसको समझ आया तो उसने अपनी जीभ निकाली और उस गीली कच्छि पर लगा दी ,कच्छि का कुछ हिसासा आरती की नाक के पास भी था तो कच्छि की खुसबू आरती की नाक मे भी जा रही थी,जो आरती को दुबारा मदहोश करती जा रही थी,और वो फिर से वासना के नशे मे आपने होश खोने लगी थी.

पर रमण जानता था कि ये नशा जो है मदहोशी का है और इस नशे मे जो चुदाई होगी उस चुदाई का मज़ा बड़ा ही जबरदस्त होगा,इसलिए वो चाहता था कि अब आरती पूरी तरह से उसके रंग मे रंग जाए,इसलिए ही उसने आरती को उसकी ही कच्छि चटानी शुरू की थी,अब आरती अपनी कच्छि को आगे से पूरी तरह से मूह मे ले कर चूस रही थी,और उसको उसमे बहुत मज़ा आ रहा था.

इधर बाहर मनु अब अंदर का नज़ारा देख कर दुबारा होश मे और जोश मे आ रहा था,अब उसका लंड अंदर अपनी मा की हरकतें देख कर दुबारा तनाव मे आ गया था.अब मनु फिर से अपने पैरो पे खड़ा हो गया था,और फिर से अंदर के नंगे नज़ारे को देख रहा था,पेर अब वो सिर्फ़ कमेरे से फोटो खींचने पे ही ज़ोर दे रहा था,आज तो उसकी लॉटरी ही लग गयी थी,कि उसको अपनी ही माँ की इतनी सारी नंगी फोटो खींचने का मौका मिल रहा था

मनु का लंड अब फिर से तनाव मे आ गया था,और अब वो फिर से फूंकारने लगा था.

अंदर अब रमण और आरती दोनो बहुत एक्शिटेड हो गये थे,और रमण जानता था कि अब अगर आरती की बुर मे लंड नही डाला तो वो एक बार फिर से झाड़ सकती है,और उपर से उसका खुद का लंड अब उसको तंग कर रहा था,और वो अब किसी बिल मे घुसना चाह रहा था,इसलिए अब रमण ने आरती के मोटे-2 मम्मों को भी हॉर्न की तरह से दबाना शुरू कर दिया था.

 
फिर रमण ने आरती के पूरे शरीर पे चुंबनो की बौछार कर दी,तब तक आरती भी बहुत गरम हो गयी थी और अब वो गर्मी उसकी बर्दाश्त से बाहर हो रही थी,उसकी चूत मे इस टाइम खलबली मची हुई थी,और इसको सिर्फ़ रमण का लंड ही शांत कर सकता था,इसलिए अब उसने अपना हाथ नीचे ले जा कर अंडरवेर के उपर ही रमण के लंड पर रख दिया,आरती का हाथ जैसे ही रमण के लंड के उपर टच हुआ,एकदम से रमण के लंड ने फूँकार सी मारी,और उसमे बहुत कडपन आ गया,तब रमण ने भी अपना एक हाथ नीचे ले जा कर अपनी अंडरवेर को थोड़ा सा नीचे किया और अपने तने हुए लंड को उसके बंधन से आज़ाद कर दिया,और आरती के हाथ को अपने लंड पे ले जा कर रख दिया,आरती को ऐसा लगा कि जैसे कोई बहुत गरम चीज़ उसके हाथ मे आ गयी है,पर उसने फिर भी लंड को नही छोड़ा,और उधर रमण के लंड को जैसे ही आरती के मुलायम हाथों का स्पर्श मिला वो और ज़्यादा भड़क उठा.

अब आरती से बिल्कुल बर्दाश्त नही हो रहा था,तो उसने रमण से कहा कि रमण अब कुछ करो मेरी चूत मे आग जैसी लग रही है,इसको कैसे भी करके शांत करो,रमण बोला भाभी जी ये तो अब मेरे साँप के आपके बिल मे जाने से ही शांत होगी.

आरती -तुम कुछ भी करो पर अब मुझ से मेरी चूत की खुजली सही नही जा रही,इसको ख़तम कर दो.

रमण-फिर तो आपको मेरा ये मूसल अपनी चूत मे लेना होगा,और वो यहाँ सोफे पर मुश्किल है.

आरती-तो चलो फिर बेडरूम मे चलते हैं.

रमण-ठीक है,और उसने पहले अपनी पॅंट को अपने से अलग किया ,और अपना अंडरवेर ठीक किया ,फिर आगे बढ़ कर आरती को अपनी बाहों मे उठा लिया,आरती ने सिर्फ़ स्कर्ट डाली हुई थी,बाकी के कपड़े वहीं पर बिखरे पड़े थे.

रमण-अब कहाँ को चलें,आरती ने उसको अपने बेडरूम की तरफ चलने का इशारा किया,तो वो उधर ही चल दिया.

इधर बाहर से मनु ये सब देख रहा था,और सुन भी रहा था कि अब उसकी मा को बहुत गर्मी चढ़ गयी है और अब वो अपनी चूत मरवाना चाहती है,वो ये सोच कर बहुत एक्शिटेड हो गया कि अब माँ की लाइव चुदाई देखने को मिलेगी,ये सोच कर तो उसके हाथ पैर काँपने लगे की अब आगे तो बहुत ही शानदार सीन आने वाला है,उसने जब देखा कि रमण ने आरती को अपनी बाहों मे उठा लिया है और वो उसके बेडरूम की तरफ जा रहा है,तो उसने अपनी अंडरवेर बिल्कुल ही निकाल दी और वो नीचे से बिल्कुल नंगा हो गया.

तब तक रमण आरती को ले कर उसके बेडरूम मे जा चुका था.

