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मा की मस्ती compleet

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तब रमण ने मनु को इशारा किया कि अब वो जा कर अपनी माँ की फुद्दि मे अपना लंड डाल दे,तो मनु उठा और आरती के उपर आ गया,पर क्यूंकी उसको ज़्यादा चुदाई का अनुभव नही था,तो नीचे से रमण ने उसके लंड को पकड़ कर आरती की चूत के खुले हुए मूह पर लगाया,और उसके सुपाडे को आरती की चूत मे फँसा दिया,फिर उसने मनु को कहा कि अब धक्का लगा दे यार और अपनी मा की चूत मे अपना लंड डाल कर इसको फ़तह कर ले,इसका भोसड़ा बना दे.

जैसे ही रमण ने मनु को इशारा किया और कहा कि डाल दे ,वैसे ही मनु ने अपना लोड्‍ा अपनी माँ की चूत मे बाड़ दिया,और उसका लंड आरती की चूत के गुलाबी छेद के अंदर जा कर गायब हो गया.

रमण देख रहा था कि कैसे मनु का लंड पूरे का पूरा आरती की चूत के गुलाबी छेद मे जाता है,जैसे ही मनु का लंड उसमे जा कर गायब हुआ,रमण का जोश और बढ़ गया,उधर जैसे ही मनु का पूरा लंड आरती की चूत मे गया आरती के मूह से बहुत मादक सिसकारी निकली,और वो मदहोश हो गयी,आज उसके खुद के बेटे ने उसकी चूत मे अपने लंड को बाड कर वहाँ पर अपनी मोहर लगा दी थी,इसलिए उसके आनंद का ठिकाना नही था.

अब मनु ने धीरे-2 अपनी कमर चलानी शुरू कर दी थी,और आरती भी उसका साथ दे रही थी,वो दोनो सब कुछ भूल कर मस्त हो कर चुदाई मे मशगूल हो गये थे,और आपस मे धक्के पर धक्का लगा रहे थे.

तब रमण से सबर नही हो रहा था,क्यूंकी वो दोनो माँ बेटे तो आपस मे चुदाई मे लगे हुए थे,पर वो अलग से बैठा था,तो फिर वो उठा और उसने अपने लंड को अपने हाथ से सहलाया ,जैसे ही उसने ये किया उसका लंड और ज़्यादा तन गया,तब वो आगे बढ़ा और उसने अपने दोनो पैर आरती के मूह के पास करे और फिर धीरे-2 अपने आप को और अपने लंड को आरती के नरम मुलायम होठों के उपर रख दिया,जैसे ही आरती को अपने होठ पर कुछ गरम रखा हुआ महसूस हुआ तो उसने अपनी आँखें खोल कर देखा तो रमण का मोटा लंबा तना हुआ लंड उसके होठों को छू रहा था,और उसका सुपाडा फूल कर लाल हो रहा था,तो आरती ने अपने होठ खोल दिए,आरती ने जैसे ही आपने होठ खोले रमण ने आपना लंड उसके होठों के बीच मे फँसा दिया.

पर उसका लंड इतना मोटा था कि आरती के होंठो मे समा नही पा रहा था,तो फिर आरती ने अपने मूह को पूरा खोल दिया,तब रमण ने आपने लंड को उसके मूह मे घुसा दिया,लंड मूह मे जाते ही आरती उसको भी चूसने लगी,अब तो आरती का हाल ये था कि नीचे से मनु उसकी चूत मार रहा था,और उपर से रमण उसके मूह को चोद रहा था,और आरती इस सब का मज़ा ले रही थी,आज जैसा मज़ा आरती को आ रहा था वैसा उसको जिंदगी मे कभी भी नही मिला था.

आज तो आरती को अपनी पूरी जिंदगी का सबसे खुशी वाला अनुभव हो रहा था,आज जो मज़ा उसको आ रहा था उसकी उसने कभी भी कल्पना तक नही की थी,और इस-से आगे के भी सारे रास्ते खुल जाने वाले थे.

अब मनु ने उपर से अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी थी,और वो झड़ने के बहुत नज़दीक था,नीचे से आरती भी उसका साथ दे रही थी और अब वो भी उसके साथ ही झड़ने की कोशिस कर रही थी,उपर से उसके मूह मे रमण का लंड भी अब झड़ने को तैयार था.

इस तरह से अब तीनी ही जने अपना-2 पानी छोड़ने वाले थे,और फिर सबसे पहले मनु ने अपने लंड का रस अपनी माँ की चूत मे छोड़ दिया,जैसे ही उसके लंड का गरम रस आरती की चूत के अंदर गिरा,वैसे ही मनु के रस की गर्मी से आरती की चूत ने भी अपना रस छोड़ दिया और इस तरह से दोनो माँ-बेटे एक साथ इकट्ठा ही झाड़ गये.

जब उन दोनो ने अपना-2 रस छोड़ दिया तो आरती ने रमण के लंड को चूसना छोड़ दिया,तब रमण ने अपना लंड आरती के मूह से निकाल लिया और अपने हाथ से ही मूठ मारने लगा और फिर उसने अपने लंड का रस आरती के मम्मों पर गिरा दिया और निढाल हो कर वहीं आरती के दूसरी तरफ गिर गया,अब एक तरफ तो मनु था बीच मे आरती जिसकी चूत और मम्मे लंड रस से भीगे हुए थे और दूसरी तरफ रमण था.

वो तीनो जने चुदाई से इतना थक गये थे कि वहीं पर उसी पोज़ीशन मे सो गये,आज की रात उन तीनो को कभी भी नही भूलने वाली थी.

सुबह सबसे पहले आँख मनु की खुली उसको पेशाब का प्रेशेर बना हुआ था,तो वो जल्दी से उठ कर वॉशरूम मे चला गया,जब वो वहाँ पर हल्का हो रहा था,तो रात की चुदाई उसकी आँखों के सामने घूमने लगी,और पेशाब करते-2 ही उसका लंड फिर से कड़क होने लगा,और कुछ ही सेकेंड मे मनु का लंड तन कर तैयार था,फिर से चुदाई के लिए.

मनु अपने लंड को हाथ मे पकड़ कर बाहर आया तो उसने देखा कि उसकी मा आरती बिस्तेर पर बिल्कुल नंगी सो रही है और उसके बगल मे ही रमण भी नंगा सो रहा है,अपनी मा को नंगा देख कर अब मनु का लंड फिर से उसकी चूत मे जाने के लिए कुलबुलाने लगा.मनु फिर अपनी मा के नज़दीक आ गया और उसने देखा कि रात की चुदाई के निशान आरती के जिस्म पर ज्यों के त्यों थे,आरती की चूत रात की चुदाई से थोड़ी सी फूल गयी थी,और उसमे लगी हुई कॉकटेल अब सूख गयी थी और ऐसे ही रात को जो रमण ने अपने लंड का पानी उसके मम्मों पर गिराया था वो सूख कर चमक रहा था.

ये देख कर मनु को पूरी तरह से जोश आ गया और वो बिस्तेर पर चाड कर अपनी मा के पास आ गया फिर उसने आरती के दोनो तरफ अपने पाँव किए और अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखा और एक तेज़ धक्का मारा,धक्के से लंड अंदर तो चला गया पर मनु क्यूंकी अभी अनाड़ी था तो उसने लंड को ऐसे चूत मे डालने से पहले बिल्कुल भी चिकना नही किया था और आरती की चूत भी सुखी हुई थी तो उसके लंड को खरोंच सी लगी और थोड़ा सा दर्द भी हुआ,उसके इस तरह से धक्का लगाने से आरती को भी अपनी चूत मे कुछ रगड़ता हुआ महसूस हुआ और उसकी आँख खुल गयी,उसने देखा कि उसका बेटा मनु उस पर चढ़ा हुआ है और अपना लंड उसकी चूत मे घुसा रहा है,तो वो समझ गयी कि सुबह-2 उसको ऐसे नंगा देख कर उसको फिर से जोश चढ़ गया है और वो उस पर चढ़ गया है.