इसलिए मनु जल्दी से ड्रॉयिंग रूम मे आया और वहाँ से सबसे पहले आपनी मा की कच्छि उठाई,फिर उसने उसको अपनी नाक पर लगाया,और सूंघने लगा,उसकी खुसबू तो उसको भी मदहोश कर रही थी,फिर उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और जहाँ से उसकी माँ चूस रही थी वहाँ पर ही अपनी जीभ लगाई,जैसे ही जीभ वहाँ टच हुई एक करेंट सा उसके शरीर मे दौड़ गया,वहाँ से उसको एक नमकीन स्वाद चूसने को मिला,अब तो मनु का लंड फिर से उस-से बग़ावत करने लगा था,और अब वो फिर से अककड़ गया था.

 


मनु समझ गया कि अब अगर उसने फिर से अपने लंड को नही झाड़ा तो वो नही मानेगा तो उसने अपनी मा की कच्छि को चूस्ते हुए मूठ मारनी शुरू कर दी,तभी उसकी नज़र अपनी मा के टॉप पर गयी तो उसने झट से उसको उठा लिया और फिर उसको अपने लंड पर रख लिया,उसको एक बार ऐसा महसूस हुआ कि जैसे उसकी मा ही उसके साथ हो,ये सोच कर उसने टॉप को ही अपने लंड पर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया,अब हालत ये थे कि आरती की कच्छि उसके मूह मे थी और टॉप उसके लंड पर था,और वो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी मा के नंगे जिस्म की कल्पना कर रहा था,कि जैसे उसका लंड ही उसकी मा की चूत मे हो और तभी वो झाड़ गया,इस बार उसके लंड ने सारा पानी अपनी माँ के टॉप मे ही छोड़ दिया था.

जब मनु का लंड झाड़ गया तब उसने अपने लंड को अपनी मा की कच्छि से ही साफ कर लिया,फिर उसको होश आया कि वो तो यहाँ खड़ा है और इतने मे तो उसकी माँ अंदर चुद ना गयी हो,वो जल्दी से अपनी माँ के रूम की तरफ जाने लगा ,तभी उसकी नज़र वहीं पर रखे हॅंडकॅम पर गयी,जो वो पहले ले कर आया था,पर अभी काम मे नही आया था,अब उसने सोचा कि मा की फोटुस तो कमेरे से ले ही ली हैं ,अब तो मा की चुदाई की ब्लू फिल्म इस-से बना ली जाए,ये सोच कर उसने हॅंडकॅम उठा लिया और अपनी माँ के रूम की तरफ चल दिया.

अंदर रमण ने आरती को अपनी गोदी से उतार कर बिस्तेर पर लिटा दिया था,और अब वो अपने कपड़े उतार रहा था,पर उसने आरती की मिनी और सेंडल नही उतारे,जब वो बिल्कुल नंगा हो गया तो वो आरती के पास आ गया और फिर से उसके मम्मे चूसने लगा,तब आरती ने कहा कि अब इनको बाद मे चूस लेना ये कहीं भागे नही जा रहे ,पर एक बार पहले आपना ये मोटा लंड मेरी चूत मे बाड़ दो,जिस-से कि मेरी चूत मे जो आग लग रही है वो कुछ ठंडी पड़ जाए.

रमण ने कहा कि वो तो ठीक है,अगर उसकी ये ही इच्छा है तो पहले ये ही सही ये कह कर उसने अपने मोटे लंड को आरती की चिकनी चूत पर रखा और एक करारा धक्का मारा,आरती की चूत पहले ही चटाई और चुसाइ से इतनी गीली हो रखी थी कि जैसे ही रमण ने शॉट मारा उसका पूरे का पूरा लंड एक बार मे ही आरती की चूत मे घुस गया,और जैसे ही वो जा कर उसकी चूत के अंदर लास्ट मे टकराया तो एकदम से आरती के मूह से चीख सी निकल गयी.

तभी मनु भी बाहर तक आ गया था ,तो उसने जैसे ही अपनी माँ की चीख सुनी वो एकदम से अपने आप को रोक नही पाया और कमरे मे घुस गया,पर जब उसने देखा कि वो चीख तो उसकी माँ ने मज़े के कारण मारी थी,तो वो वहीं रुक गया,उसने देखा कि बिस्तेर पर उसकी माँ टाँगें चौड़ी करके आँखें बंद करके लेटी हुई है और रमण उसके उपर चढ़ कर उसकी जम कर चुदाई कर रहा है.

तभी रमण की नज़र भी मनु पर पड़ी और उसने देखा कि मनु नीचे से पूरी तरह से नंगा है और अब उसका लंड अपनी माँ की चुदाई देख कर फिर से खड़ा हो रहा है,और उसके दूसरे हाथ मे हॅंडकॅम है तो उसने मनु को आँख मारी और इशारा किया कि अगर वो चाहे तो अपनी माँ की फिल्म बना ले.

मनु रमण का इशारा समझ गया,पर उसको पता था कि अगर वो ऐसे ही कमरे मे खुले आम अपनी मा की चुदाई को शूट करेगा तो,जब उसकी माँ की नज़र उस पर पड़ेगी तो शायद वो इस-से आगे ना बढ़े और फिर वो इस सब से महरूम हो जाए ,इसलिए उसको कहीं पर भी थोड़ा सा छुप कर ही फिल्म बनाना सही रहेगा,तो वो थोड़ा सा पीछे हो कर पर्दे के पीछे छुप गया और वहाँ से ही शूट करने लगा.

इधर आरती ने उस चीख के बाद से तेज़ी से सिसकना शुरू कर दिया था,और रमण के मूसल लंड को अपनी चूत मे अड्जस्ट कर लिया था और अब आँखें बंद करके उसके हर धक्के का मज़ा ले रही थी,और धक्कों का जवाब अपनी कमर उछाल-2 कर धक्कों से ही दे रही थी.साथ ही साथ अब मज़े के कारण उसकी आहें भी तेज़ हो गयी थी और वो बड-बड़ाने भी लगी थी,जैसे कि आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे सनम आज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज तुमने मुझे खुस कर दियाआआआआआ अब तुम मेरी चूत को चाहे फाड़ डालो या इसका भोसड़ा बना दो,अब तुमको रोज़ ही ऐसे ही मुझे ठोकना होगा,आज तो मेरी चूत की आग को ठंडा कर दो. हेययीयीयैआइयैआइयैआइयैआइयैआइयैआइयैआइयैआइयैआइयैयीयीयियी रजाआआ

रमण बोला हां मेरी जानेमन अब मैं रोज़ ही तुझे ऐसे ही ठोकुन्गा ,अब तो मुझे भी रोज़ ही तेरी चूत मारने को चाहेयेगि,नही तो मेरे लंड की प्यास ही नही बुझेगी,मेरी रानी.