उपर मनु फिर से धक्का लगा रहा था,तो आरती ने अपनी टाँगे फेला दी जिस-से कि मनु का लंड आराम से उसकी चूत मे चला जाए,उसके ऐसा करते ही मनु का पूरा लंड आरती की चूत मे समा गया,तो उसने नज़र उठा कर देखा तो आरती उसको ही देख रही थी और मुस्करा रही थी.

मनु भी अपनी मा को जगा हुआ देख कर मुस्करा दिया,आरती बोली -अरे तुझे बिल्कुल सबर नही है रात भर तो मुझे चोद्ते ही रहे और सुबह-2 आँख खुलते ही फिर शुरू हो गया,मनु ने कहा कि माँ तुम हो ही ऐसी कि तुम्हे ऐसे सोते हुए देख कर मुझे अपने आप पर बिल्कुल कंट्रोल नही हुआ और मैने अपना लंड तुम्हारी चूत मे डाल दिया.

आरती बोली तो इसका मतलब है कि तुम्हारी जब भी इच्छा करेगी तुम ऐसे ही करोगे

मनु बोला कि जब आपके जैसे सुंदरी घर मे ही हो तो किसका दिल नही करेगा.अब आप ऐसे लेटी थी तो मैने डाल दिया.

आरती बोली चलो ठीक है पर अब जल्दी करो सुबह हो गयी है और उठना भी है,तुम लोग रात भर मेरे को ऐसे ही रगड़ते रहे ,मेरा पूरा बदन दुख रहा है,तभी रमण जिसकी नींद उन लोगों की चुदाई से खुल गयी थी बोला कोई बात नही मेरी जान हम दोनो तुम्हारे बदन की जैसे कहोगी अंदर और बाहर से मालिश कर देंगे,हम हैं ही तुम्हारी सेवा के लिए.

आरती-बस-2 रहने दो मैं जानती हूँ तुम लोग मेरी क्या सेवा करोगे,और अब मनु जल्दी करके हट जाओ मुझे उठना भी है,और कामवाली भी आने वाली होगी. और ये जो तुम लोगों ने रात भर यहाँ पर गंदा किया है उसको भी उसके आने से पहले सॉफ करना ज़रूरी है,नही तो बात बिगड़ सकती है.

ये सुन कर मनु ने अपने धक्को की रफ़्तार तेज़ कर दी और नीचे से आरती भी अपनी कमर चलाने लगी,दिन की रोशनी मे माँ बेटे की चुदाई देख कर रमण का लंड भी फिर से तन गया और अब वो भी तैयार था आरती को चोदने के लिए,तभी मनु ने कहा कि माँ मेरा अब निकलने वाला है,तो आरती बोली कि ठीक है मेरा अभी नही आ रहा तुम अपना गिरा दो,ये सुनते ही मनु ने एक दो तेज़ धक्के लगाए और आरती की चूत के अंदर अपना गरम माल गिरा दिया.

इधर रमण ने अब आरती के मम्मे दबाने शुरू कर दिए थे और उसके मम्मे दबाने से आरती का जोश बढ़ रहा था,पर इतने मे मनु ने अपना रस ही गिरा दिया तो वो भी थोड़ी ठंडी हो गयी.

फिर मनु आरती के उपर से हट गया और वॉशरूम मे चला गया,उसके जाते ही रमण आरती के उपर आ गया,ये देख कर आरती बोली क्या तुम उसके हटने का ही इंतेज़ार कर रहे थे,अब तुम दोनो मुझे छोड़ो गे भी या नही.

रमण-बस मेरी जान अब मेरा काम भी करवा दो फिर मैं तुमको छोड़ दूँगा,ये देखो मेरा लंड तुम्हारी चूत के लिए कितना प्यासा हो रहा है,ये कह कर रमण ने आरती के हाथ को अपने लंड पर रख दिया,और जैसे ही आरती का मुलायम हाथ रमण के लंड पर रखा गया वैसे ही उसने झटके मारने शुरू कर दिए.

 


आरती ने रमण के लंड को धीरे-2 सहलाना शुरू कर दिया और रमण भी आरती के मम्मों से खेलने लगा,अब दोनो ही जने गरम हो रहे थे और अब आरती को भी जल्दी नही लग रही थी,वो भूल गयी कि अभी तो कह रही थी कि काम वाली आने वाली है पर अब पहले उसको अपनी चूत की आग को ठंडा करना था फिर आगे कुछ और सोचना था.

कुछ देर तक दोनो आपस मे ऐसे ही मस्ती करते रहे ,फिर जब दोनो जाने अच्छे से गरम हो गये तो रमण ने आरती को घोड़ी के पोज मे कर दिया,आरती घबरा गयी कि ये अब उसकी गंद मारेगा,वो बोली कि नही मैं पीछे नही लूँगी.

रमण बोला कि मेरी जान घबराओ मत और देखती जाओ कि अब मैं क्या कर रहा हूँ,तब तक मनु भी बाहर आ गया था और वो भी देख रहा था कि रमण अब उसकी माँ की कैसे लेता है,वो भी आगे के लिए ये सब कुछ सीखना चाह रहा था.

फिर रमण ने अपनी उंगली आरती की चूत मे डाल दी आरती की चूत तो वैसे ही मनु के पानी से चिकनी हो रखी थी तो उसकी उंगली फॉरन अंदर चली गयी,फिर उसने अपनी उंगली निकाली और आरती के पीछे आ कर घुटनो के बल बैठ गया और अपना लंड आरती की पीठ को थोड़ा सा उपर करके उसकी चूत के मूह पर लगा दिया,और फिर एक करारा शॉट मारा ,एक ही बार मे रमण का पूरे का पूरा लंड आरती की चूत मे समा गया,पर इसमे आरती की चीख निकल गयी,वो बोली ये तुमने कहाँ डाल दिया,रमण ने कहा सही तो डाला है तुम हाथ लगा कर देख लो.

तब आरती ने अपना एक हाथ नीचे ले जा कर अपनी चूत पर लगाया तो देखा कि रमण का लंड गया तो चूत मे ही है,वो फिर बोली कि हां गया तो सही जगह है पर फिर इतना दर्द क्यों हो रहा है.

रमण ने कहा कि जान ऐसे पहली बार है ना तो थोडा सा लगता है पर अब ठीक हो जाएगा ये कह कर उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए,अब उसके धक्के लगाने से आरती को दर्द की जगह मज़ा आने लगा था,और वो भी उसका सहयोग करने लगी थी.

उन दोनो की ऐसे पोज मे मस्त चुदाई देख कर मनु का लंड फिर से खड़ा हो गया वैसे भी आरती जो नशीली-2 आवाज़ें निकाल रही थी,उस-से तो किसी का भी लंड टनटना जाए और वो तो अपने सामने अपनी ही माँ को किसी दूसरे से कुतिया की तरह से चुदवाते हुए देख रहा था तो उसका तो खड़ा होना ही था.

जब आरती ने मनु के लंड का ये हाल देखा तो उसने मनु को अपने पास बुलाया और कहा कि मेरे बेटे का लंड फिर खड़ा हो गया ,अब मैं क्या करूँ कि ये मज़े ले सके,फिर उसने मनु से कहा कि ठीक है तुम अपना लंड मेरे मूह मे डाल दो,ये सुनते ही मनु के लंड ने झटके लेने शुरू कर दिए,फिर मनु भी पलंग पर आ गया और उसने अपना तना हुआ लंड आरती के मूह के पास कर दिया.

जैसे ही उसने लंड को आरती के मूह के पास किया आरती ने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके लंड को चाटने लगी,अब रमण उसको पीछे से चोद रहा था और आगे से उसने अपने बेटे मनु का लंड अपने मूह मे ले रखा था और वो दो-2 लंड के मज़े ले रही थी.

कुछ ही देर मे वो तीनो ही जने अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये और झड़ने के नज़दीक आ गये,और उन्होने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी,सबसे पहले मनु बोला कि मा अब मेरा निकलने वाला है,और ये कह कर उसने आरती के मूह मे ही अपने लंड का पानी गिराना शुरू कर दिया,आरती भी मनु के वीर्य को किसी अमृत की तरह से सारे का सारा पी गयी.

फिर मनु वहाँ से हट गया अब वो दोनो हो चुदाई मे लगे हुए थे,इतने मे ही आरती ने कहा कि रमण अब बस करो मेरा होने वाला है,और मैं थक गयी हूँ,रमण ने कहा ठीक है जान मैं भी आ रहा हूँ और फिर वो दोनो भी झाड़ गये और हान्फते हुए रमण ने अपना लंड झाड़ कर आरती की चूत से निकाल लिया और निढाल हो कर बिस्तेर पर गिर गया,आरती भी घोड़ी बनी हुई पोज़ीशन मे ही फैल कर बिस्तेर पर गिर गयी,अब वो तीनो जने पूरी तरह से झाड़ कर संतुष्ट हो गये थे.

 


कुछ ही देर के बाद जब आरती की साँसें थोड़ी संयंत हुई तो वो सीधी हो कर उठी ,तभी उसकी नज़र अपनी बुर पर पड़ी,रात से जब से चुदाई हो रही थी उसने अपनी चूत को देखा ही नही था,वो तो बस उसमे लंड पे लंड लिए जा रही थी,अब जब उसको थोड़ा आराम मिला तो उसको अपनी चूत मे दर्द महसूस हुआ तो उसने अपनी नज़र अपनी चूत पर डाली,पर अपनी चूत की हालत देख कर उसके तो पसीने छूट गये,उसकी चूत इस टाइम ऐसे लग रहा था कि बुरी तरह से चोदने के कारण फट ही गयी है,वो बहुत फूली हुई नज़र आ रही थी,और उस पर जगह-2 लंड और चूत की कॉकटेल लगी हुई थी,और दाँतों के भी निशान थे,पर सबसे बड़ी बात ये थी कि अब उसमे दर्द की वजह से चीस चल रही थी.

अब आरती को समझ आया कि रात भर जो उसने मस्ती की है उसका फल उसकी चूत को भुगतना पड़ा है,और वो सूज गयी है.फिर उसने उठने की कोशिस की तो उसको पता चला कि चूत के साथ-2 उसका पूरा शरीर भी दुख रहा है और उसकी चीख सी निकल गयी,जब उसकी चीख निकली तो वो दोनो जो बिस्तेर पर पड़े हुए थे उठ कर बैठ गये,और रमण ने पूछा कि क्या हुआ जानेमन.

आरती बोली नही और कराहने लगी,तो रमण ने फिर से पूछा कि हुआ क्या है?तो आरती बोली कि हुआ क्या है ये देखो ये कह कर उसने अपनी चूत की तरफ इशारा किया,इसका तुम दोनो जनो ने क्या हाल कर दिया है.

ये देख कर रमण की हँसी छूट गयी,रमण को ऐसे हंसते देख कर आरती को और ज़्यादा मिर्ची लग गयी,वो बोली यौं हंस क्या रहे हो तुम दोनो जनो ने रात भर मे मेरी चूत को फाड़ डाला,अब मेरे से उठा भी नही जा रहा.

रमण ने कहा ये तो अच्छी बात है ना उठने की ज़रूरत ही क्या है,हम दोनो यहीं पर तुम्हारी सेवा करते रहेंगे.तुम तो बस हमे सेवा का मौका दे दो.

आरती-मैं सब समझती हूँ तुम्हारा इरादा,बस अब उठो यहाँ से और जा कर चेंज करो कभी भी कोई भी आ सकता है,और मैं भी जा कर कोई दवाई वगेरह लेती हूँ,ऐसे लेटी रहूंगी तो तुम्हारा कुछ नही पता है तुम फिर शुरू हो सकते हो.

ये कह कर आरती अपने दर्द को कंट्रोल करती हुई उठ कर वॉशरूम मे चली गयी,और वहाँ जा कर गरम पानी से अपने आप को साफ करने लगी.

इधर ये दोनो भी अब उठे और बारी बारी से फ्रेश हो गये और अपने कपड़े पहन लिए,जब आरती फ्रेश हो कर बाहर आने लगी तो उसने देखा कि उसने कपड़े नही लिए हैं,तो उसने बाहर झाँका तो वो दोनो वहीं थे,तब उसने टवल को ही अपने शरीर से लपेट लिया और बाहर आ गयी,अब इस समय दिन मे वो फ्रेश हो कर टवल मे लिपटी हुई एक गदराई हुई जवान माल लग रही थी और वो टवल भी उसकी मदमस्त जवानी को छुपाने मे असमर्थ था.

उन दोनो जनो की तो आरती को ऐसे देखते ही सीटी बज गयी,अब तो उन दोनो के लंड फिर से तनाव मे आने लगे थे.आरती ने जब देखा कि वो दोनो उसको खा जाने वाली नज़रो से घूर रहे हैं तो उसने जल्दी से कपड़े पहनना ठीक समझा ,क्यूंकी उसको उन दोनो की ही नियत खराब लग रही थी,और हो सकता है कि ये दोनो जने फिर से उसको ऐसे देख कर पेलना शुरू कर दें.

पर अब रमण से उसको ऐसे देख कर रहा नही गया और वो उठ कर आरती की तरफ गया,तो आरती ने कहा कि अब क्या हुआ,रमण ने कहा जान अब तुमको ऐसे मस्त रूप मे देख कर रहा नही जा रहा ,चलो अभी एक बार और हो जाए.

आरती-मैं सब समझती हूँ तुम लोगो को,अब बस करो मेरा शरीर बहुत दुख रहा है,रात भर मे भी तुम लोगों का दिल नही भरा क्या?

रमण-अर्रे जान इस चीज़ से कभी किसी का दिल भरता है क्या,ये तो जितनी मिलती है प्यास उतनी ही बढ़ती जाती है.

आरती-पर अभी नही अभी काम वाली भी आने वाली है और मेरे शरीर मे भी दर्द है.

रमण-पर ये तुम्हारी तूफ़ानी जवानी तो हमे बेचैन कर रही है,तुम इस टवल मे कहर ढा रही हो,मैं एक ही शर्त पर अभी तुम्हें छोड़ सकता हूँ जब तुम वादा करो कि मैं जब भी घर आऊंगा तुम ऐसे ही सेक्सी रूप मे मेरा स्वागत किया करोगी.

आरती-अच्छा भाई ठीक है मैं तुम्हे कम कपड़ों मे ही अच्छी लगती हूँ तो कोई बात नही जब भी तुम आओगे मे कम कपड़ों मे ही रहा करूँगी.