अब दोनो जनो ने अपने धक्को की रफ़्तार को बढ़ा दिया था,अब दोनो ही झड़ने के करीब आ गये थे,वैसे तो रमण इतनी जल्दी शायद नही झाड़ता पर क्यूंकी अभी तक उसका पानी एक बार भी नही निकला था और उसकी उतेज़ना इतनी बढ़ी हुई थी कि जैसे ही उसका लंड पहली बार आरती की चूत मे घुसा था वो तो तभी झड़ने के लिए तैयार था,वो तो उसने आपने आप पर कंट्रोल करके अभी तक अपने लंड को झड़ने से रोका हुआ था,पर जब आरती भी झड़ने वाली थी तो उसने सोचा कि अब उसको भी एक बार इसके साथ ही झाड़ जाना चाहिए.

ये सोच कर रमण ने अपने धक्को की स्पीड तेज़ कर दी,तभी आरती ने रमण से कहा रमण अब मेरा निकलने वाला है,रमण बोला तो ठीक है जानेमन मैं भी तुम्हारे साथ-2 आ रहा हूँ,और ये कह कर आरती ने एक तेज़ सिसकी मारी और अपनी दोनो टाँगें जो अब तक खुली थी उनसे रमण को बुरी तरह से जाकड़ लिया,तभी रमण ने भी उसकी चूत मे अपना पानी गिरा दिया.दोनो जने साथ-2 झाड़ रहे थे और उनके रस आपस मे मिल कर आरती की चूत मे इकट्ठा हो रहे थे.

 


इधर मनु उनकी बातें तो सुन ही रहा था साथ ही साथ उनकी मूवी भी बनाए जा रहा था,अब उसका लंड दुबारा से कड़ा हो चुका था,पर अब तक वो 3 बार झाड़ चुका था,इसलिए कोई जल्दी नही थी,फिर उसको ये तो पता ही था कि ये रास लीला आज सारी रात चलनी है,और आज की रात उसके पास अपना माल निकालने के कई मौके आएँगे,इसलिए वो सिर्फ़ मूवी शूट करने पर ही ध्यान दे रहा था.

अब जब रमण के लंड का सारा पानी आरती की चूत मे गिर गया तो,वो आरती के उपर से हट गया,उसका लंड अब थोड़ा सिकुड के आरती की चूत से बाहर आ गया,वो दोनो के मिले जुले रस से बुरी तरह से भीगा हुआ था.अब दोनो जने बिस्तेर पर साथ-2 लेट कर लंबी-2 साँसे लेने लगे.

थोड़ी देर बाद जब दोनो की साँसें कुछ ठीक हुई तो रमण ने फिर से आरती के मम्मों को पकड़ लिया,आरती ने कहा कि क्या तुम्हारा मन अभी भरा नही.

रमण-अर्रे जिसके पास आपके जैसी हसीना हो उसका कभी मन भर ही नही सकता,मेरा बस चले तो मैं हमेशा ही आपकी चूत मारता ही रहूं,और कभी अपना लंड इस चूत मे से निकालु ही नही.

आरती-अच्छा जी,ऐसा है क्या,मैं तुम्हे इतनी पसंद हूँ क्या?

रमण-और क्या आप तो मुझे शुरू से ही बहुत पसंद हो,और मैं शुरू से ही आपको अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता था.

आरती-ये बात तो पहले मुझे मनु ने भी कही थी,कि तुम मुझसे दोस्ती करना चाहते हो.तो क्या ये सब बाते तुम मनु से भी कर लेते हो,और अब जो हमारे बीच हुआ है ,ये भी क्या तुम मनु को बताओगे.

रमण-अर्रे भाभी जी

आरती-अब तुम मुझे भाभी मत बोलो

रमण-ठीक है मेरी रानी ,सच तो ये है कि इन सब बातों मे मनु मेरा राज़दार है,और आज जो मौका हम को मिला है उसमे भी मनु ने हमारा साथ दिया है,और अगर आगे भी हम को सबसे ये सब छुपा कर रखना है तो उसको तो शामिल करना ही पड़ेगा.

ये सब सुन कर आरती एक बार तो सन्न रह गयी.तब रमण ने कहा कि मेरी जान तुम क्या सोच रही हो?

आरती कुछ देर तो चुप रही,फिर बोली तो इसका मतलब है कि मनु को सब बातों का पता है,अब मैं उस-से आँखें कैसे मिला पाउन्गि,आख़िर वो मेरा बेटा है.

रमण-इसमे कुछ भी दिक्कत नही है,वो तुम्हारा बेटा है तो क्या हुआ,है तो वो भी एक आदमी ही और जैसे तुम्हे देख कर मेरा दिल धड़कता है ऐसे ही उसका भी धड़कता है,तो अगर मैं तुमसे मस्ती कर सकता हूँ तो फिर उस-से क्या दिक्कत है.

आरती बहुत देर तक चुप ही रही,अब वो क्या बोले वो ये ही सोच रही थी,उसकी ज़ुबान उसके तालू से चिपक गयी थी,ये सुन कर कि मनु को पता है कि वो इस समय रमण से चुदवा रही है.

रमण समझ रहा था कि इस समय आरती के दिल मे क्या चल रहा है और वो कह रहा था कि आरती भी ये मान ले कि मनु से उसको कोई प्राब्लम नही है,जिस-से कि वो लोग आगे बेख़टके घर मे चुदाई कर सकें,पर इतनी जल्दी से आरती का ये स्वीकार करना मुश्किल था.