मनु-माँ ये तो कोई फेर बात नही हुई,जब रमण भैया के लिए आप ऐसा करोगी तो मेरे लिए क्यों नही?

आरती-अच्छा भाई जैसे तुम दोनो कहो मैं वैसे ही रहूंगी पर अभी तो मुझे छोड़ो.

जब आरती ने ऐसे कहा तो रमण ने आरती को छोड़ दिया,और अलग हो गया,फिर आरती ने उन दोनो को कहा कि अब तो मैने तुम्हारी बात मान ली है अब तो बाहर जाओ तुम दोनो.

 


आरती के कहने पर वो दोनो जने कमरे से बाहर आ गये,और उनके बाहर आते ही आरती ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.बाहर वो दोनो मनु के रूम मे आ गये,रमण और मनु दोनो जने आज बहुत खुश थे,रमण को तो जो उसने कहा था वो मिल गया था,और मनु भी अपनी मा को चोदने मे सफल हो गया था.

रमण ने मनु से कहा कि यार आज तो रात को मज़ा आ गया ,जो भी प्लान किया था वो सक्सेस्फुल हो गया,और मेरे साथ-2 तुम्हारे भी मज़े हो गये.

मनु-हां भैया आपने तो कल कमाल ही कर दिया मुझे नही पता था कि आप एक ही रात मे इतना आगे तक बढ़ जाओगे.

रमण-यार इसमे तुम्हारा भी तो रोल है,तुम सही टाइम पर बाहर चले गये नही तो तुम्हारी मम्मी शरमाने के कारण खुल नही पा रही थी.

मनु-पर भैया आप की टाइमिंग बहुत बढ़िया है,आप ने सही टाइम पर मुझे बुला भी लिया नही तो मुझे मज़े के लिए तरसना पड़ता.

रमण-आरे मेरे भाई ऐसा कैसे हो सकता है जब तुम ने मेरे लिए इतना किया तो मैं क्या तुम्हारे लिए ये भी नही कर सकता था,पर अब आगे के लिए तो तुम्हारे मज़े हो गये हैं,अब तुम्हारी माँ सारे दिन रात तुम्हारे साथ है तुम जब मर्ज़ी उसकी ले सकते हो.

मनु-बात तो आपकी सही है,पर इस काम में भी आप को मेरा गुरु बन-ना पड़ेगा तभी ये हो पाएगा.

रमण-मैं हमेशा ही तुम्हारे साथ हूँ पर तुम भी कहीं अपनी माँ के साथ मिल कर मुझे भूल मत जाना.

मनु-ये आप क्या कह रहे हो ऐसा हो ही नही सकता,पर हां अभी मम्मी को और भी ज़्यादा मस्का लगाना होगा,कहीं ऐसा ना हो कि अब उनको हमारे साथ कोई प्राब्लम हो.

रमण-नही-2 तुम बिल्कुल मत घबराओ अब तो हम जैसा कहेंगे वो वैसे ही करेंगी,क्यूंकी मज़ा खाली हमे ही नही उनको भी आया है,अभी तुमने देखा नही अगर कामवाली आने वाली नही होती तो अभी भी तुम्हारी मा हमारे साथ एक-2 राउंड और लगा लेती,पर हां अभी उनको और मनाना होगा कि घर पर वो तुम्हारे और मेरे सामने कपड़े ज़रा काम -2 ही पहने.

 


तभी आरती कपड़े पहन कर आ गयी,उसने देखा कि वो दोनो आपस मे बातें कर रहें हैं तो उसने कहा क्या बाते चल रही हैं.आरती की आवाज़ सुन कर दोनो ने आरती की तरफ देखा आरती ने अब गाउन पहन लिया था,और वो नहा कर और भी सुंदर लग रही थी,पर उन दोनो को तो ये देख कर शॉक लगा कि आरती ने उनकी बात ना मान कर गाउन के साथ-2 अंडरगार्मेंट्स भी पहन लिए थे,जबकि वो ये चाहते थे कि अब आरती उनके सामने कम से कम कपड़ों मे रहे.

तो रमण ने कहा कि तुम्हारी ही बातें हो रही थी जान पर ये क्या तुम तो इतने सारे कपड़े डाल कर आ गयी अब अगर हमारा मन करेगा तो इतने कपड़े उतारने पड़ेंगे.

आरती-इसलिए ही तो मैं ने कपड़े कम नही पहने तुम लोगों का क्या है कहीं भी मुझे देखा तो तुम्हारा तो हमेशा खड़ा रहता है वहीं पर डाल दोगे.

मनु-पर मम्मी अभी तो आप कह रही थी कि ऐसा नही करोगी.

आरती-मेरे बेटे रमण तुम नही समझोगे अभी काम वाली आएगी तो अगर उसने देखा कि मैं ऐसे कपड़ों मे घर मे हूँ तो अच्छा नही रहेगा,एक बार वो काम करके चली जाए तो तुम जैसे कहोगे वैसे ही रहूंगी.

मनु-वाउ मोम ये हुई ना बात.

आरती-अच्छा चलो अब आज तो मेरे बस की और करवाना नही है,अब मैं नाश्ता तैयार कर रही हूँ तुम लोग कर लेना,फिर आज जो तुमने मेरे साथ किया है उसके कारण मुझे आराम करना पड़ेगा.

ये कह कर आरती मनु के रूम से निकल गयी,तब रमण ने कहा कि अच्छा अब मे चलता हूँ जब तुम्हारी मम्मी ने कह ही दिया कि आज और कुछ नही होगा तो मैं रुक कर क्या करूँगा,और ये कह कर रमण वहाँ से निकल गया.

रमण के जाने का बाद मनु किचेन मैं आपनी माँ के पास आया और बोला मम्मी क्या बना रही हो,और पीछे से आरती से चिपक गया.

आरती नेपीछे मूड कर कहा कि ये क्या कर रहे हो,मैने अभी-2 तुम को क्या कहा था.

मनु-पर पहले काम वाली को आने तो दो,जब तक वो नही आती मैं ऐसे ही आप से चिपक के कुछ तो मज़े कर ही लूँ.

आरती-नही ऐसे मत करो अच्छा नही है फिर रमण क्या सोचगा कि अभी तो मैने उसके सामने मना किया और अब तुम ऐसे कर रहे हो.

मनु-पर रमण भैया तो चले गये.

आरती-अच्छा कब गया रमण

मनु-अभी-2 कह रहे थे कि आज तो आपने मना कर दिया फिर रुक कर क्या करेंगे.

तभी बाहर की बेल बजी और मनु ने जा कर दरवाजा खोला तो काम वाली आई थी,फिर मनु अपने रूम में चला गया.

जब काम वाली काम निपटा कर गयी और गेट बंद होने की आवाज़ आई मनु तुरंत बाहर आया,तो उसने देखा कि आरती अपने कमरे मैं सोई हुई थी,वो समझ गया कि अब उसकी मम्मी रात भर की चुदाई की थकान उतार रही है और वो भी अपने कमरे में जा कर सो गया.

शाम को आरती मनु को उठाने उसके कमरे मैं आई तो मनु बेसूध पड़ा सो रहा था,तब तक आरती की थकान और शरीर का दर्द कुछ कम हो गया था,जब उसने मनु को ऐसे सोते हुए देखा तो उसके शरीर मैं फिर से खुमारी चढ़ने लगी,कहते हैं ना कि एक बार जिसको बाहर का खाने की आदत पड़ जाए वो हमेशा उसी चक्कर में ही रहता है,तो फिर आरती को एक शरारत सूझी वो अपने कमरे मैं गयी और जा कर नाइटी के नीचे से अपने अंडर गारमेंट्स निकाल दिए और अपने नंगे जिस्म पर सिर्फ़ एक पतली सी नाइटी डाल कर मनु के रूम में उसको जगाने के लिए आई.