रमण ने आरती का ध्यान वहाँ से हटाने के लिए अब फिर से आरती के जिस्म से खेलना शुरू कर दिया था,पर आरती बहुत ज़्यादा साथ नही दे रही थी

तब रमण ने उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया,और फिर उनको चूसने लगा,जब वो इतनी कोशिस कर रहा था,तो कुछ तो असर आना ही था,और अब आरती को फिर से धीरे-2 मस्ती चढ़ने लगी थी और वो भी अब आहें भरने लगी थी और सिसकियाँ लेने लगी थी,अब रमण को समझ आ गया कि आरती अब फिर से मूड मे आ रही है तो वो उसकी चुचियों को और तेज़ी से चूसने लगा था,फिर उसने अपनी दो उंगलियाँ आरती की चूत मे डाल दी,आरती की चूत अभी भी रमण और उसके रस के कॉकटेल से भरी हुई थी और कुछ रस बाहर भी छलक रहा था,जब रमण ने अपनी उंगली उसकी चूत मे डाली तो आरती के मूह से एक ज़ोर की आह निकली और उसकी चूत मे से रस और बाहर को गिर गया.

 


फिर रमण ने अपनी उंगलियों को थोड़ा सा उसकी चूत मे घुमाया और फिर निकाल कर आरती के मूह मे ले जा कर डाल दी,आरती को एक बार तो वो कॉकटेल का स्वाद अज्जीब सा लगा और वो बोली कि ये क्या कर रहे हो.

रमण बोला कि जानेमान ये तो तुम्हारी चूत और मेरे लंड के प्रेमरस का कॉकटेल,(यानी कि कॉक का टेल कॉकटेल)इसको चाटो इसका स्वाद अमृत जैसा लगेगा,ये सुन कर आरती ने उसकी उंगलियो को मूह मे ले ही लिया और उसके बाद उसको भी उसमे स्वाद आने लगा और वो उसको चूसने लगी,अब आरती पूरी मस्ती मे आ गयी थी,फिर रमण ने दुबारा से आरती की चूत मे उंगली डाली और इस बार अपनी उंगली पर पहले से बहुत ज़्यादा रस लगा कर उसके मूह मे डाला इस बार आरती ने खुद उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी उंगलियाँ चूसने लगी,जब वो चपड-2 करके रमण की उंगलियाँ चूस रही थी तो रमण ने मनु को इशारा किया कि वो भी बाहर आ जाए,मनु उसका इशारा समझ कर बाहर रमण के पास आ गया,आरती तो उस टाइम रमण की उंगलियो से कॉकटेल ही चूसे जा रही थी,तब रमण ने मनु को उसकी एक चुचि को दबाने का इशारा किया.

अब सीन ये था कि रमण एक हाथ से आरती की चुचि दबा रहा था और उसका दूसरा हाथ आरती के मूह मे था,और मनु अपने दोनो हाथों से अपनी ही मा की चुचि को दबा रहा था,जब आरती को ये समझ मे आया कि अब कोई और भी उसकी चुचि को दबा रहा है तो उसने आँखें खोल कर और पलट कर देखा कि ये तो उसका खुद का बेटा मनु ही है,ये देखते ही उसका शरीर एकदम से ठंडा पड़ गया और उसने सभी तरह की हरकतें बंद कर दी.

रमण ने जब ये देखा तो वो बोला कि जानेमन क्या हुआ?

आरती पहले तो कुछ भी नही बोली,और चुप चाप पड़ी रही,फिर बोली कि मनु तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

रमण-अर्रे जानेमन अब इस-से क्या शरमाना इसको तो सब पता ही है,और अगर हम इसको अपने साथ नही मिलाएँगे तो फिर हम भी मस्ती नही कर पाएँगे.

आरती-पर मैं इसके साथ ये सब नही कर सकती.आख़िर ये मेरा बेटा है.

रमण-तो क्या हुआ,अगर ये तुम्हारा बेटा है तो ,है तो ये भी एक मर्द ही ना,और देखो ये तुम से कितना प्यार करता है,जब इसने खुद ही तुमको मेरे से चुदवाने का मौका दिया है तो फिर इसका भी यो कुछ हक़ बनता है,फिर अगर ये हमारे साथ रहेगा तो घर मे ही तुम्हे दो-2 लंड का स्वाद हमेशा मिलता रहेगा,फिर ये किसी को बताएगा भी नही,और हम मिल कर मस्ती कर सकेंगे.

आरती-पर मेरा दिल नही मानता,कि मैं अपने बेटे के साथ ये सब करूँ.

रमण-तुम समझ क्यों नही रही,तुम एक बार को ये भूल जाओ कि ये तुम्हारा बेटा है,फिर इसके लंड पर नज़र डालो,ये कह कर रमण ने मनु का नंगा लंड निकाल कर आरती के सामने कर दिया,अब लंड महाराज तो जोश मे थे ही और जब उनको अपनी मा की चूत मरने का मौका मिलने वाला था तो वो और भी जोश मे आ गये,तो जैसे ही रमण ने उसको आगे किया और आरती का एक हाथ पकड़ के उसके हाथ को मनु के लंड पर रखा तो वो और भी ज़्यादा फूल गये,अब जब आरती ने अपने बेटे का इतना मोटा लंड देखा तो एक बार तो उसकी आह ही निकल गयी,पर फिर भी उसने कुछ नही बोला,तो रमण बोला जब इतना मोटा लंड घर मे ही मौजूद रहेगा तो तुम जब चाहे इसको अपनी चूत मे ले सकती हो,और किसी को पता भी नही चलेगा.

तब आरती ने अपने दिल मे सोचा कि अब जो होना था वो तो हो ही चुका है,और अब तो मनु ने भी मुझको रमण से चुदवाते हुए देख ही लिया है तो अब छुपाने को तो कुछ बचा ही नही है,फिर अब उसको भी ये मान ही लेना चाहिए कि वो खुद भी तो अब अपने बेटे के इतने मोटे लंड को देख कर अब उस-से चुदवाना ही चाहती है

 


आरती ने अब अपने दिल को समझा लिया कि अगर उसको अपनी जवानी के मज़े लेने हैं और घर मे मौज करनी है तो फिर,मनु को तो साथ रखना ही पड़ेगा और वो तो तभी साथ देगा जब उसको कुछ मिलेगा,और वो जो चाहता है वो आरती ही उसको दे सकती है,इसलिए ये तो अब खुद उसपेर ही निर्भर है कि वो क्या करे.

ये विचार दिमाग़ मे आते ही आरती ने अपना मन पक्का कर लिया कि अब वो अपनी जवानी का फुल मज़ा लेगी,और उसके लिए अब अपने बेटे का लंड भी अपनी चूत मे ले लेगी,तब उसने अपने हाथ को मनु के लंड पर धीरे-2 आगे-पीछे करना शुरू कर दिया,जब रमण ने ये देखा कि आरती ने अब हालत को समझ लिया है,और अब वो सब कुछ करने को तैयार है तो ,उसने मनु को कहा कि लो यार अब तुम भी इस जवानी के मज़े लो.

मनु का लंड हालाँकि आरती के हाथ मे था और वो अपनी मा के नरम मुलायम हाथ के स्पर्श से और ज़्यादा उत्तेजना महसूस कर रहा था,पर मन के किसी कोने मे अभी भी थोड़ी सी झिझक मा -बेटे वाली बाकी थी,इसलिए वो इतना खुल कर आरती के साथ वो सब नही कर पा रहा था.

ये बात रमण भी समझता था कि अभी पहली ही बार मे दोनो ही मा-बेटे मे कुछ झीजक तो रहेगी ही,पर जब एक बार बेटे का लंड मा की बुर की सैर कर लेगा तो सारी शरम हया ख़तम हो जाएगी,और फिर खुल कर वासना का खेल होगा.

रमण के लंड मे अब तनाव बढ़ता जा रहा था,और अब वो फिर से आरती की चुदाई करने की तैयारी कर रहा था,अब आरती भी धीरे-2 सब कुछ समझ कर रंग मे आने लगी थी और अब उसका हाथ लगातार ही मनु के लंड पर आगे-पीछे हो रहा था,और उसकी सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी.

अब मनु को भी अपनी मा के लंड को मसल्ने से और आहें भरने से जोश बढ़ रहा था,और उसने अपनी मा की चुचियो को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया था,तभी उसने झुक कर अपनी मा के मम्मे को चूसना शुरू कर दिया,जैसे ही मनु ने अपना मूह आरती के मम्मे पर रखा आरती को फिर से करेंट सा लगा,क्यूंकी चुदाई एक अलग अहसास है,पर अपने बेटे से ही चुदाई बिल्कुल ही दूसरा अहसास है.

और ये बात रमण को भी समझ आ रही थी कि अब जो आरती ही नही उसका भी जोश इतना बढ़ गया है,वो मा-बेटे के वासना के खेल के कारण है,और इसमे उसी बात का प्रभाव सबसे ज़्यादा है,कि वो ये देख रहा है कि कैसे एक जवान बेटा अपनी ही माँ के मम्मों को चूस रहा है.

अब जो रमण ने आरती की चूत मे उंगलियाँ डाली तो उसको उसमे पहले से कहीं ज़्यादा गर्मी महसूस हुई,उसने इस बार अपने हाथ के साथ-2 आरती का हाथ भी पकड़ कर उसकी ही चूत मे डाल दिया,एक साथ 4-4 उंगलियाँ जैसे ही आरती की चूत मे गयी वो तो एकदम से पानी ही छोड़ने लगी,और झाड़ गयी.

इस बार रमण ने अपना अंडरवेर जो वहीं पड़ा था उठाया और उसको एक तरफ से पकड़ कर आरती की चूत मे घुसा दिया,और उस-से आरती की चूत के रस को काफ़ी सारी मात्रा मे सोख लिया,फिर उसने वो अंडरवेर उसी साइड से आरती की नाक के पास लगाया,तो वो उसकी खुसबू से मदहोश सी हो गयी,तब रमण ने उस हिस्से को आरती के मूह मे डाल दिया,तो आरती उसको बुरी तरह से चूसने लगी,उसको अब कॉकटेल चाटने मे पहले से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था.जब उसमे से रस आना कम हुआ तो रमण ने आरती का वो वाला हाथ जो उसने चूत मे डाला था पकड़ा और उसकी वो उंगलियाँ उसके मूह मे डाल दी,अब तो आरती वासना के नशे मे पागल हो गयी थी,और अनप-शनाप बोलने लगी थी.अब मेरी चूत को फाड़ दो,इसका भोसड़ा बना दो,आज मैं अपने ही बेटे का लंड अपनी चूत मे लूँगी,आजा मेरे बेटे अपनी माँ की चूत मार ले और मादरचोद बन जा.

ये सब सुन कर मनु का जोश तो सातवें आसमान पर ही जा पहुँचा था ,और अब वो फिर से झड़ने को तैयार था,अब आरती भी उसके लंड पर हाथ तेज़ी से चला रही थी,तभी मनु एक बार फिर झाड़ गया,और उसके रस ने आरती के हाथ को भर दिया,जो कि आरती ने जल्दी से अपनी नाक के पास ले जा कर देखा,तो उसको उसमे से बहुत ही मादक खुसबू आई,फिर उसने अपनी जीभ से अपने हाथ को चाटना शुरू कर दिया,उसको उसका स्वाद बहुत ही अच्छा लग रहा था,और वो मनु के सारे रस को अपनी जीभ से चाट -2 कर सॉफ कर गयी

अब मनु का लंड झाड़ कर ढीला हो गया था,और आज की रात मे वो इतनी बार झाड़ गया था कि अब खुद भी कुछ थकान महसूस करने लगा था,तो इस कारण वो झाड़ कर वहीं अपनी मा के पास ही बिस्तर पर गिर गया,और हाँफने लगा.