आरती ने अब मनु के रूम में आ कर धीरे से मनु को कहा कि मनु बेटा उठो ना अब उठना नही क्या,कब से सो रहे हो.अपनी मा की आवाज़ सुन कर मनु की नींद खुली तो उसने अपनी आँखें खोल कर देखा और जैसे ही उसकी नज़र अपनी माँ के आध नंगे जिस्म पर पड़ी उसकी तो नींद ही उड़ गयी,आरती इस टाइम एक पतली सी नाइटी में उसके सामने खड़ी थी,जिसमें से उसके मोटे -2 मम्मे बाहर आने को तैयार हो रहे थे और नीचे उसकी सुडौल भारी-2 जंघें भी नंगी नज़र आ रही थी,वो नाइटी कुछ शॉर्ट थी,और वो किसी को भी सिड्यूस करने में समर्थ थी.

 


वैसे भी आरती के रूप का जलवा उस नाइटी में और ज़्यादा निखार के आ रहा था,तो अब तो मनु की आँखें अपनी माँ पर ही जम गयी और वो पालक झपकाना भी भूल गया,जब आरती ने उसको ऐसे अपने आप को घूरते हुए देखा तो वो मन ही मन बहुत खुस हुई कि उसके रूप का जादू इस नाइटी में उसको और भी कातिल बना रहा है,और वो मनु पे चल गया है,अब वो उसको चिडाने वाले अंदाज़ में बोली क्या उठोगे नही सोए ही रहोगे.

और ये कह कर वो बाहर आ गयी,जब आरती मनु के रूम से निकल गयी तब जा कर मनु का ध्यान भंग हुआ नही तो वो अपनी माँ के रूप का ही रस्पान किए जा रहा था,अब मनु जल्दी से उठा और वॉशरूम में जा कर मूह वगेरह धो कर बाहर आ गया.

बाहर आरती अब किचेन में थी वो रात के खाने की तैयारी करने लगी थी,मनु ने जब देखा कि उसकी माँ उस अध नंगी अवस्था में खाना बनाने की तैयारी कर रही है,तो वो उसके पास चला गया और फिर से पीछे से उस-से चिपक गया,और धीरे-2 उसके चुतडो पर हाथ फेरने लगा.

आरती को जब मनु का स्पर्श अपने शरीर पेर और फिर अपनी गान्ड पर महसूस हुआ तो उसको बहुत अच्छा लगा पर वो मनु से बोली कि ये क्या कर रहे हो मुझे काम करने दो.

मनु बोला कि मैं तुम्हे काम करने से कहाँ रोक रहा हूँ पर मैं भी तो अपना काम कर रहा हूँ,मुझे भी अपना काम करने दो.ये कह कर उसने अपनी माँ की नाइटी को थोड़ा सा उपर किया और अपनी माँ की चिकनी नंगी गान्ड पर हाथ फेरते हुए अपनी उंगली आरती की नरम गान्ड में घुसा दी.

जैसे ही मनु की उंगली आरती की गान्ड के अंदर गयी उसकी तो चीख सी निकल गयी,पर वो बोली कुछ नही और वैसे ही अपना काम करती रही ,अब मनु समझ गया कि उसकी माँ को भी उसका यूँ मस्ती करना अच्छा लग रहा है तो उसने अपनी उंगली को थोड़ा सा बाहर किया और फिर से अपनी माँ की गान्ड में पेल दिया अब की बार आरती के मूह से एक मादक सिसकारी ही निकली.

अब मनु समझ गया कि आरती भी मज़े कर रही है तो उसने अपनी उंगली को फिर से अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और उसके ऐसे करने पर हर बार आरती बहुत मादक-2 सिसकियाँ लेने लगी,तब मनु ने अपना बरमूडा खोल कर नीचे गिरा दिया और अंडरवेर भी उतार दिया और अपना खड़ा हुआ लंड अपनी माँ की नंगी चिकनी गान्ड पर रगड़ने लगा

अपनी माँ की नरम गान्ड पर जब उसने अपना लंड रगड़ना शुरू किया तो वो तो तंबू की तरह से तन गया और उसमे से थोड़ा सा पानी भी निकलने लगा,उस पानी से उसके लंड का टोपा भी चिकना हो गया अब वो अपने लंड को वैसे ही अपनी माँ की गान्ड में लगा कर बिना अंदर किए ही आगे-पीछे करने लगा था,और इस-से आरती को भी बहुत मज़ा आ रहा था,जब वो अपने लंड को आगे करता तो आरती भी अपनी गान्ड को पीछे को धकेल रही थी.

 


मनु समझ गया कि आरती भी अब उसकी रागड़ाई का फुल मज़ा ले रही है,फिर उसने अपना हाथ आगे करके अब अपनी उंगली अपनी माँ की चूत के पास ले गया,पर वहाँ से तो इतना पानी टपक रहा था जैसे की उसकी माँ ने वहाँ पर सूसू कर दिया हो,फिर मनु ने पहले तो अपनी उंगली को अपनी नाक के पास ला कर सूँघा,तो उसमें से इतनी मादक खुसबू आ रही थी कि वो मदहोश ही हो गया और वो उंगली उसने अपने मूह में ले ली और उसको चूसने लगा ,उसको अपनी मा की चूत के रस का स्वाद इतना अच्छा लगा कि वो फिर से अपनी उंगली को अपनी माँ की चूत के पास ले गया पर इस बार उसने अपनी 2 उंगलियाँ आरती की चूत में डाल दी,जैसे ही मनु की उंगली आरती की चूत में गयी वो तो बिल्कुल ही मदहोश हो गयी और ज़ोर-2 से सिसकारियाँ भरने लगी,और उसकी सिसकारियो से मनु को भी जोश बढ़ गया,फिर उसने वो उंगलियाँ अपनी माँ की चूत से निकाली और एक बार फिर से अपनी नाक के पास ले जा कर पहले उसको सूँघा और फिर उन उंगलियो को अपनी जीभ निकाल कर चाटना शुरू कर दिया,जिस तरह से वो चाट रहा था ऐसे लग रहा था कि वो चूत का रस ना हो कर अमृत हो.

अब आरती का ध्यान भी खाना बनाने पर ना हो कर अपनी चूत की आग पर ही था और वो भी कह रही थी कि अब मनु उसकी चूत की ठुकाई कर दे,तो उसने अपना हाथ पीछे करके मनु के लंड पर रख दिया,और फिर वो पीछे को घूम गयी अब आरती और मनु आमने-सामने थे,मनु का तना हुआ लंड आरती के हाथ में था और दोनो एक दूसरे को वासना भरी कामुक नज़रो से देख रहे थे

अब आरती और मनु मा और बेटा दोनो आमने सामने खड़े थे मनु का तना हुआ लंड उसकी माँ आरती के नरम हाथों मैं था,और वो अपने हाथ को धीरे-2 मनु के लंड पर फिरा रही थी,मनु का लंड आरती के हाथों के स्पर्श से और ज़्यादा तना जा रहा था.