पर तब तक रमण का लंड तन कर बहुत कड़क हो गया था,और झटके मारने लगा था,अब रमण से सबर नही हो रहा था,और कुछ-2 यही हाल आरती का भी था,तो अब आरती ने रमण के लंड को पकड़ कर अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया.

 


रमण समझ गया कि अब इसको फिर चुदाई की तमन्ना हो रही है,और अब वो भी फिर से चुदाई के लिए तैयार था,इसलिए उसने भी तुरंत ही देर ना करके अपने को आरती के शरीर पर चढ़ा लिया और तब आरती ने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर लगा दिया,इस बार जैसे ही रमण ने धक्का मारा तो आवेश की वजह से उसका लंड साइड मे हो गया और लंड चूत मे ना जा कर बाहर ही रह गया,तब आरती ने दुबारा से रमण का लंड पकड़ा और इस बार अपनी चूत को थोड़ा सा खोल कर उसके लंड का सुपाडा उसने अपनी चूत के खुले हुए मूह पर फिट कर दिया और रमण को बोला कि अब धक्का लगाओ.इस बार रमण ने जैसे ही धक्का लगाया उसका लंड आरती की चिकनी चूत की गहराई मे पूरा उतर गया.

जैसे ही रमण के लंड ने आरती की चूत के आख़िर मे जा कर टक्कर मारी वैसे ही उसकी बहुत ज़ोर की सिसकारी निकल गयी,जैसे ही उसने इतनी तेज़ सिसकारी ली वैसे ही मनु ने उठ कर देखा तो उसकी मा रमण के लंड के नीचे दबी हुई,अपनी चूत मरवा रही थी,ये देख कर मनु को फिर से जोश आ गया,और उसने अपने आप को उठा कर अपनी मा की बगल से सटा लिया.

जैसे ही मनु आरती के बदन से सटा तो आरती ने उसकी तरफ देखा तो वो अपनी मा को बहुत ही प्यार और वासना वाली नज़र से चुदाई करते देख रहा था,ये देख कर आरती का जोश और बढ़ गया,और वो और तेज़ी से अपनी कमर उठाने लगी थी,तभी मनु ने अपना हाथ बढ़ा कर अपनी माँ के मम्मों को पकड़ लिया.

जैसे ही मनु का हाथ आरती के मम्मों पर गया,उसका लंड अब फिर से खड़ा होना शुरू होने लग गया,अब मनु ने आरती की एक चुचि को मूह मे ले कर चूसना शुरू कर दिया,अब तो आरती के मज़े की इंतेहा ही हो गयी,उपर से उसका प्रेमी उसको हुमच-2 के चोद रहा था,और उसका बेटा उसकी चुचि को चूस रहा था,तो आरती के आनंद का तो कहना ही क्या था,और वो मज़े मे पागल हुई जा रही थी,और बहुत सेक्सी-2 आवाज़ें निकाल रही थी.

जब मनु का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया तो उसने आरती की चुचि को अपने मूह से निकाल दिया पर अभी तो रमण ही उसकी मा को चोदे जा रहा था,इसलिए उसका मौका तो अभी आने वाला नही था,पर उसका लंड तो फिर से तन-तना गया था,और अब की बार वो अपना माल बाहर निकाल कर बर्बाद नही करना चाहता था,इसलिए उसने थोड़ा सा बैठ कर अपने लंड को अपनी मा के मूह के पास किया,फिर उसने आपनी माँ आरती का मूह अपने लंड की तरफ घुमाया.

जब आरती ने मनु के लंड को अपने मूह के इतने पास बिल्कुल खड़ी हुई हालत मे देखा तो वो सब कुछ समझ गयी,पर इस-से पहले कभी उसने कोई भी लंड अपने मूह मे ले कर नही चूसा था,इसलिए उसको थोड़ी सी झिझक हो रही थी,पर फिर उसने सोचा कि आज जब उसने इतनी बार लंड के रस को कई तरह से चाटा है तो इसमे भी कोई परेशानी नही होनी चाहिए,फिर उसके अलावा वो अब अपने बेटे के लंड को देख कर मोहित भी हो रही थी,और सोच रही थी कि अब इसका स्वाद ले ही लेना चाहिए,ये सोच कर आरती ने अपना मूह खोला और मनु के लंड को अपने मूह मे ले लिया

आरती ने अब मनु के मोटे लंड को अपने मूह पर लगाया,तो एक बार तो उसको लगा कि उसके होठ ही जल गये,क्यूंकी मनु का लंड था ही इतना गरम,फिर उसने अपना मूह अच्छी तरह से खोला और उसके लंड के सुपाडे को अपने नरम होठों मे दबा लिया,जैसे ही उसने ये किया तो मनु की भी सिसकी निकल गयी,फिर आरती ने धीरे-2 उसको अपने मूह मे ले कर चूसना शुरू किया ,जैसे की वो कोई आइस कॅंडी वाली आइस्क्रीम चूस रही हो,और उसका फ्लेवर धीरे-2 मज़े ले के ले रही हो,फिर उसने मनु के लंड को अपने मूह से निकाल कर बाहर से चाटना शुरू कर दिया.

इधर रमण के धक्कों की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी,और अब जो अपनी मंज़िल के करीब था,पर आरती का ध्यान तो अपने बेटे के मूसल पर ही था,तो उसने कहा जान इधर भी तो कुछ करो,और अपनी कमर को उछालो,या सिर्फ़ इसके लंड को ही चुस्ती रहोगी,इसको तो तुम जब भी चाहो ले सकती हो,ये तो तुम्हे हर टाइम मिलता रहेगा.