फिर मनु ने अपनी माँ की चुचियो को गाउन के अंदर हाथ डाल कर पकड़ लिया और उनको दबाने लगा,आरती को भी अपनी चुचियाँ मसलवाने में मज़ा आ रहा था,वो भी अब मनु के हाथों से चुचियाँ मसलवाने में आनंद ले रही थी,फिर मनु ने अपने हाथों से अपनी मा की छोटी सी नाइटी को उतार फेंका अब आरती किचन में मनु के सामने बिल्कुल ही नंगी खड़ी थी,और मनु ने भी सिवाए टीशर्ट के कुछ भी नही पहना हुआ था.

अब मनु ने अपनी माँ की चुचि को अपने मूह में ले लिया और खड़ा-2 ही उसको चूसने लगा ,आरती भी मज़े में एक हाथ से तो उसके लंड को सहला रही थी,पर दूसरे हाथ से अपनी चुचि को दबा कर मनु के मूह में डाल रही थी,अब वो दोनो ही वासना के नशे में डूब गये थे,अब आरती को लग रहा था कि उसकी चूत को अब तो मनु के लंड की बहुत ही ज़्यादा ज़रूरत हुई नही तो वो सहन नही कर पाएगी,तो उसने मनु से कहा कि बेटा अब बस भी करो क्या इनको ही चूस्ते रहोगे ,और अपने एक हाथ से मनु का हाथ पकड़ा और अपनी बहती हुई चूत पर ले जा कर रख दिया और बोली -इसका भी कुछ ख़याल करो ना.

मनु समझ गया कि अब उसकी माँ चुदवाने के लिए गरम हो चुकी है अब उसको अपना लंड मा की चूत में डाल देना चाहिए ,तो उसने कहा कि माँ क्या यहीं कर लें क्या?

आरती ने कहा और नही तो क्या अब यहीं पर मुझे चोद दो मेरी चूत में अपना ये गरम लंड डाल कर इसकी गर्मी को शांत कर दो.

मनु ने कहा कि ठीक है और फिर उसने अपनी टीशर्ट भी उतार दी और अपनी माँ को आगे करके किचन में ही सेल्फ़ के साथ ले जा कर खड़ा कर दिया आरती समझ गयी वो तो पहले ही बहुत खेली-खाई हुई थी कि मनु क्या चाहता है ,तो उसने भी घूम कर अपने आपको सेल्फ़ के सहारे झुका कर खड़ा कर लिया ,और अपनी गान्ड को पीछे की तरफ फैला दिया,और टाँगें खोल दी,अब पोज़ीशन ये थी कि आरती की खुली हुई चूत मनु को निमंत्रण दे रही थी कि वो अपने लंड को उसमें डाल कर उसको चोद डाले.

मनु ने अपने लंड को हाथ में लिया और आगे बढ़ कर अपने लंड को अपनी माँ की चूत पर लगा दिया,उसकी चूत तो पहले ही रस के कारण चिकनी हो रही थी,इसलिए जैसे ही उसने धक्का लगाया तो उसका लंड सरक कर आरती की चूत में समा गया.

आरती ने जब महसूस किया कि मनु का लंड पूरे का पूरा उसकी चूत में घुस गया है तो उसको बड़ा मज़ा आया,और उसने एक बार हाथ पीछे ले जा कर देखा कि अब लंड बाहर तो नही है,जब उसने देखा कि पूरा लंड जा चुका है,तो उसने कहा कि मनु बेटा अब धक्के लगा कर मेरी चूत को जम कर चोदो,अब इसको चाहे फाड़ डालो मैं कुछ नही कहूँगी,पर इसकी आग को तुम शांत कर दो.

मनु बोला कि माँ तुम देखती जाओ अब मैं कैसे तुम्हारी चूत को चोद-2 कर इसका भोसड़ा बना दूँगा अब तो मैं सारे दिन और रात ही तुमको घर पर नंगा ही रख कर तुम्हारी चूत मारता रहूँगा,रमण भैया तो कभी-2 ही आएँगे अब मैं तुमको हर टाइम अपने लंड के नीचे ही रखूँगा.

आरती बोली ठीक है बेटा मैं भी अब घर में कपड़े नही पहनूँगी और जैसे तुम कहोगे वैसे ही रहूंगी,अगर तुम कहोगे तो मैं तुम्हारी रंडी बन जाउन्गि,मुझे तुम लोगों ने जो चुदाई का आनंद दिया है वो कभी भी नही मिला.

मनु ने जब अपनी माँ के मूह से ये सब सुना तो उसका जोश और ज़्यादा बढ़ गया-वो बोला ठीक है माँ अब में तुमको घर में अपनी रंडी की तरह से ही ट्रीट करूँगा और मैं जो भी कहूँगा तुम वो सब फॉलो करना.

आरती-ठीक है बेटा पर तुम अभी बातें कम करो और मेरी चुदाई पर ज़्यादा ध्यान दो.

ये कह कर आरती अपनी कमर को आगे-पीछे करने लगी और अब मनु ने भी अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी थी,उसको इस बात की बहुत ख़ुसी थी कि अब उसकी माँ पूरी तरह से उसकी मुट्ठी में थी,अब वो जब चाहे घर पर उसको चोद सकता था,और वो भी अपनी चूत की खुजली मिटाने के लिए जैसे मनु चाहे करने को तैयार थी.

कुछ ही देर में मनु ने कहा कि माँ अब में झड़ने वाला हूँ,तो आरती ने कहा कि ठीक है कुछ देर रूको तो मेरा भी तुम्हारे ही साथ निकल जाएगा,मनु ने कहा कि ठीक है माँ,मैं कोशिस करता हूँ,और अब उसने अपनी रफ़्तार कुछ कम कर दी,पर आरती वैसे ही अपनी कमर को हिलाती रही ,कुछ ही देर में आरती बोली कि मनु अब अपनी रफ़्तार फिर से बढ़ा दो अब मैं भी झड़ने के लिए तैयार हूँ.

ये सुन कर मनु ने भी अपनी रफ़्तार तेज़ कर दी,अब दोनो माँ-बेटे किचन में बहुत तेज़ी से चुदाई कर रहे थे और कुछ ही देर में दोनो जने साथ-2 झाड़ गये,झड़ने के बाद मनु ने अपना लंड अपनी माँ की चूत से बाहर निकाल लिया.

मनु के लंड को बाहर निकलते ही जैसे आरती की चूत का कॉर्क खुल गया और उसमें से दोनो के रस का मिक्स्चर बह कर बाहर आने लगा,आरती को अपनी जांघों पर कुछ रिस्ता हुआ लगा,तो उसने हाथ नीचे करके अपनी चूत पर लगाया,तो दोनो के रस का कॉकटेल उसकी उंगलियो पर लग गया,मनु ने ऐसा करते हुए देख लिया कि उसकी माँ की उंगलियो पर उसकी चूत का मिक्स्चर लगा हुआ है,तो उसने अपनी माँ का हाथ पकड़ कर उसको उसके ही मूह के पास ले गया,आरती समझ गयी कि मनु क्या चाहता है,वो मनु के इशारे को समझ गयी और उसने अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी उंगलियो को चाटना शुरू कर दिया,वो बहुत ही सिड्यूसिव तरीके से अपनी ही उंगलियो को चाट रही थी,ये देख कर मनु के लंड में फिर से हरकत होने लगी,अब आरती ने अपनी उंगलियो को अपने मूह में ले लिया और वो उनको चूसने लगी.

 


अब तो मनु को बहुत ही मज़ा आ रहा था,अब तो उसकी माँ उसके हर तरह के इशारे को समझ कर जैसे वो चाहता था वैसे ही कर रही थी,फिर मनु वहीं पर नीचे बैठ गया और उसने अपना मूह अपनी माँ की चुदि हुई चूत पर रख दिया और वो उसमे भरे हुए रस को चूसने लगा,आरती को भी अपनी चूत चुसवाने में मज़ा आ रहा था.

अब आरती के लिए खड़ा होना मुश्किल हो गया था,तो वो मनु से बोली कि मनु अब मेरे से खड़ा नही हुआ जा रहा.

तो मनु ने कहा कि कोई बात नही तुम यहीं पर लेट जाओ और ये कह कर उसने अपनी माँ को वहीं पर लिटा दिया,और फिर से उसकी चूत में मूह घुसा दिया और उसको चूसने लगा,आरती अब मनु की चुसाइ से बुरी तरह से सीसीयाने लगी थी,और अपनी कमर को उपर उछालने लगी थी.

फिर कुछ ही देर में आरती की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया,और उसकी चूत का पानी मनु ने सारे का सारा चूस लिया.

आरती कुछ ही देर में दो बार झाड़ चुकी थी अब उसकी टाँगों में इतनी ताक़त नही थी कि वो खड़ी हो सके तो उसने मनु से कहा कि अब मैं खाना नही बना सकती तुम बाहर से ही कुछ मॅंगा लो,मनु ने कहा कि ठीक है और उसने फिर बाहर से पिज़ा का ऑर्डर दे दिया,और फिर से किचन में आ गया वहाँ आरती वैसे ही नंगी हालत में फर्श पर लेटी हुई थी,ये सीन मनु को बहुत ही इरोटिक लगा और उसने अपनी माँ की इस हालत में फोटो खींच ली.

आरती की आँख खुली तो उसने देखा की मनु उसको देखे जा रहा है,तो वो बोली कि ऐसे क्या देख रहा है,मनु बोला माँ तुम ऐसे नंगी लेटी हुई बहुत सुंदर लग रही हो,तो इसलिए ही तुमको निहार रहा था.

आरती बोली अब बस भी करो और वो उठने लगी तो मनु ने उसको अपनी गोद मैं उठा लिया और उसको ले जा कर उसके बेड पर लिटा दिया.कुछ ही देर में वो सो गयी.

इस तरह से अब मनु की तो लॉटरी लग गयी थी,वो अब स्कूल से आने के बाद ज़्यादा समय अपनी माँ के साथ ही गुज़ारता था,और ऐसे ही रमण भी जब भी मनु को ट्यूशन पढ़ाने के लिए आता था तो कम से कम एक बार तो आरती को ज़रूर ही चोद्ता था,अब आरती को भी चुदाई की इतनी आदत हो गयी थी कि वो घर में हर समय कम कपड़ों में ही रहती थी और ब्रा और पैंटी पहन-ना तो उसने तक़रीबान बंद ही कर दिया था.

जैसे ही उन दोनो जनो में से कोई भी उसको चोदना चाहता था वो हर समय तैयार ही रहती थी,एक तरह से हर टाइम उसकी चूत में किसी ना किसी के लंड का पानी बहता ही रहता था,क्यूंकी वो उसको सॉफ नही करती थी,उसको लंड के पानी को अपनी चूत में महसूस करके बहुत मज़ा आता था,अगर कभी भी उसको पैंटी पहननि पड़ती थी तो वो वैसे ही हालत में ही पैंटी पहन लेती थी और उसको बहुत मज़ा आता था.

रमण जब मनु को ट्यूशन पढ़ाने आता था तो वो आ कर उसकी गोद में बैठ जाती और फिर वहीं से उनकी मस्ती शुरू हो जाती थी और चुदाई पर जा कर ही रुकती थी,पर इस बीच में रमण मनु को वहीं पढ़ने की हिदायात दे कर दूसरे कमरे में ले जा कर आरती की चूत को अपने लंड की खुराक देता था.

इस तरह से अब आरती की चुदाई और मनु की पढ़ाई दोनो साथ-2 चल रही थी,पर कुछ दिनो से रमण को इसमे कुछ बदलाव करने की चाहत हो रही थी

और एक दिन जब रमण हमेशा की तरह से आरती की चूत मार रहा था,तो वो बोला कि जान आज तो कुछ अलग करने का दिल है.

 


आरती ने कहा क्या हुआ क्या मेरे से दिल भर गया तुम्हारा.

रमण-नही मैने ये कब कहा मैं तो आज तुम्हारी चूत के साथ-2 तुम्हारी गान्ड भी मारना चाहता हूँ,वैसे तो तुम्हारी चूत इतनी दिलकश है कि कोई सारी उमर भी चोद्ता रहे तो उसका दिल नही भरेगा,पर थोड़ा सा चेंज करने में ज़्यादा मज़ा आएगा.

रमण की ये बात सुन कर आरती एक बार तो घबरा गयी,वैसे तो उसने अपनी कई सहेलियो से सुन रखा था जो कि अपनी गान्ड मरवाती थी कि जैसा मज़ा चूत मरवाने में आता है उस-से कहीं ज़्यादा मज़ा गान्ड फड़वाने में आता है,और उसका दिल भी कई बार चाहता था कि वो रमण या मनु से कहे कि वो उसकी गान्ड मारें,पर वो बोलती नही थी,दिल के किसी कोने में उसको गान्ड मारने के दर्द का डर लगता था,इसलिए वो चुप रहती थी,पर आज जब रमण ने खुद उसकी गान्ड मारने का प्रस्ताव दिया तो उसकी ये दिली इच्छा उभर कर आ गयी,और वो समझ गयी कि आज उसकी गान्ड का भी उद्घाटन हो ही जाए गा.

पर कहते हैं ना वो औरत ही क्या जो एक बार में ही मान जाए तो वो बोली कि नही मैं अपनी गान्ड तुम्हारे इस गधे जैसे लंड से फड़वाने वाली नही हूँ,तुम बस मेरी चूत ही मारो.

पर आज रमण ने अपने दिल में ये फ़ैसला कर लिया था कि वो आरती की गान्ड को फाड़ कर ही रहेगा,तो वो बोला कि जानेमन तुम ये क्या कह रही हो तुम एक बार ले कर तो देखो अगर तुमको अच्छा नही लगा तो मैं ज़िद नही करूँगा,पर मेरी ये शर्त है कि तुमको मेरे से भी ज़्यादा मज़ा आएगा.

आरती ने कहा कि नही-2 ये नही हो सकता तुम्हारा ये लंड अगर मेरी कुँवारी गान्ड में गया तो ये तो फॅट ही जाएगी.

रमण समझ गया कि आरती ने आज तक अपनी गान्ड नही मरवाई है,और जैसे ही ये विचार उसके दिमाग़ में आया तो उसका लंड और ज़्यादा फन-फ़ना कर तन गया कि आज तो उसको कोरी गान्ड मारने को मिलने वाली है,और वो ये मौका किसी भी हालत में नही छोड़ने वाला था,तो उसने आरती को कहा कि डार्लिंग तुम एक बार ले कर देखो अगर तुम्हे ज़्यादा दर्द हुआ तो मैं नही करूँगा.

ऐसे रमण ने जब कई बार कहा तो आरती ने सोचा कि अब ज़्यादा नखरा नही करना कहिए कहीं ये गान्ड मारने का विचार त्याग ही ना दे तो वो बोली कि ठीक है पर अगर मेरे को ज़्यादा दर्द हुआ तो तुम आगे नही करना और अपना ये निकाल लेना.