आरती ने कहा कि वो तो ठीक है,पर अभी तो सबर नही हो रहा था,चलो पहले तुमसे ही मज़े ले लूँ,फिर इसको आराम से लूँगी,ये कह कर उसने मनु के लंड को छोड़ दिया और उसके हाथों को अपनी चुचियों पर रख दिया,और खुद रमण के धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी.

 


थोड़ी ही देर मे दोनो अपनी मंज़िल के नज़दीक पहुँच गये,तो रमण ने कहा कि जान मे आ रहा हूँ,आरती बोली मैं भी तुम्हारे साथ ही झड़ने वाली हूँ,और ये कह कर दोनो तेज़ी से धक्के लगाने लगे.

मनु को अपनी माँ की चूत मे लग रहे धक्के बहुत ही अच्छे लग रहे थे,और वो ये सोच रहा था कि कुछ टाइम के बाद उसका खुद का लंड भी इसी प्यारी और चिकनी छूट मे गोते लगाएगा,ये सोच-2 कर ही उसका तन बदन और ज़्यादा रोमांचित हो रहा था,और उसका लंड ज़ोर-2 से झटके लेने लगा था.

तभी वो दोनो जने एक साथ आवाज़ करते हुए झड़ने लगे और एक दूसरे से बुरी तरह से चिपक गये,मनु बिचारा वैसे ही अलग हो गया था,जब उन लोगों ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई थी,तो वो साइड से देख कर ही मज़े ले रहा था.वो दोनो जने पसीने मे लत-पथ एक दूसरे से चिपके हुए थे,और आरती की चूत रमण के वीर्य का एक -2 कतरा अपने अंदर समेट कर चूस रही थी,और उसकी चूत को बहुत ठंडक मिल रही थी.

फिर जब आरती की चूत ने रमण के वीर्य की हर बूँद निचोड़ ली तो वो दोनो अलग -2 हो कर लेट गये,और तेज़-2 साँसें लेने लगे.

पर मनु तो सिर्फ़ अपनी मा को ही देखे जा रहा था,आरती पसीने मे भीगी हुई नंगे बदन उसको किसी जादुई हसीना की तरह से अपनी तरफ खींच रही थी,इस टाइम जो आरती की साँसों के साथ-2 उसके मम्मे उपर-नीचे हो रहे थे मनु तो उनको ही देखे जा रहा था,और अपनी मा के हुस्न की तरफ और ज़्यादा आकर्षित हो रहा था,वो सिफ स्कर्ट और सेन्डेक पहने हुए ही बिस्तर पर पड़ी थी,और उसकी चूत से दोनो जनो के रस की कॉकटेल बाहर आ रही थी,मनु तो सिर्फ़ उसको ही निहारे जा रहा था.

जब आरती की नज़र मनु पर पड़ी और उसने देखा कि मनु ऐसे आसक्ति से उसको देखे ही जा रहा है तो उसको भी अपने बेटे पर बहुत प्यार आया,और उसने इशारे से मनु को अपने पास बुलाया और अपने नंगे शरीर से उसको चिपका लिया,जैसे ही आरती ने मनु को अपने शरीर से चिपकाया मनु को मोटा लंड आरती की चूत पर दस्तक देने लगा,पर आरती अभी और चुदाई नही करवा सकती थी,इसलिए उसने मनु के लंड को अपनी चूत की चुम्मि लेने दी,और उसको अपने शरीर से चिपका कर ही लेटी रही.

थोड़ी देर तो मनु आरती से ऐसे ही चिपका रहा,उसको भी अपनी मा के नंगे बदन से चिपक कर असीम आनंद आ रहा था,पर अब उसको अपने शरीर पर पड़े हुए कुछ कपड़े भी भारी लग रहे थे,क्यूंकी वो अपनी मा के मम्मों को अपने शरीर से ही महसूस करना चाहता था,इसलिए उसने थोड़ा सा अपनी मा से अलग हो कर अपने बचे हुए कपड़े भी उतार दिए,और इस तरह से वो बिल्कुल मदरजात नंगा हो गया,और फिर अपनी मा के नंगे बदन से चिपक गया,अब उसको जो मज़ा आ रहा था उसका वर्णन नही किया जा सकता,अब आरती के मोटे-2 बूब्स उसके सीने मे दबे जा रहे थे,और उसको उनकी गर्मी का अहसास हो रहा था,तब तक आरती की साँसें भी संयंत हो गयी थी,और उसको भी अपने बेटे के नंगे शरीर से चिपक के एक अलग ही रोमांच का अनुभव हो रहा था.

अब मनु का लंड आरती की चूत पर पहले से ज़्यादा ठोकर मारने लगा था,और ये आरती को महसूस हो रहा था,पर अभी वो सिर्फ़ मनु से उप्पेरी मज़े ही लेना चाहती थी और फिर कुछ देर के बाद अपनी चूत उस-से मरवाना चाहती थी,वो खुद अब ये कह रही थी कि आज रात को ही मनु उसको चोद कर सारे बंधन तोड़ दे ,जिस-से कि आगे के लिए कोई शर्मो हया ना रहे,और फिर मा-बेटे हमेशा खुल कर घर मे वासना का नंगा खेल खेल सकें.

फिर मनु ने जोश मे अपने होंठ अपनी मा के नरम और नज़ूक गुलाबी होठों पर रख दिए और धीरे-2 उनको चूसने लगा,आरती भी इसमे उसका साथ देने लगी थी,और फिर उसने अपने मा के मूह मे अपनी जीभ डाल दी और अपनी मा की जीभ का स्वाद लेने लगा.

रमण साइड मे लेटा हुआ ये मा बेटे की नंगी मस्ती देख रहा था,और आज पहली बार ऐसे किसी सगे मा बेटे को अपने ही सामने नंगे हो कर आपस मे यौं चिपका देख कर अपने मे बहुत रोमांचित भी हो रहा था,आज तक ये सब सिर्फ़ उसने किस्से कहानियों मे ही पढ़ा था कि ऐसे इंसेस्ट चुदाई भी होती है,पर अपनी आँखों के सामने अपनी कल्पना को साकार होते देख कर तो उसको विश्वास ही नही हो रहा था.

अब मनु की जीभ अपनी मा की जीभ के साथ खेल रही थी,और उसका लंड अपनी मा की फुद्दि पर ठोकर मार रहा था,अब दोनो जनो का शरीर फिर से तपने लगा था.अब आरती की चूत फिर से गरम हो रही थी,जबकि मनु का लंड तो पहले ही तना हुआ था,आरती को भी अंदर से एक अलग ही अहसास हो रहा था,आज पहली बार ही वो किसी दूसरे मर्द से चुदि थी,और उसके तुरंत बाद ही वो अब अपने ही सगे बेटे का लंड अपनी चूत मे लेने वाली थी,ये सोच-2 कर ही उसको एक रोमांच का अनुभव हो रहा था,कि अब मनु का मोटा लंड उसकी चूत का बॅंड बजाने वाला है.

फिर दोनो मा बेटे थोड़ा सा अलग हुए तो आरती ने मनु के लंड को अपने हाथ मे ले लिया,और उसको आगे-पीछे करने लगी,मनु अब बोला कि मा अब ऐसे मत करो अब इसको छोड़ दो,नही तो ये आपकी चूत मे जाने से पहले ही झाड़ जाएगा.

आरती बोली कि नही अब मैं ऐसा नही होने दूँगी,अब तो मैं तुम्हारे इस मोटे बंबू को अपनी चूत मे ले कर ही रहूंगी.

 


रमण मा बेटे की ऐसे खुली और नंगी बातें सुन कर फिर से तैयार हाने लगा था,जब उसने मा बेटे को ऐसे खुल कर चोदा-चोदि की बातें करते हुए सुना तो उसका लंड भी फिर से खड़ा हो गया,और अब वो तनाव मे आ रहा था.अब उसके लंड को भी दुबारा से खुराक की ज़रूरत महसूस होने लगी थी.

फिर रमण भी थोड़ा सा नज़दीक हो कर दूसरी तरफ से आरती से चिपक गया,अब तो आरती का हाल बयान करना मुश्किल था,एक तरफ से तो मनु उसका खुद का बेटा उस-से चिपका हुआ था,तो दूसरी तरफ से रमण भी उस-से चिपक गया था,और तीनो ही जने नंगे थे,उस समय कमरे का नज़ारा ऐसा था कि खुद काम देव भी देखे तो वहीं रह जाए.

अब आरती ने मनु के लंड को खींचना शुरू कर दिया था,क्यूंकी अब उसकी चूत बहुत गरम हो गयी थी,और उसको ठुकाइ की ज़रूरत महसूस होने लगी थी,और आरती चाहती थी कि अब एक बार मनु भी उसकी चूत का मज़ा ले ही ले.तो उसने मनु को अपने उपर आने का इशारा किया,मनु अपनी मा के इशारे को समझ कर आरती के उपर आ गया.

पर आरती की चूत तो पहले ही कॉकटेल से भरी हुई थी,तो अब मनु ने रमण की अंडरवेर जो नीचे पड़ी थी,वो उठाई और अपनी मा की चूत मे डाल दी,और उस-से अच्छी तरह से अपनी मा की चूत को अच्छी तरह से सॉफ करने लगा,ये करते हुए उसका मूह एक बार अपनी मा की चूत के बिल्कुल नज़दीक आ गया,तो उसकी नाक को अपनी मा की चूत से निकलती हुई मादक महक महसूस हुई,और वो मादक महक ऐसी थी कि उस-से मनु मदहोश हो कर अपने होश खोने लगा और उसको पता ही नही चला कि कब उसकी जीभ अपनी मा की चूत पर चली गयी,जैसे ही मनु की जीभ ने आरती की चूत को छुआ,तो आरती के शरीर मे करेंट दौड़ गया,और उसने अपना सिर थोड़ा सा उपर करके देखा तो उसका बेटा मनु मदहोश हो कर उसकी चूत को चाट रहा था.

रमण ने जब देखा कि मनु अपनी मा की चूत को ऐसे चाट रहा है तो उसको भी जोश आ गया और वो भी अपनी जीभ निकाल कर आरती की गरम चूत को चाटने लगा,अब तो आरती की हालत देखने वाली थी,2-2 जवान लड़के उसकी चूत को अपनी-2 जीभ से चाटने के लिए आपस मे जीभ से लड़ाई कर रहे थे,और उसकी चूत उन दोनो की जीभ के खुरदारे पन से और ज़्यादा प्यासी होती जा रही थी.

अब आरती अपनी कमर को उपर की तरफ उछालने लगी थी,तब रमण जो कि इस काम का पुराना खिलाड़ी था,उसने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया,जैसे ही रमण की जीभ आरती की चूत के अंदर घुसी उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और वो इतना छोड़ा कि उसकी चूत को भर दिया,तब रमण ने मनु को इशारा किया और अपने साथ आरती की चूत का रस चाटने को कहा,मनु को भी अपनी मा के चूत के रस का स्वाद बहुत शानदार लगा और वो सारे का सारा रस पी गये.

अब आरती तो झाड़ गयी थी,पर वो दोनो के लंड बिल्कुल तन-तनाए हुए थे,और वो दोनो ही अब उसकी चुदाई करना चाहते था,पर ये रमण भी जानता था कि वो अब तक आरती को 2 बार ठोक चुका है तो अब मौका मनु को ही मिलना चाहिए,फिर आरती उसकी माँ भी है तो वैसे भी मौका उसका ही बनता है,तो फिर वो दोनो ही आरती की चूत को फिर भी चाट-ते रहे और थोड़ी और चटाई से आरती मे फिर से जोश भर गया,और फिर वो बोली कि ये तुम दोनो क्या अब मेरी चूत को खा ही जाओगे,अब आ कर मेरी चूत मे अपना लंड डाल कर इसको चोदो भी.

 
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