रमण ने कहा कि ये मेरा प्रॉमिस है कि मैं तुम्हारे रोकते ही रुक जाउन्गा.(जबकि अंदर ही अंदर वो सोच रहा था कि एक बार तू ले तो ले साली फिर तो जब तक ये अंदर का पूरा दर्शन नही कर आएगा और अपना जाल नही चढ़ा देगा तब तक मैं तुझे छोड़ने वाला नही हूँ)पर बाहर से उसने ऐसा कुछ भी फील नही होने दिया.

फिर रमण ने आरती को उसके बेड पर उल्टा लिटा दिया और उसकी गान्ड के नीचे एक तकिया लगा दिया ,फिर अपनी एक उंगली उसकी गान्ड में डाली तो आरती की कसी हुई गान्ड में थोड़ा सा दर्द हुआ ,पर साथ ही साथ आरती को आनंद की एक मीठी अनुभूति भी हुई,और उसकी आह निकल गयी.

 


रमण को भी बहुत अच्छा लगा क्यूंकी उसकी गान्ड इतनी टाइट थी कि उसकी उंगली को भी अंदर जाने में परेशानी हो रही थी,फिर रमण ने अपनी उंगली निकाली और उसको अपनी नाक के पास ले जा कर सूँघा तो उसमे से बड़ी मादक खुसबू आ रही थी,फिर उसने वो उंगली अपने मूह में ली और उसको अपने थूक से अच्छी तरह से गीला कर लिया अब उसने आरती की गान्ड को थोड़ा सा फैलाया और अपनी उंगली फिर से उसकी गान्ड में डाल दी इस बार वो बहुत आराम से अंदर चली गयी,अब उसने अपनी दो उंगलियों को गीला करके अंदर डाला तो थोड़ी सी मेहनत से वो भी चली गयी ,फिर रमण ने उनको अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,कुछ ही देर में आरती की गंद 2-2 उंगलियाँ अंदर लेने लगी,अब रमण ने सोचा कि ये टाइम सही है,अब उसकी गान्ड मार ही लेनी चाहिए.

फिर रमण खड़ा हुआ और आरती की ड्रेसिंग टेबल से क्रीम की शीशी उठा लाया,अब उसने उस क्रीम को अच्छी तरह से आरती की गान्ड मे लगाया और छेद के अंदर तक उस-से मालिश की ,फिर उसने क्रीम अपने लंड पर भी बहुत अच्छी तरह से लगाई.अब उसने आरती की कमर को ताक़ीए से उपर उठा कर उसको कुतिया बना दिया और अपना लंड उसकी गान्ड के सुराख पर लगाया,और दोनो हाथों से उसको फैला कर अपना सुपाडा उसमें फँसा दिया,फिर उसने आरती की कमर को कस कर पकड़ा और एक धक्का लगाया,जैसे ही उसका लंड थोड़ा सा अंदर गया तो आरती को दर्द का अहसास हुआ और वो बोली कि रमण अभी रूको दर्द हो रहा है,आरती के ये कहने पर रमण थोड़ा रुक गया और अपने हाथ आगे ले जा कर उसकी चुचियो को मसल्ने लगा जब आरती को दर्द थोड़ा कम हुआ तो उसकी सिसकारी निकलने लगी,रमण समझ गया कि अब आगे बढ़ना है और उसने फिर से पोज़ीशन बना कर अबकी बार एक तेज़ धक्का मारा और अपना आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार में आरती की अन्चुदि हुई गान्ड में डाल दिया

जब रमण का आधे से ज़्यादा लंड एक ही झटके मे अंदर घुस गया,तो आरती की तो साँसें ही रुक गयी,और उसको ऐसा फील हुआ जैसे कि कोई गरम लोहे की रोड उसकी गान्ड में घुस गयी हो,और उसको अपनी गान्ड में इतनी तेज़ दर्द हुआ कि उसकी चीख ही निकल गयी.

जब आरती चीखी तो उसकी चीख मनु को भी सुनाई दी और उसका कुछ-2 ध्यान वैसे भी उस तरफ ही होता था ,जब भी रमण उसकी माँ को चोदने के लिए ले कर जाता था तो वो उनकी चुदाई के बारे में ही सोच-2 कर इतना गरम हो जाता था कि जैसे ही ट्यूशन ख़तम होती थी और रमण जाता था मनु वहीं पर अपनी अर्धनगन माँ की नाइटी उठा कर उसकी चुदि हुई गीली चूत में ही अपना लंड डाल देता था,ये उसका हर बार का रूटिन बना हुआ था.

तो जैसे ही आरती की चीख उसको सुनाई दी वो जल्दी से उठ कर अपनी माँ के बेडरूम में गया वहाँ जा कर देखा तो उसकी माँ कुतिया बनी हुई है और रमण उसकी गान्ड में अपना घोड़े जैसा मोटा लंड डाल रहा है,ये देख कर उसका तना हुआ लंड और तन गया,और वो वहीं पर खड़ा हो कर रह गया.

इधर रमण के लंड से आरती की हालत खराब हो रही थी,वो उसको बोली कि हाई ये तुमने क्या किया जब मैने तुमको कहा था कि धीरे-2 डालना तो तुमने इतनी तेज़ धक्का क्यों मारा अब अपने लंड को बाहर निकालो मेरी जान निकली जा रही है.

पर अब रमण कहाँ उसकी सुनने वाला था,उसने कहा कि जान ऐसा क्या हो गया अगर अन्चुदि गान्ड में लंड जाएगा तो थोड़ा सा दर्द तो होगा ही,अभी कुछ देर सबर करो तेरा दर्द ख़तम हो जाएगा.रमण इस मौके को गँवाने वाला नही था वैसे भी.

मनु ने जब सुना कि रमण उसकी माँ की कुँवारी गान्ड को आज फाड़ रहा है तो उसको और भी ज़्यादा अच्छा लगा और अब उसको एक बात और लगी कि अब वो भी अपनी माँ के दोनो छेद का मज़ा ले सकेगा,इसलिए वो चाहता था कि रमण आज इस काम को बीच में ना छोड़े और आरती की गान्ड को एक बार अच्छी तरह से मार ले ,जिससे कि वो उसको मार सके,उसका लंड तो ये सोच-2 कर ही कड़क से कड़क हो रहा था कि अब उसकी माँ आरती की गान्ड मारने का मौका उसको मिला करेगा,वो तो कब से अपनी माँ की गान्ड का दीवाना था,पर उसकी हिम्मत ही नही होती थी ,पर आज उसकी दिली इच्छा पूरी होने वाली थी.

रमण कुछ देर तक उसी पोज़ मे आरती को लिए खड़ा रहा,फिर जब उसकी नज़र मनु पर पड़ी तो उसने उसको इशारे से अंदर बुला लिया ,जब मनु उसके पास आया तो उसने मनु से कहा कि मनु तुम अपनी माँ का दर्द कम करने के लिए आगे से उसके मम्मों को थोड़ा सा मस्लो,इस-से उसको राहत महसूस होगी.

मनु रमण की बात को समझ गया और बेड पर बैठ गया फिर वो आगे हो कर कुतिया बनी हुई आरती के मम्मों को मसल्ने लगा,जब उसका हाथ अपने मम्मों पर महसूस हुआ तो आरती ने उसकी तरफ देखा,आरती की आँखों में उस टाइम दर्द के कारण आँसू आ रहे थे,जब मनु ने अपनी माँ को ऐसे देखा तो उसको अपनी माँ पर बहुत दया आई,और वो रमण से बोला कि भैया आप अपना लंड माँ की गान्ड से निकाल लो माँ को बहुत दर्द हो रहा है.

 
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